Advit Jewels Share Price: धमाकेदार लिस्टिंग के बाद लगा लोअर सर्किट, अब खरीदें, बेचें या होल्ड करें? जानिए एक्सपर्ट्स से

Advit Jewels Share Price: ज्वेलरी कंपनी Advit Jewels की बुधवार को तगड़े प्रीमियम पर लिस्टिंग हुई, लेकिन उसके बाद जोरदार मुनाफावसूली भी देखने को मिली। इसमें 5% का लोअर सर्किट लग गया। कंपनी का शेयर BSE पर 138 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले 35.5% प्रीमियम के साथ 187 रुपये पर लिस्ट हुआ। वहीं NSE पर इसकी एंट्री 188.90 रुपये पर हुई, जो इश्यू प्राइस से 36.88% ज्यादा थी।

लिस्टिंग के समय कंपनी का मार्केट कैप 814.27 करोड़ रुपये रहा। हालांकि शुरुआती तेजी ज्यादा देर टिक नहीं सकी। मुनाफावसूली बढ़ने से शेयर 5% गिरकर 179.46 रुपये पर बंद हुआ। Advit Jewels का 165.16 करोड़ रुपये का IPO पिछले हफ्ते बोली के आखिरी दिन 212.63 गुना सब्सक्राइब हुआ था। कंपनी ने IPO का प्राइस बैंड 130 से 138 रुपये प्रति शेयर तय किया था।

एक्सपर्ट ने क्या कहा?

Swastika Investmart की हेड ऑफ वेल्थ शिवानी न्याती का कहना है कि Advit Jewels की लिस्टिंग मजबूत रही है, क्योंकि कंपनी के फाइनेंशियल नतीजे भी अच्छे रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘कंपनी ने पिछले दो साल में अपना रेवेन्यू लगभग तीन गुना कर लिया है। EBITDA मार्जिन 29-30% के आसपास बना हुआ है। रिटर्न ऑन नेट वर्थ (RoNW) 43.6% रहा है। यही वजह है कि कंपनी का प्रीमियम वैल्यूएशन कुछ हद तक सही माना जा सकता है। हालांकि Advit Jewels अभी छोटी और नई कंपनी है। इसका कारोबार भी कुछ चुनिंदा इलाकों तक सीमित है, इसलिए आने वाले समय में इसके शेयर में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।’

निवेशकों के लिए सलाह

शिवानी न्याती का कहना है कि जिन निवेशकों को IPO में शेयर मिले हैं, वे शॉर्ट से मीडियम टर्म के नजरिए से इसे होल्ड कर सकते हैं। वहीं, जिन लोगों ने सिर्फ लिस्टिंग गेन के लिए निवेश किया था, वे चाहें तो थोड़ा या पूरा मुनाफा बुक कर सकते हैं।

नए निवेशकों को फिलहाल जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। उनका कहना है कि कम से कम एक-दो तिमाही के नतीजे आने का इंतजार करें, उसके बाद ही इस शेयर में बड़ा निवेश करें। उन्होंने 165 रुपये का क्लोजिंग स्टॉप-लॉस रखने की सलाह भी दी है।

Waterways Leisure की कमजोर

Cordelia Cruises चलाने वाली Waterways Leisure Tourism की लिस्टिंग निवेशकों की उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। शेयर बाजार में आते ही इसमें दबाव देखने को मिला और बाद में भी गिरावट जारी रही।

कंपनी का शेयर BSE पर 690 रुपये पर लिस्ट हुआ, जो 808 रुपये के इश्यू प्राइस से 14.60% कम था। वहीं NSE पर इसकी शुरुआत 681 रुपये पर हुई, यानी यह 15.71% के डिस्काउंट पर लिस्ट हुआ।

कमजोर लिस्टिंग की वजह क्या रही?

