तीसरा बच्चा होने पर चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य, नियम पर Supreme Court ने क्या कहा, क्यों बताया गैर जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत और अन्य स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए लागू 'दो बच्चों की शर्त' (Two-Child Norm) की वैधता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा कि जिस नीति को कभी बढ़ती आबादी पर नियंत्रण के लिए बनाया गया था, वह आज के बदले जनसांख्यिकीय हालात में शायद अपना उद्देश्य पूरा कर चुकी है। ऐसे में इस नियम को जारी रखने का औचित्य दोबारा परखा जाना चाहिए।

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जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आलोक अराधे की पीठ महाराष्ट्र की पूर्व सरपंच मंगला भीमराव इंगले की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इंगले को तीसरा बच्चा होने के आधार पर महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम, 1959 की धारा 14(1)(j-1) के तहत अयोग्य घोषित कर दिया गया था।

 

'देश बदल गया है, नीति पर फिर से विचार जरूरी'

सुनवाई के दौरान जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने वर्ष 2003 के जावेद बनाम हरियाणा राज्य फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में इस नीति पर पुनर्विचार की जरूरत है। उन्होंने टिप्पणी की कि देश की जनसंख्या और प्रजनन दर (Fertility Rate) में बड़ा बदलाव आ चुका है, इसलिए पुराने आधार पर बनी नीति को अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रखा जा सकता। पीठ ने इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता रुक्मिणी बोबडे को एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) के रूप में सहायता देने के लिए कहा है।

घटती फर्टिलिटी रेट का दिया हवाला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत का कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate) अब करीब 1.7 रह गया है। वहीं, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में यह दर कई स्कैंडिनेवियाई देशों से भी कम है। अदालत ने कहा कि जब कई राज्य अब घटती जन्म दर की चुनौती का सामना कर रहे हैं, तब केवल आबादी नियंत्रण के नाम पर दो-बच्चे की शर्त लागू रखना तर्कसंगत नहीं दिखता।

'विरोधी इसे हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं'

सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी कहा कि वर्तमान समय में तीन बच्चों वाला परिवार असामान्य नहीं माना जा सकता। अदालत ने टिप्पणी की कि इस नियम का इस्तेमाल कई बार चुनावी प्रतिद्वंद्वी विरोधियों को अयोग्य ठहराने के हथियार के रूप में करते हैं। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि इस नीति का प्रभाव अब समाप्त हो चुका है और इसे वापस लेने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले की काकोडा ग्राम पंचायत की सरपंच चुनी गईं मंगला भीमराव इंगले के खिलाफ शिकायत की गई थी कि उनका तीसरा बच्चा है। इसके आधार पर अतिरिक्त कलेक्टर ने अक्टूबर 2024 में उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया।
 

बाद में अतिरिक्त आयुक्त ने उनकी अपील खारिज कर दी और अगस्त 2025 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा। हाई कोर्ट ने माना कि जन्म प्रमाण पत्र एक सार्वजनिक दस्तावेज है और याचिकाकर्ता उसे गलत साबित नहीं कर सकीं। अब सुप्रीम कोर्ट इस बात पर विचार करेगा कि बदलते सामाजिक और जनसांख्यिकीय हालात में दो-बच्चे की शर्त को जारी रखना संवैधानिक रूप से उचित है या नहीं।

कल का मौसम : अगले 12 घंटों में बदलेगा इन 22 राज्यों का मिजाज! IMD ने जारी किया भारी बारिश और आंधी का अलर्ट

Weather conditions in these 22 states set to change over next 12 hours, IMD issues alert for heavy rain   and thunderstorms

देशभर में मॉनसून एक बार फिर से बेहद आक्रामक रूप ले चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज दोपहर ताजा बुलेटिन जारी करते हुए अगले 12 से 24 घंटों के भीतर देश के 22 राज्यों में मूसलाधार बारिश का ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया है। अगर आप भी कल यानी 16 जुलाई को किसी जरूरी काम या यात्रा के लिए घर से बाहर निकलने वाले हैं, तो पहले अपने शहर और राज्य के मौसम का हाल जरूर जान लें।

 

बंगाल की खाड़ी में एक्टिव हुआ नया सिस्टम

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में एक नया कम दबाव का क्षेत्र (Low-Pressure Area) सक्रिय हो गया है। सैटेलाइट तस्वीरों से साफ दिख रहा है कि समंदर से भारत के मैदानी इलाकों की तरफ बादलों का एक विशाल 'व्हाइट जोन' तेजी से बढ़ रहा है।

 

इस सिस्टम के कारण मॉनसून की ट्रफ लाइन (Monsoon Trough) अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर खिसक गई है, जिससे मध्य, उत्तर और पश्चिमी भारत में भारी नमी वाली हवाएं टकरा रही हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 12 घंटों के भीतर इन हवाओं की रफ्तार 50 से 60 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है।

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किन 22 राज्यों में है भारी बारिश की चेतावनी?

IMD द्वारा जारी आधिकारिक चेतावनी के अनुसार, अगले 24 घंटों के दौरान भारत के तीन बड़े हिस्सों में मौसम का सबसे उग्र रूप देखने को मिल सकता है :

 

1. उत्तर और मध्य भारत (North & Central India)

दिल्ली-NCR और उत्तर प्रदेश : दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद सहित पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों में कल सुबह से ही रुक-रुक कर तेज बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है।

 

मध्य प्रदेश और राजस्थान : एमपी के पूर्वी हिस्सों (जैसे जबलपुर, रीवा) और राजस्थान के दक्षिणी जिलों (जैसे उदयपुर, कोटा) में भारी से अत्यंत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। यहाँ कुछ इलाकों में 120mm तक बारिश दर्ज की जा सकती है।

 

पंजाब और हरियाणा : इन राज्यों के तराई वाले इलाकों में तेज हवाओं के साथ मध्यम बारिश की उम्मीद है।

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2. पश्चिमी और तटीय क्षेत्र (West & Coastal Regions)

महाराष्ट्र और मुंबई : कोंकण और मुंबई के तटीय इलाकों में समुद्र में ऊंची लहरें उठने और निचले इलाकों में जलजमाव (Waterlogging) की आशंका जताई गई है। मछुआरों को अगले दो दिनों तक समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।

 

गुजरात और गोवा : गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में मानसून की सक्रियता बढ़ने से भारी बारिश का दौर शुरू होने वाला है।

 

3. पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत (East & Northeast India)

ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार : नए मौसमी सिस्टम का सबसे पहला असर ओडिशा और बंगाल के तटीय जिलों पर दिखेगा। यहां आज रात से ही मूसलाधार बारिश शुरू होने का अनुमान है।

 

असम और मेघालय : पूर्वोत्तर के इन राज्यों में पहाड़ी इलाकों पर भूस्खलन (Landslide) की चेतावनी जारी की गई है।

 

IMD की एडवायज़री : भारी बारिश के अलर्ट को देखते हुए मौसम विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे जलभराव वाले इलाकों से दूर रहें, बिजली के खंभों के पास खड़े न हों और यात्रा पर निकलने से पहले स्थानीय ट्रैफिक व वेदर अपडेट्स की जांच अवश्य कर लें।

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आपके शहर में कल कैसा रहेगा तापमान?

