27 रनों से जीता इंग्लैंड, भारत के खिलाफ 2-1 से जीती सीरीज

ENGvsIND इंग्लैंड ने लॉर्ड्स के एतिहासिक मैदान पर भारत के खिलाफ 27 रनों से जीत पाकर 3 मैचों की सीरीज को 2-1 से अपने नाम कर लिया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने 3 विकेट खोकर 387 रन बनाए। जिसके जवाब में भारत की टीम रोहित शर्मा के शतक के बावजूद 360 रनों पर रुक गई। 

360 रनों का पीछा करते हुए भारत शुरुआत में धीमे खेली लेकिन रोहित शर्मा ने 110 गेंदो में 138 रनों की शानदार पारी खेली। खेल में कई बार ऐसे मौके आए जब लगा टीम इंडिया इंग्लैंड से भी तेज खेली लेकिन अंतिम 10 ओवरों में टीम विकेट गंवाते चली गई और सैम करन ने अपने अंतिम स्पैल में 4 विकेट निकाले। 


डेकेट ने शतक लगाकर और बेथल ने 91 रन बनाकर बनाया भारतीय गेंदबाजी का कीमा

ENGvsIND बेन डकेट की 141 रन की शानदार पारी और जैकब बेथेल के साथ पहले विकेट के लिए 192 रन की साझेदारी के बूते इंग्लैंड ने रविवार को निर्णायक तीसरे एकदिवसीय मैच में तीन विकेट पर 387 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया।तीन मैचों की यह श्रृंखला 1-1 की बराबरी पर है।

शतकवीर डकेट ने अनुभवहीन भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की जमकर धुनाई की और मैच पर पूरी तरह इंग्लैंड की पकड़ मजबूत कर दी।भारत को मैच से पहले ही बड़ा झटका लगा, जब तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह बाएं घुटने में लगी चोट के कारण मुकाबले से बाहर हो गए। उनकी अनुपस्थिति भारतीय टीम को भारी पड़ी और इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने इसका पूरा फायदा उठाया।

इस मैच में खेल रहे भारत के चार तेज गेंदबाजों प्रसिद्ध कृष्णा (10 ओवर में 69 रन देकर दो विकेट), अर्शदीप सिंह (10 ओवर में 72 रन), प्रिंस यादव (10 ओवर में 79 रन देकर एक विकेट) और गुरनूर बराड़ (10 ओवर में 97 रन) के संयुक्त खाते में महज 51 एकदिवसीय मैचों का अनुभव था। अनुभव और धार की कमी के कारण वे शानदार लय में बल्लेबाजी कर रही इंग्लैंड की टीम पर दबाव बनाने में नाकाम रहे।

डकेट और बेथेल (93 गेंदों में 91 रन) ने अपनी योजना और शानदार बल्लेबाजी से भारतीय गेंदबाजों को पूरी तरह बेअसर कर दिया। शुरुआती 10 ओवर के पावरप्ले में इंग्लैंड ने 58 रन बनाए, लेकिन 11वें से 30वें ओवर के बीच दोनों बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों की जमकर खबर ली और तेजी से रन बटोरे।

दोनों की 192 रन की साझेदारी भारत के खिलाफ किसी भी विकेट के लिए इंग्लैंड की सर्वश्रेष्ठ साझेदारी बन गयी। डकेट ने इसके साथ ही ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर वनडे की सबसे बड़ी पारी के दिग्गज विवियन रिचर्ड्स (इंग्लैंड के खिलाफ 1979 में नाबाद 138 रन) के 47 साल पुराने रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया।

भारत को अक्षर पटेल (10 ओवर में 61 रन) के अलावा दूसरे विशेषज्ञ स्पिनर की कमी खली, ऐसे में कुलदीप यादव को मौका नहीं देने पर सवाल उठ रहे हैं।डकेट ने अपनी शानदार पारी में 18 चौके और एक छक्का लगाया, जबकि शुरुआत में अधिक सहज दिख रहे बेथेल ने 11 चौके और एक छक्का जड़ा। वह हालांकि प्रसिद्ध कृष्णा की गेंद पर बाउंड्री के पास रोहित शर्मा को कैच देकर शतक से चूक गए।

इसके बाद शानदार लय में चल रहे जो रूट ने 48 गेंदों में नाबाद 74 रन बनाए। यह इस श्रृंखला में उनका लगातार तीसरा अर्धशतक था, जिसकी मदद से इंग्लैंड का स्कोर 350 के पार पहुंचा। अंत में जोस बटलर ने भी सिर्फ 13 गेंदों में नाबाद 41 रन की विस्फोटक पारी खेली।

गुरनूर बराड़ के लिए यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का कठिन अनुभव साबित हुआ और उन्होंने अपने 10 ओवर में लगभग 100 रन लुटा दिए।पारी की शुरुआत में युवा तेज गेंदबाज प्रिंस यादव को लॉर्ड्स के प्रसिद्ध ढलान (स्लोप) पर अपनी लेंथ नियंत्रित करने में दिक्कत हुई। बेथेल ने उनकी गेंद पर डीप मिडविकेट के ऊपर से छक्का लगाया और फिर मिडविकेट और मिड-ऑन के बीच शानदार चौका भी जड़ा।

लंबे समय बाद इस प्रारूप में वापसी कर रहे अर्शदीप सिंह भी अपनी लाइन पर नियंत्रण नहीं रख सके, जबकि प्रसिद्ध कृष्णा ने कई बार बेथेल को परेशान किया, लेकिन बीच-बीच में ढीली गेंदें भी फेंकीं, जिनका बल्लेबाजों ने पूरा फायदा उठाया।

बेथेल ने केवल 51 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और इंग्लैंड ने 16वें ओवर में ही 100 रन पूरे कर लिए। तब तक भारतीय गेंदबाज 15 चौके खा चुके थे और उनकी लाइन-लेंथ इतनी खराब रही कि दोनों सलामी बल्लेबाज आसानी से लय में आ गए। पूरी पारी में भारतीय गेंदबाजों ने 42 चौके और छह छक्के खाए।

