Skoda Kylaq long-term review, 3,800km report

Skoda Kylaq long-term review, 3,800km report
Skoda Kylaq in red colour

You could argue there was no better long-term test for the Skoda Kylaq than being driven 19,351 kilometres from India to Czechia. However, for those of us who can’t go on a two-month-long adventure full of culture, cuisine and continent-crossing, here’s what it’s been like trudging through Mumbai traffic for the last few weeks.

I’ve been fascinated by the Kylaq since its launch in early 2025, and apart from a few quick peeks at it when it came in for other shoots, I had never really driven one before this. So, now that it’s finally joined the Autocar India fleet, I’ve been more than happy to take it on for its first couple of weeks. And just as a proposition alone, I’m amazed that Group partner Volkswagen didn’t immediately jump on this idea and do a compact SUV in parallel. Guess we’ll just have to wait until 2027.

Skoda Kylaq interior door handle
Feels reassuringly solid, from the door shut to the driving dynamics.

The formula is simple enough – a Kushaq, but slightly smaller and using only the lesser 1.0-litre engine. But the more time I spend in here, the more I wonder if there’s any need for a Kushaq 1.0 TSI at all – this thing offers pretty much everything it does. At no moment does it feel lesser in any way – same step up into the cabin, same solid slam on door shut, same high-set driving position. And features? Apart from the Kushaq’s newly added panoramic sunroof, bigger driver’s display and rear massaging seats, it has everything else!

Skoda Kylaq driver's display
Severe turbo lag followed by sudden burst of power frustrating in stop-go traffic.

There are two mechanical changes that I hope make their way to the Kylaq soon, though. The first is the 8-speed gearbox, which should help mask one of this car’s shortcomings – turbo lag. The older 6-speed AT in our Kylaq may be smooth while you’re on the move, but at crawling speeds, where I spend most of my time, it can never figure out if it needs to be in first or second, and sometimes changes its mind at the worst possible moment. If it chooses first, it will lurch you forward aggressively, but if it chooses second, it traps you in the dreaded lag zone. Off boost, this 999cc engine feels overwhelmed by the Kylaq’s 1,255kg.

Skoda Kylaq touchscreen
Single-digit fuel economy unexpected, unacceptable in a compact car.

Frustratingly jerky movement aside, where this indecisiveness has really hurt more is my wallet. The constant shifting, switching on and off boost and general inconsistent progress have hit the fuel economy very hard, and I struggle to get past 8kpl on my admittedly slow daily commute. Some of it might be down to the sudden advent of E20 fuel, but eight kilometres per litre in a compact car is criminal. I used to average 10kpl in our 1.5-litre TSI DSG Slavia a few years ago, and the team has been getting more out of our 2.0-litre TSI VW Tayron. So, it’s really down to an overstressed engine and a clumsy gearbox.

The other mechanical change is far less of a problem, and that’s the AC. While this still uses the fixed-geometry compressor from the original Kushaq, it’s a smaller car, so cooling the cabin is rarely an issue, and I drove it through at least one week of our awful heat wave. The thing is, you can feel it’s working overtime to keep the cabin cool, and when set to auto mode, the fan stays on full blast for most of my journey. I often find myself turning it down to have a conversation or enjoy my music.

Skoda Kylaq alloy wheel
Large, shiny 17-inch alloy wheels do well to enhance Kylaq’s road presence.

These two niggles aside, it’s a very pleasing experience, as you might expect from a slightly smaller Kushaq. There’s a certain toughness to it you don’t find in cars from this segment that almost encourages you to seek out potholes and slam through them. There’s a similar firmness to the ride, but I actually like that; it suits my driving style better than something overly soft and rolly. And I’m also willing to forgive a lot for how good those 17-inch wheels look; a bold choice when most of the segment is still running 16s.

I’ll delve more into the interior, tech and other things in a future update, but in this short first experience, I can see how the Kylaq made it to Prague so comfortably and without incident. It’s compact only in size and is a uniquely European addition to the compact SUV segment.

