दुर्गा पूजा में खींचनी हैं शानदार तस्वीरें? ₹30,000 से कम में खरीदें ये 5 कैमरा स्मार्टफोन

Best Camera Smartphones Under ₹30,000: दुर्गा पूजा शुरू होते ही सड़कों पर रोशनी, जगमगाते दीये और लोगों की भीड़ देखने को मिलती है। ऐसे माहौल में अच्छी तस्वीरें खींचने के लिए एक बढ़िया कैमरा फोन होना जरूरी है। अगर आप ज्यादा पैसे खर्च किए बिना नया स्मार्टफोन खरीदना चाहते हैं, तो आपके लिए अच्छा मौका है। दरअसल, Amazon और Flipkart पर इन दिनों खास सेल चल रही है। इन सेल में ₹30,000 से कम कीमत वाले कई स्मार्टफोन पर छूट मिल रही है। इसके अलावा, ग्राहकों को बैंक ऑफर और पुराने फोन को एक्सचेंज करने पर अतिरिक्त छूट का फायदा भी मिल सकता है।

यहां कुछ ऐसे स्मार्टफोन दिए गए हैं जो खास तौर पर बेहतरीन कैमरा के लिए जाने जाते हैं। आप इस फेस्टिव सीजन में 30,000 रुपये से कम कीमत वाले इन स्मार्टफोन्स पर विचार कर सकते हैं।

Samsung Galaxy A56 5G

Samsung Galaxy A56 5G में तीन रियर कैमरे दिए गए हैं, जो अलग-अलग तरह की तस्वीरें खींचने में अच्छा प्रदर्शन करते हैं। यह फोन फ्रंट और रियर, दोनों कैमरों से 4K वीडियो रिकॉर्डिंग को सपोर्ट करता है। इसके 50MP के मेन कैमरे से साफ और शानदार रंगों वाली तस्वीरें मिलती हैं। साथ ही, यह कैमरा रोशनी और अंधेरे के बीच के अंतर को भी अच्छी तरह कैप्चर करता है।

फोन में 12MP का अल्ट्रावाइड कैमरा भी दिया गया है, जो मेन कैमरे जैसी ही अच्छी तस्वीरें खींचता है। वहीं, इसका 12MP का फ्रंट कैमरा सेल्फी में चेहरे को साफ दिखाता है और त्वचा के रंग को भी प्राकृतिक बनाए रखता है।

Vivo V60e 5G

Vivo V60e 5G भी ₹30,000 से कम कीमत में अच्छी फोटोग्राफी के लिए एक बढ़िया विकल्प है। इसकी सबसे बड़ी खासियत 200MP का प्राइमरी कैमरा है। इसमें OIS यानी ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन का सपोर्ट भी मिलता है, जिससे रात में तस्वीरें खींचते और वीडियो रिकॉर्ड करते समय धुंधलापन कम होता है।

फोन में Vivo की खास रियर रिंग लाइट भी दी गई है, जो कम रोशनी में तस्वीरें खींचने और पोर्ट्रेट फोटो को बेहतर बनाने में मदद करती है। इसके अलावा, फोन में 50MP का सेल्फी कैमरा मिलता है। यह ग्रुप सेल्फी लेते समय भी लोगों के चेहरों पर फोकस बनाए रखने में मदद करता है।

Motorola Edge 70 Fusion

Motorola Edge 70 Fusion में एक संतुलित कैमरा सिस्टम दिया गया है, जिसमें मुख्य रूप से भरोसेमंद 50MP का सोनी LYTIA 710 प्राइमरी सेंसर लगा है। इस कीमत वाले अन्य स्मार्टफोन्स के मुकाबले, इसमें 13MP का हाई-रिजॉल्यूशन अल्ट्रावाइड सेंसर है, जो सामान्य 8MP अल्ट्रावाइड सेंसर की तुलना में कहीं अधिक स्पष्ट तस्वीरें देता है। हालांकि, इसमें कोई समर्पित टेलीफोटो सेंसर नहीं है, फिर भी इसके 2x जूम वाले शॉट्स जल्दी फोटो लेने के काम के लिए काफी अच्छे हैं। इसका 32MP का फ्रंट कैमरा तेज बैकग्राउंड कंट्रास्ट को भी आसानी से संभाल लेता है, जिससे तस्वीरें प्राकृतिक रंगों और एकसमान स्किन टोन के साथ आती हैं।

Vivo T5 Pro

हालांकि, Vivo T5 Pro अपनी बड़ी 9,020 mAh बैटरी के लिए सबसे ज्यादा जाना जाता है, लेकिन इसका कैमरा सिस्टम भी हर तरह की लाइटिंग में एक भरोसेमंद ‘पॉइंट-एंड-शूट’ सेटअप की तरह काम करता है। इस डिवाइस में 50MP का सोनी IMX882 प्राइमरी सेंसर है, जो बहुत ही शार्प और बेहतरीन तस्वीरें देता है। इसके अलावा, इसका 32MP का सेल्फी कैमरा बहुत ही शानदार क्लैरिटी देता है, जिसमें चेहरे की बारीक रेखाएं और बाल भी एकदम साफ दिखाई देते हैं। इन सभी खूबियों की वजह से, यह पूरे दिन फोटोग्राफी करने के लिए एक बेहतरीन फोन है—खासकर तब, जब इसकी मौजूदा कीमत 30,000 रुपये से भी कम है।

