मोदी के जन्मदिन पर एनडीए की एकता का प्रदर्शन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76 साल के होने का जश्न बहुत व्यवस्थित और सांस्थायिक तरीके से मनाया गया। एक एक चीज बहुत संयोजन के साथ की गई। दीये जलाने से लेकर गीत लॉन्च करने और रक्तदान शिविर से लेकर सफाई अभियान तक के सारे कामों की योजना बनी थी। ऐसे ही योजनाबद्ध तरीके से बाइक रैली रवाना की गई। तीन सौ बाइकर्स वाराणसी से वडनगर के लिए रवाना हुए तो इतने ही बाइकर्स वडनगर से वाराणसी के लिए रवाना हुए। ये सभी लोग सात राज्यों से गुजरेंगे और हर जगह नरेंद्र मोदी के गुजरात और देश में कामकाज का गुणगान करेंगे।

इतने ही योजनबद्ध तरीके से प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर एनडीए के घटक दलों की एकता का प्रदर्शन भी किया गया। यह कमाल की बात है कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू भी इसमें शामिल हुए। वे आंध्र प्रदेश से वाराणसी पहुंचे, जहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मोदी के जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। वहां बिहार की सहयोगी पार्टी लोजपा के नेता और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान मौजूद थे। इसी तरह उत्तर प्रदेश की सहयोगी अनुप्रिया पटेल वडनगर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ मौजूद थीं। वहां महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी शाह के साथ कई कार्यक्रमों में शामिल हुए। इस तरह भाजपा ने उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक अपनी पार्टी के नेताओं व सहयोगी नेताओं को मोदी के जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल किया।

सहयोगी पार्टियां अड़ंगा डालेंगी

भाजपा को कई राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने में समस्या आएगी। जगहां भाजपा की अपनी सरकार है वहां भी उसके सामने चुनौती होगी। गोवा इसका उदाहरण है। गोवा में प्रमोद सावंत की सरकार ने समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी की पूरी तैयारी कर ली थी। लेकिन ऐन मौके पर इसे टाल दिया गया। तभी एमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने अमित शाह को चुनौती दी है कि वे गोवा में यूसीसी लागू करके दिखाएं। गोवा जैसी समस्या भाजपा के सामने पूर्वोत्तर के राज्यों में आएगी। पूर्वोत्तर में असम में कानून पास हो गया है। इसके अलावा त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में भाजपा का अपना मुख्यमंत्री है। सिक्किम, नगालैंड औऱ मेघालय में सहयोगी पार्टी की मुख्यमंत्री है औऱ मिजोरम की सत्तारूढ़ पार्टी ने हाल ही में भाजपा को केंद्र में मुद्दों पर आधारित समर्थन देने का ऐलान किया है। इन सभी सात राज्यों में भाजपा को समान नागरिक कानून लागू करने में समस्या आएगी। सहयोगी पार्टियां आसानी से इसके लिए तैयार नहीं होंगी।

हालांकि भाजपा ने साफ कर दिया है कि अनुसूचित जनजाति यानी एसटी समुदाय को कानून से बाहर रखा जाएगा। इसलिए पूर्वोत्तर में इसे लेकर समस्या नहीं आएगी। लेकिन कई राज्यों में ईसाई आबादी भी बहुत अधिक है। गौरतलब है कि ईसाई आबादी की संवेदनशीलता को ध्यान में रख कर ही गोवा में कानून टाला गया है। पूर्वोत्तर के अलावा बिहार में भी भाजपा की योजना अटक सकती है। उसकी तीन सहयोगी पार्टियों ने बना बिल का मसौदा देखे समर्थन देने से इनकार कर दिया है। नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यू, चिराग पासवान की पार्टी लोजपा और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने कहा है कि पहले वे बिल का मसौदा देखेंगे। हालांकि पहले तो जनता दल यू ने साफ मना कर दिया था और कहा था कि वह किसी हाल में बिहार में इस कानून को लागू नहीं होने देगी। भाजपा की अन्य सहयोगी पार्टियों में सुनेत्रा पवार की एनसीपी भी इसे समर्थन देने से पहले सोचेगी।

बिहार की पार्टियां यूसीसी के विरोध में

पटना। भाजपा की कई सहयोगी पार्टियों ने समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी का समर्थन किया है। चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी, एकनाथ शिंदे कि शिव सेना और जीतन राम मांझी की हम ने इसका समर्थन किया है। लेकिन बिहार की तीन सहयोगी पार्टियों ने इसका विरोध किया है। जनता दल यू, लोजपा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने इस पर सवाल उठाए हैं। उधर महाराष्ट्र में भी सुनेत्रा पवार की पार्टी ने चुपी साध ली है।

