Gold Price Today: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से पहले सोना ₹3400 महंगा हुआ, चांदी भी ₹5000 उछली

Gold Price Today: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गुरुवार, 3 सितंबर को सोने की कीमत में जोरदार तेजी आई। 6 कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद सोना ₹3,400 उछलकर ₹1,59,500 प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। इससे पहले बुधवार को 24 कैरेट वाला वाला सोना ₹1,56,100 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।

चांदी की कीमत में भी बड़ी तेजी देखने को मिली। चांदी ₹5,000 बढ़कर ₹2,40,500 प्रति किलो पहुंच गई। पिछले कारोबारी सत्र में इसका भाव ₹2,35,500 प्रति किलो था।

क्यों बढ़े सोने-चांदी के दाम?

ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म लेमॉन के हेड ऑफ रिसर्च गौरव गर्ग के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड हाल की ऊंचाई से नीचे आई है। इसके अलावा, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण सुरक्षित निवेश की मांग बनी हुई है। इससे सोने और चांदी को सपोर्ट मिला।

HDFC Securities के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, अमेरिका के निजी रोजगार के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख को लेकर बाजार की धारणा बदली।

कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट आई। डॉलर कमजोर होने से दूसरे देशों के निवेशकों के लिए सोना सस्ता पड़ता है। इससे कीमतों को सहारा मिलता है।

इंटरनेशनल मार्केट में भी तेज उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड $55.76 यानी 1.27% बढ़कर $4,443.93 प्रति औंस पहुंच गया। चांदी भी करीब 1% की तेजी के साथ $65.77 प्रति औंस पर पहुंच गई।

निवेश प्लेटफॉर्म Mudrex के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत ने कहा कि सोना एक महीने के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद फिर $4,440 के आसपास लौट आया। कमजोर डॉलर ने कीमती धातुओं की कीमतों को सहारा दिया।

Gold Jewellery Price: 18, 14 या 9 कैरेट की ज्वेलरी कितने में बनेगी? समझिए पूरा कैलकुलेशन

आगे क्या रहेगा रुख?

अमेरिकी जॉब मार्केट के अहम आंकड़ों से पहले सोने और चांदी की आगे की चाल को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। कमजोर आंकड़े आने पर डॉलर और कमजोर हो सकता है, जिससे सोने को और सपोर्ट मिल सकता है।

वहीं, अगर रोजगार के आंकड़े मजबूत रहे या फेड ने सख्त रुख अपनाया, तो ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद फिर मजबूत हो सकती है। ऐसे में सोने और चांदी पर दबाव आ सकता है।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Viral Post: ‘मेंटल पीस के लिए बिना ऑफर के छोड़ दी नौकरी’, वायरल हुआ इंजीनियर का पोस्ट

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट इंजीनियर का पोस्ट काफी तेजी से वायरल हो रहा है। पोस्ट में इंजीनियर ने बताया कि उसने बिना किसी नई नौकरी के पुरानी नौकरी छोड़ने के फैसला किआ। इस फैसले को लेकर लोगों की अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ लोग के मुताबिक नौकरी और करियर से ज्यादा जरूरी मानसिक सुकून है, वहीं कुछ ने कहा कि, मौजूदा नौकरी के माहौल में बिना किसी दूसरे ऑप्शन के इस्तीफा देना जोखिम भरा हो सकता है। इसी वजह से यह मामला सोशल मीडिया पर बहस का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पोस्ट

सॉफ्टवेयर इंजीनियर गौरव शरण ने X पर एक छोटा सा पोस्ट शेयर किया। उन्होंने लिखा, “बिना किसी ऑफर के इस्तीफा दे दिया। किसी भी चीज से ज्यादा मेंटल पीस जरूरी है।” अपने इस पोस्ट के जरिए उन्होंने बताया कि उन्होंने दूसरी नौकरी या ऑफर तय किए बिना ही मौजूदा नौकरी छोड़ने का फैसला किया। गौरव शरण का ये पोस्ट देखते ही देखते सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। लोग इस पोस्ट पर कई कमेंट किए।

 

