‘मैं लोगों की जान नहीं लेना चाहता’, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कैंसिल किए ‘भीषण हमले’, ईरानी मीडिया ने कस दिया तंज

Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले का फैसला टाल दिया है। उन्होंने अपने इस निर्णय को लेकर कहा कि ने निर्दोषों की जान नहीं लेना चाहते हैं। युद्ध में लोगों की मौत होती है और वे ऐसा नहीं चाहते। उन्होंने दावा किया कि इस बाबत उन्होंने सऊदी अरब के किंग और क्र

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Gold Price Today: सावन के पहले सोमवार को सोना फिसला, दिल्ली में ₹132240 पर आया 22 कैरेट

देश में सोने की कीमत में गिरावट नजर आ रही है। सावन के पहले सोमवार को ज्यादातर शहरों में दाम फिसला है। 3 अगस्त की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत घटकर 144360 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। मुंबई में कीमत 144210 रुपये प्रति 10 ग्राम है। बीते एक सप्ताह में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 710 रुपये तक ​गिरी। वहीं 22 कैरेट गोल्ड का भाव 750 रुपये तक नीचे आया।

रॉयटर्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना महंगा हुआ है। कीमत बढ़कर 4,067.06 डॉलर प्रति औंस हो गई है। इसकी वजह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जल्द समझौते की उम्मीद जताई है और नया हमला करने का फैसला टाल दिया है। इसके कारण महंगाई और ऊंची ब्याज दरों को लेकर चिंताएं कुछ कम हुईं।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 144360 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 132240 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 132190 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 144210 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 144600 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 132550 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 144210 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 132190 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली132240144360
मुंबई132190144210
अहमदाबाद132240144260
चेन्नई132550144600
कोलकाता132190144210
हैदराबाद132190144210
जयपुर132240144360
भोपाल132240144260
लखनऊ132240144360
चंडीगढ़132240144360

Silver Price Outlook: चांदी इस साल ₹65000 सस्ती हुई, एक्सपर्ट्स से जानिए अब दाम घटेंगे या बढ़ेंगे

चांदी का भाव

चांदी की कीमत में भी देश के अंदर गिरावट है। 3 अगस्त की सुबह चांदी 234900 रुपये प्रति किलोग्राम पर है। बीते एक सप्ताह में इसका भाव 5000 रुपये ​लुढ़का। रॉयटर्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत बढ़कर 58.02 डॉलर प्रति औंस हो गई है।

Stock Market Live Update: बाजार लगाएगा आज तेजी की छलांग, गिफ्ट निफ्टी दे रहा गैप-अप ओपनिंग के संकेत

Stock Market Live Update: क्रूड में नरमी से गिफ्ट निफ्टी का जोश हाई है। गिफ्ट निफ्टी 125 अंकों की तेजी के साथ ट्रेड कर रहा है। वहीं US फ्यूचर्स भी ऊपर है। 4.74 परसेंट तक जाने के बाद US बॉन्ड यील्ड नरम पड़ी है और यह 4.7 के नीचे फिसली है। इधर शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में भी रौनक दिखी। हालांकि एशिया दबाव में नजर आ रहा है। कोस्पी 5 परसेंट तो जापान का बाजार निक्केई 3 परसेंट नीचे फिसला है।

रविवार को ट्रंप के यह कहने के बाद कि उन्होंने ईरान के खिलाफ़ तय हमले रद्द कर दिए हैं, तेल की कीमतों में गिरावट आई। तेहरान और मध्य पूर्व के दूसरे देशों ने उनसे हमले न करने का अनुरोध किया था ताकि दोनों पक्ष किसी समझौते पर पहुंच सकें।

ट्रंप ने कहा कि प्रस्तावित समझौते में “होरमुज़ जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़) को तुरंत, पूरी तरह और हर तरह से खोलने” का प्रावधान होगा और इससे ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े खतरे का भी समाधान होगा। ब्रेंट क्रूड की कीमत $3.52 गिरकर $84.41 प्रति बैरल हो गई, जबकि U.S. वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट की कीमत $3.49 गिरकर $81.18 हो गई।

