क्या आप बहुत ज्यादा फंड में निवेश कर रहे हैं? जानिए इसके नुकसान

मेरे एक दोस्त ने एक दिन अपने म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि वह हर साल म्यूचु्अल फंड में निवेश बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही उनके पोर्टफोलियो में फंड्स यानी स्कीम की संख्या भी बढ़ रही है। क्या ऐसा करना सही है? जब मैंने उनसे पूछा कि उनके पोर्टफोलियो में कितनी स्कीमें हैं तो वह गिनती करने लगे। दरअसल यह समस्या सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं है।

डायवर्सिफिकेशन का सही मतलब कम लोग समझते हैं

ज्यादातर निवेशकों को लगता है कि डायवर्सिफिकेशन के लिए ज्यादा स्कीमों में निवेश करना जरूरी है। लेकिन, कम लोग यह समझते हैं कि डायवर्सिफिकेशन का मतलब ज्यादा फंडों में निवेश करना नहीं है। डायवर्सिफिकेशन का मतलब यह है कि आपके पोर्टफोलियो में अलग-अलग तरह के एसेट्स और स्कीमें होनी चाहिए। उन स्कीमों का पोर्टफोलियो एक जैसे शेयरों का नहीं होना चाहिए। उदाहरण के लिए एक से ज्यादा लार्जकैप फंड में निवेश करने का कोई मतलब नहीं है।

एक जैसी कई स्कीम में निवेश करना डायवर्सिफिकेशन नहीं है 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर कोई इनवेस्टर डायवर्सिफिकेशन करना चाहता है तो वह अपने पोर्टफोलियो में एक लार्जकैप फंड, एक मिडकैप फंड, एक स्मॉलकैप फंड को शामिल कर सकता है। लार्जकैप, मिडकैप या स्मॉलकैप के एक से ज्यादा फंड में निवेश करने से डायवर्सिफिकेशन का मकसद पूरा नहीं होता है।

अलग-अलग एसेट में निवेश करने से रिस्क कम हो जाता है

डायवर्सिफिकेशन का मतलब अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश करना है। इसका मतलब है कि पोर्टफोलियो में इक्विटी शामिल होना चाहिए। इक्विटी की हर कैटेगरी के फंड होने चाहिए। डेट यानी बॉन्ड्स जैसे फिक्स्ड रिटर्न इंस्ट्रूमेंट्स भी पोर्टफोलियो का हिस्सा होना चाहिए। साथ ही बुलियन भी होना चाहिए। बुलियन का मतलब सोने और चांदी से है। एक्सपर्ट्स गोल्ड ईटीएफ और सिल्वर ईटीएफ में निवेश की सलाह देते हैं।

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एक साथ सभी एसेट क्लास में नहीं आती है गिरावट 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि डायवर्सिफिकेशन का मकसद यह है कि किसी एसेट क्लास में गिरावट का असर पोर्टफोलियो पर कम से कम पड़े। आम तौर पर यह देखा जाता है कि सभी एसेट क्लास में एक साथ गिरावट नहीं आती है। कई बार इक्विटी में गिरावट आने पर गोल्ड में तेजी होती है। डेट में निवेश आपके पोर्टफोलियो को शेयरों में तेज गिरावट की स्थिति में नुकसान से बचाता है। इसलिए एक्सपर्ट्स पोर्टफोलियो में डेट को शामिल करने सलाह देते हैं।

IMD Heavy Rain Alert: आईएमडी ने असम-मेघालय और बंगाल समेत इन 27 राज्यों में भारी बारिश-आंधी का अलर्ट दिया, 3 जुलाई तक ऐसा रहेगा मौसम

देश के बड़े हिस्से में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार तेज होती जा रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने असम, मेघालय, बिहार और पश्चिम बंगाल समेत देश के करीब 27 राज्यों में आने वाले दिनों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश और तेज आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के ताजा अनुमान के मुताबिक, देश के कई हिस्सों में आगामी 3 जुलाई तक मौसम का मिजाज बदला रहेगा और व्यापक रूप से वर्षा होने की संभावना है।

वर्तमान में मानसून की उत्तरी सीमा सूरत, इंदौर, मांडला, डालटनगंज और मोतिहारी से होकर गुजर रही है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 3-4 दिनों के भीतर मानसून के उत्तर अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार के शेष हिस्सों और उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं।

पूर्वोत्तर भारत और बंगाल-सिक्किम में आफत की बारिश, रेड अलर्ट जारी

मौसम विभाग ने पूर्वोत्तर भारत और पश्चिम बंगाल के पहाड़ी इलाकों में मूसलाधार बारिश का अनुमान जताया है:

उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम: इन क्षेत्रों में 27 से 29 जून के दौरान कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने और अलग-अलग हिस्सों में बेहद भारी बारिश होने की प्रबल आशंका है। इसके बाद 30 जून को भी यहां कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है, जबकि 1 से 3 जुलाई तक भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है।

  • असम और मेघालय: इन दोनों राज्यों में 27 जून और फिर 29-30 जून को अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। सबसे गंभीर स्थिति 28 जून को होने की संभावना है, जब असम और मेघालय में कई जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ अलग-अलग इलाकों में अत्यंत भारी बारिश हो सकती है। इसके बाद 1 से 3 जुलाई तक भी यहां भारी बारिश जारी रहेगी।
  • अरुणाचल प्रदेश: यहां 27 से 29 जून के दौरान अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश का अनुमान है, जबकि 30 जून से 2 जुलाई तक भारी बारिश दर्ज की जा सकती है।
  • नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा: इन चारों पूर्वोत्तर राज्यों में 27 जून से लेकर 3 जुलाई तक लगातार अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना व्यक्त की गई है।

