Income Tax Return: 31 जुलाई तक रिटर्न फाइल करने का मौका चूक गए? जानिए अब आपके लिए क्या हैं विकल्प

अगस्त का महीना शुरू हो गया है। रुपये-पैसे से जुड़े कई नियम आज से बदल गए हैं। आज से आईटीआर-1 और आईटीआर-2 फॉर्म से रिटर्न भरने पर पेनाल्टी चुकानी होगी। साथ ही आईटीआर-3 और आईटीआर-4 फॉर्म से रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त को खत्म हो जाएगी। आइए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं।

बिलेटेड रिटर्न 31 दिसंबर तक फाइल किया जा सकता है

ITR-1 और ITR-2 फॉर्म से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई थी। अगर किसी वजह से आप डेडलाइन तक रिटर्न फाइल करने से चूक गए हैं तो आप इस साल 31 दिसंबर तक रिटर्न फाइल कर सकते हैं। इसके लिए आपको पेनाल्टी चुकानी होगी। साथ ही टैक्स अमाउंट पर इंटरेस्ट देना होगा। ऐसे टैक्सपेयर्स का रिफंड आने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है।

बिलेटेड रिटर्न फाइल करने के लिए पेनाल्टी चुकानी होगी

ऐसे टैक्सपेयर्स जिनकी सालाना इनकम 5 लाख रुपये से ज्यादा है, उन्हें बिलेटेड रिटर्न फाइल करने के लिए 5000 रुपये पेनाल्टी चुकानी होगी। ऐसे टैक्सपेयर्स जिनकी सालाना इनकम 5 लाख रुपये तक है उन्हें 1000 रुपये पेनाल्टी चुकानी होगी। इसके अलावा टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 234ए के तहत बकाया टैक्स पर इंटरेस्ट चुकाना होगा।

ये टैक्सपेयर्स बगैर पेनाल्टी 31 अगस्त तक फाइल कर सकते हैं रिटर्न

ऐसे टैक्सपेयर्स जिनके लिए आईटीआर-3 या आईटीआर-4 का इस्तेमाल करना जरूरी है और जिन्हें टैक्स ऑडिट की जरूरत नहीं है, उनके लिए रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त है। इस कैटेगरी में सेल्फ-एंप्लॉयड प्रोफेशनल्स, फ्रीलांसर्स, छोटे कारोबारी जैसे टैक्सपेयर्स आते हैं। इसके अलावा ऐसे टैक्सपेयर्स भी इस कैटेगरी में आते हैं, जिन्होंने सेक्शन 44 एडी और 44एडीए के तहत प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम को सेलेक्ट किया है।

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इस महीने आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी की भी होगी बैठक

इस महीने आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक होगी। 3 अगस्त को यह बैठक शुरू होगी, जिसके नतीजे 5 अगस्त को आएंगे। अगर इस मीटिंग में आरबीआई इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का ऐलान करता है तो होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन महंगे हो जाएंगे। साथ ही जिन लोगों ने पहले से लोन लिए हैं, उनकी EMI बढ़ जाएगी। हालांकि, अगस्त की बैठक में आरबीआईआ के रेपो रेट बढ़ाने की उम्मीद कम है। रेपो रेट बढ़ने से बैंक लोन का इंटरेस्ट रेट बढ़ा देते हैं।

दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल: दिल्ली में बनेगा प्रॉपर्टी आधार कार्ड! जानिए क्या है ये और कैसे करेगा काम

Delhi Land Record Bill 2026: दिल्ली में प्रॉपर्टी और जमीन के मालिकाना हक से जुड़े रिकॉर्ड्स को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाने के लिए दिल्ली सरकार एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। दिल्ली सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल, 2026 के तहत दिल्ली की हर संपत्ति को एक खास डिजिटल पहचान दी जाएगी। इसे प्रॉपर्टी आधार कार्ड कहा जा रहा है। इस नए कानून को पारित कराने के लिए दिल्ली विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाया जाएगा। इसके बाद पूरी दिल्ली में वैज्ञानिक सर्वे शुरू होगा। इसके माध्यम से हर गांव के घर, जमीन के टुकड़े से लेकर शहरों के फ्लैट्स और कमर्शियल बिल्डिंग्स तक का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।

क्या है नया बिल और कैसे होगा सर्वे?

