Stock in Focus: आईटी कंपनी HCLTech की Nokia और Neste से AI डील, शेयरों पर रहेगी नजर

Stock in Focus: आईटी कंपनी HCLTech ने AI बेस्ड सर्विसेज को मजबूत करने के लिए दो बड़े समझौतों का ऐलान किया है। कंपनी ने टेलीकॉम इक्विपमेंट बनाने वाली Nokia और फिनलैंड की रिन्यूएबल फ्यूल कंपनी Neste के साथ साझेदारी की है। इन समझौतों का फोकस AI, नेटवर्क ऑटोमेशन और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने पर रहेगा।

Nokia के साथ बनाएगी स्मार्ट नेटवर्क

HCLTech ने Nokia के साथ अपनी मौजूदा साझेदारी का विस्तार किया है। दोनों कंपनियां AI बेस्ड नेटवर्क ऑटोमेशन को बढ़ावा देंगी। इसका मकसद टेलीकॉम कंपनियों को ज्यादा स्मार्ट और ऑटोमेटेड नेटवर्क उपलब्ध कराना है।

इस समझौते के तहत HCLTech, Nokia के SMO Marketplace में चार AI बेस्ड rApps जोड़ेगी। इनमें Anomaly Detector नेटवर्क की गड़बड़ियां पकड़ने का काम करेगा। Energy Optimizer कम ट्रैफिक के दौरान बिजली की खपत घटाने में मदद करेगा।

mMIMO Interference Mitigation सिग्नल क्वालिटी बेहतर करेगा। वहीं Traffic Balancer नेटवर्क पर दबाव और लेटेंसी कम करने का काम करेगा। दोनों कंपनियां मिलकर 5G और भविष्य की नेटवर्क तकनीकों के लिए नए rApps भी विकसित करेंगी।

HCLTech के कॉर्पोरेट वाइस प्रेसिडेंट हरी सदरहल्ली ने कहा कि यह साझेदारी टेलीकॉम ऑपरेटर्स को AI बेस्ड नेटवर्क ऑटोमेशन अपनाने में मदद करेगी। साथ ही वे सेल्फ-ड्राइविंग नेटवर्क्स की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेंगे।

Neste के साथ बढ़ाएगी ऑपरेशनल एफिशिएंसी

HCLTech को फिनलैंड की रिन्यूएबल फ्यूल कंपनी Neste ने अपने प्रदर्शन सुधार कार्यक्रम के लिए रणनीतिक साझेदार चुना है। इस समझौते के तहत HCLTech, Neste के आईटी सिस्टम को सरल बनाने पर काम करेगी। कंपनी अलग-अलग आईटी सेवाओं को कंसॉलिडेट करेगी। साथ ही ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने और तकनीकी ढांचा मजबूत करने में मदद करेगी।

Neste की CFO ईवा सिपिला ने कहा कि यह साझेदारी कंपनी की आईटी क्षमताओं को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी। इससे प्रदर्शन सुधार कार्यक्रम को भी गति मिलेगी। HCLTech के चीफ ग्रोथ ऑफिसर अजय बहल ने कहा कि यह समझौता Neste को ज्यादा कुशल और मजबूत तकनीकी ढांचा तैयार करने में मदद करेगा।

HCLTech का शेयर मंगलवार को 0.41% बढ़कर ₹1,114 पर बंद हुआ। हालांकि, साल 2026 में अब तक शेयर करीब 32% टूट चुका है।

ED ने राजेश एक्सपोर्ट्स के 9 ठिकानों की तलाशी ली! 5 चौंकाने वाली बातें मिली, ₹3000 करोड़ के लेन-देन पर भी सवाल

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

S&P का भारत के बारे में बड़ा बयान, कहा-भले ही यह AI की रेस जीत नहीं सकता, फिर भी इसकी ग्रोथ काफी तेज है

एसएंडपी ने इंडिया के बारे में बड़ी बात कही है। उसने कहा है कि इंडिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बूम के बेनेफिशियरी के रूप में अभी नहीं उभरा है। लेकिन, इसका इकोनॉमिक ग्रोथ आउटलुक स्ट्रॉन्ग घरेलू मांग की वजह से ठोस बना हुआ है। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स में चीफ एपीएसी इकोनॉमिस्ट लुइस कुइज्स ने यह बात कही है।

सेमीकंडक्टर और चिप बनाने वाले देशों में जा रहा निवेश

उन्होंने कहा कि अभी एआई-से जुड़ा ज्यादातर निवश उन इकोनॉमीज में जा रहा है, जिनकी सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और चिप सप्लाई चेन में सीधी भूमिका है। इनमें ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देश हैं, जिनकी इकोनॉमी को लेकर बीते कुछ महीनों में सबसे ज्यादा अपग्रेड देखने को मिला है।

एआई से जुड़ी इकोनॉमी की ग्रोथ में ज्यादा अपग्रेड दिखा है

उन्होंने कहा कि जब हम पिछले डेढ़ साल के अपने अनुमान पर नजर डालते हैं तो हम पाते हैं कि इनमें ऐसी इकोनॉमीज हैं जो इस पूरी एआई स्टोरी से जुड़ी हैं। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन से जुड़ी दूसरी इकोनॉमीज में भी इसी तरह का ट्रेंड देख रही है। इनमें मलेशिया, चीन और जापान शामिल हैं।