बारिश और ठंडी हवाओं के चलने से उत्तर और मध्य भारत के राज्यों में उमसभरी गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी। दिल्ली-NCR में अधिकतम तापमान गिरकर 31°C और न्यूनतम तापमान 25°C के आसपास रहने का अनुमान है। वहीं मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य से 3 से 4 डिग्री सेल्सियस नीचे जा सकता है, जिससे मौसम खुशनुमा बना रहेगा।

 

मौसम की पल-पल की लाइव रिपोर्ट और अपने जिले के सटीक पूर्वानुमान के लिए हमारे साथ बने रहें।

Mausam Update 15 July: बिहार, बंगाल और ओडिशा में मूसलाधार बारिश की चेतावनी, ये 3 चक्रवाती सिस्टम एक्टिव! IMD ने इन 14 राज्यों के लिए जारी किया अलर्ट

Mausam Update 15 July: देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर पूरी रफ्तार पकड़ चुका है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 15 जुलाई के लिए एक नया वेदर बुलेटिन जारी कर बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा समेत देश के 14 राज्यों में भारी से अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में एक नया कम दबाव का क्षेत्र बन गया है। इसके साथ ही तीन बड़े चक्रवाती सिस्टम और सक्रिय हो गए हैं। इनके प्रभाव से मूसलाधार बारिश के साथ-साथ तेज आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने का भी गंभीर खतरा बना हुआ है।

आइए जानते हैं 15 जुलाई को लेकर मौसम विभाग का विस्तृत पूर्वानुमान और इसके पीछे काम कर रहे एक्टिव चक्रवाती सिस्टम।

देश में अभी एक्टिव वेदर सिस्टम: बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र

मौसम विभाग के मुताबिक इस समय देश में कई मजबूत चक्रवाती प्रणालियां सक्रिय हैं। ये मानसून को रफ्तार दे रही हैं।

लो प्रेशर एरिया और चक्रवाती परिसंचरण: उत्तर बंगाल की खाड़ी और उससे सटे दक्षिण बांग्लादेश के ऊपर सक्रिय वेदर सिस्टम के प्रभाव से आज उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, उत्तरी ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटों के पास एक कम दबाव का क्षेत्र बन गया है। इससे संबद्ध चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से 7.6 किमी ऊपर तक फैला हुआ है और ऊंचाई के साथ दक्षिण-पश्चिम की ओर झुका हुआ है। इसके अगले 2 दिनों के दौरान उत्तरी ओडिशा और गांगेय पश्चिम बंगाल से होते हुए पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने की प्रबल संभावना है।

गुजरात और राजस्थान में सिस्टम: उत्तरी गुजरात और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के ऊपर समुद्र तल से 5.8 किमी की ऊंचाई पर एक चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) बना हुआ है।

उत्तर प्रदेश में चक्रवाती प्रणाली: पूर्वी उत्तर प्रदेश और उसके आस-पास के इलाके में भी समुद्र तल से 5.8 किमी की ऊंचाई पर एक चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है।

पश्चिमी विक्षोभ: उत्तरी पाकिस्तान और उससे सटे जम्मू के ऊपर समुद्र तल से 5.8 किमी की ऊंचाई पर चक्रवाती परिसंचरण के रूप में एक पश्चिमी विक्षोभ बना हुआ है।

मानसून ट्रफ: समुद्र तल पर मानसून ट्रफ वर्तमान में जम्मू, देहरादून, बरेली, गोरखपुर, पटना, बांकुरा और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी (उत्तरी ओडिशा-पश्चिम बंगाल तटों के पास) में बने कम दबाव के क्षेत्र के केंद्र से होते हुए दक्षिण-पूर्व दिशा में पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी की ओर गुजर रही है।

ओडिशा में अत्यंत भारी बारिश की रेड वॉर्निंग, बिहार और गांगेय बंगाल में ऑरेंज वॉर्निंग

मौसम विभाग ने ओडिशा के अलग-अलग जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ कुछ हिस्सों में अत्यंत भारी बारिश होने की आशंका जताई है। बिहार और गांगेय पश्चिम बंगाल के अलग-अलग हिस्सों में 15 जुलाई को भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है।

इन 11 राज्यों में होगी भारी बारिश

मौसम विभाग के मुताबिक 15 जुलाई को देश के नीचे दिए राज्यों में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश होने की पूरी संभावना है:-

उत्तराखंड

झारखंड

छत्तीसगढ़

तटीय आंध्र प्रदेश

उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम

अरुणाचल प्रदेश

असम और मेघालय

नागालैंड

मणिपुर

मिजोरम

त्रिपुरा

आंधी-तूफान, बिजली चमकने और तेज हवाओं की चेतावनी

सक्रिय चक्रवाती सिस्टम के कारण देश के बड़े हिस्से में तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गांगेय पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख और झारखंड में अलग-अलग जगहों पर बिजली चमकने और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं (झोंकों) के साथ आंधी चलने की संभावना है।

आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, केरल और माहे तथा तेलंगाना में गरज-चमक, आकाशीय बिजली और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं का अलर्ट है। इसके साथ ही कर्नाटक, केरल और माहे, रायलसीमा तथा तेलंगाना में अलग-अलग स्थानों पर तेज सतही हवाएं भी चलेंगी।

अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय, छत्तीसगढ़, कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र, मरठवाड़ा, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम संग उत्तराखंड में अलग-अलग जगहों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका जताई गई है।

इन राज्यों में दिखेगा हीट वेव और उमस का डबल अटैक

एक तरफ जहां देश के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश हो रही है वहीं कुछ राज्यों में गर्मी और उमस का प्रकोप भी जारी रहेगा। तटीय आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में अलग-अलग जगहों पर लू की स्थिति बनी रहने की संभावना है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, तटीय कर्नाटक, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक, रायलसीमा, तेलंगाना और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराईकल में मौसम काफी गर्म और उमस भरा रहने की संभावना है।

समुद्र में मौसम का हाल: मछुआरों के लिए अलर्ट

पश्चिम-मध्य अरब सागर के अधिकांश हिस्सों, उससे सटे पूर्व-मध्य, उत्तर और दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के कुछ हिस्सों, सोमालिया व ओमान तटों के साथ-साथ उत्तरी गुजरात और उससे सटे दक्षिणी गुजरात तटों पर 45-55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं (जो बढ़कर 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं) चलने की संभावना है। मन्नार की खाड़ी, दक्षिण श्रीलंका और उससे सटे दक्षिण व पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में 45-55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार (झोंके 65 किमी प्रति घंटे) से तेज हवाएं चल सकती हैं।

ओडिशा, गांगेय पश्चिम बंगाल के तटों के पास और अंडमान सागर में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) से चलने वाली तूफानी हवाओं के साथ प्रतिकूल मौसम रहने का अनुमान है। मछुआरों को इन क्षेत्रों में समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।