शिवानी न्याती का कहना है कि कंपनी की कमजोर लिस्टिंग से साफ है कि निवेशक इसके वैल्यूएशन और कारोबार से जुड़े जोखिमों को लेकर सतर्क हैं।

उन्होंने कहा, ‘हाल के समय में कंपनी का EBITDA मार्जिन घटा है। इसके अलावा इसका कारोबार फ्यूल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, यात्रियों की संख्या में कमी और दूसरे ऑपरेशनल जोखिमों से भी प्रभावित हो सकता है। करीब 101 गुना प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) वैल्यूएशन पर यह IPO निवेशकों को ज्यादा मार्जिन ऑफ सेफ्टी नहीं देता। हालांकि, सेक्टर के लॉन्ग टर्म के संकेत अच्छे जरूर हैं।’

इस शेयर में क्या करें?

शिवानी का कहना है कि जिन निवेशकों को IPO में शेयर मिले हैं, वे लंबी अवधि के नजरिए से इसे होल्ड कर सकते हैं। वहीं, नए निवेशकों को बेहतर तिमाही नतीजों और आकर्षक कीमत का इंतजार करना चाहिए। फिलहाल इस शेयर पर उनकी राय ‘न्यूट्रल’ है। उन्होंने 640 रुपये का क्लोजिंग स्टॉप-लॉस रखने की सलाह दी है।

Waterways Leisure Tourism का 585 करोड़ रुपये का IPO पिछले हफ्ते बोली के आखिरी दिन 1.46 गुना सब्सक्राइब हुआ था। कंपनी ने IPO का प्राइस बैंड 769 से 808 रुपये प्रति शेयर रखा था।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stocks to Watch: 1 जुलाई को फोकस में रहेंगे ये 9 स्टॉक्स, दिख सकता है तगड़ा एक्शन

Stocks to Watch: बुधवार, 1 जुलाई के कारोबार में कई शेयर खबरों के चलते फोकस में रह सकते हैं। कहीं नए प्रोडक्ट और बड़ी डील का असर दिख सकता है, तो कहीं टैक्स विवाद और जून महीने के बिक्री आंकड़े निवेशकों की नजर में रहेंगे। ऐसे में इन शेयरों में बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है।

KPIT Technologies

टेक्नोलॉजी कंपनी KPIT Technologies ने कहा है कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही उम्मीद से कमजोर रह सकती है। कंपनी को रेवेन्यू में सालाना आधार पर करीब 1% की गिरावट का अनुमान है। वहीं EBITDA और नेट मार्जिन भी पिछली तिमाही के मुकाबले घट सकते हैं। हालांकि, कंपनी को दूसरी छमाही में कारोबार में सुधार और चौथी तिमाही में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है।

L&T Technology Services

इंजीनियरिंग और टेक कंपनी L&T Technology Services ने AI बेस्ड प्लेटफॉर्म Ainfonix 4.0 लॉन्च किया है। इसकी मदद से इंजीनियरिंग डॉक्युमेंट्स और तकनीकी रिकॉर्ड को डिजिटल डेटा में बदला जा सकेगा।

HDFC Life Insurance

लाइफ इंश्योरेंस कंपनी HDFC Life Insurance को GST मामले में झटका लगा है। थाणे के कमिश्नर (अपील) ने ब्याज और जुर्माने समेत 132.7 करोड़ रुपये की GST डिमांड को बरकरार रखा है।

Kotak Mahindra Bank

प्राइवेट सेक्टर के Kotak Mahindra Bank ने Deutsche Bank के साथ डील की है। कोटक इसके तहत बैंक के भारत में रिटेल बैंकिंग, प्राइवेट बैंकिंग और वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार को करीब 281.7 करोड़ रुपये में खरीदेगा।

Paras Defence

डिफेंस कंपनी Paras Defence and Space Technologies ने Tandem Defense LLC के साथ Guardian-1 Interceptor तकनीक के लिए IP लाइसेंस एग्रीमेंट किया है।

Prestige Estates Projects

रियल एस्टेट कंपनी Prestige Estates Projects ने मुंबई के मुलुंड में Prestige Forest Hills प्रोजेक्ट का दूसरा चरण लॉन्च किया है। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित ग्रॉस डेवलपमेंट वैल्यू 2,200 करोड़ रुपये है।

