Passport fees hiked: जुलाई से पासपोर्ट बनवाना होगा महंगा! सरकार ने बढ़ाई फीस, जानिए नए रेट और नियम

Passport fees hiked: विदेश मंत्रालय (MEA) ने पासपोर्ट शुल्क में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। भारत सरकार द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन के मुताबिक, नई दरें 1 जुलाई से लागू होंगी। संशोधित नियमों के अनुसार 1 जुलाई 2026 से पासपोर्ट बनवाने और री-इश्यू कराने के लिए अधिक शुल्क देना होगा। 36 पेज के नए या री-इश्यू पासपोर्ट के लिए सामान्य कैटेगरी में ₹2,500 और तत्काल कैटेगरी में ₹5,000 शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं, 60 पेज के पासपोर्ट के लिए सामान्य शुल्क ₹3,500 और तत्काल शुल्क 6,000 रुपये होगा।

रिप्लेसमेंट पर सबसे अधिक बढ़ोतरी

खोए या क्षतिग्रस्त पासपोर्ट के रिप्लेसमेंट पर सबसे अधिक बढ़ोतरी की गई है। 36 पेज के पासपोर्ट के रिप्लेसमेंट के लिए सामान्य कैटेगरी में ₹5,000 और तत्काल में ₹7,500 देने होंगे। इसके अलावा पुलिस क्लियरेंस सर्टिफिकेट (PCC), सरेंडर सर्टिफिकेट और अन्य प्रमाणपत्रों के लिए ₹750 फीस तय किया गया है। नए शुल्क 1 जुलाई से पूरे देश में लागू होंगे।

नई दरों के तहत, एडल्ट कैटेगरी में अप्लाई करने वाले एडल्ट और 15-18 साल के नाबालिगों को नॉर्मल प्रोसेस के तहत नए 36-पेज के पासपोर्ट या री-इश्यू के लिए 2,500 रुपये देने होंगे। तत्काल कैटेगरी के तहत यह फीस बढ़कर 5,000 रुपये हो जाएगी।

60-पेज की पासपोर्ट

60-पेज की पासपोर्ट बुकलेट के लिए नॉर्मल कैटेगरी में 3,500 रुपये और तत्काल प्रोसेसिंग के तहत 6,000 रुपये की फीस लगेगी। सबसे अधिक बढ़ोतरी खोए या खराब हुए पासपोर्ट को बदलने पर की गई है। 36-पेज का रिप्लेसमेंट पासपोर्ट नॉर्मल प्रोसेसिंग के तहत 5,000 रुपये और तत्काल के तहत 7,500 रुपये का पड़ेगा। 60-पेज के रिप्लेसमेंट पासपोर्ट के लिए फीस नॉर्मल और तत्काल कैटेगरी के तहत क्रमशः 6,000 रुपये और 8,500 रुपये तय की गई है।

खोए या खराब हुए 36-पेज के पासपोर्ट

खोए या खराब हुए 36-पेज के पासपोर्ट को बदलने के लिए अप्लाई करने वाले नाबालिगों को नॉर्मल कैटेगरी के तहत 4,250 रुपये और तत्काल के तहत 6,750 रुपये देने होंगे। पासपोर्ट से जुड़ी अन्य सर्विस, जैसे पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट, सरेंडर सर्टिफिकेट, ग्लोबल एंट्री प्रोग्राम वेरिफिकेशन और दूसरे सर्टिफिकेट के लिए भारत में फीस 750 रुपये तय की गई है।

सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिटी की कीमत

पहचान के सर्टिफिकेट (सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिटी) की कीमत 1,000 रुपये होगी। विदेश में दी जाने वाली सेवाओं के लिए इमरजेंसी सर्टिफिकेट की कीमत 15 डॉलर होगी। जबकि पहचान प्रमाण-पत्र (सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिटी) की कीमत 50 USD होगी। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि इन सेवाओं के लिए कोई तत्काल सुविधा उपलब्ध नहीं होगी।

नए फीस स्ट्रक्चर पर एक नजर डालें

1. सामान्य और तत्काल पासपोर्ट (36 और 60 पेज) के रुल्स

36 पेज का नया/री-इश्यू पासपोर्ट (नॉर्मल): अब इसके लिए ₹2,500 देने होंगे।

36 पेज का पासपोर्ट (तत्काल): तत्काल स्कीम के तहत यह फीस ₹5,000 होगी।

60 पेज का पासपोर्ट (नॉर्मल): इसके लिए ₹3,500 की फीस तय की गई है।

60 पेज का पासपोर्ट (तत्काल): इसके लिए आपको ₹6,000 चुकाने होंगे।

2. पासपोर्ट खोने या खराब होने पर (रिप्लेसमेंट)

36 पेज का रिप्लेसमेंट (नॉर्मल): ₹5,000 की फीस लगेगी।

36 पेज का रिप्लेसमेंट (तत्काल): इसके लिए ₹7,500 देने होंगे।

60 पेज का रिप्लेसमेंट (नॉर्मल): इसकी फीस ₹6,000 तय की गई है।

60 पेज का रिप्लेसमेंट (तत्काल): इसके लिए सबसे ज्यादा ₹8,500 चुकाने होंगे।

3. अन्य जरूरी सेवाएं

पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (PCC) और सरेंडर सर्टिफिकेट जैसी अन्य मिसलेनियस सेवाओं के लिए भारत में ₹750 की फीस लगेगी।

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भारत से बाहर आपातकालीन सर्टिफिकेट (Emergency Certificate) के लिए 15 USD और आइडेंटिटी सर्टिफिकेट के लिए 50 USD की फीस तय की गई है।

वैलिडिटी (वैधता) के नियम

भारत सरकार ने साफ किया है कि वयस्कों (Adults) के लिए जारी किए गए पासपोर्ट 10 साल के लिए वैध रहेंगे। वहीं, नाबालिगों (Minors) के लिए जारी पासपोर्ट की वैधता 5 साल या उनके 18 वर्ष के होने तक (जो भी पहले हो) मान्य रहेगी।

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Farmer Pension Scheme: सिर्फ 55 रुपये महीने जमा करें और 60 साल के बाद पाएं ₹3,000 मासिक पेंशन, ये किसान और मजदूर तुरंत करें अप्लाई

Farmer Pension Scheme: देश के करोड़ों श्रमिक असंगठित सेक्टर में काम करते हैं। इनमें रेहड़ी-पटरी विक्रेता, रिक्शा चालक, कामगार मजदूर, घरेलू कामगार, दर्जी, ड्राइवर, कृषि मजदूर और अन्य दैनिक मजदूरी करने वाले श्रमिक शामिल हैं। इन श्रमिकों को आमतौर पर कर्मचारी भविष्य निधि (PF), ग्रेच्युटी या अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। ऐसे में बुढ़ापे में नियमित आय का कोई साधन नहीं होने से उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

इसी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM) योजना शुरू की है। यह एक स्वैच्छिक पेंशन योजना है। इसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। योजना के तहत 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर लाभार्थी को हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन दी जाती है।

आवेदक की उम्र कितनी होनी चाहिए?

