Anant Raj Share: नोमुरा ने इस डेटा सेंटर स्टॉक का घटाया टारगेट, अब क्या करें निवेशक?

Anant Raj Share: ब्रोकरेज हाउस Nomura ने रियल एस्टेट और डेटा सेंटर कंपनी Anant Raj पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। हालांकि, टारगेट प्राइस को 700 रुपये से घटाकर 650 रुपये कर दिया है। नया टारगेट 25 जून के क्लोजिंग भाव 521.35 के मुकाबले अब भी करीब 25% से संभावित तेजी का संकेत देता है।

आइए जानते हैं कि ब्रोकरेज ने टारगेट प्राइस में कटौती क्यों की है और अब निवेशकों को क्या करना चाहिए।

क्लाउड बिजनेस से कमाई में देरी

Nomura का कहना है कि अनंत राज की नई 1.5 मेगावॉट क्लाउड क्षमता से किराये की कमाई उम्मीद से देर से शुरू होगी। पहले यह आय FY26 के अंत तक आने की उम्मीद थी, लेकिन अब इसके FY27 की दूसरी तिमाही से शुरू होने का अनुमान है। इसकी वजह यह है कि ग्राहकों की टेस्टिंग और हैंडओवर प्रक्रिया में अपेक्षा से ज्यादा समय लग रहा है।

रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट लॉन्च टले

ब्रोकरेज के मुताबिक, अनंत राज का Luxury Group Housing 2 (GH2) प्रोजेक्ट भी तय समय पर लॉन्च नहीं हो पाएगा। पहले इसे FY26 के अंत तक लॉन्च होने की उम्मीद थी। लेकिन अब इसके FY27 की दूसरी तिमाही में लॉन्च होने की संभावना है। कंपनी को लाइसेंस और अन्य मंजूरियां मिल चुकी हैं। RERA की मंजूरी पहली तिमाही के अंत तक मिलने की उम्मीद है।

क्षमता बढ़ाने का अनुमान घटाया

Nomura ने क्लाउड क्षमता बढ़ाने के अपने अनुमान को भी कम कर दिया है। अब ब्रोकरेज हर साल 3 मेगावॉट क्षमता बढ़ने का अनुमान लगा रहा है, जबकि पहले यह अनुमान 4 मेगावॉट का था।

इसके अलावा डेटा सेंटर कारोबार में क्लाउड से आने वाले रेवेन्यू का अनुमान भी घटाकर 10-11% कर दिया गया है। पहले यह 13-14% रहने का अनुमान था। कंपनी मैनेजमेंट 25% क्लाउड हिस्सेदारी का लक्ष्य बता चुका है। इन कारणों से Nomura ने FY27 और FY28 के लिए अपने EPS अनुमान क्रमशः 8% और 10% घटा दिए हैं।

मार्च तिमाही में कैसा रहा प्रदर्शन?

वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 23.6% बढ़कर 146.6 करोड़ रुपये रहा। वहीं, रेवेन्यू 19.6% बढ़कर 646.8 करोड़ रुपये हो गया।

EBITDA 17.6% बढ़कर 167.4 करोड़ रुपये रहा, जबकि EBITDA मार्जिन 26.3% से घटकर 25.9% पर आ गया। पूरे FY26 में कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 21.92% बढ़कर 2,511.60 करोड़ रुपये रहा।

अब क्या करें अनंत राज के निवेशक?

निवेशकों के लिए फिलहाल सबसे अहम बात कंपनी के कारोबार की रफ्तार पर नजर रखना है। Nomura ने BUY रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन क्लाउड बिजनेस से कमाई में देरी और रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स के लॉन्च टलने की वजह से टारगेट प्राइस घटाया है।

ऐसे में जिन निवेशकों के पास पहले से यह शेयर है, वे कंपनी की आने वाली तिमाहियों में प्रोजेक्ट्स की प्रगति और क्लाउड रेवेन्यू पर नजर रखें। वहीं, नए निवेशकों को किसी भी फैसले से पहले अपने जोखिम लेने की क्षमता और निवेश के समय का आकलन जरूर कर लेना चाहिए।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

कनाडा ने माना- एअर इंडिया फ्लाइट ब्लास्ट खालिस्तानियों ने किया:41 साल पहले आतंकी हमले में 329 लोगों की मौत हुई, ज्यादातर भारतीय मूल के थे