इंग्लैंड ने लॉर्ड्स के मैदान पर बनाया सबसे बड़ा स्कोर, 387 रन ठोके भारत के खिलाफ

ENGvsIND इंग्लैंड ने लंदन के लॉर्ड्स के एतिहासिक मैदान में इतिहास रचते हुए भारतीय गेंदबाजों के खिलाफ निर्धारित 50 ओवरों में 387 रन बनाए। इस पारी में बहुत सारे रिकॉर्ड बने। भारत के खिलाफ बेन डकेट और जैकब बेथल ने सर्वाधिक 193 रनों की साझेदारी की। यह लॉर्ड्स पर सबसे बड़ी सलामी साझेदारी थी। इसके अलावा बेन डकेट ने 140 रन बनाए जो इस मैदान पर किसी भी बल्लेबाज का एकदिवसीय प्रारुप में सर्वाधिक स्कोर है।

भारतीय गेंदबाजी के हाल बेहाल रहे। सिर्फ प्रसिद्ध कृष्णा को 2 विकेट मिले वहीं। प्रिंस यादव को 1 विकेट मिला। भारत को अगर यह मैच जीतना है तो एकदिवसीय प्रारुप में रिकॉर्ड रन चेज करना होगा। भारत के लिए सबसे महंगे गुरनूर बरार रहे जिन्होंने 10 ओवर में 97 रन दिए। 

इंग्लैंड ने पहले दस ओवर में 58 रन बनाए। 10 से 40 ओवर में 210 रन बनाए। और अंतिम 10 ओवर में 126 रन बनाए। इसमें से 62 रन अंतिम 3 ओवरों में आए।आज इंग्लैंड ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी का फैसला किया। जसप्रीत बुमराह की कमी भारतीय गेंदबाजों को बहुत खली जो घुटने की चोट से बाहर रहे।

CM मोहन यादव ने असंभव को किया संभव, UCC को कैबिनेट ने दी मंजूरी, जानें लिव-इन के लिए क्या हैं शर्तें?

Meeting of Madhya Pradesh Cabinet was held under chairmanship of Chief Minister Dr Mohan Yadav

– जगदीशपुर में हुई मध्यप्रदेश कैबिनेट की ऐतिहासिक मीटिंग

– तीन तलाक-हलाला से जुड़े मामले अब अपराध की श्रेणी में

– अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होगी समान नागरिक संहिता

– प्रदेश के मुखिया ने कैबिनेट के बाद खुद दी यूसीसी की जानकारी 

Chief Minister Dr. Mohan Yadav : मध्यप्रदेश के लिए 19 जुलाई का दिन ऐतिहासिक रहा। अब राज्य में किसी के लिए कोई विशेष कानून नहीं होगा। सभी धर्मों के लोग एक ही कानून के तहत जीवन-यापन करेंगे। चाहे लिव-इन हो या जीवन से जुड़ा कोई भी मामला, सब एक ही नियम से तय होगा। दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने असंभव को संभव कर दिया है। उनकी अध्यक्षता में जगदीशपुर में हुई कैबिनेट ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू करने को सहमति दे दी है। 

 

समान नागरिक संहिता को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया से कहा कि भारत के संविधान में बताए गए एक समानता, बराबरी, न्याय और धर्मनिरपेक्षता के विज़न को साकार करने की दिशा में एक खास कदम है। इसे मध्य प्रदेश के निवासियों के लिए , चाहे उनका धर्म कोई भी हो, शादी, तलाक, वैवाहिक झगड़ों से जुड़े भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे निजी मामलों को नियंत्रित करने के लिए एक समान पर्सनल सिविल कानून लागू करने के मकसद से बनाया गया है।

इस कोड का मुख्य मकसद महिलाओं की सुरक्षा और उन्हें सशक्त बनाना है, ताकि शादी, तलाक और उत्तराधिकार से जुड़े अलग-अलग पर्सनल कानूनों के तहत उनके साथ होने वाले पुराने भेदभाव को खत्म किया जा सके।

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उन्होंने कहा कि इन अलग-अलग और कभी-कभी बिना लिखित नियमों वाली प्रथाओं में सुधार करके और एक समान व निष्पक्ष ढांचा बनाकर, यह कोड पर्सनल सिविल कानून को आधुनिक बनाता है, ताकि पुरुषों और महिलाओं को समान अधिकार मिल सकें। साथ ही, यह धार्मिक रीति-रिवाजों, समारोहों और पारंपरिक प्रथाओं की भी साफ तौर पर सुरक्षा करता है, बशर्ते वे सार्वजनिक नैतिकता और नीति के अनुरूप हों।

 

धर्मनिरपेक्षता के विजन के मद्देनजर बड़ा कदम

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारत के संविधान के भाग-4 में राज्य के नीति-निदेशक तत्वों के अंतर्गत अनुच्छेद 44 में यह उपबंध किया गया है कि राज्य भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा। इसके उ‌द्देश्य के परिप्रेक्ष्य में राज्य में विवाह, विवाह-विच्छेद, उत्तराधिकार तथा सहवासी-संबंध और उनसे संबंधित विषयों के विनियमन के लिए “मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता, 2026” का प्रारूप तैयार किया गया है।

प्रस्तावित संहिता का उ‌द्देश्य विभिन्न व्यक्तिगत विधियों के अंतर्गत समान प्रकृति के नागरिक विषयों में प्रचलित भिन्नताओं को एक समेकित विधिक ढांचे में विनियमित करना तथा समानता, लैंगिक न्याय, गरिमा और विधि के शासन के संवैधानिक मूल्यों को प्रभावी बनाना है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के निवासियों के लिए एक समान पर्सनल सिविल कानून लागू करने के उद्देश्य से 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code) का एक ऐतिहासिक ड्राफ्ट तैयार किया है।

