Sunil Pal: ‘हनुमान अंश’ ने 500 करोड़ कमाए, आपकी फिल्में 50 करोड़ भी नहीं कमा पाती, सुनील पाल ने सलमान खान पर कसा तंज

Sunil Pal: बॉलीवुड एक्टर सलमान खान ने हाल ही में सोशल मीडिया पर सेलेब्रिटीज के लुक और काम को लेकर उन्हें ट्रोल किए जाने पर अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने उन लोगों की भी आलोचना की, जो पसंद का काम न होने पर एक्टर्स को अपशब्द कहते हैं। वहीं ‘बिग बॉस 20 वीकेंड का वार’ के दौरान बच्चे के जन्म के बाद बढ़े वजन को लेकर हो रही ट्रोलिंग के बीच कैटरीना कैफ का बचाव किया। अब कॉमेडियन सुनील पाल ने सलमान की इस तीखी प्रतिक्रिया पर अपनी बात रखी है और एक्टर को ही “ट्रोल” किया है, साथ ही शो को “गटर” भी कहा है।

सुनील पाल ने क्या कहा?

सुनील को हाल ही में एक कार्यक्रम में देखा गया, जहां उन्होंने पैपराजी से बातचीत की। सेलिब्रिटी ट्रोलिंग पर सलमान के कमेंट के बारे में पूछे जाने पर कॉमेडियन ने कहा, “हमने सलमान खान को बनाया। सलमान खान ने हमें नहीं बनाया। सलमान खान आज हम सभी की वजह से, भारत के लोगों की वजह से स्टार हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि हमने उनकी बहुत सारी फिल्में देखी हैं।

सलमान खान, शाहरुख खान, सब लोग सबक ले लीजिये, आप लोगों का टाइम पास बहुत ज्यादा चल रहा है। हनुमान अंश से 500 करोड़ कमाए जो 2 करोड़ में बनी है और 500 करोड़ की फिल्म 50 करोड़ भी नहीं कमा पा रही है। शरम आनी चाहिए आपको।

उन्होंने आगे कहा- “आप इतने बड़े स्टार हैं कि आपने कॉर्पोरेट और इंडस्ट्री पर कब्जा कर लिया है और छोटे लोग फिल्में नहीं बना पा रहे हैं। भगवान हनुमान और नीम करौली बाबा की कृपा से ‘हनुमान अंश’ इतनी कमाई कर पाई।” सुनील ने सलमान से ‘बिग बॉस’ बंद करने को भी कहा और इसे “गटर शो” बताया। उन्होंने कहा कि इस शो में ऐसे सेलिब्रिटी आते हैं, जो देश के लिए “बड़ा नुकसान” हैं और शो उन्हें स्टार बना देता है।

सलमान खान ने क्या कहा?

‘वीकेंड का वार’ के दौरान, सलमान ने इस बारे में बात की कि कैसे सोशल मीडिया पर सेलिब्रिटीज़ को उनके लुक को लेकर ट्रोल किया जाता है। होस्ट ने बताया कि सोशल मीडिया पर “बूढ़ा” कहे जाने के बाद उन्हें भी ऐसी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा था और कुछ लोगों ने उनके नए गंजे लुक का मजाक भी उड़ाया था। एक्टर ने कैटरीना कैफ के प्रेग्नेंसी के बाद बढ़े वजन को लेकर उन्हें ट्रोल करने वालों को भी जवाब दिया और कहा, “प्रेग्नेंसी के बाद हर किसी का वजन बढ़ता है। जब वह फिल्मों में वापसी करेंगी तो वह फिर से शेप में आ जाएंगी। वह अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहती हैं।”

बॉडी-शेमिंग करने वाले ट्रोलर्स के जवाब में उन्होंने शो पर अपनी शर्ट उतार दी और दूसरों को नीचा दिखाकर पैसे कमाने वालों की आलोचना करते हुए उन्हें पैरासाइट कहा। होस्ट ने उन एक्टर्स का भी बचाव किया, जो राजनीतिक मुद्दों पर बात नहीं करते और पैपराजी कल्चर की आलोचना की। उन्होंने महिला एक्टर्स की गलत तस्वीरें लेने के लिए पैपराजी की आलोचना की और महिलाओं को सलाह दी कि अगर उन्हें असहज महसूस हो तो वे फोटोग्राफर्स को थप्पड़ मार दें। वरुण धवन, नेहा धूपिया और रोहित शेट्टी समेत कई सेलिब्रिटीज़ ने सेलिब्रिटी ट्रोलिंग पर सलमान के रुख का समर्थन किया।

72nd National Film Awards: कार्तिक आर्यन से लेकर यामी गौतम तक…जानें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स 2026 में किसे मिला कौन सा अवॉर्ड, देखें पूरी लिस्ट

72nd National Film Awards: भारतीय सिनेमा के लिए 72वें राष्ट्रीय फिल्म अवॉर्ड्स का दिन खास रहा। देशभर की फिल्मों और कलाकारों को उनके बेहतरीन काम के लिए सम्मान मिला। इस बार ‘आर्टिकल 370’ और यामी गौतम से लेकर मम्मूटी, कार्तिक आर्यन और राजकुमार पेरियासामी तक कई बड़े नाम पुरस्कार जीत रहे हैं। अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों ने भी अपनी खास जगह बनाई है। वहीं, दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है। समारोह में अभिनय के साथ-साथ संगीत, निर्देशन, सिनेमैटोग्राफी, एक्शन और तकनीकी काम के लिए भी कई कलाकारों को पुरस्कार मिले हैं।

‘आर्टिकल 370’ का दबदबा, यामी गौतम को मिला सम्मान

इस साल के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में बड़ी उपलब्धि दर्ज कर रही है। फिल्म को बेस्ट फीचर फिल्म का पुरस्कार मिला है। इसी फिल्म में प्रभावशाली अभिनय के लिए यामी गौतम बेस्ट एक्ट्रेस इन अ लीडिंग रोल का सम्मान हासिल किया। फिल्म की सफलता यहीं नहीं रुकती। इसके संगीत के लिए शाश्वत सचदेव को बेस्ट म्यूजिक डायरेक्शन (सॉन्ग्स) का पुरस्कार मिला है। यानी फिल्म कहानी, अभिनय और संगीत तीनों मोर्चों पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है।