IMD Heavy Rain Alert: अगले 7 दिन इन राज्यों में होगी आफत की बारिश! 60 Kmph की आंधी भी, बिहार से लेकर MP तक 17 जुलाई तक ऐसा रहेगा मौसम

Weekly Weather Forecast: देशभर में मानसून की रफ्तार तेज हो गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 11 से 17 जुलाई तक के लिए देशभर का साप्ताहिक मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। इस दौरान पूर्वी, मध्य, पूर्वोत्तर और पश्चिमी भारत के कई राज्यों में भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना है। कई इलाकों में 40-60 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं, गरज-चमक और बिजली गिरने की भी चेतावनी दी गई है। वहीं, आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में हीटवेव का अलर्ट भी जारी किया गया है।

इस दौरान पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में जहां मूसलाधार बारिश का संकट मंडरा रहा है। वहीं, मध्य भारत में तेज आंधी-तूफान का अलर्ट है। दूसरी ओर, दक्षिण के कुछ हिस्सों में अभी भी भीषण गर्मी और लू का प्रकोप जारी है।

आइए जानते हैं अगले कुछ दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में कैसा रहेगा मौसम:-

मध्य भारत: मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का अलर्ट

IMD के अनुसार पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ में पूरे सप्ताह बारिश का दौर जारी रहेगा:-

  • 14 से 17 जुलाई के बीच पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी बारिश की संभावना।
  • 11 से 15 जुलाई तक छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का अलर्ट।
  • पूर्वी मध्य प्रदेश और विदर्भ में 40 से 60 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं, गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका।

पूर्वी भारत: बिहार, झारखंड, ओडिशा और बंगाल में मूसलाधार बारिश

पूर्वी भारत में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहेगा।

  • बिहार में 13 से 15 जुलाई के दौरान भारी बारिश की संभावना।
  • 11 और 12 जुलाई को बिहार के कुछ इलाकों में अति भारी बारिश हो सकती है।
  • झारखंड, गंगीय पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी कई दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट।
  • कई स्थानों पर बिजली गिरने और तेज हवाओं की चेतावनी।

पूर्वोत्तर भारत: मेघालय में सबसे ज्यादा खतरा

अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में पूरे सप्ताह व्यापक बारिश का अनुमान है:-

  • 11 जुलाई को मेघालय में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी।
  • 12 जुलाई को असम और मेघालय में अति भारी बारिश का अलर्ट।
  • पूरे सप्ताह कई राज्यों में भारी बारिश जारी रहने की संभावना।
  • पश्चिम भारत: कोंकण-गोवा और महाराष्ट्र में बरसेंगे बादल
  • कोंकण और गोवा में पूरे सप्ताह व्यापक बारिश।
  • गुजरात, सौराष्ट्र-कच्छ, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में भी लगातार हल्की से मध्यम बारिश का दौर।

दक्षिण भारत: बारिश भी, हीटवेव भी

  • केरल, तटीय कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में बारिश के आसार।
  • 11 जुलाई को तमिलनाडु में तेज हवाओं और गरज-चमक की चेतावनी।
  • तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में 11-12 जुलाई को हीटवेव का अलर्ट जारी।

कहां चलेगी तेज हवा?

IMD के मुताबिक, कई राज्यों में 40 से 60 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं:-

पूर्वी मध्य प्रदेश

विदर्भ

झारखंड

अंडमान-निकोबार

तमिलनाडु

ओडिशा

बीते 24 घंटे: कहां हुई सबसे ज्यादा बारिश?