कनाडा ने पहली बार आधिकारिक तौर पर माना है कि 1985 में एयर इंडिया की फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ में हुए बम धमाके के पीछे कनाडा में मौजूद खालिस्तानी आतंकियों का हाथ था। कनाडा की खुफिया एजेंसी कनाडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस( CSIS) ने इस घटना को ‘जघन्य आतंकवादी काम’ बताया है। 23 जून को इस घटना के 41 साल पूरे होने पर CSIS ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान एजेंसी ने लिखा, आतंकवाद के पीड़ितों की राष्ट्रीय स्मृति दिवस पर हम एयर इंडिया फ्लाइट 182 के उन 329 लोगों को याद करते हैं, जिन्होंने एक जघन्य आतंकी हमले में अपनी जान गंवाई। इस हादसे में विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हुई थी। इनमें 268 कनाडाई नागरिक थे, जिनमें ज्यादातर भारतीय मूल के थे। 24 लोग भारत के नागरिक थे। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी दी श्रद्धांजलि 23 जून 1985 को एयर इंडिया की फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ मॉन्ट्रियल से लंदन होते हुए नई दिल्ली आ रही थी। लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पहुंचने से करीब 45 मिनट पहले आयरलैंड के तट के पास अटलांटिक महासागर के ऊपर विमान में जोरदार विस्फोट हुआ और विमान हवा में ही टूटकर समुद्र में गिर गया। इसमें सवार सभी लोगों की मौत हो गई। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी इस घटना को देश के इतिहास का सबसे घातक आतंकी हमला बताया है। उन्होंने कहा, “41 साल पहले एयर इंडिया फ्लाइट 182 बम धमाके में 329 निर्दोष लोगों की जान गई थी, जिनमें 268 कनाडाई नागरिक थे। यह आज भी कनाडा के इतिहास का सबसे बड़ा आतंकी हमला है। कनाडा हर तरह के हिंसक आतंकवाद के खिलाफ खड़ा है।” जांच में सामने आया कि विस्फोटक एक सूटकेस में छिपाकर विमान के चेक-इन बैगेज में रखा गया था। यह सूटकेस जिस यात्री के नाम से चेक-इन हुआ था, वह खुद विमान में सवार ही नहीं हुआ। कनाडाई जांच एजेंसियों ने निष्कर्ष निकाला था कि यह हमला 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार के जवाब में किया गया था। ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान भारतीय सेना ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में छिपे आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाया था। जांच के मुताबिक, इसी के प्रतिशोध में सिख अलगाववादियों ने एयर इंडिया विमान को निशाना बनाया। एयर इंडिया फ्लाइट 182 पर हुआ हमला आज भी किसी यात्री विमान पर हुआ दुनिया का सबसे घातक बम धमाका माना जाता है। हालांकि 2001 के 9/11 हमलों के बाद यह घटना वैश्विक स्तर पर कुछ हद तक चर्चा से बाहर हो गई, लेकिन कनाडा, भारत और आयरलैंड में इसे आज भी नहीं भुलाया गया है। कनाडा ने यह बात कहने में 41 साल क्यों लगा दिए? भारत शुरू से कहता रहा कि इस हमले की साजिश कनाडा की जमीन से सक्रिय खालिस्तानी आतंकियों ने रची थी। लेकिन कनाडा की सरकार और सरकारी संस्थाएं कई दशकों तक सार्वजनिक तौर पर ‘खालिस्तानी’ शब्द इस्तेमाल करने से बचती रहीं। इसके पीछे कई वजह रहे हैं। 1. जांच एजेंसियों की बड़ी नाकामी 2010 में कनाडा के पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जॉन मेजर की अध्यक्षता में हुई सार्वजनिक जांच में कहा गया कि कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों की कई गंभीर गलतियों ने जांच को कमजोर कर दिया। सबसे बड़ी चूक यह थी कि CSIS ने बब्बर खालसा के नेता तलविंदर सिंह परमार की निगरानी तो की, लेकिन बाद में उसकी सैकड़ों घंटे की फोन रिकॉर्डिंग नष्ट कर दी। इससे महत्वपूर्ण सबूत खत्म हो गए और मुकदमा कमजोर पड़ गया। 2. CSIS और RCMP के बीच तालमेल की कमी कनाडा की खुफिया एजेंसी CSIS और पुलिस एजेंसी RCMP के बीच जानकारी साझा करने को लेकर मतभेद थे। इसका असर जांच पर पड़ा। 3. हमले को भारत का मामला समझा गया जांच आयोग ने कहा कि चूंकि विमान एयर इंडिया का था, इसलिए कई राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इसे मुख्य रूप से भारत से जुड़ा मामला माना गया। जबकि मारे गए अधिकांश लोग कनाडा के नागरिक थे। इससे इस हमले को कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे के रूप में उतनी गंभीरता नहीं मिली। 4. अदालत में केस कमजोर पड़ गया मुख्य गवाहों को धमकियां मिलीं, कुछ की हत्या भी कर दी गई। सबूत कमजोर होने के कारण 2005 में मुख्य आरोपियों को अदालत ने पर्याप्त सबूत न होने के चलते बरी कर दिया। 5. सरकार ने माफी तो मांगी, लेकिन नाम लेने से बचती रही 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर ने पीड़ित परिवारों से माफी मांगी और माना कि सरकार इस मामले को संभालने में विफल रही। इसके बावजूद कई वर्षों तक कनाडा की सरकारी संस्थाएं चरमपंथी या उग्रवादी जैसे सामान्य शब्दों का इस्तेमाल करती रहीं और सीधे खालिस्तानी चरमपंथी नहीं कहा। अब हालात कैसे बदले हाल के कुछ साल में भारत और कनाडा के बीच खालिस्तानी गतिविधियों को लेकर तनाव लगातार बढ़ा है। भारत लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि कनाडा अभिव्यक्ति की आजादी और राजनीतिक गतिविधियों के नाम पर खालिस्तान समर्थक नेटवर्क को खुलकर काम करने देता है। इसी बीच CSIS ने अपनी 2025 की वार्षिक रिपोर्ट में पहली बार कनाडा बेस्ट खालिस्तानी एक्सट्रीमिस्ट (CBKE) को कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया। रिपोर्ट में कहा गया कि ऐसे कुछ नेटवर्क कनाडा की संस्थाओं का इस्तेमाल कर धन जुटाते हैं और उसे हिंसक गतिविधियों की ओर मोड़ते हैं। यह भी कहा गया कि इनकी हिंसक गतिविधियां कनाडा और उसके हितों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा बनी हुई हैं। ———————————– कनिष्क प्लेन क्रैश से जुड़े मामले को यहां विस्तार से पढ़ें… जब खालिस्तानियों ने हवा में उड़ा दिया भारतीय विमान:329 लोग सवार थे, कोई नहीं बचा 23 जून 1985 की सुबह एअर इंडिया की फ्लाइट नंबर ‘182′ कनाडा से लंदन होते हुए भारत आ रही थी। इसमें 307 पैंसेजर्स और 22 क्रू मेंबर सवार थे। यह बोइंग 747 विमान था, जिसे एयर इंडिया ने कनिष्क नाम दिया था। पूरी खबर यहां पढ़ें…

कनाडा ने माना- एअर इंडिया फ्लाइट ब्लास्ट खालिस्तानियों ने किया:41 साल पहले आतंकी हमले में 329 लोगों की मौत हुई, ज्यादातर भारतीय मूल के थे