OnePlus Nord CE 6 Lite

OnePlus Nord CE 6 Lite, फोटोग्राफी के लिए 30,000 रुपये से कम कीमत में एक बेहतरीन विकल्प है। इसमें 50MP का प्राइमरी कैमरा और साथ ही 2MP का सेंसर दिया गया है। इसके अलावा, इस फोन में 32MP का फ्रंट कैमरा भी मौजूद है।

सीधी धूप में इस फोन से ली गई तस्वीरों में बारीक डिटेल्स साफ नजर आती हैं, साथ ही रंगों का सटीक रिप्रजेंटेशन और बेहतरीन सैचुरेशन देखने को मिलता है। पोर्ट्रेट मोड के लिए, 50MP का सेंसर और 2MP का डेप्थ सेंसर मिलकर काम करते हैं, जिससे एज डिटेक्शन (किनारों की पहचान) काफी सटीक रहती है। 8MP का फ्रंट कैमरा भी बेहतरीन सेल्फी अनुभव देता है, जिसमें रंगों का सटीक रिप्रजेंटेशन और शार्प फोकस मिलता है।

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Southwest monsoon: 12% कम बारिश के साथ पूरी तरह वापस लौटा दक्षिण पश्चिम मॉनसून, 21 अक्टूबर तक उत्तर पूर्व मॉनसून फिर लाएगा बारिश

Southwest monsoon: भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने गुरुवार को कहा कि देश से दक्षिण पश्चिम मॉनसून पूरी तरह वापस चला गया है। मौसम एजेंसी ने इसी दिन दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में उत्तर पूर्वी मॉनसून के आने का भी ऐलान किया। आईएमडी के मुताबिक, उत्तर पूर्व मॉनसून की वजह से तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, कोस्टल आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, साउथ अंदरूनी कर्नाटक, केरल और माहे में बारिश हुई।

उत्तर पूर्व मॉनसून के आने के बाद 21 अक्टूबर तक दक्षिण प्रायद्वीप भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश के साथ बारिश का अनुमान है। भारत में दो बड़े मॉनसून सिस्टम होते हैं, जून से सितंबर तक दक्षिण पश्चिम मॉनसून और अक्टूबर से दिसंबर तक उत्तर पूर्व मॉनसून रहता है, जिसे रिट्रीटिंग मॉनसून भी कहा जाता है।

दक्षिण पश्चिम मॉनसून को भारत की खेती और अर्थव्यवस्था के लिए बहुत जरूरी माना जाता है क्योंकि यह सीधे खरीफ फसल के मौसम को प्रभावित करता है। वहीं, उत्तर पूर्व मॉनसून कम आक्रामक होता है, लेकिन यह रबी फसल की पैदावार को सहयोग करने में, खासकर दक्षिण के राज्यों में, एक अहम रोल निभाता है।

आईएमडी ने कहा कि इस साल दक्षिण पश्चिम मॉनसून 759.4 mm बारिश के साथ खत्म हुआ, जो सामान्य औसत 868.6 mm से 12.6% कम था। एजेंसी ने बारिश में कमी के लिए ट्रॉपिकल प्रशांत महासागर में मौजूदा एल नीनो परिस्थिति को जिम्मेदार बताया। यह जून में सामने आया था और लगातार मजबूत होता जा रहा है।

एल नीनो मौसम का एक पैटर्न है जो पैसिफिक रीजन में समुद्र के तापमान और वातावरण परिस्थितियों में बदलाव से जुड़ा है। यह आमतौर पर भारत में मॉनसून की बारिश को कम करता है, जबकि इसका उल्टा फेज, ला नीना, अक्सर दुनिया का तापमान ठंडा करता है और बारिश के पैटर्न पर असर डाल सकता है।

वर्ल्ड मेटियोरोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (WMO) समेत वैश्विक मौसम एजेंसियों ने अनुमान लगाया है कि मौजूदा एल नीनो प्रभाव दिसंबर 2026 में शिखर पर हो सकता है। यह 1950 में ऑब्जर्वेशन शुरू होने के बाद से अब तक का सबसे मजबूत रिकॉर्ड बन सकता है। ये हालात फरवरी 2027 तक जारी रहने की उम्मीद है।

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मुस्कान कैदी नंबर 396, साहिल 395… जेल में बदली पहचान, जानिए जेल में दोनों को क्या काम मिलेगा?

मुस्कान कैदी नंबर 396, साहिल 395… जेल में बदली पहचान, जानिए जेल में दोनों को क्या काम मिलेगा?

meerut neela durm hatayakand

कभी नाम से पहचाने जाने वाले मुस्कान और साहिल की अब मेरठ जिला जेल में नई पहचान बन गई है। साहिल को कैदी नंबर 395 और मुस्कान को कैदी नंबर 396 आवंटित किया गया है। चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत से फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद दोनों की जेल में दिनचर्या बदलने लगी है। अब उनकी पहचान, कामकाज और निगरानी की व्यवस्था सजायाफ्ता कैदियों के लिए निर्धारित नियमों के मुताबिक की जा रही है। जेल की चारदीवारी के भीतर दोनों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल अपने भविष्य और आगे की कानूनी लड़ाई को लेकर है।