इस कानून के तहत दिल्ली के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को मिलाकर पूरी दिल्ली का वैज्ञानिक सर्वे अनिवार्य किया जाएगा। जमीन और प्रॉपर्टी की सीमाओं मैपिंग ड्रोन से सर्वे करके की जाएगी। इसमें सर्वे ऑफ इंडिया की भी मदद ली जाएगी। अभी अलग-अलग सरकारी विभागों और स्थानीय निकायों के पास जो रिकॉर्ड्स हैं उन्हें एक ही सिंगल प्लेटफॉर्म पर लेकर आया जाएगा।

बहुमंजिला इमारतों में हर फ्लोर के लिए एक अलग डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, ताकि इसमें इंडिविजुअल यूनिट्स भी शामिल की जा सकें। सरकार को उम्मीद है कि इस पूरी व्यवस्था से प्रॉपर्टी से जुड़े विवादों में कमी आएगी और अदालतों व राजस्व अधिकारियों का बोझ घटेगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस पहल की तुलना लोगों के आधार कार्ड से करते हुए कहा कि दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल, 2026 के माध्यम से दिल्ली की हर संपत्ति को अब एक सुरक्षित और प्रामाणिक डिजिटल पहचान मिलेगी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की स्वामित्व (SVAMITVA) योजना के तहत 30 ग्रामीण गांवों में सफल क्रियान्वयन के अनुभवों के आधार पर इसे पूरी दिल्ली में लागू किया जाएगा। फिलहाल यह विधेयक मंत्रियों के समूह की समीक्षा के बाद मंजूरी की प्रक्रिया से गुजर रहा है और सरकार इसे आगे बढ़ाने के लिए एक विशेष विधानसभा सत्र आयोजित करने की योजना बना रही है।

लाल डोरा क्षेत्रों के लिए क्यों अहम है यह कदम?

लाल डोरा क्षेत्र वे ग्रामीण आवासीय क्षेत्र हैं जिन्हें राजस्व रिकॉर्ड में लाल स्याही से मार्क किया जाता है। इनका इस्तेमाल खेती और गैर खेती दोनों ही उद्देश्यों के लिए होता है और यहां कंस्ट्रक्शन पर कुछ पाबंदियां होती हैं। सीएम रेखा गुप्ता के मुताबिक लाल डोरा क्षेत्रों में लंबे समय से व्यवस्थित और प्रामाणिक संपत्ति रिकॉर्ड का अभाव रहा है। स्वामित्त्व पहल का उद्देश्य इन क्षेत्रों के निवासियों को पहली बार औपचारिक और सत्यापन योग्य दस्तावेज प्रदान करके दशकों पुराने इस अंतर को दूर करना है।

कैसे काम करेगा स्मार्ट प्रॉपर्टी आधार कार्ड?

स्वामित्व योजना के तहत जारी होने वाला यह कार्ड PVC फॉर्मेट में होगा। इसे UIDAI मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इस कार्ड में कई जानकारियां दर्ज की जाएंगी। कार्ड पर एक प्रॉपर्टी आइडेंटिफिकेशन नंबर (PID), जारी करने की तारीख, गांव व जिले का विवरण, कब्जाधारक व परिवार की जानकारी, जमीन का क्षेत्रफल और एक ‘भू-आधार नंबर’ मौजूद होगा। कार्ड पर मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन करने पर संपत्ति का पूरा डिजिटल स्केच, सीमाओं का विवरण, आसपास की संपत्तियों के PID, खसरा नंबर और कानूनी रूप से मान्य सर्टिफिकेट ऑफ ऑक्यूपेंसी लिंक रहेगा।

वैसे सरकार ने अभी यह जानकारी नहीं दी है कि ये प्रॉपर्टी कार्ड स्वयं मालिकाना हक के प्रमाण के रूप में काम करेगा या मौजूदा दस्तावेजों से जुड़े एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन रिकॉर्ड के रूप में। स्वामित्व सत्यापन, त्रुटियों के सुधार और विवादित प्रविष्टियों से संबंधित नियम विधानसभा में बिल पास होने के बाद तय किए जाएंगे।

पायलट प्रोजेक्ट: अब तक कितना हुआ काम?