इस पेंशन योजना का लाभ सड़क किनारे रेहड़ी-पटरी लगाने वाले, रिक्शा चालक, निर्माण मजदूर, घरेलू कामगार, ड्राइवर, प्लंबर, दर्जी, कृषि मजदूर, मोची, धोबी, बीड़ी मजदूर, हैंडलूम कर्मी और अन्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को मिलता है। योजना में शामिल होने के लिए आवेदक की मासिक आय 15,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही उसकी आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजना है। बेहद कम मासिक अंशदान के साथ यह योजना वृद्धावस्था में नियमित आय की गारंटी देती है। खासकर ऐसे श्रमिक जिनके पास भविष्य के लिए कोई पेंशन या बचत व्यवस्था नहीं है, उनके लिए यह योजना आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार साबित हो सकती है।

55 से 200 रुपये का करें योगदान

इस योजना की खास बात यह है कि श्रमिक जितनी राशि मासिक अंशदान के रूप में जमा करता है, उतनी ही राशि केंद्र सरकार भी उसके अकाउंट में जमा करती है। 18 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने पर केवल 55 रुपये प्रति माह जमा करने होते हैं। जबकि 40 वर्ष की आयु में शामिल होने वालों को 200 रुपये प्रति माह का योगदान देना पड़ता है। योजना के तहत 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद लाभार्थी को हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन मिलती है।

यदि किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है तो उसका जीवनसाथी योजना को आगे जारी रख सकता है। वहीं पेंशन शुरू होने के बाद सदस्य के निधन पर जीवनसाथी को 50 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन का लाभ मिलता है। हालांकि, ईपीएफओ, ईएसआईसी या एनपीएस जैसी किसी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना से जुड़े कर्मचारी और आयकरदाता इस योजना का लाभ नहीं उठा सकते।

कौन उठा सकता है योजना का लाभ?

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (Pradhan Mantri Shram Yogi Maandhan Yojana) का लाभ असंगठित क्षेत्र में कार्यरत उन श्रमिकों को मिलता है जिनकी मासिक आय 15,000 रुपये या उससे कम है। योजना में शामिल होने के लिए आवेदक की उम्र 18 वर्ष से कम और 40 साल से अधिक नहीं होनी चाहिए। योजना के पात्र लाभार्थियों में घरेलू कामगार, सड़क विक्रेता, रिक्शा चालक, मजदूर, कृषि मजदूर, बीड़ी श्रमिक, मोची, धोबी, चमड़ा उद्योग से जुड़े श्रमिक, प्लंबर, ड्राइवर, दर्जी, हैंडलूम और पावरलूम श्रमिक, मिड-डे मील कर्मचारी तथा अन्य असंगठित क्षेत्र के कामगार शामिल हैं।

कौन नहीं ले सकता लाभ?

इस योजना का लाभ उन लोगों को नहीं मिलेगा जो पहले से कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) या राष्ट्रीय पेंशन सिस्टम (NPS) जैसी किसी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा आयकर का भुगतान करने वाले लोग भी इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।

सरकार भी करती है बराबर का योगदान

इस पेंशन स्कीम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि लाभार्थी जितनी राशि मासिक अंशदान के रूप में जमा करता है, उतनी ही राशि केंद्र सरकार भी उसके बैंक अकाउंट में जमा करती है। यानी यह एक सह-अंशदायी (Co-Contributory) पेंशन योजना है। इससे श्रमिकों को भविष्य के लिए बड़ा लाभ मिलता है।

18 साल की उम्र में सिर्फ 55 रुपये महीना जमा करें

कम उम्र में योजना से जुड़ने पर कम राशि जमा करनी पड़ती है। 18 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने वाले व्यक्ति को केवल 55 रुपये प्रति माह जमा करने होते हैं। 19 वर्ष की आयु पर 58 रुपये, 20 वर्ष पर 61 रुपये, 21 वर्ष पर 64 रुपये और 22 वर्ष की आयु में 68 रुपये मासिक योगदान देना होता है। इसी तरह 23 साल की उम्र पर 72 रुपये, 24 वर्ष पर 76 रुपये, 25 वर्ष पर 80 रुपये, 26 वर्ष पर 85 रुपये, 27 वर्ष पर 90 रुपये और 28 वर्ष की आयु पर 95 रुपये मासिक जमा करने होते हैं।

29 से 40 वर्ष तक कितना देना होगा योगदान?

29 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने पर 100 रुपये प्रति माह, 30 वर्ष पर 105 रुपये, 31 वर्ष पर 110 रुपये, 32 वर्ष पर 120 रुपये, 33 वर्ष पर 130 रुपये और 34 वर्ष पर 140 रुपये मासिक किस्त देना होगा। वहीं 35 वर्ष के व्यक्ति को 150 रुपये, 36 वर्ष पर 160 रुपये, 37 वर्ष पर 170 रुपये, 38 वर्ष पर 180 रुपये, 39 वर्ष पर 190 रुपये और 40 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने वाले व्यक्ति को 200 रुपये प्रति माह जमा करने होंगे। सरकार भी प्रत्येक मामले में उतनी ही राशि अपने हिस्से से जमा करती है।

60 साल के बाद मिलेगी 3,000 रुपये मासिक पेंशन

योजना के तहत नियमित अंशदान करने वाले लाभार्थी को 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन मिलेगी। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। इससे वृद्धावस्था में आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और किसी पर निर्भरता कम होगी।

सदस्य की मृत्यु होने पर क्या होगा?

यदि योजना से जुड़े सदस्य की किसी कारणवश निधन हो जाती है, तो उसका जीवनसाथी योजना को आगे जारी रख सकता है। इसके लिए उसे नियमित रूप से अंशदान जमा करना होगा। यदि सदस्य 60 वर्ष की आयु के बाद पेंशन का लाभ ले रहा हो और उसके बाद उसकी मृत्यु हो जाए, तो उसके जीवनसाथी को पेंशन राशि का 50 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन के रूप में दिया जाएगा।

बीच में योजना छोड़ने पर क्या हैं नियम?

यदि कोई सदस्य योजना में शामिल होने के 10 साल के भीतर बाहर निकलना चाहता है, तो उसे उसके द्वारा जमा की गई राशि बचत बैंक अकाउंट की ब्याज दर के अनुसार वापस कर दी जाएगी। यदि सदस्य 10 साल पूरे होने के बाद लेकिन 60 वर्ष की आयु से पहले योजना छोड़ता है, तो उसे उसकी जमा राशि के साथ योजना के अनुसार अर्जित ब्याज भी वापस मिलेगा। अगर किसी कारणवश सदस्य कुछ समय तक किस्त जमा नहीं कर पाता है, तो वह बाद में बकाया राशि और निर्धारित ब्याज का भुगतान करके योजना को दोबारा एक्टिव कर सकता है।

कैसे करें अप्लाई?

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना में शामिल होने के लिए इच्छुक व्यक्ति को अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाना होगा। वहां आधार कार्ड, बैंक या जनधन खाते की जानकारी और मोबाइल नंबर देना होगा। सभी जानकारियां दर्ज होने के बाद कंप्यूटर सिस्टम खुद मासिक किस्त की राशि बता देगा। पहली किस्त जमा करने के बाद रजिस्ट्रेशन पूरा हो जाएगा और लाभार्थी को श्रम योगी कार्ड जारी कर दिया जाएगा। योजना में रजिस्ट्रेशन के लिए लाभार्थी को नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर आधार कार्ड और बैंक या जनधन खाते की जानकारी देनी होगी। पहली किस्त जमा करने के बाद श्रम योगी कार्ड जारी कर दिया जाता है।

कौन कर सकता है अप्लाई?

