IPO This Week: इस हफ्ते इन 5 आईपीओ में पैसा लगाने का मौका, जानिए इन इश्यू की हर जरूरी बात

IPO This Week:आईपीओ के लिहाज से यह हफ्ता व्यस्तता वाला है। कुल 5 छोटे-बड़े आईपीओ इस हफ्ते खुल रहे हैं। कुछ खुल गए हैं तो कुछ खुलने वाले हैं। अगर आप इनमें निवेश का प्लान बना रहे हैं तो मनीकंट्रोल आपके लिए इन आईपीओ से जुड़ी हर जरूरी जानकारी पेश कर रहा है।

Advit Jewels Ltd

यह आईपीओ 23 जून को खुल गया है। इसमें 25 जून तक निवेश किया जा सकता है। कंपनी ने शेयर के लिए 130-138 रुपये का प्राइस बैंड किया है। इनवेस्टर्स को कम से कम शेयरों के एक लॉट के लिए अप्लाई करना होगा। एक लॉट 100 शेयरों का है। कंपनी इस इश्यू में 1.2 करोड़ नए शेयर इश्यू करेगी। इस इश्यू में अप्लाई करने के लिए कम से कम 13,800 रुपये की जरूरत पड़ेगी।

2. Waterways Leisure Tourism

यह आईपीओ भी 23 जून को खुल चुका है। इसमें 25 जून तक निवश किया जा सकता है। कंपनी ने शेयर के लिए 769-808 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। एक लॉट 18 शेयरों का है। इसका मतलब है कि प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर अप्लाई करने के लिए कम से कम 14,544 रुपये की जरूरत पड़ेगी।

3. Aastha Spintex

यह इश्यू 24 जून को खुलने जा रहा है। इसमें 1 जुलाई तक अप्लाई किया जा सकता है। कंपनी ने प्रति शेयर 136 रुपये कीमत तय की है। एक लॉट 110 शेयरों का है। इस इश्यू में अप्लाई करने के लिए कम से कम 14,960 रुपये की जरूरत पड़ेगी। कंपनी इस इश्यू में 1.25 करोड़ शेयर इश्यू करेगी। कंपनी के शेयर 6 जुलाई को स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट होंगे।

4. CSM Technologies

सीएसएम टेक्नोलॉजीज का आईपीओ 24 जून यानी बुधवार को खुल रहा है। कंपनी इस इश्यू के तहत 146 करोड़ रुपये जुटाने जा रही है। वह करीब 1.29 करोड़ शेयर जारी करेगी। आईपीओ से मिले पैसे का इस्तेमाल कर्ज चुकाने, कारोबार के विस्तार और सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए करेगी। कंपनी ने शेयर का प्राइस बैंड 107-113 रुपये तय किया है। इस आईपीओ में 29 जून तक निवेश किया जा सकता है।

यह भी पढ़ें: CSM Technologies IPO: 24 जून को खुल रहा सीएसएम टेक्नोलॉजीज का आईपीओ, क्या निवेश करना चाहिए?

5. Crazy Snacks

यह आईपीओ 25 जून को खुलेगा। इसमें 30 जून तक अप्लाई किया जा सकता है। कंपनी ने प्रति शेयर कीमत 42 रुपये तय की है। एक लॉट 3,000 शेयरों का है। लॉट साइज ज्यादा होने से इस आईपीओ में अप्लाई करने के लिए कम से कम 1,26,000 रुपये की जरूरत पड़ेगी। कंपनी के शेयर 3 जुलाई को स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट हो सकते हैं।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

राजेश एक्सपोर्ट्स पर ED का छापा, SEBI के आरोपों के बाद लिया है एक्शन

देश की प्रमुख गोल्ड ज्वेलरी एक्सपोर्टर कंपनी Rajesh Exports Limited एक बार फिर जांच एजेंसियों के रडार पर है। सूत्रों के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को बेंगलुरु में कंपनी और उसके प्रमोटर्स से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की।

यह कार्रवाई सुबह शुरू हुई और रिपोर्ट लिखे जाने तक जारी थी। ED की टीमें कंपनी और उससे जुड़े कई परिसरों में दस्तावेजों और लेन-देन की जांच कर रही थीं।

SEBI की रिपोर्ट के बाद बढ़ी जांच

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब कुछ दिन पहले ही Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने राजेश एक्सपोर्ट्स, इसके चेयरमैन राजेश मेहता और कुछ संबंधित संस्थाओं के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किया था।

SEBI ने आरोप लगाया था कि कंपनी ने फंड के लेन-देन को छिपाने के लिए कई संबंधित संस्थाओं के बीच जटिल ट्रांजैक्शन किए। रेगुलेटर का कहना है कि इन लेन-देन को इस तरह अंजाम दिया गया कि पैसों के असली शुरुआत और अंत को पहचानना मुश्किल हो जाए।

