GDP Growth: जून तिमाही में 7.8% रही भारत की जीडीपी ग्रोथ, सर्विसेज सेक्टर की ग्रोथ सबसे ज्यादा

GDP Growth: इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन अच्छा रहा है। जून तिमाही में जीडीपी की ग्रोथ 7.8 फीसदी रही। यह एनालिस्ट्स और इकोनॉमिस्ट्स के अनुमान से ज्यादा है। खास बात यह है कि जून तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ तब 7.8 फीसदी रही, जब वैश्विक स्थितियां काफी चैलेंजिंग थीं।

मार्च तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 8.6 फीसदी

इस साल मार्च तिमाही में भारत में जीडीपी ग्रोथ 8.6 फीसदी थी। मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लिमेंटेशन (MoSPI) ने 31 अगस्त को जून तिमाही के जीडीपी के डेटा जारी किए। जीडीपी की ग्रोथ अनुमान से ज्यादा रही। मनीकंट्रोल के पोल में इकोनॉमिस्ट्स ने जून तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया था।

जून तिमाही में जीवीए 8.2 फीसदी रहा

जून तिमाही में ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) 8.2 फीसदी रहा। मार्च तिमाही में यह 8.7 फीसदी था। जीवीए का मतलब इकोनॉमी में उत्पादित गुड्स और सर्विसेज की कुल वैल्यू से है। इसमें नेट इनडायरेक्ट टैक्स शामिल नहीं होता है। जून तिमाही में अर्थव्यवस्था के शानदार प्रदर्शन में सर्विसेज और इनवेस्टमेंट का बड़ा हाथ है।

पहली तिमाही में सर्विसेज सेक्टर की ग्रोथ सबसे ज्यादा

जून तिमाही में सर्विसेज का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा। इसकी ग्रोथ 10 फीसदी रही। एक साल पहले की समान अवधि में सर्विसेज सेक्टर की ग्रोथ 8 फीसदी थी। मैन्युफैक्चरिंग की ग्रोथ 9.2 फीसदी रही। कंस्ट्रक्शन सेक्टर की ग्रोथ 7.7 फीसदी रही। ट्रेड, होटल्स, ट्रांसपोर्ट, कम्युनिकेशन और ब्रॉडकास्टिंग से संबंधित सर्विसेज सेगमेंट की ग्रोथ 8.5 फीसदी रही।

पहली तीमाही में मध्यपूर्व में लड़ाई का असर इकोनॉमी पर

जून तिमाही का मतलब अप्रैल, मई और जून के महीनों से है। अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी को लड़ाई शुरू हुई थी। जून तिमाही में ज्यादातर समय ईरान को अमेरिकी हमले का सामना करना पड़ा। ईरान ने कई खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले किए।

क्रूड ऑयल  की कीमतें काफी समय तक 100 डॉलर से ऊपर रहीं

इस दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से क्रूड ऑयल सहित दूसरी कमोडिटीज की सप्लाई पर काफी ज्यादा असर पड़ा। क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गईं। लेकिन, सरकार के कैपिटल एक्सपेंडिचर जारी रखने से आर्थिक गतिविधियों को काफी सपोर्ट मिला।

प्राइवेट फाइनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर 7.1 फीसदी बढ़ा 

जून तिमाही में प्राइवेट फाइनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर 7.1 फीसदी बढ़ा। इससे परिवारों में होने वाली खपत का पता चलता है। ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन 11.9 फीसदी बढ़ा, जबकि सरकार का फाइनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर 4.3 फीसदी बढ़ा। जून तिमाही के जीडीपी ग्रोथ के डेटा ऐसे वक्त आए हैं, जब इनफ्लशन से जुड़े रिस्क बढ़ रहा है।