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भारी बारिश की रेड वॉर्निंग 15 जुलाई: बिहार संग इन 14 राज्यों में भयानक बारिश का अलर्ट, चक्रवाती सिस्टम एक्टिव होने से आंधी-तूफान का भी खतरा

IMD Red alert for heavy rain on July 15: देश के कई हिस्सों में मानसून रौद्र रूप धारण कर चुका है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 15 जुलाई के लिए देश के कई राज्यों में भारी से अत्यंत भारी बारिश का रेड और ऑरेंज वॉनिंग जारी की है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण और कई दूसरे वेदर सिस्टम्स की वजह से बिहार, ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों समेत कुल 14 से अधिक राज्यों में मूसलाधार बारिश, आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने का गंभीर खतरा बना हुआ है। आइए जानते हैं 15 जुलाई को लेकर मौसम विभाग का विस्तृत पूर्वानुमान और इसके पीछे काम कर रहे एक्टिव चक्रवाती सिस्टम।

एक्टिव वेदर सिस्टम: बंगाल की खाड़ी में बनेगा कम दबाव का क्षेत्र

मौसम विभाग के मुताबिक इस समय देश में कई मजबूत चक्रवाती सिस्टम और ट्रफ लाइन एक्टिव हैं। समुद्र तल पर मानसून ट्रफ वर्तमान में जम्मू, देहरादून, बाराबंकी, पटना, बांकुरा, कैनिंग से होते हुए दक्षिण-पूर्व दिशा में पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी की ओर गुजर रही है। उत्तर बंगाल की खाड़ी और उससे सटे दक्षिण बांग्लादेश के ऊपर समुद्र तल से 7.6 किमी की ऊंचाई तक विस्तृत एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है, जो ऊंचाई के साथ दक्षिण-पश्चिम की ओर झुका हुआ है। इसके असर से अगले 24 घंटों के दौरान उत्तर बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बंगाल-बांग्लादेश तटों पर एक कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है।

उत्तरी गुजरात और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के ऊपर समुद्र तल से 5.8 किमी ऊपर एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। उत्तरी पाकिस्तान और उससे सटे जम्मू के ऊपर समुद्र तल से 5.8 किमी की ऊंचाई पर चक्रवाती परिसंचरण के रूप में पश्चिमी विक्षोभ बना हुआ है। इसके अलावा दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश और उसके पड़ोस में भी 5.8 किमी की ऊंचाई पर एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है।

ओडिशा में अत्यंत भारी बारिश और बिहार में ‘वेरी हैवी’ रेन का अलर्ट

ओडिशा (रेड वॉर्निंग): मौसम विभाग ने 15 जुलाई को ओडिशा के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश होने की प्रबल आशंका जताई है।

वहीं बिहार के अलग-अलग हिस्सों में 15 जुलाई को भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है। इसके साथ ही राज्य में 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं, आंधी और बिजली चमकने का भी अलर्ट जारी किया गया है।

इन 12 राज्यों में होगी भारी बारिश

मौसम विभाग के मुताबिक 15 जुलाई को देश के नीचे दिए गए राज्यों में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश होने की पूरी संभावना है:-

उत्तराखंड

पश्चिम बंगाल और सिक्किम

झारखंड

छत्तीसगढ़

अरुणाचल प्रदेश

असम और मेघालय

नागालैंड

मणिपुर

मिजोरम

त्रिपुरा

आंधी-तूफान, बिजली चमकने और तेज हवाओं की चेतावनी

चक्रवाती सिस्टम एक्टिव होने के कारण देश के कई राज्यों में तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गांगेय पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख और झारखंड में अलग-अलग जगहों पर बिजली चमकने और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं (झोंकों) के साथ आंधी चलने की संभावना है।

आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, केरल और माहे तथा तेलंगाना में गरज-चमक, आकाशीय बिजली और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं का अलर्ट है। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और माहे और तेलंगाना में अलग-अलग जगहों पर तेज सतही हवाएं भी चलेंगी।

अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय, छत्तीसगढ़, कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के साथ उत्तराखंड में अलग-अलग जगहों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका है।

इन राज्यों में सताएगी हीट वेव और उमस भरा मौसम

एक तरफ जहां कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट है, वहीं कुछ राज्यों में गर्मी और उमस का प्रकोप भी बना रहेगा। तटीय आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में अलग-अलग जगहों पर लू की स्थिति बनी रहने की संभावना है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, तटीय कर्नाटक, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक, रायलसीमा, तेलंगाना और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराईकल में मौसम काफी गर्म और उमस भरा रहने की संभावना है।

समुद्र में मौसम का हाल: मछुआरों के लिए चेतावनी

पश्चिम-मध्य अरब सागर के अधिकांश हिस्सों, उससे सटे उत्तर-पश्चिम अरब सागर, दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के कुछ हिस्सों और सोमालिया व ओमान तटों के साथ-साथ 45-55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाएं (जो बढ़कर 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं) चलने की संभावना है।

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दक्षिण श्रीलंका और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में 45-55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। ओडिशा, गांगेय पश्चिम बंगाल के तटों के पास और अंडमान सागर में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) से चलने वाली तूफानी हवाओं के साथ प्रतिकूल मौसम रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है।

नासिक में वॉटरफॉल घूमने गए परिवार का 15 KM पीछा किया, मारपीट की, कार भी फोड़ी

nashik car attack

महाराष्ट्र के नासिक में कुछ लोगों ने वॉटरफॉल पर घूमने गए एक परिवार का लगभग 15 किलोमीटर तक पीछा किया और उनके साथ मारपीट की। उनकी गाड़ी पर रॉड से हमले किए। परिवार की एक महिला ने छेड़छाड़ का विरोध किया था। मामले में 9 आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया है। ALSO READ: रूह कंपा देगा इंदौर का ये हत्‍याकांड, पत्नी को तड़पाकर मारा, नए कपड़े पहने, तिलक लगाया, ऑनलाइन मंगाया था 7 लेयर कट चाकू

 

इस दिल दहला देने वाली घटना से महाराष्ट्र के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों पर कानून-व्यवस्था और पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पर्यटक परिवार द्वारा छेड़छाड़ का विरोध करने से नाराज बदमाशों ने न केवल उन पर बेरहमी से हमला किया, बल्कि कई किलोमीटर तक उनकी कार का पीछा करते हुए लोहे की सरियों और डंडों से हमला किया तथा कार के शीशे भी तोड़ दिए। घटना के बाद डरे-सहमे परिवार ने सीधे पुलिस थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।

क्या है मामला? 

पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, नासिक के भागवत परिवार के 8 सदस्य रविवार को इगतपुरी कस्बे में भवाली डैम गए थे। जब परिवार वापस लौटने की तैयारी कर रहा था, तभी दो स्थानीय युवकों ने परिवार की एक युवती के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी और उस पर अश्लील टिप्पणियां करने लगे। जब परिवार ने इसका विरोध किया तो आरोपी वहां से चला गया और कुछ समय के लिए स्थिति सामान्य हो गई।

 

पीड़ित महिला के अनुसार, विवाद शांत होने के कुछ ही देर बाद 8 से 10 स्थानीय युवकों का एक समूह वहां पहुंच गया। वे चिल्लाते हुए बोले, “तुमने हमारे लोगों से झगड़ा क्यों किया?” इसके बाद जब परिवार कार से वहां से निकला, तो बदमाशों ने बाइक पर फिल्मी अंदाज में उनका पीछा करना शुरू कर दिया। ALSO READ: राम मंदिर दान चोरी कांड पर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी का बड़ा खुलासा

 

आरोपियों ने करीब 15 से 20 किलोमीटर तक परिवार की कार का पीछा किया। रास्ते में कई बार कार को ओवरटेक कर रोकने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने चलती कार पर लोहे की सरियों और भारी लकड़ी के डंडों से लगातार हमला किया, जिससे कार के पीछे और साइड के शीशे टूट गए। परिवार किसी तरह जान बचाने में सफल रहा।

 

पुलिस ने 9 आरोपियों को हिरासत में लिया

SP धोंडोपांत स्वामी ने कहा कि शुरुआती FIR दर्ज होने के बाद, हमने वीडियो रिव्यू और तकनीकी जांच समेत पूरी जांच-पड़ताल की और अब तक 9 आरोपियों की पहचान कर ली है। हालांकि शुरुआती FIR में 6 या 7 संदिग्धों के नाम थे, लेकिन हमने जांच का दायरा बढ़ाते हुए उन लोगों को भी इसमें शामिल किया है जिन्होंने उन्हें पनाह दी या जो उनके साथी थे। हमने अब 9 आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। आगे की कानूनी कार्रवाई अभी चल रही है।
 

भाजपा विधायक ने क्या कहा?

भाजपा विधायक देवयानी फरांडे ने कहा कि स्थानीय गुंडों द्वारा पर्यटकों पर हमले के बाद, नासिक ग्रामीण एसपी ने मुख्यमंत्री के आदेश पर कार्रवाई करते हुए हमलावरों को 24 घंटे के भीतर जेल भेज दिया जाए। नासिक ग्रामीण पुलिस पर्यटकों को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति से सख्ती से निपटेगी।

 

भारत में इंजीनियर बनने का सपना फीका क्यों पड़ रहा है?

Engineering Colleges Closing in India

समीरात्मज मिश्र

एक समय इंजीनियरिंग कॉलेज खोलना एक सुरक्षित कारोबार माना जाता था। आज उनमें से कई खाली हैं या बंद हो रहे हैं। आखिर ऐसा क्या बदला कि इंजीनियर बनने का सपना लाखों युवाओं के लिए पहले जैसा आकर्षक नहीं रहा? ALSO READ: पर्यावरण संरक्षण में क्यों पिछड़ रहा है भारत

 

करीब डेढ़ दशक पहले उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में इंजीनियरिंग कॉलेज खोलना सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता था। हर साल हजारों छात्र बीटेक में दाखिला लेते थे और निजी कॉलेजों का तेजी से विस्तार हो रहा था। लेकिन अब वही संस्थान छात्रों के इंतजार में खाली पड़े हैं। कई कॉलेज बंद हो चुके हैं और कई बंद होने की कगार पर हैं। एक समय जिस तकनीकी शिक्षा को रोजगार की गारंटी माना जाता था, वही मॉडल आज सवालों के घेरे में है।

 

यही नहीं, इंजीनियरिंग की महंगी डिग्री लेने के बाद छात्रों को या तो बेरोजगारी का सामना करना पड़ता है या फिर बहुत कम तनख्वाह वाली नौकरियां मिलती हैं। नतीजा यह हुआ कि इंजीनियरिंग और एमबीए जैसे तमाम अन्य तकनीकी संस्थान धीरे-धीरे बंद होते जा रहे हैं।

 

ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन यानी एआईसीटीई की एक ताजा रिपोर्ट ने न सिर्फ इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक गंभीर चेतावनी दी है बल्कि देश के शैक्षिक परिवेश और बेरोजगारी की स्थिति पर भी सोचने को मजबूर किया है। एआईसीटीई के मुताबिक, शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान देश भर में 58 से ज्यादा इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थान बंद कर दिए गए।

 

जिन राज्यों में ये कॉलेज बंद हुए हैं, उनमें उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र शीर्ष पर हैं। इन दोनों राज्यों में 12-12 संस्थान बंद हुए हैं जबकि मध्य प्रदेश में आठ और तेलंगाना और पंजाब में चार-चार संस्थान बंद हुए हैं। इन 58 संस्थानों में से तीन सरकारी मदद वाले थे, जबकि बाकी निजी तौर पर संचालित हो रहे थे। ALSO READ: अमेरिकी नागरिकता के पक्ष में फैसले से क्यों खुश हैं भारतीय

 

क्यों बंद हो रहे हैं कॉलेज?

दरअसल, एआईसीटीई उन स्थितियों में किसी संस्थान को बंद करने का आदेश देती है जब वहां छात्रों का दाखिला लगातार कम हो रहा हो, संस्थान में स्वीकृत संख्या में शिक्षकों की कमी हो और इंफ्रास्ट्रक्चर और संचालन के नियमों का सही तरीके से पालन न हो रहा हो।

 

एआईसीटीई भारत में तकनीकी शिक्षा के लिए कानूनी तौर पर बनी राष्ट्रीय संस्था और नियामक है। यह इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, मैनेजमेंट और फार्मेसी जैसे कार्यक्रमों की देख-रेख करती है और गुणवत्ता और मानक बनाए रखने की निगरानी करती है।

 

नोएडा के एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज में मेकेनेकिल इंजीनियरिंग पढ़ाने वाले एक शिक्षक नाम न बताने की शर्त पर कहते हैं कि चार साल की पढ़ाई के दौरान एक छात्र औसतन आठ-दस लाख रुपये खर्च करता है लेकिन इस खर्च के अनुरूप उन्हें नौकरी नहीं मिलती।

 

उनके मुताबिक, “कई कॉलेजों की फीस तो और भी ज्यादा है। चार साल में इंजीनियर बनकर जब छात्र बाहर जाते हैं तो उन्हें 15-20 हजार महीने की नौकरी के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। यही नहीं, इसके बाद वो फिर उन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं जिसके लिए सिर्फ स्नातक की अर्हता होती है। तो धीरे-धीरे पेरेंट्स को भी लगता है कि बीटेक कराने से फायदा ही क्या?” ALSO READ: पश्चिम बंगाल: पुलिस मुठभेड़ में अभियुक्त की मौत से उठे सवाल

 

