रेड सी की सुरक्षा के लिए गठबंधन बना रहा सऊदी:50 देशों को न्योता भेजा; हूती विद्रोहियों के हमलों से जहाजों को बचाना मकसद

सऊदी अरब ने ऐलान किया है कि वह रेड सी (लाल सागर) में जहाजों की सुरक्षा के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाएगा। इसका मकसद यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों से जहाजों की रक्षा करना है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस गठबंधन में शामिल होने के लिए कई देशों को न्योता भेजा गया है। हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि कौन-कौन से देश इसमें शामिल होंगे। रिपोर्ट के मुताबिक इसकी औपचारिक घोषणा जल्द की जा सकती है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सऊदी ने 50 से ज्यादा देशों को गठबंधन में शामिल होने का न्योता भेजा है। हालांकि अभी तक उन देशों की आधिकारिक सूची जारी नहीं हुई है। हूती विद्रोहियों ने 20 जुलाई को सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया था। इससे रेड सी के रास्ते भेजे जा रहे तेल की खेप पर असर पड़ा है। गठबंधन में कौन हो सकता है शामिल? मिडिल ईस्ट की न्यूज वेबसाइट अल-मॉनिटर के मुताबिक अमेरिका, पाकिस्तान, मिस्र, तुर्किये, जिबूती, सोमालिया और सूडान को न्योता भेजा गया है। इसके अलावा जर्मनी, फ्रांस और इटली समेत कई यूरोपीय देशों को भी निमंत्रण मिला है। इस रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि मिस्र, जिबूती और सूडान गठबंधन में शामिल होने पर सहमत हो गए हैं। हालांकि, सऊदी अरब का करीबी सहयोगी अमेरिका अभी तक आधिकारिक तौर पर गठबंधन में शामिल होने की पुष्टि नहीं कर पाया है, लेकिन उसके इसमें शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। सऊदी रक्षा मंत्री की अमेरिकी नेताओं से मुलाकात एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ इमरजेंसी बैठक की। बैठक से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि प्रिंस खालिद ने अमेरिका से कहा कि सऊदी अरब, अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध को और फैलाने के पक्ष में नहीं है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर वह अपनी रक्षा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। 28 फरवरी से अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले शुरू होने के बाद, ईरान जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और दूसरे इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रिंस खालिद ने जेडी वेंस से यह भी कहा कि सऊदी अरब, यमन के हूती विद्रोहियों से निपटने में सक्षम है और फिलहाल उसे इस मामले में अमेरिका की सैन्य मदद की जरूरत नहीं है। दुनिया के लिए रेड सी इतना अहम क्यों है? रेड सी दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। इसके एक तरफ सऊदी अरब और यमन हैं, जबकि दूसरी तरफ मिस्र, सूडान, इरिट्रिया, जिबूती और सोमालिया स्थित हैं। दुनिया के करीब 30% समुद्री व्यापार का आवागमन इसी रास्ते से होता है। रेड सी में आने-जाने के केवल दो रास्ते हैं। पूर्व में बाब अल-मंदेब स्ट्रेट और पश्चिम में स्वेज नहर। इसलिए इनमें से किसी एक रास्ते में रुकावट आने पर वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ता है। बाब अल-मंदेब अपने सबसे संकरे हिस्से में सिर्फ 29 किलोमीटर चौड़ा है। इसी वजह से यहां जहाजों के आने और जाने के लिए केवल दो समुद्री लेन हैं। ईरान जंग के बाद होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी के कारण सऊदी अरब अपना ज्यादातर तेल इसी रास्ते से भेज रहा है। लेकिन अब इस रास्ते में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का असर बढ़ गया है। ईरान जंग से एक चौथाई सप्लाई पर असर पड़ा सामान्य समय में दुनिया के लगभग 20% तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट से गुजरती है। अब होर्मुज स्ट्रेट और रेड सी, दोनों क्षेत्रों में बढ़ते तनाव के कारण दुनिया की करीब 25% ऊर्जा आपूर्ति किसी न किसी रूप में इस संघर्ष से प्रभावित हो रही है। शिपिंग पर टोल लगाने की योजना रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, हूती विद्रोही शिपिंग पर शुल्क लगाने पर विचार कर रहे हैं। यमन के सूचना मंत्री मोअम्मर अल-एर्यानी ने बुधवार को इस खबर की पुष्टि की और आरोप लगाया कि इसमें ईरान का इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) शामिल है। एर्यानी ने चेतावनी दी कि यह एक खतरनाक कदम है, जिसका उद्देश्य समुद्री गलियारे को मिलिशिया की गतिविधियों के लिए फंडिंग का जरिया बनाना है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत, प्राकृतिक जलडमरूमध्य के किनारे स्थित देशों को टोल वसूलने की अनुमति नहीं है। वैश्विक व्यापार और तेल कीमतों पर असर लाल सागर में तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति लाइनों पर बुरा असर पड़ा है। रॉयटर्स के अनुसार, सप्ताहांत में लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटकर केवल 11 रह गई, जबकि 2023 से पहले प्रतिदिन 70 से अधिक जहाज यहां से गुजरते थे। फरवरी में अमेरिका-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से तेल की कीमतें अस्थिर हैं। बुधवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 88.09 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि पिछले हफ्ते कीमतें 100 डॉलर के पार चली गई थीं।