भारत को मजबूत घरेलू मांग का मिल रहा बड़ा फायदा

जो देश चिप मैन्युफैक्चरिंग में ज्यादा एक्विट नहीं हैं, उनमें भी ग्रोथ दिख रही है, लेकिन यह ग्रोथ उतनी नहीं है जितनी चिप बनाने वाले देशों की है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इंडिया पिछड़ रहा है। इंडियन इकोनॉमी को उसके मजबूत घरेलू मांग का फायदा मिल रहा है। यह भारत की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है।

एसएंडपी ने इंडिया की ग्रोथ 6.6 फीसदी रहने की उम्मीद जताई

एसएंडपी को इंडिया की ग्रोथ करीब 6.6 फीसदी रहने की उम्मीद है। यह ग्रोथ के आरबीआई के अनुमान के करीब है। हालांकि, कुइज्स का मानना है कि एआई बूम अपेक्षाकृत कमजोर बुनियाद पर खड़ा है। एआई को लेकर ज्यादा उम्मीद का आधार कुछ मुट्ठीभर अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों का बड़ा निवेश है। ये कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर्स में बड़ा निवेश कर रही हैं।

एआई का फायदा उम्मीद के मुताबिक नहीं मिला तो कई देशों को होगी दिक्कत

उन्होंने कहा कि अगर इन कंपनियों को एआई पर अपने इनवेस्टमेंट का फायदा मिलने में दिक्कत आती है तो इसका असर पूरे सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन पर दिखेगा। इसका असर उनक इकोनॉमीज पर भी दिखेगा जिन्हें एआई ट्रेड से फायदा हुआ है। इधर, इंडिया की ग्रोथ को बढ़ावा देने वाले फैक्टर्स काफी डायवर्सिफायड हैं। घरेलू खपत से इकोनॉमी को लगातार सपोर्ट मिल रहा है।

ED ने राजेश एक्सपोर्ट्स के 9 ठिकानों की तलाशी ली! 5 चौंकाने वाली बातें मिली, ₹3000 करोड़ के लेन-देन पर भी सवाल

Rajesh Exports ED Raid: गोल्ड रिफाइनिंग और ज्वेलरी बनाने वाली कंपनी Rajesh Exports Ltd (REL) की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत बेंगलुरु और मुंबई में कंपनी और उससे जुड़े लोगों के 9 ठिकानों पर छापेमारी की है।

यह कार्रवाई 23 जून से शुरू हुई थी। जांच के दौरान ED को कई ऐसी बातें मिली हैं, जिन पर अब विस्तार से जांच की जा रही है।

1. विदेशी लेन-देन के दस्तावेज नहीं मिले

ED का कहना है कि कंपनी अपने कई विदेशी लेन-देन से जुड़े जरूरी दस्तावेज नहीं दिखा पाई। इनमें आयात-निर्यात, विदेशों में किए गए निवेश और विदेशी कंपनियों से मिलने या उन्हें दिए जाने वाले पैसों का रिकॉर्ड शामिल है।

एजेंसी के मुताबिक, दस्तावेज नहीं होने की वजह से यह पता लगाना मुश्किल हो रहा है कि ये लेन-देन वास्तव में हुए भी थे या नहीं। ED ने यह भी कहा कि कंपनी अफ्रीका की खदानों में किए गए कथित ₹1,035 करोड़ के निवेश से जुड़े रिकॉर्ड भी नहीं दिखा पाई।

2. ₹3,000 करोड़ के लेन-देन पर सवाल

जांच में यह भी सामने आया है कि राजेश एक्सपोर्ट्स UAE और कुछ दूसरे देशों की कंपनियों के साथ अपने देनदार और लेनदार खातों को आपस में एडजस्ट कर रही थी। ED के मुताबिक, ऐसे करीब ₹3,000 करोड़ के लेन-देन मिले हैं।

एजेंसी का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था से यह समझना मुश्किल हो जाता है कि पैसा आखिर कहां से आया और कहां गया।

3. फैक्ट्री स्टॉक में 40% का अंतर

छापेमारी के दौरान ED ने फैक्ट्री में मौजूद माल का भी मिलान किया। जांच में पाया गया कि कंपनी के रिकॉर्ड में जितना स्टॉक दिखाया गया था, वास्तविक स्टॉक उससे करीब 40% कम या ज्यादा था।

यानी कागजों और जमीन पर मौजूद माल के बीच बड़ा अंतर मिला है। अब एजेंसी इसकी वजह तलाश रही है।

4. अधिकारियों की सैलरी बेहद कम

ED ने कंपनी के सीनियर एग्जीक्यूटिव्स की सैलरी पर भी सवाल उठाए हैं। एजेंसी के मुताबिक, कंपनी के CFO को साल 2020 के बाद से कोई वेतन नहीं मिला।

वहीं कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर को सिर्फ करीब ₹17,000 महीने की सैलरी दी जा रही थी। ED के मुताबिक, यह आंकड़ा हैरान करने वाला है, क्योंकि कॉर्पोरेट जगत में ऊंचे पदों पर इतनी कम सैलरी देने का चलन नहीं है। खासकर, अगर कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू करीब ₹7.7 लाख करोड़ बताया गया होय़

5. शेयरों में हेरफेर का भी शक

ED ने कुछ संदिग्ध ब्लॉक डील्स और शेयरों में संभावित हेरफेर की ओर भी इशारा किया है।

