भारत का दिल यूं ही नहीं कहलाता मध्य प्रदेश, ये 10 डेस्टिनेशन शिमला-मनाली से भी हैं खूबसूरत!

मध्य प्रदेश में जुलाई से अक्टूबर का समय घूमने के लिए सबसे खूबसूरत माना जाता है, क्योंकि इस दौरान मानसून की वजह से सूखे पहाड़, जंगल और घाटियां हरे-भरे हो जाते हैं। झरनों में पानी भर जाता है और नेचुरल नजारे बेहद शानदार दिखाई देते हैं। मध्य प्रदेश को ‘भारत का दिल’ कहा जाता है और इसकी वजह सिर्फ इसकी जियोग्राफिकल लोकेशन नहीं, बल्कि इसकी अनोखी पहचान भी है। यहां प्राचीन धरोहरों से लेकर घने जंगल, आध्यात्मिक जगह और प्राकृतिक नज़ारे हर तरह के टूरिस्ट को अट्रैक्ट करते हैं। यहां ऐसी जगहें हैं जहां इस मौसम में नेचर का सबसे सुंदर रूप देखने को मिलता है:

रंग-बिरंगी संस्कृति और झीलों का अट्रैक्शन

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मध्य प्रदेश प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अपनी कल्चरल डाइवर्सिटी के लिए भी जाना जाता है। यहां की झीलें, हरियाली और शांत वातावरण टूरिस्ट को खास अट्रैक्ट करते हैं। राज्य में हिंदी के अलावा कई भाषाएं बोली जाती हैं। यही डाइवर्सिटी मध्य प्रदेश को सांस्कृतिक रूप से बेहद खास बनाती है।

1. Pachmarhi, पचमढ़ी – सतपुड़ा की रानी

जटा शंकर गुफाएं, पचमढ़ी, मध्य प्रदेश पर्यटन 2021 | गुफाएं, शिव, जटा शंकर गुफाएं की तस्वीरें - TripInvites - TripInvites

मध्य प्रदेश का सबसे पॉपुलर हिल स्टेशन पचमढ़ी मानसून में बेहद खूबसूरत हो जाता है। चारों तरफ हरियाली, बादलों से ढकी पहाड़ियां और बहते झरने इसे एक शानदार नेचुरल जगह बनाते हैं। यहां बी फॉल, अप्सरा विहार वॉटरफॉल और जटाशंकर गुफा जैसे जगह घूमने लायक हैं। जुलाई से अक्टूबर के बीच यहां की पहाड़ियां हरे रंग की चादर ओढ़ लेती हैं।

 

2. Bhedaghat, भेड़ाघाट – संगमरमर की चट्टानों और झरनों का नजारा

भेड़ाघाट का धुंआधार जलप्रपात - Khabar Lahariya (खबर लहरिया)

जबलपुर के पास भेड़ाघाट अपनी सफेद संगमरमर की चट्टानों और धुआंधार वॉटरफॉल के लिए पॉपुलर है। बारिश के मौसम में नर्मदा नदी का बहाव बढ़ जाता है और धुआंधार झरना बेहद शक्तिशाली दिखाई देता है। यहां नाव की सवारी करते हुए दोनों ओर ऊंची संगमरमर की चट्टानों का व्यू बेहद अट्रैक्टिव लगता है।

3. Tamia, तामिया – छिपा हुआ हरा-भरा हिल स्टेशन

Tamia in Chhindwara is a peaceful place offering everything from trekking to picnics find out how to get there- भीड़ से दूर सुकून चाहिए... तामिया है सबसे खूबसूरत जगह, ट्रेकिंग से लेकर

तामिया मध्य प्रदेश की कम भीड़ वाली खूबसूरत जगहों में से एक है। मानसून में यहां की घाटियां, जंगल और पहाड़ियां पूरी तरह हरी हो जाती हैं। पातालकोट घाटी के शानदार दृश्य यहां का मेन अट्रैक्शन हैं। बादलों से ढकी घाटियां और शांत वातावरण इसे नेचर लवर के लिए खास बनाते हैं।

 

4. Kapildhara Waterfall, कपिलधारा वॉटरफॉल – अमरकंटक का खूबसूरत झरना

KapilDhar-WaterFall – मराठवाडा टुरिझम डेव्हलपमेंट चेंबर

अमरकंटक एरिया में कपिलधारा वॉटरफॉल बारिश के मौसम में अपने पूरे रूप में दिखाई देता है। ऊंचाई से गिरता पानी और आसपास फैली हरियाली मन को अट्रैक्ट करती है। जुलाई से अक्टूबर के बीच यहां का वातावरण बेहद ठंडा और सुहावना रहता है।

 

5. Raneh Falls, रानेह फॉल्स – रंग-बिरंगी चट्टानों के बीच झरना

Discover the Raneh Fall from Khajuraho (Guided Halfday Sightseeing Tour by Car) (with Reviews)

खजुराहो के पास स्थित रानेह फॉल्स बारिश के मौसम में देखने लायक होता है। यहां केन नदी गहरी घाटी से होकर बहती है और आसपास अलग-अलग रंगों की ग्रेनाइट चट्टानें दिखाई देती हैं। मानसून के समय पानी का फ्लो बढ़ जाता है और पूरा क्षेत्र नेचुरल ब्यूटी से भर जाता है।

 

हजारों साल पुरानी धरोहरों की पहचान

Madhya Pradesh | District Portal

मध्य प्रदेश का गौरवशाली इतिहास इसकी प्राचीन इमारतों, मंदिरों और स्मारकों में आज भी जीवित है। यहां मौजूद सदियों पुराने मंदिर अपनी यूनिक क्राफ्टमैनशिप और आर्किटेक्टर के लिए दुनियाभर में पॉपुलर हैं। बारीक नक्काशी, ऐतिहासिक किले और प्राचीन धरोहरें इस राज्य की समृद्ध विरासत को दिखाती हैं। इतिहास में इंटरेस्ट रखने वालों के लिए यह राज्य किसी खजाने से कम नहीं है।

 

6. Orchha, ओरछा – नदी, जंगल और नेचुरल ब्यूटी

Chaturbhuj Temple Orchha: A Divine Architectural Marvel | Incredible India

ओरछा अपने ऐतिहासिक महलों और मंदिरों के लिए पॉपुलर है, लेकिन बारिश के मौसम में यहां की नेचुरल ब्यूटी भी देखने लायक होती है। बेतवा नदी का बहाव, आसपास की हरियाली और शांत वातावरण इसे मानसून ट्रिप के लिए शानदार जगह बनाते हैं। यहां हिस्ट्री और नेचर दोनों का आनंद लिया जा सकता है।

 

7. Tincha Waterfall, तिंचा वॉटरफॉल – इंदौर के पास मानसून का पसंदीदा स्थान

Rahatgarh Waterfalls Bhalkund Jalprapat in Rahatgarh,Sagar - Best Tourist Attraction near me in Sagar - Justdial

इंदौर के पास तिंचा फॉल्स बारिश के मौसम में बेहद अट्रैक्टिव हो जाता है। पहाड़ियों के बीच से गिरता पानी और आसपास की हरियाली यहां का मेन अट्रैक्शन है। यह जगह दोस्तों और परिवार के साथ एक दिन की ट्रिप के लिए काफी पॉपुलर है।

 

8. Patalpani Waterfall, पातालपानी वॉटरफॉल – झरने और पहाड़ियों का संगम

पाताल पानी जलप्रपात, मध्य प्रदेश पाताल पानी एक बेहद खूबसूरत जलप्रपात है और इंदौर के पास स्थित एक प्रसिद्ध पिकनिक स्पॉट है। इस जलप्रपात की ...