बिहार में भाजपा की तीन सहयोगी पार्टियों ने अलग रुख अख्तियार किया है। नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यू ने कहा है कि वह इस कानून को बिहार में नहीं लागू होने देगी। पार्टी के विधायक श्याम रजक ने कहा है उनकी पार्टी इसका विरोध करेगी। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी लोजपा और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने समर्थन या विरोध की बजाय कहा है कि वे कानून का मसौदा देखने के बाद फैसला करेंगे।

गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार, 13 सितंबर को मुंबई में एक कार्यक्रम में कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा और एनडीए के शासन वाले सभी 21 राज्यों में यूसीसी लागू कर दिया जाएगा। अभी देश में 22 राज्यों में एनडीए की सरकार है। इनमें उत्तराखंड में जनवरी 2025 से यूसीसी लागू है। गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में यूसीसी बिल पास हो चुका है। अब इन राज्यों में राष्ट्रपति की मंजूरी और अधिसूचना जारी होने का इंतजार है। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ ने यूसीसी कानून का मसौदा तैयार करने के लिए समितियां गठित की हैं।

Gurugram Biker Case: टक्कर मारने के आरोपी कल्याण बैंसला के वकील ने महिला बाइकर को लेकर किया बड़ा दावा, केस में आया नया ट्विस्ट!

Gurugram Hit-And-Run Case: गुरुग्राम पुलिस ने ‘हिट-एंड-रन’ के मामले में आरोपी कल्याण बैंसला समेत दो लोगों को राजस्थान के दौसा जिले से गिरफ्तार कर लिया है। दौसा सदर के थानाधिकारी युधिष्ठिर सिंह ने बताया कि गुरुग्राम पुलिस की टीम ने थाने को जानकारी दी है कि उसने दौसा के आगरा रोड इलाके से बैंसला और एक अन्य व्यक्ति को हिरासत में लिया है। सिंह ने कहा, “गुरुग्राम पुलिस ने हिट-एंड-रन मामले के सिलसिले में कल्याण बैंसला और एक अन्य व्यक्ति को हिरासत में लिया है।” इस बीच, बाइक सवार महिला को टक्कर मारने का आरोपी कल्याण बैंसला के वकील ने अदालत में मंगलवार को एक बड़ा दावा किया।

आरोपी ने सभी आरोपों को किया खारिज

जानबूझकर कार से टक्कर मारने और परेशान करने के आरोपों को खारिज करते हुए गुरुग्राम गोल्फ कोर्स रोड दुर्घटना मामले में आरोपी ड्राइवर कल्याण बैंसला का पक्ष रख रहे वकील नवीन बैंसला ने मंगलवार को दावा किया कि यह घटना हिट-एंड-रन नहीं। बल्कि तेज़ रफ़्तार और रेसिंग के कारण हुई आपसी लापरवाही का मामला है।

न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए वकील ने जानबूझकर टक्कर मारने के दावों को खारिज कर दिया। वकील ने आरोप लगाया कि 20 से 30 मोटरसाइकिल सवारों का एक ग्रुप सड़क पर स्टंट कर रहा था और अन्य वाहनों को रेस के लिए उकसा रहा था।

‘हिट-एंड-रन का मामला नहीं’

वकील नवीन बैंसला ने कहा, “यह हिट-एंड-रन का मामला नहीं है। यह लापरवाही का मामला है। यह पूरी तरह से तेज रफ्तार और लापरवाह व्यवहार के कारण हुआ। वे एक-दूसरे के साथ रेस लगा रहे थे। बाइकर्स का एक बड़ा ग्रुप था। लगभग 20-30 राइडर्स एक साथ थे। सड़क के नियमों का पालन करने के बजाय, वे तेज रफ़्तार से गाड़ी चला रहे थे और स्टंट कर रहे थे। वे अन्य वाहनों को ताने मार रहे थे और परेशान कर रहे थे। उन्हें रेस या ओवरटेक करने के लिए उकसा रहे थे।””

उन्होंने तर्क दिया कि टक्कर इसलिए हुई क्योंकि कार और दोपहिया वाहन दोनों तेज रफ्तार से चल रहे थे, जिसके परिणामस्वरूप वाहनों पर से कंट्रोल खो गया। वकील ने कहा, “कार और बाइक के बीच टक्कर सिर्फ इसलिए हुई क्योंकि वे जिस रफ़्तार से गाड़ी चला रहे थे। वह बहुत ज्यादा तेज थी। यह पूरी तरह से लापरवाही का मामला है। इसमें और कुछ नहीं है। यह बस एक ऐसा मामला था जिसमें दोनों गलत थे। वे तेज रफ्तार से रेस लगा रहे थे, नियंत्रण खो बैठे और वाहन आपस में टकरा गए।”