एजेंसी के मुताबिक, इन सौदों में शामिल कुछ लोगों के नाम इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) की लीक रिपोर्ट्स में भी सामने आए हैं। जांच एजेंसी को शक है कि NRI बेनामी खातों का इस्तेमाल कर शेयरों में हेरफेर की गई और ₹600 करोड़ से ज्यादा रकम भारत से बाहर भेजी गई।

SEBI की रिपोर्ट के बाद बढ़ीं मुश्किलें

Rajesh Exports की मुश्किलें तब बढ़ गईं, जब हाल ही में SEBI ने कंपनी पर बड़ा आरोप लगाया। रेगुलेटर का दावा है कि वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच कंपनी ने अपने रेवेन्यू को कथित तौर पर ₹15.15 लाख करोड़ तक बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया।

SEBI के मुताबिक, कंपनी ने अपनी विदेशी सहायक कंपनियों से जुड़ी आय को जिस तरह पेश किया, वह उपलब्ध वित्तीय रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती। खासकर स्विट्जरलैंड की Valcambi SA का रेवेन्यू। रेगुलेटर को शक है कि इससे निवेशकों के सामने कंपनी के कारोबार का आकार असलियत से कहीं बड़ा दिखाया गया।

कंपनी ने आरोपों को किया है खारिज

राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन राजेश मेहता ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि अगर कोई आंकड़ों में हेरफेर करना चाहे, तो वह मुनाफा बढ़ाकर दिखाएगा। सिर्फ रेवेन्यू बढ़ाकर दिखाने से कोई खास फायदा नहीं होता।

इस बीच जांच की खबरों का असर शेयर पर भी दिखा। बुधवार को Rajesh Exports का शेयर करीब 5% गिरकर ₹102.85 पर बंद हुआ। इससे पहले स्टॉक कुछ ही कारोबारी सत्र में करीब 30% तक बढ़ गया था। फिलहाल ED और SEBI दोनों की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं।

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Gold Price Outlook: अगले 6 महीने में 36% बढ़ेगा सोने का भाव! UBS ने गिरावट के बाद भी जताया भरोसा

Gold Price Outlook: जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। हालांकि वैश्विक ब्रोकरेज UBS का मानना है कि यह कमजोरी अस्थायी है। कंपनी का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। अभी गोल्ड का प्राइस 4046 डॉलर के करीब है। यानी UBS के मुताबिक, मौजूदा स्तर से सोने में करीब 36% की तेजी देखने को मिल सकती है।

UBS का कहना है कि मजबूत निवेश मांग, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी और आगे चलकर डॉलर में संभावित कमजोरी सोने को सहारा दे सकती है।

जनवरी के रिकॉर्ड हाई से 28% नीचे

UBS की रिपोर्ट के मुताबिक, जून की शुरुआत तक सोना जनवरी में बने अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 28% नीचे आ चुका था। ब्रोकरेज का कहना है कि हाल के महीनों में ऊंची ऊर्जा कीमतों, मजबूत अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की आशंकाओं ने सोने पर दबाव डाला है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ऊर्जा कीमतें बढ़ीं, जिससे डॉलर मजबूत हुआ और अमेरिकी रियल यील्ड में भी तेजी आई। इन दोनों वजहों ने सोने की चमक कुछ समय के लिए फीकी कर दी।

मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दरों का असर

UBS का कहना है कि जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो सोने जैसे ऐसे निवेश कम आकर्षक हो जाते हैं, जिन पर कोई ब्याज नहीं मिलता। वहीं डॉलर मजबूत होने से दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा पड़ता है, जिससे वैश्विक मांग पर असर पड़ता है।

पिछले कुछ समय से बाजार में यही स्थिति देखने को मिली है। इसी वजह से सोना दबाव में रहा और इसकी कीमतों में गिरावट आई।

फिर भी सोने पर भरोसा क्यों?

UBS का कहना है कि सोने की तेजी के पीछे मौजूद बड़े कारण अब भी बरकरार हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, साल की पहली तिमाही में सोने की मांग मजबूत रही। इसके अलावा दुनिया भर के केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं।

ब्रोकरेज का मानना है कि बढ़ता वैश्विक कर्ज, अमेरिका का लगातार बढ़ता राजकोषीय घाटा और केंद्रीय बैंकों की रिजर्व डायवर्सिफिकेशन रणनीति आने वाले वर्षों में सोने को सहारा देती रहेगी।

भारत में कितना बढ़ेगा भाव

UBS का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। अभी सोना करीब 4,046 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। यानी यहां से लगभग 36% की तेजी की संभावना जताई गई है।

भारत में सोने का भाव फिलहाल करीब ₹1.46 लाख प्रति 10 ग्राम है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में इतनी ही तेजी आती है, तो घरेलू कीमतें ₹2 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच सकती हैं। हालांकि रुपये-डॉलर की चाल, आयात शुल्क और घरेलू मांग भी कीमतों को प्रभावित करेंगे।

आगे क्या रहेगा नजरिया?