इंदौर के पास पातालपानी झरना मानसून में अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है। ऊंचाई से गिरता पानी, आसपास के जंगल और पहाड़ी रास्ते इसे अट्रैक्टिव बनाते हैं। बारिश के समय यहां का वातावरण काफी हरा-भरा हो जाता है।

 

बाघों का सबसे बड़ा ठिकाना

Madhya Pradesh Declared "Tiger State" of India and Shortlisted for Two Prestigious Travel and Awards

भारत में सबसे ज्यादा बाघ मध्य प्रदेश में पाए जाते हैं, इसलिए इसे ‘टाइगर स्टेट ऑफ इंडिया’ कहा जाता है। यहां के घने जंगल और रिच बायोडाइवर्सिटी वाइल्डलाइफ के लिए अच्छा घर हैं। राज्य के नेशनल पार्क बाघों के साथ-साथ कई रेयर वाइल्डलाइफ कंज़र्वेशन के लिए भी पॉपुलर हैं। हर साल लाखों टूरिस्ट जंगल सफारी का रोमांच और बाघों की एक झलक पाने यहां पहुंचते हैं।

 

 

घूमने का सबसे अच्छा समय

जुलाई–सितंबर: झरनों और हरियाली का सबसे शानदार समय

अक्टूबर: मौसम सुहावना, ट्रेकिंग और घूमने के लिए परफेक्ट

बारिश के समय पहाड़ी इलाकों में जाते समय फिसलन और तेज बहाव वाले पानी से सावधानी रखना जरूरी है।

Poco M8 Power और Poco X8 की एंट्री भारत में जल्द! मिलेगी 8000mAh बैटरी, जानें कीमत और फीचर्स

Poco जल्द ही भारत में अपने स्मार्टफोन लाइनअप में दो नए डिवाइस शामिल कर सकता है। हाल ही में आई एक लीक के अनुसार, Xiaomi का यह सब-ब्रांड आने वाले हफ्तों में देश में Poco M8 Power और Poco X8 लॉन्च कर सकता है। कहा जा रहा है कि ये दोनों हैंडसेट हाल ही में लॉन्च हुए Redmi Note 17 और Redmi Note 17 Pro के रीब्रांडेड वर्जन होंगे, जिनमें Poco की ब्रांडिंग के साथ वही पुराने हार्डवेयर देखने को मिलेंगे। हालांकि, कंपनी ने अभी तक लॉन्च की जानकारी नहीं दी है, लेकिन ताजा लीक से यह अंदाजा लग सकता है कि क्या उम्मीद की जा सकती है। यहां उन Poco स्मार्टफोन के बारे में सब कुछ बताया गया है जिनकी चर्चा हो रही है।

Poco M8 Power और Poco X8 की लॉन्च टाइमलाइन लीक

टिप्सटर योगेश बरार के अनुसार, चीनी स्मार्टफोन कंपनी Poco इस साल की मौजूदा तिमाही में Poco M8 Power और Poco X8 को भारत में लॉन्च कर सकती है। हालांकि, लॉन्च की सही तारीख का खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन टाइमलाइन से पता चलता है कि ये स्मार्टफोन अगले कुछ हफ्तों या महीनों में लॉन्च हो सकते हैं।

लीक में यह भी दावा किया गया है कि ये दोनों मॉडल असल में Redmi Note 17 और Redmi Note 17 Pro के ही रीब्रांडेड वर्जन होंगे, जिन्हें हाल ही में चीन में लॉन्च किया गया है। बता दें कि Poco के लिए यह कोई नई रणनीति नहीं है, क्योंकि यह चीनी टेक कंपनी अक्सर कई ग्लोबल मार्केट में Redmi स्मार्टफोन को अलग-अलग नामों से लॉन्च करती रही है।

हालांकि, टिपस्टर ने यह भी संकेत दिया कि कीमत का अनुमान “खराब” है, जिससे पता चलता है कि भारत में मिलने वाले मॉडल की कीमत चीन में मौजूद Redmi मॉडल की तुलना में काफी ज्यादा हो सकती है।

स्पेसिफिकेशन्स और कीमत (अनुमानित)

माना जा रहा है कि Poco M8 Power का ज्यादातर हार्डवेयर Redmi Note 17 जैसा ही होगा। बता दें कि Redmi का यह डिवाइस इस महीने की शुरुआत में चीन में लॉन्च किया गया था, जिसकी शुरुआती कीमत 6GB RAM + 128GB स्टोरेज वाले वेरिएंट के लिए CNY 1,299 (लगभग 18,000 रुपये) थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फोन Qualcomm Snapdragon 4 Gen 4 चिपसेट पर चल सकता है और इसमें बड़ी 8,000mAh की बैटरी मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, यह भी कहा जा रहा है कि मार्केट के हिसाब से Poco M8 Power और Poco X8 में अलग-अलग Snapdragon चिपसेट हो सकते हैं, हालांकि अभी चिपसेट के बारे में कोई पक्की जानकारी नहीं है।

400 साल पुरानी, 3000 किलो वजनी ऐतिहासिक तोप नरवर किले से चोरी, अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह पर शक

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मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहे नरवर किले से करीब 400 साल पुरानी एक ऐतिहासिक तोप चोरी हो गई है। पुलिस ने मामले की पुष्टि करते हुए एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस घटना के बाद प्रशासन और पुरातत्व विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

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रात के अंधेरे में बदमाशों ने दिया वारदात को अंजाम

जानकारी के मुताबिक, चोरी की घटना बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात हुई। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि अज्ञात बदमाश किसी बड़े वाहन से किले के पिछले हिस्से के रास्ते अंदर पहुंचे और वहां रखी भारी-भरकम तोप को वाहन में लादकर फरार हो गए। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस अब चोरी के सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है।

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प्राचीन वस्तु तस्करों पर पुलिस की नजर

 

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तोप के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इस मामले में प्राचीन वस्तुओं की तस्करी करने वाले गिरोह की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।  पुलिस के मुताबिक पुलिस किले और आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। इसके अलावा वाहन की आवाजाही, संभावित रास्तों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

 

प्रशासन की लापरवाही उजागर

इस चोरी के बाद प्रशासनिक लापरवाही का मामला भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले यह तोप अपने स्थान से गिर गई थी, लेकिन उसे दोबारा सुरक्षित स्थान पर नहीं रखा गया। इसी लापरवाही का फायदा उठाकर चोरों ने इसे आसानी से चोरी कर लिया।

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नरवर किले में अब बचीं सिर्फ 13 ऐतिहासिक तोपें

