कल का मौसम 13 जुलाई: पूर्वी यूपी, बिहार-बंगाल तक मूसलाधार बरसात, IMD ने इन 11 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट दिया

India Weather Update: देश के कई हिस्सों में मानसून का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग 13 जुलाई के लिए देश का ताजा वेदर बुलेटिन जारी कर दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक मानसून की अक्षीय रेखा इस समय श्री गंगानगर, हिसार, मेरठ, शाहजहाँपुर, गोरखपुर, मुजफ्फरपुर से होते हुए पूर्व-दक्षिण-पूर्व की ओर दक्षिण असम तक जा रही है। इसके साथ ही उत्तर-पूर्वी बिहार, दक्षिण बांग्लादेश और उत्तर-पूर्वी असम के ऊपर अलग-अलग चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं। इन मजबूत वेदर सिस्टम के प्रभाव से बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत कुल 11 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

आइए जानते हैं मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक 13 जुलाई को देश के अलग-अलग राज्यों में मौसम का हाल कैसा रहने वाला है:

इन राज्यों में मूसलाधार और बहुत भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के मुताबिक 13 जुलाई को तीन प्रमुख राज्यों के अलग-अलग हिस्सों में बादलों की भीषण गर्जना के साथ मूसलाधार और बहुत भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है:

  • बिहार
  • गंगा तटीय पश्चिम बंगाल
  • असम और मेघालय

इन इलाकों में रहने वाले लोगों को जलभराव और खराब मौसम को देखते हुए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

पूर्वी यूपी और उत्तराखंड समेत इन 8 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी

देश के कई अन्य हिस्सों में भी मानसूनी हवाओं के चलते भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में शामिल हैं:

  • पूर्वी उत्तर प्रदेश
  • उत्तराखंड
  • उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम
  • ओडिशा
  • अरुणाचल प्रदेश
  • नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा

आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और बवंडर जैसी तेज हवाओं का अलर्ट

बारिश के साथ-साथ मौसम विभाग ने कई राज्यों में आकाशीय बिजली गिरने और तेज रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने का पूर्वानुमान जारी किया है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में कुछ स्थानों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली कड़कने की आशंका है। बिहार, झारखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के अलग-अलग हिस्सों में 30 से 40 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी और गरज-चमक के साथ बिजली गिर सकती है।

उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग स्थानों पर तेज गरज के साथ बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कुछ इलाकों में धरातल पर बहुत तेज गति से हवाएं चलने की संभावना है।

तटीय आंध्र प्रदेश में लू और ओडिशा-तमिलनाडु में उमस का असर

एक तरफ जहां उत्तर और पूर्वी भारत में बारिश का दौर जारी है, वहीं दक्षिण और तटीय इलाकों में मौसम विपरीत रहेगा। तटीय आंध्र प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में लू की स्थिति बनी रहेगी। ओडिशा और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल के कुछ हिस्सों में मौसम बेहद गर्म और उमस भरा रहने वाला है। इससे लोगों को काफी परेशानी हो सकती है।

अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में मौसम का हाल

समंदर में उठने वाले तूफान और तेज हवाओं को लेकर मछुआरों को तटीय इलाकों में न जाने की चेतावनी दी गई है। पश्चिम-मध्य और उससे सटे पूर्वी-मध्य, उत्तरी और दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के अधिकांश हिस्सों में, सोमालिया और ओमान के तटों के साथ-साथ उत्तरी गुजरात के तटों पर 45-55 किमी/घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं 65 किमी/घंटे की रफ्तार तक पहुंच सकती हैं। उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों से सटे समुद्र और अंडमान सागर में 40-50 किमी/घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं, जिनकी गति बढ़कर 60 किमी/घंटे तक पहुंचने का अनुमान है।

IMD Heavy Rain Alert: अगले 7 दिन इन राज्यों में होगी आफत की बारिश! 60 Kmph की आंधी भी, बिहार से लेकर MP तक 17 जुलाई तक ऐसा रहेगा मौसम

Weekly Weather Forecast: देशभर में मानसून की रफ्तार तेज हो गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 11 से 17 जुलाई तक के लिए देशभर का साप्ताहिक मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। इस दौरान पूर्वी, मध्य, पूर्वोत्तर और पश्चिमी भारत के कई राज्यों में भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना है। कई इलाकों में 40-60 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं, गरज-चमक और बिजली गिरने की भी चेतावनी दी गई है। वहीं, आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में हीटवेव का अलर्ट भी जारी किया गया है।

इस दौरान पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में जहां मूसलाधार बारिश का संकट मंडरा रहा है। वहीं, मध्य भारत में तेज आंधी-तूफान का अलर्ट है। दूसरी ओर, दक्षिण के कुछ हिस्सों में अभी भी भीषण गर्मी और लू का प्रकोप जारी है।

