मलेशिया को मात देकर भारत की पुरुष और महिला टीम ने जीता गोल्ड मेडल

भारत की पुरुष और महिला टेबल टेनिस टीम ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में जारी राष्ट्रमंडल खेल 2026 में मलेशिया की टीम को हराकर स्वर्ण पदक हासिल कर लिया है। भारत की महिली टीम ने मलेशिया को 3-0 से हराया वहीं भारत की पुरुष टीम ने मलेशिया को 3-2 से हराया। यह जीत एक ही दिन और एक ही प्रतिद्वंदी के खिलाफ आई इस कारण से यह जीत टीम के लिए खास है।

भारत की पुरुष टीम ने पिछली बार भी स्वर्ण पदक जीता था जबकि महिला टीम ने 12 साल बाद स्वर्ण पदक जीता है। भारतीय पुरुष टीम में मानव ठक्कर, मानुष शाह, साथियन गणानाशेकरन, हरमीत देसाई और पायस जैन शामिल थे।

भारत ने इससे पहले ग्रुप स्टेज में भी जिमबाब्वे और मलेशिया को 3-0 से हराया था। इसके बाद टीम ने श्रीलंका, वेल्स, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, सिंगापुर और इंग्लैंड पर विजय हासिल की।

खिताबी मुकाबले में मानव ठक्कर, मानुष शाह विजेता रहे जबकि साथियन गणानाशेकरन को हार मिली।

वहीं दूसरी वरीयता प्राप्त महिला टीम ने दबदबा बनाकर छठी वरीयता प्राप्त मलेशिया को  3-0 से हराकर खिताब पाया। भारत की महिला टीम में सिंड्रेला दास, श्रीजा अकुला, यशस्वी घोरपड़े, सुतीर्था मुखर्जी और स्वस्तिका घोष शामिल थीं।

पुरषों की भांति इस टूर्नामेंट में महिला टीम भी बिना कोई मैच हारे खिताब जीती। महिला टीम ने मालदीव, दक्षिण अफ्रीका, उत्तरी आयरलैंड, श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के खिलाफ बिना कोई सेट गंवाए 3-0 से जीत दर्ज की। वहीं सेमीफाइनल में इंग्लैंड को 3-1 से हराया।

श्रीलंका दौरे से पहले टीम इंडिया को मिली बड़ी संजीवनी, जसप्रीत बुमराह फिट

Jasprit Bumrah

श्रीलंका दौरे से पहले टीम इंडिया को एक अच्छी खबर या फिर संजीवनी मिल गई है। इंग्लैंड के खिलाफ घुटने की चोट के कारण तीसरे एकदिवसीय मैच से बाहर बैठे जसप्रीत बुमराह ने फिटनेस टेस्ट पास कर लिया है। वह श्रीलंका के खिलाफ 15 अगस्त से शुरु  हो रहे पहले टेस्ट से अंतिम ग्यारह में जगह बना लेंगे।

श्रीलंका में स्पिन की मुफीद पिचें भारत का इंतजार करेंगी ऐसे में जसप्रीत बुमराह को ऐसी पिच पर आराम देने की सलाह रविचंद्रन अश्विन ने दी थी। लेकिन विश्व टेस्ट चैंपियनशित चक्र 2025-27 को देखते हुए अब भारत की टीम ज्यादा जोखिम नहीं ले सकती। टीम इंडिया के लिए बचे हुए 9 मैचों में से 7 जीतने आवश्यक है।

ऐसे में जसप्रीत बुमराह श्रीलंका के खिलाफ अगर भारत के लिए सलामी गेंदबाजी करते हैं तो मैच जल्दी समाप्त करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। गौरतलब है कि जसप्रीत बुमराह ने कार्यभार प्रबंधन के तहत बोर्ड को पिछले साल इंग्लैंड टेस्ट दौरे पर यह बताया था कि वह 5 में से सिर्फ 3 मैचों का हिस्सा रहेंगे। यह सीरीज जब 2-2 से बराबर हुई तो जसप्रीत बुमराह को साफ शब्दों में बताया गया कि वह पूरी सीरीज के लिए उपलब्ध रहें या फिर पूरी सीरीज से आराम लेलें।