प्रमोटर के खाते से पैसे घुमाने का आरोप

SEBI का आरोप है कि Rajesh Exports ने कंपनी का पैसा प्रमोटर राजेश मेहता के निजी बैंक खाते के जरिए ट्रांसफर किया। लेकिन कंपनी यह नहीं बता पाई कि ऐसा क्यों किया गया। नियामक के मुताबिक, कंपनी कोई लोन एग्रीमेंट, बोर्ड की मंजूरी या अन्य दस्तावेज पेश नहीं कर सकी, जो इस काम को सही ठहरा सकें।

SEBI ने कहा कि कंपनी ने खुद स्वीकार किया है कि फंड को उसके मूल स्रोत का खुलासा किए बिना आगे भेजा गया था। रेगुलेटर के मुताबिक, यह पहली नजर में फंड ट्रेल छिपाने और लेयरिंग करने की कोशिश लगती है। आदेश के मुताबिक, अप्रैल 2020 से सितंबर 2025 के बीच कंपनी ने राजेश मेहता को ₹338.90 करोड़ ट्रांसफर किए। इसी अवधि में कंपनी को उनके खाते से ₹232.44 करोड़ वापस मिले।

₹15.15 लाख करोड़ की गलत रिपोर्टिंग

SEBI की अंतरिम रिपोर्ट में सबसे गंभीर आरोप कंपनी के वित्तीय बयानों से जुड़ा है। रेगुलेटर का आरोप है कि कंपनी ने बार-बार एक जैसे सर्कुलर ट्रांजैक्शन दर्ज करके अपने खातों में करीब ₹15.15 लाख करोड़ की कथित गलत रिपोर्टिंग की।

SEBI के मुताबिक, एक ही लेन-देन को कई संस्थाओं के जरिए बार-बार घुमाया गया। इससे खरीद और बिक्री के आंकड़े वास्तविकता से कहीं ज्यादा बड़े दिखाई दिए। हालांकि, रेगुलेटर ने यह भी स्पष्ट किया है कि ₹15.15 लाख करोड़ असल धनराशि नहीं है। यह उन अकाउंटिंग एंट्रीज का कुल मूल्य है, जिन्हें SEBI ने कथित तौर पर गलत बताया है।

निवेशकों को लेकर भी चिंता

SEBI का मानना है कि इन कथित गड़बड़ियों की वजह से निवेशकों को कंपनी के कारोबार और वित्तीय स्थिति के बारे में गलत जानकारी मिल सकती थी। इसी कारण जांच पूरी होने तक कंपनी, उसके प्रमोटर्स और कुछ संबंधित संस्थाओं पर अंतरिम प्रतिबंध लगाए गए हैं।

अब ED क्या तलाश रही है?

सूत्रों के मुताबिक, ED की छापेमारी SEBI की रिपोर्ट में सामने आए आरोपों से जुड़ी हो सकती है। आमतौर पर जब किसी दूसरी जांच एजेंसी या नियामक को वित्तीय गड़बड़ी के संकेत मिलते हैं, तो ED यह पता लगाने की कोशिश करती है कि कहीं पैसों की हेराफेरी या मनी लॉन्ड्रिंग तो नहीं हुई। हालांकि अभी तक ED ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि छापेमारी किस विशेष कानूनी प्रावधान के तहत की जा रही है।

दूसरी ओर Rajesh Exports ने सार्वजनिक रूप से इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। माना जा रहा है कि कंपनी प्रतिभूति कानूनों के तहत उपलब्ध कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर सकती है। फिलहाल ED की कार्रवाई ने कंपनी पर नियामकीय दबाव और बढ़ा दिया है। चूंकि जांच अभी जारी है, इसलिए आने वाले समय में इस मामले में और जानकारी सामने आ सकती है।

Market Outlook : भारी गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 24 जून को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Healthcare Stocks : कमजोर बाजार में भी फार्मा और हेल्थकेयर शेयरों में आई बहार, मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट ने भरा दम

Healthcare Stocks : कमजोर बाजार में फार्मा और हेल्थकेयर शेयरों में आज जोरदार खरीदारी का मूड देखने को मिला। इसके चलते निफ्टी फार्मा इंडेक्स में 0.92 प्रतिशत की बढ़त हुई, जबकि बीएसई हेल्थकेयर इंडेक्स 0.62 प्रतिशत बढ़ा। चुनिंदा हेल्थकेयर शेयरों में डिफेंसिव बाइंग देखने को मिली। सिप्ला में 1.5 प्रतिशत,डॉ. रेड्डीज़ लैबोरेटरीज में 1.05 प्रतिशत और सन फार्मा में 0.98 प्रतिशत की बढ़त हुई। वहीं, ग्लैंड फार्मा के शेयरों में 4.79 प्रतिशत की बढ़त हुई और यह BSE मिडकैप गेनर्स में सबसे आगे रहा। लॉरस लैब्स में 3.12 प्रतिशत और ऑरोबिंदो फार्मा में 2.99 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इस बीच मोतीलाल ओसवाल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक हेल्थकेयर स्पेस में ग्रोथ के काफी मौके हैं। इसके चलते भी इस सेक्टर को शेयरों में तेजी रही।

