सऊदी अरब के रास तनुरा में रविवार को दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको का हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया। हादसे में हेलिकॉप्टर सवार सभी 14 लोगों की मौत हो गई। सऊदी प्रेस एजेंसी (SPA) के मुताबिक, हेलिकॉप्टर में सवार सभी लोग सऊदी अरब के ही नागरिक थे। हालांकि, क्रैश की वजह की जानकारी अभी सामने नहीं आई है। अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं। अरामको दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको दुनिया की सबसे बड़ी तेल और गैस कंपनियों में से एक है। यह सऊदी अरब सरकार के स्वामित्व में है। इसकी स्थापना 1933 में अमेरिकी कंपनियों के साथ समझौते के तहत हुई थी। 1980 में यह पूरी तरह सऊदी सरकार के नियंत्रण में आ गई। कंपनी का मुख्यालय धहरान में स्थित है। अरामको के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक है और यह प्रतिदिन लाखों बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करती है, जिससे यह वैश्विक ऊर्जा बाजार की प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन गई है। सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था काफी हद तक इसी कंपनी की आय पर निर्भर करती है। अरामको केवल कच्चे तेल का उत्पादन ही नहीं करती, बल्कि रिफाइनिंग, पेट्रोकेमिकल्स और प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में भी सक्रिय है। इसके नियंत्रण में दुनिया का सबसे बड़ा पारंपरिक तेल क्षेत्र, गवार, भी आता है। 2019 में कंपनी ने शेयर बाजार में अपना आईपीओ लॉन्च किया, जिसे इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ माना गया। हाल के वर्षों में अरामको रिन्यूबल एनर्जी, हाइड्रोजन और कार्बन कैप्चर जैसी तकनीकों में निवेश बढ़ा रही है। एक महीने में तीन बड़े हैलिकॉप्टर हादसे… 13 जून: चीन में जमीन पर गिरकर हेलिकॉप्टर चरखी जैसा घूमता रहा चीन में हेलिकॉप्टर क्रैश का एक वीडियो सामने आया है। इसमें एक हेलिकॉप्टर खेत में क्रैश होकर दो हिस्से में टूट गया, इसके बावजूद उसके रोटर ब्लेड तेज रफ्तार में काफी देर तक घूमते रहे। कॉकपिट के अंदर फंसे पायलट और उसका साथी इधर-उधर झटके खाते रहे। एक पायलट तो हेलिकॉप्टर के दरवाजे से आधा बाहर लटका हुआ था। वह कई बार जमीन और हेलिकॉप्टर के किनारे से टकराया। पास की सड़क पर मौजूद लोग यह सब देखकर इकट्ठा हो गए, लेकिन हेलिकॉप्टर के रोटर ब्लेड लगातार घूम रहे थे, इसलिए कोई भी उनकी मदद के लिए आगे नहीं बढ़ सका। दोनों पायलटों की जान सीट बेल्ट की वजह से बच गई। द सन की रिपोर्ट के मुताबिक यह घटना चीन के वुजिन शहर में हुई। पूरी खबर पढ़ें… 10 जून: PoK में पाकिस्तानी सेना का हेलिकॉप्टर क्रैश पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बुधवार को पाकिस्तान सेना का एक MI-17 हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसा मुजफ्फराबाद के पास उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद हुआ। हेलिकॉप्टर में सवार सभी 21 सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने की खबर है। हालांकि सेना ने अभी यह नहीं बताया है कि हेलिकॉप्टर में कुल कितने लोग सवार थे। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, ये सुरक्षाकर्मी PoK के नीलम घाटी सेक्टर जा रहे थे। वहां पर विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर विवाद चल रहा है। इस वजह से सरकार वहां एक्स्ट्रा सैनिक तैनात कर रही है। पूरी खबर पढ़ें… 29 मई: शादी के दिन हेलिकॉप्टर क्रैश में भारतवंशी पायलट की मौत अमेरिका के जॉर्जिया में शादी के कुछ घंटों बाद भारतीय मूल के पायलट की हेलिकॉप्टर हादसे में मौत हो गई। उनकी पत्नी घायल हो गईं और करीब 6 घंटे तक मलबे में फंसी रहीं। डेव फिजी और जेस्नी की शादी 29 मई को डॉसनविल के ‘द रिवेरे’ वेडिंग वेन्यू में हुई थी। समारोह में करीब 400 मेहमान शामिल हुए थे। नवविवाहित जोड़ा शादी के तुरंत बाद हेलिकॉप्टर से अटलांटा के लिए रवाना हुआ था, लेकिन उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। घटना की पूरी कहानी 1 जून को सामने आई है। अमेरिका की नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) जांच कर रही है। हालांकि, एजेंसी ने अभी तक दुर्घटना की वजह नहीं बताई है। पूरी खबर पढ़ें…
जयपुर की कंपनी अद्वित ज्वेल्स का 165.16 करोड़ रुपये का IPO 25 जून को बंद हो चुका है। इसे 212.63 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। अब 29 जून को अलॉटमेंट फाइनल होने की उम्मीद है। उसके बाद कंपनी की लिस्टिंग NSE और BSE पर 1 जुलाई को हो सकती है। जिन लोगों ने इस IPO में पैसे लगाए हैं, वे इसकी रजिस्ट्रार Bigshare Services Pvt Ltd और स्टॉक एक्सचेंज BSE की वेबसाइट के जरिए अलॉटमेंट स्टेटस चेक कर सकते हैं। इसकी प्रोसेस इस तरह है…
BSE पर कैसे करें चेक
- https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx पर जाएं।
- इश्यू का टाइप ‘इक्विटी’ चुनें।
- ड्रॉपडाउन मेन्यू से Advit Jewels IPO चुनें।
- एप्लीकेशन नंबर या PAN डिटेल एंटर करें।
- ‘कैप्चा’ डालें।
- ‘Submit’ बटन पर क्लिक करें।
Bigshare Services की साइट से
- https://www.bigshareonline.com/ipo_allotment.html पर जाएं।
- 3 सर्वर्स में से किसी एक को चुनें।
- कंपनी में Advit Jewels सिलेक्ट करें।
- एप्लीकेशन नंबर/PAN/बेनिफीशियरी ID में से किसी एक को सिलेक्ट कर डिटेल एंटर करें।
- ‘कैप्चा’ डालें।
- ‘सर्च’ बटन पर क्लिक करें।
कंपनी हाथ से बनी पारंपरिक और आधुनिक ज्वेलरी बनाती और बेचती है। यह रामभजो (Rambhajo) ब्रांड नेम के तहत कुंदन, पोलकी, डायमंड और जड़ाऊ गहनों में माहिर है। कंपनी के प्रमोटर नितिन गिलारा, प्रतीक गिलारा, विपुल गिलारा और श्री कृष्ण वर्धन गिलारा हैं। प्री-IPO राउंड में अद्वित ज्वेल्स ने एंकर इनवेस्टर्स को 18.32 लाख शेयर जारी करके 22.9 करोड़ रुपये जुटाए। वहीं इश्यू की ओपनिंग से एक दिन पहले एंकर विंडो के जरिए 49.52 करोड़ रुपये जुटाए।
कैसी रह सकती है लिस्टिंग?