न्यूजीलैंड के खिलाफ उसकी धरती पर होने वाली श्रृंखला से पहले भारत के लिए श्रीलंका में श्रृंखला को 2-0 के अंतर से जीतना बहुत महत्वपूर्ण है। न्यूजीलैंड के खिलाफ उसकी धरती पर होने वाली श्रृंखला काफी चुनौतीपूर्ण होने की उम्मीद है।

तेज गेंदबाज हर्षित राणा और ऑलराउंडर नीतीश रेड्डी चोटिल होने के कारण श्रीलंका के खिलाफ श्रृंखला में नहीं खेल पाएंगे। ऑलराउंडर वाशिंगटन सुंदर भी मांसपेशियों में खिंचाव के कारण पहले टेस्ट मैच से बाहर हो गए हैं जबकि तेज गेंदबाज आकाशदीप अभी तक पीठ की दर्द से नहीं उबर पाए हैं।


जो रूट को 4 साल बाद फिर मिली इंग्लैंड टेस्ट क्रिकेट टीम की कमान

इंग्लैंड के लिए रनों का अंबार लगाने वाले जो रूट टेस्ट टीम के कप्तान चुने गए हैं। वह 4 साल बाद इंग्लैंड की कप्तानी करेंगे। टेस्ट रनों के मामले में जो रूट सिर्फ सचिन तेंदुलकर से पीछे हैं और उन्होंने इस प्रारुप में 41 शतक लगाए हैं जो सिर्फ जैक कैलिस और सचिन तेंदुलकर से पीछे है।

इससे पहले द एथलेटिक ने पिछले शुक्रवार को यह रिपोर्ट किया था कि रूट को 2027 के एशेज तक के लिए टेस्ट कप्तान बनाया जा सकता है। ECB का कहना था कि इस संबंध में अभी कोई फ़ैसला नहीं लिया गया है लेकिन इस समय वह पाकिस्तान के ख़िलाफ़ पहले टेस्ट में टीम की अगुवाई करने की दौड़ में सबसे आगे हैं।

35 वर्षीय रूट 2017 से 2022 तक इंग्लैंड के पूर्णकालिक टेस्ट कप्तान थे। उन्होंने 65 टेस्ट में इंग्लैंड की अगुवाई की है और उनकी कप्तानी में इंग्लैंड ने 27 मैच जीते जबकि 27 में उन्हें हार मिली। लेकिन पिछले 18 टेस्ट मैचों में कप्तानी करते हुए रूट को एक ही जीत हासिल हुई है। बेन स्टोक्स की अनुपस्थिति में पिछले महीने द ओवल में उन्होंने कप्तानी की और इंग्लैंड की 253 रनों से हार के बावजूद उन्होंने कहा कि कप्तान के रूप में वापस आते हुए उन्होंने इस भूमिका का काफ़ी लुत्फ़ उठाया।

हैरी ब्रूक को तीनों प्रारूप में एशेज तक के लिए कप्तान बनाए जाने की योजना पर पूर्णविराम लगा दिया गया है। ECB यह भी विचार कर रहा था कि ब्रूक को टेस्ट कप्तान बनाते हुए किसी अन्य खिलाड़ी को सफ़ेद गेंद के किसी एक या दोनों प्रारूप में कप्तानी दी जाए। जेकब बेथेल (जो कि अभी चोटिल हैं) जैसे किसी कम अनुभव वाले खिलाड़ी को टेस्ट कप्तान बनाते हुए दांव अमूमन इंग्लैंड क्रिकेट जैसा बोर्ड नहीं खेलता। ब्रूक सफ़ेद गेंद के दोनों प्रारूप में कप्तान हैं। ब्रूक की अगुवाई में ही हाल ही में इंग्लैंड ने घर पर भारत को टी 20 में 4-0 और वनडे सीरीज़ में 2-1 से मात दी थी।

नीरज चोपड़ा समेत 3 भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी फाइनल में हराने उतरेंगे नदीम को

नीरज चोपड़ा समेत 3 भारतीय भाला फेंक खिलाड़ियों ने भाला फेंक स्पर्धा के फाइनल में प्रवेश पा लिया है। कुल 20 प्रतियोगियों में से 12 प्रतियोगी को फाइनल में प्रवेश मिला। भारत के 3 खिलाड़ियों का इस स्पर्धा में भाग लेना मायने रखता है। हालांकि ग्लास आधा भरा और आधा खाली जैसी स्थिति है।

