Rashifal Today: आज के दिन अपने खर्च पर दें ज्यादा ध्यान, जानें क्या कहते हैं आपके सितारे

Aaj Ka Rashifal: अंक ज्योतिष के अनुसार, हर इंसान की जन्मतिथि का अपना खास महत्व होता है। ये न सिर्फ उनके स्वभाव और व्यक्तित्व को बताता है, बल्कि उनके भविष्य के बारे में भी संकेत देती है। आज के दिन कुछ मुलांक के लोगों के लिए सलाह यही है कि अनावश्यक खर्चों से बचें, बजट बनाकर चलें और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता दें। सोच-समझकर लिया गया हर छोटा फैसला आगे चलकर आपकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकता है। आइए जानते हैं कैसा होगा मूलांक 1 से 9 तक के लोगों का दिन

मूलांक 1

अगर आपका जन्म 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, तो मूलांक आज आपको अपने खर्च और बचत पर खास ध्यान देना चाहिए। बिना जरूरत की खरीदारी करने से बचें और भविष्य की आर्थिक योजनाओं पर काम करें। बजट बनाकर चलेंगे तो आने वाले समय में आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

मूलांक 2

अगर आपका जन्म 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है, तो आज का दिन पैसों के मामलों में समझदारी दिखाने का है। किसी भी बड़े खर्च या निवेश से पहले अच्छी तरह सोचें। बचत बढ़ाने और भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए नई योजना बनाना आपके लिए लाभदायक रहेगा।

मूलांक 3

अगर आपका जन्म 3, 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है, तो आज अपनी आय और खर्च का पूरा हिसाब रखें। अगर कोई नया आर्थिक अवसर मिलता है तो पहले उसकी अच्छी तरह जांच करें। जरूरत पड़ने पर अपने बजट में बदलाव करने से पीछे न हटें।

मूलांक 4

अगर आपका जन्म 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है, तो घर और परिवार से जुड़े खर्च बढ़ सकते हैं, इसलिए सोच-समझकर पैसे खर्च करें। भावनाओं में आकर खरीदारी करने से बचें। सही योजना बनाकर चलेंगे तो आर्थिक संतुलन बना रहेगा।

मूलांक 5

अगर आपका जन्म 5, 14 या 23 तारीख को हुआ है, तो आज आपकी योजना बनाने की क्षमता आपको फायदा दिला सकती है। अपने बजट को व्यवस्थित करें और फालतू खर्चों पर रोक लगाएं। कोई नया काम या अतिरिक्त कमाई का मौका मिल सकता है, लेकिन फैसला सोच-समझकर लें।

मूलांक 6

अगर आपका जन्म 6, 15 या 24 तारीख को हुआ है, तो आज का दिन आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए अच्छा है। अपने खर्चों की समीक्षा करें और जहां जरूरत हो वहां कटौती करें। बचत पर ध्यान देने से भविष्य में अच्छे परिणाम मिल सकते हैं।

मूलांक 7

अगर आपका जन्म 7, 16 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज लंबी अवधि की आर्थिक योजना बनाने का सही समय है। दिखावे या महंगी चीजों पर खर्च करने से बचें। अपने भविष्य के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर ही कोई फैसला लें।

मूलांक 8

अगर आपका जन्म 8, 17 या 26 तारीख को हुआ है, तो आज जल्दबाजी में कोई आर्थिक निर्णय न लें। अपने निवेश, बचत और बजट की दोबारा समीक्षा करें। सही योजना के साथ आगे बढ़ेंगे तो आने वाले समय में आर्थिक लाभ मिलने की संभावना बढ़ेगी।

मूलांक 9

अगर आपका जन्म 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है, तो आज नए अवसर मिल सकते हैं, लेकिन किसी भी फैसले में जल्दबाजी न करें। हर विकल्प को अच्छी तरह समझने के बाद ही निवेश या खर्च करें। अपने आर्थिक लक्ष्यों की समीक्षा करें और जरूरत के अनुसार बदलाव करें। धैर्य और समझदारी से लिए गए फैसले भविष्य में अच्छे नतीजे देंगे।

डिस्क्लेमर: इस लेख की सामग्री पूरी तरह से ज्योतिषीय भविष्यवाणियों पर आधारित है। हम इसकी सत्यता और सटीकता का पूरी तरह दावा नहीं करते। यहां दी गई किसी भी जानकारी के आधार पर कोई वित्तीय, स्वास्थ्य या व्यावसायिक निर्णय लेने से पहले योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

जेवर में 6,785 करोड़ का बड़ा निवेश! इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की ओर बढ़ा उत्तर प्रदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जेवर में 6,785 करोड़ रुपये के निवेश से अंबर एंटरप्राइजेज एवं कोरिया सर्किट्स के ज्वाइंट वेंचर ‘एसेंट के सर्किट्स’ का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग प्लांट क्षेत्र में रोजगार व नए उद्योगों को गति प्रदान करेगा। उन्होंने यूपी के प्रोजेक्ट्स को त्वरित स्वीकृति मिलने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी व केंद्रीय मंत्रियों का आभार भी प्रकट किया। सीएम ने कहा कि कभी जंगलराज के लिए जाना जाने वाला जेवर क्षेत्र अब मंगलराज की पहचान बना है। 

 

मुख्यमंत्री शनिवार को गौतम बुद्ध नगर के जेवर में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के भूमिपूजन एवं शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि 6,785 करोड़ रुपये से अधिक का यह निवेश क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर पैदा करेगा और कई एंकर यूनिट्स की स्थापना में योगदान देगा। यह प्रदेश के औद्योगिक विकास को भी नई गति देगा। उत्तर प्रदेश पहले ही एमएसएमई का सबसे बड़ा हब है, जहां लगभग 96 लाख इकाइयां कार्यरत हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की प्रेरणा से शुरू हुई 'वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट' योजना ने प्रदेश के उत्पादों को देश व दुनिया में नई पहचान दिलाई है।

 