उम्र: 18 से 40 साल

महीने की कमाई: ₹15,000 तक

जरूरी डॉक्यूमेंट

आधार कार्ड।

सेविंग्स बैंक अकाउंट या जन धन अकाउंट होना चाहिए।

एम्प्लॉईज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन, एम्प्लॉईज स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन या नेशनल पेंशन सिस्टम का सदस्य नहीं होना चाहिए।

इनकम टैक्स भरने वाले लोग इसके लिए योग्य नहीं हैं।

हेल्पलाइन नंबर

योजना से जुड़ी किसी भी जानकारी या सहायता के लिए श्रमिक टोल फ्री नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए श्रमिक सरकार के टोल फ्री नंबर 1800-267-6888 पर संपर्क कर सकते हैं। यह योजना असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए बुढ़ापे में नियमित आय सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।

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कल का मौसम 26 जून: IMD ने बिहार संग इन 11 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट दिया, दिल्ली और इन इलाकों में आएगा 60kmph स्पीड वाली आंधी-तूफान

Weather update for June 26: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के कई हिस्सों में मानसून के आगे बढ़ने के अनुकूल माहौल के बीच 26 जून के लिए मौसम का लेटेस्ट बुलेटिन जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक बिहार समेत देश के 11 से अधिक राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और पंजाब सहित कई मैदानी इलाकों में 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली तेज आंधी-तूफान और गरज-चमक की चेतावनी भी दी है।

आइए जानते हैं कि 26 जून को आपके राज्य में मौसम का मिजाज कैसा रहने वाला है और आईएमडी ने किन इलाकों के लिए अलर्ट जारी किया है-

इन 11 से ज्यादा राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने 26 जून को देश के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी दी है:-

बहुत भारी बारिश: उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के अलग-अलग हिस्सों में बेहद भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है।

भारी बारिश वाले राज्य: बिहार, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तटीय कर्नाटक में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

दिल्ली-NCR और इन राज्यों में 60 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी-तूफान

मौसम विभाग के मुताबिक 26 जून को देश के कई हिस्सों में आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और तेज हवाओं का दौर देखा जाएगा। बिहार, पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज आंधी-तूफान आने की आशंका है।

दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, उत्तर प्रदेश (पूर्वी और पश्चिमी), हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, झारखंड, ओडिशा, पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़, गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराईकल में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। केरल, माहे, लक्षद्वीप और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। तटीय और आंतरिक कर्नाटक के इलाकों में तेज सतही हवाएं चलने का अनुमान है।

यूपी और झारखंड में लू का प्रकोप

एक तरफ जहां देश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ रही हैं, वहीं कुछ राज्यों में गर्मी का सितम अभी जारी रहेगा। पूर्वी यूपी के अलग-अलग इलाकों में 26 जून को भीषण लू की स्थिति बनी रहेगी। उत्तर-पश्चिम भारत में 28 जून तक तापमान में 2-3°C की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके बाद ही राहत मिलने की उम्मीद है। झारखंड के अलग-अलग हिस्सों में भी 26 जून को लू चलने की चेतावनी दी गई है।

मानसून की ताजा स्थिति

मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्तरी सीमा (NLM) फिलहाल सूरत, इंदौर, मंडला, डालटनगंज और मोतिहारी से होकर गुजर रही है। 3 से 4 दिनों के भीतर मानसून के उत्तरी अरब सागर, गुजरात के कुछ और हिस्सों, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के बचे हुए हिस्सों, झारखंड, बिहार तथा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं।

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Ketan Agarwal Murder: ‘मर्डर इसने किया, मैंने नहीं…’; मंगेतर मर्डर केस में सिया गोयल पुलिस के सामने अलग ही कहानी सुनाने लगी

Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के लोहगढ़ किले के पास हुए 25 वर्षीय कारोबारी केतन अग्रवाल की मर्डर मिस्ट्री ने पूरे देश को चौंका दिया है। शुरुआती जांच में जिसे महज एक हादसा समझा जा रहा था, वह अब सोची-समझी साजिश के तहत किया गया मर्डर का मामला बन चुका है। पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसका बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी अब एक-दूसरे पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा रहे हैं। पुलिस के सामने दोनों आरोपी अलग-अलग कहानियां सुनाकर खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

मंगेतर और बॉयफ्रेंड का ब्लेम गेम!

केतन अग्रवाल की कथित हत्या के बाद से सिया गोयल और चेतन चौधरी दोनों ही सलाखों के पीछे हैं। लेकिन पूछताछ के दौरान दोनों का रवैया एक-दूसरे पर दोष मढ़ने का है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक चेतन ने जांचकर्ताओं के सामने दावा किया है कि वह सिया के साथ भाग जाना चाहता था। उसका आरोप है कि सिया गोयल ने ही केतन अग्रवाल को रास्ते से हटाने यानी उसकी हत्या करने पर जोर दिया था।

दूसरी तरफ सिया गोयल ने पुलिस को एक बिल्कुल अलग कहानी सुनाई है। सिया का दावा है कि हत्या की पूरी योजना चेतन चौधरी के दिमाग की उपज थी। सिया ने यह भी बताया कि इससे पहले 14 जून को भी केतन को मारने की एक कोशिश की गई थी लेकिन जब वह योजना विफल हो गई तो चेतन उसके सामने भावुक होकर रोने लगा था।

पुलिस का दावा- यह दोनों की डिफेंस स्ट्रेटेजी

दोनों आरोपियों द्वारा एक-दूसरे पर मढ़ जा रहे आरोपों को लेकर जांच टीम का हिस्सा रहे एक पुलिस अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया है कि वे साजिश का जिम्मा एक-दूसरे पर डालने की कोशिश कर रहे हैं। यह स्पष्ट रूप से उनकी डिफेंस स्ट्रेटेजी लग रही है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि मौजूदा सूबत साफ कर रहे हैं कि इस साजिश में दोनों की बराबर की हिस्सेदारी रही है।

पुणे के कैफे में हुई मुलाकात और सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस

पुलिस इस मामले में डिजिटल और फिजिकल सबूतों को पुख्ता करने में जुटी है। जांच में पुलिस को पता चला है कि सिया और चेतन के बीच 31 मई से 4 जून के बीच पुणे के एक कैफे में मुलाकात हुई थी। पुलिस अब इस बैठक की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह स्थापित किया जा सके कि क्या यह मुलाकात भी उसी मर्डर की साजिश का हिस्सा थी। जांचकर्ताओं ने सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल रिकॉर्ड और आरोपियों के बीच हुए कम्युनिकेशन को खंगाला है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि यह मर्डर पूरी तरह से प्री-प्लान्ड था।

शादी की तैयारी और अनचाहा रिश्ता: क्या थी मर्डर की वजह?