LPG Cylinder Price: क्या फिर महंगा होगा LPG सिलेंडर? जानें दिल्ली से पटना तक के ताजा रेट

LPG Cylinder Price: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और होर्मुज में टैंकरों पर हो रहे हमले के कारण हाल के दिनों में इस अहम शिपिंग रूट से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी कमी आई है। ऐसे में अगर यही सिलसिला जारी रहा तो, जल्द ही पेट्रोल-डीजल और LPG की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। फिलहाल, भारत में कई दिनों से 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू और 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।

वहीं, अब इस बार देश की केंद्र सरकार दोबारा LPG की सप्लाई को लेकर समस्या नहीं झेलना चाहती है, और इसी वजह से भारत ने मिडिल ईस्ट पर निर्भरता कम करने और सप्लाई में रुकावट से बचने के लिए 2027 तक अपनी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की कुल इंपोर्ट का एक-चौथाई हिस्सा अमेरिका से मंगाने की योजना बना रहा है। भारत के इस कदम से अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर भी बात कुछ आगे बढ़ने की उम्मीद है।

शहरवार LPG की कीमतें

शहर घरेलू सिलेंडर की कीमतकमर्शियल सिलेंडर की कीमत
दिल्ली 942.0 रुपये3113.5 रुपये
मुंबई941.5 रुपये 3067.5 रुपये
कोलकाता968.0 रुपये3256.0 रुपये
चेन्नई 957.5 रुपये 3283.0 रुपये
बेंगलुरु944.5 रुपये 3198.0 रुपये
अमृतसर983.0 रुपये 3220.0 रुपये
लखनऊ979.5 रुपये3236.0 रुपये
गाजियाबाद939.50 रुपये3113.50 रुपये
पटना1031.5 रुपये3400.5 रुपये

खाड़ी देशों से आगे बढ़ेगा भारत का LPG नेटवर्क

साल की शुरुआत में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव और युद्ध जैसे हालात के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी ने भारत के लिए एलपीजी सप्लाई को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी कर दी थी। इस संकट के बाद अब भारत ने अपनी रणनीति बदलने का फैसला किया है। सरकार अब एलपीजी आयात के स्रोतों को बढ़ाने और किसी एक देश पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम उठा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति में घरेलू गैस आपूर्ति प्रभावित न हो।

बता दें कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता है। 2025 में भारत ने अपने 21.85 मिलियन मीट्रिक टन LPG आयात का लगभग 90% हिस्सा मिडिल ईस्ट से मंगाया था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में LPG की कुल खपत में आयात की हिस्सेदारी लगभग 66% थी।

कब बदले थे कमर्शियल और घरेलू सिलेंडर के दाम

1 जुलाई 2026 को 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम में 183.50 की कटौती की गई थी। जिसका सीधा फायदा होटल, रेस्टोरेंट और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को मिला है। जबकि इससे पहले 7 जून को घरेलू LPG सिलेंडर का दाम 29 रुपये बढ़ा गया था।