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यह प्रस्तावित कोड भारत के संविधान में निहित एकसमानता, बराबरी, न्याय और धर्मनिरपेक्षता के विज़न को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस संहिता का मुख्य मकसद पर्सनल कानूनों के तहत महिलाओं के साथ होने वाले पुराने भेदभाव को खत्म करना, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना और उन्हें सशक्त बनाना है।

पुरुषों और महिलाओं को समान अधिकार देने के साथ-साथ यह कोड उन धार्मिक रीति-रिवाजों और पारंपरिक प्रथाओं की साफ तौर पर सुरक्षा करता है जो सार्वजनिक नैतिकता और नीति के अनुरूप हैं। यह कोड उत्तराखंड (2024), गुजरात (2026) और असम (2026) के यूनिफॉर्म सिविल कोड के गहन अध्ययन और उनके मार्गदर्शन से तैयार किया गया है।

 

सीएम डॉ. यादव ने बताईं संहिता की मुख्य विशेषताएं

1- अनुसूचित जनजातियों को संरक्षण: संवैधानिक सुरक्षा-कवच का सम्मान करते हुए यह कानून संविधान के अनुच्छेद 342 और अनुच्छेद 366 (खंड 25) के तहत आने वाली अनुसूचित जनजातियों जैसे भील, गोंड, कोरकू, बैगा, सहरिया और भारिया पर लागू नहीं होगा।

इसके अलावा, जिन समुदायों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा संविधान के भाग XXI के तहत की गई है, उन्हें भी इस कोड से विशेष रूप से बाहर रखा गया है। कोड का परिभाषा वाला हिस्सा इसके अधिकार क्षेत्र को तय करता है। उत्तराधिकार से जुड़े जिन शब्दों की परिभाषा इसमें नहीं है, उनके लिए 'भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925' के अर्थ मान्य होंगे।

 

2- विवाह और तलाक से जुड़े बड़े सुधार

बहुविवाह-तीन तलाक पर पूर्ण रोक: यह कोड सभी समुदायों में केवल एक ही शादी (मोनोगैमी) को अनिवार्य बनाता है। कोई भी व्यक्ति एक समय में केवल एक ही जीवित जीवनसाथी के साथ शादीशुदा रह सकता है। विवाह के लिए पुरुषों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं की 18 वर्ष तय की गई है। अमान्य सहमति और प्रतिबंधित रिश्तों (जब तक परंपरा की अनुमति न हो) के बीच विवाह पर रोक लगाई गई है।

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मौखिक तलाक या अनौपचारिक पंचायत के फैसलों को पूरी तरह गैर-कानूनी घोषित किया गया है। अब विवाह का समापन केवल कानून में बताए गए स्पष्ट और वैधानिक आधारों पर ही हो सकता है। मौजूदा व्यवस्था के विपरीत, अब महिलाओं को भी यह अधिकार दिया गया है कि यदि उनके पति ने शादी के समय किसी दूसरी महिला को गर्भवती किया है, तो पत्नी शादी को रद्द घोषित करने की मांग कर सकती है।

लोगों के लिए शादी और तलाक दोनों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। शहरी क्षेत्रों में 'MP ई-नगर पालिका पोर्टल' और ग्रामीण क्षेत्रों में SDM, नगरपालिका या पंचायत के ज़रिए यह प्रक्रिया पूरी होगी। रजिस्ट्रेशन न होने से शादी अमान्य नहीं होगी, लेकिन रजिस्ट्रार द्वारा बिना ठोस लिखित कारण के आवेदन खारिज करने पर जुर्माने का प्रावधान है। तलाक के बाद उसी जीवनसाथी से दोबारा शादी करने के लिए 'निकाह हलाला' जैसी अपमानजनक या नीचा दिखाने वाली शर्तों को मानना, बढ़ावा देना या मजबूर करना एक दंडनीय आपराधिक अपराध माना जाएगा।

 

3- बच्चों के अधिकार और कस्टडी

'अवैध' शब्द की समाप्ति: संहिता ने एक प्रगतिशील कदम उठाते हुए कानूनी ढांचे से 'अवैध' (illegitimate) शब्द को पूरी तरह हटा दिया है। विवाहित या अविवाहित माता-पिता के बच्चों, जैविक, गोद लिए गए, सरोगेसी या असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) से पैदा हुए सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा प्राप्त होगा। कस्टडी से जुड़े किसी भी विवाद में माता-पिता के अधिकारों के मुकाबले “बच्चे का हित और सर्वांगीण भलाई” ही अदालत के फैसले का मुख्य और अनिवार्य आधार होगी।

 

4- उत्तराधिकार का एकसमान और जेंडर-न्यूट्रल ढांचा

लिंग-तटस्थ अधिकार: बेटों और बेटियों को संपत्ति के उत्तराधिकार में समान अधिकार दिए गए हैं, चाहे उनकी वैवाहिक स्थिति कुछ भी हो। मृतक की संपत्ति में विधवाओं और विधुरों के साथ भी समान व्यवहार होगा। जीवित माता और पिता दोनों को क्लास-1 का उत्तराधिकारी माना गया है, और वे मृतक बच्चे की संपत्ति में जीवनसाथी और बच्चों के साथ बराबर का हिस्सा पाएंगे।

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बिना वसीयत मरे व्यक्ति की संपत्ति को तीन वर्गों (क्लास-1, क्लास-2 और अन्य रिश्तेदार) में क्रमिक तरीके से बांटा जाएगा। पिछली पीढ़ियों के लिए एक 'यूनिट सिस्टम' और 'सर्वाइवरशिप का अधिकार' लागू किया गया है। यदि कोई व्यक्ति संपत्ति के मालिक की हत्या या उसमें मदद का दोषी है, तो वह विरासत से हमेशा के लिए अयोग्य हो जाएगा। यदि किसी का कोई कानूनी वारिस नहीं है, तो 'एस्चीट' सिद्धांत के तहत संपत्ति राज्य को हस्तांतरित हो जाएगी।