मृतक केतन अग्रवाल एक बड़े रियल एस्टेट व्यवसायी का बेटा था और अपनी पारिवारिक फर्म में निदेशक के पद पर काम कर रहा था। वह बोस्टन से अपनी मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद हाल ही में भारत लौटा था। केतन और सिया के परिवार एक-दूसरे को 1990 के दशक से जानते थे। इसी साल गुलबर्गा में एक शादी के दौरान दोनों की मुलाकात हुई, जिसके बाद शादी की बातचीत तेजी से आगे बढ़ी और महज एक सप्ताह के भीतर दोनों की सगाई हो गई।

पुलिस के मुताबिक सिया पहले से ही चेतन चौधरी के साथ रिलेशनशिप में थी और वह केतन से शादी नहीं करना चाहती थी। इसके बावजूद दोनों परिवारों की ओर से इस साल के अंत में राजस्थान में एक भव्य और विस्तृत शादी समारोह आयोजित करने की तैयारियां चल रही थीं।

हादसे की मनगढ़ंत कहानी से ऐसे उठा पर्दा

बीती 18 जून को पुणे के लोहगढ़ किले के पास एक गहरी खाई में गिरने के कारण केतन अग्रवाल की मौत हो गई थी। घटना के तुरंत बाद सिया ने केतन के परिवार और पुलिस को सूचित करते हुए दावा किया था कि केतन का पैर अनजाने में फिसल गया और यह एक हादसा था। पुलिस को सिया के बयानों में कई विसंगतियां नजर आईं।

इसके बाद जब पुलिस ने घटना स्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो वहां एक संदिग्ध शख्स दिखाई दिया, जिसकी पहचान बाद में सिया के बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के रूप में हुई। इसी सुराग ने पुलिस को गहरी जांच के लिए प्रेरित किया और यह साफ हो गया कि केतन फिसला नहीं था बल्कि उसे सिया और चेतन ने कथित तौर पर धक्का दिया था।

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जांच के बाद पुलिस ने 23 जून को सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपी फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं और जांचकर्ता इस बात का पता लगा रहे हैं कि क्या इस पूरी आपराधिक साजिश में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था।

Ketan Murder Update: पुणे के कैफै में चेतन और सिया ने इस तरह रची थी केतन अग्रवाल की हत्या की साजिश, पहली बार सामने आया CCTV फुटेज

Ketan Agarwal Murder Update: पुणे के 26 वर्षीय रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या मामले में एक नया खुलासा हुआ है। केतन अग्रवाल की कथित हत्या से एक दिन पहले सिया गोयल और उसका प्रेमी चेतन चौधरी पुणे के एक कैफै में मिले थे। यह CCTV फ़ुटेज अब जांच का एक अहम हिस्सा बन गया है। बताया जा रहा है कि 17 जून को पुणे में सिया गोयल और उनके बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के बीच एक कॉफी डेट हुई थी। इस दौरान कथित तौर पर सिया के मंगेतर केतन अग्रवाल की हत्या की साज़िश रची गई थी।

पुलिस के मुताबिक, यह घटना अग्रवाल को पुणे के लोहागढ़ किले में एक खाई में धकेले जाने से एक दिन पहले हुई थी। शुरुआती जांच के अनुसार, दोनों ने कैफै में बैठकर हत्या के बारे में बातचीत की और योजना बनाई। पुलिस ने बताया कि सिया ने चेतन के साथ लोहागढ़ किले के बारे में जानकारी शेयर की थी। इसके बाद YouTube वीडियो की मदद से उससे उस जगह के बारे में चर्चा की थी।

मारने का आइडिया कैसे आया?

पुलिस के मुताबिक, 31 मई को सिया और केतन लोहागढ़ किले गए थे। वहां केतन एक खतरनाक जगह बैठा था। तभी सिया के दिमाग में उसे मारने का आइडिया आया। बताया जा रहा है कि 14 जून को भी केतन को किले से धक्का देने की कोशिश की गई थी। उस वक्त सिया ने सांप दिखने का बहाना बनाकर घटना को हादसा बताने की साजिश रची थी, लेकिन केतन बच गया था। इसके बाद सिया ने अपने प्रेमी चेतन चौधरी से पुणे के एक कैफे में मिली। वहां दोनों ने लोहागढ़ किले पर केतन को खाई में धक्का देने की योजना पर डिटेल्स चर्चा की थी।

बैकअप प्लान भी था तैयार 

‘दैनिक भास्कर’ के मुताबिक, इस दौरान दोनों ने वह पॉइंट भी ढूंढ लिया, जहां से केतन को धक्का देना था। यदि केतन इससे भी बच जाता तो 20 जून के बाद सड़क हादसे में मारने का बैकअप प्लान तैयार था। ‘इंडिया टुडे’ को मिले CCTV फुटेज में वे दोनों हत्या के एक दिन पहले शाम करीब 4:35 बजे कैफ़े में आते और लगभग 5:30 बजे वहां से निकलते हुए दिखाई दे रहे हैं।

पुणे के पास लोहागढ़ किले में अपनी मंगेतर सिया गोयल के साथ ट्रेकिंग के दौरान 18 जून को खाई में गिरने से केतन अग्रवाल की मौत हो गई। केतन अपने परिवार की रियल एस्टेट कंपनी, सक्सेस ग्रुप के डायरेक्टर और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर थे। कपल की सगाई इसी साल हुई थी और नवंबर में उनकी शादी होने वाली थी। पुलिस के मुताबिक, दोनों परिवारों ने राजस्थान के उदयपुर में एक भव्य शादी की योजना बनाई थी।

SIT गठित करने का निर्देश

इस बीच, महाराष्ट्र विधानसभा के पीठासीन अधिकारी राजू खरे ने सरकार को पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया है। पुलिस ने मंगलवार को बताया कि 26 वर्षीय अग्रवाल की मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने 18 जून को पुणे में लोहागढ़ किले के निकट एक घाटी में उन्हें कथित तौर पर धक्का दे दिया था।

सिया गोयल (20) और चौधरी (22) को गिरफ्तार कर लिया गया है। अग्रवाल और गोयल की शादी नवंबर में राजस्थान के उदयपुर स्थित एक महल में होने वाली थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) सदस्य सुनील शेलके ने राज्य विधानसभा में यह मुद्दा उठाया और मांग की थी कि हत्या के मामले में गोयल के परिवार को भी आरोपी बनाया जाए।

उन्होंने दावा किया कि गोयल परिवार ने अग्रवाल परिवार से उसके (सिया) किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंध होने की जानकारी छिपाई थी। उन्होंने कहा कि हत्या का मुकदमा फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाना चाहिए। खरे ने सरकार को हत्या की जांच के लिए एक एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया।

शेलके ने राज्य सरकार से पीड़ित के परिवार को न्याय सुनिश्चित करने की अपील की। विधायक ने कहा कि केतन अग्रवाल के परिवार को शुरुआत में बताया गया था कि उसकी मौत एक हादसे में हुई है। हालांकि, पुलिस की विस्तृत जांच में बाद में यह सामने आया कि यह हत्या का मामला था।

उन्होंने आरोपियों सिया गोयल और उसके प्रेमी के बीच कथित संबंधों का भी उल्लेख किया और दावा किया कि जांच के दौरान फोन कॉल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य सामने आए हैं। शेलके ने अधिकारियों से मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच करने की अपील की और मांग की कि इस मामले की सुनवाई जल्द से जल्द अदालत में की जाए।

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Emergency in NCERT textbook: एनसीईआरटी की कक्षा 9 की किताब में पहली बार शामिल हुआ आपातकाल, भारतीय नदियों के नाम भी शामिल

Emergency in NCERT textbook: भारत में इमरजेंसी लागू होने के पांच दशक से भी ज्यादा समय बाद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने पहली बार क्लास 9 की किताब में इस ऐतिहासिक टॉपिक को शामिल किया है। इसे ‘बड़ी चुनौतियों में से एक’ के तौर पर पेश किया गया है, क्योंकि उस दौरान ज्यादातर मौलिक अधिकार सस्पेंड कर दिए गए थे। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, इमरजेंसी का जिक्र नई बनी सोशल साइंस की किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में है।