पिछले 24 घंटों में देश के कई हिस्सों में जोरदार बारिश दर्ज की गई।

  • चेरापूंजी (मेघालय) – 19 सेमी
  • मौसिनराम (मेघालय) – 17 सेमी
  • नाहन (हिमाचल प्रदेश) – 16 सेमी
  • फतेहपुर (उत्तर प्रदेश) – 16 सेमी
  • कीर्तिनगर (उत्तराखंड) – 13 सेमी
  • बिक्रम (पटना, बिहार) – 10 सेमी

लोगों के लिए जरूरी सलाह

  • भारी बारिश वाले क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचें।
  • नदी-नालों और जलभराव वाले इलाकों से दूरी बनाए रखें।
  • गरज-चमक के दौरान खुले मैदान और पेड़ों के नीचे खड़े न हों।
  • स्थानीय प्रशासन और IMD की एडवाइजरी का पालन करें।

इन राज्यों में आज ‘अत्यधिक भारी’ बारिश का अलर्ट, पूर्वोत्तर में आफत

पूर्वोत्तर भारत में मानसून का सबसे रौद्र रूप देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, 11 जुलाई को मेघालय में अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश (Extremely Heavy Rainfall) होने की आशंका है। इसके अलावा:-

  • असम और मेघालय में 12 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अनुमान है। जबकि 13 से 17 जुलाई के बीच भी भारी बारिश जारी रहेगी।
  • अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 11 से 17 जुलाई के दौरान व्यापक रूप से भारी बारिश होने की संभावना है। इन सभी राज्यों में 15 जुलाई तक आंधी और बिजली गिरने का अलर्ट भी जारी किया गया है।

बिहार और पश्चिम बंगाल में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी

पूर्वी भारत के राज्यों के लिए भी मौसम विभाग ने चिंता जताई है:-

  • बिहार और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम में 11 और 12 जुलाई को ‘बहुत भारी बारिश’ (Very Heavy Rainfall) होने के आसार हैं। बिहार में 13 से 15 जुलाई के बीच भी भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा।
  • झारखंड में 12 से 14 जुलाई, गंगा तटीय पश्चिम बंगाल में 11-13 व 16-17 जुलाई और ओडिशा में 11 से 15 जुलाई के बीच भारी बारिश होने की संभावना है।
  • मध्य और पश्चिम भारत: आंधी-तूफान के साथ 60 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

    मध्य भारत में बारिश के साथ-साथ तेज हवाओं का तांडव देखने को मिल सकता है।

  • पूर्वी मध्य प्रदेश (11-14 जुलाई) और विदर्भ (13-15 जुलाई) में आंधी-तूफान के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।
  • पश्चिम मध्य प्रदेश में 11 से 14 जुलाई के दौरान 30-40 किमी/घंटा (झोंके 50 किमी/घंटा तक) की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।
  • छत्तीसगढ़ में 14 से 17 जुलाई के बीच व्यापक रूप से भारी बारिश होने की उम्मीद है। वहीं, कोंकण, गोवा और गुजरात के इलाकों में भी 17 जुलाई तक बारिश का दौर जारी रहेगा।

लू (Heat Wave) की चेतावनी

एक तरफ जहां देश के कई हिस्सों में पानी बरस रहा है। वहीं तटीय आंध्र प्रदेश और यनम के अलग-अलग इलाकों में 11 और 12 जुलाई को भीषण लू (Heat Wave) चलने की चेतावनी दी गई है।

एक ही 40°C, फिर भी अलग एहसास! जानिए भारत, दुबई और फ्रांस में गर्मी का फर्क

भारत, दुबई और फ्रांस में अगर टेम्परेचर 40 डिग्री सेल्सियस हो, तो इसका मतलब यह नहीं कि तीनों जगह गर्मी एक जैसी महसूस होगी। मौसम, नमी, हवा की रफ्तार, धूप की तीव्रता और वहां के इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से गर्मी का अहसास बदल जाता है। यही कारण है कि एक ही टेम्परेचर अलग-अलग देशों में अलग एक्सपीरियंस देता है। आइए जानते हैं कि 40°C पर कहां कितनी तपिश महसूस होती है और इसके पीछे कौन-से फैक्टर जिम्मेदार हैं:

1. एक जैसा टेम्परेचर, लेकिन महसूस अलग

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भारत, दुबई और फ्रांस में अगर टेम्परेचर 40°C हो, तब भी तीनों जगह गर्मी एक जैसी महसूस नहीं होती। इसकी वजह यह है कि हर देश का मौसम, वातावरण, नमी, हवा और रहने का तरीका अलग होता है। इसलिए शरीर को गर्मी का अहसास भी अलग-अलग होता है।

