Saudi Arabia के ‘स्काईवास्प’ अटैक के आगे बेदम हुए हूती लड़ाके, जानें कैसे सऊदी अरब के इस सस्ते और टिकाऊ उपाय ने बदली जंग की तस्वीर

अब तक सऊदी अरब के महंगे और हाईटेक हथियार हूती लड़ाकों के गोरिल्ला अटैक के आगे बौने साबित हो रहे थे। लेकिन जब से सऊदी अरब ने जंग की पुरानी रणनीति को छोड़ कर नई रणनीति अपनाई है, तब से खाड़ी देशों के बीच जारी जंग की सूरत बदलती नजर आ रही है। हाल ही में यमन की राजधानी सना पर सऊदी अरब ने जो हमला किया, उससे हूती विद्रोहियों के पांव उखड़ गए और भागने के लिए उनके पास जमीन कम पड़ गई।

इस हमले में सऊदी अरब की मिसाइलें नहीं गरजीं, बल्कि ‘स्काईवास्प’ अटैक किया गया। इस हमले ने अटैक ने रातों-रात मध्य पूर्व के युद्ध के समीकरण को बदल कर रख दिया है। हूती विद्रोहियों के हथियार अब काम नहीं आ रहे हैं। सऊदी अरब का यह हथियार त्रिकोणीय आकार के खौफनाक ड्रोन्स हैं, जो हूतियों के ठिकानों पर तबाही मचा रहे हैं। हूती लड़ाकों की एंटी-एयरक्राफ्ट गन से ड्रोन को मार गिराने की कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं। इस हमले के बाद पूरे साना शहर में हड़कंप मच गया और हूती विद्रोहियों के कई अहम ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचने का दावा किया जा रहा है।

सऊदी अरब ने जंग में उतारे कामिकेज ड्रोन स्काईवास्प

खाड़ी देशों के बीच जारी जंग में सऊदी अरब ने बेहद विनाशकारी कामिकेज यानी ‘सुसाइड’ ड्रोन उतार दिए हैं। इनका नाम ‘स्काईवास्प’ है, जो एक तरह के कीड़े के लिए अंग्रेज में इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द वॉस्प से लिया गया है। हिंदी में इसे ततैया कहते हैं। ये सऊदी अरब का पहला स्वदेशी लंबी दूरी का सुसाइड ड्रोन है। सुसाइड ड्रोन उन हथियारों को कहा जाता है, जो मिसाइल की तरह सीधे अपने टारगेट से टकराकर खुद को भी खत्म कर लेते हैं।

ईरान के ‘शाहिद-136’ ड्रोन पर आधारित स्काईवास्प

स्काईवास्प का डिजाइन काफी हद तक ईरान के मशहूर ‘शाहिद-136’ ड्रोन से मिलता-जुलता है। शाहिद-136 का इस्तेमाल रूस-यूक्रेन युद्ध में बड़े पैमाने पर हुआ है। इसे हूती विद्रोही भी अक्सर सऊदी अरब और लाल सागर में जहाजों पर हमले के लिए इस्तेमाल करते रहे हैं। अब सऊदी अरब ने इसी से प्रेरित खुद का कामिकेज ड्रोन तैयार कर लिया है, जो दुश्मन के घर में घुसकर सटीक हमला करने में माहिर है।

सस्ता और टिकाऊ हथियार बना स्काईवास्प

एक ‘स्काईवास्प’ ड्रोन की कीमत महज करीब 35,000 डॉलर यानी लगभग 29 से 30 लाख रुपए आती है। जहां एक मिसाइल की कीमत लाखों डॉलर होती है। इस ड्रोन की मारक क्षमता करीब 1,500 किलोमीटर है। यानी सऊदी अरब अपनी सीमा से यमन के हूतियों के ठिकानों पर सटीक निशाना लगा सकता है। ये ड्रोन जीपीएस और नेविगेशन सिस्टम से पूरी तरह लैस होता है, जिससे ये दुश्मन की लोकेशन पर सटीक वार करता है और एयर डिफेंस सिस्टम को आसानी से चकमा दे सकता है।

सऊदी और अमेरिका मिलकर बनाया

स्काईवास्प सऊदी अरब का पहला स्वदेशी प्रोजेक्ट है। इसे ‘SR2Vector’ नाम की कंपनी ने बनाया है, जो सऊदी अरब और अमेरिका का एक ज्वाइंट वेंचर है।

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सऊदी ने मक्का के पास हूती ड्रोन मार गिराया:यह इस्लाम का सबसे पवित्र शहर; हूती बोले- मक्का को कोई खतरा नहीं

सऊदी अरब के एयर डिफेंस सिस्टम ने मंगलवार को मक्का के दक्षिण में एक हूती ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने बुधवार को बताया कि ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही मार गिराया गया। सैन्य गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि इस्लाम के दो सबसे पवित्र स्थलों और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सऊदी अरब के लिए रेड लाइन है। उन्होंने कहा कि गठबंधन हूतियों के खिलाफ जरूरी निवारक कदम उठाएगा। वहीं हूति विद्रोहियों ने मक्का या दूसरे पवित्र स्थलों को निशाना बनाने की बात से इनकार किया है। हूतियों की समाचार एजेंसी SABA के मुताबिक, संगठन से मक्का या अन्य पवित्र स्थलों को कोई खतरा नहीं है। मक्का इस्लाम का सबसे पवित्र शहर मक्का इस्लाम का सबसे पवित्र शहर है। यहां मुस्लिमों के प्रमुख पवित्र स्थल हैं और हर साल दुनिया भर से लाखों लोग हज के लिए पहुंचते हैं। हज इस्लाम के पांच प्रमुख धार्मिक कर्तव्यों में शामिल है। अल-मलिकी ने इस घटना को मक्का को निशाना बनाने की हूतियों की दूसरी कोशिश बताया। उनके मुताबिक, इससे पहले जुलाई 2017 में गठबंधन ने हूतियों पर मक्का की ओर बैलिस्टिक मिसाइल दागने का आरोप लगाया था। सऊदी अरब के कई हिस्सों में सुरक्षा अलर्ट मंगलवार को सऊदी अरब के कई हिस्सों में सुरक्षा अलर्ट जारी किए गए। इनमें मक्का और अन्य शहर शामिल थे। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ, जब पिछले एक सप्ताह में ईरान समर्थित लड़ाकों के हमलों के बाद सऊदी अरब क्षेत्रीय संघर्ष से और ज्यादा प्रभावित हुआ है। हूतियों के हमलों से सऊदी अरब के उन तेल निर्यात मार्गों पर भी जोखिम बढ़ा है, जिन्हें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से हटाकर वैकल्पिक रास्तों से इस्तेमाल किया जा रहा है। हूतियों ने सऊदी एयरबेस पर हमले का दावा किया हूतियों ने पिछले एक सप्ताह में सऊदी अरब के खिलाफ कई हमलों का दावा किया है। सोमवार को संगठन ने एक एयरबेस को निशाना बनाने की बात कही थी। हूतियों के मुताबिक, यह कार्रवाई यमन पर हुए हवाई हमलों के जवाब में की गई। सऊदी पक्ष ने मक्का के पास ड्रोन को प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में पहुंचने से पहले नष्ट करने की बात कही है। वहीं, हूती पक्ष ने पवित्र शहर को किसी खतरे से इनकार किया है।