अमेरिका-ईरान में आज से फिर बातचीत शुरू होगी:ट्रम्प ने एलान किया; बोले- कार्रवाई कर सकते हैं, लेकिन लोगों को मारना नहीं चाहता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि सोमवार से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत शुरू होगी। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वार्ता मध्यस्थों के जरिए होगी। ट्रम्प ने कहा, “हम जब चाहें कार्रवाई कर सकते हैं, लेकिन मैं लोगों को मारना नहीं चाहता। अगर समझौता हो जाता है तो बहुत-सी जानें बच जाएंगी। देखते हैं बातचीत का क्या नतीजा निकलता है।” ट्रम्प के मुताबिक, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ईरान के साथ हुई कूटनीतिक बातचीत के बाद उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित बड़ा हमला टाल दिया। उन्होंने दावा किया कि बातचीत में होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी। हालांकि, ईरान ने ट्रम्प के कई दावों से इनकार किया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अभी कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ट्रम्प ने फिलहाल ईरान पर हमला टाला: ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान और दूसरे पश्चिम एशियाई देशों की ओर से समझौते का प्रस्ताव मिलने के बाद अमेरिका ने फिलहाल ईरान पर प्रस्तावित हमला टाल दिया है। 2. ईरान की चेतावनी- हमला हुआ तो अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएंगे: ईरानी सांसद इब्राहिम रेजाई ने कहा कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो ईरान सिर्फ खाड़ी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि जहां-जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं, उन्हें निशाना बनाएगा। 3. ट्रम्प और सऊदी क्राउन प्रिंस ने तनाव कम करने पर की बात: ट्रम्प और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने फोन पर पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने बातचीत और सीजफायर के जरिए तनाव कम करने पर जोर दिया। 4. अमेरिका के मिसाइल डिफेंस सिस्टम का स्टॉक तेजी से घटा: CSIS की रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार सैन्य अभियानों के कारण अमेरिका के पैट्रियट और THAAD इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार तेजी से कम हुआ है। रिपोर्ट में इसे भविष्य के संभावित संघर्षों के लिए बड़ी चुनौती बताया गया है। 5. रूबियो बोले- होर्मुज स्ट्रेट का विकल्प तैयार करना होगा: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि दुनिया को तेल और गैस की सप्लाई के लिए सिर्फ होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। इसके लिए वैकल्पिक समुद्री मार्ग विकसित करने होंगे, हालांकि एक्सपर्ट्स इसे आसान नहीं मानते। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

Silver Price Outlook: चांदी इस साल ₹65000 सस्ती हुई, एक्सपर्ट्स से जानिए अब दाम घटेंगे या बढ़ेंगे

Silver Price Outlook: इस साल चांदी ने निवेशकों को निराश किया है। साल की शुरुआत से अब तक इसकी कीमत करीब 23% गिर चुकी है। सिर्फ जून महीने में ही इसमें 22% की बड़ी गिरावट आई। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी करीब 58 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही है। भारत में इसका भाव करीब ₹2.20 लाख प्रति किलो है। इसका मतलब है कि इस साल चांदी ₹65,000 प्रति किलो सस्ती हो चुकी है।

हालांकि, पिछले एक साल में चांदी ने 50% से ज्यादा का रिटर्न दिया था। लेकिन अब कीमतें दिसंबर 2025 के स्तर के आसपास लौट आई हैं। सवाल यह है कि आखिर चांदी पर दबाव क्यों बना हुआ है?

तेल की कीमतें बनी सबसे बड़ी वजह

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। ईरान युद्ध के बाद होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ा है। इससे तेल की सप्लाई पर असर पड़ा और कीमतें चढ़ गईं। फिलहाल ब्रेंट क्रूड करीब 86 डॉलर प्रति बैरल पर है, जो युद्ध शुरू होने से पहले के मुकाबले करीब 20% ज्यादा है। अगर तनाव और बढ़ता है, तो तेल महंगा हो सकता है। इससे महंगाई बढ़ेगी और दुनिया भर के बाजारों पर दबाव आएगा।

फेड की ब्याज दरें क्यों हैं अहम?

तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ती है। ऐसे में अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बनता है। अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो डॉलर मजबूत होता है। ऐसे समय में निवेशक सोना और चांदी जैसे बिना ब्याज वाले एसेट छोड़कर डॉलर आधारित निवेश की ओर रुख करते हैं। यही वजह है कि चांदी की कीमतों पर दबाव बना रहता है।

चांदी सोने से ज्यादा उतार-चढ़ाव वाली

चांदी की कीमतें सोने के मुकाबले ज्यादा तेजी से ऊपर-नीचे होती हैं। इसकी वजह यह है कि चांदी सिर्फ निवेश का जरिया नहीं, बल्कि औद्योगिक धातु भी है। इसका इस्तेमाल सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल, डेटा सेंटर और पावर ग्रिड जैसे सेक्टरों में होता है। इसलिए औद्योगिक मांग में थोड़ा भी बदलाव कीमतों पर बड़ा असर डाल सकता है।

गोल्ड सिल्वर रेशियो क्या होता है

जून 2026 में जब सोना 4,000-4,060 डॉलर प्रति औंस के बीच था, तब चांदी 60-61 डॉलर प्रति औंस पर थी। उस समय गोल्ड-सिल्वर रेशियो करीब 67 था। इससे पहले मई में यह 55 और जनवरी में 50 तक आ गया था।

गोल्ड-सिल्वर रेशियो बताता है कि 1 औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी चाहिए। इसे सोने की कीमत को चांदी की कीमत से भाग देकर निकाला जाता है। अगर रेशियो 75 या उससे ज्यादा हो, तो इसका मतलब माना जाता है कि चांदी सोने के मुकाबले सस्ती है। वहीं, अगर यह 50-60 या उससे नीचे हो, तो सोना सस्ता माना जाता है।

क्या अभी चांदी सस्ती है?

Bonanza के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निरपेन्द्र यादव का कहना है कि 70 का रेशियो अपने लंबे समय के औसत के करीब है। यह बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन फिर भी चांदी सोने के मुकाबले थोड़ी सस्ती नजर आती है। खासकर तब, जब औद्योगिक मांग मजबूत बनी रहे। भारत में दिसंबर 2025 से चांदी की कीमत लगातार ₹2 लाख प्रति किलो से ऊपर बनी हुई है।

आगे किस धातु में ज्यादा दम?

निरपेन्द्र यादव का मानना है कि फिलहाल गोल्ड-सिल्वर रेशियो 65 से 75 के बीच रह सकता है। यह काफी हद तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और वैश्विक आर्थिक स्थिति पर निर्भर करेगा। अगर फेड ब्याज दरें घटाता है, डॉलर कमजोर पड़ता है और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सुधार आता है, तो चांदी सोने से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। इससे Gold-Silver Ratio घटकर 60-65 तक आ सकता है।

वहीं, अगर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, मंदी का खतरा गहराता है या निवेशक सुरक्षित निवेश की तरफ भागते हैं, तो सोना चांदी से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। ऐसे में यह रेशियो 70 से ऊपर बना रह सकता है।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा समय में सिर्फ सोना या सिर्फ चांदी चुनने के बजाय दोनों में संतुलित निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है।

अगर आपका लक्ष्य पूंजी की सुरक्षा है और आप कम जोखिम लेना चाहते हैं, तो सोना बेहतर विकल्प माना जा सकता है। लेकिन अगर आप थोड़ा ज्यादा जोखिम उठा सकते हैं और लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो धीरे-धीरे चांदी में हिस्सेदारी बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है। क्योंकि मौजूदा वैल्यूएशन के हिसाब से चांदी में आगे बेहतर प्रदर्शन की संभावना बनी हुई है।

Gold Price Today: अगस्त के पहले दिन सोना हुआ और महंगा, 24 और 22 कैरेट दोनों का बढ़ गया भाव

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इंडोनेशिया में बड़ा हादसा, बीच समुद्र में नाव में लगी आग, 5 की मौत, 41 लापता, 271 लोग थे सवार

Big maritime accident in Indonesia : इंडोनेशिया में रविवार को मदुरा द्वीप के पास एक यात्री नौका में भीषण आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। खबरों के अनुसार, इस हादसे में अब तक 5 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 41 लोग अभी भी लापता हैं। नौका में कुल 271 यात्री और चालक दल के सदस्य सवार थे, जिनमें से 225 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में नौका के ऊपरी डेक से घना काला धुआं उठता हुआ दिखाई दे रहा है। कुछ लोग जहाज से पानी में कूदते हुए भी दिख रहे हैं।

 

