अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिका ने लगातार आठवीं रात भी ईरान पर हवाई हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने खुद इन हमलों को मंजूरी दी थी और यह कार्रवाई जॉर्डन में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के जवाब में की गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया कि इस बार हमलों का मुख्य निशाना ईरान के सैन्य ठिकाने, हथियारों के भंडार और लॉजिस्टिक्स सेंटर रहे। अमेरिकी सेना के मुताबिक, इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना है। हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में पुलों और डिसैलिनेशन प्लांट पर भी हमले की बात कही गई है, लेकिन CENTCOM ने इसकी पुष्टि नहीं की है। जंग में में दो और सैनिकों की मौत जान गंवाने वाले अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. अमेरिका के साथ समझौते से पीछे हटा ईरान: ईरान ने अमेरिका के साथ एक महीने पहले हुए समझौते से पीछे हटने का ऐलान किया है। ईरान के उप विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका ने खुद समझौते का उल्लंघन किया, इसलिए वे भी उसकी शर्तों का पालन नहीं करेंगे। 2. अमेरिकी हमलों में 50 लोगों की मौत, 500 घायल: ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि 27 जून से 18 जुलाई के बीच अमेरिकी हवाई हमलों में 50 लोगों की मौत हुई है, जबकि 500 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। 3. जंग में डिसैलिनेशन प्लांट बने निशाना: कुवैत ने दावा किया कि ईरान ने उसके एक डिसैलिनेशन प्लांट पर हमला किया है। वहीं, ईरान ने भी दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के होर्मोजगान में एक डिसैलिनेशन प्लांट पर हमला किया है। 4. अमेरिकी हमलों में दो पुल क्षतिग्रस्त: अमेरिकी हमले में बंदर अब्बास-रूदान मार्ग पर स्थित दो पुल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। साथ ही, जस्क के पास एक इलाके पर भी सैन्य हमला हुआ। 5. होर्मुज में जहाजों की आवाजाही निचले स्तर पर: होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की संख्या तीन हफ्तों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। शिप ट्रैकिंग वेबसाइट मरीन ट्रैफिक के मुताबिक, गुरुवार को स्ट्रेट से सिर्फ 8 जहाज गुजरे। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
अमेरिका के साथ युद्धविराम समझौते के बाद ईरान के भीतर राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आ गया है। राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ पर अब ईरान के कट्टरपंथी धड़े ‘सॉफ्ट कूप’ यानी बिना हथियारों के सत्तापलट करने का आरोप लगा रहे हैं। कट्टरपंथियों का कहना है कि इन नेताओं ने अमेरिका से समझौता करके ईरान के सिद्धांतों से समझौता किया है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह तेहरान में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान यह नाराजगी खुलकर दिखाई दी। राष्ट्रपति मसूद पजशकियान जब खामेनेई के ताबूत के साथ चल रहे थे, तब काले कपड़े पहने कुछ लोगों ने राष्ट्रपति के खिलाफ नारे लगाए। वहीं, अंतिम संस्कार स्थल से कुछ दूरी पर विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर पत्थर फेंके गए और उन्हें देश बेचने वाला गद्दार कहा गया। हालात इतने बिगड़ गए कि उन्हें वहां से भागना पड़ा। कट्टरपंथियों का आरोप- अमेरिका के सामने सरकार झुक गई CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथी गुटों का मानना है कि अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने के बजाय सरकार ने अमेरिका के सामने झुककर समझौता कर लिया। उनका कहना है कि यह समझौता नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के आदेशों के खिलाफ किया गया। मुजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उन्होंने न तो देश को संबोधित किया है और न ही खुलकर अपनी सत्ता का प्रदर्शन किया है, जबकि उनके नाम पर सरकार बातचीत भी कर रही है और देश भी चला रही है। कट्टरपंथियों का आरोप है कि मुजतबा की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर मौजूदा सरकार अपनी ताकत बढ़ाने में लगी है। उनका दावा है कि वे संसद को कमजोर करना चाहती है। मुजतबा खामेनेई के लगातार सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने के कारण राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची युद्ध के बाद ईरान के सबसे प्रमुख चेहरे बन गए हैं। कट्टरपंथियों की नाराजगी की एक बड़ी वजह यही है। अंतिम संस्कार में जंग का संदेश, कुछ दिन बाद ही टूट गया युद्धविराम ईरान में युद्ध के दौरान राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की लगातार अपील की जा रही थी, लेकिन अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में कट्टरपंथी गुटों का दबदबा साफ दिखाई दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथी गुटों ने इस मौके का इस्तेमाल अमेरिका के खिलाफ फिर से युद्ध छेड़ने की मांग उठाने और ट्रम्प सरकार के साथ हुए किसी भी समझौते को पूरी तरह खारिज करने के लिए किया। कट्टरपंथियों की यह इच्छा कुछ ही दिनों बाद पूरी होती नजर आई। इस सप्ताह ईरान और अमेरिका के बीच हुआ नाजुक युद्धविराम लगभग टूट गया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को निशाना बनाकर इस समुद्री मार्ग पर अपना कंट्रोल दिखाने की कोशिश की। इसके जवाब में अमेरिका ने जवाबी हमले किए। राष्ट्रपति को खुलेआम दी गई थी जान से मारने की धमकी युद्ध दोबारा शुरू होने से पहले भी कट्टरपंथी नेता अमेरिका से समझौता करने वाले अधिकारियों पर लगातार हमला बोल रहे थे। ईरानी शासन से जुड़े धार्मिक गायक मोहम्मद अली बख्शी ने एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति मसूद पजशकियान को खुलेआम धमकी दी थी। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति महोदय, अगर सुप्रीम लीडर की शर्तें पूरी नहीं हुईं तो हमारी तलवार होगी और आपका गला होगा। हम आपकी जिंदगी को जहन्नुम बना देंगे।” राष्ट्रपति को जान से मारने की इस धमकी की ईरान में काफी आलोचना हुई, लेकिन बख्शी के खिलाफ किसी कानूनी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई। गालिबाफ भी कट्टरपंथियों के निशाने पर कट्टरपंथियों के निशाने पर सिर्फ राष्ट्रपति और विदेश मंत्री ही नहीं हैं। अमेरिका के साथ बातचीत करने वाले मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ भी उनके निशाने पर हैं। गालिबाफ पहले रिवोल्यूशनरी गार्ड्स में कमांडर रह चुके हैं और लंबे समय से ईरान की राजनीति में सक्रिय हैं। कट्टरपंथी सांसद कमरान गजनफारी ने जुलाई की शुरुआत में जारी एक वीडियो मैसेज में आरोप लगाया कि मौजूदा नेतृत्व सर्वोच्च नेता और संसद की भूमिका कमजोर कर रहा है। कट्टरपंथियों को किनारे करने की कोशिश तेज ईरान में करीब चार महीने बाद 14 जुलाई को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। इसमें सत्ता संघर्ष खुलकर सामने आया और अमेरिका के साथ हुए समझौते का विरोध करने वाले दो प्रमुख कट्टरपंथी सांसदों को अहम संसदीय पदों से हटा दिया गया। सबसे पहले अमेरिका से समझौते का सबसे ज्यादा विरोध करने वाले कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियन को संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग (नेशनल सिक्योरिटी कमीशन) से हटा दिया गया। इसके अलावा इसके प्रवक्ता रहे इब्राहिम रेजाई को भी हटा दिया गया। नबावियन पहले अमेरिका के साथ बातचीत करने वाले ईरानी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रह चुके हैं, लेकिन बाद में उन्होंने वार्ता का विरोध शुरू कर दिया। आरोप है कि उन्होंने पिछले महीने समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले उसका मसौदा मीडिया में लीक कर दिया था, ताकि समझौता रुक सके। विशेषज्ञ बोले- सरकार कट्टरपंथियों का असर कम करना चाहती है एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान की मौजूदा सरकार अब इन कट्टरपंथी गुटों का प्रभाव कम करने की कोशिश कर रही है। हामिदरेजा अजीजी ने CNN से कहा, “हम देख रहे हैं कि गालिबाफ इन कट्टरपंथी नेताओं को धीरे-धीरे किनारे कर रहे हैं। ये लोग अब व्यवस्था के लिए बोझ बन चुके हैं और देश में अस्थिरता