अद्वित ज्वेल्स की लिस्टिंग अच्छी रहने के संकेत हैं। ग्रे मार्केट में शेयर IPO के अपर प्राइस बैंड 138 रुपये से 35.51% प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। IPO में 1.20 करोड़ नए शेयर जारी हुए। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 174.98 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 536.38 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 95.30 गुना भरा।
IPO के पैसों का कैसे होगा इस्तेमाल
कंपनी अपने IPO से हुई कमाई का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए, कर्ज चुकाने के लिए और सामान्य कॉरपोरेट कामों के लिए करेगी। अद्वित ज्वेल्स की अप्रैल-दिसंबर 2025 अवधि में कुल इनकम 123.80 करोड़ रुपये रही। शुद्ध मुनाफा 25.44 करोड़ रुपये रहा। इस बीच कंपनी पर 64.92 करोड़ रुपये की उधारी थी। EBITDA 36.68 करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2025 के दौरान कुल इनकम 124.94 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 25.37 करोड़ रुपये था। EBITDA 37.15 करोड़ रुपये था।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Fuel Crisis News: फरवरी 2026 में जब अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया, तो पूरी दुनिया पेट्रोल-डीजल और LPG को लेकर हड़कंप मच गया। होर्मुज वह रास्ता है जहां से दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा कच्चा तेल गुजरता है। भारत के लिए यह स्थिति किसी बड़ी आपदा से कम नहीं थी। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है।
भारत अपनी जरूरत का 90% कच्चा तेल और 60% एलपीजी (LPG) आयात करता है। ईंधन संकट की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि भारत का 50% तेल और 90% एलपीजी इसी रास्ते से आता था, जो अगले चार महीनों के लिए पूरी तरह ठप हो गया।
संकट के बीच भारत ने दिखाया दम
पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़े संघर्ष के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई। इसके बावजूद भारत ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए संभावित ईंधन संकट को टाल दिया। सरकार का दावा है कि करीब चार महीने तक आपूर्ति बाधित रहने के बावजूद देश में कहीं भी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राशनिंग लागू नहीं करनी पड़ी। इस दौरान ईंधन की उपलब्धता सामान्य बनी रही।
जरूरत का लगभग 90% तेल आयात करता है भारत
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत और एलपीजी का करीब 60 प्रतिशत आयात करता है। इनमें से लगभग 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 90 प्रतिशत एलपीजी होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। इस मार्ग के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया। भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल से अधिक पहुंच गई। जबकि ब्रेंट क्रूड 126 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक चला गया। एलपीजी के आयात में भी करीब 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
सरकार ने कई मोर्चों पर बनाई रणनीति
ईंधन संकट के शुरुआती दिनों में ही केंद्र सरकार ने नियंत्रण संबंधी आदेश जारी किए। घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ वैकल्पिक देशों से तेल और गैस की खरीद तेज कर दी। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (OMCs) को निर्देश दिया गया कि वे बढ़ी हुई लागत का अधिकांश बोझ खुद वहन करें ताकि आम उपभोक्ताओं पर इसका असर कम से कम पड़े।
सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती भी की। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिली। इस फैसले से केंद्र सरकार को लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू का त्याग करना पड़ा।
बीते एक दशक में मजबूत हुई ऊर्जा सुरक्षा
सरकार का कहना है कि पिछले 10 वर्षों में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए किए गए निवेश का लाभ इस संकट के दौरान मिला। वर्ष 2014 में जहां देश में 11 एलपीजी आयात टर्मिनल थे। वहीं, अब उनकी संख्या बढ़कर 22 हो गई है। इसी अवधि में एलपीजी आयात क्षमता 12 मिलियन टन प्रतिवर्ष से बढ़कर 32.3 मिलियन टन प्रति वर्ष हो गई।
इसके अलावा भारत अब 27 की बजाय 41 देशों से कच्चे तेल का आयात कर रहा है। लीबिया, गैबॉन, इक्वेटोरियल गिनी और गुयाना जैसे नए देशों को भी सप्लाई चेन में शामिल किया गया है। रूस और अमेरिका से भी आयात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकार ने वैकल्पिक समुद्री रूट्स का भी इस्तेमाल बढ़ाया, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता पहले की तुलना में कम हुई।
एथेनॉल मिश्रण से भी मिली राहत
सूत्रों का कहना है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ने से भी कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिली। सरकार का कहना है कि इससे हर साल बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की बचत हो रही है।
तेल कंपनियों पर पड़ा भारी वित्तीय बोझ
सरकार के अनुसार, सार्वजनिक तेल कंपनियों ने दो महीने से अधिक समय तक खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की। बाद में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई। इसके बावजूद कंपनियां एक समय प्रतिदिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये के अंडर रिकवरी का सामना कर रही थीं। यह बाद में घटकर करीब 650 करोड़ रुपये प्रतिदिन रह गई। अनुमान है कि चालू तिमाही में तेल कंपनियों को 1 से 1.2 लाख करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
आसमान छूती कीमतें और सरकार पर बढ़ता दबाव
होर्मुज होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार चली गईं। भारत जो तेल $70 प्रति बैरल में खरीद रहा था, उसकी कीमत महज चार हफ्तों में $120 के पार पहुंच गई। वहीं ब्रेंट क्रूड $126 प्रति बैरल के अपने उच्चतम स्तर पर जा पहुंच गया। दूसरी ओर, एलपीजी की कीमतों में 46% की भारी बढ़ोतरी हुई। इससे एक 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की आयात लागत बढ़कर 1,600 रुपये से अधिक हो गई। जहाजों का युद्ध-जोखिम बीमा (War-risk insurance) भी कई गुना बढ़ चुका था।
संकट के चक्रव्यूह को भारत ने कैसे तोड़ा?
