लोकतंत्र सेनानियों को प्रतिवर्ष मिलेगी 5 लाख की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा : योगी आदित्यनाथ

Loktantra Senani to receive cashless health benefits worth Rs 5 lakh annually

– लोकतंत्र सेनानियों का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ कराने की बनेगी व्यवस्था

– लोकतंत्र सेनानियों ने मंच से सुनाई आपबीती, जेल में नाखून उखाड़े, जबरन नसबंदी की गई

– मुख्यमंत्री योगी ने कहा- लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान कर गौरव की अनुभूति

Chief Minister Yogi Adityanath : आपातकाल की 51वीं बरसी 'संविधान हत्या दिवस' के अवसर पर लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकतंत्र को बचाने वाले लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रदेश सरकार लोकतंत्र सेनानियों के लिए जल्द ही 5 लाख रुपए प्रतिवर्ष कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराएगी। मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों के स्वस्थ व दीर्घायु होने की कामना करते हुए कहा कि उनका अंतिम संस्कार भी राजकीय सम्मान के साथ किए जाने की व्यवस्था बनाई जा रही है।

 

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आज लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान करते हुए गौरव की अनुभूति हुई। उनकी अपनी पीड़ा है। उन्होंने लोकतंत्र को बचाने के लिए जेल की यातनाएं सहीं। इसलिए प्रदेश में जब लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित सरकार आई तो लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान के लिए कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया। प्रदेश में 3,780 लोकतंत्र सेनानी तथा 1,461 उनके आश्रित हैं।

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सरकार वर्ष 2018 से लोकतंत्र सेनानियों व मरणोपरांत उनके आश्रितों को प्रत्येक माह 20 हजार रूपये की सम्मान राशि दे रही है। साथ ही लोकतंत्र सेनानी या उनके उत्तराधिकारी (पति अथवा पत्नी) को एक सहायक के साथ पूरे प्रदेश में परिवहन निगम की सभी श्रेणी की बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की गई है। लोकतंत्र सेनानियों को राजकीय चिकित्सालयों में निशुल्क चिकित्सा भी उपलब्ध कराई जा रही है। 

 

पांच लाख की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा जल्द

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अब सरकार लोकतंत्र सेनानियों को कैशलेस 5 लाख रुपए प्रतिवर्ष स्वास्थ्य सुविधा भी उलब्ध कराने जा रही है। इसके साथ ही लोकतंत्र सेनानी के दिवंगत होने पर उनका अंतिम संस्कार भी राजकीय सम्मान के साथ किए जाने की व्यवस्था सरकार द्वारा बनाई जा रही है। आने वाली पीढ़ी हमेशा इस बात को ध्यान में रखेगी कि जो भी देश व लोकतंत्र के हित में काम करेगा, सरकारें उन्हें सम्मानित करेंगी। 

 

मुख्यमंत्री योगी ने किया लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया। इसमें 6 महीने तक जेल में यातनाएं झेलने वाले लोकतंत्र सेनानी भारत दीक्षित, गया प्रसाद सोनकर, राम सिंह कुशवाहा (हरदोई), विद्या राम वर्मा (हरदोई), अजय सिंह (बाराबंकी) व ओम प्रकाश गुप्ता (सीतापुर) शामिल रहे। 

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लोकतंत्र सेनानियों ने सुनाई आपबीती

इस दौरान लोकतंत्र सेनानी भारत दीक्षित ने बताया कि आपातकाल लगाने का कोई कारण नहीं था। कांग्रेस बस किसी भी तरह सत्ता में रहना चाहती थी। आपातकाल के दौरान हमारी गिरफ्तारी के समय कपड़े फाड़ दिए गए। हम लोगों ने इसके बाद भी सत्याग्रह में भाग लिया, तब बहुत ज्यादा अत्याचार किए गए।

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लोकतंत्र सेनानी विद्या राम वर्मा ने बताया कि इतने साल बीत जाने के बाद भी आपातकाल के बारे में सोचता हूं तो मन भावुक हो जाता है। सीपीआई को छोड़कर बाकी सभी दलों के साथ अत्याचार किया गया। मेरा घर रात में घेरा गया, जैसे किसी डकैत को पकड़ने आए हों। जेल में कैदियों के नाखून उखाड़े गए और जबरन नसबंदी की गई। उस समय की सरकार ने कैसे अत्याचार किए गए, आज कोई अहसास भी नहीं कर सकता।
Edited By : Chetan Gour

योगी सरकार की छात्रवृत्ति योजना से लाखों छात्रों को मिला संबल, प्रयागराज सबसे आगे

Yogi Adityanath

Yogi Government Scholarship Scheme: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार प्रभावी कार्य कर रही है। खासतौर पर पिछड़े वर्ग के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने में योगी सरकार की छात्रवृत्ति योजनाएं बेहद कारगर साबित हुई हैं। सरकार की पिछड़ा वर्ग दशमोत्तर छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति योजना लाखों छात्रों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है। लाभार्थियों की संख्या के मामले में प्रयागराज जिला पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर रहा है। 

 

प्रयागराज में सबसे ज्यादा 1.69 लाख से अधिक छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ मिला है। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मजबूत आधार दे रही है। योगी सरकार की इस पहल से लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिला है और छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का मार्ग आसान हुआ है।