राज्य पुरातत्व विभाग के उपनिदेशक ने कहा कि वह जल्द ही नरवर किले का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेंगे और पुलिस के साथ मिलकर चोरी हुई धरोहर को बरामद करने के प्रयास तेज किए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार, नरवर किले में पहले कुल 14 ऐतिहासिक तोपें मौजूद थीं, लेकिन एक तोप चोरी होने के बाद अब यहां केवल 13 तोपें बची हैं।

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400 साल पुरानी विरासत पर बड़ा खतरा

नरवर किला मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां मौजूद प्राचीन हथियार और स्थापत्य कला इतिहास के गौरव को दर्शाते हैं। ऐसे में ऐतिहासिक तोप की चोरी ने प्रदेश में धरोहरों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।

Commodity News : वित्त वर्ष 2026 में भारत का इलायची निर्यात तीन गुना से ज्यादा बढ़कर 43.6 करोड़ डॉलर पर रहा

Commodity News : कॉमर्स मिनिस्ट्री के ताजे आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 में भारत से साबुत इलायची का एक्सपोर्ट 43.68 करोड़ डॉलर पर रहा है। यह आंकड़ा 2023-24 में 13.19 करोड़ डॉलर पर रहा था। इसका मतलब है कि 2023-24 के मुकाबले 2025-26 में भारत से साबुत इलायची का एक्सपोर्ट तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ा है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि 2025-26 में साबुत इलायची का निर्यात में 43.68 करोड़ डॉलर रहा। जबकि 2024-25 में यह 20.12 करोड़ डॉलर और 2023-24 में 13.19 करोड़ डॉलर रहा था।

खुशबू,क्वालिटी और शुद्धता की वजह से बढ़ी मांग

मात्रा के हिसाब से देखें तो 2025-26 में साबुत इलायची का एक्सपोर्ट बढ़कर 16,399 टन हो गया। जबकि पिछले फाइनेंशियल ईयर में यह 7,674 टन और 2023-24 में 7,083 टन रहा था। कॉमर्स मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने कहा कि एक्सपोर्ट में हुई जबरदस्त बढ़ोतरी से प्रीमियम मसालों की बढ़ती ग्लोबल मांग,बेहतर क्वालिटी का प्रोडक्शन और विदेशी खरीदारों के बीच भारतीय इलायची की बढ़ती पसंद का पता चलता है। इसकी खुशबू,क्वालिटी और शुद्धता की वजह से है दुनिया भर में मांग बढ़ी है।

इन देशों को होता है सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट

भारत से साबुत इलायची का एक्सपोर्ट मुख्यत: UAE ($135.22 मिलियन),सऊदी अरब ($125.16 मिलियन),बांग्लादेश ($47.71 मिलियन),कुवैत ($20 मिलियन),इराक ($13.71 मिलियन)और मलेशिया ($8.48 मिलियन) को होता है। नीदरलैंड,ऑस्ट्रेलिया,बहरीन,कनाडा,चीन,मिस्र और ईरान जैसे देश भी भारत से यह मसाला इम्पोर्ट करते हैं।

भारत में दो तरह की इलायची का होता है उत्पादन

भारत में इलायची की खेती मुख्य रूप से दो किस्मों में बंटी हुई है। छोटी इलायची,जो दक्षिणी पश्चिमी घाट में उगाई जाती है और बड़ी इलायची जिसकी खेती हिमालय के निचले उत्तर-पूर्वी इलाके में की जाती है।

इलायची के कुल उत्पादन में केरल की 56-58% हिस्सेदारी

केरल देश में छोटी इलायची का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है,जो कुल उत्पादन का 56-58% से ज्यादा हिस्सा प्रोड्यूस करता है। केरल के मुख्य इलायची उत्पादक जिलों में इडुक्की,वायनाड और पलक्कड़ शामिल हैं।

इसके बाद कर्नाटक का नंबर आता है,जहां इसकी खेती कूर्ग,हासन और चिकमगलूर में होती है। तमिलनाडु इसके उत्पादन में तीसरे नंबर पर आता है। जहां इसकी खेती मुख्य रूप से नीलगिरि,पलानी और पुलनी की पहाड़ियों में की जाती है।

 ज्यादा ऊंचाई वाले पूर्वोत्तर राज्यों में उगाई जाती है बड़ी इलायची

बड़ी इलायची,जिसका इस्तेमाल अक्सर आयुर्वेदिक दवाओं और मजेदार मसालों के मिश्रण में किया जाता है,मुख्य रूप से सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे ज्यादा ऊंचाई वाले पूर्वोत्तर राज्यों में उगाई जाती है।

भारत में इलायची की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। इसे एक नगदी फसल के तौर पर भी उगाया जाता है। इसकी खेती के जरिए देश के किसान बंपर कमाई कर रहे हैं। इलायची की मांग देश के अलावा विदेश में भी है। इलायची का इस्तेमाल भोजन,कन्फेक्शनरी,पेय पदार्थों को बनाने के दौरान किया जाता है। इसके अलावा इसका उपयोग मिठाई में खुशबू के लिए भी किया जाता है।

 

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प्लेटफॉर्म टिकट से भी सस्ता! भारत की पहली हाईड्रोजन ट्रेन का किराया जानकर रह जाएंगे हैरान

भारत ने अपनी पहली हाइड्रोजन से चलने वाली पैसेंजर ट्रेन शुरू करके ग्रीन रेल ट्रांसपोर्ट के एक नए दौर में कदम रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 17 जुलाई को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। यह सेवा क्लीन-एनर्जी टेक्नोलॉजी और इंडियन रेलवे नेटवर्क पर सबसे सस्ते टिकट दामों में से एक का मेल है।

नॉर्दर्न रेलवे के जींद-सोनीपत सेक्शन पर चलने वाली यह ट्रेन भारत को उन चुनिंदा देशों की लिस्ट में शामिल करती है, जिन्होंने हाइड्रोजन से चलने वाली पैसेंजर रेल सर्विस शुरू की है। स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से विकसित इस प्रोजेक्ट का मकसद पारंपरिक जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करते हुए साफ-सुथरे ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना है।

लॉन्च के बाद सबसे ज़्यादा चर्चा ट्रेन के किराए को लेकर हो रही है। कम से कम टिकट की कीमत 5 रुपये तय की गई है। जबकि ज़्यादा से ज़्यादा किराया 25 रुपये है। यह तय की गई दूरी पर निर्भर करता है। उद्घाटन सेवा में यात्रा करने वाले यात्रियों ने भी 5 रुपये वाले टिकट ही खरीदे। इसका शुरुआती किराया कई रेलवे स्टेशनों पर लगने वाले प्लेटफ़ॉर्म टिकट से भी कम है, जिससे यह सेवा भविष्य की तकनीक वाली और सस्ती दोनों बन जाती है।

किराये पर एक नज़र

• कम से कम किराया- ₹5

• ज़्यादा से ज़्यादा किराया- ₹25

• किराया इस पर निर्भर करता है- तय की गई दूरी

रूट, स्टॉप और यात्रियों की क्षमता

हाइड्रोजन से चलने वाली यह ट्रेन जींद जंक्शन और सोनीपत के बीच चलेगी और लगभग दो घंटे में करीब 90 किलोमीटर का सफ़र तय करेगी। इसे ज़्यादा से ज़्यादा 75 किमी/घंटा की रफ़्तार से चलाने की मंज़ूरी मिली है, जबकि इसकी डिज़ाइन स्पीड 110 किमी/घंटा है।

रूट पर पड़ने वाले स्टेशन

•जींद जंक्शन

•जींद सिटी

•पांडु पिंडारा

•ललित खेड़ा हॉल्ट

•भंभेवा

•ईसापुर खेड़ी हॉल्ट

•बुटाना हॉल्ट

•खांडराई हॉल्ट

•राबराह हॉल्ट

•लाठ

•मोहाना

•बरवासनी हॉल्ट

•सोनीपत

10 कोच वाली इस ट्रेन में लगभग 2,600 यात्री सफर कर सकते हैं और उम्मीद है कि यह इस रूट पर रोज़ाना यात्रा करने वालों के काम आएगी।

यह ट्रेन दूसरों से अलग क्यों है?