इसमें भारतीय लोकतंत्र की खूबियों और चुनौतियों पर चर्चा करने वाले चैप्टर में इमरजेंसी को शामिल किया गया है। ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में 1975-77 के आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। NCERT के एक अधिकारी ने कंफर्म किया है कि यह पहली बार है जब क्लास 9 की किताब में इमरजेंसी पर कोई सेक्शन जोड़ा गया है।

स्कूल के सिलेबस में बदलाव

स्कूल के सिलेबस में यह एक अहम बदलाव है, क्योंकि हाल ही में देश ने 1975 में इमरजेंसी की घोषणा के 50 साल पूरे किए हैं। इस सेक्शन में लिखा है, “भारत में लोकतंत्र के सामने एक बड़ी चुनौती तब आई जब 1975-77 में इमरजेंसी लागू की गई। 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी की सरकार के प्रति लोगों में असंतोष बढ़ रहा था। बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और कुशासन के आरोपों के कारण बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए।”

इसमें आगे कहा गया है, “जून 1975 में सरकार ने आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय इमरजेंसी लागू की। इस दौरान, ज्यादातर मौलिक अधिकार सस्पेंड कर दिए गए थे। प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं और एक्टिविस्टों को अरेस्ट किया गया। लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भारी दबाव पड़ा और नागरिकों की आजादी सीमित कर दी गई।”

जयप्रकाश नारायण की भूमिका पर भी जोर

किताब में इमरजेंसी के ख़िलाफ आंदोलन में जयप्रकाश नारायण की भूमिका पर भी जोर दिया गया है। किताब के एक हिस्से में लिखा है, “जयप्रकाश नारायण एक राजनीतिक नेता और समाजवादी विचारक थे और जिन्हें ‘लोक नायक’ के नाम से जाना जाता है। उनके नेतृत्व में चले जन-आंदोलनों ने छात्रों और नागरिकों, खासकर बिहार और गुजरात में लामबंद किया। 1977 में इमरजेंसी हटा ली गई और आम चुनाव हुए, जिससे लोगों को वोट के जरिए अपनी इच्छा जाहिर करने का मौका मिला। सत्ताधारी सरकार की हार ने भारतीय लोकतंत्र की ताकत को दिखाया और लोकतंत्र के महत्व को उजागर किया।”

इमरजेंसी वाला यह सेक्शन लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर व्यापक चर्चा का हिस्सा है। इमरजेंसी के अलावा, यह किताब लोकतांत्रिक कामकाज के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे कि फेक न्यूज, गलत जानकारी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, सार्वजनिक नियमों का उल्लंघन, गरीबी, क्षेत्रीयता, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा करती है।

‘लोकतंत्र और आप’

इस चैप्टर में “लोकतंत्र और आप” नाम का एक नया सेक्शन भी जोड़ा गया है। NCERT का कहना है कि इसे पहली बार इसलिए शामिल किया गया है ताकि छात्र क्लासरूम में सीखी गई बातों को एक नागरिक और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदार के तौर पर अपनी भूमिका से जोड़ सकें। इमरजेंसी के अलावा, नई किताब में भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संस्थाओं पर भी काफी जोर दिया गया है। इसमें भारत में लोकतांत्रिक कामकाज की शुरुआत शुरुआती ऐतिहासिक दौर से ही बताई गई है और आज के शासन-प्रशासन में उनकी अहमियत को भी समझाती है।

लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका

इस किताब में लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पर भी एक खास सेक्शन है, जिसमें मीडिया को “लोकतंत्र का चौथा स्तंभ” बताया गया है। लोगों की चिंताओं को उठाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने में इसकी भूमिका पर जोर दिया गया है। भारत के लोकतांत्रिक सिस्टम के बड़े पैमाने को दिखाने के लिए, किताब में वोटरों की भागीदारी, वोटिंग से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े तथ्य और आंकड़े शामिल किए गए हैं। इसमें बताया गया है कि 2024 में भारत में 96.8 करोड़ से ज़्यादा रजिस्टर्ड वोटर थे और पूरे देश में फैले वोटिंग सेंटर्स के बड़े नेटवर्क का भी ज़िक्र किया गया है।

यह चैप्टर शासन-प्रशासन में नागरिकों की भागीदारी दिखाने के लिए जमीनी स्तर के लोकतंत्र के उदाहरणों का भी इस्तेमाल करता है, जैसे गुजरात की एक पंचायत और त्रिपुरा की महिलाओं के अनुकूल पंचायत। महिलाओं के वोटिंग अधिकारों और स्थानीय निकायों में आरक्षण के लिए भी एक अलग सेक्शन दिया गया है।

भारत की नदियों के नाम भी शामिल

ANI के मुताबिक, NCERT ने अपनी भाषा की टेक्स्टबुक्स का नाम भारत की नदियों के नाम पर रखा है। ‘कृष्णा’ नाम कृष्णा नदी के नाम पर रखा गया है। हिंदी टेक्स्टबुक का नाम ‘गंगा’ रखा गया है, इंग्लिश टेक्स्टबुक का नाम ‘कावेरी’ रखा गया है, और उर्दू टेक्स्टबुक का नाम ‘जमुना’ रखा गया है। इसी तरह, कन्नड़ टेक्स्टबुक का नाम ‘कृष्णा’ रखा गया है क्योंकि यह कर्नाटक में बहने वाली मुख्य नदियों में से एक है।

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इस टेक्स्टबुक के चैप्टर 6 में बैलेंस्ड डाइट के बारे में बताया गया है। इसे पेज 63 पर एक अलग हेडिंग, ‘बैलेंस्ड डाइट’ के तहत भी कवर किया गया है। पेज 63 पर दी गई तस्वीर में वेजिटेरियन और नॉन-वेजिटेरियन दोनों तरह के खाने की चीज़ें शामिल हैं। टेक्स्टबुक में कहीं भी वेजिटेरियनिज़्म के बारे में बताया या उसे सही नहीं ठहराया गया है, न ही नॉन-वेजिटेरियन खाने का विरोध किया गया है।

Siya Goyal: केतन अग्रवाल से शादी के लिए तैयार नहीं थी सिया गोयल, परिवार का था दबाव;’; पुणे कारोबारी हत्याकांड में पुलिस का बड़ा दावा

Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के पास स्थित लोहागढ़ किले पर घूमने गए  युवा कारोबारी केतन अग्रवाल की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस जांच ने नया मोड़ ले लिया है। पुलिस का दावा है कि केतन की मंगेतर सिया गोयल शादी के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थी। वह अपने परिवार के दबाव में यह रिश्ता स्वीकार की थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि यही तनाव इस कथित साजिश की एक अहम वजह हो सकता है।

पहले हादसा माना गया था मामला

जांच में सामने आया कि 18 जून को ‘ट्रेकिंग’ के दौरान सिया (20) और उसके प्रेमी चेतन (22) ने 26 वर्षीय केतन को खाई में कथित तौर पर धक्का देकर मार डाला। वह लोहागढ़ किले में एक चट्टान से गिर गए थे। उस समय दुर्घटनावश हुई मौत मानकर मामला दर्ज किया गया था। सिया ने भी केतन के परिजनों को बताया था कि ट्रेकिंग के दौरान उनका पैर फिसल गया था, जिससे वह खाई में जा गिरे।

