हरीश रावत से रुकवाई गई यात्रा

उत्तराखंड में कांग्रेस पार्टी के अंदर एक बार फिर गुटबाजी तेज हो गई है। पार्टी को दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी फिशिंग कर रही है तो दूसरी ओर नेता आपस में उलझे हैं। ईडी ने पिछले दिनों पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के ओएसडी रहे और अभी उनके पीए के तौर पर काम कर रहे चंदन जीना के यहां छापा मारा। उनके यहां से एक करोड़ रुपए से ज्यादा की बरामदगी की भी खबर आई। उसके बाद हरीश रावत ने कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। हालांकि ऐसा करने के लिए किसी ने उनको कहा नहीं था। तब माना गया कि वे अब खुद ब खुद नेतृत्व की रेस से हट रहे हैं। लेकिन असल में ऐसा नहीं हुआ।

हरीश रावत ने मुख्यमंत्री पद की रेस से खुद को अलग करने की बजाय ज्यादा गंभीरता से अपनी तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने पूरे प्रदेश में ‘धन्यवाद एवम जनसंवाद यात्रा’ शुरू कर दी। इसके लिए भी उन्होंने किसी से बात नहीं की और न पार्टी आलाकमान की मंजूरी ली। इसके बाद उनकी शिकायत पार्टी नेतृत्व के पास पहुंची और मल्लिकार्जुन खड़गे ने उनको दिल्ली तलब किया। बताया जा रहा है कि खड़गे ने उनसे कहा कि वे अपनी यात्रा स्थगित करें। उनसे कहा गया है कि पार्टी जल्दी ही सभी नेताओं के साथ बैठक कर चुनाव तैयारियों की समीक्षा करेगी। गौरतलब है कि प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोंदियाल और विधायक दल के नेता यशपाल आर्य की अपनी दावेदारी है। कांग्रेस तय नहीं कर पा रही है कि ब्राह्मण और दलित समीकरण पर जाए या ठाकुर को भी उसमें शामिल करे। भाजपा की ओर से पुष्कर सिंह धामी सीएम हैं और सीएम का चेहरा हैं इसलिए ठाकुर वोट टूटने की संभावना कम दिख रही है।

ज्ञानेश के हटने तक नहीं रूकेंगे: राहुल

नई दिल्ली। लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बुधवार को लगातार दूसरे दिन कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों के नेताओं के साथ प्रदर्शन के लिए सड़क पर उतरे। उन्होंने जंतर मंतर पर जाने की कोशिश की परंतु पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद राहुल ने कहा कि वे नहीं रूकने वाले हैं। राहुल ने दो टूक अंदाज में कहा, जब तक ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं हो जाता है तब तक हम नहीं रूकने वाले हैं…यह लड़ाई देश की सबसे पवित्र चीज को बचाने के लिए है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह कुछ भी करके हमें रोक नहीं सकते हैं।

इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी पार्टियों के सांसदों को बुधवार को कनॉट प्लेस में ‘सागर रत्ना’ रेस्तरां में दोपहर के भोजन पर बुलाया था। वहां से निकल कर सारे नेता जंतर मंतर की ओर बढ़े लेकिन पुलिस ने उनको रास्ते में रोक दिया। रोके जाने के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा सड़क पर लेट गईं। उनके हाथ में संविधान की कॉपी थी। प्रियंका ने पुलिस पर बदसलूकी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘क्या यही तरीका है? आप देख सकते हैं कि ये क्या कर रहे हैं’।

कांग्रेस और दूसरी पार्टियों के नेता बस में बैठ कर जंतर मंतर की ओर जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोका तो राहुल सड़क पर धरने पर बैठ गए। थोड़ी देर के बाद पुलिस उनको वहां से उठा कर ले गई। पुलिस ने राहुल और अन्य नेताओं को करीब एक घंटे तक बाराखंभा पुलिस स्टेशन में रखा। शाम में साढ़े सात बजे के करीब पुलिस ने सबको छोड़ दिया। उससे पहले राहुल को हिरासत में लेते समय कांग्रेस कार्यकर्ता की सुरक्षा बलों के साथ धक्कामुक्की भी हुई। पुलिस राहुल गांधी को जिस बस में लेकर जा रही थी, कांग्रेस कार्यकर्ता उसके ऊपर चढ़ गए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस की बस को भी पंक्चर कर दिया।