गाजीपुर में 1.34 लाख से ज्यादा छात्रों को मिली छात्रवृत्ति

वर्ष 2025-26 में पिछड़ा वर्ग दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत करीब 27 लाख से अधिक छात्रों को छात्रवृत्ति दी गई है। प्रयागराज में 169489 छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ मिला है। प्रयागराज के बाद गाजीपुर जिला दूसरे स्थान पर रहा है, जहां 1.34 लाख से अधिक छात्रों को छात्रवृत्ति दी गई है। वहीं आजमगढ़ में 1.19 लाख से ज्यादा छात्रों को लाभ मिला है। इसी तरह जौनपुर में 1.15 लाख से अधिक छात्रों को योजना का लाभ मिला है, जबकि वाराणसी में 88,859 छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई है। यह आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में छात्रवृत्ति योजना व्यापक स्तर पर प्रभाव छोड़ रही है।

छात्र-छात्राओं के साथ ट्रांसजेंडरों को भी मिली सहायता

छात्रवृत्ति वितरण के आंकड़ों पर नजर डालें तो कक्षा 11-12 में 4,72,764 छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की गई है। जबकि 3,80,667 छात्रों और 2 ट्रांसजेंडरों को भी छात्रवृत्ति दी गई है। वहीं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में 10,01,084 छात्राओं, 9,31,906 छात्रों और 8 ट्रांसजेंडरों को छात्रवृत्ति का लाभ दिया गया है। दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना केवल इंटरमीडिएट स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि उच्च शिक्षा और प्रोफेशनल कोर्स तक को कवर करती है। कक्षा 11 और 12 के छात्रों के साथ-साथ बीटेक, एमबीबीएस, एमबीए जैसे प्रोफेशनल कोर्स तथा बीए, बीएससी, बीकॉम, आईटीआई और पॉलिटेक्निक जैसे पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत छात्रों को भी इसका लाभ दिया जा रहा है।

छात्रवृत्ति वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाया

इस योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर देना है। जिन छात्रों के अभिभावकों की वार्षिक आय 2 लाख रुपये या उससे कम है, उन्हें योजना का लाभ दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में योगी सरकार ने छात्रवृत्ति वितरण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सरल बनाया है। छात्र छात्रवृत्ति प्रबंधन प्रणाली की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करते हैं, जिससे प्रक्रिया तेज और आसान हुई है। स्वीकृति के बाद छात्रवृत्ति की धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है।

छात्रवृत्ति योजना का लाभ बड़ी संख्या में छात्रों तक पहुंच रहा

पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का कोई भी छात्र आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। योजनाओं का लाभ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और अन्य पात्र वर्गों तक पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए मजबूत आर्थिक संबल प्रदान करना है।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

यूपी में संपत्ति रजिस्ट्री के नए नियम: पहचान के लिए आधार अनिवार्य, रिश्तों की पहचान और बाकी चीजों के लिए ये नए 5 Rules जान लें

UP Property Registration New Rules: उत्तर प्रदेश सरकार ने संपत्ति की रजिस्ट्री और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्देश जारी किया है। इस नए नोटिफिकेशन के तहत सरकार ने साफ कर दिया है कि आधार कार्ड पर दर्ज रिश्तों की डिटेल (जैसे- पिता, पति या अभिभावक का नाम) को अब कानूनी रिश्ते का अंतिम या निर्णायक सबूत नहीं माना जाएगा।

हमारे सहयोगी सीएनबीसी टीवी 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा द्वारा इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। इसमें राज्य के सभी रजिस्ट्रेशन कार्यालयों और सहायक महानिरीक्षकों को इन नए दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया गया है।

आइए जानते हैं संपत्ति रजिस्ट्री और सरकारी योजनाओं में होने वाली कानूनी दिक्कतों को रोकने के लिए विभाग द्वारा अनिवार्य किए गए इन 5 नए नियमों के बारे में।

प्रशासनिक मूल्यांकन के लिए अनिवार्य किए गए 5 नए नियम

उत्तर प्रदेश सरकार ने संपत्ति रजिस्ट्रेशन, सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कानूनी जटिलताओं से बचने के लिए आधिकारिक मूल्यांकन के दौरान इन 5 नियमों का पालन अनिवार्य किया है:-

नियम 1 (पहचान और पते का प्रमाण): आधार कार्ड को विशेष रूप से सिर्फ पहचान और पते के वैध प्रमाण के रूप में ही स्वीकार किया जाना चाहिए।

नियम 2 (रिश्तों पर निर्णायक नहीं): आधार कार्ड पर दर्ज परिवार या माता-पिता की डिटेल को किसी भी रिश्ते के निर्णायक या कानूनी रूप से बाध्यकारी सबूत के तौर पर नहीं माना जा सकता है।

नियम 3 (पारिवारिक सत्यापन): ऐसे आवेदन, योजनाएं या कानूनी दस्तावेज जिनमें पारिवारिक रिश्ते का अनिवार्य सत्यापन आवश्यक है, वहां अधिकारी सिर्फ आधार कार्ड के आधार पर अंतिम निर्णय नहीं ले सकते हैं।

नियम 4 (मान्य दस्तावेजों की जांच): रिश्तों के सत्यापन के लिए विभागों को मौजूदा नियमों के तहत मानक और कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त दस्तावेजों की जांच करनी होगी। इसके तहत जन्म प्रमाणपत्र, परिवार रजिस्टर की नकल, उत्तराधिकार प्रमाणपत्र या सक्षम अदालतों/प्राधिकारियों द्वारा जारी संबंध प्रमाणपत्र को ही मान्य माना जाएगा।

नियम 5 (द्वितीयक सूचना): आधार कार्ड पर माता-पिता या पति/पत्नी के नाम के किसी भी उल्लेख को स्थापित कानूनी सबूत के बजाय केवल एक द्वितीयक सूचनात्मक संदर्भ के रूप में देखा जाना चाहिए।

क्या है आधार कार्ड का मूल उद्देश्य?

उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्देश भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुरूप है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि आधार कार्ड का मूल और प्राथमिक उद्देश्य केवल किसी व्यक्ति की पहचान और पते को स्थापित करना है न कि उसकी वंशावली या वैवाहिक स्थिति को प्रमाणित करना। यही कारण है कि आधार कार्ड पर दर्ज C/o (केयर ऑफ), S/o (पुत्र), D/o (पुत्री), या W/o (पत्नी) जैसे शब्दों के साथ लिखी गई पारिवारिक जानकारी केवल सूचनात्मक प्रकृति की होती है।

दस्तावेजों के मानकों को लेकर देशव्यापी सख्ती

उत्तर प्रदेश सरकार का यह राज्य स्तरीय निर्देश दस्तावेज़ीकरण के मानकों को लेकर देश भर में की जा रही सख्ती का ही एक हिस्सा है। आपको बता दें कि हाल ही में आयोजित ‘पासपोर्ट सेवा दिवस’ के दौरान विदेश मंत्रालय (MEA) के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इसी तरह की कानूनी सीमा को रेखांकित किया था। उन्होंने स्पष्ट रूप से स्पष्ट किया था कि एक भारतीय पासपोर्ट सिर्फ एक यात्रा दस्तावेज है और इसे नागरिकता का अंतिम या निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता है।

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LPG को लेकर आई बड़ी खुशखबरी, सरकार ने दी बड़ी राहत

पश्चिम एशिया में हालिया तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के बीच वाणिज्यिक (कमर्शियल) एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति पर लगाई गई सभी अस्थायी पाबंदियां केंद्र सरकार ने तत्काल प्रभाव से हटा दी हैं।   प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने हालात की समीक्षा करने के बाद राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सूचित किया है कि अब कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की बिक्री और आपूर्ति पर लगाए गए प्रतिबंध समाप्त किए जा रहे हैं।

संकट के समय घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम यानी Essential Commodities Act के तहत आदेश जारी किया था। आदेश में कहा गया था कि C3-C4 स्ट्रीम्स का इस्तेमाल सिर्फ एलपीजी बनाने में होगा। इन्हें पेट्रोकेमिकल और दूसरे काम से हटाकर एलपीजी में लगा दिया गया था। सरकार की ओर से पाबंदियां हटाने के बाद अब बल्क एलपीजी की सप्लाई भी फिर से शुरू कर दी गई है, जिसे संकट की शुरुआत में रोक दिया गया था। इसे संकट से पहले की खपत के 50 फीसदी तक खोल दिया गया है। सरकार के इस फैसले से कमर्शियल और इंडस्ट्रियल कंज्यूमर्स को बड़ी राहत मिलेगी।

 

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति को संकट से पहले के स्तर पर बहाल करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही बल्क एलपीजी की आपूर्ति भी पूर्व-संकट खपत स्तर के 50 प्रतिशत तक बहाल की जा सकती है।

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पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे पत्र में कहा है कि हालिया पश्चिम एशिया संकट के दौरान लागू की गई अस्थायी एलपीजी आपूर्ति पाबंदियों की समीक्षा के बाद सरकार ने कमर्शियल एलपीजी सप्लाई को सामान्य स्तर पर बहाल करने का निर्णय लिया है। केंद्र सरकार ने यह भी कहा है कि जिन उपभोक्ताओं के पास पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सुविधा उपलब्ध है, उन्हें दीर्घकालिक समाधान के रूप में PNG का उपयोग जारी रखना चाहिए या उस पर स्थानांतरित होना चाहिए।

 

इसके अलावा तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को निर्देश दिए गए हैं कि सभी वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं का डेटा उनके डेटाबेस में दर्ज किया जाए। साथ ही तीनों तेल विपणन कंपनियों के बीच सेक्टरवार एकीकृत डेटाबेस बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो कमर्शियल या बल्क उपभोक्ता पहले ही PNG पर शिफ्ट हो चुके हैं, वे आगे भी PNG का ही उपयोग जारी रखेंगे। Edited by : Sudhir Sharma

Gold Silver Ratio: सोने के मुकाबले और ज्यादा गिर सकती है चांदी, चार्ट दे रहा बड़े संकेत; जानिए अब क्या करें निवेशक

Gold Silver Ratio: जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद से चांदी की कीमत में करीब 50% की गिरावट आ चुकी है। सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि सोने के मुकाबले भी चांदी एक-तिहाई से ज्यादा कमजोर हो गई है। अब टेक्निकल चार्ट इशारा कर रहे हैं कि यह गिरावट अभी थमने वाली नहीं है। ऐसे में सोने के मुकाबले चांदी और कमजोर पड़ सकती है।

जनवरी के बाद क्यों बदला माहौल?

रॉयटर्स के मुताबिक, 30 जनवरी के बाद से सोना और चांदी दोनों में दबाव बढ़ने लगा। इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि बाजार को लगने लगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अब ब्याज दरों में कटौती करने के मूड में नहीं है। इसके उलट, अगर महंगाई बढ़ती रही तो ब्याज दरें बढ़ाने की नौबत भी आ सकती है।

इस बीच ईरान युद्ध के बाद महंगाई को लेकर चिंताएं और बढ़ गईं। इससे निवेशकों ने ब्याज दरों को लेकर अपने अनुमान बदलने शुरू कर दिए और कीमती धातुओं में बिकवाली तेज हो गई।

चांदी पर ज्यादा दबाव क्यों आया?