शराब पीकर कार चलाने के आरोपों को किया खारिज

पीड़िता के इस दावे को खारिज करते हुए कि कार में सवार लोग नशे में थे। वकील ने जोर देकर कहा कि ड्राइवर सुबह-सुबह अपने परिवार के सदस्यों के साथ यात्रा कर रहा था। उसने शराब नहीं पी रखी थी।

वकील ने कहा, “कल्याण बैंसला मेरे गांव के रहने वाले हैं। वह बहुत अच्छे इंसान हैं। वह नेशनल और इंटरनेशनल कबड्डी खिलाड़ी हैं। उनके परिवार के खिलाफ आज तक कोई शिकायत नहीं आई है। समाज में उनके परिवार का बहुत सम्मान है। वे शराब नहीं पी रहे थे। यह घटना सुबह 7 बजे हुई। उनके परिवार के सदस्य उनके साथ थे। शराब पीने के दावे पूरी तरह से झूठे हैं। वह एक जिम ट्रेनर और जिम के मालिक हैं।”

पुलिस ने हत्या के प्रयास की धारा जोड़ी

गुरुग्राम में कार की टक्कर से घायल हुई बाइक सवार महिला ने सोशल मीडिया पर एक नया वीडियो जारी कर आरोपी कल्याण बैंसला पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके बाद उसके खिलाफ अब हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया है। बैंसला ने दावा किया था कि यह महज एक दुर्घटना थी।

शिवानी चौहान उर्फ सिया ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर डाले गए वीडियो में सवाल किया कि अगर बैंसला दुर्घटना को लेकर वास्तव में परेशान था तो टक्कर लगने के बाद वह घटनास्थल पर क्यों नहीं रुका। गुरुग्राम पुलिस ने मामले में अब भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109 के तहत हत्या के प्रयास का आरोप दर्ज किया है जिसमें 10 साल तक के कारावास का प्रावधान है।

गुरुग्राम पुलिस ने इससे पहले मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए सेक्टर-56 थाने में मामला दर्ज किया था। सहायक पुलिस आयुक्त (मुख्यालय) अभिलक्ष जोशी के अनुसार, आरोपी चालक के खिलाफ भारतीय बीएनएस की धारा 281 (लापरवाही से वाहन चलाना) और धारा 125 (चोट पहुंचाना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

सिया ने यह आरोप भी लगाया कि महिला बाइक सवार होने के कारण उसे निशाना बनाया गया। उसे रोकने की जानबूझकर कोशिश की गई। उसने दावा किया कि उसकी जान जा सकती थी और दुर्घटना के बाद आरोपी ने यह तक जानने की कोशिश नहीं की कि वह सुरक्षित है या नहीं।

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UCC Row In NDA: 2029 तक 21 राज्यों में UCC के अमित शाह के दावे को मिला JDU का चैलेंज! TDP और चिराग पासवान का भी सख्त रुख

UCC Row In NDA: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा कि 21 राज्यों की भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकारें 2029 से पहले समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करेंगी। शाह ने कहा, “तीन तलाक को समाप्त करके मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार दिए गए हैं। हमने कई राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू की है। मुझे विश्वास है कि BJP-NDA शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी लागू कर दिया जाएगा।”

शाह ने कहा कि सरकार ने भारतीय न्याय संहिता के माध्यम से देश की आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत किया है। साथ ही दावा किया कि कई राज्यों में एक साल में दोषसिद्धि दर में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि तीन साल के भीतर न्याय दिलाने के लिए एक व्यवस्था स्थापित की जा रही है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर शाह ने कहा कि आर्टिकल 370 और 35ए को बिना एक बूंद खून बहाए या एक गोली चलाए समाप्त किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने पांच दशक से जारी नक्सलवाद को समाप्त किया है। देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में 14 से अधिक शांति समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

UCC पर NDA में हलचल, JDU ने किया विरोध

अमित शाह के 2029 से पहले NDA शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू किए जाने के बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि वह इस मुद्दे पर जल्द ही गृह मंत्री से मुलाकात करेंगे। फिर उनकी पार्टी अपना रुख तय करेगी। झा ने इस विषय पर पीटीआई से कहा कि वह जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात करेंगे और उसके बाद पार्टी यूसीसी के मुद्दे पर अपना रुख तय करेगी।

