राजेश एक्सपोर्ट्स पर ED का छापा, SEBI के आरोपों के बाद लिया है एक्शन

देश की प्रमुख गोल्ड ज्वेलरी एक्सपोर्टर कंपनी Rajesh Exports Limited एक बार फिर जांच एजेंसियों के रडार पर है। सूत्रों के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को बेंगलुरु में कंपनी और उसके प्रमोटर्स से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की।

यह कार्रवाई सुबह शुरू हुई और रिपोर्ट लिखे जाने तक जारी थी। ED की टीमें कंपनी और उससे जुड़े कई परिसरों में दस्तावेजों और लेन-देन की जांच कर रही थीं।

SEBI की रिपोर्ट के बाद बढ़ी जांच

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब कुछ दिन पहले ही Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने राजेश एक्सपोर्ट्स, इसके चेयरमैन राजेश मेहता और कुछ संबंधित संस्थाओं के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किया था।

SEBI ने आरोप लगाया था कि कंपनी ने फंड के लेन-देन को छिपाने के लिए कई संबंधित संस्थाओं के बीच जटिल ट्रांजैक्शन किए। रेगुलेटर का कहना है कि इन लेन-देन को इस तरह अंजाम दिया गया कि पैसों के असली शुरुआत और अंत को पहचानना मुश्किल हो जाए।

प्रमोटर के खाते से पैसे घुमाने का आरोप

SEBI का आरोप है कि Rajesh Exports ने कंपनी का पैसा प्रमोटर राजेश मेहता के निजी बैंक खाते के जरिए ट्रांसफर किया। लेकिन कंपनी यह नहीं बता पाई कि ऐसा क्यों किया गया। नियामक के मुताबिक, कंपनी कोई लोन एग्रीमेंट, बोर्ड की मंजूरी या अन्य दस्तावेज पेश नहीं कर सकी, जो इस काम को सही ठहरा सकें।

SEBI ने कहा कि कंपनी ने खुद स्वीकार किया है कि फंड को उसके मूल स्रोत का खुलासा किए बिना आगे भेजा गया था। रेगुलेटर के मुताबिक, यह पहली नजर में फंड ट्रेल छिपाने और लेयरिंग करने की कोशिश लगती है। आदेश के मुताबिक, अप्रैल 2020 से सितंबर 2025 के बीच कंपनी ने राजेश मेहता को ₹338.90 करोड़ ट्रांसफर किए। इसी अवधि में कंपनी को उनके खाते से ₹232.44 करोड़ वापस मिले।

₹15.15 लाख करोड़ की गलत रिपोर्टिंग

SEBI की अंतरिम रिपोर्ट में सबसे गंभीर आरोप कंपनी के वित्तीय बयानों से जुड़ा है। रेगुलेटर का आरोप है कि कंपनी ने बार-बार एक जैसे सर्कुलर ट्रांजैक्शन दर्ज करके अपने खातों में करीब ₹15.15 लाख करोड़ की कथित गलत रिपोर्टिंग की।

SEBI के मुताबिक, एक ही लेन-देन को कई संस्थाओं के जरिए बार-बार घुमाया गया। इससे खरीद और बिक्री के आंकड़े वास्तविकता से कहीं ज्यादा बड़े दिखाई दिए। हालांकि, रेगुलेटर ने यह भी स्पष्ट किया है कि ₹15.15 लाख करोड़ असल धनराशि नहीं है। यह उन अकाउंटिंग एंट्रीज का कुल मूल्य है, जिन्हें SEBI ने कथित तौर पर गलत बताया है।

निवेशकों को लेकर भी चिंता

SEBI का मानना है कि इन कथित गड़बड़ियों की वजह से निवेशकों को कंपनी के कारोबार और वित्तीय स्थिति के बारे में गलत जानकारी मिल सकती थी। इसी कारण जांच पूरी होने तक कंपनी, उसके प्रमोटर्स और कुछ संबंधित संस्थाओं पर अंतरिम प्रतिबंध लगाए गए हैं।

अब ED क्या तलाश रही है?

सूत्रों के मुताबिक, ED की छापेमारी SEBI की रिपोर्ट में सामने आए आरोपों से जुड़ी हो सकती है। आमतौर पर जब किसी दूसरी जांच एजेंसी या नियामक को वित्तीय गड़बड़ी के संकेत मिलते हैं, तो ED यह पता लगाने की कोशिश करती है कि कहीं पैसों की हेराफेरी या मनी लॉन्ड्रिंग तो नहीं हुई। हालांकि अभी तक ED ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि छापेमारी किस विशेष कानूनी प्रावधान के तहत की जा रही है।

दूसरी ओर Rajesh Exports ने सार्वजनिक रूप से इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। माना जा रहा है कि कंपनी प्रतिभूति कानूनों के तहत उपलब्ध कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर सकती है। फिलहाल ED की कार्रवाई ने कंपनी पर नियामकीय दबाव और बढ़ा दिया है। चूंकि जांच अभी जारी है, इसलिए आने वाले समय में इस मामले में और जानकारी सामने आ सकती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।