MasterChef India: MasterChef India: ये मेरा फील्ड है…, जब अक्षय कुमार से ज्यादा फीस लेने पर अड़ गए थे संजीव कपूर

MasterChef India: मशहूर शेफ संजीव कपूर भारत की कुकिंग की दुनिया में सबसे बड़े नामों में से एक हैं। हाल ही में हुई एक बातचीत में उन्होंने बताया कि जब देश में ‘मास्टरशेफ इंडिया’ कुकिंग रियलिटी शो पहली बार शुरू हुआ था, तो उन्हें इसे जज करने के लिए अप्रोच किया गया था। हालांकि, उन्होंने शो में शामिल होने से इनकार कर दिया क्योंकि उनकी एक अहम मांग पूरी नहीं हुई थी।

‘कलिनरी कल्चर’ से बात करते हुए संजीव ने बताया कि उन्होंने बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार से ज़्यादा फ़ीस की मांग की थी, भले ही वह सिर्फ 1 ज़्यादा हो। हालांकि, उनकी यह मांग पूरी नहीं हुई, इसलिए उन्होंने शो का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया।

उन्होंने कहा, “जब वे पहली बार मेरे पास आए, तो उन्होंने मेरी शर्त नहीं मानी। मेरी शर्त यह थी कि मुझे अक्षय कुमार से ज़्यादा फीस मिलनी चाहिए, भले ही वह सिर्फ़ एक रुपया ज़्यादा हो। यह पहला सीज़न था और मेरे अलावा कोई और यह काम नहीं कर सकता था। यह बात साफ थी। लेकिन जब वे मेरे पास आए, तो मैंने कहा, ‘एक शर्त है।’ वे सहमत नहीं हुए और मैं समझौता नहीं करना चाहता था। मैं अपने फैसले से खुश था।”

संजीव ने बताया कि मना करने के बावजूद, मेकर्स उन्हें शो के एक एपिसोड में आने के लिए कहते रहे, लेकिन वह अपने फैसले पर अड़े रहे। हालांकि, तीसरे सीजन तक प्रोड्यूसर्स ने संजीव से बात कर माना कि शो का फ़ॉर्मेट काम नहीं कर रहा था और उनसे शो को जज करने के लिए कहा। तीसरे सीज़न तक, उन्होंने असल में कहा, ‘सर, यह काम नहीं कर रहा है। हमें आपकी जरूरत है। आपको क्या लगता है कि हमें क्या करना चाहिए?’ मैंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि मैं कर पाऊंगा…’ उन्होंने जवाब दिया, ‘नहीं, हम वही करेंगे जो आप कहेंगे,’ और ऐसी ही बातें हुईं।”

अक्षय ने शेफ कुणाल कपूर और अजय चोपड़ा के साथ मिलकर रियलिटी शो के पहले दो सीजन जज किए थे। अक्षय के जाने के बाद संजीव तीसरे सीजन में इस फ़्रैंचाइजी से जुड़े और अपनी शर्तों पर शो का हिस्सा बने। संजीव ने इससे पहले एक साल पहले सिद्धार्थ कन्नन के साथ एक इंटरव्यू में इसी घटना के बारे में बात की थी। बातचीत के दौरान, उन्होंने बताया कि वह अक्षय से ज़्यादा पैसे लेने की बात पर इतने अड़े क्यों थे।

उन्होंने कहा, “अक्षय मेरे अच्छे दोस्त, बहुत काबिल इंसान और बेहतरीन प्रोफेशनल हैं। जब वे मेरे पास शो के लिए आए, तो मैंने कहा, ‘बहुत अच्छा, मैं बहुत खुश हूं, लेकिन मेरी एक ही शर्त है। आप उन्हें जो भी पैसे दे रहे हैं, मैं उससे एक रुपया ज़्यादा लूंगा।’ यह मेरा फील्ड है।”

UCC Bill West Bengal: पश्चिम बंगाल में सोमवार को UCC बिल होगा पेश, जानें इसमें क्या है खास?

UCC Bill West Bengal: पश्चिम बंगाल अब समान नागरिक संहिता (UCC) की दिशा में कदम बढ़ाने वाला अगला भाजपा शासित राज्य बनने जा रहा है। इस सोमवार को राज्य विधानसभा में UCC बिल पेश किया जाएगा। गौरतलब है कि भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में UCC लागू करने का वादा किया था और इसे नई सरकार की प्राथमिक प्राथमिकताओं में शामिल किया था।

बता दें कि पश्चिम बंगाल उन BJP-शासित राज्यों की बढ़ती सूची में शामिल हो गया है जिन्होंने UCC की दिशा में कदम उठाए हैं। जबकि उत्तराखंड ने इसे सबसे पहले लागू किया था, जिसके बाद असम, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात ने भी ऐसा किया।

यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) क्या है?