क्वालिफाय करने वाले तीनों खिलाड़ियों में से एक ने भी पहली तीन में से एक भी स्थान नहीं पाया। 79.61 मीटर के थ्रो के साथ नीरज चोपड़ा पांचवे स्थान पर रहे। वहीं रोहित यादव 78.37 की थ्रो के साथ नवें स्थान पर रहे। 78.36 मीटर थ्रो के साथ यशवीर सिंह दसवें स्थान पर रहे।

श्रीलंका के रुमेश थरंगा 82.84 मीटर के थ्रो के कारण शीर्ष पर रहे। ग्रेनेडा के एंडरसन पीटर्स 81.29 मीटर के थ्रो के साथ दूसरे स्थान पर रहे। वहीं दक्षिण अफ्रीका के डाउ स्मिट 80.64  मीटर की थ्रो के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इंग्लैंड के बेन इस्ट 80.38  मीटर की थ्रो के साथ चौथे स्थान पर रहे।

ऑस्ट्रेलिया के कैमरून मेकेन्ट्री 78.91 मीटर के साथ छठवें स्थान पर रहे। सातवें स्थान पर रहे पेरिस ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता पाकिस्तान के अर्शद नदीम जिन्होंने  78.63 मीटर दूर भाला फेंका।

बहरीन के केशुआन स्ट्रेचन ने 78.60 मीटर दूर भाला फेंका और वह आठवें स्थआन पर रहे। ट्रिनिडैड और टोबेगो के केशरोन वेलकॉट 78.26 मीटर दूर भाला फेंककर 9वें स्थान पर रहे। दसवें स्थान पर नाइजिरिया के शिनचिरीम नमादी रहे जिन्होंने  75.27 मीटर दूर भाला फेंका।भाला फेंक स्पर्धा का फाइनल शुक्रवार देर रात खेला जाएगा।

Commonwealth Games 2026: जैवलिन थ्रो के फाइनल में आमने-सामने होंगे नीरज चोपड़ा-अरशद नदीम, जानें कब होगा मुकाबला

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा पुरुष जैवलिन थ्रो के फाइनल में अपनी जगह बना ली है। क्वालिफिकेशन राउंड में नीरज ने 79.61 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए पांचवां स्थान हासिल किया और आसानी से फाइनल में पहुंच गए। वहीं नीरज के अलावा भारत के रोहित यादव ने 78.37 मीटर और यशवीर सिंह ने 78.36 मीटर का थ्रो कर क्रमशः नौवां और दसवां स्थान हासिल किया। इस तरह तीनों भारतीय खिलाड़ियों ने फाइनल के लिए क्वालिफाई कर लिया। अब तीनों भारतीय खिलाड़ी पदक जीतने के इरादे से फाइनल में उतरेंगे।

वहीं पाकिस्तान के ओलिंपिक चैंपियन अरशद नदीम ने भी फाइनल में अपनी जगह बना ली है। नदीम ने क्वालिफिकेशन राउंड में 78.63 मीटर के साथ सातवें स्थान हासिल किया। कुल 12 खिलाड़ियों ने पुरुष जैवलिन थ्रो के फाइनल में जगह बनाई है। फाइनल मुकाबला शुक्रवार देर रात 12:45 बजे से खेला जाएगा।

दूसरे प्रयास में फाइनल में पहुंचे नीरज

इस सीजन में शानदार फॉर्म में चल रहे श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरगे ने 82.84 मीटर का थ्रो कर क्वालिफिकेशन राउंड में पहला स्थान हासिल किया। वहीं, ग्लासगो के ठंडे मौसम में नीरज चोपड़ा ने भी संयम के साथ अपना प्रदर्शन किया। उन्होंने पहले प्रयास में 76.28 मीटर और दूसरे प्रयास में 79.61 मीटर तक भाला फेंककर पांचवां स्थान हासिल किया। दूसरे थ्रो के बाद उनका फाइनल में पहुंचना तय हो गया, इसलिए उन्होंने तीसरा और आखिरी प्रयास नहीं किया।

यशवीर-रोहित भी फाइनल में

भारत के दोनों युवा भाला फेंक खिलाड़ी यशवीर सिंह और रोहित यादव ने भी क्वालिफिकेशन राउंड में दमदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में अपनी जगह बना ली। 24 वर्षीय यशवीर ने पहले दो प्रयासों के बाद तीसरे थ्रो में 78.36 मीटर की दूरी हासिल कर शीर्ष 12 में जगह बनाई। वहीं, रोहित यादव ने दूसरे प्रयास में 78.37 मीटर का थ्रो कर फाइनल का टिकट पक्का कर लिया। इसके बाद उन्होंने तीसरा प्रयास नहीं किया। अब नीरज चोपड़ा, रोहित यादव और यशवीर सिंह तीनों भारतीय खिलाड़ी फाइनल में पदक के लिए चुनौती पेश करेंगे।