दिल्ली के 48 ग्रामीण गांवों में से 30 गांवों को इस प्रोजेक्ट के पायलट फेज में शामिल किया गया है। इन गांवों में सर्वे और पहचान का काम पूरा हो चुका है।संबंधित दस्तावेजों को संकलित करते हुए प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए जा रहे हैं। अब तक 12232 संपत्तियों का सर्वेक्षण किया जा चुका है। इनमें से 8423 (लगभग 69 प्रतिशत) संपत्तियां पूरी तरह विवाद-मुक्त पाई गई हैं। दक्षिण और उत्तर-पश्चिम जिलों में सर्वे की गई सभी संपत्तियों के मामलों का शत-प्रतिशत समाधान हो चुका है। इन रिकॉर्ड्स को अंततः दिल्ली ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन इंफॉर्मेशन सिस्टम (DORIS) के साथ रियल-टाइम में इंटिग्रेट किया जाएगा। इन 30 गांवों के अनुभवों के आधार पर पायलट फेज पूरा होते ही इस प्रोजेक्ट का विस्तार पूरी दिल्ली की आवासीय, व्यावसायिक और अन्य श्रेणियों की संपत्तियों पर किया जाएगा।

दिल्लीवासियों को क्या होगा फायदा?

व्यवस्थित रिकॉर्ड न होने की वजह से दिल्लीवासियों को दशकों से मालिकाना हक साबित करने, संपत्ति के लेन-देन, विरासत, बैंक लोन प्राप्त करने, नक्शा पास कराने और अदालती विवादों को सुलझाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। प्रामाणिक डिजिटल रिकॉर्ड बनने से सीमा विवाद खत्म होंगे और नागरिकों को संपत्ति के हस्तांतरण, बैंक ऋण लेने, उत्तराधिकार और मकान का नक्शा पास कराने में काफी आसानी, पारदर्शिता और भरोसा मिलेगा।

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महाराष्ट्र के 423 शहरों के लिए ₹44800 करोड़ का प्लान, सड़क-पानी और ट्रैफिक की तस्वीर बदल जाएगी

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी 423 शहरी स्थानीय निकायों में बुनियादी ढांचे को बेहतर करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने अर्बन चैलेंज फंड नाम से 44800 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया है। इस योजना की घोषणा करते हुए उप मुख्यमंत्री और नगर विकास मंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह कार्यक्रम शहरों को अधिक आधुनिक, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और भविष्य की शहरी चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर ढंग से सक्षम बनाएगा। यह फंड वर्ष 2025-26 से 2030-31 के बीच लागू किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर इसे अगले तीन सालों के लिए इसे बढ़ाने का प्रावधान भी रखा गया है।

फंड का ढांचा: कैसे जुटाया जाएगा 44800 करोड़ रुपये का बजट?

इस पहल की एक प्रमुख विशेषता इसका ब्लेंडेड फाइनेंसिंग मॉडल है। इसके तहत परियोजनाओं को केंद्र सरकार की सहायता, बाजार उधारी और राज्य के सहयोग के संयोजन के माध्यम से फाइनेंस किया जाएगा। एलिबिल परियोजनाओं को केंद्र सरकार से 25 प्रतिशत तक की फंडिंग मिल सकती है। परियोजना लागत का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा म्यूनिसिपल बॉन्ड, बैंक लोन या पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के जरिए जुटाना होगा। बाकी 25 प्रतिशत राशि राज्य सरकार या संबंधित शहरी स्थानीय निकाय द्वारा दी जाएगी।