UBS को उम्मीद है कि साल के आगे चलकर अमेरिकी डॉलर में कमजोरी आ सकती है। अगर ऐसा होता है तो सोने की कीमतों को नया सहारा मिल सकता है। इसके अलावा राजनीतिक अनिश्चितता और वैश्विक आर्थिक जोखिम भी निवेशकों को सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर खींच सकते हैं।

ब्रोकरेज का कहना है कि हालिया गिरावट लंबी अवधि की तस्वीर को नहीं बदलती। यह सिर्फ थोड़े वक्त के दबाव का असर है। UBS अब भी निवेशकों को पोर्टफोलियो में सोने को जोखिम कम करने वाले निवेश के रूप में रखने की सलाह देता है।

Gold Price Today: दो हफ्ते के निचले स्तर पर सोना, एक्सपर्ट्स ने बताया अब क्या करें निवेशक?

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Trent Share Price : ट्रेंट का 10 गुना ग्रोथ का लक्ष्य बरकरार, AGM में पॉजिटिव ग्रोथ कमेंट्री के दम पर जोर से दौड़ा शेयर

Trent Share Price : ट्रेंट के शेयर में आज 4 फीसदी की तेजी है। दरअसल ट्रेंट के AGM में नोएल टाटा की पॉजिटिव कमेंट्री से शेयर में रौनक है। नोएल टाटा ने ट्रेंट की ग्रोथ के लिए खास रोडमैप रखा है। यह नोएल टाटा की आखिरी ट्रेंट AGM थी। आज पेश कंपनी के आगे के रोडमैप में कारोबार में 10 गुना ग्रोथ का लक्ष्य बरकरार रखा गया है। इसमें ये भी कहा गया है कि सिर्फ वेस्टसाइड ( Westside) और जूडियो (Zudio) के भरोसे लक्ष्य हासिल नहीं होगा। हर साल 50 वेस्टसाइड और 200-250 जूडियो और 25-40 स्टार स्टोर बढ़ाने का लक्ष्य भी रखा गया है।

लॉन्ग टर्म लक्ष्य के तहत जूडियो के 5000 स्टोर और स्टॉर को भी इसी स्केल तक पहुंचने का इरादा है। इस रोडमैप में ये भी कहा गया है कि बर्न्ट टोस्ट (Burnt Toast) और Samoh में 2-3 साल और इनक्यूबेशन की जरूरत है। फैशन LFL ग्रोथ में नरमी है लेकिन लो-डबल डिजिट ग्रोथ का लक्ष्य रखा गया है। Trent का मार्केट शेयर सिर्फ 2% है। लेकिन इसके लिए ग्रोथ के बड़े मौके मौजूद हैं। कंपनी ने 2500 करोड़ रुपए जुटाए हैं। इसे वेयरहाउस,IT, AI और स्टोर विस्तार पर खर्च किया जाएगा। स्टार बिजनेस पर कंपनी का भरोसा कायम है। ग्रोसरी रिटेल में मजबूत संभावनाएं दिख रही हैं। वेस्टसाइड ई-कॉमर्स रेवेन्यू 300 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।

बताते चलें कि 69 साल के नोएल टाटा ने यह भी कहा की है कि वे ट्रेंट लिमिटेड के चेयरमैन का पद छोड़ने जा रहे। इसके साथ ही,टाटा ग्रुप की मुख्य रिटेल कंपनी के हेड के तौर पर उनका लगभग 30 साल का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। टाटा ग्रुप की गवर्नेंस पॉलिसी के मुताबिक एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर की रिटायरमेंट की उम्र 65 साल होती है,जबकि नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर 70 साल की उम्र में रिटायर होते हैं। नोएल टाटा की चेयरमैनशिप में FY26 में ट्रेंट का रेवेन्यू बढ़कर 19,701 करोड़ रुपये हो गया।

कंपनी की 2023 की शेयरहोल्डर्स मीटिंग में ट्रेंट को दस गुना बड़ा बनाने का रखा गया था। तब से कंपनी की रेवेन्यू और मुनाफे की ग्रोथ रेट 2.5 गुना से ज्यादा बढ़ गई है। इस पर नोएल टाटा ने कहा “मुझे पूरा भरोसा है कि हम जल्द ही उस मुकाम तक पहुंच जाएंगे जिसका मैंने ज़िक्र किया था।”

ट्रेंट पर ब्रोकरेज की राय

ट्रेंट पर ब्रोकरेज का नजरिया भी बुलिश है। HSBC ने इस स्टॉक को Buy रेटिंग देते हुए 3460 रुपए प्रति शेयर का टारगेट दिया है। वहीं, मोतीलाल ओसवाल ने इसे Buy रेटिंग देते हुए 3500 रुपए प्रति शेयर का टारगेट दिया है। मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि कुछ स्टोर्स में सेल्स घटी है। LFL में रिकवरी दिख रही है। आगे डबल डिजिट LFL ग्रोथ संभव है। आगे जाकर मार्जिन में उछाल LFL ग्रोथ पर निर्भर करेगी।

ट्रेंट की चाल पर एक नजर

एनएसई पर आज यह शेयर 104.10 रुपए यानी 3.31 फीसदी की तेजी लेकर 3247 रुपए पर बंद हुआ है। आज का इसका दिन का हाई 3,309.20 रुपए और दिन का लो 3,140.00 रुपए है। स्टॉक का 52 वीक हाई 4,174.00 रुपए और 52 वीक लो 2,183.67 रुपए है। स्टॉक का ट्रेडिंग वॉल्यूम 3,950,989 शेयर और मार्केट कैप 173,140 करोड़ रुपए है।