देश के 55 प्रतिशत मोबाइल नोएडा-ग्रेटर नोएडा में बन रहे

मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी जी के विजन का ही परिणाम है कि उत्तर प्रदेश आज मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। देश में बनने वाले 55 प्रतिशत मोबाइल फोन नोएडा-ग्रेटर नोएडा में निर्मित हो रहे हैं, जबकि इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का भी 55 से 60 प्रतिशत उत्पादन यहीं हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अंबर ग्रुप और कोरिया सर्किट का यह संयुक्त उपक्रम इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम साबित होगा और उत्तर प्रदेश के माध्यम से भारत को नई उड़ान देगा।

 

केंद्र से यूपी के प्रोजेक्ट्स को मिलती है त्वरित स्वीकृति

सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश से संबंधित किसी प्रस्ताव को केंद्र सरकार में आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार को फोन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। प्रस्ताव केंद्र सरकार तक पहुंचते ही सूचना मिल जाती है कि उसे अंतिम स्वीकृति प्रदान कर दी गई है और आप कार्य को आगे बढ़ाएं। ऐसा बहुत कम ही देखने को मिलता है। जब अपनत्व का भाव हो, देश के प्रति जज्बा हो, तब ये चीजें देखने को मिलती हैं। मैं इस स्वीकृति के लिए पीएम मोदी जी व केंद्रीय मंत्रियों का आभार प्रकट करता हूं।

 

कोरिया से उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक व आत्मीय संबंध

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश का कोरिया से बहुत पुराना संबंध है। इतिहास में यह मान्यता है कि कोरिया की रानी क्वीन हो वस्तुत: अयोध्या की राजकुमारी रत्ना थीं, जो जलमार्ग से कोरिया पहुंची थीं। कोरिया की प्रथम महिला के उत्तर प्रदेश आगमन पर अयोध्या में एक पार्क का निर्माण कराया गया था। कोरिया के राजदूत भी अयोध्या आए थे और उस ऐतिहासिक संबंध को स्मरण करते हुए भावुक हुए थे। यही आत्मीय संबंध भारत व कोरिया को और अधिक निकट लाता है। कोरिया इस बात का उदाहरण है कि आक्रामक रणनीति, अनुशासन और समर्पण के बल पर कोई देश इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बन सकता है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है और देश की अर्थव्यवस्था नए प्रतिमान स्थापित कर रही है।

 

हर नागरिक के कर्तव्य से साकार होगा विकसित भारत का सपना

मुख्यमंत्री ने कहा कि मोदी जी का लक्ष्य वर्ष 2047 तक भारत को विकसित, आत्मनिर्भर और खुशहाल राष्ट्र बनाना है। इस संकल्प की शुरुआत प्रदेश, जनपद, नगर, गांव और प्रत्येक नागरिक से होती है। प्रधानमंत्री जी ने भी नागरिक कर्तव्य पर विशेष बल दिया है। यदि प्रत्येक नागरिक अपने क्षेत्र में पूरी निष्ठा से कार्य करेगा तो विकसित भारत का सपना निश्चित रूप से साकार होगा। इस प्रकार के निवेश उत्तर प्रदेश को नई पहचान दिलाते हैं, युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराते हैं, नए स्टार्टअप्स के लिए मंच तैयार करते हैं, निर्यात क्षमता को मजबूत करते हैं और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को गति प्रदान करते हैं।

 

जंगलराज नहीं, अब मंगलराज बना जेवर की पहचान

मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी जंगलराज के रूप में पहचाना जाने वाला जेवर आज आक्रामक रणनीति और मोदी जी के प्रेरणादायी नेतृत्व के कारण मंगलराज का प्रतीक बन चुका है। आज जब वह जेवर एयरपोर्ट पर उतरे तो उन्हें मोदी जी के कर कमलों से मिले शानदार एयरपोर्ट की सौगात दिखाई दी। अब यहां से कमर्शियल फ्लाइट्स भी शुरू हो चुकी हैं और लगातार निवेश के नए प्रस्ताव प्राप्त हो रहे हैं।

 

निवेशकों की पहली पसंद बना उत्तर प्रदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय था जब उत्तर प्रदेश पहचान के संकट से जूझ रहा था, लेकिन आज प्रदेश अपनी नई पहचान के साथ देश-दुनिया के निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। कानून व्यवस्था में सुधार, सेक्टोरल पॉलिसियों और 75 हजार एकड़ के विशाल लैंड बैंक के कारण हर क्षेत्र के निवेशकों के लिए उत्तर प्रदेश सबसे उपयुक्त बन चुका है। सरकार प्रत्येक क्षेत्र के लिए स्पष्ट नीति लेकर आई है। कोई भी निवेशक इन नीतियों के दायरे में आकर निवेश कर सकता है। सरकार समय पर इंसेंटिव देती है, सिंगल विंडो प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराती है और बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के निवेश की पूरी प्रक्रिया संपन्न होती है। इसका परिणाम यह है कि प्रदेश के युवाओं को तेजी से रोजगार मिल रहा है।

 

कानपुर व झांसी के बीच बन रही इंडस्ट्रियल सिटी

सीएम योगी ने कहा कि राज्य सरकार कानपुर व झांसी के बीच 56 हजार एकड़ क्षेत्र में बीडा के रूप में एक बड़े इंडस्ट्रियल सिटी का निर्माण कर रही है। इस परियोजना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति का प्रस्ताव भारत सरकार के पास भेजा गया था। प्रस्ताव जब केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव जी के पास गया तो उन्होंने तत्काल सभी कार्यों को समय-सीमा में पूरा करते हुए इसकी स्वीकृति दी और फोन करके अवगत भी कराया। केंद्र व राज्य सरकार के बीच इसी प्रकार का समन्वय और त्वरित निर्णय देश के विकास को नई गति प्रदान करता है। मैं विश्वास करता हूं कि इस परियोजना को भी हम समय-सीमा में पूरा कर प्रधानमंत्री जी के विजन को आगे बढ़ाने का काम करेंगे।

 

