Monsoon Watch 4 July: अगले 4 दिनों में आक्रामक होकर इस ओर बढ़ेगा मानसून, IMD ने इन इलाकों में तूफानी बारिश का अलर्ट दिया

देश भर में दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शनिवार को जानकारी दी है कि अगले चार दिनों के भीतर मानसून आक्रामक रूप दिखाते हुए उत्तर अरब सागर, गुजरात के कुछ और हिस्सों, पंजाब और हरियाणा के बचे हुए इलाकों और राजस्थान के कई अन्य हिस्सों को पूरी तरह कवर कर लेगा। मौसम विभाग के मुताबिक वर्तमान में उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक सुस्पष्ट निम्न दाब क्षेत्र बना हुआ है। इस मजबूत मौसमी सिस्टम के प्रभाव से अगले 4-5 दिनों के दौरान देश के मध्य भागों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के लगातार सक्रिय चरण में रहने की संभावना है। इसके कारण कई राज्यों में गरज-चमक, आंधी और मूसलाधार बारिश का दौर देखने को मिलेगा।

इन 5 क्षेत्रों में अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट

आईएमडी के विशेष बुलेटिन के मुताबिक, देश के कई हिस्सों में बादलों का रौद्र रूप दिखेगा जहां छिटपुट स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की आशंका है-

  • कोंकण एवं गोवा और गुजरात क्षेत्र: 4 से 7 जुलाई के दौरान अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी।
  • मध्य महाराष्ट्र: 4 से 6 जुलाई के बीच रिकॉर्डतोड़ बारिश की संभावना।
  • सौराष्ट्र और ओडिशा: 4 और 5 जुलाई को छिटपुट इलाकों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट।
  • पश्चिम मध्य प्रदेश: 4 जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश दर्ज की जा सकती है।
  • उत्तर-पश्चिम भारत: दिल्ली-हरियाणा में व्यापक बारिश, यूपी में भारी वर्षा

उत्तर प्रदेश: पश्चिमी यूपी में 4-7 जुलाई और पूर्वी यूपी में 4-6 जुलाई के दौरान छिटपुट से बिखरी हुई बारिश होगी। इसके बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश में 7 से 10 जुलाई और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 8 से 10 जुलाई के दौरान मौसम बदलेगा और व्यापक से बहुत व्यापक बारिश होगी। पश्चिमी यूपी में 9-10 जुलाई और पूर्वी यूपी में 8-10 जुलाई के बीच भारी बारिश का अलर्ट है। 4 जुलाई और 7-8 जुलाई को दोनों क्षेत्रों में बिजली कड़कने की चेतावनी दी गई है।

दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब: इन क्षेत्रों में 4-5 जुलाई और 9-10 जुलाई को छिटपुट बारिश होगी लेकिन 6 से 8 जुलाई के बीच व्यापक बारिश के साथ भारी बौछारें पड़ने की उम्मीद है। इसके साथ ही 4-5 जुलाई को गरज-चमक के साथ 40-50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी।

राजस्थान: पूर्वी राजस्थान में 5-9 जुलाई के दौरान व्यापक बारिश होगी। यहां 4-7 जुलाई और 9 जुलाई को बहुत भारी बारिश और 8 और 10 जुलाई को भारी बारिश का अनुमान है। पश्चिमी राजस्थान में 4-10 जुलाई तक छिटपुट बारिश और 4-6 जुलाई के बीच 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से धूलभरी आंधी चलेगी। ये 7-10 जुलाई को 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार में बदलेगी। पश्चिमी राजस्थान में 4 जुलाई और 6-8 जुलाई को भारी बारिश होगी।

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश: दोनों राज्यों में 4 से 10 जुलाई तक व्यापक बारिश जारी रहेगी। उत्तराखंड में 4 जुलाई और 6-10 जुलाई को भारी बारिश जबकि 5 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी। हिमाचल प्रदेश में 4-5 जुलाई और 8-9 जुलाई को भारी बारिश जबकि 6-7 जुलाई को बहुत भारी बारिश की संभावना है।

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख: यहां 4-5 जुलाई को छिटपुट और 6-9 जुलाई को व्यापक बारिश होगी। पूरे हफ्ते (4-10 जुलाई) यहां 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से आंधी और बिजली गिरने का अलर्ट है।

मध्य और पूर्वी भारत: एमपी में आफत की बारिश, झारखंड में कड़केगी बिजली

मध्य प्रदेश: पूरे राज्य में 4 से 10 जुलाई तक व्यापक बारिश का दौर चलेगा। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 4 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश के बाद 5-8 जुलाई तक बहुत भारी बारिश होगी। पूर्वी मध्य प्रदेश में 4-8 जुलाई के बीच बहुत भारी और 9-10 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट है। दोनों हिस्सों में 4-8 जुलाई तक 40-50 किमी प्रति घंटे की हवाएं चलेंगी।

छत्तीसगढ़ और विदर्भ: दोनों क्षेत्रों में 4-10 जुलाई तक व्यापक बारिश होगी। छत्तीसगढ़ और विदर्भ में 4-5 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी। छत्तीसगढ़ में 6-7 और 9-10 जुलाई को भारी बारिश का अनुमान है।

बिहार: बिहार में 4 से 10 जुलाई के दौरान छिटपुट से लेकर बिखरी हुई बारिश होगी। हालांकि 6-7 जुलाई और 10 जुलाई को बिहार में भारी बारिश का अलर्ट है। 4-8 जुलाई के दौरान यहां 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से हवाएं चलेंगी।

झारखंड: यहाँ 4-10 जुलाई तक व्यापक बारिश होगी। 4 जुलाई को झारखंड में मध्यम से तीव्र बिजली गिरने का विशेष अलर्ट दिया गया है। यहां 5-7 जुलाई के बीच भारी बारिश और 4-8 जुलाई तक 40-50 किमी प्रति घंटे की आंधी चल सकती है।

पश्चिम बंगाल और ओडिशा: ओडिशा में 4-5 जुलाई को अत्यंत भारी, 6-7 जुलाई को बहुत भारी और 10 जुलाई को भारी बारिश होगी। गंगीय पश्चिम बंगाल में 4 व 6 जुलाई को भारी और 5 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 9 जुलाई को बहुत भारी बारिश हो सकती है।

पश्चिमी भारत: कोंकण, गोवा और गुजरात में बाढ़ जैसे हालात

गुजरात, कोंकण और गोवा: कोंकण और गोवा में 4-10 जुलाई तथा गुजरात क्षेत्र में 4-8 जुलाई तक व्यापक बारिश जारी रहेगी। सौराष्ट्र और कच्छ में 4-5 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश के बाद 6 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अलर्ट है।

महाराष्ट्र (मध्य महाराष्ट्र और मराठावाड़ा): मध्य महाराष्ट्र में 4-6 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश के बाद 7 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी। मराठावाड़ा में 4-5 जुलाई को भारी बारिश और 4-6 जुलाई के दौरान तेज आंधी-बिजली (40-50 किमी प्रति घंटे की हवाएं) चलने का अलर्ट है।

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत: तेलंगाना में 50-60kmph का बवंडर

तेलंगाना: तेलंगाना में 4 जुलाई को 50-60 किमी प्रति घंटे (झोंके 70 किमी प्रति घंटे तक) की रफ़्तार से तीव्र थंडरस्कॉल चलने की चेतावनी दी गई है। यहां 4 जुलाई को बहुत भारी बारिश और 5 जुलाई को भारी बारिश होगी।

कर्नाटक: तटीय कर्नाटक में 4-10 जुलाई तक बहुत भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में 4 जुलाई और 7-8 जुलाई को तथा दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में 4-8 जुलाई के दौरान बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। कर्नाटक के सभी हिस्सों में 4-7 जुलाई के दौरान तेज सतही हवाएं और आंधी चलेगी।

केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु: केरल और माहे में 6-7 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी। तटीय आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में 4 जुलाई को भारी बारिश और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से आंधी का अलर्ट है। रायलसीमा में 4-10 जुलाई के दौरान तेज सतही हवाएं चलेंगी।

उत्तर-पूर्व भारत: सातों राज्यों में भारी वर्षा

असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश: असम और मेघालय में 7-9 जुलाई और अरुणाचल प्रदेश में 7-8 जुलाई को व्यापक बारिश होगी। असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में 4 से 10 जुलाई के दौरान अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश का अलर्ट जारी रहेगा।

नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा: इन राज्यों में 4 से 10 जुलाई के दौरान व्यापक बारिश होगी। इस पूरे हफ्ते (4-10 जुलाई) यहाँ भारी बारिश और 4-8 जुलाई के बीच गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका है।

भारी उमस और गर्मी की चेतावनी

बारिश के बीच कुछ राज्यों में भारी उमस लोगों को परेशान करेगी। पूर्वी उत्तर प्रदेश और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा में 4 और 5 जुलाई को मौसम बेहद गर्म और उमस भरा रहने की संभावना है। असम और मेघालय में 4 से 7 जुलाई के दौरान लोगों को तीखी गर्मी और उमस भरी परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा।

कल का मौसम 5 जुलाई: राजस्थान से MP तक आंधी-तूफान, IMD ने इन 20+ राज्यों में जारी किया भारी बारिश का अलर्ट

देश भर में दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon 2026) अपनी पूरी रफ्तार पकड़ चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक मानसून की उत्तरी सीमा फिलहाल जामनगर, उदयपुर, अजमेर, झुंझुनू, हिसार, बठिंडा से होकर गुजर रही है। अगले 4 दिनों के भीतर मानसून के उत्तरी अरब सागर, गुजरात, राजस्थान के कुछ और हिस्सों तथा पंजाब व हरियाणा के बाकी बचे इलाकों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं। इस सक्रिय मानसूनी सिस्टम के प्रभाव से मौसम विभाग ने 5 जुलाई को देश के 20 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भारी से अत्यंत भारी बारिश, आकाशीय बिजली गिरने और तेज आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया है।

इन 4 राज्यों में अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट

मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक 5 जुलाई को देश के चार राज्यों में बादलों का रौद्र रूप देखने को मिलेगा। यहां छिटपुट स्थानों पर मूसलाधार से लेकर अत्यधिक भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है-

  • गुजरात
  • कोंकण और गोवा
  • मध्य महाराष्ट्र
  • ओडिशा

मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत इन राज्यों में बहुत भारी बारिश की चेतावनी

आईएमडी के मुताबिक, 5 जुलाई को कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है:

  • मध्य प्रदेश
  • पूर्वी राजस्थान
  • छत्तीसगढ़
  • विदर्भ
  • उत्तराखंड
  • गंगीय पश्चिम बंगाल
  • तटीय कर्नाटक
  • दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक

इन 10 राज्यों/क्षेत्रों में भारी बारिश का अलर्ट

देश के कई अन्य हिस्सों में भी 5 जुलाई को भारी बारिश का दौर देखने को मिलेगा:

उत्तर प्रदेश और बिहार से सटे राज्य झारखंड में भारी बारिश होगी। हिमाचल प्रदेश में भी भारी बारिश का अलर्ट है। केरल और माहे, तेलंगाना और उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में भारी बारिश होगी। महाराष्ट्र के मराठावाड़ा क्षेत्र में भारी बारिश का अलर्ट है। असम और मेघालय के साथ-साथ नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भारी बारिश का अनुमान है।

दिल्ली-पंजाब से राजस्थान और एमपी तक आंधी-तूफान और बिजली का कहर

मौसम विभाग ने देश के बड़े हिस्से में बारिश के साथ-साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया है।

उत्तर-पश्चिम भारत: हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, तथा जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में गरज-चमक के साथ 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ चलने और बिजली गिरने की आशंका है। उत्तराखंड में भी बिजली गिरने की चेतावनी है।

मध्य और पूर्वी भारत: मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र के मध्य महाराष्ट्र व मराठावाड़ा क्षेत्र, झारखंड, और पश्चिम बंगाल व सिक्किम में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं और बिजली कड़कने का अलर्ट है। बिहार और विदर्भ में 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है।

दक्षिण भारत और अन्य क्षेत्र: तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में भी 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी और बिजली गिरने का अलर्ट है। इसके अलावा गुजरात क्षेत्र में भी बिजली गिरने की संभावना है।

कर्नाटक, केरल और रायलसीमा में तेज सतही हवाएं

बारिश और आंधी के अलावा, आईएमडी ने कर्नाटक, केरल व माहे और रायलसीमा में अलग-अलग स्थानों पर बेहद मजबूत सतही हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है।

उत्तर-पूर्व और यूपी में भारी उमस, अरुणाचल में गर्म दिन का अलर्ट

मौसम के इस उतार-चढ़ाव के बीच कुछ राज्यों को भारी उमस और गर्मी का सामना करना पड़ेगा। असम व मेघालय, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा में अलग-अलग स्थानों पर मौसम काफी गर्म और उमस भरा रहने की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश में मौसम विभाग ने कुछ जगहों पर गर्म दिन रहने की आशंका जताई है।

समंदर में जाने वाले मछुआरों के लिए चेतावनी

अरब सागर: सोमालिया तट, ओमान तट, दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के कुछ हिस्सों, उत्तरी अरब सागर के कुछ हिस्सों और मध्य अरब सागर के अधिकांश हिस्सों में 45-55 किमी प्रति घंटे (झोंके 65 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलेंगी। यही स्थिति महाराष्ट्र और गोवा के तटों पर भी रहेगी। इसके अलावा गुजरात, कोंकण व गोवा, कर्नाटक, केरल के तटों और लक्षद्वीप क्षेत्र व उससे सटे पूर्व-मध्य और उत्तर-पूर्वी अरब सागर में 40-50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से मौसम खराब रहेगा।

बंगाल की खाड़ी: मध्य बंगाल की खाड़ी के हिस्सों में 45-55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी। वहीं गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा के तटों, आंध्र प्रदेश, उत्तरी व मध्य बंगाल की खाड़ी और उससे सटे दक्षिणी बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों तथा अंडमान सागर में 40-50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से तूफानी मौसम रहने का अनुमान है। मछुआरों को इन इलाकों में न जाने की सलाह दी गई है।

India Heavy Rain Alert: दिल्ली से यूपी-बिहार तक इन 25+ राज्यों में हैवी बारिश का अलर्ट, आंधी-तूफान और आएगा 50-60kmph स्पीड वाला बवंडर

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक देश भर में दक्षिण-पश्चिम मानसून का असर अब बेहद व्यापक और आक्रामक हो चुका है। उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक वेल-मार्क लो-प्रेशर एरिया बना हुआ है। इसके अगले 3 दिनों के दौरान उत्तर ओडिशा और उत्तर छत्तीसगढ़ की ओर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने की संभावना है। इस सिस्टम के प्रभाव से अगले 4-5 दिनों तक देश के मध्य हिस्सों में मानसून बेहद सक्रिय चरण में रहेगा।

मौसम विभाग ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित देश के 25 से अधिक राज्यों में भारी से अत्यंत भारी बारिश और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार वाले तूफानी बवंडर का अलर्ट जारी किया है। मानसून की उत्तरी सीमा (NLM) फिलहाल जामनगर, उदयपुर, अजमेर, झुंझुनू, हिसार और बठिंडा से होकर गुजर रही है, और अगले 4 दिनों में इसके पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के बचे हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं।

इन राज्यों में अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट

मौसम विभाग के मुताबिक कुछ राज्यों में मानसून का सबसे भयंकर रूप देखने को मिलेगा। यहां मूसलाधार से अत्यधिक भारी बारिश का रेड/ऑरेंज अलर्ट है:

  • कोंकण और गोवा व गुजरात क्षेत्र: 4 से 7 जुलाई के दौरान अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश की आशंका।
  • मध्य महाराष्ट्र: 4 से 6 जुलाई के बीच अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट।
  • सौराष्ट्र और ओडिशा: 4 और 5 जुलाई को छिटपुट स्थानों पर मूसलाधार से अत्यंत भारी बारिश।
  • पश्चिमी मध्य प्रदेश: 4 जुलाई को कुछ हिस्सों में अत्यंत भारी बारिश का अनुमान।
  • उत्तर-पश्चिम भारत: दिल्ली, यूपी, पंजाब और हरियाणा में आंधी और बारिश का दौर

दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब: इन राज्यों में 4 और 5 जुलाई तथा फिर 9-10 जुलाई को छिटपुट बारिश होगी। 6 से 8 जुलाई के दौरान व्यापक से बहुत व्यापक बारिश और 6-8 जुलाई के बीच ही भारी बारिश का दौर आएगा। 4 और 5 जुलाई को यहाँ 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी और बिजली चमकने का अलर्ट है।

उत्तर प्रदेश: पश्चिमी यूपी में 4-7 जुलाई तक और पूर्वी यूपी में 4-6 जुलाई तक छिटपुट बारिश होगी। इसके बाद पूर्वी यूपी में 7 से 10 जुलाई और पश्चिमी यूपी में 8 से 10 जुलाई के दौरान व्यापक वर्षा होगी। पश्चिमी यूपी में 9-10 जुलाई और पूर्वी यूपी में 8-10 जुलाई के बीच भारी बारिश का अलर्ट है। 4 जुलाई तथा 7-8 जुलाई को दोनों हिस्सों में बिजली कड़कने की चेतावनी दी गई है।

राजस्थान: पूर्वी राजस्थान में 4 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी जबकि 5 से 9 जुलाई तक व्यापक बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। पश्चिमी राजस्थान में 4 से 10 जुलाई तक छिटपुट बारिश और 4-6 जुलाई के दौरान 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से धूलभरी आंधी/बवंडर का अलर्ट है। पश्चिमी राजस्थान में 6-8 जुलाई और पूर्वी राजस्थान में 8 व 10 जुलाई को भारी बारिश होगी।

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड: दोनों पहाड़ी राज्यों में 4 से 10 जुलाई के दौरान व्यापक बारिश जारी रहेगी। उत्तराखंड में 4 जुलाई और 6-10 जुलाई के बीच भारी बारिश होगी जबकि 5 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। हिमाचल प्रदेश में 6-7 जुलाई को बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है।

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख: यहां 4-5 जुलाई को छिटपुट और 6-9 जुलाई के दौरान व्यापक बारिश के साथ ही पूरे हफ्ते (4-10 जुलाई) 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से हवाएं और बिजली गिरने की आशंका है।

मध्य भारत: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में भारी तबाही की आशंका

मध्य प्रदेश: पूरे मध्य प्रदेश (पूर्वी और पश्चिमी) में 4 से 10 जुलाई के दौरान व्यापक बारिश होगी। इसके साथ ही 4-8 जुलाई के दौरान 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से तूफानी हवाएं और बिजली कड़कने का अलर्ट है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 4 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश और 5-8 जुलाई के बीच बहुत भारी बारिश होगी। पूर्वी मध्य प्रदेश में 4-8 जुलाई के दौरान बहुत भारी बारिश की चेतावनी है।

छत्तीसगढ़ और विदर्भ: छत्तीसगढ़ में 4-5 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी और 6-7 व 9-10 जुलाई को भारी बारिश का अनुमान है। विदर्भ में 4-5 जुलाई को बहुत भारी बारिश और 6 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट है। इन क्षेत्रों में 30-50 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से हवाएं चलेंगी।

पूर्वी भारत: बिहार-झारखंड और बंगाल में मौसम का मिजाज

बिहार: बिहार में 4 से 10 जुलाई के दौरान छिटपुट से लेकर बिखरी हुई बारिश दर्ज की जाएगी। 6, 7 और 10 जुलाई को बिहार के कुछ हिस्सों में भारी बारिश का अलर्ट है। 4 से 8 जुलाई के दौरान बिहार में 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं और आंधी चलने की आशंका है।

झारखंड: झारखंड में 4 से 10 जुलाई तक व्यापक बारिश का अनुमान है। 4 जुलाई को झारखंड में मध्यम से तीव्र बिजली गिरने का विशेष अलर्ट है। यहां 5-7 जुलाई के बीच भारी बारिश और 4-8 जुलाई तक 40-50 किमी प्रति घंटे की आंधी चल सकती है।

पश्चिम बंगाल और सिक्किम: गंगीय पश्चिम बंगाल में 4 और 6 जुलाई को भारी बारिश और 5 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 6-8 जुलाई को भारी और 9 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी। इन क्षेत्रों में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी।

पश्चिमी भारत: कोंकण, गोवा और गुजरात में आफत की बारिश

कोंकण, गोवा और गुजरात: कोंकण व गोवा में 4-10 जुलाई और गुजरात क्षेत्र में 4-8 जुलाई तक व्यापक बारिश होगी। सौराष्ट्र और कच्छ में 4-5 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश के बाद 6 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अलर्ट है।

मध्य महाराष्ट्र और मराठावाड़ा: मध्य महाराष्ट्र में 4-6 जुलाई को अत्यंत भारी और 7 जुलाई को बहुत भारी बारिश की चेतावनी है। मराठावाड़ा में 4-5 जुलाई को भारी बारिश और 4-6 जुलाई के दौरान तेज आंधी-बिजली का अलर्ट रहेगा।

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत: तेलंगाना में 50-60kmph का थंडरस्कॉल और भारी बारिश

तेलंगाना: तेलंगाना में 4 जुलाई को 50-60 किमी प्रति घंटे (झोंके 70 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से तीव्र थंडरस्कॉल यानी बवंडर आने की सख्त चेतावनी दी गई है। 4 जुलाई को यहाँ बहुत भारी बारिश और 5 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट है।

कर्नाटक: तटीय, उत्तरी आंतरिक और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में 4 से 7 जुलाई के दौरान बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। तटीय कर्नाटक में 4-10 जुलाई तक लगातार भारी से बहुत भारी बारिश जारी रहेगी। इन क्षेत्रों में तेज सतही हवाएं भी चलेंगी।

केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु: केरल और माहे में 4-5 जुलाई को भारी और 6-7 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी। तटीय आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में 4 जुलाई को भारी बारिश और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से आंधी-तूफान का अलर्ट है।

उत्तर-पूर्व भारत: असम, मेघालय और नागालैंड में भारी वर्षा का अनुमान

असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश: असम और मेघालय में 7-9 जुलाई के दौरान व्यापक बारिश होगी। 4-10 जुलाई के बीच लगातार भारी बारिश का अलर्ट है। अरुणाचल प्रदेश में 6-10 जुलाई के दौरान भारी बारिश की संभावना है।

नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा: इन राज्यों में 4 से 10 जुलाई के दौरान व्यापक बारिश और इस पूरे हफ्ते भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। 4-8 जुलाई के बीच गरज-चमक का अलर्ट है।

उमस और गर्मी की चेतावनी

भारी बारिश के अलर्ट के बीच मौसम विभाग ने कुछ इलाकों में असहज करने वाले मौसम की भी चेतावनी दी है। 4 और 5 जुलाई को पूर्वी उत्तर प्रदेश और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा में गर्म और उमस भरा मौसम रहने की संभावना है। वहीं असम और मेघालय में 4 से 7 जुलाई के दौरान भी लोगों को भारी उमस और गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।

Cockroaches removal tips: मानसून में कॉकरोच का आतंक खत्म करेंगे ये 5 घरेलू उपाय, किचन रहेगा साफ

बारिश का मौसम अपने साथ ठंडक तो लाता है, लेकिन नमी बढ़ते ही घरों में कॉकरोच और दूसरे कीड़े-मकौड़ों की परेशानी भी बढ़ जाती है। खासकर किचन में इनका दिखना चिंता की वजह बन जाता है, क्योंकि ये खाने-पीने की चीजों को दूषित कर सकते हैं। ऐसे में हर बार केमिकल स्प्रे का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। घर में मौजूद कुछ आसान चीजों की मदद से भी कॉकरोच को दूर रखा जा सकता है। अगर आप भी मानसून में इस समस्या से परेशान हैं, तो कुछ सरल घरेलू उपाय अपनाकर किचन को साफ-सुथरा और कॉकरोच मुक्त रखने में मदद मिल सकती है।

बारिश में क्यों बढ़ जाते हैं कॉकरोच?