सऊदी ने मक्का के पास हूती ड्रोन मार गिराया:यह इस्लाम का सबसे पवित्र शहर; हूती बोले- मक्का को कोई खतरा नहीं

सऊदी अरब के एयर डिफेंस सिस्टम ने मंगलवार को मक्का के दक्षिण में एक हूती ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने बुधवार को बताया कि ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही मार गिराया गया। सैन्य गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि इस्लाम के पवित्र स्थलों और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सऊदी अरब के लिए रेड लाइन है। उन्होंने कहा कि गठबंधन हूतियों के खिलाफ जरूरी कदम उठाएगा। वहीं हूति विद्रोहियों ने मक्का या दूसरे पवित्र स्थलों को निशाना बनाने की बात से इनकार किया है। हूतियों की समाचार एजेंसी SABA के मुताबिक, संगठन से मक्का या अन्य पवित्र स्थलों को कोई खतरा नहीं है। मक्का इस्लाम का सबसे पवित्र शहर मक्का इस्लाम का सबसे पवित्र शहर है। यहां मुस्लिमों के प्रमुख पवित्र स्थल हैं और हर साल दुनिया भर से लाखों लोग हज के लिए पहुंचते हैं। अल-मलिकी ने इस घटना को मक्का को निशाना बनाने की हूतियों की दूसरी कोशिश बताया। इससे पहले जुलाई 2017 में गठबंधन ने हूतियों पर मक्का की ओर बैलिस्टिक मिसाइल दागने का आरोप लगाया था। इस्लामिक देशों के संगठन ने हूती हमलों को आतंकवाद बताया इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने मक्का और मदीना क्षेत्र में हूती हमलों की निंदा की है। संगठन ने कहा कि पवित्र जगहों, मस्जिदों और आम लोगों के ठिकानों पर हमला करना आतंकवाद है। ऐसी कार्रवाई इस्लाम की सीख और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। यमन में तनाव के बाद सऊदी में हमले ईरान से जुड़े हूतियों का आरोप है कि सऊदी अरब यमन में हवाई हमले कर रहा है और क्रूज मिसाइलें दाग रहा है। यमन के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में हूती लड़ाकों और सऊदी समर्थित सरकारी बलों के बीच भारी लड़ाई चल रही है। इसी बीच हूतियों ने यमन के पश्चिमी लाल सागर तट पर तेजी से अपना कब्जा बढ़ाया है। उन्होंने सोमवार को इस इलाके में दो और द्वीप ग्रेटर हनीश और लेसर हनीश पर भी कब्जा कर लिया। ये दोनों द्वीप बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से करीब 160 किमी उत्तर में स्थित हैं। हूतियों ने पिछले हफ्ते सऊदी एयरबेस पर हमले का दावा किया हूतियों ने पिछले एक हफ्ते सऊदी अरब के खिलाफ कई हमलों का दावा किया है। सोमवार को संगठन ने एक एयरबेस को निशाना बनाने की बात कही थी। हूतियों के मुताबिक, यह कार्रवाई यमन पर हुए हवाई हमलों के जवाब में की गई। ————— ये खबर भी पढ़ें… मक्का में पहली बार मिसाइल अटैक का इमरजेंसी अलर्ट:हूती विद्रोहियों ने सऊदी पर हमला किया; 2017 में भी मक्का की ओर आई थी मिसाइल यमन के हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को सऊदी अरब पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इसके बाद सऊदी अरब ने मक्का में पहली बार इमरजेंसी अलर्ट जारी किया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

आज का एक्सप्लेनर:भारत के लिए सुखोई-57 क्यों जरूरी; वायुसेना के पास 13 स्क्वाड्रन कम, पाकिस्तान को मिलने वाला है 5वीं पीढ़ी का जेट

जुलाई 2026, भारत के रक्षा सचिव ने साफ कहा था कि सुखोई-57 खरीदने की कोई योजना नहीं है। बमुश्किल दो महीने बाद, रूसी राष्ट्रपति पुतिन के भारत दौरे पर सुखोई-57 पर डील की चर्चा जोरों पर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान को दिसंबर 2026 तक पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट मिल सकता है। भारत के पास फिलहाल सबसे एडवांस जेट 4.5 पीढ़ी का राफेल है। भारत घूम-फिरकर पांचवीं पीढ़ी के इसी Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने पर वापस क्यों आ गया, पूरी कहानी आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: कभी हां-कभी न… सुखोई-57 को लेकर भारत का रुख कैसे बदलता रहा है? जवाबः भारत ने 1990 के दशक से रूस के करीब 400 सुखोई-30 और सुखोई-30MKI विमान खरीदे हैं। इनमें से करीब आधे विमान रूस के साथ मिलकर भारत की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, HAL के प्लांट में बने हैं… अब दोबारा पुतिन की यात्रा के दौरान चर्चा है कि भारत 75 सुखोई-57E जेट्स खरीद सकता है। सवाल-2: भारत की तलाश वापस सुखोई-57 पर क्यों टिक गई है? जवाबः 4 वजहों से भारत को सुखोई-57E जैसे एडवांस्ड फाइटर जेट्स की जरूरत है… 1. फाइटर स्क्वाड्रन की जरूरत के मुकाबले आधे रह गए 2. पाकिस्तान-चीन के पास 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट 3. भारत का स्वदेशी 5th जनरेशन प्रोग्राम AMCA लेट-लतीफ 4. भारत के पास दूसरा बेहतर ऑप्शन नहीं सवाल-3: इस डील से रूस को क्या फायदा होगा? जवाबः अगर भारत रूस से सुखोई-57 खरीदता है, तो रूस को कई फायदे हैं… सवाल-4: क्या इस डील से ट्रम्प नाराज हो सकते हैं, कैसे निपटेगा भारत? जवाबः अगस्त 2025 में ट्रम्प ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया था। इसमें 25% टैरिफ के पीछे वजह थी- भारत की रूस से कच्चे तेल की खरीद। अमेरिका ये भी चाहता है कि भारत रूस के बजाय उससे तेल और हथियार खरीदे। फरवरी 2025 में पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान ट्रम्प ने भारत को ‘F-35 लाइटनिंग-II’ फाइटर जेट बेचने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि भारत ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई। अमेरिका अपने CAATSA नाम के कानून के तहत रूस से हथियार खरीदने वाले देशों पर कड़े प्रतिबंध लगाता है। अब अगर रूस से सुखोई-57 की डील हुई, तो अमेरिका बैन लगाने की धमकी दे सकता है। भारत और अमेरिका के बीच MQ-9B ड्रोन और अपाचे हेलिकॉप्टर की डील और भारत के तेजस फाइटर जेट के लिए जनरल मोटर्स के इंजन की सप्लाई पर भी असर पड़ सकता है। अमेरिकी संसद में रूस से हथियार लेने वाले देशों पर टैरिफ लगाने का कानून भी पारित हुआ है। भारत पर फिलहाल 18% टैरिफ लागू है और दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर बातचीत जारी है। इस पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि जब भारत ने रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा, तो अमेरिका ने भारत पर सख्त बैन लगाने की धमकी दी थी, भारत ने इसके बावजूद ये सिस्टम खरीदा। 1990 के दशक में न्यूक्लियर टेस्ट के बाद भी अमेरिका ने भारत पर दबाव बनाया। तब भी भारत ने रूस से हथियारों की खरीद जारी रखी थी। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में ट्रेड रिलेशंस के एक्सपर्ट कैसर शमीम कहते हैं कि भारत अपनी सुरक्षा के मामले में किसी दूसरे देश पर निर्भर होकर फैसले नहीं लेता। भारत हमेशा से अपनी ‘सामरिक स्वायत्तता’, यानी स्ट्रैटेजिक ऑटोनोमी को अपनी विदेश नीति की सेंट्रल पॉलिसी मानता है। सवाल-5: जंग में घिरा रूस क्या समय पर सुखोई-57 की डिलीवरी कर पाएगा? जवाबः सुखोई-57 डिफेंस सिक्योरिटी एशिया की रिपोर्ट के अनुसार, रूस भारत को 36 से 60 पूरी तरह तैयार सुखोई-57 जेट की तत्काल डिलीवरी करने को तैयार है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत भी शुरुआत में कुछ ‘रेडी-टू-फ्लाई’ विमान लेना चाहता है। हालांकि रूस ये कर पाएगा, ये कहना थोड़ा मुश्किल है… —————— ये खबर भी पढ़िए… CIA डायरेक्टर से लेकर ट्रम्प के दामाद तक, मॉस्को क्यों जा रहे; क्या रूस-यूक्रेन जंग खत्म होने वाली है 25 अगस्त को अमेरिकी इंटेलिजेंस के मुखिया जॉन रैटक्लिफ ने मॉस्को की सीक्रेट विजिट की। 10 दिन बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के 2 भरोसेमंद दूत- जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ भी मॉस्को पहुंचे और रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मिले। पूरी खबर पढ़िए…