लोगों ने किए कमेंट

एक यूजर ने बताया कि, “उसने 2025 में बिना किसी नई नौकरी के ऑफर के इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद नई नौकरी मिलने में उसे करीब दो महीने का समय लगा। इस दौरान उसे कई ऑफर मिले, लेकिन कोई भी उसकी घर से काम करने की पसंद के मुताबिक नहीं था।” एक और यूजर ने कहा, “नौकरी छोड़ने से पहले कम से कम एक नया ऑफर अपने हाथ में होना बेहतर है, ताकि बाद में परेशानी का सामना न करना पड़े।” यूजर ने कहा कि, “मौजूदा नौकरी छोड़ने से पहले कम से कम एक नया ऑफर अपने पास होना चाहिए, क्योंकि जॉब मार्केट की वास्तविक स्थिति उम्मीद से काफी अलग हो सकती है।”

एक यूजर ने बताया कि, “कई कंपनियां ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता देती हैं, जो तुरंत काम शुरू कर सकते हैं और 60 दिन तक इंतजार नहीं करना चाहतीं। ऐसे में पहले इस्तीफा देने वाले उम्मीदवार रिक्रूटर्स को ज्यादा आसानी से उपलब्ध लग सकते हैं और उन्हें नौकरी के बेहतर मौके मिल सकते हैं।”

Gold Silver Price: 10 हफ्ते के हाई पर सोना, 1 हफ्ते में 11% चढ़ी चांदी, जानिए इस तेजी के पीछे क्या है वजह

Gold – Silver Price: सोने और चांदी की कीमतों में हालिया तेजी जारी है। सोना 10 हफ्ते के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है जबकि चांदी में पिछले हफ्ते 11% से ज़्यादा की बढ़त हुई है। इस हफ्ते स्पॉट गोल्ड की कीमत लगभग USD 4,435 प्रति औंस तक पहुंच गई, जो जून के मध्य के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। खबर लिखे जाने के समय USD 4,375 के आसपास थी।

Comex सिल्वर में इस हफ्ते 11% से ज्याजा की तेजी आई। स्पॉट सिल्वर की कीमत लगभग USD 64 प्रति औंस हो गई। भारत में, सोना 10 ग्राम के लिए लगभग 1,55,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा था, जबकि MCX सिल्वर में हफ्ते भर में लगभग 6.58% की बढ़त हुई और यह प्रति किलोग्राम लगभग 2,31,804 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा था।

सोने-चांदी की कीमतों के पीछे तेजी के एक नहीं बल्कि कई वजह है। इनमें से US में कमजोर रोजगार डेटा, फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की कम होती उम्मीदें, सेंट्रल बैंक द्वारा लगातार सोने की खरीद, ETF में फिर से निवेश आना और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता – इन सभी ने मिलकर कीमती धातुओं की मांग को मजबूत किया है।

US में कमजोर जॉब्स डेटा से कम हुई ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें

हालिया तेजी की एक मुख्य वजह US जॉब मार्केट से आई। US ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स ने 7 अगस्त, 2026 को रिपोर्ट दी कि जुलाई में नॉन-फ़ार्म पेरोल में 23,000 की गिरावट आई, जबकि बाजार को लगभग 80,000 नई नौकरियों की उम्मीद थी। जून के आंकड़ों को भी नीचे की ओर संशोधित किया गया, जबकि मई और जून के संयुक्त संशोधनों से पहले के अनुमानों में लगभग 103,000 नौकरियों की कमी आई।

इस रिपोर्ट के आने के बाद, स्पॉट गोल्ड 2.67% बढ़कर USD 4,352.60 हो गया, जबकि चांदी 4.20% बढ़कर USD 63.97 हो गई, क्योंकि ट्रेडर्स ने सितंबर में फ़ेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम कर दीं।

बाजार अब सितंबर में 25 बेसिस पॉइंट की ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना लगभग 44% मान रहा है, जबकि एक हफ्ते पहले यह संभावना 67% थी। सोने पर कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता है, इसलिए ब्याज दरें कम रहने की उम्मीद से इस मेटल को रखने की ‘अपॉर्चुनिटी कॉस्ट’ कम हो सकती है और इसकी मांग को बढ़ावा मिल सकता है।

