Monsoon Glow Secrets: उमस भरे मौसम में भी चेहरे पर रहेगा पार्लर जैसा निखार, नोट कर लें ये नेचुरल स्किन केयर टिप्स

A photo providing information on keeping the skin healthy and glowing during the rainy season

baarish ke mausam mein khubsurti ke tips: बदलते मौसम में आपकी त्वचा को खास देखभाल की जरूरत होती है। अपनी स्किन को हेल्दी और ग्लोइंग बनाए रखने के लिए इस आसान रूटीन को फॉलो करें:ALSO READ: घर पर BP चेक करते समय न करें ये गलतियां, जानें ब्लड प्रेशर नापने का सही तरीका

 

1. डीप क्लींजिंग है सबसे पहला कदम

उमस के कारण चेहरे पर पसीना, धूल और गंदगी जल्दी जम जाती है, जिससे रोमछिद्र (pores) बंद हो जाते हैं। तो दिन में कम से कम दो बार यानी सुबह और रात को सोने से पहले एक माइल्ड यानी हल्के फेस वॉश से चेहरा साफ करें।

 

ऑयली स्किन के लिए: अगर चेहरा बार-बार तैलीय हो जाता है, तो मुल्तानी मिट्टी या नींबू और शहद का होममेड फेस पैक लगाएं। यह त्वचा से एक्स्ट्रा ऑयल को सोख लेता है।

 

2. जेंटल एक्सफोलिएशन (सौम्य स्क्रब)

हफ्ते में 1 या 2 बार त्वचा से डेड स्किन सेल्स यानी मृत कोशिकाओं को हटाना जरूरी है, लेकिन ध्यान रहे कि स्क्रब बहुत ज्यादा हार्ड न हो।

 

नेचुरल उपाय: बेसन, हल्दी और ओटमील/ जई का आटा को मिलाकर घर पर ही एक बेहतरीन नेचुरल स्क्रब तैयार कर सकते हैं। यह बिना किसी नुकसान के त्वचा को साफ करता है।

 

3. हाइड्रेशन को न करें नजरअंदाज

अक्सर लोग सोचते हैं कि मानसून में हवा में पहले से नमी है, तो मॉइस्चराइजर की क्या जरूरत? यहीं पर सबसे बड़ी गलती होती है।

 

अंदर से हाइड्रेशन: दिन में 8 से 10 ग्लास पानी जरूर पिएं ताकि शरीर के टॉक्सिन्स/ विषाक्त पदार्थ बाहर निकल सकें।

 

सही मॉइस्चराइजर चुनें: भारी क्रीम की जगह वॉटर-बेस्ड या जेल-बेस्ड लाइट मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें। हयालूरोनिक एसिड (Hyaluronic Acid) और ग्लिसरीन वाले प्रोडक्ट्स त्वचा की नमी को बिना चिपचिपाहट के लॉक रखते हैं।

 

4. धूप न हो, फिर भी सनस्क्रीन है जरूरी

बादल होने का मतलब यह नहीं है कि आपकी त्वचा सुरक्षित है। सूरज की हानिकारक यूवी किरणें बादलों को पार करके भी आपकी स्किन को नुकसान पहुंचा सकती हैं और वक्त से पहले झुर्रियां ला सकती हैं।

 

टिप: घर से बाहर निकलते समय कम से कम SPF 30 या उससे ज्यादा वाली नॉन-कॉमेडोजेनिक यानी जो रोमछिद्रों को बंद न करे, यह सनस्क्रीन जरूर लगाएं।

 

5. लाइट मेकअप और पर्सनल हाइजीन

वॉटरप्रूफ मेकअप: इस मौसम में हैवी फाउंडेशन या थिक मेकअप से बचें। अगर मेकअप करना जरूरी हो, तो केवल लाइट और वॉटरप्रूफ प्रोडक्ट्स का ही इस्तेमाल करें।

 

इन्फेक्शन से बचाव: यदि आप बारिश में भीग जाते हैं, तो तुरंत साफ पानी से नहाएं और खुद को अच्छी तरह सुखाएं। शरीर के मोड़ वाले हिस्सों- जैसे उंगलियों के बीच, गर्दन, अंडरआर्म्स को सूखा रखें ताकि फंगल इन्फेक्शन और खुजली की समस्या न हो।

 

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IMD Flash Flood Alert: सावधान! अगले 24 घंटों में इन 3 राज्यों में आ सकती है अचानक बाढ़, फ्लैश फ्लड और भारी बारिश की चेतावनी

IMD Flash Flood Alert: देश भर में सक्रिय दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने एक बड़ा अलर्ट जारी किया है। आईएमडी ने लगातार हो रही भारी मॉनसूनी बारिश के मद्देनजर देश के तीन राज्यों महाराष्ट्र, गोवा और गुजरात के कई हिस्सों के लिए अचानक आने वाली बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटों के दौरान इन राज्यों के कई जिलों में मध्यम स्तर के फ्लैश फ्लड का खतरा मंडरा रहा है जहां बहुत भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है।

कुछ इलाकों में 200 मिमी तक बारिश हो सकती है। इससे अचानक बाढ़, जलभराव और भूस्खलन की आशंका काफी बढ़ गई है। लगातार हो रही बारिश से मिट्टी पहले ही पूरी तरह गीली हो चुकी है और नदियां उफान पर हैं। इससे इन क्षेत्रों में तेजी से बाढ़ आने की संवेदनशीलता बढ़ गई है।

पश्चिमी भारत में भारी बारिश से बढ़ा बाढ़ का खतरा

IMD के मुताबिक सबसे ज्यादा फ्लैश फ्लड का खतरा नीचे दिए गए इलाकों को है-

कोंकण और गोवा

मध्य महाराष्ट्र

गुजरात

भारी बारिश से नदियां उफान पर

मौसम एजेंसी का कहना है कि बहुत कम समय में होने वाली बेहद तेज बारिश की वजह से नदियां, नाले और जल निकासी चैनल उफान पर आ सकते हैं। खासकर निचले इलाकों में स्थिति गंभीर हो सकती है। इसे देखते हुए अधिकारियों ने स्थानीय निवासियों को सतर्क रहने और भारी बारिश के दौरान बाढ़ वाली सड़कों या नदियों के किनारों से यात्रा करने से बचने की सख्त सलाह दी है।

क्या होती है अचानक आने वाली बाढ़?