रूस से 75 सुखोई-57 फाइटर जेट का सौदा संभव:कीमत ₹1 लाख करोड़ तक; भारत ऐसी टेक्नोलॉजी चाहता है, जो आगे भी काम आए

भारत और रूस के बीच 75 सुखोई-57 फाइटर जेट खरीदने पर समझौता हो सकता है। दोनों देशों के बीच इस सौदे की शर्तों पर बातचीत आगे बढ़ चुकी है। सौदा हुआ तो इसकी कीमत करीब 1 लाख करोड़ रुपए तक हो सकती है। इसमें विमान के साथ हथियार, पुर्जे, ट्रेनिंग, सिम्युलेटर और रखरखाव भी शामिल होगा। भारत चाहता है कि विमान खरीदने के साथ उसे ऐसी टेक्नोलॉजी भी मिले, जो आगे लड़ाकू विमान बनाने के काम आए। रूस भारत में सुखोई-57 बनाने की पेशकश पहले ही कर चुका है। भारत इस प्रोजेक्ट में अपनी कंपनियों की भागीदारी और जरूरी तकनीक तक पहुंच चाहता है। BRICS सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को नई दिल्ली में मिलेंगे। इस बैठक में सुखोई-57 के अलावा रक्षा, परमाणु ऊर्जा और दोनों देशों के बीच सहयोग से जुड़े दूसरे मुद्दों पर भी बात होगी। वायुसेना को अभी सुखोई-57 पर पूरा भरोसा नहीं भारतीय वायुसेना को सुखोई-57 की क्षमता पर अभी पूरा भरोसा नहीं है। भारत पहले रूस के साथ पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान बनाने के प्रोजेक्ट में शामिल था, लेकिन बाद में इससे बाहर हो गया। उस समय विमान के रडार से बचने और जरूरी टेक्नोलॉजी मिलने को लेकर सवाल उठे थे। अब वायुसेना यह देख रही है कि सुखोई-57 रडार से कितना बच सकता है, दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से कैसे निपटता है और अलग-अलग हथियारों के साथ कितना अच्छा काम करता है। एक्सपर्ट बोले; Su-57 गेमचेंजर, वायुसेना की ताकत बढ़ा सकता है भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन संदीप मेहता के मुताबिक सुखोई-57 की एंट्री से हवाई लड़ाई का तरीका बदल सकता है। इसकी असली ताकत इस बात में होगी कि इसे राफेल, सुखोई-30 MKI, AWACS, ग्राउंड रडार और एयर डिफेंस सिस्टम से कितनी अच्छी तरह जोड़ा जाता है। युद्ध की शुरुआत में दुश्मन के रडार, कमांड सेंटर और मिसाइल ठिकानों तक पहुंचना सबसे मुश्किल होता है। सुखोई-57 रडार पर देर से पकड़ में आता है, इसलिए इन जगहों तक ज्यादा आसानी से पहुंच सकता है। यह विमान खुद हर लक्ष्य पर हमला करने के बजाय दुश्मन के रडार, एयर डिफेंस और फाइटर की जानकारी पीछे मौजूद भारतीय विमानों तक पहुंचा सकता है। इससे राफेल और सुखोई-30 जैसे दूसरे लड़ाकू विमानों की मारक क्षमता भी बढ़ सकती है। सुखोई-30 को लंबी दूरी की मिसाइल देने की तैयारी भारत सुखोई-30 MKI की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए आर-37एम जैसी लंबी दूरी की मिसाइल चाहता है। यह मिसाइल करीब 300 किमी दूर तक लक्ष्य पर हमला कर सकती है और दुश्मन के अवाक्स जैसे बड़े विमानों को भी निशाना बना सकती है। फिलहाल भारत 63 हजार करोड़ रुपए में 84 सुखोई-30MKI को ‘सुपर सुखोई’ बना रहा है। परमाणु ऊर्जा पर भी होगी बात बैठक में सिविल न्यूक्लियर एनर्जी पर भी चर्चा होगी। रूस तमिलनाडु के कुडनकुलम में छह परमाणु रिएक्टरों के निर्माण में भारत का साझेदार है। दोनों देश एक और परमाणु परियोजना पर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। भारत परमाणु पनडुब्बियों के लिए ज्यादा ताकतवर रिएक्टर से जुड़ी रूसी तकनीकी मदद भी चाहता है। इस पर दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है। S-400 की बाकी सप्लाई पर भी बात बैठक में S-400 मिसाइल सिस्टम की बाकी सप्लाई पर भी चर्चा हो सकती है। भारत ने रूस से 5 S-400 सिस्टम खरीदने के लिए 5.43 अरब डॉलर का सौदा किया था। इनमें से 4 सिस्टम भारत को मिल चुके हैं। रूस बाकी सिस्टम की सप्लाई पूरी करने का भरोसा दे सकता है। यूक्रेन युद्ध पर भारत के प्रयासों का स्वागत करेगा रूस रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा है कि रूस यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए भारत की कोशिशों का स्वागत करेगा। उन्होंने कहा कि मॉस्को युद्ध का शांतिपूर्ण समाधान निकालने के तरीकों पर भारत के साथ संपर्क में है। ——————————— ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका का 5 ईरानी टैंकरों पर हमला:जवाब में ईरान ने जॉर्डन में US बेस पर 20 मिसाइलें दागीं; इससे पहले अमेरिकी सब-मरीन ड्रोन भी पकड़ा अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार (8 सितंबर) को ईरान से जुड़े 5 तेल टैंकरों पर हमला किया। इसके कुछ घंटे बाद ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने की ओर 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