छोटे शहरों के लिए विशेष सुविधा

यह योजना महाराष्ट्र के सभी शहरी स्थानीय निकायों के लिए खुली है। छोटे शहरों को भी इस योजना का पूरा लाभ मिले, यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 1 लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए लोन रीपेमेंट गारंटी मैकेनिज्म पेश किया है। इससे छोटी नगरपालिकाओं के लिए वित्तीय बाजारों से धन जुटाना और बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को शुरू करना आसान हो जाएगा।

इन 3 मुख्य क्षेत्रों पर रहेगा फोकस और ये प्रोजेक्ट होंगे शामिल

यह फंड मुख्य रूप से तीन व्यापक क्षेत्रों पर केंद्रित होगा। पहला जल आपूर्ति और स्वच्छता, दूसरा क्रिएटिव अर्बन डेवलपमेंट और तीसरा शहरों को आर्थिक विकास के इंजन के रूप में मजबूत करना।

किन-किन परियोजनाओं को मिलेगा बजट?

योजना के तहत फंडिंग के लिए एलिजिबल प्रोडेक्ट्स यहां नीचे देखे जा सकते हैं:-

डिजिटल गवर्नेंस और प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड

ट्रैफिक की समस्या से मुक्ति और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी

पुराने शहरी इलाकों व बाजारों का पुनर्विकास

नॉन-मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट, ट्रांजिट हब्स और ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट

शहरी बाढ़ नियंत्रण और इंटिग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट

ग्रीनफील्ड और सेमी-ग्रीनफील्ड डेवलपमेंट, सड़कें, फ्लाईओवर्स और रिवरफ्रंट डेवलपमेंट

लैंड बैंक तैयार करना और शहरी क्षेत्रों से डेयरी गतिविधियों को बाहर ले जाना

20 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए विशेष प्रोजेक्ट

जिन शहरों की जनसंख्या 20 लाख से अधिक है, वहां सरकार कई सुविधाओं को भी प्राथमिकता देगी। इसमें कन्वेंशन सेंटर्स और मनोरंजन सुविधाएं, मॉडर्न पब्लिक लाइब्रेरी और स्पोर्ट्स इंफ्रा, वॉटर स्पोर्ट्स सुविधाएं, ध्यान केंद्र और वेलनेस पार्क जैसी चीजें शामिल हैं।

परियोजनाओं को सुचारू और पारदर्शी तरीके से पूरा करने के लिए सरकार ने किया है कि प्रोजेक्ट डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स की नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट्स और जिला स्तर पर निगरानी समितियों का गठन होगा। हर शहर में समर्पित मिशन मैनेजमेंट सेल्स बनाए जाएंगे। जरूरत के मुताबिक परियोजनाओं को स्पेशल पर्पज व्हीकल्स के माध्यम से भी लागू किया जा सकता है।

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इसे सिर्फ एक फंडिंग स्कीम की बजाय कायाकल्प का रोडमैप बताते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह फंड नागरिक सुविधाओं में सुधार करेगा, शहरी सेवाओं को मजबूत करेगा, निवेश लेकर आएगा, रोजगार पैदा करेगा और नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि लंबे समय में सरकार का उद्देश्य एक कॉम्पिटेटिव , टिकाऊ और फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट शहरों को तैयार करना है।

Personal Loan EMI: पर्सनल लोन सस्ते ब्याज पर चाहिए? अप्लाई करने से पहले इन 5 बातों का जरूर रखें ध्यान

Personal Loan EMI: पर्सनल लोन लेना आज पहले से काफी आसान हो गया है। कई बैंक और NBFC कुछ ही मिनटों में लोन मंजूर करने का दावा करते हैं। लेकिन जल्दी में लिया गया पर्सनल लोन आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है।

पर्सनल लोन पर ब्याज दरें होम लोन या कार लोन से ज्यादा होती हैं। ऐसे में अगर थोड़ी-सी सावधानी बरती जाए, तो हजारों रुपये बचाए जा सकते हैं। आइए जानते हैं पर्सनल लोन लेने से पहले किन 5 बातों का ध्यान रखना चाहिए।