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, फ्लैश फ्लड सामान्य नदी की बाढ़ से बिल्कुल अलग होती है। मौसमी नदी की बाढ़ आमतौर पर बारिश होने के 100 से 150 घंटे बाद आती है लेकिन फ्लैश फ्लड भारी बारिश के कुछ ही मिनटों या घंटों के भीतर आ सकता है। यह स्थिति तब बनती है जब जमीन पानी को सोखने की स्थिति में नहीं रहती या फिर नदियां, नाले और ड्रेनेज चैनल पूरी तरह से भर जाते हैं। तेज हवाओं की वजह से फ्लैश फ्लड अपने साथ मिट्टी, चट्टानें और मलबे को भी बहा ले आती है। अपनी बेहद तेज स्पीड और ताकत की वजह से इसे बारिश के मौसम से जुड़ी सबसे खतरनाक आपदाओं में से एक माना जाता है। ये तुरंत जानलेवा साबित हो सकती है।

IMD कैसे लगाता है फ्लैश फ्लड के खतरे का अनुमान?

मौसम विभाग द्वारा फ्लैश फ्लड की चेतावनियां जारी करने के लिए कई आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। वैज्ञानिक इसके लिए बारिश के पूर्वानुमान, सैटेलाइट ऑब्जर्वेशन, डॉपलर वेदर रडार डेटा और हाइड्रोलॉजिकल मॉडल्स का इस्तेमाल करते हैं। वैज्ञानिक मिट्टी की नमी, नदियों के जलस्तर और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों का भी बारीकी से एनालिसिस करते हैं ताकि यह सटीक अनुमान लगाया जा सके कि तेज बारिश के बाद कहां पानी तेजी से बढ़ सकता है।

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9 जुलाई तक जारी रहेगा मौसम का यह उग्र रूप

पश्चिमी भारत में वर्तमान दक्षिण-पश्चिम मानसून लगातार सक्रिय बना हुआ है। IMD के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, महाराष्ट्र, गोवा और गुजरात के कुछ हिस्सों में 9 जुलाई तक बहुत भारी बारिश का यह दौर जारी रहेगा। इसके बाद परिस्थितियों में धीरे-धीरे सुधार होने की उम्मीद है। मौसम विभाग का कहना है कि अरब सागर से मिल रही प्रचुर नमी और अनुकूल मानसूनी चक्र की वजह से मौसम का यह चरम रूप देखने को मिल रहा है।

El Nino Impact: अल नीनो के खतरे पर PMO में हाई लेवल मीटिंग, खेती-जॉब से खाने-पीने के सामान तक अंदर से निकल कर आईं ये 5 बातें जानिए

El Nino Update: देश में खरीफ सीजन पर और इकॉनमी के दूसरे सेक्टर्स पर अल नीनो के खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अलर्ट मोड में आ गया है। PIB की एक प्रेस रिलीज के मुताबिक प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ पीके मिश्रा की अध्यक्षता में 7 जुलाई पीएमओ में एक हाई लेवल बैठक आयोजित की गई। इसमें कृषि, बिजली, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, आर्थिक मामलों और उपभोक्ता मामलों सहित 15 से अधिक मंत्रालयों के सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

बैठक का उद्देश्य अल नीनो की वजह से पैदा होने वाले हालात और मंत्रालयों की तैयारियों का डिटेल में एनालिसिस करना था। आइए आपको बताते हैं कि इस बैठक से निकल कर क्या खास बातें सामने आई हैं:-

1- मानसून का हाल और अल नीनो का अनुमान

बैठक की शुरुआत में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जून से लेकर 7 जुलाई तक देश में हुई बारिश का डिटेल पेश किया। मौसम विभाग के महानिदेशक ने बताया कि गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में मानसून के आने में करीब 10 दिनों की देरी हुई। वैसे 7 जुलाई तक हुई बारिश के बाद पूरे भारत में बारिश की कमी घटकर -12% रह गई है।

ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि जुलाई के पहले सप्ताह में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। जुलाई और अगस्त में कमजोर से मध्यम अल नीनो रहने की उम्मीद है। चूंकि मानसून सीजन की 30% से अधिक बारिश जुलाई में ही होती है इसलिए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि अल नीनो वर्ष का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उस साल सामान्य से कम या बहुत कम बारिश होगी।

2- कृषि और फसलों को लेकर सरकार की तैयारी

कृषि सचिव ने खरीफ सीजन के दौरान अल नीनो के किसी भी संभावित प्रभाव से निपटने की तैयारियों पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। देश के 262 संवेदनशील जिलों के लिए डिस्ट्रिक्ट एग्रीकल्चर कंटिंजेंसी प्लान को अपडेट किया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने जिलों में मौजूद कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए भारतीय कृषि में अल नीनो जोखिमों के प्रबंधन पर SOP जारी की है।

बारिश, जलाशयों में पानी, फसल की बुवाई, बाजार के रुझान और कीट/बीमारी की स्थिति की निगरानी के लिए राज्यों के साथ फसल मौसम निगरानी समूह की वीकली बैठकें बुलाई जा रही हैं। कमजोर राज्यों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड कवरेज के लिए अभियान शुरू किए गए हैं।

3- खाद्य सामग्री और फर्टिलाइजर का बफर स्टॉक

देश में आवश्यक खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता को लेकर भी बैठक में मंथन हुआ। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने खुदरा कीमतों की स्थिति और चावल, गेहूं और दालों के पर्याप्त बफर स्टॉक की जानकारी साझा की। उर्वरक विभाग ने बताया कि रबी सीजन के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। दोनों विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे आवश्यक वस्तुओं और उर्वरकों की मैक्रो और माइक्रो दोनों स्तरों पर उपलब्धता की लगातार निगरानी करें।

4- पानी, बिजली और पशुओं के चारे पर फोकस

इस बैठक में पेयजल, सिंचाई और पशुपालन के मोर्चे पर भी मंत्रालयों ने अपनी रिपोर्ट पेश की। पेयजल और स्वच्छता विभाग ने बताया कि स्थिति स्थिर है लेकिन उन्हें संवेदनशील जिलों में माइक्रो लेवल पर प्लानिंग और निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

जल संसाधन विभाग ने बताया कि वर्तमान में भूजल और जलाशयों की स्थिति स्थिर है लेकिन पूरे सीजन इस पर लगातार नजर रखी जाएगी। पशुपालन और डेयरी विभाग को निर्देश दिया गया है कि वे सूखे चारे, हरे चारे और पशु आहार की उपलब्धता का आकलन करें। इसके लिए चारा विकास योजनाएं बनाने और राज्यों के साथ नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। बिजली विभाग ने भी उत्पादन और उपलब्धता की स्थिति साझा की।

5- रोजगार, स्वास्थ्य और राज्यों के साथ तालमेल

बैठक में स्वास्थ्य अलर्ट और रोजगार योजनाओं पर भी चर्चा की गई। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने बताया कि हीट वेव, हाई ह्यूमिडिटी और डेंगू के प्रकोप की निगरानी के लिए एडवाइजरी जारी हुई हैं। ग्रामीण विकास विभाग ने जानकारी दी कि 1 जुलाई से ‘विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन’ के तहत काम शुरू हो गया है और अब तक 1 करोड़ मानव दिवस रोजगार पैदा किया गया है।