Auto Stocks

ऑटो सेक्टर की कंपनियां जून महीने के बिक्री आंकड़े जारी करेंगी। अनुमान है कि पैसेंजर व्हीकल की बिक्री में 26% और दोपहिया वाहनों की बिक्री में 18% की सालाना बढ़ोतरी हो सकती है।

Hexaware Technologies

आईटी कंपनी Hexaware Technologies ने Tensai for Reasoning Ops नाम का नया AI प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। इसका मकसद एंटरप्राइज आईटी ऑपरेशंस में एजेंटिक AI का इस्तेमाल बढ़ाना है।

Zaggle Prepaid Ocean Services

फिनटेक कंपनी Zaggle Prepaid Ocean Services ने APAC Financial Services के साथ 5 साल का समझौता किया है। इसके तहत कंपनी अपने एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म की सेवाएं उपलब्ध कराएगी।

Multibagger Stocks: रामदेव अग्रवाल ने बताया अच्छे स्टॉक खरीदने का फॉर्मूला, इन 10 बातों से होगी पहचान

 

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Multibagger Stocks: रामदेव अग्रवाल ने बताया अच्छे स्टॉक खरीदने का फॉर्मूला, इन 10 बातों से होगी पहचान

Multibagger Stocks: शेयर बाजार में सफल निवेश सिर्फ शेयर की कीमत या बाजार की चाल देखने से नहीं होता। अनुभवी निवेशकों का मानना है कि किसी कंपनी की असली ताकत उसके फाइनेंशियल नतीजों में छिपी होती है।

Motilal Oswal Group के चेयरमैन और दिग्गज निवेशक रामदेव अग्रवाल ने The Alpha Bets में ऐसे 10 फाइनेंशियल इंडिकेटर के बारे में बताया है, जिन्हें देखकर निवेशक किसी कंपनी की मजबूती का बेहतर आकलन कर सकते हैं। इससे मल्टीबैगर स्टॉक्स मिलने की संभावना भी बेहतर हो जाती है।

1. मुनाफे में लगातार बढ़ोतरी

सिर्फ बिक्री बढ़ना काफी नहीं है। कंपनी का मुनाफा भी लगातार बढ़ना चाहिए। इससे पता चलता है कि कंपनी खर्च पर नियंत्रण रखते हुए बेहतर कमाई कर रही है।

2. कम कर्ज

कर्ज से कारोबार बढ़ सकता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा कर्ज जोखिम बढ़ा देता है। कम कर्ज वाली कंपनियां मुश्किल समय में भी बेहतर स्थिति में रहती हैं।

3. मजबूत ऑपरेटिंग कैश फ्लो

ऑपरेटिंग कैश फ्लो बताता है कि कंपनी अपने रोजमर्रा के कारोबार से कितना नकद कमा रही है। इसे मुनाफे के मुकाबले ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है, क्योंकि इसमें हेरफेर करना आसान नहीं होता।

4. लगातार बढ़ता रेवेन्यू

रेवेन्यू यानी कंपनी की बिक्री से होने वाली कमाई। अगर किसी कंपनी का रेवेन्यू कई साल तक लगातार बढ़ रहा है, तो यह अच्छी बात मानी जाती है। इससे पता चलता है कि उसके प्रोडक्ट या सर्विस की मांग बनी हुई है।

5. ऊंचा ROE

रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) बताता है कि कंपनी शेयरधारकों के पैसे का कितना बेहतर इस्तेमाल कर रही है। ऊंचा ROE मजबूत मैनेजमेंट और बेहतर बिजनेस का संकेत माना जाता है।

6. बढ़ता प्रॉफिट मार्जिन

मार्जिन बताता है कि हर रुपये की बिक्री में से कंपनी के पास कितना मुनाफा बच रहा है। अगर मार्जिन बढ़ रहा है, तो इसका मतलब कंपनी पहले से ज्यादा कुशल तरीके से काम कर रही है।

7. मजबूत फ्री कैश फ्लो

फ्री कैश फ्लो वह रकम होती है, जो सभी खर्च और निवेश के बाद कंपनी के पास बचती है। इससे कंपनी विस्तार, डिविडेंड, कर्ज चुकाने या नए निवेश जैसे फैसले आसानी से ले सकती है।