मानसून के दौरान नालियों, सीलन और नमी की वजह से कॉकरोच तेजी से घरों में घुसने लगते हैं। खासकर किचन में खाना और पानी आसानी से मिलने के कारण ये सबसे ज्यादा वहीं दिखाई देते हैं।

आटा और बोरिक पाउडर का आसान उपाय

एक कटोरी आटे में 2 चम्मच चीनी, 1 चम्मच हल्दी और 2 चम्मच बोरिक पाउडर मिलाकर पेस्ट तैयार करें। इसे किचन के कोनों, स्लैब के किनारों, दीवारों की दरारों और उन जगहों पर लगाएं, जहां से कॉकरोच आते हैं। इसकी गंध और मिश्रण कॉकरोच को दूर रखने में मदद कर सकता है।

नीम का स्प्रे करेगा कमाल

नीम का तेल या नीम का पानी एक स्प्रे बोतल में भर लें और किचन समेत घर के कोनों में छिड़काव करें। नीम की तेज खुशबू और प्राकृतिक गुण कॉकरोच के साथ कई दूसरे कीड़ों को भी दूर रखने में मदद करते हैं।

तेजपत्ता भी है असरदार

कुछ तेजपत्तों को पीसकर गर्म पानी में मिला लें। इस मिश्रण को ठंडा होने के बाद घर के उन हिस्सों में स्प्रे करें, जहां कॉकरोच ज्यादा नजर आते हैं। तेजपत्ते की महक इन्हें दूर रखने का प्राकृतिक तरीका मानी जाती है।

लौंग की खुशबू से भागेंगे कॉकरोच

लौंग को हल्का पीसकर किचन और घर के कोनों में छिड़क दें। इसकी तेज सुगंध कॉकरोच को पसंद नहीं होती, इसलिए वे इन जगहों से दूर रहने लगते हैं। इससे अन्य छोटे कीड़े-मकौड़ों की समस्या भी कम हो सकती है।

साफ-सफाई है सबसे बड़ा बचाव

अगर आप चाहते हैं कि कॉकरोच बार-बार घर में न आएं, तो किचन को हमेशा साफ रखें। रातभर जूठे बर्तन सिंक में न छोड़ें, खाने की चीजों को ढककर रखें और डस्टबिन को नियमित रूप से खाली व साफ करें। छोटी-छोटी सफाई की आदतें कॉकरोच की समस्या को काफी हद तक कम कर सकती हैं।

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मानसून में पहाड़ों की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है, लेकिन इसी मौसम में कुछ हिल स्टेशन सबसे ज्यादा सेंसेटिव भी हो जाते हैं। तेज बारिश, लैंडस्लाइड, सड़क बंद होने और घने कोहरे जैसी समस्याएं ट्रैवल को मुश्किल बना सकती हैं। ऐसे में सिर्फ खूबसूरत नजारों को देखकर ट्रिप प्लान करना सही नहीं होता, बल्कि सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। आइए जानते हैं उन हिल स्टेशनों के बारे में, जहां मानसून में जाने से पहले अच्छी तरह सोच-समझकर योजना बनानी चाहिए:

1. नैनीताल, उत्तराखंड

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नैनीताल अपनी खूबसूरत झीलों, पहाड़ों और ठंडे मौसम के लिए मशहूर है, लेकिन मानसून के दौरान यहां लगातार बारिश होने से लैंडस्लाइड, सड़क धंसने और पत्थर गिरने का खतरा बढ़ जाता है। कई बार तेज बारिश के कारण रास्ते बंद हो जाते हैं और ट्रैफिक घंटों तक रुका रहता है। झील के आसपास की सड़कें भी फिसलन भरी हो जाती हैं, जिससे पैदल चलने और वाहन चलाने में सावधानी बरतनी पड़ती है।

2. दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल

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दार्जिलिंग अपने चाय बागानों, टॉय ट्रेन और कंचनजंगा के शानदार नजारों के लिए पॉपुलर है। हालांकि बारिश के मौसम में यहां लगातार तेज बारिश होती है, जिससे पहाड़ी रास्तों पर लैंडस्लाइड और सड़क बंद होने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। घना कोहरा भी विजिबिलिटी कम कर देता है, जिससे ट्रैवल मुश्किल हो सकती है। कई बार ट्रेन और सड़क मार्ग भी प्रभावित होते हैं, इसलिए रोड कंडीशन चेक कर लें।

3. शिमला, हिमाचल प्रदेश

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शिमला पूरे साल टूरिस्ट से भरा रहता है, लेकिन मानसून में यहां की पहाड़ियों पर लैंडस्लाइड और पेड़ गिरने का खतरा बढ़ जाता है। कई जगहों पर सड़कें टूट जाती हैं और लंबा ट्रैफिक जाम लग सकता है। लगातार बारिश की वजह से पहाड़ी रास्ते फिसलन भरे हो जाते हैं। अगर इस मौसम में शिमला जाएं, तो दिन के समय ट्रैवल करें और रात में पहाड़ी सड़कों पर ड्राइव करने से बचें।

4. मसूरी, उत्तराखंड

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मसूरी को “पहाड़ों की रानी” कहा जाता है, लेकिन मानसून में यहां का मौसम कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है। भारी बारिश के कारण सड़कों पर पत्थर गिर सकते हैं और भूस्खलन का खतरा बना रहता है। कैमल्स बैक रोड और कई व्यू पॉइंट्स के रास्ते फिसलन भरे हो जाते हैं। ऐसे में ट्रेकिंग या लंबी वॉक करते समय विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

5. गंगटोक, सिक्किम

Dehradun and Mussoorie during monsoon season

गंगटोक अपनी नेचुरल ब्यूटी और बर्फीली चोटियों के लिए पॉपुलर है। मानसून में यहां तेज बारिश के कारण पहाड़ी रास्तों पर लैंडस्लाइड का रिस्क बढ़ जाता हैं। कई बार नाथुला पास और आसपास के रास्ते भी अस्थायी रूप से बंद कर दिए जाते हैं। धुंध और बारिश की वजह से ड्राइविंग करना भी मुश्किल हो सकता है। इसलिए ट्रैवल से पहले स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी जरूर देखें।

6. मनाली, हिमाचल प्रदेश

Manali Images – Browse 13,682 Stock Photos, Vectors, and Video | Adobe Stock

मनाली एडवेंचर और नेचर लवर्स की पसंदीदा जगह है, लेकिन मानसून में यहां की नदियों का वाटरलेवल बढ़ जाता है और पहाड़ों पर लैंडस्लाइड का रिस्क रहता है। कई बार मनाली जाने वाले हाईवे भी प्रभावित हो जाते हैं। नदी किनारे कैंपिंग या तेज बहाव वाले क्षेत्रों में जाना इस मौसम में सेफ नहीं माना जाता। मौसम की जानकारी लेकर ही ट्रैवल करें।

7. मुन्नार, केरल

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मुन्नार बारिश में बेहद खूबसूरत दिखता है, लेकिन लगातार बारिश के कारण यहां पहाड़ी इलाकों में लैंडस्लाइड का रिस्क बढ़ जाता है। चाय बागानों के बीच बने रास्ते फिसलन भरे हो जाते हैं और कई जगहों पर पानी भर सकता है। घना कोहरा भी विजिबिलिटी कम कर देता है। अगर मानसून में यहां जाएं, तो सेफ होटल में ठहरें और मौसम खराब होने पर अनावश्यक ट्रैवल से बचें।

 

इन 3 बातों का रखें ध्यान ट्रिप पर जाने से पहले

1. मौसम और ट्रैवल अपडेट जरूर देखें

मानसून में महाबलेश्वर में कहाँ ठहरें

ट्रैवल शुरू करने से पहले वेदर फॉरकास्ट, सड़कों की कंडीशन जरूर देखें। अगर भारी बारिश या लैंडस्लाइड की चेतावनी हो, तो ट्रिप टालना बेहतर होता है।

2. सही सामान साथ रखें

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रेनकोट, वाटरप्रूफ जैकेट, मजबूत ग्रिप वाले जूते, टॉर्च, पावर बैंक, जरूरी दवाइयां और ज्यादा कपड़े हमेशा साथ रखें। इससे अचानक मौसम खराब होने पर भी परेशानी कम होगी।

3. सुरक्षित ट्रैवल करें

The best monsoon treks in India, as recommended by adventure experts | Condé Nast Traveller India

बारिश के दौरान रात में पहाड़ी रास्तों पर ट्रैवल करने से बचें। तेज बहाव वाली नदियों, झरनों और लैंडस्लाइड वाले एरिया के पास न जाएं। हमेशा सेफ रोड चुनें और वहां के लोकल लोगों या प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

मानसून में पहाड़ों की खूबसूरती जितनी अट्रैक्टिव होती है, उतनी ही सावधानी भी इस मौसम में जरूरी होती है। सही जानकारी लेकर आप अपनी ट्रिप को सेफ और यादगार बना सकते हैं। अगर आप भी बारिश के मौसम में किसी हिल स्टेशन जाने की प्लानिंग बना रहे हैं, तो जल्दबाज़ी करने के बजाय पहले पूरी तैयारी करें। थोड़ी-सी सतर्कता आपकी ट्रिप को परेशानी से बचाकर खूबसूरत यादों में बदल सकती है।

मानसून में खुला जन्नत का दरवाजा देखिये हरियाली की चादर ओढे, इंडिया के स्कॉटलैंड और स्विट्ज़रलैंड!