मम्मूटी और कार्तिक आर्यन को भी मिला सम्मान

अभिनय के मैदान में इस बार दो बड़े नाम एक साथ चमक रहे हैं। मम्मूटी को Bramayugam और कार्तिक आर्यन को Chandu Champion में उनके प्रदर्शन के लिए बेस्ट एक्टर इन अ लीडिंग रोल का पुरस्कार साझा रूप से मिला है। Bramayugam को सिनेमैटोग्राफी के लिए भी सम्मान मिला है, जहां शेहनाद जलाल बेस्ट सिनेमैटोग्राफी का पुरस्कार मिला।

‘अमरन’ के निर्देशक राजकुमार पेरियासामी को निर्देशन सम्मान

तमिल फिल्म Amaran के निर्देशक राजकुमार पेरियासामी बेस्ट डायरेक्शन का पुरस्कार मिला है। फिल्म के लिए जी. वी. प्रकाश कुमार को बेस्ट म्यूजिक डायरेक्शन (बैकग्राउंड म्यूजिक) का सम्मान भी मिल रहा है। वहीं, Swatantrya Veer Savarkar के लिए रणदीप हुड्डा को बेस्ट डेब्यू फिल्म ऑफ अ डायरेक्टर का पुरस्कार मिल रहा है।

सपोर्टिंग कलाकारों ने भी छोड़ी छाप

संजय मिश्रा को Bhakshak में उनके अभिनय के लिए बेस्ट एक्टर इन अ सपोर्टिंग रोल का सम्मान मिल रहा है। बेस्ट एक्ट्रेस इन अ सपोर्टिंग रोल का पुरस्कार महराजा की सचाना नामिदास और कन्नड़ फिल्म Mithya की रोपाश्री वरकडी साझा कर रही हैं।

Maharaja को एक्शन के लिए भी पहचान मिली है और अनल अरासु बेस्ट एक्शन डायरेक्शन का पुरस्कार हासिल किया हैं।

‘Kalki 2898 AD’, ‘Stree 2’ और ‘Pushpa 2’ भी छाए

बड़े बजट की चर्चित फिल्मों में को बेस्ट पॉपुलर फिल्म प्रोवाइडिंग व्होलसम एंटरटेनमेंट का सम्मान मिला है। फिल्म के प्रोडक्शन डिजाइन के लिए नितिन जिहानी चौधरी को भी पुरस्कार मिल। Stree 2 के गाने Aaj Ki Raat की कोरियोग्राफी के लिए विजय गांगुली सम्मानित किया गया है, जबकि Bhool Bhulaiyaa 3 को बेस्ट साउंड डिजाइन का पुरस्कार मिला है।

Pushpa: The Rule Part 2 के लिए सुकुमार को बेस्ट ओरिजिनल स्क्रीनप्ले और दीपली नूर व शीतल शर्मा को साझा रूप से बेस्ट कॉस्ट्यूम डिजाइन का सम्मान मिला है।

अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों का भी जलवा

क्षेत्रीय सिनेमा की बात करें तो Srikanth को बेस्ट हिंदी फिल्म, Raayan को बेस्ट तमिल फिल्म, Committee Kurrollu को बेस्ट तेलुगु फिल्म, Feminichi Fathima को बेस्ट मलयालम फिल्म और Mithya को बेस्ट कन्नड़ फिल्म का सम्मान मिला। वहीं Chalchitra Ekhon को बेस्ट बंगाली फिल्म और Mukkam Post Bombilwadi को बेस्ट मराठी फिल्म चुना गया।

अनंत नाग को मिला सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान

इस समारोह का एक बेहद भावुक और गौरवपूर्ण पल दिग्गज अभिनेता अनंत नाग से जुड़ा है। भारतीय सिनेमा में उनके लंबे योगदान के लिए उन्हें 2024 का दादासाहेब फाल्के पुरस्कार  दिया गया।

Hanuman Ansh Box Office: बॉक्स ऑफिस पर नहीं थम रहा ‘हनुमान अंश’का जलवा, दुनियाभर में हुई 350 करोड़ से ज्यादा की कमाई

Hanuman Ansh: ‘हनुमान अंश’ की टीम ने दिल्ली में HM अमित शाह से की मुलाकात, 300 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है फिल्म

Hanuman Ansh: बॉक्स ऑफिस पर ‘हनुमान अंश’ ने शानदार कमाई की है। इस सफलता के बाद फिल्म की टीम ने सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात की। इस मुलाकात में फिल्म के डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी और लीड एक्टर शोभिनव सत्या भी मौजूद थे।

अमित शाह से की मुलाकात

जानकारी के मुताबिक बातचीत के दौरान गृह मंत्री ने नीम करोली बाबा के बारे में बहुत सम्मानीय बातें कीं। वहीं उन्होंने भारतीय संस्कृति व परंपराओं के बारे में अपनी जानकारी साझा की। उन्होंने फिल्म बनाने वालों को भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी कहानियों को पर्दे पर लाने का काम जारी रखने के लिए प्रोत्साहित भी किया।

‘रामबोला’ के बारे में दी जानकारी

विशाल के साथ प्रोड्यूसर महावीर जैन भी अमित शाह से मिलने पहुंचे थे, जिन्होंने शाह को उनके अगले प्रोजेक्ट ‘रामबोला’ के बारे में बताया। रामबोला फिल्म गोस्वामी तुलसीदास के जीवन और विरासत पर आधारित है।” ‘रामबोला’ का ऐलान इसी महीने की शुरुआत में किया गया था। इसे विशाल चतुर्वेदी लिखेंगे और डायरेक्ट करेंगे। वहीं महावीर इसके को-प्रोड्यूसर होंगे।

इन लोगों से भी हो चुकी है मुलाकात

इससे पहले ‘हनुमान अंश’ की टीम कई प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों से भी मुलाकात कर चुकी है। इसी महीने की शुरुआत में टीम ने लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। इसके बाद मुंबई में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी उनके आधिकारिक आवास ‘वर्षा’ पर मुलाकात की थी।

7 अगस्त को रिलीज हुई ‘हनुमान अंश’ इस साल की सबसे बड़ी सरप्राइज थिएट्रिकल सफलताओं में से एक बनकर उभरी है। लगभग ₹2 करोड़ के बजट में बनी यह फिल्म शुरुआत में धीमी रही, लेकिन लोगों की बातचीत (वर्ड ऑफ माउथ) से इसे गति मिली और चौथे हफ्ते से इसमें जबरदस्त उछाल आया। इसने दुनिया भर में ₹300 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है।

‘हनुमान अंश’ का जलवा बरकरार, 45वें दिन 13.75 करोड़ की कमाई से बॉक्स ऑफिस पर मचाई हलचल!

