दतिया उपचुनाव में भाजपा की हार का ठीकरा किसके सिर फूटेगा?

दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की करारी हार का ठीकरा भाजपा में किसके सिर फूटेगा, यह सवाल अब सियासी गलियारों में पूछा जाने लगा है। राजनीतिक विश्लेषक इस बात को साफ तौर पर मानते है कि दतिया विधानसभा चुनाव के परिणाम जिस तरह से आए वह पार्टी के लिए वकाई चिंता का विषय है। भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी जिस तरह से चुनाव में पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह का बूथ हार गए, उसके एक नहीं कई सियासी मायने है।

दतिया में भाजपा की करारी हार ठीकरा पूरी तरह से पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा पर फूटना तय है। चुनाव के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने जिस तरह से टिकट कटने को लेकर पार्टी नेतृ्व्य पर इशारों ही इशारों में सवाल उठाए, उसका खामियाजा पार्टी  को चुनाव में उठाना पड़ा। दतिया में भाजपा की हार सिर्फ पार्टी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी की हार नहीं बल्कि भाजपा संगठन की हार है।

2023 में दतिया विधानसभा सीट हारने के बाद इस बार भाजपा ने नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया और आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया। इसके बाद जिस तरह से पहले नरोत्तम मिश्रा समर्थकों ने दतिया में बवाल काटा और फिर नरोत्तम मिश्रा मंच पर रोए, उससे उपचुनाव में उनकी भूमिका पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। नरोत्तम मिश्रा पूरे उपचुनाव के दौरान दावा करते रहे है कि वह पूरी तरह पार्टी के साथ है लेकिन कई  अहम मौकों जैसे बसई में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और बड़ौना में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का सभा में उनका नहीं जाना, उनकी नाराजगी और भाजपा की गुटबाजी से जोड़कर देखा गया।

वहीं दतिया भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह जिसको नरोत्तम मिश्रा का समर्थक माना जाता है, उसके बूथ पर भी पार्टी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को हार का सामना करना पड़ा। उपचुनाव में भाजपा की हार नरोत्तम मिश्रा की सियासी करियर पर एक ग्रहण का काम करेगी और उनकी पार्टी में पूछ-पऱख कम होगी और उनके सियासी पुर्नवास की राह कठिन हो जाएगी। इस बात का अंदाजा शायक खुद नरोत्तम मिश्रा को भी है इसलिए वह पूरे चुनाव के दौरान कहते रहे है कि पार्टी ने उन्हें बहुत कुछ दिया और अब पार्टी कितना देगी। वहीं नरोत्तम मिश्रा ने अब राजनीति में अपनी सक्रियता को लेकर भी इशारों ही इशारों में कई संदेश दिए है। दतिया से पार्टी की हार के साथ उन्होंने कहा कि मेरी राजनीति का पटाक्षेप हो गया है।

विदेश में पढ़ाई के खर्चे पर अभिजीत दीपके ने बताया सच, कहा अब लोन चुकाना है

Abhijeet Deepke

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी अमेरिका में पढ़ाई के खर्चे को लेकर उठे सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया है कि उनकी बोस्टन यूनिवर्सिटी में एमएस (पब्लिक रिलेशंस) की डिग्री स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन से पूरी हुई। उन्होंने स्कॉलरशिप दस्तावेज भी सार्वजनिक रूप से दिखाने की पेशकश की है।

अभिजीत दीपके ने पत्रकार बरखा दत्त को दिए इंटरव्यू में कहा, “मैं बोस्टन यूनिवर्सिटी से स्कॉलरशिप प्राप्त की थी और बाकी खर्च के लिए एजुकेशन लोन लिया था, जिसे मुझे अभी चुकाना है।” उन्होंने डीन स्कॉलरशिप का दस्तावेज साझा करते हुए बताया कि यूनिवर्सिटी ने उन्हें प्रति सेमेस्टर 12,500 डॉलर की स्कॉलरशिप दी, जो तीन सेमेस्टर के लिए कुल 37,500 डॉलर (लगभग 30 लाख रुपये से अधिक) बनी।
 