आइए जानते हैं अगले कुछ दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में कैसा रहेगा मौसम:-

मध्य भारत: मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का अलर्ट

IMD के अनुसार पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ में पूरे सप्ताह बारिश का दौर जारी रहेगा:-

  • 14 से 17 जुलाई के बीच पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी बारिश की संभावना।
  • 11 से 15 जुलाई तक छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का अलर्ट।
  • पूर्वी मध्य प्रदेश और विदर्भ में 40 से 60 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं, गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका।

पूर्वी भारत: बिहार, झारखंड, ओडिशा और बंगाल में मूसलाधार बारिश

पूर्वी भारत में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहेगा।

  • बिहार में 13 से 15 जुलाई के दौरान भारी बारिश की संभावना।
  • 11 और 12 जुलाई को बिहार के कुछ इलाकों में अति भारी बारिश हो सकती है।
  • झारखंड, गंगीय पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी कई दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट।
  • कई स्थानों पर बिजली गिरने और तेज हवाओं की चेतावनी।

पूर्वोत्तर भारत: मेघालय में सबसे ज्यादा खतरा

अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में पूरे सप्ताह व्यापक बारिश का अनुमान है:-

  • 11 जुलाई को मेघालय में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी।
  • 12 जुलाई को असम और मेघालय में अति भारी बारिश का अलर्ट।
  • पूरे सप्ताह कई राज्यों में भारी बारिश जारी रहने की संभावना।
  • पश्चिम भारत: कोंकण-गोवा और महाराष्ट्र में बरसेंगे बादल
  • कोंकण और गोवा में पूरे सप्ताह व्यापक बारिश।
  • गुजरात, सौराष्ट्र-कच्छ, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में भी लगातार हल्की से मध्यम बारिश का दौर।

दक्षिण भारत: बारिश भी, हीटवेव भी

  • केरल, तटीय कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में बारिश के आसार।
  • 11 जुलाई को तमिलनाडु में तेज हवाओं और गरज-चमक की चेतावनी।
  • तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में 11-12 जुलाई को हीटवेव का अलर्ट जारी।

कहां चलेगी तेज हवा?

IMD के मुताबिक, कई राज्यों में 40 से 60 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं:-

पूर्वी मध्य प्रदेश

विदर्भ

झारखंड

अंडमान-निकोबार

तमिलनाडु

ओडिशा

बीते 24 घंटे: कहां हुई सबसे ज्यादा बारिश?

पिछले 24 घंटों में देश के कई हिस्सों में जोरदार बारिश दर्ज की गई।

  • चेरापूंजी (मेघालय) – 19 सेमी
  • मौसिनराम (मेघालय) – 17 सेमी
  • नाहन (हिमाचल प्रदेश) – 16 सेमी
  • फतेहपुर (उत्तर प्रदेश) – 16 सेमी
  • कीर्तिनगर (उत्तराखंड) – 13 सेमी
  • बिक्रम (पटना, बिहार) – 10 सेमी

लोगों के लिए जरूरी सलाह

  • भारी बारिश वाले क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचें।
  • नदी-नालों और जलभराव वाले इलाकों से दूरी बनाए रखें।
  • गरज-चमक के दौरान खुले मैदान और पेड़ों के नीचे खड़े न हों।
  • स्थानीय प्रशासन और IMD की एडवाइजरी का पालन करें।

इन राज्यों में आज ‘अत्यधिक भारी’ बारिश का अलर्ट, पूर्वोत्तर में आफत

पूर्वोत्तर भारत में मानसून का सबसे रौद्र रूप देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, 11 जुलाई को मेघालय में अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश (Extremely Heavy Rainfall) होने की आशंका है। इसके अलावा:-

  • असम और मेघालय में 12 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अनुमान है। जबकि 13 से 17 जुलाई के बीच भी भारी बारिश जारी रहेगी।
  • अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 11 से 17 जुलाई के दौरान व्यापक रूप से भारी बारिश होने की संभावना है। इन सभी राज्यों में 15 जुलाई तक आंधी और बिजली गिरने का अलर्ट भी जारी किया गया है।

बिहार और पश्चिम बंगाल में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी

पूर्वी भारत के राज्यों के लिए भी मौसम विभाग ने चिंता जताई है:-

  • बिहार और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम में 11 और 12 जुलाई को ‘बहुत भारी बारिश’ (Very Heavy Rainfall) होने के आसार हैं। बिहार में 13 से 15 जुलाई के बीच भी भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा।
  • झारखंड में 12 से 14 जुलाई, गंगा तटीय पश्चिम बंगाल में 11-13 व 16-17 जुलाई और ओडिशा में 11 से 15 जुलाई के बीच भारी बारिश होने की संभावना है।
  • मध्य और पश्चिम भारत: आंधी-तूफान के साथ 60 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