225 लोगों को सुरक्षित बचाया

इंडोनेशिया में रविवार को मदुरा द्वीप के पास एक यात्री नौका में भीषण आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। खबरों के अनुसार, इस हादसे में अब तक 5 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 41 लोग अभी भी लापता हैं। नौका में कुल 271 यात्री और चालक दल के सदस्य सवार थे, जिनमें से 225 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है।

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वायरल हो रहा हादसे का वीडियो

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में नौका के ऊपरी डेक से घना काला धुआं उठता हुआ दिखाई दे रहा है। कुछ लोग जहाज से पानी में कूदते हुए भी दिख रहे हैं। यह नौका पूर्वी जावा प्रांत के सुराबाया से दक्षिण सुलावेसी के मकासर जा रही थी, तभी उसमें आग लग गई। कई जहाजों की मदद से बड़े पैमाने पर राहत और बचाव दल युद्ध स्तर पर तलाश अभियान चलाया जा रहा है।

 

हादसे के कारणों की हो रही जांच

अभी तक आग लगने के कारण का पता नहीं चला है। हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। नौका आग लगने के बाद चीख-पुकार मच गई। तेज हवा के कारण पूरी नौका धूं-धूं कर जलने लगी। मदुरा द्वीप जावा के उत्तर-पूर्वी तट के पास स्थित है। यह क्षेत्र समुद्री परिवहन के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

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क्‍यों होती हैं समुद्री दुर्घटनाएं?

गोताखोरों को भी समुद्र में उतारा गया है। फिलहाल अभी लापता लोगों के बारे में पता नहीं लग पाया है। इंडोनेशिया, जो कि 17000 से ज्यादा द्वीपों का एक समूह है। यहां समुद्री दुर्घटनाएं आम बात हैं। इसकी कुछ वजहें सुरक्षा के ढीले नियम और मौसम का अनिश्चित मिजाज है।   

CJP संस्थापक अभिजीत दिपके के पिता ने बेटे की विदेश में पढ़ाई का खर्च कैसे उठाया? RTI कार्यकर्ता ने जांच की मांग की

CJP protest ends Abhijeet Dipke

कॉकरोज जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के पिता की आर्थिक स्थिति और उनके बेटे की विदेश में हुई उच्च शिक्षा के खर्च को लेकर सूरत के एक RTI कार्यकर्ता ने जांच की मांग की है। RTI कार्यकर्ता अमित तिवारी ने इस मामले को लेकर निर्वाचन आयोग और कर अधिकारियों से भी वित्तीय पहलुओं की जांच करने का आग्रह किया है।

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अमित तिवारी ने सवाल उठाया है कि महाराष्ट्र सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारी भगवानराव दिपके ने अपने बेटे की विदेश में उच्च शिक्षा का खर्च किस तरह वहन किया। उन्होंने भगवानराव दिपके की वित्तीय स्थिति की जांच की मांग करते हुए उनकी सरकारी सेवा और सेवानिवृत्त कर्मचारी होने की स्थिति का हवाला दिया है।

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कपिल सिब्बल के 1 करोड़ रुपए के कानूनी सहायता फंड पर भी सवाल

 

RTI कार्यकर्ता ने वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल की ओर से CJP प्रदर्शनकारियों के लिए घोषित 1 करोड़ रुपए के कानूनी रक्षा कोष को लेकर भी निर्वाचन आयोग और कर अधिकारियों से जांच की मांग की है।

 

सिब्बल ने सोमवार को NEET पेपर लीक विवाद को लेकर हुए आंदोलन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए CJP की ओर से बनाए गए फंड में 1 करोड़ रुपए देने की घोषणा की थी। तिवारी ने इस फंड की प्रकृति और इसके वित्तीय स्रोतों की भी जांच किए जाने की मांग की है।

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CJP के राजनीतिक दल के रूप में संचालन पर भी सवाल

 

अमित तिवारी ने कॉकरोज जनता पार्टी (CJP) की कानूनी और राजनीतिक स्थिति पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि CJP एक अपंजीकृत संस्था है, लेकिन राजनीतिक दल के नाम से काम कर रही है। तिवारी के मुताबिक, यदि CJP के लिए 1 करोड़ रुपए का कानूनी रक्षा कोष घोषित किया गया है, तो चुनाव आयोग को यह जांचना चाहिए कि क्या यह संगठन जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत पंजीकृत है या नहीं। उन्होंने कहा कि यदि संस्था पंजीकृत नहीं है, तो राजनीतिक दल के नाम से उसका संचालन और धन का संग्रह या प्राप्ति जांच के दायरे में आ सकती है।