विवाद की शुरुआत : विवाद तब शुरू हुआ जब सूरत के आरटीआई कार्यकर्ता अमित तिवारी ने अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके (महाराष्ट्र सरकार के रिटायर्ड जूनियर इंजीनियर) की वित्तीय स्थिति की जांच की मांग की। तिवारी ने सवाल उठाया कि मासिक वेतन लगभग 60-65 हजार रुपए वाले रिटायर्ड कर्मचारी ने अमेरिका जैसी महंगी पढ़ाई का खर्च कैसे उठाया। उन्होंने चुनाव आयोग, इनकम टैक्स विभाग और महाराष्ट्र सरकार को पत्र लिखकर जांच की अपील की थी।

अभिजीत ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि वे अपना स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन दस्तावेज दिखाने को तैयार हैं। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर चुनौती दी, “मैं अपना स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन लेटर दिखाने को तैयार हूं। क्या सम्राट अपना डिग्री दिखाएंगे?” कितना खर्च आया पढ़ाई पर? अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस के मास्टर कोर्स पर ट्यूशन फीस, रहन-सहन, स्वास्थ्य बीमा आदि मिलाकर कुल खर्च 30 लाख से 1 करोड़ रुपये तक हो सकता है। अभिजीत की स्कॉलरशिप ने काफी हिस्सा कवर किया, जबकि बाकी लोन से पूरा हुआ। उनके पिता ने पहले भी लोन लेकर बेटे को पढ़ाने की बात कही थी।

CJP की फंडिंग को लेकर भी सवाल : अभिजीत दीपके ने पुणे से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद वे अमेरिका गए और हाल ही में जून 2026 में भारत लौटकर बड़े प्रदर्शन आंदोलन का नेतृत्व किया। CJP की फंडिंग को लेकर भी सवाल उठे हैं, जिस पर उन्होंने क्राउडफंडिंग और पूर्ण पारदर्शिता का वादा किया है।यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जहां लोग दीपके के जवाब और RTI कार्यकर्ता के सवालों पर अपनी राय रख रहे हैं। अभिजीत दीपके की स्पष्टता ने कई सवालों के जवाब दिए हैं, लेकिन राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है। अभिजीत दीपके ने बयान दिया है कि पढ़ाई का खर्च स्कॉलरशिप और लोन से हुआ। अब लोन चुकाना है।

बता दें कि अभिजीत दीपके कॉकरोच पार्टी बनाकर चर्चा में आए थे। पार्टी बनाने के बाद उन्‍होंने दिल्‍ली के जंतर मंतर में प्रोटेस्‍ट किया। बाद में ये प्रोटेस्‍ट जेंनजी प्रोटेस्‍ट बन गया। जिसका असर यह हुआ कि नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्‍तीफा देना पडा। 

भारतीय स्वतंत्रता दिवस पर इस बार की खास तैयारी, कौन होंगे अतिथि?

narendra modi 80th Independence Day 2026

15 अगस्त 2026 को भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। लाल किले पर मुख्य समारोह और देश भर में तैयारियों को लेकर रूपरेखा तैयार की जा रही है। इस बार यह दिवस बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। हालांकि आजादी के उत्सव में विदेशी अतिथियों को बुलाने की परंपरा नहीं रहती है लेकिन इस दिन देश के गणमान्य नागरिकों को जरूर बुराया जाता है।

 

मुख्य अतिथि और विशेष आमंत्रित सदस्य

स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) के अवसर पर गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) की तरह विदेश से कोई मुख्य अतिथि (Chief Guest) बुलाने की परंपरा नहीं होती। इस दिन मुख्य रूप से केंद्र में देश के प्रधानमंत्री होते हैं, जो लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराते हैं और राष्ट्र को संबोधित करते हैं। हालाँकि, केंद्र सरकार द्वारा देश भर से विभिन्न क्षेत्रों के विशेष अतिथियों को आमंत्रित करने की परंपरा जारी है-

 

जन-भागीदारी (Special Invitees): देश भर के विभिन्न राज्यों से ज़मीनी स्तर पर बदलाव लाने वाले लोग, उत्कृष्ट युवा इनोवेटर्स/स्टार्टअप उद्यमी, एयरोस्पेस/स्टेम (STEM) शिक्षा में योगदान देने वाले अग्रणी (जैसे एरोबे की संस्थापक नेहा चौहान), स्वयं सहायता समूहों की महिलाएँ, और माईभारत/माईगव (MyGov) प्रतियोगिताओं के विजेता अतिथियों में शामिल होंगे।

 

इस बार की खास तैयारियाँ:

'आत्मनिर्भर रक्षा' और स्वदेशी तकनीक: स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर इस्तेमाल होने वाले तोप और सुरक्षा उपकरण स्वदेशी (Indigenously built) तकनीक से युक्त होंगे।

22 भारतीय भाषाओं में रीयल-टाइम अनुवाद: डिजिटल इंडिया के 'भाषिणी' (AI Bhashini) टूल की मदद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण 22 से अधिक भारतीय भाषाओं में रीयल-टाइम अनुवादित किया जाएगा।

'विकसित भारत 2047' और 'युवा संवाद': इस बार का मुख्य फोकस 6G ट्रायल्स, ग्रीन एनर्जी (ग्रीन हाइड्रोजन मिशन), और 'यंग लीडर्स डायलॉग' पर रहेगा। 'हर घर तिरंगा' अभियान: इस अभियान के माध्यम से नागरिकों को अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और डिजिटल रूप से तिरंगे के साथ सेल्फी शेयर करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।  

सांप को जैन साध्‍वियों ने सुनाया णमोकार मंत्र, कहा— मुक्‍त हो जाओ, अब किसी को मत डसना’, फन फैलाकर बैठे रहे नागराज

Jain Sadhvis

ललितपुर में रविवार सुबह से एक अनोखा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दिगंबर जैन आर्यिका एक ब्लैक कोबरा के सामने नमोकार मंत्र का जाप करती दिख रही हैं। लगभग तीन मिनट तक नागराज भी फन फैलाकर शांत मुद्रा में उनके सामने बैठे रहे और मंत्र सुनते रहे।

साथ में मौजूद शिष्य ने अपने मोबाइल फोन में पूरे वाकिया को रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। पूरा किस्सा क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह पूरी घटना मड़ावरा तहसील क्षेत्र स्थित अतिशय क्षेत्र गिरार की है।

सड़क पर बैठे इस जहरीले सांप को देखकर जैन साध्वियों रुक गई और उसके समझाने लगी। इस दौरान साध्वियों ने कहा कि हम तुम्हें णमोकार मंत्र सुनाते हैं। इस सुनने के बाद अब किसी को डंसना नहीं। बहुत लंबी यात्रा कर लिए अब किसी को परेशान नहीं करना। इस दौरान एक साध्वी सर्प के नजदीक बैठ गई और उसे समझाने लगी।

शांति से मंत्र सुनता रहे नागराज : जैन साध्वी जब इस मंत्र को सुना रहीं थी उस दौरान सर्प फन फैलाकर पूरे मंत्र को सुनता रहा। साध्वियों का मंत्र सुनने के बाद सांप शांत हो गया। इस दौरान साध्वी ने कहा कि हम तुम्हे मार नहीं रहे हैं। बल्कि आशीर्वाद दे रहे हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो को देखकर लोग तरह-तरह की बातें कर रहे हैं।

शिष्य ने वीडियो किया रिकॉर्ड : सांप को देखने के बाद मौके पर साध्वियां वहीं रुक गईं। आर्यिका मां विदुषश्री माताजी ने शांत भाव से नमोकार मंत्र का जाप करना शुरू किया। उनके साथ में मौजूद शिष्य पंकज जैन ने पूरे घटना को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया। रिकॉर्ड करने के बाद उसने वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। 

काशी विश्वनाथ धाम में VIP दर्शन के नाम पर ठगी, पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए वापस दिलाए पैसे

varansi : cheating on the name of vip darshan

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का सबसे पावन और महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषकर सावन के सोमवार पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। आस्था, श्रद्धा और भक्ति के इस महासंगम के बीच कुछ असामाजिक तत्व श्रद्धालुओं की भावनाओं का फायदा उठाकर ठगी करने से भी नहीं चूक रहे हैं।

 

ऐसा ही एक मामला सोमवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम में सामने आया, जहां मैसूर से दर्शन करने आई एक महिला श्रद्धालु से आसानी के साथ वीआईपी दर्शन कराने का झांसा देकर एक ठग ने 4 हजार रुपये की ठगी कर ली। महिला ने आराम से जल्दी दर्शन मिलने की उम्मीद में रकम दे दी, लेकिन कुछ ही देर में उसे एहसास हुआ कि उसे दर्शन के नाम पर ठगा गया है।

 