बिहार, झारखंड और ओड़िशा समेत पूर्वी भारत का हाल

  • बिहार: बिहार में 27 और 28 जून को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। इसके बाद 29 और 30 जून को राज्य में कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश होने का अलर्ट जारी किया गया है। 1 जुलाई को भी यहां भारी बारिश की संभावना है, जबकि 27 से 29 जून के दौरान आकाशीय बिजली चमकने और 30 जून से 1 जुलाई के बीच 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है।
  • ओडिशा: ओडिशा में 27 से 29 जून और फिर 2-3 जुलाई को भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक 30 जून और 1 जुलाई को ओड़िशा में कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश दर्ज की जा सकती है।
  • झारखंड और गांगेय पश्चिम बंगाल: इन दोनों राज्यों में 30 जून और 1 जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। इसके साथ ही 27 जून से 3 जुलाई तक तेज हवाओं (40-50 किमी/घंटा) और गरज-चमक का दौर जारी रहेगा।
  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: यहाँ 28 और 29 जून को भारी बारिश का अनुमान है। साथ ही 28 जून से 1 जुलाई के दौरान 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाले थंडरस्कॉल का अलर्ट जारी किया गया है।

दिल्ली-NCR, यूपी और उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम का पूर्वानुमान

  • दिल्ली, हरियाणा और पंजाब: हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब में 27 जून से 2 जुलाई तक छिटपुट बारिश की संभावना है, जबकि 3 जुलाई को इन क्षेत्रों में व्यापक रूप से वर्षा हो सकती है। 1 से 3 जुलाई के दौरान इन राज्यों में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली चमकने का अनुमान है।
  • उत्तर प्रदेश: पूर्वी उत्तर प्रदेश में 27 से 30 जून तक छिटपुट बारिश और फिर 1 से 3 जुलाई के दौरान व्यापक रूप से बारिश होने की संभावना है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 29 जून से 3 जुलाई तक बारिश का दौर देखा जाएगा, जिसके साथ 30 जून से 3 जुलाई के बीच 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चल सकती है।
  • उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर: जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और उत्तराखंड में 30 जून से 3 जुलाई के दौरान व्यापक रूप से बारिश होने का अनुमान है। उत्तराखंड में 30 जून से 3 जुलाई के बीच और जम्मू-कश्मीर में 2-3 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट है।
  • हिमाचल प्रदेश: यहां 1 से 3 जुलाई के बीच व्यापक बारिश और भारी बारिश होने की संभावना है।
  • राजस्थान: पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान में 27 जून से 3 जुलाई तक बारिश और आंधी-तूफान की गतिविधियां जारी रहने का अनुमान है। पश्चिमी राजस्थान में 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।

मध्य और पश्चिमी भारत में वर्षा का अलर्ट

मध्य प्रदेश: पश्चिमी मध्य प्रदेश में 27 जून और फिर 29-30 जून को भारी बारिश की संभावना है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 27 और 29 जून को भारी बारिश हो सकती है जबकि 2 से 3 जुलाई के बीच यहां व्यापक बारिश का अनुमान है।

छत्तीसगढ़ और विदर्भ: छत्तीसगढ़ और विदर्भ दोनों ही क्षेत्रों में 27 जून से 3 जुलाई तक लगातार अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

कोंकण और गोवा: यहाँ 27 जून से 3 जुलाई के दौरान लगातार व्यापक रूप से भारी बारिश होने की संभावना है।

मध्य महाराष्ट्र और मारवाड़ा: मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में 27 जून को और फिर 1 से 3 जुलाई के बीच भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।

गुजरात क्षेत्र: गुजरात क्षेत्र में 2 और 3 जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान है।

दक्षिण भारत के राज्यों में मौसम की स्थिति

तटीय कर्नाटक और तेलंगाना: इन दोनों क्षेत्रों में 27 जून से 3 जुलाई तक लगातार अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने का अलर्ट है। तटीय कर्नाटक में इस दौरान तेज सतही हवाएं भी चलेंगी।

केरल और माहे: यहां 27 जून और फिर 30 जून से 3 जुलाई तक भारी बारिश की संभावना है। हालांकि, 28 और 29 जून को केरल और माहे के अलग-अलग इलाकों में बहुत भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है।

तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल: यहां 27 से 29 जून के दौरान अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है।

आंतरिक कर्नाटक: उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में 2-3 जुलाई को और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में 30 जून से 3 जुलाई के बीच भारी बारिश की संभावना है।

तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा: तटीय आंध्र प्रदेश और यानम में 27-28 जून तथा 1-3 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट है। रायलसीमा में 27 जून को भारी बारिश का अनुमान जताया गया है।

लक्षद्वीप: लक्षद्वीप में 28 और 29 जून को भारी बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है।

उत्तर प्रदेश और बिहार में भीषण लू की चेतावनी

बारिश के अलर्ट के बीच मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्सों में अगले दो दिनों तक भीषण गर्मी का अनुमान जताया है:

उत्तर प्रदेश: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 27 से 29 जून तक और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 27 से 30 जून तक लू की स्थिति बनी रहेगी। इनमें से 27 और 28 जून को दोनों ही क्षेत्रों (पूर्वी और पश्चिमी यूपी) के अलग-अलग पॉकेट्स में भीषण लू का प्रकोप रहने की आशंका है।

बिहार: बिहार के कुछ सीमित इलाकों में 27 और 28 जून को लू की स्थिति देखने को मिल सकती है। उमस भरा मौसम: झारखंड और ओड़िशा में 27 जून को मौसम बेहद गर्म और उमस भरा रहने की संभावना है।

IND vs IRE: आयरलैंड से करारी हार के बाद अभिषेक शर्मा का बड़ा बयान, बताया कहां हुई टीम से चूक

टी20 वर्ल्ड कप चैंपियन टीम इंडिया को आयरलैंड की टीम ने करारी शिकस्त दी है। बेलफास्ट में खेले गए पहले टी20 मैच में आयरलैंड ने इंटरनेशनल क्रिकेट में भारत को पहली बार हराया है। पहले टी20 मुकाबले में आयरलैंड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को 34 रन से मात दी है। इस जीत के साथ आयरलैंड ने सीरीज में 1-0 की लीड बना ली है। मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए आयरलैंड ने 182 रन बनाए। जवाब में भारतीय टीम 18.5 ओवर में 148 रन पर सिमट गई।

वहीं भारत की इस हार के बाद भारतीय बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने कहा कि टीम को आयरलैंड की परिस्थितियों के अनुसार खुद को जल्द से जल्द ढालना होगा। अब भारतीय टीम दूसरे और आखिरी मुकाबले में भारत बेहतर प्रदर्शन कर सीरीज बराबर करने के इरादे से उतरेगा।

मैच के बाद अभिषेक ने क्या कहा

अभिषेक ने मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “एक टीम के तौर पर ये बहुत जरूरी है कि हम हालात के अनुसार खुद को कितनी जल्दी ढाल पाते हैं। जब लगातार दो मैच खेलने होते हैं, तो पूरे ग्रुप को परिस्थितियों के हिसाब से जल्दी तालमेल बैठाना पड़ता है। प्रैक्टिस सेशन और अनुभव से इसमें मदद मिलती है। एक मजबूत टीम होने के नाते हमें तेजी से परिस्थितियों के अनुसार खुद को बदलना चाहिए। आज हमने ऐसा करने की कोशिश की, लेकिन दुर्भाग्य से हम इसमें सफल नहीं हो सके।” आयरलैंड की ओर से हम्फ्रीज और होलार्ड ने तीन-तीन विकेट लिए, जबकि भारतीय मूल के जय मूंद्रा ने दो विकेट झटके।

भारत के लगातार विकेट गिरे

भारत के बल्लेबाज तेज शुरुआत के बावजूद बड़ी पारी नहीं खेल सके और लगातार विकेट गंवाने के कारण पूरी टीम 148 रन पर सिमट गई। अभिषेक शर्मा ने सिर्फ 20 गेंदों में अर्धशतक जड़कर उम्मीद जगाई, लेकिन दूसरे बल्लेबाज उनका साथ नहीं दे सके। वहीं, अपने पहले अंतरराष्ट्रीय मैच में खेल रहे तेज गेंदबाज जय मूंदड़ा ने शानदार शुरुआत करते हुए संजू सैमसन को बोल्ड कर भारत को शुरुआती झटका दिया। आयरलैंड के गेंदबाजों ने सधी हुई गेंदबाजी करते हुए भारतीय बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। डेब्यू कर रहे तेज गेंदबाज जय मूंदड़ा (2/26) ने अपनी टीम को शानदार शुरुआत दिलाई।

भारत के नियमित टी20 कप्तान के रूप में श्रेयस अय्यर की शुरुआत अच्छी नहीं रही। पहले ही मैच में उनकी कप्तानी के साथ-साथ बल्लेबाजी भी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी। अय्यर बड़ा शॉट लगाने की कोशिश में मैट होलार्ड की धीमी गेंद को सही तरीके से नहीं खेल पाए और गेंद हवा में चली गई, जहां जॉर्ज डॉकरेल ने आसान कैच लेकर उनकी पारी का अंत कर दिया।

ओवरटाइम से दूरी, HR तक सीधी शिकायत… Gen Z की नई वर्किंग स्टाइल पर इंटरनेट पर छिड़ी बहस

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर entrepreneur और content creator Sheetal Rijhwani की एक पोस्ट ने अचानक ऑनलाइन बड़ी चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने अपने पोस्ट में Gen Z कर्मचारियों के काम करने के तरीके को लेकर कुछ ऐसे दावे किए, जिन्होंने इंटरनेट पर नई बहस को जन्म दे दिया है। इस पोस्ट के सामने आते ही लोग दो अलग-अलग खेमों में बंट गए हैं  एक तरफ वो लोग हैं जो मानते हैं कि Gen Z वाकई में पुराने टॉक्सिक वर्क कल्चर को बदल रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ यूजर्स इसे जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया मामला मान रहे हैं।

इस चर्चा ने काम के घंटों, ऑफिस अनुशासन और वर्क-लाइफ बैलेंस जैसे मुद्दों को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। खास बात यह है कि यह बहस सिर्फ एक पोस्ट तक सीमित नहीं रही, बल्कि अलग-अलग पीढ़ियों के नजरिए को भी सामने लेकर आई है।

Gen Z का नया स्टाइल?