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अमेरिका ने ईरान पर फिर हमले शुरू किए:जॉर्डन में US बेस पर अटैक के बाद कार्रवाई; ट्रम्प बोले- अब हमारी बारी

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि उसने ईरान के ठिकानों पर जवाबी हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिकी सेना के मुताबिक, यह कार्रवाई जॉर्डन में उसके सैन्य ठिकानों और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई है। सेंटकॉम ने इसे ‘शक्तिशाली प्रतिक्रिया’ बताया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में कहा, “अब हमारी बारी है।” उन्होंने दावा किया कि ईरान को हमले की जानकारी थी और उसने अमेरिका से ऐसा न करने की अपील भी की थी। इससे एक दिन पहले अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों पर संयुक्त हवाई हमले किए थे। वहीं मिस्र के दमिएटा बंदरगाह पर अमेरिकी स्वामित्व वाले गैस टैंकर ‘एनर्गोस विंटर’ पर भी ड्रोन हमला हुआ। बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 7.3% बढ़कर 88 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ट्रम्प ने ईरान को फिर दी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अगर हालात बिगड़े तो अमेरिका ईरान पर “बहुत जोरदार हमला” करेगा। हालांकि उन्होंने भविष्य में समझौते की संभावना से भी इनकार नहीं किया। 2. अमेरिका-सऊदी के संयुक्त हमले, इराक में 20 PMF लड़ाके मारे गए: अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित PMF के ठिकानों पर संयुक्त हवाई हमले किए। PMF के मुताबिक, हमलों में कम से कम 20 लड़ाके मारे गए और कई अन्य घायल हुए। 3. मिस्र के बंदरगाह पर अमेरिकी गैस टैंकर पर ड्रोन हमला: मिस्र के दमियत्ता पोर्ट पर अमेरिकी गैस स्टोरेज टैंकर को ड्रोन से निशाना बनाया गया। हमले के बाद आग लग गई, लेकिन प्रशासन ने हालात पर जल्द काबू पा लिया। 4. कच्चे तेल का भाव 90 डॉलर के करीब, 100 डॉलर तक जाने की आशंका: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड करीब 90 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि हालात और बिगड़े तो कीमत 100 डॉलर तक जा सकती है। 5. ईरान बोला- हमारी इजाजत के बिना होर्मुज से कोई जहाज नहीं गुजरेगा: ईरानी नौसेना ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के समुद्री क्षेत्र पर उसका पूरा नियंत्रण है। उसने कहा कि उसकी अनुमति के बिना किसी जहाज की आवाजाही नहीं हो सकती। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

‘अब मचेगी तबाही…’, इस मिलिट्री बेस पर हुए हमले से बौखलाया अमेरिका, ट्रंप ने ईरान को दी सीधी धमकी

जॉर्डन में अमेरिकी मिलिट्री बेस पर हुए हमलों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच सीधी जारी जंग टालने की कोशिशें हो रही थीं, लेकिन अब हालात फिर से बेहद गंभीर होते दिखाई दे रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हुए हमलों का कड़ा जवाब दिया जाएगा। फॉक्स न्यूज़ से बातचीत में उन्होंने कहा, “हम ईरान के खिलाफ सख्त सैन्य कार्रवाई करेंगे।” ट्रंप ने दोहराया कि जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने के जवाब में अमेरिका ईरान पर हमला करेगा। इस हमले का जवाब पूरी ताकत के साथ दिया जाएगा।

ट्रंप ने ईरान को दी सीधी धमकी

बता दें कि, ट्रंप की तरह से ये चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब ईरान ने जॉर्डन की ओर मिसाइलें दागीं। कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच सीधी सैन्य टक्कर नहीं हुई थी, लेकिन इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव फिर बढ़ गया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उन्होंने कई बैलिस्टिक मिसाइलों से जॉर्डन में मौजूद एक अमेरिकी एयरबेस और अमेरिकी सेंट्रल कमांड के ठिकाने को निशाना बनाया। हालांकि, जॉर्डन की सेना का कहना है कि उसने ईरान की पांच मिसाइलों को रास्ते में ही मार गिराया। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने यह भी कहा कि जब तक ईरान की सुरक्षा को खतरा बना रहेगा, तब तक उनकी कार्रवाई जारी रहेगी।