UCC का मकसद धर्म-आधारित पर्सनल कानूनों की जगह एक ऐसा एकसमान कानूनी ढांचा लाना है जो सभी नागरिकों के लिए – चाहे उनका धर्म कोई भी हो – शादी, तलाक, विरासत, संपत्ति के बंटवारे और गोद लेने जैसे सिविल मामलों को नियंत्रित करे।

इसके समर्थकों का तर्क है कि यह कानून के सामने समानता सुनिश्चित करता है और धर्म-आधारित पर्सनल कानूनों से होने वाले भेदभाव को खत्म करता है।

पश्चिम बंगाल के UCC में क्या-क्या शामिल होगा?

भाजपा द्वारा प्रस्तावित ढांचे के आधार पर, इस विधेयक में निम्नलिखित मुद्दों को संबोधित किए जाने की उम्मीद है:

क्षेत्रक्या बदलाव होंगे
विवाह (Marriage)सभी समुदायों के लिए विवाह की समान न्यूनतम कानूनी उम्र; सभी शादियों का अनिवार्य पंजीकरण
लैंगिक समानता (Gender Equality)बहुविवाह पर प्रतिबंध; महिलाओं को संपत्ति और उत्तराधिकार में समान अधिकार; धर्म की परवाह किए बिना समान कानूनी सुरक्षा
लिव-इन संबंध (Live-in Relationships)लिव-इन संबंधों का शुरुआत और अंत दोनों समय अनिवार्य पंजीकरण, निर्धारित प्राधिकरण के पास
तलाक (Divorce)तलाक की प्रक्रिया के लिए एक समान कानूनी ढांचा, जो धर्म-आधारित या पारंपरिक तरीकों की जगह लेगा; दोनों पक्षों को समान कानूनी अधिकार और राहत

पश्चिम बंगाल में यह बात खास तौर पर क्यों अहम है?

राजनीतिक नेताओं ने बताया है कि अल्पसंख्यक बहुल जिलों – मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तरी दिनाजपुर के कुछ हिस्सों में इसका बड़ा राजनीतिक और सामाजिक असर हो सकता है। पार्टी सूत्रों का दावा है कि अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं का एक वर्ग UCC प्रस्ताव का स्वागत कर रहा है। उनका कहना है कि इससे शादी, तलाक और विरासत से जुड़े उनके कानूनी अधिकार मजबूत हो सकते हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

भाजपा के लिए UCC एक लंबे समय से चला आ रहा वैचारिक और नीतिगत संकल्प है। अगर यह विधेयक पारित हो जाता है, तो इसे पश्चिम बंगाल की पहली भाजपा सरकार के सबसे महत्वपूर्ण विधायी सुधारों में से एक माना जाएगा।

इस पर राजनीतिक बहस कैसी हो सकती है?

समर्थक UCC को कानूनी एकरूपता और लैंगिक समानता की दिशा में एक कदम के तौर पर देखते हैं। आलोचकों के धर्म-आधारित पर्सनल लॉ और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों पर इसके संभावित असर को लेकर चिंता जताने की उम्मीद है। यह बहस पश्चिम बंगाल जैसे विविध जनसंख्या और राजनीतिक संरचना वाले राज्य में काफी तीखी हो सकती है।

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ICSSR Postdoctoral Fellowship 2026: पोस्टडॉक्टोरल और सीनियर फेलोशिप के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू, 21 जुलाई तक करें अप्लाई

ICSSR Postdoctoral Fellowship 2026: इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (ICSSR) में वित्त वर्ष 2026–2027 के लिए पोस्टडॉक्टरल फेलोशिप और सीनियर फेलोशिप स्कीम के लिए ऑनलाइन आवदेन शुरू हो गए हैं। इन दोनों फेलोशिप में शामिल होने के इच्छुक उम्मीदवार आईसीएसएसआर की आधिकारिक वेबसाइट पर 21 जुलाई, 2026 तक पंजीकरण करा सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन रहेगी। उम्मीदवारों को किसी भी फेलोशिप स्कीम के तहत कोई अलग रिसर्च प्रपोजल या हार्ड कॉपी जमा नहीं करनी होगी।

आईसीएसएसआर पोस्टडॉक्टरल फेलोशिप 2026 पात्रता मानदंड

आईसीएसएसआर पोस्टडॉक्टरल फेलोशिप 2026 के लिए सिर्फ भारतीय नागरिक ही आवेदन कर सकते हैं। इच्छुक उम्मीदवारों की अधिकतम उम्र आवेदन की आखिरी तारीख तक 45 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। SC, ST और बेंचमार्क डिसेबिलिटी वाले कैंडिडेट्स के लिए उम्र में पांच साल की छूट है।

आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार के पास PhD डिग्री होनी चाहिए, और उनकी रिसर्च काबिलियत पब्लिश हुए काम से दिखनी चाहिए। एप्लीकेंट्स का पब्लिकली फंडेड इंडियन यूनिवर्सिटी, डीम्ड यूनिवर्सिटी, अप्रूव्ड PhD प्रोग्राम वाले कॉलेज, ICSSR रिसर्च इंस्टीट्यूट, मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन से अप्रूव्ड नेशनल इंपॉर्टेंस का इंस्टीट्यूशन, या किसी सरकारी रिसर्च इंस्टीट्यूट से एफिलिएटेड होना जरूरी है। फेलोशिप को एफिलिएटिंग इंस्टीट्यूशन के जरिए एक सर्विंग सीनियर सोशल साइंटिस्ट की देखरेख में मैनेज किया जाएगा, जो एसोसिएट प्रोफेसर के रैंक से नीचे का न हो, आईसीएसएसआर से मंजूरी के अधीन।

चयन प्रक्रिया

पोस्टडॉक्टरल फेलोशिप स्कीम के तहत सिर्फ एक आवेदन किया जा सकता है, हालांकि उम्मीदवार दूसरी आईसीएसएसआर स्कीम के लिए अलग से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन का कई चरण में विषेय विशेषज्ञ के पैनल के सामने मूल्यांकन और प्रदर्शन होगा। अंतिम सुझाव वाजिब आईसीएसएसआई कमेटियों के सामने रखे जाएंगे। चयनित उम्मीदवार और उनसे जुड़े संस्थानों को मंजूरी के बाद अस्थायी अवॉर्ड लेटर मिलेंगे।

अनुभवी स्कॉलर्स के लिए सीनियर फेलोशिप

सीनियर फेलोशिप 45 से 70 साल के उन भारतीय शोधकर्ताओं के लिए है जिनके पास पीएचडी है और जिन्होंने सामाजित विज्ञान अध्ययन में अहम योगदान दिया है। इस स्कीम का मकसद वरिष्ठ शोधकर्ताओं को पहचाने गए थीम पर पूर्णकालिक शोध करने और सोशल और पॉलिसी चैलेंजेस की एविडेंस-बेस्ड समझ में योगदान देने में मदद करना है।

आवेदन प्रक्रिया

आवेदकों को निर्धारित समय सीमा के भीतक आईसीएसएसआर पोर्टल के जरिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। संस्थानों को सिर्फ उन उम्मीदवारों के आवेदन आगे बढ़ाने होंगे जो आईसीएसएसआर दिशानिर्देशों के तहत तय पात्रता मानदंड को पूरा करते हैं।

फेलोशिप का समय

यह फेलोशिप दो साल के लिए पूर्णकालिक शोध कार्य है, जिसमें एक्सटेंशन का कोई प्रावधान नहीं है। चयनित शोधकर्ताओं को शिक्षा मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार, हर महीने 31,000 रुपये के साथ-साथ सालाना 25,000 रुपये का कंटिंजेंसी ग्रांट मिलेगा।

फेलोशिप के दौरान, शोधकर्ताओं को अपने रिसर्च थीम से जुड़े पीयर-रिव्यूड जर्नल्स में कम से कम दो रिसर्च पेपर पब्लिश करने होंगे और आईसीएसएसआर समर्थन को मानना होगा। कार्यकाल के आखिर में, उन्हें एक किताब जितनी लंबी फाइनल रिपोर्ट, 3,000 से 4,000 शब्दों की समरी, पब्लिश हुए रिसर्च पेपर और एक प्लेजरिज्म रिपोर्ट जमा करनी होगी, जिसमें 10% से ज्यादा का सिमिलैरिटी इंडेक्स न दिखे।

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Ketan Agarwal Murder Case: ‘अगर उसने हमें बताया होता…’: केतन अग्रवाल मर्डर केस में सिया के भाई ने किया सनसनीखेज दावा

Ketan Agarwal Murder Case: केतन अग्रवाल की हत्या की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस मामले में नए खुलासे सामने आ रहे हैं। अब पीड़ित और आरोपी सिया गोयल के परिवार के बयानों ने इस केस को नया मोड़ दे दिया है। पुलिस पूछताछ के दौरान सिया के बड़े भाई साहिल गोयल ने बताया कि परिवार को कभी यह नहीं बताया गया था कि सिया अपनी शादी से खुश नहीं थी। CNN-News18 के सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान पुलिस ने साहिल से पूछा कि क्या परिवार को पता था कि सिया इस शादी से खुश नहीं थी या उसने इस रिश्ते पर कोई आपत्ति जताई थी।