अमेरिका-ईरान में तेज हुई जंग: CENTCOM ने तबाह किए 5 ईरानी तेल टैंकर, जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर हमला

अमेरिका-ईरान में तेज हुई जंग: CENTCOM ने तबाह किए 5 ईरानी तेल टैंकर, जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर हमला

US Iran conflict

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध थमने का नाम ही रहा है। अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों पर मिसाइल हमलों के बाद अमेरिकी नौसेना ने ईरान के पांच तेल टैंकरों पर हमला किया है। अमेरिका ने ओमान की खाड़ी में 4 और खार्ग द्वीप के पास 1 तेल टैंकर को निशाना बनाया। अमेरिका ने ईरान की 36 संस्थाओं पर नए प्रतिबंध भी लगाए हैं। इस बीच ईरान ने भी एक अमेरिकी ड्रोन कब्जे में लेने का दावा किया है। ALSO READ: ईरान-अमेरिका युद्ध का नया दौर, फिर बढ़ीं तेल की कीमतें

 

CENTCOM ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, सेंटकॉम बलों ने 8 सितंबर को 5 ईरानी कच्चे तेल के वाहकों को नष्ट कर दिया, जब इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पिछले 2 दिनों में दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को निशाना बनाया था। अमेरिकी युद्धपोत ने ईरानी हमलों के प्रयासों को सफलतापूर्वक विफल कर दिया और क्षेत्रीय जल में गश्त करना जारी रखा। किसी भी अमेरिकी कर्मी को नुकसान नहीं पहुंचा है।

ईरान का जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर हमला

ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने की ओर 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन की सेना ने दावा किया कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने 18 मिसाइलों को मार गिराया, जबकि दो मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। इस बीच ईरान ने भी एक अमेरिकी ड्रोन कब्जे में लेने का दावा किया है।

 

कुवैत और बहरीन में तेल टैंकरों को धमकी

अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने कुवैत और बहरीन के बंदरगाहों के पास मौजूद कुछ तेल टैंकरों को चेतावनी दी है। ईरान के IRGC ने कहा है कि इन जहाजों के चालक दल तुरंत जहाज खाली कर दें। ALSO READ: Top News 9 September: ईरान के 5 तेल टैंकरों पर अमेरिकी हमला, नेपाल में 5.0 का भूकंप; राघव चड्ढा बने दिल्ली के वोटर

 

महंगा हुआ क्रूड 

मिडिल ईस्ट में जंग तेज होने से कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर पहुंच गई है। ब्रेंट क्रूड 99.36 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 94.37 डॉलर प्रति बैरल हो गया। इंडियन बास्केट में कच्चे तेल के दाम बढ़कर 106.3 डॉलर प्रति बैरल हो गए।

अमेरिका का 5 ईरानी टैंकरों पर हमला:जवाब में IRGC ने जॉर्डन में US बेस पर 20 मिसाइलें दागीं, दावा- 18 मार गिराईं

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार (8 सितंबर) को ईरान से जुड़े 5 तेल टैंकरों पर हमला किया। इसके कुछ घंटे बाद ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने की ओर 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन की सेना ने दावा किया कि उसकी एयर डिफेंस ने इनमें से 18 मिसाइलों को मार गिराया, जबकि दो मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि ईरान ने पिछले दो दिनों में अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की थी। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े तेल टैंकरों पर हमला किया। अमेरिका ने ओमान में 4 टैंकरों को निशाना बनाया CENTCOM के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ओमान की खाड़ी में 4 तेल टैंकरों को निशाना बनाया। एक अन्य टैंकर पर ईरान के खार्ग द्वीप के पास हमला किया गया। खार्ग द्वीप ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यात केंद्र है। अमेरिका ने दावा किया कि जिन पांच टैंकरों पर हमला किया गया, वे अरबों डॉलर के एक छाया नेटवर्क का हिस्सा थे। CENTCOM के अनुसार यह नेटवर्क ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के लिए फंड जुटाता है। अमेरिकी सेना ने बताया कि हमले से पहले टैंकरों के चालक दल को जहाज खाली करने का निर्देश दिया गया था। ईरान का जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर हमला अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि उसने अल-अज्राक एयर बेस पर भारी मिसाइल हमले किए। इस बेस के पास मुवाफ्फक सल्ती एयर बेस भी है, जहां अमेरिकी सेना की मौजूदगी रहती है। जॉर्डन की सेना के प्रवक्ता ने बताया कि ईरान की ओर से उसकी सीमा की तरफ 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। एयर डिफेंस सिस्टम ने इनमें से 18 को हवा में ही नष्ट कर दिया। दो मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। जॉर्डन की सेना ने यह भी कहा कि मिसाइल हमले में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। अमेरिका ने कहा- युद्धपोत पर हमला नाकाम हुआ CENTCOM के मुताबिक, ईरान ने अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की थी। अमेरिकी सेना ने कहा कि युद्धपोत ने मिसाइल हमले को सफलतापूर्वक चकमा दे दिया। CENTCOM के अनुसार इस घटना में किसी अमेरिकी सैनिक को नुकसान नहीं हुआ और अमेरिकी युद्धपोत क्षेत्रीय जलक्षेत्र में अपनी गश्त जारी रखे हुए है। अमेरिकी सेना का कहना है कि ईरान के इन हमलों के जवाब में ही पांच तेल टैंकरों पर कार्रवाई की गई। रूबियो की चेतावनी- अमेरिकी जहाज पर हमला किया तो टैंकर खोएगा ईरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ईरान को खुले तौर पर चेतावनी दी है कि अमेरिकी नौसैनिक जहाजों पर हमले की कोशिश का जवाब दिया जाएगा। कोलंबिया में पत्रकारों से बातचीत के दौरान रूबियो ने कहा, “ईरान लगातार अमेरिकी नौसैनिक जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहा है। जब भी वे ऐसा करेंगे या ऐसा करने की कोशिश करेंगे, उन्हें टैंकर गंवाने पड़ेंगे।” उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से इस तरह की कार्रवाई आगे भी देखने को मिल सकती है। ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी जहाजों को भी धमकाया अमेरिकी हमले के बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की नौसेना ने कुवैत और बहरीन के बंदरगाहों के पास मौजूद अमेरिकी संपर्क वाले तेल टैंकरों के चालक दल को चेतावनी दी। IRGC ने कहा कि इन जहाजों के चालक दल को तुरंत अपने जहाज छोड़ देने चाहिए। ईरान ने धमकी दी कि चाहे जहाज बंदरगाह में खड़े हों या समुद्र में एंकर डालकर हों, उन्हें निशाना बनाया जा सकता है। खार्ग द्वीप ईरान के तेल कारोबार के लिए बेहद अहम अमेरिकी कार्रवाई में जिस इलाके को निशाना बनाया गया, उसमें खार्ग द्वीप खास तौर पर महत्वपूर्ण है। यह ईरान का प्रमुख कच्चा तेल निर्यात टर्मिनल है। ईरान के करीब 90% कच्चे तेल का निर्यात इसी द्वीप के जरिए होता है। मुख्य भूमि से पाइपलाइनों के जरिए कच्चा तेल खार्ग द्वीप तक पहुंचाया जाता है और फिर यहां से इसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए भेजा जाता है। इस वजह से खार्ग द्वीप के आसपास किसी भी सैन्य कार्रवाई से ईरान के तेल निर्यात और वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ सकती है। पहले भी ईरान के तेल टैंकरों को निशाना बना चुका है अमेरिका अमेरिका ने इससे पहले 5 सितंबर को 3 ईरानी तेल टैंकरों पर हमला किया था। अमेरिकी सेना के मुताबिक, यह कार्रवाई ईरान की ओर से एक अमेरिकी विमानवाहक पोत और गाइडेड मिसाइल विध्वंसक पर हमला करने की कोशिश के बाद की गई थी। अब पांच और टैंकरों पर अमेरिकी हमले और उसके जवाब में जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ईरानी मिसाइल हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।