आम ट्रेनों के उलट, जो डीज़ल इंजन या ऊपर लगे तारों से मिलने वाली बिजली पर चलती हैं, यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल का इस्तेमाल करके खुद ही बिजली बनाती है। फ्यूल सेल के अंदर, हाइड्रोजन ऑक्सीजन के साथ मिलकर बिजली बनाती है। इस प्रक्रिया में बाई-प्रोडक्ट के तौर पर सिर्फ़ पानी की भाप और गर्मी निकलती है, जिससे यह ट्रांसपोर्ट का ज़ीरो-एमिशन (बिना प्रदूषण वाला) ज़रिया बन जाता है। इसे चलाने के लिए ज़रूरी हाइड्रोजन की सप्लाई जींद में बने एक खास प्लांट से की जाएगी।

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की मुख्य विशेषताएं

• 10-कोच वाली हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित ट्रेन

• हाइड्रोजन से चलने वाली दो ड्राइविंग पावर कारें

• आठ ट्रेलर कोच और 1,200 kW का हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम

• लगभग 2,600 यात्रियों की क्षमता और अधिकतम ऑपरेशनल स्पीड 75 kmph

• डिज़ाइन स्पीड 110 kmph

• हाइड्रोजन लीक, धुआं, आग और ज़्यादा गर्म होने का पता लगाने के लिए एडवांस्ड सिस्टम

• बिना पारंपरिक ओवरहेड इलेक्ट्रिक तारों के चलती है

भारत की सबसे बड़ी रेलवे हाइड्रोजन सुविधा

इस प्रोजेक्ट के तहत जींद में भारत की सबसे बड़ी रेलवे हाइड्रोजन स्टोरेज और रीफ्यूलिंग सुविधा भी बनाई गई है। सरकार के अनुसार, इस सुविधा में लगभग 3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन स्टोर की जा सकती है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माने जाने वाले सुरक्षा मानकों के अनुसार विकसित किया गया है। यात्रियों के लिए सेवा शुरू करने से पहले इसकी स्वतंत्र सुरक्षा जांच भी की गई है।

भारत ग्लोबल हाइड्रोजन रेल नेटवर्क में शामिल हुआ

इस सर्विस के शुरू होने के साथ ही, भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिन्होंने हाइड्रोजन से चलने वाली रेल टेक्नोलॉजी अपनाई है। जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, इटली, जापान, चीन और अमेरिका जैसे देशों में हाइड्रोजन ट्रेनें पहले से ही चल रही हैं या उनके ट्रायल चल रहे हैं। इस लॉन्च के साथ भारत उन देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है जो अगली पीढ़ी के, कम प्रदूषण वाले रेलवे सिस्टम में निवेश कर रहे हैं।

हरियाणा के CM ने इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने इस प्रोजेक्ट को देश की क्लीन एनर्जी यात्रा में एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन ट्रेन ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ के विज़न को दिखाती है, साथ ही यह क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मज़बूत करती है और आर्थिक विकास में मदद करती है।

PM मोदी ने दूसरे बड़े प्रोजेक्ट्स भी लॉन्च किए

हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के साथ-साथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत नए सिरे से तैयार किए गए जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन का उद्घाटन किया और देश भर के 75 अपग्रेड किए गए रेलवे स्टेशनों को वर्चुअली देश को समर्पित किया।

उन्होंने अमृतसर और वाराणसी को जोड़ने वाली संत रविदास एक्सप्रेस को भी हरी झंडी दिखाई। चंडीगढ़ दौरे के दौरान, प्रधानमंत्री ने PGIMER में बड़े हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर का उद्घाटन किया, जिसमें ‘एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर’ भी शामिल है।

गिलगित-बाल्टिस्तान को 5वां राज्य बनाने की तैयारी में पाकिस्तान:विधानसभा में प्रस्ताव पास, संसद से संविधान संशोधन की मांग