इसके जवाब में, साहिल ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि सिया ने केतन से शादी करने को लेकर कभी कोई नाराजगी या आपत्ति नहीं जताई थी। उसने यह भी दावा किया कि अगर सिया ने अपनी चिंताएं बताई होतीं, तो परिवार उसकी शादी सह-आरोपी चेतन चौधरी से कराने के लिए मान जाता।

साहिल ने जांचकर्ताओं को बताया, “परिवार को चेतन से क्या दिक्कत होगी? वह भी उसी समुदाय से है, एक कारोबारी परिवार से आता है और हमारी तरह ही अच्छी-खासी आर्थिक स्थिति वाला है।”

केतन अग्रवाल के परिवार ने भी ऐसी ही बातें कही हैं। उनके पिता ने जांच करने वालों को बताया कि उन्हें भी इस बात की जानकारी नहीं थी कि सिया कथित तौर पर उनके बेटे से शादी नहीं करना चाहती थी।

खबरों के मुताबिक, केतन के पिता ने कहा, “हम एक अच्छे-खासे परिवार से हैं। हम अपने बेटे के लिए कई दूसरी लड़कियां ढूंढ सकते थे।” उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि कभी ऐसा कोई संकेत नहीं मिला जिससे पता चले कि सिया शादी के खिलाफ थी।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिया गोयल ने कथित तौर पर जांच करने वालों को बताया था कि अपने मंगेतर केतन अग्रवाल को “मार डालना”, परिवार को यह बताने से “आसान” था कि वह उससे शादी नहीं करना चाहती।

पुलिस कस्टडी में पूछताछ के दौरान, सिया ने कथित तौर पर कहा कि उसने शादी न करने की अपनी इच्छा के बारे में परिवार को इसलिए नहीं बताया क्योंकि वह उन्हें दुख नहीं पहुंचाना चाहती थी।

डिलीट चैट और 17 जून की कैफे मीटिंग भी जांच के दायरे में

जांचकर्ताओं ने डिजिटल सबूतों को भी जांच में शामिल किया है, क्योंकि कथित तौर पर पता चला है कि दोनों आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन से बातचीत और ऑनलाइन एक्टिविटी के रिकॉर्ड हटा दिए थे।

फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स अभी डिवाइस से मिले डिलीट किए गए WhatsApp मैसेज, Instagram पर हुई बातचीत और दूसरे डेटा की जांच कर रहे हैं। पुलिस को शक है कि लोहगढ़ की घटना से पहले और बाद में, दोनों ही समय कुछ बातचीत मिटाई गई थी।

सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने अपनी बातचीत छिपाने के लिए रीसायकल बिन खाली करने और डिलीट की गई फ़ाइलों के निशान मिटाने जैसे अतिरिक्त कदम उठाए थे। इस वजह से जांचकर्ताओं को बातचीत की कड़ियों को जोड़ने के लिए फ़ोरेंसिक तकनीकों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

इस बीच, पुलिस सिया गोयल और चेतन चौधरी के बीच हुई उस मुलाकात की भी जांच कर रही है जो केतन अग्रवाल की मौत से एक दिन पहले हुई थी। जांच करने वालों ने बताया कि दोनों 17 जून को पुणे के लुल्ला नगर इलाके के एक कैफे में मिले थे और वहां शाम 4.30 बजे से 5.30 बजे के बीच लगभग एक घंटा बिताया था। अधिकारी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या उस मुलाकात के दौरान कथित अपराध के बारे में कोई बातचीत हुई थी।

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Prabhjeet Singh: कौन हैं OpenAI के India MD प्रभजीत सिंह, कंधों पर ChatGPT मेकर की ग्रोथ को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी

ChatGPT मेकर OpenAI ने प्रभजीत सिंह को भारत के लिए अपना मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया है। वह सितंबर 2026 से कंपनी के साथ जुड़ेंगे और भारत में OpenAI के सबसे सीनियर एग्जीक्यूटिव होंगे। प्रभजीत सिंह अभी तक उबर इंडिया एंड साउथ एशिया प्रेसिडेंट थे। कंपनी में एक दशक से ज्यादा समय बिताने के बाद उन्होंने उबर का साथ छोड़ दिया है। उबर में उनकी जगह कौन लेगा, इसकी घोषणा अभी नहीं हुई है।