FY27 में 5 फीसदी रह सकता है रिटेल इनफ्लेशन 

पिछले हफ्ते मनीकंट्रोल के पोल में शामिल इकोनॉमिस्ट्स का यह मानना था कि FY27 में रिटेल इनफ्लेशन 5 फीसदी रह सकता है। इसकी रेंज 4.7 से 5.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया। इसकी कई वजहें हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से ऑयल की कीमतें हाई लेवल पर बनी हुई हैं। देश में मानसून की बारिश एक समान नहीं रही है। इसका असर फसल उत्पादन पर पड़ेगा।

2030 तक ₹20 लाख करोड़ का हो सकता है EV मार्केट, 5 करोड़ नौकरियां पैदा होंगी: नितिन गडकरी

भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी EV बाजार तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि 2030 तक भारत का EV बाजार ₹20 लाख करोड़ का हो सकता है। इससे करीब 5 करोड़ नौकरियां पैदा होने का अनुमान है।

गडकरी ने CII-ITC Centre of Excellence for Sustainable Development के एक कार्यक्रम में यह बात कही। उन्होंने बताया कि भारत में अभी करीब 57 लाख इलेक्ट्रिक व्हीकल रजिस्टर्ड हैं। देश में EV की गाड़ियों के मार्केट में हिस्सेदारी करीब 7% है।

EV बाजार में बड़ा मौका

गडकरी के मुताबिक, भारत के EV सेक्टर में आने वाले वर्षों में तेजी से विस्तार हो सकता है। सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा दे रही है। इससे वाहन निर्माण के साथ बैटरी, चार्जिंग और इससे जुड़े दूसरे कारोबार भी बढ़ सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि बजाज ऑटो और हीरो मोटोकॉर्प जैसे बड़े टू-व्हीलर निर्माता भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता दिखा रहे हैं। दोनों कंपनियां अपने बनाए 50% से ज्यादा वाहन विदेशों में एक्सपोर्ट करती हैं।

इलेक्ट्रिक बसों की मांग ज्यादा

गडकरी ने कहा कि भारत में हर साल करीब 1 लाख इलेक्ट्रिक बसों की जरूरत है। लेकिन घरेलू कंपनियां अभी सिर्फ 50,000 से 60,000 इलेक्ट्रिक बसें सालाना बना रही हैं।

यानी इस सेगमेंट में अभी भी बड़ी कमी है। सरकार का फोकस घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर है। इससे इलेक्ट्रिक बस बनाने वाली कंपनियों के लिए भी अवसर बढ़ सकते हैं।

ऑटो सेक्टर को नंबर-1 बनाने का लक्ष्य

गडकरी ने कहा कि सरकार अगले पांच साल में भारत के ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को दुनिया का नंबर-1 बनाना चाहती है। उन्होंने माना कि लक्ष्य मुश्किल है। लेकिन इसे हासिल करना असंभव नहीं है।

उनके मुताबिक, जब उन्होंने परिवहन मंत्री का पद संभाला था, तब भारत का ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री करीब ₹14 लाख करोड़ का था। अब इसका आकार करीब ₹22 लाख करोड़ हो गया है।

अमेरिका और चीन से पीछे भारत

गडकरी के मुताबिक, अमेरिका का ऑटोमोबाइल उद्योग करीब ₹78 लाख करोड़ का है। चीन का उद्योग करीब ₹47 लाख करोड़ का है। वहीं भारत का ऑटो सेक्टर करीब ₹23 लाख करोड़ का है।

उन्होंने कहा कि भारत के पास प्रशिक्षित कर्मचारी और प्रतिस्पर्धी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता है। इसलिए देश के पास वैश्विक ऑटो हब बनने की क्षमता है।

फॉसिल फ्यूल इंपोर्ट घटाने पर जोर

गडकरी ने कहा कि भारत हर साल करीब ₹22 लाख करोड़ का फॉसिल फ्यूल इंपोर्ट करता है। इससे देश के आयात बिल के साथ प्रदूषण भी बढ़ता है। उन्होंने बायोफ्यूल और दूसरे वैकल्पिक ईंधनों को भविष्य के लिए अहम बताया।