पाकिस्तान ने अपने अवैध कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान को देश का पांचवां राज्य बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। गुरुवार को गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से संविधान में संशोधन करके इस क्षेत्र को राज्य का दर्जा देने की मांग की। प्रस्ताव में कहा गया है कि गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों को पाकिस्तान के दूसरे राज्यों के नागरिकों की तरह समान संवैधानिक, राजनीतिक और लोकतांत्रिक अधिकार दिए जाएं। इसके तहत इस क्षेत्र को नेशनल असेंबली, सीनेट और अन्य संघीय संवैधानिक संस्थाओं में भी प्रतिनिधित्व देने की मांग की गई है। प्रस्ताव की कॉपी पर मुख्यमंत्री, स्पीकर, डिप्टी स्पीकर, नेता विपक्ष और दो निर्दलीय विधायकों के हस्ताक्षर हैं। इसे अब पाकिस्तानी संसद के पास भेजा जाएगा। अस्थायी राज्य बनाने का प्रस्ताव अभी तक पाकिस्तान में केवल चार राज्य पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा हैं। गिलगित-बाल्टिस्तान अब तक सीमित स्वशासन (लिमिटेड सेल्फ-गवर्नेंस) के तहत संचालित होता रहा है और उसे पाकिस्तान के अन्य राज्यों जैसा संवैधानिक दर्जा प्राप्त नहीं है। प्रस्ताव में कहा गया है कि गिलगित-बाल्टिस्तान को अभी स्थायी नहीं, बल्कि अस्थायी तौर पर पाकिस्तान का राज्य बनाया जाएगा। अगर भविष्य में जम्मू-कश्मीर विवाद का कोई समाधान निकलता है, तो उस फैसले के अनुसार इस क्षेत्र की स्थिति दोबारा तय की जा सकती है। यानी पाकिस्तान ने यह रास्ता खुला रखा है कि कश्मीर विवाद के अंतिम समाधान के बाद गिलगित-बाल्टिस्तान का दर्जा बदला जा सके। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि जब तक गिलगित-बाल्टिस्तान को राज्य का दर्जा नहीं मिलता, तब तक पाकिस्तान की केंद्र सरकार और चारों राज्य यह सुनिश्चित करें कि इस क्षेत्र को भी सरकारी फंड और राष्ट्रीय संसाधनों में उसका उचित हिस्सा मिले। यानी गिलगित-बाल्टिस्तान को भी दूसरे राज्यों की तरह विकास के लिए पैसा दिया जाए। गिलगित-बाल्टिस्तान को 2009 में पहली बार मिली विधानसभा 2009 से पहले गिलगित-बाल्टिस्तान का पूरा प्रशासन पाकिस्तान की केंद्र सरकार के नियंत्रण में था। यहां लोगों के पास सीमित अधिकार थे। 2009 में पहली बार यहां विधानसभा और मुख्यमंत्री की व्यवस्था लागू की गई, जबकि 2018 में विधानसभा को कुछ और अधिकार दिए गए। इसके बावजूद गिलगित-बाल्टिस्तान आज भी पाकिस्तान का संवैधानिक राज्य नहीं है और यहां के लोगों को नेशनल असेंबली व सीनेट में प्रतिनिधित्व नहीं मिलता। इसी स्थिति को बदलने के लिए अब इसे अस्थायी तौर पर पांचवां राज्य बनाने का प्रस्ताव लाया गया है। पिछले महीने गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव हुए थे गिलगित-बाल्टिस्तान में पिछले महीने 7 जून चुनाव हुआ था जिसमें बिलावल भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) को सबसे ज्यादा सीटें मिली थीं। एक पार्टी के पास पूर्ण बहुमत ना होने की वजह से PPP और शहबाज शरीफ की पार्टी PML-N के बीच पॉवर शेयरिंग एग्रीमेंट हुआ था जिसके तहत मुख्यमंत्री और स्पीकर PPP का हुआ। वहीं गवर्नर और डिप्टी स्पीकर PML-N मिला। गिलगिट-बाल्टिस्तान और भारत का क्या कनेक्शन है? गिलगिट-बाल्टिस्तान ट्रांस-हिमालयन क्षेत्र में कश्मीर घाटी के उत्तर-पश्चिम में है। यह जम्मू-कश्मीर रियासत का हिस्सा था। तब यह रियासत पांच क्षेत्रों में बंटी थी- जम्मू, कश्मीर, लद्दाख, गिलगिट वजाहत और गिलगिट एजेंसी। 1947 से भारत के जिस हिस्से पर पाकिस्तान का कब्जा है, उसमें सिर्फ 15% एरिया पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में है। 85% हिस्सा तो गिलगिट-बाल्टिस्तान या नॉर्दर्न एरियाज में है। यह चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) का मुख्य इलाका है। सिंधु नदी पाकिस्तान में गिलगिट-बाल्टिस्तान से ही होकर प्रवेश करती है। गिलगिट-बाल्टिस्तान भारत से अलग कब हुआ? 1947 में। दरअसल, 1917 में USSR बनने के बाद ब्रिटिश इंडिया ने गिलगिट एजेंसी को 1935 में जम्मू-कश्मीर के महाराजा से 60 साल की लीज पर लिया था। पर जब भारत आजाद हुआ तो 15 दिन बाद गिलगित भी महाराजा हरिसिंह के अधीन आ गया था। 26 अक्टूबर 1947 को हरि सिंह ने अपनी रियासत को भारत में मर्ज करने का फैसला किया, तब ब्रिटिश कमांडर विलियम एलेक्जेंडर ब्राउन के नेतृत्व में गिलगिट स्काउट्स ने बगावत कर दी। उसने बाल्टिस्तान पर भी कब्जा कर लिया था, जो लद्दाख का हिस्सा था। स्कार्दू, करगिल और द्रास पर भी गिलगिट स्काउट्स का कब्जा था। युद्ध में भारतीय सेनाओं ने अगस्त 1948 में करगिल और द्रास पर फिर से कब्जा हासिल किया। पर गिलगिट पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा कायम रहा। 1 नवंबर 1947 को राजनीतिक दल रिवॉल्युशनरी काउंसिल ऑफ गिलगिट-बाल्टिस्तान ने गिलगिट-बाल्टिस्तान को स्वतंत्र देश घोषित किया था। 15 नवंबर को उसने पाकिस्तान में मर्जर की घोषणा की। पर इस मर्जर की भी शर्त ये थी कि पूरी तरह एडमिनिस्ट्रेटिव कंट्रोल के लिए यह होगा। पिछले साल पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने 1 नवंबर को गिलगिट-बाल्टिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया।

शामली और कैराना की डेमोग्राफी बदल रहे थे जिन्ना के उपासक : योगी आदित्यनाथ

Chief Minister Yogi Adityanath targeted the Samajwadi Party and the Congress

– मुख्यमंत्री ने शामली, थानाभवन व कैराना विधानसभा क्षेत्रों की 581 करोड़ रुपए से अधिक की 89 परियोजनाओं का किया लोकार्पण/शिलान्यास

– 10 साल पहले आतंक व भय का प्रतीक था शामली, अब यहां गन्ने की मिठास और एक्सप्रेसवे की ‘त्रिवेणी’ है

– कांवड़ यात्रा में अनुशासनहीनता स्वीकार नहीं, उपद्रव का प्रयास करने वाले को कान पकड़कर बाहर कर दें

– 2017 के पहले 12 बजे तक सोने वाली और अब भोर में 4 बजे से काम करने वाली सरकार

– 2007 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश में 29 चीनी मिलें बंद हुईं, आज 122 मिलें संचालित

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी व कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जिन्ना के उपासक लोग डेमोग्राफी बदल रहे थे और इसीलिए कैराना व कांधला से पलायन हो रहा था। उन्होंने स्थानीय नागरिकों को चेताया कि जिन्ना के अनुयायियों को जब भी मौका मिलेगा, वे आपको क्षेत्र व जाति के नाम पर बांटेंगे। विकास कार्यों में लूट-खसोट करेंगे। बेटी-व्यापारी की सुरक्षा में सेंध लगाएंगे। इनसे लगातार सतर्क रहना है।

 

मुख्यमंत्री शुक्रवार को कैराना, शामली व थानाभवन विधानसभा क्षेत्र की 581 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 89 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने लोकार्पण व शिलान्यास की गई योजनाओं का विवरण देते हुए गत 10 वर्ष में शामली, थानाभवन व कैराना में आए सकारात्मक बदलाव की भी चर्चा की।

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कैराना व शामली का आध्यात्मिकता, संस्कृति व आजादी में योगदान

सीएम योगी ने कहा कि 5000 वर्ष पूर्व कुरुक्षेत्र के धर्मयुद्ध में जाने से पहले लीलाधारी प्रभु श्रीकृष्ण ने हनुमान टीले में आकर विश्राम किया था और यहां के पवित्र जल को ग्रहण किया था। शामली व कैराना ने 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर में ब्रिटिश हुकूमत की चूलों को हिला दिया था। कैराना घराने से पं. भीमसेन जोशी ने शास्त्रीय संगीत की परंपरा को नई ऊंचाई दी। 

 

