अगर आप निकालना चाहते हैं अपना पूरा PF बैलेंस, तो जानिए इस बारे में क्या कहते हैं EPFO ​​के नियम

EPF मुख्य रूप से बुढ़ापे के लिए पैसे बचाने के मकसद से बनाया गया है। हालांकि,समय के साथ EPFO ​​ने कई ऐसी योजनाएं शुरू की हैं,जिनसे सदस्य अपनी बचत कभी भी निकाल सकते हैं। EPFO 3.0 और सेवाओं के डिजिटाइजेशन को लेकर हो रही चर्चाओं के बीच,कई सदस्य यह सोच सकते हैं कि क्या वे जब चाहें तब अपने प्रोविडेंट फंड बैलेंस का 100 प्रतिशत हिस्सा निकाल सकते हैं।

इसका छोटा सा जवाब है,नहीं। हालांकि कुछ खास स्थितियों में पूरा पैसा निकालने की इजाज़त है,लेकिन EPFO ​​के नियम नौकरी के दौरान पूरा पैसा निकालने पर रोक लगाते हैं।

आप अपना 100 प्रतिशत PF बैलेंस कब निकाल सकते हैं?

सबसे आम स्थिति जिसमें कोई सदस्य अपना पूरा EPF फंड निकाल सकता है,वह है रिटायरमेंट। मौजूदा EPFO ​​नियमों के तहत,सदस्य 58 साल की उम्र पूरी होने पर फ़ाइनल सेटलमेंट के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस स्टेज पर,वे आम तौर पर अपने अकाउंट में जमा पूरा EPF बैलेंस निकाल सकते हैं।

अगर कोई सदस्य नौकरी छोड़ने के बाद एक तय समय तक बेरोजगार रहता है,तो वह अपना पूरा बैलेंस निकाल सकता है। अभी,EPFO ​​एक महीने की बेरोजगारी के बाद EPF बैलेंस का 75 प्रतिशत तक निकालने की इजाजत देता है। अगर बेरोजगारी दो महीने या उससे ज्यादा समय तक बनी रहती है,तो सदस्य बाकी बचा हुआ बैलेंस निकालने के लिए भी आवेदन कर सकता है। इस प्रावधान का उद्देश्य बेरोजगारी की अवधि के दौरान वित्तीय सहायता प्रदान करना है।

अगर आप नौकरी बदलते हैं तो क्या होगा?

कई कर्मचारियों को लगता है कि नौकरी बदलने पर उन्हें अपना PF फंड निकाल लेना चाहिए। लेकिन EPFO ​​सलाह देता है कि अपने यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) का इस्तेमाल करके EPF अकाउंट का पैसा नए एम्प्लॉयर के पास ट्रांसफर कर लिया जाए। इससे फंड पर ब्याज मिलता रहता है और सदस्य का सर्विस रिकॉर्ड भी बिना किसी रुकावट के चलता रहता है।

बार-बार नौकरी बदलने पर पूरी रकम निकाल लेने से भविष्य में आपकी रिटायरमेंट प्लानिंग पर बुरा असर पड़ सकता है। हालात के आधार पर,इस पर टैक्स भी लग सकता है।

खास जरूरतों के लिए आंशिक निकासी की अनुमति

हालांकि, पूरी निकासी पर रोक है,लेकिन EPFO ​​कुछ मंजूरी प्राप्त कामों के लिए आंशिक निकासी (जिसे एडवांस भी कहा जाता है)की अनुमति देता है। इनमें हायर एजुकेशन,शादी,घर खरीदना,घर बनाना,होम लोन चुकाना,मेडिकल ट्रीटमेंट और कुछ दूसरी स्थितियां शामिल हैं। एलिजिबिलिटी की शर्तें मकसद और सर्विस के समय के हिसाब से अलग-अलग होती हैं। निकाली जा सकने वाली रकम भी एक कैटेगरी से दूसरी कैटेगरी में अलग-अलग होती है। इसलिए,मेंबर्स को अक्सर नौकरी करते हुए भी अपनी सेविंग्स का कुछ हिस्सा मिल जाता है।

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PF फंड निकालने से पहले ध्यान रखने वाली बातें

पूरा पैसा निकालने का फ़ैसला करने से पहले,यह याद रखना जरूरी है कि EPF उन कुछ रिटायरमेंट प्रोडक्ट्स में से एक है जिसमें अनिवार्य बचत, एम्प्लॉयर का योगदान और सालाना ब्याज जमा होने का फायदा मिलता है। पूरा फंड निकाल लेने से हाथ में कैश तो बढ़ सकता है,लेकिन लंबे समय में इस तरीके से आपकी रिटायरमेंट की बचत खतरे में पड़ सकती है। अगर रिटायरमेंट प्लान से पैसे निकालने की जरूरत न हो,तो उस फंड को निवेश करने या नौकरी बदलने पर भी बनाए रखना फायदेमंद होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या नौकरी करते हुए मैं अपने PF बैलेंस का 100% हिस्सा निकाल सकता हूं?