सेमीकंडक्टर दुनिया की सबसे बड़ी ताकत

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दिनों उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट के शिलान्यास कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव जी का सानिध्य उत्तर प्रदेश की जनता को प्राप्त हुआ था। सेमीकंडक्टर आज दुनिया की सबसे बड़ी ताकत है और भारत को इसी ताकत का केंद्रबिंदु बनना है। इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट हब के रूप में देश को स्थापित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। मोदी जी का विजन है कि भारत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट हब के रूप में अपनी पहचान स्थापित करे। जो चीजें विभिन्न देशों से आयात होती हैं, वे भारत में बनें और दुनिया को निर्यात हों।

 

इस अवसर पर केंद्रीय रेलवे, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव,  यूपी के मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, प्रभारी मंत्री ब्रजेश सिंह, सांसद महेश शर्मा, सुरेंद्र सिंह नागर, विधायक धीरेंद्र सिंह, तेजपाल सिंह नागर, भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर, नगर अध्यक्ष महेश चौहान, अंबर ग्रुप के कार्यकारी अध्यक्ष जसवीर सिंह, मैनेजिंग डायरेक्टर दलजीत सिंह, सीईओ कोरिया सर्किट चो यांग-हो आदि मौजूद रहे। Edited by : Sudhir Sharma

भारत में बुलेट ट्रेन का मेगा प्लान, जेवर एयरपोर्ट से सूरत-वडोदरा तक बदलेगी विकास की तस्वीर

भारत में बुलेट ट्रेन नेटवर्क को बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन (NHSRCL) ने करीब 4,000 किलोमीटर लंबे सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया है। इन परियोजनाओं के लिए पुल, सुरंग, एलिवेटेड ट्रैक और स्टेशनों का एक समान डिजाइन तैयार किया जाएगा। खास बात ये है कि नई बुलेट ट्रेन लाइनें भारतीय इंजीनियरिंग मानकों पर आधारित होंगी और इन्हें 350 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति के अनुरूप विकसित किया जाएगा। सरकार इसे ‘मेक इन इंडिया’ के तहत रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

सात प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में से चार की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को मंजूरी मिल चुकी है। वहीं बाकी तीन मार्गों पर सर्वे का काम जारी है। इसके साथ ही रूट की जांच और जमीन की तकनीकी पड़ताल का काम भी तेजी से किया जा रहा है, ताकि परियोजनाओं को तय समय पर आगे बढ़ाया जा सके। प्रस्तावित सात नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल मार्ग भी शामिल है। इस परियोजना की सबसे खास बात नोएडा के जेवर एयरपोर्ट के नीचे बनने वाला भूमिगत स्टेशन होगा। इस स्टेशन को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए करीब 9.4 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जाएगी, जिसे इस परियोजना की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग चुनौतियों में से एक माना जा रहा है।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत 508 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग पर 12 स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। इस हाई-स्पीड रेल लाइन से महाराष्ट्र और गुजरात के कई प्रमुख शहर आपस में जुड़ेंगे। माना जा रहा है कि इस परियोजना से स्टेशनों के आसपास तेजी से शहरी विकास होगा और निवेश के नए अवसर बढ़ेंगे। खासकर सूरत और वडोदरा जैसे शहरों में बेहतर कनेक्टिविटी के कारण रियल एस्टेट बाजार को बड़ा फायदा मिल सकता है और आने वाले समय में यहां संपत्तियों की कीमतों में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

बुलेट ट्रेन परियोजना से बोइसर, वापी और अहमदाबाद जैसे क्षेत्रों के विकास को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण इन इलाकों में उद्योग, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउस और नए आवासीय प्रोजेक्ट तेजी से बढ़ सकते हैं। वहीं अहमदाबाद का साबरमती स्टेशन बुलेट ट्रेन, मेट्रो और रेलवे को जोड़ने वाला बड़ा ट्रांसपोर्ट हब बनेगा, जिससे आसपास के क्षेत्र में व्यापार, होटल और रियल एस्टेट सेक्टर को भी बड़ा फायदा मिलने की संभावना है।

जेवर बनेगा भारत का सोलर हब! 8200 करोड़ के निवेश से सीएम योगी ने रखी बड़ी परियोजना की नींव

yogi adityanath

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रिन्यूएबल व ग्रीन एनर्जी आज की आवश्यकता है। उत्तर प्रदेश ने 20 हजार मेगावाट रिन्यूएबल एनर्जी पैदा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है और जेवर क्षेत्र जल्द ही भारत का सोलर मैन्युफैक्चरिंग हब बनेगा। इससे चीन आदि देशों पर निर्भरता कम होगी। पीएम सूर्यघर योजना से प्रदेश के 6 लाख परिवारों का बिजली बिल 60 प्रतिशत तक घटा है, यह यूपी में बढ़ती सौर ऊर्जा शक्ति का प्रमाण है।

 

मुख्यमंत्री शनिवार को गौतम बुद्ध नगर के जेवर क्षेत्र में 8200 करोड़ रुपये के निवेश से एसएईएल के इंटीग्रेटेड सोलर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का शिलान्यास करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विकसित उत्तर प्रदेश बनाने में एसएईएल की बड़ी भूमिका होगी। मुझे विश्वास है कि हम जल्द ही यूपी को सोलर मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करने का काम करेंगे। पीएम मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में पिछले 12 वर्ष में भारत ने दुनिया में एक नई सशक्त पहचान बनाई है। लोग सबसे तेज अर्थवस्थवस्था के रूप में भारत को बढ़ता देख रहे हैं। हमारा लक्ष्य अगले दो-तीन वर्षों में यूपी में 20 हजार मेगावाट रिन्यूएबल एनर्जी पैदा करना है।

 