बैरक भी अलग, जिम्मेदारियां भी होंगी अलग-अलग

मेरठ जेल में मुस्कान को महिला बंदियों की बैरक संख्या 12बी में रखा गया है, जबकि साहिल बैरक नंबर 15 में रहेगा। दोनों की गिनती और रिकॉर्ड कैदी नंबर के आधार पर दर्ज किए जा रहे हैं। जेल में दोनों अलग-अलग रहेंगे और उनकी दिनचर्या भी अलग होगी।

 

जेल प्रशासन के मुताबिक, सजायाफ्ता कैदियों के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार उनके कामकाज की व्यवस्था की जाती है। इसी क्रम में मुस्कान ने सिलाई और कढ़ाई सीखने की इच्छा जताई थी। अब वह जेल में कपड़ों की सिलाई का काम करेगी। दूसरी ओर, साहिल को खेतीबाड़ी और बागवानी से जुड़े काम में लगाया जाएगा। इस तरह जेल के भीतर दोनों की दिनचर्या अलग-अलग जिम्मेदारियों के साथ आगे बढ़ेगी।

लखनऊ और आगरा जेल भेजे जाने की संभावना

मेरठ जेल में दोनों की आगे की व्यवस्था को लेकर भी चर्चा है। जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, जेल के नियमों के तहत दोनों को दूसरी जेल में स्थानांतरित किया जा सकता है। मुस्कान को लखनऊ स्थित नारी निकेतन और साहिल को आगरा जेल भेजे जाने की संभावना है। हालांकि, यह फैसला संबंधित स्थानों पर उपलब्धता और नियमानुसार प्रक्रिया के आधार पर आगामी दिनों में लिया जा सकता है।

 

फिलहाल दोनों मेरठ जिला जेल में ही हैं। दूसरी जेल में स्थानांतरण को लेकर अंतिम निर्णय होने तक उनकी व्यवस्था जेल प्रशासन के निर्देशों के अनुसार संचालित होगी।

भविष्य की चिंता…. 

अदालत के फैसले के बाद मुस्कान और साहिल के सामने अब कानूनी प्रक्रिया का अगला चरण है। दोनों अपने भविष्य को लेकर चिंतित बताए जा रहे हैं और जेल प्रशासन से यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आगे क्या होगा और अपील की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी। फांसी की सजा के बाद दोनों की कानूनी लड़ाई का अगला पड़ाव अब महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, सजा के खिलाफ अपील और आगे की न्यायिक प्रक्रिया का निर्णय संबंधित कानूनी कार्यवाही के तहत होगा।

दोनों बच्चियों की चिंता में भावुक हो रही मुस्कान

अब दोनों के सामने जेल द्वारा निर्धारित दिनचर्या के साथ-साथ आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी।वहीं मुस्कान के लिए अपनी बच्चियों की चिंता सर्वोपरि है। उसके आंखें बार-बार नम हो रही है कि यदि उसे जल्दी ही फांसी हो गई तो उसकी छोटी बेटी की देखभाल कौन करेगा।

 

Yes Bank News: यस बैंक ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर तोड़ी चुप्पी, शेयर 14% क्रैश होने के बाद कही ये बात

Yes Bank News: प्राइवेट सेक्टर के यस बैंक के शेयरों में गुरुवार, 15 अक्टूबर को भारी गिरावट आई। कारोबार के दौरान स्टॉक करीब 14% तक टूट गया। मामला 8,415 करोड़ रुपये के AT-1 बॉन्ड से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने इन बॉन्ड को राइट ऑफ करने का फैसला रद्द कर दिया है। इसके बाद बैंक ने कहा कि वह कोर्ट के फैसले और उसके असर की जांच कर रहा है।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने भी शेयर में गिरावट को लेकर बैंक से जवाब मांगा था। इसके बाद यस बैंक ने कहा कि वह फैसले की पूरी कॉपी हासिल कर रहा है। उसे पढ़ने और उसके असर को समझने के बाद बैंक जरूरत के मुताबिक आगे जानकारी देगा।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर को यस बैंक के 8,415 करोड़ रुपये के AT-1 बॉन्ड राइट ऑफ करने के फैसले को खारिज कर दिया। कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के 2023 के फैसले को बरकरार रखा। यस बैंक और दूसरे पक्षों की अपील भी खारिज कर दी गई।

कोर्ट के मुताबिक, बैंक के पुनर्गठन की अंतिम योजना में इन बॉन्ड को राइट ऑफ करने का साफ प्रावधान नहीं था। इसलिए बैंक के एडमिनिस्ट्रेशन को ऐसा करने का अधिकार नहीं था।

AT-1 बॉन्ड क्या होते हैं?

AT-1 बॉन्ड बैंकों के लिए पूंजी जुटाने का एक तरीका हैं। बैंक इनसे निवेशकों से पैसा जुटाते हैं और बदले में ब्याज देते हैं। लेकिन इनमें जोखिम भी ज्यादा होता है। बैंक की वित्तीय हालत बहुत खराब होने पर नियमों और शर्तों के तहत इन बॉन्ड की रकम घटाई या पूरी तरह खत्म की जा सकती है।

यस बैंक ने दिसंबर 2016 में 3,000 करोड़ रुपये के AT-1 बॉन्ड जारी किए थे। इसके बाद अक्टूबर 2017 में 5,415 करोड़ रुपये के और बॉन्ड जारी किए गए। इस तरह कुल रकम 8,415 करोड़ रुपये थी।

2020 में क्या हुआ था?