समस्या सिर्फ रोजगार की नहीं है

यानी समस्या सिर्फ रोजगार की नहीं है, बल्कि चार साल की पढ़ाई पर होने वाले निवेश और उससे होने वाले लाभ या रिटर्न के बिगड़ते समीकरण की भी है। दीपाली राज मध्य प्रदेश की रहने वाली हैं। नोएडा के एक प्रतिष्ठित कॉलेज से उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। वो बताती हैं, “कैंपस प्लेसमेंट में जो ऑफर मिले, उनकी सैलरी चार साल की पढ़ाई पर हुए खर्च के मुकाबले बहुत कम थी। इसलिए मैंने बैंकिंग की तैयारी शुरू कर दी। कम से कम वहां नौकरी की स्थिरता तो है”

 

दीपाली पिछले तीन साल से तैयारी में हैं लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली। दीपाली कहती हैं कि उनकी तरह हजारों की संख्या में इंजीनियरिंग करने वाले छात्र इन परीक्षाओं की तैयारी क रहे हैं। वजह यह कि कम से कम स्थाई नौकरी तो मिल जाएगी, बीटेक की डिग्री में इसकी गारंटी नहीं है।

 

प्राइवेट संस्थानों के बंद होने के पीछे और भी कई कारण हैं। जानकारों के मुताबिक, एक तो ये अभी भी पुराने पाठ्यक्रमों के हिसाब से चल रहे हैं जबकि आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस के जमाने में चीजें बहुत तेजी से बदल रही हैं। इसके अलावा बीटेक के पाठ्यक्रमों का विकल्प अन्य पाठ्यक्रमों में भी है जिन्हें पूरा करने में समय भी कम लगता है और खर्च भी।

 

गाजियाबाद के एबीईएस कॉलेज में कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसर आदित्य टंडन बताते हैं, “बीटेक में भीड़ बढ़ गई है। डेटा साइंस में भरमार हो गई है और इसमें सिर्फ बीटेक ही नहीं चाहिए, दूसरे क्षेत्रों के लोग भी आते हैं। इसके अलावा, बीटेक के विकल्प के रूप में बीसीए, बीएससी कंप्यूटर साइंस जैसे कोर्स तीन साल में ही हो जा रहे हैं। इनका पाठ्यक्रम बीटेक जैसा ही है। यही नहीं, कई प्रोग्राम ऑनलाइन और डिस्टेंस लर्निंग मोड में भी हैं। तो छात्रों को यह भी एक विकल्प मिल जाता है। छात्रों की संख्या में कमी की वजह ये भी है।”

 

तकनीक तेजी से बदल रही है

पिछले कुछ वर्षों में आईटी और तकनीकी कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया भी बदली है। कई कंपनियां अब केवल डिग्री के आधार पर भर्ती करने के बजाय उम्मीदवार के कौशल, प्रोजेक्ट, इंटर्नशिप और समस्या सुलझाने की क्षमता पर ज्यादा जोर दे रही हैं। ऐसे में केवल बीटेक की डिग्री नौकरी की गारंटी नहीं रह गई है।

 

यहीं एक दिलचस्प सवाल भी खड़ा होता है कि यदि इंजीनियरिंग का आकर्षण कम हो रहा है, तो फिर हर साल लाखों छात्र जेईई जैसी परीक्षाओं की तैयारी क्यों कर रहे हैं?

 

दिल्ली, कोटा, पुणे, कानपुर जैसी जगहों पर लाखों की संख्या में छात्र इन्हीं प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। दिल्ली में एक इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले दुर्गेश कुमार खुद भी आईआईटी से इंजीनियर रहे हैं। नौकरी करने की बजाय उन्होंने छात्रों को पढ़ाने का फैसला किया।

 

डीडब्ल्यू से बातचीत में दुर्गेश कहते हैं, “यह कहना ठीक नहीं है कि इंजीनियरिंग में लोगों की दिलचस्पी कम हो गई है। लेकिन हां, उन संस्थानों से बीटेक का क्रेज जरूर खत्म हुआ है जहां पढ़ाई, ट्रेनिंग और प्लेसमेंट का स्तर कमजोर है। जो संस्थान इसे सिर्फ पैसा कमाने का जरिया बनाए हुए हैं। आज भी आईआईटी, एनआईटी और तमाम अन्य संस्थानों की मांग वैसी ही बनी हुई है जैसी बीस-तीस साल पहले थी। इसका कारण है कि इन संस्थानों ने अपनी गुणवत्ता बरकरार रखी है और आधुनिक तकनीक और समय के हिसाब से खुद को ढालते रहे हैं। ज्यादातर संस्थान सरकारी नियंत्रण में हैं जहां पैसा कमाना संस्थान का लक्ष्य नहीं बल्कि संस्थान से बेहतर प्रशिक्षित लोग तैयार करना है।”

 

सिर्फ यही संस्थान टिक पाएंगे

जानकारों का मानना है कि उद्योगों की मांग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर जैसी नई तकनीकों की ओर बढ़ रही है। जिन संस्थानों ने समय के अनुरूप अपने पाठ्यक्रम, प्रयोगशालाओं और उद्योगों से जुड़ाव को मजबूत नहीं किया, वहां छात्रों का रुझान लगातार घटा है। आदित्य टंडन कहते हैं कि आने वाले समय में वही संस्थान टिक पाएंगे, जो आधुनिक तकनीकों को अपनाने के साथ कौशल आधारित शिक्षा और उद्योगों के साथ बेहतर समन्वय पर जोर देंगे।

 

उनके मुताबिक, “चूंकि निजी क्षेत्र के ज्यादातर संस्थान किसी तरह मान्यता लेने की कोशिश करते हैं, इसके लिए तमाम मानकों का उल्लंघन भी करते हैं लेकिन जब छात्र यहां आते हैं तो खुद को ठगा महसूस करते हैं। ऐसे में धीरे-धीरे वहां छात्रों की संख्या में कमी आने ही लगती है। यही नहीं, संस्थानों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की गुणवत्ता और उनका प्रोफाइल भी बहुत मायने रखता है। बहुत से निजी संस्थान इस तरफ भी ज्यादा ध्यान नहीं देते। नतीजा, छात्रों की कमी होना ही है।”

 

दरअसल, यह कहानी केवल 58 इंजीनियरिंग कॉलेजों के बंद होने की नहीं है बल्कि यह भारत की तकनीकी शिक्षा के उस दौर के खत्म होने की कहानी है, जिसमें सिर्फ डिग्री मिल जाना ही सफलता की गारंटी माना जाता था। अब छात्र डिग्री नहीं, रोजगार तलाश रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में वही इंजीनियरिंग संस्थान टिक पाएंगे जो बदलती तकनीक, उद्योगों की जरूरत और छात्रों की अपेक्षाओं के साथ खुद को बदल सकेंगे। बाकी संस्थानों के लिए चुनौती और कठिन होती जाएगी।

झरनों की आवाज और हरियाली, जहां हर बूंद के साथ बढ़ जाती है खूबसूरती, ऐसी है भारत की ये बेस्ट जगह!