शुरुआत में इसे एक दुर्घटना माना गया था। सिया ने परिजनों को बताया था कि ट्रेकिंग के दौरान केतन का पैर फिसल गया और वह खाई में गिर गया। हालांकि बाद में पुलिस जांच में कई संदिग्ध तथ्य सामने आए, जिसके बाद मामले को हत्या के एंगल से देखा जाने लगा।

पुलिस का दावा- शादी नहीं करना चाहती थी सिया

ANI के मुताबिक पुलिस सूत्रों के अनुसार पूछताछ, डिजिटल सबूतों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से संकेत मिले हैं कि सिया गोयल इस शादी को लेकर सहज नहीं थी। उसने पहले भी विवाह को एक साल के लिए टालने की इच्छा जताई थी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, सिया खुद को शादी के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं मानती थी। लेकिन परिवार की अपेक्षाओं और दबाव के कारण वह रिश्ते को आगे बढ़ा रही थी।

CCTV फुटेज से खुला राज

जांच में बड़ा सुराग किले परिसर के सीसीटीवी कैमरों से मिला। पुलिस ने फुटेज में देखा कि केतन और सिया के पीछे कुछ दूरी पर एक संदिग्ध व्यक्ति चल रहा था। बाद में उसकी पहचान चेतन चौधरी (Chetan Chaudhary) के रूप में हुई, जिसे पुलिस सिया का कथित प्रेमी बता रही है।

गर्मी में हूडी पहनकर घूम रहा था युवक

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, संदिग्ध युवक ने शॉर्ट्स और हूडी पहन रखी थी। उसने हूडी को इस तरह नीचे खींच रखा था कि उसका चेहरा दिखाई न दे। उसके ऊपर हेडसेट भी लगा हुआ था। जांचकर्ताओं के मुताबिक, एक अन्य फुटेज में सिया अचानक पीछे मुड़कर देखती है। उसी समय हूडी पहने युवक नीचे बैठ जाता है। इस गतिविधि ने पुलिस का संदेह और बढ़ा दिया।

फरवरी में हुई थी सगाई, नवंबर में होनी थी शादी

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि केतन और सिया की सगाई फरवरी में हुई थी। दोनों की शादी नवंबर में राजस्थान के उदयपुर में एक भव्य समारोह में होने वाली थी। इसके लिए पैलेस वेन्यू भी बुक किया जा चुका था।

तीन बार कर चुकी थी मारने की कोशिश

पुलिस का दावा है कि सिया लगातार केतन को लोहागढ़ किले ले जाने के लिए दबाव डाल रही थी। जांच के अनुसार वह उसे 31 मई, 4 जून, 14 जून और 18 जून को वहां लेकर गई थी। अधिकारियों का आरोप है कि 14 जून को भी केतन को खाई में धक्का देने की कोशिश की गई थी। लेकिन वह एक झाड़ी पकड़कर बच गया था। इसके बाद 18 जून को कथित तौर पर दोबारा साजिश को अंजाम दिया गया।

जांच जारी, पुलिस जुटा रही सबूत

फिलहाल पुलिस सिया गोयल और चेतन चौधरी से पूछताछ कर रही है। दोनों का मोबाइल डेटा, सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल सबूतों  की जांच में जुटी हुई है। हालांकि मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

मामले ने खड़े किए कई सवाल

इस चर्चित मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पारिवारिक दबाव में होने वाली शादियां युवाओं पर मानसिक तनाव बढ़ा रही हैं। वहीं, पुलिस का दावा है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला एक सुनियोजित हत्या की साजिश का उदाहरण बन सकता है।

मामले की जांच से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “जांच के दौरान कुछ ऐसे तथ्य और परिस्थितियां सामने आईं जिन्होंने इस कथित हादसे पर सवाल खड़े कर दिए। इसके बाद हमने मामले की गहन पड़ताल शुरू की। जब किले के टिकट काउंटर पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की गई तो उसमें केतन और सिया एक साथ किले की ओर जाते दिखाई दिए जिससे जांच को एक महत्वपूर्ण दिशा मिली।” फुटेज को बारीकी से खंगालने पर पुलिस की नजर एक ऐसे शख्स पर पड़ी, जो केतन और सिया से कुछ मीटर पीछे चल रहा था।

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अधिकारी ने कहा, “उस व्यक्ति ने शॉर्ट्स और ‘हुडी’ पहन रखी थी। हुडी’ का अगला हिस्सा इतना नीचे कर रखा था कि उसका चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था। इसके अलावा उसने हुडी के ऊपर हेडसेट भी लगा रखा था। एक अन्य फुटेज में हमने देखा कि सिया अचानक पीछे मुड़कर देखती है और उसी समय हुडी पहने वह व्यक्ति भी अचानक बैठ जाता है। यह संयोग बेहद संदिग्ध लगा। अधिकारी ने बताया कि बाद में पुलिस ने 18 जून को उस समय के तापमान का पता लगाया जो करीब 33 डिग्री सेल्सियस था और यह बात खटकी कि इतनी गर्मी में कोई व्यक्ति आखिर ‘हुडी’ पहनकर क्यों घूम रहा था।

Trump vs Netanyahu: ‘यहूदी भी आपसे तंग आ चुके हैं…’; ट्रंप ने गाजा सीजफायर को लेकर नेतन्याहू को लगाई फटकार, नई किताब में बड़ा दावा

Trump vs Netanyahu: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच सितंबर 2025 में फोन पर हुई एक कथित तीखी बातचीत को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। यह दावा ‘रेजीम चेंज: इनसाइड द इंपीरियल प्रेसिडेंसी ऑफ डोनाल्ड ट्रंप (Regime Change: Inside The Imperial Presidency Of Donald Trump)’ नामक नई किताब में किया गया है। इस किताब को ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के रिपोर्टर मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान (Maggie Haberman और Jonathan Swan) ने लिखा है।

नई किताब में किए गए ये दावे अमेरिका और इज़राइल के शीर्ष नेतृत्व के बीच पर्दे के पीछे मौजूद तनाव की तस्वीर पेश करते हैं। यदि ये दावे सही साबित होते हैं, तो यह दिखाता है कि गाजा सीजफायर को लेकर ट्रंप प्रशासन ने नेतन्याहू पर काफी दबाव बनाया था, भले ही दोनों नेताओं की सार्वजनिक छवि लंबे समय तक मजबूत सहयोगियों की रही हो।

किताब के अनुसार, गाजा में सीजफायर को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू के बीच गंभीर मतभेद पैदा हो गए थे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप ने फोन पर नेतन्याहू से नाराजगी जताते हुए कहा, “सब लोग तुमसे तंग आ चुके हैं, बिबी। सभी यहूदी भी तुमसे परेशान हैं। यहां तक कि इस कॉल पर मौजूद दो यहूदी भी तुमसे तंग आ चुके हैं।”

गाजा सीजफायर को लेकर बढ़ा था तनाव

किताब के मुताबिक, ट्रंप-नेतन्याहू के बीच यह बातचीत सितंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) के दौरान हुई थी। उस समय ट्रंप प्रशासन गाजा युद्ध को समाप्त करने के लिए 20 सूत्रीय शांति योजना पर काम कर रहा था।