हनुमान अंश की कमाई ने सातवें हफ्ते में भी रफ्तार पकड़ी हुई है और फिल्म अब 350 करोड़ के आंकड़े के पहुंची करीब

विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी आध्यात्मिक ड्रामा फिल्म ‘हनुमान अंश’ बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद से ज्यादा लंबी पारी खेलती नजर आ रही है। रिलीज के कई हफ्ते बीतने के बाद भी फिल्म को दर्शकों का साथ मिल रहा है। रविवार को इसकी कमाई में अच्छी बढ़त देखने को मिली, जिससे अब फिल्म की नजर एक बड़े वर्ल्डवाइड आंकड़े पर है।

रविवार को कमाई में आया बड़ा उछाल

ट्रेड वेबसाइट सैकनिल्क के मुताबिक, फिल्म ने 20 सितंबर यानी 45वें दिन भारत में 7,628 शो से 13.75 करोड़ रुपये नेट कमाए। इससे एक दिन पहले यानी 44वें दिन फिल्म की कमाई 9.75 करोड़ रुपये थी। यानी रविवार को घरेलू कारोबार में करीब 41 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। भारत में फिल्म का कुल नेट कलेक्शन अब 271.88 करोड़ रुपये हो गया है।

वर्ल्डवाइड कलेक्शन 347 करोड़ के पार

भारत के अलावा फिल्म को विदेशी बाजारों से भी कमाई हो रही है। 45वें दिन फिल्म ने विदेशों से करीब 1.50 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया। इसका ओवरसीज ग्रॉस अब 26 करोड़ रुपये हो चुका है। भारत और विदेशों की कमाई मिलाकर फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 347.05 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

सातवें हफ्ते में लगातार बढ़ी कमाई

फिल्म की हालिया कमाई पर नजर डालें तो पिछले तीन दिनों में लगातार तेजी देखने को मिली है। 43वें दिन फिल्म ने 5 करोड़ रुपये नेट कमाए थे। इसके बाद शनिवार को कमाई बढ़कर 9.75 करोड़ रुपये हुई और रविवार को यह आंकड़ा 13.75 करोड़ रुपये पहुंच गया। यानी सातवें हफ्ते में भी फिल्म की रफ्तार धीमी पड़ने के बजाय बढ़ती नजर आई।

शाम के शो में सबसे ज्यादा ऑक्यूपेंसी

45वें दिन हिंदी 2D वर्जन की कुल ऑक्यूपेंसी 45.46 प्रतिशत रही। शाम के शो दर्शकों से सबसे ज्यादा भरे रहे, जहां 62.23 प्रतिशत ऑक्यूपेंसी दर्ज हुई। दोपहर के शो में 54.54 प्रतिशत, रात में 37.23 प्रतिशत और सुबह के शो में 27.85 प्रतिशत ऑक्यूपेंसी रही।

नीम करौली बाबा की कहानी पर आधारित है फिल्म

‘हनुमान अंश’ की कहानी नीम करौली बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा से प्रेरित है। फिल्म में लक्ष्मी नारायण नाम के एक युवा की कहानी दिखाई गई है, जो अपनी मां को खोने के बाद ईश्वर की तलाश में घर छोड़ देता है। उत्तर भारत के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा और कई अनुभवों के बाद उसकी जिंदगी धीरे-धीरे आध्यात्मिक दिशा में आगे बढ़ती है। फिल्म में शोभिनव सत्या और विहान शेडगे मुख्य भूमिकाओं में हैं।

लंबे समय तक सिनेमाघरों में टिके रहने के साथ ‘हनुमान अंश’ ने अपने कारोबार में एक खास मोड़ हासिल किया है। अब फिल्म की आगे की कमाई इस बात पर निर्भर करेगी कि आने वाले दिनों में दर्शकों की दिलचस्पी कितनी बनी रहती है और सिनेमाघरों में इसे कितने शो मिलते हैं।

Hanuman Ansh Box Office Collection Day 44: ‘हनुमान अंश’ ने भारत में 300 करोड़ रुपये का आंकड़ा किया पार, जानें कितना हुआ कलेक्शन

Hanuman Ansh Box Office Collection Day 44: ‘हनुमान अंश’ का शानदार थिएट्रिकल रन जारी है। फिल्म की कमाई में सातवें शनिवार को काफी बढ़ोतरी देखी गई। सैक्निलक (Sacnilk) के अनुसार शोभिनव सत्या और चंदन आनंद स्टारर इस फिल्म ने भारत में 44वें दिन 9.75 करोड़ रुपये (नेट) कमाए।

यह लेटेस्ट कलेक्शन फिल्म की 43वें दिन की 5 करोड़ रुपये की कमाई के मुकाबले 95% ज्यादा है। इस नई कमाई के साथ ‘हनुमान अंश’ का भारत में कुल नेट कलेक्शन 44 दिनों में 258.13 करोड़ रुपये हो गया है। शनिवार, 19 सितंबर को पूरे भारत में फिल्म के 7,119 शो हुए। इसकी कुल ऑक्यूपेंसी 30% रही और दिन चढ़ने के साथ दर्शकों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई।

सुबह के शो में 14% ऑक्यूपेंसी रही, जबकि दोपहर के शो में 32.62% ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई। शाम के शो में 42.23% ऑक्यूपेंसी रही और रात के शो में सबसे ज़्यादा 45% ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई। रिपोर्ट किए गए शो-वाइज आंकड़ों के अनुसार लिस्ट किए गए समय पर कुल ऑक्यूपेंसी 33.46% रही।

‘हनुमान अंश’ के शुक्रवार, 18 सितंबर को 6,462 शो हुए थे, जिसमें 18% ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई और 5 करोड़ रुपये की कमाई हुई। फिल्म ने विदेशी बाजारों में भी अपनी रफ्तार बनाए रखी है। ‘हनुमान अंश’ ने 44वें दिन विदेशों से 1.50 करोड़ रुपये कमाए, जिससे इसकी कुल विदेशी ग्रॉस कमाई 24.50 करोड़ रुपये हो गई।

इसकी भारत में ग्रॉस कमाई अभी 304.80 करोड़ रुपये है। विदेशी ग्रॉस कमाई को मिलाकर फिल्म का दुनिया भर में कलेक्शन 329.30 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

‘हनुमान अंश’ किस बारे में है?