बिहार में लागू नहीं होने देंगे: श्याम रजक

इस बीच, बिहार में सत्तारूढ़ राजग के प्रमुख घटक JDU के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने कहा कि पार्टी ने संसद में यूसीसी से जुड़े विधेयक का समर्थन किया था। लेकिन बिहार में इसे लागू करने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी के सर्वोच्च नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मुद्दे पर अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं।

बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन में सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी ने भले ही नागरिक संहिता से जुड़े विधेयक का संसद में समर्थन किया था। लेकिन वह इसे राज्य में लागू करने के पक्ष में नहीं है। JDU के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव रजक ने दावा किया कि इस मुद्दे पर पार्टी का रुख सर्वोच्च नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं।

JDU विधायक दल के नेता एवं बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने भी यूसीसी पर सीधे टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी के प्रवक्ता बोलेंगे। उन्होंने कहा कि उनका पक्ष सुनने के बाद वह कुछ कहेंगे। JDU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने भी संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यूसीसी के मुद्दे पर पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत करेंगे। बिहार में भारतीय जनता पार्टी नीत राजग सरकार में JDU दूसरा सबसे बड़ा घटक है। अगला लोकसभा चुनाव 2029 में होना है।

चिराग ने भी जताया विरोध

बिहार में बीजेपी की प्रमुख सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि पहले ड्राफ्ट आए। इसमें सभी पक्षों के हित शामिल रहें। पासवान ने एक पोस्ट में लिखा, “भारत का सामाजिक ताना-बाना विविधतापूर्ण है। हर वर्ग की अपनी नागरिक परंपराएँ और रीति-रिवाज हैं। संविधान ने स्वयं इसे स्वीकार किया है। पांचवीं-छठी अनुसूची, आर्टिकल 371A व 371G, और अब तक की हर संहिता में अनुसूचित जनजातियों को दी गई छूट इसका प्रमाण है। मेरी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) समानता और विविधता- दोनों के प्रति प्रतिबद्ध है। प्रारूप सार्वजनिक हो, सभी हितधारकों के हितों का अवलोकन हो, व्यापक विचार-विमर्श हो> तत्पश्चात अवलोकन उपरांत पार्टी अपना मत रखेगी।”

TDP का मिला समर्थन

लोकसभा में TDP के नेता लावू कृष्ण देवरायालु ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा, “हम इसका समर्थन करेंगे।” कृष्ण ने कहा, “अभी तो कोई चर्चा नहीं हो रही है। लेकिन जब भी हमें इसकी जरूरत महसूस होगी, हम इस पर विचार करेंगे। इसे अपनाने से पहले हम निश्चित रूप से अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स को इसमें शामिल करेंगे।”

ओवैसी ने यूसीसी को लेकर शाह पर साधा निशाना

देश के 21 राज्यों में भाजपा के नेतृत्व वाली NDA सरकारों के 2029 से पहले यूसीसी लागू करने के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल मुसलमानों को निशाना बनाना चाहता है।नउन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और शाह संविधान के आर्टिकल 25 (जो धर्म की आजादी की गारंटी देता है) और आर्टिकल 14 (जो समानता के अधिकार की गारंटी देता है) का उल्लंघन करते हुए समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।

ओवैसी ने कहा कि देश की आत्मा उसकी विविधता है। यूसीसी लागू करने का मतलब गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानून थोपना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार द्वारा नियुक्त विधि आयोग ने यह निष्कर्ष निकाला था कि यूसीसी न तो जरूरी है और न ही वांछनीय। गोवा में यूसीसी के अलग-अलग प्रावधानों का जिक्र करते हुए, उन्होंने पूछा कि क्या शाह और भाजपा पश्चिमी राज्य में भी उसी यूसीसी को लागू करेंगे, जैसा उत्तराखंड जैसे भाजपा-शासित राज्यों में लागू है।

उन्होंने यह भी पूछा कि क्या एन. चंद्रबाबू नायडू, नीतीश कुमार और चिराग पासवान जैसे NDA नेता यूसीसी के प्रावधानों का समर्थन करेंगे। दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत-चीन संबंधों में आए सुधार पर ओवैसी ने सवाल उठाया कि क्या बेहतर द्विपक्षीय संबंधों का मतलब यह है कि भारत ने भारत-चीन सीमा पर अपने गश्त करने के अधिकार खो दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को हथियार दिए थे।

‘सांप्रदायिक राजनीतिक के लिए कर रही यूसीसी का इस्तेमाल’

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की घोषणा को लेकर सोमवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस मुद्दे का इस्तेमाल सांप्रदायिक और बहुसंख्यकवादी राजनीति के लिए कर रही है। माकपा ने कहा कि एकरूपता का मतलब हमेशा समानता नहीं होता और यूसीसी लागू करने की घोषणा से भाजपा का राजनीतिक इरादा स्पष्ट हो गया है।