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GST को लेकर भी जांच की मांग

RTI कार्यकर्ता ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) का भी रुख किया है। उन्होंने बोर्ड से यह जांचने का अनुरोध किया है कि सिब्बल की प्रस्तावित 1 करोड़ रुपए की राशि पर GST लागू होता है या नहीं। फिलहाल, इन सभी मुद्दों पर RTI कार्यकर्ता की ओर से जांच की मांग की गई है। उनके आरोपों और सवालों के आधार पर संबंधित प्राधिकरणों की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

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कौन हैं अमित तिवारी

अमित तिवारी गुजरात के सूरत जिले के रहने वाले हैं। वे एक आरटीआई एक्टिविस्ट हैं। अभिजीत दिपके और उनके पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने के बाद अमित तिवारी सुर्खियों में हैं। यह पहला मामला है जब अमित तिवारी किसी तरह की सुर्खियों में आए हो। इससे पहले उन्हें कम लोग ही जानते थे।

Iran-US War Update: ईरान को धमकाते हुए क्यों पीछे हटे ट्रंप? फिलहाल ईरान पर हमला नहीं करेगा अमेरिका, सैन्य कार्रवाई रोकी

Iran-US War Update: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमला फिलहाल टाल दिया है। ट्रंप के अनुसार, ईरान और मध्य पूर्व के कुछ अन्य देशों ने संभावित समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। इसके बाद उन्होंने वैश्विक हित को ध्यान में रखते हुए सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला किया। ट्रंप ने अपने पोस्ट में कहा कि वॉशिंगटन ने ईरान पर तय सैन्य हमला इसलिए रद्द कर दिया क्योंकि तेहरान और मध्य पूर्व के दूसरे देशों ने एक प्रस्तावित समझौते को अंतिम रूप देने के लिए और समय मांगा था।

इस समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत फिर से खोलना और ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करना शामिल होगा। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ट्रंप ने लिखा कि अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ ऐसी सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार थी, जिसकी ताकत और क्षमता द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नहीं देखी गई। हालांकि, उन्होंने कहा कि बातचीत में प्रगति होने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने हमले को फिलहाल रद्द करने का निर्णय लिया।

ट्रंप के मुताबिक, ईरान के साथ प्रस्तावित समझौते में हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को तत्काल, पूरी तरह और बिना किसी बाधा के खोलना तथा ईरानी परमाणु खतरे को समाप्त करना शामिल है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द समझौता हो जाता है तो यह पूरी दुनिया और ईरान दोनों के लिए फायदेमंद होगा।

इजरायल ने अमेरिका का किया सपोर्ट

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि इजरायल ने भी वार्ता जारी रहने तक सैन्य कार्रवाई टालने के फैसले में अमेरिका का साथ दिया है। उन्होंने सभी पक्षों से जल्द से जल्द समझौता पूरा करने की अपील की। उधर, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका, इजरायल या क्षेत्र का कोई अन्य देश ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई करता है, तो तेहरान उसका निर्णायक जवाब देगा।

अराघची ने यह बात तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान, पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद के साथ अलग-अलग बातचीत के दौरान कही। तुर्किये के विदेश मंत्री ने भी पुष्टि की है कि दोनों पक्षों के बीच जारी वार्ता की ताजा स्थिति पर चर्चा हुई।

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हालांकि, ट्रंप के इन दावों पर ईरान या अन्य संबंधित देशों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए संभावित समझौते और हमले को टालने संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी दावा किया कि बातचीत जारी रहने के दौरान सैन्य कार्रवाई में देरी करने में इजरायल भी अमेरिका के साथ शामिल हो गया है।

US-Iran War : ईरान पर हमले से पीछे हटे ट्रंप तो तेहरान ने कसा तंज, रुबियो बोले- अब चुकानी होगी ‘बहुत बड़ी कीमत’; इराक में ड्रोन अटैक से आग