हेल्थकेयर पर MOFSL की राय

हेल्थकेयर पर MOFSL की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रेटर नोएडा सैटेलाइट टाउन से अर्बन हब बन गया है। ग्रेटर नोएडा की जनसंख्या सालाना 5.4% बढ़कर 1.3 करोड़ पर पहुंच गई है। ग्रेटर नोएडा में जनसंख्या राष्ट्रीय औसत से ज्यादा बढ़ी है। ग्रेटर नोएडा में सिर्फ 4500 सुपर स्पेशलिटी बेड मौजूद हैं जो जरुरत से काफी कम हैं। वेस्टर्न यूपी और पश्चिमी दिल्ली से भी डिमांड को सपोर्ट मिल रहा है। यहां ऑर्गन ट्रांसप्लांट,रोबोटिक सर्जरी और क्रिटिकल केयर में बडे़ मौके हैं।

MOFSL के पसंदीदा शेयर

MOFSL ने मेदांता को BUY रेटिंग देते हुए 1490 रुपए प्रति शेयर का टारगेट दिया है। ब्रोकरेज का कहना है कि इसके 382 बेड्स ऑपरेशनल हैं। इनकी रेवेन्यू 200-250 करोड़ करोड़ रुपए महीना है। कंपनी के EBITDA घाटे में तेजी से कमी आई है। मजबूत ब्रांड से मरीज बढ़े हैं। FY26-28 में रेवेन्यू 11%, EBITDA 24% और मुनाफा 31% CAGR संभव है।

Market Outlook : भारी गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 24 जून को कैसी रह सकती है इसकी चाल

मैक्स हेल्थकेयर पर MOFSL

मैक्स हेल्थकेयर पर MOFSL ने BUY रेटिंग देते हुए 1260 रुपए प्रति शेयर का टारगेट दिया है। ब्रोकरेज का कहना है कि Jaypee के अधिग्रहण के बाद ऑक्यूपेंसी 64% से बढ़कर 72% हो गई है। इसकी रेवेन्यू 36-37 करोड़ रुपए प्रति महीना से बढ़कर 57 करोड़ रुपए प्रति महीना हो गई है। कंपनी की 100 बेड और 5 OT जोड़ने की तैयारी है। इसका कार्डियोलॉजी,ऑन्कोलॉजी और ऑर्गन ट्रांसप्लांट पर फोकस है। FY26-28 में रेवेन्यू 14%,EBITDA 15% और मुनाफा 20% CAGR संभव है।

फोर्टिस पर MOFSL

फोर्टिस पर MOFSL ने BUY रेटिंग देते हुए 1140 रुपए प्रति शेयर का टारगेट दिया है। ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी 22 साल पुरानी है। बेड फैसिलिटी अच्छी है। इसकी ऑक्यूपेंसी 77-78% है। 22% EBITDA मार्जिन और 15% सालाना ग्रोथ की उम्मीद है। कंपनी को नोएडा में दूसरे साइट की तलाश है। FY26-28 में रेवेन्यू 13%, EBITDA 17% और मुनाफा 21% CAGR संभव है।

 

डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

CSM Technologies IPO: 24 जून को खुल रहा सीएसएम टेक्नोलॉजीज का आईपीओ, क्या निवेश करना चाहिए?

CSM Technologies IPO: सीएसएम टेक्नोलॉजीज का आईपीओ 24 जून यानी बुधवार को खुल रहा है। कंपनी इस इश्यू के तहत 146 करोड़ रुपये जुटाने जा रही है। वह करीब 1.29 करोड़ शेयर जारी करेगी। आईपीओ से मिले पैसे का इस्तेमाल कर्ज चुकाने, कारोबार के विस्तार और सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए करेगी।

ई-गवर्नेंस, सिस्टम इंटिग्रेशन में विशेषज्ञता

CSM Technologies एक प्रमुख GovTech और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन कंपनी है। इसे सरकार के डिपार्टमेंट्स, पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स और एंटरप्राइजेज को टेक्नोलॉजी एनेबल्ड सॉल्यूशंस ऑफर करने का 27 साल से ज्यादा का अनुभव है। इसे ई-गवर्नेंस, सिस्टम इंटिग्रेशन, अप्लिकेशन डेवलपमेंट, क्लाउड सॉल्यूशंस, एनालिटिक्स और एआई में विशेषज्ञता हासिल है।