बढ़ने के साथ अपनी आपसी लड़ाई भी खुलकर सामने ला रहे हैं।” हालांकि इन कट्टरपंथियों की संख्या ज्यादा नहीं है, लेकिन संसद और सरकारी न्यूज एजेंसीज आईआरआईबी (IRIB) जैसे कई प्रभावशाली संस्थानों में उनकी मजबूत पकड़ है। इनकी वास्तविक राजनीतिक ताकत कितनी है, यह साफ नहीं है। इस धड़े के प्रमुख नेता और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख सईद जलीली को 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में 1.3 करोड़ से ज्यादा वोट मिले थे। वे चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे थे। ईरान की कुल आबादी करीब 9.3 करोड़ है। ट्रम्प ने कहा था- ईरान भीतर से बंटा हुआ है युद्ध और कूटनीतिक बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कई बार कह चुके हैं कि ईरान का नेतृत्व गंभीर अंदरूनी मतभेदों से जूझ रहा है और यही किसी समझौते में सबसे बड़ी बाधा है। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार और कट्टरपंथियों के बीच मतभेद जरूर हैं, लेकिन पूरे शासन की प्राथमिकता अब भी एक जैसी है। उनका लक्ष्य ऐसा समझौता करना है जिससे युद्ध खत्म हो, ईरान को प्रतिबंधों से राहत मिले और होर्मुज स्ट्रेट पर उसका प्रभाव भी बना रहे। अमेरिका से फिर जंग चाहते हैं कट्टरपंथी CNN के अनुसार, मुजतबा खामेनेई का लगातार सार्वजनिक रूप से सामने न आना, युद्धविराम को लेकर उनका सीमित समर्थन, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का बढ़ता प्रभाव और अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में जुटी भारी भीड़ ने कट्टरपंथियों का मनोबल बढ़ा दिया है। अब वे अमेरिका और इजराइल के खिलाफ युद्ध जारी रखने की खुलकर मांग कर रहे हैं। ईरान के पूर्व विदेश मंत्री और कट्टरपंथी नेता मनूचेहर मुत्ताकी ने बुधवार को एक टीवी इंटरव्यू में कहा, मेरा सुझाव है कि हम क्षेत्र में मौजूद अमेरिका के किसी सैन्य अड्डे पर जाएं, जहां सैकड़ों या शायद हजारों अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। अगर हम उनमें से 100 सैनिकों को पकड़कर ईरान ले आएं, तो इतना ही काफी होगा। यह बयान दिखाता है कि अमेरिका के साथ हुए समझौते के बावजूद ईरान के भीतर सत्ता संघर्ष खत्म नहीं हुआ है। एक तरफ सरकार कूटनीतिक रास्ते से प्रतिबंधों में राहत और युद्ध खत्म करने की कोशिश कर रही है, वहीं कट्टरपंथी धड़े अब भी अमेरिका और इजराइल के खिलाफ टकराव की नीति पर अड़े हुए हैं। इससे आने वाले समय में ईरान की आंतरिक राजनीति और विदेश नीति दोनों पर बड़ा असर पड़ सकता है। —————————– ईरान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका का लगातार सातवीं रात ईरान पर हमला:भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट पर अटैक; ईरान ने कतर-कुवैत पर दागीं मिसाइलें अमेरिका ने शनिवार को लगातार सातवीं रात ईरान पर एयरस्ट्राइक की। इन हमलों में पुल, एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट का एक कंट्रोल (निगरानी) टावर निशाना बना। जवाब में ईरान ने कतर, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन की ओर मिसाइलें दागीं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
US strikes Iran port and bridge: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब बेहद खतरनाक लेवल पर पहुंच गया है। शुक्रवार को दोनों देशों ने एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों और रणनीतिक बुनियादी ढांचों को निशाना बनाकर भीषण हमले किए। अमेरिका ने जहां ईरान के मुख्य बंदरगाहों और आंतरिक परिवहन संपर्कों (पुलों) को तबाह करने के लिए अपनी सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है, वहीं ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी के अमेरिकी सहयोगी देशों पर मिसाइलें दागी हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर शुरू हुआ यह युद्ध अब पांचवें महीने में प्रवेश कर चुका है। दोनों ओर से लगातार हो रही बमबारी के कारण वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मचा हुआ है। आइए आपको बताते हैं कि पिछले 24 घंटों में युद्ध के मैदान में क्या-क्या हुआ है.