PMO का सख्त निर्देश

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि स्थिति की लगातार निगरानी की जानी चाहिए। मंत्रालयों को कहा गया है कि वे राज्यों के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर माइक्रो रणनीति के साथ काम करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कृषि और आर्थिक गतिविधियां अल नीनो से प्रभावित न हों।

‘अल नीनो’ का एनर्जी सिस्टम पर सबसे ज्यादा असर

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के एक नए एनालिसिस के अनुसार, इस साल के अल नीनो का सबसे बड़ा ग्लोबल असर भारत के एनर्जी सिस्टम पर पड़ने वाला है। अल नीनो मौसम का एक ऐसा चक्र है जो बार-बार आता है। इससे दुनिया भर में तापमान बढ़ता है।

भारत के सामने दोहरी चुनौती

अल नीनो की वजह से हवा और बारिश कम होने से टरबाइन और हाइड्रोपावर से बिजली का उत्पादन घटेगा। जबकि तापमान बढ़ने से एयर कंडीशनिंग (AC) की मांग बढ़ेगी, जिसमें बहुत ज्यादा बिजली खर्च होती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि साल भर कूलिंग अप्लायंसेज (ठंडा करने वाले उपकरण) के ज्यादा इस्तेमाल से बिजली की मांग 10 टेरावाट-घंटे (TWh) तक बढ़ सकती है, जो दिल्ली की सालाना बिजली खपत का एक-चौथाई हिस्सा है।

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यह एनालिसिस जुलाई 2026 से जून 2027 की अवधि के लिए भारत के पावर सेक्टर पर ला नीना से अल नीनो में बदलाव के असर को दिखाता है। रिपोर्ट में कहा गया है, “भारत को बिजली देने में सौर ऊर्जा की भूमिका लगातार बढ़ रही है। अब यह दिन के समय बिजली की 24 प्रतिशत मांग को पूरा करती है। सौर ऊर्जा उत्पादन पर अल नीनो का बहुत कम असर पड़ता है, जिसका मतलब है कि भारत द्वारा लगाया गया हर अतिरिक्त सोलर पैनल और बैटरी ग्रिड को ऐसे खराब मौसम का सामना करने के लिए तैयार करने में मदद करता है।”

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व्हाइट ब्यूटी की तलाश में जाएं भारत के इन 8 खूबसूरत वाइल्डलाइफ डेस्टिनेशन पर, जहां सफेद जानवरों का होगा दीदार!

भारत में वन्यजीवों की कई ऐसी प्रजातियां हैं जो अपनी अनोखी रंग-रूप की वजह से लोगों को अट्रैक्ट करती हैं। इनमें सफेद रंग के दुर्लभ जंगली जानवर सबसे ज्यादा रोमांच पैदा करते हैं। हालांकि जंगलों में इन्हें देख पाना बहुत मुश्किल होता है। भारत के कुछ नेशनल पार्क और वाइल्ड लाइफ एरिया ऐसे हैं जहां इन दुर्लभ जीवों को देखने की संभावना रहती है।

1. जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क – सफेद हिरण और रेयर वाइल्ड लाइफ का एरिया

पानी में नहाते दिखा दुर्लभ सफेद हिरण, वीडियो हुआ वायरल - white Moose rare animal Population only 50 VIRAL VIDEO tsty - AajTak

उत्तराखंड में जिम कॉर्बेट भारत के सबसे पुराने और पॉपुलर नेशनल पार्क में से एक है। यह जगह बाघ, हाथी, हिरण और कई पक्षियों के लिए जानी जाती है। समय-समय पर यहां सफेद रंग वाले दुर्लभ हिरण या अन्य वन्यजीवों के दिखाई देने की खबरें सामने आती रही हैं। घने जंगल, घास के मैदान और नदी क्षेत्र ऐसे वातावरण बनाते हैं जहां कई तरह के जीव रहते हैं। सफारी के दौरान दुर्लभ रंग वाले जानवर दिखना पूरी तरह किस्मत पर डिपेंड करता है।

 

2. केवलादेव नेशनल पार्क – सफेद पक्षियों का खूबसूरत संसार

सफेद मोर सुंदर पंख और प्रेमालाप प्रदर्शन के साथ एक राजसी पक्षी तस्वीर और मुफ्त डाउनलोड के लिए चित्र - Pngtree

राजस्थान का केवलादेव नेशनल पार्कदुनिया के पॉपुलर पक्षी अभयारण्यों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में देशी और विदेशी पक्षी आते हैं। सर्दियों के मौसम में यहां कई प्रवासी पक्षी दिखाई देते हैं। इस क्षेत्र में सफेद रंग के पक्षी जैसे बगुले, सारस और अन्य जलपक्षी आसानी से देखे जा सकते हैं। झीलों, तालाबों और घास वाले एरिया के कारण यह जगह पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग मानी जाती है।

 

3. रणथंभौर नेशनल पार्क – सफेद बाघ की कहानियों से जुड़ा 

दुनिया में पीले टाइगर्स मौजूद थे तो सफेद बाघ कहां से आए? - Trending AajTak

रणथंभौर राजस्थान का पॉपुलर टाइगर रिजर्व है, जहां बाघों को खुले जंगल में देखने का शानदार एक्सपीरियंस मिलता है। यहां सफेद बाघ नियमित रूप से नहीं पाए जाते, लेकिन भारत में सफेद बाघों की ऐतिहासिक कहानी मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ नेशनल पार्क जैसे क्षेत्रों से जुड़ी रही है। रणथंभौर में सफेद रंग के अन्य दुर्लभ जीव और पक्षी देखने को मिल सकते हैं।

 

4. काजीरंगा नेशनल पार्क – सफेद गैंडों की धरती

उत्तरी सफेद गैंडे: लॉन्गलीट के जानवर प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाने में मदद करते हैं | आईटीवी न्यूज़ वेस्ट कंट्री

असम का काजीरंगा नेशनल पार्क एक सींग वाले गैंडों के लिए वर्ल्ड फेमस है। यहां सफेद रंग वाले गैंडे नहीं, बल्कि सामान्य रंग के भारतीय गैंडे पाए जाते हैं, जिन्हें कई लोग गलती से “सफेद गैंडा” कह देते हैं। इसके अलावा यहां हाथी, जंगली भैंसे, हिरण और कई पक्षियों की प्रजातियां मिलती हैं। मानसून के बाद हरियाली से भरा यह पार्क बेहद खूबसूरत दिखाई देता है।

 

5. भितरकनिका नेशनल पार्क – सफेद मगरमच्छों की दुर्लभ झलक

 

Meet Pearl, one of the world's rare albino alligators | Natural World | Earth Touch News