पाकिस्तान का नया AI ‘वॉर वीडियो’ वायरल, 32 एयरबेस और 8 विमान तबाह करने का दावा, सबूत नदारद

India-Pakistan Conflict: एयर फोर्स डे के मौके पर, पाकिस्तान एयर फोर्स के डायरेक्टरेट जनरल पब्लिक रिलेशंस ने एक शानदार और ग्राफिक्स से भरपूर वीडियो जारी किया, जिसमें मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष का एक असाधारण रूप दिखाया गया है।

“फिजाओं के पासबान” नाम के इस वीडियो में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने भारतीय वायु सेना के 32 ठिकानों पर हमला किया, दो S-400 एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट किए, भारत के आठ विमान गिराए और भारत के नेशनल पावर ग्रिड और फ्यूल सप्लाई चेन को बाधित किया। एनिमेशन में भारतीय संसद और INS विक्रांत समेत भारत के प्रमुख ठिकानों पर हमले भी दिखाए गए हैं।

वीडियो के ग्राफिक्स से इस फैंटेसी (काल्पनिक कहानी) का दायरा काफी साफ हो जाता है। एक ग्राफिक में दावा किया गया है कि “IAF के 32 बेस पर हमला हुआ”, जबकि दूसरे में दावा है कि चार राफेल, एक Su-30MKI, एक MiG-29, एक मिराज-2000 और एक हेरॉन UAV नष्ट कर दिए गए। अन्य विजुअल में S-400 सिस्टम पर हमले, भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर के बर्बाद होने और भारतीय शहरों की ओर मिसाइलें जाते हुए दिखाई गई हैं।

पाकिस्तान के लिए समस्या काफी सीधी-सी है: वीडियो में बहुत सारे धमाके, मैप और कंप्यूटर से बनाई गई तबाही तो है, लेकिन असल तबाही का बहुत कम सबूत है।

भारत के 32 एयरबेस पर हमला? आखिर इसका सबूत कहां है?

सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि पाकिस्तान ने भारतीय वायु सेना के 32 बेस पर हमला किया। अगर यह सच होता, तो यह एक बहुत बड़ी सैन्य उपलब्धि होती। इसे छिपाना भी बहुत मुश्किल होता।

फिर भी, PAF के वीडियो में इस दावे को साबित करने के लिए सैटेलाइट तस्वीरें, हमले से पहले और बाद की तस्वीरें, रनवे को हुए पहचाने जा सकने वाले नुकसान या नष्ट हुए हैंगर की ऐसी तस्वीरें नहीं दिखतीं जिनकी पुष्टि की जा सके। सीमा के दूसरी तरफ से मिले सबूतों के साथ इसका अंतर साफ दिखता है।

जब मई 2025 की लड़ाई के आखिरी दौर में भारत ने पाकिस्तान के सैन्य बुनियादी ढांचे पर हमला किया, तो सैटेलाइट तस्वीरों से बिल्कुल अलग तरह की जानकारी मिली। ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ ने दो दर्जन से ज्यादा सैटेलाइट तस्वीरों और हमले के बाद के वीडियो का विश्लेषण किया। इसमें पाकिस्तान के कम से कम छह एयरफील्ड पर नुकसान का पता चला, जिनमें तीन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैंगर, दो रनवे और पाकिस्तान वायु सेना द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली दो मोबाइल इमारतें शामिल थीं।

तस्वीरों में नूर खान, भोलारी, शाहबाज, सुक्कुर और मुशफ जैसी जगहों पर नुकसान दिखाई दिया। भोलारी में, एनालिस्ट्स ने एयरक्राफ्ट हैंगर में एक बड़ा छेद देखा। शाहबाज में एक और बड़े हैंगर और कंट्रोल टावर को नुकसान पहुंचा था, जबकि मुशफ और शेख जायद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रनवे पर गड्ढे दिखाई दिए।

बता दें कि जब मिलिट्री को होने वाला नुकसान सिर्फ पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन तक सीमित न रहकर असलियत में सामने आता है, तो वह कुछ ऐसा ही दिखता है।

S-400 वाला दावा पहले ही खारिज किया जा चुका है

PAF के वीडियो में फिर से वही पुराना दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने भारत के दो S-400 एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट कर दिए थे। यह दावा नया नहीं है।

मई 2025 के टकराव के दौरान, पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने भारत का एक S-400 सिस्टम नष्ट कर दिया है। भारत ने उस समय इस आरोप को खारिज कर दिया था। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की फैक्ट चेक यूनिट ने S-400 के नष्ट होने या उसे नुकसान पहुंचाने की खबरों को बेबुनियाद बताया था, जबकि रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तान S-400 सिस्टम और भारतीय एयरफील्ड से जुड़े दावों को लेकर गलत जानकारी फैलाने का अभियान चला रहा है।