गौरतलब है कि एक दिन पहले मंगलवार को ‘इंडिया’ ब्लॉक के दो सौ से ज्यादा सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग के ऑफिस तक मार्च निकाला था, लेकिन उन्हें पहले ही रोक दिया गया। इसके बाद राहुल और प्रियंका ने आकाशवाणी परिसर में आठ घंटे धरना दिया था। आकाशवाणी परिसर में जबरन घुसने पर दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। विपक्षी पार्टियों के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ऊपर वोट चोरी के आरोप लगा रहे हैं और उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

इस बीच नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने कहा कि जंतर मंतर पर बीएनएसएस की धारा 163 लागू है। पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को जंतर मंतर पर जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। सचिन शर्मा ने सुरक्षाकर्मियों से सांसदों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने की अपील की। उन्होंने बताया कि सांसद और उनके समर्थक तीन बसों में जंतर मंतर जा रहे थे।

सपा नेता नहीं शामिल हुए

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शन के दूसरे दिन बुधवार को समाजवादी पार्टी के नेता कांग्रेस के साथ सड़क पर नहीं उतरे। मंगलवार को तो सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव निर्वाचन सदन के घेराव के कार्यक्रम में शामिल हुए। हालांकि बाद में वे राहुल और प्रियंका के साथ आकाशवाणी में धरने में शामिल नहीं हुए। दूसरे दिन यानी बुधवार को वे या उनकी पार्टी के दूसरे नेता विपक्ष के अभियान से दूर रहे। मंगलवार के प्रदर्शन में भी राहुल और अखिलेश के बीच गर्मजोशी नहीं दिखी।

गौरतलब है कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को विपक्षी पार्टियों के सांसदों और नेताओं के लिए दिन में भोजन का बंदोबस्त किया था। कनॉट प्लेस ‘सागर रत्ना’ रेस्तरां में दो सौ लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था थी। लेकिन सपा के नेता उसमें नहीं पहुंचे। सपा का कहना है कि उसको खड़गे के दोपहर भोज का न्योता देर से मिला। दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है कि यह कार्यक्रम ही देर से बना था इसलिए सबको देर से न्योता दिया गया। बहरहाल, कारण जो रहा हो लेकिन सपा के नेता खड़गे के लंच में भी नहीं पहुंचे और उसके बाद प्रदर्शन मे भी नहीं शामिल हुए।

आयोग और भाजपा पर राहुल का हमला

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ के दौरान संसद मार्ग पर रोके जाने के बाद चुनाव आयोग के साथ साथ केंद्र सरकार और भाजपा पर भी जोरदार हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने वोट चोरी करने में भाजपा की मदद की है। राहुल ने यह भी कहा कि भाजपा, चुनाव आयोग और आरएसएस ने देश में लोकतंत्र को खत्म कर दिया है। राहुल कई घंटे तक धरने पर भी बैठे रहे।

राहुल ने कहा, ‘तीन सौ लोकसभा और राज्यसभा के सांसद आए थे। हम चाहते थे ज्ञानेश कुमार और उनके दो चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते थे। पुलिस ने हमें रोका। चुनाव आयोग से 50 गज दूर बैठाकर रखा है हमें जाने नहीं दे रहे हैं। तीन सौ सांसद ज्ञानेश कुमार से मिलना चाहते हैं। ज्ञानेश कुमार डरे हुए हैं। अगर जनप्रतिनिधियों से चुनाव आयोग नहीं मिलेगा तो लोकतंत्र का क्या मतलब है’।