भगवान के नाम पर ठगी का यह दृश्य जैसे ही ड्यूटी पर मौजूद एक पुलिसकर्मी की नजर में पहुंचा तो हड़कंप मच गया। उसने तत्काल प्रभाव से थाना सिगरा को सूचना दी। जानकारी मिलते ही इंस्पेक्टर शिवाकांत मिश्रा अपनी टीम के साथ श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे और पीड़ित महिला से पूरी जानकारी ली। इसके बाद आसपास के स्थानीय व्यापारियों और लोगों से पूछताछ की गई।

 

जांच के दौरान लोगों ने बताया कि ठगी करने वाले व्यक्ति का नाम बसंत पांडे है, जो चेतगंज क्षेत्र का निवासी है। आरोप है कि वह मैसूर से आई महिला सहित अन्य चार श्रद्धालुओं को भी शीघ्र दर्शन कराने का लालच देकर पैसे ऐंठने का प्रयास कर रहा था।

 

पुलिस टीम के पहुंचने की भनक लगते ही बसंत पांडे गेट नंबर-4 की ओर से भागने लगा, लेकिन पुलिस ने पीछा कर उसे पकड़ लिया और हिरासत में ले लिया। पुलिस की तत्परता से पीड़ित महिला के 4 हजार रुपये तत्काल ऑनलाइन वापस कराए गए, जिससे श्रद्धालु ने राहत की सांस ली।

 

आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं 

सावन के पहले सोमवार पर, जब श्री काशी विश्वनाथ धाम में आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा हुआ था, तब पुलिस की इस संवेदनशील और तुरंत कार्रवाई ने यह संदेश भी दिया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और उनकी आस्था के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

 

पुलिस टीम की इस सराहनीय कार्यशैली की हर तरफ प्रशंसा हो रही है। महिला श्रद्धालु को ऑनलाइन पैसे वापस दिलवाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग वाराणसी पुलिस की मुक्तकंठ से सराहना कर रहे हैं। वहीं कर्नाटक (मैसूर) से आई महिला उत्तर प्रदेश राज्य की उज्ज्वल छवि को लेकर अपने प्रदेश वापस लौटेगी।

 

पुलिस-प्रशासन और मंदिर कमेटी ने श्रृद्धालुओं से अपील

पुलिस-प्रशासन और मंदिर कमेटी ने श्रृद्धालुओं से अपील की है कि श्री काशी विश्वनाथ धाम आने वाला कोई भी भक्त किसी भी अनजान व्यक्ति, दलाल या तथाकथित वीआईपी दर्शन कराने का दावा करने वाले लोगों के झांसे में न आएं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों या प्रशासन को दें, ताकि आस्था के इस पावन पर्व की गरिमा बनी रहे।

मांजलपुर उपचुनाव परिणाम : गढ़ बचाने में कामयाब रही भाजपा, वडोदरा की इस सीट पर सतीश पटेल की बंपर जीत

satish patel

Manjalpur Bypoll Election Result 2026 : वडोदरा की मांजलपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी सतीश पटेल ने कांग्रेस के भीखाभाई रबारी को 30,000 से ज्यादा वोटो से हराया। ALSO READ: बांकीपुर में प्रंशात किशोर ने कर दिया 'खेला', भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन को झटका

 

20 दौर तक चली मतगणना सतीश पटेल को 55,481 वोट हासिल हुए जबकि कांग्रेस के भीखा भाई रबारी को मात्र 24,851 वोट ही हासिल हुए। इस तरह भाजपा ने यह चुनाव 30,630 वोटों से जीत लिया। इस चुनाव में 37.05 फीसदी जैसा कम मतदान दर्ज किया गया था। कम मतदान के चलते भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियां अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत को लेकर आशान्वित थे। 

 

कौन हैं सतीश पटेल?

सतीश गोविंदभाई पटेल (सतेन्द्रभाई पटेल) वर्तमान में गुजरात के वडोदरा शहर की मांजलपुर विधानसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार हैं। वे मुख्य रूप से कृषि और सहकारिता क्षेत्र से जुड़े रहे हैं तथा वडोदरा नगर निगम में पार्षद के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

बांकीपुर जनसुराज पार्टी के प्रशांत किशोर और दतिया में कांग्रेस के घनश्याम सिंह भाजपा उम्मीदवारों से काफी आगे चल रहे हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि 3 राज्यों के 3 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों में केवल मांजलपुर में ही भाजपा जीतती नजर आ रही है।

 

मांजलपुर में क्यों हुए उपचुनाव?