मार्च 2020 में यस बैंक गंभीर वित्तीय संकट में फंस गया था। उस समय केंद्र सरकार ने बैंक पर करीब एक महीने के लिए मोरेटोरियम लगाया था। यानी बैंक से पैसे निकालने पर कुछ समय के लिए पाबंदियां लगाई गई थीं। इसके बाद बैंक के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हुई।

इसी दौरान नियुक्त एडमिनिस्ट्रेशन ने AT-1 बॉन्ड को राइट ऑफ कर दिया। इसका मतलब था कि बॉन्डधारकों की निवेश रकम खत्म कर दी गई। बॉन्डधारकों ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी।

बॉन्डधारक कोर्ट क्यों पहुंचे?

मई 2020 में Axis Trustee Services ने बॉन्डधारकों की ओर से बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। इसमें बॉन्ड राइट ऑफ करने के फैसले को चुनौती दी गई। वहां बॉन्डधारकों के पक्ष में फैसला आया। मार्च 2023 में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यस बैंक इसके कानूनी और वित्तीय असर की समीक्षा कर रहा है। बैंक ने कहा है कि फैसले के अलावा उसके पास ऐसी कोई दूसरी जानकारी नहीं है, जिसका खुलासा करना जरूरी हो।

यस बैंक का स्टॉक 14% क्रैश

यस बैंक का शेयर 14.53% गिरकर 18.12 रुपये पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 20% के लोअर सर्किट के साथ 16.96 रुपये तक फिसला था। हालांकि, बाद में थोड़ी रिकवरी हुई।

Q2 Results: आईटी कंपनी को ₹1586 करोड़ का मुनाफा, डिविडेंड और बोनस शेयर का ऐलान

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Caller Name Display Service : क्या है कॉलर नेम डिस्प्ले की व्यवस्था, मोबाइल यूजर्स को क्या फायदा होगा, पूरी खबर में पढ़िए

Caller Name Display Service : क्या है कॉलर नेम डिस्प्ले की व्यवस्था, मोबाइल यूजर्स को क्या फायदा होगा, पूरी खबर में पढ़िए

telecom sector

मोबाइल फोन पर कॉल करने वाले की पहचान करना अब आसान हो सकता है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने 1 नवंबर से सभी टेलीकॉम ग्राहकों के लिए कॉलर नेम डिस्प्ले (Caller Name Display) अनिवार्य कर दिया है। इस निर्देश के तहत टेलीकॉम कंपनियों को कॉलर का नाम दिखाने की व्यवस्था लागू करने के साथ-साथ इस सुविधा से जुड़ी ग्राहकों की शिकायतों का समाधान भी करना होगा।

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इस कदम का मुख्य उद्देश्य फोन कॉल के दौरान पारदर्शिता बढ़ाना और मोबाइल यूजर्स को आने वाली कॉल करने वाले व्यक्ति की पहचान करने में मदद देना है।

 

क्या है कॉलर नेम डिस्प्ले की व्यवस्था?

 

कॉलर नेम डिस्प्ले ऐसी सुविधा है, जिसके जरिए मोबाइल फोन पर इनकमिंग कॉल आने के दौरान कॉल करने वाले का नाम दिखाई दे सकता है। इससे यूजर्स को यह समझने में मदद मिल सकती है कि उन्हें किसकी कॉल आ रही है। दूरसंचार विभाग के इस निर्देश का उद्देश्य कॉल करने वाले की पहचान से जुड़ी व्यवस्था को बेहतर बनाना है, ताकि ग्राहकों को अनजान नंबरों से आने वाली कॉल के बारे में अधिक जानकारी मिल सके।

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टेलीकॉम कंपनियों की क्या होगी जिम्मेदारी?

 

दूरसंचार विभाग के निर्देश के अनुसार, टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं को कॉलर नेम डिस्प्ले की अनिवार्य व्यवस्था का पालन सुनिश्चित करना होगा। इसके अलावा, यदि किसी ग्राहक को इस सुविधा से संबंधित परेशानी होती है या वह शिकायत दर्ज कराता है, तो कंपनी को उसका समाधान करना होगा।

 

इससे कॉलर नेम डिस्प्ले सुविधा के संचालन के साथ-साथ ग्राहकों की समस्याओं के निपटारे की जिम्मेदारी भी टेलीकॉम ऑपरेटरों पर होगी।

 

मोबाइल यूजर्स को क्या फायदा होगा?

 

कॉलर नेम डिस्प्ले की व्यवस्था का उद्देश्य फोन पर संपर्क करने वाले व्यक्ति की पहचान को आसान बनाना और दूरसंचार सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाना है। हालांकि, यह सुविधा अपने आप में हर अनजान कॉल या संभावित धोखाधड़ी वाली कॉल की पहचान की गारंटी नहीं देती। इस निर्देश को लागू करने की विस्तृत प्रक्रिया, नाम दिखाने के तकनीकी मानकों और ग्राहकों की शिकायतों के निपटारे से जुड़े अतिरिक्त विवरणों की जानकारी अभी सामने आनी बाकी है।

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ से पहले आकाश अंबानी ने कहा-जियो का प्रति GB प्राइस दुनिया में सबसे कम