OpenAI में वह एशिया पैसिफिक (APAC) के मैनेजिंग डायरेक्टर किरण मणि को रिपोर्ट करेंगे और देश में कंज्यूमर ग्रोथ, एंटरप्राइज अडॉप्शन, स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप, रेगुलेटरी मामलों और बिजनेस ऑपरेशन्स जैसे कामकाज संभालेंगे। OpenAI में भारत के लिए मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर सिंह के कंधों पर कंज्यूमर और एंटरप्राइज दोनों सेगमेंट में OpenAI की ग्रोथ को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। OpenAI का कहना है कि सिंह ज्यादा कंज्यूमर्स, एंटरप्राइज, शैक्षणिक संस्थानों और पब्लिक सेक्टर संगठनों को AI टेक्नोलॉजी अपनाने में मदद करने पर ध्यान देंगे।

IIT खड़गपुर और IIM-अहमदाबाद के रह चुके हैं छात्र

प्रभजीत सिंह IIT खड़गपुर और IIM-अहमदाबाद के छात्र रह चुके हैं। वह अगस्त 2015 में मैकिन्से एंड कंपनी से उबर में शामिल हुए थे। जुलाई 2020 में उन्हें भारत और साउथ एशिया के लिए कंपनी का प्रेसिडेंट नियुक्त किया गया। सिंह को कॉर्पोरेट लीडरशिप में उनकी शानदार उपलब्धियों के लिए IIM-अहमदाबाद से ‘यंग एलुमनाई अचीवर्स अवार्ड 2022’ मिला था।

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उबर में क्या देखते थे

उबर इंडिया एंड साउथ एशिया प्रेसिडेंट की भूमिका में प्रभजीत सिंह पर भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका में Uber के मोबिलिटी बिजनेस की जिम्मेदारी थी। उन्होंने इस क्षेत्र में Uber के विकास और विस्तार के अगले चरण का नेतृत्व किया।

OpenAI के लिए भारत क्यों अहम

यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब OpenAI भारत में अपना निवेश बढ़ा रही है। भारत ChatGPT के लिए सबसे बड़े और तेजी से बढ़ने वाले बाजारों में से एक बन गया है, जिसे कंज्यूमर्स, स्टार्टअप्स, एंटरप्राइज, डेवलपर्स और शैक्षणिक संस्थानों में बड़े पैमाने पर अपनाया जा रहा है। कंपनी ने नवंबर 2025 में नई दिल्ली में अपना पहला ऑफिस खोला था और देश भर में तेजी से पार्टनरशिप कर रही है।

इस फंड ने 10 साल में 10 हजार के मंथली निवेश को 33.87 लाख रुपये बनाया

एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी का मिडकैप फंड अपने 20वें साल में प्रवेश कर लिया है। इसका एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है। इस स्कीम के डायरेक्ट प्लान के ग्रोथ ऑप्शन ने बीते 20 सालों में करीब 20 फीसदी कंपाउंडेंड एनुअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) से रिटर्न दिया है। लंबी अवधि में इतना ज्यादा रिटर्न बहुत कम फंडों ने दिया है।

एक लाख का निवेश 10 साल में 5.68 लाख बना

अगर आपने इस स्कीम में 10 साल पहले एक लाख रुपये का एकमुश्त निवेश किया होता तो आज आपका पैसा बढ़कर 5.68 लाख रुपये हो गया होता। अगर आपने इस स्कीम में 10 साल पहले मंथली 10,000 रुपये का निवेश शुरू किया होता तो आज आपका पैसा बढ़कर 33,87,433 लाख रुपये हो गया होता।

फंड मिडकैप कंपनियों के शेयरों में निवेश करता है

यह फंड मुख्य रूप से मिडकैप कंपनियों के शेयरों में निवेश करता है। मिडकैप कंपनियों में लंबी अवधि में ग्रोथ की संभावना लॉर्जकैप कंपनियों के मुकाबले ज्यादा होती है। हालांकि, मिडकैप शेयरों में लार्जकैप के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव दिखता है। एनालिस्ट्स का कहना है कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार हो रहा है। घरेलू कंजम्प्शन बढ़ रहा है। ऐसे में मिडकैप कंपनियों की ग्रोथ की अच्छी संभावना है।

निवेश में बॉटम-अप स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल

एचडीएफसी मिडकैप स्कीम के डिसक्लोजर के मुताबिक, यह फंड निवेश में बॉटम-अप स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल करता है। स्कीम का फोकस उन मिडकैप कंपनियों के शेयरों में निवेश पर होता है, जिनका बिजनेस मॉडल ठोस है, मैनेजमेंट अच्छा है, बाजार में कॉम्पटिटिव पोजीशन है और वैल्यूएशन सही है। इस स्कीम का एयूएम 31 मई, 2026 को 97,350 करोड़ रुपये था।

लंबी अवधि में शानदार रिटर्न जेनरेट करना मकसद

एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ नवनीत मुनोत ने कहा कि इस मिडकैप फंड का मकसद लंबी अवधि में इनवेस्टर्स के लिए शानदार रिटर्न जेनरेट करना है। इस स्कीम के फंड मैनेजर चिराग सितलवाड़ हैं। उन्हें निवेश का व्यापक अनुभव है। एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी के कई फंडों ने लंबी अवधि में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिए हैं।

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क्या आपको निवेश करना चाहिए?