    मध्य भारत में बारिश के साथ-साथ तेज हवाओं का तांडव देखने को मिल सकता है।

  • पूर्वी मध्य प्रदेश (11-14 जुलाई) और विदर्भ (13-15 जुलाई) में आंधी-तूफान के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।
  • पश्चिम मध्य प्रदेश में 11 से 14 जुलाई के दौरान 30-40 किमी/घंटा (झोंके 50 किमी/घंटा तक) की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।
  • छत्तीसगढ़ में 14 से 17 जुलाई के बीच व्यापक रूप से भारी बारिश होने की उम्मीद है। वहीं, कोंकण, गोवा और गुजरात के इलाकों में भी 17 जुलाई तक बारिश का दौर जारी रहेगा।

लू (Heat Wave) की चेतावनी

एक तरफ जहां देश के कई हिस्सों में पानी बरस रहा है। वहीं तटीय आंध्र प्रदेश और यनम के अलग-अलग इलाकों में 11 और 12 जुलाई को भीषण लू (Heat Wave) चलने की चेतावनी दी गई है।

बकरी कान हिलाए तो समझो बारिश आए! हमारे किसान इन 5 पशुओं, पक्षियों, कीटों को देख बता देते थे कब और कितनी होगी बरसात

सालों से, भारतीय किसानों ने आसमान को समझने के अपने तरीके विकसित किए थे। ये कोई बिखरी हुई लोक-मान्यताएं या अलग-थलग परंपराएं नहीं थीं। कई इलाकों में, समुदाय बहुत ध्यान से देखे-परखे गए तरीकों को अपनाते थे। ये तरीके पीढ़ियों तक बेहतर बनाए गए, ग्रंथों में दर्ज किए गए और बहुत ही एकरूपता के साथ आगे की पीढ़ियों तक पहुंचाए गए।

खबरों के अनुसार, भारत में बारिश का अनुमान लगाने के कुछ सबसे पुराने तरीके खगोल विज्ञान से गहराई से जुड़े थे। खगोल विज्ञान और समय की गणना पर सबसे शुरुआती भारतीय ग्रंथों में से एक, ‘वेदांग ज्योतिष’ ने ‘पंचांग’ (हिंदू कैलेंडर) की नींव रखी, जिसका इस्तेमाल आज भी देश के कई हिस्सों में किया जाता है। सूरज, चांद और तारों की चाल पर नजर रखकर, इस तरीके से लोगों को मौसम में बदलाव और बारिश के पैटर्न का अंदाजा लगाने में मदद मिलती थी।

सदियों बाद, खगोलशास्त्री और विद्वान वराहमिहिर ने इन विचारों को और आगे बढ़ाया। छठी सदी ईस्वी में लिखी अपनी रचना ‘बृहत्संहिता’ में, उन्होंने बारिश, खगोलीय घटनाओं और वायुमंडलीय स्थितियों के बीच संबंधों का वर्णन किया। कुछ शोधकर्ताओं के अनुसार, इन अवलोकनों के कुछ हिस्से आधुनिक मौसम विज्ञान की अवधारणाओं से मिलते-जुलते हैं।

कई गांवों में, हिंदू नव वर्ष के दौरान ‘ग्राम जोशी’ या गांव का ज्योतिषी सालाना बारिश और फसल के बारे में भविष्यवाणियां पढ़कर सुनाता था। पीढ़ियों से चली आ रही गणनाओं पर आधारित ये भविष्यवाणियां अक्सर किसानों को आने वाले खेती के मौसम की योजना बनाने में मदद करती थीं।

कई रिपोर्टों के अनुसार, समय के साथ किसानों ने खगोलीय परंपराओं के साथ-साथ मौसम का अनुमान लगाने के स्थानीय तरीके भी विकसित किए। आंध्र प्रदेश की ऐसी ही एक परंपरा थी ‘तट्टा संकेतम’; इसमें अनाज से भरी टोकरी के ऊपर एक गिलास रखा जाता था और एक बच्चा उसे सावधानी से संतुलित करता था। गिलास अंत में जिस दिशा में गिरता था, उसे ग्रहों की स्थिति के साथ जोड़कर देखा जाता था और माना जाता था कि इससे आने वाले मॉनसून के मिजाज का पता चलता है।