US Iran peace deal missed track Photo  : AI Generated

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोकने के फैसले को लेकर तेहरान की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB ने ट्रंप के फैसले का मजाक उड़ाते हुए इसे अमेरिकी रुख में बदलाव और पीछे हटने के तौर पर पेश किया है।

 

ईरान इंटरनेशनल के मुताबिक, IRIB ने दावा किया कि तेहरान और क्षेत्रीय ताकतों के दबाव के कारण ट्रंप को अपने रुख से पीछे हटना पड़ा। ईरानी सरकारी मीडिया ने इसे वॉशिंगटन की आक्रामक सैन्य बयानबाजी से पीछे हटने के रूप में बताया है।

 

ईरान को ‘बहुत बड़ी कीमत’ चुकानी होगी: मार्को रुबियो

 

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अगर तेहरान अपनी क्रांति को दूसरे देशों तक फैलाने की कोशिश करता है, तो उसे “बहुत बड़ी कीमत” चुकानी होगी। फॉक्स न्यूज से बातचीत में रुबियो ने कहा कि ईरान के व्यवहार में बदलाव तभी संभव है, जब उसके कार्यों की कीमत इतनी बढ़ा दी जाए कि वह उसे वहन न कर सके। उन्होंने कहा कि ईरान की क्षेत्रीय गतिविधियों को रोकने और उसकी नीतियों में बदलाव के लिए उसके खिलाफ कार्रवाई के परिणामों को बढ़ाना जरूरी है।

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इराक में ड्रोन हमले के बाद लगी भीषण आग

 

इस बीच, इराक के सुलेमानियाह में पेशमर्गा के 70वीं ब्रिगेड मुख्यालय के पास ड्रोन हमले के बाद भीषण आग लग गई। इराकी मीडिया के अनुसार, ड्रोन को रोक लिया गया था, लेकिन उसके जलते हुए मलबे के कारण सैन्य ठिकाने के पास आग भड़क गई।

 

अभी तक किसी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। हालांकि, अल-मायादीन ने इसे ईरान समर्थित समूहों से जोड़कर बताया है। वहीं, ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने इस स्थान को “ईरान विरोधी आतंकवादियों” का ठिकाना बताया है।

 

ट्रंप बोले- हमला करने के लिए अमेरिका पूरी तरह तैयार था

 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान पर कार्रवाई रोकने से पहले अमेरिका सैन्य अभियान के लिए पूरी तरह तैयार था। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका “पूरी तरह तैयार” था और उसके पास द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नहीं देखी गई सैन्य ताकत के साथ कार्रवाई करने की क्षमता थी।

 

ट्रंप के मुताबिक, ईरान और मध्य-पूर्व के कुछ अन्य देशों ने बातचीत के लिए समय मांगा था। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित समझौते में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तत्काल दोबारा खोलना और ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करना शामिल है।

 

ट्रंप ने यह भी कहा कि इजरायल ने सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोकने के फैसले का समर्थन किया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि हमला अभी के लिए रद्द किया गया है और आगे की कार्रवाई बातचीत में तेजी से होने वाली प्रगति पर निर्भर करेगी।

ईरान बोला- अमेरिका अपने मकसद में नाकाम रहा:जंग की तैयारी और तेज करेंगे, सऊदी ने US से हमले टालने को कहा

ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री माजिद इब्न अल-रेजा ने कहा कि अमेरिका अपने सैन्य मकसद पूरे नहीं कर पाया है। लेकिन इससे ईरान को ढील नहीं देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश को भविष्य की जंग के लिए और तेजी से तैयारी करनी होगी। माजिद ने कहा, दुश्मन अपने मकसद में नाकाम रहा है, लेकिन हमें लापरवाह नहीं होना चाहिए। जंग की तैयारी, नई तकनीक और रक्षा क्षमता को पहले से ज्यादा तेजी से बढ़ाना होगा। रक्षा मंत्री ने स्पेस टेक्नोलॉजी, इंटेलिजेंस, कम लागत में हथियार बनाने और रक्षा उद्योग को मजबूत करने को सरकार की प्राथमिकता बताया। उधर, एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से फोन पर बात की। उन्होंने ईरान के खिलाफ संभावित बड़े सैन्य हमले पर चिंता जताई और ट्रम्प से संयम बरतने के साथ इस योजना को टालने की अपील की। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…