‘हनुमान अंश’ ‘डिवाइन डिटूर दैट चेंज्ड माई लाइफ़’ (Divine Detour: That Changed My Life) पर आधारित है और नीम करौली बाबा के जीवन से प्रेरित है। आजादी से पहले के भारत पर आधारित यह फिल्म लक्ष्मी नारायण नाम के एक युवा लड़के की कहानी है, जो अपनी मां को खो देता है और फिर भगवान की तलाश में घर छोड़ देता है।

उसका सफर उसे उत्तरी भारत के अलग-अलग हिस्सों में ले जाता है, जहां कई तरह के अनुभव आखिरकार उसकी जिंदगी बदल देते हैं और उसे नीम करौली बाबा बनने की ओर ले जाते हैं। शोभिनव सत्या और चंदन आनंद इस फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में हैं। कास्ट में अनिल रस्तोगी, सुगंधा मल्होत्रा, भगवानदास पटेल और नेहा परांजपे भी शामिल हैं।

Hanuman Ansh: सीएम देवेंद्र फडणवीस ने अपने आवास पर ‘हनुमान अंश’ की टीम से मुलाकात की, शेयर किया वीडियो

Hanuman Ansh: ‘हनुमान अंश’ बॉक्स ऑफिस पर लगातार धूम मचा रही है। भले ही फिल्म की शुरुआत धीमी रही, लेकिन दूसरे वीक में इसने रफ्तार पकड़ी तब से यह सारे रिकॉर्ड तोड़ रही है। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की इस कामयाबी के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई में अपने आवास ‘वर्षा’ पर ‘हनुमान अंश’ की टीम से मुलाकात की।

टीम के साथ मुलाकात के बाद CM फडणवीस ने एक वीडियो शेयर किया और दिल से एक नोट लिखा। मुलाकात का वीडियो शेयर करते हुए फडणवीस ने लिखा- “कल शाम गणपति बप्पा का आशीर्वाद लेने के लिए ‘हनुमान अंश’ की टीम का ‘वर्षा’ में स्वागत करना बहुत अच्छा लगा। विशाल चतुर्वेदी और उनकी टीम को उनके शानदार काम के लिए बधाई दी और उनके सभी प्रयासों में और सफलता की कामना की!”

सैक्निलक (Sacnilk) के अनुसार ‘हनुमान अंश’ ने 43वें दिन भारत में 5 करोड़ रुपये की कमाई की, जिससे इसका भारत में नेट कलेक्शन 248.38 करोड़ रुपये हो गया। फिल्म ने शुक्रवार को कुल मिलाकर 18.72% ऑक्यूपेंसी दर्ज की, जिसमें नाइट शो में सबसे ज्यादा 27.08% ऑक्यूपेंसी रही। फिल्म ने 43वें दिन विदेशी बाजारों से भी 1.25 करोड़ रुपये कमाए, जिससे इसका विदेशी ग्रॉस कलेक्शन 23 करोड़ रुपये हो गया। इसका भारत में ग्रॉस कलेक्शन 293.30 करोड़ रुपये है, जिससे इसका वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 316.30 करोड़ रुपये हो गया है।

अपने छठे वीक में, ‘हनुमान अंश’ ने भारत में 80.25 करोड़ रुपये की कमाई की। इसने 36वें दिन 10.50 करोड़ रुपये, 37वें दिन 18.50 करोड़ रुपये और 38वें दिन 22.50 करोड़ रुपये कमाए। इसके बाद 39वें और 40वें दिन 8.25-8.25 करोड़ रुपये, 41वें दिन 6 करोड़ रुपये और 42वें दिन 6.25 करोड़ रुपये की कमाई की।

‘हनुमान अंश’ विशाल चतुर्वेदी की किताब ‘डिवाइन डिटूर दैट चेंज्ड माई लाइफ’ (Divine Detour: That Changed My Life) पर आधारित है। यह फिल्म नीम करौली बाबा के जीवन पर बनी है। फिल्म में शोभिनव सत्या और चंदन आनंद मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म आजादी से पहले के भारत में रहने वाले लक्ष्मी नारायण नाम के एक युवा लड़के की कहानी है, जो अपनी मां की मौत के बाद भगवान की तलाश में घर छोड़ देता है। उत्तर भारत की उनकी यात्रा उन्हें अंतत नीम करौली बाबा के रूप में बदल देती है। फिल्म की कास्ट में अनिल रस्तोगी, सुगंधा मल्होत्रा, भगवानदास पटेल और नेहा परांजपे भी शामिल हैं।

यह फिल्म 7 अगस्त, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी और यह एक नियोजित ट्राइलॉजी की पहली फिल्म है। इस फिल्म को विशाल चतुर्वेदी ने अपने बैनर, स्वयंभू मीडिया नेटवर्क के तहत लिखा, निर्देशित और प्रोड्यूस किया है।

Hanuman Ansh Box Office Collection Day 43: ‘हनुमान अंश’ का सातवें शुक्रवार को भी जलवा कायम, 43वें दिन करोड़ों में कमाई, बॉक्स ऑफिस कलेक्शन हैरान कर देगा

Hanuman Ansh Box Office Collection Day 43: ‘हनुमान अंश’ का बॉक्स ऑफिस पर जलवा बरकरार है। यह लंबे समय से सिनेमाघरों में चल रही है। फिल्म ने अपनी जर्नी में एक और मुकाम हासिल किया है, जिसके तहत 43वें दिन के नए आंकड़े सामने आए हैं।

‘हनुमान अंश’ बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 43वां दिन

43वें दिन, ‘हनुमान अंश’ ने 16.0% ऑक्यूपेंसी के साथ 5,220 शो से 5 करोड़ की कमाई की। Sacnilk की रिपोर्ट के अनुसार भारत में इसका कुल नेट कलेक्शन ₹248.38 करोड़ और ग्रॉस कलेक्शन ₹293.30 करोड़ है। नए आंकड़े अभी भी अपडेट किए जा रहे हैं।

फिल्म के हिंदी वर्शन ने 43वें दिन कुल 15.72% ऑक्यूपेंसी दर्ज की। मॉर्निंग शो में 8.00% ऑक्यूपेंसी रही, इसके बाद दोपहर में 16.38% और रात को 27.8% ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई। फिल्म लगातार बेहद अच्छा परफॉम कर रही है। वहीं वर्ल्डवाइड कलेक्शन की बात करें तो फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 316.30 करोड़ हो चुका है।

बीक वाइज कलेक्शन

Sacnilk के अनुसार ‘हनुमान अंश’ ने पहले दिन ₹10 लाख से शुरुआत की और पहला हफ्ता ₹1.08 करोड़ के कलेक्शन के साथ खत्म किया। इसने दूसरे वीक में ₹40 लाख और तीसरे वीक में ₹10.40 करोड़ जोड़े। फिल्म ने चौथे हफ्ते में ₹61 करोड़, पांचवें हफ्ते में ₹90.25 करोड़ और छठे हफ्ते में ₹80.25 करोड़ का कलेक्शन किया। सातवें हफ्ते में प्रवेश करते हुए, ‘हनुमान अंश’ ने अब तक 43वें दिन ₹2.60 करोड़ की कमाई की है।

