अफगानिस्तान वनडे के बाद अब टी-20 सीरीज से भी बाहर होने की कगार पर खड़े हार्दिक

जून माह में अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज से बाहर हुए हार्दिक पांड्या अब इस देश के खिलाफ इस महीने खेली जाने वाली टी-20 सीरीज से भी बाहर हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक उनके पैर में अकड़न है और टीम प्रबंधन उनको जल्द मैदान पर नहीं उतारना चाहता। इससे पहले अफगानिस्तान के खिलाफ एकदिवसीय सीरीज में  मांसपेशियां यानि कि हैमस्ट्रिंग के कारण वह बाहर रहे थे।

गौरतलब है कि मुख्य चयनकर्ता अजीत आगरकर ने यह कहा था कि हार्दिक पांड्या को दक्षिण अफ्रीका में होने वाले एकदिवसीय विश्वकप के लिए भारतीय टीम में शामिल करने की योजना है।

यह चोट उस योजना को पीछे ढकेलती है क्योंकि एक बार फिर हार्दिक पांड्या की खराब फिटनेस सबके सामने उजागर हो जाती है। वह भी तब जब उनको बैंगलूरू स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से हरी झंडी मिल गई थी।इससे पहले पिछले एकदिवसीय विश्वकप में भी बीच हार्दिक पांड्या टूर्नामेंट चोटिल होकर बाहर हो गए थे।

2 टी-20 विश्वकप जीत चुके हार्दिक पांड्या टी20 टीम में पंड्या की वापसी की संभावना कम लग रही है क्योंकि अगरकर ने साफ कर दिया था कि उनका इस्तेमाल ज्यादातर 50 ओवर प्रारूप में किया जाएगा।अगरकर ने कहा था, ‘‘वह अभी अफगानिस्तान सीरीज के लिए वनडे टीम का हिस्सा हैं। बुमराह की तरह, अगर हम उनसे अच्छा प्रदर्शन करवा सकें और उन्हें वनडे क्रिकेट के लिए फिट रख सकें। इस समय यही मुख्य मक़सद है। ’’

उन्होंने कहा था, ‘‘हम उन्हें कभी भी वापस ला सकते हैं। इससे हमें नितीश रेड्डी जैसे खिलाड़ी को टी20 क्रिकेट में कुछ मौके देने का भी मौका मिलता है। इसलिए पंड्या के मामले में टी20 के लिए थोड़ा आराम और रोटेशन होगा। ’’

लेजेंड्स बूट्स क्यों टांग देते हैं?

Messi

महान करियर का सबसे मुश्किल क्षण वह नहीं होता, जब आपको यह साबित करना हो कि आप अब भी जीत सकते हैं। मुश्किल क्षण वह होता है, जब आप यह तय करते हैं कि अब आपको कुछ और साबित करने की जरूरत नहीं है।

 

यही किसी महान खिलाड़ी की विदाई को इतना भावुक बना देता है। दुनिया आमतौर पर मानती है कि हार करियर खत्म करती है। लेकिन महान खिलाड़ी कई बार हार से पहले ही चले जाते हैं।

 

वे तब विदा होते हैं, जब तालियां अभी बाकी होती हैं। जब शरीर अभी कुछ और मुकाबले लड़ सकता है। जब दर्शक अभी एक और प्रदर्शन की मांग कर रहे होते हैं।

 

लियोनेल मेसी की विदाई कुछ ऐसी ही है।

 

39 साल की उम्र में मेसी अर्जेंटीना की जर्सी उतार रहे हैं—इसलिए नहीं कि दुनिया ने उन्हें बता दिया कि उनका समय खत्म हो गया है, बल्कि इसलिए कि उन्होंने खुद तय किया कि अब समय आ गया है।

यह फर्क महत्वपूर्ण है।

 

2022 में उन्होंने अर्जेंटीना को विश्व कप जिताया। 2026 में टीम को फिर फाइनल तक पहुंचाया और टूर्नामेंट में आठ गोल किए। अर्जेंटीना के लिए 207 मैच और 125 गोल के साथ वह अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल को अलविदा कह रहे हैं। क्लब फुटबॉल में उनकी कहानी अभी जारी है।

 

फिर भी उनके शब्दों में जीत का अहंकार नहीं, विदाई का दर्द है। फैसला उन्हें भीतर तक चोट पहुंचाता है, लेकिन वह समझते हैं कि यही सही समय है। मेसी की विदाई का सबसे मार्मिक हिस्सा यह नहीं कि वह जा रहे हैं। बल्कि यह कि वह तब जा रहे हैं जब उनके पास अभी भी देने के लिए कुछ बाकी दिखता है। 

 

यह बात सिर्फ इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि मेसी दुनिया के महानतम फुटबॉलरों में से एक हैं। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मेसी ने तब रुकने का फैसला किया जब वे अभी भी मेसी थे।

 

यही विदाई को सुंदर बनाता है। 

 

शायद यही महानता की सबसे कठिन परीक्षा है— जब आप अभी भी अच्छा खेल सकते हों, तब यह पहचानना कि अब रुक जाना चाहिए।

चार लेजेंड्स, चार अलग विदाइयां

सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट इसलिए नहीं छोड़ा कि उनका क्रिकेट से प्रेम खत्म हो गया था। 24 साल और 200 टेस्ट के बाद उन्होंने उस खेल से विदाई ली, जिसे 11 साल की उम्र से उन्होंने अपना जीवन बना लिया था।

 

कल्पना कीजिए—जिस व्यक्ति की सुबह, दोपहर, शाम और पहचान क्रिकेट के इर्द-गिर्द बनी हो, उसके लिए क्रिकेट छोड़ना किसी नौकरी छोड़ने जैसा नहीं था।

