राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में 2 महीने में 18 महिलाओं की मौत से हड़कंप! डिलीवरी के बाद मौतों के मामलों ने खड़े किए बड़े सवाल, क्या बोली सरकार?

Deaths of pregnant women in Rajasthan: राजस्थान में पिछले दो महीनों के दौरान सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद महिलाओं की लगातार हो रही मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मई 2026 से अब तक राज्य के अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में कम से कम 18 महिलाओं की डिलीवरी या सी-सेक्शन (सिजेरियन) के बाद मौत हो चुकी है। इनमें सबसे चिंताजनक बात यह है कि जुलाई की शुरुआत में केवल छह दिनों के भीतर ही 9 महिलाओं की जान चली गई।

मामले केवल मौतों तक सीमित नहीं हैं। प्रसव के बाद गंभीर रूप से बीमार हुई 7 अन्य महिलाओं की किडनी फेल होने के कारण डायलिसिस करनी पड़ रही है। इससे यह आशंका मजबूत हुई है कि यह अलग-अलग घटनाएं नहीं। बल्कि प्रसव के बाद होने वाली गंभीर जटिलताओं का एक बड़ा पैटर्न हो सकता है।

सिर्फ 6 दिन में 9 मौत?

‘न्यूज 18’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मई के बाद से भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, जोधपुर और अन्य सहित कम से कम पांच जिलों के सरकारी अस्पतालों में माताओं की 18 मौतों की खबर आई है। इनमें से नौ मौतें जुलाई की शुरुआत में सिर्फ छह दिनों में हुईं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार ये मौतें भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, जोधपुर समेत कम से कम पांच जिलों के सरकारी अस्पतालों में हुई हैं। सभी मामलों में महिलाओं की मौत डिलीवरी या ऑपरेशन के बाद हुई, जिससे पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।

पहले मातृ मृत्यु दर में सुधार, अब फिर चिंता

राजस्थान ने हाल के वर्षों में मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Ratio) कम करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की थी। साल 2017-19 के दौरान प्रति 1 लाख जीवित जन्म पर 141 माताओं की मौत होती थी, जो 2018-20 में घटकर 113 रह गई। इस सुधार के कारण राजस्थान को मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश की सफलता की मिसाल माना गया था। लेकिन अब बेहद कम समय में एक साथ सामने आए इन मामलों ने एक्सपर्ट को भी चिंता में डाल दिया है कि आखिर अचानक ऐसी स्थिति क्यों बनी।

परिवारों ने लगाए गंभीर आरोप

मृतक महिलाओं के परिजनों का कहना है कि वे खुशहाल प्रसव की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचे थे। लेकिन उनकी बेटियां, बहुएं और पत्नियां कभी घर वापस नहीं लौट सकीं। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने उन्हें इलाज से जुड़े पूरे मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए। यह भी स्पष्ट नहीं बताया कि आखिर मौत कैसे हुई। कई परिवारों ने इन मामलों की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारी तय करने और पूरी पारदर्शिता की मांग की है।

रिश्तेदारों का दावा है कि कई महिलाएं भर्ती होने के समय सामान्य स्थिति में थीं, लेकिन सामान्य प्रसव या सी-सेक्शन के कुछ समय बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। इसके बाद उन्हें अत्यधिक रक्तस्राव (पोस्ट-पार्टम हेमरेज), संक्रमण (सेप्सिस) या किडनी फेल होने जैसी गंभीर समस्याएं हुईं। कई महिलाओं की जिला अस्पतालों में मौत हो गई। जबकि कुछ को बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया। लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

इलाज में लापरवाही के आरोप

परिवारों ने अस्पतालों पर इलाज में देरी, मरीजों की पर्याप्त निगरानी न होने और एक्सपर्ट डॉक्टरों की कमी जैसे आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कई उप-जिला अस्पतालों में एनेस्थेटिस्ट, फिजिशियन और आईसीयू सुविधाओं की भारी कमी है। परिजनों के मुताबिक कई बार मदद की गुहार लगाने के बावजूद समय पर डॉक्टर नहीं पहुंचे। कुछ अस्पतालों में एक ही डॉक्टर कई गंभीर मरीजों को संभाल रहा था, जबकि सीमित संसाधनों के बीच नर्सिंग स्टाफ मरीजों का इलाज करने की कोशिश कर रहा था।

सरकार ने क्या कहा?

राजस्थान सरकार ने इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए भीलवाड़ा और बांसवाड़ा सहित प्रभावित जिलों में विशेषज्ञ टीमों को जांच के लिए भेजा है। स्वास्थ्य विभाग ने कई जांच समितियां गठित की हैं और लगातार समीक्षा बैठकें भी की जा रही हैं। हालांकि, राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने इन मौतों को फिलहाल रहस्य बताया है। उनका कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि मई से अब तक इतनी बड़ी संख्या में माताओं की मौत आखिर क्यों हुई। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अब तक किसी जांच समिति ने इन सभी मामलों के पीछे कोई एक स्पष्ट कारण नहीं बताया है।

शुरुआती जांच में क्या सामने आया?

स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक रिपोर्टों में कई संभावित कारणों का उल्लेख किया गया है। इनमें प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव, संक्रमण (सेप्सिस), दवाओं के संभावित दुष्प्रभाव, गंभीर एनीमिया और हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी जैसी स्थितियां शामिल हैं। हालांकि, अब तक जांच एजेंसियां ऐसा कोई साझा कारण नहीं खोज पाई हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि इतने कम समय में अलग-अलग जिलों में एक जैसी घटनाएं क्यों सामने आईं।

एक्सपर्ट की चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन मामलों की जल्द और निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो इससे सरकारी अस्पतालों में प्रसव सेवाओं पर लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है। उनका कहना है कि हर मामले की मेडिकल ऑडिट कर यह पता लगाना जरूरी है कि कहीं इलाज में लापरवाही, संसाधनों की कमी या किसी अन्य प्रणालीगत समस्या के कारण तो ये मौतें नहीं हुईं। फिलहाल, राजस्थान में माताओं की लगातार हो रही मौतों का कारण अब भी स्पष्ट नहीं हो पाया है। जांच जारी है और पूरे राज्य की नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर इन मौतों के पीछे असली वजह क्या है।