गौरतलब है कि वडोदरा की मांजलपुर सीट से लगातार आठ बार चुनाव जीतने वाले भाजपा के वरिष्ठ विधायक योगेश पटेल का जून में 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। साल 1990 से लेकर 2022 के विधानसभा चुनाव तक वे लगातार आठ बार अजेय रहे। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की सरकार में राज्यमंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दी थीं। 

दतिया उपचुनाव में भाजपा की हार के पांच बड़े कारण, कांग्रेस के घनश्याम सिंह को निर्णायक बढ़त

दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस अब प्रचंड जीत की ओर है। 11वें राउंड के बाद अब कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने अब निर्णायक बढ़त बना ली है। 15वें राउंड की मतगणना में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम ने तीसरे राउंड से जो बढ़त बनाई और वह आखिरी में एक बड़ी जीत में बदल गई है। मध्यप्रदेश की सबसे हाईप्रोफाइल सीट माने जाने वाली दतिया उपचुनाव में भाजपा की हार के आखिरी क्या कराण थे इसको लेकर अब सियासी गलियारों में  चर्चा तेज हो गई है।

1-भाजपा की रणनीतिक चूक, नरोत्तम की जगह आशुतोष को टिकट देना-दतिया उपचुनाव में भाजपा ने जिस तरह से अपने कद्दवार नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट काट कर नए चेहरे आशुतोष तिवारी को टिकट दिया वह चुनाव में भाजपा की हार का सबसे बड़ा कारण साबित हुई। नरोत्तम मिश्रा जो 2008 में पहली बार दतिया विधानसभा सीट से चुनाव जीते और लगातार 15 साल तक दतिया से विधायक रहे वह उपचुनाव में भाजपा की तरह से टिकट के प्रबल दावेदार थे लेकिन उपचुनाव की तारीखों के एलान के बाद भाजपा आलाकमान ने नरो्त्तम मिश्रा का टिकट काट कर सीधे नए चेहरे आशुतोष तिवारी को चुनावी मैदान में उतार दिया।

नरोत्तम मिश्रा के टिकट कटने के बाद इसका रिएक्शन भी देखा गया और पार्टी के जिला अध्यक्ष सहित सभी स्थानीय पदाधिकारियों ने एक झटके में इस्तीफा दे दिया और नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने 48 घंटे तक दतिया में जमकर बवाल काटा। इसका चुनाव मे साइड इफेक्ट देखने को मिला और  पूरे चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा का कोर कार्यकर्ता घर बैठ गए और इसका नुकसान भाजपा को  चुनाव में उठाना पड़ा।  

2-उपचुनाव में भाजपा में भितरघात-दतिया विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार का बड़ा कारण पार्टी में जमकर भितरघात होना रहा। पूरे चुनाव प्रचार के दौरान नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों के साथ भाजपा के जिला पदाधिकारी अलग-थलग दिखाई पड़े और उन्होंने एक तरह से पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के  विरोध में काम किया। “वेबदुनिया” ने जब दतिया विधानसभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्टिग की तो नाम न छापने की शर्त पर कई स्थानीय भाजपा नेताओं ने साफ कहा कि नरोत्तम मिश्रा का टिकट गलत तरीके से टिकट काटा गया और इससे पार्टी का कोर कार्यकर्ता बिल्कुल खुश नहीं है।

दतिया के स्थानीय भाजपा नेता पूरे चुनाव प्रचार के दौरान एक दौरान खमोश रहे। चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी के भीतर पूरी तरह एकजुटता नहीं दिखी। कई क्षेत्रों में स्थानीय कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता और अंदरूनी असंतोष की चर्चा लगातार होती रही, जिसका असर मतदान पर पड़ा। सोमवार को  जिस तरह से  चुनावी परिणाम आए है उसमें भाजपा को शहर के पोलिंग बूथ पर हार का सामना करना पड़ा इससे साफ है कि उपचुनाव में भाजपा को भितरघात का सामना करना पड़ा।