फाइनेंशियल एडवाइजर का कहना है कि इनवेस्टर्स लंबी अवधि के लिए मिडकैप फंड्स में निवेश कर सकते हैं। इसकी वजह यह है कि लंबी अवधि में शेयरों के रिटर्न पर उतार-चढ़ाव का ज्यादा असर नहीं पड़ता है। मिडकैप कंपनियों की ग्रोथ की संभावना अच्छी होती है। कई मिडकैप कंपनियां बाद में लार्जकैप कैटेगरी में आ जाती है। हालांकि, किसी फंड के पिछले रिटर्न को भविष्य में उसके रिटर्न की गारंटी नहीं माना जा सकता। अगर आप इस फंड में निवेश करना चाहते हैं तो आपको अपने फाइनेंशियल एडवाइजर की राय लेनी चाहिए।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

K Bhagyaraj Death: नहीं रहे फिल्ममेकर के भाग्यराज, दिल का दौरा पड़ने से 73 साल की उम्र में हुआ निधन

K Bhagyaraj Death: मशहूर एक्टर और डायरेक्टर के. भाग्यराज का शनिवार को चेन्नई में निधन हो गया। ANI के मुताबिक, अपोलो हॉस्पिटल ने भाग्यराज के निधन की पुष्टि की। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, भाग्यराज को हार्ट अटैक आया और उनका निधन हो गया। वे 73 साल के थे। उनके अंतिम संस्कार के बारे में और जानकारी का इंतजार है।

भाग्यराज के परिवार में उनकी पत्नी और एक्ट्रेस पूर्णिमा भाग्यराज, उनके बेटे और एक्टर शांतनु भाग्यराज और बेटी सारण्या भाग्यराज हैं। भाग्यराज सार्वजनिक जीवन में सक्रिय थे और कुछ ही दिन पहले उन्हें गोवा में एक्ट्रेस और पॉलिटिशियन खुशबू सुंदर की बेटी की शादी में शामिल होते देखा गया था।

तमिलनाडु के इरोड जिले में कृष्णास्वामी भाग्यराज के रूप में जन्मे भाग्यराज ने अपना सफल करियर बनाने से पहले प्रशंसित फिल्म निर्माता भारतीराजा के सहायक के रूप में फिल्म इंडस्ट्री में अपना करियर शुरू किया था। उन्होंने सबसे पहले 16 वायथिनिले (1977) और सिगप्पु रोजक्कल (1978) जैसी फिल्मों में छोटी सहायक भूमिकाएं निभाईं।

इसके बाद उन्होंने भारतीराजा की दो फिल्मों – 16 वायथिनिले और किज़हक्के पोगम रेल – में सहायता की और भारतीराजा की फिल्मों किज़हक्के पोगम रेल (1978) और टिक टिक टिक (1981) के लिए स्क्रिप्ट लिखी। उन्होंने 1979 में सुवरिलाधा चिथिरंगल के साथ अपने निर्देशन की शुरुआत की। उन्होंने भारतीराजा की पुथिया वारपुगल में एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में भी अपनी शुरुआत की।

भाग्यराज मुख्य रूप से मिडिल-क्लास परिवारों के लिए मनोरंजक फिल्में बनाने के लिए जाने जाते थे। उन्होंने ऐसे किरदार और कहानियां बनाईं, जिनसे लोग आसानी से जुड़ सके, और इस तरह उन्होंने पारिवारिक मनोरंजन के नज़रिए को बदल दिया। मिडिल-क्लास परिवारों पर आधारित उनकी फिल्में, बेहतरीन पटकथा लेखन और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी कहानियों ने 1980 और 1990 के दशक में तमिल सिनेमा को एक नई पहचान दी। उनकी कुछ प्रमुख फिल्मों में ‘अंधा 7 नाटकाल्’ (1981), ‘मुंधनाई मुदिचु’ (1983), ‘थूरल निन्नु पोचु’ (1982), ‘इंद्रु पोई नालई वा’ (1981) और कई अन्य फिल्में शामिल हैं।