 

उनके लिए वो अपने ही एक हिस्से से अलग होना था।

 

रोज नेट्स पर न जाना। ड्रेसिंग रूम में न लौटना। दर्शकों का शोर न होना। बल्ले से टकराती बॉल की आवाज न सुनना। फिर भी एक समय उन्होंने समझा कि एक सपना अपनी पूर्णता तक पहुंच चुका है।

 

रोजर फेडरर के सामने सवाल कुछ और था। शरीर वर्षों से संकेत दे रहा था—चोटें, सर्जरी, लंबी रिकवरी और बार-बार लौटने की कोशिश।

 

41 की उम्र में उन्होंने आखिरकार स्वीकार किया कि कभी-कभी दिमाग अब भी दौड़ना चाहता है, लेकिन शरीर अपनी सीमा पहले ही बता चुका होता है। फेडरर ने अपने शरीर की सुनी। 

 

राफेल नडाल की कहानी में शरीर के साथ समय भी खड़ा था। 38 की उम्र में, वर्षों की चोटों से जूझने के बाद, उन्होंने स्वीकार किया कि खेल अब पहले जैसी शर्तों पर संभव नहीं था।

 

नडाल ने अपने करियर को “much more successful than I could have ever imagined” कहकर पीछे देखा। 

सचिन ने कहा—“जब मेरा दिल कहता है कि अब समय आ गया है।”

 

फेडरर ने अपने शरीर का संदेश सुना।

 

और मेसी कह रहे हैं—दर्द हो रहा है, लेकिन समय आ गया है।

 

चार महान खिलाड़ी। चार अलग कारण।

 

लेकिन एक बात समान—  किसी ने दुनिया से यह प्रमाणपत्र नहीं मांगा कि अब उसका समय पूरा हो चुका है।

 

उन्होंने खुद पहचाना। महान खिलाड़ी सिर्फ यह नहीं जानते कि कितना खेलना है; वे यह भी जानते हैं कि कब खेलना बंद करना है।

यहीं खेल अचानक जिंदगी बन जाता है

हममें से ज्यादातर लोग कभी विश्व कप फाइनल नहीं खेलेंगे। किसी स्टेडियम में 70 हजार लोग हमारा नाम नहीं पुकारेंगे। लेकिन जीवन किसी न किसी मोड़ पर हमसे वही सवाल पूछेगा— अब रुकना कब है?

 

50 की उम्र के बाद यह सवाल और साफ सुनाई देता है। तीन दशक तक आपका परिचय आपके काम से रहा— मैं पत्रकार हूं। मैं डॉक्टर हूं। मैं अधिकारी हूं। मैं कारोबारी हूं। 

 

फिर एक दिन designation चला जाता है। विजिटिंग कार्ड बदल जाता है। कुर्सी पर कोई और बैठ जाता है। और पहली बार सवाल नौकरी का नहीं रहता।

 

सवाल यह होता है—मैं कौन हूं, जब मैं वह नहीं रहा जो इतने वर्षों तक था?

 

शायद रिटायरमेंट का असली डर वेतन या पद खोने का नहीं है। अपने उस रूप को खो देने का है, जो नौकरी के साथ बना था।

 

इसीलिए कुछ लोग रिटायर नहीं होते—भले ही उन्हें पैसों की जरूरत न हो। उन्हें काम से ज्यादा जरूरी होने का एहसास चाहिए।
 

लेकिन जरूरी होना और मूल्यवान होना एक बात नहीं

यह उम्र के साथ सीखा जाने वाला शायद सबसे कठिन सबक है। कोई संस्था हमसे बड़ी होती है।

 

अखबार हमारे बिना भी निकलता है। कंपनी नया नेतृत्व खोज लेती है। टीम नया कप्तान चुन लेती है। 

दुनिया आगे बढ़ जाती है।

 

यह समझना कि आप replaceable हैं, पहले चोट करता है। फिर मुक्त करता है। क्योंकि जब आपको हर कीमत पर अपनी जगह बचाने की जरूरत नहीं रहती, तब आप एक बेहतर सवाल पूछ सकते हैं— “अब मैं वह क्या दे सकता हूं, जो खुद को साबित करने में व्यस्त रहते हुए नहीं दे पाया?”

 

यहीं अनुभव की असली कीमत शुरू होती है।

 

खिलाड़ी कोच बनता है।

 

बॉस mentor बनता है।

 

विशेषज्ञ शिक्षक बनता है।

 

और जो व्यक्ति कभी जगह के लिए लड़ता था, वह किसी और के लिए जगह बनाने लगता है।

 

शायद उम्र का सबसे बड़ा विशेषाधिकार यही है कि कमरे का सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति बनने की जरूरत खत्म हो जाए और किसी दूसरे को महत्वपूर्ण बनाने में खुशी मिलने लगे।

 

रिटायरमेंट की कोई उम्र नहीं होती

  • फेडरर 41 पर रुके। 
  • नडाल 38 पर।
  • सचिन 40 पर।

 

कुछ लोग इससे बहुत आगे तक काम करते हैं। कुछ को करना चाहिए। कुछ को नहीं।

 

सवाल बस चार हैं— 

  • क्या मैं सीख रहा हूं?
  • क्या मैं योगदान दे रहा हूं?
  • क्या शरीर रुकने का संकेत दे रहा है?
  • और क्या मैं किसी युवा को अपनी जगह देने के लिए तैयार हूं?

