कैफे में रची गई साजिश, CCTV से खुली पोल, एक बॉलीवुड फिल्म की तर्ज हुआ केतन का मर्डर

Pune Ketan Agarwal murder case

Pune Ketan Agarwal murder case: पुणे के युवा करोड़पति बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की मौत कोई हादसा नहीं, बल्कि एक बेहद खौफनाक और सोची-समझी साजिश थी। पुलिस की तफ्तीश में अब एक ऐसा सीसीटीवी (CCTV) फुटेज हाथ लगा है, जिसने इस मर्डर मिस्ट्री की पूरी पोल खोलकर रख दी है। फिल्म 'हसीन दिलरुबा' की तर्ज पर रची गई इस खूनी स्क्रिप्ट में केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने मौत से ठीक एक दिन पहले एक कैफे में बैठकर मर्डर का फाइनल प्लान तैयार किया था।

 

दरअसल, रियल एस्टेट कारोबारी केतन विशाल अग्रवाल हत्याकांड में हर दिन ऐसे खुलासे हो रहे हैं जो किसी बॉलीवुड सस्पेंस थ्रिलर फिल्म को भी पीछे छोड़ दें। पुलिस की जांच अब उस सीसीटीवी फुटेज तक पहुंच गई है, जो केतन की हत्या से ठीक एक दिन पहले का है। इस फुटेज ने आरोपियों के उस झूठ को बेनकाब कर दिया है जिसमें वे इसे एक 'हादसा' बताने की कोशिश कर रहे थे। ALSO READ: हत्या के पहले किसने गायब किया केतन का पासपोर्ट, 17 करोड़ में बुक किया था महल, पिता बोले सिया से क्यों मारा बेटे को?

थर्ड वेव कैफे का वो 'सीक्रेट प्लान'

सामने आया सीसीटीवी फुटेज पुणे के 'थर्ड वेव' कैफे का है। हत्या से ठीक एक दिन पहले सिया गोयल (जींस-टॉप में) और उसका प्रेमी चेतन चौधरी (टी-शर्ट और जींस में) इस कैफे में दाखिल होते हैं। दोनों ने कैफे के अंदर भीड़भाड़ वाले हिस्से को छोड़कर एक कोने वाली खुली जगह चुनी। वीडियो में साफ दिख रहा है कि दोनों ने अपनी कुर्सियां बेहद करीब खींच रखी थीं ताकि उनकी फुसफुसाहट कोई और न सुन सके।

 

करीब एक घंटे तक चली इस सीक्रेट मीटिंग के दौरान दोनों के हावभाव बेहद गंभीर और संदिग्ध थे। इसी बीच सिया के पास एक फोन कॉल भी आता है, जिसके बाद वह और तेजी से चेतन के साथ चर्चा में मशगूल हो जाती है। पुलिस का दावा है कि इसी मेज पर बैठकर दोनों ने केतन को रास्ते से हटाने और अगले दिन लोहागढ़ किले से धक्का देने का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार किया था। ALSO READ: सिया गोयल का वो खौफनाक कबूलनामा और बेकरी-ड्राई फ्रूट्स वाले इश्क की इनसाइड स्टोरी!

नेटफ्लिक्स की 'हसीन दिलरुबा' जैसा मर्डर प्लॉट

केतन अग्रवाल की हत्या का यह खौफनाक तरीका साल 2021 में आई बॉलीवुड फिल्म 'हसीन दिलरुबा' की याद दिलाता है। उस फिल्म में भी प्यार और धोखे के बीच एक पार्टनर को रास्ते से हटाने के लिए ऐसी ही उलझी हुई मर्डर मिस्ट्री बुनी गई थी। ठीक उसी तर्ज पर, 18 जून को लोहागढ़ किले में ट्रेकिंग के बहाने केतन को ले जाया गया और वहां 400 फीट गहरी खाई में धक्का देकर उसकी जान ले ली गई।

करोड़ों की दौलत पर भारी पड़ा 'दिवाली का प्यार'

26 वर्षीय केतन अग्रवाल करोड़ों की संपत्ति के मालिक थे। इसी साल नवंबर में उनकी शादी 20 वर्षीय सिया गोयल से होने वाली थी, जिनकी सगाई फरवरी में धूमधाम से हुई थी। लेकिन सिया इस शादी के लिए तैयार नहीं थी। परिवार के दबाव में उसने हां तो कह दिया था, लेकिन उसका दिल अपने प्रेमी चेतन चौधरी के लिए धड़क रहा था, जिससे उसकी मुलाकात पिछले साल दिवाली पर हुई थी। सिया केतन की दौलत छोड़ चेतन के साथ जाना चाहती थी। ALSO READ: कौन है सिया का प्रेमी चेतन चौधरी, 6 महीनों में 2004 कॉल, 238 घंटे बातचीत और मर्डर के 3 प्लान

 

पुलिस पूछताछ में जब आरोपी चेतन से पूछा गया कि वह सिया को लेकर भाग क्यों नहीं गया? तो उसने बेहद हैरान करने वाला जवाब दिया। चेतन ने कहा कि अगर हम भाग जाते, तो सिया के परिवार की समाज में बदनामी होती और उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचती। यानी परिवार की 'इज्जत' बचाने के लिए उन्होंने केतन की जान लेना बेहतर समझा।

क्या कहा चेतन के पिता ने?

इस बीच मामले में ट्विस्ट तब आया जब आरोपी चेतन चौधरी के पिता बाबूलाल चौधरी अपने बेटे के बचाव में उतर आए। बाबूलाल ने दावा किया कि उनका बेटा बेगुनाह है और उसे फंसाया जा रहा है। उनके मुताबिक, चेतन 18 जून को घर से सिर्फ यह कहकर निकला था कि वह एक 'मीटिंग' में जा रहा है। चेतन के पिता ने कहा कि हम सिया को नहीं जानते, उसका नाम भी एक दिन पहले सुना है। घटना के वक्त मेरा बेटा दूर खड़ा था, जबकि जब केतन गिरा तो सिया उसके बिल्कुल पास खड़ी थी।

 

पिता के दावों के उलट, पुलिस के पास मौजूद सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल्स दोनों आरोपियों की संलिप्तता की गवाही दे रहे हैं। पुलिस ने मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर लिया है और कोर्ट से रिमांड लेकर आगे की कड़ी पूछताछ कर रही है।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

 

तामेश्वरनाथ धाम बनेगा भव्य कॉरिडोर, सीएम योगी ने 475 करोड़ की 139 परियोजनाओं की दी सौगात

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बाबा तामेश्वरनाथ धाम, बाबा बैजूनाथ धाम सहित क्षेत्र के धार्मिक स्थलों का सौंदर्यीकरण केवल आस्था का सम्मान नहीं, बल्कि उन पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता है जिन्होंने इन धरोहरों की स्थापना की थी। सरकार बाबा तामेश्वरनाथ धाम को नई पहचान देने के लिए भव्य कॉरिडोर निर्माण की योजना पर कार्य कर रही है। कॉरिडोर बनने से क्षेत्र का विकास तीव्र गति से होगा और इसे काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या धाम तथा मां विंध्यवासिनी धाम की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। 

 