लॉजिस्टिक्स लागत 8% करने का लक्ष्य

सरकार लॉजिस्टिक्स लागत को घटाकर GDP के करीब 8% तक लाने का लक्ष्य रखती है। गडकरी के मुताबिक, इससे भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी।

उन्होंने बताया कि IIT चेन्नई, IIT कानपुर और IIM बेंगलुरु की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक्सप्रेसवे और इकोनॉमिक कॉरिडोर बनने से भारत की लॉजिस्टिक्स लागत करीब 16% से घटकर 10% रह गई है। सरकार इसे और घटाकर 8% तक लाना चाहती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market Outlook: इस हफ्ते कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल; कच्चे तेल की कीमत, पश्चिम एशिया के हालात समेत इन फैक्टर्स से होगा तय

नए शुरू हो रहे सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार की दिशा कच्चे तेल की कीमत और अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़े घटनाक्रमों जैसे प्रमुख फैक्टर्स से तय होगी। पिछले सप्ताह सेंसेक्स में 468.42 अंकों की गिरावट रही। निफ्टी 114 अंक फिसला। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंड (रिसर्च) अजीत मिश्रा का कहना है कि निवेशक जैक्सन होल आर्थिक संगोष्ठी (Jackson Hole Symposium) पर करीबी नजर रखेंगे, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख की टिप्पणियों पर। इससे बेंचमार्क ब्याज दरों की आगे की दिशा के संकेत मिलने की उम्मीद है।

आगे कहा कि अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुमान, ड्यूरेबल गुड्स के ऑर्डर और कंज्यूमर कॉन्फिडेंस से भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती और फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा के बारे में महत्वपूर्ण संकेत मिलेंगे। भारत को लेकर बात करें तो निवेशकों की नजर रुपये की चाल, विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख और घरेलू बाजार में नकदी की स्थिति पर रहेगी।

छाए रहेंगे 3 प्रमुख मुद्दे

ऑनलाइन ट्रेडिंग एंड वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि वैश्विक बाजारों में इस सप्ताह 3 प्रमुख मुद्दे छाए रहेंगे। इनमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति की दिशा, एनवीडिया के तिमाही नतीजे और अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव शामिल हैं। लंबी अवधि के अमेरिकी बॉन्ड पर यील्ड में उतार-चढ़ाव के बीच जैक्सन होल संगोष्ठी में फेड के प्रमुख केविन वॉर्श के संबोधन पर करीबी नजर रहेगी। सितंबर में होने वाली पॉलिसी मीटिंग से पहले निवेशक संकेत तलाशेंगे कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक लगातार बनी हुई महंगाई के जोखिमों और श्रम बाजार के नरम पड़ने के संकेतों को कैसे तौल रहा है।

पोनमुडी ने आगे कहा कि कच्चे तेल की कीमतें भी एक बड़ा बाहरी जोखिम बनी हुई हैं। उनके मुताबिक, ‘‘अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिन का समझौता किसी स्थायी समाधान के बिना समाप्त हो गया है। इससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर जारी तनाव का केंद्र बन गया है और क्षेत्र में ऊर्जा की सामान्य आपूर्ति प्रभावित हुई है।’’

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FPI की गतिविधियां

नए सप्ताह में निवेशक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के रुख पर भी नजर रखेंगे। इन निवेशकों ने अगस्त में भारतीय शेयर बाजार में अपनी खरीद तेज की है। कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों, रुपये की स्थिरता और बाजार की बेहतर संभावनाओं से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। FPI ने अगस्त में अब तक भारतीय शेयर बाजार में 23,544 करोड़ रुपये डाले हैं। इससे पहले जुलाई में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 20,200 करोड़ रुपये का निवेश किया था। जुलाई से पहले लगातार 4 महीने सेलिंग की थी।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के रिसर्च हेड (वेल्थ मैनेजमेंट) सिद्धार्थ खेमका का मानना है कि निफ्टी में बीते लगातार दो सप्ताह गिरावट रही। अब भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह कुछ स्थिरता आ सकती है और निकट अवधि में मामूली रिकवरी की उम्मीद है। बाजार की निगाह ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों पर भी रहेगी, जो 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। इसके अलावा वैश्विक घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण रहेंगे।