 

अगर जवाब बदल रहे हैं, तो अगली पारी सामने है। जरूरी नहीं कि वह संन्यास हो—शायद सिर्फ भूमिका बदलनी हो।

 

भगवद्गीता की एक परिचित पंक्ति है— “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।”

 

हम इसे आमतौर पर कर्म और उसके फल से विरक्ति के रूप में समझते हैं। लेकिन उम्र के एक पड़ाव पर इसका एक और अर्थ खुल सकता है— आपकी कीमत हमेशा स्कोरबोर्ड से तय नहीं हो सकती।

 

जिंदगी की पहली पारी में हम स्कोर गिनते हैं—पद, पैसा, पुरस्कार, उपलब्धियां, प्रभाव। 

 

दूसरी पारी में शायद सवाल बदल जाता है— “मैंने जो सीखा, अब उसका करूंगा क्या?” यहीं करियर धीरे-धीरे उपलब्धि से विरासत में बदलता है। 

 

हर किसी को विश्व कप फाइनल, 200वां टेस्ट या आखिरी ग्रैंड स्लैम जैसा विदाई मंच नहीं मिलेगा। हममें से अधिकांश की आखिरी विदाई बहुत शांत होगी। एक खाली होती मेज।

 

बदलता हुआ विजिटिंग कार्ड। एक आखिरी ईमेल। और बंद होता हुआ एक दरवाजा। लेकिन सवाल वही रहेगा— क्या हम तब रुकेंगे जब कोई और हमें बता देगा कि हमारा समय खत्म हो गया है?

 

या हममें इतनी समझ होगी कि उससे पहले पहचान लें कि हमारी सबसे अच्छी पारी अब कहीं और है? 

 

और फिर बात मेसी पर लौटती है।  

 

उन्होंने फुटबॉल नहीं छोड़ा है।

 

तेंदुलकर ने क्रिकेट छोड़ा, उसकी समझ नहीं।

 

फेडरर ने प्रतिस्पर्धी टेनिस छोड़ा, खेल से रिश्ता नहीं।

 

नडाल ने कोर्ट छोड़ा, टेनिस नहीं।

 

शायद महान संन्यास की यही खूबसूरती है— आप मंच छोड़ते हैं। अपनी कहानी नहीं।

 

क्योंकि महानता सिर्फ यह नहीं कि आपने खेल में कितने लंबे समय तक टिके रहे। महानता यह भी है कि कब समझा कि खेल ने आपको सब कुछ दे दिया है—और अब आपकी बारी है कुछ लौटाने की।

 

शायद बूट्स इसलिए नहीं टांगे जाते कि देने को कुछ नहीं बचा। कभी-कभी इसलिए टांगे जाते हैं क्योंकि जो बचा है, वह अगली पारी के लिए है।

19 सितंबर से शुरु होगा Family Full House with Rohit Sharma, टीजर हुआ रीलीज (Video)

भारतीय पूर्व कप्तान रोहित शर्मा जल्द ही अपना फैमिली शो Family Full House with Rohit Sharma.में बतौर होस्ट शिरकत करते हुए नजर आएंगे। उन्होंने इस टीजर को रीट्विट कर कैप्शन में लिखा कि 19 सितंबर का प्लान सेट कर दिया है। मीडिया सूत्रों के मुताबिक यह मशूहर अमेरिकी शो द फैमिली फ्यूड(The Family Feud) का भारतीय संस्करण होगा और इसके 40 एपिसोड रोहित शर्मा को शूट करने होंगे।इस अमेरिकी शो में मशहूर होस्ट स्टीव हार्वे की भूमिका रोहित शर्मा निभाएंगे।

संन्यास की अटकलें जुलाई से हो रही है तेज

17 जुलाई (शुक्रवार) से मीडिया सूत्रों में यह अटकलें लग रही थी कि वह संन्यास के बारे में सोच रहे हैं और 19 जुलाई को (रविवार) को लॉर्ड्स पर खेला जाने वाला एकदिवसीय मैच उनका अंतिम मैच होगा। इस मैच से पहले या तो वह खुद संन्यास ले लेंगे या फिर ड्रॉप हो जाएंगे।लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सचिव देवजीत सैकैया ने कहा है कि यह सब अफवाह है। वह जब तक चाहे क्रिकेट खेल सकते हैं।

माना जा रहा था रोहित शर्मा ने अपने PR यानि कि जनसंपर्क के कारण अफगानिस्तान सीरीज में अपनी जगह बचा ली थी लेकिन इंग्लैंड उनकी अंतिम सीरीज मानी जा रही थी।रोहित शर्मा ने फिर जबरदस्त जनसंपर्क की बिसात बिछाकर अपनी जगह एक बार फिर बचा ली और आलोचकों के मुंह शतक लगाकर बंद कर दिए।

साल भर रहा बुरा फॉर्म, लॉर्ड्स पर मिली संजीवनी

गौरतलब है कि रोहित शर्मा खराब फॉर्म से जूझ रहे थे और इंग्लैंड के पहले दो एकदिवसीय मैच में फ्लॉप रहे थे। जिसके बाद उनकी संन्यास की अटकलें लगनी शुरु हो गई थी। हालांकि आज उन्होंने बेहतरीन पारी खेली। रोहित शर्मा ने 110 गेंदो में 138 रन बनाए। उन्हें जैकब बैथल ने बोल्ड किया।

रोहित शर्मा ने इंग्लैंड के खिलाफ पहले एकदविसीय मैच में 21 गेंदो में 11 रन बनाए थे।  दूसरे एकदिवसीय मैच में 47 गेंद में 1 चौका और छक्का मारने के बाद 26 रन बनाकर आउट हुए। उनका 5 रनों पर गस एटिंकसन ने कैच छोड़ा था।

अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे एकदिवसीय मैच को छोड़ दे तो इस साल रोहित का प्रदर्शन औसत से नीचे रहा है।पहले मैच में वह 16 रन बनाकर रनआउट हो गए और दूसरे मैच में वह 39 गेंदों में 48 रन बनाकर बोल्ड हो गए।

इससे पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ पहली एकदिवसीय सीरीज में रोहित शर्मा फ्लॉप रहे और टीम को शुरुआत में बड़ा स्कोर नहीं दे सके। रोहित शर्मा 3 मैचों में 20 की औसत से 61 रन बना पाए। पूरी सीरीज में उन्होंने 9 चौके और 2 छक्के लगाए।पहले मैच में उन्होंने 29 गेंदो पर 26 रन, दूसरे मैच में उन्होंने 38 गेंदो में 24 रन और तीसरे मैच में 13 गेंदो में 11 रन बनाए।

इंग्लैंड दौरे से 7 खिलाड़ियों को स्वदेश बुलाया, पाकिस्तान क्रिकेट में भूचाल

पाकिस्तान क्रिकेट सालों से गलत खबरों का केंद्र बना हुआ है। पाकिस्तान जब जब हारता है तब तब क्रिकेट विशेषज्ञ उसे एक नया पतन करार देते हैं। लेकिन इस बार कुछ अलग हुआ है। पाकिस्तान लॉर्ड्स टेस्ट में दोनों पारियों में 200 का आंकडा भी पार नहीं कर पाया और 189 रनों से मैच हार गया।

चौतरफा आलोचना के बीच पाकिस्तान ने एक ऐसा कदम उठाया जो कम ही बोर्ड उठाते हुए दिखते हैं।पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने 9 सितंबर को तीसरा टेस्ट शुरु होने से पहले ही अपने मौजूदा टेस्ट दल के 7 खिलाड़ियों को स्वदेश वापस बुला लिया है। वहीं उनकी जगह 7 ऐसे खिलाड़ियों को इंग्लैंड भेजने का फैसला किया है जिन्हें या तो बहुत कम अनुभव है या फिर पदार्पण के लिए इंतजार कर रहे थे।

 पीसीबी ने बताया कि मोहम्मद रिजवान, इमाम उल हक, सलमान अली आगा, अली उस्मान, आमिर जमाल, मुहम्मद अवैस जफर और खुर्रम शहजाद को टीम से रिलीज कर दिया गया है।बोर्ड ने मुख्य कोच सरफराज अहमद और गेंदबाजी कोच उमर गुल को भी पद से हटा दिया। उनकी जगह क्रमश: माइक हेसन और एश्ले नॉफ्के को नियुक्त किया गया है।

इंग्लैंड के खिलाफ लीड्स और लॉर्ड्स में खेले गए पहले दो टेस्ट में पाकिस्तान को करारी हार का सामना करना पड़ा था जिसके बाद ये बड़े बदलाव किए गए हैं। तीसरा और अंतिम टेस्ट नौ सितंबर से खेला जाना है। टीम में शामिल किए गए सात नए खिलाड़ी साइम अयूब, अब्दुल्ला फजल, अराफात मिन्हास, साद बेग, मुहम्मद रंधावा, रजाउल्लाह और मुहम्मद इमरान जूनियर हैं।

इन सात खिलाड़ियों में से पांच अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल चुके हैं जबकि मुहम्मद रंधावा और रजाउल्लाह ने अभी पाकिस्तान का किसी भी स्तर पर प्रतिनिधित्व नहीं किया है।सभी नए खिलाड़ी बर्मिंघम में होने वाले तीसरे टेस्ट से पहले पाकिस्तान की टीम से जुड़ेंगे।

बर्मिंघम टेस्ट के लिए पाकिस्तान की संशोधित टीम: बाबर आजम (कप्तान), अब्दुल्ला फजल, अराफात मिन्हास, अजान अवैस, मोहम्मद अब्बास, मोहम्मद अली, मुहम्मद इमरान, मोहम्मद इमरान जूनियर, मुहम्मद गाजी गोरी, रजाउल्लाह, साद बेग (विकेटकीपर), साइम अयूब, साजिद खान, सऊद शकील, शान मसूद और उबैद शाह।


क्रिकेट इतिहास की अनोखी हार! खराब प्रिंटर की वजह से मैच हार गई टीम

क्रिकेट में अक्सर आपने सुना होगा कि मैदान पर बल्लेबाज, गेंदबाज या फिर बारिश की वजह से मैच का नतीजा बदल जाता है। लेकिन क्या आपने कभी ये सुना है कि प्रिंटर खराब होने की वजह से एक टीम हार गई। नॉर्दर्न आयरलैंड में एक मैच का फैसला बेहद अनोखी वजह से हुआ। मैदान पर खेल शुरू होने के बाद बारिश के कारण मैच रोकना पड़ा था। इसके बाद DLS नियम के तहत आगे की प्रक्रिया पूरी की जानी थी। इसी दौरान सामने आई एक छोटी सी तकनीकी खराबी की वजह से मुकाबले का फैसला हो गया। इस फैसले की काफी चर्चा हो रही है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला

किस टीम के बीच था ये मुकाबला

नॉर्दर्न आयरलैंड में एक क्रिकेट मैच का नतीजा बेहद अजीब तरीके से सामने आया। नॉर्थ वेस्ट क्रिकेट यूनियन प्रीमियर लीग में शनिवार को बैलीस्पैलन और एग्लिंटन के बीच मुकाबला खेला गया। एग्लिंटन की टीम 48.1 ओवर में 159 रन बनाकर ऑलआउट हो गई, जिसके बाद बैलीस्पैलन टारगेट का पीछा करने उतरी। टीम ने दो ओवर में 19 रन बना लिए थे, लेकिन तभी बारिश के कारण मैच रोकना पड़ा। इसकी वजह से मैच को कुछ देर के लिए रोक दिया गया। इसके बाद जो घटनाक्रम हुआ, उसने इस मुकाबले को क्रिकेट की बेहद अनोखी हार में बदल दिया।