फेडरल रिजर्व के ब्याज दर पर फैसले पर नजर

फेडरल ओपन मार्केट कमेटी ने 29 जुलाई को अपनी बेंचमार्क ब्याज दर को 3.50% से 3.75% के दायरे में बनाए रखने के लिए 9-3 से वोट किया। हालांकि फेडरल रिजर्व ने पॉलिसी में किसी बड़े बदलाव का साफ संकेत नहीं दिया है, लेकिन कमजोर रोजगार डेटा और दरों को स्थिर रखने के फैसले ने निकट भविष्य में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदों को कम कर दिया है।

कीमती धातुओं के लिए अगला बड़ा ट्रिगर इस सप्ताह के आखिर में आने वाला अमेरिकी महंगाई का डेटा है। कमजोर पेरोल रिपोर्ट से सितंबर में ब्याज दरें बढ़ाने के लिए फेडरल रिजर्व पर दबाव कम हो सकता है, हालांकि उम्मीद से ज्यादा महंगाई दर बढ़ने की उम्मीदों को फिर से जगा सकती है और सोने-चांदी पर दबाव डाल सकती है।

सेंट्रल बैंक की रिकॉर्ड खरीदारी से सोने को मिला सहारा

कीमतों में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के अलावा, सेंट्रल बैंक की मजबूत मांग ने सोने को एक मजबूत आधार दिया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ‘गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स Q2 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही के दौरान सेंट्रल बैंकों की शुद्ध सोने की खरीदारी 289 टन ​​तक पहुंच गई। यह Q1 2026 के स्तर से पांच गुना अधिक और रिकॉर्ड पर दूसरी तिमाही का सबसे अधिक आंकड़ा था।

सेंट्रल बैंक की खरीदारी एक साल पहले की इसी अवधि की तुलना में 62% अधिक थी। पोलैंड के नेशनल बैंक ने Q2 के दौरान 51 टन सोना जोड़ा, जिससे उसका भंडार 632 टन हो गया, जबकि पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने 33 टन सोना जोड़ा, जो Q4 2023 के बाद से उसकी सबसे बड़ी तिमाही खरीदारी थी।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के नवीनतम सर्वेक्षण में भी सेंट्रल बैंक की मांग जारी रहने की मजबूत उम्मीदें दिखाई दीं। लगभग 89% उत्तरदाताओं को उम्मीद थी कि अगले वर्ष वैश्विक स्वर्ण भंडार में वृद्धि होगी, जबकि रिकॉर्ड 45% लोगों को उम्मीद थी कि वे अपने स्वयं के स्वर्ण भंडार में वृद्धि करेंगे।

ETF में फिर से निवेश बढ़ा

सोने को ETF की खरीदारी से भी सहारा मिला है। 20 जुलाई के बाद से एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) में कुल बुलियन होल्डिंग में 24 टन की वृद्धि हुई है, जो अप्रैल की शुरुआत के बाद से निवेश के प्रवाह की सबसे तेज गति है।

ETF की मांग में यह वापसी ऐसे समय में हुई है जब सेंट्रल बैंक की खरीदारी अधिक बनी हुई है, जिससे इस पीली धातु के लिए निवेश की मांग का एक और स्रोत मिल रहा है। संस्थागत खरीदारी और ETF में फिर से निवेश बढ़ने से कीमतों को सहारा मिला है, भले ही ऊंची कीमतों के कारण गहनों की मांग पर दबाव बना हुआ है।

ब्रोकरेज हाउस क्या दे रहे अनुमान

जेपी मॉर्गन को उम्मीद है कि सोने की कीमतें $6,000 प्रति औंस तक पहुंच सकती है। गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि इस साल के आखिर तक कीमते $5,400 के स्तर पर पहुंच सकती है। वहीं मेटल फोकस का अनुमान है कि कीमतें $6,000 प्रति औंस तक पहुंच सकती है। वहीं डॉयचे बैंक, एचएसबीसी और ING जैसे कई बैंक इस कैलेंडर साल की चौथी तिमाही तक सोने की कीमत $4,600 से $4,900 के बीच रहने का अनुमान लगा रहे है।

 

MCX पर सोना ₹1.53 लाख के पार, चांदी ₹2.36 के नीचे फिसली, जानें किस कारण बढ़ी मांग

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

‘अब और नहीं झेल सकता’, टॉक्सिक मैनेजर से परेशान ऑस्ट्रेलिया में भारतीय ने छोड़ी नौकरी, वायरल हो रहा पोस्ट