फाइनल में पहुंचे नदीम

क्वालिफिकेशन राउंड में श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरगे ने 82.84 मीटर का थ्रो कर पहला स्थान हासिल किया। उनके अलावा ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स (81.29 मीटर), दक्षिण अफ्रीका के डाउ स्मिट (80.64 मीटर) और इंग्लैंड के बेन ईस्ट (80.38 मीटर) ने भी नीरज चोपड़ा से बेहतर प्रदर्शन किया। वहीं, पाकिस्तान के अरशद नदीम अपने पहले प्रयास के 78.63 मीटर के थ्रो में सुधार नहीं कर सके, लेकिन इसी प्रदर्शन के दम पर सातवें स्थान पर रहते हुए उन्होंने फाइनल में जगह बना ली।

दिलीप ट्रॉफी में भी शिरकत करेंगें वैभव सूर्यवंशी, खेलेंगे ईशान किशन की कप्तानी में

कम उम्र में ही अपनी बल्लेबाज़ी से धूम मचाने वाले वैभव सूर्यवंशी को आने वाली दिलीप ट्रॉफी के लिए ईस्ट ज़ोन टीम का उप-कप्तान बनाया गया है। यह उनकी तेज़ी से आगे बढ़ने की कहानी का एक और अहम पड़ाव है, क्योंकि हाल के महीनों में ही उन्होंने सीनियर भारतीय टीम में जगह बनाई है।विकेटकीपर-बल्लेबाज़ ईशान किशन इस प्रतिष्ठित इंटर-ज़ोनल रेड-बॉल टूर्नामेंट में 15 सदस्यों वाली टीम की कप्तानी करेंगे। यह टूर्नामेंट 23 अगस्त को बेंगलुरु में शुरू होगा।

15 साल के इस खिलाड़ी के लिए यह सीज़न शानदार रहा है। इंग्लैंड दौरे पर भारत के लिए अपने डेब्यू में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाने के बाद, सूर्यवंशी ने ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ टी20 सीरीज़ में प्रभावित किया। वहाँ उन्होंने कई मैचों में जीत दिलाने वाला प्रदर्शन किया और ‘Player of the series’ चुने गए।

ईस्ट ज़ोन ने एक मज़बूत टीम चुनी है जिसमें कई अनुभवी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी शामिल हैं। चुने गए प्रमुख खिलाड़ियों में भारत के अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद शमी, बंगाल के कप्तान अभिमन्यु ईश्वरन, तेज़ गेंदबाज़ मुकेश कुमार, ऑलराउंडर शाहबाज़ अहमद और विकेटकीपर-बल्लेबाज़ कुमार कुशाग्र शामिल हैं।

शमी के शामिल होने से टीम को बहुत अनुभव मिलेगा। 35 साल के यह तेज़ गेंदबाज़ 2025 चैंपियंस ट्रॉफ़ी फ़ाइनल के बाद से भारत के लिए नहीं खेले हैं, लेकिन घरेलू क्रिकेट में लगातार खेलते रहे हैं। उन्होंने 2025-26 घरेलू सीज़न में बंगाल का प्रतिनिधित्व किया और आईपीएल 2026 में लखनऊ सुपर जायंट्स के 14 में से 13 मैचों में भी खेले।

दिलीप ट्रॉफी 2026 के लिए ईस्ट ज़ोन की टीम: अभिमन्यु ईश्वरन (बंगाल), सुदीप कुमार घरामी (बंगाल), शाहबाज़ अहमद (बंगाल), सूरज सिंधु जायसवाल (बंगाल), मोहम्मद शमी (बंगाल), मुकेश कुमार (बंगाल), ईशान किशन (कप्तान, झारखंड), कुमार कुशाग्र (झारखंड ), शिखर मोहन (झारखंड ), अनुकूल रॉय (झारखंड), विराट सिंह (झारखंड), सुभ्रांशु सेनापति (ओडिशा), वैभव सूर्यवंशी (उप-कप्तान, बिहार), डेनिश दास (असम) और अभिजीत सरकार (त्रिपुरा)। स्टैंडबाय: आयुष लोहारूका (बिहार), श्रीदाम पॉल (त्रिपुरा), संबित एस बराल (ओडिशा), शरणदीप सिंह (झारखंड) और स्वास्तिक सामल (ओडिशा)।