पोस्ट के अनुसार, कुछ Gen Z कर्मचारी ऑफिस में एक अलग ग्रुप बनाकर काम करते हैं। ये लोग तय समय पर ऑफिस छोड़ देते हैं, बिना जरूरत देर तक रुककर मैनेजर को खुश करने की कोशिश नहीं करते और वीकेंड पर वर्क कॉल्स भी अवॉइड करते हैं।

ऑफिस की गलत चीजों पर सीधा सवाल

दावा यह भी है कि अगर कोई मैनेजर गलत व्यवहार करता है, तो ये कर्मचारी सीधे HR तक शिकायत पहुंचाते हैं। बताया गया कि HR भी कई मामलों में कर्मचारियों का साथ देता है और मुद्दों को गंभीरता से लेता है।

AC बंद हुआ तो लिया बड़ा फैसला

पोस्ट का सबसे दिलचस्प हिस्सा वह था, जिसमें कहा गया कि ऑफिस की AC खराब होने पर Gen Z ग्रुप ने काम रोक दिया और पास के कैफे से काम करने का फैसला किया, जब तक समस्या ठीक नहीं हुई।

मिलेनियल्स झेल लेते हैं, हम नहीं

एक मजेदार मोड़ तब आया जब कहा गया कि मिलेनियल्स अक्सर ऐसी परिस्थितियों को सह लेते हैं, जबकि Gen Z इसे चैलेंज करते हैं। इसी बात पर पोस्ट में “Emotional damage” जैसा कैजुअल कमेंट भी किया गया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया

इस पोस्ट पर अलग-अलग पीढ़ियों के लोगों ने अपनी राय दी। कुछ ने कहा कि Gen Z सच में टॉक्सिक वर्क कल्चर को तोड़ रहा है, जबकि कुछ ने इसे जरूरत से ज्यादा सख्त रिएक्शन बताया।

नई और पुरानी सोच की टक्कर

कमेंट सेक्शन में Gen X और अन्य यूजर्स ने बताया कि नौकरी का माहौल समय के साथ बदलता रहा है जहां पहले लोग लंबे समय तक नौकरी में टिके रहते थे, वहीं अब कॉन्ट्रैक्ट और फ्लेक्सिबल वर्क कल्चर बढ़ रहा है। कई लोगों ने माना कि अब “ओवरवर्क = डेडिकेशन” वाली सोच पर सवाल उठना जरूरी है।

MasterChef India: MasterChef India: ये मेरा फील्ड है…, जब अक्षय कुमार से ज्यादा फीस लेने पर अड़ गए थे संजीव कपूर

MasterChef India: मशहूर शेफ संजीव कपूर भारत की कुकिंग की दुनिया में सबसे बड़े नामों में से एक हैं। हाल ही में हुई एक बातचीत में उन्होंने बताया कि जब देश में ‘मास्टरशेफ इंडिया’ कुकिंग रियलिटी शो पहली बार शुरू हुआ था, तो उन्हें इसे जज करने के लिए अप्रोच किया गया था। हालांकि, उन्होंने शो में शामिल होने से इनकार कर दिया क्योंकि उनकी एक अहम मांग पूरी नहीं हुई थी।

‘कलिनरी कल्चर’ से बात करते हुए संजीव ने बताया कि उन्होंने बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार से ज़्यादा फ़ीस की मांग की थी, भले ही वह सिर्फ 1 ज़्यादा हो। हालांकि, उनकी यह मांग पूरी नहीं हुई, इसलिए उन्होंने शो का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया।

उन्होंने कहा, “जब वे पहली बार मेरे पास आए, तो उन्होंने मेरी शर्त नहीं मानी। मेरी शर्त यह थी कि मुझे अक्षय कुमार से ज़्यादा फीस मिलनी चाहिए, भले ही वह सिर्फ़ एक रुपया ज़्यादा हो। यह पहला सीज़न था और मेरे अलावा कोई और यह काम नहीं कर सकता था। यह बात साफ थी। लेकिन जब वे मेरे पास आए, तो मैंने कहा, ‘एक शर्त है।’ वे सहमत नहीं हुए और मैं समझौता नहीं करना चाहता था। मैं अपने फैसले से खुश था।”

संजीव ने बताया कि मना करने के बावजूद, मेकर्स उन्हें शो के एक एपिसोड में आने के लिए कहते रहे, लेकिन वह अपने फैसले पर अड़े रहे। हालांकि, तीसरे सीजन तक प्रोड्यूसर्स ने संजीव से बात कर माना कि शो का फ़ॉर्मेट काम नहीं कर रहा था और उनसे शो को जज करने के लिए कहा। तीसरे सीज़न तक, उन्होंने असल में कहा, ‘सर, यह काम नहीं कर रहा है। हमें आपकी जरूरत है। आपको क्या लगता है कि हमें क्या करना चाहिए?’ मैंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि मैं कर पाऊंगा…’ उन्होंने जवाब दिया, ‘नहीं, हम वही करेंगे जो आप कहेंगे,’ और ऐसी ही बातें हुईं।”