सोने की तुलना में चांदी पर असर ज्यादा पड़ा। इसकी वजह सिर्फ निवेशकों की बिकवाली नहीं है। दरअसल, चांदी केवल एक कीमती धातु नहीं, बल्कि औद्योगिक धातु भी है। इसका इस्तेमाल सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और कई उद्योगों में होता है।

इसलिए जब अर्थव्यवस्था या निवेशकों के जोखिम लेने के रुख को लेकर चिंता बढ़ती है तो चांदी पर दबाव भी ज्यादा आता है। एक वजह यह भी रही कि इससे पहले चांदी में सोने के मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी आई थी। ऐसे में मुनाफावसूली शुरू होने पर इसमें गिरावट भी ज्यादा देखने को मिली।

टेक्निकल चार्ट क्या कह रहा है?

एनालिस्टों के मुताबिक, गोल्ड टु सिल्वर रेशियो यानी सोने और चांदी के भाव का अनुपात लगातार ऊपर जा रहा है। हाल ही में यह 200-डे मूविंग एवरेज (66.76) के ऊपर निकल गया है।

टेक्निकल एनालिसिस में 200-डे मूविंग एवरेज को लंबे समय के ट्रेंड का अहम पैमाना माना जाता है। किसी भी एसेट का इसके ऊपर या नीचे जाना अक्सर बाजार की दिशा का बड़ा संकेत देता है।

अब 70 के स्तर पर रहेगी नजर

अब इस अनुपात का अगला बड़ा लक्ष्य 70 माना जा रहा है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि बाजार के लिए महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर भी है। ट्रेडर्स अक्सर ऐसे गोल आंकड़ों पर खास नजर रखते हैं।

अगर गोल्ड टु सिल्वर रेशियो मजबूती से 70 के ऊपर निकल जाता है, तो इसके बाद 6 फरवरी के 72.74 के स्तर तक पहुंचने की संभावना बढ़ जाएगी। इसके बाद अगला लक्ष्य 75.25 हो सकता है। यह अप्रैल 2025 के बाद सोने के मुकाबले चांदी की गिरावट के दायरे का लगभग आधा स्तर है।

अगर चांदी वापसी करती है तो क्या होगा?

हालांकि, चांदी के लिए उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अगर चांदी में फिर से खरीदारी लौटती है, तो सबसे पहले गोल्ड टु सिल्वर रेशियो को 200-डे मूविंग एवरेज (66.76) के नीचे आना होगा। इसके बाद यह 22 जून के 62.68 के स्तर तक फिसल सकता है।

अगर यह अनुपात 60.56 से भी नीचे चला जाता है, तो इसे चांदी के पक्ष में मजबूत संकेत माना जाएगा। ऐसे में बाजार में चांदी की तेजी को नई ताकत मिल सकती है।

निवेशकों के लिए क्या है इसका मतलब

अभी के संकेत बताते हैं कि निवेशकों का झुकाव चांदी की बजाय सोने की ओर ज्यादा है। जब तक गोल्ड टु सिल्वर रेशियो ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तब तक माना जाएगा कि सोना, चांदी से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।

लेकिन अगर यह अनुपात नीचे आने लगता है, तो इसका मतलब होगा कि चांदी फिर से मजबूत होने लगी है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, उस वक्त चांदी में दोबारा खरीदारी दिख सकती है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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Farmer Pension Scheme: सिर्फ 55 रुपये महीने जमा करें और 60 साल के बाद पाएं ₹3,000 मासिक पेंशन, ये किसान और मजदूर तुरंत करें अप्लाई

Farmer Pension Scheme: देश के करोड़ों श्रमिक असंगठित सेक्टर में काम करते हैं। इनमें रेहड़ी-पटरी विक्रेता, रिक्शा चालक, कामगार मजदूर, घरेलू कामगार, दर्जी, ड्राइवर, कृषि मजदूर और अन्य दैनिक मजदूरी करने वाले श्रमिक शामिल हैं। इन श्रमिकों को आमतौर पर कर्मचारी भविष्य निधि (PF), ग्रेच्युटी या अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। ऐसे में बुढ़ापे में नियमित आय का कोई साधन नहीं होने से उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

इसी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM) योजना शुरू की है। यह एक स्वैच्छिक पेंशन योजना है। इसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। योजना के तहत 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर लाभार्थी को हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन दी जाती है।

आवेदक की उम्र कितनी होनी चाहिए?

इस पेंशन योजना का लाभ सड़क किनारे रेहड़ी-पटरी लगाने वाले, रिक्शा चालक, निर्माण मजदूर, घरेलू कामगार, ड्राइवर, प्लंबर, दर्जी, कृषि मजदूर, मोची, धोबी, बीड़ी मजदूर, हैंडलूम कर्मी और अन्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को मिलता है। योजना में शामिल होने के लिए आवेदक की मासिक आय 15,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही उसकी आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजना है। बेहद कम मासिक अंशदान के साथ यह योजना वृद्धावस्था में नियमित आय की गारंटी देती है। खासकर ऐसे श्रमिक जिनके पास भविष्य के लिए कोई पेंशन या बचत व्यवस्था नहीं है, उनके लिए यह योजना आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार साबित हो सकती है।