जंग में अब सऊदी अरब की भी हुई एंट्री

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान से कुछ घंटे पहले अमेरिका और सऊदी अरब की सेनाओं ने इराक में ईरान स्पोर्टेड आर्मड ग्रुप के ठिकानों पर ज्वाइंट हवाई हमला किया। अमेरिकी सेना ने बताया कि इस कार्रवाई में ईरान समर्थित समूहों के हथियारों के भंडार और रसद (लॉजिस्टिक्स) से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। वहीं, इराक के हशद अल-शाबी (पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज) ने दावा किया कि इन हमलों में बगदाद समेत सात प्रांतों में उसके कम से कम 20 सदस्य मारे गए। इस संगठन ने हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह एक सरकारी सुरक्षा बल के खिलाफ उठाया गया ऐसा कदम है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।

सऊदी अरब ने कहा कि इराक में किए गए हवाई हमले उसके तेल ठिकानों पर ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों के हमलों के जवाब में किए गए हैं। रियाद का कहना है कि इससे पहले उसने इन समूहों की ओर से भेजे गए ड्रोन भी मार गिराए थे।

होर्मुज को लेकर बढ़ा तनाव

इस बीच, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी तनाव बना हुआ है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। ईरान अब भी इस क्षेत्र में अपनी सख्त निगरानी बनाए हुए है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उन्होंने बुधवार को इस जलमार्ग में तीन तेल टैंकरों को रोका। साथ ही उन्होंने कहा कि इस रणनीतिक समुद्री रास्ते पर ईरान का पूरा नियंत्रण है। इन घटनाओं के बाद दुनिया भर में तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है, जिसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखने को मिला। इससे पहले भी होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और सऊदी अरब के तेल निर्यात को लेकर दी गई धमकियों के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दबाव बना हुआ था।

US-Iran War Update: होर्मुज में जहाजों पर हुए हमले पर भारत ने दी तीखी प्रतिक्रिया, गाजा संकट पर भी जताई चिंता

US-Iran War Update: भारत ने पश्चिम एशिया में बढ़ती हिंसा और तनाव को गंभीर रूप से चिंताजनक करार दिया है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य में कई समुद्री जहाजों पर हुए हालिया हमलों की कड़ी निंदा करते हुए क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय समुद्री रूट्स में व्यापार जल्द बहाल करने की मांग की। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की मध्य पूर्व पर आयोजित खुली बहस के दौरान संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने क्षेत्र में हिंसा और तनाव को बेहद चिंताजनक बताते हुए तत्काल तनाव कम करने की अपील की।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने पश्चिम एशिया को भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा, “क्षेत्र में थोड़े समय हमले रुकने के बाद फिर हमले शुरू हो गए हैं जो चिंताजनक है। यह बेहद गंभीर स्थिति है और भारत तत्काल तनाव कम करने का आग्रह करता है।”

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मंगलवार को पश्चिम एशिया की स्थिति पर आयोजित एक चर्चा में हरीश ने इस महीने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे जीएफएस गैलेक्सी, एमटी अल बहियाह और एमटी मोम्बासा सहित कई जहाजों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की।

उन्होंने कहा, “इन हमलों में कई भारतीय नागरिक घायल हुए, जिनमें कुछ गंभीर रूप से घायल हैं। एक भारतीय नागरिक को अपनी जान गंवानी पड़ी जबकि एक अन्य अब भी लापता है। भारत, नाविकों को निशाना बनाने और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर सुरक्षित एवं स्वतंत्र नौवहन बाधित करने वाली सभी हिंसक घटनाओं की लगातार निंदा करता रहा है।”

भारत ने क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता के हित में संवाद और कूटनीति के रास्ते पर लौटने की पुरजोर वकालत की। हरीश ने कहा, “क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों और असैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना तुरंत बंद होना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप क्षेत्र के समुद्री मार्गों पर बिना रोकटोक नौवहन और व्यापार को जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए।”