एक सवाल के जवाब में राहुल ने कहा, ‘मैं लोकतंत्र बचाने यहां खड़ा हूं। अमित शाह, नरेंद्र मोदी, ज्ञानेश कुमार और मोहन भागवत ने देश के लोकतंत्र को खत्म कर दिया है। देश के युवा ये बात जानते हैं’। उन्होंने आगे कहा, ‘चुनाव को मोदी, शाह ने हाइजैक किया है और ज्ञानेश कुमार ने उनकी मदद की है। यहां पुलिस वाले भी यही कर रहे हैं। इनमें से कोई भी बचकर नहीं जाएगा। जो इन्होंने देश के साथ किया है, वह देशद्रोह है’।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह आंदोलन देश के युवाओं, महिलाओं, किसानों और गरीबों के अधिकारों से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सत्ता में बने रहने के लिए लोगों के अधिकार छीन रही है और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है। खड़गे ने कहा कि जिस तरह से सत्ता हासिल की गई, वह उचित नहीं था और इसे तुरंत खत्म किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर देश में नौ राज्यों की विधानसभाएं भंग की जा सकती हैं, तो यहां की अवैध व्यवस्था भी खत्म होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता इस मुद्दे पर चुप नहीं रहेगी।

विपक्ष के इस प्रदर्शन में शामिल समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, ‘अगर ज्ञानेश कुमार निष्पक्ष हैं तो उन्हें हमारी बात सुननी चाहिए। यह लोकतंत्र बचाने की बात है। पुलिस को बच्चों के साथ और प्रदर्शनकारियों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए’।

‘Gyanesh, it’s done bro…’ का नारा लगाते बैरिकेड पर चढ़े राहुल गांधी; अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी सांसद डिटेन

Rahul Gandhi-India Bloc EC March: देश की राजधानी में मंगलवार को विपक्षी INDIA गठबंधन ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की अगुआई में दर्जनों विपक्षी सांसदों ने संसद के मकर द्वार से चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर विरोध मार्च निकाला। सुरक्षा बलों ने इस मार्च को संसद मार्ग पर ही नीति आयोग और आकाशवाणी भवन के बीच भारी बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।

बैरिकेड पर चढ़े राहुल गांधी, बोले- ‘ज्ञानेश, अब बहुत हुआ!’

सुरक्षा बलों द्वारा रास्ता रोके जाने पर माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। इसी दौरान राहुल गांधी प्रदर्शनकारियों के बीच लगे बैरिकेड्स पर चढ़ गए और हाथों में तिरंगा लहराते हुए सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मुख्य चुनाव आयुक्त को संबोधित करते हुए लिखा, ‘Gyanesh it’s done bro. Time to resign’ यानी ज्ञानेश, अब बहुत हो गया ब्रो! अब इस्तीफा देने का समय आ गया है।

इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, पवन खेड़ा और केसी वेणुगोपाल आकाशवाणी भवन के गेट तक पहुंच गए, जहां से पुलिस ने राहुल और प्रियंका गांधी को हिरासत में ले लिया।

सड़क पर ही धरने पर बैठे सांसद, कई बड़े चेहरे हिरासत में

बैरिकेडिंग के पास मार्च रुकने के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता अभिषेक बनर्जी व डेरेक ओ’ब्रायन और सीपीआई (एम) के जॉन ब्रिटास समेत तमाम सांसद सड़क पर ही धरने पर बैठ गए।

सांसदों ने हाथों में तख्तियां और पोस्टर ले रखे थे, जिनमें सीईसी ज्ञानेश कुमार को संघ (RSS) की गणवेश में दिखाया गया था। सांसदों ने ‘भाजपा है CEC है’, ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ और ‘लोकतंत्र बिकाऊ नहीं है’ जैसे तीखे नारे लगाए। बाद में पुलिस ने अखिलेश यादव और अभिषेक बनर्जी समेत कई नेताओं को बसों में भरकर हिरासत में ले लिया।