स्टीफन फ्लेमिंग इंग्लैंड की टेस्ट टीम के अगले मुख्य कोच बनने से बहुत करीब

Stephen Fleming

न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान स्टीफन फ्लेमिंग इंग्लैंड की टेस्ट टीम के अगले मुख्य कोच बनने के लिए इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ECB) की पहली पसंद हैं। फ्लेमिंग ने इसी महीने चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के मुख्य कोच पद से इस्तीफा दिया था, इसके कुछ समय बाद ही ब्रैंडन मक्कलम को इंग्लैंड की टेस्ट टीम के मुख्य कोच पद से हटा दिया गया था।

अब ईसीबी के प्रबंध निदेशक रॉब की के साथ बातचीत के बाद फ्लेमिंग अपने हमवतन मक्कलम की जगह लेने के लिए सबसे मजबूत दावेदार नजर आ रहे हैं। उन्होंने CSK को पांच आईपीएल खिताब जिताए हैं और एसए20 व एमएलसी में भी सीएसके की सहयोगी टीमों के मुख्य कोच रह चुके हैं।

वह समय-समय पर अल्पकालिक आधार पर न्यूजीलैंड टीम के सलाहकार कोच की भूमिका भी निभा चुके हैं। इसके अलावा मिडिलसेक्स, यॉर्कशायर और नॉटिंघमशायर के लिए खिलाड़ी और सदर्न ब्रेव के कोच के रूप में काम करने के कारण उन्हें इंग्लैंड क्रिकेट का भी लंबा अनुभव भी है। मक्कलम अभी अगले साल के आखिर तक अपने अनुबंध की अवधि पूरी होने तक इंग्लैंड की सीमित ओवर टीम के मुख्य कोच बने रहेंगे। ऐसे में अपने पूर्व कीवी साथी के साथ फ्लेमिंग के संबंध भी अहम पहलू होंगे।

 
फ्लेमिंग और मक्कलम करीबी दोस्त हैं और दोनों ने साथ में कारोबारी साझेदारी भी की है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि फ्लेमिंग 19 अगस्त से हेडिंग्ली में पाकिस्तान के खिलाफ शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज से पहले टीम की कमान संभाल पाएंगे या नहीं। ईसीबी की सबसे बड़ी प्राथमिकता सही उम्मीदवार को नियुक्त करना है, जो अगले साल होने वाली ऐशेज सीरीज में इंग्लैंड को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जीत दिलाने में मदद कर सके। जरूरत पड़ने पर बोर्ड इंतजार करने के लिए भी तैयार है।

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फ्लेमिंग के सामने सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक नया टेस्ट कप्तान चुनना होगा। बेन स्टोक्स ने पिछले महीने अपने अचानक संन्यास के बाद अपने उपकप्तान हैरी ब्रूक का समर्थन किया था। हालांकि ब्रूक पहले से ही इंग्लैंड की सीमित ओवर टीमों के कप्तान हैं और ईसीबी अंतरिम आधार पर यह जिम्मेदारी फिर से जो रूट को सौंपने पर भी विचार कर रहा है।

Ajinkya Rahane: लॉर्ड्स से गाबा तक… अजिंक्य रहाणे की वो यादगार पारियां, जिन्हें क्रिकेट फैंस कभी नहीं भूलेंगे

Ajinkya Rahane: अजिंक्य रहाणे ने 12 साल लंबे अपने इंटरनेशनल क्रिकेट करियर को अलविदा कह दिया है। भारत के सबसे भरोसेमंद मिडिल ऑर्डर बल्लेबाजों में गिने जाने वाले रहाणे विदेशी जमीन पर शानदार बल्लेबाजी, स्लिप में बेहतरीन फील्डिंग और मुश्किल समय में टीम की जिम्मेदारी संभालने के लिए जाने जाते थे।

रहाणे ने अपने करियर में भारतीय क्रिकेट को कई यादगार पल दिए। उन्होंने 28 साल बाद लॉर्ड्स में भारत को टेस्ट जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। वहीं, एडिलेड टेस्ट में मिली शर्मनाक हार के बाद चोटों से जूझ रही भारतीय टीम की मेलबर्न टेस्ट में कप्तानी करते हुए ऐतिहासिक जीत दर्ज की दिलाई, जिसे उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है।