मानसून का मौसम भारत की खूबसूरती को एक अलग ही रंग दे देता है। बादलों से ढकी पहाड़ियां, हरे-भरे जंगल और गिरते झरने कई जगहों को यूरोप जैसा बना देते हैं। भारत में ऐसी कई जगहें हैं जहां का नजारा देखकर लगता है जैसे हम किसी विदेशी देश में आ गए हों। यहां का मौसम, प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण हर ट्रैवलर को अट्रैक्ट करता है। आइये जानते है उन जगहों के बारे में भारत का स्वर्ग है मानसून सीजन में:

कूनूर, तमिलनाडु — शांत पहाड़ी जगह

Coonoor - Tourist Places & Top Things to Do in 2026

कूनूर ऊटी से ज्यादा शांत और नेचुरल जगह है जहां चाय बागानों के बीच सुकून मिलता है। मॉनसून में यहां की हरियाली बहुत गहरी और ताज़गी भरी लगती है। यह जगह कम भीड़ और ज्यादा नेचर के लिए जानी जाती है। होटल ₹1,500 से ₹5,000 प्रति रात और खाना ₹400 से ₹1,000 प्रति दिन होता है। डॉल्फिन नोज व्यू यहां का सबसे खूबसूरत पॉइंट है।

महाबलेश्वर, महाराष्ट्र — स्विस जैसा नज़ारा

Sanskar

महाबलेश्वर झरनों, घाटियों और स्ट्रॉबेरी फार्म के लिए बहुत मशहूर है। मॉनसून में यहां हरियाली और बढ़ जाती है और पूरा इलाका बहुत सुंदर लगने लगता है। यह जगह फैमिली और कपल ट्रिप दोनों के लिए बेस्ट है। रिसॉर्ट ₹2,000 से ₹8,000 प्रति रात और खाना ₹500 से ₹1,500 प्रति दिन होता है। एलेफैंट्स हेड पॉइंट यहां का सबसे पॉपुलर व्यू है।

लैंसडाउन, उत्तराखंड — शांत और साफ हवा

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लैंसडाउन भीड़ से दूर एक शांत और साफ हवा वाली जगह है। मॉनसून में यहां की हरियाली और बादल इसे बहुत खूबसूरत बना देते हैं। यह जगह सेना से जुड़ी होने के कारण काफी साफ और व्यवस्थित रहती है। होटल ₹1,200 से ₹5,000 प्रति रात और खाना ₹300 से ₹1,000 प्रति दिन होता है। आर्मी म्यूजियम और ट्रेकिंग यहां के मेन अट्रैक्शन हैं।

तवांग, अरुणाचल प्रदेश — पहाड़ों का जादू

Exploring Shungatser Lake & Bumla : Hidden Gems of Tawang

तवांग ऊंचाई पर स्थित एक बेहद खूबसूरत जगह है जहां बर्फीले पहाड़ और बौद्ध संस्कृति देखने को मिलती है। मॉनसून में यहां बादलों के बीच का माहौल बहुत रहस्यमय और शांत लगता है। यह जगह एडवेंचर और स्पिरिचुअल ट्रैवल दोनों के लिए खास है। होटल ₹2,500 से ₹9,000 प्रति रात और खाना ₹600 से ₹1,800 प्रति दिन होता है। तवांग मोनेस्ट्री और सेला पास यहां के मेन अट्रैक्शन हैं।

कूर्ग, कर्नाटक — स्कॉटलैंड की फीलिंग

This may contain: a small cabin in the middle of trees with fog rolling over it's roof

कूर्ग को भारत का स्कॉटलैंड कहा जाता है क्योंकि यहां कॉफी के बागान, धुंध से ढके पहाड़ और झरनों का बेहद सुंदर नजारा मिलता है। मॉनसून में यह जगह और भी हरी-भरी हो जाती है और बादलों के बीच घूमना एक अलग ही एक्सपीरियंस देता है। यहां की ठंडी हवा और शांत माहौल मन को सुकून देता है। ठहरने के लिए होमस्टे और रिसॉर्ट ₹2,000 से ₹8,000 प्रति रात में मिल जाते हैं और खाने का खर्च लगभग ₹500 से ₹1,500 प्रति दिन होता है। यहां कूर्गी खाना और ताज़ी कॉफी का स्वाद जरूर लेना चाहिए।

मुन्नार, केरल — मिनी स्विट्जरलैंड

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मुन्नार अपनी चाय बागानों से ढकी पहाड़ियों और ठंडी हवा के लिए जाना जाता है। मॉनसून में बादलों के बीच चलना और हरियाली का नजारा इसे बेहद खास बना देता है। यहां की घाटियां और धुंध भरा मौसम बहुत रोमांटिक फील देता है। होटल और रिसॉर्ट ₹1,500 से ₹7,000 प्रति रात में मिल जाते हैं और खाने का खर्च ₹400 से ₹1,200 प्रति दिन होता है। यहां चाय म्यूजियम और एलेफैंट सफारी का एक्सपीरियंस लेना बहुत यादगार होता है।

ऊटी, तमिलनाडु — इंग्लिश गार्डन जैसी फीलिंग

Starts at ₹3,500/night* - Book United 21 Paradise in Naduvattam,Nilgiri - Best 3 Star Hotels near me in Nilgiri - Justdial

ऊटी अपनी झील, बॉटनिकल गार्डन और टॉय ट्रेन के लिए मशहूर है। मॉनसून में यहां की हरियाली और ठंडी हवा इसे और भी खूबसूरत बना देती है। यहां ब्रिटिश समय की झलक आज भी देखने को मिलती है। ठहरने का खर्च ₹1,800 से ₹6,000 प्रति रात और खाने का खर्च ₹400 से ₹1,200 प्रति दिन होता है। यह जगह फैमिली ट्रिप और रोड जर्नी के लिए बहुत पॉपुलर है।

शिलांग, मेघालय — ईस्ट का स्कॉटलैंड

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शिलांग में झरने, पहाड़ और धुंध भरे रास्ते इसे यूरोप जैसा फील देते हैं। मॉनसून में यहां का मौसम बहुत फिल्मी और रहस्यमय लगता है। हर तरफ हरियाली और पानी की आवाजें मन को रोक लेती हैं। यहां ठहरने का खर्च ₹1,500 से ₹6,500 प्रति रात और खाने का ₹400 से ₹1,000 प्रति दिन होता है। एलिफैंट फॉल्स और उमियम लेक यहां के मेन अट्रैक्शन हैं।

कसौली, हिमाचल प्रदेश — शांत हिल स्टेशन

Kasauli Tourism Guide – About Kasauli, Travel Info & Attractions | Trip and Tales

कसौली एक छोटा लेकिन बहुत शांत हिल स्टेशन है जहां मॉनसून में बादल और हरियाली बहुत सुंदर लगती है। यहां की सड़कों पर हल्की बारिश और ठंडी हवा एक रोमांटिक माहौल बनाती है। यह जगह भीड़ से दूर सुकून चाहने वालों के लिए परफेक्ट है। होटल ₹2,000 से ₹7,000 प्रति रात और खाना ₹500 से ₹1,200 प्रति दिन होता है। सनसेट पॉइंट और ट्रेल्स यहां बहुत फेमस हैं।