अमेरिकी सेना का ‘नावल ब्लॉकेड’ और 6 घंटे की भीषण बमबारी
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, शुक्रवार दोपहर 3 बजे से लेकर रात 9:30 बजे (ET) तक ईरान पर चौतरफा हमले किए गए. अमेरिकी लड़ाकू विमानों, ड्रोन्स और युद्धपोतों ने ईरान के सर्विलांस ठिकानों, सैन्य लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, भूमिगत हथियार डिपो और समुद्री क्षमताओं को निशाना बनाया।
राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों की पूरी तरह से ‘नावल नाकेबंदी’ कर रही है। यह लगातार सातवीं रात थी जब अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ हवाई और समुद्री ऑपरेशन चलाया।
जवाब में ईरान का मिसाइल हमला, कुवैत और कतर निशाने पर
अमेरिकी हमलों से बौखलाए ईरान ने खाड़ी के उन देशों पर मिसाइलें दागीं जो अमेरिका के करीबी सहयोगी हैं। तेहरान ने कतर जो इस विवाद में मध्यस्थ की भूमिका भी निभा रहा है और कुवैत पर मिसाइलें बरसाईं। कुवैती अधिकारियों के मुताबिक, ईरान के इस मिसाइल हमले में उनके देश के एक बड़े ‘डिटेसिनेशन प्लांट’ यानी खारे पानी को पीने लायक बनाने वाली फैसिलिटी को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
चाबहार पोर्ट और बंदर खमीर के रणनीतिक पुलों को किया तबाह
इस ताजा हमले में अमेरिका ने ईरान की रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले आर्थिक और परिवहन नेटवर्क को निशाना बनाया है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, अमेरिकी हमलों में चाबहार बंदरगाह पर स्थित एक बड़ा टावर मलबे में तब्दील हो गया।
बता दें कि चाबहार पोर्ट को भारत की मदद से विकसित किया गया था और यह अफगानिस्तान के लिए एक प्रमुख व्यापारिक मार्ग है। अमेरिका का दावा है कि इस टावर का इस्तेमाल ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) जहाजों की जासूसी के लिए कर रही थी।
दक्षिणी होर्मोजगान प्रांत में तटीय शहर बंदर खमीर के पास बने प्रमुख पुलों को अमेरिकी हवाई हमलों में उड़ा दिया गया। इसका मकसद ईरान के सबसे बड़े वाणिज्यिक बंदरगाह ‘बंदर अब्बास’ का संपर्क राजधानी तेहरान और देश के अंदरूनी हिस्सों से पूरी तरह काटना है।
युद्ध की शुरुआत के बाद पहली बार ईरान ने स्वीकार किया है कि उसके पावर ग्रिड (बिजली नेटवर्क) को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसके कारण दक्षिणी प्रांतों में ब्लैकआउट का खतरा मंडरा रहा है।
दोनों तरफ भारी तबाही, अब तक सैकड़ों मौतें
शुक्रवार को हुए इन ताजा हमलों में दोनों पक्षों के सैन्य और नागरिक हताहत हुए हैं:
ईरान में नुकसान: ईरानी अधिकारियों के अनुसार, ताजा हमलों में कम से कम 46 लोगों की मौत हो गई और 400 से अधिक घायल हुए हैं. केवल पुल पर हुए हमले में 8 लोगों की जान गई।
अमेरिका को नुकसान: पेंटागन ने पुष्टि की है कि इस हफ्ते सोमवार से अब तक 13 और अमेरिकी सैनिक (10 थल सेना और 3 नौसेना कर्मी) घायल हुए है। युद्ध की शुरुआत से अब तक कुल 14 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं और 427 घायल हुए हैं।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट में दो तेल टैंकरों में विस्फोट हुआ है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की गलत जानकारी के कारण टैंकरों ने उस मार्ग से गुजरने की कोशिश की जहां समुद्र में माइंस बिछी थीं। इससे टकराने के बाद दोनों जहाजों में भीषण आग लग गई। हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस दावे को गलत बताया है। CENTCOM ने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा, ‘IRGC के कई दावों की तरह ये दावा भी झूठा है।’ वहीं, CENTCOM ने बताया कि उसने शुक्रवार देर रात ईरान पर लगातार सातवीं रात सैन्य हमले किए। इसमें ईरान के निगरानी ठिकानों, सैन्य लॉजिस्टिक ढांचे, भूमिगत हथियार भंडार और समुद्री सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया गया। अल जजीरा के मुताबिक, सीरिक, बुशेहर, बंदर अब्बास, केश्म द्वीप और मध्य ईरान के यज्द शहर पर हमले हुए हैं। उधर, ईरानी सांसद अहमद बख्शायेश अर्देस्तानी ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर जमीनी हमला किया, तो ईरान कुवैत और बहरीन में घुस जाएगा और वहां अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सेना को तबाह कर देगा। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
Iran-US War Update: ब्रिटिश सेना ने शुक्रवार (17 जुलाई) को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर ओमान के सबसे पास वाले समुद्री रूट्स से गुजर रहे एक टैंकर पर हमला किया गया। ब्रिटेन के यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला शुक्रवार तड़के हुआ, जिसमें एक टैंकर से टकराया। UKMTO ने बताया कि हमले में टैंकर के बाईं हिस्से को मामूली क्षति पहुंची। उसने कहा, “चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं। सभी का पता लगा लिया गया है। पर्यावरण को किसी प्रकार की क्षति की सूचना नहीं है। पोत अपने अगले गंतव्य की ओर बढ़ रहा है।”
ईरान ओमान के निकट इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले टैंकरों पर हमले करता रहा है। हालांकि, इस घटना के संबंध में ईरान की ओर से तत्काल किसी हमले की पुष्टि नहीं की गई। इस बीच जॉर्डन की सेना ने शुक्रवार को कहा कि उसने ईरान की ओर से दागी गई तीन मिसाइलों को बीच रास्ते में ही मार गिराया।