इस अभूतपूर्व संकट के बीच भारत सरकार, तेल कंपनियों और कूटनीतिज्ञों ने मिलकर एक बहुआयामी रणनीति तैयार की, ताकि आम जनता पर इसका सीधा असर न पड़े:-
1. 10 साल की तैयारी आई काम (इन्फ्रास्ट्रक्चर का अपग्रेड)
भारत पिछले 10 वसालों से अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) पर लगातार निवेश कर रहा था। साल 2014 में जहाँ देश में केवल 11 एलपीजी आयात टर्मिनल थे। वहीं, 2026 में इनकी संख्या बढ़कर 22 हो गई। इस वजह से एलपीजी आयात क्षमता 12 मिलियन टन (2014) से बढ़कर 2026 में 32.3 मिलियन टन प्रति वर्ष हो गई। इसने संकट के समय एक बड़े सुरक्षा कवच का काम किया.
2. नए देशों से दोस्ती और नए रास्ते की खोज
भारत ने केवल होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते पर निर्भर रहने के बजाय आक्रामक आपूर्ति की नीति अपनाई। साल 2014 में भारत जहां 27 देशों से कच्चा तेल खरीदता था, वहीं 2026 में यह संख्या बढ़कर 41 देश हो गई। भारत ने लीबिया, गैबॉन, इक्वेटोरियल गिनी और गुयाना जैसे नए देशों से तेल मंगाना शुरू किया। साथ ही अमेरिका और रूस से तेल के आयात को और गहरा किया। नए समुद्री रास्तों की खोज की गई, जिससे होर्मुज स्ट्रेट पर भारत की निर्भरता पहले के मुकाबले काफी कम हो गई।
3. घरेलू मोर्चे पर राहत और सरकारी खजाने पर बोझ
सरकार ने तुरंत डिमांड मैनेजमेंट (Demand-management) लागू किया और घरेलू स्तर पर तेल उत्पादन को तेजी से बढ़ाया। इसके अलावा, पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग (Ethanol Blending) के ऊंचे स्तर ने एक बड़ा सहारा दिया। इससे हर साल भारी मात्रा में कच्चे तेल के आयात की बचत होती है।
सबसे बड़ा फैसला यह था कि सरकार ने कीमतों का बोझ सीधे आम जनता पर नहीं डाला। सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने दो महीने से अधिक समय तक खुदरा कीमतों को स्थिर रखा। बाद में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में केवल 7 रुपये प्रति लीटर की मामूली बढ़ोतरी की। इस वजह से तेल कंपनियों को प्रति दिन करीब 650 करोड़ रुपये से लेकर 1,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ा। इस तिमाही में उन्हें कुल 1 लाख करोड़ से 1.2 लाख करोड़ रुपये का घाटा होने का अनुमान है।
अर्थव्यवस्था पर सीमित रहा असर
सरकार का दावा है कि पूरे संकट के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार 728 अरब डॉलर से अधिक के स्तर पर बना रहा। चालू खाते का घाटा नियंत्रण में रहा। साथ ही खुदरा महंगाई भी भारतीय रिजर्व बैंक की तय सीमा के भीतर रही। जीडीपी वृद्धि दर करीब 7 प्रतिशत के आसपास बनी रही।
दूसरे देशों से अलग रही भारत की रणनीति
रिपोर्ट के अनुसार, जहां कई देशों को पेट्रोल-डीजल की राशनिंग लागू करनी पड़ी। वहीं भारत ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया। श्रीलंका, पाकिस्तान, म्यांमार, बांग्लादेश और इथियोपिया जैसे देशों ने ईंधन संकट से निपटने के लिए अलग-अलग प्रतिबंध लगाए। जबकि जापान, दक्षिण कोरिया और कई यूरोपीय देशों ने अपने रणनीतिक भंडार का उपयोग किया। साथ ही उपभोक्ताओं को सब्सिडी दी।
भारत में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए न तो ईंधन की राशनिंग लागू की गई और न ही स्कूल बंद करने या वर्किंग डे घटाने जैसे कदम उठाए गए। केवल कमर्शियल एवं थोक एलपीजी तथा डीजल और एविएशन फ्यूल के निर्यात पर कुछ प्रतिबंध लगाए गए ताकि घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी जा सके।
अब सामान्य हो रही स्थिति
सरकार के अनुसार, होर्मुज फिर से खुलने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घटकर लगभग 74 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई हैं। भारत के पास फिलहाल कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी का लगभग दो महीने का भंडार उपलब्ध है। साथ ही रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (ISPRL) की क्षमता बढ़ाने का काम भी जारी है। इससे भविष्य में किसी भी वैश्विक आपूर्ति संकट से बेहतर तरीके से निपटा जा सके। हालांकि, खबर है कि अमेरिका-ईरान के बीच एक बार फिर से तनाव बढ़ने की आशंका है।
अमर सिंह
दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक देश के तौर पर,भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा तेल आयात करता है। इसलिए,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से उसे फायदा होता है। ब्रेंट क्रूड की कीमत में प्रति बैरल $1 की गिरावट से देश के सालाना आयात बिल में आम तौर पर लगभग 10,000 से 13,000 करोड़ रुपये की बचत होती है।
इसके साथ ही जियोपॉलिटिकल जोखिम कम हो रहे हैं। मिडिल ईस्ट में तनाव का घटना,ईरान-इजरायल युद्ध का समाधान,होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही का शुरू होना भी भारत के लिए फायदेमंद है। इससे देश को महंगाई कम होने,करंट अकाउंट घाटा घटने,रुपये को सहारा मिलने और RBI व सरकार के लिए पॉलिसी बनाने की बेहतर गुंजाइश मिलने जैसे फायदे होंगे।