बताया जा है कि ट्रंप को आशंका थी कि नेतन्याहू अमेरिकी मध्यस्थों द्वारा तैयार किए गए सीजफायर समझौते से पीछे हट सकते हैं। इसी वजह से उन्होंने कथित तौर पर नेतन्याहू पर समझौते को स्वीकार करने का दबाव बनाया। रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने नेतन्याहू से कहा कि युद्ध बहुत लंबा खिंच चुका है और अब समझौते को आगे बढ़ाना जरूरी है।

कॉल में मौजूद थे विटकॉफ और कुशनर

किताब में दावा किया गया है कि इस फोन कॉल में ट्रंप के मध्य पूर्व दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल थे। दोनों को डर था कि महीनों की बातचीत के बाद तैयार किया गया शांति प्रस्ताव इजरायल की अनिच्छा के कारण विफल हो सकता है। इसी वजह से अमेरिकी पक्ष नेतन्याहू से स्पष्ट प्रतिबद्धता चाहता था।

कतर में हमले के बाद बढ़ी नाराजगी

किताब के अनुसार, सितंबर 2025 की शुरुआत में इजरायल ने कतर की राजधानी दोहा में हमास नेताओं को निशाना बनाकर एक हवाई हमला किया था। उस समय सीजफायर को लेकर बातचीत जारी थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कार्रवाई से कतर नाराज हो गया।

इतना ही नहीं कतर ने मध्यस्थता की प्रक्रिया जारी रखने पर आपत्ति जताई। इससे युद्धविराम प्रयासों को झटका लगा। किताब का दावा है कि विटकॉफ और कुशनर को लगा कि उन्हें इजरायल की योजनाओं के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गई थी। इससे अमेरिकी टीम के भीतर भी असंतोष पैदा हुआ।

ट्रंप ने नेतन्याहू को बताया ‘कॉन मैन’

किताब के लेखकों के अनुसार ट्रंप ने निजी बातचीत में नेतन्याहू को ‘कॉन मैन’ (धोखेबाज या चालाक व्यक्ति) भी कहा था। किताब का दावा है कि ट्रंप की राजनीतिक शब्दावली में यह सबसे कठोर टिप्पणियों में से एक मानी जाती है। यह खुलासा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सार्वजनिक तौर पर ट्रंप और नेतन्याहू को लंबे समय तक करीबी सहयोगी के रूप में देखा जाता रहा है।

आखिरकार नेतन्याहू ने माना प्रस्ताव

किताब के मुताबिक, शुरुआती विरोध और तनाव के बावजूद नेतन्याहू ने आखिरकार अमेरिकी सीजफायर को स्वीकार कर लिया। किताब में दावा किया गया है कि दोहा हमले के लगभग 18 दिन बाद इजरायल इस समझौते पर सहमत हुआ। बाद में नेतन्याहू ने अपनी ओर से खेद भी जताया।

हालांकि, ये सभी दावे पत्रकारों की किताब में प्रकाशित डिटेल्स पर आधारित हैं। कथित फोन कॉल की कोई आधिकारिक रिकॉर्डिंग या सार्वजनिक ट्रांसक्रिप्ट सामने नहीं आई है। इसलिए इन आरोपों और दावों को फिलहाल किताब में किए गए दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।

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Ketan Murder: होने वाली बहू सिया का जन्मदिन सेलिब्रेट करने के लिए ससुर ने बुक किए थे 70 रूम, जिसकी ख्वाहिशों को पलकों पर रखा उसने ये सिला दिया!

Ketan Agarwal Murder: महाराष्ट्र के मशहूर बिजनेसमैन के बेटे केतन अग्रवाल की लोहगढ़ किले में हुई संदिग्ध मौत में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। जिसे दुनिया एक दुखद हादसा समझ रही थी उसके पीछे साजिश की एक ऐसी खौफनाक दास्तान छिपी थी जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। पुलिस की जांच में सामने आया है कि केतन की मंगेतर सिया गोयल ने अपने कथित प्रेमी के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी और उसे एक्सिडेंट का रूप देना चाहा। फिलहाल दोनों पुलिस की गिरफ्त में हैं। इस बीच यह भी पता चला है कि केतन का परिवार अपनी होने वाली बहू के लिए लगातार एक से एक लग्जरी तैयारियां कर रहा था।

केतन का परिवार अपनी होने वाली बहू सिया गोयल को किस कदर पलकों पर बिठाकर रखता था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसके जन्मदिन के लिए पांच सितारा होटल में 70 लग्जरी कमरे बुक किए गए थे। लेकिन जिस होने वाली बहू की हर ख्वाहिश को ससुर और मंगेतर पलकों पर रखते थे, उसने प्यार में अंधा होकर केतन को ऐसा खौफनाक सिला दिया। आइए जानते हैं इस हाई-प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री की पूरी इनसाइड स्टोरी।

ससुर ने बुक किए थे 70 लग्जरी रूम

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र के एक प्रमुख व्यवसायी और रियल एस्टेट बिजनेस के डायरेक्टर 26 वर्षीय केतन अग्रवाल का परिवार अपनी होने वाली बहू सिया गोयल का जन्मदिन बेहद भव्य तरीके से मनाने की तैयारी कर रहा था। केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने महाबलेश्वर के एक शानदार फाइव-स्टार होटल में करीब 70 कमरे बुक किए थे। यह आलीशान आयोजन 20 जून को सिया गोयल के जन्मदिन के जश्न के लिए प्लान किया गया था। इसमें दोनों परिवारों के सदस्यों को शामिल होना था।

सिया ने रची दूसरी ही साजिश

एक तरफ जहां केतन का परिवार इस जश्न की तैयारियों में डूबा था, वहीं सिया के दिमाग में कुछ और ही खौफनाक प्लान चल रहा था। इस मामले की जांच में पता चला है कि सिया ने बड़ी ही चालाकी से केतन को मनाकर महाबलेश्वर का यह भव्य बर्थडे सेलिब्रेशन कैंसिल करवा दिया और उसकी जगह उसे अपने साथ पुणे के पास स्थित लोहगढ़ किले में ट्रेकिंग ट्रिप पर ले गई।

18 जून को किले की खाई में धकेला, पहले भी की थीं कई कोशिशें

बीती 18 जून को लोहगढ़ किले की एक गहरी खाई में गिरने के कारण केतन अग्रवाल की मौत हो गई। शुरुआत में सिया ने पुलिस को गुमराह करते हुए कहानी सुनाई थी कि ट्रेकिंग के दौरान केतन का पैर फिसल गया था। इसके बाद पुलिस इसे सिर्फ एक एक्सीडेंट मानकर चल रही थी। जब जांच आगे बढ़ी तो कहानी पूरी तरह पलट गई। पुलिस जांच में सामने आया है कि सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी के बीच प्रेम प्रसंग था और वे दोनों केतन को अपने रास्ते का कांटा समझते थे। इस कांटे को हटाने के लिए दोनों ने मिलकर केतन की हत्या की पूरी साजिश रची थी।

पुलिस के मुताबिक 18 जून को कामयाब होने से पहले भी दोनों केतन को रास्ते से हटाने की कई नाकाम कोशिशें कर चुके थे। इस घातक ट्रिप से पहले भी केतन और सिया कई बार लोहगढ़ किला घूमने गए थे, जहां प्लान को अंजाम देने की पिछली कोशिशें असफल रही थीं।

बाली में होने वाला था प्री-वेडिंग फोटोशूट, गायब कर दिया था केतन का पासपोर्ट!