भाग्यराज ने 25 से ज़्यादा फिल्मों का निर्देशन किया और 75 से ज़्यादा फिल्मों में अभिनय किया। भाग्यराज ने अमिताभ बच्चन की फ़िल्म ‘आखिरी रास्ता’ (1986) का निर्देशन करके हिंदी सिनेमा में भी अपनी पहचान बनाई। इस फ़िल्म में अमिताभ बच्चन ने दोहरी भूमिका निभाई थी, जबकि जया प्रदा, श्रीदेवी और अनुपम खेर ने अहम भूमिकाएं निभाई थीं। भाग्यराज भी इस फ़िल्म में एक सहायक भूमिका में नज़र आए थे।

बाद में उन्होंने ‘मिस्टर बेचारा’ (1996) में सहायक भूमिकाएँ निभाईं, जिसमें अनिल कपूर और श्रीदेवी मुख्य भूमिकाओं में थे, और ‘पापा द ग्रेट’ (2000) में कृष्णा कुमार, नगमा और सत्य प्रकाश के साथ काम किया।

Cinema Ka Flashback: जब ‘गुजारिश’ के लिए ऐश्वर्या राय को मिलने वाला था बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड, सुपरस्टार के कहने पर काजोल को थमा दी गई थी ट्रॉफी

Cinema Ka Flashback: बॉलीवुड किसी के लिए किसी को पीछे खींचना….नीचा दिखाना….या आगे बढ़ाना बहुत आम बात है। इस ग्लैमर दुनिया में आप कब किसके लिए खास और किससे दुश्मन बन जाएं किसी को पता नहीं होता है। आए दिन दोस्ती से दुश्मनी…जलन से जुड़े किस्से सामने आते रहते हैं। एक ऐसा ही किस्सा जुड़ा है 2010-11 में एक अवॉर्ड शो से। इसके बाद से एक्टर्स के साथ-साथ दर्शकों का भी भरोसा इन शो से उठने लगा था।

ऐश्वर्या राय को भेजा गया इंवाइट

मीडिया रिपोर्ट और बॉलीवुड सोर्स के मुताबिक 2010 में ऐश्वर्या राय संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘गुजारिश’ में नजर आई थीं। फिल्म में उनके अपोजिट ऋतिक रोशन थे। इस मूवी को दर्शकों का मिला जुला प्यार मिला था। लेकिन फिल्म में ऐश्वर्या के काम और खूबरत लुक्स के लोग कायल हो गए थे। इसी साल एक अवॉर्ड शो हुआ, जिसमें ऐश्वर्या को ये कहकर इंवाइट किया गया था कि जूरी ने बेस्ट एक्ट्रेस के अवॉर्ड के लिए उनका नाम सजेस्ट किया है।

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लास्ट मोमेंट पर काजोल को दिया गया अवॉर्ड

ऐश्वर्या राय अवॉर्ड शो में अपना अवॉर्ड लेने पहुंची थी। लेकिन वहां जो हुआ उसने उन्हें काफी दुख और इंसल्टिंग महसूस कराया। शो में बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड ऐश को न देकर My Name Is Khan के लिए काजोल को दे दिया गया। ये सब वहां मौजूद ऐश्वर्या के सामने हो रहा था।

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फिल्ममेकर का बड़ा खुलास

हंगामा तब मचा जब इस किस्से के कुछ समय बाद एक बड़े फिल्ममेकर ने इंटरव्यू में इस बात का खुलकर जिक्र किया। उन्होंने सुपरस्टार का नाम लिए बिना कहा कि- एक्टर के कहने पर ऐश्वर्या राय की जगह काजोल को लास्ट मोमेंट पर ये अवॉर्ड दिया गया था। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट में भी इस बात के कई दावे किए थे, कि लास्ट मोमेंट पर विनर का नाम एक्टर के कहने पर चेंज किया गया था। इस खुलासे के बाद से लोगों ने अवॉर्ड शो को कम आंकना शुरू कर दिया।

गुजारिश फिल्म

संजय लीला भंसाली की फिल्म गुजारिश 2010 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म ऋतिक रोशन और ऐश्वर्या राय लीड रोल में थे। ऋतिक ने इसमें लकवा ग्रस्त जादूगर का किरदार निभाते हैं। स्टेज पर हुए एक हादसे के बाद उन्हें लकवा हो जाता है। इसके बाद वह अपने जादू को एक हिट रेडियो शो के ज़रिए लोगों तक पहुंचाता है, जिसमें उसका साथ ऐश देती हैं।

माई नेम इज खान फिल्म

यह फिल्म रिजवान खान (शाहरुख खान) की कहानी है, जो एस्पर्जर सिंड्रोम से पीड़ित एक मुस्लिम है। 11 सितंबर 2001 (9/11) के हमलों के बाद अमेरिका में इस्लामोफोबिया और नस्लीय भेदभाव काफी बढ़ जाता है, जिसके कारण उनके परिवार को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसके बाद रिजवान अमेरिका के राष्ट्रपति से मिलने और दुनिया को यह मैसेज देने के लिए एक जर्नी पर निकलते हैं-जिसमें वह लोगों को बताते हैं “मेरा नाम खान है, और मैं आतंकवादी नहीं हूं।”