रिलायंस इंडस्ट्रीज की टेलीकॉम और डिजिटल सर्विसेज इकाई जियो ने बड़ा प्लान बनाया है। कंपनी का टारगेट वित्त वर्ष 2031 तक भारत की अनुमानित 1.4 लाख करोड़ डॉलर की डिजिटल इकोनॉमी का बड़ा हिस्सा हासिल करना है। इसके लिए कंपनी अपने बड़े सब्सक्राइबर बेस, 5जी एक्सपैंशन और 5जी क्षमता का इस्तेमाल करेगी। जियो प्लेटफॉर्म्स के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने कंपनी के मेगा आईपीओ से पहले इस बारे में बताया।

जियो का प्रति GB प्राइस दुनिया में सबसे कम

अंबानी ने कहा कि जियो का प्रति GB प्राइस दुनिया में सबसे कम है। उन्होंने बताया कि 2016 में कंपनी की टेलीकॉम मार्केट में एंट्री के बाद देश में डिजिटल कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आया है। अभी इंडिया के वायरलेस डेटा ट्रैफिक का 60 फीसदी से ज्यादा हिस्सा जियो के पास है। इस साल जून के अंत में कंपनी के सब्सक्राइबर्स की संख्या 53.33 करोड़ थी। इसमें 5जी के 28.5 करोड़ यूजर्स शामिल हैं।

प्रति यूजर एवरेज मंथली डेटा कंजम्प्शन 43.7 जीबी

इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी का प्रति यूजर एवरेज मंथली डेटा कंजम्प्शन 43.7 जीबी था। अंबानी ने कहा, “हमें उम्मीद है कि FY31 तक भारत की डिजिटल इकोनॉमी 1.4 लाख करोड़ डॉलर की होगी। इसका बड़ा हिस्सा हमारे पास होगा।” उन्होंने कहा कि कंपनी के लिए मोबिलिटी, होम ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज सर्विसेज और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़े मौके हैं।

आईपीओ से पहले कंपनी का अच्छा प्रदर्शन 

जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ इस महीने आ रहा है। इससे पहले कंपनी का प्रदर्शन अच्छा रहा है। FY26 में कंपनी का EBITDA 76,225 करोड़ रुपये रहा। FY24 और FY26 के बीच एबिड्टा की सीएजीआर 17.8 फीसदी रही। कंपनी का एबिड्टा मार्जिन इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 53.3 फीसदी रहा।

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जियो की स्ट्रेटेजी टेक्नोलॉजी, कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित

अंबानी ने कहा कि जियो की स्ट्रेटेजी टेक्नोलॉजी, कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित है। मोबिलिटी, होम ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज सर्विसेज और इंटरनेशनल सर्विसेज कंपनी के लिए तीन प्रमुख ग्रोथ इंजन हैं। उन्होंने कहा कि टेलीकॉम मार्केट में जियो की एंट्री के बाद देश में इंटरनेट की स्पीड में बड़ा बदलाव आया है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेंट मीडिया ट्रस्ट के पास है, जिसकी रिलायंस इंडस्ट्रीज एकमात्र लाभार्थी है।

यूपी में 9 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित

यूपी में 9 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित

योगी सरकार के नेतृत्व में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश ने घरेलू रूफटॉप सोलर के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में 9 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं और 3,000 मेगावाट (3 गीगावाट) से अधिक सौर ऊर्जा क्षमता जुड़ चुकी है। यह उपलब्धि प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार, घरेलू बिजली बिलों में बचत, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घरेलू रूफटॉप सोलर की दैनिक स्थापना दर से तुलना

वर्ष 2026 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में जनवरी से जून के दौरान लगभग 1.89 गीगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित की गई, जो औसतन लगभग 10.4 मेगावाट प्रतिदिन है। अमेरिका में आवासीय सोलर स्थापना की दर पहली तिमाही में लगभग 13.1 मेगावाट प्रतिदिन और दूसरी तिमाही में लगभग 10.9 मेगावाट प्रतिदिन रही। वहीं, जर्मनी में भवनों पर स्थापित सोलर क्षमता की वृद्धि पहली छमाही में औसतन लगभग 17.5 मेगावाट प्रतिदिन रही। इस अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 9–10 मेगावाट घरेलू रूफटॉप सोलर क्षमता जोड़ने की निरंतर दर प्रदेश के सौर ऊर्जा अभियान के व्यापक पैमाने को दर्शाती है। यह दर ऑस्ट्रेलिया के व्यापक रूफटॉप बाजार की दैनिक औसत वृद्धि के आसपास है। 

पात्र परिवारों को ₹1.08 लाख तक की सब्सिडी

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पात्र लाभार्थियों को निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार अधिकतम ₹1.08 लाख तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। योजना की निर्धारित पात्रता एवं प्रक्रिया के अनुसार इच्छुक उपभोक्ता 31 मार्च 2027 तक आवेदन कर सकते हैं। यह वित्तीय सहायता घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित करने की शुरुआती लागत कम करने में सहायक है।

9500 से अधिक वेंडर्स के नेटवर्क से 1 लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष रोजगार

इस दौरान यूपी नेडा डायरेक्टर रविन्दर सिंह ने बताया कि प्रदेश में 9,500 से अधिक वेंडर्स के नेटवर्क के माध्यम से सोलर प्लांट की स्थापना, उपकरणों की आपूर्ति, परिवहन, रखरखाव और संबंधित सेवाओं में 1 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है। सोलर क्षेत्र के विस्तार से युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल रहा है।