पीढ़ियों से, किसान अपने घरों और खेतों के आस-पास होने वाले बदलावों को समझना भी सीख गए थे। बकरियों का बार-बार कान फड़फड़ाना, रात भर उल्लुओं का लगातार बोलना और लाल बालों वाली इल्लियों का तेजी से सुरक्षित जगह की ओर बढ़ना – ये सभी इस बात के संकेत माने जाते थे कि बारिश होने वाली है। बाद में वैज्ञानिकों ने पाया कि कई कीड़े इंसानों के महसूस करने से बहुत पहले ही अपने एंटीना से नमी में होने वाले बदलावों का पता लगा सकते हैं। शायद इसीलिए ऐसी बातें अक्सर सही साबित होती थीं।

मधुमक्खियों का जल्दी अपने छत्तों में लौटना और मकड़ियों का तेजी से अपने जाले ठीक करना बदलते मौसम की और चेतावनियां मानी जाती थीं। इसके अलावा, शाम के समय खाना पकाने से निकलने वाला धुआं, जो ऊपर उठने के बजाय नीचे ही रहता था, उसे हवा में नमी बढ़ने का संकेत माना जाता था।

खबरों के मुताबिक, किसान शायद ही कभी सिर्फ एक संकेत पर निर्भर रहते थे। इसके बजाय, वे बुवाई का फैसला करने से पहले कई संकेतों की जांच-पड़ताल करते थे और खेती से जुड़े फैसलों में वैसी ही सावधानी और अनुशासन बरतते थे, जिसकी अनिश्चितता के कारण जरूरत होती थी।

El Nino Impact: अल नीनो के खतरे पर PMO में हाई लेवल मीटिंग, खेती-जॉब से खाने-पीने के सामान तक अंदर से निकल कर आईं ये 5 बातें जानिए

El Nino Update: देश में खरीफ सीजन पर और इकॉनमी के दूसरे सेक्टर्स पर अल नीनो के खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अलर्ट मोड में आ गया है। PIB की एक प्रेस रिलीज के मुताबिक प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ पीके मिश्रा की अध्यक्षता में 7 जुलाई पीएमओ में एक हाई लेवल बैठक आयोजित की गई। इसमें कृषि, बिजली, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, आर्थिक मामलों और उपभोक्ता मामलों सहित 15 से अधिक मंत्रालयों के सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

बैठक का उद्देश्य अल नीनो की वजह से पैदा होने वाले हालात और मंत्रालयों की तैयारियों का डिटेल में एनालिसिस करना था। आइए आपको बताते हैं कि इस बैठक से निकल कर क्या खास बातें सामने आई हैं:-

1- मानसून का हाल और अल नीनो का अनुमान

बैठक की शुरुआत में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जून से लेकर 7 जुलाई तक देश में हुई बारिश का डिटेल पेश किया। मौसम विभाग के महानिदेशक ने बताया कि गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में मानसून के आने में करीब 10 दिनों की देरी हुई। वैसे 7 जुलाई तक हुई बारिश के बाद पूरे भारत में बारिश की कमी घटकर -12% रह गई है।

ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि जुलाई के पहले सप्ताह में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। जुलाई और अगस्त में कमजोर से मध्यम अल नीनो रहने की उम्मीद है। चूंकि मानसून सीजन की 30% से अधिक बारिश जुलाई में ही होती है इसलिए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि अल नीनो वर्ष का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उस साल सामान्य से कम या बहुत कम बारिश होगी।

2- कृषि और फसलों को लेकर सरकार की तैयारी

कृषि सचिव ने खरीफ सीजन के दौरान अल नीनो के किसी भी संभावित प्रभाव से निपटने की तैयारियों पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। देश के 262 संवेदनशील जिलों के लिए डिस्ट्रिक्ट एग्रीकल्चर कंटिंजेंसी प्लान को अपडेट किया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने जिलों में मौजूद कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए भारतीय कृषि में अल नीनो जोखिमों के प्रबंधन पर SOP जारी की है।

बारिश, जलाशयों में पानी, फसल की बुवाई, बाजार के रुझान और कीट/बीमारी की स्थिति की निगरानी के लिए राज्यों के साथ फसल मौसम निगरानी समूह की वीकली बैठकें बुलाई जा रही हैं। कमजोर राज्यों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड कवरेज के लिए अभियान शुरू किए गए हैं।

3- खाद्य सामग्री और फर्टिलाइजर का बफर स्टॉक

देश में आवश्यक खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता को लेकर भी बैठक में मंथन हुआ। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने खुदरा कीमतों की स्थिति और चावल, गेहूं और दालों के पर्याप्त बफर स्टॉक की जानकारी साझा की। उर्वरक विभाग ने बताया कि रबी सीजन के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। दोनों विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे आवश्यक वस्तुओं और उर्वरकों की मैक्रो और माइक्रो दोनों स्तरों पर उपलब्धता की लगातार निगरानी करें।