जांच में यह भी सामने आया है कि इस साल की शुरुआत में केतन और सिया ने इंडोनेशिया के बाली में एक भव्य प्री-वेडिंग फोटोशूट की प्लानिंग की थी। लेकिन यात्रा पर रवाना होने से ठीक पहले अचानक केतन का पासपोर्ट रहस्यमय तरीके से गायब हो गया। इसकी वजह से वह पूरा इंटरनेशनल ट्रिप ही कैंसिल करना पड़ा था। जांचकर्ता अब इस एंगल और आरोपों की भी गहनता से जांच कर रहे हैं कि क्या केतन का पासपोर्ट किसी बड़ी साजिश के हिस्से के रूप में जानबूझकर छुपाया गया था।

33 डिग्री की गर्मी में हुडी पहनने की भूल और सीसीटीवी का सुराग

इस पूरे मर्डर केस का पर्दाफाश करने में सीसीटीवी फुटेज सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण जरिया साबित हुआ। लोहगढ़ किले के पास लगे कैमरों में एक शख्स कैद हुआ था जो किले के आसपास लगभग 33 डिग्री सेल्सियस की गर्मी होने के बावजूद हुडी पहने हुए घूम रहा था। इसी अजीब हरकत ने पुलिस का ध्यान खींचा और जांचकर्ताओं को उस पर गहरा शक हुआ। सीसीटीवी फुटेज को जब खंगाला गया तो साफ दिखा कि वह हुडी वाला शख्स ट्रेकिंग के दौरान केतन और सिया से कुछ ही दूरी पर लगातार उनका पीछा कर रहा था। इसी सीसीटीवी सुराग की मदद से पुलिस ने संदिग्ध की पहचान की और चेतन चौधरी तक पहुंच गई।

दोनों कातिल सलाखों के पीछे, पुलिस खंगाल रही है पूरी कुंडली

सिया गोयल द्वारा सुनाई गई घटना की कहानी में कई विरोधाभास थे। इसने पुलिस के शक को यकीन में बदल दिया। संदिग्धों से गहन पूछताछ और तकनीकी सबूतों के विश्लेषण के बाद पुलिस आखिरकार इस नतीजे पर पहुंची कि केतन की मौत कोई हादसा नहीं बल्कि एक सोची-समझी क्रूर हत्या थी। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने इस सनसनीखेज हत्याकांड के आरोप में सिया गोयल और चेतन चौधरी दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसियां अब इस बात की भी बारीकी से जांच कर रही हैं कि इस पूरी क्रिमिनल कॉन्स्पिरेंसी में क्या इन दोनों के अलावा कोई और बाहरी व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।

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Bharat Tiwari Encounter: भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर के बाद उनके भाई चंदन तिवारी ने कर दिया बड़ा ऐलान, अंतिम संस्कार के बाद करेंगे ये काम

Bharat Tiwari Encounter Case: बिहार के भोजपुर जिले में 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी के कथित पुलिस एनकाउंटर को लेकर परिवार का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। मृतक के भाई चंदन तिवारी ने मीडिया से बातचीत में न्याय की मांग करते हुए लोगों से समर्थन की अपील की है। चंदन तिवारी ने यह भी ऐलान किया है कि वह अपने भाई का अंतिम संस्कार करने के बाद दिल्ली में इंसाफ की मांग करते हुए प्रदर्शन करेंगे। उन्होने कहा कि मेरी गुज़ारिश है कि आप वहां आकर मेरा साथ दें। भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर के बाद बिहार पुलिस सवालों के घेर में है।

चंदन तिवारी ने बुधवार को पत्रकारों से कहा, “मैं इतना कहना चाहता हूं कि अपने भाई का अंतिम संस्कार करने के बाद मैं दिल्ली जाऊंगा। मैं आप सबसे अनुरोध करता हूं कि वहां आकर मेरा समर्थन करें।” उनके इस बयान को परिवार की ओर से न्याय की लड़ाई को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

परिवार उठा रहा एनकाउंटर पर सवाल

भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद परिजन कथित पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े कर रहे हैं। परिवार का दावा है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और पूरी घटना की सच्चाई सामने आनी चाहिए। चंदन तिवारी के दिल्ली जाने और समर्थन मांगने के बयान के बाद इस मामले में राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया भी तेज हो सकती है। परिवार न्यायिक जांच और पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र पड़ताल की मांग कर रहा है।

जांच के बाद ही साफ होगी सच्चाई

फिलहाल मामले की जांच और आधिकारिक तथ्यों का इंतजार है। एनकाउंटर को लेकर लगाए जा रहे आरोपों और पुलिस के पक्ष की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में सभी दावों को जांच पूरी होने तक आरोप और प्रत्यारोप के रूप में ही देखा जा रहा है।

भरत के गांव पहुंचे प्रशांत किशोर

इस बीच, जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर बुधवार को भोजपुर जिले में हालिया कथित पुलिस मुठभेड़ में जान गंवाने वाले भरत भूषण तिवारी के पैतृक गांव पहुंचे और उसके परिजनों से मुलाकात की। जन सुराज पार्टी के पदाधिकारियों ने बताया कि भरत भूषण के परिजनों ने न्याय दिलाने में किशोर से मदद की अपील की थी। उन्हें पंचायत बैठक में आमंत्रित किया था।

किशोर ने भोजपुर में पत्रकारों से कहा, “पीड़ित परिवार की मांग बिल्कुल स्पष्ट है। उन्हें न तो पैसा चाहिए, न मुआवजा और न ही सरकारी नौकरी। उन्हें न्याय चाहिए और न्याय तभी मिलेगा जब उस व्यक्ति की हत्या करने वालों तथा ऐसा करने का आदेश देने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।”

उन्होंने मांग की है कि न्यायिक जांच किसी रिटायर जज के बजाय कार्यरत जज की निगरानी में कराई जाए और जांच तीन महीने के भीतर पूरी की जाए। किशोर ने कहा कि न्यायिक जांच का दायरा केवल जिला पुलिस प्रशासन तक सीमित नहीं होना चाहिए। बल्कि बिहार के गृह विभाग, विशेष कार्य बल (एसटीएफ), पुलिस महानिदेशक और राज्य के गृह मंत्री की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए।

एनकाउंटर के बाद बवाल

भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में बिलौती गांव के भरत भूषण तिवारी की पिछले सप्ताह पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मौत हो गई थी। इस घटना को लेकर राज्य में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों ने इसे कथित रूप से फर्जी मुठभेड़ बताते हुए पुलिस पर न्यायेतर हत्या का आरोप लगाया है। जन सुराज पार्टी ने रविवार को पटना में मोमबत्ती मार्च निकालकर तिवारी के लिए न्याय की मांग की थी।

मुठभेड़ के बाद अधिकारियों ने कहा था कि तिवारी लगातार पुलिस पर गोलीबारी कर रहा था, जिसके जवाब में आत्मरक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी थी। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में कथित तौर पर तिवारी एनकाउंट से पहले हथियार डालते हुए नजर आ रहा है।

तिवारी की मां की शिकायत के आधार पर इस मामले में घटना से जुड़े कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। प्रशांत किशोर ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।

भोजपुर जिले के बिलौती गांव में आयोजित ‘महापंचायत’ को संबोधित करते हुए किशोर ने कहा कि मामले में पटना में बैठे शीर्ष अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो वह लोगों के साथ पटना जाकर मुख्यमंत्री से मुलाकात का प्रयास करेंगे और मुलाकात नहीं होने पर उनके आवास का घेराव करेंगे।