10 साल पहले आतंक और भय का प्रतीक था शामली

सीएम ने कहा कि 10 साल पहले लोग पूछते थे कि आतंक-भय का प्रतीक शामली जनपद कहां है। शामली, कैराना-कांधला से पलायन होता था, यहां गुंडागर्दी होती थी। कोई सुरक्षित नहीं था। शरारत के तहत डेमोग्राफी को बदलने की साजिश हो रही थी। अब यहां के गन्ने की मिठास प्रसिद्ध है। पीएम मोदी जी के नेतृत्व व मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार शामली की गति को प्रगति में बदल रही है।

 

एक्सप्रेसवे का 'संगम' बन चुका है शामली

मुख्यमंत्री ने कहा कि शामली अब दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, शामली-अंबाला एक्सप्रेसवे और गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे का 'संगम' बन चुका है। यहां की युवा पीढ़ी की ऊर्जा का उपयोग सकारात्मक दिशा में किया गया तो आने वाले समय में इंफ्रास्ट्रक्चर व सुरक्षा का यह बेहतर माहौल शामली को एनसीआर के सबसे धनी व समृद्ध जनपदों में खड़ा कर देगा।

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शामली वाले 10 साल पहले बिजली के लिए तरसते थे, लेकिन आज शामली 400 केवीए विद्युत स्टेशन के माध्यम से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति का माध्यम बना है। 10 साल पहले मेडिकल सुविधाएं नदारद थीं। लेकिन, कोरोना महामारी में दिल्ली व आसपास के लोग इलाज कराने शामली के हॉस्पिटलों में पहुंचे। 

 

2007 से 2017 के बीच 29 चीनी मिलें बंद हुईं, आज 122 चल रहीं 

सीएम ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों चौधरी जयंत सिंह, वीरेंद्र सिंह, मोहित बेनीवाल, पूर्व मंत्री सुरेश राणा के कार्यों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत में चौधरी चरण सिंह के बाद चीनी मिलों की स्थिति में सुधार व पुनरोद्धार का बीड़ा 2017 में सुरेश राणा ने उठाया था। 2007 से 2017 के बीच तत्कालीन सरकारों में 29 चीनी मिलें बंद हुईं।

21 मिलें औने-पौने दाम पर बेची गईं। 2017 में सुरेश राणा ने मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली तो मैंने पूछा कि अब मिलें बिकेंगी तो नहीं, तब उन्होंने कहा था कि इन मिलों को वापस लेकर चलाएंगे। आज 122 चीनी मिलें चल रही हैं और किसानों को समय से भुगतान हो रहा है। अब गन्ना किसानों को 400 रुपए कुंतल दाम मिल रहा है। यूपी चीनी, गन्ना व एथेनॉल उत्पादन में नंबर एक है। यह प्रगति किसानों की समृद्धि का कारक बनी है।

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शामली व कैराना को देखकर लगता है कि सार्वजनिक जीवन में आना सफल हुआ 

सीएम योगी ने कहा कि विकास का विकल्प नहीं हो सकता। हम किसानों के उपासक हैं, जिन्होंने गन्ने का क्षेत्रफल बढ़ाकर उत्पादन बढ़ाया। हमने भी चीनी मिलों के माध्यम से उन्हें गन्ना मूल्य का भुगतान करा के दिखा दिया। शामली की खुशहाली और थानाभवन-कैराना का विकास देख लगता है कि सार्वजनिक जीवन में आना सफल हुआ है।

पिछली बार मैंने यहां के स्कूलों का दौरा किया था। यूपी-सीबीएसई बोर्ड की मेरिट सूची में शामली के बच्चों का नाम देखा तो उन्हें लखनऊ बुलाया। वे बच्चे भी बता रहे थे कि अब डर नहीं लगता, क्योंकि अपराधी जानता है कि हिमाकत की तो जेल या जहन्नुम में ही जगह मिलेगी। 

 

सैफई का सिंडिकेट अब युवाओं का अधिकार नहीं छीन सकता

सीएम ने कहा कि शामली में तेज गति से प्रगति होगी। कैराना में पीएसी की भव्य बटालियन बन रही है। सैफई का नौकरी का सिंडिकेट अब शामली के युवाओं का अधिकार नहीं छीन सकता। शामली, मुजफ्फरनगर का नौजवान भी अब नौकरी पाता है।

मुख्यमंत्री ने कटाक्ष भी किया कि 2017 के पहले जयश्रीराम बोलने पर लाठी-गोली चलाने वाले, कांवड़ यात्रा प्रतिबंधित करने, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आयोजन को रोकने, रामनवमी की शोभायात्रा नहीं निकलने देने वाले, धार्मिक स्थलों की संपत्तियों पर कब्जा करने वाले आज किस मुंह से आस्था की बात कर रहे हैं।

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चौधरी चरण सिंह के सपनों को साकार कर रही डबल इंजन सरकार

सीएम ने कहा कि भारत रत्न चौधरी चरण सिंह ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश, किसानों, युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए जो सपना देखा था, उसे डबल इंजन सरकार साकार कर रही है। एक तरफ किसान के चेहरे पर खुशहाली लाई जा रही है तो दूसरी तरफ युवाओं के लिए रोजगार व नौकरी है। हर गरीब को शासन की योजना का लाभ मिल रहा है। हर व्यापारी के निवेश को सुरक्षा मिल रही है। 

 

कांवड़ यात्रा में गलत व्यक्तियों को कान पकड़कर बाहर कर दें 

सीएम ने कांवड़ संघों से अपील करते हुए कहा कि हम सभी श्रीराम के वंशज, श्रीकृष्ण के अनुयायी व भोले शंकर के भक्त हैं। राम की मर्यादा, कृष्ण की लीला व शंकर की समरसता/जीवंतता आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। अनुशासन व धैर्य जीवन की पूंजी है। अनुशासनहीनता करने वालों को सीएम ने चेताया कि छोटी बातों को लेकर हुड़दंग नहीं होना चाहिए।

विरोधी लोग अनुशासनहीनता पर कांवड़ यात्रा को पहले की तरह बंद कराने के लिए दबाव बनाने का प्रयास करेंगे। किसी गलत व्यक्ति ने हमारे बीच में आकर उपद्रव करने का प्रयास किया तो उसे कान पकड़कर बाहर करने की आवश्यकता है। अनुशासनहीनता कतई स्वीकार नहीं होगी। पर्वों की मर्यादा को ध्यान में रखकर काम करेंगे तो परंपरा और अच्छे तरीके से बढ़ेगी।

 

सीएम ने विधायकों के कार्यों की प्रशंसा की 

सीएम ने थाना भवन के विधायक अरशद अली और शामली के विधायक प्रसन्न चौधरी के खराब स्वास्थ्य का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अरशद अली का सुबह फोन पर हालचाल लिया था, वह स्वास्थ्य के कारण अनुपस्थित हैं। वहीं पैर में फ्रैक्चर होने के बावजूद प्रसन्न चौधरी यहां मौजूद हैं। हमारे जनप्रतिनिधि निरंतर विकास के लिए प्रयास करते हैं।