आईपीओ में 29 जून तक लगाई जा सकती है बोली

कंपनी ने शेयर का प्राइस बैंड 107-113 रुपये तय किया है। इस आईपीओ में 29 जून तक निवेश किया जा सकता है। इस इश्यू में ऑफर फॉर सेल (OFS) नहीं होगा। इसका मतलब है कि कंपनी इश्यू में सिर्फ नए शेयर इनवेस्टर्स को इश्यू करेगी।

1998 में हुई थी कंपनी की शुरुआत

सीएसएम टेक्नोलॉजी की शुरुआत 1998 में हुई थी। इसका मुख्यालय भुवनेश्वर है। बीते सालों में खुद को सॉफ्टवेयर सर्विसेज प्रोवाइडर से एंड-टू-एंड टेक्नोलॉलीज सॉल्यूशंस पार्टनर के रूप में बदला है। आईपीओ में शेयर के अपर प्राइस बैंड पर FY25 के अर्निंग्स के मुकाबले कीमत 41.6 गुनी है। यह ज्यादा नहीं है, क्योंकि कंपनी का ट्रैक रिकॉर्ड और फाइनेंशियल मीट्रिक्स बेहतर रहे हैं।

आनंदराठी ने दी बोली लगाने की सलाह

ब्रोकरेज फर्म आनंदराठी ने इस आईपीओ को सब्सक्राइब करने की सलाह दी है। कंपनी ने इश्यू में 50 फीसदी शेयर क्वालिफायड इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व रखा है। 15 फीसदी शेयर नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व होंगे। बाकी 35 फीसदी शेयर रिटेल इनवेस्टर्स के लिए होंगे।

कम से कम 14,916 रुपये से अप्लाई करना होगा

इनवेस्टर्स को इश्यू में कम से कम शेयरों के एक लॉट के लिए अप्लाई करना होगा। एक लॉट 132 शेयरों का है। इसका मतलब है कि शेयर के अपर प्राइस बैंड पर अप्लाई करने के लिए रिटेल इनवेस्टर्स को कम से कम 14,916 रुपये की बोली लगानी होगी।

यह भी पढ़ें: Advit Jewels IPO: 23 जून को खुलेगा ₹165 करोड़ का आईपीओ, ग्रे मार्केट से हर लॉट पर ₹6400 के लिस्टिंग गेन के आसार

आईटी कंपनियों को लेकर मार्केट सेंटिमेंट कमजोर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सीएसएम टेक्नोलॉजीज का आईपीओ ऐसे वक्त आ रहा है, जब आईटी शेयरों पर बिकवाली का दबाव है। खासकर भारतीय आईटी कंपनियों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल का असर पड़ा है। 23 जून को भी शेयर बाजार में गिरावट में आईटी कंपनियों में बिकवाली का बड़ा हाथ रहा। करीब सभी दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयरों पर बिकवाली का दबाव दिखा।

Railway Stocks: रेलवे का ₹50000 करोड़ का कवच प्रोजेक्ट, इन 3 कंपनियों को मिल सकता है बड़ा फायदा

Railway Stocks: भारतीय रेलवे सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए कवच (Kavach) सिस्टम को तेजी से लागू कर रहा है। यह स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है, जो सिग्नल तोड़ने या तय रफ्तार से ज्यादा गति होने पर ट्रेन को खुद रोक सकता है। मार्च 2026 तक यह 3,103 रूट किलोमीटर पर शुरू हो चुका है। 24,427 रूट किलोमीटर पर काम जारी है। सरकार अगले दो वर्षों में 9,000 रूट किलोमीटर और जोड़ने की तैयारी में है।

Concord Control Systems के मुताबिक, कवच से जुड़ा कुल बाजार अवसर करीब ₹50,000 करोड़ का हो सकता है। यही वजह है कि रेलवे सेक्टर की कई कंपनियां इस अवसर का फायदा उठाने की दौड़ में हैं।

Kernex Microsystems

Kernex रेलवे सुरक्षा और सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस उपलब्ध कराती है। कवच 4.0 इसका प्रमुख प्रोडक्ट है। कंपनी हर महीने 450 कवच यूनिट बनाने की क्षमता रखती है और मार्च 2026 में BHEL के साथ एक जॉइंट वेंचर भी बना चुकी है।