मामलों को लेकर सरकार गंभीर

राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने सोमवार को कहा कि प्रसूताओं की मृत्यु की हालिया घटनाओं को लेकर राज्य सरकार संवेदनशील और गंभीर है। स्वास्थ्य भवन में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए खींवसर ने कहा कि इन सभी मामलों में मरीज विभिन्न स्थानों से रेफर होकर सरकारी अस्पतालों में भर्ती हुए थे। खींवसर ने कहा कि राज्य में मातृ मृत्यु के मामलों में लगातार कमी आई है।

पीटीआई के मुताबिक, उन्होंने कहा, “2023-24 में मातृ मृत्यु के 1,094 मामले दर्ज किए गए थे, जो 2024-25 में घटकर 986 और 2025-26 में 824 रह गए। इस प्रकार वर्तमान सरकार के कार्यकाल में मातृ मृत्यु के मामलों में लगभग 25 प्रतिशत की कमी आई है।” उन्होंने कम समय में प्रसूताओं की लगातार हुई मौतों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक घटना को गंभीरता से ले रही है। मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

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स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि 2011 में जोधपुर में तीन दिन के भीतर 18 प्रसूताओं की मृत्यु हुई थी, जिनका कारण एक जैसा था। इसी प्रकार 2011-12 में जयपुर में भी आठ प्रसूताओं की क्रमिक मृत्यु हुई थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान मामलों में ऐसा नहीं है। प्रत्येक मामले में मृत्यु के कारण अलग-अलग थे। बैठक के दौरान खींवसर ने ऑनलाइन माध्यम से बांसवाड़ा और भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के डॉक्टरों से मृत्यु के मामलों की विस्तृत जानकारी ली।

लखनऊ में शहीद पथ पर बनेगा नया एलिवेटेड कॉरिडोर, नितिन गडकरी ने दिए डीपीआर बनाने के निर्देश

new elevated corridor will be built on Shaheed Path in Lucknow

– योगी सरकार की कानून व्यवस्था और विकास मॉडल की सड़क एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने की सराहना

– रक्षामंत्री राजनाथ सिंह बोले- योगी जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों पर

– शहीद पथ पर एयरपोर्ट से आउटर रिंग रोड तक बनेगा 23 किमी लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर

– केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने गिनाईं यूपी में भावी योजनाएं

Uttar Pradesh News : लखनऊ में बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए शहीद पथ पर बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट साकार होने जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कहने पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लखनऊ एयरपोर्ट से आउटर रिंग रोड तक लगभग 23 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण के लिए डीपीआर तैयार करने के निर्देश दे दिए हैं। नितिन गडकरी ने कहा कि इस वर्ष दिसंबर तक भूमि पूजन कर परियोजना का निर्माण कार्य शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा। दोनों वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों ने योगी सरकार की कार्यशैली की खुलकर सराहना की। 

 

सोमवार को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4,850 करोड़ रुपए से अधिक की 3 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। 

 

शहीदपथ पर वाहन चालकों को जाम से मिलेगी राहत

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में केंद्र सरकार थी, तब उनके सड़क परिवहन मंत्री रहते हुए शहीद पथ का शिलान्यास हुआ था। आज यही शहीद पथ लखनऊ की लाइफलाइन बन चुका है। लगातार बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए अब इसके ऊपर एलिवेटेड रोड बनाना समय की आवश्यकता है, जिससे वाहन चालकों को जाम से राहत मिलेगी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में इसी कॉरिडोर पर मेट्रो भी संचालित की जाए, ताकि लोगों को तेज और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध हो सके।

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तीन लेयर फ्लाईओवर बनेगा दुनिया के आकर्षण का केंद्र

नितिन गडकरी ने कहा कि लखनऊ में प्रस्तावित तीन लेयर एलिवेटेड फ्लाईओवर विश्व स्तर पर आकर्षण का केंद्र बनेगा। इस परियोजना में आधुनिक मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम की भी व्यवस्था की जाएगी, जिससे सड़क और सार्वजनिक परिवहन दोनों को मजबूती मिलेगी। किसी भी राज्य के विकास की नींव मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर होती है। पानी, बिजली, परिवहन और संचार व्यवस्था बेहतर होने से उद्योग, व्यापार और निवेश बढ़ता है, जिससे रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और गरीबी व बेरोजगारी कम होती है।

 

लखनऊ-सीतापुर सिक्स लेन हाईवे सहित कई परियोजनाओं को मिली मंजूरी

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि लखनऊ से सीतापुर तक प्रस्तावित छह लेन राजमार्ग को भी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने तत्काल स्वीकृति दे दी है और जल्द ही इस परियोजना पर काम शुरू होने की उम्मीद है। वहीं नितिन गडकरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 50 से 60 हजार करोड़ रुपए की नई सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

अगले दो वर्षों में प्रदेश में लगभग पांच लाख करोड़ रुपए के विकास कार्य पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है। नितिन गडकरी ने कहा कि लखनऊ के किसान पथ पर सर्विस रोड बनाई जाएगी। इसके अलावा अयोध्या-गोंडा बाईपास, आनंदनगर-महराजगंज बाईपास, पडरौना-तमकुही बाईपास तथा दादरी-लालकुआं छह लेन एलिवेटेड रोड जैसी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है।

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रक्षा मंत्री और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने मुख्यमंत्री योगी की सराहना की

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का विकास पूरे देश में चर्चा का विषय है। किसी भी प्रदेश के विकास की पहली शर्त मजबूत कानून व्यवस्था होती है और योगी सरकार ने यह स्थापित करके दिखाया है। लखनऊ के विकास से जुड़े हर प्रस्ताव को मुख्यमंत्री ने प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया और आने वाले समय में लखनऊ के आसपास बड़े उद्योग स्थापित होंगे।

 

यूपी में सीएम योगी ने समाप्त किया गुंडाराजः नितिन गडकरी

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था मजबूत कर लोगों का विश्वास जीता और गुंडाराज को समाप्त किया। किसी भी देश और राज्य के विकास में चार बातें महत्वपूर्ण होती हैं।

सबसे पहली आवश्यकता मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर की होती है। इंफ्रास्ट्रक्चर के चार प्रमुख आधार हैं वाटर, पावर, ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन, जहां ये चारों व्यवस्थाएं मजबूत होती हैं, वहां व्यापार, उद्योग और कारोबार तेजी से बढ़ते हैं।