असल में, कुछ ही दिनों बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब के आदमपुर एयर फोर्स स्टेशन के अचानक दौरे के दौरान अपनी तस्वीरें जारी कीं, जिनमें वे पूरी तरह सुरक्षित S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के सामने खड़े थे। मई 2025 में जारी इन तस्वीरों को पाकिस्तान की सेना के उन दावों का जवाब माना गया था, जिनमें कहा गया था कि उसने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान बेस और रूस से मिले S-400 सिस्टम को नष्ट कर दिया था।

इसके बाद के भारतीय सैन्य रिकॉर्ड भी पाकिस्तान के दावे से मेल नहीं खाते। मार्च 2026 में, भारत ने पांच और S-400 सिस्टम खरीदने का रास्ता साफ कर दिया था। जबकि जून तक चौथी स्क्वाड्रन भारत पहुंच चुकी थी।

यानी पाकिस्तान के नए एनिमेशन ने असल में उस दावे को ही लिया है जिस पर 2025 में ही विवाद था, और बस इस बार उसे कंप्यूटर से नया रूप दिया है।

8 विमानों के दावे की सच्चाई की जांच होनी चाहिए

वीडियो में दावा किया गया है कि भारत के 8 विमान नष्ट हो गए थे। ग्राफिक में खास तौर पर चार राफेल, एक Su-30MKI, MiG-29, Mirage-2000 और Heron UAV का जिक्र किया गया है।

हालांकि, भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने माना कि शुरुआत में भारत को हवाई हमले में नुकसान हुआ था, लेकिन उन्होंने पाकिस्तान के बहुत बड़े दावे को खारिज कर दिया। उन्होंने पाकिस्तानी आंकड़ों को “पूरी तरह गलत” बताया और कहा कि शुरुआती नुकसान के बाद भारत ने आगे हमले करने से पहले अपनी रणनीति बदल ली थी।

आखिरकार, इस पूरे मामले में चल रही प्रचार की जंग ने एक दिलचस्प मोड़ ले लिया।

अगस्त 2025 में, भारतीय एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने कहा कि संघर्ष के दौरान भारत ने पाकिस्तान के पांच फाइटर जेट और एक अन्य मिलिट्री एयरक्राफ्ट को मार गिराया था। उनके अनुसार, पाकिस्तान के ज्यादातर एयरक्राफ्ट भारत के S-400 सिस्टम से गिराए गए थे। उन्होंने इसकी पुष्टि के लिए इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग डेटा का हवाला दिया।

हालांकि, दोनों पक्षों ने युद्ध के मैदान को लेकर दावे किए हैं, लेकिन कुछ वास्तविक नुकसान को स्वीकार करने और एक एनिमेटेड स्कोरबोर्ड दिखाने में बहुत बड़ा अंतर है—जैसे कि नक्शे पर दिखाए गए हर धमाके की स्वतंत्र रूप से पुष्टि की गई हो।

पाकिस्तान के अपने एयर बेस एक अजीब तुलना पेश करते हैं

शायद PAF के हालिया वीडियो के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि मई 2025 की असली सैटेलाइट तस्वीरें एक ऐसी कहानी बताती हैं जिसे पाकिस्तान सिर्फ एनिमेशन से नहीं बदल सकता।

पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद भारत ने पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए। भारत के रक्षा मंत्रालय ने 10 मई को कहा कि उसकी सेनाओं ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों, जिनमें एयर डिफेंस सिस्टम भी शामिल थे, पर हमले किए। स्टिमसन सेंटर के हमले के बाद के आकलन में पाया गया कि भारतीय हमलों ने कम से कम 11 जगहों को निशाना बनाया, जिनमें नूर खान, रफीकी, रहीम यार खान, सुक्कुर, सरगोधा, भोलाड़ी और जैकोबाबाद शामिल हैं। कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरों से इन एयर बेस में से ज्यादातर पर हमलों की पुष्टि हुई।

वाशिंगटन पोस्ट ने इन हमलों को 1971 की लड़ाई के बाद पाकिस्तान के सैन्य बुनियादी ढांचे पर भारत का सबसे बड़े हवाई हमला बताया। पाकिस्तान ने खुद माना कि सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा और हमले के बाद वायु सेना के 6 जवान मारे गए।

तस्वीरों से यह भी पता चला कि जमीन पर हुए नुकसान का मतलब सिर्फ कुछ मामूली निशान नहीं थे। हैंगर टूट गए थे, रनवे पर बड़े गड्ढे हो गए थे और मिलिट्री की इमारतों पर हमले हुए थे।

यह फर्क इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे पता चलता है कि मिलिट्री का गंभीर आकलन कैसा होता है। इसके लिए यह दावा करने की जरूरत नहीं है कि पूरी एयर फोर्स ही गायब हो गई। इसके लिए यह दिखाना जरूरी है कि असल में किन चीजों पर हमला हुआ।

एयर बेस से लेकर नेशनल ग्रिड तक

PAF का वीडियो सिर्फ एयरक्राफ्ट और एयर बेस तक ही सीमित नहीं है। इसके ग्राफिक्स में भारत के नेशनल ग्रिड, फ्यूल सप्लाई चेन और मिलिट्री सैटेलाइट क्षमताओं को बाधित करने का भी दावा किया गया है। एक हिस्से में भारत का नक्शा दिखाया गया है जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर को बर्बाद होते हुए दिखाया गया है, जबकि दूसरे हिस्से में बड़े पैमाने पर साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर कैंपेन को दिखाया गया है।

यहां भी, ज्यादातर काम एनिमेशन के जरिए ही दिखाया गया है।

इन बड़े दावों के साथ कोई ऐसी सैटेलाइट इमेज या स्वतंत्र रूप से वेरिफाई किया जा सकने वाला ठोस सबूत नहीं है जिसकी तुलना की जा सके। समस्या तब और साफ हो जाती है जब वीडियो किसी खास जगह पर हुए खास नुकसान के बजाय, पूरे देश में चलाए गए कथित कैंपेन को कंप्यूटर से बनाए गए धमाकों की एक सीरीज के तौर पर दिखाता है।

जाहिर है, युद्ध में साइबर ऑपरेशन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और ऐसी रुकावटें शामिल हो सकती हैं जिनकी तस्वीरें अंतरिक्ष से नहीं ली जा सकतीं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि एनिमेशन इस बात का सबूत बन जाता है कि वे ऑपरेशन असल में हुए थे।

और फिर बारी आती है संसद की

वीडियो में संसद परिसर समेत भारत के अहम राष्ट्रीय ठिकानों पर हमले दिखाए गए हैं। यह टीवी पर तो रोमांचक लग सकता है, लेकिन सबूत के तौर पर इसकी अहमियत बहुत कम है।

कंप्यूटर से बनाए गए एक सीन में मिसाइलों को एक जानी-पहचानी जगह की ओर बढ़ते हुए दिखाया गया है, जिससे पता चलता है कि इसे बनाने वाले दर्शकों को क्या दिखाना चाहते थे। इससे यह साबित नहीं होता कि असल में उस जगह पर हमला हुआ था।