मुख्यमंत्री गुरुवार को कुआनो नदी तट स्थित श्री बैजूनाथ धाम में संत कबीर नगर व गोरखपुर की 475 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 139 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण/स्वीकृति पत्र भी वितरित किए। इन परियोजनाओं में धनघटा विधानसभा क्षेत्र के लिए लगभग 225 करोड़ रुपये तथा खजनी विधानसभा क्षेत्र के लिए लगभग 251 करोड़ रुपये के विकास कार्य शामिल हैं। 

 

6.18 लाख नए ग्रामीण परिवारों को आवास स्वीकृत

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम में आने से पहले उन्होंने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ समीक्षा बैठक की। इस दौरान उत्तर प्रदेश के 6 लाख 18 हजार नए पात्र परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत आवास स्वीकृत किए गए। डबल इंजन सरकार का यह निर्णय गरीबों को पक्की छत उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम है।

 

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे ने बदली तस्वीर

सीएम ने कहा कि कभी सबसे पिछड़े क्षेत्रों में गिने जाने वाले धनघटा और खजनी आज पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के माध्यम से राजधानी लखनऊ से सीधे जुड़ रहे हैं। पहले जहां इन क्षेत्रों को उपेक्षित माना जाता था, अब ये विकास की मुख्यधारा का हिस्सा बन चुके हैं। बेलघाट, खजनी और धनघटा के लोगों को अब लखनऊ पहुंचने के लिए लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ता, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के जरिए दो घंटे में राजधानी तक पहुंचना संभव है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय एवं ग्रामीण सड़कों का विस्तार, नए पुलों और संपर्क मार्गों का निर्माण क्षेत्र की तस्वीर बदल रहा है। धुरियापार क्षेत्र में ग्रेटर गीडा की स्थापना से नए उद्योग लग रहे हैं और धनघटा क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। मगहर में संत कबीर एकेडमी, ऑडिटोरियम और महापरिनिर्वाण स्थली के विकास के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार से हजारों युवाओं को रोजगार उपलब्ध हो रहा है।

 

बखिरा झील बनेगी इको-टूरिज्म केंद्र

मुख्यमंत्री ने मेहन्दावल विधानसभा क्षेत्र की बखिरा झील का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र अब रामसर साइट और इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। सरकार शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बड़े कार्य कर रही है। जहां उच्च शिक्षण संस्थान नहीं थे, वहां डिग्री कॉलेज, पॉलिटेक्निक व आईटीआई खोले जा रहे हैं। ऑपरेशन कायाकल्प, प्रोजेक्ट अलंकार, अटल आवासीय विद्यालय और मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय जैसी योजनाओं के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।

 

गरीबों, किसानों और युवाओं को अधिकार दिलाने का संकल्प

मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार का लक्ष्य आने वाली पीढ़ी को आत्मनिर्भर बनाना है। डबल इंजन सरकार गरीब, किसान, नौजवान व महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। आज गरीबों को मुफ्त राशन, आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुविधा और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल रहा है।

 

आपातकाल को बताया लोकतंत्र का काला अध्याय

मुख्यमंत्री ने 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल का उल्लेख करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने लोकतंत्र का गला घोंटा, नागरिक अधिकारों को निलंबित किया और विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया था। कांग्रेस व समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो दल लोकतंत्र व संविधान की बात करते हैं, वही संविधान के सबसे बड़े अपमान के लिए जिम्मेदार रहे हैं।

 

उत्तर प्रदेश बना देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश पहचान का मोहताज नहीं है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बन चुका है। गांव, गरीब, किसान, नौजवान और महिलाओं को उनका अधिकार देने का कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार ने किया है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से विकास व सुशासन की इस यात्रा में सहभागी बनने का आह्वान करते हुए कहा कि डबल इंजन सरकार के साथ मिलकर क्षेत्र व प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।

 

2024 के चुनाव में विपक्ष ने किया गुमराह

विपक्ष पर कड़ा प्रहार करते हुए सीएम योगी ने कहा कि कांग्रेस व समाजवादी पार्टी जनता की आंख में धूल झोंकने का काम करती हैं। जब देश लोकतंत्र की हत्या के 50वें वर्ष में प्रवेश कर रहा था, तब ये दोनों दल देश की जनता के साथ झूठे वायदे कर रहे थे। इन लोगों ने 2024 के लोकसभा चुनाव में जनता जनार्दन को गुमराह किया था। ये लोग संविधान की प्रति लेकर घूम रहे थे। राहुल गांधी व अखिलेश यादव किस मुंह से जनता के बीच जाकर लोकतंत्र की दुहाई देते हैं, किस मुंह से संविधान की प्रति लेकर घूमते हैं?  संविधान का जितना बड़ा अपमान कांग्रेस व सपा ने किया, किसी ने भी नहीं किया। डबल इंजन सरकार ने बाबा साहेब का सपना साकार करने, संविधान, विरासत व समाज के हर तबके को सम्मान देने का काम किया है।

 

इन लाभार्थियों को सीएम योगी ने दिए स्वीकृति पत्र 

 

राधिका (मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना)

 

शबनम कुमारी (मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना)

रीता उपाध्याय (स्वंय सहायता समूह, 5,71,50,000 रुपये का चेक)

अभिज्ञान राय (मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास, 5 लाख का चेक) 

राम शरण विश्वकर्मा (श्रम सम्मान योजना से लाभान्वित) 

यशुवर्धन पांडेय (अनुदान पत्र) 

 

इस अवसर पर मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम, डुमरियागंज के सांसद जगदम्बिका पाल, विधायक गणेश चंद्र चौहान, विधायक श्रीराम चौहान, विधायक अंकुर राज तिवारी, विधायक अनिल त्रिपाठी, विधान परिषद सदस्य संतोष सिंह, सुभाष यदुवंशी, जिला पंचायत अध्यक्ष बलराम यादव, पूर्व सांसद अष्टभुजा प्रसाद शुक्ल, पूर्व सांसद इंद्रजीत मिश्र, भाजपा जिलाध्यक्ष नीतू सिंह, भाजपा गोरखपुर जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, पूर्व विधायक राकेश सिंह बघेल, दिग्विजय नारायण चतुर्वेदी, संत प्रसाद, जिला प्रभारी अजय सिंह गौतम, जिला महामंत्री गणेश पाण्डेय आदि मौजूद रहे।

बुनियादी शिक्षा को नई गति, योगी सरकार ने एआरपी व्यवस्था का किया पुनर्गठन

Nipun Bharat UP

Restructuring of the ARP System: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार बुनियादी शिक्षा में गुणवत्ता सुधार को नई गति देने के लिए अकादमिक नेतृत्व व्यवस्था को और मजबूत बना रही है। इसी क्रम में समग्र शिक्षा के अंतर्गत संचालित ब्लॉक संसाधन केंद्रों (बीआरसी) की अकादमिक व्यवस्था को नई संरचना देते हुए अकादमिक रिसोर्स पर्सन्स (एआरपी) प्रणाली का व्यापक पुनर्गठन किया गया है। अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश शासन पार्थ सारथी सेन शर्मा के हस्ताक्षर से जारी शासनादेश में एआरपी के चयन, कार्य दायित्व, प्रशिक्षण, मूल्यांकन और जवाबदेही संबंधी विस्तृत प्रावधान निर्धारित किए गए हैं।

 

शासनादेश के अनुपालन में स्कूल शिक्षा महानिदेशक एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को जुलाई तक रिक्त एआरपी पदों पर चयन प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं, ताकि नए शैक्षणिक सत्र में ब्लॉक स्तर का अकादमिक सहयोग तंत्र पूरी क्षमता के साथ कार्य कर सके।