DLS शीट नहीं कर पाई प्रिंट

बारिश के कारण मैच के ओवर कम करने पड़े। इसके बाद अंपायरों ने DLS नियम के तहत नया लक्ष्य तय करने का फैसला किया। लेकिन इसी समय ये मामला दिलचस्प हो गया। बैलीस्पैलन की टीम जरूरी DLS शीट प्रिंट नहीं कर सकी। टीम का प्रिंटर खराब था, इसलिए जरूरी कागज तैयार नहीं हो पाए। नियमों के मुताबिक, इन कागजों के बिना मैच फिर से शुरू नहीं किया जा सकता था। बारिश रुकने के बाद भी खेल शुरू नहीं हुआ और एग्लिंटन को विजेता घोषित कर दिया गया। इस तरह सिर्फ प्रिंटर खराब होने की वजह से बैलीस्पैलन को मैच हारना पड़ा।

कैसे लिया गया फैसला

नियमों के मुताबिक, अगर दोनों टीमों और अंपायरों को DLS की जरूरी शीट नहीं मिलती है तो घरेलू टीम के खिलाफ फैसला किया जा सकता है। इसके लिए मेजबान क्लब की जिम्मेदारी होती है कि वह मैच के दौरान जरूरी तकनीकी सुविधाएं तैयार रखे। बैलीस्पैलेन इस मैच की मेजबान टीम थी। क्लब के पास DLS चलाने के लिए उपयुक्त सॉफ्टवेयर वाला कंप्यूटर, पर्याप्त कागज और स्याही वाला सही प्रिंटर होना चाहिए। इसके साथ ही प्रिंटर चलाने के लिए एक ऐसा व्यक्ति भी मौजूद होना जरूरी है, जो इस काम को ठीक से संभाल सके।

दोबारा नहीं शुरू हुआ मैच

नॉर्थ वेस्ट क्रिकेट यूनियन के नियमों के अनुसार, मैच शुरू होने से पहले मेजबान टीम को यह सुनिश्चित करना होता है कि DLS से जुड़ा पूरा सिस्टम सही तरीके से काम कर रहा हो। बैलीस्पैलन की टीम इस जरूरी व्यवस्था को तैयार रखने में नाकाम रही। इसी तकनीकी कमी का उसे बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ा और बारिश से रुका मैच दोबारा शुरू नहीं हो सका। आखिरकार नियमों के तहत विरोधी टीम को जीत दे दी गई।

70 साल में पाक क्रिकेट का सबसे बुरा दौर, राशिद लतीफ ने टीम को लताड़ा

पाकिस्तान के पूर्व कप्तान राशिद लतीफ़ ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) और उसके चेयरमैन मोहसिन नक़वी की कड़ी आलोचना की है। यह आलोचना तब हुई जब लॉर्ड्स में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में इंग्लैंड के हाथों राष्ट्रीय टीम को 194 रनों की करारी हार का सामना करना पड़ा। इंग्लैंड के मौजूदा दौरे पर पाकिस्तान का प्रदर्शन बहुत खराब रहा है और वे शुरुआती दो टेस्ट मैचों में से किसी में भी टक्कर का खेल नहीं दिखा पाए हैं।

उनकी इस हालिया हार ने टीम और प्रशासन पर दबाव और बढ़ा दिया है। प्रदर्शन इतना निराशाजनक रहा है कि ब्रिटिश मीडिया ने इस पाकिस्तानी टीम को “पिछले 50 वर्षों की सबसे खराब पाकिस्तानी टीम” करार दिया है। लतीफ़ इस बात से सहमत थे, लेकिन उनका कहना था कि समस्याएँ सिर्फ़ खिलाड़ियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पीसीबी को भी इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज़ ने कहा कि बोर्ड का खराब प्रशासन, सिलेक्शन कमिटी और कोचिंग सेटअप – इन सभी ने मैदान पर पाकिस्तान के खराब प्रदर्शन में भूमिका निभाई है। लतीफ़ ने जियो न्यूज़ पर कहा, “हर कोई पाकिस्तान टीम के बारे में बात कर रहा है और कह रहा है कि यह पिछले 50 वर्षों में दौरा करने वाली सबसे खराब टीम है। लेकिन कोई भी इस बारे में बात नहीं कर रहा है कि मौजूदा बोर्ड पिछले 70 वर्षों में सबसे खराब है। कोई भी सबसे खराब सिलेक्शन कमिटी और कोचों के बारे में बात नहीं कर रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “अगर आप इन सभी मुद्दों को एक साथ देखें, तो आपको अपने सवाल का जवाब मिल जाएगा। आपको पता चल जाएगा कि इस टीम को किसने बर्बाद किया है। अब आप लगातार हार रहे हैं। यह सबसे खराब क्रिकेट बोर्ड है, यह एक सच्चाई है।”

न्यूजीलैंड दौरे के लिए तैयार किए जाएंगे आकिब नबी, सरे के लिए खेलेंगें काउंटी

रणजी ट्रॉफी में चमक बिखेरने के बाद भारतीय टेस्ट टीम दल में शामिल होने वाले आकिब नबी को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड काउंटी का अनुभव देना चाहती है ताकि न्यूजीलैंड श्रृंखला में भारत के पास तेज गेंदबाजी विकल्प रहें। गौरतलब है कि जसप्रीत बुमराह के फिटनेस पर संदेह के बादल हैं और मोहम्मद सिराज की गेंद की गति धीमी होती जा रही है।ऐसे में टीम को एक विश्वसनीय नाम चाहिए जो कि न्यूजीलैंड में विकेट निकाले।