कनाडा ने पहली बार आधिकारिक तौर पर माना है कि 1985 में एयर इंडिया की फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ में हुए बम धमाके के पीछे कनाडा में मौजूद खालिस्तानी आतंकियों का हाथ था। कनाडा की खुफिया एजेंसी कनाडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस( CSIS) ने इस घटना को ‘जघन्य आतंकवादी काम’ बताया है। 23 जून को इस घटना के 41 साल पूरे होने पर CSIS ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान एजेंसी ने लिखा, आतंकवाद के पीड़ितों की राष्ट्रीय स्मृति दिवस पर हम एयर इंडिया फ्लाइट 182 के उन 329 लोगों को याद करते हैं, जिन्होंने एक जघन्य आतंकी हमले में अपनी जान गंवाई। इस हादसे में विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हुई थी। इनमें 268 कनाडाई नागरिक थे, जिनमें ज्यादातर भारतीय मूल के थे। 24 लोग भारत के नागरिक थे। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी दी श्रद्धांजलि 23 जून 1985 को एयर इंडिया की फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ मॉन्ट्रियल से लंदन होते हुए नई दिल्ली आ रही थी। लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पहुंचने से करीब 45 मिनट पहले आयरलैंड के तट के पास अटलांटिक महासागर के ऊपर विमान में जोरदार विस्फोट हुआ और विमान हवा में ही टूटकर समुद्र में गिर गया। इसमें सवार सभी लोगों की मौत हो गई। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी इस घटना को देश के इतिहास का सबसे घातक आतंकी हमला बताया है। उन्होंने कहा, “41 साल पहले एयर इंडिया फ्लाइट 182 बम धमाके में 329 निर्दोष लोगों की जान गई थी, जिनमें 268 कनाडाई नागरिक थे। यह आज भी कनाडा के इतिहास का सबसे बड़ा आतंकी हमला है। कनाडा हर तरह के हिंसक आतंकवाद के खिलाफ खड़ा है।” जांच में सामने आया कि विस्फोटक एक सूटकेस में छिपाकर विमान के चेक-इन बैगेज में रखा गया था। यह सूटकेस जिस यात्री के नाम से चेक-इन हुआ था, वह खुद विमान में सवार ही नहीं हुआ। कनाडाई जांच एजेंसियों ने निष्कर्ष निकाला था कि यह हमला 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार के जवाब में किया गया था। ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान भारतीय सेना ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में छिपे आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाया था। जांच के मुताबिक, इसी के प्रतिशोध में सिख अलगाववादियों ने एयर इंडिया विमान को निशाना बनाया। एयर इंडिया फ्लाइट 182 पर हुआ हमला आज भी किसी यात्री विमान पर हुआ दुनिया का सबसे घातक बम धमाका माना जाता है। हालांकि 2001 के 9/11 हमलों के बाद यह घटना वैश्विक स्तर पर कुछ हद तक चर्चा से बाहर हो गई, लेकिन कनाडा, भारत और आयरलैंड में इसे आज भी नहीं भुलाया गया है। कनाडा ने यह बात कहने में 41 साल क्यों लगा दिए? भारत शुरू से कहता रहा कि इस हमले की साजिश कनाडा की जमीन से सक्रिय खालिस्तानी आतंकियों ने रची थी। लेकिन कनाडा की सरकार और सरकारी संस्थाएं कई दशकों तक सार्वजनिक तौर पर ‘खालिस्तानी’ शब्द इस्तेमाल करने से बचती रहीं। इसके पीछे कई वजह रहे हैं। 1. जांच एजेंसियों की बड़ी नाकामी 2010 में कनाडा के पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जॉन मेजर की अध्यक्षता में हुई सार्वजनिक जांच में कहा गया कि कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों की कई गंभीर गलतियों ने जांच को कमजोर कर दिया। सबसे बड़ी चूक यह थी कि CSIS ने बब्बर खालसा के नेता तलविंदर सिंह परमार की निगरानी तो की, लेकिन बाद में उसकी सैकड़ों घंटे की फोन रिकॉर्डिंग नष्ट कर दी। इससे महत्वपूर्ण सबूत खत्म हो गए और मुकदमा कमजोर पड़ गया। 2. CSIS और RCMP के बीच तालमेल की कमी कनाडा की खुफिया एजेंसी CSIS और पुलिस एजेंसी RCMP के बीच जानकारी साझा करने को लेकर मतभेद थे। इसका असर जांच पर पड़ा। 3. हमले को भारत का मामला समझा गया जांच आयोग ने कहा कि चूंकि विमान एयर इंडिया का था, इसलिए कई राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इसे मुख्य रूप से भारत से जुड़ा मामला माना गया। जबकि मारे गए अधिकांश लोग कनाडा के नागरिक थे। इससे इस हमले को कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे के रूप में उतनी गंभीरता नहीं मिली। 4. अदालत में केस कमजोर पड़ गया मुख्य गवाहों को धमकियां मिलीं, कुछ की हत्या भी कर दी गई। सबूत कमजोर होने के कारण 2005 में मुख्य आरोपियों को अदालत ने पर्याप्त सबूत न होने के चलते बरी कर दिया। 5. सरकार ने माफी तो मांगी, लेकिन नाम लेने से बचती रही 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर ने पीड़ित परिवारों से माफी मांगी और माना कि सरकार इस मामले को संभालने में विफल रही। इसके बावजूद कई वर्षों तक कनाडा की सरकारी संस्थाएं चरमपंथी या उग्रवादी जैसे सामान्य शब्दों का इस्तेमाल करती रहीं और सीधे खालिस्तानी चरमपंथी नहीं कहा। अब हालात कैसे बदले हाल के कुछ साल में भारत और कनाडा के बीच खालिस्तानी गतिविधियों को लेकर तनाव लगातार बढ़ा है। भारत लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि कनाडा अभिव्यक्ति की आजादी और राजनीतिक गतिविधियों के नाम पर खालिस्तान समर्थक नेटवर्क को खुलकर काम करने देता है। इसी बीच CSIS ने अपनी 2025 की वार्षिक रिपोर्ट में पहली बार कनाडा बेस्ट खालिस्तानी एक्सट्रीमिस्ट (CBKE) को कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया। रिपोर्ट में कहा गया कि ऐसे कुछ नेटवर्क कनाडा की संस्थाओं का इस्तेमाल कर धन जुटाते हैं और उसे हिंसक गतिविधियों की ओर मोड़ते हैं। यह भी कहा गया कि इनकी हिंसक गतिविधियां कनाडा और उसके हितों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा बनी हुई हैं। ———————————– कनिष्क प्लेन क्रैश से जुड़े मामले को यहां विस्तार से पढ़ें… जब खालिस्तानियों ने हवा में उड़ा दिया भारतीय विमान:329 लोग सवार थे, कोई नहीं बचा 23 जून 1985 की सुबह एअर इंडिया की फ्लाइट नंबर ‘182′ कनाडा से लंदन होते हुए भारत आ रही थी। इसमें 307 पैंसेजर्स और 22 क्रू मेंबर सवार थे। यह बोइंग 747 विमान था, जिसे एयर इंडिया ने कनिष्क नाम दिया था। पूरी खबर यहां पढ़ें…

आइए जानें कि इंटरेस्ट कैलकुलेटर लोन लेने से पहले कुल लागत की तुलना करने में कैसे आपकी मदद करता है

कोई भी लोन लेने से पहले इंटरेस्ट कैलकुलेटर आपको उस पर होने वाले कुल खर्च का अंदाज़ा लगाने में आपकी मदद करता है। इससे पता चलता है कि आपको कितना ब्याज़ चुकाना होगा, आपकी महीने की किस्त कितनी होगी और कुल मिलाकर कितनी रकम वापस करनी होगी। इस कैलकुलेटर की मदद से आप लोन के अलग-अलग विकल्पों की तुलना कर सकते हैं, अपना बजट की बेहतर योजना बना सकते हैं और समझदारी से लोन लेने का फैसला कर सकते हैं।

चाहे आप अपने घर को नए जैसा बनाना चाहते हों, आगे की पढ़ाई के लिए पैसों का इंतजाम कर रहे हों, शादी का खर्च उठाना हो या  अचानक कोई मेडिकल इमरजेंसी सामने आ गई हो, किसी भी स्थिति में आपको अपना लोन चुकाने की ज़िम्मेदारी को समझना बेहद जरूरी है। ऐसे मौकों पर ही पर्सनल लोन और इंटरेस्ट कैलकुलेटर आपके काम आते हैं ताकि आप ज़िम्मेदारी से लोन ले सकें।

इंटरेस्ट कैलकुलेटर क्या होता है?

इंटरेस्ट कैलकुलेटर एक ऑनलाइन टूल है, जो कुछ जरूरी बातों को ध्यान में रखकर अंदाज़ा लगाता है कि आपको लोन पर कितना ब्याज़ देना होगा, जैसे कि:

  • लोन की रकम
  • ब्याज़ दर
  • लोन चुकाने की समय-सीमा

इस कैलकुलेटर की मदद से आप तुरंत कुछ चीजों का अंदाज़ा लगा सकते हैं, जैसे कि:

  • हर महीने की किस्त
  • चुकाया जाने वाला कुल ब्याज़
  • चुकाई जाने वाली कुल रकम
  • समय-सीमा या लोन की रकम बदलने का असर

खुद से हिसाब लगाने के झंझट के बिना, आपको तुरंत नतीजे मिल जाते हैं जिससे आप पूरे भरोसे के साथ लोन के अलग-अलग विकल्पों की तुलना कर सकते हैं।

लोन लेने से पहले इंटरेस्ट कैलकुलेटर का इस्तेमाल करना क्यों जरूरी है?