1 हफ्ते में यह शेयर 4.65 रुपए और 1 महीने में 13.36 फीसदी भागा है। इस साल अब तक इसमें 13.82 फीसदी की तेजी आई है। वहीं, 1 साल में इसमें 19.60 फीसदी की कमजोरी आई है। जबकि, 3 साल में यह शेयर 182.36 फीसदी भागा है।

Market Outlook : भारतीय इक्विटी इंडेक्स बढ़त के साथ हुए बंद, जानिए 25 जून को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

नोएल टाटा छोड़ेंगे Trent के चेयरमैन का पद, AGM में कहा- कंपनी के सबसे अच्छे साल आना अभी बाकी

नोएल टाटा ने ट्रेंट लिमिटेड के चेयरमैन का पद छोड़ने की घोषणा की है। इसके साथ ही ट्रेंट के साथ उनका लगभग 30 साल का कार्यकाल खत्म हो जाएगा। वह 70 साल के होने वाले हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोएल टाटा ने 23 जून को ट्रेंट की 47वीं सालाना आम बैठक में शेयरहोल्डर्स से कहा कि चेयरमैन के तौर पर यह उनकी आखिरी सालाना आम बैठक है।

टाटा ग्रुप की गवर्नेंस पॉलिसी के मुताबिक, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स के रिटायरमेंट की उम्र 65 साल होती है, जबकि नॉन-इंडिपेंडेंट नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स 70 साल में रिटायर होते हैं। इंडिपेंडेंट डायरेक्टर 75 की उम्र में रिटायर होते हैं। ट्रेंट, टाटा ग्रुप का फैशन और लाइफस्टाइल बिजनेस है। कंपनी के Westside, Zudio और Star जैसे ब्रांड्स के तहत रिटेल स्टोर हैं।

1998 से Trent के साथ

नोएल टाटा साल 1998 में ट्रेंट के बोर्ड में डायरेक्टर के तौर पर शामिल हुए थे। उस वक्त, जब उनकी मां सिमोन टाटा ने लैक्मे के डाइवेस्टमेंट के बाद कंपनी शुरू की थी। उन्होंने जून 1999 में ट्रेंट के पहले मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर चार्ज संभाला था। वित्त वर्ष 2026 में ट्रेंट का रेवेन्यू बढ़कर 19,701 करोड़ रुपये हो गया। नोएल टाटा ने सालाना आम बैठक में कहा, “एक वेस्टसाइड स्टोर से 1,200 से ज्यादा स्टोर के नेटवर्क तक, हमारा सफर लगातार आगे बढ़ा है। पिछले कुछ सालों में हमने अपने पोर्टफोलियो में पावरफुल ग्रोथ इंजन जोड़े हैं- खासकर जूडियो और स्टार, जो अब हमारे पोर्टफोलियो का एक अहम हिस्सा हैं।”

नोएल टाटा का मानना है कि ट्रेंट के सबसे अच्छे साल अभी बाकी हैं। कंपनी अपनी विकास यात्रा के शुरुआती चरण में है। कंपनी के सामने मौके बहुत हैं और केवल भारत तक सीमित नहीं हैं। आने वाले सालों में ट्रेंट अलग-अलग कैटेगरी में बढ़ेगी और नई जगहों पर भी पहुंचेगी।

नोएल टाटा ने कंपनी की 2023 की शेयरहोल्डर्स मीटिंग का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने ट्रेंट को दस गुना बड़ा बनाने का सोचा था। तब से रेवेन्यू और प्रॉफिटेबिलिटी रन रेट 2.5 गुना से ज्यादा बढ़ गया है। टाटा ने आगे कहा, “मुझे यकीन है कि हम जल्द ही उस माइलस्टोन तक पहुंच जाएंगे, जिसका मैंने जिक्र किया था।”

ट्रेंट का शेयर 3 प्रतिशत से ज्यादा उछला

24 जून को ट्रेंट के शेयर में 3.6 प्रतिशत की तेजी है। शेयर BSE पर 3255 रुपये पर बंद हुआ है। कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर 1.73 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। जून की शुरुआत में शेयर ने एक्स-बोनस ट्रेड किया था। ट्रेंट ने अपने शेयरहोल्डर्स को उनके पास मौजूद हर 2 शेयरों पर 1 नया शेयर बोनस के तौर पर देने का ऐलान किया था। वहीं कंपनी वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 6 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड दे रही है। रिकॉर्ड डेट 12 जून थी। ट्रेंट के शेयर के लिए मॉर्गन स्टेनली ने ‘ओवरवेट’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 3,151 रुपये प्रति शेयर दिया है।

LIC का फाइनल डिविडेंड पाना चाहते हैं तो आज, 24 जून को आखिरी मौका, 25 जून को शेयर करेगा एक्स-ट्रेड

HSBC ग्लोबल इनवेस्टमेंट रिसर्च ने ‘बाय’ रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस बढ़ाकर 3,460 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। मोतीलाल ओसवाल ने 3,500 रुपये का टारगेट प्राइस बरकरार रखा है। दूसरी तरफ कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने ​’रिड्यूस’ रेटिंग दी है। लेकिन टारगेट बढ़ाकर 3,025 रुपये कर दिया है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