इसी सिलसिले में जम्मू-कश्मीर के प्रतिभाशाली तेज गेंदबाज आकिब नबी भारत के अक्टूबर में होने वाले न्यूजीलैंड दौरे को ध्यान में रखते हुए काउंटी चैंपियनशिप डिवीजन एक में सरे के लिए तीन मैच खेलने के लिए ब्रिटेन रवाना हुए।    नबी को हाल में श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट की श्रृंखला के लिए चोटिल जसप्रीत बुमराह के स्थान पर भारतीय टीम में शामिल किया गया था लेकिन उन्हें पदार्पण का मौका नहीं मिला।

गोपनियता की शर्त पर शीर्ष भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के एक सूत्र ने बताया, ‘‘नबी दुबई से ब्रिटेन के लिए रवाना हो गए हैं और बुधवार को यॉर्कशर के खिलाफ होने वाले मैच में खेलने को लेकर बेताब हैं।’’

रणजी ट्रॉफी के पिछले सत्र में सर्वाधिक विकेट लेने वाले नबी के समय पर लौटने की भी उम्मीद है जिससे कि वह पुडुचेरी में ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ भारत के चार दिवसीय अनौपचारिक टेस्ट मैच में हिस्सा ले सकें। यह श्रृंखला 22 सितंबर से शुरू होगी।जम्मू-कश्मीर ने पिछले सत्र में पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीता था।

इससे पहले खबर आई थी कि सरे को स्विंग गेंदबाज की तलाश थी और नबी को कुछ मैच में क्लब की ओर से खिलाने को लेकर बातचीत चल रही थी।यॉर्कशर के खिलाफ दो से पांच सितंबर तक होने वाले मुकाबले के बाद सरे को आठ से 11 सितंबर तक ससेक्स और 15 से 18 सितंबर तक ग्लेमोर्गन का सामना करना है।

आकिब बने थे रणजी के मैन ऑफ द मैच

अबूधाबी में हुए IPL नीलामी में दिल्ली कैपिटल्स से 8.40 करोड़ रुपये की भारी भरकम रकम मिली। हालांकि सफेद गेंद से उनका प्रदर्शन प्रभावशाली नहीं रहा लेकिन वह लाल गेंद के सिद्धहस्त गेंदबाज माने जाते हैं।

नबी ने पिछले दो रणजी ट्रॉफी सत्र में कुल 104 विकेट लिए थे, जिनमें 2025-26 सत्र में लिए गए 60 विकेट भी शामिल हैं। उन्होंने जम्मू कश्मीर को पहली बार रणजी ट्रॉफी जिताने में अहम भूमिका निभाई थी। वह बल्लेबाजी में भी उपयोगी योगदान देने में सक्षम हैं।

Dhoni: धोनी ने मांगी थी CSK में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी? सीईओ ने तोड़ी चुप्पी

MS dhoni: भारत के दिग्गज खिलाड़ी और पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पिछले कुछ समय से नों काफी चर्चा में हैं। ऐसी खबरे थी धोनी ने चेन्नई सुपर किंग्स में महेंद्र सिंह धोनी की हिस्सेदारी की मांग की थी। दावा किया गया था कि धोनी ने सीएसके में 25 प्रतिशत की हिस्सेदारी (स्टेक) की मांग की थी, लेकिन कंपनी 5.5 प्रतिशत ही स्टेक ऑफर किया था, जिसे धोनी ने मना कर दिया। CSK मैनेजमेंट और धोनी के बीच बात नहीं बन पाई। वहीं अब इन खबरों पर फ्रेंचाइजी के CEO काशी विश्वनाथन ने अपना रिएक्शन दिया है।

CEO ने क्या कहा

CSK के CEO काशी विश्वनाथन ने धोनी के टीम में हिस्सेदारी लेने वाली खबरों को खारिज कर दिया। साथ ही, उन्होंने IPL के अगले सीजन को लेकर भी धोनी के CSK के साथ जुड़े रहने पर जानकारी दी है। बता दें धोनी के CSK में हिस्सेदारी लेने की खबरों के बाद फ्रेंचाइजी और उनके बीच रिश्तों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। लेकिन, इन खबरों की कोई पक्की पुष्टि नहीं हुई थी। इसके बावजूद सोशल मीडिया और क्रिकेट जगत में धोनी और CSK के बीच मतभेद होने की अटकलें लगाई जाने लगी थीं।

क्या थी अफवाह

क्रिकब्लॉगर की पहले की रिपोर्ट के मुताबिक, धोनी ने शुरुआत में CSK में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी की मांग की थी, जिसे बाद में घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि इसके जवाब में CSK ने उन्हें 5.5 प्रतिशत हिस्सेदारी देने की पेशकश की थी।

विश्वनाथन ने इन दावों को किया खारिज

CSK के CEO काशी विश्वनाथन ने PTI से बातचीत में इन सभी दावों को खारिज कर दिया और खबरों को “पूरी तरह से बेबुनियाद” बताया। उन्होंने IPL 2027 में धोनी के खिलाड़ी के तौर पर भविष्य को लेकर भी बात की। विश्वनाथन ने कहा, “धोनी ने अभी तक यह नहीं कहा है कि वह नहीं खेलेंगे। इसलिए हमें इंतजार करना चाहिए।” उन्होंने हिस्सेदारी से जुड़ी खबरों को भी “प्लांटेड स्टोरी” बताया।