जॉर्डन की सरकारी समाचार एजेंसी पेट्रा के अनुसार, सेना ने यह जानकारी दी। हमले में किसी के हताहत होने की अभी सूचना नहीं है। जॉर्डन में अमेरिकी सैनिक और सैन्य विमान तैनात हैं। अमेरिका द्वारा ईरान पर हवाई हमलों का अभियान तेज किए जाने के बाद जवाबी कार्रवाई के तहत ईरान कई बार जॉर्डन को निशाना बना चुका है।
होर्मुज में ट्रैफिक कम हुआ
अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़ी लड़ाई ने होर्मुज से होने वाले ट्रैफिक को काफी हद तक रोक दिया है। होर्मुज तेल और गैस के लिए दुनिया का सबसे अहम शिपिंग रूट है। इसके बंद होने से दुनिया भर में एनर्जी की कीमतें बढ़ गई हैं। रिपोर्ट के शुक्रवार सुबह 0513 GMT के डेटा के मुताबिक, फ्यूल ऑयल ले जा रहे ‘मीरान’ (एक सैंक्शन वाला प्रोडक्ट टैंकर) और लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस ले जा रहे छोटे जहाज ‘नोरिता’ ने गुरुवार को ईरानी रूट से जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) को पार किया।
लेकिन ओमान की खाड़ी में रुक गए। वहां US की नाकेबंदी है। LSEG के डेटा से पता चला कि इराकी फ्यूल ऑयल से लदा बंकरिंग टैंकर ‘एरोलिया’ शुक्रवार को खाड़ी से बाहर निकलने के कुछ ही घंटों बाद वापस खाड़ी की ओर मुड़ गया।
अमेरिका का चाबहार पोर्ट पर अटैक
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने शुक्रवार को एक टावर की तस्वीर शेयर की, जो ईरान पर लगातार हमलों के बाद गिरता हुआ दिख रहा था। न्यूज एजेंसी AP के अनुसार, यह तस्वीर चाबहार पोर्ट के टावर की है। हालांकि हेगसेथ ने खुद इस टावर या तस्वीर को किसी खास जगह से नहीं जोड़ा। चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी हवाई हमले बार-बार होते रहे हैं।
ईरान के सरकारी मीडिया ने इस जगह पर हमलों के तीसरे दौर की बात तो मानी। लेकिन तुरंत यह नहीं बताया कि टावर गिर गया है। हालांकि, ईरान ने कहा कि यह टावर पोर्ट पर आने-जाने वाले कमर्शियल ट्रैफिक पर नजर रखने का काम करता था।
ईरान का पैरामिलिट्री रिवोल्यूशनरी गार्ड भी देश भर के पोर्ट्स पर काम करता है। इस बीच, तेहरान ने शुक्रवार को दावा किया कि उसने खाड़ी इलाके में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर नए सिरे से हमले किए हैं। यह जवाबी कार्रवाई तब हुई जब अमेरिकी सेना ने लगातार छठी रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए। हमलों के इस नए दौर से तनाव और बढ़ गया है। पिछले महीने हुए सीजफायर के बाद अब दोनों तरफ से रोजाना हमले हो रहे हैं।
अमेरिका ने लगातार छठी रात ईरान पर बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि फाइटर जेट, ड्रोन और युद्धपोतों से ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया गया। इसी दौरान भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट पर भी मिसाइल हमला हुआ। ईरानी समाचार एजेंसी मेहर के मुताबिक, पोर्ट के मेरिटाइम कंट्रोल टावर को निशाना बनाया गया। पिछले एक हफ्ते में इस टावर पर यह तीसरा हमला है। CENTCOM ने कहा कि हमलों में तटीय निगरानी केंद्र, एयर डिफेंस सिस्टम, सैन्य लॉजिस्टिक्स और समुद्री सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरान बोला- अमेरिकी सैनिकों का कत्लेआम होगा: ईरानी सांसद बेहनाम सईदी ने अमेरिका को धमकी देते हुए कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान पर जमीनी हमला किया, तो अमेरिकी सैनिकों का कत्लेआम कर दिया जाएगा। 2. बाब अल-मंदेब स्ट्रेट पर खतरा बढ़ा: ईरान ने यमन के हूती विद्रोहियों से कहा है कि अगर अमेरिका ईरान के बिजली ढांचे पर हमला करता है तो वे बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को बंद करने के लिए तैयार रहें। 3. होर्मुज स्ट्रेट से सिर्फ 9 जहाज गुजरे: समुद्री डेटा कंपनी केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक बुधवार को सिर्फ 9 जहाजों ने होर्मुज पार किया। मंगलवार को यह संख्या 13 थी। 4. होर्मुज में भारतीय नाविकों की तैनाती नहीं होगी: भारत सरकार ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती फिलहाल रोकने के निर्देश दिए हैं। 5. कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमला: ईरान ने कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए गए। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
LPG Price Today (17 जुलाई): अगर आप आज यानी 17 जुलाई को घरेलू गैस सिलेंडर बुक कराने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर और 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में आज भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। देशभर में गैस सिलेंडर की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत ₹942 है। जबकि 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹2,930 बनी हुई है। वहीं, दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा और गाजियाबाद में घरेलू गैस सिलेंडर ₹939.50 में उपलब्ध है। इन शहरों में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत भी ₹2,930 है।
क्या अमेरिका-ईरान तनाव का पड़ेगा असर?