4- पानी, बिजली और पशुओं के चारे पर फोकस

इस बैठक में पेयजल, सिंचाई और पशुपालन के मोर्चे पर भी मंत्रालयों ने अपनी रिपोर्ट पेश की। पेयजल और स्वच्छता विभाग ने बताया कि स्थिति स्थिर है लेकिन उन्हें संवेदनशील जिलों में माइक्रो लेवल पर प्लानिंग और निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

जल संसाधन विभाग ने बताया कि वर्तमान में भूजल और जलाशयों की स्थिति स्थिर है लेकिन पूरे सीजन इस पर लगातार नजर रखी जाएगी। पशुपालन और डेयरी विभाग को निर्देश दिया गया है कि वे सूखे चारे, हरे चारे और पशु आहार की उपलब्धता का आकलन करें। इसके लिए चारा विकास योजनाएं बनाने और राज्यों के साथ नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। बिजली विभाग ने भी उत्पादन और उपलब्धता की स्थिति साझा की।

5- रोजगार, स्वास्थ्य और राज्यों के साथ तालमेल

बैठक में स्वास्थ्य अलर्ट और रोजगार योजनाओं पर भी चर्चा की गई। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने बताया कि हीट वेव, हाई ह्यूमिडिटी और डेंगू के प्रकोप की निगरानी के लिए एडवाइजरी जारी हुई हैं। ग्रामीण विकास विभाग ने जानकारी दी कि 1 जुलाई से ‘विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन’ के तहत काम शुरू हो गया है और अब तक 1 करोड़ मानव दिवस रोजगार पैदा किया गया है।

PMO का सख्त निर्देश

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि स्थिति की लगातार निगरानी की जानी चाहिए। मंत्रालयों को कहा गया है कि वे राज्यों के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर माइक्रो रणनीति के साथ काम करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कृषि और आर्थिक गतिविधियां अल नीनो से प्रभावित न हों।

‘अल नीनो’ का एनर्जी सिस्टम पर सबसे ज्यादा असर

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के एक नए एनालिसिस के अनुसार, इस साल के अल नीनो का सबसे बड़ा ग्लोबल असर भारत के एनर्जी सिस्टम पर पड़ने वाला है। अल नीनो मौसम का एक ऐसा चक्र है जो बार-बार आता है। इससे दुनिया भर में तापमान बढ़ता है।

भारत के सामने दोहरी चुनौती

अल नीनो की वजह से हवा और बारिश कम होने से टरबाइन और हाइड्रोपावर से बिजली का उत्पादन घटेगा। जबकि तापमान बढ़ने से एयर कंडीशनिंग (AC) की मांग बढ़ेगी, जिसमें बहुत ज्यादा बिजली खर्च होती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि साल भर कूलिंग अप्लायंसेज (ठंडा करने वाले उपकरण) के ज्यादा इस्तेमाल से बिजली की मांग 10 टेरावाट-घंटे (TWh) तक बढ़ सकती है, जो दिल्ली की सालाना बिजली खपत का एक-चौथाई हिस्सा है।

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यह एनालिसिस जुलाई 2026 से जून 2027 की अवधि के लिए भारत के पावर सेक्टर पर ला नीना से अल नीनो में बदलाव के असर को दिखाता है। रिपोर्ट में कहा गया है, “भारत को बिजली देने में सौर ऊर्जा की भूमिका लगातार बढ़ रही है। अब यह दिन के समय बिजली की 24 प्रतिशत मांग को पूरा करती है। सौर ऊर्जा उत्पादन पर अल नीनो का बहुत कम असर पड़ता है, जिसका मतलब है कि भारत द्वारा लगाया गया हर अतिरिक्त सोलर पैनल और बैटरी ग्रिड को ऐसे खराब मौसम का सामना करने के लिए तैयार करने में मदद करता है।”

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Delhi Weather: दिल्ली में हीटवेव के बाद 5 दिन देरी से पहुंचा मानसून, IMD ने 5 जुलाई तक जारी किया बारिश का अलर्ट

Delhi Weather: कई दिनों की भीषण गर्मी, उमस और लू के बाद, दक्षिण-पश्चिम मानसून आखिरकार गुरुवार को दिल्ली पहुंच ही गया, जिससे लोगों को इस उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिली। बता दें कि इस बार मानसून अपने तय समय से 5 दिन देर से पहुंचा है। वहीं, राष्ट्रीय राजधानी में मानसून के पहुंचने के बाद गुरुवार की सुबह दिल्ली के कई इलाकों में हल्की बारिश हुई। पूरे दिन आसमान में बादल छाए रहे, जिससे तापमान सामान्य से काफी कम रहा। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने बताया कि मौसम की अनुकूल परिस्थितियां बनने के बाद दिल्ली में मानसून के पहुंचने की आधिकारिक घोषणा कर दी गई।