इतिहास गवाह है कि तेल की कीमतों में भारी गिरावट (जैसे 2014-16 के दौरान) ने कुछ खास सेक्टर को काफी फायदा पहुंचाया है,भले ही ग्लोबल ग्रोथ की रफ्तार धीमी रही हो। मौजूदा हालात से फायदे में रहने वाले सेक्टर एक जैसे नहीं हैं। ये फायदे उन इंडस्ट्रीज़ तक सीमित हैं जहां फ्यूल या कच्चे तेल से जुड़े कच्चे माल की लागत का हिस्सा बहुत ज्यादा होता है,या जहां कम महंगाई और ज्यादा डिस्पोजेबल इनकम से बिक्री की मात्रा(वॉल्यूम)सीधे तौर पर बढ़ती है।
कच्चे तेल के भाव कम होने से एविएशन सेक्टर को सीधा और बड़ा फायदा मिलता है। भारतीय एयरलाइंस के ऑपरेटिंग खर्च में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF)का हिस्सा लगभग 40 प्रतिशत होता है। कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट से ATF की कीमतें तुरंत कम हो जाती हैं,जिससे इंडिगो,एयर इंडिया और स्पाइसजेट के ऑपरेटिंग मार्जिन में सीधे तौर पर बढ़ोतरी होती है।
तेल के भाव घटने से एयरलाइंस या तो अपने मार्जिन को सुरक्षित रख सकती हैं या कम किराए के जरिए डिमांड बढ़ा सकती हैं। ये दोनों ही बातें इस सेक्टर के लिए अच्छी हैं। कीमतों में उतार-चढ़ाव कम होने से हेजिंग की लागत भी कम हो जाती है। पहले के दौर में,तेल की कीमतों में बदलाव पर एयरलाइन शेयरों ने अच्छी तेजी दिखाई है। घरेलू हवाई ट्रैफिक में अभी भी मजबूत बढ़त बनी हुई है,इसलिए ईंधन की कम लागत इनके मुनाफे और क्षमता बढ़ाने में आने वाली एक बड़ी रुकावट को दूर कर सकती है।
इसके बाद डाउनस्ट्रीम ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs)और कच्चे तेल से जुड़े मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का नंबर आता है। इंडियन ऑयल,BPCL और HPCL जैसी कंपनियों को कच्चा तेल खरीदने की कम लागत का फायदा मिलता है। जब रिटेल फ्यूल की कीमतों में बदलाव में देरी होती है या टैक्स की वजह से कीमतों में आई गिरावट का कुछ हिस्सा एडजस्ट हो जाता है। ऐसे में इनका मार्केटिंग मार्जिन बढ़ जाता है। इनको इन्वेंट्री से होने वाला फायदा भी मिल सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में कमी से पेंट सेक्टर को फायदा होता है। इनके कच्चे माल की लागत (जैसे सॉल्वैंट्स,रेजिन और कुछ एडिटिव्स)का 35-50 प्रतिशत हिस्सा कच्चे तेल से जुड़ा होता है। ऐसे में कच्चे तेल में नरमी से एशियन पेंट्स,बर्जर पेंट्स और ऐसी दूसरी कंपनियों को अच्छे मार्जिन या कीमतें तय करने में लचीलेपन का फायदा मिलता है।
टायर बनाने वाली कंपनियों (अपोलो टायर्स,MRF,सिएट,JK टायर)को सिंथेटिक रबर और कार्बन ब्लैक की लागत में कमी से राहत मिल रही है। लुब्रिकेंट्स और कुछ खास केमिकल सेगमेंट को भी इसका फायदा हो रहा है। जब कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है तो इन कंपनियों के लिए लागत कम,मार्जिन ज्यादा वाली क्लासिक स्थितियां बनती हैं।
तेल की कीमतों में कमी से ऑटोमोबाइल और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को लागत और मांग,दोनों ही फ्रंट पर फायदा होता है। टू-व्हीलर और पैसेंजर गाड़ियों के मामले में,पेट्रोल और डीजल की कम कीमतें गाड़ियों की कुल ओनरशिप लागत (टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप)को बेहतर बनाती हैं। कीमत को लेकर संवेदनशील बाजार में यह खरीदारी का एक अहम कारण होता है। पहले भी देखा गया है कि जब ईंधन की कीमतें कम रही हैं,तब एंट्री-लेवल और मास-मार्केट सेगमेंट में रिटेल बिक्री में तेजी आई है।
इसके अलावा क्रूड की कीमतों में कमी से कमर्शियल गाड़ियों और बड़े लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम (ट्रकिंग,लास्ट-माइल डिलीवरी)को डीजल खर्च पर सीधे बचत होती है,जो वेरिएबल कॉस्ट का एक बड़ा हिस्सा होता है। इससे लॉजिस्टिक्स कंपनियों की ऑपरेटिंग लेवरेज बेहतर होती है और ज्यादा ब्याज दरों वाले माहौल में वॉल्यूम रिकवरी में मदद मिल सकती है। भारत में सामान की ढुलाई के लिए सड़क परिवहन ही मुख्य जरिया (70%) है,इसलिए सप्लाई चेन पर इसका मल्टीप्लायर असर काफी अहम है।
कच्चे तेल में नरमी से कंज्यूमर-फेसिंग सेक्टर और फाइनेंशियल सेक्टर को मैक्रो-लेवल पर दूसरे दौर के फायदे मिलते हैं। फ्यूल और ट्रांसपोर्ट की लागत कम होने से महंगाई कम होती है। इससे RBI को पॉलिसी रेट्स को मैनेज करने के लिए ज्यादा गुंजाइश मिलती है। इससे क्रेडिट ग्रोथ और एसेट क्वालिटी में सुधार होता है। जिन बैंकों और NBFCs का रिटेल और SME पोर्टफोलियो मज़बूत है,उन्हें कम महंगाई,स्थिर या कम रेट्स और बेहतर होते कॉर्पोरेट कैश फ्लो के अच्छे चक्र से फायदा होता है।
इसके अलावा ईंधन और ट्रांसपोर्ट पर खर्च कम होने से’कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी’और कुछ खास FMCG कैटेगरी में खर्च करने लायक आय(डिस्पोजेबल इनकम)में थोड़ी लेकिन वास्तविक बढ़ोतरी देखने को मिलती है। अगर कम महंगाई और बेहतर फिस्कल हेडरूम (ईंधन सब्सिडी का दबाव कम होने से)से बेहतर कैपेक्स(पूंजीगत व्यय)माहौल बनता है या ब्याज दरों पर निर्भर मांग में सुधार होता है,तो रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा हो सकता है।
भू-राजनीतिक जोखिम कम होने से इन प्रभावों का असर सिर्फ तेल के गणित से कहीं ज्यादा बढ़ जाता है। ग्लोबलअनिश्चितता कम होने से इक्विटी रिस्क प्रीमियम घटता है,FII निवेश को बढ़ावा मिलता है और कुल मिलाकर जोखिम लेने की क्षमता बेहतर होती है। ग्लोबल ट्रेड और कैपिटल एक्सपेंडिचर से जुड़े सेक्टर जैसे कुछ कैपिटल गुड्स,चुनिंदा मैन्युफैक्चरिंग और टूरिज़्म/हॉस्पिटैलिटी शेयरों के लिए अनुकूल माहौल बनता है। सप्लाई-चेन में स्थिरता से आयात पर निर्भर असेंबली इंडस्ट्रीज को भी मदद मिलता है।