29 मई 2026 तक कंपनी के पास ₹4,150 करोड़ का ऑर्डर बुक था, जो FY26 के रेवेन्यू के आधार पर करीब 10 साल की कमाई का नजरिया देता है। FY26 में कंपनी का रेवेन्यू 127% बढ़कर ₹430 करोड़ पहुंच गया। ऑपरेटिंग प्रॉफिट ₹149 करोड़ रहा। हालांकि, तेजी से बढ़ते ऑर्डर के साथ वर्किंग कैपिटल पर दबाव भी बढ़ा है।

Concord Control Systems

Concord Control Systems कवच 4.0 के लिए जरूरी तकनीक और कई अहम कंपोनेंट बनाती है। कंपनी को RDSO की प्रोटोटाइप मंजूरी मिल चुकी है और फील्ड ट्रायल शुरू हो चुके हैं।

31 मार्च 2026 तक कंपनी का कुल ऑर्डर बुक ₹697 करोड़ था। इसके बाद मई 2026 में उसे ₹279.9 करोड़ का नया कवच ऑर्डर मिला। कंपनी के मुताबिक, इन ऑर्डर्स के साथ 15 साल तक मेंटेनेंस से भी कमाई होगी। इससे लंबी अवधि की कमाई का रास्ता बनता है। FY26 में कंपनी का रेवेन्यू 69% बढ़कर ₹210.5 करोड़ और नेट प्रॉफिट 88% बढ़कर ₹42.7 करोड़ रहा।

HBL Engineering

HBL Engineering को कवच का शुरुआती खिलाड़ी माना जाता है। कंपनी 2005 से इस तकनीक पर काम कर रही है। यह Kavach 4.0 का सर्टिफिकेशन हासिल करने वाली पहली कंपनी रही है।

22 जून 2026 तक HBL का ऑर्डर बुक ₹5,748 करोड़ था। कंपनी का अनुमान है कि FY26 से FY28 तक कवच से हर साल ₹1,300-1,500 करोड़ की बिक्री हो सकती है। साथ ही कंपनी ट्रेन मैनेजमेंट सिस्टम और अन्य रेल सिग्नलिंग प्रोडक्ट्स पर भी फोकस बढ़ा रही है।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

कवच भारत के रेलवे सेक्टर में लंबे समय तक चलने वाली बड़ी थीम बन चुका है। इन तीनों कंपनियों ने इस क्षेत्र में मजबूत पकड़ बनाई है। लेकिन सिर्फ बड़े ऑर्डर मिलना ही काफी नहीं होगा। आने वाले वर्षों में यह देखना अहम होगा कि ये कंपनियां समय पर प्रोजेक्ट पूरे कर पाती हैं या नहीं, वर्किंग कैपिटल को कैसे संभालती हैं और कवच के अलावा नए रेलवे सॉल्यूशंस में कितनी तेजी से विस्तार करती हैं।

फिलहाल, रेलवे सुरक्षा सेक्टर में दिलचस्पी रखने वाले निवेशको इन तीनों कंपनियों को अपनी वॉचलिस्ट में रख सकते हैं। इससे सही समय पर एंट्री लेने में मदद मिल सकती है।

Gold Silver Prices: सोने-चांदी में बड़ी गिरावट, ETF भी टूटा; ये 5 कारण हैं जिम्मेदार

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

अगले 6-12 महीनों में नई ऊंचाई पर पहुंच सकता है बाजार, नीलेश शाह ने बताई वजह

बाजार अगले 6-12 महीनो में नई ऊंचाई पर पहुंच सकता है। इनविजन कैपिटल के फाउंडर नीलेश शाह ने यह अनुमान जताया है। उन्होंने पेटीएम के शेयरों में तेजी जारी रहने की उम्मीद जताई है। उनका मानना है कि अच्छी अर्निंग्स ग्रोथ, अनुकूल पॉलिसी और बेहतर होते इनवेस्टर सेंटिमेंट से अगली कुछ तिमाही में पेटीएम के शेयरों में तेजी जारी रह सकती है।

बाजार अगले चरण की तेजी के लिए तैयार

उन्होंने कहा कि लंबे समय तक कंसॉलिडेशन के बाद शेयर बाजारों में अगले चरण की तेजी के लिए एक मजबूत बुनियाद बनी है। बैंकिंग और आईटी जैसे सेक्टर में अच्छी अर्निंग्स ग्रोथ दिख सकती है। विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) की खरीदारी भी फिर से शुरू होने की उम्मीद है। इससे अगले 6 से 12 महीनों में बाजार के प्रमुख सूचकांक नई ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं।

इन वजहों से बढ़ेगी कॉर्पोरेट अर्निंग्स

उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि कंपनियों की अर्निंग्स बढ़ने के बड़े कारण हैं। अगली कुछ तिमाहियों में स्ट्रॉन्ग ग्रोथ दिख सकती है। बीती कुछ तिमाहियों में पॉलिसी के स्तर पर जो कदम उठाए गए हैं, उनका पूरा असर अभी कंपनियों की अर्निंग्स पर नहीं दिखा है।” उन्होंने कहा कि अगर सरकार नए रिफॉर्म्स करती है तो इससे विदेशी कैपिटल की आवक शुरू हो सकती है।