‘हनुमान अंश’ के बारे में

विशाल चतुर्वेदी द्वारा लिखित और निर्देशित, ‘हनुमान अंश’ एक आध्यात्मिक ड्रामा है जो नीम करौली बाबा (जिन्हें महाराज जी के नाम से भी जाना जाता है) के जीवन और शिक्षाओं से प्रेरित है। शोभिनव सत्या ने नीम करौली बाबा की भूमिका निभाई है, जबकि विहान शेडगे ने बचपन का किरदार निभाया है। फिल्म की कास्ट में चंदन आनंद, पूर्णिमा तिवारी, अनिल के. रस्तोगी और गुलशन पांडे भी शामिल हैं। यह फिल्म भारत में 7 अगस्त, 2026 को रिलीज हुई थी।

आस्था का कारोबार, सिनेमा की जीत: ‘हनुमान अंश’

कभी-कभी कोई फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलती, वह समाज के भीतर चलती है। ‘हनुमान अंश’ के साथ कुछ ऐसा ही होता हुआ दिखाई देता है। लगभग दो करोड़ की लागत से बनी यह फ़िल्म तीन सौ करोड़ से ज़्यादा का वैश्विक कारोबार कर चुकी है। लेकिन इस वाक्य में सबसे महत्वपूर्ण शब्द दो करोड़ या तीन सौ करोड़ नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण शब्द है, दर्शक।

‘हनुमान अंश’ की तीन सौ करोड़ से ज़्यादा की यात्रा को सिर्फ़ एक फ़िल्म की सफलता की तरह देखना शायद उसके साथ नाइंसाफ़ी होगी। यह उस दर्शक की कहानी भी है जो तेज़ी से बदलती दुनिया में किसी स्थिर, भरोसेमंद और आत्मीय चीज़ की तलाश में है। लेकिन क्या सिनेमा उसे सिर्फ़ विश्वास दे या विश्वास के भीतर सवाल करने की जगह भी?

कभी-कभी कोई फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलती, वह समाज के भीतर चलती है। ‘हनुमान अंश’ के साथ कुछ ऐसा ही होता हुआ दिखाई देता है। लगभग दो करोड़ की लागत से बनी यह फ़िल्म तीन सौ करोड़ से ज़्यादा का वैश्विक कारोबार कर चुकी है। लेकिन इस वाक्य में सबसे महत्वपूर्ण शब्द दो करोड़ या तीन सौ करोड़ नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण शब्द है, दर्शक। वह दर्शक, जिसने शुरुआत में इस फ़िल्म को शायद कोई बड़ी सिनेमाई घटना नहीं माना। जिसने फिर किसी दोस्त से इसके बारे में सुना। किसी परिवार के सदस्य ने कहा, “एक बार देखना”। किसी सोशल मीडिया पोस्ट ने उत्सुकता जगाई। किसी ने फ़िल्म देख कर अपनी अनुभूति साझा की। और धीरे-धीरे एक फ़िल्म, फ़िल्म से बढ़ कर एक अनुभव बन गई।

यही सिनेमा की सबसे पुरानी और सबसे ताक़तवर मार्केटिंग है, किसी दूसरे इंसान का विश्वास। और इसलिए ‘हनुमान अंश’ को समझने के लिए हमें आज से नहीं, 1975 से शुरुआत करनी चाहिए। ‘जय संतोषी मां’। एक ऐसी फ़िल्म, जिसने उस दौर में धार्मिक सिनेमा को सिर्फ़ एक जॉनर नहीं रहने दिया, बल्कि उसे सामूहिक आस्था के अनुभव में बदल दिया। कई जगह दर्शक सिनेमाघर में फ़िल्म देखने नहीं, मानो दर्शन करने जाते थे। फूल चढ़ते थे, आरती होती थी, और फ़िल्म का पर्दा कुछ समय के लिए पूजा और सिनेमा के बीच की सीमा को धुंधला कर देता था।

सोचिए, 1975 का भारत। न सोशल मीडिया था, न इंस्टाग्राम, न यूट्यूब, न डिजिटल मार्केटिंग। लेकिन वर्ड ऑफ़ माउथ था। मोहल्ला था। परिवार था। भरोसा था। आज 51 साल बाद तकनीक बदल गई है। दर्शक की जेब में पूरा मीडिया संसार आ गया है। लेकिन मनुष्य की कुछ ज़रूरतें शायद उतनी नहीं बदलीं। उसे अभी भी उम्मीद चाहिए। उसे अभी भी किसी ऐसी कहानी की ज़रूरत है जो कहे कि अंधेरे के बाद उजाला होता है। उसे अभी भी किसी ऐसे पात्र की तलाश होती है जिसके सामने वह अपने निजी दुःख, अपनी असुरक्षा और अपनी असमर्थता रख सके। और शायद यही वह जगह है जहां आस्था सिनेमा से मिलती है।

हम अक्सर पूछते हैं कि लोग धार्मिक फ़िल्में क्यों देख रहे हैं? मुझे लगता है, हमें इसके उलट सवाल पूछना चाहिए। आज के समय में लोगों को ऐसी फ़िल्मों की ज़रूरत क्यों महसूस हो रही है? हम एक ऐसे समय में हैं जहां जानकारी की कोई कमी नहीं है, लेकिन निश्चितता की बहुत कमी है। हमारे पास हर सवाल का उत्तर खोजने के लिए गूगल है, लेकिन हर बेचैनी का उत्तर नहीं है। हमारे पास दुनिया से जुड़े रहने के लिए सोशल मीडिया है, लेकिन अपने भीतर टिके रहने का हुनर कम होता जा रहा है। हमारे पास विकल्प बहुत हैं, लेकिन शांति कम है। ऐसे समय में आस्था एक भावनात्मक आश्रय बन सकती है। इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है।

मनुष्य जब अनिश्चितता से घिरता है, तो वह अर्थ खोजता है। कभी दर्शन में। कभी प्रेम में। कभी कला में। कभी राजनीति में। और कभी ईश्वर में। इसलिए किसी धार्मिक फ़िल्म के दर्शक को पिछड़ा हुआ, अंधविश्वासी या अविवेकी मान लेना शायद सबसे आसान और सबसे ग़लत रास्ता होगा। वह दर्शक भी हमारी तरह ही जटिल है। वह मंदिर भी जाता है और अस्पताल भी। वह भगवान से प्रार्थना भी करता है और डॉक्टर की रिपोर्ट भी देखता है। वह अपने बच्चे को विज्ञान पढ़ाता है और घर में पूजा भी करता है। भारत की असली कहानी शायद इसी सह अस्तित्व में है। और इसलिए असली सवाल यह नहीं है कि आस्था हो या तर्क। सवाल यह है कि क्या आस्था और तर्क साथ रह सकते हैं? मेरे लिए जवाब होना चाहिए, हां।