55 से 200 रुपये का करें योगदान

इस योजना की खास बात यह है कि श्रमिक जितनी राशि मासिक अंशदान के रूप में जमा करता है, उतनी ही राशि केंद्र सरकार भी उसके अकाउंट में जमा करती है। 18 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने पर केवल 55 रुपये प्रति माह जमा करने होते हैं। जबकि 40 वर्ष की आयु में शामिल होने वालों को 200 रुपये प्रति माह का योगदान देना पड़ता है। योजना के तहत 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद लाभार्थी को हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन मिलती है।

यदि किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है तो उसका जीवनसाथी योजना को आगे जारी रख सकता है। वहीं पेंशन शुरू होने के बाद सदस्य के निधन पर जीवनसाथी को 50 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन का लाभ मिलता है। हालांकि, ईपीएफओ, ईएसआईसी या एनपीएस जैसी किसी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना से जुड़े कर्मचारी और आयकरदाता इस योजना का लाभ नहीं उठा सकते।

कौन उठा सकता है योजना का लाभ?

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (Pradhan Mantri Shram Yogi Maandhan Yojana) का लाभ असंगठित क्षेत्र में कार्यरत उन श्रमिकों को मिलता है जिनकी मासिक आय 15,000 रुपये या उससे कम है। योजना में शामिल होने के लिए आवेदक की उम्र 18 वर्ष से कम और 40 साल से अधिक नहीं होनी चाहिए। योजना के पात्र लाभार्थियों में घरेलू कामगार, सड़क विक्रेता, रिक्शा चालक, मजदूर, कृषि मजदूर, बीड़ी श्रमिक, मोची, धोबी, चमड़ा उद्योग से जुड़े श्रमिक, प्लंबर, ड्राइवर, दर्जी, हैंडलूम और पावरलूम श्रमिक, मिड-डे मील कर्मचारी तथा अन्य असंगठित क्षेत्र के कामगार शामिल हैं।

कौन नहीं ले सकता लाभ?

इस योजना का लाभ उन लोगों को नहीं मिलेगा जो पहले से कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) या राष्ट्रीय पेंशन सिस्टम (NPS) जैसी किसी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा आयकर का भुगतान करने वाले लोग भी इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।

सरकार भी करती है बराबर का योगदान

इस पेंशन स्कीम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि लाभार्थी जितनी राशि मासिक अंशदान के रूप में जमा करता है, उतनी ही राशि केंद्र सरकार भी उसके बैंक अकाउंट में जमा करती है। यानी यह एक सह-अंशदायी (Co-Contributory) पेंशन योजना है। इससे श्रमिकों को भविष्य के लिए बड़ा लाभ मिलता है।

18 साल की उम्र में सिर्फ 55 रुपये महीना जमा करें

कम उम्र में योजना से जुड़ने पर कम राशि जमा करनी पड़ती है। 18 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने वाले व्यक्ति को केवल 55 रुपये प्रति माह जमा करने होते हैं। 19 वर्ष की आयु पर 58 रुपये, 20 वर्ष पर 61 रुपये, 21 वर्ष पर 64 रुपये और 22 वर्ष की आयु में 68 रुपये मासिक योगदान देना होता है। इसी तरह 23 साल की उम्र पर 72 रुपये, 24 वर्ष पर 76 रुपये, 25 वर्ष पर 80 रुपये, 26 वर्ष पर 85 रुपये, 27 वर्ष पर 90 रुपये और 28 वर्ष की आयु पर 95 रुपये मासिक जमा करने होते हैं।

29 से 40 वर्ष तक कितना देना होगा योगदान?

29 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने पर 100 रुपये प्रति माह, 30 वर्ष पर 105 रुपये, 31 वर्ष पर 110 रुपये, 32 वर्ष पर 120 रुपये, 33 वर्ष पर 130 रुपये और 34 वर्ष पर 140 रुपये मासिक किस्त देना होगा। वहीं 35 वर्ष के व्यक्ति को 150 रुपये, 36 वर्ष पर 160 रुपये, 37 वर्ष पर 170 रुपये, 38 वर्ष पर 180 रुपये, 39 वर्ष पर 190 रुपये और 40 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने वाले व्यक्ति को 200 रुपये प्रति माह जमा करने होंगे। सरकार भी प्रत्येक मामले में उतनी ही राशि अपने हिस्से से जमा करती है।

60 साल के बाद मिलेगी 3,000 रुपये मासिक पेंशन

योजना के तहत नियमित अंशदान करने वाले लाभार्थी को 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन मिलेगी। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। इससे वृद्धावस्था में आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और किसी पर निर्भरता कम होगी।

सदस्य की मृत्यु होने पर क्या होगा?

यदि योजना से जुड़े सदस्य की किसी कारणवश निधन हो जाती है, तो उसका जीवनसाथी योजना को आगे जारी रख सकता है। इसके लिए उसे नियमित रूप से अंशदान जमा करना होगा। यदि सदस्य 60 वर्ष की आयु के बाद पेंशन का लाभ ले रहा हो और उसके बाद उसकी मृत्यु हो जाए, तो उसके जीवनसाथी को पेंशन राशि का 50 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन के रूप में दिया जाएगा।

बीच में योजना छोड़ने पर क्या हैं नियम?