3-आशुतोष तिवारी दतिया में बाहरी चेहरा?-दतिया में भाजपा ने भांडेर से आने वाले आशुतोष तिवारी को अपना उम्मीदवार बनाय था। भाजपा ने आशुतोष तिवारी को दतिया का अपना स्थानीय चेहरा बनाकर चुनाव मैदान में उतारा, लेकिन दतिया की जनता ने आशुतोष तिवारी को स्वीकार नहीं किया। “वेबदुनिया” ने जब दतिया के स्थानीय लोगों से बात की  थी तो लोगों ने साफ कहा था कि आशुतोष तिवारी को उन्होंने कभी नहीं देखा और वह अचानक से चुनाव लड़ने आ गए। दरअसल आशुतोष तिवारी संगठन में लबे समय से सक्रिय थे और वह पहली बार चुनावी मैदान में उतरे थे। ऐसे में वह दतिया की जनता से सीधा कनेक्ट नहीं कर पाए।

वहीं घनश्याम सिंह जो पहले भी दो बार दतिया से विधायक चुने जा चुके थे उनको स्थानीय चेहरा माना गया और स्थानीय और बाहरी के मुद्दे को लगातार चुनाव में उठाया। स्थानीय बनाम बाहरी की बहस चुनाव प्रचार के दौरान भी सुनाई देती रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे ने भी चुनाव में असर डाला और भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।

4-कांग्रेस की बेहतर चुनावी रणनीति और मैनेजमेंट-दतिया उपचुनाव में कांग्रेस ने जिस तरह से एकजुटता का परिचय दिया और विधानसभा क्लस्टर में बांटकर जिस तरह से चुनाव लड़ा वह उसकी जीत का बड़ा कारण रहा। भाजपा की तुलना में कांग्रेस ने उचुनाव में बेहतर चुनावी प्रबंधन का प्रदर्शन किया। बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता, कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय और मतदाताओं तक लगातार पहुंच बनाने की रणनीति कांग्रेस के पक्ष में जाती दिखाई दी। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी जिस तरह से पूरे चुनाव प्रचार के दौरान दतिया में डेरा डाले रख कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने के साथ पोलिंग बूथ मैनेजमेंट किया वह कांग्रेस की प्रचंड जीत का बडा कारण साबित हुआ।

5-कांग्रेस की एकजुटता-दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने जिस तरह से एकजुटता का परिचय दिया वह उसकी जीत का बड़ा कराण साबित हुई। कांग्रेस ने चुनाव के अंतिम दौर तक जिस तरह से नाराज नेताओं अवधेश नायक और राजेंद्र भारती को साध कर रखा, वह जीत का एक बड़ा कारण साबित हुई। चुनाव के दौरान अधिकांश वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता एक मंच पर नजर आए और उम्मीदवार के समर्थन में एकजुट होकर प्रचार किया। इस एकजुटता का लाभ कांग्रेस को सीधा मिला।

बाबा औघड़नाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, मेरठ पुलिस की चाक-चौबंद सुरक्षा

Baba Augharnath Temple

श्रावण मास के प्रथम सोमवार के अवसर पर भगवान शिव के जलाभिषेक एवं दर्शन के लिए बाबा औघड़नाथ मंदिर में सोमवार तड़के करीब 3:30 बजे से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। शिवभक्तों की सुरक्षा और बिना रूके आसानी से दर्शन करने के लिए मेरठ पुलिस ने मंदिर परिसर सहित आसपास के क्षेत्र में व्यापक और सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था लागू की है।

 

श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कांवड़ियों के वाहनों को केवल निर्धारित पार्किंग स्थलों पर ही रुकवाया जा रहा है, जिससे मंदिर तक जाने-आने वाले मुख्य मार्गों पर यातायात सुचारु रूप से बनी रहे और दर्शनार्थियों को किसी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े।

 

पुलिस-प्रशासन ने मंदिर परिसर में गर्भगृह से लेकर मुख्य प्रवेश एवं निकास द्वार तक त्रिस्तरीय (3-लेयर) सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। किसी भी आपात स्थिति से तत्काल निपटने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) को भी रणनीतिक स्थानों पर तैनात किया गया है।

 

सुरक्षा व्यवस्था के तहत मंदिर में प्रवेश करने वाले सभी संदिग्ध व्यक्तियों एवं वस्तुओं की आधुनिक सुरक्षा उपकरणों की सहायता से सघन जांच की जा रही है। इसके साथ ही मंदिर प्रशासन एवं मंदिर समिति के साथ निरंतर समन्वय स्थापित कर दर्शन व्यवस्था को व्यवस्थित रखने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि दर्शन कर बाहर निकलने वाले और नए आने वाले श्रद्धालुओं का आवागमन निरन्तर चल सके।