आमतौर पर,नहीं। पूरा पैसा निकालने की इजाजत या तो रिटायरमेंट पर या फिर बेरोजगारी की स्थिति में जरूरी शर्तें पूरी होने पर ही मिलती है। कुछ खास वजहों से ही PF का कुछ हिस्सा निकालने की इजाजत दी जाती है।

नौकरी छूटने के बाद मैं कितना PF निकाल सकता हूं?

बेरोजगारी के एक महीने बाद EPF की 75 प्रतिशत रकम निकाली जा सकती है। नियमों के अनुसार,बेरोजगारी के एक और महीने बाद बाकी रकम निकाली जा सकती है।

क्या मुझे नौकरी बदलते समय अपना PF निकाल लेना चाहिए?

ज्यादातर मामलों में सबसे अच्छा तरीका यह है कि UAN-बेस्ड ट्रांसफर सुविधा का इस्तेमाल करके EPF की रकम को नए एम्प्लॉयर को ट्रांसफर कर दिया जाए।

 

 

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PTC Industries जुटाएगी ₹1800 करोड़, उधार लेने की सीमा बढ़ाई; सोमवार को शेयर पर रहेगी नजर

PTC इंडस्ट्रीज के शेयर सोमवार, 29 जून को फोकस में रहने वाले हैं। कंपनी के बोर्ड ने 1800 करोड़ रुपये तक का फंड जुटाने को मंजूरी दे दी है। साथ ही उधार लेने की सीमा को भी बढ़ाया है। कंपनी ने शेयर बाजारों को बताया है कि वह 1800 करोड़ रुपये तक का फंड क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) और/या प्रिफरेंशियल इश्यू और/या शेयरों में कनवर्ट हो सकने वाले वॉरंट्स को प्रेफरेंशियल बेसिस पर जारी करके जुटाएगी।

फंड को एक या एक से ज्यादा राउंड में जुटाया जाएगा। इसके लिए कंपनी के सदस्यों की मंजूरी और अन्य जरूरी रेगुलेटरी या कानूनी मंजूरियां लिया जाना बाकी है। इश्यू की खास शर्तें, जैसे- इश्यू का मकसद, नेट कमाई का इस्तेमाल, इश्यू का साइज, प्राइसिंग और टाइमिंग, इश्यू लॉन्च करने से पहले बोर्ड और ऑडिट कमिटी के सामने मंजूरी के लिए रखे जाएंगे।

इसके अलावा पीटीसी इंडस्ट्रीज के बोर्ड ने कंपनी की उधार लेने की सीमा को 350 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 600 करोड़ रुपये करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। इस प्रस्ताव पर भी अभी शेयरहोल्डर्स की मंजूरी लिया जाना बाकी है।

क्या करती है PTC Industries

कंपनी क्रिटिकल और सुपर क्रिटिकल एप्लीकेशंस के लिए हाई क्वालिटी इंजीनियरिंग कंपोनेंट्स बनाती है। यह एयरोस्पेस, LNG प्रोसेसिंग, ऑयल एंड गैस मरीन, एनर्जी, पल्प एंड पेपर, पेट्रोकेमिकल, सस्टेनेबिलिटी और अन्य तरह की इंजीनियरिंग इंडस्ट्रीज को सर्विसेज देती है। इसके 75% से ज्यादा प्रोडक्ट एक्सपोर्ट होते हैं। कंपनी के कस्टमर्स में रॉल्स रॉयस, Siemens, GE, Alstom, मेटसो, एमर्सन जैसे नाम शामिल हैं।

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शेयर 3 साल में 286 प्रतिशत चढ़ा

PTC Industries के शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर 17432.10 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 26100 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। यह BSE 500 इंडेक्स का हिस्सा है। कंपनी में मार्च 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 59.72 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर 3 साल में 286 प्रतिशत और 5 साल में 2000 प्रतिशत चढ़ा है। 10 साल में यह 21600 प्रतिशत मजबूत हुआ है। गोल्डमैन सैक्स ने शेयर के लिए ‘बाय’ रेटिंग के साथ 25,770 रुपये प्रति शेयर का टारगेट प्राइस दिया है।