जनप्रतिनिधियों के प्रयास से ही कुछ ही दिनों में 750 किमी. लंबा गोरखपुर-शामली इकॉनमिक कॉरिडोर शामली को गोरखपुर व सिलीगुड़ी तक जोड़ देगा। इसकी दूरी लगभग 1100-1200 किमी की होगी। एक्सप्रेसवे के जरिए शामली से ही अंबाला व पानीपत की यात्रा कराएंगे। शामली चारों ओर से एक्सप्रेसवे हाईवे के महत्वपूर्ण पड़ाव का केंद्र होगा। आज दी जा रही योजनाएं शामली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगी। 

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प्रदेश का पहला एकीकृत निजी टेक्सटाइल्स 

सीएम ने कहा कि शामली अब एनसीआर का हिस्सा हो गया है। प्रदेश का पहला एकीकृत निजी टेक्सटाइल्स यहां बनने जा रहा है, जिससे 8000 युवाओं को नौकरी/रोजगार प्राप्त होगा। आमजन का समर्थन ही हमारी ताकत है और हम इसका इस्तेमाल करके ही कार्य कर रहे हैं। शामली अब पहचान के लिए मोहताज नहीं है। जनता के आशीर्वाद से शामली की तकदीर और तस्वीर बदल रही है।

 

पहले 12 बजे तक सोने वाली और अब भोर में चार बजे से काम करने वाली सरकार  

सीएम ने कहा कि 2017 के पहले सरकार में सोने वाले लोग थे। वे 12 बजे सोकर उठते थे, 2 बजे तैयार होते थे और 5 बजे जिम चले जाते थे। उनके पास जनता के लिए फुर्सत नहीं थी। यह माफिया के सामने नाक रगड़ते और दंगाइयों को घर में बुलाकर सम्मानित करते थे, लेकिन यूपी अब बदल चुका है। यूपी की यात्रा अब सुबह चार बजे से प्रारंभ होती है। चरैवेति-चरैवेति के मंत्र के साथ हर वर्ग का हित करने वाली सरकार है। 

 

इस अवसर पर जलशक्ति राज्यमंत्री दिनेश खटिक, विधायक प्रसन्न कुमार, विधान परिषद सदस्य मोहित बेनीवाल, चौधरी वीरेंद्र सिंह, पूर्व सांसद प्रदीप चौधरी, पूर्व मंत्री व भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेश राणा, क्षेत्रीय अध्य़क्ष नवाब सिंह नागर, जिलाध्यक्ष रामजीलाल कश्यप आदि मौजूद रहे।

Tariff on Russia Oil: भारत-चीन को ट्रंप दे सकते हैं बड़ा झटका, रूस से तेल खरीदने पर 100% टैरिफ वाले बिल को अमेरिका के 60 सीनेटर्स ने किया समर्थन

US Tariff on India-China: रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अब अमेरिका बड़ा एक्शन लेने जा रहा है। अमेरिकी संसद (सीनेट) में पेश किए गए 100 फीसदी तक का भारी टैरिफ वाले बिल को भारी समर्थन मिल रहा है। अमेरिका के 60 से ज्यादा सांसदों ने इस बिल को सपोर्ट किया है। अमेरिकी राष

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Banyan Tree Benefits: शीघ्रपतन और वीर्य के पतलेपन से हैं परेशान? आयुर्वेद में छिपा है बरगद के फल और दूध का यह पारंपरिक नुस्खा

The image shows a banyan tree and a glass full of milk; the caption reads:

Banyan Tree Sex Health Benefits: आयुर्वेद में बरगद (वट वृक्ष) के फल और दूध को पुरुषों के यौन स्वास्थ्य जैसे शीघ्रपतन और शुक्राणुओं की कमी को दूर करने में बेहद गुणकारी माना गया है। जानिए इसके इस्तेमाल का सही तरीका।

 

बरगद का महत्व:

भारतीय संस्कृति में बरगद (Banyan Tree या वट वृक्ष) को न केवल एक पवित्र और पूजनीय पेड़ माना गया है, बल्कि आयुर्वेद में इसे औषधीय गुणों का खजाना भी कहा गया है। हिंदू धर्म में ब्रह्मा के समान पूजे जाने वाले इस विशालकाय वृक्ष के पत्ते, छाल, फल और इससे निकलने वाले औषधीय दूध (लेटेक्स) का इस्तेमाल सदियों से कई तरह की शारीरिक व्याधियों को दूर करने के लिए किया जाता रहा है।

 

विशेष रूप से पुरुषों के यौन स्वास्थ्य (Sexual Health) को बेहतर बनाने, वीर्य के पतलेपन को दूर करने और शीघ्रपतन (Premature Ejaculation) जैसी समस्याओं में बरगद के नुस्खे प्राचीन ग्रंथों में बेहद असरदार बताए गए हैं। आइए जानते हैं बरगद के पेड़ से जुड़े इन पारंपरिक नुस्खों और उनके फायदों के बारे में।

 

पुरुषों के लिए क्यों खास है बरगद? (यौन संबंधी फायदे)

आयुर्वेद के अनुसार, बरगद में प्राकृतिक रूप से 'कामशक्तिवर्धक' (Aphrodisiac) और 'शुक्रवर्धक' (Spermatogenic) गुण पाए जाते हैं। इसके नियमित और सही इस्तेमाल से पुरुषों को निम्नलिखित लाभ मिल सकते हैं:

 

शीघ्रपतन और कमजोरी में राहत: यह शरीर की अंदरूनी कमजोरी को दूर कर स्टैमिना बढ़ाने में मददगार माना जाता है।

 

वीर्य के विकार दूर करना: वीर्य का पतलापन और प्रमेह (Involuntary Semination) जैसी समस्याओं को ठीक करने में इसके तत्वों को गुणकारी माना गया है।

 

शुक्राणुओं (Sperm Count) में वृद्धि: यह शुक्राणुओं की संख्या और उनकी गुणवत्ता में सुधार करने में सहायक है।

 

पहला नुस्खा: बरगद के फल और मिश्री का पाउडर

प्राचीन आयुर्वेदिक पद्धतियों में बरगद के फलों का एक विशेष नुस्खा बताया गया है, जिसे तैयार करने की विधि काफी अनूठी है:

 

कैसे तैयार करें यह मिश्रण?

फल इकट्ठा करें: बरगद के पेड़ पर लगने वाले छोटे, गोलाकार और लाल रंग के पके हुए फलों को सीधे हाथों से तोड़ें। ध्यान रखें कि जमीन पर गिरे हुए फलों का इस्तेमाल नहीं करना है।

छाया में सुखाएं: इन फलों को साफ कपड़े पर फैलाकर सीधे धूप के बजाय छांव में अच्छी तरह सुखा लें।

पत्थर पर पीसें: जब फल पूरी तरह सूख जाएं, तो इन्हें पीसकर पाउडर बना लें। ध्यान रहे कि पीसने के दौरान लोहे के बर्तनों या मिक्सर ग्राइंडर का इस्तेमाल न करें; इसे पत्थर के सिल-बट्टे या खरल में पीसना सबसे उत्तम माना जाता है।

मिश्री मिलाएं: इस पाउडर के वजन के बराबर मात्रा में पत्थर पर पिसी हुई धागे वाली मिश्री (माखन मिश्री) मिला लें।