कमर्शियल जहाजों पर हमले तेज

अमेरिका और इजरायल के ईरान के खिलाफ जारी युद्ध के बीच छह जुलाई से कमर्शियल जहाजों पर हमलों के बाद ईरान ने 11 जुलाई को एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद घोषित कर दिया। संयुक्त राष्ट्र के एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए आर्थिक एवं सामाजिक आयोग के अनुसार, संघर्ष से पहले प्रतिदिन 100 से अधिक जहाज इस मार्ग से गुजरते थे। सात जुलाई तक यह संख्या 49 तक पहुंच गई थी, लेकिन जुलाई के मध्य तक घटकर केवल 8 से 15 जहाज प्रतिदिन रह गई।

हरीश ने कहा कि इस क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता से भारत के महत्वपूर्ण हित जुड़े हैं क्योंकि भारत का व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति तंत्र पश्चिम एशिया से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि भारत और पश्चिम एशिया के बीच लगभग 180 अरब डॉलर का वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार, 31 अरब डॉलर से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश तथा केवल खाड़ी सहयोग परिषद के देशों से 52 अरब डॉलर से अधिक का वार्षिक प्रेषण (रेमिटेंस) होता है। इनका भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा प्रभाव है।

उन्होंने कहा कि लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी क्षेत्र में रहकर काम करते हैं। उनकी सुरक्षा एवं कल्याण भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत ने सुरक्षा परिषद में यह भी कहा कि दुनिया का ध्यान केवल होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर केंद्रित है और ऐसे में गाजा पट्टी में जारी गंभीर मानवीय संकट की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। हरीश ने कहा कि नागरिकों की मौत और असैन्य बुनियादी ढांचे का विनाश चिंता का बेहद गंभीर विषय है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

फिलिस्तीन को मानवीय सहायता जारी

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों, विशेष रूप से प्रस्ताव 2803, को पूरी तरह लागू करने की आवश्यकता दोहराई। भारत ने बताया कि वह अब तक फिलिस्तीन को लगभग 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर की विकास और मानवीय सहायता उपलब्ध करा चुका है तथा UNRWA (संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी) के प्रमुख दानदाताओं में शामिल है।

दो-राष्ट्र समाधान पर दोहराया समर्थन

भारत ने एक बार फिर इजरायल-फिलिस्तीन विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अपने पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि वह बातचीत के जरिए दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन किया है। भारत चाहता है कि एक संप्रभु, स्वतंत्र और सक्षम फिलिस्तीनी राष्ट्र का गठन हो, जो सुरक्षित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर इज़राइल के साथ शांति से रह सके।

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जंग में सऊदी अरब की एंट्री, अमेरिका के साथ मिलकर इराक पर की एयर स्ट्राइक

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डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर के बीच ईरान ने खाड़ी में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमला कर दिया है तो दूसरी तरफ सऊदी अरब के सब्र का भी बांध टूट गया है। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि बुधवार 29 जुलाई को उसने अमेरिका के साथ मिलकर इराक में ईरान के समर्थित मिलिशिया ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। मंत्रालय के मुताबिक, इन समूहों का संबंध सऊदी अरब की तेल सुविधाओं पर हुए हमलों से था। बता दें कि ईरान समर्थित PMF के 8 लड़ाके मारे गए हैं। वहीं, जवाब में ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं हैं।

इससे पहले सऊदी रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि उसने इराक से उड़ाए गए कई ड्रोन को रास्ते में ही मार गिराया। ये ड्रोन पूर्वी सऊदी अरब की तेल सुविधाओं को निशाना बनाने के लिए भेजे गए थे। एक अलग बयान में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी कहा कि अमेरिका और सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों ने पूर्वी इराक में कई आतंकवादी ठिकानों, हथियारों के गोदामों और सामान पहुंचाने वाले ठिकानों पर हमला किया है। यह कार्रवाई लगातार हो रहे ड्रोन हमलों के जवाब में की गई।

एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ईरान ने बिना किसी उकसावे के वीकेंड से ही सऊदी अरब के सहयोगियों पर हमले करवाए थे। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार उस अधिकारी ने कहा, “यह साफ संदेश है कि हम ऐसी कोशिशों का जवाब दिए बिना नहीं छोड़ेंगे”