6 लाख परिवारों को बिजली बिल 60 प्रतिशत तक कम

सीएम ने कहा कि मोदी जी ने दुनिया के देशों को प्रदूषण मुक्त वातावरण देने के लिए प्रेरित किया। रिन्यूएबल व ग्रीन एनर्जी के लिए आक्रामक रणनीति अपनाई। उसी का परिणाम है कि यूपी जैसे राज्य में 6 लाख से अधिक परिवार पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर पैनल लगाकर ऊर्जा की आत्मनिर्भरता प्राप्त कर रहे है। इनके बिजली बिलों में भी लगभग 50-60 प्रतिशत की कमी आई है। आज यूपी 2 हजार मेगावाट से अधिक बिजली सोलर पैनल से उत्पन्न कर रहा है। 

 

20 हजार मेगावाट रिन्यूएबल एनर्जी का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी योजना अगले दो-तीन वर्षों के अंदर यूपी में 20 हजार मेगावाट तक रिन्यूएबल एनर्जी का लक्ष्य प्राप्त करना है। फिलहाल हम 6 हजार मेगावाट तक रिन्यूएबल एनर्जी से प्राप्त कर रहे हैं। ग्रीन एनर्जी का स्रोत सोलर के अलावा पराली भी है। किसान पराली को जलाकर प्रदूषण न करें, बल्कि उसे सीबीजी प्लांट तक पहुंचा दें  तो वहां इससे सीएनजी, कंप्रेस्ड बायोगैस और इथेनॉल बन सकता है। किसानों को अतिरिक्त आय भी होगी।

 

देश का 55 प्रतिशत एथेनॉल उत्पादन यूपी में

सीएम ने कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी लागू होने के बाद यूपी सबसे ज्यादा एथेनॉल उत्पादन वाले राज्य के रूप में स्थापित हुआ है। इसने हमारी शुगर इंडस्ट्री को आत्मनिर्भर बना दिया है। करीब एक दशक पहले हताशा-निराशा से जूझ रहे किसानों को हमने पिछले 9 वर्ष के अंदर 3.22 लाख करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान किया। हम गन्ने से चीनी व एथेनॉल भी बना रहे हैं। देश का लगभग 55 फीसदी एथेनॉल उत्पादन अकेले उत्तर प्रदेश कर रहा है। सबसे ज्यादा सीबीजी प्लांट यूपी में लगे हैं। हमारा लक्ष्य अगले एक वर्ष में 100 सीबीजी प्लांट स्थापित करना है।

 

भारत की निर्यात क्षमता बढ़ाएगा सोलर प्लांट

सीएम योगी ने कहा कि एसएईएल ने नई तकनीक के साथ सोलर मैन्युफैक्चरिंग कार्यक्रम को आगे बढ़ाया है। इस प्लांट से 5 गीगावाट सोलर सेल और 5 गीगावाट सोलर मॉड्यूल निर्माण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। यह सोलर मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भारत की निर्यात क्षमता को बढ़ाने में बड़ी भूमिका का निर्वहन करेगा। अभी तक जिन कार्यों के लिए हमें चीन या दुनिया के अन्य देशों पर निर्भर रहना पड़ता था,  अब वह टेक्नोलॉजी इसी जेवर में तैयार होगी। इसके माध्यम से हजारों प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन भी होने वाला है। एमएसएमई, लॉजिस्टिक और सहायक उद्योगों के साथ-साथ इंजीनियरों व टेक्नीशियनों को भी एक नए फील्ड में कार्य करने के अवसर प्राप्त होंगे। उत्तर प्रदेश के युवाओं को ग्रीन इकोनॉमी का नेतृत्व करने का भी अवसर इसके माध्यम से प्राप्त होने वाला है।

 

भारत का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक हब

मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी हम इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की नई यूनिट का शिलान्यास करके आए हैं, जिसे भारत का अंबर ग्रुप व कोरिया सर्किट मिलकर आगे बढ़ा रहे हैं। यहां फिल्म सिटी व अपैरल सिटी भी बन रही है। विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय भी आ रहे हैं। टॉय पार्क भी बनने जा रहा है। भारत के सबसे बड़े लॉजिस्टिक हब के रूप में यह क्षेत्र विकसित होने जा रहा है। हमें पीएम मोदी जी के विजन को पूरे प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाना है।

 

इस अवसर पर वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह, एसएईएल के डायरेक्टर सुखबीर सिंह, एसएईएल के सीईओ एवं कार्यकारी निदेशक लक्षित आवला, एसएईएल के फाउंडर एवं मैनेजिंग डायरेक्टर जसवीर सिंह और यीडा समेत अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी व अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

 

20 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार

जेवर। एसएईएल कंपनी के मुताबिक इस परियोजना से 20 हजार प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इससे औद्योगिक गतिविधियों, सहायक उद्योगों और बुनियादी ढांचे के विकास के माध्यम से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। निर्माण पूरा होने पर यहां अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए उच्च दक्षता वाले सोलर सेल और टॉपकॉन सोलर मॉड्यूल्स का निर्माण किया जाएगा, जिससे भारत में तेजी से बढ़ती अक्षय ऊर्जा क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।

 

20 हजार करोड़ रुपये तक निवेश बढाएगी कंपनी

एसएईएल के सह-संस्थापक एवं निदेशक सुखबीर सिंह ने कहा कि कंपनी 8,200 करोड़ रुपये के प्रारंभिक निवेश से 5 गीगावाट सोलर सेल और 5 गीगावाट सोलर मॉड्यूल निर्माण सुविधा स्थापित कर रही है। यह केवल बुनियादी ढांचे में निवेश नहीं है, बल्कि भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण निवेश है। राज्य वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। कंपनी 2029-30 तक अपना निवेश बढ़ाकर 20 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाएगी। Edited by : Sudhir Sharma

शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में हुआ है भारी नुकसान? तब भी क्यों जरूरी है ITR फाइल करना, जानें टैक्स छूट का यह सीक्रेट फॉर्मूला

ITR Filing Rules: क्या शेयर बाजार में मुनाफे की बजाय नुकसान होने पर इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना चाहिए? अक्सर देखा जाता है कि जिन निवेशकों को किसी फाइनेंशियल ईयर के दौरान इक्विटी या म्यूचुअल फंड में घाटा होता है, वे मान लेते हैं कि उन्हें ITR फाइल करने की कोई जरूरत नहीं है। खासकर तब, जब उनकी कोई अन्य टैक्स योग्य आय न हो।

लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स की मानें तो घाटे वाले साल में आईटीआर फाइल न करना लंबे समय में आपको बहुत भारी पड़ सकता है। अगर आप तय समय सीमा के भीतर अपना रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं, तो आप अपने इस कैपिटल लॉस को अगले सालों के लिए कैरी फॉरवर्ड का अधिकार खो देते हैं।

इसका सीधा असर यह होगा कि भविष्य में जब आपको प्रॉफिट होगा, तब आप इस घाटे को उस मुनाफे से एडजस्ट नहीं कर पाएंगे और आपको ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ेगा। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि नुकसान के बावजूद आईटीआर भरना क्यों फायदेमंद है।

लॉस कैरी फॉरवर्ड करने का क्या है नियम?

टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नुकसान के बावजूद समय पर आईटीआर भरने से आपको अपने नुकसान को भविष्य के मुनाफे से एडजस्ट करने की कानूनी अनुमति मिलती है। एनए शाह एसोसिएट्स के टैक्स पार्टनर गोपाल बोहरा बताते हैं कि भले ही किसी टैक्सपेयर की कोई टैक्स देनदारी न बन रही हो और सिर्फ इक्विटी या म्यूचुअल फंड से कैपिटल लॉस हुआ हो, तब भी ड्यू डेट पर या उससे पहले आईटीआर फाइल करना बेहद फायदेमंद है।

Vijay Kedia का मार्केट में कमाई का मंत्र: दिग्गज इन्वेस्टर ने समझाया मोटा पैसा बनाने का ‘एक लाइन’ का ये फॉर्मूला

समय पर आईटीआर दाखिल करने से आप इस नुकसान को अगले 8 सालों तक कैरी फॉरवर्ड कर सकते हैं। भविष्य के सालों में जब भी आपको शेयरों या म्यूचुअल फंड से कमाई होगी, तो आप इस पुराने घाटे को उस मुनाफे से घटाकर अपनी टैक्स देनदारी को काफी कम या शून्य कर सकते हैं।

क्या इक्विटी, डेट म्यूचुअल फंड और गोल्ड ETF के नियम अलग हैं?

कई निवेशकों को लगता है कि यह नियम सिर्फ शेयरों के लिए है, लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स ने साफ किया है कि निवेश का माध्यम कोई भी हो, नियम सभी के लिए बिल्कुल एक समान हैं। चाहे आपका नुकसान इक्विटी शेयर्स से हुआ हो, इक्विटी म्यूचुअल फंड से हो, डेट म्यूचुअल फंड से हो या फिर गोल्ड ईटीएफ से, अगर आप इस अन-एडजस्टेड लॉस को आगे ले जाना चाहते हैं, तो आपको तय तारीख के भीतर ही आईटीआर भरना होगा। नियत तारीख चूकने पर घाटे को आगे ले जाने की अनुमति नहीं मिलेगी।

इक्विटी के घाटे को क्या दूसरे एसेट्स के मुनाफे से एडजस्ट कर सकते हैं?

हां, नियमों के दायरे में रहकर आप इक्विटी के घाटे को दूसरे कैपिटल एसेट्स से हुए मुनाफे के खिलाफ एडजस्ट कर सकते हैं और अपना टैक्स बचा सकते हैं:

शॉर्ट-टर्म कैपिटल लॉस(STCL): अगर आपको शेयरों से शॉर्ट-टर्म कैपिटल लॉस हुआ है, तो इसे आप शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म दोनों तरह के कैपिटल गेन्स से एडजस्ट कर सकते हैं। फिर चाहे वह मुनाफा शेयरों से हो, प्रॉपर्टी बेचने से हो, गोल्ड से हो या डेट म्यूचुअल फंड से।

लॉन्ग-टर्म कैपिटल लॉस(LTCL): अगर आपको शेयरों में लंबी अवधि में घाटा हुआ है, तो नियम कड़े हैं। इसे केवल और केवल लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) के खिलाफ ही एडजस्ट किया जा सकता है।

निवेशकों को कौन सा ITR फॉर्म चुनना चाहिए?

सही आईटीआर फॉर्म का चुनाव पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी कमाई या नुकसान के स्रोत क्या हैं:

ITR-2: जो निवेशक शेयरों, म्यूचुअल फंड या अन्य कैपिटल एसेट्स से होने वाले केवल कैपिटल गेन्स या कैपिटल लॉस को रिपोर्ट कर रहे हैं, उन्हें आमतौर पर ITR-2 फॉर्म भरना होता है।

ITR-3: लेकिन, अगर आप शेयरों में इंट्राडे ट्रेडिंग करते हैं या फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) में ट्रेड करते हैं, जिसे टैक्स की भाषा में बिजनेस इनकम माना जाता है, तो आपको ITR-3 फॉर्म चुनना चाहिए।

कैपिटल लॉस रिपोर्ट करते समय किन बातों का रखें ध्यान?

टैक्सपेयर्स को हमेशा यह याद रखना चाहिए कि केवल वही नुकसान आगे ले जाए जा सकते हैं जो समय सीमा के भीतर फाइल किए गए रिटर्न में दिखाए गए हों। इसके अलावा, अपने कॉन्ट्रैक्ट नोट्स, ब्रोकर स्टेटमेंट्स और कैपिटल गेन्स स्टेटमेंट्स जैसे सभी जरूरी दस्तावेजों को संभालकर रखें, क्योंकि टैक्स अधिकारियों द्वारा मांगे जाने पर ये सबूत के तौर पर काम आते हैं।