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इसके साथ ही पूंजी निवेश आता है। जहां व्यापार, उद्योग और निवेश बढ़ता है, वहां रोजगार का सृजन होता है और जहां रोजगार का निर्माण होता है, वहां गरीबी, भुखमरी और बेरोजगारी स्वतः दूर हो जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में तेजी से विकास हुआ है। 

वर्ल्ड अपडेट्स:पोलैंड की नेता ने ‘हिटलर’ जेलेंस्की की तस्वीर कूड़ेदान में फेंकी

पोलैंड की राजनेता और क्राकोव की मेयर पद की उम्मीदवार मरिआना श्राइबर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की तस्वीर कूड़ेदान में फेंक दी। उन्होंने यूक्रेन पर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलिश नागरिकों के नरसंहार से जुड़े विवादित राष्ट्रवादी संगठनों और नेताओं का महिमामंडन करने का आरोप लगाया। वीडियो में श्राइबर ने जेलेंस्की की एक तस्वीर दिखाई, जिस पर हिटलर जैसी मूंछ बनाई गई थी। इसके बाद उन्होंने तस्वीर को मोड़कर कूड़ेदान में फेंकते हुए कहा कि “अपराधियों का महिमामंडन करने वालों की जगह इतिहास के कूड़ेदान में है।” उन्होंने कहा कि “बांदेरावादी नायक नहीं हैं, बल्कि मानवता के लिए कलंक हैं।” साथ ही आरोप लगाया कि यूक्रेन ने अब तक पोलिश नागरिकों के नरसंहार के लिए औपचारिक माफी नहीं मांगी है। श्राइबर ने यह टिप्पणी 11 जुलाई 1943 की ‘ब्लडी संडे’ घटना की बरसी पर की। पोलैंड के अनुसार, उस दिन यूक्रेनी विद्रोही सेना (UPA) ने वोल्हीनिया क्षेत्र के पोलिश गांवों पर एक साथ हमले किए थे। पोलैंड का दावा है कि 1943-44 के दौरान ऐसे हमलों में लगभग एक लाख पोलिश नागरिक मारे गए थे और वह इन घटनाओं को नरसंहार मानता है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… EU माइग्रेशन कानून पर विवाद: स्वीडिश सांसद ने डेनिश सांसद के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत
यूरोपीय संसद में हाल ही में पारित सख्त माइग्रेशन कानून को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब कानूनी लड़ाई में बदल गया है। स्वीडन की सांसद आबिर अल-सहलानी ने डेनमार्क के सांसद क्रिस्टोफर स्टॉर्म के खिलाफ कथित नस्लीय टिप्पणी को लेकर स्वीडिश पुलिस में आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने इस मामले की शिकायत यूरोपीय संसद की अध्यक्ष रोबर्टा मेट्सोला से भी की है। यह विवाद पिछले महीने यूरोपीय संसद द्वारा पारित रिटर्न रेगुलेशन के बाद शुरू हुआ। नए कानून के तहत यूरोपीय संघ के सदस्य देशों को अवैध प्रवासियों के निर्वासन की प्रक्रिया तेज करने के लिए यूरोपीय संघ के बाहर ‘रिटर्न हब’ स्थापित करने की अनुमति दी गई है। कानून पारित होने के बाद संसद में “उन्हें वापस भेजो” जैसे नारे लगे। इराकी मूल की स्वीडिश सांसद आबिर अल-सहलानी ने इन नारों की आलोचना करते हुए कहा कि यह कट्टर दक्षिणपंथी राजनीति का चिंताजनक उदाहरण है और इस घटना के बाद उन्होंने संसद में खुद को असुरक्षित महसूस किया। इसके जवाब में डेनिश सांसद क्रिस्टोफर स्टॉर्म ने सोशल मीडिया पर “गो होम” टिप्पणी की। अल-सहलानी ने इसे नस्लीय घृणा फैलाने वाली टिप्पणी बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। यूरोपीय संघ में माइग्रेशन का मुद्दा लगातार राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में प्रवासियों के यूरोप पहुंचने के बाद इस विषय पर सदस्य देशों के बीच मतभेद और राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। जर्मनी यूक्रेन को देगा 50 हजार अटैक ड्रोन, 9 करोड़ यूरो की डील की फंडिंग करेगा
जर्मनी यूक्रेन के लिए 50,000 एफपीवी (फर्स्ट-पर्सन व्यू) अटैक ड्रोन खरीदने का वित्तपोषण करेगा। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, इस सौदे की अनुमानित कीमत करीब 9 करोड़ यूरो (10.3 करोड़ डॉलर) है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये श्राइक (Shrike) नामक कम लागत वाले अटैक ड्रोन यूक्रेन की कंपनी स्काईफॉल बनाती है। इनमें अमेरिकी कंपनी ऑटेरियन का सॉफ्टवेयर लगा है, जो उड़ान के अंतिम चरण में चलते हुए लक्ष्य की खुद पहचान कर उस पर हमला करने में सक्षम है। ऑटेरियन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लॉरेंज मेयर के अनुसार, कुछ ड्रोन पहले ही यूक्रेन को भेजे जा चुके हैं और बाकी की आपूर्ति 2026 के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी कंपनी इस वर्ष विभिन्न निर्माताओं के कम से कम एक लाख ड्रोन के लिए सॉफ्टवेयर उपलब्ध करा रही है, जिनकी फंडिंग कई पश्चिमी सरकारें कर रही हैं। रॉयटर्स के अनुसार, स्काईफॉल ने इस सौदे में जर्मनी की भागीदारी की पुष्टि की है, लेकिन और जानकारी देने से इनकार कर दिया। वहीं, जर्मनी और यूक्रेन के रक्षा मंत्रालयों ने इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। चीन में भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई: पूर्व पोलित ब्यूरो सदस्य मा शिंगरुई पार्टी से निष्कासित
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व पोलित ब्यूरो सदस्य मा शिंगरुई को कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, मा पर भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और रिश्तेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप लगे हैं। मा शिंगरुई को अप्रैल में “कानून और पार्टी अनुशासन के गंभीर उल्लंघन” के आरोप में जांच के दायरे में लिया गया था। जांच में पाया गया कि उन्होंने अधिकारियों की नियुक्ति और पदोन्नति में दूसरों को अनुचित लाभ पहुंचाया, अपने प्रभाव का दुरुपयोग किया तथा रिश्तेदारों को बाजार मूल्य से कम कीमत पर संपत्ति खरीदने में मदद की। शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, मा ने महंगे उपहार स्वीकार किए और अपने परिवार के सदस्यों को सरकारी प्रभाव का इस्तेमाल कर बड़े आर्थिक लाभ दिलाए। जांच एजेंसियों ने इसे बड़े पैमाने पर “पारिवारिक भ्रष्टाचार” (फैमिली करप्शन) बताया है। मा शिंगरुई पहले चीन के एयरोस्पेस उद्योग में वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं और उन्होंने देश के कई महत्वपूर्ण अंतरिक्ष कार्यक्रमों की जिम्मेदारी संभाली थी। बाद में वे राजनीति में आए और पोलित ब्यूरो तक पहुंचे। 2025 के बाद किसी मौजूदा पोलित ब्यूरो सदस्य के खिलाफ यह तीसरी बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