दूसरी तरफ मौसम विभाग ने शुक्रवार के लिए येलो अलर्ट जारी किया है और आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहने और मध्यम बारिश का अनुमान जताया है। इस दौरान न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में दिल्ली में मॉनसून की भारी बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है।

5 जुलाई तक और मानसून बारिश की संभावना

स्काईमेट वेदर के मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत ने बताया कि मौसम प्रणाली में बदलाव के बाद दिल्ली में बारिश की गतिविधियां फिर तेज हो सकती हैं।

पलावत ने कहा, “मानसून आमतौर पर मौसमी ट्रफ के साथ आगे बढ़ता है, जो अभी पंजाब से बंगाल की खाड़ी तक फैला हुआ है।” उन्होंने कहा कि यह मौसमी ट्रफ दक्षिण की ओर मध्य भारत की तरफ बढ़ने की उम्मीद है, जिससे मध्य भारत में बारिश बढ़ेगी, जबकि दिल्ली, पंजाब और हरियाणा सहित इंडो-गंगा के मैदानी इलाकों में बारिश की गतिविधियां कुछ समय के लिए कम हो सकती हैं।”

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि 5 जुलाई तक ट्रफ के फिर से उत्तर की ओर बढ़ने की संभावना है, जिससे दिल्ली और उत्तर-पश्चिम भारत के अन्य हिस्सों में मानसून जैसी बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है।

2021 के बाद पहली बार जुलाई में मॉनसून की शुरुआत

2021 के बाद यह पहली बार है जब मानसून जुलाई में दिल्ली पहुंचा है। 2021 में, मानसून 13 जुलाई को आया था। IMD के रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले कुछ सालों में मानसून अलग-अलग तारीखों पर दिल्ली पहुंचा है। 2025 में यह 29 जून को, 2024 में 28 जून को, 2023 में 25 जून को और 2022 में 30 जून को पहुंचा था।

पिछले 125 सालों में दिल्ली में मानसून का सबसे जल्दी आगमन 15 जून, 2008 को दर्ज किया गया था, जबकि सबसे देर से आगमन 26 जुलाई, 1987 को हुआ था।

2020 में, मॉनसून 25 जून को दिल्ली पहुंचा था और एक दिन बाद पूरे देश में फैल गया था। 2021 में, यह दिल्ली पहुंचा और उसी दिन पूरे देश में फैल गया। 2022, 2023 और 2024 में, मॉनसून 2 जुलाई को पूरे देश में फैल गया, जबकि पिछले साल यह दिल्ली पहुंचा और 29 जून को पूरे भारत में फैल गया।

तापमान में भारी गिरावट

मानसून के आने से शहर भर में तापमान में काफी गिरावट आई। दिल्ली के मुख्य मौसम केंद्र, सफदरजंग में अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.4 डिग्री कम था, जबकि न्यूनतम तापमान 22.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 5.1 डिग्री कम था। शहर में 21 जुलाई, 2021 के बाद से सबसे कम न्यूनतम तापमान भी दर्ज किया गया; उस समय न्यूनतम तापमान 22.4 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया था।

अन्य मौसम केंद्रों पर भी सामान्य से कम तापमान दर्ज किया गया। जैसे- पालम में अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। लोदी रोड पर अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

रिज स्टेशन पर अधिकतम तापमान 33.8 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि अयानगर में अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

दिल्ली में हल्की बारिश हुई

गुरुवार को सुबह के समय हल्की लेकिन व्यापक बारिश हुई। सुबह 8.30 बजे तक सफदरजंग में 4.6mm बारिश हुई, जबकि पालम में 1.9mm और आयानगर में 5mm बारिश दर्ज की गई। लोदी रोड पर 4.1mm और रिज स्टेशन पर 3mm बारिश हुई। सुबह के बाद ज्यादातर मौसम केंद्रों पर कोई खास बारिश दर्ज नहीं की गई।

मानसून में देरी क्यों हुई?

देरी से आने की वजह बताते हुए पलावत ने कहा कि मानसून को बनाए रखने के लिए जरूरी नमी वाली हवाएं पहले दिल्ली नहीं पहुंची थीं।

उन्होंने कहा, “बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी वाली पूर्वी हवाएं, जो मानसून की लगातार बारिश के लिए जरूरी हैं, पहले दिल्ली नहीं पहुंची थीं।” दिल्ली में मानसून के देर से आने से पहले का मौसम (प्री-मानसून सीजन) सामान्य से ज्यादा गर्म रहा था।

IMD के डेटा के मुताबिक, मार्च-जून के दौरान औसत न्यूनतम तापमान 22.9 डिग्री सेल्सियस रहा, जो 2022 के बाद से सबसे ज्यादा औसत तापमान है।