गोपाल बोहरा सलाह देते हैं कि आईटीआर दाखिल करने से पहले निवेशकों को अपने AIS और TIS में दर्ज ट्रांजैक्शन का मिलान अपने ब्रोकर की रिपोर्ट से जरूर कर लेना चाहिए। आईटीआर में शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म नुकसान का सही खुलासा सुनिश्चित करें ताकि भविष्य में टैक्स छूट का लाभ लेने में कोई रुकावट न आए।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल पर विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त किए गए विचार और निवेश टिप्स उनके अपने हैं, वेबसाइट या उसके प्रबंधन के नहीं। मनीकंट्रोल यूजर्स को सलाह देता है कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स से जांच कर लें।

Silver Consumer Electricals: प्री-IPO राउंड में जुटाए ₹150 करोड़; कंपनी में हार्दिक पांड्या, अर्पित खंडेलवाल जैसे दिग्गजों का है निवेश

गुजरात की कंपनी सिल्वर कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड ने प्री-IPO राउंड में लगभग 150 करोड़ रुपये जुटाए हैं। प्रमोटर ग्रुप के एक सदस्य ने 2.59 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची है। कंपनी का कहना है कि धर्मशीभाई मोहनभाई बेडिया ने सेकेंडरी सेल के जरिए निवेशक रियाज सुतरवाला को 73,15,288 इक्विटी शेयर ट्रांसफर किए। यह ट्रांजेक्शन 205.05 रुपये प्रति इक्विटी शेयर की कीमत पर हुआ, जिससे कुल वैल्यू 150 करोड़ रुपये बनी। इस खरीद के बाद, सुतरवाला के पास कंपनी की प्री-ऑफर इक्विटी शेयर कैपिटल में 2.59 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी।

सिल्वर कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स ने पिछले साल अगस्त में सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया था। उस वक्त धर्मशीभाई मोहनभाई बेडिया के पास 7.86 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। वहीं उनके बेटे विनीत धर्मशीभाई बेडिया के पास 48.99 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। SEBI ने IPO ड्राफ्ट को नवंबर 2025 में मंजूरी दी।

यह IPO के जरिए 1,400 करोड़ रुपये तक जुटाना चाहती है। प्रस्तावित इश्यू में 1,000 करोड़ रुपये तक के नए इक्विटी शेयर जारी किए जाने का प्लान है। साथ ही प्रमोटर विनीत धर्मशीभाई बेडिया की ओर से 400 करोड़ रुपये तक का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा।

क्या करती है Silver Consumer Electricals

गुजरात के राजकोट में स्थित सिल्वर कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स दो ब्रांड्स- सिल्वर और बेडिया जरिए कारोबार करती है। सिल्वर ब्रांड के तहत पंप, मोटर और खेती के उपकरण बनाती है। वहीं बेडिया ब्रांड के तहत पंखे, लाइट, हीटर, मिक्सर और अन्य कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल प्रोडक्ट बनाती है। कंपनी अपने इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशंस के जरिए घरों, खेती और इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा करती है। IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल कर्ज चुकाने और सामान्य कॉर्पोरेट कामों के लिए किया जाएगा। कंपनी 17 से ज्यादा देशों में एक्सपोर्ट भी करती है। इसके कुल कर्मचारियों में 700 से ज्यादा महिलाएं हैं।

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पांड्या ब्रदर्स समेत किन दिग्गजों का लगा है पैसा

कंपनी में अगस्त 2025 तक एंजेल इनवेस्टर और प्लूटस वेल्थ मैनेजमेंट के मैनेजिंग पार्टनर अर्पित खंडेलवाल के पास 26.79 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। वह सबसे बड़े शेयरहोल्डर थे। उन्होंने जनवरी 2023 में कंपनी में निवेश करना शुरू किया था। इसके अलावा क्रिकेटर क्रुणाल पांड्या और उनके भाई हार्दिक पांड्या भी सिल्वर कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स में निवेशक हैं। क्रुणाल पांड्या के पास 1.1 प्रतिशत और हार्दिक पांड्या के पास 0.017 प्रतिशत शेयर हैं। हार्दिक पांड्या कंपनी के ब्रांड एंबेसडर हैं। मशहूर निवेशक मधु केला की पत्नी माधुरी मधुसूदन केला के पास 0.62 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

सिल्वर कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स के IPO को मैनेज करने के लिए मोतीलाल ओसवाल इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स, ICICI सिक्योरिटीज, JM फाइनेंशियल और चॉइस कैपिटल एडवाइजर्स को मर्चेंट बैंकर के तौर पर नियुक्त किया गया है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

बिजनेस साइकिल फंड में निवेश करना चाहते हैं? पहले ये बातें ठीक तरह से समझ लीजिए

शेयर बाजार इकोनॉमी के अलग-अलग चरणों से गुजरता है। इस वजह से सेक्टर का प्रदर्शन भी बदलता रहता है। अगर किसी एक वक्त में फाइनेंशियल स्टॉक्स का प्रदर्शन अच्छा होता है तो दूसरे वक्त में मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी या हेल्थकेयर का प्रदर्शन अच्छा हो सकता है। एक इनवेस्टर के लिए यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि आगे किस सेक्टर का प्रदर्शन अच्छा रहने वाला है। इस समस्या का समाधान बिजनेस साइकिल फंड है।

बिजनेस साइकिल फंड म्यूचुअल फंड की एक कैटेगरी है। यह फंड इकोनॉमी और मार्केट की स्थितियों के हिसाब से निवेश के लिए सेक्टर बदलता रहता है। बिजनेस साइकिल फंड एक तरह की डायवर्सिफायड इक्विटी स्कीम है, जो उन सेक्टर्स में इनवेस्टमेंट का ऐलोकेशन करता है जनके प्रदर्शन आगे बेहतर रहने की उम्मीद होती है।

बिजनेस साइकिल फंड और थिमैटिक फंड्स में फर्क है। थिमैटिक फंड का फोकस किसी एक इंडस्ट्री या थीम पर होता है। लेकिन, बिजनेस साइकिल फंड के पास समय के साथ निवेश के लिए सेक्टर बदलने की आजादी होती है। बिजनेस साइकिल फंड का फंड मैनेजर इकोनॉमिक ग्रोथ ट्रेंड्स, इंटरेस्ट रेट्स, पॉलिसी डेवलपमेंट्स, कॉर्पोरेट अर्निंग्स और मार्केट वैल्यूएशन के आधार पर ऐलोकेशन का फैसला करता है।