उधर, सऊदी अरब ने अपने पूर्वी प्रांत के तेल ठिकानों की ओर बढ़ रहे कई ड्रोन मार गिराने का दावा किया। वहीं, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज स्ट्रेट में तीन तेल टैंकर रोकने का दावा किया है। इसके अलावा, यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में एक सऊदी तेल टैंकर पर बैलिस्टिक मिसाइल दागने की बात कही है।

ट्रंप- नेतन्याहू के बीच व्हाइट हाउस में मीटिंग : अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू मंगलवार (28 जुलाई) को डोनाल्ड ट्रंप से मिलने पहुंचे। राष्ट्रपति ट्रंप और नेतन्याहू के बीच व्हाइट हाउस में लंबी मीटिंग चली। इस दौरान दोनों के बीच युद्ध समेत कई मसलों पर बातचीत हुई। दावा किया जा रहा है कि इस मीटिंग में नेतन्याहू ने ट्रंप के साथ नई सीक्रेट जानकारी शेयर की है, जो कि ईरान के लिए सिरदर्द बन सकती है।

अमेरिका-सऊदी ने इराक में हवाई हमले किए:ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों पर निशाना; जवाब में ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं

अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेना के मुताबिक, इन ठिकानों से अमेरिकी सैनिकों और सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों पर हमलों की तैयारी की जा रही थी। हमलों के कुछ घंटे बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि ये मिसाइलें जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे की ओर दागी गई थीं, लेकिन सभी को रास्ते में ही इंटरसेप्ट कर दिया गया। सऊदी अरब ने अपने पूर्वी प्रांत के तेल ठिकानों की ओर बढ़ रहे कई ड्रोन मार गिराए। वहीं, यमन के हुती विद्रोहियों ने लाल सागर में एक सऊदी तेल टैंकर पर बैलिस्टिक मिसाइल दागने की बात कही। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस एजेंसी ने भी एक टैंकर के पास विस्फोट की सूचना दी है। इराक में US-सऊदी के हमलों से जुड़े फुटेज… पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ट्रम्प-नेतन्याहू की मुलाकात, ईरान पर बनी सहमति: व्हाइट हाउस में हुई बैठक के बाद नेतन्याहू ने इसे अपनी सबसे अच्छी बैठकों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेता इस बात पर सहमत हैं कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे। 2. जेलेंस्की ने ट्रम्प से एयर डिफेंस और युद्ध पर की चर्चा: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने ट्रम्प से मुलाकात में पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम, रक्षा सहयोग और रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर कूटनीतिक प्रयास तेज करने पर चर्चा की। 3. होर्मुज स्ट्रेट पर ओमान का नया फॉर्मूला: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच ओमान ने प्रस्ताव दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट का नियंत्रण सिर्फ ईरान के पास न होकर क्षेत्र के सभी देशों की साझेदारी में हो। इस प्रस्ताव को खाड़ी के कई देशों का समर्थन भी मिला है। 4. अमेरिका-ईरान बातचीत की खबरों से कच्चा तेल सस्ता: दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई। ब्रेंट और WTI क्रूड दोनों पिछले कई दिनों के निचले स्तर पर कारोबार करते दिखे। 5. मिडिल ईस्ट में बढ़े ड्रोन हमले, कई देशों में अलर्ट: पिछले दो दिनों में इराक, जॉर्डन और सऊदी अरब में ड्रोन हमलों की कई घटनाएं सामने आई हैं। कुछ हमलों की जिम्मेदारी हूतियों ने ली है, जबकि कई मामलों में हमलावरों की पहचान अब तक नहीं हो सकी है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

Global Market Today: ग्लोबल बाजार में कोहराम, चिप शेयरों में बिकवाली से कोस्पी 8% टूटा, निक्केई 4% से ज्यादा लुढ़का