भारतीय परंपरा की एक बड़ी खूबी यही रही है कि यहां प्रश्न पूछने की परंपरा भी उतनी ही पुरानी है जितनी प्रार्थना की। उपनिषदों में संवाद हैं। बुद्ध के सामने प्रश्न हैं। कबीर के यहां सवाल हैं। नानक की वाणी में जिज्ञासा है। हमारी आध्यात्मिक परंपरा ने हमेशा मनुष्य को सिर्फ़ सिर झुकाना नहीं सिखाया; कई बार उसने सिर उठाकर देखने को भी कहा है। फिर सिनेमा क्यों न पूछे? यहीं ‘हनुमान अंश’ मेरे लिए एक दिलचस्प फ़िल्म बन जाती है। एक संत की कहानी को पर्दे पर उतारना अपने आप में मुश्किल काम है। क्योंकि संत के जीवन में चमत्कार दिखाना आसान है, लेकिन उनकी मनुष्यता दिखाना मुश्किल। चमत्कार आंखों को आकर्षित करता है। मनुष्यता दिल में ठहरती है।

अगर किसी संत की पूरी सिनेमाई यात्रा सिर्फ़ इस बात पर टिकी हो कि उन्होंने कितने चमत्कार किए, तो हम शायद उनके सबसे बड़े चमत्कार को ही भूल जाएंगे कि उन्होंने लोगों के जीवन को कैसे छुआ? किसी डरे हुए आदमी को साहस देना क्या चमत्कार नहीं है? किसी टूटे हुए इंसान को अपने पैरों पर खड़ा कर देना क्या चमत्कार नहीं है? किसी भूखे को खाना देना? किसी अकेले के पास बैठना?

किसी के दुःख को बिना जज किए सुन लेना?

शायद सिनेमा का सबसे सुंदर आध्यात्मिक क्षण वह नहीं होता जब आसमान से कोई चमत्कार उतरता है। वह होता है जब एक इंसान दूसरे इंसान के लिए खड़ा होता है। और यहीं से धार्मिक सिनेमा की अगली यात्रा शुरू हो सकती है। हमें संतों की कहानियां चाहिए। लेकिन हमें उनके भीतर के इंसान की कहानियां भी चाहिए। हमें आस्था चाहिए। लेकिन उसके साथ सवाल भी चाहिए। हमें चमत्कार चाहिए। लेकिन उसके साथ चरित्र भी चाहिए। हमें भगवान चाहिए। लेकिन उसके साथ इंसान भी चाहिए। क्योंकि अगर भगवान को बड़ा करने के लिए इंसान को छोटा करना पड़े, तो शायद हमने भगवान को समझा ही नहीं।

‘हनुमान अंश’ जैसी फ़िल्मों के बहाने एक और सामाजिक सवाल उठता है, जिस पर हमारी फ़िल्में बहुत कम बात करती हैं। जब कोई व्यक्ति भौतिक संसार छोड़कर आध्यात्मिक यात्रा पर निकलता है, तो पीछे कौन रह जाता है? उसकी पत्नी? उसके बच्चे? उसके माता-पिता? उसकी रोज़मर्रा की ज़िम्मेदारियां? हम अक्सर त्याग की कहानी सिर्फ़ उस व्यक्ति की नज़र से देखते हैं, जिसने घर छोड़ा। लेकिन जिसने घर में रहकर जीवन सम्भाला, उसका त्याग किस कहानी में है? यह सवाल किसी संत की महानता को कम नहीं करता, बल्कि त्याग की परिभाषा को और मानवीय बनाता है। और शायद यही वह जगह है, जहां भविष्य का आध्यात्मिक सिनेमा हमारे समय से संवाद कर सकता है।

आज की महिला अपने पति की आध्यात्मिक यात्रा की सिर्फ़ दर्शक नहीं है। वह उस यात्रा की सामाजिक कीमत को भी समझती है। आज का परिवार भी बदल चुका है। आज का दर्शक भी। इसलिए आने वाली धार्मिक फ़िल्में अगर सिर्फ़ पुराने सांचे दोहराएंगी, तो वे शायद उस दर्शक से आधा ही संवाद कर पाएंगी, जिसके लिए वे बनाई जा रही हैं। ‘जय संतोषी मां’ के समय आस्था का सिनेमाई अनुभव सामूहिक था। ‘हनुमान अंश’ के समय वह सामूहिक होने के साथ-साथ डिजिटल भी है। लेकिन दोनों के बीच एक अदृश्य धागा वही है- कहानी पर विश्वास।

और शायद सिनेमा का भविष्य भी यहीं छिपा है। अगर निर्माता इस सफलता से सिर्फ़ यह सीखेंगे कि “धार्मिक फ़िल्म बनाओ, कम बजट रखो और तीन सौ करोड़ कमाओ”, तो वे सबसे ज़रूरी बात नहीं समझेंगे। दर्शक फ़ॉर्मूला नहीं खरीदता। दर्शक विश्वास खरीदता है। और विश्वास की नकल नहीं की जा सकती।

एक और संत की कहानी बना देने से वही परिणाम नहीं आएगा। एक और चमत्कार दिखा देने से वही भाव पैदा नहीं होगा। एक और भक्ति गीत डाल देने से वही सामूहिक अनुभव नहीं बनेगा। क्योंकि दर्शक को कहानी में कुछ अपना मिलना चाहिए। यही वजह है कि ‘हनुमान अंश’ की सफलता को केवल धार्मिक फ़िल्मों की सफलता कह देना भी अधूरा होगा। यह उस भारतीय दर्शक की वापसी है जो शायद बहुत समय से अपने सिनेमा में अपने सांस्कृतिक अनुभव की कोई सच्ची प्रतिध्वनि खोज रहा था।

लेकिन यहां सिनेमा की ज़िम्मेदारी भी शुरू होती है। आस्था को बेचने और आस्था को समझने में फ़र्क़ है। पहले रास्ते में फ़ॉर्मूला बनता है। दूसरे में सिनेमा। और मुझे उम्मीद है कि इस नई लहर में दूसरा रास्ता चुना जाएगा। ऐसी फ़िल्में बनेंगी जो धार्मिक हों, लेकिन प्रचारात्मक नहीं। जो आध्यात्मिक हों, लेकिन उपदेशात्मक नहीं। जो चमत्कार दिखाएं, लेकिन सवाल से न डरें। जो परंपरा का सम्मान करें, लेकिन इंसान की स्वतंत्र सोच का भी। क्योंकि हमारा संविधान भी नागरिकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद और जिज्ञासा की भावना विकसित करने की बात करता है।