रहाणे ने अपने करियर में भारतीय क्रिकेट को कई यादगार पल दिए। उन्होंने लॉर्ड्स में 28 साल बाद भारत की टेस्ट जीत में अहम योगदान दिया। वहीं, एडिलेड टेस्ट में हार के बाद जब टीम मुश्किल दौर से गुजर रही थी, तब मेलबर्न टेस्ट में कप्तानी करते हुए भारत को शानदार जीत दिलाई। जिसे उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है।

इसके अलावा, विदेशी दौरों पर लगाए गए उनके शानदार शतक, गॉल टेस्ट में स्लिप में रिकॉर्ड कैच, और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) फाइनल में खेली गई यादगार पारी भी उनके इंटरनेशनल करियर के सबसे खास पलों में शामिल हैं।

टीम इंडिया के लिए अजिंक्य रहाणे के आंकड़ों पर एक नजर:

हालांकि रहाणे ने भारत के लिए तीनों फ़ॉर्मेट में खेला, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने अपनी सबसे बड़ी छाप छोड़ी। उन्होंने 85 टेस्ट मैचों में 12 शतकों के साथ 5,077 रन बनाए, जिनमें से कई बेहतरीन पारियां मुश्किल विदेशी हालात में खेली गईं। 2013 और 2016 के बीच, उन्होंने न्यूजीलैंड, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में शतक लगाकर खुद को भारत के प्रमुख विदेशी दौरे वाले बल्लेबाज के तौर पर स्थापित किया। बाद में उन्होंने विराट कोहली के उप-कप्तान और जरूरत पड़ने पर कप्तान के तौर पर भी भूमिका निभाई।

भारत के लिए अजिंक्य रहाणे के यादगार पल

  1. लॉर्ड्स में शतक (इंग्लैंड के खिलाफ 103 रन, 2014)

साल 2014 में लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेले गए टेस्ट मैच में अजिंक्य रहाणे ने अपने करियर की सबसे यादगार पारियों में से एक खेली। मुश्किल पिच पर जब भारतीय टीम 145 रन पर 7 विकेट गंवा चुकी थी, तब रहाणे ने शानदार 103 रन बनाकर टीम को संकट से बाहर निकाला था। भुवनेश्वर कुमार के साथ उनकी साझेदारी ने पहली पारी में भारत का स्कोर 295 तक पहुँचाया और टीम को मुकाबले में बनाए रखा। हालाँकि भारत की दूसरी पारी में रहाणे ‘गोल्डन डक’ (पहली ही गेंद पर आउट) का शिकार हुए, लेकिन उनका शतक बहुत अहम साबित हुआ। इसके बाद इशांत शर्मा ने सात विकेट लिए और भारत को 95 रनों से जीत दिलाई, जिससे इस मशहूर मैदान पर टेस्ट जीत का भारत का 28 साल का इंतजार खत्म हुआ।

  1. MCG में कप्तान का शतक (ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 112 रन, 2020)

2020-21 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर एडिलेड टेस्ट में भारत सिर्फ 36 रन पर ऑलआउट हो गया था, जिसके बाद टीम को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा। इसी बीच विराट कोहली पितृत्व अवकाश पर घर लौट गए और कई खिलाड़ी भी चोट के कारण टीम से बाहर हो गए। ऐसे मुश्किल समय में अजिंक्य रहाणे ने कप्तानी की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) में खेले गए दूसरे टेस्ट में रहाणे ने दबाव के बीच 223 गेंदों पर शानदार 112 रन की कप्तानी पारी खेली। उनकी इस पारी और बेहतरीन कप्तानी की बदौलत भारत ने 8 विकेट से जीत हासिल की और बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में सीरीज 1-1 से बराबर कर दी।

दौरे के बाकी मैचों में रहाणे की शांत कप्तानी निर्णायक साबित हुई, क्योंकि उन्होंने कई प्रमुख गेंदबाजों के बिना चोटिल टीम का नेतृत्व करते हुए ऑस्ट्रेलिया के गढ़ गाबा में एक यादगार जीत दर्ज की और सीरीज को 2-1 से अपने नाम कर लिया। बता दें कि एडिलेड में शर्मनाक हार के बाद की गई यह शानदार वापसी भारतीय क्रिकेट के इतिहास की सबसे यादगार विदेशी टेस्ट जीतों में गिनी जाती है, जिसमें रहाणे की शांत का नेतृत्व सबे अहम रहा।