नए कोच की तलाश में सीएसके

सूत्रों के मुताबिक, IPL 2027 से पहले CSK की टीम को लेकर एमएस धोनी की भूमिका अहम हो सकती है। टीम के नए हेड कोच के चयन से लेकर खिलाड़ियों की टीम तैयार करने तक धोनी की राय को महत्व दिया जा सकता है। स्टीफन फ्लेमिंग के जाने के बाद फ्रेंचाइजी अब नए कोच की तलाश में है। फ्लेमिंग ने इंग्लैंड टेस्ट टीम की जिम्मेदारी संभालने के लिए CSK का साथ छोड़ा था।

धोनी 2008 में IPL शुरू होने के बाद से ही सीएसके के साथ जुड़े हैं। CSK ने IPL 2025 से पहले धोनी को 4 करोड़ रुपये में टीम में रिटेन किया था। धोनी ने अपनी कप्तानी में टीम को 5 ट्रॉफी जीता चुके हैं। वहीं चोट के चलते वह IPL 2026 में CSK की ओर से एक भी मैच नहीं खेल पाए थे।

Impact Player को हटाने के पक्ष में भारतीय क्रिकेट बोर्ड, मांगे फ्रैंचाइजी के सुझाव

इंडियन प्रीमियर लीग में 3 साल पहले आए इम्पैक्ट प्लेयर नियम की चौतरफा आलोचना के बाद भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने आखिरकार फ्रैंचाइजी से इसके बारे में अपना अंतिम विचार जानने के लिए सोमवार 31 अगस्त तक की समय सीमा निर्धारित की है। अगर ज्यादातर फ्रैंचाइजी इसके खिलाफ होंगी तो यह नियम अगले सत्र के लिए बरकरार नहीं रहेगा।

3 साल पहले में लाया गया था यह नियम

 भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने इंडियन प्रीमियर लीग को रोमांचक बनाने के लिये पहली बार यह नियम पेश किया था।यह नियम टीमों को एक मैच में स्थिति के आधार पर एक और गेंदबाज या बल्लेबाज को मैदान पर उतारने की अनुमति देता था। नियम का उद्देश्य खेल में एक रणनीतिक आयाम जोड़ना था जिससे टीमें मैच की स्थिति के आधार पर सामरिक परिवर्तन कर सकें।

इस तरह के किसी भी विकल्प को हालांकि पारी के 14वें ओवर से पहले किया जाता था। इसके तहत टीम में ‘इंपैक्ट प्लेयर’ के तौर पर शामिल होने वाला खिलाड़ी अपने कोटे की पूरी गेंदबाजी या नए बल्लेबाज की तरह बल्लेबाजी कर सकता था।

इसके अतिरिक्त, यदि शुरुआती एकादश में पहले से ही चार विदेशी खिलाड़ी शामिल थे, तो इम्पैक्ट प्लेयर विदेशी नहीं हो सकता था। यदि शुरुआती एकादश में चार से कम विदेशी खिलाड़ी शामिल थे, तो एक गैर-भारतीय इम्पैक्ट प्लेयर को पेश किया जा सकता था।

टूर्नामेंट की समिति ‘इम्पैक्ट सब्स्टीट्यूशन’ (इम्पैक्ट खिलाड़ी के स्थानापन्न) की घोषणा हुई थी जिसमें एक नये खिलाड़ी को मैच के दौरान पांच निर्धारित स्थानापन्न खिलाड़ियों से बदला जा सकता था।

सचिन समेत कई दिग्गजों ने की थी इस नियम की आलोचना

इंडियन प्रीमियर लीग में जान फूंकने के लिए दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। सचिन तेंदुलकर ने इंडियन प्रीमियर लीग IPL में बल्ले और गेंद के बीच संतुलन बनाने के लिए विवादास्पद इम्पैक्ट प्लेयर नियम को खत्म करने की वकालत की और साथ ही कुछ अन्य बदलाव करने के लिए भी सुझाव दिए।

तेंदुलकर ने एक अग्रणी क्रिकेट वेबसाइट द्वारा आयोजित पुरस्कार समारोह में कहा, ‘‘मेरी निजी राय है कि कुछ ऐसी बातें हैं जिनसे मुझे लगता है कि ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ का नियम खत्म कर देना चाहिए।’’उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि टी20 प्रारूप में आपको केवल 20 ओवर खेलने होते हैं। फिर आप उस लाइन-अप में एक और बल्लेबाज जोड़ देते हैं। जहां गेंदबाजों को पहले से ही चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

कप्तान रोहित शर्मा से सहमति जताते हुए स्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने इंपैक्ट खिलाड़ी के नियम की आलोचना करते हुए कहा कि इससे खेल का संतुलन बिगड़ रहा है।आईपीएल के पिछले सत्र से पारी के बीच में स्थानापन्न खिलाड़ी को उतारने का नियम शुरू हुआ है जिस पर रोहित ने भी नाराजगी जताई थी।

कोहली ने कहा ,‘‘ मैं रोहित का समर्थन करता हूं। मनोरंजन खेल का एक पहलू है लेकिन संतुलन भी होना चाहिये। इससे खेल का संतुलन बिगड़ा है और कई लोगों को ऐसा लगता है , सिर्फ मुझे नहीं।’’

रोहित ने पॉडकास्ट में कहा ,‘‘ मैं इस नियम का मुरीद नहीं हूं। इससे हरफनमौलाओं पर विपरीत असर पड़ेगा। क्रिकेट 11 खिलाड़ियों का खेल है, 12 का नहीं।’’आईपीएल के इस सत्र में आठ बार 250 रन से अधिक का स्कोर बना और कोहली गेंदबाजों का दर्द समझते हैं।