8. प्रमोटर्स की मजबूत हिस्सेदारी

अगर प्रमोटर्स लंबे समय तक अपनी हिस्सेदारी बनाए रखते हैं, तो यह कंपनी के भविष्य पर उनके भरोसे का संकेत माना जाता है। हालांकि, अगर उनकी हिस्सेदारी लगातार घट रही हो, तो निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए।

9. पूंजी का सही इस्तेमाल

अच्छी कंपनी सिर्फ मुनाफा नहीं कमाती, बल्कि उस मुनाफे का सही इस्तेमाल भी करती है। बेहतर मैनेजमेंट पूंजी को सही जगह निवेश करता है, कर्ज संभालता है और जरूरत पड़ने पर शेयरधारकों को भी फायदा पहुंचाता है।

10. लगातार बढ़ती कमाई

बेहतरीन कंपनियां सिर्फ अच्छे समय में नहीं, बल्कि मुश्किल दौर में भी कमाई बढ़ाने की क्षमता रखती हैं। लगातार बढ़ती आय मजबूत बिजनेस मॉडल और प्रतिस्पर्धी बढ़त का संकेत देती है।

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Waaree Energies Share Price: सोलर कंपनी पर अमेरिकी एक्शन का असर, JM Financial ने घटाया टारगेट प्राइस

Waaree Energies Share Price: ब्रोकरेज JM Financial ने सोलर कंपनी Waaree Energies के शेयर का टारगेट प्राइस घटा दिया है। अब उसने 12 महीने का टारगेट प्राइस 3,509 रुपये से घटाकर 3,185 रुपये रखा है। इसकी वजह अमेरिका की ओर से कंपनी पर सोलर सेल आयात में टैरिफ से बचने (Tariff Evasion) का आरोप लगना है।

हालांकि, ब्रोकरेज ने शेयर पर अपनी ‘Add’ रेटिंग बरकरार रखी है। मौजूदा भाव 2,954 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 231 रुपये या 7.8% की संभावित बढ़त की गुंजाइश बनती है।

अमेरिका ने क्या कहा?

अमेरिका की Customs and Border Protection (CBP) ने अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट में कहा है कि Waaree Energies ने 2021 से 2026 के बीच वियतनाम और मलेशिया से आने वाले सोलर सेल्स पर लगने वाले टैरिफ से बचने की कोशिश की।

CBP का कहना है कि कंपनी ने चार साल तक सामान के मूल देश (Country of Origin) की गलत जानकारी दी। JM Financial का मानना है कि इससे कंपनी की साख पर असर पड़ सकता है।

271% तक एंटी-डंपिंग ड्यूटी

CBP के फैसले के बाद जिन आयातों को नियमों से बचने वाला माना गया है, उन पर 271.28% तक एंटी-डंपिंग ड्यूटी के लिए कैश डिपॉजिट देना होगा। यह जांच 2025 में शुरू हुई थी।

शिकायत में कहा गया था कि Waaree Energies ने चीन से सोलर सेल का आयात काफी बढ़ाया। इसके बाद भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले क्रिस्टलाइन सिलिकॉन फोटोवोल्टिक (CSPV) मॉड्यूल का निर्यात भी तेजी से बढ़ा। 2021 से 2023 के बीच भारत से अमेरिका जाने वाले CSPV मॉड्यूल के आयात में 2,250% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

ऑर्डर बुक पर पड़ सकता है असर

JM Financial के मुताबिक, Waaree Energies की ऑर्डर बुक 53,000 करोड़ रुपये की है। इसका 65% से 70% हिस्सा विदेशी ग्राहकों के लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट्स से जुड़ा है।

ब्रोकरेज का मानना है कि इस फैसले से कंपनी की साख पर असर पड़ सकता है। इसका असर भविष्य में मिलने वाले कुछ अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर्स पर भी पड़ सकता है।

फिर भी ‘Add’ रेटिंग क्यों बरकरार?