सस्ती एनर्जी और शांत भू-राजनीतिक स्थिति का मेल वोलैटिलिटी के उन मुख्य कारणों में से एक को घटाता है,जिन्होंने समय-समय पर भारत की विकास गाथा में बाधा डाली है।
एक बार होने वाले इन्वेंट्री या मार्जिन से मिलने वाले फायदे और लगातार होने वाली कमाई में बढ़ोतरी के बीच फ़र्क करना जरूरी है। ग्राहकों को कितना फायदा होगा और कंपनियां कितना फायदा अपने पास रखेंगी,यह टैक्स पॉलिसी,कॉम्पिटिशन की तीव्रता और प्राइसिंग डिसिप्लिन पर निर्भर करेगा। फायदा पाने वाले सेक्टर की हर कंपनी को एक जैसा फायदा नहीं होगा। बैलेंस-शीट की मजबूती,प्राइसिंग पावर और ऑपरेशनल क्षमता के आधार पर बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियां ज्यादा बेहतर स्थिति में रहेंगी।
बुनियादी नज़रिए से देखें तो,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और कम होते जियोपॉलिटिकल तनाव का मेल भारत के लिए एक अच्छा संकेत है। इससे बाहरी फैक्टर का दबाव कम होता है,महंगाई पर लगाम लगती है और ज्यादा कर्ज वाले सेक्टर में कंपनियों का मुनाफा बढ़ता है। जब तेल की कीमतें गिरती हैं और तो बाजार अक्सर तुरंत सकारात्मक प्रतिक्रिया देता है।
इस स्थिति में निवेशकों को ऐसी कंपनियों पर फोकस करना चाहिए जिनका ऑपरेटिंग लेवरेज ज़्यादा हो (खासकर ईंधन या कच्चे तेल से जुड़े इनपुट के मामले में),जिनकी बैलेंस शीट मज़बूत हो (ताकि वे किसी भी तरह के उतार-चढ़ाव का सामना कर सकें) और जिनकी वॉल्यूम ग्रोथ भरोसेमंद हो। ऐसे माहौल में, एविएशन,OMCs,पेंट,टायर,ऑटोमोबाइल,लॉजिस्टिक्स और ब्याज दरों से प्रभावित होने वाले फाइनेंशियल सेक्टर में चुनिंदा निवेश करना,भारत की जारी स्ट्रक्चरल ग्रोथ स्टोरी में शामिल होने का एक भरोसेमंद तरीका है।
अमर सिंह एंजेल वन में रिसर्च के सीनियर VP हैं.
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टैक्स और पॉलिसी में कई बदलाव ने भारतीय स्टॉक मार्केट में निवेश को अधिक आकर्षक बना दिया है। यह दावा जेपी मॉर्गन की एक रिपोर्ट में किया गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो वर्षों में शेयर बाजार से सुस्त रिटर्न के बावजूद इन बदलावों के चलते घरेलू शेयर मार्केट में निवेश की रफ्तार यानी इनफ्लो के लगातार मजबूत बने रहने की संभावना है। जेपीमॉर्गन के मुताबिक लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स, डेट म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स पर टैक्स में हालिया बदलावों ने रिस्क-रिवॉर्ड रेश्यो को ऐसा बना दिया कि इक्विटी में निवेश अधिक आकर्षक हो गया।
पॉलिसी और टैक्स से इक्विटी मार्केट को मिल रहा सपोर्ट
जेपी मॉर्गन ने अपनी इक्विटी स्ट्रैटेजी रिपोर्ट में कहा कि पॉलिसी और टैक्स से इक्विटी मार्केट को सपोर्ट मिल रहा है। इक्विटी पर 12.5% LTCG टैक्स लगता है, और इंडेक्सेशन हटाने, इंश्योरेंस पॉलिसी से मिलने वाले पैसे पर टैक्स और डेट म्यूचुअल फंड के लिए स्लैब-रेट टैक्स से इक्विटी की चमक बढ़ी। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि इन स्ट्रक्चरल बदलाव और SIP के जरिए खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी से इक्विटी मार्केट में घरेलू निवेश लगातार मजबूत बना रहेगा।
जेपीमॉर्गन का कहना है कि वित्त वर्ष 2025 और वित्त वर्ष 2026 के दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय इक्विटी में अपना निवेश कम किया लेकिन फिर भी घरेलू निवेशक डटे रहे। इस दौरान बेंचमार्क इंडेक्स ने भले ही बहुत ज्यादा रिटर्न नहीं दिया, लेकिन रिटेल निवेशकों ने एसआईपी के जरिए निवेश जारी रखा। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक इससे बाजार में लॉन्ग टर्म बदलाव का संकेत मिल रहा है।
SIP से मिला सपोर्ट लेकिन इस बात को लेकर किया अलर्ट
जेपीमॉर्गन ने अपनी रिपोर्ट में एसआईपी के बढ़ते महत्व पर जोर दिया, जो इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश आने का मुख्य जरिया बन गए हैं। जेपीमॉर्गन के मुताबिक हर महीने एसआईपी में निवेश का लगातार बढ़ना दिखाता है कि घरों की बचत का अधिकतर हिस्सा अब फाइनेंशियल एसेट्स में जा रहा है और आने वाले वर्षों में भी इस रुझान के बने रहने की उम्मीद है। हालांकि जेपीमॉर्गन ने चेतावनी दी है कि अगर लंबे समय तक एसआईपी में मासिक निवेश ₹25 हजार करोड़ से कम रहता है, तो निवेशकों के नजरिए पर दबाव पड़ सकता है।
एक और रिस्क रेगुलेटरी बदलावों से जुड़ा है। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक इन बदलावों से डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग वॉल्यूम में 20% से अधिक की गिरावट आ सकती है और इसका असर मार्केट की एक्टिविटीज पर पड़ सकता है।
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कंप्रेसर, पंप और डीजल इंजन बनाने वाली स्वराज इंजन्स के शेयरहोल्डर्स को जल्द ही 110 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड मिलने वाला है। डिविडेंड वित्त वर्ष 2025-26 के लिए है। यह कंपनी की ओर से घोषित अब तक का सबसे ज्यादा डिविडेंड अमाउंट है। शेयरहोल्डर्स की पात्रता तय करने के लिए रिकॉर्ड डेट 3 जुलाई 2026 रखी गई है। इस तारीख तक जिन शेयरधारकों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में होंगे, वे डिविडेंड पाने के हकदार होंगे।