प्रतिदिन लगभग 1.35 करोड़ यूनिट स्वच्छ बिजली उत्पादन की अनुमानित क्षमता

प्रदेश में स्थापित 3000 मेगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता के आधार पर, यदि प्रति किलोवाट प्रतिदिन औसतन 4.5 यूनिट बिजली उत्पादन माना जाए, तो प्रतिदिन लगभग 1.35 करोड़ यूनिट स्वच्छ बिजली उत्पादन की क्षमता बनती है। ₹6.50 प्रति यूनिट की सांकेतिक दर से इस बिजली का अनुमानित आर्थिक मूल्य प्रतिदिन लगभग ₹8.78 करोड़ और वार्षिक आधार पर लगभग ₹3,202 करोड़ होता है। वास्तविक बिजली उत्पादन और आर्थिक मूल्य धूप, मौसम, प्लांट की कार्यक्षमता तथा लागू बिजली दरों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

स्थानीय विनिर्माण और आर्थिक विकास को बढ़ावा

रूफटॉप सोलर के विस्तार से सोलर मॉड्यूल, इन्वर्टर, बैटरी, केबल, माउंटिंग स्ट्रक्चर और अन्य उपकरणों की आपूर्ति एवं विनिर्माण गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलता है। इंस्टॉलेशन और रखरखाव से जुड़े स्थानीय उद्यमों को भी नए अवसर प्राप्त होते हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना बिजली खर्च में बचत, पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय रोजगार सृजन और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। रूफटॉप सोलर का निरंतर विस्तार प्रदेश की हरित अर्थव्यवस्था और स्वच्छ ऊर्जा आधारित विकास को नई गति प्रदान कर सकता है।

 

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस शिक्षा विरोधी, सीएम योगी ने साधा निशाना

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस शिक्षा विरोधी, सीएम योगी ने साधा निशाना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर शिक्षा विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी हो या कांग्रेस, ये दोनों शिक्षा विरोधी हैं। ऐसा न होता तो प्रदेश में शिक्षा की ये दुर्गति नहीं होती। शिक्षा में अव्यवस्था होने पर सबसे पहले शिक्षकों का सम्मान प्रभावित होता है। स्नातक युवाओं के सामने भविष्य की चिंता खड़ी होती है, वे हताश और निराश होते हैं, पलायन पर मजबूर होते हैं। समाजवादी पार्टी के समय प्रदेश में यही सब हुआ। विश्वविद्यालय नहीं खोले गए, महाविद्यालयों को मान्यता नहीं दी गई और अराजकता चरम पर थी। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन और प्रदेश सरकार के प्रयासों से शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो रहा है, युवाओं को नौकरी मिल रही है, शिक्षकों को सम्मान और सुरक्षा मिल रही है तथा शिक्षण संस्थानों का कायाकल्प किया जा रहा है।

2017 के पहले नहीं था कोई विजन

मुख्यमंत्री ने मीरजापुर में आयोजित शिक्षक सम्मेलन में कहा कि विंध्यवासिनी धाम की पावन धरती श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है। शारदीय नवरात्रि में लाखों श्रद्धालु मां विंध्यवासिनी, मां अष्टभुजी और काली खोह में मां काली के दर्शन, पूजा-अर्चना कर मातृशक्ति के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं। मोदी जी के नेतृत्व में मां विंध्यवासिनी धाम में भव्य कॉरिडोर का निर्माण हो चुका है।

मां गंगा के पावन घाटों का निर्माण कार्य भी पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। ये सुविधाएं वर्ष 2017 से पहले भी दी जा सकती थीं, लेकिन तब इस धनराशि का दुरुपयोग माफिया को पालने और गरीबों की जमीनों पर कब्जा करने के लिए किया जाता था। हमारी सरकार ने उसी धनराशि का दुरुपयोग रोका और उसे विकास कार्यों में लगाया। इसी का परिणाम है कि प्रतिदिन दो लाख श्रद्धालु मां विंध्यवासिनी धाम आ रहे हैं। इसके लिए इच्छाशक्ति और वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर निर्णय लेने की सामर्थ्य चाहिए, लेकिन आजादी के बाद सत्ता में आए लोगों के पास कोई स्पष्ट विजन या दिशा नहीं थी।

कांग्रेस-सपा सिर्फ परिवार तक सीमित रहीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस व सपा में हर काम परिवार के नाम और परिवार तक सीमित रखने की प्रवृत्ति रही। कांग्रेस केवल नेहरू परिवार के लिए और समाजवादी पार्टी सैफई परिवार तक सीमित रही। इन लोगों ने प्रदेश को बेगाना बना दिया था और इसीलिए जनता ने इन्हें बेगाना बना दिया, इनकी छुट्टी कर दी। सपा का वास्तविक चेहरा देखना हो तो राज्यसभा में इसके प्रत्याशियों के चयन को देखिए। ये पीडीए-पीडीए चिल्लाते हैं, लेकिन जब राज्यसभा चुनाव आए तो अपने चचाजान और मुंबई के धन्ना सेठ को प्रत्याशी बना दिया। इन्हें कोई और दलित, वंचित, पिछड़ा या अगड़ा नहीं दिखाई दिया। अगर इन वर्गों पर विश्वास नहीं था तो कम से कम किसी मुस्लिम को ही प्रत्याशी बना देते, लेकिन उसे भी नहीं बनाया। इसके विपरीत भारतीय जनता पार्टी ने आठ टिकट दिए, जिनमें तीन फॉरवर्ड, तीन बैकवर्ड और दो अनुसूचित जाति के प्रत्याशी थे।