इसी दौरान औसत अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस रहा, जो 2024 के बाद पिछले छह सालों में दूसरा सबसे ज्यादा औसत तापमान है। राष्ट्रीय राजधानी में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आने से पहले, प्री-मानसून सीजन में लगातार गर्मी, उमस, कुछ समय के लिए तेज लू और कहीं-कहीं प्री-मानसून बारिश देखी गई।

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Monsoon Special Recipes: मानसून की 5 बेहतरीन रेसिपीज, देखते ही मुंह में आ जाएगा पानी

An image providing information on preparing hot, spicy, and special recipes for rainy days

Monsoon Special Recipes: रिमझिम बारिश की बूंदें, ठंडी हवा और खिड़की से आती मिट्टी की सोंधी खुशबू… मानसून का मजा तब तक अधूरा है, जब तक किचन से गरमा-गरम और चटपटी चीजों की महक न आए। मानसून का मौसम केवल ठंडी हवाओं और सुहाने मौसम का ही नहीं, बल्कि परिवार और दोस्तों के साथ स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लेने का भी होता है। इस सुहाने मौसम का लुत्फ दोगुना करने के लिए यहां मानसून की 5 सबसे बेहतरीन और सदाबहार रेसिपीज दी गई हैं, जिन्हें देखते ही आपके मुंह में पानी आ जाएगा:

 

1. कड़क चाय के साथ 'चीज़ी ब्रेड पकौड़ा'

ब्रेड पकौड़ा तो आपने कई बार खाया होगा, लेकिन इस बार बारिश में इसे एक ट्विस्ट दें। आलू के चटपटे मसाले के साथ ब्रेड के बीच में मोज़ेरेला या स्लाइस चीज़/Cheese रखें। इसे बेसन के गाढ़े घोल में डुबोकर सुनहरा होने तक डीप फ्राई करें। जब आप इसे बीच से काटेंगे, तो पिघलता हुआ चीज़ और आलू का तीखापन मानसून का मजा बढ़ा देगा।

 

2. गरमा-गरम 'कॉर्न भजिया'

बारिश के मौसम में भुट्टा (स्वीट कॉर्न) हर गली-नुक्कड़ पर मिलता है। इस बार भुट्टे को उबालकर खाने के बजाय इसके क्रिस्पी भजिए बनाएं। ताजे मक्के के दानों को दरदरा पीस लें, फिर इसमें थोड़ा बेसन, चावल का आटा (क्रिस्पी बनाने के लिए), हरी मिर्च, बारीक कटा प्याज और हरा धनिया मिलाएं। तैयार गरमा-गरम मक्के के भजिए हरी चटनी के साथ लाजवाब लगते हैं।

 

3. मुंबई स्टाइल 'कांदा भजी' (चटपटी प्याज के पकौड़े)

अगर कुछ बेहद क्रिस्पी और झटपट खाने का मन है, तो लच्छेदार प्याज के पकौड़े (कांदा भजी) से बेहतर कुछ नहीं। प्याज को लंबा और पतला काटें, उसमें नमक डालकर 5 मिनट छोड़ दें ताकि प्याज पानी छोड़ दे। अब उसी पानी में बेसन, अजवाईन, कुटी हुई लाल मिर्च और थोड़ा सा गरम तेल डालकर बिना पानी के गूंथ लें और कुरकुरा होने तक तलें। तली हुई हरी मिर्च के साथ इसका स्वाद लाजवाब आता है।

 

4. सूजी का हलवा या 'गुलगुले' (मीठे पकौड़े)

चटपटे के बाद कुछ मीठा हो जाए! उत्तर भारत में बारिश के दिनों में 'गुलगुले', जो कि गेहूं के आटे और गुड़ से बने मीठे पकौड़े बनाने की पुरानी परंपरा है। अगर वो न बनाना चाहें, तो देसी घी में भुना हुआ गरमा-गरम सूजी का शीरा या हलवा बनाएं। इलायची की खुशबू और ड्राई फ्रूट्स से सजा यह हलवा बारिश के मौसम में आत्मा को तृप्त कर देता है।

 

5. चटपटा वेज सूप

बारिश में जब थोड़ी ठंडक बढ़ने लगती है, तो कुछ गरमा-गरम और हेल्दी पीने का मन करता है। ऐसे में स्पाइसी 'हॉट एंड सॉर सूप' या 'क्लियर सूप' एक बेहतरीन विकल्प है। ढेर सारी सब्जियां- जैसे गाजर, पत्तागोभी, शिमला मिर्च और अदरक-लहसुन के तड़के के साथ बना यह सूप न सिर्फ आपके मुंह का स्वाद बदलेगा, बल्कि मानसून की बीमारियों से भी बचाएगा।

 

मानसून स्पेशल टिप: इन सभी रेसिपीज के साथ अदरक, इलायची और लौंग वाली कड़क मसाला चाय बनाना बिल्कुल न भूलें, क्योंकि इसके बिना हर मानसून रेसिपी अधूरी है!