लोन लेना पैसों से जुड़ा एक बड़ा फैसला है। इंटरेस्ट कैलकुलेटर की मदद से आप कोई भी लोन लेने से पहले ही उस पर होने वाले कुल खर्च को अच्छी तरह समझ सकते हैं।

लोन की अलग-अलग रकम की तुलना करें

हो सकता है आपको अपने घर के रेनोवेशन के लिए 2 लाख रुपये चाहिए या फिर शादी में होने वाले खर्च के लिए 10 लाख रुपये की ज़रूरत हो। आप इंटरेस्ट कैलकुलेटर में अलग-अलग रकम डालकर देख सकते हैं कि आपकी महीने की किस्त और कुल खर्च में कितना बदलाव आता है।

इस तरह आप बस उतना ही लोन लेते हैं जितनी आपको ज़रूरत हो, और बेवजह के आर्थिक बोझ से बच जाते हैं।

लोन की समय-सीमा के असर को समझें

आम तौर पर, कम समय के लिए लोन लेने पर आपकी हर महीने की किस्त तो ज़्यादा होगी, लेकिन कुल मिलाकर आपको काफी कम ब्याज़ चुकाना होगा। वहीं, लंबे समय के लिए लोन लेने से हर महीने खर्च का बोझ थोड़ा कम होता है, पर आपको ज़्यादा ब्याज़ चुकाना पड़ सकता है।

इंटरेस्ट कैलकुलेटर की मदद से आप लोन चुकाने की अलग-अलग समय-सीमा में होने वाले खर्च को देख सकते हैं, फिर आप अपनी इनकम और आर्थिक लक्ष्यों के हिसाब से सही समय-सीमा चुन सकते हैं।

अपने महीने के बजट की बेहतर योजना बनाएँ

अगर आपको पहले से ही अपनी महीने की किस्तों के बारे में पता हो, तो इससे अपने महीने के खर्चों को अच्छी तरह संभालने में मदद मिलती है।

पर्सनल लोन के लिए आवेदन करने से पहले आप यह देख सकते हैं कि लोन चुकाना आपके बजट में आसानी से फिट बैठता है या नहीं।

इंटरेस्ट कैलकुलेटर लोन पर होने वाले कुल खर्च की तुलना करने में कैसे मददगार है?

इंटरेस्ट कैलकुलेटर का सबसे बड़ा फायदा यही है कि ये आपसे कुछ भी नहीं छिपाता है। इसकी मदद से आप सिर्फ ब्याज़ दर ही नहीं, बल्कि कई दूसरे पहलुओं के आधार पर भी लोन की तुलना कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए, हो सकता है दो अलग-अलग लोन की ब्याज़ दरें एक-समान हों, लेकिन लोन चुकाने की समय-सीमा अलग-अलग होने पर आपके द्वारा चुकाई जाने वाली कुल रकम में काफी अंतर आ सकता है।

इंटरेस्ट कैलकुलेटर की मदद से आप इन चीजों की तुलना कर सकते हैं:

  • चुकाई जाने वाली कुल रकम
  • हर महीने की किस्त
  • चुकाया जाने वाला कुल ब्याज़
  • समय-सीमा के अलग-अलग विकल्प
  • लोन की अलग-अलग रकम

यह पूरी जानकारी आपको ऐसा लोन विकल्प चुनने में मदद करती है, जो आपके लिए किफायती हो और जिसे चुकाना भी आसान हो।

एक ही लोन के लिए दो अलग-अलग समय-सीमा के विकल्पों की तुलना

मान लीजिए पुणे में रहने वाली 32 साल की प्रिया एक मार्केटिंग प्रोफेशनल हैं, जिनकी महीने की इनकम 65,000 रुपये है। उन्हें अपनी बहन की शादी के लिए 5 लाख रुपये की ज़रूरत है। वह इंटरेस्ट कैलकुलेटर की मदद से सालाना 14% की ब्याज़ दर पर लोन चुकाने के दो अलग-अलग विकल्पों की तुलना करती हैं।

तुलना के बिंदुविकल्प A: 24 महीने की समय-सीमाविकल्प B: 48 महीने की समय-सीमा
लोन की रकम5,00,000 रुपये5,00,000 रुपये
ब्याज़ दर14% सालाना14% सालाना
महीने की किस्त (लगभग)24,006 रुपये13,676 रुपये
चुकाया जाने वाला कुल ब्याज़ (लगभग)76,144 रुपये1,56,448 रुपये
चुकाई जाने वाली कुल रकम (लगभग)5,76,144 रुपये6,56,448 रुपये

दोनों विकल्पों की तुलना करने पर, प्रिया को समझ आता है कि 48 महीने की समय-सीमा चुनने से उनकी महीने की किस्त में 10,330 रुपये की बचत तो होगी, लेकिन लोन की समय-सीमा के दौरान कुल मिलाकर 80,304 रुपये ज़्यादा ब्याज़ चुकाना होगा।

चूंकि उनकी महीने की इनकम इतनी है कि वह हर महीने होने वाले खर्चों के बाद भी 24 महीने की EMI आसानी से चुका सकती हैं, इसलिए वह लोन पर होने वाले कुल खर्च को कम करने के लिए कम समय-सीमा वाला विकल्प चुनती है।

कैलकुलेटर से क्या पता चला: दोनों ही मामलों में ब्याज़ की दर एक जैसी थी। सिर्फ लोन की समय-सीमा बदलने से चुकाई जाने वाली कुल रकम में 80,000 रुपये से ज्यादा का अंतर आ गया। इंटरेस्ट कैलकुलेटर के ज़रिये आप कुछ ही सेकंड में इन बातों की तुलना कर सकते हैं।

पर्सनल लोन फाइनैंसिंग का सुविधाजनक विकल्प क्यों है?

पर्सनल लोन पैसे की ज़रूरत पूरी करने के सबसे सुविधाजनक विकल्पों में से एक हैं, क्योंकि पहले से तय और अचानक सामने आने वाले कई तरह के खर्चों को पूरा करने के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है।

आप पर्सनल लोन ऑनलाइन के लिए आवेदन करके लोन की रकम का उपयोग इन कामों के लिए कर सकते हैं:

  • मेडिकल इमरजेंसी
  • ट्रैवल पर होने वाले खर्च
  • आगे की पढ़ाई
  • शादी का खर्च
  • घर की मरम्मत/रिनोवेशन
  • कोई बड़ी खरीदारी

सिक्योर्ड लोन के मुकाबले, पर्सनल लोन के लिए आमतौर पर किसी कोलेटरल की ज़रूरत नहीं होती है। इसके आवेदन करने का तरीका भी बहुत आसान है, जो उन लोगों के लिए सबसे बेहतर विकल्प है जिन्हें तुरंत पैसों की ज़रूरत हो।

बजाज फाइनैंस पर्सनल लोन कैसे आपकी मदद कर सकता है?

बजाज फाइनैंस पर्सनल लोन अलग-अलग तरह की पैसों की जरूरतों को पूरा करने का बेहद आसान और सुविधाजनक जरिया है। इंटरेस्ट कैलकुलेटर का उपयोग करके आप अपने लोन चुकाने की जिम्मेदारियों का अंदाज़ा लगा सकते हैं और एक सही लोन स्ट्रक्चर चुन सकते हैं।

इसके कुछ खास फायदे इस प्रकार हैं:

  • 40,000 रुपये से 55 लाख रुपये तक की लोन की रकम
  • लोन चुकाने के लिए 12 महीने से 108 महीने तक की समय-सीमा
  • सालाना 10% से 30% तक की ब्याज़ दरें
  • किसी कोलेटरल की ज़रूरत नहीं
  • तेजी से मंजूरी मिलने की प्रक्रिया
  • बहुत कम कागजी कार्रवाई
  • ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया
  • वेरिफिकेशन और मंजूरी के आधार पर, सिर्फ़ 24 घंटों* में लोन की रकम पाने की सुविधा

आवेदन करने से पहले इंटरेस्ट कैलकुलेटर की मदद से आप जान सकते हैं कि लोन की अलग-अलग रकम और समय-सीमा आपके कुल लोन खर्च पर कैसे असर डालती है।

ऑनलाइन पर्सनल लोन के लिए कौन-कौन आवेदन कर सकता है?