बेहतर नौकरी, अच्छी कमाई और बेहतर जीवन की तलाश में कई भारतीय विदेश जाकर काम करना पसंद करते हैं। उन्हें उम्मीद होती है कि विदेश में काम के साथ परिवार के लिए भी समय मिलेगा, लेकिन कई बार ज्यादा काम के दबाव से निजी जिंदगी प्रभावित होने लगती है। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले एक भारतीय युवक की स्टोरी काफी वायरल हो रही है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय अंकुर सचदेवा के लिए नौकरी और पर्सनल लाइफ के बीच बैलेंस बनाना मुश्किल हो गया। एक बड़े ऑस्ट्रेलियाई बैंक में नौकरी शुरू करने के बाद उन्हें ऑफिस के समय के बाद भी लगातार फोन आते थे और जरूरी काम के नाम पर बार-बार काम करना पड़ता था। मैनेजर के दबाव के कारण उनके पास परिवार के साथ समय बिताने के लिए बहुत कम समय बचता था।

लगातार काम के दबाव के बाद अंकुर सचदेवा ने अपनी नौकरी छोड़ने का फैसला किया। इसके बाद उन्हें एक नई नौकरी मिली, जहां अब वह मैनेजर के पद पर काम कर रहे हैं। फिलहाल वह ऑस्ट्रेलियाई सरकार के लिए काम कर रहे हैं।

इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो

इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में उन्होंने कहा, “मैं वर्क-लाइफ बैलेंस के लिए ऑस्ट्रेलिया आया था… लेकिन अब मैं इसे और नहीं झेल सकता।” उन्होंने कैप्शन में आगे लिखा, “मैंने आखिरकार अपने टॉक्सिक भारतीय मैनेजर की वजह से इस्तीफा दे दिया।” वीडियो के अंत में उन्होंने बताया कि अब वह एक नई कंपनी में मैनेजर के तौर पर काम कर रहे हैं। हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए, सचदेवा ने अपने पिछले वर्कप्लेस के अनुभव को शेयर किया। उन्होंने कहा, “मेरे मैनेजर मेरी जिंदगी मुश्किल बना देते थे।”

अपना काम भी करवाते थे मैनेजर

सचदेवा के मुताबिक, उनके मैनेजर ऑफिस का समय खत्म होने के बाद भी उनसे संपर्क करते थे और तुरंत काम पूरा करने के लिए कहते थे। उन्होंने बताया, “वह मुझे ऑफिस टाइम के बाद भी कॉल करते थे और कहते थे, ‘यह अर्जेंट है, तुम्हें इसे आज ही खत्म करना है।’ वह मुझसे अपना काम भी करवाते थे और लगभग हर काम को ‘अर्जेंट’ बताते थे, इस उम्मीद के साथ कि उसे उसी दिन पूरा किया जाए।” उन्होंने बताया कि ज्यादा काम के कारण उनकी निजी जिंदगी प्रभावित होने लगी थी। नौकरी छोड़ना आसान नहीं था, लेकिन उनका नवजात बच्चा भी था और वह परिवार को ज्यादा समय देना चाहते थे। काम की बढ़ती जिम्मेदारियों के कारण वह परिवार के साथ पर्याप्त समय नहीं बिता पा रहे थे।

ऑस्ट्रेलियाई सरकार के लिए कर रहे काम

सचदेवा ने कहा, “मैं एक ऐसे दौर में पहुंच गया था, जहां मैं मुश्किल से अपने परिवार के साथ समय बिता पाता था। मैं खासकर अपने नवजात बच्चे के लिए उसके साथ रहना चाहता था।” उन्होंने कहा, “जॉब मार्केट बहुत अच्छा नहीं था, इसलिए मुझे ज्यादा इंटरव्यू कॉल नहीं आ रहे थे। खुशकिस्मती से, आखिरकार मुझे एक कॉल आया और किस्मत से मेरा चयन हो गया। इसके अलावा, यह एक बहुत अच्छी पोस्ट थी, जिससे यह मौका मेरे लिए और भी खास बन गया।” नई नौकरी में चयन होने के बाद सचदेवा ने अपनी पुरानी नौकरी छोड़ दी और अब ऑस्ट्रेलियाई सरकार के लिए काम कर रहे हैं।