 

5- वसीयत (Will) की पूर्ण स्वतंत्रता

– एक नई धर्मनिरपेक्ष प्रणाली के तहत अब कोई भी स्वस्थ दिमाग का वयस्क अपनी 100% संपत्ति (स्वयं-अर्जित और पैतृक दोनों) वसीयत के माध्यम से किसी को भी दे सकता है। इससे पुरानी 'अनिवार्य उत्तराधिकार' की सीमाएं (जैसे इस्लामी कानून में एक-तिहाई की सीमा) समाप्त हो गई हैं। यह प्रक्रिया 'भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925' के तहत संचालित होगी।

 

6- लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य विनियमन (Live-in Relationship)

अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए साथ रहने की शुरुआत के एक महीने के भीतर रजिस्ट्रार के पास “लिव-इन रिलेशनशिप का बयान” जमा करना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। पार्टनर्स की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। वे प्रतिबंधित श्रेणी में न हों, पहले से विवाहित न हों और उनकी सहमति स्वतंत्र होनी चाहिए। यदि कोई पार्टनर 21 साल से कम उम्र का है, तो लिव-इन के शुरू होने और खत्म होने की जानकारी उनके माता-पिता-अभिभावकों को भेजी जाएगी। रजिस्ट्रार यह रिकॉर्ड स्थानीय पुलिस स्टेशन को भी भेजेगा।

 

7- महिला पार्टनर और बच्चों को सुरक्षा

लिव-इन से पैदा हुए बच्चों को वैध माना जाएगा और उन्हें पूर्ण उत्तराधिकार मिलेगा। यदि पुरुष पार्टनर महिला को छोड़ देता है, तो वह सक्षम अदालत के माध्यम से कानूनी पत्नी की तरह ही भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) का दावा कर सकती है।

बिना रजिस्ट्रेशन एक महीने से ज्यादा साथ रहने पर 3 महीने तक की जेल या 10,000 जुर्माना हो सकता है। गलत जानकारी देने पर 3 महीने की जेल और 25,000 जुर्माना तथा रजिस्ट्रार के नोटिस के बाद भी बयान न देने पर 6 महीने तक की जेल और 25,000 का जुर्माना हो सकता है।

Video: फ्लैट, 80 हजार रुपेय महीना इनकम फिर भी 12 घंटे चलाते हैं Uber, वजह जानकर करेंगे सलाम

आमतौर पर लोग ऐसी जिंदगी की कल्पना करते हैं, जहां बिना रोज मेहनत किए हर महीने अच्छी आमदनी होती रहे और आराम से जीवन बिताया जा सके। लेकिन दिल्ली के एक Uber ड्राइवर की कहानी इस सोच को पूरी तरह बदल देती है। उनके पास हर महीने करीब ₹80 हजार की किराये से आने वाली आय है, फिर भी वह रोजाना 12 घंटे तक गाड़ी चलाते हैं। उनकी यह कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जहां लोग उनकी मेहनत, आत्मनिर्भरता और सकारात्मक सोच की जमकर तारीफ कर रहे हैं।

जिंदगी में मुश्किल हालातों का सामना करने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और काम को अपनी पहचान और आत्मसम्मान से जोड़कर देखा। उनकी कहानी सिर्फ कमाई की नहीं, बल्कि उस जज्बे की है जो इंसान को कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

एक सफर के दौरान खुली जिंदगी की कहानी

इस प्रेरणादायक कहानी का पता तब चला, जब एक महिला यात्री ने Uber राइड के दौरान ड्राइवर से बातचीत शुरू की। इंस्टाग्राम यूजर आस्था सेठ ने इस बातचीत को सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसके बाद यह कहानी हजारों लोगों तक पहुंच गई।

बिहार से दिल्ली तक का सफर

ड्राइवर मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले हैं। आस्था के मुताबिक, वह पहले दिल्ली में एक रिश्तेदार की फैक्ट्री में काम करते थे और वहां उनकी अच्छी कमाई थी। लेकिन पिछले साल उन्हें हार्ट अटैक आया, जिसके बाद उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया। ठीक होने के बाद कथित तौर पर उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया और उन्हें यह महसूस कराया गया कि अब वह पहले की तरह काम नहीं कर सकते।

मुश्किल वक्त में चुना नया रास्ता

हार्ट अटैक के बाद नौकरी छूटना उनके लिए बड़ा झटका था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने Uber चलाना शुरू किया और खुद को फिर से साबित करने का फैसला किया।आस्था के अनुसार, उनके पास नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी के पास दो फ्लैट हैं, जिनसे उन्हें हर महीने करीब ₹80 हजार किराया मिलता है। इसके बावजूद उन्होंने घर बैठने के बजाय काम करना चुना।

काम सिर्फ पैसे के लिए नहीं, आत्मसम्मान के लिए

ड्राइवर के लिए Uber चलाना केवल कमाई का जरिया नहीं है। वह इसे अपनी सक्रियता और आत्मनिर्भरता बनाए रखने का तरीका मानते हैं। वह रोज सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक गाड़ी चलाते हैं और इससे करीब ₹50 हजार अतिरिक्त कमाई करते हैं। उनका कहना है कि वह यह दिखाना चाहते हैं कि बीमारी किसी इंसान की क्षमता को खत्म नहीं कर सकती।

बेटियों के भविष्य के लिए की पूरी तैयारी

उन्होंने बताया कि उनके दो फ्लैट उन्होंने अपनी बेटियों के भविष्य के लिए सुरक्षित रखे हैं। इसके अलावा बिहार में पैतृक संपत्ति भी है। यानी काम करना उनकी मजबूरी नहीं, बल्कि उनकी अपनी पसंद है।