24000 के पार Nifty बंद, Sensex में 790 प्वाइंट्स का उछाल, डेढ़ लाख करोड़ रुपये बढ़ी निवेशकों की दौलत

Share Market Rally: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकी सीनेट में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव से झटका लगा जिससे अब ईरान पर हमला करने उनके लिए मुश्किल हो गया तो इसने मार्केट में काफी रौनक बढ़ा दी। ट्रंप को इस करंट से घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 900 प्वाइंट्स अधिक उछल पड़ा तो निफ्टी 50 भी 24100 के काफी करीब पहुंच गया। ब्रोडर लेवल पर भी मार्केट में अच्छी रिकवरी आई और शुरुआती गिरावट से उबरते हुए निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 ग्रीन हो गए।

सेक्टरवाइज मेटल शेयरों ने जोरदार वापसी की कोशिश की और निफ्टी मेटल करीब 1% की गिरावट से रिकवर करते हुए ग्रीन हुआ लेकिन मुनाफावसूली के चलते यह फिर 0.40% की गिरावट के साथ बंद हुआ। आईटी सेक्टर और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर ने मिलकर मार्केट में शानदार रौनक बिखेरी और इनके निफ्टी इंडेक्स करीब 2% मजबूत हुए। शुरुआती कारोबार में गिरावट के बाद पीएसयू बैंक में भी रिकवरी हुई और अब इसके निफ्टी इंडेक्स करीब आधे फीसदी की बढ़त है तो निफ्टी रियल्टी 2% से अधिक मजबूत हुआ।

ओवरऑल आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक बढ़ गया यानी निवेशकों की दौलत में डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक का इजाफा हुआ है। इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज सेंसेक्स (Sensex) 790.54 प्वाइंट्स यानी 1.04% के उछाल के साथ 76,991.22 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 197.55 प्वाइंट्स यानी 0.83% की बढ़त के साथ 24,021.65 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 989.69 प्वाइंट्स उछलकर 77,190.37 और निफ्टी 265.95 प्वाइंट्स चढ़कर 24,090.05 तक पहुंच गया था।

₹1.86 लाख करोड़ बढ़ी निवेशकों की दौलत

एक कारोबारी दिन पहले यानी 23 जून 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,74,59,448.771 करोड़ था। आज यानी 23 जून 2026 को यह बढ़कर ₹4,76,45,817.53 करोड़ पर पहुंच गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹1,86,368.759 करोड़ का इजाफा हुआ है।

Sensex के 23 स्टॉक्स ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें आज 23 स्टॉक्स ग्रीन जोन में बंद हुए हैं। सबसे अधिक तेजी आज इंडिगो, ट्रेंट और टेक महिंद्रा में रही। वहीं दूसरी तरफ आज सेंसेक्स पर सबसे अधिक गिरावट एनटीपीसी, टाटा स्टील और मारुति में रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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147 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर आज 4430 शेयरों की ट्रेडिंग हुई। इसमें 2215 शेयर आज मजबूत हुए तो 2034 में गिरावट रही जबकि 181 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा 147 शेयर एक साल के हाई और 63 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

ITR Filing 2026: विदेशी शेयर, बैंक अकाउंट या आय छिपाई तो लग सकता है ₹10 लाख तक का जुर्माना

कई लोगों को नौकरी के दौरान विदेश में काम करने का मौका मिलता है। कुछ समय बाद वे देश लौट आते हैं। लेकिन, विदेश में पोस्टिंग के दौरान वे वहां एसेट्स खरीद लेते हैं। इनकम टैक्स का नियम कहता है कि अगर किसी टैक्सपेयर का विदेश में एसेट्स है या किसी तरह की इनकम है तो उसे उसकी जानकारी इनकम टैक्स में रिटर्न में देनी होगी। अगर किसी व्यक्ति ने विदेशी कंपनी के शेयरों या म्यूचुअल फंड्स में निवेश किया है तो भी उसे अपने रिटर्न में इस बारे में बताना होगा।

अब विदेश में एसेट्स या इनकम छुपाना मुश्किल

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट टैक्सपेयर्स की विदेश में एसेट्स और किसी तरह की इनकम पर करीबी नजर रखता है। डिपार्टमेंट को सीधे दूसरे देशों की सरकार और वहां के वित्तीय संस्थानों से इस बारे में जानकारी मिलती है। इसलिए विदेश में एसेट्स या विदेशी एसेट्स से होने वाली इनकम को अब छुपाना मुश्किल हो गया है। ऐसा करने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट बड़ी कार्रवाई कर सकता है।

विदेशी कंपनी के ईसॉप्स या शेयरों की भी देनी होगी जानकारी

एसबीएचएस एंड एसोसिएट्स के फाउंडिंग पार्टनर हिमांग सिंगला ने कहा, “अगर एंप्लॉयीज के पास विदेशी कंपनी के ईसॉप्स, आरएसयू या शेयर हैं तो उसे इसकी जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को देनी होगी। साथ ही अगर इंडिया के बाहर से किसी तरह की इनकम होती है तो उसके बारे में भी रिटर्न में बताना होगा।” इनकम टैक्स के नियमों के तहत ऐसा करना अब अनिवार्य है।