विद्यालयों तक पहुंचेगा मजबूत अकादमिक सहयोग तंत्र

नई व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक ब्लॉक में पांच चयनित एआरपी और एक नामित डायट मेंटर मिलकर शैक्षणिक सहायता टीम का गठन करेंगे। यह अकादमिक टीम विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने, शिक्षकों को सतत शैक्षणिक सहयोग प्रदान करने, कक्षा-कक्ष की चुनौतियों के समाधान तथा विद्यार्थियों के अधिगम स्तर में सुधार की दिशा में कार्य करेगी।

पारदर्शी और योग्यता आधारित चयन प्रक्रिया

एआरपी का चयन पूरी तरह मेरिट आधारित होगा। नई व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक योग्य और अनुभवी शिक्षकों को इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक दायित्व से जोड़ा जा सके। अब सेवानिवृत्ति में केवल पांच वर्ष शेष रहने वाले शिक्षक भी एआरपी पद के लिए पात्र होंगे, जबकि पहले यह सीमा 10 वर्ष थी। अब किसी भी विषय के परिषदीय शिक्षक आवेदन कर सकेंगे, जबकि पहले केवल चयनित विषयों के शिक्षकों को ही पात्रता प्राप्त थी। चयन प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए माइक्रो टीचिंग का प्रावधान समाप्त कर दिया गया है। अब चयन केवल लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर होगा। जिला स्तर पर गठित चयन समिति पूरी प्रक्रिया का संचालन करेगी।

निपुण भारत मिशन को मिलेगा जमीनी आधार

निपुण भारत मिशन को बालवाटिका से कक्षा 5 तक विस्तारित करने की दिशा में यह व्यवस्था महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेगी। एआरपी विद्यालयों में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन), गतिविधि आधारित शिक्षण, टीएलएम के प्रभावी उपयोग, प्रिंट-रिच वातावरण तथा बेहतर कक्षा प्रबंधन को बढ़ावा देंगे। साथ ही वे शिक्षकों को नवीन शिक्षण पद्धतियों और डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग में भी सहयोग करेंगे, जिससे ब्लॉक स्तर पर सतत शैक्षणिक सहयोग की मजबूत व्यवस्था विकसित होगी।

प्रदर्शन आधारित जवाबदेही से बढ़ेगी गुणवत्ता

नई व्यवस्था में एआरपी का कार्यकाल प्रदर्शन आधारित होगा। नियमित मूल्यांकन के आधार पर ही कार्यकाल का विस्तार किया जाएगा। इससे शैक्षणिक नेतृत्व में जवाबदेही, प्रतिस्पर्धा और उत्कृष्टता को बढ़ावा मिलेगा। शासनादेश में एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर्स के लिए नियमित प्रशिक्षण तथा क्षमता संवर्धन कार्यक्रमों का भी प्रावधान किया गया है।

शिक्षा सुधारों को मिलेगा नया बल

प्रदेश में निपुण भारत मिशन, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षा, बालवाटिका, विद्यालय कायाकल्प और अधिगम गुणवत्ता सुधार जैसे कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। नई एआरपी व्यवस्था इन सभी प्रयासों को विद्यालय स्तर तक सशक्त रूप से पहुंचाने का माध्यम बनेगी। ब्लॉक स्तर पर मजबूत अकादमिक सहयोग तंत्र विकसित होने से शिक्षकों को निरंतर मार्गदर्शन मिलेगा, अधिगम परिणामों में सुधार आएगा और निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

 

Rhea Chakraborty: कभी अपने ब्रांड का नाम ‘चुड़ैल का बदला’ रखना चाहती थीं रिया चक्रवर्ती, सोसायटी में काली भेड़ जैसा महसूस…

Rhea Chakraborty: एक्टर-बिजनेसवुमन रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शोविक चक्रवर्ती ने नेहा धूपिया और अंगद बेदी के चैट शो ‘डबल डेट’ पर भाई-बहन के तौर पर साथ काम करने की असलियत के बारे में बात की। दोनों ने पर्सनल और प्रोफेशनल रिश्तों के बीच तालमेल बिठाने की चुनौतियों, 2020 के बाद आए मुश्किल दौर और साथ मिलकर बिजनेस शुरू करने से कैसे उन्हें एक नया मकसद मिला, इस पर खुलकर बात की।

बातचीत के दौरान, नेहा धूपिया ने भाई-बहन से पूछा कि क्या साथ मिलकर बिज़नेस शुरू करने का फैसला आसान था। ईमानदारी से जवाब देते हुए, रिया ने माना कि भाई-बहन के साथ काम करने में अपनी तरह की मुश्किलें आती हैं। रिया ने कहा, “भाई-बहन के साथ काम करना मुश्किल होता है। पर्सनल और प्रोफेशनल ज़िंदगी के बीच फर्क समझने में काफ़ी समय लगता है। अगर आप घर पर उनसे नाराज़ हैं और फिर वे काम पर कोई छोटी सी बात करते हैं, तो वह अचानक बहुत बड़ी बात लगने लगती है क्योंकि आप पहले से ही गुस्से में होते हैं।”

अपने काम की शुरुआत के दिनों को याद करते हुए रिया ने बताया कि अक्सर उनके बीच अनबन हो जाती थी। उन्होंने हंसते हुए कहा, “शुरुआत में हमारे लिए यह बहुत मुश्किल था। कमरे से निकलने से पहले वह अक्सर घर छोड़कर जाने की धमकी देते थे।” हालांकि, उन्होंने बताया कि शोविक के घर से अलग रहने के बाद हालात काफी बेहतर हो गए। उन्होंने कहा, “उनके अलग रहने से असल में फायदा ही हुआ। हम ऑफिस में पूरा दिन साथ बिताते थे, इसलिए घर पर अपनी अलग जगह होने से बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिली।”

कभी-कभी होने वाली अनबन के बावजूद, रिया का मानना ​​है कि परिवार के साथ काम करने का एक बड़ा फ़ायदा है। उन्होंने बताया, “भाई-बहन के साथ काम करने का एक अच्छा पहलू यह है कि एक-दूसरे पर पूरा भरोसा होता है।” “लेकिन उनके साथ काम करने के अपने अलग तरह के चैलेंज भी होते हैं।” रिया ने अपने छोटे भाई को एक लीडर के तौर पर आगे बढ़ते हुए देखने के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, “बड़ी बहन होने के नाते, उसे एक एडल्ट और हमारी कंपनी ‘चैप्टर 2’ के CEO के तौर पर देखना एक दिलचस्प सफ़र रहा है। मैं कंप्लायंस और अकाउंट्स जैसे काम संभालती हूँ, जिनमें उसे ज़्यादा दिलचस्पी नहीं है।”