1. सबसे पहले अपना CIBIL स्कोर सुधारें

अगर आपका CIBIL स्कोर 750 या उससे ज्यादा है, तो बैंक आपको कम ब्याज पर लोन देने की संभावना ज्यादा होती है। वहीं, कम स्कोर होने पर ब्याज दर बढ़ सकती है या लोन भी रिजेक्ट हो सकता है।

मान लीजिए दो लोगों ने 5 साल के लिए ₹5 लाख का पर्सनल लोन लिया। एक को 11% और दूसरे को 15% ब्याज मिला। यानी सिर्फ 4% ज्यादा ब्याज की वजह से आपको करीब ₹62,000 अतिरिक्त ब्याज देना पड़ सकता है।

ब्याज दरअनुमानित EMIकुल ब्याज
11%करीब ₹10,870करीब ₹1.52 लाख
15%करीब ₹11,895करीब ₹2.14 लाख

2. पहले कई बैंकों का ऑफर तुलना करें

जिस बैंक का पहला ऑफर मिले, उसी पर हामी मत भरिए। कम से कम 3-4 बैंक और NBFC की ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और बाकी शर्तों की तुलना करें।

कई बार आपका सैलरी बैंक भी सबसे सस्ता लोन नहीं देता। ऑनलाइन तुलना करने में सिर्फ कुछ मिनट लगते हैं, लेकिन इससे अच्छी बचत हो सकती है।

3. जितनी जरूरत हो, उतना ही लोन लें

बैंक अगर ₹10 लाख का लोन देने को तैयार है, तो जरूरी नहीं कि आप पूरा पैसा लें।

अगर आपकी जरूरत ₹6 लाख की है, तो उतना ही लोन लें। ज्यादा रकम का मतलब ज्यादा EMI और ज्यादा ब्याज। इससे आप पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा। फायदे से ज्यादा नुकसान हो सकता है।

4. सिर्फ ब्याज नहीं, बाकी चार्ज भी देखें

कई लोग सिर्फ ब्याज दर देखकर फैसला कर लेते हैं। लेकिन प्रोसेसिंग फीस, फोरक्लोजर चार्ज, लेट पेमेंट पेनाल्टी और दूसरी फीस भी आपकी जेब पर असर डालती हैं।

लोन लेने से पहले पूछ लें कि कुल कितना खर्च आएगा। तभी आपको लोन की असली कीमत पता चलेगी।

5. EMI अपनी कमाई के हिसाब से रखें

ऐसी EMI चुनें जिसे आप हर महीने आराम से भर सकें। कोशिश करें कि सभी EMI मिलाकर आपकी मंथली इनकम के 35% से 40% से ज्यादा न हों।

अगर EMI बहुत ज्यादा होगी, तो भविष्य में डिफॉल्ट का खतरा बढ़ सकता है। इससे आपका CIBIL स्कोर भी खराब हो सकता है।

पर्सनल लोन के लिए सबसे जरूरी बात

पर्सनल लोन बिना गारंटी मिलता है। इसलिए इसकी ब्याज दर भी ज्यादा होती है। अगर आप अच्छा CIBIL स्कोर बनाए रखें, अलग-अलग बैंकों के ऑफर की तुलना करें और जरूरत के हिसाब से ही लोन लें, तो कम ब्याज दर मिलने की संभावना बढ़ जाती है। लोन लेने में जल्दबाजी नहीं, सही तुलना करना ज्यादा फायदेमंद साबित होता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Personal Loan: अपनी आर्थिक जरूरतों के लिए कैसे चुनें सही पर्सनल लोन? ये 5 फैक्टर करेंगे आपकी मदद

Personal Loan: -पर्सनल लोन जरूरत के समय बड़ी राहत दे सकता है। मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की पढ़ाई, शादी-ब्याह, घर की मरम्मत या पुराने कर्जों को चुकाने जैसे कई कामों के लिए लोग इसका इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, बिना योजना के लिया गया लोन बाद में आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है। इसलिए लोन लेने से पहले अपनी जरूरत, चुकाने की क्षमता और लोन की शर्तों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।