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Daily Voice : ग्लोबल AI थीम से जुड़े शेयरों के वैल्यूएशन को लेकर रहें सतर्क, अगले 6-9 महीनों में मार्केट के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने की संभावना कम

Daily Voice : INVasset PMS के पार्टनर और फंड मैनेजर अनिरुद्ध गर्ग ने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि नैस्डैक कंपोजिट में हालिया गिरावट महीनों से चली आ रही बहुत ज्यादा उम्मीदों के बाद वैल्यूएशन में आया बदलाव है,न कि फंडामेंटल्स में कोई बड़ी गिरावट। वह इस स्ट्रक्चरल थीम को लेकर तो पॉज़िटिव हैं,लेकिन इसके वैल्यूएशन को लेकर सावधान हैं। उनका मानना ​​है कि पिछले दो सालों में हुई बड़ी री-रेटिंग के मुकाबले,अब इनका रिटर्न ज्यादातर चुनिंदा शेयरों और कंपनियों की कमाई पर निर्भर करेगा।

उनके मानना है कि बाजार के नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए जरूरी है कि अर्निंग का स्तर वैल्यूएशन के बराबर हो और ग्लोबल वोलैटिलिटी कम हो। लेकिन इस दौरान इनमें से किसी की भी गारंटी नहीं है। इसलिए,अगले छह से नौ महीनों में बाजार के एक सीमित दायरे में रहने और खास शेयरों पर फोकस्ड रहने की ज्यादा संभावना है। अगर अर्निंग अच्छी रहती है,तो दूसरी छमाही में बाजार धीरे-धीरे ऊपर जा सकता है।

क्या आपको लगता है कि ग्लोबल AI स्टॉक्स में अभी भी काफी बढ़त की गुंजाइश है,या आप टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में हालिया गिरावट को लेकर चिंतित हैं?

ग्लोबल AI में आसानी से मिलने वाले फायदे का ज्यादातर हिस्सा पहले ही हासिल किया जा चुका है। हाल की गिरावट (जिसमें सेमीकंडक्टर सेक्टर की वैल्यूएशन में एक ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की कमी आई और नैस्डैक में एक ही सेशन में जबरदस्त गिरावट देखी गई) असल में महीनों से चली आ रही बहुत ज्यादा उम्मीदों के बाद वैल्यूएशन का रीसेट है,न कि फंडामेंटल्स में कोई बड़ी गिरावट। इस स्ट्रक्चरल थीम को लेकर तो पॉज़िटिव नजरिया है,लेकिन इसके वैल्यूएशन को लेकर सावधानी की जरूरत है। पिछले दो सालों में हुई बड़ी री-रेटिंग के मुकाबले,अब इस सेक्टर का रिटर्न ज्यादातर चुनिंदा शेयरों और कंपनियों की कमाई पर निर्भर करेगा।

क्या निवेशकों को IT सर्विस कंपनियों और AI इकोसिस्टम में निवेश करने में जल्दबाजी से बचना चाहिए?

हैं, धैर्य रखना सही रहेगा,लेकिन यह धैर्य भी हकीकत पर आधारित होना चाहिए। भारतीय IT सर्विस कंपनियां AI साइकिल के एक मुश्किल दौर में हैं। AI से जुड़ी मांग बढ़ने और उसकी जगह लेने से पहले ही ऑटोमेशन की वजह से हर प्रोजेक्ट से होने वाली कमाई कम हो जाती है। बड़ी कंपनियों के लिए FY27 का कमजोर गाइडेंस (यानी ‘कांस्टेंट-करेंसी’के आधार पर कम सिंगल-डिजिट ग्रोथ) इसी बात को दिखाता है।

टेक्नोलॉजी कंपनियों को डील मिलने की रफ़्तार अच्छी बनी हुई है,लेकिन कीमतों का दबाव और प्रोडक्टिविटी में कमी की वजह से निकट भविष्य में अर्निंग्स की रफ़्तार सीमित रह सकती है। ऐसे में मजबूत कंपनियों में निवेश बनाए रखेंगे,लेकिन रिटर्न की उम्मीदों को कम रखने की सलाह होगी। यह सेक्टर ऐसा है जिसका साइकल बदल रहा है। ऐसे में अभी इसमें सोच समझकर निवेश बनाए रखना चाहिए और बहुत ज्यादा निवेश करने से बचाना चाहिए।

क्या आपको उम्मीद है कि अगले 6-9 महीनों में भारतीय इक्विटी मार्केट नई ऊंचाई पर पहुंचेंगे?