यदि कोई सदस्य योजना में शामिल होने के 10 साल के भीतर बाहर निकलना चाहता है, तो उसे उसके द्वारा जमा की गई राशि बचत बैंक अकाउंट की ब्याज दर के अनुसार वापस कर दी जाएगी। यदि सदस्य 10 साल पूरे होने के बाद लेकिन 60 वर्ष की आयु से पहले योजना छोड़ता है, तो उसे उसकी जमा राशि के साथ योजना के अनुसार अर्जित ब्याज भी वापस मिलेगा। अगर किसी कारणवश सदस्य कुछ समय तक किस्त जमा नहीं कर पाता है, तो वह बाद में बकाया राशि और निर्धारित ब्याज का भुगतान करके योजना को दोबारा एक्टिव कर सकता है।

कैसे करें अप्लाई?

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना में शामिल होने के लिए इच्छुक व्यक्ति को अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाना होगा। वहां आधार कार्ड, बैंक या जनधन खाते की जानकारी और मोबाइल नंबर देना होगा। सभी जानकारियां दर्ज होने के बाद कंप्यूटर सिस्टम खुद मासिक किस्त की राशि बता देगा। पहली किस्त जमा करने के बाद रजिस्ट्रेशन पूरा हो जाएगा और लाभार्थी को श्रम योगी कार्ड जारी कर दिया जाएगा। योजना में रजिस्ट्रेशन के लिए लाभार्थी को नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर आधार कार्ड और बैंक या जनधन खाते की जानकारी देनी होगी। पहली किस्त जमा करने के बाद श्रम योगी कार्ड जारी कर दिया जाता है।

कौन कर सकता है अप्लाई?

उम्र: 18 से 40 साल

महीने की कमाई: ₹15,000 तक

जरूरी डॉक्यूमेंट

आधार कार्ड।

सेविंग्स बैंक अकाउंट या जन धन अकाउंट होना चाहिए।

एम्प्लॉईज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन, एम्प्लॉईज स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन या नेशनल पेंशन सिस्टम का सदस्य नहीं होना चाहिए।

इनकम टैक्स भरने वाले लोग इसके लिए योग्य नहीं हैं।

हेल्पलाइन नंबर

योजना से जुड़ी किसी भी जानकारी या सहायता के लिए श्रमिक टोल फ्री नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए श्रमिक सरकार के टोल फ्री नंबर 1800-267-6888 पर संपर्क कर सकते हैं। यह योजना असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए बुढ़ापे में नियमित आय सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।

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Isobutanol-diesel blending trial expected to begin in Q2 FY2027

Isobutanol-diesel blending trial expected to begin in Q2 FY2027

A pilot trial for blending 2 percent isobutanol with diesel is expected to begin in the second quarter of FY27, Girish Wagh, MD and CEO of Tata Motors stated during a media roundtable on Thursday. A government-led task force, which includes active participation from original equipment manufacturers (OEMs), oil marketing companies, testing agencies and others, is driving the initiative. Tata Motors is currently coordinating with state-run Hindustan Petroleum to secure the specialised blended fuel for the upcoming tests.

  1. Isobutanol has a lower calorific value (energy content) than diesel
  2. A minimal 2 percent blend may have a negligible effect on the vehicle’s performance

The development should be seen in the context of how ethanol is being blended with petrol, with the base blending level now at 20 percent (also called as E20). Amidst fuel supply challenges emanating from the West Asia war, the government recently notified standards for ethanol blending of E22, E25, E27 and E30. Plans are now being prepared to take blending levels up further, and the government also announced the rollout of E85 and E100.  

ARAI to lead 10-month-long assessment

Our sister publication Autocar Professional had reported earlier about how commercial vehicle manufacturers, Automotive Research Association of India (ARAI), the Council of Scientific and Industrial Research, oil marketing companies and others are moving to break a decades-long deadlock in diesel decarbonisation by launching a nationwide validation program for isobutanol blending.

The ARAI will lead a 10-month technical assessment alongside bioenergy tech supply major Praj Industries to determine if isobutanol can serve as a seamless “drop-in” replacement for standard diesel. With nearly all major OEMs expected to participate, the initiative indicates a shift away from problematic diesel-blending trials, focusing instead on a molecule that promises better stability and safety for the nation’s critical transport fleet.

Oil majors like Bharat Petroleum have been testing isobutanol for two years, recently completing a three-month trial in stationary Cummins engines. They are now committing significant capital to validate data across 33 different vehicle types in India.

Issues in isobutanol-diesel blending

To understand why isobutanol is causing a stir, one must look at the failures of ethanol-diesel blending. For years, engineers tried to force ethanol into diesel tanks, but the chemistry refused to cooperate. Ethanol is a two-carbon alcohol with a “polar” structure, meaning it doesn’t like to mix with the oily consistency of diesel. Without expensive chemical binders, the two fuels simply separate in the tank.

More critically, ethanol is a fire hazard in a diesel ecosystem. Its flashpoint – the temperature at which it catches fire – is a mere 12 to 13deg C. Diesel, by contrast, is regulated to a minimum of 35deg C. This difference puts them in entirely different petroleum safety classes, making shared storage and transport a logistical nightmare. Even with proprietary binders, OEMs were rarely comfortable going beyond a 5 percent blend before combustion issues emerged.

Technical bridge in the making

Praj Industries, the Pune-based bioenergy giant, has spent the last two years building the technical bridge that ethanol couldn’t cross. As a four-carbon alcohol, isobutanol behaves much more like diesel. Its flashpoint sits between 27 and 30deg C, which allows it to stay within the same Class B petroleum category as diesel. This means the existing network of tankers and pumps doesn’t need a multi-billion-dollar overhaul. Initial investigation found that isobutanol remained stable at 10 percent blends for over 40 days without any separation. Early dynamometer trials on standard Indian driving cycles showed that a 5 percent blend slashed emissions with a negligible 1 to 2 percent impact on fuel mileage, a trade-off most fleet operators would take in a heartbeat.