ज्यादातर नौकरीपेशा वाले और खुद का रोजगार करने वाले लोग ऑनलाइन पर्सनल लोन चुनते हैं, क्योंकि यह सुविधाजनक है और इसकी प्रक्रिया पूरी होने में बहुत कम वक्त लगता है।

सामान्य तौर पर एलिजिबिलिटी इन बातों पर निर्भर है:

राष्ट्रीयताभारतीय
उम्र21 साल से 80 साल*
नौकरीसरकारी, प्राइवेट, या MNC.
CIBIL स्कोर650 या उससे ज्यादा
ग्राहक का प्रोफाइलखुद का रोजगार करने वाले या नौकरीपेशा

 

* लोन की समय-सीमा पूरी होने पर आपकी उम्र 80 साल या उससे कम होनी चाहिए।

लोन पाने की शर्तों को पूरा करने से मंजूरी की गारंटी नहीं मिलती, क्योंकि लोन देने वाले संस्थान अपने नियमों और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया के आधार पर हर आवेदन की जांच करते हैं।

पर्सनल लोन के लिए आवेदन करने से पहले, चुकाई जाने वाली रकम का अंदाज़ा लगाने और अपनी आर्थिक स्थिति के हिसाब से सही फैसला लेने के लिए इंटरेस्ट कैलकुलेटर का उपयोग करना बहुत मददगार साबित होता है।

ज़िम्मेदारी से लोन लेने से हमें क्या फायदा होता है?

इंटरेस्ट कैलकुलेटर सिर्फ़ योजना बनाने में मदद करने वाला टूल नहीं है, बल्कि यह ज़िम्मेदारी से लोन लेने में भी बहुत उपयोगी है।

कोई भी लोन लेने से पहले, इन बातों को जरूर ध्यान में रखें:

  • बस उतनी ही रकम लोन लें जितनी आपको असल में ज़रूरत हो
  • लोन चुकाने की अपनी क्षमता के हिसाब से सही समय-सीमा चुनें
  • अपना क्रेडिट प्रोफाइल बेहतर बनाए रखें
  • सभी शुल्कों और शर्तों पर अच्छी तरह गौर करें
  • ध्यान रखें कि हर महीने की किस्त आपके बजट में आ जाए

ज़िम्मेदारी से लोन लेकर आप इसे अच्छी तरह संभाल सकते हैं और भविष्य में होने वाले आर्थिक तनाव से बच सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या इंटरेस्ट कैलकुलेटर चुकाई जाने वाली कुल रकम दिखाता है?

हाँ। इंटरेस्ट कैलकुलेटर से आपको यह अंदाज़ा मिलता है कि लोन के मूलधन और तय समय-सीमा में लगने वाले ब्याज़ को मिलाकर आपको कुल कितनी रकम चुकानी होगी। इससे लोन लेने से पहले आपको कुल खर्च के बारे में जानने में मदद मिलती है।

क्या मैं इंटरेस्ट कैलकुलेटर की मदद से लोन के अलग-अलग विकल्पों की तुलना कर सकता हूँ?

हाँ। इंटरेस्ट कैलकुलेटर की मदद से आप लोन की अलग-अलग रकम, ब्याज़ दर और लोन चुकाने की समय-सीमा की तुलना कर सकते हैं। इस तरह आपके लिए ऐसा विकल्प चुनना आसान हो जाता है, जो आपके बजट और आर्थिक लक्ष्यों के हिसाब से सही हो।

क्या पर्सनल लोन के लिए इंटरेस्ट कैलकुलेटर उपयोगी है?

हाँ, पर्सनल लोन के लिए इंटरेस्ट कैलकुलेटर खास तौर पर बहुत उपयोगी है, क्योंकि इससे आप हर महीने की किस्त और कुल खर्च का आसानी से अंदाज़ा लगा सकते हैं। इससे आपको लोन लेने के बारे में सही फैसला लेने और लोन चुकाने की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलती है।

निष्कर्ष

इंटरेस्ट कैलकुलेटर बेहद आसान लेकिन बहुत कारगर टूल है, जिससे आपको लोन के विकल्पों की तुलना करने, लोन चुकाने के बारे में अंदाज़ा लगाने और कोई भी फैसला लेने से पहले लोन लेने की कुल लागत को समझने में मदद मिलती है। इसके ज़रिये आप  सारी चीजों को अच्छे से समझ सकते हैं, आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग बेहतर होती है और आप समझदारी से लोन ले सकते हैं।

अगर आप पहले से तय या अचानक सामने आने वाले किसी खर्च के लिए लोन लेने के बारे में सोच रहे हैं, तो बजाज फाइनैंस पर्सनल लोन के साथ इंटरेस्ट कैलकुलेटर का उपयोग करके आप अपनी ज़रूरतों के हिसाब से लोन चुकाने का सही विकल्प चुन सकते हैं। आज ही अपनी एलिजिबिलिटी के बारे में जानें और ऑनलाइन आवेदन करें, ताकि आप आसान और तेज आवेदन प्रक्रिया के ज़रिये फाइनैंसिंग के सुविधाजनक विकल्पों का लाभ उठा सकें।

* नियम व शर्तें लागू

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में FIR दर्ज, 8 नामजद आरोपी, SIT रिपोर्ट के बाद बड़ा एक्शन, चंपत राय का नाम नहीं

Ayodhya Ram Mandir

राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे के कथित गबन एवं अनियमितताओं के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए एफआईआर दर्ज करा दी है। पुलिस ने इस मामले में 8 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है, जबकि कई अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। एफआईआर में टिन्नू यादव और अनुकल्प मिश्रा समेत कुल आठ आरोपियों के नाम शामिल हैं। इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। 

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उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर, BNS की धारा 306, 316 (5), 317 (4), 317 (5), 61 और 3 (5) के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई।

 

आरोपियों पर आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।  बताया जा रहा है कि विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने यह कार्रवाई की है। 

 

फिलहाल एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की जांच जारी है। सूत्रों के अनुसार, जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। अब सभी की नजरें जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। राज्य सरकार ने 13 जून को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी का गठन किया था। ट्रस्ट ने राम मंदिर में प्राप्त दान राशि के कथित दुरुपयोग और गबन के आरोपों की जांच की मांग की थी।

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इस मामले ने राजनीतिक रंग तब ले लिया जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 7 जून को दावा किया था कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपए के दान का हिसाब स्पष्ट नहीं है। उन्होंने मामले का न्यायिक संज्ञान लेने की मांग भी की थी।

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इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। Edited by : Sudhir Sharma

Passport fees hiked: जुलाई से पासपोर्ट बनवाना होगा महंगा! सरकार ने बढ़ाई फीस, जानिए नए रेट और नियम

Passport fees hiked: विदेश मंत्रालय (MEA) ने पासपोर्ट शुल्क में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। भारत सरकार द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन के मुताबिक, नई दरें 1 जुलाई से लागू होंगी। संशोधित नियमों के अनुसार 1 जुलाई 2026 से पासपोर्ट बनवाने और री-इश्यू कराने के लिए अधिक शुल्क देना होगा। 36 पेज के नए या री-इश्यू पासपोर्ट के लिए सामान्य कैटेगरी में ₹2,500 और तत्काल कैटेगरी में ₹5,000 शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं, 60 पेज के पासपोर्ट के लिए सामान्य शुल्क ₹3,500 और तत्काल शुल्क 6,000 रुपये होगा।