माकपा ने आरोप लगाया कि BJP समान अधिकारों से जुड़े जटिल सवाल को सांप्रदायिक और बहुसंख्यकवादी राजनीति के हथियार में बदल रही है। अगले लोकसभा चुनाव से पहले अपने हिंदुत्व वोट बैंक को मजबूत करना चाहती है। वाम दल ने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई, कृषि संकट और छात्रों की समस्याओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से निपटने के बजाय भाजपा एक और विभाजनकारी अभियान चलाने को प्राथमिकता दे रही है।

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मैंने सिर फोड़ दिया था…’, दावा करने वाला ‘इन्फ्लुएंसर’ स्वतंत्र भारद्वाज गिरफ्तार, CJP प्रोटेस्टर के पिता पर हमला करने का है आरोप

दिल्ली पुलिस ने शनिवार को खुद को ‘इन्फ्लुएंसर’ बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार किया है। उस पर जुलाई में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के एक प्रदर्शनकारी के पिता पर हमला करने का आरोप है। भारद्वाज की गिरफ्तारी शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से उसे हिरासत में लिए जाने के कुछ घंटों बाद हुई। बता दें कि यह कार्रवाई नई दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP), इंडियन यूथ कांग्रेस और लोकसभा सांसद चंद्र शेखर व राजेश रंजन के विरोध प्रदर्शन के बाद की गई थी।

इसके बाद भारद्वाज को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया।

पीड़ित और उनकी बेटी के वकील ऋषभ रंजन ने CNN-News18 को बताया: “उनकी सुनवाई बहुत हैरान करने वाली थी। हम इंतजार कर रहे थे, लेकिन उसे कोर्ट में पेश नहीं किया गया। हमें बस यह जानकारी मिली कि स्वतंत्र को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्पेशल जज के सामने उनके घर पर पेश किया गया। हमें बताया गया कि एक दिन की पुलिस कस्टडी दी गई है, लेकिन इस समय हमारे पास और कोई जानकारी नहीं है।”

उन्होंने कहा, “हमें यह भी नहीं पता कि कौन सी धाराएं जोड़ी गई हैं।”

इससे पहले, सूत्रों ने CNN-News18 को बताया था कि दिल्ली पुलिस ने एक शिकायत के आधार पर ‘बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण’ (POCSO) एक्ट के तहत एक नई FIR दर्ज की है, साथ ही भारद्वाज के खिलाफ पहले से दर्ज FIR में ‘अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति’ (SC/ST) एक्ट की धाराएं भी जोड़ी हैं।

क्या है पूरा मामला?

21 साल के ‘इन्फ्लुएंसर’ और अन्य लोगों पर संजय आजाद नाम के व्यक्ति पर हमला करने का आरोप है, जो 23 जून को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में अपनी नाबालिग बेटी के साथ गए थे।

हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान, भारद्वाज ने दावा किया कि उसने “पीड़ित का सिर फोड़ दिया था” और कहा कि उसे कई राजनीतिक नेताओं का समर्थन हासिल है, जिनमें बीजेपी नेता कपिल मिश्रा और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान शामिल हैं।

उसने कहा “मैंने निशु के पिता का सिर फोड़ दिया। क्या आप जानते हैं कि इस अपराध पर कौन सी धारा लागू होती है? धारा 307। उन्हें 60 टांके लगे। उस व्यक्ति को गंभीर हालत में एम्बुलेंस से ले जाया जा रहा था।”

भारद्वाज ने दावा किया कि इस घटना के बावजूद, उसे जेल नहीं हुई और वो आजादी से घूमता रहा।

भारद्वाज ने कहा, “उसकी बेटी पुलिस स्टेशन के बाहर खड़ी होकर कह रही थी कि अगर उसके पिता को न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या कर लेगी। लेकिन मुझे जेल तक नहीं हुई। दुनिया को यह पता होना चाहिए। मैं पूरी रात बाहर घूमता रहा।”

उसने आगे कहा, “मुझ पर हनुमान जी की कृपा है। दूसरी बात, कपिल मिश्रा मेरे बड़े भाई हैं। कहा जाता है कि कपिल मिश्रा के फोन करने पर मुझे छोड़ा गया। चिराग पासवान मेरे बड़े भाई हैं। आप कितने नेताओं को जानते हैं? क्या आप मोदी जी को जानते हैं? मोदी जी भी मेरे बड़े भाई हैं। मुझे सबका समर्थन हासिल है।”