पार्टी ने सामान्य कार्यकर्ताओं को अवसर दिया, किसी धन्ना सेठ को नहीं, क्योंकि कार्यकर्ता मेहनत करता है और अपना समय देता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में एनडीए ने आठ प्रत्याशी दिए और आठों जीते। सपा ने परिवार और धन्ना सेठ को टिकट दिया, जिसका परिणाम यह हुआ कि पीडीए की हवा निकल गई।
 

रिश्तेदार को बना दिया था आयोग का अध्यक्ष

सीएम योगी ने कहा कि समाजवादी पार्टी के समय अनिल यादव नाम के व्यक्ति थे, जो सैफई परिवार के रिश्तेदार थे। वह पद के योग्य नहीं थे, फिर भी उन्हें आयोग का अध्यक्ष बना दिया गया। हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी के साथ उन्हें कुर्सी से हटाया और कहा कि वह उस पद के योग्य नहीं हैं। उस समय युवा सड़कों पर चिल्लाता था, लेकिन लखनऊ में बैठी अखिलेश यादव की सरकार कानों में तेल डालकर खर्राटे लेती थी। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जाता था। आज प्रदेश का युवा नौकरी प्राप्त कर रहा है और स्टार्टअप इकोसिस्टम के माध्यम से दूसरों को रोजगार भी दे रहा है।

मीरजापुर मंडल में आज दो मेडिकल कॉलेज

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी को चार बार प्रदेश में शासन करने का अवसर मिला, लेकिन उस समय मीरजापुर मंडल के तीन जनपदों- मीरजापुर, सोनभद्र और भदोही में न कोई मेडिकल कॉलेज था और न कोई विश्वविद्यालय। आज मंडल में दो मेडिकल कॉलेज और दो विश्वविद्यालय सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। मीरजापुर में मां विंध्यवासिनी के नाम पर विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेज भी शुरू हो गया है। भदोही में काशी नरेश विश्वविद्यालय तथा सोनभद्र में मेडिकल कॉलेज शुरू हो गया है। सपा शासन में मंडल में न सड़क थी, न बिजली, न पानी, न सुरक्षा, न सरकार की सहायता, न शिक्षा और न नौकरी। सैफई सिंडिकेट जिसे चाहता था, उसे नौकरी मिलती थी। नौकरियों पर भी एक ही परिवार का कब्जा था। हमारी सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाया है।

साढ़े नौ वर्षों में साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी

सीएम ने कहा कि एनडीए और भाजपा के नेतृत्व में प्रदेश में सरकार बनने के बाद साढ़े नौ वर्षों में साढ़े नौ लाख नौजवानों व स्नातकों को सरकारी नौकरी दी गई है। सुरक्षा का बेहतरीन वातावरण बनाया गया, जिससे 65 लाख लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में नौकरियां मिली है। वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट योजना के तहत तीन करोड़ से ज्यादा रोजगार विकसित किए गए। आस्था भी आर्थिकी का कारण बन सकती है। प्रयागराज का महाकुंभ, मां विंध्यवासिनी धाम और काशी विश्वनाथ धाम इसके उदाहरण हैं। 
 

अयोध्या में वर्ष 2017 से पहले स्थिति ऐसी थी कि रामलला के दर्शन के लिए संकरे मार्गों से गुजरना पड़ता था और रामलला टाट के नीचे रहने के लिए मजबूर थे। स्वतंत्र भारत हम सबको ललकारता था कि क्या यही स्वाधीनता है कि हमारे प्रभु टाट के नीचे रहें? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में आज भगवान राम के भव्य मंदिर का निर्माण हो गया है। विपक्ष इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं। जिन लोगों ने राम मंदिर का विरोध किया और आस्था पर कुठाराघात किया, वे आज अयोध्या के बारे में उपदेश देते फिर रहे हैं।

दो करोड़ युवाओं को देंगे टैबलेट, 62 लाख को मिल चुके

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की अनेक योजनाएं युवाओं के लिए चल रही हैं। दो करोड़ युवाओं को टैबलेट देने की योजना है, जिनमें 62 लाख युवाओं को टैबलेट दिए जा चुके हैं। चुनाव संपन्न होने के बाद फिर बड़े-बड़े कार्यक्रम आयोजित होंगे और स्नातक युवाओं को टैबलेट उपलब्ध कराकर डिजिटल अभियान को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग सेंटर प्रारंभ किए गए हैं। ये केंद्र निःशुल्क हैं और युवा भौतिक तथा वर्चुअल दोनों माध्यमों से इनका लाभ ले सकते हैं। नीट, आईआईटी-जेईई, यूपीएससी, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सरकार युवाओं के साथ खड़ी है। सरकार युवाओं की प्रतिभा और सामर्थ्य पर विश्वास करती है और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध करा रही है।