रिया चक्रवर्ती ने यह भी बताया कि ब्रांड का नाम सोचते समय उनके दिमाग में कुछ हटकर नाम भी आए थे। रिया ने हंसते हुए कहा, “मैं ब्रांड का नाम ‘चुड़ैल का बदला’ रखना चाहती थी। मैं इसे लेकर पूरी तरह से पक्की थी और मैंने इसके लिए कूल टी-शर्ट और मर्चेंडाइज़ बनाने के बारे में भी सोचा था।” उन्होंने याद करते हुए कहा, “सबने मुझसे कहा कि इतना नेगेटिव मत सोचो, लेकिन मैं कहती रही, ‘यह नेगेटिव नहीं, मज़ेदार है।'” रिया ने आगे बताया कि एक और नाम जिस पर उन्होंने गंभीरता से सोचा था, वह था ‘ब्लैक शीप’। उन्होंने कहा, “मैंने ‘ब्लैक शीप’ लिखे हुए ब्रेसलेट भी बनवाए थे क्योंकि उस समय हमें ऐसा ही महसूस होता था। हमें लगता था कि हम समाज की ‘ब्लैक शीप’ (सबसे अलग या अजीब) हैं।”

आखिरकार, उन्होंने ‘चैप्टर 2’ नाम चुना, जो उनकी ज़िंदगी में एक नई शुरुआत और नए दौर का प्रतीक था। इस बीच, शोविक ने बताया कि उनके बिज़नेस का सफ़र उनकी ज़िंदगी के एक मुश्किल दौर में शुरू हुआ था। उन्होंने कहा, “सच कहूँ तो, हमने यह बिज़नेस इसलिए शुरू किया क्योंकि हमारे पास कोई और चारा नहीं था।” शोविक के मुताबिक, जहाँ एक तरफ़ रिया का एक्टिंग करियर अनिश्चितता से गुज़र रहा था, वहीं दूसरी तरफ़ MBA पूरा करने के बावजूद उन्हें कोई अच्छा मौका नहीं मिल पा रहा था।

रिया ने आगे कहा, “2020 के बाद मुझे काम मिलना बंद हो गया था। कोई मुझे साइन नहीं कर रहा था और न ही उन्हें कोई काम दे रहा था।” शोविक ने यह भी बताया कि जिस साल उन्हें गिरफ़्तार किया गया था, उसी साल उन्हें MBA में एडमिशन मिला था। उन्होंने कहा, “मैंने 97 परसेंट मार्क्स हासिल किए थे,” और इस बात पर गौर किया कि उस दौर में ज़िंदगी कितनी तेज़ी से बदल गई थी।

YouTube पर ‘डबल डेट’ शो में उनकी खुलकर हुई बातचीत ने दर्शकों को परिवार के साथ काम करने की असलियत, 2020 के बाद आई मुश्किलों और साथ मिलकर बिज़नेस खड़ा करने के सफ़र की एक करीबी झलक दिखाई। हालाँकि रिया और शोविक चक्रवर्ती ने माना कि भाई-बहन के रिश्ते और प्रोफेशनल ज़िम्मेदारियों के बीच तालमेल बिठाना हमेशा आसान नहीं रहा है, लेकिन उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भरोसे और आपसी सहयोग ने उन्हें मुश्किलों से उबरने में मदद की है। नेहा धूपिया और अंगद बेदी के YouTube चैट शो में उनकी मौजूदगी ने न सिर्फ़ उनके बिज़नेस के सफ़र को दिखाया, बल्कि उस मज़बूती को भी दिखाया जिसने मुश्किल समय में उनके रिश्ते को और गहरा किया है।

Ketan Agarwal Murder: ‘मर्डर इसने किया, मैंने नहीं…’; मंगेतर मर्डर केस में सिया गोयल पुलिस के सामने अलग ही कहानी सुनाने लगी

Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के लोहगढ़ किले के पास हुए 25 वर्षीय कारोबारी केतन अग्रवाल की मर्डर मिस्ट्री ने पूरे देश को चौंका दिया है। शुरुआती जांच में जिसे महज एक हादसा समझा जा रहा था, वह अब सोची-समझी साजिश के तहत किया गया मर्डर का मामला बन चुका है। पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसका बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी अब एक-दूसरे पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा रहे हैं। पुलिस के सामने दोनों आरोपी अलग-अलग कहानियां सुनाकर खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

मंगेतर और बॉयफ्रेंड का ब्लेम गेम!

केतन अग्रवाल की कथित हत्या के बाद से सिया गोयल और चेतन चौधरी दोनों ही सलाखों के पीछे हैं। लेकिन पूछताछ के दौरान दोनों का रवैया एक-दूसरे पर दोष मढ़ने का है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक चेतन ने जांचकर्ताओं के सामने दावा किया है कि वह सिया के साथ भाग जाना चाहता था। उसका आरोप है कि सिया गोयल ने ही केतन अग्रवाल को रास्ते से हटाने यानी उसकी हत्या करने पर जोर दिया था।

दूसरी तरफ सिया गोयल ने पुलिस को एक बिल्कुल अलग कहानी सुनाई है। सिया का दावा है कि हत्या की पूरी योजना चेतन चौधरी के दिमाग की उपज थी। सिया ने यह भी बताया कि इससे पहले 14 जून को भी केतन को मारने की एक कोशिश की गई थी लेकिन जब वह योजना विफल हो गई तो चेतन उसके सामने भावुक होकर रोने लगा था।

पुलिस का दावा- यह दोनों की डिफेंस स्ट्रेटेजी

दोनों आरोपियों द्वारा एक-दूसरे पर मढ़ जा रहे आरोपों को लेकर जांच टीम का हिस्सा रहे एक पुलिस अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया है कि वे साजिश का जिम्मा एक-दूसरे पर डालने की कोशिश कर रहे हैं। यह स्पष्ट रूप से उनकी डिफेंस स्ट्रेटेजी लग रही है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि मौजूदा सूबत साफ कर रहे हैं कि इस साजिश में दोनों की बराबर की हिस्सेदारी रही है।

पुणे के कैफे में हुई मुलाकात और सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस

पुलिस इस मामले में डिजिटल और फिजिकल सबूतों को पुख्ता करने में जुटी है। जांच में पुलिस को पता चला है कि सिया और चेतन के बीच 31 मई से 4 जून के बीच पुणे के एक कैफे में मुलाकात हुई थी। पुलिस अब इस बैठक की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह स्थापित किया जा सके कि क्या यह मुलाकात भी उसी मर्डर की साजिश का हिस्सा थी। जांचकर्ताओं ने सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल रिकॉर्ड और आरोपियों के बीच हुए कम्युनिकेशन को खंगाला है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि यह मर्डर पूरी तरह से प्री-प्लान्ड था।

शादी की तैयारी और अनचाहा रिश्ता: क्या थी मर्डर की वजह?