विपक्ष की नाराजगी, पासवान ने बनाई दूरी

उसके बयानों पर CJP, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।

इसके बाद, चिराग पासवान ने खुद को उस तथाकथित ‘इन्फ्लुएंसर’ से अलग कर लिया और जोर देकर कहा कि जो लोग खुलेआम कानून का मजाक उड़ाते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री ने कहा कि अगर भारद्वाज के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो जनता की नजर में यह एक गलत मिसाल कायम करेगा।

उन्होंने भारद्वाज पर अपने नाम का “गलत इस्तेमाल” करने का भी आरोप भी लगाया। “मामले की गंभीरता को देखते हुए और चूंकि उस व्यक्ति ने मेरे नाम के साथ-साथ कई अन्य राजनेताओं के नामों का भी गलत इस्तेमाल किया है, इसलिए मैंने उसके खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और दिल्ली पुलिस से निष्पक्ष जांच करने का आग्रह भी किया है… संजय जी (निशु के पिता) आज जिस स्थिति में हैं, उसे देखते हुए मैं और मेरी पार्टी पूरी तरह से उनके और उनके परिवार के साथ खड़े हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “उन्हें न्याय दिलाना एक ऐसी जिम्मेदारी है जिसे मैं और मेरी पार्टी पूरी तरह से स्वीकार करते हैं… हम यह सुनिश्चित करेंगे कि सच सामने आए और जो व्यक्ति खुलेआम कानून का मजाक उड़ा रहा है, उसके खिलाफ जल्द से जल्द उचित कार्रवाई की जाए…”

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मैंने सिर फोड़ दिया था…’, दावा करने वाला ‘इन्फ्लुएंसर’ स्वतंत्र भारद्वाज गिरफ्तार, CJP प्रोटेस्टर के पिता पर हमला करने का है आरोप

दिल्ली पुलिस ने शनिवार को खुद को ‘इन्फ्लुएंसर’ बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार किया है। उस पर जुलाई में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के एक प्रदर्शनकारी के पिता पर हमला करने का आरोप है। भारद्वाज की गिरफ्तारी शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से उसे हिरासत में लिए जाने के कुछ घंटों बाद हुई। बता दें कि यह कार्रवाई नई दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP), इंडियन यूथ कांग्रेस और लोकसभा सांसद चंद्र शेखर व राजेश रंजन के विरोध प्रदर्शन के बाद की गई थी।

इसके बाद भारद्वाज को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया।

पीड़ित और उनकी बेटी के वकील ऋषभ रंजन ने CNN-News18 को बताया: “उनकी सुनवाई बहुत हैरान करने वाली थी। हम इंतजार कर रहे थे, लेकिन उसे कोर्ट में पेश नहीं किया गया। हमें बस यह जानकारी मिली कि स्वतंत्र को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्पेशल जज के सामने उनके घर पर पेश किया गया। हमें बताया गया कि एक दिन की पुलिस कस्टडी दी गई है, लेकिन इस समय हमारे पास और कोई जानकारी नहीं है।”

उन्होंने कहा, “हमें यह भी नहीं पता कि कौन सी धाराएं जोड़ी गई हैं।”

इससे पहले, सूत्रों ने CNN-News18 को बताया था कि दिल्ली पुलिस ने एक शिकायत के आधार पर ‘बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण’ (POCSO) एक्ट के तहत एक नई FIR दर्ज की है, साथ ही भारद्वाज के खिलाफ पहले से दर्ज FIR में ‘अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति’ (SC/ST) एक्ट की धाराएं भी जोड़ी हैं।

क्या है पूरा मामला?

21 साल के ‘इन्फ्लुएंसर’ और अन्य लोगों पर संजय आजाद नाम के व्यक्ति पर हमला करने का आरोप है, जो 23 जून को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में अपनी नाबालिग बेटी के साथ गए थे।

हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान, भारद्वाज ने दावा किया कि उसने “पीड़ित का सिर फोड़ दिया था” और कहा कि उसे कई राजनीतिक नेताओं का समर्थन हासिल है, जिनमें बीजेपी नेता कपिल मिश्रा और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान शामिल हैं।

उसने कहा “मैंने निशु के पिता का सिर फोड़ दिया। क्या आप जानते हैं कि इस अपराध पर कौन सी धारा लागू होती है? धारा 307। उन्हें 60 टांके लगे। उस व्यक्ति को गंभीर हालत में एम्बुलेंस से ले जाया जा रहा था।”

भारद्वाज ने दावा किया कि इस घटना के बावजूद, उसे जेल नहीं हुई और वो आजादी से घूमता रहा।