यही बात उन दृश्यों पर भी लागू होती है जिनमें भारत में धमाके, आसमान से गिरते विमान और सेना के ढांचे को ढहते हुए दिखाया गया है। ये दृश्य भले ही प्रभावशाली हों, लेकिन स्वतंत्र पुष्टि के बिना सबूत के तौर पर इनकी कोई खास अहमियत नहीं है।

आसिम मुनीर की जीत की कहानी को एक और ग्राफिक्स पैकेज मिला

PAF की इस प्रस्तुति का एक व्यापक राजनीतिक संदर्भ भी है। मई 2025 के संघर्ष के कुछ ही समय बाद, पाकिस्तान ने सेना प्रमुख आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल का दर्जा दिया। सरकार ने उनकी “रणनीतिक सूझबूझ और साहसी नेतृत्व” का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित की और दुश्मन को हराया।

तब से, इस संघर्ष के बारे में सेना का नजरिया पाकिस्तान के आधिकारिक संदेश का मुख्य हिस्सा बन गया है।

PAF का ताजा वीडियो इसी नजरिए के साथ पूरी तरह मेल खाता है। भले ही युद्ध के मैदान का घटनाक्रम जटिल रहा हो, लेकिन एनिमेशन बिल्कुल सरल है। यह एक साफ-सुथरा स्कोरबोर्ड दिखाता है: भारतीय विमान नष्ट, भारतीय बेस पर हमले, S-400 सिस्टम खत्म, बुनियादी ढांचा बर्बाद और पाकिस्तान की जीत।

हकीकत इससे काफी अलग और जटिल है।

उपलब्ध सबूतों से पता चलता है कि भारत को कुछ विमानों का नुकसान हुआ था, खासकर संघर्ष के शुरुआती दौर में। लेकिन यह भी सामने आया है कि इसके बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर सटीक और दूर तक पहुंचने वाले हमले किए। सैटेलाइट तस्वीरों में पाकिस्तान के कई एयरबेस पर हुए नुकसान को साफ देखा गया।

और यही वजह है कि PAF का यह नया वीडियो काफी कुछ बताता है।

दावा जितना बड़ा और शानदार होता जाता है, सबूतों की कमी उतनी ही ज्यादा साफ दिखाई देती है।

जब युद्ध का मैदान वीडियो-एडिटिंग का मुकाबला बन जाए

मई 2025 के टकराव में दोनों पक्षों को असल सैन्य सफलताएं और नाकामियां मिलीं। साथ ही, अलग-अलग दावे, बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बातें और गलत सूचनाओं की बाढ़ भी देखने को मिली।

लेकिन एक साल से ज्यादा समय बीतने के बाद, ऐसा लगता है कि पाकिस्तान की वायु सेना एनिमेशन के जरिए इस बहस को खत्म करने की कोशिश कर रही है।

यहां एक साफ विरोधाभास है।

PAF के वीडियो में दावा किया गया है कि उसने भारत के 32 ठिकानों पर हमला किया, दो S-400 सिस्टम नष्ट किए, 8 विमान तबाह किए, भारत के ग्रिड को बेकार कर दिया और देश के अहम ठिकानों पर हमले किए। फिर भी, जब सवाल यह उठता है कि “सबूत कहां है?”, तो उसका जवाब ज्यादातर उस वीडियो के अंदर ही मिलता है।

भारत को हुए सैन्य नुकसान की स्वतंत्र रूप से जांच की जा सकती है। इसके लिए दुर्घटनास्थल की तस्वीरें और दूसरे उपलब्ध सबूत देखे जा सकते हैं। वहीं, पाकिस्तान के एयरबेस को हुए नुकसान की जांच कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए की जा सकती है। भारत के हमलों के बाद पाकिस्तान की सेना ने भी अपने सैन्य ढांचे को हुए नुकसान की बात स्वीकार की थी।

ऐसे में PAF के सामने एक मुश्किल स्थिति है। या तो वह अपने एनीमेशन में और धमाके जोड़ता रहे, या फिर उन दावों के समर्थन में सैटेलाइट तस्वीरें पेश करे।

पाकिस्तानी सेना के वीडियो में भारतीय संसद पर हमला:एयरबेस-विमान तबाह करने का दावा; यूजर्स बोले– हकीकत में जीत नहीं पाए, इसलिए AI वीडियो बनाया

पाकिस्तानी सेना ने मई 2025 में भारत के साथ हुए संघर्ष को लेकर एक नया वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में भारत की संसद पर हमला होते हुए दिखाया गया है। साथ ही, इसमें दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने भारत के 32 एयरफोर्स बेस पर हमला किया, 8 भारतीय विमान गिराए और 2 S-400 एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट किए।वीडियो में ज्यादातर घटनाओं को AI, ग्राफिक्स और एनीमेशन के जरिए दिखाया गया है वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर इसका मजाक बनने लगा। एक यूजर्स ने कहा कि वे हकीकत में नहीं जीत पाए तो AI का सहारा लेना पड़ा। वहीं दूसरे ने सवाल किया कि अगर इतनी बड़ी जीत हुई है तो सैटेलाइट तस्वीरें कहां हैं, क्यों सिर्फ ग्राफिक्स पर निर्भर रहना पड़ रहा है। 32 एयरबेस पर हमले का सबूत नहीं पाकिस्तान ने 32 भारतीय एयरबेस को निशाना बनाने का दावा तो किया है, लेकिन वीडियो में इसके समर्थन में सैटेलाइट तस्वीरें या हमले के पहले और बाद की तस्वीरें नहीं दिखाई गई हैं। रनवे के नुकसान या नष्ट हुए हैंगर की ऐसी तस्वीरें भी नहीं हैं। इसके उलट, मई 2025 में पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर हुए भारतीय हमलों के बाद सैटेलाइट तस्वीरों से नुकसान की पुष्टि हुई थी। वॉशिंगटन पोस्ट ने 2 दर्जन से ज्यादा सैटेलाइट तस्वीरों और हमले के बाद के वीडियो का विश्लेषण किया था। इसमें पाकिस्तान के कम से कम 6 एयरफील्ड पर नुकसान मिला था। इनमें 3 बड़े हैंगर, 2 रनवे और पाकिस्तान एयरफोर्स की 2 मोबाइल इमारतों को नुकसान शामिल था। नूर खान, भोलारी, शाहबाज, सुक्कुर और मुशफ जैसे ठिकानों पर भी नुकसान दिखाई दिया था। भोलारी में एक एयरक्राफ्ट हैंगर में बड़ा छेद मिला था, जबकि शाहबाज में हैंगर और कंट्रोल टावर को नुकसान पहुंचा था। भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट करने का पुराना दावा दोहराया पाकिस्तान एयरफोर्स ने नए वीडियो में भारत के 2 S-400 एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट करने का दावा भी दोहराया है। मई 2025 के संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने भारत का एक S-400 सिस्टम नष्ट कर दिया है। भारत ने इसे खारिज किया था। PIB की फैक्ट चेक यूनिट ने S-400 को नुकसान पहुंचने या नष्ट होने की खबरों को बेबुनियाद बताया था। रक्षा मंत्रालय ने भी पाकिस्तान पर S-400 और भारतीय एयरफील्ड को लेकर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया था। इसके कुछ दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब के आदमपुर एयरफोर्स स्टेशन का दौरा किया था। वहां S-400 सिस्टम के सामने उनकी तस्वीरें जारी की गई थीं। पावर ग्रिड और साइबर हमले का भी दावा वीडियो में भारत के नेशनल पावर ग्रिड, ईंधन सप्लाई और सैन्य सैटेलाइट सिस्टम को नुकसान पहुंचाने का भी दावा किया गया है। साथ ही साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर का बड़ा अभियान चलाने की बात कही गई है। इन दावों के साथ भी सबूत नहीं दिए गए हैं। सिर्फ कंप्यूटर एनीमेशन को ऐसे हमलों का सबूत भी नहीं माना जा सकता। वीडियो में INS विक्रांत जैसे बड़े राष्ट्रीय ठिकाने पर मिसाइल हमले भी दिखाए गए हैं।लेकिन यह साबित नहीं करता कि वहां वास्तव में हमला हुआ था। यही बात वीडियो में दिखाए गए दूसरे धमाकों, गिरते विमानों और तबाह होते सैन्य ठिकानों पर भी लागू होती है। ————— यह खबर भी पढ़ें… रक्षा-समझौते की आड़ में हथियारों का जखीरा भर रहा पाकिस्तान: तुर्किये से ड्रोन की सप्लाई, 60 घंटे में दर्जनों सैन्य विमान पहुंचे सऊदी अरब और तुर्किये से हुए रक्षा समझौते की आड़ में पाकिस्तान हथियारों का जखीरा बढ़ा रहा है। पूरी खबर पढ़ें…