पांडिचेरी — फ्रेंच रिवेरा फील

Where to Propose on the French Riviera - AL Projects Design

पांडिचेरी में फ्रेंच आर्किटेक्चर और समुद्र का मेल इसे यूरोप जैसा बनाता है। मॉनसून में बीच और कैफे का माहौल बहुत खूबसूरत लगता है। यहां की गलियों में साइकिल चलाना और समुद्र किनारे घूमना बहुत खास एक्सपीरियंस है। ठहरने का खर्च ₹2,500 से ₹10,000 प्रति रात और खाने का ₹600 से ₹2,000 प्रति दिन होता है। कैफे हॉपिंग और बीच वॉक यहां बहुत पॉपुलर हैं।

भारत के ये सभी मानसून डेस्टिनेशन ट्रैवलर को हरियाली, बादल और झरनों का अनोखा एक्सपीरियंस कराते हैं। ये जगहें सिर्फ घूमने के लिए नहीं, बल्कि सुकून और यादगार पलों के लिए भी बेहतरीन हैं। अगर आप नेचर और शांति पसंद करते हैं तो ये ट्रिप आपके लिए परफेक्ट है। यदि आपको भी कभी मौका मिले तो अगली बार अपनी ट्रिप की प्लानिंग में इन जगहों को जरूर शामिल करें, क्योंकि यहां का एक्सपीरियंस हमेशा याद रहने वाला होता है।

कल का मौसम 4 जुलाई: राजस्थान-MP से यूपी-बिहार, बंगाल तक मौसम का रौद्र रूप, IMD ने इन 25 से ज्यादा जगहों पर भारी बारिश का अलर्ट दिया

देश भर में दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने पूरे शबाब पर आ चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक मानसून की उत्तरी सीमा इस समय जामनगर, उदयपुर, अजमेर, झुंझुनू, हिसार और बठिंडा से होकर गुजर रही है। उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तरी ओडिशा व पश्चिम बंगाल के तटों पर एक कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय है। इसके साथ ही समुद्र तल पर दक्षिण गुजरात से कर्नाटक तट तक ऑफ-शोर ट्रफ और मध्य क्षोभमंडल में पश्चिमी विक्षोभ बना हुआ है। इन मजबूत मौसमी प्रणालियों के असर की वजह से मौसम विभाग ने 4 जुलाई को देश के 25 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भारी से अत्यंत भारी बारिश और गरज-चमक के साथ तेज अंधड़ का ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया है।

5 राज्यों में अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट

मौसम विभाग के मुताबिक 4 जुलाई को देश के पांच प्रमुख राज्यों में मानसून का सबसे रौद्र रूप देखने को मिल सकता है। यहां छिटपुट स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की प्रबल आशंका है-

  • गुजरात (गुजरात क्षेत्र, सौराष्ट्र और कच्छ)
  • कोंकण और गोवा
  • मध्य महाराष्ट्र
  • ओडिशा
  • पश्चिमी मध्य प्रदेश

इन राज्यों में होगी बहुत भारी बारिश

आईएमडी के पूर्वानुमान के मुताबिक 4 जुलाई को कुछ राज्यों में मूसलाधार यानी बहुत भारी बारिश दर्ज की जाएगी:

  • पूर्वी राजस्थान
  • पूर्वी मध्य प्रदेश
  • विदर्भ
  • तेलंगाना
  • तटीय कर्नाटक

उत्तर-पश्चिम भारत: यूपी-राजस्थान में आंधी और बिजली का अलर्ट

उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी और पहाड़ी इलाकों में कल मौसम का मिजाज काफी बदला हुआ रहेगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 4 जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर गरज-चमक और बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। 4 से 7 जुलाई के दौरान यहां छिटपुट से लेकर बिखरी हुई बारिश होने का अनुमान है। पूर्वी राजस्थान में 4 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी जबकि पश्चिमी राजस्थान में भारी बारिश का अलर्ट है। इसके साथ ही पूर्वी राजस्थान में 40-50 किमी प्रति घंटे और पश्चिमी राजस्थान में 4-9 जुलाई के दौरान 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से धूलभरी हवाएं और अंधड़ चलने की आशंका है।

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और पंजाब-हरियाणा में 4 जुलाई को गरज-चमक के साथ 40-50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने का अलर्ट है। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 3-5 जुलाई के दौरान छिटपुट से बिखरी हुई बारिश होगी। हिमाचल प्रदेश में 4 जुलाई को छिटपुट बारिश होगी जबकि उत्तराखंड में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश के साथ बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है।

मध्य और पूर्वी भारत: मध्य प्रदेश-बिहार में तेज अंधड़ की चेतावनी

मध्य प्रदेश के दोनों हिस्सों (पूर्वी व पश्चिमी) और विदर्भ में 4 जुलाई को भारी से अत्यंत भारी बारिश के साथ ही 30-40 किमी प्रति घंटे (झोंके 50 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से तेज आंधी चलने और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। छत्तीसगढ़ में 4 जुलाई को छिटपुट स्थानों पर भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। बिहार में 3-9 जुलाई तक छिटपुट बारिश का दौर रहेगा लेकिन 4 जुलाई को राज्य में 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली कड़कने का अलर्ट है। झारखंड में 4 जुलाई को मध्यम से तीव्र बिजली गिरने की गतिविधि और तेज हवाएं चलने का अनुमान है।

गंगीय पश्चिम बंगाल में 4 जुलाई को भारी बारिश होगी। इसके साथ ही उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और गंगीय पश्चिम बंगाल में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से अंधड़ चलने की चेतावनी है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भारी बारिश के साथ 30-40 किमी प्रति घंटे की हवाएं चलेंगी।

उत्तर-पूर्व भारत: असम-मेघालय सहित सातों राज्यों में भारी वर्षा

उत्तर-पूर्व के राज्यों में मानसूनी हवाएं लगातार नमी ला रही हैं। असम और मेघालय में 4 जुलाई को भारी बारिश का अनुमान है। साथ ही 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा इन चारों राज्यों में 4 जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश के साथ ही गरज-चमक और बिजली गिरने की प्रबल संभावना है। अरुणाचल प्रदेश में 4 जुलाई को छिटपुट स्थानों पर बिजली गिरने और आंधी-तूफान की चेतावनी दी गई है।

दक्षिण भारत: कर्नाटक में मजबूत सतही हवाएं और मूसलाधार बारिश

तटीय कर्नाटक में बहुत भारी बारिश और आंतरिक कर्नाटक (उत्तरी व दक्षिणी) में भारी बारिश का अलर्ट है। इसके अलावा पूरे कर्नाटक में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से धूलभरी आंधी चलेगी और तटीय व आंतरिक हिस्सों में तेज सतही हवाएं चलने की चेतावनी है। केरल, माहे और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में 4 जुलाई को भारी बारिश होगी। तमिलनाडु में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। तटीय आंध्र प्रदेश में भारी बारिश होगी। रायलसीमा और लक्षद्वीप में 4 जुलाई को तेज सतही हवाएं चलेंगी जबकि तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से अंधड़ चलने का अलर्ट है।

समंदर में जाने वाले मछुआरों के लिए रेड वॉर्निंग

खराब मौसम और तूफानी हवाओं को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को समंदर में न उतरने की सख्त हिदायत दी है-

अरब सागर: सोमालिया तट, ओमान तट, दक्षिण-पश्चिम अरब सागर और मध्य व उत्तरी अरब सागर में 45-55 किमी प्रति घंटे (झोंके 65 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से डरावनी हवाएं चलेंगी। इसके अलावा गुजरात, कोंकण, गोवा, कर्नाटक और केरल के तटों तथा लक्षद्वीप क्षेत्र में 40-50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से तूफानी मौसम रहेगा।

बंगाल की खाड़ी: मध्य और उससे सटे दक्षिणी बंगाल की खाड़ी, दक्षिण श्रीलंका और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में 45-55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। वहीं गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तरी और दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटों, उत्तरी व मध्य बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में 40-50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से ऊंची लहरें और तूफानी मौसम रहने का अनुमान है।

Electric Scooter : बरसात में अपने EV scooter का कैसे रखें ध्यान, जानिए 5 iMP टिप्स

मानसून का मौसम भीषण गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन इलेक्ट्रिक स्कूटर (Electric Scooter) चलाने वालों के लिए यह अतिरिक्त सावधानी बरतने का समय भी होता है। मानसून के दौरान सही रखरखाव करने से न केवल बैटरी की उम्र बढ़ती है, बल्कि बेहतर रेंज, सुरक्षित राइडिंग और लंबे समय तक भरोसेमंद प्रदर्शन भी मिलता है। थोड़ी-सी सावधानी आपको भविष्य में होने वाले बड़े खर्च से भी बचा सकती है।

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क्यों जरूरी है बैटरी की देखभाल?