Persistent Systems की हो जाएगी जर्मनी की Nagarro, खरीदेगी सारे शेयर; स्टॉक में दिख सकता है बड़ा उछाल

पर्सिस्टेंट सिस्टम्स जर्मनी की डिजिटल इंजीनियरिंग फर्म Nagarro SE के सभी बकाया शेयर 81 यूरो प्रति शेयर की कैश डील में खरीदना चाहती है। इसके लिए कंपनी एक वॉलंटरी पब्लिक टेकओवर ऑफर दे रही है। यह खरीद सब्सिडियरी गैलेक्सी जर्मनी होल्डिंग के जरिए करने का प्लान है। पर्सिस्टेंट सिस्टम्स का कहना है कि डील के अक्टूबर-दिसंबर 2026 या जनवरी-मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है। पर्सिस्टेंट को पहले ही Nagarro की सबसे बड़ी शेयरहोल्डर, Lantano Beteiligungen GmbH का साथ मिल चुका है, जिसने कंपनी में अपनी पूरी 21 प्रतिशत हिस्सेदारी पर्सिस्टेंट को बेचने पर सहमति जताई है।

Nagarro का मैनेजमेंट और सुपरवाइजरी बोर्ड भी इस ट्रांजेक्शन के सपोर्ट में है। फाइनल ऑफर डॉक्यूमेंट का रिव्यू करने के बाद उस पर शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। इस ट्रांजेक्शन पर अभी रेगुलेटरी मंजूरियां और जर्मनी के फाइनेंशियल रेगुलेटर BaFin की मंजूरी लिया जाना भी बाकी है। प्रस्तावित अधिग्रहण से Persistent की AI-बेस्ड इंजीनियरिंग और क्लाउड क्षमताएं, Nagarro की यूरोपियन डिजिटल इंजीनियरिंग, ERP और कस्टमर एक्सपीरियंस विशेषज्ञता के साथ आएंगी। इससे एक ऐसी कंपनी बनेगी, जिसका सालाना रेवेन्यू रन रेट लगभग 2.9 अरब डॉलर होगा। इसके 40 से अधिक देशों में 46,000 से अधिक कर्मचारी होंगे।

इस सौदे के लिए फंडिंग बार्कलेज (Barclays) से कमिटेड फाइनेंसिंग के जरिए की जाएगी। यह अधिग्रहण यूरोप में पर्सिस्टेंट सिस्टम्स की मौजूदगी को काफी मजबूत करेगा। इस ट्रांजेक्शन के बाद बनने वाली कंपनी के रेवेन्यू में यूरोप की हिस्सेदारी लगभग 22 प्रतिशत की होगी। नॉर्थ अमेरिका का योगदान लगभग 62 प्रतिशत रहेगा।

Nagarro डीलिस्ट होगी

जर्मनी के म्यूनिख में हेडक्वार्टर वाली Nagarro ने कैलेंडर वर्ष 2025 में लगभग 1 अरब यूरो का रेवेन्यू कमाया। इसके 40 से अधिक देशों में लगभग 18,500 कर्मचारी हैं। कंपनी की ऑटोमोटिव, इंडस्ट्रियल, कंज्यूमर, टेलीकॉम और BFSI सेक्टर में अच्छी मौजूदगी है। डील पूरी होने के बाद पर्सिस्टेंट की योजना नगारो को फ्रैंकफर्ट स्टॉक एक्सचेंज के प्राइम स्टैंडर्ड सेगमेंट से डीलिस्ट करने की है। हालांकि, सौदा पूरा होने के बाद कम से कम दो साल तक डोमिनेशन और प्रॉफिट एंड लॉस ट्रांसफर एग्रीमेंट (DPLTA) करने का कोई इरादा नहीं है।

Persistent Systems का कहना है कि डील के अक्टूबर-दिसंबर 2026 या जनवरी-मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है। 

सोमवार को चढ़ सकता है Persistent Systems का शेयर

इस नए डेवलपमेंट से सोमवार, 29 जून को Persistent Systems के शेयर में उछाल आ सकता है। शेयर की वर्तमान कीमत बीएसई पर 4840.45 रुपये है। शेयर 6 महीनों में 24 प्रतिशत गिरा है। कंपनी में मार्च 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 30.29 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। कंपनी का मार्केट कैप 76300 करोड़ रुपये से ज्यादा है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।