इन सेक्टर का प्रदर्शन कंसॉलिडेशन के दौरान भी बेहतर

शाह ने कहा कि कुल मिलाकर आउटलुक कंस्ट्रक्टिव लगता है। ऐसा लगता है कि बुरा दौर बीत चुका है। उन्होंने उन सेक्टर्स को अपनी पसंद बताया, जिनका प्रदर्शन बाजार में कंसॉलिडेशन के दौरान भी अच्छा रहा। इनमें डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, डिफेंस और एयरोस्पेस कंपनियां शामिल हैं।

आने वाले हैं बाजार में बड़े आईपीओ

उन्होंने कहा कि एनएसई और एनएसडीएल के आईपीओ आने वाले हैं। मार्केट में लिक्विडिटी का एक बड़ा हिस्सा इन शेयरों में जाएगा। हालांकि, म्यूचु्अल फंड्स और सिप के जरिए अच्छा निवेश हो रहा है, जिससे मार्केट में अतिरिक्त सप्लाई से कोई निगेटिव असर नहीं पड़ेगा।

यह भी पढ़ें: यूएस फ्यूचर्स, भारत, दक्षिण कोरिया सहित दुनियाभर के शेयर बाजारों में मचा कोहराम

बाजार का सेंटीमेंट अब हो रहा बेहतर

बीते कुछ महीनों में बाजार पर बड़ा दबाव दिखा था, जिसकी वजह मध्यपूर्व में टेंशन से क्रूड की कीमतों में उछाल था। अब क्रूड की कीमतें नीचे आ रही हैं। इसका पॉजिटिव असर मार्केट पर पड़ा है। अमेरिका-ईरान के बीच डील की खबर का भी बाजार पर पॉजिटिव असर पड़ा है।

Gold Silver Prices: सोने-चांदी में बड़ी गिरावट, ETF भी टूटा; ये 5 कारण हैं जिम्मेदार

Gold Silver Prices: सोने और चांदी में मंगलवार को बड़ी गिरावट दिखी। यह ट्रेंड वैश्विक और घरेलू, दोनों बाजारों में दिखा। गोल्ड और सिल्वर ETF भी लाल निशान में ट्रेड करते नजर आए। इसकी वजह फेडरल रिजर्व का रुख और भू-राजनीतिक घटनाक्रम हैं।

ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) के राष्ट्रीय महासचिव नितिन केडिया का कहना है कि सितंबर में अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका है। वहीं, बैंक ऑफ अमेरिका ने 2026 में तीन बार ब्याज दर बढ़ने का अनुमान दिया है। इस फैक्टर ने भी निवेशकों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

सोने और चांदी में कितनी गिरावट

गोल्ड दोपहर 2.40 बजे तक करीब 2100 रुपये यानी 1.42% की गिरावट के साथ 1,46,010 रुपये प्रति 10 ग्राम पर था। हालांकि, एक वक्त यह गिरकर 1,45,510 रुपये तक पर आ गया था। वहीं, चांदी 7300 रुपये यानी 3% से ज्यादा टूटकर 2,27,010 प्रति किलो पर थी। ये भी कारोबार के दौरान गिरकर 2,25,666 रुपये तक आ गई थी।

अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें, तो वहां सोना करीब 2% गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा था। वहीं, चांदी में 5% से ज्यादा की गिरावट आई है। गोल्ड और सिल्वर ETF भी लगभग इतना ही टूटे हैं।

गोल्ड-सिल्वर गिरने के 5 बड़े कारण

फेडरल रिजर्व के कड़े संकेत: अमेरिकी सेंट्रल बैंक ने संकेत दिए हैं कि महंगाई को काबू में रखने के लिए इस साल ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है। ब्याज दरें बढ़ने से निवेशक बॉन्ड्स में निवेश करना पसंद करते हैं। क्योंकि सोने-चांदी में ब्याज नहीं मिलता।

ब्याज दर बढ़ने का अनुमान: बैंक ऑफ अमेरिका ने 2026 में ब्याज दरों में तीन बार बढ़ोतरी का अनुमान दिया है। इसके चलते भी निवेशकों ने सोने और चांदी में बिकवाली बढ़ा दी है।

निवेशकों की मुनाफावसूली: ब्याज दर में बढ़ोतरी की आशंका से निवेशक गोल्ड और सिल्वर में मुनाफावसूली भी कर रहे हैं। गोल्ड-सिल्वर ETF में भी प्रॉफिट बुकिंग दिख रही है।