पैरामिलिट्री फोर्स तैनात, संजय राउत ने उठाए सवाल

विपक्ष के मार्च को देखते हुए संसद भवन और चुनाव आयोग मुख्यालय के आसपास तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था और भारी बैरिकेडिंग की गई थी। शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने इस भारी सुरक्षा बल की तैनाती पर तीखा हमला बोला।

संजय राउत ने कहा, ‘हम सांसद हैं, इस देश के जिम्मेदार नागरिक हैं। हमें रोकने के लिए इतनी बड़ी तादाद में सुरक्षा बल तैनात करने की क्या ज़रूरत थी? हम निहत्थे हैं और शांतिपूर्वक पैदल जा रहे थे।’ राउत ने यह भी दावा किया कि मौके पर बीएसएफ और सीआईएसएफ के जवानों को तैनात किया गया था और केंद्रीय मंत्रियों के आवासों की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई थी।

क्या है विवाद की वजह?

विपक्ष का यह भारी विरोध प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी के बाद सामने आया है, जो सोमवार को मतदाता नामांकन से जुड़े ‘फॉर्म 6’ (Form 6) को लेकर की गई थी। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि उसने फॉर्म 6 के किसी भी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है और वह चुनाव आयोग के रिकॉर्ड की जांच करेगी कि क्या नियमों में बदलाव किए गए थे और इसकी अनुमति किसने दी थी।

इसी मुद्दे पर चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को एक बयान जारी कर कहा था कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान फॉर्म 6 के साथ जोड़े गए घोषणापत्र को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के रुख को लेकर देश को गुमराह किया है।

आज निर्वाचन सदन घेरेगा विपक्ष

नई दिल्ली। मंगलवार का दिन दिल्ली में एक बार फिर बड़े प्रदर्शन का दिन होगा। विपक्षी पार्टियों के सभी बड़े नेता चुनाव आयोग के मुख्यालय यानी निर्वाचन सदन की ओर मार्च करेंगे और उसका घेराव करेंगे। 30 सितंबर को हुई विपक्षी पार्टियों की बैठक में इसका फैसला किया गया था। विपक्षी गठबंधन यानी ‘इंडिया’ ब्लॉक के सांसद दिल्ली में ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ निकालेंगे। वे संसद से चुनाव आयोग मुख्यालय तक करीब दो किलोमीटर पैदल जाएंगे।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि कांग्रेस पार्टी की तीन मांगे ऐसी हैं, जिन पर कोई समझौता नहीं होगा यानी ये  नॉन नेगोशिएबल हैं। उन्होंने लिखा कि कांग्रेस की पहली मांग यह है कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा हो। दूसरी मांग है कि एसआईआर को रद्द किया जाए और तीसरी मांग है कि बैलट पेपर से चुनाव कराया जाए। खड़गे ने कहा कि देश भर में कांग्रेस कार्यकर्ता और ‘इंडिया’ ब्लॉक के साथी दल इन तीन मुद्दों को लेकर सड़कों पर हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले 11 अगस्त 2025 को विपक्षी गठबंधन के सांसदों ने संसद भवन से चुनाव आयोग के ऑफिस तक मार्च निकाला था। इसमें राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, शरद पवार सहित 25 विपक्षी दल शामिल हुए थे। इस बार मंगलवार, छह अक्टूबर को विपक्ष की 19 पार्टियां के नेता मार्च निकालेंगे। इनके लोकसभा में 178 और राज्यसभा में 62 सांसद हैं।

निर्वाचन सदन को घेरेगा विपक्ष

नई दिल्ली। विपक्षी पार्टियों के गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक में बुधवार को बड़ा फैसला हुआ। बैठक में शामिल पार्टियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और इस्तीफा नहीं देने पर छह अक्टूबर को चुनाव आयोग के कार्यालय यानी नई दिल्ली के अशोक रोड पर स्थित निर्वाचन सदन का घेराव करेंगी। इस बीच दो से आठ अक्टूबर के बीच ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए विपक्षी पार्टियां पूरे देश में मार्च निकालेंगी।