विदेश में इनकम डिसक्लोज नहीं करने पर 10 लाख तक की पेनाल्टी

विदेश में एसेट्स और इनकम डिसक्लोज नहीं करने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट टैक्सपेयर के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकता है। वह टैक्सपेयर के खिलाप ब्लैक मनी से जुड़े कानून के तहत कार्रवाई कर सकता है। टैक्सपेयर पर 10 लाख रुपये तक पेनाल्टी लगाई जा सकती है। कुछ गंभीर मामलों में कानूनी प्रक्रिया तक का सामना करना पड़ सकता है।

विदेश में बैंक अकाउंट है तो भी उसकी जानकारी रिटर्न में देनी होगी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के दौरान टैक्सपेयर्स के लिए विदेश में बैंक अकाउंट की डिटेल, रियल एस्टेट में निवेश, शेयर या म्यूचुअल फंड्स में निवेश या किसी दूसरे तरह के इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश के बारे में बताना जरूरी है।

फॉरेन इनकम बताना भूल गए तो फाइल कर सकते हैं रिवाइज्ड रिटर्न

अगर टैक्सपेयर विदेश में अपने एसेट्स या इनकम की जानकारी इनकम टैक्स रिटर्न में बताना भूल जाता है या वह गलत इनकम बता देता है तो उसके पास रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने का विकल्प है। उसे अगले साल 31 मार्च तक रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करना होगा। ऐसा करने पर वह इनकम टैक्स की कार्रवाई से बच सकता है।

ITR Filing 2026: फॉर्म 16 नहीं मिला? फिर भी आसानी से भर सकते हैं ITR, जानिए स्टेप-बाय-स्टेप तरीका

ITR Filing 2026: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने का समय आते ही ज्यादातर नौकरीपेशा लोग Form 16 का इंतजार करने लगते हैं। यह दस्तावेज ITR फाइल करने का काम काफी आसान बना देता है। लेकिन कई बार नौकरी बदलने, कंपनी बंद हो जाने, कम सैलरी होने या किसी दूसरी वजह से Form 16 नहीं मिल पाता। ऐसे में कई लोगों को लगता है कि अब ITR भरना मुश्किल हो जाएगा।

लेकिन ऐसा नहीं है। अगर आपके पास Form 16 नहीं है, तब भी आप आसानी से अपना ITR फाइल कर सकते हैं। बस आपको अपनी कमाई, टैक्स कटौती और निवेश से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारियां जुटानी होंगी।

Form 16 आखिर होता क्या है?

Form 16 एक टैक्स सर्टिफिकेट होता है, जिसे कंपनी अपने कर्मचारियों को देती है। इसमें सालभर की सैलरी, TDS, टैक्स छूट और दूसरी जरूरी जानकारियां दर्ज होती हैं।

हालांकि Form 16 ITR भरने में मदद करता है, लेकिन ITR दाखिल करने के लिए इसका होना जरूरी नहीं है। आयकर विभाग ने ऐसी कोई शर्त नहीं रखी है कि बिना Form 16 के रिटर्न नहीं भरा जा सकता।

बिना Form 16 के ITR कैसे भरें?

सबसे पहले सैलरी स्लिप जुटाएं

अगर Form 16 नहीं मिला है, तो सबसे पहले पूरे वित्त वर्ष की सैलरी स्लिप निकाल लें। इन स्लिप्स में आपकी बेसिक सैलरी, HRA, स्पेशल अलाउंस, बोनस और दूसरी भुगतान संबंधी जानकारी होती है।

अगर आपने साल के दौरान नौकरी बदली है, तो दोनों कंपनियों की सैलरी स्लिप साथ रखें। इससे कुल आय निकालना आसान हो जाएगा।

AIS और TIS जरूर चेक करें

इनकम टैक्स पोर्टल पर लॉगिन करके एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) डाउनलोड करें।

AIS में आपकी सैलरी, बैंक ब्याज, डिविडेंड, शेयरों से हुई कमाई, TDS और कई दूसरे वित्तीय लेन-देन की जानकारी मिल जाती है। इससे आपको अपनी कुल आय का सही हिसाब लगाने में मदद मिलेगी।

Form 26AS को नजरअंदाज न करें

ITR भरने से पहले Form 26AS जरूर देखें। इसमें आपके PAN पर कटे TDS और जमा किए गए टैक्स का पूरा रिकॉर्ड होता है।

अगर आपकी कंपनी या बैंक ने TDS काटा है, तो वह यहां दिखाई देगा। इससे यह भी पता चल जाएगा कि आपके नाम पर कितना टैक्स जमा किया गया है।

सिर्फ सैलरी नहीं, दूसरी आय भी जोड़ें

कई लोग ITR भरते समय सिर्फ सैलरी की जानकारी भरते हैं और बैंक ब्याज, FD का ब्याज, डिविडेंड या दूसरी आय को भूल जाते हैं।

ऐसी गलती बाद में नोटिस की वजह बन सकती है। इसलिए AIS, बैंक स्टेटमेंट और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड देखकर सभी आय को जोड़ना जरूरी है।

टैक्स छूट का फायदा लेना न भूलें

अगर आप पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) चुन रहे हैं, तो 80C, 80D, NPS, होम लोन और दूसरी उपलब्ध कटौतियों को जरूर शामिल करें।

अपने निवेश और खर्च से जुड़े दस्तावेज संभालकर रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें दिखाया जा सके।