भारद्वाज ने कहा, “उसकी बेटी पुलिस स्टेशन के बाहर खड़ी होकर कह रही थी कि अगर उसके पिता को न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या कर लेगी। लेकिन मुझे जेल तक नहीं हुई। दुनिया को यह पता होना चाहिए। मैं पूरी रात बाहर घूमता रहा।”

उसने आगे कहा, “मुझ पर हनुमान जी की कृपा है। दूसरी बात, कपिल मिश्रा मेरे बड़े भाई हैं। कहा जाता है कि कपिल मिश्रा के फोन करने पर मुझे छोड़ा गया। चिराग पासवान मेरे बड़े भाई हैं। आप कितने नेताओं को जानते हैं? क्या आप मोदी जी को जानते हैं? मोदी जी भी मेरे बड़े भाई हैं। मुझे सबका समर्थन हासिल है।”

विपक्ष की नाराजगी, पासवान ने बनाई दूरी

उसके बयानों पर CJP, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।

इसके बाद, चिराग पासवान ने खुद को उस तथाकथित ‘इन्फ्लुएंसर’ से अलग कर लिया और जोर देकर कहा कि जो लोग खुलेआम कानून का मजाक उड़ाते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री ने कहा कि अगर भारद्वाज के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो जनता की नजर में यह एक गलत मिसाल कायम करेगा।

उन्होंने भारद्वाज पर अपने नाम का “गलत इस्तेमाल” करने का भी आरोप भी लगाया। “मामले की गंभीरता को देखते हुए और चूंकि उस व्यक्ति ने मेरे नाम के साथ-साथ कई अन्य राजनेताओं के नामों का भी गलत इस्तेमाल किया है, इसलिए मैंने उसके खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और दिल्ली पुलिस से निष्पक्ष जांच करने का आग्रह भी किया है… संजय जी (निशु के पिता) आज जिस स्थिति में हैं, उसे देखते हुए मैं और मेरी पार्टी पूरी तरह से उनके और उनके परिवार के साथ खड़े हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “उन्हें न्याय दिलाना एक ऐसी जिम्मेदारी है जिसे मैं और मेरी पार्टी पूरी तरह से स्वीकार करते हैं… हम यह सुनिश्चित करेंगे कि सच सामने आए और जो व्यक्ति खुलेआम कानून का मजाक उड़ा रहा है, उसके खिलाफ जल्द से जल्द उचित कार्रवाई की जाए…”

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स्वतंत्र भारद्वाज के वायरल वीडियो पर बवाल, निशु आजाद के पिता पर हमले को लेकर CJP ने घेरा थाना

स्वतंत्र भारद्वाज के वायरल वीडियो पर बवाल, निशु आजाद के पिता पर हमले को लेकर CJP ने घेरा थाना

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जंतर-मंतर पर निशु आजाद के पिता पर हुए हमले के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचकर आरोपियों की गिरफ्तारी और हत्या की धारा लगाने की मांग की है। ALSO READ: 'डरो मत, मैं साथ हूं': पिता पर हमले के बाद निशु आजाद के समर्थन में आए राहुल गांधी

 

CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हमारी साथी निशु के पिता संजय के साथ मारपीट हुई, उनका सिर फोड़ा गया। खुलेआम ये घटना हुई। लगातार हमारी टीम सौरव और हमारी पूरी टीम दिल्ली पुलिस से मांग करती रही कि इन गुंडों को आप गिरफ्तार करें, इन पर हत्या के प्रयास का चार्ज लगाएं लेकिन दिल्ली पुलिस सोती रही। 
 

उन्होंने कहा कि अब देश की राजधानी में हालात ऐसे हो गए हैं कि गुंडे ये खुलेआम कबूल कर रहे हैं कि उन्होंने संजय का सिर फोड़ा, पूरी कोशिश थी उन्हें जान से मारने की। खुद कबूल कर रहे हैं कि उस पर हत्या के प्रयास का केस बनता था लेकिन दिल्ली पुलिस ने कपिल मिश्रा और भाजपा के गुंडों की शय पर उस व्यक्ति के साथ कुछ नहीं किया।

रांका ने कहा कि आज देश के लिए, हमारे लोकतंत्र के लिए शर्मनाक दिन है जहां पर खुलेआम गुंडागर्दी करने वाले लोग दावा करते हैं कि उन्होंने किसी को जान से मारने का प्रयास किया लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। हमारी पूरी टीम निशु और उनके पिता, संजय के साथ पहले दिन से खड़ी रही है। हम दिल्ली पुलिस से मांग करेंगे कि इन गुंडों को, जिन्होंने खुद की पहचान बताई है, उन्हें गिरफ्तार किया जाए, उन पर हत्या के प्रयास की धाराएं लगाई जाएं, जितनी भी संगीन धाराएं उन पर लगती हैं, लगाई जाएं।