ओडिशा का भितरकनिका नेशनल पार्क मैंग्रोव जंगलों और खारे पानी के मगरमच्छों के लिए पॉपुलर है। यहां दुर्लभ रंग वाले मगरमच्छों के दिखाई देने की घटनाएं सामने आई हैं। पार्क में सफेद या हल्के रंग के मगरमच्छ बेहद दुर्लभ माने जाते हैं। इसके अलावा यहां कछुए, पक्षी और कई जलीय जीव भी पाए जाते हैं। यह एरिया भारत के सबसे जरुरी मैंग्रोव इको-सिस्टम में से एक है।

 

6. काबिनी वाइल्डलाइफ सेचुअरी – जंगलों में दुर्लभ नजारे

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कर्नाटक का काबिनी एरिया अपने खूबसूरत जंगलों, झील और वाइल्डलाइफ सफारी के लिए पॉपुलर है। यहां हाथी, बाघ, तेंदुए और कई प्रकार के हिरण पाए जाते हैं। काबिनी की खासियत यह है कि यहां जंगल और पानी का सुंदर ब्लेंड देखने को मिलता है, जिससे वाइल्डलाइफ को देखने का एक्सपीरियंस और भी शानदार हो जाता है।

7. नागरहोल टाइगर रिजर्व – रेयर वाइल्डलाइफ का नेचुरल होम

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नागरहोल टाइगर रिजर्व कर्नाटक के सबसे जरुरी जंगल एरिया में से एक है। यहां बाघ, हाथी, गौर, हिरण और कई पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। घने जंगल और नदी क्षेत्र इसे वाइल्डलाइफ के लिए आइडियल प्लेस बनाते हैं। सफेद रंग वाले जानवरों को देखना यहां भी दुर्लभ घटना है, लेकिन सफारी के दौरान अलग-अलग प्रजातियों के अनोखे रूप देखने का मौका मिल सकता है।

 

8. पेरियार टाइगर रिजर्व – झील और जंगलों का अनोखा संगम

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केरल का पेरियार टाइगर रिजर्व अपनी खूबसूरत झील, हाथियों और हरे-भरे जंगलों के लिए पॉपुलर है। यहां कई प्रकार के पक्षी, हिरण और वाइल्डलाइफ पाए जाते हैं। सफेद रंग वाले दुर्लभ जीवों को देखना आसान नहीं होता, लेकिन इस क्षेत्र की बायोडाइवर्सिटी इसे खास बनाती है। नाव सफारी के दौरान जंगल और पानी के बीच वाइल्डलाइफ को देखने का एक्सपीरियंस बेहद यादगार होता है।

भारत के जंगलों में सफेद रंग के दुर्लभ जानवरों को देखना एक रोमांचक लेकिन बेहद मुश्किल एक्सपीरियंस है। नेचर में ऐसे जीव बहुत कम संख्या में पाए जाते हैं और इनका कंज़र्वेशन बेहद जरूरी है। इन नेशनल पार्क की ट्रिप केवल दुर्लभ जानवरों को देखने के लिए ही नहीं, बल्कि भारत की यूनिक बायोडाइवर्सिटी और नेचुरल ब्यूटी को समझने का भी शानदार मौका देती है।

Delhi NCR Heavy Rain Alert: IMD ने दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश का अलर्ट दिया, इस बीच गुरुग्राम में WFH की एडवाइजरी जारी

Delhi NCR Heavy Rain Alert: मानसून की पहली ही भारी बारिश ने दिल्ली से सटे साइबर सिटी के नाम से मशहूर गुरुग्राम की रफ्तार पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया है। मंगलवार (7 जुलाई) को हुई लगभग 82 मिमी बारिश के बाद हरियाणा के इस प्रमुख शहर के कई इलाके जलमग्न हो गए। सबसे बुरा हाल नेशनल हाईवे-48 (NH-48) पर देखने को मिला। यहां नरसिंहपुर के पास मुख्य हाईवे की सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस गया। इसके बाद प्रशासन को दो लेन पूरी तरह बंद करनी पड़ीं।

इस हादसे के कारण दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेसवे पर हीरो होंडा चौक से लेकर खेड़की दौला टोल प्लाजा तक लगभग 8 किलोमीटर लंबा भारी ट्रैफिक जाम लग गया। इसमें हजारों वाहन चालक घंटों फंसे रहे। यह घटना दोपहर 3 से 4 बजे के बीच की है। सूत्रों के मुताबिक, गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) इस हिस्से के नीचे ड्रेनेज (जल निकासी) पाइप डालने का काम कर रहा था। खुदाई की वजह से सड़क के नीचे की मिट्टी पहले से ही कमजोर थी। इस वजह से भारी बारिश के पानी ने इसे पूरी तरह बहा दिया, जिससे मुख्य हाईवे बीच से धंस गया।

ट्रैफिक पुलिस की नई एडवाइजरी

भारी ट्रैफिक जाम को देखते हुए गुरुग्राम पुलिस ने दिल्ली से जयपुर की ओर जाने वाले वाहनों के लिए तुरंत रूट डायवर्ट कर दिया है। वाहन चालकों को इन रास्तों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है:-

राजीव चौक से: वाहन चालक राजीव चौक पर बाईं (Left) तरफ मुड़कर एसपीआर रोड (SPR Road) का इस्तेमाल करें।

हीरो होंडा चौक से: यहां से भी बाईं ओर मुड़कर एसपीआर रोड के जरिए अपने गंतव्य की ओर बढ़ें।

दिल्ली से आने वाले वाहन: दिल्ली से आने वाले लोग नरसिंहपुर के जाम से बचने के लिए सीधे द्वारका एक्सप्रेसवे (Dwarka Expressway) का रास्ता अपनाएं।

कॉरपोरेट कंपनियों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ की अपील

मौसम विभाग के अनुमान और आने वाले दिनों में और जलभराव की आशंका को देखते हुए गुरुग्राम पुलिस ने एक सख्त एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने शहर के सभी निजी संस्थानों और कॉरपोरेट सेक्टर से अपील की है:-

  • आगामी कुछ दिनों तक मुख्य सड़कों और चौराहों पर जलभराव और भारी जाम की पूरी आशंका है। इसलिए हम कॉरपोरेट सेक्टर और निजी कंपनियों से पुरजोर अपील करते हैं कि वे अपने कर्मचारियों को अगले कुछ दिनों के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ (घर से काम करने) की सुविधा दें, ताकि सड़कों पर दबाव कम हो सके और लोग सुरक्षित रहें।”
  • अगर आप भी गुरुग्राम या दिल्ली-एनसीआर में सफर कर रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले लाइव ट्रैफिक अपडेट जरूर चेक कर लें और संभव हो तो डिजिटल माध्यमों से ही अपना काम निपटाएं।

आज भी राहत मिलने की उम्मीद कम

यह वेदर फोरकास्ट साफ इशारा कर रहा है कि गुरुग्राम और दिल्ली-एनसीआर के लोगों को आज भी जलभराव (waterlogging) और ट्रैफिक जाम से राहत मिलने की उम्मीद थोड़ी कम है। कल के 82 मिमी वाले हाहाकार के बाद आज, 8 जुलाई 2026, का मौसम कुछ ऐसा रहने वाला है:-