गौरतलब है कि बुधवार को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में ‘इंडिया’ ब्लॉक की पार्टियों की बैठक हुई, जिसमें 19 पार्टियों के दो दर्जन से ज्यादा नेता शामिल हुए। सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, सीपीएम महासचिव एमए बेबी सहित कई बड़े नेता बैठक में शामिल हुए। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे वर्चुअल तरीके से बैठक में शामिल हुए। डीएमके और आम आदमी पार्टी ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया। समाजवादी पार्टी की ओर से दो सांसद बैठक में शामिल हुए।

करीब तीन घंटे चली बैठक में तीन बातों पर सहमति बनी। विपक्षी पार्टियों ने तय किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव लाया जाए। चुनाव आयोग से विपक्ष ने कहा कि मतदाता सूची से हटाए गए नामों को सार्वजनिक किया जाए। साथ ही नाम हटाने से पहले वोटर को नोटिस और अपील का मौका देने की मांग भी की गई। विपक्षी पार्टियों ने ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि बैठक में 19 पार्टियां शामिल हुईं, जिनके लोकसभा में 178 और राज्यसभा में 62 सांसद हैं।

बैठक के बाद खड़गे ने आरोप लगाया कि मोदी और शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग को कठपुतली बना दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा चुनाव आयोग के साथ वोट चोरी कर रही है। बैठक में ममता बनर्जी ने ज्ञानेश कुमार को चोर और डाकू कहा। उन्होंने कहा कि विपक्ष बड़ा आंदोलन करेगा और जरुरत हुई तो चांद, तारों तक जाएगा। राहुल गांधी ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ साथ प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी, अमित शाह और ज्ञानेश कुमार लोकतंत्र पर हमला कर रहे हैं। राहुल ने कहा, ‘हम एक गठबंधन हैं और देश में बड़ा बदलाव लाएंगे’। तेजस्वी यादव ने फॉर्म छह में किए गए बदलाव को विपक्ष की बड़ी जीत बताया।

हाल के चुनाव अवैध है: राहुल

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को कांग्रेस कार्य समिति यानी सीडब्लुसी की बैठक में कहा कि हाल के सभी चुनाव अवैध हैं। उन्होंने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त सरकार से समझौता कर चुके हैं। करीब ढाई घंटे तक चली सीडब्लुसी की बैठक के बारे में सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि राहुल ने कांग्रेस नेताओं से उनके ऊपर भरोसा करने को कहा। उन्होंने एक नियुक्ति पैनल की बैठक के बाद का किस्सा सुनाते हुए कहा कि बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माना की उनके बाद राहुल ही प्रधानमंत्री बनेंगे। यह किस्सा सुना कर राहुल ने कहा कि मोदी को जैसे उनके ऊपर भरोसा है वैसे ही कांग्रेस नेताओं को भी रखना चाहिए।

बहरहाल, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर हुए खुलासे पर विचार के लिए हुई कार्य समिति की बैठक में राहुल गांधी ने कहा, “मुख्य चुनाव आयुक्त पूरी तरह समझौता कर चुके हैं और देश की चुनाव व्यवस्था ‘फिक्स’ है। हाल के सभी चुनाव अवैध हैं”। राहुल गांधी ने आगे कहा, “चाहे ईवीएम हो या मतदाता सूची, दोनों से छेड़छाड़ की गई है। दोनों का इस्तेमाल भाजपा चुनाव जीतने की रणनीति के तौर पर कर रही है”।

बैठक में पार्टी ने एक प्रस्ताव मंजूर किया, जिसमें कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तत्काल इस्तीफा दें। इसके अलावा एसआईआर को तत्काल रोकने का प्रस्ताव भी मंजूर किया गया है। कांग्रेस ने इसमें कहा है कि हटाए गए 13 करोड़ 30 लाख नाम बहाल किए जाएं। मंगलवार को हुई बैठक में 68 सदस्यों ने हिस्सा लिया। कांग्रेस ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी वोटर लिस्ट और चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के मुद्दों को संसद में उठाएगी और प्रदर्शन करेगी।

बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मोदी सरकार की कठपुतली बन गए हैं। उन्हें तुरंत हटाया जाना चाहिए। मोदी सरकार ने व्यवस्थित रूप से उस मजबूत लोकतांत्रिक नींव को खोखला कर दिया है जिसे हमारे पूर्वजों ने बनाया था”। उन्होंने कहा, “पीएम मोदी ने युवाओं को वोट देने से रोकने की साजिश रची है। फॉर्म 6 से जुड़े नियमों में गैरकानूनी तरीके से बदलाव किया गया”।

विपक्ष की बैठक आज

नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में हुई गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मनमानियों को लेकर हुए खुलासे के बाद विपक्षी पार्टियों की एक अहम बैठक बुधवार को होगी। विपक्षी गठबंधन यानी ‘इंडिया’ ब्लॉक की पार्टियों के नेताओं की यह बैठक दिल्ली में होगी। हालांकि बैठक से पहले विपक्ष का बिखराव भी साफ दिख गया है। कई पार्टियों के नेता इसमें नहीं शामिल हो रहे हैं।

पिछली बैठक की ही तरह इस बार भी डीएमके और आम आदमी पार्टी इस बैठक में नहीं शामिल होंगे। गौरतलब है कि इस बैठक के समन्वय का काम कांग्रेस पार्टी देख रही है और बताया जा रहा है कि उसने आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को न्योता नहीं दिया। बहरहाल, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी बैठक में नहीं शामिल होंगे। यह भी कहा जा रहा है कि उनके चाचा रामगोपाल यादव भी बैठक से दूर रहेंगे और पार्टी की ओर से कोई अन्य नेता शामिल होगा। उद्धव ठाकरे भी बैठक के लिए दिल्ली नहीं आ रहे हैं। वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल होंगे।

विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक की पिछले तीन साल में यह आठवीं बैठक है। जून 2024 में लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद यह तीसरी बैठक है। लोकसभा के चुनाव नतीजों के तुरंत बाद एक बैठक हुई थी। उसके दो साल बाद आठ जून 2026 को बैठक हुई थी। उसमें एसआईआर और चुनाव आयोग को लेकर चर्चा हुई। उसमें तय हुआ था कि दो महीन बाद अगस्त में हैदराबाद में बैठक होगी। लेकिन वह बैठक नहीं हुई। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खोजी रिपोर्ट के बाद ममता बनर्जी ने विपक्ष की बैठक बुलाने की पहल की।

बहरहाल, बैठक से एक दिन पहले मंगलवार को बताया गया कि अखिलेश यादव 30 सितंबर को लखनऊ में किसानों के सम्मेलन में शामिल होंगे। कहा जा रहा है कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से इस बारे में बात भी की है। हालांकि कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि अखिलेश राज्यसभा चुनाव के नामांकन से जुड़ी व्यस्तता के कारण नहीं आएंगे।

बैठक में कांग्रेस की ओर से मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी शामिल होंगे। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी भी इसमें शामिल होंगे। राजद के तेजस्वी यादव, जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और सीपीएम के महासचिव एमए बेबी बैठक में शामिल होंगे। शरद पवार की पार्टी के भी बैठक में शामिल होने की खबर है। गौरतलब है कि पिछले दिनों एमए बेबी ने दिल्ली में अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की थी। लेकिन उन्होंने केजरीवाल को बैठक का न्योता नहीं दिया क्योंकि यह काम कांग्रेस को करना है।