यूजर्स ने क्या कहा

उनकी कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी चर्चा शुरू हो गई। कुछ लोगों ने ऑफिस के बाद काम के दबाव पर बात की, तो कुछ ने पूछा कि मैनेजर बनने के बाद सचदेवा अपनी टीम के साथ कैसा व्यवहार करेंगे। एक यूजर ने लिखा, “भाई, सिर्फ ऑस्ट्रेलिया में ही नहीं, बल्कि पूरे यूरोप में भी यही हाल है। भारत में तो यह पहले से ही हो रहा था और अब भारतीयों ने विदेशों में भी ऐसा करना शुरू कर दिया है।” एक और यूजर ने कहा, “और अब शायद तुम्हारे जूनियर भी ऐसा ही करेंगे। मजाक कर रहा हूँ! तुम्हें शुभकामनाएं। अपनी टीम के लिए एक अच्छा और सपोर्टिव माहौल बनाओ।” दूसरे यूजर ने कहा, “ध्यान रखना कि तुम दूसरे लोगों के साथ ऐसा न करो। इस चेन को तोड़ने वाले बनो। बधाई हो।”

18,000 रुपये की सैलरी से शुरू हुआ सफर, अब हर महीने ₹10 लाख कमाते हैं शब्बीर, जानें कैसे बदली किस्मत

बिना चेतावनी एक ईमेल में गई नौकरी! वायरल पोस्ट ने छेड़ी जॉब सिक्योरिटी पर बहस

सोशल मीडिया पर एक वायरल पोस्ट ने एक बार फिर कॉर्पोरेट सेक्टर में नौकरी की सुरक्षा (Job Security) को लेकर बहस तेज कर दी है। पोस्ट में दावा किया गया कि एक कर्मचारी को अचानक ईमेल भेजकर नौकरी से हटा दिया गया, जिसके बाद इंटरनेट पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। इस घटना ने न केवल कंपनियों के कर्मचारियों के प्रति रवैये पर सवाल खड़े किए, बल्कि यह भी चर्चा शुरू कर दी कि क्या मौजूदा समय में बिना पूर्व सूचना या स्पष्ट संवाद के कर्मचारियों को नौकरी से निकालना एक सामान्य कॉर्पोरेट प्रथा बनती जा रही है। कई यूजर्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी जॉब मार्केट में ऐसी घटनाएं पहले की तुलना में अधिक देखने को मिल रही हैं।

वहीं कुछ लोगों का मानना है कि कंपनियों और कर्मचारियों के बीच बेहतर संवाद और पारदर्शिता की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। इस वायरल पोस्ट ने रोजगार की स्थिरता और कॉर्पोरेट संस्कृति पर नई बहस को जन्म दे दिया है।

वायरल पोस्ट में क्या था?

X यूजर @coolcoder ने कथित तौर पर कर्मचारी हर्ष राणा को भेजे गए ईमेल का स्क्रीनशॉट साझा किया। पोस्ट के साथ उन्होंने लिखा, “बिना किसी चेतावनी या फीडबैक के नौकरी से निकाल दिया गया। क्या अब यह सामान्य बात हो गई है?” देखते ही देखते यह पोस्ट वायरल हो गई और हजारों यूजर्स ने अपनी राय रखनी शुरू कर दी।

ITR

ईमेल में क्या लिखा था?

स्क्रीनशॉट के अनुसार, कंपनी ने ईमेल में बताया कि प्रोसेस रैंप-डाउन होने के कारण कर्मचारी को मौजूदा भूमिका से हटाया जा रहा है। ईमेल में 7 अगस्त 2026 को अंतिम कार्य दिवस (Last Working Day) बताया गया और कंपनी की सभी एसेट्स जमा कराने के साथ फुल एंड फाइनल (F&F) प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया।

फीडबैक या चेतावनी का नहीं था जिक्र

ईमेल में कहीं भी कर्मचारी के प्रदर्शन, किसी गलती या पहले दी गई चेतावनी का उल्लेख नहीं था। यही वजह रही कि सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या कर्मचारी को निर्णय से पहले अपनी बात रखने या सुधार का कोई अवसर दिया गया था।

सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कई यूजर्स ने कॉर्पोरेट कंपनियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए। कुछ लोगों का कहना था कि कंपनियां मुनाफे को कर्मचारियों से ज्यादा महत्व देती हैं। वहीं कुछ ने पूछा कि क्या कर्मचारी को अचानक नौकरी जाने के बदले तीन महीने का वेतन या कोई मुआवजा मिलेगा।