ऐसा हो सकता है,लेकिन हमें इसे ‘बेस केस'(सबसे ज्यादा संभावित स्थिति) नहीं मानना चाहिए। निफ्टी अभी भी अपने पीक (उच्चतम स्तर)से काफी नीचे 24,000 के आसपास है और मोमेंटम इंडिकेटर पक्के भरोसे के बजाय दुविधा की ओर इशारा कर रहे हैं। नई ऊंचाई तक पहुंचने के लिए जरूरी है कि अर्निंग,वैल्यूएशन के बराबर हो और ग्लोबल वोलैटिलिटी कम हो। लेकिन इस समय इसकी कोई गारंटी नहीं है।

अगले छह से नौ महीनों में बाजार के एक सीमित दायरे में रहने और खास स्टॉक्स पर फोकस्ड रहने की ज्यादा संभावना है। अगर कंपनियों की अर्निंग अच्छी रही,तो दूसरी छमाही में बाजार धीरे-धीरे ऊपर जा सकता है। हम रिकॉर्ड स्तर तक तेजी से पहुँचने की उम्मीद करने के बजाय,इस धीरे-धीरे होने वाले सुधार के हिसाब से अपनी रणनीति बनाएंगे।

US-Iran के बीच संभावित डील से जुड़ी गतिविधियों के अलावा,आपको आगे चलकर मार्केट के लिए कौन सी बड़ी चुनौतियां दिखती हैं?

बाजार के लिए कई चुनौतियां हैं। इनमें से पहली है, वैल्यूएशन। मार्केट में अभी भी अभी भी कुछ लोग यह मानकर चल रहे हैं सब कुछ एकदम सही तरीके से होगा। ऐसे में अगर अर्निंग उम्मीद के मुताबिक नहीं रही,तो नुकसान से बचने की गुंजाइश बहुत कम होगी। दूसरी,चुनौती बड़ी ग्लोबल टेक और AI सेक्टर में करेक्शन है। अगर विदेशी बाजारों में वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट आती है,तो विदेशी पैसा इमर्जिंग मार्केट (जिनमें भारत भी शामिल है) से बाहर निकल जाएगा। तीसरी चुनौती US में ब्याज दरों में कटौती की रफ्तार और डॉलर की मजबूती को लेकर अभी भी बनी अनिश्चितता है,जिसका सीधा असर FIIs पर पड़ता है।

चौथी चुनौती घरेलू अर्निंग की मजबूती है जहां मार्जिन पर दबाव देखने को मिल सकता है। इसके अलावा ट्रेड पॉलिसी को लेकर भी चिंता बनी हुई है। भारत और अमेरिका के बीच कैसा समझौता होगा,इसको लेकर स्थितियां साफ नहीं हैं। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए बाजार में सावधानी बरतने की सलाह होगी।

क्या आपको लगता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में लंबे समय के लिए स्ट्रक्चरल निवेश के अच्छे मौके हैं?

ये स्ट्रक्चरल मौके तो हैं,लेकिन मैं इन्हें’सबसे अच्छे’कहने से बचने की जरूरत है। कई भारतीय प्लेटफॉर्म्स में मज़बूत नेटवर्क इफेक्ट और आगे बढ़ने की अच्छी गुंजाइश है,फिर भी कई प्लेटफॉर्म बहुत ज्यादा वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे हैं। इस वैल्यूएशन में यह मान लिया जाता है कि इनका काम बिना किसी गलती के होगा,जबकि इनके लिए मुनाफा,रेगुलेशन और कड़ी प्रतिस्पर्धा असल जोखिम बने हुए हैं।

हम उन्हें एक बड़े स्ट्रक्चरल बास्केट के हिस्से के तौर पर देखते हैं,जिसमें मैन्युफैक्चरिंग,बचत का फाइनेंशियलाइज़ेशन और प्रीमियम कंजम्पशन भी शामिल हैं । ये ऐसे थीम हैं जिनकी कमाई की संभावना आज ज्यादा साफ है। लेबल से ज्यादा जरूरी है सही चुनाव करना। हम उन कुछ ऐसे प्लेटफ़ॉर्म में निवेश करेंगे जो साफ तौर पर मुनाफ़ा कमा रहे हैं और ग्रोथ के लिए किसी भी कीमत पर निवेश करने से बच रहे हैं।