मानसून का मौसम नेचर लवर और घूमने-फिरने के शौकीनों के लिए सबसे खास माना जाता है। पहाड़, जंगल और नदियां हरियाली से भर जाते हैं, जबकि झरने अपने पूरे वेग और खूबसूरती के साथ बहने लगते हैं। बारिश के बाद इन वॉटरफॉल्स का नज़ारा बहुत मनमोहक होता है। अगर आप भी इस मानसून यादगार नेचर ट्रिप की प्लानिंग बना रहे हैं, तो भारत के इन खूबसूरत झरनों को अपनी ट्रैवल लिस्ट में जरूर शामिल करें:

ओडिशा का बरेहीपानी फॉल्स

Majestic Barehipani Waterfall – Odisha's Tourist Gem

सिमलीपाल नेशनल पार्क में बरेहीपानी फॉल्स भारत के सबसे ऊंचे झरनों में से एक है। यह करीब 1,309 फीट की ऊंचाई से दो चरणों में गिरता है। मानसून में इसका तेज बहाव और चारों ओर फैले घने जंगल इसे बेहद अट्रैक्टिव बना देते हैं। वाइल्डलाइफ और नेचुरल ब्यूटी के कारण यह नेचर लवर की पसंदीदा जगह है।

महाराष्ट्र का कुने फॉल्स

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लोनावला के पास कुने फॉल्स तीन टियर में गिरने वाला बेहद खूबसूरत झरना है। मानसून में यहां चारों ओर हरियाली और बादलों का नज़ारा देखने लायक होता है। यह मुंबई और पुणे से वीकेंड ट्रिप के लिए पॉपुलर टूरिस्ट डेस्टिनेशन है। बारिश के मौसम में इसकी खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है।

कर्नाटक का शिवनसमुद्र फॉल्स

Shivanasamudra Falls, Karnataka - N Travel Advisor

कावेरी नदी से बनने वाला शिवनसमुद्र फॉल्स गगनचुक्की और भराचुक्की नाम के दो हिस्सों में बंटा हुआ है। बारिश के मौसम में दोनों झरनों का तेज फ्लो बेहद शानदार दिखाई देता है। आसपास की हरियाली और चट्टानों का दृश्य इसकी खूबसूरती बढ़ा देता है। यह दक्षिण भारत के सबसे फेमस झरनों में गिना जाता है।

छत्तीसगढ़ का चित्रकोट फॉल्स

Shivanasamudra Images – Browse 202 Stock Photos, Vectors, and Video | Adobe Stock

चित्रकोट फॉल्स को इसकी चौड़ाई के कारण ‘भारत का नियाग्रा’ कहा जाता है। यह इंद्रावती नदी पर है और मानसून में इसका विशाल रूप देखने लायक होता है। बारिश के दौरान पानी का बहाव कई गुना बढ़ जाता है। नेचुरल ब्यूटी और इंद्रधनुष जैसा व्यू इसे खास बनाता है।

हिमाचल प्रदेश का भागसू वॉटरफॉल

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मैक्लोडगंज के पास भागसू वॉटरफॉल मानसून में सबसे खूबसूरत दिखाई देता है। देवदार के जंगल, ठंडी हवाएं और पहाड़ों का नज़ारा यहां की खूबसूरती बढ़ा देते हैं। ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए भी यह पसंदीदा जगह है। बारिश के मौसम में यहां का शांत माहौल सुकून का एहसास कराता है।

उत्तराखंड का केम्प्टी फॉल्स

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मसूरी के पास स्थित केम्प्टी फॉल्स उत्तराखंड के सबसे पॉपुलर झरनों में से एक है। मानसून में इसका वाटर फ्लो काफी बढ़ जाता है, जिससे इसका व्यू और भी मनमोहक हो जाता है। यहां टूरिस्ट झरने के पास नेचुरल माहौल का आनंद लेते हैं। परिवार और दोस्तों के साथ घूमने के लिए यह बेहतरीन जगह है।

मानसून ट्रिप पर निकलने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

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जर्नी शुरू करने से पहले मौसम का ताजा अपडेट जरूर देखें और भारी बारिश की चेतावनी होने पर ट्रिप टाल दें। फिसलन वाली जगहों पर ज्यादा सावधानी बरतें। झरनों के पास बने सुरक्षा बैरियर पार करने की कोशिश न करें, क्योंकि वाटर फ्लो खतरनाक हो सकता है। अपने साथ रेनकोट, वाटरप्रूफ जूते, जरूरी दवाइयां और मोबाइल को सेफ रखने के लिए वाटरप्रूफ बैग जरूर रखें।

IMD Heavy Rain Alert: इन 15 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी, कई जगहों पर आंधी-तूफान, दिल्ली से यूपी-बिहार तक ऐसा रहेगा मौसम

India Weather Update: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के विभिन्न हिस्सों के लिए ताजा वेदर बुलेटिन जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 3-4 दिनों के दौरान पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल और बिहार में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इसके साथ ही 13 जुलाई को मेघालय और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में कुछ जगहों पर अत्यधिक भारी बारिश को लेकर भी चेतावनी दी गई है। उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों, पश्चिम-मध्य और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में अगले 6-7 दिनों के दौरान बारिश की गतिविधियों में थोड़ी कमी देखी जा सकती है।

अभी कहां कितनी हुई बारिश और आंधी-तूफान की स्थिति?

मौसम विभाग के मुताबिक पिछले 24 घंटों के दौरान देश के कई हिस्सों में भारी वर्षा और तेज हवाएं दर्ज की गईं। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में बेहद तेज बारिश रिकॉर्ड की गई। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, मेघालय और त्रिपुरा में भी बहुत भारी बारिश (12-20 सेमी) दर्ज हुई। अरुणाचल प्रदेश, गांगेय पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश (7-11 सेमी) देखी गई।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और पंजाब में अलग-अलग जगहों पर 60-80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज/झंझावाती हवाएं चलीं। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी राजस्थान, मध्य प्रदेश, विदर्भ, महाराष्ट्र, गुजरात राज्य, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल, केरल और माहे, रायलसीमा, तेलंगाना और आंतरिक कर्नाटक में 40-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं और बिजली चमकने की घटनाएं दर्ज की गईं।

क्षेत्रीय मौसम का विस्तृत पूर्वानुमान

मौसम प्रणालियों की बात करें तो मानसून ट्रफ का पश्चिमी छोर समुद्र तल पर अपनी सामान्य स्थिति के करीब है जबकि इसका पूर्वी छोर सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर बना हुआ है। इसके अलावा पाकिस्तान और बांग्लादेश के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं और उत्तर-पश्चिम बिहार से मणिपुर तक एक ट्रफ रेखा भी गुजर रही है। इन सिस्टम्स के प्रभाव से आने वाले दिनों में देश का मौसम कुछ ऐसा रहेगा-

उत्तर-पश्चिम भारत (दिल्ली, यूपी, पंजाब और हरियाणा)

दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 13 से 19 जुलाई के दौरान अलग-अलग जगहों पर हल्की से छिटपुट बारिश होने की संभावना है। 18 और 19 जुलाई को पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पंजाब में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 13-17 जुलाई तक छिटपुट बारिश और 18-19 जुलाई को व्यापक रूप से भारी बारिश होने का अनुमान है। इस दौरान 17 से 19 जुलाई के बीच पूर्वी यूपी में भारी बारिश का अलर्ट है। उत्तराखंड में 13-19 जुलाई तक व्यापक बारिश और 15-19 जुलाई के दौरान भारी बारिश की चेतावनी है। हिमाचल प्रदेश में 18-19 जुलाई को भारी बारिश हो सकती है।

जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में 13-19 जुलाई के दौरान 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और 18-19 जुलाई को भारी बारिश की संभावना है। पूर्वी राजस्थान में 16-19 जुलाई के दौरान बारिश देखने को मिल सकती है।

पूर्वी भारत (बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल)

बिहार में 13-15 जुलाई तक व्यापक बारिश होने की संभावना है। इसके बाद 16-19 जुलाई को छिटपुट बारिश जारी रहेगी। 13-14 जुलाई को बिहार में अलग-अलग जगहों पर बहुत भारी बारिश का अलर्ट है जबकि 15-19 जुलाई के दौरान भारी बारिश होने का अनुमान है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 13 जुलाई को अत्यधिक भारी बारिश और 14, 15, 18 व 19 जुलाई को भारी बारिश की संभावना है। गांगेय पश्चिम बंगाल में 13-17 जुलाई के दौरान भारी बारिश देखने को मिल सकती है।

झारखंड में 13, 18 और 19 जुलाई को छिटपुट बारिश और 14-17 जुलाई तक व्यापक बारिश के साथ 13-14 जुलाई को भारी बारिश का अनुमान है। ओडिशा में 14-15 जुलाई को बहुत भारी बारिश और 13 व 16 जुलाई को भारी बारिश हो सकती है।

पूर्वोत्तर भारत (असम, मेघालय और त्रिपुरा)

मेघालय में 13 जुलाई को कुछ जगहों पर अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। असम और मेघालय में 13-15 जुलाई और 17-19 जुलाई के दौरान भारी बारिश तथा 16 जुलाई को बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश में 13-19 जुलाई तक लगातार भारी बारिश का अनुमान है। नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 13 और 17 जुलाई को बहुत भारी बारिश हो सकती है जबकि 14-16 और 18-19 जुलाई को भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

मध्य और पश्चिमी भारत (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र)

पश्चिमी मध्य प्रदेश में 16-17 जुलाई को 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। छत्तीसगढ़ में 14-15 जुलाई को भारी बारिश की संभावना है। कोंकण और गोवा में 13-16 जुलाई तक छिटपुट बारिश के बाद 17-19 जुलाई के दौरान व्यापक से बहुत व्यापक बारिश होने का अनुमान है। गुजरात, मध्य महाराष्ट्र और सौराष्ट्र व कच्छ में 13-19 जुलाई तक छिटपुट बारिश जारी रहेगी।

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत (कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु)

तटीय कर्नाटक में 17-19 जुलाई और केरल व माहे, लक्षद्वीप में 18-19 जुलाई को व्यापक बारिश होने की संभावना है। तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, तटीय कर्नाटक, रायलसीमा और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 13-17 जुलाई के दौरान तेज सतही हवाएं चलने की संभावना है।

हीटवेव और उमस भरी गर्मी की चेतावनी

बारिश के बीच देश के कुछ हिस्सों में गर्मी का प्रकोप भी देखने को मिलेगा। तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में 13 से 15 जुलाई के दौरान अलग-अलग इलाकों में लू चलने की प्रबल संभावना है। ओडिशा में 13-14 जुलाई और रायलसीमा व तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल में 13-15 जुलाई के दौरान मौसम बेहद गर्म और उमस भरा बना रहेगा।

सूखे में भी चमकी किस्मत! कम पानी, कम खर्च… फिर भी बंपर कमाई, सहजन की खेती ने किसान की बदल दी तकदीर

महाराष्ट्र के किसान संदीप कदम के लिए कई सालों तक खेती करना आसान नहीं रहा। सूखा, बढ़ती खेती की लागत और मौसम की मार की वजह से उन्हें लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा था। लेकिन एक छोटे से फैसले ने उनकी किस्मत बदल दी। घाटे वाली फसलों की जगह उन्होंने अपने खेत में सिर्फ 40 सहजन (मुनगा) के पेड़ लगाए और इसके बाद उनकी खेती की तस्वीर बदल गई।

30Stades की रिपोर्ट के अनुसार, बार-बार फसल खराब होने के बाद संदीप ने अपने परिवार की खेती को नए तरीके से करने का फैसला किया। महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित सांगोला क्षेत्र में कम पानी और कम खर्च में होने वाली फसल की तलाश के दौरान उन्होंने सहजन की खेती शुरू की। हालांकि शुरुआत में उन्हें यह भरोसा नहीं था कि यह प्रयोग सफल होगा, लेकिन उनका यह फैसला आगे चलकर उनके लिए बेहद फायदेमंद साबित हुआ। लेकिन यह फैसला भी उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। संदीप कदम ने बताया कि अनार की खेती में भी उन्हें लगातार नुकसान हुआ। बेमौसम बारिश की वजह से फसल में बैक्टीरियल ब्लाइट और विल्ट जैसी बीमारियां फैलने लगीं। इन बीमारियों से बचाने के लिए बार-बार दवाओं का छिड़काव करना पड़ता था, जिससे खेती का खर्च लगातार बढ़ता गया। आखिरकार उन्हें किसी नई फसल की तलाश करनी पड़ी।

लगातार हो रहे नुकसान के बाद संदीप ने खेती का तरीका बदलने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि सांगोला इलाके में भूजल का स्तर पहले से ही कम है और बारिश का कोई भरोसा नहीं रहता। इसलिए उन्हें ऐसी फसल चाहिए थी जो कम पानी में भी अच्छी तरह उग सके और जिसमें दवाओं व देखभाल पर ज्यादा खर्च न आए। इसी दौरान उन्हें सहजन की खेती का विकल्प मिला और उन्होंने इसे अपनाने का फैसला किया।

सहजन की खेती क्यों चुनी?

संदीप कदम की तलाश आखिरकार सहजन (मुनगा) की खेती पर जाकर खत्म हुई। सहजन एक ऐसी फसल है, जिसका इस्तेमाल भारत के कई हिस्सों में सब्जी, सांभर, दाल और दूसरी कई डिश बनाने में किया जाता है। स्वाद के साथ-साथ यह पोषक तत्वों से भी भरपूर होती है। सबसे बड़ी बात यह है कि दूसरी कई बागवानी फसलों के मुकाबले सहजन को बहुत कम पानी की जरूरत होती है। यही वजह है कि यह सूखा प्रभावित इलाकों के लिए एक अच्छा विकल्प माना जाता है। इन खूबियों ने संदीप को सहजन की खेती शुरू करने के लिए प्रेरित किया।

संदीप ने एक साथ पूरी खेती बदलने का जोखिम नहीं लिया। उन्होंने पहले छोटे स्तर पर इसकी शुरुआत की। साल 2010 में उन्होंने तमिलनाडु से ओडीसी (ODC) किस्म के बीज मंगवाए और अपने अनार के बाग में खाली पड़ी जगह पर सिर्फ 40 सहजन के पेड़ लगाए।