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। भारत अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसका अधिकांश आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के रास्ते होता है।
यदि इस समुद्री मार्ग पर किसी तरह की बाधा आती है या संघर्ष और बढ़ता है, तो भारत में LPG की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। ऐसे में आने वाले समय में गैस सिलेंडर की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
क्या फिर बढ़ सकती हैं गैस सिलेंडर की कीमतें?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और LPG की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं, तो सरकार के सामने दो विकल्प होंगे। या तो LPG पर सब्सिडी बढ़ाई जाए या फिर घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की जाए।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 तक सरकारी तेल कंपनियों को प्रत्येक घरेलू LPG सिलेंडर पर लगभग ₹500 से ₹700 तक का नुकसान उठाना पड़ रहा था। ऐसे में लंबे समय तक वैश्विक कीमतें ऊंची रहने पर उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ सकता है।
फिलहाल क्या करें उपभोक्ता?
फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि 17 जुलाई को LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए आने वाले दिनों में कीमतों और सप्लाई दोनों पर नजर रखना जरूरी होगा।
आज के प्रमुख रेट
दिल्ली: घरेलू LPG (14.2 किग्रा)- ₹942, कमर्शियल (19 किग्रा) – ₹2,930
नोएडा: घरेलू LPG – ₹939.50, कमर्शियल – ₹2,930
गाजियाबाद: घरेलू LPG – ₹939.50, कमर्शियल – ₹2,930
US-Iran War Update: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार (17 जुलाई) को अमेरिका ने लगातार छठी रात ईरान पर हवाई हमले किए। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इस बार हमलों का निशाना दक्षिणी ईरान का महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर बना, जिसमें एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, पुल और संचार सुविधाएं शामिल हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बयान जारी कर कहा कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को और कमजोर करना था। हालांकि, ईरानी मीडिया का दावा है कि हमलों में परिवहन नेटवर्क, संचार व्यवस्था और कुछ नागरिक क्षेत्रों को भी नुकसान पहुंचा है।
एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और पुलों पर हमले
ईरानी सरकारी मीडिया IRIB के मुताबिक, दक्षिण-पूर्वी ईरान स्थित इरानशहर एयरपोर्ट के पास जोरदार धमाके हुए। अमेरिकी मिसाइल ने एयरपोर्ट परिसर को निशाना बनाया। वहीं, ‘तस्नीम न्यूज’ एजेंसी ने दावा किया कि अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने एयरपोर्ट पर मिसाइल हमला किया।
बंदर अब्बास शहर में स्थित रेलवे जंक्शन स्टेशन पर भी हमला होने की खबर है। ‘मेहर’ न्यूज एजेंसी के अनुसार, इस हमले में रेलवे के दो कर्मचारी घायल हो गए। इसके अलावा, होर्मोजगान प्रांत के बंदर खमीर के पास दो पुलों पर भी हमले किए गए।
स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, इन हमलों में दो लोगों की मौत हो गई। जबकि चार अन्य घायल हुए हैं। नुकसान के बाद बंदर अब्बास, खमीर और लार को जोड़ने वाले प्रमुख सड़क मार्गों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया।
कई इलाकों में धमाके, बिजली प्रभावित
ईरानी मीडिया के अनुसार, क़ेश्म द्वीप, बुशेहर और अहवाज समेत दक्षिणी ईरान के कई हिस्सों में भी विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। तस्नीम न्यूज एजेंसी ने बताया कि बंदर अब्बास में एक मोबाइल टावर भी हमले की चपेट में आया, जिससे बिजली आपूर्ति बाधित हुई और सात लोग घायल हो गए।
ट्रंप ने पहले ही दी थी चेतावनी
इन हमलों से दो दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान बातचीत की मेज पर नहीं लौटता, तो अमेरिका उसके अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा। ‘फॉक्स न्यूज’ को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ईरान के बिजली प्लाटों और पुलों पर भी हमला कर सकता है। उन्होंने कहा, “अगले हफ्ते हालात उनके लिए और खराब होंगे। हम उनके बिजली प्लाटं और पुलों को तबाह कर देंगे, यदि वे बातचीत के लिए तैयार नहीं होते।”