JM Financial का कहना है कि हालात उतने खराब नहीं हैं, जितनी आशंका जताई जा रही थी। CBP ने कंपनी के सभी आयातों को नियमों का उल्लंघन करने वाला नहीं माना है।

जांच में यह भी सामने आया कि Waaree Energies ने गैर-चीनी सोलर सेल्स से इतने मॉड्यूल तैयार किए थे, जो अमेरिका भेजे गए उसके कुल मॉड्यूल की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त थे। इसी वजह से ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी पर असर तो पड़ेगा, लेकिन सबसे खराब स्थिति बनने की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही है।

मार्च तिमाही में कैसा रहा प्रदर्शन?

FY26 की चौथी तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 112% बढ़कर 8,840.25 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, शुद्ध मुनाफा 74.7% बढ़कर 1,126.26 करोड़ रुपये रहा। EBITDA 80% बढ़कर 1,577 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, EBITDA मार्जिन घटकर 18.6% रह गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में 23% था।

Waaree के शेयरों का हाल

Waaree Energies का शेयर मंगलवार को 2.35% की बढ़त के साथ 2,954 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने स्टॉक तकरीबन फ्लैट है। वहीं, 1 साल के दौरान इसमें करीब 6% की गिरावट आई है। कंपनी का मार्केट कैप 84.71 हजार करोड़ रुपये है।

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Stocks to Watch: 30 जून को फोकस में रहेंगे ये 10 स्टॉक्स, दिख सकती है बड़ी हलचल

Stocks to Watch: शेयर बाजार में मंगलवार, 30 जून को कई कंपनियों के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है। कुछ कंपनियों ने बड़े ऑर्डर हासिल किए हैं, तो कुछ ने फंड जुटाने, डिविडेंड, अधिग्रहण और मैनेजमेंट से जुड़े अहम ऐलान किए हैं। इससे इन 10 शेयरों में हलचल दिख सकती है।

HDFC Bank और Axis Bank

प्राइवेट सेक्टर के Axis Bank के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) पुनीत शर्मा ने इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक, पुनीत HDFC Bank अपने अगले CFO बन सकते हैं। वह मौजूदा CFO श्रीनिवासन वैद्यनाथन की जगह ले सकते हैं।

BSE

स्टॉक एक्सचेंज BSE 1 जनवरी 2027 से अपने इंटरनेशनल मार्केट डेटा बिजनेस को खुद संभालेगी। अभी यह काम Deutsche Börse AG करती है। इससे विदेशी ग्राहकों को BSE की सेवाएं सीधे मिलेंगी और कंपनी को अपने ग्लोबल मार्केट डेटा कारोबार पर ज्यादा नियंत्रण मिलेगा।

Sterling & Wilson Renewable Energy

रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी Sterling & Wilson Renewable Energy को विदेश में करीब 56 करोड़ डॉलर का ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर उसकी 50:50 जॉइंट वेंचर कंपनी को मिस्र के West Minya Solar Project के लिए मिला है।

Afcons Infrastructure

इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Afcons Infrastructure ने FY26 के लिए प्रस्तावित 2 रुपये प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की रिकॉर्ड डेट 23 जुलाई 2026 तय की है। कंपनी की 50वीं AGM 30 जुलाई को होगी। शेयरधारकों की मंजूरी मिलने पर डिविडेंड का भुगतान 28 अगस्त 2026 तक कर दिया जाएगा।

RITES

सरकारी इंजीनियरिंग कंपनी RITES ने Container Corporation of India (CONCOR) के साथ एक समझौता (MoU) किया है। इसके तहत दोनों कंपनियां लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी (PMC) सेवाओं में साथ मिलकर काम करेंगी।

Bandhan Bank

प्राइवेट सेक्टर के बैंक Bandhan Bank ने बताया कि उसके चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) और की मैनेजेरियल पर्सन राजीव मंत्री ने इस्तीफा दे दिया है। बैंक को उनका इस्तीफा 29 जून 2026 को मिला।

Yes Bank

प्राइवेट सेक्टर के बैंक Yes Bank के बोर्ड ने 7,500 करोड़ रुपये तक के योग्य सिक्योरिटीज जारी कर फंड जुटाने और 8,500 करोड़ रुपये तक के डेट सिक्योरिटीज जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके लिए शेयरधारकों और नियामकीय मंजूरी की जरूरत होगी।