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RBI के अनुमान को भी पीछे छोड़ सकती है भारत की GDP ग्रोथ, डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने दिए ये बड़े संकेत

आरबीआई की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने गुरुवार को कहा कि मार्च में खत्म होने वाले फाइनेंशियल ईयर में भारत की ग्रोथ रेट 7% के करीब रह सकती है,जो सेंट्रल बैंक के 6.7% के अनुमान से बेहतर है। इस रफ्तार के साथ भारत दुनिया की सबसे तेजी से ग्रोथ करने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहेगा। फाइनेंशियल एक्सप्रेस में आई अखबार के आधार पर ब्लूमबर्ग ने बताया कि चेन्नई में मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में एक कार्यक्रम में बोलते हुए पूनम गुप्ता ने कहा कि उनका यह अनुमान अप्रैल-जून तिमाही के मजबूत रहने की उम्मीदों पर आधारित है। इस अवधि के आधिकारिक आंकड़े इस महीने के आखिर में आने वाले हैं। अर्थशास्त्रियों का अनुमान आम तौर पर 6.9% से 8% के बीच है। इसका मतलब है कि पूरे साल की ग्रोथ रेट काफी ज़्यादा,यानी 7% के करीब रह सकती है।

तमाम चुनौतियों के बावजूद कायम रही रफ्तार

इकोनॉमी की तेज रफ्तार से पता चलता है कि कमजोर मॉनसून और एनर्जी की बढ़ी लागत जैसे झटकों के बावजूद अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है। इससे यह भी पता चलता है कि गुप्ता का रुख हाल ही में काफी सख्त क्यों हो गया है। इस हफ्ते जारी RBI की अगस्त पॉलिसी मीटिंग के मिनट्स से पता चला कि गुप्ता ने इस साल के आखिर में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना जताई थी।

पूनम गुप्ता ने कहा “इन झटकों के बावजूद,आगे के लिए मैं कहूंगी कि 7.5% ग्रोथ तो तय है और हमें इससे बेहतर करने की कोशिश करनी चाहिए।”

बाहरी खातों को लेकर भी जताया भरोसा 

पूनम गुप्ता ने भारत के बाहरी खातों (external accounts) को लेकर भी भरोसा जताया और कहा कि आगे स्थिति काफी बेहतर होगी। अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि पहले घाटे के अनुमान के बावजूद,इस फाइनेंशियल ईयर में देश का बैलेंस ऑफ पेमेंट पॉजिटिव हो जाएगा। इसकी मुख्य वजह विदेशी मुद्रा में गिरावट को रोकने के उपायों के बाद 80 अरब डॉलर तक विदेशी फंड आने की उम्मीद है। इन उपायों में विदेशी मुद्रा डिपॉजिट को आकर्षित करने के लिए खास इंसेंटिव भी शामिल हैं।

भारत को एक विकसित देश बनाने के लिए 8% से ज्यादा की ग्रोथ रेट की जरूरत 

पूनम गुप्ता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारतीय अधिकारी देश की अर्थव्यवस्था को लेकर ज्यादा उम्मीदें जता रहे हैं,क्योंकि ईरान युद्ध के चलते जितने बुरे हालात का डर था,वे सच साबित नहीं हुए। मजबूत ग्रोथ को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले हफ्ते 2047 तक भारत को एक विकसित देश बनाने के अपने लक्ष्य को फिर से दोहराया। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमें कम से कम दो दशकों तक लगातार 8% से ज्यादा की ग्रोथ रेट की जरूरत हो सकती है।

 

 

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