 

Market trend : निफ्टी जल्द ही हासिल कर सकता है 24728 के टारगेट, आगे हफ्ते इन दो शेयरों में हो सकती है बंपर कमाई

 

डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

जेवर बनेगा उत्तर भारत की सिलिकॉन वैली! 2 इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट हो रहे शुरू; निकलेंगी 3000 जॉब्स

जेवर में लगभग 6,750 करोड़ रुपये के निवेश से दो इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट शुरू हो रहे हैं। इनसे करीब 3,000 नौकरियां पैदा होंगी और जेवर को भारत के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग हब्स में से एक बनाने में मदद मिलेगी। यह बात केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कही है। वैष्णव ने यमुना सिटी, जेवर में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मिलकर इन प्रोजेक्ट्स की आधारशिला रखी।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, दोनों प्रोजेक्ट्स में एडवांस्ड हाई-डेंसिटी और मल्टी-लेयर प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) बनाने के लिए ASCENT-K Circuit 3,250 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। यह दक्षिण कोरिया की KCC का जॉइंट वेंचर है। साथ ही HVAC (हीटिंग, वेंटिलेशन एंड एयर कंडीशनिंग) कंपोनेंट्स बनाने और PCB की असेंबलिंग के लिए एंबर एंटरप्राइजेज की 3,500 करोड़ रुपये की फैसिलिटी भी है।

भारत की बढ़ती घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की असेंबलिंग से आगे बढ़कर उनके मुख्य कंपोनेंट्स की मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ रहा है। वैष्णव के मुताबिक, “हम असेंबली से डीप मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ रहे हैं। यहां बनने वाले एडवांस्ड मल्टी-लेयर PCB, जिनमें से कुछ में 20 से 22 लेयर्स होती हैं, आधुनिक टेक्नोलॉजी की रीढ़ हैं। जिन चीजों को हम कभी इंपोर्ट करते थे, उन्हें अब हम दुनिया के लिए ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बनाएंगे।”

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40000 करोड़ के PCB इंपोर्ट करता रहा है भारत

वैष्णव ने कहा कि भारत हर साल लगभग 40,000 करोड़ रुपये के PCB इंपोर्ट करता रहा है और घरेलू प्रोडक्शन से इंपोर्ट पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी। जेवर में बनने वाला हर PCB विदेशी मुद्रा की बचत करेगा, रुपये को मजबूत करेगा और भारत के बैलेंस ऑफ पेमेंट्स में सुधार करेगा। मंत्री ने कहा कि यमुना सिटी क्षेत्र में हजारों करोड़ रुपये का निवेश जेवर को उत्तर भारत की सिलिकॉन वैली बनाने में मदद करेगा।

उन्होंने इलाके में तेजी से बढ़ रहे इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि चालू हो चुके नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) से कनेक्टिविटी और प्रस्तावित दिल्ली-लखनऊ-वाराणसी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की वजह से जेवर ग्लोबल निवेशकों के लिए एक आकर्षक जगह बन रहा है।

Mangalam Worldwide Stock Split: एक शेयर के हो जाएंगे 10 टुकड़े, रिकॉर्ड डेट 10 जुलाई

रिकॉर्ड डेट 10 जुलाई है। इस तारीख तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में होंगे, उनके स्टॉक स्प्लिट हो जाएंगे। रिकॉर्ड डेट 10 जुलाई है। इस तारीख तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में होंगे, उनके स्टॉक स्प्लिट हो जाएंगे।

स्टॉक स्प्लिट की घोषणा मई महीने में की गई थी। मंगलम वर्ल्डवाइड गुजरात की कंपनी है। इसके कामकाज में स्क्रैप को पिघलाने से लेकर सीमलेस पाइप और ट्यूब बनाने तक के काम शामिल हैं। स्टॉक स्प्लिट की घोषणा मई महीने में की गई थी। मंगलम वर्ल्डवाइड गुजरात की कंपनी है। इसके कामकाज में स्क्रैप को पिघलाने से लेकर सीमलेस पाइप और ट्यूब बनाने तक के काम शामिल हैं।