अक्षय ने शेफ कुणाल कपूर और अजय चोपड़ा के साथ मिलकर रियलिटी शो के पहले दो सीजन जज किए थे। अक्षय के जाने के बाद संजीव तीसरे सीजन में इस फ़्रैंचाइजी से जुड़े और अपनी शर्तों पर शो का हिस्सा बने। संजीव ने इससे पहले एक साल पहले सिद्धार्थ कन्नन के साथ एक इंटरव्यू में इसी घटना के बारे में बात की थी। बातचीत के दौरान, उन्होंने बताया कि वह अक्षय से ज़्यादा पैसे लेने की बात पर इतने अड़े क्यों थे।

उन्होंने कहा, “अक्षय मेरे अच्छे दोस्त, बहुत काबिल इंसान और बेहतरीन प्रोफेशनल हैं। जब वे मेरे पास शो के लिए आए, तो मैंने कहा, ‘बहुत अच्छा, मैं बहुत खुश हूं, लेकिन मेरी एक ही शर्त है। आप उन्हें जो भी पैसे दे रहे हैं, मैं उससे एक रुपया ज़्यादा लूंगा।’ यह मेरा फील्ड है।”

UCC Bill West Bengal: पश्चिम बंगाल में सोमवार को UCC बिल होगा पेश, जानें इसमें क्या है खास?

UCC Bill West Bengal: पश्चिम बंगाल अब समान नागरिक संहिता (UCC) की दिशा में कदम बढ़ाने वाला अगला भाजपा शासित राज्य बनने जा रहा है। इस सोमवार को राज्य विधानसभा में UCC बिल पेश किया जाएगा। गौरतलब है कि भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में UCC लागू करने का वादा किया था और इसे नई सरकार की प्राथमिक प्राथमिकताओं में शामिल किया था।

बता दें कि पश्चिम बंगाल उन BJP-शासित राज्यों की बढ़ती सूची में शामिल हो गया है जिन्होंने UCC की दिशा में कदम उठाए हैं। जबकि उत्तराखंड ने इसे सबसे पहले लागू किया था, जिसके बाद असम, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात ने भी ऐसा किया।

यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) क्या है?

UCC का मकसद धर्म-आधारित पर्सनल कानूनों की जगह एक ऐसा एकसमान कानूनी ढांचा लाना है जो सभी नागरिकों के लिए – चाहे उनका धर्म कोई भी हो – शादी, तलाक, विरासत, संपत्ति के बंटवारे और गोद लेने जैसे सिविल मामलों को नियंत्रित करे।

इसके समर्थकों का तर्क है कि यह कानून के सामने समानता सुनिश्चित करता है और धर्म-आधारित पर्सनल कानूनों से होने वाले भेदभाव को खत्म करता है।

पश्चिम बंगाल के UCC में क्या-क्या शामिल होगा?

भाजपा द्वारा प्रस्तावित ढांचे के आधार पर, इस विधेयक में निम्नलिखित मुद्दों को संबोधित किए जाने की उम्मीद है:

क्षेत्रक्या बदलाव होंगे
विवाह (Marriage)सभी समुदायों के लिए विवाह की समान न्यूनतम कानूनी उम्र; सभी शादियों का अनिवार्य पंजीकरण
लैंगिक समानता (Gender Equality)बहुविवाह पर प्रतिबंध; महिलाओं को संपत्ति और उत्तराधिकार में समान अधिकार; धर्म की परवाह किए बिना समान कानूनी सुरक्षा
लिव-इन संबंध (Live-in Relationships)लिव-इन संबंधों का शुरुआत और अंत दोनों समय अनिवार्य पंजीकरण, निर्धारित प्राधिकरण के पास
तलाक (Divorce)तलाक की प्रक्रिया के लिए एक समान कानूनी ढांचा, जो धर्म-आधारित या पारंपरिक तरीकों की जगह लेगा; दोनों पक्षों को समान कानूनी अधिकार और राहत

पश्चिम बंगाल में यह बात खास तौर पर क्यों अहम है?

राजनीतिक नेताओं ने बताया है कि अल्पसंख्यक बहुल जिलों – मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तरी दिनाजपुर के कुछ हिस्सों में इसका बड़ा राजनीतिक और सामाजिक असर हो सकता है। पार्टी सूत्रों का दावा है कि अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं का एक वर्ग UCC प्रस्ताव का स्वागत कर रहा है। उनका कहना है कि इससे शादी, तलाक और विरासत से जुड़े उनके कानूनी अधिकार मजबूत हो सकते हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

भाजपा के लिए UCC एक लंबे समय से चला आ रहा वैचारिक और नीतिगत संकल्प है। अगर यह विधेयक पारित हो जाता है, तो इसे पश्चिम बंगाल की पहली भाजपा सरकार के सबसे महत्वपूर्ण विधायी सुधारों में से एक माना जाएगा।

इस पर राजनीतिक बहस कैसी हो सकती है?