मृतक केतन अग्रवाल एक बड़े रियल एस्टेट व्यवसायी का बेटा था और अपनी पारिवारिक फर्म में निदेशक के पद पर काम कर रहा था। वह बोस्टन से अपनी मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद हाल ही में भारत लौटा था। केतन और सिया के परिवार एक-दूसरे को 1990 के दशक से जानते थे। इसी साल गुलबर्गा में एक शादी के दौरान दोनों की मुलाकात हुई, जिसके बाद शादी की बातचीत तेजी से आगे बढ़ी और महज एक सप्ताह के भीतर दोनों की सगाई हो गई।

पुलिस के मुताबिक सिया पहले से ही चेतन चौधरी के साथ रिलेशनशिप में थी और वह केतन से शादी नहीं करना चाहती थी। इसके बावजूद दोनों परिवारों की ओर से इस साल के अंत में राजस्थान में एक भव्य और विस्तृत शादी समारोह आयोजित करने की तैयारियां चल रही थीं।

हादसे की मनगढ़ंत कहानी से ऐसे उठा पर्दा

बीती 18 जून को पुणे के लोहगढ़ किले के पास एक गहरी खाई में गिरने के कारण केतन अग्रवाल की मौत हो गई थी। घटना के तुरंत बाद सिया ने केतन के परिवार और पुलिस को सूचित करते हुए दावा किया था कि केतन का पैर अनजाने में फिसल गया और यह एक हादसा था। पुलिस को सिया के बयानों में कई विसंगतियां नजर आईं।

इसके बाद जब पुलिस ने घटना स्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो वहां एक संदिग्ध शख्स दिखाई दिया, जिसकी पहचान बाद में सिया के बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के रूप में हुई। इसी सुराग ने पुलिस को गहरी जांच के लिए प्रेरित किया और यह साफ हो गया कि केतन फिसला नहीं था बल्कि उसे सिया और चेतन ने कथित तौर पर धक्का दिया था।

ये भी पढ़ें- Ketan Murder Update: पुणे के कैफै में चेतन और सिया ने इस तरह रची थी केतन अग्रवाल की हत्या की साजिश, पहली बार सामने आया CCTV फुटेज

जांच के बाद पुलिस ने 23 जून को सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपी फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं और जांचकर्ता इस बात का पता लगा रहे हैं कि क्या इस पूरी आपराधिक साजिश में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था।

Kawasaki KLX230 S vs KLX230 Price and Differences Explained

Kawasaki KLX230 S vs KLX230 Price and Differences Explained

Kawasaki has launched the KLX230 S, a more accessible version of the KLX230. Beyond the new naming scheme, the ‘S’ model features several modifications that make it more accessible for shorter riders and the occasional off-road explorers.

Kawasaki KLX230 S vs KLX230: Suspension and ground clearance

The KLX230 S gets lesser suspension travel resulting in a lower seat height

The KLX230 S utilizes the same 37mm fork and monoshock as the standard model, but travel is reduced to 160mm and 163mm (F/R), respectively – compared to the 220mm and 223mm travel on the standard KLX230. This adjustment results in a more accessible seat height of 830mm, benefiting riders who might find the standard model’s 890mm seat height intimidating. Additionally, the shorter suspension stroke has resulted in a 1,350mm wheelbase, which is 20mm shorter than the standard model.

However, it is worth noting that during our testing of the standard KLX230, we found that the rear suspension sags significantly under load. This makes it easier for riders to flat-foot the bike, especially since the narrow frame and seat design already enhance accessibility.

The reduced suspension travel on the KLX230 S naturally leads to a lower ground clearance of 220mm, compared to 255mm on the standard model. Despite this decrease, the KLX230 S still offers sufficient clearance to handle most off-road situations effectively.

Apart from these specific adjustments, the KLX230 S remains identical to the standard KLX230, including the panels and colour schemes. It is powered by the same 233cc, single-cylinder, air-cooled engine, producing 19hp at 7,800rpm and 19Nm of torque at 6,400rpm, paired with a six-speed gearbox.

At Rs 2.19 lakh (ex-showroom, India), both models cost the same. So the decision lies with the customer if they wish to choose a more accessible seat height and lower suspension stroke as opposed to more off-road capability.

 

Kawasaki KLX230 S

Kawasaki KLX230

Wheel travel (front)

160mm

220mm

Wheel travel (rear)

163mm

223mm

Wheelbase

1,350mm

1,370mm

Ground clearance

220mm

255mm

Seat height

830mm

890mm

क्या आपने निपटा लिए टैक्स से जुड़े ये 5 जरूरी काम? जेब पर भारी पड़ सकती है जरा सी भी देरी, ये है डेडलाइंस

ITR Filing 2026: नौकरीपेशा लोगों, कारोबारियों और कंपनियों के लिए जुलाई 2026 का महीना टैक्स और कंप्लायंस के लिहाज से बेहद व्यस्त रहने वाला है। इस महीने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने से लेकर TDS जमा करने जैसी कई महत्वपूर्ण तारीखें आ रही हैं। अगर आप इनमें से किसी भी डेडलाइन को चूक जाते हैं, तो आपको भारी पेनाल्टी, लेट फीस और ब्याज का भुगतान करना पड़ सकता है।

अपनी जेब को नुकसान से बचाने के लिए टैक्स से जुड़ी इन 5 बड़ी डेडलाइंस को पहले ही नोट कर लें और समय रहते अपना काम पूरा करें।

1. 31 जुलाई: ITR फाइल करने की आखिरी तारीख

जुलाई महीने की सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण डेडलाइन इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए ITR-1 और ITR-2 भरने वाले व्यक्तिगत करदाताओं को 31 जुलाई 2026 तक अपना रिटर्न हर हाल में दाखिल करना होगा। इस तारीख के बाद रिटर्न भरने पर भारी लेट फीस देनी होगी और आप अपने नुकसान को अगले सालों के लिए कैरी फॉरवर्ड भी नहीं कर पाएंगे।

2. 7 जुलाई: टीडीएस जमा करने की डेडलाइन

महीने की शुरुआत में ही 7 जुलाई को एक बड़ा कंप्लायंस आ रहा है। जिन करदाताओं या संस्थाओं को असेसिंग ऑफिसर से तिमाही टीडीएस जमा करने की मंजूरी मिली हुई है, उन्हें अप्रैल-जून तिमाही का टीडीएस 7 जुलाई तक जमा करना होगा। इसके अलावा, जून 2026 को समाप्त हुई तिमाही के दौरान मिले विशेष डिक्लेरेशन और फॉर्म्स को अपलोड करने की आखिरी तारीख भी यही है।

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3. 15 जुलाई: इन संस्थाओं के लिए बड़ी रिपोर्टिंग

15 जुलाई की तारीख सरकारी दफ्तरों, स्टॉक एक्सचेंजों, ऑथराइज्ड डीलर्स, आईएफएससी यूनिट्स और गैर-निवासी भारतीय (NRI) निवेशकों के साथ काम करने वाले बिचौलियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इन्हें इस तारीख तक अपनी जरूरी रिपोर्टिंग और टैक्स से जुड़े दस्तावेज जमा करने होंगे।

4. 30 जुलाई: चालान-कम-स्टेटमेंट भरने की अंतिम तिथि

टैक्स कटौती करने वाले लोगों या संस्थाओं के लिए 30 जुलाई की तारीख अहम है। जून के महीने में की गई कुछ खास कैटेगरी की टैक्स कटौतियों से संबंधित चालान-कम-स्टेटमेंट को इस तारीख तक सबमिट करना अनिवार्य है।

5. 31 जुलाई: टीडीएस/टीसीएस रिटर्न और जरूरी फॉर्म्स की बाढ़

31 जुलाई सिर्फ आईटीआर के लिए ही नहीं, बल्कि कई अन्य बड़े टैक्स कंप्लायंस के लिए भी साल का सबसे व्यस्त दिन है:

TDS/TCS तिमाही स्टेटमेंट: सैलरी से टैक्स काटने वाले एम्प्लॉयर्स और टीसीएस कलेक्ट करने वाली संस्थाओं को 30 जून को खत्म हुई तिमाही का रिटर्न 31 जुलाई तक फाइल करना होगा। इसके अलावा, अनिवासियों को किए गए गैर-सैलरी भुगतानों का तिमाही टीडीएस स्टेटमेंट भी इसी दिन तक देना है।