1. सबसे पहले तय करें कितनी रकम चाहिए

लोन के लिए आवेदन करने से पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि आपको कितनी रकम की जरूरत है और उसका इस्तेमाल किस काम के लिए होना है। कई बार लोग जरूरत से ज्यादा लोन ले लेते हैं, जिससे EMI और ब्याज दोनों का बोझ बढ़ जाता है।

जरूरत के हिसाब से लोन लेने का फायदा यह है कि कुल ब्याज कम चुकाना पड़ता है और लोन चुकाना भी आसान रहता है। इससे आपकी वित्तीय स्थिति पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता।

2. ब्याज दरों की तुलना करना जरूरी

पर्सनल लोन चुनते समय सबसे अहम ब्याज दर है। अलग-अलग बैंक अलग-अलग दरों पर लोन देते हैं। जून 2026 में Axis Bank 8.95% सालाना की शुरुआती ब्याज दर पर पर्सनल लोन ऑफर कर रहा है। वहीं HDFC Bank और कई अन्य बैंक 9.99% से शुरू होने वाली दरों पर लोन दे रहे हैं।

ब्याज दर में छोटा-सा अंतर भी लंबे समय में बड़ी रकम का फर्क पैदा कर सकता है। इसलिए किसी एक बैंक के ऑफर को देखकर फैसला करने की बजाय कई बैंकों की दरों की तुलना करना बेहतर रहता है।

3. छिपे हुए शुल्कों को नजरअंदाज न करें

सिर्फ कम ब्याज दर देखकर लोन लेना सही फैसला नहीं होता। कई बार प्रोसेसिंग फीस, प्रीपेमेंट चार्ज, पार्ट-पेमेंट फीस, लेट पेमेंट पेनाल्टी और दूसरे शुल्क लोन की कुल लागत को काफी बढ़ा देते हैं।

यही वजह है कि आवेदन करने से पहले सभी नियम और शुल्कों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। इससे बाद में किसी तरह की परेशानी या अतिरिक्त खर्च से बचा जा सकता है।

4. सही टेन्योर चुनना भी उतना ही अहम

लोन का टेन्योर आपकी EMI और कुल ब्याज लागत दोनों को प्रभावित करता है। कम अवधि वाला लोन चुनने पर EMI ज्यादा आती है, लेकिन कुल ब्याज कम देना पड़ता है। वहीं लंबी अवधि चुनने पर EMI कम हो जाती है, लेकिन ब्याज का कुल बोझ बढ़ जाता है।

इसलिए ऐसा टेन्योर चुनना चाहिए, जो आपकी आय और मासिक बजट के हिसाब से संतुलित हो। EMI इतनी होनी चाहिए कि बाकी जरूरी खर्चों पर असर न पड़े।

5. बैंक की साख और सेवा भी देखें

लोन लेते समय सिर्फ ब्याज दर ही नहीं, बल्कि बैंक या वित्तीय संस्था की साख भी देखनी चाहिए। ग्राहक सेवा, शिकायत निपटान व्यवस्था, लोन प्रोसेसिंग की पारदर्शिता और रकम मिलने में लगने वाला समय जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी है। एक अच्छी संस्था से लिया गया लोन पूरी प्रक्रिया को आसान और सुविधाजनक बना सकता है।

सोच-समझकर लें पर्सनल लोन का फैसला

पर्सनल लोन एक वित्तीय जिम्मेदारी है। बैंक आपको तय शर्तों पर रकम देता है और बदले में आपको हर महीने EMI चुकानी होती है। इसलिए लोन लेने से पहले अपनी आय, खर्च, मौजूदा कर्ज और भविष्य की जरूरतों का आकलन जरूर करें।

ब्याज दर, टेन्योर, अतिरिक्त शुल्क और चुकाने की क्षमता को ध्यान में रखकर लिया गया फैसला आपको आर्थिक दबाव से बचा सकता है। जरूरत पड़ने पर किसी योग्य वित्तीय सलाहकार की राय लेना भी फायदेमंद हो सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। कोई भी वित्तीय फैसला लेने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।