समर्थक UCC को कानूनी एकरूपता और लैंगिक समानता की दिशा में एक कदम के तौर पर देखते हैं। आलोचकों के धर्म-आधारित पर्सनल लॉ और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों पर इसके संभावित असर को लेकर चिंता जताने की उम्मीद है। यह बहस पश्चिम बंगाल जैसे विविध जनसंख्या और राजनीतिक संरचना वाले राज्य में काफी तीखी हो सकती है।

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ICSSR Postdoctoral Fellowship 2026: पोस्टडॉक्टोरल और सीनियर फेलोशिप के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू, 21 जुलाई तक करें अप्लाई

ICSSR Postdoctoral Fellowship 2026: इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (ICSSR) में वित्त वर्ष 2026–2027 के लिए पोस्टडॉक्टरल फेलोशिप और सीनियर फेलोशिप स्कीम के लिए ऑनलाइन आवदेन शुरू हो गए हैं। इन दोनों फेलोशिप में शामिल होने के इच्छुक उम्मीदवार आईसीएसएसआर की आधिकारिक वेबसाइट पर 21 जुलाई, 2026 तक पंजीकरण करा सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन रहेगी। उम्मीदवारों को किसी भी फेलोशिप स्कीम के तहत कोई अलग रिसर्च प्रपोजल या हार्ड कॉपी जमा नहीं करनी होगी।

आईसीएसएसआर पोस्टडॉक्टरल फेलोशिप 2026 पात्रता मानदंड

आईसीएसएसआर पोस्टडॉक्टरल फेलोशिप 2026 के लिए सिर्फ भारतीय नागरिक ही आवेदन कर सकते हैं। इच्छुक उम्मीदवारों की अधिकतम उम्र आवेदन की आखिरी तारीख तक 45 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। SC, ST और बेंचमार्क डिसेबिलिटी वाले कैंडिडेट्स के लिए उम्र में पांच साल की छूट है।

आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार के पास PhD डिग्री होनी चाहिए, और उनकी रिसर्च काबिलियत पब्लिश हुए काम से दिखनी चाहिए। एप्लीकेंट्स का पब्लिकली फंडेड इंडियन यूनिवर्सिटी, डीम्ड यूनिवर्सिटी, अप्रूव्ड PhD प्रोग्राम वाले कॉलेज, ICSSR रिसर्च इंस्टीट्यूट, मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन से अप्रूव्ड नेशनल इंपॉर्टेंस का इंस्टीट्यूशन, या किसी सरकारी रिसर्च इंस्टीट्यूट से एफिलिएटेड होना जरूरी है। फेलोशिप को एफिलिएटिंग इंस्टीट्यूशन के जरिए एक सर्विंग सीनियर सोशल साइंटिस्ट की देखरेख में मैनेज किया जाएगा, जो एसोसिएट प्रोफेसर के रैंक से नीचे का न हो, आईसीएसएसआर से मंजूरी के अधीन।

चयन प्रक्रिया

पोस्टडॉक्टरल फेलोशिप स्कीम के तहत सिर्फ एक आवेदन किया जा सकता है, हालांकि उम्मीदवार दूसरी आईसीएसएसआर स्कीम के लिए अलग से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन का कई चरण में विषेय विशेषज्ञ के पैनल के सामने मूल्यांकन और प्रदर्शन होगा। अंतिम सुझाव वाजिब आईसीएसएसआई कमेटियों के सामने रखे जाएंगे। चयनित उम्मीदवार और उनसे जुड़े संस्थानों को मंजूरी के बाद अस्थायी अवॉर्ड लेटर मिलेंगे।

अनुभवी स्कॉलर्स के लिए सीनियर फेलोशिप

सीनियर फेलोशिप 45 से 70 साल के उन भारतीय शोधकर्ताओं के लिए है जिनके पास पीएचडी है और जिन्होंने सामाजित विज्ञान अध्ययन में अहम योगदान दिया है। इस स्कीम का मकसद वरिष्ठ शोधकर्ताओं को पहचाने गए थीम पर पूर्णकालिक शोध करने और सोशल और पॉलिसी चैलेंजेस की एविडेंस-बेस्ड समझ में योगदान देने में मदद करना है।

आवेदन प्रक्रिया

आवेदकों को निर्धारित समय सीमा के भीतक आईसीएसएसआर पोर्टल के जरिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। संस्थानों को सिर्फ उन उम्मीदवारों के आवेदन आगे बढ़ाने होंगे जो आईसीएसएसआर दिशानिर्देशों के तहत तय पात्रता मानदंड को पूरा करते हैं।

फेलोशिप का समय

यह फेलोशिप दो साल के लिए पूर्णकालिक शोध कार्य है, जिसमें एक्सटेंशन का कोई प्रावधान नहीं है। चयनित शोधकर्ताओं को शिक्षा मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार, हर महीने 31,000 रुपये के साथ-साथ सालाना 25,000 रुपये का कंटिंजेंसी ग्रांट मिलेगा।

फेलोशिप के दौरान, शोधकर्ताओं को अपने रिसर्च थीम से जुड़े पीयर-रिव्यूड जर्नल्स में कम से कम दो रिसर्च पेपर पब्लिश करने होंगे और आईसीएसएसआर समर्थन को मानना होगा। कार्यकाल के आखिर में, उन्हें एक किताब जितनी लंबी फाइनल रिपोर्ट, 3,000 से 4,000 शब्दों की समरी, पब्लिश हुए रिसर्च पेपर और एक प्लेजरिज्म रिपोर्ट जमा करनी होगी, जिसमें 10% से ज्यादा का सिमिलैरिटी इंडेक्स न दिखे।

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Ketan Agarwal Murder Case: ‘अगर उसने हमें बताया होता…’: केतन अग्रवाल मर्डर केस में सिया के भाई ने किया सनसनीखेज दावा

Ketan Agarwal Murder Case: केतन अग्रवाल की हत्या की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस मामले में नए खुलासे सामने आ रहे हैं। अब पीड़ित और आरोपी सिया गोयल के परिवार के बयानों ने इस केस को नया मोड़ दे दिया है। पुलिस पूछताछ के दौरान सिया के बड़े भाई साहिल गोयल ने बताया कि परिवार को कभी यह नहीं बताया गया था कि सिया अपनी शादी से खुश नहीं थी। CNN-News18 के सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान पुलिस ने साहिल से पूछा कि क्या परिवार को पता था कि सिया इस शादी से खुश नहीं थी या उसने इस रिश्ते पर कोई आपत्ति जताई थी।