Jagsonpal Pharmaceuticals

फार्मा कंपनी Jagsonpal Pharmaceuticals ने Aequitas Healthcare Pvt. Ltd. में 85% हिस्सेदारी खरीदने के लिए शेयर परचेज एग्रीमेंट (SPA) किया है। इस अधिग्रहण से कंपनी घरेलू दवा बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती है।

Juniper Hotels

होटल कंपनी Juniper Hotels ने बताया कि उसके चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) तरुण जेटली ने इस्तीफा दे दिया है। वह 15 जुलाई 2026 से अपने पद से हट जाएंगे।

SJVN

सरकारी पावर कंपनी SJVN ने Gujarat Urja Vikas Nigam Ltd (GUVNL) के साथ तीन जलविद्युत परियोजनाओं से ग्रीन पावर सप्लाई के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) पर हस्ताक्षर किए हैं। हिमाचल प्रदेश की धौलासिद्ध (66 मेगावाट), लुहरी स्टेज-I (210 मेगावाट) और सुन्नी डैम (382 मेगावाट) परियोजनाओं की कुल क्षमता 658 मेगावाट होगी।

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अब पैसे लगाने लायक हो गया शेयर बाजार? JPMorgan ने कहा- टैक्स और नीतिगत बदलावों से सुधरा माहौल

भारतीय स्टॉक मार्केट में निवेश करने वालों के लिए अच्छी खबर है। ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक JPMorgan का मानना है कि सरकार के टैक्स और नीतिगत बदलावों की वजह से अब इक्विटी में निवेश पहले से ज्यादा आकर्षक हो गया है। यही कारण है कि पिछले दो साल में बाजार की रिटर्न ज्यादा दमदार नहीं रहने के बावजूद घरेलू निवेशकों का पैसा लगातार शेयर बाजार में आ रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG), डेट म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स से जुड़े टैक्स नियमों में हुए बदलावों से इक्विटी की स्थिति मजबूत हुई है। इससे लोगों का रुझान धीरे-धीरे पारंपरिक बचत की जगह वित्तीय निवेश की ओर बढ़ रहा है।

टैक्स नियमों से इक्विटी को फायदा कैसे?

JPMorgan के मुताबिक, फिलहाल इक्विटी पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है। वहीं, डेट म्यूचुअल फंड पर इंडेक्सेशन का फायदा खत्म हो चुका है। कुछ इंश्योरेंस पॉलिसियों की मैच्योरिटी रकम पर भी टैक्स लागू हो गया है।

ब्रोकरेज का कहना है कि इन बदलावों से दूसरे निवेश विकल्पों के मुकाबले इक्विटी ज्यादा आकर्षक बन गई है।

SIP से लगातार आ रहा पैसा

रिपोर्ट का कहना है कि घरेलू निवेशकों की सबसे बड़ी ताकत अब सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) बन गया है। पिछले दो साल में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में अपनी हिस्सेदारी घटाई। इसके बावजूद घरेलू निवेशकों ने SIP के जरिए लगातार निवेश जारी रखा। इससे बाजार को मजबूत सहारा मिला।

JPMorgan का मानना है कि यह सिर्फ बाजार की चाल से जुड़ा निवेश नहीं है, बल्कि लोगों की बचत की आदत में स्थायी बदलाव का संकेत है। मतलब कि अब लोग तेजी की गिरावट की परवाह किए बगैर निवेश जारी रख रहे हैं।

घरेलू निवेशक सबसे बड़ा सहारा

ब्रोकरेज का कहना है कि घरेलू निवेशकों का लगातार निवेश भारतीय शेयर बाजार के लिए बड़ा सहारा बन गया है। इससे विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर काफी हद तक संतुलित हो जाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले वर्षों में भी घरेलू बचत का बड़ा हिस्सा वित्तीय निवेश और इक्विटी की ओर जा सकता है।

किन बातों का है जोखिम?