इस डिविडेंड पर कंपनी की 20 जुलाई को होने वाली सालाना आम बैठक में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। उसके बाद पेमेंट किया जाएगा। इससे पहले वित्त वर्ष 2025 के लिए महिंद्रा एंड महिंद्रा ग्रुप की कंपनी स्वराज इंजन्स ने अपने शेयरहोल्डर्स को 104.50 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड दिया था। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। स्वराज इंजन्स में महिंद्रा एंड महिंद्रा के पास 52.11 प्रतिशत शेयरहोल्डिंग है।
Swaraj Engines के शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर 3946.50 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 4800 करोड़ रुपये के करीब है। शेयर 2 साल में 30 प्रतिशत चढ़ा है। 3 साल में कीमत 90 प्रतिशत और 3 महीनों में 12 प्रतिशत उछली है। शेयर BSE 1000 इंडेक्स का हिस्सा है। BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 4,725.95 रुपये और एडजस्टेड लो 3,300 रुपये है।
Swaraj Engines की वित्तीय सेहत
कंपनी का जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 545.79 करोड़ रुपये रहा। इस बीच शुद्ध मुनाफा 54.56 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 2,007.13 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 196.31 करोड़ रुपये रहा।
HDFC Bank और ICICI Bank के Q1 नतीजे एक ही दिन होंगे जारी, जुलाई में इस तारीख को है बोर्ड मीटिंग
3 जुलाई महिंद्रा ग्रुप की इन कंपनियों के डिविडेंड की भी रिकॉर्ड डेट
3 जुलाई महिंद्रा एंड मंहिद्रा, टेक महिंद्रा, महिंद्रा लाइफ और एसएमएल महिंद्रा के डिविडेंड के लिए भी रिकॉर्ड डेट है। महिंद्रा एंड मंहिद्रा 33 रुपये, टेक महिंद्रा 36 रुपये, महिंद्रा लाइफ 3.50 रुपये और एसएमएल महिंद्रा 23.50 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड देने वाली है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Dividend Stocks: शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए नया हफ्ता काफी अहम रहने वाला है। 29 जून से 3 जुलाई के बीच 40 से ज्यादा कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड होने जा रहे हैं। इनमें Bajaj Holdings & Investment के स्पेशल डिविडेंड और Mahindra & Mahindra (M&M) के अब तक के सबसे बड़े डिविडेंड पर निवेशकों की खास नजर रहेगी।
इसके अलावा Shriram Finance, Bharat Forge, Union Bank of India, Bajaj Finserv, Bajaj Finance समेत कई कंपनियां भी इस हफ्ते डिविडेंड के लिए एक्स-डेट पर ट्रेड करेंगी। आइए जानते हैं किस दिन कौन-कौन से शेयर एक्स-डिविडेंड होंगे।
29 जून: Raymond और Kalpataru समेत ये कंपनियां
29 जून को Raymond Lifestyle का शेयर एक्स-डिविडेंड होगा। कंपनी ने 2 रुपये फेस वैल्यू वाले हर शेयर पर 1 रुपये का अंतिम डिविडेंड घोषित किया है।
Kalpataru Projects भी 29 जून को एक्स-डिविडेंड होगा। कंपनी ने 11 रुपये प्रति शेयर का अंतिम डिविडेंड घोषित किया है। 13 अगस्त या उससे पहले डिविडेंड का भुगतान किया जाएगा।
इसके अलावा Jyothy Labs भी 3.50 रुपये प्रति शेयर के अंतिम डिविडेंड के लिए एक्स-डेट पर ट्रेड करेगा। वहीं, Kansai Nerolac Paints ने 2.50 रुपये प्रति शेयर का अंतिम डिविडेंड घोषित किया है।
30 जून: Bajaj Group के तीन शेयरों पर रहेगी नजर
30 जून को Bajaj Group की तीन बड़ी कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड होंगे। इनमें Bajaj Finserv, Bajaj Holdings & Investment और Bajaj Finance शामिल हैं। इसी दिन Maharashtra Scooters भी 60 रुपये प्रति शेयर के अंतिम डिविडेंड के लिए एक्स-डिविडेंड होगा।
Bajaj Finserv ने 1.50 रुपये प्रति शेयर का अंतिम डिविडेंड घोषित किया है। Bajaj Finance ने 6 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड घोषित किया है।
Bajaj Holdings & Investment ने निवेशकों को बड़ा तोहफा दिया है। कंपनी ने 80 रुपये प्रति शेयर का अंतिम डिविडेंड और 50 रुपये प्रति शेयर का स्पेशल डिविडेंड घोषित किया है। यानी कुल 130 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड मिलेगा।
1 जुलाई: DCM Shriram और Grovy India
1 जुलाई को DCM Shriram Fine Chemicals का शेयर 0.40 रुपये प्रति शेयर के अंतिम डिविडेंड के लिए एक्स-डिविडेंड होगा।
वहीं, रियल एस्टेट कंपनी Grovy India भी 0.10 रुपये प्रति शेयर के अंतिम डिविडेंड के लिए एक्स-डेट पर ट्रेड करेगी।
2 जुलाई: Chembond Material और Lloyds Enterprises
2 जुलाई को Chembond Material Technologies का शेयर 2 रुपये प्रति शेयर के अंतिम डिविडेंड के लिए एक्स-डिविडेंड होगा।
इसके अलावा Lloyds Enterprises भी 0.05 रुपये प्रति शेयर के अंतिम डिविडेंड के लिए एक्स-डेट पर रहेगा।
3 जुलाई: M&M, Bharat Forge, Shriram Finance समेत 33 कंपनियां
3 जुलाई इस हफ्ते का सबसे व्यस्त दिन रहने वाला है। इस दिन 33 कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड होंगे।
- Mahindra & Mahindra ने 33 रुपये प्रति शेयर का अंतिम डिविडेंड घोषित किया है। यह कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड है।