  • सुबह और दोपहर से पहले (Morning/Forenoon): आसमान में घने बादल छाए रहेंगे। कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। सबसे जरूरी बात-इस दौरान बिजली कड़कने, गरजने और 30 से 40 किमी/घंटा (जो बढ़कर 50 किमी/घंटा तक जा सकती है) की तेज रफ्तार से हवाएं चलने की आशंका है।
  • दोपहर के समय हवा की रफ्तार थोड़ी धीमी (करीब 15 किमी/घंटा) पड़ेगी। लेकिन बादलों का डेरा बना रहेगा।
  • राहत की उम्मीद मत करिए, क्योंकि शाम होते ही हवाएं फिर से रफ्तार पकड़ेंगी (20 किमी/घंटा) और कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश का दूसरा दौर (another spell) शुरू हो जाएगा।

यात्रियों और ऑफिस जाने वालों के लिए जरूरी सलाह

  • कल NH-48 (नरसिंहपुर) पर हुए बड़े रोड केव-इन (सड़क धंसने) और 8 किलोमीटर लंबे जाम के बाद आज की यह बारिश स्थिति को और बिगाड़ सकती है। सुबह के समय चलने वाली तेज हवाओं और गरज-चमक के कारण विजिबिलिटी कम हो सकती है और जलभराव वाले चौराहों पर ट्रैफिक रेंग सकता है।
  • पुलिस ने पहले ही ‘वर्क फ्रॉम होम’ की एडवाइजरी जारी कर रखी है। अगर आपकी कंपनी इजाजत दे तो आज घर पर रहकर ही काम करना सबसे सुरक्षित और समझदारी भरा फैसला होगा।
  • जलभराव के बीच अगर निकलना ही पड़े, तो मुख्य हाईवे (NH-48) के बजाय द्वारका एक्सप्रेसवे या एसपीआर रोड (SPR Road) का इस्तेमाल करें और जलभराव वाले अंडरपास से दूर रहें।

दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग (IMD) ने दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और फरीदाबाद समेत एनसीआर के कई हिस्सों में अगले कुछ घंटों तक भारी बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई है। लोगों को खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

बारिश के चलते कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। जबकि कुछ स्थानों पर वाहनों की लंबी कतारें भी देखी गईं। प्रशासन ने संबंधित एजेंसियों को जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त रखने और प्रभावित क्षेत्रों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।

मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटे तक दिल्ली-एनसीआर में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। ऐसे में लोगों से मौसम संबंधी ताजा अपडेट पर नजर रखने और आवश्यक सावधानी बरतने की अपील की गई है।

क्या करें और क्या न करें

  • जलभराव वाले रास्तों से गुजरने से बचें।
  • बिजली के खंभों और खुले तारों से दूरी बनाए रखें।
  • मौसम विभाग की आधिकारिक चेतावनियों और अपडेट का पालन करें।
  • बेहद जरूरी होने पर ही यात्रा करें।
  • कार चलाते समय गति नियंत्रित रखें और पर्याप्त दूरी बनाए रखें।

मानसून भी नहीं रोक पाएगा आपकी ट्रैवल प्लानिंग, बारिश से हटकर कुछ खास जुलाई में घूमने की टॉप 6 लोकेशन!

जुलाई का महीना भारत में मानसून का मौसम लेकर आता है, लेकिन अगर आप बारिश से बचते हुए घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो देश में कई ऐसी खूबसूरत जगहें हैं जहां इस समय भी मौसम सुहावना रहता है। इन डेस्टिनेशंस पर कम बारिश होने के कारण आप बिना किसी परेशानी के प्राकृतिक नज़ारों, एडवेंचर और संस्कृति का भरपूर आनंद ले सकते हैं। आइए जानते हैं जुलाई में मॉनसून से बचने के लिए भारत की 6 बेहतरीन घूमने लायक जगहों के बारे में:

लाहौल घाटी-हिमालयी शांत वादी

PHOTOS: हिमाचल का स्वर्ग है स्पीति घाटी, हर साल आते हैं बड़ी संख्या में सैलानी

हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी जुलाई में मॉनसून से बचकर घूमने के लिए एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है। यह भी रेन शैडो क्षेत्र में आती है, इसलिए यहां बारिश बहुत कम होती है और मौसम सुहावना बना रहता है। सिस्सू, सूरज ताल, बारालाचा ला और गोंधला किला जैसी जगहें यहां की प्राकृतिक खूबसूरती को और खास बनाती हैं। बर्फ से ढकी चोटियां, साफ नदियां और शांत वातावरण नेचर लवर को बेहद पसंद आता है। रोड ट्रिप, ट्रेकिंग, कैंपिंग और फोटोग्राफी के लिए यह जगह किसी सपने से कम नहीं है।

जैसलमेर-सुनहरी रेगिस्तान नगरी

Rajasthan - Sharvil Holidays

राजस्थान का गोल्डन सिटी जैसलमेर जुलाई में भी घूमने के लिए एक अच्छा ऑप्शन माना जाता है, क्योंकि यहां बारिश बहुत कम होती है। मानसून के दौरान मौसम अपेक्षाकृत सुहावना हो जाता है और टूरिस्ट की भीड़ भी कम रहती है। जैसलमेर किला, पटवों की हवेली, गड़ीसर झील और सैम सैंड ड्यून्स यहां काअट्रैक्शन हैं। रेगिस्तान में ऊंट की सवारी, डेजर्ट सफारी, लोक संगीत और ट्रेडिशनल राजस्थानी संस्कृति का एक्सपीरियंस आपकी जर्नी को यादगार बना देता है। अगर आप रेगिस्तान की खूबसूरती को करीब से देखना चाहते हैं, तो जुलाई का समय भी अच्छा साबित हो सकता है।

हम्पी-पुरानी खंडहर नगरी

Uragas Immigrated in India Seems an Unproved Hypothesis – Raigar.net

अगर आप हिस्ट्री और आर्किटेक्चर में इंटरेस्ट रखते हैं, तो कर्नाटक का हम्पी जुलाई में घूमने के लिए शानदार डेस्टिनेशन है। हल्की बारिश के कारण यहां का वातावरण हरा-भरा और सुहावना हो जाता है, जिससे प्राचीन मंदिरों और खंडहरों की सुंदरता और बढ़ जाती है। यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल यह शहर विरुपाक्ष मंदिर, विट्ठल मंदिर, लोटस महल और मातंगा हिल जैसी ऐतिहासिक जगहों के लिए प्रसिद्ध है। यहां साइकिल से घूमना, सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा देखना और विरासत से जुड़ी कहानियों को जानना एक अलग ही एक्सपीरियंस देता है।