लगातार छठी रात कार्रवाई
शुक्रवार के हमलों के साथ ही अमेरिका ने लगातार छठी रात ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखा है। इस घटनाक्रम के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।
ईजब अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था, तब तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को समुद्री ट्रैफिक के लिए प्रभावी रूप से बंद कर दिया था। इस कदम से तेल, उर्वरक और कई अन्य वस्तुओं की कीमतें न केवल क्षेत्र में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी तेजी से बढ़ गई थीं। इससे वार्ता में ईरान की स्थिति मजबूत हो गई। अमेरिकी जनता को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि युद्ध में अमेरिका का पलड़ा भारी है।
Karnataka Doctor Murder: कर्नाटक के धारवाड़ से एक बेहद सनसनीखेज और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। एक महिला डॉक्टर पर अपने ही डॉक्टर पति की चाकू मारकर हत्या करने और 8 साल के बेटे पर जानलेवा हमला करने का आरोप लगा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि जब परिजन और पुलिस मौके पर पहुंचे, तब आरोपी महिला कथित तौर पर बेड पर लेटी हुई मोबाइल चला रही थी। जबकि पति और बेटा खून से लथपथ पड़े थे। वहां का नजीरा डरावना था। पूरे अपार्टमेंट में खून फैला हुआ था।
डॉक्टर पति की बेरहमी से हत्या
मृतक की पहचान डॉ. किरण होन्नन्नावर (45) के रूप में हुई है। वह धारवाड़ के चिरायु अस्पताल में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ (Anaesthetist) थे। उनकी पत्नी डॉ. प्रियंका कट्टनहल्ली एमबीबीएस और नेत्र रोग विशेषज्ञ (MS Ophthalmology) हैं। महिला पर अपने पति की हत्या का आरोप है। यह घटना बुधवार 15 जुलाई को शहर के एक अपार्टमेंट की छठी मंजिल पर स्थित उनके फ्लैट में हुई। पुलिस के मुताबिक, कपल के 8 वर्षीय बेटे पर भी चाकू से हमला किया गया। बच्चे की सांस चल रही थी। इसके बाद उसे तुरंत निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है।
पुलिस पहुंची तो सामने था खौफनाक मंजर
पड़ोसियों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची तो पूरे फ्लैट में खून फैला हुआ था। एक कमरे में डॉ. किरण का शव पड़ा था। जबकि उनका बेटा गंभीर रूप से घायल था। पुलिस कमिश्नर एन. शशिकुमार ने बताया कि शुरुआती टीम को लगा था कि बच्चा भी मर चुका है। लेकिन उन्होंने उसकी नब्ज जांची तो पता चला कि वह जीवित है। इसके बाद तुरंत उसे अस्पताल भेजा गया, जिससे उसकी जान बचाई जा सकी। महिला डॉक्टर कथित तौर पर बेड पर लेटी मोबाइल स्क्रॉल कर रही थी। इस सीन ने सभी को स्तब्ध कर दिया।
परिजनों को देती रही झूठी जानकारी
जांच में सामने आया है कि मंगलवार रात और बुधवार सुबह जब परिजनों और दोस्तों ने डॉ. किरण को फोन किया, तो उनकी पत्नी प्रियंका ने कॉल उठाकर कहा कि वह आराम कर रहे हैं। बाद में उसने यह भी कहा कि वह ड्यूटी पर गए हैं। लेकिन जब लंबे समय तक संपर्क नहीं हुआ तो बुधवार शाम परिजन फ्लैट पहुंचे। दरवाजा खुलने पर उन्होंने अंदर का भयावह सीन देखा। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि घटना के समय घर में कोई बाहरी व्यक्ति मौजूद था। फ्लैट के अंदर केवल पति, पत्नी और बेटा ही थे। फिलहाल, मामले की जांच सभी एंगल से चल रही है।
US-Iran War Update: पश्चिम एशिया में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रूट्स में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अपनी ‘अटूट रेड लाइन’ (unbreakable red line) घोषित करते हुए अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। तेहरान ने साफ कहा है कि यदि अमेरिका ने इस रणनीतिक जलमार्ग में किसी भी तरह का हस्तक्षेप किया तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका लगातार पांचवीं रात ईरान पर हवाई हमले कर चुका है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान युद्ध छोड़ बातचीत की मेज पर नहीं लौटता तो उसके बिजली प्लांटों और प्रमुख पुलों को भी निशाना बनाया जा सकता है।
क्या है ईरान की ‘रेड लाइन’?