नौकरी बदली है तो ये गलती न करें

अगर आपने वित्त वर्ष के दौरान एक से ज्यादा कंपनियों में काम किया है, तो सभी कंपनियों से मिली सैलरी को जोड़कर कुल आय निकालें।

कई बार नया नियोक्ता पुरानी नौकरी की आय को अपने टैक्स कैलकुलेशन में शामिल नहीं करता। ऐसे में ITR भरते समय सही आंकड़ा खुद जोड़ना जरूरी होता है। वरना बाद में अतिरिक्त टैक्स देना पड़ सकता है।

ITR भरने से पहले एक बार सब मिलान कर लें

रिटर्न फाइल करने से पहले AIS, Form 26AS, बैंक स्टेटमेंट और सैलरी रिकॉर्ड का मिलान जरूर करें। यह भी सुनिश्चित करें कि आपकी हर आय उसमें शामिल हो।

अगर आपकी कमाई के कई स्रोत हैं या मामला थोड़ा जटिल है, तो किसी टैक्स एक्सपर्ट की सलाह लेना बेहतर हो सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

फूड डिलीवरी मार्केट में छिड़ी नई जंग, जानिए रैपिडो की एंट्री से स्विगी और जोमैटो में किसको होगा ज्यादा नुकसान

फूड डिलीवरी सेगमेंट में नई जंग छिड़ गई है। स्विगी और जोमैटो के दबदबे को चैलेंज करने के लिए इस सेक्टर में एक नया खिलाड़ी उतर गया है। रैपिडो ने फूड डिलीवरी सेगमेंट में एंट्री मारी है। रैपिडो का राइडर्स नेटवर्क और जीरो कमीशन मॉडल इस स्पेस के मैट्रिक्स को बदलने की क्षमता रखते हैं। “Ownly” नाम से फूड डिलीवरी में रैपिडो की एंट्री हुई है। इससे स्विगी और जोमैटो के दबदबे को चुनौती मिलने की उम्मीद है। Ownly का फोकस कम बजट वाले कस्टमर पर है।

स्विगी ने किया अंडरपरफॉर्म

इटरनल और स्विगी के प्रदर्शन पर नजर डालें तो स्विगी ने अंडरपरफॉर्म किया है। इटरनल ने इस साल अब तक 9 फीसदी निगेटिव रिटर्न दिया है। वहीं, 1 साल में इसने 2 फीसदी पॉजिटिव रिटर्न दिया है। वहीं, स्विगी ने इस साल अब तक 37 फीसदी निगेटिव रिटर्न दिया है। वहीं, 1 साल में इसने 38 फीसदी निगेटिव रिटर्न दिया है।

रैपिडो के मॉडल में क्या है अंतर?

रैपिडो रेस्टोरेंट्स के लिए 0% कमीशन मॉडल पर काम करेगा। वहीं, स्विगी और जोमैटो रेस्टोरेंट्स से 16 से 30 फीसदी तक कमीशन वसूलतें हैं। इसको ध्यान में रखते हुए रैपिडो का दांव मजबूत दिख रहा है। इसके पास राइडर्स का एक बड़ा नेटवर्क है। कंपनी को पहले से मौजूद बाइक-टैक्सी ड्राइवर्स का सीधा फायदा मिलेगा। इससे लागत कम करने में मदद मिलेगी

रैपिडो को दमदार रिस्पॉन्स!

रैपिडो को रेस्टोरेंट्स का अच्छा साथ मिला है। शुरुआती 3 महीनों में ही रैपिडो से 15% पार्टनर रेस्टोरेंट्स जुड़े हैं। Ownly के 3 महीने में 10 लाख डाउनलोड्स हुए हैं। स्विगी के ऐप Toing के करीब 60 लाख डाउनलोड्स हैं।

स्विगी के लिए क्यों निगेटिव?

ब्रोकरेज हाउस स्विगी के’Instamart’को 0 वैल्यूएशन दे रहे हैं। रैपिडो की एंट्री से जोमैटो से ज्यादा स्विगी को नुकसान हो सकता है। स्विगी ने भी बजट कस्टमर के लिए ही Toing ऐप उतारा है।

इटरनल और स्विगी के शेयरों पर एक नजर

इटरनल के शेयर पर नजर डालें तो एनएसई पर यह शेयर 1.15 बजे के आसपास 3.90 रुपए यानी 1.51 फीसदी की गिरावट के साथ 255 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा था। आज का इसका दिन का हाई 260.95 रुपए और दिन का लो 253.80 रुपए है। इस शेयर ने 1 हफ्ते में 0.95 फीसदी की कमजोरी दिखाई है। वहीं, 1 महीने में इसमें 5.81 फीसदी और 3 महीने में 7.61 फीसदी की तेजी दिखाई है। 1 साल में इसने 0.44 फीसदी रिटर्न दिया है।

स्विगी की बात करें तो यह शेयर 6.70 रुपए यानी 2.68 फीसदी की गिरावट के साथ 243 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा है। 1 हफ्ते में इसमें 6.19 फीसदी की कमजोरी आई है। वहीं, 1 महीने में इसमें 2.64 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। 3 महीने में यह शेयर 11.73 फीसदी टूटा है। इस साल अब तक इसमें 37.02 फीसदी की गिरावट हुई है। वहीं, 1 साल में यह शेयर 37.96 फीसदी टूटा है।

 

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