रिप्लेसमेंट पर सबसे अधिक बढ़ोतरी

खोए या क्षतिग्रस्त पासपोर्ट के रिप्लेसमेंट पर सबसे अधिक बढ़ोतरी की गई है। 36 पेज के पासपोर्ट के रिप्लेसमेंट के लिए सामान्य कैटेगरी में ₹5,000 और तत्काल में ₹7,500 देने होंगे। इसके अलावा पुलिस क्लियरेंस सर्टिफिकेट (PCC), सरेंडर सर्टिफिकेट और अन्य प्रमाणपत्रों के लिए ₹750 फीस तय किया गया है। नए शुल्क 1 जुलाई से पूरे देश में लागू होंगे।

नई दरों के तहत, एडल्ट कैटेगरी में अप्लाई करने वाले एडल्ट और 15-18 साल के नाबालिगों को नॉर्मल प्रोसेस के तहत नए 36-पेज के पासपोर्ट या री-इश्यू के लिए 2,500 रुपये देने होंगे। तत्काल कैटेगरी के तहत यह फीस बढ़कर 5,000 रुपये हो जाएगी।

60-पेज की पासपोर्ट

60-पेज की पासपोर्ट बुकलेट के लिए नॉर्मल कैटेगरी में 3,500 रुपये और तत्काल प्रोसेसिंग के तहत 6,000 रुपये की फीस लगेगी। सबसे अधिक बढ़ोतरी खोए या खराब हुए पासपोर्ट को बदलने पर की गई है। 36-पेज का रिप्लेसमेंट पासपोर्ट नॉर्मल प्रोसेसिंग के तहत 5,000 रुपये और तत्काल के तहत 7,500 रुपये का पड़ेगा। 60-पेज के रिप्लेसमेंट पासपोर्ट के लिए फीस नॉर्मल और तत्काल कैटेगरी के तहत क्रमशः 6,000 रुपये और 8,500 रुपये तय की गई है।

खोए या खराब हुए 36-पेज के पासपोर्ट

खोए या खराब हुए 36-पेज के पासपोर्ट को बदलने के लिए अप्लाई करने वाले नाबालिगों को नॉर्मल कैटेगरी के तहत 4,250 रुपये और तत्काल के तहत 6,750 रुपये देने होंगे। पासपोर्ट से जुड़ी अन्य सर्विस, जैसे पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट, सरेंडर सर्टिफिकेट, ग्लोबल एंट्री प्रोग्राम वेरिफिकेशन और दूसरे सर्टिफिकेट के लिए भारत में फीस 750 रुपये तय की गई है।

सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिटी की कीमत

पहचान के सर्टिफिकेट (सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिटी) की कीमत 1,000 रुपये होगी। विदेश में दी जाने वाली सेवाओं के लिए इमरजेंसी सर्टिफिकेट की कीमत 15 डॉलर होगी। जबकि पहचान प्रमाण-पत्र (सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिटी) की कीमत 50 USD होगी। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि इन सेवाओं के लिए कोई तत्काल सुविधा उपलब्ध नहीं होगी।

नए फीस स्ट्रक्चर पर एक नजर डालें

1. सामान्य और तत्काल पासपोर्ट (36 और 60 पेज) के रुल्स

36 पेज का नया/री-इश्यू पासपोर्ट (नॉर्मल): अब इसके लिए ₹2,500 देने होंगे।

36 पेज का पासपोर्ट (तत्काल): तत्काल स्कीम के तहत यह फीस ₹5,000 होगी।

60 पेज का पासपोर्ट (नॉर्मल): इसके लिए ₹3,500 की फीस तय की गई है।

60 पेज का पासपोर्ट (तत्काल): इसके लिए आपको ₹6,000 चुकाने होंगे।

2. पासपोर्ट खोने या खराब होने पर (रिप्लेसमेंट)

36 पेज का रिप्लेसमेंट (नॉर्मल): ₹5,000 की फीस लगेगी।

36 पेज का रिप्लेसमेंट (तत्काल): इसके लिए ₹7,500 देने होंगे।

60 पेज का रिप्लेसमेंट (नॉर्मल): इसकी फीस ₹6,000 तय की गई है।

60 पेज का रिप्लेसमेंट (तत्काल): इसके लिए सबसे ज्यादा ₹8,500 चुकाने होंगे।

3. अन्य जरूरी सेवाएं

पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (PCC) और सरेंडर सर्टिफिकेट जैसी अन्य मिसलेनियस सेवाओं के लिए भारत में ₹750 की फीस लगेगी।

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भारत से बाहर आपातकालीन सर्टिफिकेट (Emergency Certificate) के लिए 15 USD और आइडेंटिटी सर्टिफिकेट के लिए 50 USD की फीस तय की गई है।

वैलिडिटी (वैधता) के नियम

भारत सरकार ने साफ किया है कि वयस्कों (Adults) के लिए जारी किए गए पासपोर्ट 10 साल के लिए वैध रहेंगे। वहीं, नाबालिगों (Minors) के लिए जारी पासपोर्ट की वैधता 5 साल या उनके 18 वर्ष के होने तक (जो भी पहले हो) मान्य रहेगी।

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Ashadha month 2026: इस साल कब से शुरू होगा आषाढ़ का महीना, जानें तारीख और इस महीने में आएंगे कौन से व्रत त्योहार

Ashadha month 2026: हिंदू कैलेंडर का तीसरा महीना ज्येष्ठ अब से कुछ दिनों में समाप्त होने वाला है। इसके बाद आषाढ़ का महीना शुरू होगा, जो इस कैलेंडर का चौथा महीना है। इस महीने में पूजा-पाठ, व्रत, तपस्या और भगवान की भक्ति का खास फल मिलता है। मान्यता है कि आषाढ़ माह में भगवान विष्णु की पूजा करने, दान-पुण्य करने और सात्विक जीवन अपनाने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि आती है। आषाढ़ माह को भक्ति, संयम, दान और साधना का महीना कहा जाता है। इसलिए इस पूरे महीने भगवान विष्णु की आराधना और धर्म-कर्म से जुड़कर व्यक्ति आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकता है।

इस दिन से शुरू हो आषाढ़ माह

अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम ने न्यूज 18 को बताया कि वैदिक पंचांग के मुताबिक 30 जून 2026 से आषाढ़ माह की शुरुआत होगी। उन्होंने बताया कि ज्येष्ठ पूर्णिमा 30 जून को सुबह 5 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगी, इसके बाद आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी। इस माह का समापन 29 जुलाई 2026 को होगा।

आषाढ़ माह 2026 के व्रत-त्योहार

  • 30 जून- आषाढ़ माह की शुरुआत
  • 3 जुलाई- संकष्टी चतुर्थी
  • 10 जुलाई- योगिनी एकादशी
  • 12 जुलाई- मासिक शिवरात्रि, प्रदोष व्रत (कृष्ण)
  • 14 जुलाई- आषाढ़ अमावस्या
  • 16 जुलाई- जगन्नाथ रथ यात्रा, कर्क संक्रांति
  • 25 जुलाई- देवशयनी एकादशी, अषाढ़ी एकादशी
  • 26 जुलाई- प्रदोष व्रत (शुक्ल)
  • 29 जुलाई- गुरु पूर्णिमा, आषाढ़ पूर्णिमा व्रत

आषाढ़ माह में क्या करें?