स्पीति घाटी-बर्फीला रेगिस्तान

WINTER SPECIAL TRIP TO SPITI VALLEY - 7 Days/6 Nights at 17499 INR (EX- SHIMLA) - HTC - Hyderabad Trekking Company

हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी उन लोगों के लिए स्वर्ग है जो प्रकृति, रोमांच और शांति का आनंद लेना चाहते हैं। रेन शैडो क्षेत्र में होने के कारण यहां जुलाई में बहुत कम बारिश होती है, जिससे रोड ट्रिप और दर्शनीय जगहों की सैर आसान हो जाती है। की मठ, चंद्रताल झील, हिक्किम, कोमिक और धंकर मठ जैसी जगहें यहां की सबसे बड़ी खासियत हैं। बंजर पहाड़, नीला आसमान और प्राचीन बौद्ध संस्कृति इस घाटी को एक अलग पहचान देते हैं। ट्रेकिंग, बाइकिंग और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है।

पुडुचेरी-फ्रेंच कोस्टल शांति

FORTE KOCHI (Fort Kochi) - Hotel Reviews, Photos, Rate Comparison - Tripadvisor

अगर आप समुद्र किनारे सुकून भरी छुट्टियां बिताना चाहते हैं, तो पुडुचेरी एक बेहतरीन ऑप्शन है। जुलाई में यहां दक्षिण-पश्चिम मानसून का असर थोड़ा कम रहता है, जिससे मौसम घूमने के लिए फ्रेंडली बना रहता है। फ्रेंच वास्तुकला, रंग-बिरंगी गलियां, प्रोमेनेड बीच, ऑरोविल और श्री अरविंद आश्रम यहां के मेन अट्रैक्शन हैं। यहां बीच पर सैर, कैफे हॉपिंग, साइकिलिंग और मेडिटेशन का आनंद लिया जा सकता है। शांत वातावरण और खूबसूरत समुद्री नजारे इसे कपल्स और फैमिली ट्रिप दोनों के लिए खास बनाते हैं।

लेह-हिमालय का जादुई स्वर्ग

Top 23 Best Places to Visit in Leh Ladakh

अगर आप जुलाई में मॉनसून से दूर किसी ऐसी जगह की तलाश में हैं, जहां नीला आसमान, बर्फ से ढके पहाड़ और शांत झीलें आपका स्वागत करें, तो लेह आपके लिए बेहतरीन ऑप्शन है। यह क्षेत्र रेन शैडो ज़ोन में आता है, इसलिए यहां बारिश बेहद कम होती है। जुलाई में पैंगोंग झील, नुब्रा घाटी, खारदुंग ला, शांति स्तूप और लेह पैलेस जैसी जगहों की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। यहां बाइक ट्रिप, रिवर राफ्टिंग, कैंपिंग और मठों की सैर जैसी एक्टिविटीज आपकी ट्रिप को यादगार बना देती हैं। हालांकि, अधिक ऊंचाई के कारण पहले दिन आराम करना और पानी पीना जरूरी होता है।

अगर आप जुलाई में बारिश से दूर और आरामदायक ट्रिप की तलाश में हैं, तो भारत में ये सभी जगहें शानदार हैं। आप अपनी पसंद और सुविधा से सही डेस्टिनेशन चुनकर मानसून के मौसम में भी यादगार छुट्टियों का आनंद ले सकते हैं। सही प्लानिंग के साथ यह ट्रिप आपके लिए बेहद खास और यादगार साबित होगी।

Viral Post: ‘ऑफिस में सिर्फ 3 मिनट, रास्ते में 1 घंटा…’ मुंबई की बारिश पर महिला प्रोफेशनल का पोस्ट हुआ वायरल

मुंबई में लगातार हो रही भारी बारिश ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर दिया है। कई इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक की समस्या की वजह से कई ऑफिस ने अपने कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी है। वहीं हाल ही में एक महिला प्रोफेशनल ने बताया कि, उसको वर्क फ्रॉम होम मिलने के बावजूद सिर्फ लैपटॉप लेने के लिए ऑफिस जाना पड़ा। उन्होंने बताया कि ऑफिस तक पहुंचने में कुल 1 घंटे का समय लगा। वहीं कई यूजर्स ने मुंबई में हर साल मानसून के दौरान होने वाली परेशानियों और बारिश के बीच भी कर्मचारियों पर पड़ने वाले काम के दबाव को लेकर अपनी राय रखी।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

मार्केटिंग प्रोफेशनल और आईआईएम रायपुर से पढ़ाई कर चुकी इहिना डी ने मुंबई में रेड अलर्ट के दौरान अपना एक्सपीरिएंस लिंक्डइन पर शेयर किया। उन्होंने बताया कि, भारी बारिश के बीच, जब बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने लोगों को केवल जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी थी। महाराष्ट्र सरकार ने प्राइवेट कंपनियों से भी अपील की कि खराब मौसम को देखते हुए जहां संभव हो, कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा दी जाए। इहिना डी ने बताया कि उनकी कंपनी ने भी भारी बारिश के कारण कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था लागू कर दी थी।

ऑफिस में भूल गई लैपटॉप

इहिना डी ने बताया कि उन्हें बाद में याद आया कि उनका लैपटॉप ऑफिस में ही रह गया है। उन्होंने लिखा, “मुंबई में कल रेड अलर्ट घोषित किया गया था, इसलिए आज मैं वर्क फ्रॉम होम कर रही हूं। लेकिन अपना लैपटॉप ऑफिस में ही छोड़ आई थी।” उन्होंने आगे लिखा, “जब पूरा शहर अपने प्लान रद्द कर रहा था और रेनकोट निकाल रहा था, तब मैं मजबूरी में कार से ऑफिस जा रही थी।” इहिना ने बताया कि ऑफिस पहुंचकर उन्होंने सिर्फ अपना लैपटॉप उठाया और करीब तीन मिनट में वापस निकल गईं। उन्होंने लिखा, “अपना लैपटॉप लिया, तीन मिनट में फिर कार में लौट आई। एक घंटे का सफर और ऑफिस में सिर्फ तीन मिनट।”

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इस एक्सपिरिएंस के बाद इहिना ने मुंबई में हर साल होने वाली बारिश को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा, “ये सिर्फ बारिश नहीं है। यह हर साल होने वाला ऐसा ठहराव है, जिसके आने का सभी को पता होता है, लेकिन पूरा शहर मानो ये दिखावा करता है कि यह आने वाला ही नहीं है।” उन्होंने हर साल मानसून के दौरान होने वाली पानी भरी सड़कों, जलभराव और आखिरी समय में होने वाली वर्क-फ्रॉम-होम की घोषणाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा, “हम जानते हैं कि बारिश जून में शुरू होगी। हमें यह भी पता है कि जुलाई में हालात और खराब होंगे। फिर भी हर साल ऐसा लगता है जैसे यह सब अचानक हो गया हो।”