  1. मेलबर्न (2014) में शानदार जवाबी हमला करते हुए 147 रन

साल 2014 में मेलबर्न टेस्ट के दौरान ऑस्ट्रेलिया के मजबूत तेज गेंदबाजी आक्रमण का सामना करते हुए, रहाणे ने 171 गेंदों पर शानदार 147 रन बनाए और चौथे विकेट के लिए विराट कोहली के साथ 262 रनों की साझेदारी की। इस साझेदारी ने भारत को फॉलो-ऑन से बचाया और सीरीज के सबसे बेहतरीन बल्लेबाजी प्रदर्शनों में से एक में कड़े संघर्ष के बाद मैच ड्रॉ कराया।

  1. न्यूजीलैंड के खिलाफ़ करियर का सर्वश्रेष्ठ 188 रन (2016)

साल 2016 में इंदौर टेस्ट में रहाणे ने अपना अब तक का सबसे बड़ा टेस्ट स्कोर 188 रन बनाया। उन्होंने कोहली के साथ चौथे विकेट के लिए 365 रनों की विशाल पार्टनरशिप की, जिसकी बदौलत भारत ने पहली पारी में 5 विकेट पर 557 रन घोषित किए। बता दें कि भारत ने यह मुकाबला 321 रन के बड़े अंतर से जीता था और 3-0 से सीरीज अपने नाम की थी। रहाणे की यह पारी उनके टेस्ट करियर की सबसे बेहतरीन पारियों में गिनी जाती है।

  1. गाले में वर्ल्ड-रिकॉर्ड कैचिंग का प्रदर्शन (2015)

अपनी बैटिंग के अलावा, रहाणे ने स्लिप में भी शानदार खेल दिखाया। गाले में श्रीलंका के खिलाफ उन्होंने एक मैच में आठ कैच लिए, जो उस समय किसी नॉन-विकेटकीपर द्वारा टेस्ट मैच में लिए गए सबसे ज्यादा कैच थे। इससे उनके बेहतरीन रिफ्लेक्स और सुरक्षित हाथों का पता चला। बाद में 10 साल बाद एडेन मार्करम ने यह रिकॉर्ड तोड़ा, जब उन्होंने नवंबर 2025 में गुवाहाटी में भारत के खिलाफ नौ कैच लिए।

  1. WTC फाइनल में वापसी (ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 89 और 46 रन, 2023)

टेस्ट टीम से लगभग 18 महीने बाहर रहने के बाद, मुंबई के लिए घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन और चेन्नई सुपर किंग्स के साथ IPL में जबरदस्त वापसी के दम पर रहाणे को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के लिए अचानक टीम में वापस बुलाया गया। श्रेयस अय्यर के चोटिल होने के बाद उन्हें प्लेइंग XI में शामिल किया गया और रहाणे ने ‘द ओवल’ पर भारत के सबसे अच्छे बल्लेबाज के तौर पर खेलकर चयनकर्ताओं के भरोसे को सही साबित किया।

जब भारत का स्कोर 71/4 हो गया था, तब उन्होंने पहली पारी में संघर्षपूर्ण 89 रन बनाए और दूसरी पारी में 46 रन जोड़े। साथ ही, इस मैच के दौरान उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 5,000 रन पूरे करने का मील का पत्थर भी हासिल किया। भले ही भारत फाइनल हार गया, लेकिन रहाणे की वापसी वाली पारियों ने सबसे बड़े मंच पर एक भरोसेमंद खिलाड़ी के तौर पर उनकी अहमियत को साबित कर दिया।

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Ajinkya Rahane Retirement: 11 मैचों में टीम इंडिया के कप्तान रहे अजिंक्य रहाणे, कितने जीते कितने हारे? कप्तानी का रिकॉर्ड चौंकाएगा

Ajinkya Rahane Retirement: करीब एक दशक से ज्यादा समय तक भारतीय क्रिकेट के सभी फॉर्मेट में प्रतिनिधित्व करने के बाद अजिंक्य रहाणे ने इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया है। गुरुवार को संन्यास का ऐलान करते हुए रहाणे ने अपने लंबे क्रिकेट सफर को यादगार अंदाज में खत्म किया। रहाण ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर करते हुए कहा, “जिंदगी की सच्चाई यही है कि हर चीज की शुरुआत होती है और हर चीज का अंत भी। जब सही समय आता है, तो आपको बस उसे स्वीकार करना होता है और आगे बढ़ना होता है।