  • आषाढ़ माह में तुलसी के पौधे में पीले रंग के कलावे से 108 गांठ बांधना शुभ होता है। इससे शादी के प्रबल योग बनते हैं।
  • आषाढ़ महीने में रोज भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है।
  • आषाढ़ माह में हर दिन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करना चाहिए।
  • इस महीने में जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का जरूर दान करना चाहिए।

आषाढ़ माह में क्या न करें?

  • आषाढ़ महीने में बड़ों का अनादर न करें और किसी को बुरा न बोलें।
  • आषाढ़ माह में प्याज-लहसुन और तामसिक भोजन का सेवन करने से बचें।
  • आषाढ़ माह में मदिरा का सेवन और किसी तरह का नशा न करें।

आषाढ़ माह का धार्मिक महत्व

आषाढ़ का महीना भगवान विष्णु की भक्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन से चातुर्मास की शुरुआत होती है। कहा जाता है कि देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और फिर चार महीने बाद देवउठनी एकादशी पर जागते हैं। चातुर्मास शुरू होने के बाद हिंदू धर्म में कई मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है। आषाढ़ शुक्ल एकादशी के बाद विवाह, गृह प्रवेश, सगाई और मुंडन जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते। इसलिए इस अवधि को साधना, भक्ति, जप और तप के लिए श्रेष्ठ माना गया है।

Gayatri Jayanti 2026: गायत्री जयंती का पर्व आज, जानें क्या है वेदमाता के प्रकट होने की कथा, आज की पूजा विधि और सामग्री

त्रेता से लेकर कलयुग तक कहानी चरण पादुका की

चरण पादुका खड़ाऊं/चट्टी इन दिनों चर्चा में है। लोग कह रहे हैं। एक था त्रेता युग, जिसमें भरत जी ने अपने बड़े भाई और देश दुनिया के करोड़ों लोगों के आराध्य प्रभु श्रीराम की चरण पादुका को सार्वजनिक रूप से अयोध्या के राजसिंहासन पर सहेज कर रखा था। एक कलियुग है, जिसमें कथित रामभक्तों ने उनकी चांदी की चरण पादुका को ही चंपत कर दिया। इसी बहाने मुझे अपने स्वर्गीय पिताजी की चरण पादुका की कहानी याद आ गई। पेश है अम्मा से सुनी बाबूजी के चरण पादुका की कहानी।

बाबूजी की चरण पादुका की विदाई

इस विदाई की कहानी यूं है। भैया ने कोई बदमाशी की। बाबूजी को गुस्सा आ गया। उन्होंने अपनी चट्टी निकाली और भाई साहब को धुन दिया। उसके बाद वह ऑफिस चले गए। पिताजी शांत स्वभाव के थे। मैंने उनको कभी किसी से तेज आवाज में बात करते और झगड़ते नहीं देखा था। मारना पीटना तो दूर की बात। कभी पिटाई भी की तो मुद्दा पढ़ाई का ही था। वह गांव के पहले ग्रेजुएट थे। तब गोरखपुर में अभी यूनिवर्सिटी की स्थापना नहीं हुई थी। जिस सेंटएंड्रूज कॉलेज से उन्होंने ग्रेजुएशन किया था वह आगरा यूनिवर्सिटी से एफिलिएटेड था।

 

जिस समय की घटना का मैं जिक्र कर रहा हूं, उस समय पिताजी गोरखपुर के रेल कारखाने में काम कर रहे थे, लेकिन मूल रूप से वह शिक्षक थे। ककरही इंटर कॉलेज के केशभान राय उनके गुरु और आदर्श थे। केशभान राय अपने जमाने के बड़े स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे। बाद में वह विधायक और प्रदेश के शिक्षा मंत्री भी बने। उनकी प्रेरणा से पिताजी ने कुछ दिनों तक ककरही में शिक्षण कार्य भी किया। इसलिए वह पढ़ाई लिखाई में कोताही करने पर कभी-कभी गुस्सा करते थे। हालांकि हम भाइयों पर सरस्वती की इतनी कृपा थी कि उनको यह अवसर बहुत ही कम मिलता था।

 

लौटते हैं चट्टी की ओर। भैया को चट्टी से पिटाई का काफी मलाल था। पिताजी के ऑफिस जाने के बाद उन्होंने अपनी पूरी खीस चट्टी पर निकालने की सोची। कुछ इस तरह कि “न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी”। उन्होंने धीरे से सीढ़ी वाले कमरे से एक हाथ से दोनों चट्टियों को उठाया और दूसरे हाथ से कुल्हाड़ी। गली में ले जाकर चट्टी को चीरा और फेंक दिया।

 

अम्मा चट्टी से पिटाई और उसकी चिराई की चश्मदीद थीं। उन्हें बाबूजी की चट्टी,चट्टी के हश्र की कहानी और उससे सुनकर बाबूजी के गुस्से और नतीजे की चिंता थी। बाबूजी ऑफिस से आए। हाथ मुंह धुलकर गुड़ की एक डली खाई और लौटे से पानी पीकर तृप्ति की एक लंबी सांस ली। अम्मा फिक्रमंद थीं। कहीं चट्टी के बारे में पूछ लिया तो क्या होगा।

 

बाबूजी ने अम्मा से कहा…गायत्री, सुनो! मुझे मुन्ना के प्रति अपने सुबह के व्यवहार के प्रति अफसोस है। मैंने संकल्प लिया है कि आज से कभी चट्टी नहीं पहनूंगा। अम्मा की फिक्र दूर हुई। उन्होंने फिर चट्टी के हश्र के बारे में बताया। पिताजी ने निर्विकार भाव से सुना और कहा अब जब उसे पहनना ही नहीं है तो उसके बारे में क्या सोचना।

 

इस तरह से मेरे घर से चट्टी की विदाई हुई। और धीरे धीरे रबर की चप्पलों की इंट्री हुई। हालांकि बचपन में मैंने भी चट्टी पहनी है। पर कभी उसकी मार नहीं खाई। हां जिस तरह की पकी हुई लकड़ी से चट्टी बनती है। और उसमें जो मजबूती होती है उसे देखकर उससे मार खाने से चोट का अहसास तो किया ही जा सकता है। सर पर अगर कायदे से लग जाए तो उसका फटना तय है। वैसे भी बचपन में बड़े बुजुर्गों को कई बार कहते सुना कि चट्टी से मार-मार कर सीधा कर दूंगा। इससे इसकी मारक क्षमता का अंदाजा लगता है। मुझे तो लगता है कि चट्टी की मार से ही 'छठी के दूध' वाले मुहावरे का जन्म हुआ। तभी तो लोग कहते हैं कि इतना मारूंगा कि छठी के दूध की याद आ जाएगा। 

 

खैर यह शोध की बात है। चट्टी से खड़ाऊ का क्या रिश्ता है? पता नहीं पर दोनों की तली लकड़ी की होती थी। मारक क्षमता इसकी चट्टी से अधिक रही होगी। क्योंकि यह दोनों ओर से बराबर से चोट करने में सक्षम थी। शायद इसी कारण इसे संस्कारों और पवित्रता से जोड़ दिया गया। अमूमन इसे पुजारी या पण्डिजी लोग ही पहनते थे। जनेऊ के समय जिनका जनेऊ होता है वह बटुक भी। खड़ाऊ का पूजन भी होता है। भरत जी ने भगवान श्री राम के खड़ाऊ को पूजते-पूजते अयोध्या का राज काज संभाले रखा। इसलिए खड़ाऊ से हिंसा के उदाहरण कम मिलते हैं।