 

इलेक्ट्रिक स्कूटर की बैटरी उसकी सबसे महंगी और महत्वपूर्ण यूनिट होती है।

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लगातार बारिश, बढ़ी हुई नमी और जलभराव वाली सड़कें इलेक्ट्रिक स्कूटर की बैटरी और इलेक्ट्रिकल सिस्टम पर असर डाल सकती हैं। अगर समय रहते सही देखभाल न की जाए तो बैटरी की परफॉर्मेंस, रेंज और लाइफ कम हो सकती है। हालांकि, कुछ आसान मेंटेनेंस टिप्स अपनाकर आप अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर की बैटरी को मानसून के दौरान भी सुरक्षित और बेहतर स्थिति में रख सकते हैं।

 

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1. जलभराव वाली सड़कों पर जाने से बचें

बारिश के दौरान जहां तक संभव हो, गहरे पानी या जलभराव वाली सड़कों पर स्कूटर चलाने से बचें। अधिक पानी इलेक्ट्रिकल पार्ट्स और चार्जिंग पोर्ट को प्रभावित कर सकता है। यदि बारिश में निकलना जरूरी हो तो धीरे-धीरे चलें और वैकल्पिक रास्ता चुनने की कोशिश करें।

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2. हमेशा सूखी जगह पर चार्ज करें

इलेक्ट्रिक स्कूटर को चार्ज करते समय यह सुनिश्चित करें कि चार्जिंग एरिया पूरी तरह सूखा और सुरक्षित हो। बारिश में स्कूटर भीग गया हो तो उसे पहले अच्छी तरह सूखने दें, उसके बाद ही चार्जिंग शुरू करें। साथ ही केवल कंपनी द्वारा दिए गए या अनुशंसित चार्जर का ही उपयोग करें।

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3. स्कूटर को साफ और सूखा रखें

 

बारिश के बाद स्कूटर पर जमा कीचड़, धूल और नमी को मुलायम कपड़े से साफ करें। बैटरी हाउसिंग और वायरिंग के आसपास हाई-प्रेशर पानी का इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि इससे पानी संवेदनशील हिस्सों तक पहुंच सकता है।

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4. सही जगह पर पार्क करें

 

मानसून में स्कूटर को हमेशा ढकी हुई, सूखी और हवादार जगह पर पार्क करें। लंबे समय तक खुले में बारिश के बीच स्कूटर खड़ा रखने से बैटरी और इलेक्ट्रिकल पार्ट्स पर नमी का असर पड़ सकता है।

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5. बैटरी को पूरी तरह डिस्चार्ज न होने दें

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अगर कई दिनों तक स्कूटर का इस्तेमाल नहीं करना है तो बैटरी को पूरी तरह खाली न होने दें। समय-समय पर चार्ज लेवल जांचते रहें ताकि बैटरी स्वस्थ बनी रहे और उसकी लाइफ प्रभावित न हो।

IMD Weather Forecast Update: यूपी से बिहार तक मौसम का तांडव! इन 20 से ज्यादा राज्यों में भारी बारिश और आंधी-तूफान का अलर्ट

Aaj Ka Mausam 3 July: देश भर में मानसून की रफ्तार तेज होने के साथ ही मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 3 जुलाई के लिए अपना मॉर्निंग वेदर बुलेटिन जारी कर दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम और उससे सटे उत्तरी ओडिशा-पश्चिम बंगाल के तटों पर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके अगले 2-3 दिनों में और मजबूत होने के आसार हैं। इस मजबूत सिस्टम और कई अन्य चक्रवातीय परिसंचरणों के कारण आज देश के 20 से अधिक राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश, वज्रपात और तेज आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया गया है। उत्तर भारत के कुछ मैदानी इलाकों और पहाड़ी राज्यों में अगले दो दिनों तक बारिश थोड़ी कम रहेगी लेकिन 5 जुलाई से एक बार फिर मूसलाधार बारिश का नया दौर शुरू होगा। राहत की बात यह है कि देश के अधिकतम तापमान में 8 जुलाई तक कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है।

इन 5 राज्यों में बेहद से बेहद बारिश की चेतावनी

आईएमडी के मॉर्निंग बुलेटिन के मुताबिक आज देश के पांच प्रमुख राज्यों/क्षेत्रों में मानसून का सबसे उग्र रूप देखने को मिल सकता है। इन इलाकों में कुछ स्थानों पर बेहद भारी बारिश का अलर्ट है:

  • गुजरात
  • कोंकण और गोवा
  • मध्य महाराष्ट्र (3 से 5 जुलाई के दौरान कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश)
  • पश्चिम मध्य प्रदेश (3 और 4 जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर मूसलाधार से अत्यंत भारी बारिश)
  • ओडिशा (3 और 4 जुलाई को अत्यधिक भारी बारिश की संभावना)

यहां होगी भारी से बहुत भारी बारिश

मौसम विभाग ने देश के मध्य, पहाड़ी और दक्षिणी तटीय क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है।

मध्य और पूर्वी भारत: छत्तीसगढ़, विदर्भ और पूर्वी मध्य प्रदेश में आज बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही पूरे मध्य भारत में आज मध्यम से तीव्र आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी दी गई है।

उत्तर-पश्चिम भारत: पहाड़ी राज्यों हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में आज बहुत भारी बारिश हो सकती है। पूर्वी राजस्थान में 3 से 6 जुलाई के बीच अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश का अनुमान है।

दक्षिण भारत: केरल व माहे और तटीय कर्नाटक।

उत्तर प्रदेश और बिहार समेत इन राज्यों में भारी बारिश

देश के कई अन्य हिस्सों में भी आज भारी बारिश का दौर जारी रहेगा:

उत्तर प्रदेश और बिहार: उत्तर प्रदेश (पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्से) और बिहार में आज अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। यूपी और बिहार में 3-4 जुलाई को छिटपुट से मध्यम बारिश के बाद 5 से 7 जुलाई के बीच फिर से व्यापक बारिश का दौर आएगा।

उत्तर-पश्चिम भारत: जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में आज भारी बारिश का अलर्ट है। दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब में आज और कल (3-4 जुलाई) केवल छिटपुट बारिश होगी, लेकिन यहां 5 से 8 जुलाई के बीच भारी बारिश की वापसी होगी।

पश्चिम और पूर्वी भारत: मराठवाड़ा, गंगीय पश्चिम बंगाल और झारखंड (4 से 8 जुलाई के बीच व्यापक बारिश)।

दक्षिण भारत: आंतरिक कर्नाटक, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल।

पूर्वोत्तर भारत: असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा (इन राज्यों में 3-4 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट है)।

आंधी-तूफान का अलर्ट: 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

बारिश के साथ-साथ मौसम विभाग ने देश के अलग-अलग हिस्सों में थंडरस्टॉर्म और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है:

40-50 किमी/घंटे की रफ्तार वाली आंधी और बिजली: दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, राजस्थान, उत्तर-पश्चिम भारत के पहाड़ी क्षेत्रों, झारखंड, गंगीय पश्चिम बंगाल, गुजरात राज्य, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में आज 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने (झोंके 60 किमी/घंटे तक) और बिजली चमकने की आशंका है।

30-40 किमी/घंटे की रफ्तार वाली आंधी और बिजली: उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, विदर्भ, पूर्वी मध्य प्रदेश, असम व मेघालय, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम, पूरे कर्नाटक, केरल व माहे, लक्षद्वीप, तेलंगाना और तमिलनाडु में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।

तेज सतही हवाएं: कर्नाटक, तेलंगाना और रायलसीमा में आज तेज सतही हवाएं चलने का अनुमान है।

उमस भरा मौसम: अरुणाचल प्रदेश और असम व मेघालय के मैदानी इलाकों में 3 से 6 जुलाई के दौरान मौसम काफी गर्म और उमस भरा बना रहेगा।

मछुआरों के लिए समुद्री चेतावनी

समुद्र में उठने वाली तेज लहरों और खराब मौसम को देखते हुए मछुआरों को तटीय इलाकों में न जाने की सलाह दी गई है-