उन्होंने ये भी माना कि हर किसी के पास घर से काम करने की सुविधा नहीं होती। उन्होंने लिखा, “आज मुझे वर्क फ्रॉम होम करने का मौका मिला, इसलिए मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं। मेरा काम नहीं रुका और मेरा सफर सिर्फ मेरे बेडरूम से मेरी डेस्क तक था। लेकिन इससे मुझे यह भी एहसास हुआ कि लाखों मुंबईकरों के पास वर्क फ्रॉम होम का विकल्प नहीं है। वे फिर भी बारिश में, लोकल ट्रेन से और बाइक पर सफर करके काम पर पहुंचे। यह कोई ‘हसल कल्चर’ नहीं है, यह बस मुंबई है।”

कल का मौसम 8 जुलाई: इन 19 राज्यों में भारी बारिश और 18 राज्यों में आंधी-तूफान का अलर्ट, दिल्ली से यूपी-बिहार तक IMD ने जारी की ये चेतावनी

India Weather Forecast for 8th July: देश भर में दक्षिण-पश्चिम मानसून अब पूरी तरह से रफ्तार पकड़ चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक मानसून गुजरात के बचे हुए हिस्सों, राजस्थान और हरियाणा के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ चुका है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले 2 से 3 दिनों के भीतर मानसून पंजाब, राजस्थान और हरियाणा के शेष हिस्सों को कवर करते हुए पूरे देश में दस्तक दे देगा। मौसम प्रणालियों की बात करें तो पूर्वी मध्य प्रदेश और उसके आसपास के इलाके पर एक वेल-मार्कड लो प्रेशर एरिया सक्रिय है। इसके साथ ही दक्षिण गुजरात से लेकर केंद्रीय केरल तक ऑफ-शोर ट्रफ और राजस्थान से लेकर बांग्लादेश तक सीजनल ट्रफ बनी हुई है। इन मजबूत सिस्टम्स के प्रभाव के चलते बुधवार 8 जुलाई को देश के 19 राज्यों में भारी से अत्यंत भारी बारिश और करीब 18 राज्यों में आंधी-तूफान व आसमानी बिजली का हाई अलर्ट जारी किया गया है।

उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट

मौसम विभाग के मुताबिक 8 जुलाई को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अलग-अलग स्थानों पर मूसलाधार से अत्यंत मूसलाधार बारिश होने की प्रबल आशंका है। इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और प्रशासनिक दिशानिर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

इन 9 राज्यों में बहुत भारी बारिश की चेतावनी

IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक 8 जुलाई को देश के 9 राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। ये अलर्ट नीचे दिए गए राज्यों के लिए जारी किया गया है-

अरुणाचल प्रदेश

असम और मेघालय

तटीय कर्नाटक

दक्षिण आंतरिक कर्नाटक

पूर्वी राजस्थान

गुजरात क्षेत्र

कोंकण और गोवा

मध्य महाराष्ट्र

मध्य प्रदेश

यूपी, दिल्ली-NCR और बिहार समेत इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

8 जुलाई को देश के कई अन्य हिस्सों में भी भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। इस सूची में नीचे दिए गए राज्य शामिल हैं-

उत्तर प्रदेश (पश्चिमी हिस्सा)

बिहार

हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली

पंजाब

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड

जम्मू-कश्मीर-लद्दाख

पश्चिमी राजस्थान

सौराष्ट्र और कच्छ

विदर्भ (महाराष्ट्र)

केरल और माहे

उत्तरी आंतरिक कर्नाटक

नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा

आंधी-तूफान, बिजली और तेज हवाओं का अलर्ट (18 प्रभावित राज्य)

मौसम विभाग ने बारिश के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों में तेज हवाओं और गरज-चमक को लेकर भी चेतावनी जारी की है:

1- 50 से 60 किमी/घंटे की रफ्तार से थंडरस्कॉल

गुजरात क्षेत्र, संपूर्ण कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल और तेलंगाना में 50-60 किमी प्रति घंटे की तूफानी रफ्तार से हवाएं चलने और आंधी-तूफान आने की आशंका है।

2- 40 से 50 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी और बिजली

आंध्र प्रदेश, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख, झारखंड, केरल और माहे, लक्षद्वीप और पूरे राजस्थान में अलग-अलग स्थानों पर 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने और बिजली कड़कने का अलर्ट है।

3- 30 से 40 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं

बिहार, ओडिशा, संपूर्ण पश्चिम बंगाल और सिक्किम, तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ गरज-चमक की स्थिति बनी रहेगी।

4- गरज-चमक और बिजली का अलर्ट

अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा और उत्तराखंड में आकाशीय बिजली चमकने और गरज-चमक के साथ सामान्य आंधी आ सकती है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, माहे, लक्षद्वीप और तेलंगाना में सतह पर बेहद मजबूत हवाएं चलने का भी अनुमान है।

समुद्री तटीय इलाकों के लिए चेतावनी: मछुआरों को न जाने की सलाह

मौसम विभाग ने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों ही क्षेत्रों में तूफानी मौसम और भारी लहरें उठने की चेतावनी जारी की है:

उत्तरी कोंकण तट: यहां सबसे खतरनाक स्थिति रहने वाली है। यहां 60-70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाएं 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंच सकती हैं।

दक्षिणी कोंकण और गोवा तट: यहां 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक छू सकती हैं।

गुजरात, कर्नाटक और केरल तट: दक्षिण गुजरात, कर्नाटक, केरल के तटों और लक्षद्वीप क्षेत्र में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने के आसार हैं। इससे मौसम खराब रहेगा।

बंगाल की खाड़ी: ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटों के साथ-साथ केंद्रीय, उत्तरी और दक्षिणी बंगाल की खाड़ी में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) चलने की संभावना है। तटीय क्षेत्रों में मछुआरों को समुद्र में न उतरने की सख्त हिदायत दी गई है।

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

An image featuring delicious dishes to prepare during the rainy season, accompanied by a caption about monsoon-special snack recipes

Easy Snack Recipes: बारिश की बूंदें गिर रही हों और किचन से अदरक वाली चाय की खुशबू आ रही हो, तो पैर अपने आप स्नैक्स की तलाश में बढ़ जाते हैं। चाय का असली मजा तभी आता है जब साथ में कुछ बेहद कुरकुरा और चटपटा हो।ALSO READ: Monsoon Special Recipes: मानसून की 5 बेहतरीन रेसिपीज, देखते ही मुंह में आ जाएगा पानी

 

इस मानसून अपनी शाम की चाय का स्वाद दोगुना करने के लिए बनाएं ये 5 सुपर क्रिस्पी स्नैक्स, जिन्हें खाकर हर कोई आपकी कुकिंग की तारीफ करेगा:

 

1. कुरकुरे 'चावल के आटे के रिंग्स'