कंपनी स्टेनलेस स्टील के बिलेट, इनगॉट, फ्लैट बार, राउंड बार, ब्राइट बार के साथ-साथ सीमलेस पाइप और ट्यूब, हीट एक्सचेंजर ट्यूब और U-ट्यूब भी बनाती है। कंपनी स्टेनलेस स्टील के बिलेट, इनगॉट, फ्लैट बार, राउंड बार, ब्राइट बार के साथ-साथ सीमलेस पाइप और ट्यूब, हीट एक्सचेंजर ट्यूब और U-ट्यूब भी बनाती है।

मंगलम वर्ल्डवाइड के शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर 370.80 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 1100 करोड़ रुपये से ज्यादा है। मंगलम वर्ल्डवाइड के शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर 370.80 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 1100 करोड़ रुपये से ज्यादा है।

शेयर का 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 394.20 रुपये और एडजस्टेड लो 365.80 रुपये है। कंपनी की सालाना आम बैठक 30 जुलाई को होने वाली है। शेयर का 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 394.20 रुपये और एडजस्टेड लो 365.80 रुपये है। कंपनी की सालाना आम बैठक 30 जुलाई को होने वाली है।

कंपनी वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 10 रुपये फेस वैल्यू वाले हर शेयर पर 30 पैसे प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देने वाली है। रिकॉर्ड डेट 17 जुलाई है। कंपनी वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 10 रुपये फेस वैल्यू वाले हर शेयर पर 30 पैसे प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देने वाली है। रिकॉर्ड डेट 17 जुलाई है।

इस डिविडेंड पर कंपनी की सालाना आम बैठक में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। उसके बाद पेमेंट किया जाएगा। इस डिविडेंड पर कंपनी की सालाना आम बैठक में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। उसके बाद पेमेंट किया जाएगा। (Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।)

LIC Jeevan Utsav: बच्चों के लिए आजीवन तोहफा, हर दिन ₹160 की बचत से करें जिंदगी भर सालाना ₹100000 का इंतजाम

LIC Jeevan Utsav: एलआईसी में लोगों की जरूरतों के हिसाब से कई पॉलिसी हैं, उसमें से एक लाइफटाइम पेंशन प्लान जीवन उत्सव है। इसकी खास बात ये है कि इसमें एक तय अवधि के बाद हर साल एक फिक्स्ड अमाउंट जिंदगी भर पॉलिसीहोल्डर्स के खाते में क्रेडिट होता रहता है। इस पर मार्केट के उठा-पटक या आर्थिक मंदी या सुस्ती का कोई असर नहीं पड़ता। 1 साल की कम उम्र के किसी बच्चे लिए 16 साल तक हर दिन ₹160 बचाकर 18 वर्ष की उम्र से जिंदगी भर उसके लिए हर दिन ₹274 के हिसाब से सालाना ₹1 लाख की व्यवस्था की जा सकती है।

Jeevan Utsav: डिटेल्स

यह प्लान 30 दिन के नवजात शिशु से लेकर 65 वर्ष की उम्र के बुजुर्गो तक के लिए उपलब्ध है। 1 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए 16 साल तक प्रीमियम चुकाना पड़ेगा तो 65 वर्ष के बुजुर्ग के लिए अधिकतम 5-10 वर्ष तक के पीरियड का ही प्रीमियम पेमेंट ऑप्शन इस पॉलिसी में है। इसमें कम से कम ₹5 लाख तक का सम एश्योर्ड लेना होता है और अधिकतम की कोई सीमा नहीं है। प्रीमियम भरने का पीरियड समाप्त होने के रेगुलर इनकम प्लान के तहत दो साल बाद से हर साल सम एश्योर्ड का 10% खाते में क्रेडिट होता रहेगा, जिंदगी भर। 100 साल की उम्र तक पैसा मिलता है और फिर पॉलिसी बंद कर जो भी मेच्योरिटी वैल्यू बनती है, वह पॉलिसी होल्डर्स को दे दी जाती है। किसी अनहोनी की स्थिति में पॉलिसीहोल्डर्स की मौत पर सम एश्योर्ड और हर साल का गारंटीड एडीशन नॉमिनी को मिलता है।

इसमें ADDB (एक्सीडेंटल डेथ एंड डिजिबिलिटी बेनेफिट राइडर), AB, AB (2 गुना), AB (3 गुना), टर्म राइडर और PWB (प्रीमियम वेवर बेनेफिट) जैसे राइडर्स थोड़े से अतिरिक्त शुल्क के साथ मिलते हैं। एडीडीबी का मतलब है कि दुर्घटना से मृत्यु होने पर अतिरिक्त पैसा मिलता है तो दुर्घटना के चलते स्थायी विकलांगता होने पर प्रीमियम माफ हो सकते हैं। वहीं पीडब्ल्यूबी का मतलब है कि दुर्घटना के चलते स्थायी विकलांगता होने पर प्रीमियम माफ हो जाता है तो बच्चों की पॉलिसी में अभिभावक की मौत होने पर 18 साल की उम्र तक के सभी प्रीमियम माफ हो जाते हैं।