इसके जवाब में, साहिल ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि सिया ने केतन से शादी करने को लेकर कभी कोई नाराजगी या आपत्ति नहीं जताई थी। उसने यह भी दावा किया कि अगर सिया ने अपनी चिंताएं बताई होतीं, तो परिवार उसकी शादी सह-आरोपी चेतन चौधरी से कराने के लिए मान जाता।

साहिल ने जांचकर्ताओं को बताया, “परिवार को चेतन से क्या दिक्कत होगी? वह भी उसी समुदाय से है, एक कारोबारी परिवार से आता है और हमारी तरह ही अच्छी-खासी आर्थिक स्थिति वाला है।”

केतन अग्रवाल के परिवार ने भी ऐसी ही बातें कही हैं। उनके पिता ने जांच करने वालों को बताया कि उन्हें भी इस बात की जानकारी नहीं थी कि सिया कथित तौर पर उनके बेटे से शादी नहीं करना चाहती थी।

खबरों के मुताबिक, केतन के पिता ने कहा, “हम एक अच्छे-खासे परिवार से हैं। हम अपने बेटे के लिए कई दूसरी लड़कियां ढूंढ सकते थे।” उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि कभी ऐसा कोई संकेत नहीं मिला जिससे पता चले कि सिया शादी के खिलाफ थी।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिया गोयल ने कथित तौर पर जांच करने वालों को बताया था कि अपने मंगेतर केतन अग्रवाल को “मार डालना”, परिवार को यह बताने से “आसान” था कि वह उससे शादी नहीं करना चाहती।

पुलिस कस्टडी में पूछताछ के दौरान, सिया ने कथित तौर पर कहा कि उसने शादी न करने की अपनी इच्छा के बारे में परिवार को इसलिए नहीं बताया क्योंकि वह उन्हें दुख नहीं पहुंचाना चाहती थी।

डिलीट चैट और 17 जून की कैफे मीटिंग भी जांच के दायरे में

जांचकर्ताओं ने डिजिटल सबूतों को भी जांच में शामिल किया है, क्योंकि कथित तौर पर पता चला है कि दोनों आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन से बातचीत और ऑनलाइन एक्टिविटी के रिकॉर्ड हटा दिए थे।

फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स अभी डिवाइस से मिले डिलीट किए गए WhatsApp मैसेज, Instagram पर हुई बातचीत और दूसरे डेटा की जांच कर रहे हैं। पुलिस को शक है कि लोहगढ़ की घटना से पहले और बाद में, दोनों ही समय कुछ बातचीत मिटाई गई थी।

सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने अपनी बातचीत छिपाने के लिए रीसायकल बिन खाली करने और डिलीट की गई फ़ाइलों के निशान मिटाने जैसे अतिरिक्त कदम उठाए थे। इस वजह से जांचकर्ताओं को बातचीत की कड़ियों को जोड़ने के लिए फ़ोरेंसिक तकनीकों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

इस बीच, पुलिस सिया गोयल और चेतन चौधरी के बीच हुई उस मुलाकात की भी जांच कर रही है जो केतन अग्रवाल की मौत से एक दिन पहले हुई थी। जांच करने वालों ने बताया कि दोनों 17 जून को पुणे के लुल्ला नगर इलाके के एक कैफे में मिले थे और वहां शाम 4.30 बजे से 5.30 बजे के बीच लगभग एक घंटा बिताया था। अधिकारी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या उस मुलाकात के दौरान कथित अपराध के बारे में कोई बातचीत हुई थी।

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Prabhjeet Singh: कौन हैं OpenAI के India MD प्रभजीत सिंह, कंधों पर ChatGPT मेकर की ग्रोथ को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी

ChatGPT मेकर OpenAI ने प्रभजीत सिंह को भारत के लिए अपना मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया है। वह सितंबर 2026 से कंपनी के साथ जुड़ेंगे और भारत में OpenAI के सबसे सीनियर एग्जीक्यूटिव होंगे। प्रभजीत सिंह अभी तक उबर इंडिया एंड साउथ एशिया प्रेसिडेंट थे। कंपनी में एक दशक से ज्यादा समय बिताने के बाद उन्होंने उबर का साथ छोड़ दिया है। उबर में उनकी जगह कौन लेगा, इसकी घोषणा अभी नहीं हुई है।

OpenAI में वह एशिया पैसिफिक (APAC) के मैनेजिंग डायरेक्टर किरण मणि को रिपोर्ट करेंगे और देश में कंज्यूमर ग्रोथ, एंटरप्राइज अडॉप्शन, स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप, रेगुलेटरी मामलों और बिजनेस ऑपरेशन्स जैसे कामकाज संभालेंगे। OpenAI में भारत के लिए मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर सिंह के कंधों पर कंज्यूमर और एंटरप्राइज दोनों सेगमेंट में OpenAI की ग्रोथ को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। OpenAI का कहना है कि सिंह ज्यादा कंज्यूमर्स, एंटरप्राइज, शैक्षणिक संस्थानों और पब्लिक सेक्टर संगठनों को AI टेक्नोलॉजी अपनाने में मदद करने पर ध्यान देंगे।