इसका मतलब यह नहीं कि भारत को अपनी आस्था छोड़ देनी चाहिए। इसका मतलब शायद यह है कि भारत अपनी आस्था को इतना मज़बूत बनाए कि वह सवाल सह सके। मुझे लगता है, यही हमारे समय की सबसे सुंदर सिनेमाई संभावना है। एक ऐसी फ़िल्म जहां कोई बच्चा मंदिर में हाथ जोड़कर खड़ा हो और उसी शाम अपने पिता से पूछे- “भगवान होते कहां हैं”? और पिता उसके सवाल से डरने के बजाय मुस्कुराकर कहे- “शायद यह सवाल पूछना भी भगवान को खोजने का एक रास्ता है”। अगर हमारा सिनेमा वहां तक पहुंच गया, तो उसने सिर्फ़ फ़िल्म नहीं बनाई। उसने समाज के भीतर एक संवाद शुरू किया। और शायद ‘हनुमान अंश’ की असली उपलब्धि यही है कि उसने यह संवाद फिर से शुरू कर दिया है।

तीन सौ करोड़ की संख्या कल किसी और फ़िल्म की हो सकती है। लेकिन जिस समय का कोई सवाल सिनेमा के ज़रिए हमारे भीतर उतर जाता है, वह संख्या से कहीं ज़्यादा देर तक रहता है। आस्था रहे। ज़रूर रहे। क्योंकि आस्था मनुष्य को संभाल सकती है। लेकिन उसके साथ विवेक भी रहे। क्योंकि विवेक मनुष्य को गिरने से बचा सकता है। और सवाल? सवाल तो रहने ही चाहिए। क्योंकि जिस आस्था को एक सवाल से डर लगने लगे, वह शायद आस्था से ज़्यादा भय बन जाती है। और जिस आस्था के भीतर सवाल के लिए जगह हो, वह शायद इंसान को ईश्वर के थोड़ा और क़रीब ले जाती है। सिनेमा का काम हमारी आस्था छीनना नहीं है। उसका काम शायद इतना भर है कि वह हमें अपनी आस्था को थोड़ा और गहराई से देखने का मौक़ा दे। फ़िल्म ख़त्म होती है। लेकिन सवाल वहीं से शुरू होता है।

‘हनुमान अंश’ के तीन सौ करोड़ सिर्फ़ एक फ़िल्म की कमाई नहीं, उस दर्शक की तलाश भी हैं जो बदलती दुनिया में भरोसा, अर्थ और शायद अपने भीतर का कोई जवाब खोज रहा है।

बहरहाल, आपके नज़दीकी सिनेमाघरों में है। देख लीजिएगा। (पंकज दुबे पॉप कल्चर क़िस्सागो, उपन्यासकार और यूट्यूब चैट शो ‘स्मॉल टाउन्स बिग स्टोरीज़”के होस्ट हैं।)

अब यूपी में गूंजेगा बाबा का नाम! कैंची धाम के बाद अब जन्मभूमि से समाधि तक बदलेगा पूरा नक्शा

नीम करौली बाबा को लेकर लोगों की बढ़ती दिलचस्पी भी देखने को मिल रही है और उनके जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ की रिलीज के बाद उनका नाम एक बार फिर चर्चा में आया है। खबरों के मुताबिक, करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने भी बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक विरासत से जुड़े विषय को लोगों के बीच पहुंचाया है।

नीम करौली बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में हुआ था और उन्होंने अपने जीवन का काफी समय इसी क्षेत्र में साधना और तपस्या करते हुए बिताया। बाबा की समाधि भी उत्तर प्रदेश में ही स्थित है, इसलिए उनके भक्तों के लिए राज्य में मौजूद ये जगहें खास महत्व रखती हैं। अब उत्तर प्रदेश सरकार इन स्थानों को धार्मिक पर्यटन के लिहाज से विकसित करने की योजना बना रही है। फिरोजाबाद स्थित उनकी जन्मस्थली को एक बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है।

जन्म स्थान पर बनेगा भव्य कॉरिडोर

फिरोजाबाद में नीम करौली बाबा की जन्मस्थली को बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। इस परियोजना के लिए करीब 87.5 बीघा जमीन तय की गई है। यहां भव्य प्रवेश द्वार, डिजिटल म्यूजियम और इंटरप्रिटेशन सेंटर बनाया जाएगा, जहां लोग बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकेंगे। इसके अलावा मीटिंग हॉल, मल्टी लेवल पार्किंग, कम्युनिटी किचन, फूड कोर्ट, मेडिटेशन सेंटर और वेलनेस सेंटर जैसी सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं।

जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी

इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। जमीन मालिकों को सरकारी नियमों के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा और यह राशि जमीन की मौजूदा कीमत से चार गुना होने की बात कही गई है। बाबा के परिवार के सदस्यों समेत कुछ ग्रामीणों ने कथित तौर पर अनापत्ति प्रमाण पत्र भी दिया है, जिसे मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजा गया है। सरकार की मंजूरी के बाद जमीन अधिग्रहण पूरा होने पर निर्माण का काम शुरू किया जा सकेगा।

तपस्या स्थल पर भी बढ़ेंगी सुविधाएं

सरकार की योजना जन्म स्थान के साथ फर्रुखाबाद के नीब करौरी गांव में भी विकास कार्य किए जाने की तैयारी है। माना जाता है कि नीम करौली बाबा ने इस इलाके में करीब 12 साल तक तपस्या की थी और इसी गांव के नाम से बाद में वे नीम करौली बाबा के नाम से प्रसिद्ध हुए। यहां करीब 5 एकड़ जमीन को विकसित करने की योजना है। प्रस्तावित कामों में पानी की टंकी, सड़कों को चौड़ा करना, अतिक्रमण हटाना और व्यवस्थित पार्किंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म ‘हनुमान अंश’ की रिलीज के बाद यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है और रोजाना करीब 60 से 70 हजार लोगों के पहुंचने की बात कही गई है।

वृंदावन के समाधि स्थल का भी होगा विकास

नीम करौली बाबा से जुड़ी धार्मिक पर्यटन योजना में वृंदावन स्थित उनके समाधि स्थल को भी शामिल किया गया है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ आसपास के इलाके में सड़क संपर्क और दूसरी जरूरी सुविधाओं को मजबूत करने की योजना है। इसका मकसद समाधि स्थल तक पहुंच को आसान बनाना और वहां आने वाले भक्तों के लिए बेहतर माहौल तैयार करना है।