रिस्क कवर के मामले में एक बात बताना जरूरी है कि 8 साल से कम उम्र के बच्चों की पॉलिसी के मामले में पॉलिसी शुरू होने के 2 साल बाद या बच्चे के 8 साल का होने, दोनों में जो पहले हो, उस दिन से रिस्क कवर शुरू होगा। 8 साल से अधिक उम्र में पॉलिसी लेने पर पर रिस्क तुरंत चालू हो जाएगा। एक और अहम बात ये है कि बच्चे के 18 साल का होने के बाद पॉलिसी अपने आप उसके नाम पर ट्रांसफर हो जाएगी।

अब एक उदाहरण से समझें

मान लीजिए कि ABC की उम्र 36 वर्ष है और एडीडीबी के राइडर के साथ वह 15 साल के लिए ₹10 लाख की पॉलिसी लेता है। 15 साल तक वह हर साल ₹66150, हर छह महीने पर ₹33653, हर तीन महीने पर ₹16950 या हर महीने ₹5691 में से एक विकल्प चुनता है और 15 साल तक लगातार प्रीमियम भरता है। 15 साल तक प्रीमियम भरने के बाद उसे दो साल तक रुकना होता है जिसके बाद 53 वर्ष की उम्र से उसे हर साल अपने बैंक खाते में सालाना ₹1 लाख यानी ₹10 लाख के सम एश्योर्ड का 10% खाते में क्रेडिट मिलता है।

किसी अनहोनी की स्थिति में बात करें तो एक्सीडेंट से पॉलिसीहोल्डर्स की मौत पर नॉमिनी को सम एश्योर्ड और जितने साल पॉलिसी मिली है, उतने समय का गारंटीड एडीशंस जोड़कर मिलेगा। जैसे कि 36 वर्ष की उम्र में पॉलिसी लेने के बाद ABC की मौत 45 वर्ष की उम्र में यानी 9 सालाना प्रीमियम भरने के बाद एक एक्सीडेंट में हो गई तो नॉमिनी को ₹24 लाख मिलेंगे।

PPF Account: इमरजेंसी में पैसों की है जरूरत? पर्सनल लोन के बजाय अपने PPF खाते से उठाएं सबसे सस्ता लोन, जानें नियम और तरीका

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने निवेश सलाहकार से जरूर संपर्क करें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी यहां कभी भी कोई सलाह नहीं दी जाती है।

Pivot Path में मेजॉरिटी स्टेक बेचेगी Strides Pharma, ₹100 करोड़ में होगी डील

स्ट्राइड्स फार्मा साइंस लिमिटेड ने अपनी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी वाली सहायक कंपनी पिवट पाथ में मेजॉरिटी स्टेक निवेशकों के एक समूह को बेचने की घोषणा की है। यह बिक्री 100 करोड़ रुपये में की जाएगी। निवेशकों के इस समूह का नेतृत्व एसेंट कैपिटल कर रही है, जिसमें सह-निवेशक विंटेज क्लासिक भी शामिल है। कंपनी ने शेयर बाजारों को बताया है कि स्ट्राइड्स फार्मा साइंस के बोर्ड ने 27 जून की मीटिंग में इस रणनीतिक निवेश को मंजूरी दी।

डील के तहत एसेंट कैपिटल, पिवट पाथ में 50 करोड़ रुपये का शुरुआती निवेश करेगी। यह निवेश 31 जुलाई 2026 तक कंप्लीट होने की उम्मीद है। सौदे के शुरुआती चरण में स्ट्राइड्स फार्मा साइंस को 75 करोड़ रुपये और इसके कंप्लीट होने की पहली वर्षगांठ पर बाकी के 25 करोड़ रुपये मिलेंगे। शेयर बिक्री 30 जून 2026 तक कंप्लीट होने की उम्मीद है।

लेनदेन के बाद स्ट्राइड्स के पास पिवट पाथ में 19.95 प्रतिशत हिस्सेदारी रह जाएगी। निवेशकों की हिस्सेदारी 65.05 प्रतिशत होगी। बाकी का 15 प्रतिशत हिस्सा कर्मचारी स्टॉक विकल्प के तहत रिजर्व रहेगा। यह रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन नहीं हैं।