अमेरिकी डॉलर: डॉलर इंडेक्स में बढ़ोतरी देखने को मिली है। डॉलर मजबूत होने से विदेशी मुद्रा रखने वाले खरीदारों के लिए सोना-चांदी महंगा हो जाता है। इससे ग्लोबल डिमांड पर असर दिखता है।

भू-राजनीतिक तनाव में कमी: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की बातचीत में सकारात्मक प्रगति हुई है। इससे वैश्विक स्तर पर जोखिम में कुछ नरमी आई है। ऐसे में निवेशक सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी से अपना पैसा निकाल रहे हैं।

EPF खाताधारकों के लिए बड़ी खुशखबरी! जल्द खाते में आएगा ब्याज का पैसा, ऐसे चेक करें बैलेंस

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Trading Strategy : ग्लोबल बाजारों से मिले कमजोर संकेत बाजार पर पड़े भारी, जानिए अब क्या हो ट्रेडिंग रणनीति

Trading Strategy : ग्लोबल बाजारों से कमजोर संकेत भारतीय बाजार पर भारी पड़े है। निफ्टी 200 प्वाइंट से ज्यादा फिसलकर 23900 के नीचे आ गया है। बैंक निफ्टी करीब 650 प्वाइंट गिरा है। वोलैटिलिटी इंडेक्स INDIA VIX 9% से ज्यादा चढ़कर 14 के करीब पहुंच गया है। चिप शेयरों में दबाव जारी है। नैस्डैक फ्यूचर्स 700 प्वाइंट से ज्यादा टूटा है। एशिया में कोस्पी में 10% का लोअर सर्किट लगा है। दूसरे एशियाई बाजारों में भी तेज गिरावट देखने को मिल रही है। डॉलर इंडेक्स के 101 के ऊपर निकलने से मेटल सेक्टर में तगड़ी मुनाफावसूली आई है। मेटल इंडेक्स 3.5 फीसदी टूटा है। नाल्को,हिंदुस्तान जिंक और NMDC वायदा के टॉप लूजर्स में शामिल हैं। IT इंडेक्स में भी दो फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। साथ ही सरकारी बैंक,कंज्यूर ड्यूरेबल और कैपिटल मार्केट शेयर भी फिसले हैं। वहीं कमजोर बाजार में भी फार्मा शेयर मजबूत दिख रहे हैं।

बाजार: बड़ी गिरावट

ऐसे में बाजार में अपनी रणनीति साझा करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि भारतीय बाजारों पर ग्लोबल बाजारों की गिरावट हावी हो गई है। एशिया और US फ्यूचर्स में गिरावट का असर देखने को मिल रहा है। निफ्टी ने इंट्राडे में 23,900 तोड़ा है। बैंक निफ्टी में भी बड़ी गिरावट आई है। इंफोसिस की अगुवाई में IT में फिर गिरावट आई है। निफ्टी IT फिर 52-WEEK LOW के करीब है। आज मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बड़ी गिरावट आई है। बड़ा सवाल यह है कि क्या आज ट्रेंड बदला है?

Meesho Share Price: सिटी ने ‘Buy’ रेटिंग के साथ शुरू की कवरेज, 6% से ज्यादा भागा शेयर, जानिए टारगेट प्राइस

बाजार: अब क्या?

अगर निफ्टी 23,900 के नीचे बंद हो तो बाहर हों। एक ना एक दिन तो ट्रेलिंग SL लगना ही था। फिर भी ये वाली स्विंग काफी अच्छी रही है। आज बाजार में थोड़ी घबराहट है। हमारे मार्केट्स का इतना गिरने का लॉजिक नहीं है। कोरिया जब 50% भागा हम तो नहीं भागे। आज कोरिया 10% गिरा तो हम क्यों गिरे? कच्चा तेल अभी भी $77 के ही करीब है। आज थोड़ा एक्सपायरी का भी प्रेशर लगता है।

निफ्टी-बैंक निफ्टी पर रणनीति साझा करते हुए अनुज सिंघल ने कहा कि निफ्टी के लिए अगला सपोर्ट 23,800-23,850 पर और बैंक निफ्टी के लिए अगला सपोर्ट 57,000-57,200 पर है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

यूएस फ्यूचर्स, भारत, दक्षिण कोरिया सहित दुनियाभर के शेयर बाजारों में मचा कोहराम

दुनियाभर के शेयर बाजारों में 23 जून को बड़ी गिरावट दिखी है। यूएस स्टॉक फ्यूचर्स 2 फीसदी से ज्यादा नीचे हैं। उधर, दक्षिण कोरिया का बाजार 11 फीसदी क्रैश चुका है। इधर, भारत में बाजार के बड़े सूचकांकों पर बड़ा दबाव दिख रहा है। निफ्टी 0.71 फीसदी यानी 172 अंक नीच है, जबकि सेंसेक्स 0.67 फीसदी यानी 513 अंक टूट चुका है। इन सभी बाजारों में गिरावट में आईटी कंपनियों का बड़ा हाथ है।