ये खास फॉर्म भरने की भी आखिरी तारीख: अगर आप टैक्स छूट या राहत का दावा करना चाहते हैं, तो 31 जुलाई तक ये फॉर्म जरूर भरें:

  • Form 10E: एरियर या एडवांस सैलरी पर टैक्स रिलीफ पाने के लिए।
  • Form 10BA: धारा 80GG के तहत किराए के मकान पर डिडक्शन का दावा करने के लिए।
  • Form 10H: विदेशी आय पर डिडक्शन का दावा करने वाले लेखकों और पेटेंट धारकों के लिए।
  • Form 10CCE और Form 10CCD: रॉयल्टी से जुड़ी टैक्स छूट का लाभ लेने के लिए।

एक सबसे जरूरी सलाह ये है कि आखिरी दिनों में इनकम टैक्स पोर्टल पर हैवी ट्रैफिक के कारण आने वाली दिक्कतों से बचने के लिए आज ही अपने पेंडिंग टैक्स कंप्लायंस निपटा लें।

S S Rajamouli: एस.एस. राजामौली के मुरीद हुए ‘वाराणसी’ स्टार पृथ्वीराज सुकुमारन, जानें क्या बोले एक्टर

S S Rajamouli: ‘बाहुबली द बिगिनिंग’, ‘बाहुबली 2 द कन्क्लूजन’ और ‘RRR’ जैसी ग्लोबल सक्सेस हासिल करने वाली फिल्मों के बाद फिल्ममेकर एस.एस. राजामौली अब अपनी अगली फिल्म ‘वाराणसी’ के साथ एक और ऐतिहासिक सिनेमाई सफर के लिए तैयार हैं। यह फिल्म एक बार फिर भारतीय सिनेमा को दुनिया के मंच पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने आ रही है।

‘वाराणसी’ इस वक्त बन रही भारत की सबसे बड़ी और सबसे ज्यादा चर्चित फिल्मों में से एक है। मशहूर निर्देशक एस.एस. राजामौली के निर्देशन में बन रही यह एक्शन-एडवेंचर फिल्म अगले साल सिनेमाघरों में रिलीज होगी। महेश बाबू, प्रियंका चोपड़ा जोनस और पृथ्वीराज सुकुमारन जैसे बड़े सितारों से सजी यह फिल्म राजामौली के भव्य विजन और बड़े पैमाने की कहानी को पर्दे पर पेश करने वाली है।

हाल ही में फिल्म के अहम कलाकार पृथ्वीराज सुकुमारन ने ‘वाराणसी’ में काम करने का अपना अनुभव साझा किया और एस.एस. राजामौली की मेहनत और काम के प्रति उनके समर्पण की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी सफलता हासिल करने के बाद भी किसी को उसी जुनून और लगन के साथ काम करते देखना अपने आप में खास अनुभव है।

‘वाराणसी’ के सेट पर अपने अनुभव को साझा करते हुए पृथ्वीराज सुकुमारन ने कहा, “जब आप ‘वाराणसी’ के सेट पर जाते हैं और एस.एस. राजामौली सर को कैमरे, मॉनिटर या कलाकारों के साथ काम करते देखते हैं, तो किसी ऐसे इंसान को लगेगा जो उन्हें नहीं जानता कि वह कोई नया निर्देशक है, जिसे 20-30 साल बाद अपनी पहली फिल्म बनाने का मौका मिला हो। वह अपने काम को लेकर इतनी ऊर्जा और उत्साह दिखाते हैं। उनसे सीखने वाली सबसे बड़ी बात यही है। मैंने उनसे ज्यादा मेहनती फिल्ममेकर के साथ कभी काम नहीं किया। अगर वह कहते हैं कि सुबह 7 बजे पहला शॉट होगा, तो महेश, प्रियंका और मेरे सेट पर पहुंचने से पहले ही वह जिम, रिहर्सल और असिस्टेंट्स के साथ सारी तैयारी पूरी कर चुके होते हैं। वह कलाकारों का इंतजार करते हैं और सेट छोड़ने वाले आखिरी शख्स भी वही होते हैं। हमारे लंच ब्रेक सिर्फ 20 मिनट के होते हैं।”

पृथ्वीराज सुकुमारन ने आगे राजामौली के फिल्ममेकिंग के प्रति जुनून की तारीफ करते हुए कहा, “मेरे लिए वह ऐसे फिल्ममेकर हैं जैसे कोई युवा निर्देशक अपनी पहली फिल्म बना रहा हो। मुझे नहीं लगता कि उन्हें खुद भी एहसास है कि उन्होंने कितनी बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। एस.एस. राजामौली से सीखने वाली यह सबसे बड़ी बात है। मैंने केरल में कई लोगों से भी यही कहा है कि उनके बारे में आपकी जो भी राय हो, उसे एक तरफ रखिए और उनके काम करने के तरीके को देखिए। इतना कुछ हासिल करने के बाद भी किसी को इस तरह काम करते देखना सच में एक सौभाग्य है।”

फिल्म को लेकर उत्साह और भी बढ़ गया है क्योंकि ‘वाराणसी’ से महेश बाबू के रुद्र अवतार, पृथ्वीराज सुकुमारन के कुंभ लुक और प्रियंका चोपड़ा जोनस के मंदाकिनी अवतार की झलक पहले ही सामने आ चुकी है। इन लुक्स ने सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा छेड़ दी है और देशभर में फिल्म को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। इन दमदार झलकियों के बाद दर्शकों का इंतजार अब चरम पर पहुंच गया है और हर कोई इस भव्य सिनेमाई प्रस्तुति का बेसब्री से इंतजार कर रहा है, जो 7 अप्रैल 2027 को बड़े पैमाने पर सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

Raja Bhaiya : बंदर की बरसी और मुहर्रम, कुंडा विधायक राजा भैया और उनके पिता क्यों हुए हाउस अरेस्ट? किले के बाहर पुलिस फोर्स तैनात, पढ़िए क्या है पूरा मामला

raja bhiyya

कुंडा विधायक राजा भैया और उनके पिता समेत 13 लोगों को पुलिस-प्रशासन ने हाउसअरेस्ट किया गया है। राजा भैया के किले के बाहर भारी संख्या में पुलिस फोर्स को भी तैनात कर दिया गया है। गुरुवार सुबह 5 बजे से हाउस अरेस्ट किए गए विधायक राजा भैया और पिता उदय प्रताप शुक्रवार रात नौ बजे तक कुंडा कोतवाली के भदरी महल में रहेंगे। बंदर की बरसी पर मोहर्रम के दिन हनुमान मंदिर पर तजिए के रास्ते में राजा उदय प्रताप सिंह पूजा पाठ सुंदरकांड और भंडारा करते है। 

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पिछले कई वर्षों से राजा भैया के पिता को हाउस अरेस्ट कर लिया जाता है मंदिर के रास्ते सड़क से ताजिया गुजरता है। पुलिस प्रशासन ने भदरी महल में हाउस अरेस्ट का नोटिस चस्पा कर दिया है। मीडिया खबरों के मुताबिक मोहर्रम जुलूस के दिन ताजिए के रास्ते में हनुमान मंदिर पर भंडारे का पुलिस प्रशासन इजाजत नहीं देता है।  

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क्या है पूरा मामला

2012 में एक बंदर की मौत के बाद ग्रामीणों ने सड़क किनारे एक हनुमान मंदिर का निर्माण किया था। राजा उदय प्रताप सिंह इसी मंदिर में हर साल मोर्हरम के दिन हनुमान पाठ और भंडारे का आयोजन करते हैं।