कांग्रेस के सामने ईडी का खतरा

कांग्रेस पार्टी के सामने राजनीतिक चुनौती तो भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी की है ही लेकिन एक बड़ी चुनौती प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की है। वह चुनौती कब और कहां से कांग्रेस को परेशान करने लगेगी यह पता नहीं चल पाता है। कांग्रेस के एक जानकार नेता ने कहा कि कई बार लगता है कि अब क्या कर लेंगे? कांग्रेस नेता सोचते हैं कि सोनिया और राहुल गांधी से कई कई दिन की पूछताछ हो चुकी है, रॉबर्ट वाड्रा से कई बार पूछताछ हो चुकी है, डीके शिवकुमार से लेकर पी चिदंबरम तक अनेक नेता जेल घूम आए हैं, जो जेल नहीं गए उनमें भूपेंद्र सिंह हुड्डा से पूछताछ हो चुकी है इसलिए अब डरने की जरुरत नहीं है। लेकिन फिर कहीं और ईडी की कार्रवाई हो जाती है और पार्टी के लिए समस्या खड़ी हो जाती है।

ताजा मामला उत्तऱाखंड का है, जहां पांच महीने के बाद विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और कांग्रेस पार्टी उम्मीद कर रही है कि भाजपा की 10 साल की सरकार के खिलाफ एंटी इन्कम्बैंसी है, जिसका उसको फायदा होगा। लेकिन वहां चुनाव से ऐन पहले पार्टी के सबसे बड़े नेता हरीश रावत विवादों में फंस गए हैं। पिछले दिनों उनके निजी सचिव चंदन सिंह जीना के यहां ईडी ने छापा मारा और सवा करोड़ रुपए से अधिक की नकदी व संपत्ति जब्त की। हरीश रावत जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री थे तब जीना उनके ओएसडी होते थे। आज वे किसी सरकारी पद पर नहीं हैं लेकिन वे हरीश रालत के पीए हैं। इसलिए उनके यहां ईडी की कार्रवाई की आंच रावत तक आनी ही थी। सो, रावत ने कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। वे अभी कांग्रेस कार्य समिति के विशेष आमंत्रित सदस्य हैं और साथ ही प्रदेश कार्यकारिणी के भी सदस्य हैं। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रही है इसलिए वे नहीं चाहते कि उनकी वजह से पार्टी के अभियान पर किसी तरह की आंच आए। यह स्पष्ट रूप से नैतिक स्टैंड है लेकिन ईडी की कार्रवाई से भाजपा को मौका मिला है कि वह कांग्रेस के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।

उत्तराखंड से पहले ईडी ने कर्नाटक में कार्रवाई की थी। ईडी ने पिछले हफ्ते कर्नाटक की डीके शिवकुमार सरकार के मंत्री सतीश जरकिहोली और उनकी सांसद बेटी प्रियंका के यहां छापा मारा। जरकिहोली परिवार बहुत मजबूत राजनीतिक परिवार है। उनमें भी सतीश का किस्सा बहुत दिलचस्प है। सतीश जरकिहोली एक समय सिद्धारमैया के सबसे करीबी लोगों में से थे। वे सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र और मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक के साथ मिल कर पिछड़ा, दलित व अल्पसंख्यक के अहिंदा समीकरण को आगे बढ़ाते थे और खुल कर शिवकुमार का विरोध करते थे। लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद शिवकुमार ने ऐसा जादू किया कि वे उनके खेमे में आ गए। इससे सिद्धारमैया नाराज हुए। कांग्रेस के अंदरूनी समीकरण में उनके पाला बदलने के दो महीने में उनके यहां ईडी का छापा पड़ गया। अब वे कह रहे हैं कि कांग्रेस के ही कुछ लोगों ने उनके यहां कार्रवाई कराई है और वे उन लोगों को जानते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को उन लोगों के बारे में बताया है। ईडी ने कांग्रेस को केरलम में अलग तरह से मुश्किल में डाला है। उसने कांग्रेस सरकार से कहा है कि वह पूर्व मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन, उनकी बेटी और दामाद के खिलाफ एसीबी से भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज कराए। कांग्रेस के लिए यह सांप छुछुंदर वाली गति है। उसका कोई भी कदम केरलम में भाजपा को फायदा पहुंचाने वाला होगा।