Global Market Today: एशियाई बाजारों में 28 जुलाई को गिरावट देखने को मिली। US में चिप कंपनियों में बिकवाली के चलते कोरिया का बाजार 8 फीसदी के लोअर सर्किट पर फिसल गया। निक्केई 4.40 फीसदी टूटा है। अमेरिकी बाजार भी ऊपरी स्तरों से फिसले है। बेंचमार्क कोस्पी (Kospi) 8.70 फीसदी गिरा। जबकि स्मॉल-कैप कोस्डैक (Kosdaq) में 3.63% की गिरावट आई। जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225) 4.21% गिरा और व्यापक टॉपिक्स (Topix) इंडेक्स में 0.63% की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 शुरुआती कारोबार में 0.38% नीचे आ गया।

वॉल स्ट्रीट

सोमवार को वॉल स्ट्रीट मिला-जुला बंद हुआ क्योंकि निवेशक इस हफ़्ते के आखिर में बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के तिमाही नतीजों से पहले सतर्क रहे। बाज़ार के प्रतिभागियों ने तेल की बढ़ी हुई कीमतों पर भी कड़ी नज़र रखी, क्योंकि चिंता थी कि लगातार महंगाई का दबाव फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों पर सख्त रुख बनाए रखने के लिए मजबूर कर सकता है।

S&P 500 मामूली रूप से 0.02% बढ़कर 7,413.18 पर बंद हुआ, जबकि डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.51% बढ़कर 52,210.08 पर बंद हुआ। वहीं, नैस्डैक 0.18% गिरकर 24,932.08 पर बंद हुआ।

टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न, मेटा और एप्पल इस हफ़्ते अपने तिमाही नतीजे घोषित करने वाले हैं। निवेशक यह भी आकलन कर रहे हैं कि क्या पिछले कुछ वर्षों में बाज़ारों को आगे बढ़ाने वाली AI-संचालित तेज़ी अब अपनी रफ़्तार खो रही है।

अमेरिकी चिप शेयरों में बिकवाली

कई नकारात्मक घटनाक्रमों के बीच सोमवार को चिप शेयरों में लगातार तीसरे सत्र में गिरावट जारी रही। Nvidia और AMD के शेयरों में 5-5% की गिरावट आई, जबकि Seagate के शेयर कंपनी की तिमाही नतीजों की घोषणा से पहले 4% गिर गए।

इस बीच, SK Hynix के US-लिस्टेड शेयरों (ADRs) में रातों-रात 7.5% की गिरावट आई और वे अपने $149 के IPO प्राइस से नीचे बंद हुए। Micron और Western Digital के शेयर भी क्रमशः 2% और 4% गिरकर बंद हुए।

US-ईरान युद्ध

Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, Axios की एक खबर में बताया गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कूटनीति को एक और मौका देने के लिए ईरान पर सैन्य हमले टालने का फैसला किया है। इस कदम के बावजूद, यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों पक्षों के बीच कोई ठोस बातचीत हुई है या नहीं।

साथ ही, खबर है कि ईरान और ओमान के अधिकारी होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से शिपिंग बहाल करने के लिए बातचीत कर रहे हैं। यह फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ने वाला एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मार्ग है। सामान्य समय में, इस जलमार्ग से दुनिया की दैनिक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है।

क्रूड में नरमी

मंगलवार, 28 जुलाई को कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट जारी रही। यह गिरावट तब आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन और तेहरान मध्य पूर्व के संघर्ष को सुलझाने के लिए बातचीत कर रहे हैं।

पिछले सत्र में 7% से ज़्यादा गिरने के बाद वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड $82 प्रति बैरल से नीचे आ गया, जबकि ब्रेंट क्रूड में तीन महीने से ज़्यादा समय में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह $88 प्रति बैरल के करीब बंद हुआ।

आज सोने की कीमत

सोने की कीमतें ऊंची बनी रहीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यह कहने के बाद कि वाशिंगटन और ईरान संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत कर रहे हैं, युद्ध से महंगाई बढ़ने और ब्याज दरें बढ़ने की आशंकाएं कम हुईं।

सोमवार को 0.6% की बढ़त के बाद, शुरुआती कारोबार में यह कीमती धातु $4,075 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही थी। जून के आखिर से सोना $4,000 प्रति औंस के स्तर के करीब बना हुआ है। इसे ‘बार्गेन बाइंग’ (कम कीमत पर खरीदारी) का सहारा मिला है, जिससे यह ट्रेडर्स द्वारा बारीकी से देखे जाने वाले अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर बना हुआ है।