Pivot Path की वैल्यूएशन 230 करोड़ रुपये

एक अलग फाइलिंग में, स्ट्राइड्स ने कहा कि इस डील में पिवट पाथ की वैल्यूएशन पोस्ट-मनी बेसिस पर 230 करोड़ रुपये आंकी गई है। पाइवट पाथ की शुरुआत स्ट्राइड्स के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC), आर्को लैब प्राइवेट लिमिटेड के भीतर हुई थी। इसने लाइफ साइंसेज कंसल्टिंग, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, क्वालिटी और कंप्लायंस, और टेक्नोलॉजी-बेस्ड ऑपरेशनल सर्विस में क्षमताएं विकसित कीं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock in Focus: ₹1000 करोड़ जुटाने की योजना, बोर्ड ने भी दी खास मंजूरी, 3 वजहों से 29 जून को फोकस में रहेगा यह शेयर

Stock in Focus: दिग्गज NBFC (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी) आईआईएफएल फाइनेंस के शेयरों में 29 जून को मार्केट खुलने पर तेज हलचल दिख सकती है। इसकी वजह ये है कि कंपनी अपने कैपिटल बेस को मजबूत करने की तैयारी में है। इसके लिए कंपनी के बोर्ड ने शेयरहोल्डर्स और रेगुलेटरी मंज़ूरी मिलने पर एक या इससे अधिक किश्तों में इक्विटी शेयर या अन्य एलिजिबल सिक्योरिटीज जारी करके ₹10,000 करोड़ तक जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने इसकी जानकारी 27 जून को एक्सचेंज फाइलिंग में दी और इस खुलासे से एक कारोबारी दिन पहले 25 जून गुरुवार को बीएसई पर यह 2.75% की गिरावट के साथ ₹510.10 (IIFL Finance Share Price) पर बंद हुआ था।

IIFL Finance से जुड़े तीन बड़े अपडेट्स

आईआईएफएल फाइनेंस के बोर्ड ने इसे ₹10 हजार करोड़ का फंड जुटाने की मंजूरी दी है। मार्केट के माहौल और कैपिटल की जरूरतों के आधार पर, फंड जुटाने का काम कई तरीकों से किया जा सकता है, जैसे कि पब्लिक इश्यू, राइट्स इश्यू, प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट, प्राइवेट प्लेसमेंट, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIPs) या इन्हें मिलाकर। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी इश्यू पर बोर्ड या उसकी कमेटियां सही समय पर विचार करेंगी।

फंड जुटाने की योजना के साथ-साथ बोर्ड ने कंपनी के ग्लोबल मीडियम टर्म नोट्स (GMTN) प्रोग्राम का साइज $100 करोड़ से बढ़ाकर $200 करने को भी मंजूरी दी। इससे कंपनी को फंडिंग के लिए विदेशी मार्केट तक पहुँचने में अधिक आसानी होगी। साथ ही बोर्ड ने कंपनी की उधार लेने की सीमा और अपनी एसेट्स पर सिक्योरिटी बनाने की सीमा को भी मौजूदा ₹60,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹75,000 करोड़ करने को मंजूरी दी लेकिन इस पर कंपनी को आने वाली सालाना आम बैठक में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी लेनी होगी।

इसके अलावा कंपनी ने अपने फाइनेंस डिपार्टमेंट में लीडरशिप में बदलाव का भी ऐलान किया। कपिश जैन ने चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर का पद छोड़ दिया ताकि वह कंपनी के भीतर ही दूसरा पद संभाल सकें और सीएफओ के पद पर उनकी जगह विकास जैन को 27 जून से जिम्मेदारी मिली है। विकास जैन इससे पहले हिंदुजा लेलैंड फाइनेंस, बजाज फाइनेंस, बजाज हाउसिंग फाइनेंस और PwC जैसी कंपनियों के साथ काम कर चुके है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल?

आईआईएफएल फाइनेंस के शेयरों ने निवेशकों को कम समय में तगड़ा झटका दिया है। इस साल की शुरुआत में 6 जनवरी 2026 को बीएसई पर यह ₹674.95 के भाव पर था जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से तीन ही महीने में यह 39.34% फिसलकर 27 अप्रैल 2026 को यह ₹409.45 के भाव पर आ गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।