बिजनेस साइकिल फंड सेक्टर रोटेशन के कॉन्सेप्ट का इस्तेमाल करता है। इसका मतलब है कि अलग-अलग समय में अलग-अलग सेक्टर के पास मार्केट लीडरशिप होती है। म्यूचुअलफंडइंडियाडॉटकॉम के मुताबिक, महिंद्रा मनुलाइफ बिजनेस साइकिल फंड ने 9 महीने, एक साल और 2 साल में अच्छा रिटर्न दिया है।

कोटक, आदित्य बिड़ला सन लाइफ और एक्सिस म्यूचुअल फंड एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के अपने बिजनेस साइकिल फंड हैं। ऐसे फंड को उन इनवेस्टर्स के लिए विकल्प के रूप में देखा जाता है जो इक्विटी में निवेश में डायवर्सिफिकेशन चाहते हैं। यह समझना जरूरी है कि इस फंड का प्रदर्शन भी इकोनॉमी की स्थितियों और फंड मैनेजर्स के फैसले पर निर्भर करता है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि बिजनेस साइकिल फंड उन निवेशकों के लिए है, जिन्हें बाजार की समझ हैं। नए निवेशकों को इस फंड में सोचसमझकर निवेश करना चाहिए। अगर कोई निवेशक बिजनेस साइकिल फंड में निवेश करना चाहता है तो वह इस बारे में अपने फाइनेंशियल एडवाइजर की राय ले सकता है।

क्या आप बहुत ज्यादा फंड में निवेश कर रहे हैं? जानिए इसके नुकसान

मेरे एक दोस्त ने एक दिन अपने म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि वह हर साल म्यूचु्अल फंड में निवेश बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही उनके पोर्टफोलियो में फंड्स यानी स्कीम की संख्या भी बढ़ रही है। क्या ऐसा करना सही है? जब मैंने उनसे पूछा कि उनके पोर्टफोलियो में कितनी स्कीमें हैं तो वह गिनती करने लगे। दरअसल यह समस्या सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं है।

डायवर्सिफिकेशन का सही मतलब कम लोग समझते हैं

ज्यादातर निवेशकों को लगता है कि डायवर्सिफिकेशन के लिए ज्यादा स्कीमों में निवेश करना जरूरी है। लेकिन, कम लोग यह समझते हैं कि डायवर्सिफिकेशन का मतलब ज्यादा फंडों में निवेश करना नहीं है। डायवर्सिफिकेशन का मतलब यह है कि आपके पोर्टफोलियो में अलग-अलग तरह के एसेट्स और स्कीमें होनी चाहिए। उन स्कीमों का पोर्टफोलियो एक जैसे शेयरों का नहीं होना चाहिए। उदाहरण के लिए एक से ज्यादा लार्जकैप फंड में निवेश करने का कोई मतलब नहीं है।

एक जैसी कई स्कीम में निवेश करना डायवर्सिफिकेशन नहीं है 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर कोई इनवेस्टर डायवर्सिफिकेशन करना चाहता है तो वह अपने पोर्टफोलियो में एक लार्जकैप फंड, एक मिडकैप फंड, एक स्मॉलकैप फंड को शामिल कर सकता है। लार्जकैप, मिडकैप या स्मॉलकैप के एक से ज्यादा फंड में निवेश करने से डायवर्सिफिकेशन का मकसद पूरा नहीं होता है।

अलग-अलग एसेट में निवेश करने से रिस्क कम हो जाता है

डायवर्सिफिकेशन का मतलब अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश करना है। इसका मतलब है कि पोर्टफोलियो में इक्विटी शामिल होना चाहिए। इक्विटी की हर कैटेगरी के फंड होने चाहिए। डेट यानी बॉन्ड्स जैसे फिक्स्ड रिटर्न इंस्ट्रूमेंट्स भी पोर्टफोलियो का हिस्सा होना चाहिए। साथ ही बुलियन भी होना चाहिए। बुलियन का मतलब सोने और चांदी से है। एक्सपर्ट्स गोल्ड ईटीएफ और सिल्वर ईटीएफ में निवेश की सलाह देते हैं।

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एक साथ सभी एसेट क्लास में नहीं आती है गिरावट 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि डायवर्सिफिकेशन का मकसद यह है कि किसी एसेट क्लास में गिरावट का असर पोर्टफोलियो पर कम से कम पड़े। आम तौर पर यह देखा जाता है कि सभी एसेट क्लास में एक साथ गिरावट नहीं आती है। कई बार इक्विटी में गिरावट आने पर गोल्ड में तेजी होती है। डेट में निवेश आपके पोर्टफोलियो को शेयरों में तेज गिरावट की स्थिति में नुकसान से बचाता है। इसलिए एक्सपर्ट्स पोर्टफोलियो में डेट को शामिल करने सलाह देते हैं।

Prabhjeet Singh: कौन हैं OpenAI के India MD प्रभजीत सिंह, कंधों पर ChatGPT मेकर की ग्रोथ को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी

ChatGPT मेकर OpenAI ने प्रभजीत सिंह को भारत के लिए अपना मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया है। वह सितंबर 2026 से कंपनी के साथ जुड़ेंगे और भारत में OpenAI के सबसे सीनियर एग्जीक्यूटिव होंगे। प्रभजीत सिंह अभी तक उबर इंडिया एंड साउथ एशिया प्रेसिडेंट थे। कंपनी में एक दशक से ज्यादा समय बिताने के बाद उन्होंने उबर का साथ छोड़ दिया है। उबर में उनकी जगह कौन लेगा, इसकी घोषणा अभी नहीं हुई है।