दवाइयां और इमरजेंसी पैसे हमेशा साथ रखते हैं

यात्री से बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी रोजमर्रा की जिंदगी के बारे में भी बताया। वह हमेशा अपनी दवाइयां और किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति के लिए कुछ पैसे अपने साथ रखते हैं। इतनी परेशानियों के बावजूद उनके चेहरे पर आत्मविश्वास और मुस्कान बनी रही, जिसने यात्री को काफी प्रभावित किया।

सोशल मीडिया पर लोग बोले- असली हीरो

वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने उनकी सोच और मेहनत की जमकर तारीफ की। कई यूजर्स ने कहा कि यह कहानी बताती है कि जिंदगी में मुश्किलें आने के बाद भी इंसान अपने फैसलों से आगे बढ़ सकता है।एक यूजर ने लिखा कि ऐसी कहानियां हमें अपनी जिंदगी की कद्र करना और लगातार मेहनत करते रहना सिखाती हैं। वहीं कई लोगों ने उन्हें प्रेरणा बताते हुए कहा- “आप असली हीरो हैं।”

एक छोटी मुलाकात ने दे दिया बड़ा संदेश

आस्था सेठ के लिए यह सिर्फ एक Uber राइड नहीं थी, बल्कि जिंदगी को देखने का नया नजरिया देने वाला अनुभव था। इस ड्राइवर की कहानी ने लोगों को याद दिलाया कि असली ताकत हालातों में नहीं, बल्कि उन्हें स्वीकार कर आगे बढ़ने के फैसले में होती है।

India’s Got Latent 2 कंटेस्टेंट साक्षी झा बनीं इंटरनेट का निशाना, समय रैना ने ट्रोलर्स को दी नसीहत

दुनिया का सबसे सस्ता शहर बनी दिल्ली! डेट से लेकर इंटरनेट तक सब सस्ता, लेकिन सैलरी ने चौंकाया

दिल्ली में दुनिया का सबसे सस्ता ब्रॉडबैंड इंटरनेट भी मिल भी मिलता है और 3 BHK फ्लैट का मासिक किराया और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की तुलना में प्रॉपर्टी की कीमत भी कम है। डेट और सस्ते इंटरनेट के बीच दिल्ली का एक कड़वा सच भी सामने आया है।  ड्यूश बैंक के हालिया ग्लोबल कॉस्ट ऑफ लिविंग सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार, रोजमर्रा की जिंदगी के खर्च के मामले में दिल्ली दुनिया के सबसे सस्ते शहरों में शामिल है। चाहे घर का किराया हो या किसी साथी के साथ बाहर घूमने-फिरने का खर्च, दिल्ली में खर्च दूसरे बड़े शहरों की तुलना में काफी कम है। हालांकि, यहां रहने वाले लोगों की औसत कमाई भी कई प्रमुख शहरों के मुकाबले सबसे कम बताई गई है।

रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

यह जानकारी ड्यूश बैंक की ‘मैपिंग द वर्ल्ड्स प्राइसेस 2026’ रिपोर्ट में दी गई है। इस रिपोर्ट में दुनिया के 69 शहरों का आकलन उपभोक्ता वस्तुओं की कीमत, वेतन, मकानों की लागत और जीवन की गुणवत्ता जैसे कई पैमानों पर किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, एक सामान्य और किफायती डेट (बाहर घूमने और खाने का खर्च) के लिए दिल्ली दुनिया का सबसे सस्ता शहर है। इसके लिए औसतन 103 डॉलर (करीब 9,920 रुपये) खर्च होते हैं। वहीं, स्विट्जरलैंड का जिनेवा इस मामले में सबसे महंगा शहर है, जहां इसी तरह की आउटिंग पर 475 डॉलर (करीब 45,750 रुपये) खर्च करने पड़ते हैं।

इन चीजों के खर्च के आधार पर हुई तुलना, इंटरनेट भी सबसे सस्ता

ड्यूश बैंक की रिपोर्ट में शहरों की किफायत का आकलन कई रोजमर्रा के खर्चों के आधार पर किया गया। इसमें वाइन की एक बोतल, एक जोड़ी जींस, गर्मियों की एक ड्रेस, दो कप कॉफी, मिड-रेंज रेस्तरां में दो लोगों का डिनर, दो मूवी टिकट, सार्वजनिक परिवहन के दो टिकट और 5 किलोमीटर की टैक्सी यात्रा का खर्च शामिल किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, मासिक ब्रॉडबैंड इंटरनेट के मामले में भी दिल्ली सबसे सस्ता शहर रहा। यहां एक औसत इंटरनेट कनेक्शन की कीमत 7.3 डॉलर (करीब 703 रुपये) प्रति माह आंकी गई।

हालांकि, कम खर्च होने के बावजूद जीवन की गुणवत्ता (क्वालिटी ऑफ लाइफ) के मामले में दिल्ली शीर्ष 50 शहरों में जगह नहीं बना सकी। इस रैंकिंग में लोगों की खरीदने की क्षमता, सार्वजनिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, घरों की किफायती कीमत, प्रदूषण, मौसम और रोजाना आने-जाने में लगने वाले समय जैसे कई पहलुओं को शामिल किया गया है।

दिल्ली में लोगों की कमाई भी काफी कम

ड्यूश बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के कई बड़े शहरों की तुलना में दिल्ली में घरों की कीमतें काफी कम हैं। शहर के बीचों-बीच एक वर्ग मीटर रिहायशी संपत्ति की औसत कीमत 2,465 डॉलर (करीब 2.37 लाख रुपये) है। इसी आधार पर 69 शहरों की सूची में दिल्ली 65वें स्थान पर रही। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले 10 वर्षों में डॉलर के हिसाब से दिल्ली में संपत्तियों की कीमतों में 9.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, 2019 के बाद से घरों की कीमतों में 15.7 फीसदी की बढ़ोतरी भी हुई है।