2. फ्रांस में गर्मी का असर 

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गर्मियों में फ्रांस में दिन 15 से 17 घंटे तक लंबे होते हैं, जिससे धूप ज्यादा देर तक रहती है। सड़कें, इमारतें और फुटपाथ पूरे दिन गर्मी सोख लेते हैं और रात में भी गर्म रहते हैं। कई बार हवा कम चलने से गर्मी बाहर नहीं निकल पाती और मौसम ज्यादा तपता हुआ महसूस होता है।

3. घरों का डिजाइन भी बड़ी वजह है

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फ्रांस के ज्यादातर पुराने घर ठंड से बचाने के लिए बनाए गए हैं। उनकी दीवारें मोटी और खिड़कियां छोटी होती हैं, जिससे घर के अंदर की गर्मी आसानी से बाहर नहीं निकलती। इसके अलावा कई जगहों पर पहले से एसी और सीलिंग फैन आम नहीं थे, इसलिए हीटवेव के दौरान लोगों को ज्यादा परेशानी होती है।

4. दुबई का रेगिस्तानी इलाका

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दुबई रेगिस्तानी इलाका है, इसलिए वहां धूप बहुत तेज होती है और गर्म हवाएं चलती हैं। हालांकि, लगभग सभी इमारतों, मॉल, बस स्टॉप, मेट्रो और कारों में एयर कंडीशनिंग की सुविधा होती है। इसी वजह से बाहर गर्मी ज्यादा होने के बावजूद लोगों को अंदर राहत मिलती है।

5. भारत में लोग गर्मी के आदी हैं

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भारत में हर साल कई राज्यों में टेम्परेचर 40°C या उससे ऊपर पहुंच जाता है। लंबे समय से ऐसी गर्मी झेलने के कारण लोग और उनका शरीर इस मौसम के काफी हद तक आदी हो जाते हैं। यहां के कई घर भी ऐसे बनाए जाते हैं जिनमें ऊंची छत, बरामदा और क्रॉस वेंटिलेशन जैसी सुविधाएं होती हैं, जो गर्मी कम करने में मदद करती हैं।

6. गर्मी का एहसास बदलता है

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सिर्फ टेम्परेचर ही नहीं, बल्कि हवा में नमी, हवा की रफ्तार, धूप की तीव्रता, इमारतों का डिजाइन और आसपास का वातावरण भी तय करते हैं कि 40°C कितना गर्म महसूस होगा। यही वजह है कि एक ही टेम्परेचर अलग-अलग जगहों पर अलग एक्सपीरियंस देता है।

7. तीनों देशों में अंतर

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फ्रांस में लंबे समय तक धूप, गर्म इमारतें और सीमित कूलिंग व्यवस्था हीटवेव को ज्यादा कठिन बना सकती है। दुबई में तेज गर्मी के बावजूद मॉडर्न एसी इंफ्रास्ट्रक्चर राहत देता है। वहीं भारत में लोग गर्म मौसम के ज्यादा आदी हैं, लेकिन 40°C से ऊपर की गर्मी में भी पर्याप्त पानी पीना और धूप से बचाव करना जरूरी रहता है।

हर देश में 40°C का टेम्परेचर एक जैसा दिखाई दे सकता है, लेकिन उसका असर वहां के मौसम, नमी, हवा, धूप और इंफ्रास्ट्रक्चर के अनुसार अलग होता है। इसलिए केवल टेम्परेचर देखकर गर्मी का सही अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।

ऐसे मौसम में सबसे जरूरी है कि पर्याप्त पानी पिएं, तेज धूप से बचें और शरीर को ठंडा रखने के उपाय अपनाएं। चाहे भारत हो, दुबई या फ्रांस, हीटवेव के दौरान सावधानी और सही तैयारी ही सेफ रहने का सबसे अच्छा तरीका है।