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El Nino Impact in July: IMD के मंथली आउटलुक में जुलाई में भी मानसून वाली बारिश का हाल ठीक नहीं, अल नीनो का खतरा यहां तक पहुंचा

देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जुलाई 2026 के लिए अपना मासिक आउटलुक जारी कर दिया है। मौसम विभाग का यह पूर्वानुमान चिंता बढ़ाने वाला है। आईएमडी के मुताबिक जुलाई के महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की बारिश का हाल ठीक नहीं रहने वाला है और इसके सामान्य से कम होने की पूरी संभावना है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो को माना जा रहा है। इसका खतरा अब और बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

जुलाई में सामान्य से कम रहेगी बारिश: IMD का पूर्वानुमान

IMD द्वारा मल्टी-मॉडल एनसेंबल फोरकास्टिंग सिस्टम के आधार पर अपने पूर्वानुमान जारी किए गए हैं। इसके मुताबिक जुलाई के दौरान पूरे देश में मासिक औसत वर्षा सामान्य से कम (<94% of Long Period Average – LPA) रहने की सबसे अधिक संभावना है।

क्या है बारिश का सामान्य आंकड़ा (LPA)?

साल 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर जुलाई महीने के लिए पूरे देश की दीर्घकालिक औसत वर्षा लगभग 280.4 मिमी है। IMD का पूर्वानुमान है कि देश के अधिकांश हिस्सों में जुलाई में कम बारिश होगी। उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ हिस्सों, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में बारिश सामान्य से ऊपर या सामान्य रहने की संभावना है।

मजबूत हो रहा है अल नीनो, न्यूट्रल रहेगा आईओडी

मौसम विभाग ने मानसून की बारिश पर असर डालने वाले वजहों के बारे में भी बताया है। IMD के मुताबिक अभी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के ऊपर कमजोर अल नीनो की स्थिति बनी हुई है। लेकिन मानसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) और अन्य वैश्विक जलवायु मॉडलों के ताजा संकेत बताते हैं कि दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह अल नीनो स्थितियां और अधिक मजबूत हो सकती हैं।

इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति कैसी है?

इस समय हिंद महासागर में न्यूट्रल आईओडी की स्थिति देखी जा रही है। मॉडल के पूर्वानुमानों के अनुसार, पूरे दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह न्यूट्रल आईओडी स्थिति ही बनी रहने की संभावना है। इंडियन ओशन डाइपोल हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के समुद्री सतह के तापमान में अंतर को दर्शाने वाली जलवायु सिस्टम है। सामान्य तौर पर यदि IOD सकारात्मक रहता है तो यह भारतीय मानसून को मजबूत करने में मदद करता है। साथ ही अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम कर देता है। लेकिन इस बार IOD के तटस्थ रहने की संभावना है। इसका मतलब है कि यह मानसून को अतिरिक्त मजबूती नहीं दे पाएगा और अल नीनो का प्रभाव अधिक हावी रहेगा।

जुलाई में सताएगी गर्मी, तापमान रहेगा सामान्य से अधिक

कम बारिश के अनुमान के बीच जुलाई के महीने में देशवासियों को सामान्य से अधिक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। जुलाई के दौरान, देश के अधिकांश हिस्सों में मासिक अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है। हालांकि, पश्चिम-मध्य भारत के कुछ छिटपुट इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है। रात के समय या न्यूनतम तापमान की बात करें तो देश के अधिकांश क्षेत्रों में यह भी सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। सिर्फ मध्य और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ अलग-अलग हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य रह सकता है।

कम बारिश से बढ़ेंगी चुनौतियां, तैयारी करने की सलाह

आईएमडी ने आगाह किया है कि जुलाई में सामान्य से कम बारिश होने के कारण कई मोर्चों पर गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। बारिश की कमी के कारण कृषि, जल संसाधन, जलविद्युत उत्पादन, पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता और पीने के पानी की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।

मौसम विभाग ने बताया कि वह नुकसान को कम करने के लिए विस्तारित अवधि के पूर्वानुमान, जिला-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान, कृषि-मौसम विज्ञान सलाहकार सेवाएं और प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान जारी करता रहता है। ये किसान, आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और बिजली क्षेत्र के योजनाकारों के लिए मददगार हैं।

अगला पूर्वानुमान कब?

आईएमडी द्वारा मानसून सीजन के दूसरे भाग (अगस्त + सितंबर 2026) के लिए और विशेष रूप से अगस्त महीने की बारिश का पूर्वानुमान जुलाई 2026 के अंत में जारी किया जाएगा