भंडारण: इस तैयार मिश्रण को कांच या मिट्टी के साफ बर्तन में सुरक्षित रखें।

सेवन की विधि: इस पाउडर की आधा-आधा चम्मच मात्रा सुबह और शाम को हल्के गर्म (गुनगुने) दूध के साथ लेने की सलाह दी जाती है। यह सामान्य स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है।

 

दूसरा नुस्खा: बरगद के पत्तों/डंठल का दूध और बताशा

बरगद के पत्तों, कोमल कलियों या डंठल को तोड़ने पर जो गाढ़ा, सफेद दूध जैसा रस (Latex) निकलता है, उसका भी एक पारंपरिक प्रयोग बहुत प्रचलित है।

 

सेवन का तरीका: सूर्यास्त से ठीक पहले बरगद के पेड़ से ताजी कली या पत्ता तोड़ें। उससे निकलने वाले दूध की 5 बूंदें एक मीठे बताशे पर टपकाकर उसका सेवन करें।

 

20 दिनों का विशेष चक्र:

आयुर्वेद के जानकारों के अनुसार, पहले दिन 5 बूंदों से शुरुआत करें। इसके बाद हर दिन एक-एक बूंद बढ़ाते जाएं (जैसे दूसरे दिन 6 बूंद, तीसरे दिन 7 बूंद) और इसे 10वें दिन तक 14-15 बूंदों तक ले जाएं। 10 दिन पूरे होने के बाद, अगले 10 दिनों तक रोजाना एक-एक बूंद कम करते जाएं (जैसे 11वें दिन 13 बूंद, फिर 12 बूंद)। इस तरह 20 दिनों का यह चक्र वीर्य के पतलेपन और प्रमेह की समस्या को जड़ से खत्म करने में मदद करता है।

 

महत्वपूर्ण चिकित्सकीय परामर्श (Health Disclaimer):

यद्यपि आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में बरगद के इन नुस्खों को बेहद सुरक्षित और प्रभावी बताया गया है, लेकिन हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति (वात, पित्त, कफ) अलग होती है। इसलिए किसी भी नुस्खे को शुरू करने से पहले एक योग्य और प्रमाणित आयुर्वेदिक चिकित्सक (BAMS Doctor) से परामर्श जरूर लें। यदि आपको कोई अन्य गंभीर बीमारी या एलर्जी है, तो बिना डॉक्टरी सलाह के इसका सेवन न करें।

US Visa Rules Tightened: अमेरिकी वीजा नियमों में भारी बदलाव, विदेशी छात्रों और पत्रकारों के लिए क्या बदलेगा यहां जानिए

US Visa Rules: ट्रंप प्रशासन ने विदेशी छात्रों, कल्चरल एक्सचेंज विजिटर्स और पत्रकारों के लिए वीजा की अवधि को कड़ा करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग के एक नए फाइनल रूल के तहत अब अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए F वीजा, कल्चरल एक्सचेंज विजिटर्स के तहत अमेरिका में काम करने की अनुमति देने वाले J वीजा और मीडिया कर्मियों के लिए I वीजा के लिए एक निश्चित समय अवधि तय कर दी गई है।

फिलहाल ये वीजा अमेरिका में कार्यक्रम या रोजगार की अवधि तक के लिए उपलब्ध रहते हैं। लेकिन नए नियमों के लागू होने के बाद विदेशी छात्रों और मीडिया कर्मियों के लिए मुश्किलें काफी बढ़ने वाली हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस नए वीजा नियम से विदेशी छात्रों और पत्रकारों के लिए क्या-क्या बदलने जा रहा है।

वीजा की अवधि में क्या हुआ बदलाव?

रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक नए नियमों के तहत वीजा की समय सीमा को पूरी तरह से सीमित कर दिया गया है। नए नियमों के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय छात्रों (Student Visa) और एक्सचेंज वीजा की अवधि अब अधिकतम 4 वर्ष से ज्यादा नहीं होगी। विदेशी पत्रकारों के लिए वीजा मौजूदा समय में सालों तक चल सकता है पर अब अधिकतम 240 दिनों तक का होगा।

चीनी नागरिकों, पत्रकारों के मामले में इस वीजा की अवधि को और भी कम करके केवल 90 दिन कर दिया गया है। यह नया नियम फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित होने के 60 दिनों के बाद प्रभावी होगा। ये फेडरल रजिस्टर कांग्रेस की समीक्षा के अंतर्गत आता है।

विदेशी छात्रों के लिए कड़े हुए नियम

नए वीजा नियमों के कारण अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के सामने कई नई पाबंदियां और चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। नए नियम स्पष्ट रूप से स्नातक छात्रों को किसी भी समय अपने शैक्षणिक उद्देश्यों को बदलने या बिना आधिकारिक अनुमति के दूसरे स्कूल में ट्रांसफर लेने से प्रतिबंधित करते हैं।

अपनी डिग्री या ट्रेनिंग पूरी करने के बाद छात्रों को अमेरिका छोड़ने के लिए मिलने वाले समय को 60 दिनों से घटाकर आधा यानी 30 दिन कर दिया गया है। हालांकि गृह सुरक्षा विभाग के मुताबिक अगर वीजा धारक निर्धारित अवधि के बाद भी अमेरिका में रुकना चाहते हैं तो उन्हें एक्सटेंशन के लिए आवेदन करना होगा या फिर विदेश यात्रा कर दोबारा अमेरिका में प्रवेश हासिल करना होगा।

भड़का चीन, दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

अमेरिकी सरकार के इस कदम पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। चीन के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को अमेरिका के इस कदम को भेदभावपूर्ण कहा है और वाशिंगटन से चीनी पत्रकारों के लिए इस नई वीजा नीति को तुरंत वापस लेने का आग्रह किया है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बीजिंग में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि यह कार्रवाई 2021 में मीडिया मुद्दों पर चीन और अमेरिका के बीच बनी तीन-बिंदु सहमति का गंभीर उल्लंघन करती है और अमेरिका में चीनी मीडिया के सामान्य कामकाज को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। इसके साथ ही लिन जियान ने चेतावनी दी कि चीन इसके खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखता है।

अमेरिका ने क्यों उठाया यह कदम?

गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने इन नियमों को लागू करने के पीछे वीजा आवेदकों की संख्या में आई भारी उछाल को मुख्य कारण बताया है। विभाग के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2024 में 18 लाख से अधिक छात्र वीजा दाखिले हुए जो पिछले वर्ष की तुलना में 11% से अधिक की वृद्धि दर्शाते हैं। इसके अलावा अमेरिका ने वित्तीय वर्ष 2024 में 5,00,000 से अधिक एक्सचेंज विजिटर्स और 37,300 मीडिया कर्मियों को वीजा जारी किए थे।

DHS का कहना है कि इन आगंतुकों की संख्या में भारी वृद्धि की वजह से संयुक्त राज्य अमेरिका में रहने के दौरान इन गैर-प्रवासियों की निगरानी और ओवरसाइट करने की विभाग की क्षमता के सामने एक चुनौती खड़ी हो गई है। विभाग ने ऐसे कई उदाहरण भी दिए जहां छात्र और एक्सचेंज विजिटर अपने वीजा पर दशकों तक अमेरिका में रुके रहे।