40 पौधों से शुरु हुआ सफर 

संदीप कदम ने एक साथ पूरी खेती बदलने की बजाय पहले छोटे स्तर पर सहजन की खेती शुरू की। साल 2010 में उन्होंने तमिलनाडु से ओडीसी (ODC) किस्म के बीज मंगवाए और अपने अनार के बाग की खाली जगह में सिर्फ 40 सहजन के पौधे लगाए। संदीप बताते हैं, “सिर्फ 40 पौधों से मुझे करीब 40 हजार रुपये की कमाई हुई। इससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ा और मुझे लगा कि सूखा प्रभावित इलाकों के किसानों के लिए सहजन की खेती एक अच्छा विकल्प बन सकती है।” जैसे-जैसे पौधे बड़े हुए, हर पेड़ से सालाना औसतन करीब 60 किलो सहजन मिलने लगा।

पहले प्रयोग की सफलता के बाद संदीप ने दिसंबर 2012 में एक एकड़ जमीन पर बड़े पैमाने पर सहजन की खेती शुरू की। इसके लिए उन्होंने अपनी पहली फसल से तैयार किए गए बीजों का इस्तेमाल किया। उन्होंने करीब 680 पौधे लगाए। पौधों की कतारों के बीच 10 फीट और एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच करीब 6 फीट की दूरी रखी गई। इसके बाद मई में पहली व्यावसायिक फसल तैयार हुई, जिसमें हर पौधे से औसतन करीब 25 किलो सहजन मिला।

25 लाख की आमदनी 

आज संदीप कदम के खेत में हर साल करीब 4.2 लाख किलो (420 टन) सहजन का उत्पादन होता है। बाजार में मौसम के अनुसार सहजन की कीमत 40 से 100 रुपये प्रति किलो तक रहती है, लेकिन उन्हें औसतन 60 रुपये प्रति किलो का भाव मिल जाता है। संदीप अपनी फसल का निर्यात दुबई भी करते हैं। इसके अलावा उनके पास खरीदारों का अच्छा नेटवर्क है, जिससे उन्हें बेहतर दाम मिलते हैं और उनकी कमाई लगातार बनी रहती है। सहजन की खेती पर उनका सालाना खर्च करीब 1.5 लाख रुपये प्रति एकड़ आता है, जबकि एक एकड़ से करीब 25 लाख रुपये की आमदनी होती है। इस तरह उन्हें लगभग 23.5 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुनाफा मिलता है।

अब बिना कोयले और पानी के 24 घंटे में बनेगी बिजली, लद्दाख के पहाड़ों में ONGC ने कर दिखाया चमत्कार! दूसरा जियोथर्मल वेल खोदा गया

India’s first pilot geothermal power plant: भारत को रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली है। सरकारी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) ने लद्दाख की पुगा घाटी में अपने दूसरे जियोथर्मल वेल की ड्रिलिंग का काम पूरा कर लिया है। यह सफलता भारत के पहले पायलट जियोथर्मल पावर प्लांट को विकसित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और मजबूत कदम है।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक ओएनजीसी की अनुसंधान और विकास शाखा ओएनजीसी एनर्जी सेंटर ने 14000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर करीब एक महीने के भीतर 1000 मीटर की गहराई तक इस दूसरे कुएं की ड्रिलिंग की है। कंपनी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि इस बार की ड्रिलिंग में पहले अभियान के मुकाबले समय और लागत दोनों में काफी सुधार आया है।

आइए विस्तार से जानते हैं कि यह पूरा प्रोजेक्ट क्या है और इससे लद्दाख और पूरे देश को कैसे बिना कोयले और पानी के 24 घंटे बिजली मिलेगी।

पहले कुएं की सफलता पर टिकी है इस दूसरे वेल की नींव

ओएनजीसी का यह दूसरा कुआं पुगा में खोदे गए पहले जियोथर्मल वेल की शानदार सफलता पर आधारित है। पुगा में कंपनी के पहले कुएं से पानी के बॉयलिंग पॉइंट से भी अधिक तापमान पर भाप पैदा हुई थी। पहले कुएं से निकले इस बेहद हाई टेंप्रेचर ने यह साबित कर दिया था कि लद्दाख के इस क्षेत्र में भू-तापीय (Geothermal) संसाधनों की अपार क्षमता मौजूद है।

1 मेगावाट का लगेगा पहला पायलट प्लांट, 24 घंटे मिलेगी बिजली

ONGC के मुताबिक यह दूसरा कुआं भारत के पहले 1-मेगावाट इलेक्ट्रिक पायलट जियोथर्मल पावर प्लांट के विकास में बेहद मददगार साबित होगा। यह सफलता देश में जियोथर्मल एनर्जी के व्यावसायिक इस्तेमाल का रास्ता साफ कर सकती है। इस परियोजना के अगले चरण में 1-मेगावाट का पायलट पावर प्लांट स्थापित करने की योजना है। दीर्घकालिक योजना के तहत इन भू-तापीय संसाधनों का विकास किया जाएगा ताकि लद्दाख जैसे सुदूर क्षेत्र को चौबीसों घंटे भरोसेमंद और निरंतर बेसलोड बिजली जी जा सके।

क्या है जियोथर्मल एनर्जी और क्यों है यह सौर-पवन ऊर्जा से बेहतर?

जियोथर्मल ऊर्जा बिजली पैदा करने और हीटिंग देने के लिए पृथ्वी की सतह के नीचे से निकलने वाली प्राकृतिक गर्मी का इस्तेमाल करती है। सौर और पवन ऊर्जा के उलट इसपर मौसम की स्थितियों का असर नहीं पड़ता। जियोथर्मल एनर्जी पूरी तरह से कम-कार्बन उत्सर्जन वाली ऊर्जा है जो बिना किसी रुकावट के चौबीसों घंटे बिजली की आपूर्ति कर सकती है।

भारत का सबसे भरोसेमंद क्षेत्र है पूर्वी लद्दाख का पुगा

पूर्वी लद्दाख में स्थित पुगा जियोथर्मल क्षेत्र को लंबे समय से भारत का सबसे प्रॉमिसिंग (उम्मीद से भरा) भू-तापीय संसाधन माना जाता रहा है। हालांकि इस क्षेत्र में दशकों से रुक-रुक कर खोज का काम किया जा रहा था लेकिन तकनीकी और आर्थिक चुनौतियों के कारण देश में अब तक व्यावसायिक रूप से भू-तापीय बिजली उत्पादन शुरू नहीं हो पाया था। अब ONGC के इस प्रयास से इसे नई रफ्तार मिली है।

2030 तक का भारत का महा-लक्ष्य

भारत इस समय सौर, पवन और जलविद्युत से आगे बढ़कर अपने रिन्यूएबल एनर्जी मिक्स में विविधता लाने का प्रयास कर रहा है। देश ने साल 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म-ईंधन आधारित बिजली क्षमता स्थापित करने का बड़ा लक्ष्य रखा है। लद्दाख का यह जियोथर्मल प्रोजेक्ट इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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