कमाई के मामले में दिल्ली सबसे पीछे

रिपोर्ट के मुताबिक, कमाई के मामले में दिल्ली की स्थिति काफी कमजोर है। हाथ में मिलने वाली मासिक सैलरी (नेट सैलरी) के आधार पर दिल्ली 69 शहरों में 66वें स्थान पर रही। दिल्ली में औसत मासिक नेट सैलरी 538 डॉलर (करीब 51,800 रुपये) बताई गई है। यह न्यूयॉर्क में काम करने वाले लोगों की औसत कमाई का लगभग दसवां हिस्सा है। वहीं, स्विट्जरलैंड का ज़्यूरिख इस सूची में सबसे ऊपर रहा। वहां लोगों की औसत मासिक नेट सैलरी 8,363 डॉलर (करीब 8.05 लाख रुपये) दर्ज की गई।

पिछले 10 साल में डॉलर के हिसाब से घटी सैलरी

ड्यूश बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में औसत मासिक सैलरी में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वर्ष 2012 में औसत सैलरी 633 डॉलर थी, जो 2016 में बढ़कर 653 डॉलर हो गई। इसके बाद 2019 में यह घटकर 556 डॉलर रह गई। 2025 में बढ़कर 607 डॉलर हुई, लेकिन 2026 में फिर गिरकर 538 डॉलर पर पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों में डॉलर के हिसाब से दिल्ली की औसत सैलरी में 17.7 फीसदी की कमी आई है। वहीं, 2019 के बाद से इसमें 3.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

यह अध्ययन ड्यूश बैंक रिसर्च इंस्टीट्यूट के जिम रीड और गैलिना पोज़्दन्याकोवा ने तैयार किया है। 13 जुलाई को प्रकाशित इस रिपोर्ट में मुख्य रूप से नमबेओ (Numbeo) के जुटाए गए आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया, जिन्हें बाद में ड्यूश बैंक की रिसर्च टीम ने जांचकर और बेहतर बनाया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कॉफी पीने वालों के लिए दिल्ली दुनिया के सबसे सस्ते शहरों में से एक है। यहां एक रेगुलर कैपुचीनो कॉफी की औसत कीमत 2.40 डॉलर (करीब 231 रुपये) है। वहीं, शहर के मुख्य इलाके में तीन बेडरूम वाले अपार्टमेंट का औसत मासिक किराया 685 डॉलर (करीब 65,970 रुपये) बताया गया है।

बीयर और सिगरेट का खर्च अब भी कम

ड्यूश बैंक की “ओएसिस इंडेक्स” (Oasis Index) रैंकिंग में दिल्ली 52वें स्थान पर रही। इस इंडेक्स में पांच बीयर और सिगरेट के दो पैकेट खरीदने में आने वाले कुल खर्च के आधार पर शहरों की तुलना की जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में इस पूरी खरीदारी पर औसतन 18.8 डॉलर (करीब 1,800 रुपये) खर्च होते हैं। यह न्यूयॉर्क में इसी तरह की खरीदारी पर होने वाले खर्च का लगभग 35 फीसदी है।

रैंकिंग की बात करें तो 2025 के मुकाबले दिल्ली सात स्थान ऊपर आई है। हालांकि, 2016 की रैंकिंग की तुलना में यह एक पायदान नीचे खिसक गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि डॉलर के हिसाब से पिछले 10 वर्षों में इस बास्केट की कीमत 36 फीसदी बढ़ी है। वहीं, 2019 के बाद से इसमें 13.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

किस भाव तक चढ़ेगा South Indian Bank का शेयर? Q1 रिजल्ट के बाद ब्रोकरेज का ये है रुझान

South Indian Bank Share Price: साउथ इंडियन बैंक के जून 2026 तिमाही के कारोबारी नतीजे के बाद ब्रोकरेज फर्म आनंद राठी ने इसमें फटाफट पैसे लगाने की सलाह दी है। ब्रोकरेज फर्म ने इसके शेयरों को लेकर जो टारगेट प्राइस फिक्स किया है, वह इसके मौजूदा लेवल से करीब 37% ऊपर है। अभी इसकी मौजूदा स्थिति की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले बीएसई पर शुक्रवार 17 जुलाई को यह 1.57% की गिरावट के साथ ₹44.62 पर बंद हुआ था।

किस भाव तक चढ़ेगा South Indian Bank का शेयर?

साउथ इंडियन बैंक के लिए एक और तिमाही बेहतरीन रही है और जून 2026 में इसके नतीजे शानदार रहे। बैंक के ग्रोथ, मुनाफे और एसेट क्वालिटी में लगातार सुधार हुआ है। RAM (रिटेल एग्रीकल्चर एंड एमएसएमई) सेगमेंट में मजबूती के दम पर इस वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही अप्रैल-जून 2026 में बैंक की क्रेडिट ग्रोथ तिमाही आधार पर 15.8% से बढ़कर 18.6% हो गई तो बेहतर CASA मिक्स की वजह से सीएएसए रेश्यो भी बढ़कर 33% हो गया।

फंडिंग कॉस्ट कम होने से NIM (नेट इंटेरेस्ट मार्जिन) में 28 बीपीएस की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई और यह 3.23% पर पहुँच गया। ब्रोकरेज फर्म आनंद राठी के मुताबिक आगे भी मार्जिन के मोटे तौर पर स्थिर रहने की उम्मीद है, क्योंकि रिटेल/MSME मिक्स में सुधार से प्राइसिंग का दबाव कम हो जाएगा।

ब्रोकरेज फर्म ने अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया है कि ट्रेजरी से कम कमाई के बावजूद बैंक को मुनाफा अच्छा रहा और स्थिर ऑपरेटिंग परफॉरमेंस और मॉडरेट क्रेडिट कॉस्ट के दम पर लगातार नौवीं तिमाही में RoA (रिटर्न ऑन एसेट्स) 1% से ऊपर बना रहा। एसेट क्वालिटी भी अच्छी बनी रही और ग्रॉस स्लिपेज घटकर 52 बीपीएस हो गया।