‘आज के जॉब मार्केट में यह आम बात है’

कई यूजर्स ने अनुमान लगाया कि मामला कर्मचारी के प्रदर्शन का नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट या काम खत्म होने से जुड़ा हो सकता है। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि मौजूदा रोजगार बाजार में बिना पूर्व सूचना के छंटनी अब असामान्य नहीं रही और ऐसे मामले लगातार देखने को मिल रहे हैं।

 ‘इन-हैंड सैलरी कितनी मिलेगी?’ बस इतना पूछा और कंपनी ने कर दिया रिजेक्ट, सोशल मीडिया पर छिड़ गई बहस

नौकरी की तलाश में हर उम्मीदवार चाहता है कि उसे कंपनी, काम और सैलरी से जुड़ी पूरी जानकारी पहले से मिल जाए। लेकिन एक शख्स के लिए सिर्फ सैलरी के बारे में सवाल पूछना ही परेशानी का कारण बन गया। उसने जॉब ऑफर मिलने के बाद जब अपनी इन-हैंड सैलरी जाननी चाही, तो कंपनी के जवाब ने उसे हैरान कर दिया। इस पूरे मामले को उम्मीदवार ने Reddit पर शेयर किया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर नौकरी में पारदर्शिता और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

कई लोगों ने कहा कि किसी भी जॉब को स्वीकार करने से पहले वेतन, कटौती और मिलने वाली रकम की जानकारी लेना एक सामान्य प्रक्रिया है। वहीं, कुछ यूजर्स ने कंपनी के रवैये पर सवाल उठाए और इसे नौकरी देने वालों की सोच से जोड़कर देखा।

2 LPA की नौकरी, लेकिन सवाल पूछते ही बदल गया रवैया

उम्मीदवार ने बताया कि उसने Indeed के जरिए एक कंपनी में आवेदन किया था। कुछ समय बाद एक छोटी कंपनी के प्रतिनिधि ने उससे संपर्क किया और बताया कि इस पद के लिए 2 LPA का पैकेज ऑफर किया जा रहा है। जब उम्मीदवार ने नौकरी में रुचि दिखाई, तो उसने सिर्फ इतना पूछा कि कटौती के बाद हर महीने मिलने वाली इन-हैंड सैलरी कितनी होगी।

‘अगर सिर्फ सैलरी चिंता है तो हमारी कंपनी सही नहीं’

उम्मीदवार के सवाल का जवाब देने के बजाय रिक्रूटर ने कहा कि अगर सैलरी ही आपकी मुख्य चिंता है, तो शायद यह कंपनी आपके लिए सही जगह नहीं है। इसके बाद कंपनी ने उम्मीदवार को शुभकामनाएं देते हुए बातचीत खत्म कर दी। अचानक मिले इस जवाब से उम्मीदवार हैरान रह गया।

cooling tips (4)

कैंडिडेट ने कहा- सवाल पूछना गलत नहीं था

उम्मीदवार ने दोबारा जवाब देते हुए कहा कि उसका सवाल सिर्फ पैसों को लेकर नहीं था, बल्कि वह ऑफर को सही तरीके से समझना चाहता था। उसने लिखा कि नौकरी करने का एक बड़ा कारण कमाई भी होती है, इसलिए सैलरी से जुड़ी जानकारी लेना एक सामान्य और जरूरी सवाल है। उसने यह भी कहा कि अगर संभावित कर्मचारियों के साथ कंपनी का रवैया ऐसा है, तो कंपनी के लिए भी शुभकामनाएं।

सोशल मीडिया ने कहा- ‘अच्छा हुआ वहां नौकरी नहीं मिली’

पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स उम्मीदवार के समर्थन में आ गए। लोगों ने कहा कि किसी भी नौकरी को स्वीकार करने से पहले इन-हैंड सैलरी, कटौती और अन्य शर्तों की जानकारी लेना बिल्कुल जायज है। एक यूजर ने लिखा कि 2 LPA का पैकेज काफी कम है और ऐसी जगह काम करने से बच जाना बेहतर है।