JPMorgan ने यह भी कहा कि उसकी यह उम्मीद घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी पर टिकी है। अगर लंबे समय तक हर महीने SIP निवेश 250 अरब रुपये (25,000 करोड़ रुपये) से नीचे रहता है, तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।

इसके अलावा, अगर किसी नियामकीय बदलाव की वजह से डेरिवेटिव कारोबार में 20% से ज्यादा गिरावट आती है, तो इसका असर पूरे शेयर बाजार की गतिविधियों पर पड़ सकता है।

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Stock in Focus: एक साल में 53% का रिटर्न, अब प्रमोटर ने ब्लॉक डील में बेचे 4 लाख शेयर

Stock in Focus: इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कंपनी Shaily Engineering Plastics की प्रमोटर वनीता नागदा ने 18 जून को ब्लॉक डील के जरिए कंपनी के 4 लाख शेयर बेच दिए।

एक्सचेंज पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह सौदा औसतन ₹2,635.05 प्रति शेयर के भाव पर हुआ। इस हिसाब से डील की कुल वैल्यू करीब ₹105.4 करोड़ रही। फिलहाल यह जानकारी सामने नहीं आई है कि इन शेयरों को किस निवेशक ने खरीदा है।

हाल के महीनों में चर्चा में रही कंपनी

Shaily Engineering Plastics पिछले कुछ महीनों से लगातार निवेशकों की नजर में बनी हुई है। इसकी वजह कंपनी को मिले बड़े ऑर्डर और मजबूत वित्तीय नतीजे हैं।

इस साल कंपनी को एक बड़ी घरेलू फार्मा कंपनी से करीब ₹423 करोड़ का मैन्युफैक्चरिंग और कमर्शियल सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट मिला था। इस समझौते के तहत कंपनी अगले चार साल तक पेन इंजेक्टर की सप्लाई करेगी। यह ऑर्डर कंपनी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे आने वाले वर्षों में कारोबार को सहारा मिल सकता है।

मार्च तिमाही में बढ़ा मुनाफा

मार्च 2026 तिमाही में कंपनी ने मजबूत नतीजे दर्ज किए। Q4 FY26 में कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 10.3% बढ़ा। वहीं, नेट प्रॉफिट में 40.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो कारोबार की बेहतर लाभप्रदता को दिखाती है।

हालांकि, तिमाही आधार पर तस्वीर थोड़ी अलग रही। पिछली तिमाही की तुलना में रेवेन्यू में 4% की गिरावट आई। इसके बावजूद नेट प्रॉफिट 7.4% बढ़ने में सफल रहा। मार्च 2026 तिमाही में कंपनी की प्रति शेयर आय (EPS) ₹8.88 रही।

Shaily Engineering के शेयरों का हाल

Shaily Engineering Plastics का शेयर 18 जून को 5.49% की गिरावट के साथ ₹2,725 पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 14.87% चढ़ा है। वहीं, एक साल में इसने करीब 53% का रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 12.54 हजार करोड़ रुपये है।

Shaily Engineering इंजीनियरिंग प्लास्टिक प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी है। यह फार्मा, हेल्थकेयर, ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर गुड्स और इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए प्लास्टिक कंपोनेंट्स और डिवाइस तैयार करती है। कंपनी पेन इंजेक्टर, ड्रग डिलीवरी डिवाइस और अन्य हाई-प्रिसिजन प्लास्टिक प्रोडक्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग भी करती है।

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NSE ने 10 साल बाद IPO के लिए दाखिल किया DRHP; ₹30000 करोड़ का हो सकता है इश्यू; SBI बेचेगा सबसे ज्यादा हिस्सेदारी

NSE IPO: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का IPO आखिरकार 10 साल के लंबे इंतजार के बाद आगे बढ़ गया है। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज ने बुधवार को SEBI और BSE के पास 607 पेज का ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर दिया। NSE के शेयर सिर्फ BSE पर लिस्ट होंगे, ठीक वैसे ही जैसे BSE के शेयर सिर्फ NSE पर लिस्टेड हैं।

यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। यानी एक्सचेंज को कोई नया पैसा नहीं मिलेगा, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। प्रस्तावित योजना के तहत शेयरधारक मिलकर NSE की करीब 6% इक्विटी बेचेंगे।