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यूरोपीय संसद में हाल ही में पारित सख्त माइग्रेशन कानून को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब कानूनी लड़ाई में बदल गया है। स्वीडन की सांसद आबिर अल-सहलानी ने डेनमार्क के सांसद क्रिस्टोफर स्टॉर्म के खिलाफ कथित नस्लीय टिप्पणी को लेकर स्वीडिश पुलिस में आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने इस मामले की शिकायत यूरोपीय संसद की अध्यक्ष रोबर्टा मेट्सोला से भी की है। यह विवाद पिछले महीने यूरोपीय संसद द्वारा पारित रिटर्न रेगुलेशन के बाद शुरू हुआ। नए कानून के तहत यूरोपीय संघ के सदस्य देशों को अवैध प्रवासियों के निर्वासन की प्रक्रिया तेज करने के लिए यूरोपीय संघ के बाहर ‘रिटर्न हब’ स्थापित करने की अनुमति दी गई है। कानून पारित होने के बाद संसद में “उन्हें वापस भेजो” जैसे नारे लगे। इराकी मूल की स्वीडिश सांसद आबिर अल-सहलानी ने इन नारों की आलोचना करते हुए कहा कि यह कट्टर दक्षिणपंथी राजनीति का चिंताजनक उदाहरण है और इस घटना के बाद उन्होंने संसद में खुद को असुरक्षित महसूस किया। इसके जवाब में डेनिश सांसद क्रिस्टोफर स्टॉर्म ने सोशल मीडिया पर “गो होम” टिप्पणी की। अल-सहलानी ने इसे नस्लीय घृणा फैलाने वाली टिप्पणी बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। यूरोपीय संघ में माइग्रेशन का मुद्दा लगातार राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में प्रवासियों के यूरोप पहुंचने के बाद इस विषय पर सदस्य देशों के बीच मतभेद और राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। जर्मनी यूक्रेन को देगा 50 हजार अटैक ड्रोन, 9 करोड़ यूरो की डील की फंडिंग करेगा
जर्मनी यूक्रेन के लिए 50,000 एफपीवी (फर्स्ट-पर्सन व्यू) अटैक ड्रोन खरीदने का वित्तपोषण करेगा। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, इस सौदे की अनुमानित कीमत करीब 9 करोड़ यूरो (10.3 करोड़ डॉलर) है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये श्राइक (Shrike) नामक कम लागत वाले अटैक ड्रोन यूक्रेन की कंपनी स्काईफॉल बनाती है। इनमें अमेरिकी कंपनी ऑटेरियन का सॉफ्टवेयर लगा है, जो उड़ान के अंतिम चरण में चलते हुए लक्ष्य की खुद पहचान कर उस पर हमला करने में सक्षम है। ऑटेरियन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लॉरेंज मेयर के अनुसार, कुछ ड्रोन पहले ही यूक्रेन को भेजे जा चुके हैं और बाकी की आपूर्ति 2026 के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी कंपनी इस वर्ष विभिन्न निर्माताओं के कम से कम एक लाख ड्रोन के लिए सॉफ्टवेयर उपलब्ध करा रही है, जिनकी फंडिंग कई पश्चिमी सरकारें कर रही हैं। रॉयटर्स के अनुसार, स्काईफॉल ने इस सौदे में जर्मनी की भागीदारी की पुष्टि की है, लेकिन और जानकारी देने से इनकार कर दिया। वहीं, जर्मनी और यूक्रेन के रक्षा मंत्रालयों ने इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। चीन में भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई: पूर्व पोलित ब्यूरो सदस्य मा शिंगरुई पार्टी से निष्कासित
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व पोलित ब्यूरो सदस्य मा शिंगरुई को कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, मा पर भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और रिश्तेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप लगे हैं। मा शिंगरुई को अप्रैल में “कानून और पार्टी अनुशासन के गंभीर उल्लंघन” के आरोप में जांच के दायरे में लिया गया था। जांच में पाया गया कि उन्होंने अधिकारियों की नियुक्ति और पदोन्नति में दूसरों को अनुचित लाभ पहुंचाया, अपने प्रभाव का दुरुपयोग किया तथा रिश्तेदारों को बाजार मूल्य से कम कीमत पर संपत्ति खरीदने में मदद की। शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, मा ने महंगे उपहार स्वीकार किए और अपने परिवार के सदस्यों को सरकारी प्रभाव का इस्तेमाल कर बड़े आर्थिक लाभ दिलाए। जांच एजेंसियों ने इसे बड़े पैमाने पर “पारिवारिक भ्रष्टाचार” (फैमिली करप्शन) बताया है। मा शिंगरुई पहले चीन के एयरोस्पेस उद्योग में वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं और उन्होंने देश के कई महत्वपूर्ण अंतरिक्ष कार्यक्रमों की जिम्मेदारी संभाली थी। बाद में वे राजनीति में आए और पोलित ब्यूरो तक पहुंचे। 2025 के बाद किसी मौजूदा पोलित ब्यूरो सदस्य के खिलाफ यह तीसरी बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