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ऐसे में कई बार तनाव की स्थिति भी उत्पन्न हो चुकी है। 2013-2014 में जुलूस और भंडारा साथ आयोजित होने पर स्थित बिगड़ गई थी। इसी को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने यह कार्रवाई की है। 

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2015 में भी मोहर्रम के दिन भंडारे का कार्यक्रम का आयोजन कराया गया था, जिसको लेकर मोहर्रम जुलूस के दौरान बवाल हो गया था। इसी को देखते हुए राजा भैया के पिता और और विधायक राजा भैया को हर साल मोहर्रम पर नजरबंद कर दिया जाता है। इस दौरान पूरे गांव में ही भारी पुलिस फोर्स तैनात रहती है। Edited by : Sudhir Sharma

बागवानी क्षेत्र को मिलेगी नई उड़ान, लखनऊ में क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित करेगी भारत सरकार

Government of India will set up Clean Plant Center in Lucknow

– केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अगले चरण के लिए 6.18 लाख पात्र लाभार्थियों की सूची मुख्यमंत्री को सौंपी

– केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की घोषणा

– कृषि क्षेत्र में नवाचार, विविधीकरण और तकनीक आधारित विकास को देंगे नई गति : मुख्यमंत्री योगी

– समृद्ध उत्तर प्रदेश से ही विकसित भारत का संकल्प होगा साकार : शिवराज सिंह चौहान

– चना, मसूर एवं सरसों खरीद अवधि बढ़ाने की मंजूरी : शिवराज सिंह चौहान

Uttar Pradesh News : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्तर प्रदेश के बागवानी क्षेत्र को नई गति देने के उद्देश्य से लखनऊ में क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किए जाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि इस केंद्र के माध्यम से किसानों को गुणवत्तायुक्त एवं रोगमुक्त पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उद्यानिकी क्षेत्र का विस्तार होगा और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित होगी।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को लखनऊ स्थित योजना भवन के वैचारिकी सभागार में उत्तर प्रदेश के कृषि रोडमैप, कृषि क्षेत्र की विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य योजनाओं तथा ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की संयुक्त समीक्षा की। बैठक में केंद्र एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया।

 

बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि के लिए समृद्ध उत्तर प्रदेश सबसे अनिवार्य है। उत्तर प्रदेश जितनी तेजी से कृषि, ग्रामीण विकास और किसानों की समृद्धि के क्षेत्र में आगे बढ़ेगा, विकसित भारत का लक्ष्य उतनी ही शीघ्रता से साकार होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार आपसी समन्वय तथा साझा प्रयासों से इस राष्ट्रीय संकल्प को अवश्य पूरा करेंगी।

 

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश कभी बीमारू राज्यों की श्रेणी में गिना जाता था, लेकिन आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकास के नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। कृषि, ग्रामीण विकास, आधारभूत संरचना तथा जनकल्याण के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की हैं।

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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है, लेकिन बदलते समय की चुनौतियों के बीच विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कृषि क्षेत्र में गंभीर मंथन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से यह समीक्षा बैठक आयोजित की गई है, ताकि कृषि को अधिक उत्पादक, लाभकारी, जलवायु अनुकूल एवं टिकाऊ बनाने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार की जा सके।

 

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चना, मसूर एवं सरसों की सरकारी खरीद की अवधि बढ़ाए जाने की मंजूरी भी प्रदान की। उन्होंने इस संबंध में स्वीकृति का आशय पत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा। मुख्यमंत्री ने इसके लिए केंद्रीय मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे प्रदेश के अधिकाधिक किसानों को अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने का अवसर मिलेगा और उनके हितों का बेहतर संरक्षण सुनिश्चित होगा। 

 

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के आगामी चरण के लिए पात्र 6,18,482 लाभार्थियों की सूची मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपते हुए प्रदेश सरकार को बधाई दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में गरीब कल्याण की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है।

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पात्रता के आधार पर प्रत्येक जरूरतमंद परिवार को आवास उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। उन्होंने निर्देश दिए कि योजना के अगले चरण में भी सभी पात्र लाभार्थियों को पूर्ण पारदर्शिता एवं समयबद्ध तरीके से लाभान्वित किया जाए, ताकि कोई भी पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित न रहे।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के लखनऊ आगमन के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत नए आवासों की स्वीकृति, चना, मसूर एवं सरसों की सरकारी खरीद की अवधि बढ़ाए जाने तथा उत्तर प्रदेश के बागवानी क्षेत्र के लिए लखनऊ में क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किए जाने की स्वीकृति के लिए भी केंद्रीय मंत्री के प्रति आभार प्रकट किया।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व एवं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मार्गदर्शन में देश का कृषि क्षेत्र नई दिशा प्राप्त कर रहा है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शिवराज सिंह चौहान जी का लंबा एवं सफल अनुभव रहा है। उनके नेतृत्व में मध्य प्रदेश ने कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की और आज उनके अनुभव, दूरदर्शिता तथा मार्गदर्शन का लाभ पूरे देश को प्राप्त हो रहा है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र एवं राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से विकसित कृषि एवं विकसित भारत के लक्ष्य को समयबद्ध रूप से प्राप्त किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि विकसित भारत@2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में आईसीएआर द्वारा तैयार ‘विकसित कृषि रोडमैप’ उत्तर प्रदेश के लिए अत्यंत उपयोगी एवं मार्गदर्शक सिद्ध होगा।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कृषि क्षेत्र को अधिक उत्पादक, लाभकारी एवं तकनीक आधारित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। कृषि विविधीकरण, आधुनिक कृषि तकनीकों के विस्तार, मूल्य संवर्धन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा किसानों की आय वृद्धि के लिए केंद्र और राज्य सरकार समन्वित रूप से कार्य कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व तथा केंद्र सरकार के सतत सहयोग से उत्तर प्रदेश विकसित कृषि के लक्ष्य को प्राप्त करते हुए विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक ने 'विकसित कृषि @2047:उत्तर प्रदेश कार्ययोजना' पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इसमें जलवायु समावेशी विकास, कृषि विविधीकरण, संसाधन आधारित नियोजन, विज्ञान आधारित कृषि, मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ीकरण तथा संपूर्ण शासन तंत्र के समन्वित दृष्टिकोण को विकसित कृषि का आधार बताया गया।

बताया गया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश की कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था लगभग 7.41 ट्रिलियन रुपए की है, जिसे वर्ष 2047 तक कृषि विविधीकरण एवं उच्च उत्पादकता आधारित रणनीति के माध्यम से बढ़ाकर 96.96 ट्रिलियन रुपए तक पहुंचाया जाना चाहिए। इसके लिए वास्तविक कृषि वृद्धि दर को 3.19 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.41 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

 

कार्ययोजना के अनुसार वर्ष 2047 तक कृषि विकास का आधार केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि उत्पादकता, किसानों की आय, मूल्य संवर्धन तथा निर्यात क्षमता में समग्र वृद्धि होना चाहिए। इसके लिए प्रत्येक जनपद की कृषि-जलवायु परिस्थितियों एवं बाजार की मांग के अनुरूप कृषि विविधीकरण को व्यापक स्तर पर अपनाया जाना चाहिए।