मुझे धक्का लगा, टीम से ड्रॉप करने के बाद छलका सूर्यकुमार यादव का दर्द

Suryakumar Yadav


भारतीय टी-20 टीम के पूर्व कप्तान सूर्यकुमार यादव ने माना कि जब उन्हें भारत की अंतरराष्ट्रीय टी-20 योजनाओं से बाहर किया गया तो वे हैरान रह गए थे। उन्होंने बताया कि वह 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक और उसी साल होने वाले अगले टी-20 विश्व कप में टीम की कप्तानी करने की तैयारी कर रहे थे। जून में आयरलैंड और इंग्लैंड सीरीज के लिए टीम से बाहर करने से कुछ समय पहले ही चयनकर्ताओं ने सूर्यकुमार को इसकी जानकारी दी थी।

35 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा कि इस फैसले ने उन्हें पूरी तरह चौंका दिया, खासकर तब जब उन्होंने इस साल मार्च में घरेलू मैदान पर टीम को टी-20 विश्व कप का खिताब जिताया था। सूर्यकुमार यादव ने यूट्यूब पर आकाश चोपड़ा के शो ‘बैठ और बोल’ में कहा, “जब मैंने देखा कि मेरा नाम लिस्ट में नहीं है, तो मैं मुस्कुरा दिया। जब भी मैं दबाव वाली स्थितियों में रहा हूं या जब चीज़ें मेरे पक्ष में नहीं रही हैं, तो मैं हमेशा मुस्कुराया हूं और शांत रहा हूं। मैंने उन पलों को याद किया है और शुक्रगुजार रहा हूं। मैंने नहीं सोचा था कि 2026 में ऐसा होगा। मुझे लग रहा था कि मैं अगले दो सालों तक टीम को आगे ले जाने की तैयारी कर रहा हूं, ओलंपिक, एक और टी-20 विश्व कप और फिर आगे एक और चुनौती।”

उन्होंने कहा, “टीम के ऐलान से दो-तीन दिन पहले चयनकर्ताओं ने मुझे फ़ोन किया। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि अब आगे बढ़ने का समय आ गया है।’ मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी क्योंकि यह मेरा स्वभाव नहीं है। जो भी फ़ैसला लिया गया, उस व्यक्ति को लगा होगा कि यह टीम के भले के लिए है। आपने फ़ैसला लिया, मुझे बताया, इसमें कोई बुराई नहीं है।” सूर्यकुमार ने खुद को भारत के प्रमुख टी-20 खिलाड़ियों में से एक के तौर पर स्थापित किया था। नवंबर 2022 में वे आईसीसी रैंकिंग में नंबर 1 पर भी पहुंचे थे। 2024 टी-20 विश्व कप के बाद रोहित शर्मा के अंतरराष्ट्रीय टी-20 से संन्यास लेने पर उन्होंने पूर्णकालिक कप्तानी संभाली।

उनकी कप्तानी में, भारत ने 50 पूरे हुए टी-20 मैचों में से 42 जीते और पुरुषों का टी-20 वर्ल्ड कप खिताब बचाने वाली और घरेलू ज़मीन पर इसे जीतने वाली पहली टीम बनी। हालांकि, न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल मैच सूर्यकुमार का भारत के लिए आख़िरी मैच साबित हुआ। इसके बाद चयनकर्ताओं ने श्रेयस अय्यर को कप्तानी सौंप दी, जिससे उस दौर का अप्रत्याशित अंत हो गया जिसमें भारत दो साल तक टी-20 सीरीज में अजेय रहा था।


सूर्यकुमार ने कहा, “जिसे उन्होंने चुना है, उसके साथ मैंने बहुत क्रिकेट खेला है। मुझे पता है कि वह एक अच्छा खिलाड़ी, अच्छा इंसान और अच्छा कप्तान भी है। इसलिए, मुझे फ़ैसले से कोई शिकायत नहीं थी, लेकिन निराशा जरूर हुई क्योंकि हम दो साल से कोई सीरीज नहीं हारे थे, एशिया कप और टी-20 विश्व कप जीते थे – आप चाहते हैं कि यह सिलसिला आगे भी जारी रहे। जब सब कुछ अच्छा चल रहा हो, तो बदलाव क्यों।”

उन्होंने कहा, “कुछ हद तक उनकी अपनी फ़ॉर्म की वजह से, और साथ ही अगले दो साल के साइकल या अगले वर्ल्ड कप तक के समय को देखते हुए, हमें लगा कि आगे बढ़ने का यही सबसे अच्छा तरीका है। उन्होंने डेढ़ महीने तक मैं यही सोचता रहा कि ऐसा कैसे हो सकता है? यह कैसे मुमकिन है। हमने अभी-अभी विश्व कप जीता है। हां, आईपीएल वैसा नहीं रहा जैसा मैं चाहता था। दोस्तों और परिवार ने मुझे समझाया कि यह ज़िंदगी का हिस्सा है। लेकिन जब वे चले जाते हैं, तो आप अपने परिवार के साथ अकेले रह जाते हैं। हम सोच रहे थे कि ऐसा कैसे हो सकता है।” टीम से बाहर किए जाने के बावजूद, सूर्यकुमार का खेल छोड़ने का कोई इरादा नहीं है। उन्हें उम्मीद है कि वे भारत की योजनाओं में अपनी जगह दोबारा बना लेंगे और दूसरे मौके का इंतज़ार करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, “मैं तैयार हूँ, मैं अभी भी खेल रहा हूं और आगे भी खेलता रहूंगा। जब भी आपको लगे कि सही समय है और हालात ठीक हैं, तो मुझे बुला लीजिएगा।”