ट्रम्प ने ईरान के परमाणु-ठिकाने पर हमले की धमकी दी:कहा- ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे, खुफिया निगरानी जारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के बेहद सुरक्षित भूमिगत परमाणु ठिकाने पिकैक्स माउंटेन पर जल्द जोरदार हमला करने की चेतावनी दी है। ट्रम्प ने शुक्रवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से कहा कि अगर इस जगह पर किसी तरह की गतिविधि दिखाई दी तो अमेरिका इसे निशाना बना सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इस ठिकाने पर होने वाली गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ पिछले पांच महीने से चल रहे अमेरिकी सैन्य अभियान का बचाव किया। उन्होंने कहा कि अभियान का सबसे बड़ा मकसद ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है। जमीन के अंदर बेहद सुरक्षित है पिकैक्स माउंटेन पिकैक्स माउंटेन ईरान के नतांज यूरेनियम संवर्धन केंद्र के पास स्थित है। नतांज पर पहले ही भारी नुकसान हो चुका है। यह जमीन के अंदर बना बेहद मजबूत और सुरक्षित परिसर है। इसमें जमीन के काफी नीचे दो बड़े सुरंग सिस्टम बताए जाते हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइली खुफिया अधिकारियों का मानना है कि ईरान ने हजारों सेंट्रीफ्यूज इस गहरे भूमिगत ठिकाने पर पहुंचा दिए हैं। सेंट्रीफ्यूज का इस्तेमाल यूरेनियम को संवर्धित करने के लिए किया जाता है। पिकैक्स माउंटेन जमीन के काफी नीचे होने की वजह से सामान्य हवाई हमलों से इसे नुकसान पहुंचाना मुश्किल है। ऐसे में अगर अमेरिका इस ठिकाने पर हमला करता है तो यह ईरान के परमाणु ठिकानों के खिलाफ चल रहे अभियान को और बड़ा रूप दे सकता है। ट्रम्प बोले- अमेरिका ने बड़ा क्षेत्रीय युद्ध रोका ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की वजह से पश्चिम एशिया में बड़ा युद्ध होने से बचा है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने कार्रवाई नहीं की होती तो इजराइल और पूरे पश्चिम एशिया को ज्यादा गंभीर खतरे का सामना करना पड़ता। ट्रम्प ने कहा, “अगर हम वहां नहीं जाते तो आज इजराइल नहीं होता, मध्य पूर्व नहीं होता और वे शायद इसके बाद यूरोप और हमारे शहरों को निशाना बनाते। लेकिन हमने उन्हें पांच महीने में परमाणु हथियार बनाने से रोक दिया।” ट्रम्प का दावा- ईरान के रडार दो बार तबाह किए ट्रम्प ने ईरान के रडार सिस्टम पर किए गए हालिया अमेरिकी हमलों के बारे में भी बात की। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के बेहद आधुनिक रडार सिस्टम को दो बार नष्ट किया है। ट्रम्प ने कहा कि हालिया हमले से पहले कई दिनों तक कोई गोलीबारी नहीं हुई थी। लेकिन ईरान ने पहले रडार लगाए थे, जिन्हें अमेरिका ने नष्ट कर दिया था। इसके बाद ईरान ने फिर नए रडार लगाए और अमेरिका ने उन्हें भी नष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि लगातार हमलों के बाद ईरान शायद अब नए रडार लगाने से बच रहा है। अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले ट्रम्प का यह बयान अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के उस बयान के कुछ दिन बाद आया है, जिसमें अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर नए हमले करने की जानकारी दी थी। CENTCOM के मुताबिक, पिछले हफ्ते किए गए हमलों में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, रडार सिस्टम, समुद्री सैन्य उपकरण, समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने की क्षमता और संचार से जुड़े ठिकाने शामिल थे। CENTCOM ने कहा कि ये हमले ईरान के IRGC की ओर से हाल में किए गए कथित हमले की कोशिशों के बाद हुए। अमेरिका के मुताबिक, इन कोशिशों में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों और अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की कोशिश शामिल थी। ईरान ने अमेरिकी हमलों की निंदा की ईरान ने अमेरिका के हालिया हमलों की कड़ी निंदा की है। ईरान ने अमेरिका पर उसकी संप्रभुता का उल्लंघन करने और कई प्रांतों में गैर-सैन्य बुनियादी ढांचे और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसकी सेना ने अमेरिका के खिलाफ जोरदार रक्षात्मक हमले किए हैं। ईरान के मुताबिक, पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने ही वे जगहें हैं, जहां से अमेरिकी हमलों की शुरुआत, मदद और तैयारी की जा रही थी। इन्हीं ठिकानों को उसके जवाबी हमलों में निशाना बनाया गया। —————— यह खबर भी पढ़ें… ईरान ने US को चिढ़ाया- ‘हबीबी अंकल सैम, ईरान आओ’: दूतावास ने होर्मुज में माइनस्वीपर गेम का वीडियो पोस्ट किया ईरान ने अमेरिका को चिढ़ाते हुए एक वीडियो शेयर किया है। सिएरा लियोन में ईरानी दूतावास ने 35 सेकेंड का वीडियो पोस्ट किया। इसके साथ लिखा- “हबीबी (अंकल सैम), ईरान आओ!” पूरी खबर पढ़ें…