धान एवं गेहूं पर अत्यधिक निर्भरता को कम करते हुए दलहन, तिलहन, मोटे अनाज, मक्का, बागवानी तथा अन्य उच्च मूल्य वाली फसलों का विस्तार किया जाना चाहिए। साथ ही उत्पादन से विपणन तक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला विकसित कर किसानों को बेहतर मूल्य उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

 

रोडमैप में स्पष्ट किया गया कि राज्य में उत्पादन वृद्धि का सबसे बड़ा आधार उत्पादकता वृद्धि होगी। धान, गेहूं, मक्का, दलहन, तिलहन, गन्ना, फल एवं सब्जियों में उच्च गुणवत्ता वाले बीज, जलवायु सहनशील किस्मों, उन्नत कृषि तकनीकों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, सूक्ष्म सिंचाई, सटीक कृषि, आधुनिक यंत्रीकरण तथा डिजिटल कृषि तकनीकों के माध्यम से प्रति हेक्टेयर उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जानी चाहिए। विभिन्न फसलों के वर्तमान उत्पादकता अंतर को कम करना विकसित कृषि की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।

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आईसीएआर के महानिदेशक ने मक्का, दलहन, तिलहन, धान, गेहूं, गन्ना, फल एवं सब्जियों के लिए पृथक दीर्घकालिक विकास रणनीति प्रस्तुत की। इसमें मक्का में जलवायु अनुकूल संकर किस्मों, ड्रिप सिंचाई, प्रसंस्करण एवं मूल्य श्रृंखला विकसित करने, दलहन उत्पादन में धान परती क्षेत्रों, गन्ना आधारित अंतरवर्ती खेती तथा वर्षा आधारित क्षेत्रों की संभावनाओं का उपयोग करने, तिलहन उत्पादन में उन्नत बीज, बीज प्रतिस्थापन, वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन एवं सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने तथा धान एवं गेहूं उत्पादन में जल संरक्षण, प्रत्यक्ष बुवाई, जीरो टिलेज तथा मौसम आधारित कृषि सलाह प्रणाली को प्रोत्साहित करने की अनुशंसा की गई।

 

कार्ययोजना में कृषि को अधिक लाभकारी एवं जलवायु अनुकूल बनाने के लिए एकीकृत कृषि प्रणाली को व्यापक स्तर पर अपनाने का सुझाव दिया गया। विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में फसल उत्पादन के साथ डेयरी, बागवानी, मत्स्य पालन, मशरूम, वर्मी कम्पोस्ट तथा कृषि वानिकी को समाहित करने से किसानों की शुद्ध आय में 109 प्रतिशत से 162 प्रतिशत तक वृद्धि तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय विस्तार की संभावना व्यक्त की गई।

 

कार्ययोजना में कृषि यंत्रीकरण को वर्ष 2047 तक 75 प्रतिशत तक बढ़ाने, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, रिमोट सेंसिंग तथा डिजिटल कृषि प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग करने की अनुशंसा की गई। प्रत्येक जनपद में डिजिटल कृषि एवं एआई प्लेटफॉर्म, प्रिसिजन एग्रीकल्चर प्रयोगशालाएं, मृदा-जल-कार्बन वेधशालाएं, जैव संसाधन एवं जैव आदान केंद्र तथा कृषि उद्यमिता एवं बिजनेस इन्क्यूबेशन केंद्र स्थापित किए जाने का सुझाव भी दिया गया।

 

फल, सब्जी, पुष्पोत्पादन, मधुमक्खी पालन, कृषि वानिकी, पशुपालन एवं मत्स्य पालन को कृषि विकास के नए इंजन के रूप में विकसित करने पर भी बल दिया गया। साथ ही किसान उत्पादक संगठनों, कृषि प्रसंस्करण इकाइयों, शीत शृंखला, पैक हाउस, खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं तथा निर्यात अवसंरचना का व्यापक विस्तार कर कृषि को उत्पादन आधारित व्यवस्था से आगे बढ़ाकर मूल्य संवर्धन एवं निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था में परिवर्तित किए जाने की आवश्यकता बताई गई।

कहा गया कि विकसित कृषि 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अनुसंधान संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों, केंद्र एवं राज्य सरकार, किसान उत्पादक संगठनों तथा निजी क्षेत्र के समन्वित प्रयासों के माध्यम से उत्पादन, उत्पादकता, कृषि विविधीकरण, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, निर्यात तथा जलवायु अनुकूल कृषि विकास को समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

 

बैठक में प्रमुख सचिव, कृषि, उत्तर प्रदेश ने कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न केंद्रीय योजनाओं की प्रगति का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। समीक्षा के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कृषि विविधीकरण एवं उत्पादकता वृद्धि पर विशेष बल देते हुए कहा कि सॉयल हेल्थ कार्ड केवल बनाना ही पर्याप्त नहीं है। किसानों को अपने खेत की मृदा की वास्तविक स्थिति, पोषक तत्वों की उपलब्धता तथा संतुलित उर्वरक उपयोग के संबंध में भी जागरूक किया जाए, ताकि वे मृदा स्वास्थ्य कार्ड का प्रभावी उपयोग कर सकें।

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उन्होंने अधिकाधिक किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड बनाए जाने तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से अधिक से अधिक किसानों को जोड़ने के लिए बैंकों के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकसित भारत अभियान के अंतर्गत जल संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है। क्रिटिकल ब्लॉकों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इन क्षेत्रों में जल संरक्षण एवं जल संचयन के कार्य मिशन मोड में संचालित किए जाएं। केंद्रीय मंत्री ने प्रदेश को आश्वस्त किया कि उर्वरकों की उपलब्धता में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।

 

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने एफडीआर तकनीक के उपयोग से लगभग 1,000 करोड़ रुपए की बचत की है। यह तकनीक न केवल लागत में कमी लाने में सहायक सिद्ध हुई है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी एक प्रभावी एवं अनुकरणीय पहल है। उन्होंने इस नवाचार के लिए प्रदेश को प्रोत्साहन राशि प्रदान किए जाने का आग्रह किया, जिस पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया।

 

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आगामी जुलाई माह से प्रारंभ होने वाले विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) अर्थात् वीबी-जी राम के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, आजीविका संवर्धन, जल संरक्षण तथा टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगी।

उन्होंने राज्य सरकार के अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूर्ववर्ती मनरेगा के लंबित देयों के भुगतान हेतु भारत सरकार को तत्काल प्रस्ताव प्रेषित किया जाए, ताकि भुगतान प्रक्रिया में किसी प्रकार का विलंब न हो और नई योजना का क्रियान्वयन निर्बाध रूप से प्रारंभ किया जा सके।

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बैठक में अलनीनो की संभावित परिस्थितियों के दृष्टिगत उत्तर प्रदेश में कृषि पर पड़ने वाले प्रभावों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। इस दौरान जल संरक्षण, फसल प्रबंधन, जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों तथा आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने के लिए अग्रिम तैयारी को और सुदृढ़ बनाने पर बल दिया गया। साथ ही किसानों के हितों की रक्षा के लिए समयबद्ध एवं समन्वित कार्ययोजना अपनाने की आवश्यकता पर भी सहमति व्यक्त की गई।

 

बैठक में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख, राजस्व राज्य मंत्री सुरेन्द्र दिलेर तथा भारत सरकार एवं प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति रही।
Edited By : Chetan Gour