ब्रोकरेज फर्म को उम्मीद है कि बैंक की मिड-टीन लोन ग्रोथ बनी रहेगी और FY27-28 के दौरान करीब 1.1 का RoA और करीब 13% का RoE (रिटर्न ऑफ इक्विटी) रह सकता है। इन सब बातों को देखकर ब्रोकरेज फर्म ने इसकी खरीदारी की रेटिंग को बरकरार रखा है और 12-महीने का टारगेट प्राइस ₹61 फिक्स किया है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

साउथ इंडियन बैंक के शेयरों ने कम समय में ही निवेशकों की ताबड़तोड़ कमाई कराई है। पिछले साल 5 सितंबर 2025 को बीएसई पर यह ₹28.13 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर 10 महीने में ही यह 77.39% ऊपर चढ़कर 7 जुलाई 2026 को ₹49.90 के भाव पर पहुंच गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है।

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Alpine Texworld कितना दे पाएगा लिस्टिंग गेन! ग्रे मार्केट से मिल रहे ‘कमजोर’ संकेत

Alpine Texworld Listing Gain: देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के साथ-साथ मार्केट में अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड का भी आईपाओ लॉन्च हुआ था। एक तरफ एसबीआई फंड्स के आईपीओ को निवेशकों का धांसू रिस्पांस मिला था और इसे 41 गुना से अधिक बोली मिली थी तो दूसरी तरफ अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड के आईपीओ को ओवरऑल 1.40 गुना बोली मिली थी। इसके शेयर अलॉट हो चुके हैं और अब इसकी लिस्टिंग का इंतजार है। आईपीओ निवेशकों को शेयर ₹105 के भाव पर जारी हुए हैं। अब मंगलवार को लिस्टिंग पर मुनाफे की बात करें तो ग्रे मार्केट में इसके शेयर इश्यू प्राइस से ₹1 यानी 0.95% की GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) पर हैं। इससे शेयरों की फीकी लिस्टिंग के संकेत मिल रहे हैं।

हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी की कारोबारी सेहत और लिस्टिंग के दिन मार्केट की परिस्थिति पर निर्भर रहेगा। अब अलॉटमेंट की बात करें तो अगर आपने आईपीओ में बोली लगाई थी और अभी तक स्टेटस चेक नहीं किया है तो इसे या तो बीएसई की वेबसाइट पर या रजिस्ट्रार केफिनटेक की वेबसाइट पर देख सकते हैं, जिसका स्टेपवाइज प्रोसेस नीचे दिया जा रहा है।

BSE की साइट पर ऐसे करें चेक

https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx, इस लिंक पर जाएं।

इश्यू टाइप ‘Equity’ चुनें। इश्यू नाम Alpine Texworld चुनें।

एप्लीकेशन नंबर या पैन भरें।

फिर I’m not a robot पर क्लिक करें।

सर्च पर क्लिक करें।

शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।

रजिस्ट्रार की साइट पर स्टेटस चेक करने का तरीका

https://ipostatus.kfintech.com/, लिंक पर क्लिक करें।

सेलेक्ट आईपीओ पर क्लिक करके Alpine Texworld चुनें।

एप्लीकेशन नंबर, डीमैट अकाउंट या पैन में से कोई भी चुनें। फिर जो विकल्प चुना है, उसके मुताबिक डिटेल्स दें। जैसे कि पैन चुना है तो पैन भरें।

सबमिट करें।

शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।

Alpine Texworld IPO को मिला था तगड़ा रिस्पांस

अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड का ₹126 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 14-16 जुलाई तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का सुस्त रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 1.40 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 1.09 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 1.09 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 1.54 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 1,20,24,000 नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹32.08 करोड़ प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाने के लिए एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में नई वीविंग यूनिट लगाने, ₹52.20 करोड़ कर्ज हल्का करने और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Alpine Texworld के बारे में

अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड कपड़ों की डाईंग और प्रोसेसिंग के बिजनेस में है। इसके पास दो मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। इसकी सालाना इंस्टॉल्ड कैपेसिटी 6 हजार टन के कॉटन और ब्लेंडेड यार्न की है। इसके पास 112 हाई-स्पीड लूम हैं जो डेनिम, सूटिंग शर्टिंग, और RFD (रेडी-फॉर-डाईंग) फैब्रिक बनाते हैं। कंपनी को फिलहाल फोकस ग्रीन एनर्जी पर है और रिन्यूएबल एनर्जी सेगमेंट पर भी ध्यान दे रही है। अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड के वित्तीय सेहत की बात करें तो पिछले वित्त वर्ष 2026 में इसका शुद्ध 151.68% बढ़कर ₹21.72 करोड़ और टोटल इनकम 47.34% उछलकर ₹350.18 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 के आखिरी में कंपनी पर ₹177.60 करोड़ का कर्ज था तो रिजर्व और सरप्लस में ₹46.32 करोड़ पड़े थे।

एसबीआई फंड्स की कैसी रह सकती है लिस्टिंग?

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

8th Pay Commission Updates: फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करेगी सैलरी में होने वाली बढ़ोतरी, जानिए कितना रहेगा फिटमेंट फैक्टर

आठवें वेतन आयोग ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन में संशोधन की सिफारिशें देने से पहले चर्चा की प्रक्रिया तेज कर दी है। एंप्लॉयीज की नजरें वेतन आयोग की सिफारिशों पर लगी हैं। इस बार आयोग वेतन में संशोधन, अलाउन्सेज, सैलरी स्ट्रक्चर सहित कई मसलों के बारे में अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा। इसका फायदा एक करोड़ से ज्यादा लोगों को मिलेगा। इनमें केंद्र सरकार के करीब 50 लाख एंप्लॉयीज और 65 लाख पेंशनर्स शामिल हैं।