IIT खड़गपुर और IIM-अहमदाबाद के रह चुके हैं छात्र

प्रभजीत सिंह IIT खड़गपुर और IIM-अहमदाबाद के छात्र रह चुके हैं। वह अगस्त 2015 में मैकिन्से एंड कंपनी से उबर में शामिल हुए थे। जुलाई 2020 में उन्हें भारत और साउथ एशिया के लिए कंपनी का प्रेसिडेंट नियुक्त किया गया। सिंह को कॉर्पोरेट लीडरशिप में उनकी शानदार उपलब्धियों के लिए IIM-अहमदाबाद से ‘यंग एलुमनाई अचीवर्स अवार्ड 2022’ मिला था।

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उबर में क्या देखते थे

उबर इंडिया एंड साउथ एशिया प्रेसिडेंट की भूमिका में प्रभजीत सिंह पर भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका में Uber के मोबिलिटी बिजनेस की जिम्मेदारी थी। उन्होंने इस क्षेत्र में Uber के विकास और विस्तार के अगले चरण का नेतृत्व किया।

OpenAI के लिए भारत क्यों अहम

यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब OpenAI भारत में अपना निवेश बढ़ा रही है। भारत ChatGPT के लिए सबसे बड़े और तेजी से बढ़ने वाले बाजारों में से एक बन गया है, जिसे कंज्यूमर्स, स्टार्टअप्स, एंटरप्राइज, डेवलपर्स और शैक्षणिक संस्थानों में बड़े पैमाने पर अपनाया जा रहा है। कंपनी ने नवंबर 2025 में नई दिल्ली में अपना पहला ऑफिस खोला था और देश भर में तेजी से पार्टनरशिप कर रही है।

इस फंड ने 10 साल में 10 हजार के मंथली निवेश को 33.87 लाख रुपये बनाया

एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी का मिडकैप फंड अपने 20वें साल में प्रवेश कर लिया है। इसका एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है। इस स्कीम के डायरेक्ट प्लान के ग्रोथ ऑप्शन ने बीते 20 सालों में करीब 20 फीसदी कंपाउंडेंड एनुअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) से रिटर्न दिया है। लंबी अवधि में इतना ज्यादा रिटर्न बहुत कम फंडों ने दिया है।

एक लाख का निवेश 10 साल में 5.68 लाख बना

अगर आपने इस स्कीम में 10 साल पहले एक लाख रुपये का एकमुश्त निवेश किया होता तो आज आपका पैसा बढ़कर 5.68 लाख रुपये हो गया होता। अगर आपने इस स्कीम में 10 साल पहले मंथली 10,000 रुपये का निवेश शुरू किया होता तो आज आपका पैसा बढ़कर 33,87,433 लाख रुपये हो गया होता।

फंड मिडकैप कंपनियों के शेयरों में निवेश करता है

यह फंड मुख्य रूप से मिडकैप कंपनियों के शेयरों में निवेश करता है। मिडकैप कंपनियों में लंबी अवधि में ग्रोथ की संभावना लॉर्जकैप कंपनियों के मुकाबले ज्यादा होती है। हालांकि, मिडकैप शेयरों में लार्जकैप के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव दिखता है। एनालिस्ट्स का कहना है कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार हो रहा है। घरेलू कंजम्प्शन बढ़ रहा है। ऐसे में मिडकैप कंपनियों की ग्रोथ की अच्छी संभावना है।

निवेश में बॉटम-अप स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल

एचडीएफसी मिडकैप स्कीम के डिसक्लोजर के मुताबिक, यह फंड निवेश में बॉटम-अप स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल करता है। स्कीम का फोकस उन मिडकैप कंपनियों के शेयरों में निवेश पर होता है, जिनका बिजनेस मॉडल ठोस है, मैनेजमेंट अच्छा है, बाजार में कॉम्पटिटिव पोजीशन है और वैल्यूएशन सही है। इस स्कीम का एयूएम 31 मई, 2026 को 97,350 करोड़ रुपये था।

लंबी अवधि में शानदार रिटर्न जेनरेट करना मकसद

एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ नवनीत मुनोत ने कहा कि इस मिडकैप फंड का मकसद लंबी अवधि में इनवेस्टर्स के लिए शानदार रिटर्न जेनरेट करना है। इस स्कीम के फंड मैनेजर चिराग सितलवाड़ हैं। उन्हें निवेश का व्यापक अनुभव है। एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी के कई फंडों ने लंबी अवधि में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिए हैं।

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क्या आपको निवेश करना चाहिए?

फाइनेंशियल एडवाइजर का कहना है कि इनवेस्टर्स लंबी अवधि के लिए मिडकैप फंड्स में निवेश कर सकते हैं। इसकी वजह यह है कि लंबी अवधि में शेयरों के रिटर्न पर उतार-चढ़ाव का ज्यादा असर नहीं पड़ता है। मिडकैप कंपनियों की ग्रोथ की संभावना अच्छी होती है। कई मिडकैप कंपनियां बाद में लार्जकैप कैटेगरी में आ जाती है। हालांकि, किसी फंड के पिछले रिटर्न को भविष्य में उसके रिटर्न की गारंटी नहीं माना जा सकता। अगर आप इस फंड में निवेश करना चाहते हैं तो आपको अपने फाइनेंशियल एडवाइजर की राय लेनी चाहिए।

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