 

गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर निशु आजाद के पिता संजय कुमार पर हुए हमले का मामला फिर से सुर्खियों में है। 23 जून 2026 को जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई हाथापाई में गाजियाबाद के रहने वाले संजय कुमार के सिर में चोट लग गई थी। सोशल मीडिया पर वायरल पॉडकास्ट क्लिप में स्वतंत्र भारद्वाज ने यह दावा किया कि उसने ही निशु के पिता संजय कुमार का सिर फोड़ा था और राजनीतिक रसूख के चलते वह बिना किसी बड़ी कानूनी कार्रवाई के बच निकला।

स्वतंत्र भारद्वाज ने दी सफाई

जंतर-मंतर पर CJP के विरोध-प्रदर्शन के दौरान CJP कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता पर हमले को लेकर एक पॉडकास्ट के दौरान किए दावे पर कार्यकर्ता स्वतंत्र भारद्वाज ने कहा कि लोग जिसे हमला कह रहे हैं, वह असल में आत्मरक्षा था। अगर मैंने आत्मरक्षा में ऐसा नहीं किया होता, तो भीड़ मुझे पीट-पीटकर मार सकती थी या मेरी हत्या हो सकती थी। मेरे पास वीडियो सबूत हैं। मुझे 10-15 लोगों ने घेर लिया था। जब मैंने आत्मरक्षा में कदम उठाया, तो उनके सिर पर चोट लग गई।

स्वतंत्र भारद्वाज ने दावा किया कि राहुल गांधी और अन्य लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा पॉडकास्ट क्लिप नकली है। जो लोग कह रहे हैं कि मुझे कपिल मिश्रा के प्रभाव के कारण छोड़ा गया, उनसे मैं कहना चाहता हूं कि कपिल मिश्रा और चिराग पासवान मेरे भाइयों की तरह हैं। लोगों को समझना चाहिए कि क्या बात व्यंग्य में कही गई थी।

Chirag Paswan Death Threat: चिराग पासवान को जान से मारने की धमकी, नोट में लिखा- ‘जल्द कट्टर आतंकवादी करेंगे हत्या’

Chirag Paswan Death Threat: केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के प्रमुख चिराग पासवान को जान से मारने की धमकी मिली है। धमकी देने वाले ने चेतावनी दी है कि जल्द ही उन्हें “कट्टर आतंकवादियों” द्वारा मार दिया जाएगा। धमकी भरे नोट में लिखा था, “जल्द ही कट्टर आतंकवादियों द्वारा आपकी हत्या कर दी जाएगी।”

न्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री को धमकी मिलने के तुरंत बाद, उनके कार्यालय ने केंद्रीय गृह सचिव को पत्र लिखकर इस मामले पर ध्यान देने और जरूरी सुरक्षा इंतजाम करने का अनुरोध किया है।

अज्ञात व्यक्ति ने भेजी धमकी

चिराग पासवान को यह धमकी भरा पत्र डाक के जरिए मिला है। हालांकि, अभी तक पत्र भेजने वाले व्यक्ति की पहचान, इसे किस जगह से भेजा गया था और इस धमकी का संबंध किसी व्यक्ति या संगठन से है या नहीं, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।

सुरक्षा एजेंसियां अब इस पत्र में लिखी बातों और दूसरे उपलब्ध सबूतों की जांच कर सकती हैं। इसका मकसद यह पता लगाना है कि धमकी कितनी गंभीर है और यह कहां से भेजी गई है।

2025 में भी चिराग पासवान को मिली थी ऐसी धमकी

चिराग पासवान को इस तरह की धमकी पहली बार नहीं मिली है। इससे पहले जुलाई 2025 में भी उन्हें सोशल मीडिया के जरिए जान से मारने की धमकी दी गई थी। यह धमकी उनकी पार्टी के बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के फैसले की घोषणा के कुछ समय बाद मिली थी।

बताया गया था कि यह धमकी इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए दी गई थी। इसके बाद LJP (राम विलास) के एक प्रवक्ता ने पटना साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी थी।

चिराग पासवान को मिली यह ताजा धमकी ऐसे समय आई है, जब कई राजनीतिक नेताओं को इसी तरह की धमकियां मिलने के मामले सामने आए हैं। इससे पहले अगस्त में NCP नेता जीशान सिद्दीकी ने मुंबई पुलिस से संपर्क किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें रोहित गोदारा गैंग के एक सदस्य की ओर से जान से मारने की धमकी मिली है।

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