15 लाख शिक्षकों को पांच लाख का स्वास्थ्य बीमा कवर

सीएम ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले शिक्षकों को न सम्मान था, न सुरक्षा और न स्वास्थ्य की सुविधा। अब सरकार ने बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के स्ववित्तपोषित संस्थानों सहित 15 लाख शिक्षकों को उनके परिवार सहित प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर दिया है। शिक्षकों को सामाजिक सुरक्षा की गारंटी भी दी गई है। किसी घटना या दुर्घटना की स्थिति में 40 लाख रुपये से लेकर डेढ़ करोड़ रुपये तक की सामाजिक सुरक्षा की सुविधा उपलब्ध होगी। सरकार शिक्षकों को सम्मान, सुरक्षा और सुविधाएं देती है तथा शिक्षण संस्थानों को कायाकल्प से जोड़ती है। ये काम वर्ष 2017 से पहले भी हो सकते थे, लेकिन उस समय न दृष्टि थी और न विजन। जब विजन ही नहीं होगा तो मिशन कैसे पूरा होगा।

माफिया के सामने घुटने टेकने वाले आज सुरक्षा की बात कर रहे

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन्होंने प्रदेश के सामने पहचान का संकट खड़ा किया था, जो माफिया के सामने गिड़गिड़ाते थे, घुटने टेकते थे तथा नाक रगड़ते थे, वे आज सुरक्षा की बात कर रहे हैं। पहले नवरात्रि के दौरान दुर्गा जी की मूर्ति रखने के लिए श्रद्धालुओं को मशक्कत करनी पड़ती थी। मंदिरों में सुविधाओं का अभाव, गंदगी, बिजली की कमी, अराजकता और अव्यवस्था प्रदेश की पहचान बन गई थी। आज ऐसी समस्याएं नहीं हैं। सरकार जनता के साथ और जनता के द्वार पर खड़ी है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत हर ब्लॉक में शिविर लगाए गए और लोगों को शासन की योजनाओं से जोड़ने का काम हुआ है। मतदाताओं को भी अच्छा प्रतिनिधि चुनकर भेजना चाहिए, जो उनकी आवाज उठा सके, उनके हितों का संवर्धन कर सके और शासन से योजनाएं स्वीकृत कराकर उन तक पहुंचा सके। गलत प्रतिनिधि चुनने पर समस्या के समाधान के रास्ते में बैरियर खड़ा हो जाता है।

सपा वही बैरियर है, जो समस्याओं का समाधान नहीं होने देती

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी वही बैरियर है, जो समस्याओं का समाधान नहीं होने देती। मां विंध्यवासिनी कॉरिडोर में इन्होंने व्यवधान पैदा किया। मेडिकल कॉलेज न बने, विश्वविद्यालय न बने, इसके लिए रोड़े अटकाने का प्रयास किया। भदोही में विश्वविद्यालय, मीरजापुर और भदोही में मां गंगा पर पुल व घाटों के निर्माण और सोनभद्र में मेडिकल कॉलेज के निर्माण में भी व्यवधान पैदा करने का प्रयास किया। इन लोगों को यही करना है तो इन्हें बैरियर ही बना रहने दीजिए, चुनकर मत भेजिए। इस बैरियर को एक झटके में उखाड़कर बाहर कर देंगे।

 

इस अवसर पर प्रभारी मंत्री मिर्जापुर नंद गोपाल गुप्ता नंदी, तकनीकी शिक्षा मंत्री आशीष पटेल, समाज कल्याण विभाग राज्य मंत्री संजीव गौड़, सांसद डॉ विनोद बिंद, उपाध्यक्ष राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग सोहन लाल श्रीमाली, भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष लाल बहादुर सरोज और जनप्रतिनिधिगण, शिक्षक स्नातक खंड के प्रत्याशी डॉ प्रमोद मिश्र, स्नातक विधान परिषद के प्रत्याशी केदारनाथ सिंह उपस्थित रहे।

‘ओडीओपी’ से हो रही यूपी की पहचान: नंदी

कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की पहचान और परसेप्शन दोनों बदले हैं। 2017 से पहले प्रदेश की पहचान परिवारवाद, तुष्टीकरण और ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया’ से होती थी, जबकि आज सुशासन, मजबूत कानून-व्यवस्था, औद्योगिक विकास और ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ प्रदेश की नई पहचान बन चुके हैं। पहले विकास सैफई और रायबरेली तक सीमित था, लेकिन आज बुंदेलखंड से पश्चिमांचल और अवध से पूर्वांचल तक, हर जनपद और गांव विकास की नई कहानी लिख रहा है। उत्तर प्रदेश अब सांस्कृतिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आगामी एमएलसी चुनाव को प्रदेश के विकास और विरासत को नई ऊंचाई देने का अवसर बताते हुए उन्होंने मतदाताओं से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों को प्रचंड बहुमत से विजयी बनाकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के हाथ मजबूत करने की अपील की।

योगी सरकार के कामकाज पर मुहर का अवसर : पटेल

मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का यह चुनाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार के कामकाज और जनहित में किए गए प्रयासों पर मुहर लगाने का अवसर है। उन्होंने विश्वास जताया कि मिर्जापुर के साथ वाराणसी मंडल के मतदाता भी भाजपा प्रत्याशियों को भारी मतों से विजयी बनाएंगे। प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश को विकास की नई दिशा दी है। लगातार भर्ती परीक्षाओं के परिणाम घोषित हो रहे हैं और युवाओं को नौकरियां मिल रही हैं। पुलिस एवं होमगार्ड भर्ती का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सरकार की बड़ी उपलब्धि है। योगी सरकार ने कानून-व्यवस्था में सुधार कर अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की है।