हालांकि, पांच महीने पहले संघर्ष शुरू होने के बाद से सोने की कीमतों में 20% से अधिक की गिरावट आई है। इससे उस कई साल की तेजी का अंत हो गया है, जिसने जनवरी के आखिर में कीमतों को लगभग $5,600 प्रति औंस के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचा दिया था।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

ट्रम्प बोले- ईरान के साथ बातचीत जारी:सफल रही तो ठीक, नहीं तो फिर शुरू होंगे हवाई हमले

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को कहा कि ईरान के साथ बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इसका कोई हल निकल जाएगा। लेकिन अगर बातचीत बेनतीजा रही तो अमेरिका फिर से ईरान पर हवाई हमले शुरू करेगा। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रम्प ने दावा किया, “पिछले 14 दिनों में ईरान को भारी नुकसान हुआ है। इसके बाद उन्होंने हमसे कहा कि हमले रोकिए और बातचीत करते हैं।” हालांकि, ईरान ने इस दावे को खारिज कर दिया। तेहरान का कहना है कि उसने अमेरिका से बातचीत की पहल नहीं की है। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका ने फिलहाल ईरान पर हवाई हमले रोक रखे हैं। दोनों देशों के बीच मध्यस्थों के जरिए बातचीत चल रही है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट समेत कई अहम मुद्दों पर अब भी सहमति नहीं बन सकी है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

ईरान पर सबसे बड़े हमले से पीछे हटे ट्रम्प:सलाहकारों ने चेतावनी दी, देश में इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ सबसे बड़े हमले को फिलहाल टाल दिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने यह फैसला अपने शीर्ष सलाहकारों और कैबिनेट सदस्यों के साथ शुक्रवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया। इस दौरान मुख्य चिंता मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना के पास मौजूद एयर डिफेंस सिस्टम और इंटरसेप्टर मिसाइलों की भारी कमी को लेकर थी। इंटरसेप्टर खत्म होने का डर ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने निजी तौर पर सलाह दी थी कि ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाना संभव तो है, लेकिन इससे सेंट्रल कमांड के पास मौजूद इंटरसेप्टर मिसाइलें खतरनाक स्तर तक खत्म हो सकती हैं। अधिकारियों का कहना है कि अप्रैल के अंत तक रक्षा विभाग 1,200 से ज्यादा पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें खर्च कर चुका है, जिनकी कीमत 4 मिलियन डॉलर प्रति मिसाइल से अधिक है। तब से स्थिति और खराब हुई है। जॉर्डन हमले के बाद बढ़ी चिंता हाल ही में जॉर्डन में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद चिंताएं और बढ़ गई हैं। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमले के दौरान एक बैलिस्टिक मिसाइल अमेरिकी सुरक्षा घेरे को भेदकर निकल गई थी। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अभियान बढ़ाया गया, तो अमेरिकी सैनिक, खाड़ी देशों के सहयोगी और महत्वपूर्ण ठिकाने ईरानी जवाबी हमलों के प्रति असुरक्षित हो जाएंगे। कूटनीति और दबाव की रणनीति व्हाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन चेउंग ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा से कूटनीतिक समाधान के पक्ष में रहे हैं, लेकिन अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य या सहयोगियों के खिलाफ आतंकी गतिविधियां जारी रखता है, तो सभी विकल्प खुले हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के लिए यही समझदारी है कि वह बातचीत के जरिए डील करे, वरना उसे अंजाम भुगतना होगा। आर्थिक दबाव और अन्य चुनौतियां ट्रंप के सलाहकारों ने चेतावनी दी है कि व्यापक युद्ध से वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, ऊर्जा संकट और शरणार्थी संकट पैदा हो सकता है। इसके अलावा, प्रशासन के भीतर यह संदेह भी है कि तेज सैन्य अभियान ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के बजाय उसे विदेशी खतरे के खिलाफ एकजुट कर सकता है। इसी दबाव को बनाए रखने के लिए शुक्रवार को ट्रेजरी विभाग ने ईरानी व्यवसायी बाबेक जंजानी के वित्तीय नेटवर्क से जुड़े 9 कंपनियों और 4 लोगों पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की है।