Shift to blended fuels essential for national energy security: Girish

According to Wagh, isobutanol is a key lever for reducing reliance on imported fuels. While isobutanol has a lower calorific value (energy content) than traditional diesel, the minimal 2 percent blend is expected to have a negligible effect on vehicle performance.

“We do expect that isobutanol, because the calorific value is lower than that of diesel, there would be some impact,” said Girish. “But 2 percent is hardly anything to have an impact. But we will start these trials”. Wagh emphasised that the shift is essential for national energy security, noting that “energy independence is so important that I am sure… everybody will fall in line and do this”.

With inputs from Uday Singh and Shahkar Abidi.

Porsche unveils 911 based GT4 racer for the first time

Porsche 911 GT4 R front tracking

Porsche has revealed the new 911 GT4 R ahead of its race debut in 2027. This is the first time the German automaker is using the 911’s platform for one of its GT4 racers, with the other GT4 being the RS Clubsport based on the 718 Cayman. According to Porsche, the 911 GT4 R in comparison offers a punchier engine, wider track and more advanced motorsport electronics. The 911 GT4 R is expected to start at USD 375,500 in the US, hitting racetracks during the 2027 motorsport season.

  1. Powered by a 4.0-litre flat-six with up to 520hp
  2. Gets a race-spec transmission, adjustable dampers and ballasts
  3. Uses lightweight natural-fibre-reinforced plastic with epoxy resin
  4. Gets an integrated data logger, GPS equipment and a 10.3-inch gauge cluster

Porsche customer motorsport programme

The 911 GT4 R joins the 718 Cayman GT4 RS Clubsport

Porsche 911 GT4 R front three quarter tracking

While GT4 races made their debut in the mid-2000s, Porsche entered the category in 2016. During this period, Porsche has produced over 1,500 racers based on the 718 Cayman. The new 911 GT4 R is aimed at customers seeking higher performance benchmarks when participating in global motorsport events such as the ADAC GT4 and the GT4 European Series. The new 911 GT4 R is meant to complement the existing Cayman range, thus offering teams another high-performance option new race-spec Porsche 911. Porsche also stated that the 911 GT4 R benefits from the detailed work already carried out during the development of the 911 Cup. The 911 Cup was introduced in July 2025, and it uses the same flat-six engine and sequential gearbox as the new 911 GT4 R.

Porsche 911 GT4 R: Powertrain details

Gets regulation-spec engine tuning and a six-speed sequential gearbox

The new GT4 R gets a 4.0-litre flat-six engine with an output of up to 520hp and 470Nm from the 911 Cup. However, in order to comply with Balance of Performance (BoP) regulations, this high-revving engine is fitted with 53.7mm air flow restrictors that lowers the output to 430hp. Transmission duties are handled by a 6-speed sequential dog-gearbox that’s controlled via paddle shifters and a four-disc racing clutch.

Porsche 911 GT4 R interior

Due to regulations, Porsche has made other changes to the GT4 R over the 911 Cup. These changes include narrower wheels (by one inch) that use a five-hole mounting pattern, dual-adjustable dampers and three selectable spring rates. The 911 GT4 R also features additional ballasts to allow it to participate in different respective weight classifications as specified by BoP regulations.

Porsche 911 GT4 R: Design and interior

Uses lightweight fibre composites and a race-spec interior with an integrated data logger

Porsche 911 GT4 R rear three quarter tracking

Some of the key structural elements of the 911 GT4 R are lifted straight from the 911 Cup, especially those that improve aerodynamic efficiency. One of the important ones here is the large manually adjustable rear wing, which has eleven different positions. To minimize excess weight, a type of natural-fibre-reinforced plastic along with epoxy resin has been used for the doors, engine cover and various aerodynamic elements, according to Porsche.

Porsche 911 GT4 R dashboard

The same lightweight material is also found in the race-spec cabin of the 911 GT4 R. In order to support analysis and performance optimisation during a race, there’s an integrated data logger that’s paired with a precise GPS equipment. The carbon-fibre steering wheel and roll-cage aside, the relatively sparse interior features a 10.3-inch full-colour digital driver’s display and a dash-mounted settings control unit.

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Gold Silver rates Today: गोल्ड में गिरावट जारी, चांदी एक दिन में 5000 रुपये लुढ़की

सोने और चांदी में गिरावट का सिलसिला 25 जून को जारी रहा। दिल्ली सर्राफा बाजार में दोनों कीमती मेटल्स की कीमतों पर दबाव दिखा। सोना 2,800 रुपये गिरकर 1.45 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी में 5000 रुपये की गिरावट आई।

चांदी एक दिन में 5000 रुपये फिसली

चांदी में 24 जून को भी बड़ी गिरावट आई थी। आज यह 5000 रुपये गिराकर 2,26,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। विदेशी बाजारों में भी गोल्ड पर दबाव दिखा। लगातार तीसरे दिन गिरावट से सोना की कीमतें सात महीनों के निचले स्तर पर आ गई है।

विदेश में सोना 4000 डॉलर से नीचे आया

स्पॉट गोल्ड 0.5 फीसदी गिरकर 4000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया। यूएस गोल्ड फ्यूचर्स में भी गिरावट दिखी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने की उम्मीद और डॉलर में मजबूती की वजह से सोने में गिरावट आ रही है। अमेरिकी डॉलर 25 जून को 13 महीनों के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गया।