टिकट बुकिंग का झंझट खत्म! जानें IRCTC के नए स्मार्ट फीचर के बारे में

रेलवे से ट्रैवल करने वाले करोड़ों पैसेंजर के लिए अच्छी खबर है। जल्द ही IRCTC की नई वेबसाइट का बीटा वर्जन लॉन्च होने वाला है, जिससे ऑनलाइन ट्रेन टिकट बुकिंग पहले से ज्यादा आसान, तेज और सुविधाजनक हो जाएगी। आइए जानते हैं नई वेबसाइट में कौन-कौन से नए फीचर्स जोड़े गए हैं और इससे पैसेंजर को क्या-क्या फायदे मिलेंगे:

15 जुलाई तक लॉन्च हो सकती है नई वेबसाइट

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IRCTC की नई वेबसाइट का बीटा वर्जन और अपग्रेडेड पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) का रिव्यू पूरा हो चुका है। रेलवे इसे 15 जुलाई 2026 तक आम लोगों के लिए लाइव कर सकता है। वेबसाइट को बेहतर बनाने में CRIS, IRCTC और MNIT जयपुर के स्टूडेंट्स ने मिलकर टेक्निकल सुधार किए हैं। इससे पैसेंजर को पहले से बेहतर और स्मूथ ऑनलाइन टिकट बुकिंग का एक्सपीरियंस मिलेगा।

एक स्क्रीन पर दिखेंगी सभी सीटों की जानकारी

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नई वेबसाइट में सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि अब स्लीपर, 3AC, 2AC और दूसरी सभी क्लासेज की अवेलेबल सीटें एक ही स्क्रीन पर दिखाई देंगी। अलग-अलग कैटेगरी देखने के लिए बार-बार क्लिक करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे पैसेंजर को सीटों की अवेलेबिलिटी एक नजर में समझ आ जाएगी और समय की बचत होगी।

कैप्चा और पॉप-अप से मिलेगी राहत

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टिकट बुकिंग के दौरान आने वाले उलझाऊ कैप्चा, फ्लैशिंग ग्राफिक्स और अनचाहे पॉप-अप को हटाया जा रहा है। इससे वेबसाइट ज्यादा साफ, तेज और उपयोग में आसान बनेगी। खासकर तत्काल टिकट बुक करने वाले पैसेंजर को इसका बड़ा फायदा मिलेगा।

तेज होगी टिकट बुकिंग प्रोसेस

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रेलवे ने टिकट बुकिंग के स्टेप्स कम कर दिए हैं, जिससे फास्ट चेकआउट की सुविधा मिलेगी। पैसेंजर की नाम, उम्र जैसी जानकारी पहले से सेव रहेगी, जिससे बार-बार फॉर्म भरने की जरूरत नहीं होगी। इससे तत्काल और सामान्य टिकट पहले से ज्यादा तेजी से बुक किए जा सकेंगे।

40 साल पुराना PRS सिस्टम होगा अपग्रेड

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रेलवे अपने 40 साल पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) को भी अपग्रेड कर रहा है। IRCTC के अधिकारियों के अनुसार, नया सिस्टम टिकट बुकिंग को पहले से ज्यादा तेज, आसान और भरोसेमंद बनाएगा। इससे वेबसाइट पर ज्यादा ट्रैफिक होने पर भी बेहतर परफॉरमेंस और कम टेक्निक दिक्कतें देखने को मिलेंगी।

VIDEO: बस में लड़की के सामने युवक करने लगा अश्लील हरकत! फिर युवती ने सिखाया सही सबक

मध्य प्रदेश के सागर जिले के देवरी बस स्टैंड से एक शर्मनाक मामला सामने आया है। एक सार्वजनिक बस में कथित तौर पर एक युवक ने युवती के साथ अशोभनीय हरकत करने की कोशिश की। घटना के बाद युवती ने साहस दिखाते हुए आरोपी का विरोध किया और उसे थप्पड़ मार दिया। ये पूरी घटना बस में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने घटना पर नाराजगी जताई है और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

घटना का सीसीटीवी वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों में काफी नाराजगी देखने को मिल रही है। कई यूजर्स ने युवती की बहादुरी की सराहना करते हुए कहा कि उसने बिना डरे आरोपी का सामना किया और उसके खिलाफ आवाज उठाकर साहस का परिचय दिया।

क्या है पूरी घटना

आरोपी की पहचान नितेश गोंड के रूप में हुई है। वीडियो में दिख रहा कि वह बस में चढ़ा और आगे की सीट पर बैठी दो युवतियों के पास पहुंच गया। आरोप है कि उसने एक युवती के साथ अश्लील और आपत्तिजनक हरकत करने की कोशिश की। आरोपी व्यक्ति आइल सीट पर बैठी एक लड़की के पास गया, अपनी पैंट की जिप खोली और अपने प्राइवेट पार्ट से अश्लील हरकत करने लगा। खिड़की के पास बैठी युवती ने सबसे पहले आरोपी की हरकत देखी और तुरंत अपनी दोस्त को इसके बारे में बताया।

युवती ने जड़ा थप्पड़

दोनों ने पहले उससे दूरी बनाने की कोशिश की, लेकिन जब आरोपी अपनी कथित अश्लील हरकतों से बाज नहीं आया, तो युवती ने हिम्मत दिखाते हुए सभी यात्रियों के सामने उसे थप्पड़ मार दिया। इसके बाद दोनों के बीच कुछ देर कहासुनी हुई, जिसके बाद आरोपी बस से उतरकर वहां से भाग गया। ये पूरी घटना बस में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसके आधार पर मामले की जांच की जा रही है।

यूजर ने किया कमेंट

घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी। एक यूजर ने लिखा, “इस युवती ने जिस साहस के साथ आरोपी का सामना किया, वह काबिल-ए-तारीफ है। उसने डरने के बजाय तुरंत विरोध किया और गलत हरकत करने वाले को सबक सिखाया। सार्वजनिक जगहों पर इस तरह की शर्मनाक हरकतों की कोई जगह नहीं है। अच्छा है कि पुलिस ने भी तेजी से कार्रवाई की।” एक अन्य यूजर ने कहा, “ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। समाज में इस तरह की मानसिकता वाले लोगों को खुला नहीं छोड़ना चाहिए।”

एक और व्यक्ति ने लिखा, “ऐसी हरकत करने वालों को बेनकाब करना और उनके खिलाफ सख्त कदम उठाना जरूरी है। अगर समय रहते विरोध नहीं किया गया तो ऐसे लोगों का हौसला बढ़ सकता है।”