कितना होगा NSE का वैल्यूएशन

अनलिस्टेड मार्केट में NSE का वैल्यूएशन करीब 5 लाख करोड़ रुपये माना जा रहा है। इस आधार पर मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि IPO का आकार लगभग 30,000 करोड़ रुपये हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह 2024 में आए Hyundai Motor India के करीब 27,000 करोड़ रुपये के IPO के बाद सबसे बड़ा IPO होगा।

दिलचस्प बात यह है कि NSE की प्रमुख शेयरधारक और देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) इस OFS में अपनी हिस्सेदारी नहीं बेच रही है।

SBI सबसे बड़ा सेलिंग शेयरधारक

ड्राफ्ट दस्तावेज के मुताबिक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) सबसे बड़ा सेलिंग शेयरधारक होगा। बैंक 2.47 करोड़ शेयर बेचने की योजना बना रहा है। इसके अलावा मॉरीशस स्थित MS Strategic (Mauritius) Limited 1.60 करोड़ शेयर बेच सकती है। वहीं, कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड करीब 1.19 करोड़ शेयरों की बिक्री करेगी।

अन्य प्रमुख विक्रेताओं में Aranda Investments (Mauritius) Pte. Ltd., बैंक ऑफ बड़ौदा और स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन शामिल हैं। ये सभी करीब 1.1 करोड़ शेयर तक बेच सकते हैं।

बीमा कंपनियां भी बेचेंगी हिस्सेदारी

सरकारी बीमा कंपनियां भी इस IPO में अपनी हिस्सेदारी घटाएंगी।

  • जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC Re) करीब 1.06 करोड़ शेयर बेचेगी।
  • द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड करीब 1.05 करोड़ शेयर बेचेगी।
  • नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड लगभग 60-60 लाख शेयर बेचेंगी।

IPO फाइलिंग से पहले NSE की IPO कमेटी ने बुधवार को बैठक कर प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया। NSE के बोर्ड ने सोमवार को DRHP को मंजूरी दी थी।

जनवरी में मिली थी SEBI की मंजूरी

NSE के बोर्ड ने 6 फरवरी 2026 को IPO प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इससे पहले जनवरी 2026 में SEBI ने एक्सचेंज को ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) दिया था। इसी के बाद लिस्टिंग का रास्ता साफ हुआ।

SEBI की यह मंजूरी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसे को-लोकेशन मामले से जुड़े कुछ पुराने मामलों के अंतिम निपटारे से अलग रखा गया था।

2016 से अटका हुआ था IPO

NSE की लिस्टिंग करीब 10 साल से अटकी हुई थी। इसकी सबसे बड़ी वजह को-लोकेशन विवाद था, जिसमें कुछ ब्रोकरों को ट्रेडिंग सिस्टम तक दूसरों के मुकाबले तेज और प्राथमिक पहुंच मिलने के आरोप लगे थे।

NSE ने 2016 में करीब 10,000 करोड़ रुपये के OFS के लिए पहली बार ड्राफ्ट पेपर दाखिल किए थे। लेकिन SEBI ने गवर्नेंस संबंधी चिंताओं के चलते प्रस्ताव वापस लेने की सलाह दी थी। इसके बाद NSE ने गवर्नेंस और कंप्लायंस में कई सुधार किए। IPO की तैयारी के लिए एक्सचेंज ने 20 मर्चेंट बैंकर समेत कई सलाहकार भी नियुक्त किए। फिलहाल NSE के करीब 1.8 लाख शेयरधारक हैं।

को-लोकेशन केस में सेटलमेंट की कोशिश

NSE ने जून 2025 में को-लोकेशन मामले में सेटलमेंट एप्लिकेशन दाखिल की थी। इसमें केस निपटाने के लिए 1,387.39 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव रखा था।

इससे पहले SEBI की हाई-पावर्ड एडवाइजरी कमेटी (HPAC) करीब 1,880 करोड़ रुपये के सेटलमेंट की सिफारिश कर चुकी थी। यह मामला अभी भी SEBI के विचाराधीन है।

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