आयोग की 9 दौर की बैठकें हो चुकी हैं

आठवां वेतन आयोग अब तक रीजनल और केंद्रीय एंप्लॉयीज यूनियंस और दूसरे पक्षों के साथ नौ दौर की बैठकें पूरी कर चुका है। इस महीने की 9 और 10 तारीख को उसने कोलकाता में बैठक की। इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों को कहना है कि आयोग की सिफारिशें अगले साल जून-जुलाई तक आने की उम्मीद है। उसके बाद केंद्र सरकार सिफारिशों पर विचार करने के बाद उन्हें लागू करने के बारे में अंतिम फैसला लेगी।

फैमिली यूनिट्स की परिभाषा बदलने की मांग

ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लॉयीज फेडरेशन ने आयोग से फैमिली यूनिट्स की परिभाषा में बदलाव करने की सलाह दी है। आयोग फैमिली यूनिट्स के आधार पर वेतन में संशोधन का कैलकुलेशन करता है। फेडरेशन का कहना है कि फैमिली यूनिट्स 3 से बढ़ाकर 4.4 की जानी चाहिए। इसमें आश्रित माता-पिता को भी शामिल किया जाना चाहिए। इससे फिटमेंट फैक्टर 2.05 से बढ़कर 2.10 हो जाएगा। फिटमेंट फैक्टर बढ़ने से बेसिक सैलरी भी बढ़ जाएगी।

मेट्रो शहरों के लिए 36 फीसदी एचआरए की मांग

एंप्लॉयीज यूनियंस को उम्मीद है कि वेतन आयोग डीए, एचआरए और ट्रैवल अलाउंसेज पर भी विचार करेगा और इनके कैलकुलेशन के तरीकों में जरूरी संशोधन करेगा। एंप्लॉयीज के प्रतिनिधि एक्स कैटेगरी के शहरों के लिए 36 फीसदी एचआरए की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वाय कैटेगरी के शहरों के लिए एचआरए 24 फीसदी और जेड कैटेगरी के शहरों के लिए 12 फीसदी होना चाहिए। ट्रैवल अलाउंसेज को भी लेवल 1 एंप्लॉयीज के लिए कम से कम प्रति माह 9000 रुपये करने की मांग की जा रही है।

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एंप्लॉयीज की सबसे ज्यादा नजरें फिटमेंट फैक्टर पर 

एंप्लॉयीज की सबसे ज्यादा नजरें फिटमेंट फैक्टर पर है। एंप्लॉयीज के प्रतिनिधि और यूनियंस 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं। सातवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था। अगर 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग मान ली जाती है तो केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज का मिनिमम बैसिक पे बढ़कर प्रति माह 69,000 रुपये हो जाएगा। अभी यह 18,000 रुपये है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि क्रूड की कीमतों में उछाल से सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ा है। ऐसे में फिटमेंट फैक्टर 1.82-2.57 के बीच रह सकता है।

Top five midsize SUVs ranked

Best midsize SUVs

If you are in the market for a new midsize SUV, you are quite spoilt for choice. There are as many as 13 models to choose from, spanning every powertrain, including petrol, diesel, CNG, strong-hybrid and electric. With so many options, it may be quite daunting to choose the right model. To make it easier for you, we have compiled the five best midsize SUVs currently available in the market, focusing only on the ICE-powered models. 

1. Kia Seltos 

Price: Rs 10.99 lakh-21.82 lakh

The midsize SUV segment has a new all-rounder in the Seltos. It’s got a wide range of engines, including a 115hp, 1.5-litre naturally aspirated petrol, a 160hp, 1.5-litre turbo-petrol and a 116hp, 1.5-litre diesel; gearbox options are just as diverse. The Seltos also has the most premium and inviting interior. Not only is it refined, efficient and spacious, but it also has class-leading tech and UI/UX. The only downside is that there’s a hint of firmness in the suspension setup, but it’s not a dealbreaker. It is, however, quite expensive at the top end. 

2. Hyundai Creta

Price: Rs 10.91 lakh-19.95 lakh  

Despite its age, the Creta remains a competitive offering in the company of its newer rivals. It’s slightly smaller and less spacious than the Seltos because the latter has moved on to a new-generation platform, but it offers the same mix of powertrain options, a comfortable driving and riding experience and a feature-loaded cabin. Hyundai’s after-sales service experience is quite satisfactory, and there’s also the N Line version with a slightly sportier setup for the more enthusiastic buyer. 

3. Maruti Victoris 

Price: Rs 10.49 lakh-19.99 lakh

If running costs, reliability and ease of ownership are priorities, the Victoris (or the Grand Vitara and Hyryder) remains unmatched. Between the three, the Victoris is the newest and also packs some additional features. The trio has the segment’s only strong-hybrid powertrain with the 116hp, 1.5-litre strong-hybrid unit and also the option of AWD with the 1.5-litre naturally aspirated petrol engine. The Victoris rides and handles well, too, although performance isn’t particularly exciting, and rear-seat space isn’t as good as that of its rivals. There’s also the option of CNG should you want affordable running costs. 

4. Tata Sierra

Price: Rs 11.49 lakh-21.29 lakh

The Sierra is the roomiest and most feature-loaded SUV in the midsize segment, uniquely even offering a third screen for the front passenger. Good ride and handling are also among its strengths. The 160hp, 1.5-litre turbo-petrol engine is the pick of the range, as the 118hp, 1.5-litre diesel and 106hp, 1.5-litre naturally aspirated petrol engines aren’t good on refinement and performance. It’s also on the more expensive side, and reliability and service experience are deterrents, too. 

5. Renault Duster 

Price: Rs 10.49 lakh-18.69 lakh

The Duster has a tough and rugged appeal, fantastic ride quality and a well-appointed interior. It offers good value for money, too, but is not as spacious as its rivals. Also, both its 100hp, 1.0-litre turbo-petrol and 163hp, 1.3-litre turbo-petrol engines suffer from turbo-lag, although performance is otherwise quite potent. A big miss is the option of an auto gearbox with the base petrol engine. Some may even miss a diesel engine and optional all-wheel-drive system offered with the original Duster.