पुलिस ने शुरू कर दी जांच

सीसीटीवी वीडियो वायरल होने के बाद देवरी पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपी की पहचान कर उसे हिरासत में ले लिया। पुलिस ने कहा कि अब तक पीड़ित युवती या उसके परिवार की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है। इसके बावजूद पुलिस ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के साथ अभद्रता या छेड़छाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इंग्लैंड के खिलाफ एकदिवसीय सीरीज कल से शुरु, इन 3 भारतीय चेहरों पर रहेगी नजर

ENGvsIND इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज में सूपड़ा साफ होने के बाद भारतीय क्रिकेट प्रशंसको की उम्मीदें एकदिवसीय क्रिकेट में कुछ अच्छी खबर सुनने की तरफ होगी क्योंकि इस प्रारुप में वरिष्ठ खिलाड़ी फैंस को हार के सिलसिले को तोड़ने का माद्दा रखते हैं क्योंकि उन्होंने भरपूर आराम लिया है।कोहली, रोहित और जसप्रीत बुमराह उस प्रारूप में खेलने के लिए वापसी कर रहे हैं।

रोहित हाल ही में अफगानिस्तान सीरीज में शिरकत करते देखे गए थे। लेकिन विराट कोहली ने फरवरी में इंदौर में न्यूजीलैंड के खिलाफ अंतिम एकदिवसीय मैच खेला था। बुमराह की बात की जाए तो वह तो 2 साल से टी-20 विश्वकप के लिए तैयारी कर रहे थे। 2 बार टीम को कप जिताने के बाद अब वह अगले साल होने वाले एकदिवसीय विश्वकप की तैयारी कर रहे हैं। जसप्रीत बुमराह ने अंतिम एकदिवसीय मैच भी विश्वकप फाइनल 2023 खेला था।

रोहित और कोहली ने पिछले कई वर्षों में इंग्लैंड के गेंदबाजों की जमकर धुनाई की है और वह इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं कि उनसे क्या उम्मीद की जा रही है।भारतीय टीम प्रबंधन ने रोहित और कोहली के लिए चीजें आसान बनाकर नहीं रखी हैं लेकिन अभी टीम जिस परिस्थिति से गुजर रही है उसे देखते हुए वह इन दोनों का खुले दिल से स्वागत करने के लिए विवश होगा। वनडे में जीत से टी20 की कमियों को छुपाया नहीं जा सकता लेकिन इससे खिलाड़ियों का मनोबल ज़रूर बढेगा।

कप्तान शुभमन गिल की वापसी और अनुभवी केएल राहुल की मौजूदगी से भारत के पास अनुभवी बल्लेबाजों की एक शानदार चौकड़ी है, जो किसी भी मैच का रुख पलट सकती है।अगर श्रेयस अय्यर को भी इसमें शामिल कर लिया जाए, तो बल्लेबाजी इकाई को लेकर ज्यादा चिंता की कोई बात नहीं होनी चाहिए। लेकिन गेंदबाजी इकाई के लिए ऐसा नहीं कहा जा सकता है जिसे बुमराह की वापसी से मजबूती मिलेगी।

भारत के नए तेज गेंदबाज गुरनूर बराड़ को इंग्लैंड की पिचों पर अपनी लेंथ को लेकर बिल्कुल अलग चुनौती का सामना करना पड़ेगा।अर्शदीप सिंह बाएं हाथ के तेज गेंदबाज के रूप में निश्चित रूप से टीम को एक नया आयाम देंगे, जबकि शिवम दुबे चौथे तेज गेंदबाज होंगे। दुबे को चोटिल हार्दिक पंड्या और नीतीश कुमार रेड्डी की अनुपस्थिति के कारण मजबूरी में टीम में शामिल किया गया है।

वॉशिंगटन सुंदर और अक्षर पटेल दोनों ने ही टी20 श्रृंखला में बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में निराशाजनक प्रदर्शन किया। लेकिन शायद ही उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा क्योंकि भारतीय टीम प्रबंधन उनकी बल्लेबाजी को तवज्जो दे रहा है और वह बल्लेबाजी में टीम के सर्वश्रेष्ठ स्पिनर कुलदीप यादव से ज्यादा योगदान दे रहे हैं।

इंग्लैंड के खिलाफ भारत के लिए यह फायदे की बात होगी कि मेजबान टीम ने 27 जनवरी के बाद से कोई भी वनडे मैच नहीं खेला है।बहुत सारे टी20 और कुछ टेस्ट मैच (न्यूजीलैंड के खिलाफ) खेलने के बाद इंग्लैंड को इस प्रारूप के लिए अपनी लय में लौटना होगा हालांकि टी20 में शानदार जीत से उसके खिलाड़ियों का मनोबल काफी बढ़ा होगा।

बल्लेबाजी क्रम में जो रूट के शामिल होने से इंग्लैंड की बल्लेबाजी को और अधिक मजबूती मिलेगी। बल्लेबाजी में उसका दारोमदार हैरी ब्रूक, जैकब बेथेल और जोस बटलर पर टिका रहेगा।उपमहाद्वीप की पिचों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण पिचों पर जोफ्रा आर्चर और जोश टंग जैसे सटीक गेंदबाजी करने वाले तेज गेंदबाजों का सामना करना एक अलग ही चुनौती है।

भारतीय दल में अब दाएं हाथ के बल्लेबाज ज्यादा रहेंगें इस कारण सैम करन और लियाम डॉसन की भूमिका ज्यादा होगी। इंग्लैंड ने लगभग टी-20 का दल ही एकदिवसीय मैचों के लिए रखा है इस कारण कागज पर भारत बेहतर दल लग रहा है।फिल साल्ट की जगह बेन डकेट सलामी बल्लेबाजी संभालेंगे।

टीम इस प्रकार हैं:

भारत: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर (उप-कप्तान), केएल राहुल (विकेटकीपर), इशान किशन (विकेटकीपर), वॉशिंगटन सुंदर, अक्षर पटेल, शिवम दुबे, कुलदीप यादव, जसप्रीत बुमराह, प्रसिद्ध कृष्णा, अर्शदीप सिंह, गुरनूर बराड़, प्रिंस यादव।

इंग्लैंड: हैरी ब्रूक (कप्तान), बेन डकेट, जोस बटलर (विकेटकीपर), टॉम बैंटन, जो रूट, जैकब बेथेल, विल जैक्स, रेहान अहमद, लियाम डॉसन, जेम्स कोल्स, सैम कुरेन, गस एटकिंसन, जोफ्रा आर्चर, जोश टंग, साकिब महमूद, आदिल राशिद।