एक वरिष्ठ ईरानी सैन्य अधिकारी के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी दखल किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। अधिकारी ने कहा कि यह ईरान की ‘अटूट रेड लाइन’ है। इसे पार करने की कोशिश गंभीर परिणाम ला सकती है। ईरान पहले भी कह चुका है कि जब तक अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई नहीं रोकता, तब तक होर्मुज को बंद रखने का विकल्प उसके पास मौजूद है।
दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रूट माना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला वैश्विक कच्चे तेल और एलएनजी (Liquefied Natural Gas) का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यदि यहां आवाजाही प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है और कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
दुनिया का लगभग 20% पेट्रोलियम (करीब 20 मिलियन बैरल प्रतिदिन) और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का एक बड़ा हिस्सा रोजाना इसी रास्ते से होकर गुजरता है। हालांकि, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों ने इस रास्ते से बचने के लिए जमीनी पाइपलाइनें बनाई हैं। लेकिन वे कुल तेल का केवल एक छोटा हिस्सा ही ले जा सकती हैं। खाड़ी देशों के अधिकांश तेल निर्यात के पास इस जलमार्ग के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।
अमेरिका ने तेज किए हमले
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी सेना ने बंदर अब्बास समेत कई स्थानों पर ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना है जिससे वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकता है। इससे पहले ग्रेटर तुंब द्वीप पर तटीय रक्षा ठिकानों और क्रूज मिसाइल साइटों पर भी हमले किए गए थे।
ईरान में कई जगह धमाके
ईरानी मीडिया के मुताबिक, हालिया हमलों का दायरा पहले की तुलना में कहीं ज्यादा व्यापक रहा। उत्तरी ईरान के सेमनान एयरपोर्ट के पास एक प्रोजेक्टाइल गिरा। जबकि लोरेस्तान प्रांत में भी विस्फोटों की खबरें सामने आईं। राजधानी तेहरान के आसपास एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए। वहीं, खुजेस्तान प्रांत के अहवाज क्षेत्र में एक बच्चों के कैंसर अस्पताल के पास भी हमले की सूचना मिली, जिसकी ईरान ने कड़ी निंदा की है।
35 लोगों की मौत, 300 से ज्यादा घायल
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, हालिया अमेरिकी हमलों में कम से कम 35 लोगों की मौत हुई है। जबकि 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। स्थानीय लोगों ने लगातार हो रहे धमाकों से दहशत का माहौल बताया है।
ईरान की पलटवार की धमकी
अमेरिका की कार्रवाई के जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि हमले जारी रहे तो केवल होर्मुज जलडमरूमध्य ही नहीं। बल्कि पूरे क्षेत्र में अमेरिकी हितों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। ईरानी सेना ने कहा कि अगर अमेरिका आगे बढ़ता है तो क्षेत्र का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर ईरानी सशस्त्र बलों के जवाबी हमलों की जद में आ सकता है।
खाड़ी देशों पर भी बढ़ा खतरा
ईरान की सेना रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उन्होंने जवाबी कार्रवाई में जॉर्डन स्थित अमेरिकी एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। वहीं, जॉर्डन ने कई मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने का दावा किया है। कुवैत ने ड्रोन गिराने की जानकारी दी। जबकि बहरीन में एयर रेड सायरन बजाए गए। इराक के एरबिल क्षेत्र में भी विस्फोटक ड्रोन को रोके जाने की खबर सामने आई है।
कूटनीतिक रास्ता अभी पूरी तरह बंद नहीं
हालांकि, दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव चरम पर है। लेकिन कूटनीतिक प्रयास पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। पाकिस्तान ने दोनों पक्षों से बातचीत फिर शुरू करने की अपील की है। वहीं, ईरान ने संकेत दिया है कि यदि उसे किसी समझौते का लाभ नहीं मिलता तो वह उस पर कायम रहने का कोई कारण नहीं देखता। उधर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोहराया कि यदि ईरान जल्द बातचीत के लिए तैयार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
दुनिया पर क्या होगा असर?
यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ता है या वहां जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार, पेट्रोल-डीजल की कीमतों, समुद्री व्यापार और पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह टकराव केवल क्षेत्रीय नहीं। बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ी चिंता बनता जा रहा है।
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