बता दें कि 2011 में इंग्लैंड में अपना इंटरनेशनल डेब्यू करने वाले रहाणे ने भारत के लिए 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 T20I मैच खेले और कुल 8414 रन बनाए हैं।

मुंबई के इस बल्लेबाज ने इंटरनेशनल क्रिकेट में 15 शतक भी लगाए हैं- 12 टेस्ट में और तीन वनडे में। उन्होंने 11 मैचों (छह टेस्ट, तीन वनडे और दो T20I) में भारत की कप्तानी भी की है, जिनमें से वे सिर्फ एक मैच हारे हैं। बता दें कि रहाणे ने अपना आखिरी मैच 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट मुकाबले में खेला था।

इंटरनेशनल क्रिकेट में अजिंक्य रहाणे के बैटिंग रिकॉर्ड्स

फॉर्मेटमैचपारियांरनसर्वाधिक स्कोरऔसतस्ट्राइक रेटशतकअर्धशतक
टेस्ट85144507718838.4649.501226
वनडे (ODI)9087296211135.2678.63324
टी20 इंटरनेशनल (T20I)20203756120.83113.2901

अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में भारत के मैचों की पूरी लिस्ट

तारीखटीमफॉर्मेटनतीजा
10 जुलाई 2015जिम्बाब्वेवनडेभारत 4 रन से जीता
12 जुलाई 2015जिम्बाब्वेवनडेभारत 62 रन से जीता
14 जुलाई 2015जिम्बाब्वेवनडेभारत 83 रन से जीता
17 जुलाई 2015जिम्बाब्वेटी20 इंटरनेशनलभारत 54 रन से जीता
19 जुलाई 2015जिम्बाब्वेटी20 इंटरनेशनलभारत 10 रन से हारा
25 मार्च 2017ऑस्ट्रेलियाटेस्टभारत 8 विकेट से जीता
14 जून 2018अफगानिस्तानटेस्टभारत पारी और 262 रन से जीता
26 दिसंबर 2020ऑस्ट्रेलियाटेस्टभारत 8 विकेट से जीता
7 जनवरी 2021ऑस्ट्रेलियाटेस्टमैच ड्रॉ रहा
15 जनवरी 2021ऑस्ट्रेलियाटेस्टभारत 3 विकेट से जीता
25 नवंबर 2021न्यूजीलैंडटेस्टमैच ड्रॉ रहा

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पैरा एथलेटिक्स में भारत ने रचा इतिहास, इन 2 रनर्स ने जीते गोल्ड और सिल्वर

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स्कॉटलैंड के ग्लासगो में चल रहे राष्ट्रमंडल खेल 2026 की पैरा एथलेटिक्स की टी47 स्पर्धा की 100 मीटर दौड़ में दिलीप महादू गवित ने सिर्फ 10.71 सेकेंड में सबसे पहले बाधा पार कर ली और भारत को स्वर्ण पदक जिताया।  इसके अलावा त्रिवेंद्रम के एथलीट मोहम्मद बेसिल मोरसिंगनाथ ने 10.83 सेकेंड में इस दौड़ को पूरा किया और सिल्वर मेडल जीता।

यह पैरा एथलेटिक्स में भारत के लिए एक एतिहासिक दिन रहा।  दिलीप महादू गवित पहले ऐसे एथलीट बने जिन्होंने पैरा एथलेटिक्स में  भारत के लिए गोल्ड जीता। इंग्लैंड के केविन सैंटोस ने 10.85 सेकेंड के सत्र के अपने सर्वश्रेष्ठ का समय के साथ कांस्य पदक जीता।

पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा पैरा एथलेटिक्स की फर्राटा प्रतियोगिता है जिसमें एक हाथ में शारीरिक अक्षमता या उसके अभाव वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। इससे शरीर के एक हिस्से की ताकत, गति या समन्वय प्रभावित होता है।इन दो पदकों के साथ भारत पदक तालिका में तीन स्वर्ण, नौ रजत और तीन कांस्य पदक लेकर आठवें स्थान पर पहुंच गया।