समय: दोपहर 3:30 बजे

इंग्लैंड ने भारत को 56 रनों से हराकर सीरीज पर 4-0 से कब्जा कर पाई नंबर 1 रैंक

ENGvsIND जोस बटलर ने अपने पुराने आक्रामक अंदाज की झलक दिखाते हुए शानदार शतक जड़ा, जबकि कप्तान हैरी ब्रुक ने भविष्य के सितारे की तरह बल्लेबाजी करते हुए तूफानी पारी खेली जिससे इंग्लैंड ने पांचवें टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में भारत को 56 रन से हराकर पांच मैचों की श्रृंखला में 4-0 की ऐतिहासिक क्लीन स्वीप पूरी कर ली।

बटलर के 64 गेंदों में 131 रन और ब्रुक के 45 गेंदों में नाबाद 95 रन की बदौलत इंग्लैंड ने तीन विकेट पर 257 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। भारतीय गेंदबाजी आक्रमण इस मुकाबले में पूरी तरह बेअसर नजर आया। बटलर और ब्रुक ने दूसरे विकेट के लिए 233 रन की रिकॉर्ड साझेदारी की, जो टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में किसी भी विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारियों में शामिल हो गई।विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम ने इस दौरे के सभी सात टी20 मुकाबलों में अपनी सबसे अच्छी बल्लेबाजी जरूर की, लेकिन जीत के लिए यह प्रयास काफी नहीं था। भारत की पारी 20 ओवर में आठ विकेट पर 201 रन तक ही पहुंच सकी।

इशान किशन ने 35 गेंदों में 56 रन और आलोचनाओं का सामना कर रहे तिलक वर्मा ने 25 गेंदों में 53 रन बनाए। दोनों बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका मिला, लेकिन उनकी पारियां टीम को जीत दिलाने में सफल नहीं हो सकीं।इस जीत के साथ इंग्लैंड ने भारत का टी20 अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में 1601 दिनों से चला आ रहा शीर्ष स्थान का दबदबा भी समाप्त कर दिया। नए कप्तान श्रेयस अय्यर की अगुवाई में भारत की यह सात मैचों में छठी हार (एक मैच बारिश के कारण रद्द हो गया था) रही,। भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने इस मैच से पहले ही निराशाजनक प्रदर्शन की समीक्षा का संकेत दे दिया था।

भारतीय टीम ने शुरुआत में ही अभिषेक शर्मा का विकेट गंवा दिया था लेकिन पॉवरप्ले में  वैभव सूर्यवंशी की जगह आए संजू सैमसन ने तेज शरुआत दिलाई। हालांकि वह भी पॉवरप्ले में आउट हो गए। 10 ओवर तक ईशान और श्रेयस के कारण भारतीय टीम 110 रन बनाकर मैच में थी लेकिन अगले 6 ओवर टीम जरूरी रन गति नहीं पा सकी और मैच एकतरफा हो गया। भारतीय टीम ने  201 रन बनाने में 9 विकेट गंवा दिए।  

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1.4 लाख की पार्टी में AC से टपका पानी…सोशल मीडिया पर वायरल हुआ कस्टमर का पोस्ट

किसी भी पार्टी पर लाखों रुपये खर्च करने के बाद लोग अच्छी व्यवस्था और बेहतरीन सर्विस की उम्मीद करते हैं। लेकिन गुरुग्राम के एक रेस्टोरेंट को लेकर किया पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। एक कस्टमर ने दावा किया कि करीब 1.4 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी उसे उम्मीद के मुताबिक सुविधा और सेवा नहीं मिली। उनका आरोप है कि पार्टी के दौरान कई एसी से पानी टपक रहा था, बार-बार बिजली जा रही थी, खाने की व्यवस्था में काफी देरी हुई। वहीं जरूरत पड़ने पर वेन्यू का जिम्मेदार व्यक्ति भी मौजूद नहीं था। Reddit पर शेयर की गई उनकी पोस्ट अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

शेयर किया एक्सपीरिएंस

एक व्यक्ति ने अपना एक्सपीरिएंस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर शेयर किया। पोस्ट में उन्होंने दावा किया कि गुरुग्राम के साइबर सिटी स्थित एक माइक्रोब्रुअरी और रेस्टोरेंट में 40 से ज्यादा लोगों के लिए आयोजित पार्टी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी। Reddit पोस्ट के अनुसार, ग्रुप ने प्रति व्यक्ति 3,500 रुपये का “टिप्सी पैकेज” बुक किया था, जिससे पार्टी का कुल खर्च करीब 1.4 लाख रुपये पहुंच गया। इतना महंगा पैकेज लेने के बाद आयोजकों को उम्मीद थी कि वेन्यू पर सभी व्यवस्थाएं अच्छी होंगी, लेकिन उनका दावा है कि ऐसा नहीं हुआ।

एसी से टपक रहा था पानी

शुरुआती परेशानियों का जिक्र करते हुए कस्टमर ने लिखा, “पूरे इवेंट के दौरान AC वेंट्स से पानी टपकता रहा, जिससे फिसलने का खतरा बना हुआ था। AC ठीक से काम नहीं कर रहा था, इसलिए अंदर काफी गर्मी थी। इसके अलावा, तीन घंटे के इवेंट के दौरान करीब पांच बार बिजली भी चली गई।” कस्टमर के मुताबिक, परेशानियां सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं थीं। उनका आरोप है कि मेहमानों की संख्या पहले से तय होने के बावजूद वेन्यू प्रबंधन खाने की सर्विस को सही तरीके से संभाल नहीं पाया।

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सफाई की लिया एक्सट्रा चार्ज

यूजर ने लिखा, “उनके पास दाल मखनी जैसी डिश परोसने के लिए भी पर्याप्त कटोरे नहीं थे। सर्विस काफी धीमी थी। हर बार जब स्टार्टर खत्म हो जाते थे, तो दोबारा आने में 15 से 20 मिनट लग जाते थे। तब तक मेहमानों का इंतजार करते-करते मन ही हट जाता था। खाना भी सिर्फ औसत था। कीमत के हिसाब से उसमें कुछ भी खास या यादगार नहीं था।” कस्टमर ने बताया कि पार्टी के दौरान एक मेहमान की तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद वेन्यू की ओर से उनसे अतिरिक्त सफाई शुल्क लिया गया। उनके मुताबिक, अगर सफाई के लिए अलग से शुल्क लेना था, तो इसकी जानकारी पहले ही देनी चाहिए थी, ताकि बाद में किसी तरह की गलतफहमी या विवाद की स्थिति न बने।