इन दो वजहों से दबाव में आया 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका में इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी और डॉलर में मजबूती दोनों ही सोने के लिए खराब खबर हैं। डॉलर में मजबूती से दुनिया की दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। उधर, इंटरेस्ट रेट घटने के माहौल में सोने की चमक बढ़ती है। इसके उलट इंटरेस्ट बढ़ने के माहौल में सोने की चमक फीकी पड़ जाती है।

फेडरल की पॉलिसी के बाद बुलियन 6 फीसदी गिरे

पिछले हफ्ते अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की पॉलिसी आने के बाद से सोने और चांदी में 6 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। सोना नवंबर 2025 के बाद पहली बार 4000 डॉलर प्रति औंस के नीचे गया है। अगर इस साल की रिकॉर्ड ऊंचाई की बात की जाए तो सोना वहां से 28 फीसदी गिर चुका है। इस साल 29 जनवरी को सोना 5,594.82 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया था, जो इसका सबसे हाई प्राइस है।

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इस साल जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई से लगातर गिरा है सोना

इस साल ऊंचाई पर पहुंचने के बाद से सोने पर दबाव देखने को मिला है। 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान की लड़ाई शुरू होने के बाद सोने और चांदी में गिरावट देखने को मिली। उम्मीद थी कि दोनों देशों में डील होने के बाद बुलियन की चमक लौटेगी। लेकिन, अभी दोनों कीमती मेटल्स पर दबाव बना हुआ है।

Passport : 1 जुलाई से पासपोर्ट बनवाना होगा महंगा! केंद्र सरकार ने बढ़ाई फीस, जानिए नई दरें

केंद्र सरकार ने पासपोर्ट और अन्य यात्रा दस्तावेजों से जुड़ी सेवाओं की फीस में बढ़ोतरी कर दी है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को पासपोर्ट (संशोधन) नियम, 2026 जारी करते हुए नई शुल्क दरों की अधिसूचना जारी की। नई फीस 1 जुलाई 2026 से लागू होगी।

 

नई व्यवस्था के तहत 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के आवेदकों के लिए 36 पेज वाले सामान्य पासपोर्ट के नए आवेदन या री-इश्यू की फीस बढ़ाकर 2,500 रुपए कर दी गई है। वहीं, इसी श्रेणी में तत्काल (Tatkal) सेवा के लिए कुल शुल्क 5,000 रुपए निर्धारित किया गया है। इसी तरह 60 पेज वाले पासपोर्ट के लिए सामान्य शुल्क 3,500 रुपए और तत्काल शुल्क 6,000 रुपए होगा।

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पहले कितनी थी फीस?

 

अब तक 36 पेज वाले पासपोर्ट के लिए 1,500 रुपए और 60 पेज वाले पासपोर्ट के लिए 2,000 रुपए शुल्क लिया जाता था। नई दरों के लागू होने के बाद आवेदकों को अधिक शुल्क चुकाना होगा।

 

बच्चों के पासपोर्ट की फीस भी बढ़ी

 

18 वर्ष से कम आयु के आवेदकों के लिए नए पासपोर्ट की फीस 1,000 रुपए से बढ़ाकर 1,750 रुपए कर दी गई है। इस श्रेणी में तत्काल सेवा के लिए शुल्क 4,250 रुपए तय किया गया है।

 

खोए या क्षतिग्रस्त पासपोर्ट पर ज्यादा खर्च

 

यदि 36 पेज का पासपोर्ट खो जाता है या क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो उसके बदले नया पासपोर्ट बनवाने के लिए सामान्य श्रेणी में 5,000 रुपए और तत्काल श्रेणी में 7,500 रुपए देने होंगे। वहीं, 60 पेज वाले पासपोर्ट के प्रतिस्थापन के लिए सामान्य शुल्क 6,000 रुपए और तत्काल शुल्क 8,500 रुपए निर्धारित किया गया है।

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अन्य सेवाओं की फीस भी बदली

 

नई अधिसूचना के अनुसार:

 

  • पुलिस क्लियरेंस सर्टिफिकेट (PCC) के लिए 750 रुपए शुल्क।
  • सरेंडर सर्टिफिकेट के लिए 750 रुपए शुल्क।
  • ग्लोबल एंट्री प्रोग्राम वेरिफिकेशन के लिए 750 रुपए शुल्क।
  • पासपोर्ट आधारित अन्य प्रमाणपत्रों के लिए भी 750 रुपए शुल्क।
  • सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिटी के लिए 1,000 रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है।
  • भारत में जारी होने वाला इमरजेंसी सर्टिफिकेट पहले की तरह निःशुल्क रहेगा।
  • पासपोर्ट की वैधता में कोई बदलाव नहीं

 

सरकार ने पासपोर्ट की वैधता अवधि में कोई बदलाव नहीं किया है। वयस्कों के लिए पासपोर्ट की वैधता 10 वर्ष रहेगी। वहीं, नाबालिगों के लिए पासपोर्ट पांच वर्ष या 18 वर्ष की आयु पूरी होने तक, जो भी पहले हो, मान्य रहेगा।

 

वरिष्ठ नागरिकों और छोटे बच्चों को राहत

 

सरकार ने 8 वर्ष तक के बच्चों और 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए पासपोर्ट शुल्क पर मिलने वाली 10 प्रतिशत छूट को बरकरार रखा है। नई फीस लागू होने के बाद भी पात्र आवेदकों को यह रियायत मिलती रहेगी। Edited by : Sudhir Sharma