अमेरिकी बाजारों में आज दिख सकता है दबाव

यूएस फ्यूचर्स में 2 फीसदी गिरावट का मतलब है कि 23 जून को कारोबार शुरू होने पर अमेरिकी बाजारों पर बड़ा दबाव दिख सकता है। 22 जून को अमेरिकी बाजार में टेक्नोलॉजी शेयरों में बड़ी गिरावट आई थी। इसका असर नैस्डेक पर पड़ा था। यह 1.32 फीसदी गिरकर बंद हुआ था। 23 जून को इसका असर भारत सहित प्रमुख एशियाई बाजारों पर पड़ा। इन बाजारों में टेक्नोलॉजी शेयरों में बड़ी बिकवाली देखने को मिली। भारत में सबसे ज्यादा गिरावट आईटी शेयरों में दिखी। इससे निफ्टी आईटी इंडेक्स 2 फीसदी से ज्यादा टूट गया।

प्रमुख एशियाई बाजारों में बड़ी बिकवाली 

जापान के प्रमुख सचूकांक Nikkei 225 में करीब 3 फीसदी की गिरावट आई। हांगकांग का हैंगसेट 1.75 फीसदी नीचे चल रहा था। शंघाई कंपोजिट 1.38 फीसदी की कमजोरी दिखा रहा था। थाइलैंड का सेट कंपोजिट इंडेक्स 1,69 फीसदी नीचे चल रहा था। इसका मतलब है कि दुनियाभर के प्रमुख शेयर बाजार बड़े दबाव में हैं। अचानक आई इस गिरावट की वजह से इनवेस्टर्स में घबराहट है।

दक्षिण कोरिया का बाजार 10 फीसदी क्रैश

सबसे ज्यादा गिरावट दक्षिण कोरिया के बाजार में आई है। कोस्पी 10 फीसदी क्रैश कर चुका है। SK Hynix और Samsung Electronics में सबसे ज्यादा गिरावट आई है। इससे कुछ समय के लिए शेयर बाजार में ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। लेकिन, दोबारा ट्रेडिंग शुरू होने के बाद बाजार पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया। इस साल दक्षिण कोरिया के बाजार में सबसे ज्यादा तेजी आई थी। विदेशी निवेशकों ने सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में खूब निवेश किए थे। इससे शेयरों की कीमतें कई गुनी हो गई थीं।

अमेरिका में टेक्नोलॉजी शेयरों में बड़ी गिरावट

22 जून को अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में बड़ी गिरावट आई। हाल में जबर्दस्त तेजी के साथ सूचीबद्ध होने वाला स्पेसएक्स का शेयर 16 फीसदी से ज्यादा क्रैश कर गया। Alphabet का शेयर 5 फीसदी फिसला। Amazon और Microsoft के शेयरों में 2.3 से 4.7 फीसदी तक की गिरावट आई। अब बाजार की नजरें Micron Technology पर लगी है। कंपनी 24 जून को अपने तिमाही नतीजों का ऐलान करेगी।

यह भी पढ़ें: Share Market Live Update

भारत में आईटी शेयरों में बड़ी गिरावट 

इधर, भारत में भी आईटी कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट दिखी। TCS का शेयर 3 फीसदी से ज्यादा क्रैश कर गया। इंफोसिस में भी 3 फीसदी से ज्यादा गिरावट दिखी। एचसीएल टेक में 1.57 फीसदी कमजोरी दिखी। विप्रो 2.85 फीसदी नीचे चल रहा था। टेक महिंद्रा का शेयर 2.15 फीसदी की कमजोरी दिखा रहा था। एलटीआई माइंडट्री भी 2 फीसदी से ज्यादा नीचे चल रहा था।

यह भी पढ़ें: South Korea Stock Market: दक्षिण कोरिया का स्टॉक मार्केट क्रैश, Kospi 9 फीसदी से ज्यादा फिसला

टेक्नोलॉजी शेयरों की वैल्यूएशन को लेकर चिंता

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका, दणिण कोरिया में चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में जबर्दस्त तेजी आई थी। इनवेस्टर्स एआई के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए इन शेयरों में निवेश कर रहे थे। इससे इन शेयरों की कीमतें आसमान में पहुंच गई थीं। अब इनकी हाई वैल्यूएशंस को लेकर चिंता जताई जा रही है। इससे इन शेयरों में बिकवाली दिख रही है।