कस्टमर का कहा कि, जब पार्टी के दौरान लगातार परेशानियां बढ़ने लगीं, तो उन्होंने बुकिंग संभाल रहे जिम्मेदार व्यक्ति से कई बार संपर्क करने की कोशिश की। अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कस्टमर ने लिखा, “मैं आमतौर पर नेगेटिव रिव्यू नहीं लिखता, लेकिन जब आप एक ही इवेंट पर 1.4 लाख रुपये से ज्यादा खर्च करते हैं, तो कम से कम अच्छी सर्विस और प्रोफेशनल व्यवहार की उम्मीद जरूर करते हैं।”

यूजर्स ने किए कमेंट

इस पोस्ट के वायरल होने के बाद Reddit पर कई यूजर्स ने अपनी राय दी। कुछ लोगों ने दावा किया कि उन्हें भी इस जगह पर इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा, वहीं ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में इस जगह की क्वालिटी काफी बदल गई है। एक यूज़र ने लिखा, “भाई, वहां का AC अप्रैल से ही खराब है। वह जगह बेकार, घुटन वाली और क्लॉस्ट्रोफोबिक लगती है।” एक अन्य यूजर ने अपने पुराने अनुभव को याद करते हुए कहा, “मुझे लगता है कि वह कॉर्पोरेट इवेंट था, कोई पर्सनल पार्टी नहीं। हमने 2017 में करीब 50 लोगों का एक इवेंट वहां किया था और उस समय सब कुछ बहुत अच्छा था। लाइव म्यूजिक, बढ़िया माहौल और अच्छी सर्विस मिली थी। लेकिन कुछ महीनों बाद जब मैं दोस्तों के साथ दोबारा गया, तो पूरा अनुभव बिल्कुल अलग और निराशाजनक था। मुझे नहीं पता कि आखिर ऐसा क्या बदल गया।”

IND vs ENG: टीम इंडिया में बदलाव करने की जरूरत…टी20 में लगातार हार के बाद पूर्व क्रिकेटर का बड़ा बयान

IND vs ENG: भारत और इंग्लैंड के बीच 5 मैचों की टी20 सीरीज का पांचवां मुकाबला शनिवार 11 जुलाई को खेला जाएगा। वहीं इंग्लैंड की टीम 3-0 से पहले ही इस सीरीज को जीत चुकी है। वहीं आखिरी मुकाबले से पहले भारतीय टीम के प्लेइंग 11 को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वहीं इस मुकाबले में सबकी नजरें उपकप्तान तिलक वर्मा पर है। इस दौरे पर अब तक तिलक वर्मा का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है।

तिलक वर्मा ने आयरलैंड के खिलाफ एक मैच में 55 रन बनाए थे, लेकिन उसके बाद खेले गए पांच मुकाबलों में उनके बल्ले से केवल 70 रन ही निकले। ऐसे में अंतिम टी20 में उनकी जगह को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

तिलक वर्मा का खराब प्रदर्शन

इंग्लैंड के गेंदबाज तिलक वर्मा की कमजोरियों को अच्छी तरह समझ चुके हैं और इसी वजह से उनके खिलाफ लगातार स्पिन गेंदबाजों का इस्तेमाल कर रहे हैं। तिलक इस दौरे पर बड़ी पारी खेलने में सफल नहीं रहे हैं, जिसके चलते उनकी टीम में जगह और उपकप्तान बनाए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। इस बीच, एक पूर्व भारतीय क्रिकेटर पार्थिव पटेल ने शुभमन गिल का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके साथ भी पहले ऐसा ही हुआ था और बाद में उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा। उन्होंने उम्मीद जताई कि तिलक वर्मा को खुद को साबित करने का पूरा मौका मिलेगा और वह जल्द ही अच्छी बल्लेबाजी कर वापसी करेंगे।

पार्थिव ने क्या कहा

पूर्व भारतीय क्रिकेटर पार्थिव पटेल ने JioStar के ‘गूगलीज’ पर कहा, “मैं बस उम्मीद कर रहा हूं कि हमें कोई और वाइस-कैप्टन ड्रॉप होते हुए न दिखे। हमारे पास जिस तरह का बैटिंग लाइन-अप है, वह लंबे समय तक काम नहीं कर सकता। अगर आपके टॉप सात बैटर में से छह लेफ्ट-हैंडर हैं, तो वह बैटिंग ऑर्डर काम नहीं करेगा। कहीं न कहीं बदलाव तो करने ही होंगे। अब, कौन टीम में आता है और किस राइट-हैंडर को सपोर्ट मिलता है, मुझे नहीं पता। इसलिए तिलक वर्मा को रन बनाने की जरूरत है।”

खराब फील्डिंग पर उठाए सवाल

पूर्व भारतीय विकेटकीपर पार्थिव पटेल ने भारतीय टीम की फील्डिंग पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ये समस्या सिर्फ पुरुष टीम तक सीमित नहीं है, बल्कि महिला और जूनियर टीमों में भी देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा, “नतीजा थोड़ा हैरान करने वाला और चौंकाने वाला था। खराब क्रिकेट खेलने के बाद आप आयरलैंड को हराने की उम्मीद नहीं कर सकते। पिछले दो से ढाई साल में भारतीय क्रिकेट की सबसे चिंताजनक बात फील्डिंग रही है, चाहे पुरुष टीम हो, महिला टीम हो या जूनियर क्रिकेट।”

उन्होंने आगे कहा, “आयरलैंड सीरीज में भी, अगर पहले मैच में दो या तीन कैच पकड़ लिए गए होते, तो वे 180 से ज्यादा का स्कोर नहीं बना पाते। दूसरे मैच में भी यही हुआ। यह निश्चित रूप से एक ऐसा क्षेत्र है, जिस पर भारत को ध्यान देने की ज़रूरत है क्योंकि टीम अहम मौकों पर कैच छोड़ रही है।”