अरब सागर: गुजरात, कोंकण, गोवा और कर्नाटक तटों के साथ-साथ सोमालिया व ओमान तटों पर 45-55 किमी प्रति घंटे (झोंके 65 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने की संभावना है। केरल तट और लक्षद्वीप क्षेत्र में भी 3 से 5 जुलाई के दौरान मौसम बेहद खराब रहेगा। मछुआरों को 7 जुलाई तक इन क्षेत्रों में न जाने की हिदायत है।

बंगाल की खाड़ी: आंध्र प्रदेश, ओडिशा और गंगीय पश्चिम बंगाल के तटों सहित मध्य, उत्तरी और दक्षिणी बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में मौसम तूफानी रहेगा। यहां हवा की रफ्तार 40 से 50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे) तक पहुंच सकती है।

मौसम विज्ञानियों के मुताबिक देश के वायुमंडल में इस समय कई शक्तिशाली प्रणालियां एक साथ काम कर रही हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून की सीमा आज 3 जुलाई को पोरबंदर, वल्लभ विद्यानगर, नीमच, टोंक, भिवानी और बठिंडा से होकर गुजर रही है। अगले 2-3 दिनों में इसके गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश के बचे हुए हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और ओडिशा-पश्चिम बंगाल तट पर बना कम दबाव का क्षेत्र समुद्र तल से 7.6 किमी की ऊंचाई तक सक्रिय है। दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश और मध्य पाकिस्तान से सटे उत्तर-पश्चिम राजस्थान के ऊपर 1.5 किमी की ऊंचाई तक दो अलग-अलग चक्रवातीय हवाओं के क्षेत्र बने हुए हैं। उत्तर-पश्चिम राजस्थान से लेकर बंगाल की खाड़ी के लो-प्रेशर एरिया तक फैली मुख्य मानसूनी ट्रफ लाइन, दक्षिण गुजरात से कर्नाटक तक फैली ऑफ-शोर ट्रफ और मध्य क्षोभमंडल में सक्रिय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (जो वर्तमान में 66°E देशांतर के साथ सक्रिय है) मिलकर देश भर में इस भारी बारिश को बढ़ावा दे रहे हैं।

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Delhi Weather: दिल्ली में हीटवेव के बाद 5 दिन देरी से पहुंचा मानसून, IMD ने 5 जुलाई तक जारी किया बारिश का अलर्ट

Delhi Weather: कई दिनों की भीषण गर्मी, उमस और लू के बाद, दक्षिण-पश्चिम मानसून आखिरकार गुरुवार को दिल्ली पहुंच ही गया, जिससे लोगों को इस उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिली। बता दें कि इस बार मानसून अपने तय समय से 5 दिन देर से पहुंचा है। वहीं, राष्ट्रीय राजधानी में मानसून के पहुंचने के बाद गुरुवार की सुबह दिल्ली के कई इलाकों में हल्की बारिश हुई। पूरे दिन आसमान में बादल छाए रहे, जिससे तापमान सामान्य से काफी कम रहा। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने बताया कि मौसम की अनुकूल परिस्थितियां बनने के बाद दिल्ली में मानसून के पहुंचने की आधिकारिक घोषणा कर दी गई।

दूसरी तरफ मौसम विभाग ने शुक्रवार के लिए येलो अलर्ट जारी किया है और आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहने और मध्यम बारिश का अनुमान जताया है। इस दौरान न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में दिल्ली में मॉनसून की भारी बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है।

5 जुलाई तक और मानसून बारिश की संभावना

स्काईमेट वेदर के मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत ने बताया कि मौसम प्रणाली में बदलाव के बाद दिल्ली में बारिश की गतिविधियां फिर तेज हो सकती हैं।

पलावत ने कहा, “मानसून आमतौर पर मौसमी ट्रफ के साथ आगे बढ़ता है, जो अभी पंजाब से बंगाल की खाड़ी तक फैला हुआ है।” उन्होंने कहा कि यह मौसमी ट्रफ दक्षिण की ओर मध्य भारत की तरफ बढ़ने की उम्मीद है, जिससे मध्य भारत में बारिश बढ़ेगी, जबकि दिल्ली, पंजाब और हरियाणा सहित इंडो-गंगा के मैदानी इलाकों में बारिश की गतिविधियां कुछ समय के लिए कम हो सकती हैं।”

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि 5 जुलाई तक ट्रफ के फिर से उत्तर की ओर बढ़ने की संभावना है, जिससे दिल्ली और उत्तर-पश्चिम भारत के अन्य हिस्सों में मानसून जैसी बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है।

2021 के बाद पहली बार जुलाई में मॉनसून की शुरुआत

2021 के बाद यह पहली बार है जब मानसून जुलाई में दिल्ली पहुंचा है। 2021 में, मानसून 13 जुलाई को आया था। IMD के रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले कुछ सालों में मानसून अलग-अलग तारीखों पर दिल्ली पहुंचा है। 2025 में यह 29 जून को, 2024 में 28 जून को, 2023 में 25 जून को और 2022 में 30 जून को पहुंचा था।

पिछले 125 सालों में दिल्ली में मानसून का सबसे जल्दी आगमन 15 जून, 2008 को दर्ज किया गया था, जबकि सबसे देर से आगमन 26 जुलाई, 1987 को हुआ था।

2020 में, मॉनसून 25 जून को दिल्ली पहुंचा था और एक दिन बाद पूरे देश में फैल गया था। 2021 में, यह दिल्ली पहुंचा और उसी दिन पूरे देश में फैल गया। 2022, 2023 और 2024 में, मॉनसून 2 जुलाई को पूरे देश में फैल गया, जबकि पिछले साल यह दिल्ली पहुंचा और 29 जून को पूरे भारत में फैल गया।

तापमान में भारी गिरावट

मानसून के आने से शहर भर में तापमान में काफी गिरावट आई। दिल्ली के मुख्य मौसम केंद्र, सफदरजंग में अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.4 डिग्री कम था, जबकि न्यूनतम तापमान 22.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 5.1 डिग्री कम था। शहर में 21 जुलाई, 2021 के बाद से सबसे कम न्यूनतम तापमान भी दर्ज किया गया; उस समय न्यूनतम तापमान 22.4 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया था।

अन्य मौसम केंद्रों पर भी सामान्य से कम तापमान दर्ज किया गया। जैसे- पालम में अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। लोदी रोड पर अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

रिज स्टेशन पर अधिकतम तापमान 33.8 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि अयानगर में अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

दिल्ली में हल्की बारिश हुई

गुरुवार को सुबह के समय हल्की लेकिन व्यापक बारिश हुई। सुबह 8.30 बजे तक सफदरजंग में 4.6mm बारिश हुई, जबकि पालम में 1.9mm और आयानगर में 5mm बारिश दर्ज की गई। लोदी रोड पर 4.1mm और रिज स्टेशन पर 3mm बारिश हुई। सुबह के बाद ज्यादातर मौसम केंद्रों पर कोई खास बारिश दर्ज नहीं की गई।

मानसून में देरी क्यों हुई?

देरी से आने की वजह बताते हुए पलावत ने कहा कि मानसून को बनाए रखने के लिए जरूरी नमी वाली हवाएं पहले दिल्ली नहीं पहुंची थीं।

उन्होंने कहा, “बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी वाली पूर्वी हवाएं, जो मानसून की लगातार बारिश के लिए जरूरी हैं, पहले दिल्ली नहीं पहुंची थीं।” दिल्ली में मानसून के देर से आने से पहले का मौसम (प्री-मानसून सीजन) सामान्य से ज्यादा गर्म रहा था।

IMD के डेटा के मुताबिक, मार्च-जून के दौरान औसत न्यूनतम तापमान 22.9 डिग्री सेल्सियस रहा, जो 2022 के बाद से सबसे ज्यादा औसत तापमान है।

इसी दौरान औसत अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस रहा, जो 2024 के बाद पिछले छह सालों में दूसरा सबसे ज्यादा औसत तापमान है। राष्ट्रीय राजधानी में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आने से पहले, प्री-मानसून सीजन में लगातार गर्मी, उमस, कुछ समय के लिए तेज लू और कहीं-कहीं प्री-मानसून बारिश देखी गई।

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