- Bharat Forge निवेशकों को 6.50 रुपये प्रति शेयर का अंतिम डिविडेंड देगी।
- Shriram Finance ने 6 रुपये प्रति शेयर का अंतिम डिविडेंड घोषित किया है।
- Union Bank of India ने 5 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड तय किया है।
- Thermax ने 14 रुपये प्रति शेयर का अंतिम डिविडेंड और 6 रुपये प्रति शेयर का स्पेशल डिविडेंड घोषित किया है।
- Akums Drugs & Pharmaceuticals ने 1 रुपये प्रति शेयर का अंतिम डिविडेंड और 2 रुपये प्रति शेयर का स्पेशल डिविडेंड घोषित किया है।
- Biocon अपने निवेशकों को 0.50 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देगी।
इन सभी कंपनियों ने 3 जुलाई को रिकॉर्ड डेट तय की है। यानी इस तारीख तक जिन निवेशकों का नाम कंपनी के रिकॉर्ड में होगा, वही डिविडेंड पाने के पात्र होंगे।
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Market View : गुरुवार को पिछले कारोबारी सत्र में आखिरी घंटे में बाजार में ऊपरी स्तर से मुनाफावसूली आई थी। सेंसेक्स-निफ्टी ऊपरी स्तर से फिसलकर बंद हुए थे। हालांकि सेंसेक्स 109 प्वाइंट चढ़कर 77,100 पर बंद हुआ था। वहीं, निफ्टी 34 प्वाइंट चढ़कर 24,056 पर बंद हुआ था। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए थे। ऑटो और FMCG शेयरों में खरीदारी आई थी। मेटल,PSE और तेल-गैस इंडेक्स गिरावट पर बंद हुए थे। IT और एनर्जी शेयरों में दबाव देखने को मिला था। बैंक निफ्टी 27 प्वाइंट चढ़कर 58,177 पर बंद हुआ था। मिडकैप 400 प्वाइंट गिरकर 61,796 पर बंद हुआ था।
निफ्टी के 50 में से 26 शेयरों में बिकवाली देखने को मिली थी। सेंसेक्स के 30 में से 19 शेयरों में बिकवाली रही थी। बैंक निफ्टी के 14 में से 8 शेयरों में गिरावट आई थी। डॉलर के मुकाबले रुपया 27 पैसे मजबूत होकर 94.40/$ पर बंद हुआ था।
बंधन AMC में VP-इक्विटीज,प्रतीक पोद्दार ने बाजार पर बात करते हुए कहा कि गिरते बाजार में वोलैटिलिटी को खतरा नहीं,मौका मानें। यह डेट से पैसा निकालकर इक्विटी निवेश बढ़ाने का मौका है। गिरावट में अच्छे स्टॉक्स सस्ते दाम पर मिलते हैं। मिड और स्मॉलकैप में भी अवसर मिलने पर एग्रेसिव खरीदारी की जा सकती है। ऑटोमैटिक रीबैलेंसिंग से रिस्क कंट्रोल में रहता है। इस समय पैनिक सेलिंग नहीं,डिसिप्लिन्ड एलोकेशन पर जोर होना चाहिए।
डेट पोर्टफोलियो की रणनीति
प्रतीक पोद्दार ने बताया कि उनके फंड का डेट हिस्से का लगभग पूरा पैसा निवेशित है। कैश होल्डिंग बहुत सीमित। सिर्फ हाई क्वालिटी डेट इंस्ट्रूमेंट्स पर फोकस है। AAA रेटेड बॉन्ड्स में बड़ा एक्सपोजर है। इसका ड्यूरेशन करीब 4 साल के आसपास है। बाजार गिरने पर डेट से पैसा निकालकर इक्विटी में शिफ्ट करने पर फोकस है।
रीबैलेंसिंग की स्ट्रैटेजी
रीबैलेंसिंग का सबसे बड़ा आधार है वैल्यूएशन। जहां रिस्क-रिवॉर्ड बेहतर दिखता है,वहां निवेश बढ़ाते हैं। सेक्टर और स्टॉक दोनों का लगातार रिव्यू करते रहना चाहिए। महंगे पॉकेट्स से निकलकर सस्ते अवसरों की तलाश की सलाह होगी।
बाजार की गिरावट में डेट का रोल?
डेट का अहम काम वोलैटिलिटी कम करना है। डेट रिटर्न्स को ज्यादा स्थिर बनाए रखता है। यह पश्चिम एशिया संकट और टैरिफ वॉर जैसे इवेंट्स में सुरक्षा कवच का काम करता है। बाजार गिरते ही इक्विटी वेट घटता है और डेट वेट बढ़ता है।
बंधन एग्रेसिव हाइब्रिड फंड
बंधन एग्रेसिव हाइब्रिड फंड (Bandhan Aggressive Hybrid Fund) के बारे में बताते हुए प्रतीक पोद्दार ने कहा कि यह फंड सिर्फ हाई-रिस्क निवेशकों के लिए नहीं है। मॉडरेट रिस्क प्रोफाइल वाले भी इसे चुन सकते हैं। इसमें इक्विटी-डेट का बैलेंस कॉम्बिनेशन है। इसमें सिर्फ रिटर्न नहीं,रिस्क मैनेजमेंट पर भी फोकस है। निवेशकों को बार-बार रीबैलेंसिंग की जरूरत नहीं होती। यह 3-5 साल के नजरिया के लिए बेहतर है।
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वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के लिए कंपनियों के नतीजों का सीजन जुलाई से शुरू होने वाला है। प्राइवेट सेक्टर के HDFC Bank और ICICI Bank की बात करें तो दोनों के अप्रैल-जून 2026 तिमाही के नतीजे एक ही दिन जारी होने वाले हैं। दोनों बैंकों के बोर्ड की मीटिंग 18 जुलाई, 2026 को होगी। इस बारे में शेयर बाजारों को सूचना दे दी गई है।
HDFC Bank का जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 9 प्रतिशत बढ़कर 19221.05 करोड़ रुपये रहा। कुल इनकम लगभग फ्लैट रहकर 89808.90 करोड़ रुपये रही। शुद्ध ब्याज आय 3.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 33,281.5 करोड़ रुपये हो गई। पूरे वित्त वर्ष 2026 में बैंक की कुल स्टैंडअलोन इनकम 370054.65 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 74671.29 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
इसी तरह ICICI Bank का मार्च 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर लगभग 8.5 प्रतिशत बढ़कर 13701.68 करोड़ रुपये हो गया। कुल इनकम एक साल पहले से लगभग 2 प्रतिशत बढ़कर 50584.38 करोड़ रुपये हो गई। शुद्ध ब्याज आय 8.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 22,979.2 करोड़ रुपये रही। शुद्ध ब्याज मार्जिन 4.32 प्रतिशत रहा। वित्त वर्ष 2026 के दौरान बैंक की कुल स्टैंडअलोन इनकम 200,703.68 करोड़ रुपये रही। शुद्ध मुनाफा 50146.64 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