OpenAI में वह एशिया पैसिफिक (APAC) के मैनेजिंग डायरेक्टर किरण मणि को रिपोर्ट करेंगे और देश में कंज्यूमर ग्रोथ, एंटरप्राइज अडॉप्शन, स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप, रेगुलेटरी मामलों और बिजनेस ऑपरेशन्स जैसे कामकाज संभालेंगे। OpenAI में भारत के लिए मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर सिंह के कंधों पर कंज्यूमर और एंटरप्राइज दोनों सेगमेंट में OpenAI की ग्रोथ को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। OpenAI का कहना है कि सिंह ज्यादा कंज्यूमर्स, एंटरप्राइज, शैक्षणिक संस्थानों और पब्लिक सेक्टर संगठनों को AI टेक्नोलॉजी अपनाने में मदद करने पर ध्यान देंगे।

IIT खड़गपुर और IIM-अहमदाबाद के रह चुके हैं छात्र

प्रभजीत सिंह IIT खड़गपुर और IIM-अहमदाबाद के छात्र रह चुके हैं। वह अगस्त 2015 में मैकिन्से एंड कंपनी से उबर में शामिल हुए थे। जुलाई 2020 में उन्हें भारत और साउथ एशिया के लिए कंपनी का प्रेसिडेंट नियुक्त किया गया। सिंह को कॉर्पोरेट लीडरशिप में उनकी शानदार उपलब्धियों के लिए IIM-अहमदाबाद से ‘यंग एलुमनाई अचीवर्स अवार्ड 2022’ मिला था।

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उबर में क्या देखते थे

उबर इंडिया एंड साउथ एशिया प्रेसिडेंट की भूमिका में प्रभजीत सिंह पर भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका में Uber के मोबिलिटी बिजनेस की जिम्मेदारी थी। उन्होंने इस क्षेत्र में Uber के विकास और विस्तार के अगले चरण का नेतृत्व किया।

OpenAI के लिए भारत क्यों अहम

यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब OpenAI भारत में अपना निवेश बढ़ा रही है। भारत ChatGPT के लिए सबसे बड़े और तेजी से बढ़ने वाले बाजारों में से एक बन गया है, जिसे कंज्यूमर्स, स्टार्टअप्स, एंटरप्राइज, डेवलपर्स और शैक्षणिक संस्थानों में बड़े पैमाने पर अपनाया जा रहा है। कंपनी ने नवंबर 2025 में नई दिल्ली में अपना पहला ऑफिस खोला था और देश भर में तेजी से पार्टनरशिप कर रही है।

इस फंड ने 10 साल में 10 हजार के मंथली निवेश को 33.87 लाख रुपये बनाया

एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी का मिडकैप फंड अपने 20वें साल में प्रवेश कर लिया है। इसका एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है। इस स्कीम के डायरेक्ट प्लान के ग्रोथ ऑप्शन ने बीते 20 सालों में करीब 20 फीसदी कंपाउंडेंड एनुअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) से रिटर्न दिया है। लंबी अवधि में इतना ज्यादा रिटर्न बहुत कम फंडों ने दिया है।

एक लाख का निवेश 10 साल में 5.68 लाख बना

अगर आपने इस स्कीम में 10 साल पहले एक लाख रुपये का एकमुश्त निवेश किया होता तो आज आपका पैसा बढ़कर 5.68 लाख रुपये हो गया होता। अगर आपने इस स्कीम में 10 साल पहले मंथली 10,000 रुपये का निवेश शुरू किया होता तो आज आपका पैसा बढ़कर 33,87,433 लाख रुपये हो गया होता।

फंड मिडकैप कंपनियों के शेयरों में निवेश करता है

यह फंड मुख्य रूप से मिडकैप कंपनियों के शेयरों में निवेश करता है। मिडकैप कंपनियों में लंबी अवधि में ग्रोथ की संभावना लॉर्जकैप कंपनियों के मुकाबले ज्यादा होती है। हालांकि, मिडकैप शेयरों में लार्जकैप के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव दिखता है। एनालिस्ट्स का कहना है कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार हो रहा है। घरेलू कंजम्प्शन बढ़ रहा है। ऐसे में मिडकैप कंपनियों की ग्रोथ की अच्छी संभावना है।

निवेश में बॉटम-अप स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल

एचडीएफसी मिडकैप स्कीम के डिसक्लोजर के मुताबिक, यह फंड निवेश में बॉटम-अप स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल करता है। स्कीम का फोकस उन मिडकैप कंपनियों के शेयरों में निवेश पर होता है, जिनका बिजनेस मॉडल ठोस है, मैनेजमेंट अच्छा है, बाजार में कॉम्पटिटिव पोजीशन है और वैल्यूएशन सही है। इस स्कीम का एयूएम 31 मई, 2026 को 97,350 करोड़ रुपये था।

लंबी अवधि में शानदार रिटर्न जेनरेट करना मकसद

एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ नवनीत मुनोत ने कहा कि इस मिडकैप फंड का मकसद लंबी अवधि में इनवेस्टर्स के लिए शानदार रिटर्न जेनरेट करना है। इस स्कीम के फंड मैनेजर चिराग सितलवाड़ हैं। उन्हें निवेश का व्यापक अनुभव है। एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी के कई फंडों ने लंबी अवधि में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिए हैं।

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क्या आपको निवेश करना चाहिए?

फाइनेंशियल एडवाइजर का कहना है कि इनवेस्टर्स लंबी अवधि के लिए मिडकैप फंड्स में निवेश कर सकते हैं। इसकी वजह यह है कि लंबी अवधि में शेयरों के रिटर्न पर उतार-चढ़ाव का ज्यादा असर नहीं पड़ता है। मिडकैप कंपनियों की ग्रोथ की संभावना अच्छी होती है। कई मिडकैप कंपनियां बाद में लार्जकैप कैटेगरी में आ जाती है। हालांकि, किसी फंड के पिछले रिटर्न को भविष्य में उसके रिटर्न की गारंटी नहीं माना जा सकता। अगर आप इस फंड में निवेश करना चाहते हैं तो आपको अपने फाइनेंशियल एडवाइजर की राय लेनी चाहिए।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।