 

पूरे क्षेत्र की निगरानी ड्रोन कैमरों एवं डॉग स्क्वाड के माध्यम से लगातार की जा रही है। पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं और मंदिर प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर सुरक्षा व्यवस्था का प्रभावी संचालन किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को सुरक्षित, व्यवस्थित एवं सुगम दर्शन का अनुभव मिल सके।

 

1857 क्रांति का उद्गम स्थल है बाबा औघड़नाथ मंदिर

मेरठ का ऐतिहासिक बाबा औघड़नाथ मंदिर भगवान शिव के प्रमुख सिद्धपीठों में माना जाता है। यह मंदिर छावनी क्षेत्र में स्थित है और 1857 की क्रांति का उद्गम स्थल भी है। धार्मिक मान्यता है कि सावन के महीने में यहां जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करने से भगवान शिव विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं तथा भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

शिवरात्रि पर दूर-दराज से शिवभक्त कांवड़ लाकर अपनी मनोकामना के लिए स्वयंभू शिवलिंग पर जलाभिषेक करते है। यही कारण है कि श्रावण मास, विशेषकर सोमवार के दिन, दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु और कांवड़िए यहां गंगाजल अर्पित करने पहुंचते हैं। आस्था और श्रद्धा का यह केंद्र सावन के दौरान आध्यात्मिक ऊर्जा, भक्ति और जनआस्था का विशाल संगम बन जाता है।

E20 पेट्रोल पर नया विवाद, जयराम रमेश ने माइलेज और इंजन खराबी को लेकर सरकार से पूछे सवाल

jairam ramesh questions E-20 petrol

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने E20 पेट्रोल को लेकर मोदी सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि E20 लागू होने के बाद माइलेज में कमी, इंजन की समस्या और पुराने वाहनों में खराबी की शिकायतें बढ़ी हैं। ALSO READ: बांकीपुर में प्रंशात किशोर ने कर दिया 'खेला', भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन को झटका

जयराम रमेश ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि 29 जुलाई 2026 को संसद में E20 पेट्रोल के देशभर में रोलआउट पर नितिन गडकरी के जवाब ने जितने सवालों के जवाब दिए, उससे कहीं अधिक नए सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने दावा किया कि E20 को वर्षों तक वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद लागू किया गया है और इससे वाहनों को व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचने का कोई प्रमाण नहीं है।

 

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि लेकिन पिछले कई महीनों से देशभर के उपभोक्ता और मैकेनिक लगातार निम्नलिखित समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं-

 

  • माइलेज में कमी
  • इंजन के प्रदर्शन में गिरावट
  • E20 ईंधन का वाहनों पर दीर्घकालिक प्रभाव को लेकर चिंता
  • 2023 से पहले के वाहनों में इंजन की कम्पैटिबिलिटी, कोल्ड-स्टार्ट की समस्या और इंजन के तेजी से घिसने की शिकायतें
  • पुराने वाहनों में फ्यूल इंजेक्टर जाम होना, फ्यूल लाइन में जंग लगना और रबर के पुर्जों में दरारें आने की बढ़ती घटनाएं
  • आम उपभोक्ताओं के पास E20 पेट्रोल के अलावा व्यावहारिक रूप से कोई दूसरा विकल्प नहीं छोड़ा गया।

 

उन्होंने कहा कि जून 2026 में 2023 से पहले के पेट्रोल वाहनों के 44,000 से अधिक मालिकों पर किए गए एक स्वतंत्र सर्वेक्षण में पाया गया कि E20 लागू होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने अपने वाहनों पर प्रतिकूल प्रभाव महसूस किया। ALSO READ: Lovlina Borgohain ने ग्लास्गो के रेस्टोरेंट में पकड़ी बड़ी गलती, भारत के नक्शे पर जताई आपत्ति

 

सितंबर 2025 में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने बायोफ्यूल के कारण वाहन या इंजन को नुकसान पहुंचने संबंधी शिकायतों को “BS” (bullshit) करार दिया था। इसके बावजूद मोदी सरकार लगातार इन दावों को खारिज करती रही है, जबकि जुलाई 2026 की ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की रिपोर्ट और नीति आयोग के 2021 एथेनॉल पॉलिसी रोडमैप-जिसका संसद में स्वयं नितिन गडकरी ने हवाला दिया था-स्पष्ट रूप से स्वीकार करते हैं कि-