 

अलबत्ता बाद में आए जूते, चप्पलें और सैंडिलों के मार का जिक्र कभी कभी जरूर होता रहता है। इनके साथ सुविधा यह है कि इनको हाथ में लेकर भी किसी पर बजा सकते हैं या फेंककर भी मार सकते हैं। जिसको मार रहे हैं उसको लगे या न लगे अगर वह हैसियत वाला है तो मारने वाला साधारण या फटा जूता भी चलाकर भरपूर सुर्ख़ियों में आ जाएगा। हाल के दिनों में एक और चीज चलन में आई है। जिसने जूता मारा उसे भले न पता हो, पर मारने के तुरंत बाद गिनने वाले तुरंत बता देंगे कि इतने सेकंड में इतने जूते मारे। यह अगले की मारक क्षमता का प्रमाण होता है। चट्टी को इस बात का जरूर अफसोस होगा कि काश! मेरे जमाने में भी ऐसा होता।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

Apple के शौकीनों को बड़ा झटका! मैकबुक समेत इन प्रोडक्ट्स के बढ़े दाम, कंपनी ने AI को बताया वजह

अमेरिकी टेक्नोलॉजी दिग्गज Apple ने भारत में अपने कई प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ा दी हैं। इनमें Mac डेस्कटॉप, MacBook, Apple TV और HomePod समेत कई डिवाइस शामिल हैं। Apple का कहना है कि AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की वजह से मेमोरी और स्टोरेज चिप्स की कीमतें दुनिया भर में तेजी से बढ़ी हैं। अब कंपनी बढ़ी लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों से वसूल रही है।

Mac Mini की कीमत में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी

  • सबसे बड़ी बढ़ोतरी Mac Mini M4 (256GB) की कीमत में हुई है। इसकी कीमत ₹59,900 से बढ़कर ₹82,900 हो गई है, यानी करीब 38% का इजाफा।
  • इसके अलावा Mac Mini M4 Pro अब ₹1,99,900 में मिलेगा। पहले इसकी कीमत ₹1,49,900 थी।
  • वहीं MacBook Air M5 की कीमत में ₹29,000 की बढ़ोतरी हुई है। अब यह ₹1,49,900 में मिलेगा।

Apple TV और HomePod भी हुए महंगे

  • Apple ने अपने स्मार्ट होम डिवाइस भी महंगे कर दिए हैं।
  • Apple TV 4K (64GB) की कीमत ₹14,900 से बढ़कर ₹25,900 हो गई है।
  • Apple TV 4K (128GB) अब ₹31,900 का हो गया है। पहले इसकी कीमत ₹16,900 थी।
  • HomePod की कीमत ₹32,900 से बढ़कर ₹44,900 हो गई है।
  • HomePod Mini अब ₹15,900 में मिलेगा, जबकि पहले इसकी कीमत ₹10,900 थी।
  • हाल ही में लॉन्च हुआ MacBook Neo भी ₹69,900 से बढ़कर ₹79,900 का हो गया है।

आखिर कीमतें बढ़ाने की नौबत क्यों आई?

Apple का कहना है कि इस समय पूरी कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री एक बड़ी चुनौती का सामना कर रही है। दरअसल, दुनिया भर में AI डेटा सेंटर तेजी से बन रहे हैं। इन डेटा सेंटरों को बड़ी मात्रा में मेमोरी और स्टोरेज चिप्स की जरूरत पड़ती है। मांग इतनी तेज हो गई है कि इन चिप्स की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई हैं।

कंपनी का कहना है कि उसने अब तक बढ़ी लागत का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला था। लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि कुछ प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया है। Apple ने अपने बयान में कहा, ‘हमें पता है कि यह ग्राहकों के लिए अच्छी खबर नहीं है। लेकिन हम लगातार ऐसे तरीके खोजने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे कीमतों पर दबाव कम किया जा सके।’

Tim Cook पहले ही दे चुके थे संकेत

Apple के निवर्तमान CEO टिम कुक ने हाल ही में The Wall Street Journal को दिए इंटरव्यू में कहा था कि मेमोरी चिप्स की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण प्रोडक्ट्स महंगे होना अब लगभग तय है।

उन्होंने कहा था कि Apple अब तक बढ़ी लागत का बोझ खुद उठा रही थी। लेकिन कंपोनेंट्स की कीमतों में जिस रफ्तार से बढ़ोतरी हुई है, उसके बाद ऐसा लंबे समय तक करना मुमकिन नहीं है।

AI की वजह से क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि मेमोरी चिप बनाने वाली कंपनियां अब अपने प्रोडक्शन का बड़ा हिस्सा AI डेटा सेंटरों के लिए दे रही हैं। इसकी वजह से लैपटॉप, स्मार्टफोन और दूसरे कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स के लिए चिप्स की सप्लाई कम हो गई है।

जब सप्लाई घटती है और मांग बढ़ती है तो कीमतें भी बढ़ने लगती हैं। यही वजह है कि पूरी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री पर लागत का दबाव बढ़ गया है। Deutsche Bank ने इसे ग्राहकों पर पड़ने वाला संभावित ‘मेमोरी इन्फ्लेशन टैक्स’ बताया है। यानी AI की बढ़ती मांग का खर्च आखिरकार ग्राहकों की जेब पर पड़ सकता है।

मेमोरी कंपनियां रिकॉर्ड कमाई कर रही हैं

मेमोरी चिप बनाने वाली कंपनी Micron ने हाल ही में 86% ग्रॉस मार्जिन दर्ज किया है। एक साल पहले यह सिर्फ 15% था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मेमोरी चिप्स की कीमतों में कितनी बड़ी तेजी आई है।

वहीं Morgan Stanley ने अपनी ‘Chipflation’ रिपोर्ट में कहा है कि सेमीकंडक्टर की बढ़ती लागत का असर आने वाले समय में लगभग सभी इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की कीमतों पर दिखाई देगा।

क्या iPhone भी महंगा हो सकता है?

फिलहाल Apple ने भारत या दूसरे देशों में iPhone की कीमत बढ़ाने का ऐलान नहीं किया है।

हालांकि, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर DRAM और NAND मेमोरी की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं और AI डेटा सेंटरों की मांग ऊंची बनी रही, तो आने वाले समय में iPhone की कीमतें बढ़ने की भी पूरी संभावना है। ऐसे में स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहकों को भी जल्द महंगे iPhone का सामना करना पड़ सकता है।

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मछुआरों ने समुद्र से देखा वेनेजुएला का भूकंप, VIDEO:बेसबॉल मैच छोड़कर भागे प्लेयर, रोते-बिलखते लोगों से भर गई सड़कें

दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में आए शक्तिशाली भूकंप ने कुछ ही सेकेंड में लोगों की जिंदगी तहस-नहस कर दी। तेज झटकों से घबराए लोग घरों, दफ्तरों और ऊंची इमारतों से बाहर निकल आए। कई शहरी इलाके मलबे के ढेर में तब्दील हो गए। सड़कें रोते-बिलखते लोगों से भर गईं। इसके बाद शुरू हुई मलबे से लोगों को निकालने की जद्दोजहद। प्रभावित इलाकों में आपातकालीन टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं। आफ्टरशॉक की आशंका के कारण आम लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। VIDEO में देखें भूकंप के बाद का मंजर…