यह एक ऐसा स्नैक है जो चाय के साथ सबसे ज्यादा क्रिस्पी लगता है और इसे आप बनाकर कुछ दिनों के लिए स्टोर भी कर सकते हैं।

 

कैसे बनाएं: एक कप पानी में थोड़ा सा घी, नमक, अजवाइन, जीरा और तिल डालकर उबालें। पानी उबलने पर इसमें एक कप चावल का आटा मिलाकर गैस बंद कर दें और ढक दें। हल्का ठंडा होने पर इसे आटे की तरह गूंथ लें। अब छोटी-छोटी लोइयां लेकर पतली रस्सी जैसी बेलें और दोनों छोर जोड़कर रिंग्स यानी छल्ले बना लें। इन्हें मध्यम आंच पर सुनहरा और क्रिस्पी होने तक तलें।

 

2. कैफ़े स्टाइल 'क्रिस्पी कॉर्न फ्रिटर्स' 

बारिश के मौसम में ताजे भुट्टे के दानों से बना यह स्नैक चाय के साथ एक परफेक्ट कॉम्बिनेशन है।

 

कैसे बनाएं: उबले हुए स्वीट कॉर्न के दानों में बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, हरा धनिया, थोड़ा सा बेसन और कुरकुरेपन के लिए बराबर मात्रा में चावल का आटा मिलाएं। इसमें चाट मसाला, लाल मिर्च पाउडर और हल्का सा पानी छिड़क कर एक गाढ़ा मिश्रण तैयार करें। चम्मच की मदद से इन्हें गरम तेल में डालें और एकदम क्रिस्पी होने तक डीप फ्राई करें।

 

3. लच्छा आलू पकौड़ा

अगर घर में कोई खास सब्जी नहीं है, तो सिर्फ आलू और प्याज से यह बेहद क्रिस्पी स्नैक मिनटों में बन जाता है।

 

कैसे बनाएं: कच्चे आलुओं को कद्दूकस कर लें और पानी से अच्छी तरह धोकर पूरा पानी निचोड़ लें। अब इन आलू के लच्छों में लंबा कटा प्याज, बारीक कटी हरी मिर्च, थोड़ा सा कॉर्नफ्लोर या अरारोट, मैदा, नमक और काली मिर्च मिलाएं। इसमें पानी बिल्कुल नहीं डालना है। इसके छोटे-छोटे लच्छेदार पकौड़े बनाकर तेज आंच पर तलें। यह बाजार के चिप्स से भी ज्यादा क्रिस्पी बनते हैं।

 

4. गार्लिक ब्रेड स्टिक्स

अगर आप चाय के साथ कुछ वेस्टर्न और क्रिस्पी ट्राई करना चाहते हैं, तो यह झटपट बनने वाली रेसिपी आपके लिए ही है।

 

कैसे बनाएं: कमरे के तापमान पर रखे मक्खन में बारीक कद्दूकस किया हुआ लहसुन, ऑरेगैनो, चिली फ्लेक्स और हरा धनिया मिलाकर एक गार्लिक बटर तैयार करें। अब रेगुलर ब्रेड स्लाइस को लंबे स्टिक्स के आकार में काट लें। इन स्टिक्स पर दोनों तरफ यह बटर लगाएं और तवे पर धीमी आंच पर दोनों तरफ से एकदम क्रिस्पी टोस्ट होने तक सेकें।

 

5. क्रिस्पी मूंग दाल भजिया 

रिमझिम बारिश में मूंग की दाल के मंगौड़े या भजिए मिल जाएं, तो शाम बन जाती है। यह ऊपर से बहुत कुरकुरे और अंदर से जालीदार होते हैं।

 

कैसे बनाएं: धुली मूंग की दाल को 2-3 घंटे के लिए भिगो दें। फिर इसे बिना पानी डाले या सिर्फ 1 चम्मच पानी के साथ दरदरा पीस लें। इस बैटर को 5 मिनट तक हाथ से अच्छे से फेंटें ताकि यह हल्का हो जाए। अब इसमें कुटा हुआ खड़ा धनिया, सौंफ, हींग, हरी मिर्च, अदरक का पेस्ट और ढेर सारा बारीक कटा प्याज और कढ़ी पत्ता मिलाएं। छोटे-छोटे भजिए गरम तेल में डालकर गोल्डन ब्राउन होने तक तलें।

 

चाय-स्नैक स्पेशल टिप: इन सभी क्रिस्पी स्नैक्स के साथ पुदीने-धनिया की तीखी हरी चटनी और लहसुन-टमाटर की चटपटी चटनी परोसें। और हां, चाय में अदरक के साथ थोड़ा सा दालचीनी का टुकड़ा या लौंग जरूर डालें, यह मानसून में गले को भी राहत देगा और स्वाद भी बढ़ाएगा।

 

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Delhi Weather Update: दिल्ली-NCR में भारी बारिश और ठंडी हवाओं से मौसम हुआ सुहावना, कई इलाकों में भरा पानी

Delhi Weather Update: मंगलवार, 7 जुलाई को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर में मानसून ने आखिरकार अपना असर दिखाई ही दिया। दोपहर में अचानक से काले बादल छा जाने के कारण मौसम सुहावना हो गया। जिसके बाद नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम समेत एनसीआर के कई इलाकों में ठंडी हवाओं के साथ भारी बारिश देखने को मिली। बता दें कि पिछले कुछ दिनों से उमस भरी गर्मी से परेशान दिल्लीवासियों को इस बारिश ने बड़ी राहत दी है।

वहीं, भारी बारिश से दिल्ली NCR के कई सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई। जिससे लोगों का आना जाना मुश्किल हो गया है, साथ ही वाहनों की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा है।

ईस्ट ऑफ कैलाश इलाके में गाड़ियों पर गिरा पेड़

तेज हवाओं के बीच दिल्ली के अमर कॉलोनी थाना क्षेत्र के ईस्ट ऑफ कैलाश इलाके में एक बड़ा पेड़ गाड़ियों पर गिर गया है। इस घटना में कम से कम 4-5 गाड़ियों को नुकसान हुआ है। हालांकि, इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है, लेकिन गाड़ियों के मालिकों को बड़ा नुकसान हुआ है।

गुरुग्राम में बारिश से जलभराव

गुरुग्राम में मूसलाधार बारिश ने उमस भरी गर्मी से राहत दी है। यहां के कई इलाकों में बारिश की वजह से पानी भर गया है। जिससे वाहनों की रफ्तार पर असर पड़ा है।

मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो दिन आंधी-बारिश की वजह से तापमान में गिरावट आ सकती है। जिससे लोगों को गर्मी से राहत रहेगी। बता दें कि पिछले करीब हफ्तेभर से हल्की वर्षा और आसमान में बादल छाए रहने के साथ तेज धूप की वजह से उमस भरी गर्मी का असर बना हुआ है।

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