 

  • E20, E10 ईंधन के लिए डिज़ाइन किए गए वाहनों में रबर के पुर्जों-जैसे होज़, सील, गैस्केट और O-rings-को अधिक तेजी से खराब करता है।
  • ड्यूरेबिलिटी परीक्षणों के दौरान यात्री वाहनों में इंजन की खराबी और फेलियर दर्ज किए गए।
  • E20 फ्यूल टैंक और अन्य आंतरिक धातु के पुर्जों में जंग लगने का जोखिम बढ़ाता है।
  • E20 के कारण पुराने चार पहिया वाहनों की फ्यूल एफिशिएंसी 6-7%, पुराने दो पहिया वाहनों की 3-4% और E20-अनुकूल चार पहिया वाहनों की भी 1-2% तक कम हो जाती है।

 

उन्होंने कहा कि लोगों में गुस्सा बढ़ रहा है। लोग जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, मोदी सरकार के मंत्री किसी को भी यह भरोसा दिलाने में नाकाम रहे हैं कि E20 से कोई नुकसान नहीं होता- क्योंकि इसके बारे में कोई ठोस डेटा या रिपोर्ट मौजूद नहीं है।

बांकीपुर में प्रंशात किशोर ने कर दिया ‘खेला’, भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन को झटका

Prashant Kishor

बिहार की सियासत के सबसे हाई-प्रोफाइल अखाड़े यानी बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की शुरुआती मतगणना ने राजनीतिक पंडितों के होश उड़ा दिए हैं। कभी चुनावी रणनीतिकार के तौर पर परदे के पीछे से सियासी चालें चलने वाले प्रशांत किशोर (पीके) जब पहली बार खुद चुनावी मैदान में उतरे, तो शुरुआती रुझानों में ही उन्होंने वो कर दिखाया, जिसकी शायद किसी को उम्मीद नहीं थी।

बांकीपुर सीट पर जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर का शुरुआती बढ़त बनाना महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि बीजेपी के उस सियासी तिलिस्मे पर सीधा आघात है जिसे पिछले तीन दशकों से कोई नहीं भेद पाया था।  यह मुकाबला सिर्फ एक विधानसभा सीट का उपचुनाव भर नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन की राजनीतिक साख और उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की अग्निपरीक्षा है।

नितिन नबीन का वह पुश्तैनी और अजेय गढ़ : बता दें कि बांकीपुर कोई साधारण सीट नहीं, बल्कि नितिन नबीन का वह पुश्तैनी और अजेय गढ़ रहा है, जहां 1995 से लेकर अब तक (कभी पटना पश्चिम तो कभी बांकीपुर के रूप में) भगवा परचम ही लहराता रहा है। खुद नितिन नबीन यहां से लगातार पांच बार विधायक रह चुके हैं और उनके पिता का भी इस क्षेत्र में गहरा राजनीतिक रसूख रहा है। ऐसे में, जिस जमीन पर बीजेपी ने अपनी अजेय बादशाहत की इबारत लिखी हो, उसी गढ़ के भीतर प्रशांत किशोर का शुरुआती दौर में आगे निकल जाना इस बात का साफ संकेत है कि पीके ने महफिल में वाकई बड़ा 'खेला' कर दिया है।

बीजेपी के नीरज कुमार दूसरे नंबर पर : बता दें कि बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव की शुरुआती मतगणना में जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर आगे चल रहे हैं। इस सीट पर बीजेपी के नीरज कुमार दूसरे नंबर पर हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक़ बांकीपुर सीट पर कुल 31 राउंड की काउंटिंग होनी है और यहां अभी 8 राउंड की गिनती पूरी हुई है, जिसमें प्रशांत किशोर अपनी बढ़त बनाए हुए हैं।

पीके निकल रहे आगे : प्रशांत किशोर को 15637 वोट मिले हैं और वो फ़िलहाल 4556 वोटों से आगे हैं। भाजपा के नीरज कुमार को 11081 वोट मिले हैं। जबकि आरजेडी की रेखा कुमारी तीसरे नंबर पर हैं। भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्यक्ष नीतीश नबीन के इस्तीफे से रिक्त हुई बांकीपुर सीट पटना के शहरी इलाक़े में मौजूद है और इसे बीजेपी का मज़बूत गढ़ माना जाता है।