हनुमान सेतु से शुरू होगा प्रस्तावित बाबा सर्किट

लखनऊ का गोमती नदी के किनारे स्थित हनुमान सेतु मंदिर भी प्रस्तावित ‘नीम करौली बाबा सर्किट’ का अहम हिस्सा होगा। यह मंदिर बाबा की प्रेरणा से बनाया गया था और इसे सर्किट के शुरुआती केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड की ओर से यहां से गाइडेड टूर भी शुरू किए जा सकते हैं। मंदिर परिसर में फिलहाल नीम करौली बाबा की दो मूर्तियां और भगवान हनुमान की एक बड़ी मूर्ति मौजूद है।

नीम करौली बाबा से जुड़ा कैंची धाम भले ही बाबा से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध जगहों में शामिल हो, लेकिन उत्तर प्रदेश में मौजूद इन स्थानों की अपनी अलग कहानी और महत्व है। प्रोजेस्ट में कैंची धाम की तरह श्रद्धालुओं के अनुभव और सुविधाओं को बेहतर बनाने की कोशिश की जाएगी, फिरोजाबाद की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखकर विकास किया जाएगा। इस विकास के बाद इन जगहों पर सुविधाएं बेहतर होने के साथ बाबा के जीवन, उनकी साधना और आध्यात्मिक विरासत को करीब से समझने का मौका भी मिल सकता है।

Mirzapur The Movie Box Office Collection Day 11: ‘मिर्जापुर द मूवी’ की कमाई ने फिर मचाया तहलका, दूसरे सोमवार के बाद 300 करोड़ से इतनी दूर रह गई फिल्म

‘मिर्जापुर द मूवी’ का बॉक्स ऑफिस सफर लगातार चर्चा में बना हुआ है। रिलीज के बाद से ही फिल्म को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है और अब दूसरे हफ्ते में भी इसकी कमाई की रफ्तार पूरी तरह थमती नजर नहीं आ रही। दूसरे सोमवार को कलेक्शन में मामूली गिरावट जरूर आई, लेकिन फिल्म ने जिस तरह से अपनी पकड़ बनाए रखी है, उसने मेकर्स और कलाकारों की उम्मीदों को कायम रखा है। ‘मिर्जापुर’ की लोकप्रिय दुनिया और इसके चर्चित किरदारों का आकर्षण एक बार फिर सिनेमाघरों में देखने को मिल रहा है। यही वजह है कि फिल्म लगातार बॉक्स ऑफिस पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है।

अब फिल्म की नजर एक बड़े आंकड़े पर टिकी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘मिर्जापुर द मूवी’ अपनी मौजूदा रफ्तार को बरकरार रखते हुए दुनिया भर में 300 करोड़ रुपये के क्लब में शामिल हो पाती है या नहीं।

भारत में 190 करोड़ के पार पहुंची कमाई

ट्रेड ट्रैकर Sacnilk के अनुसार, फिल्म ने दूसरे सोमवार को भारत में 7,014 शोज के जरिए करीब 5.50 करोड़ रुपये की नेट कमाई की। इसके साथ ही घरेलू बॉक्स ऑफिस पर फिल्म का कुल नेट कलेक्शन 190.20 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं, भारत में फिल्म की ग्रॉस कमाई 226.64 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।

विदेशों में भी जारी है कमाई

फिल्म ने 11वें दिन विदेशों में करीब 1 करोड़ रुपये का कारोबार किया। इसके साथ ही फिल्म की कुल विदेशी कमाई बढ़कर 47 करोड़ रुपये हो गई है। भारत और विदेशों की कमाई को मिलाकर ‘मिर्जापुर द मूवी’ का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन अब 273.64 करोड़ रुपये हो चुका है। यानी फिल्म 300 करोड़ के आंकड़े से करीब 26 करोड़ रुपये दूर है।

‘हैवान’ और ‘हनुमान अंश’ से मिल रही कड़ी टक्कर

बॉक्स ऑफिस पर ‘मिर्जापुर द मूवी’ के लिए राह आसान नहीं है। फिल्म को इन दिनों ‘हैवान’ और ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्मों से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है। इसके बावजूद फिल्म की कमाई का लगातार बने रहना यह दिखाता है कि ‘मिर्जापुर’ के किरदारों और कहानी को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी अभी भी बरकरार है।

बड़े पर्दे पर फिर लौटी ‘मिर्जापुर’ की दुनिया

गुरमीत सिंह के निर्देशन और पुनीत कृष्णा की कहानी पर बनी यह फिल्म लोकप्रिय ‘मिर्जापुर’ फ्रेंचाइजी को बड़े पर्दे पर लेकर आई है। कहानी सीजन 1 के छठे और सातवें एपिसोड के बीच की घटनाओं को दिखाती है। फिल्म की सबसे खास बात यह है कि इसमें ऐसे किरदार भी फिर नजर आते हैं, जो आगे चलकर कहानी में मारे गए थे। मुन्ना त्रिपाठी के किरदार में दिव्येंदु और गोलू गुप्ता के रूप में श्वेता त्रिपाठी की वापसी ने पुराने प्रशंसकों की यादें ताजा कर दी हैं।

पुराने चेहरे, वही दमदार अंदाज

फिल्म में पंकज त्रिपाठी एक बार फिर अखंडानंद ‘कालीन’ त्रिपाठी के किरदार में नजर आ रहे हैं। वहीं अली फजल गुड्डू पंडित और दिव्येंदु मुन्ना त्रिपाठी की भूमिका में लौटे हैं। फिल्म की स्टारकास्ट में रसिका दुगल, श्वेता त्रिपाठी शर्मा, श्रिया पिलगांवकर, जितेंद्र कुमार, रवि किशन, अभिषेक बनर्जी, सोनल चौहान, मोहित मलिक और सुशांत सिंह भी शामिल हैं।

अब 300 करोड़ पर टिकी नजर

273.64 करोड़ रुपये के वर्ल्डवाइड कलेक्शन के साथ ‘मिर्जापुर द मूवी’ 300 करोड़ के आंकड़े के काफी करीब पहुंच चुकी है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में फिल्म अपनी रफ्तार बरकरार रखते हुए इस बड़े आंकड़े को पार कर पाती है या नहीं।

Hanuman Ansh box office collection: 39 दिन बाद भी सिनेमाघरों में ‘हनुमान अंश’ का जलवा, 222 करोड़ पार हुई कमाई