दोनों बेंकों की एसेट क्वालिटी अभी कैसी
मार्च 2026 तिमाही में HDFC Bank का ग्रॉस NPA (Non-Performing Assets) रेशियो 1.15 प्रतिशत रहा। एक साल पहले यह 1.33 प्रतिशत था। नेट NPA रेशियो भी सालाना आधार पर कम होकर 0.38 प्रतिशत रहा। मार्च 2025 तिमाही में यह 0.43 प्रतिशत था। मार्च 2026 तिमाही में ICICI Bank की एसेट क्वालिटी में भी सुधार देखा गया। ग्रॉस NPA रेशियो 1.40 प्रतिशत रहा। एक साल पहले यह 1.67 प्रतिशत था। नेट NPA रेशियो भी सालाना आधार पर कम होकर 0.33 प्रतिशत पर आ गया। मार्च 2025 तिमाही में यह 0.39 प्रतिशत था।
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HDFC Bank और ICICI Bank के शेयर की चाल
ICICI Bank के शेयर की कीमत अभी BSE पर 1387.90 रुपये है। शेयर 3 महीनों में 10 प्रतिशत चढ़ा है। बैंक का मार्केट कैप 10 लाख करोड़ रुपये के करीब है। HDFC Bank की बात करें तो शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर 796.05 रुपये है। बैंक का मार्केट कैप 12.25 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर 6 महीनों में 20 प्रतिशत नीचे आया है। ये दोनों बैंक सेंसेक्स की टॉप 10 कंपनियों में शामिल हैं। मोस्ट वैल्यूड फर्म्स में HDFC Bank का नंबर दूसरा, जबकि ICICI Bank का चौथा है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Nifty Outlook for June 29: घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी एक कारोबारी दिन पहले गुरुवार 25 जून को लगातार दूसरे दिन कारोबारी दिन ग्रीन जोन में बंद हुआ। हालांकि खास बात ये रही कि दिन के दूसरे हाफ में इसने काफी बढ़त गंवा दी। शुक्रवार को मोहर्रम के चलते मार्केट बंद था तो तीन दिनों की लगातार छुट्टियों से पहले और जून तिमाही के आखिरी कारोबारी हफ्ते से पहले मार्केट पर मुनाफावसूली का दबाव दिखा। इसके बावजूद निफ्टी दिन के आखिरी में हल्की बढ़त के साथ बंद होने में सफल रहा और साथ ही यह लगातार तीसरे हफ्ते भी हरा रहा। गुरुवार को इंट्रा-डे में निफ्टी 239.95 प्वाइंट्स चढ़कर 24,261.60 तक पहुंचा था जिससे यह 222.60 प्वाइंट्स फिसलकर 24,039.00 तक आ गया था और दिन के आखिरी में यह महज 34.35 प्वाइंट्स यानी 0.14% की तेजी के साथ 24,056.00 पर बंद हुआ था।
Nifty को लेकर क्या कहना है एक्सपर्ट्स का?
बाजार के जानकारों का मानना है कि जब तक निफ्टी 24 हजार के ऊपर टिका रहता है, मार्केट में रौनक बनी रहेगी। जियो-पॉलिटिकल सेंटिंमेंट में सुधार, कच्चे तेल की कीमतों में कमी और रुपये की मजबूती से बाजार को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। साथ ही मार्केट की नजर यूरोजोन के महंगाई के आंकड़े, चीन के मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई और ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में हो रही हलचल पर नजर रहेगी।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के नंदीश शाह का कहना है कि निफ्टी को क्लोजिंग के आधार पर पिछले स्विंग हाई 24,190 के पास कड़ा रेजिस्टेंस झेलना पड़ रहा है। पिछले कारोबारी दिन का इंट्रा-डे हाई 24,261 अब तात्कालिक रेजिस्टेंस बन गया है, और अगर इस लेवल के पार जाकर निफ्टी
टिका रहता है तो यह 24,440 के पास 200-दिन के DEMA की ओर बढ़ सकता है। नीचे की तरफ 23,789 एक अहम सपोर्ट लेवल बना हुआ है।
एंजल वन के ओशो कृष्णन के मुताबिक निफ्टी अभी भी कंसोलिडेशन फेज में है, जिसमें 24,140-24,170 जोन में 100-DEMA तात्कालिक बैरियर का काम कर रहा है। एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर यह निफ्टी इस रेंज के ऊपर निर्णायक रूप से ब्रेकआउट करता है, तो यह 24,500-24,600 जोन की तरफ बढ़ सकता है, जबकि 23,800 के आसपास सपोर्ट मिलने की उम्मीद है, और उसके बाद 23,645 तक बुलिश गैप एरिया है।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के नागराज शेट्टी का मानना है कि अगर निफ्टी 24,200 के अहम रेजिस्टेंस लेवल के ऊपर नहीं टिक पाता है तो इसमें कंसोलिडेशन जारी रह सकता है या मामूली गिरावट आ सकती है। नागराज शेट्टी को 23,800 पर तात्कालिक सपोर्ट की उम्मीद है, जबकि 24,200 के ऊपर टिकाऊ बढ़त से और तेजी आ सकती है।
एलकेपी सिक्योरिटीज के रूपक डे ने कहा कि गुरुवार को बीएसई के F&O एक्सपायरी के दिन मार्केट में काफी उतार-चढ़ाव रहा, लेकिन इसने 50-दिन के EMA (एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज) के ऊपर बने रहकर अपना पॉजिटिव स्ट्रक्चर बनाए रखा। रूपक को उम्मीद है कि जब तक निफ्टी 23,800 के ऊपर बना रहेगा, तब तक तेजी का रुझान बना रहेगा और इसके 24,500 की तरफ बढ़ने की संभावना है।
एसबीआई सिक्योरिटीज के सुदीप शाह के मुताबिक निफ्टी को 24,200-24,250 के दायरे में तात्कालिक रेजिस्टेंस झेलना पड़ सकरता है। इस दायरे के ऊपर लगातार बने रहने यानी ब्रेकआउट से इंडेक्स पहले 24,400 और फिर 24,600 की तरफ बढ़ सकता है। सुदीप के मुताबिक नीचे की तरफ निफ्टी को 23,900-23,850 के दायरे में सपोर्ट मिलता दिख रहा है।
KEC International के शेयर 29 जून को बनेंगे रॉकेट! Power Grid ने हटाया बड़ा बैन
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