कंपनी के रवैये पर उठे सवाल

कई लोगों ने कहा कि अगर कोई कंपनी शुरुआती बातचीत में ही सैलरी से जुड़े सवालों पर ऐसा व्यवहार करती है, तो भविष्य में कर्मचारियों के साथ उसका रवैया कैसा होगा, यह सोचने वाली बात है। एक यूजर ने मजाक में कहा कि अगर बाद में कर्मचारी वेतन बढ़ाने की मांग करता, तो शायद कंपनी उसे यह कहकर मना कर देती कि “हम यहां अनुभव के लिए काम करते हैं।”

जॉब मार्केट में पारदर्शिता की मांग

इस घटना ने एक बार फिर नौकरी में पारदर्शिता को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। उम्मीदवारों का कहना है कि सैलरी, इन-हैंड पेमेंट और कंपनी की नीतियों के बारे में पहले से स्पष्ट जानकारी मिलना जरूरी है, ताकि दोनों पक्ष सही फैसला ले सकें।

किसिंग वीडियो वायरल होने के बाद बदला पूरा मामला, सोशल मीडिया ने पूछ लिया ये सवाल

‘महीने में 10 लाख कमा कर 5 लाख दे रहा हूं टैक्स’, कनाडा में 18 महीने काम करने के बाद भारत लौटे व्यक्ति ने बयां किया दर्द

कई भारतीयों के लिए कनाडा एक ऐसी जगह है, जहां बेहतर मौके और आरामदायक जिंदगी का इंतजार होता है। लेकिन तब क्या होता है जब कोई ऐसा व्यक्ति, जिसने वह सपना जी लिया हो, कहे कि यह सब बेकार था? क्या सिर्फ ज्यादा कमाई से विदेश में बेहतर जिंदगी की गारंटी मिल सकती है?

ये सवाल एंटरप्रेन्योर हर्ष गुप्ता की एक वायरल सोशल मीडिया पोस्ट के केंद्र में हैं। वे परमानेंट रेजिडेंसी (PR) पर टोरंटो गए थे, लेकिन सिर्फ 18 महीने बाद ही लौट आए। अपने बिजनेस से महीने में लगभग 10 लाख रुपये कमाने के बावजूद, गुप्ता ने कहा कि ज्यादा टैक्स, रहने का बहुत ज्यादा खर्च, हेल्थकेयर में देरी और कॉम्पिटिटिव जॉब मार्केट ने उन्हें अपने फैसले पर दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया।

थ्रेड्स पर अपना अनुभव शेयर करते हुए गुप्ता ने लिखा, “अगर आप भारतीय हैं और कनाडा जाने के बारे में सोच रहे हैं, तो ये 10 बातें आपको पता होनी चाहिए।” उन्होंने विदेश जाने की योजना बना रहे किसी भी व्यक्ति की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक – अच्छी नौकरी खोजने – से शुरुआत की। गुप्ता के अनुसार, कनाडा में अच्छी सैलरी वाली नौकरी मिलना बहुत से लोगों की उम्मीद से कहीं ज्यादा मुश्किल है। उन्होंने दावा किया कि कॉम्पिटिशन बहुत ज्यादा है, सैलरी भारत की तुलना में थोड़ी ही ज्यादा है और हर नौकरी के लिए हजारों लोग अप्लाई करते हैं।

गुप्ता ने लिखा, “अच्छी नौकरियां मिलना मुश्किल है। सैलरी भारत की तुलना में थोड़ी ही ज्यादा है। Shopify के अलावा कोई भी ग्लोबल लेवल की बड़ी कंपनी नहीं है। ज्यादा लोग CAD 15/घंटा (1,000 रुपये) पर काम कर रहे हैं। रहने का खर्च आपकी कमर तोड़ देगा। मैं डाउनटाउन टोरंटो में रहता था। एक साधारण 600 sq ft के अपार्टमेंट के लिए महीने का किराया 2 लाख रुपये था।”

फिर टैक्स का झटका लगा। गुप्ता ने कहा कि सबसे बड़े सरप्राइज में से एक वह टैक्स था, जो उन्हें अच्छी कमाई के बावजूद देना पड़ा। “टैक्स बहुत ज्यादा हैं। मैं अपने बिजनेस से महीने में 10 लाख रुपये कमाता था और 5 लाख रुपये टैक्स में देता था।”

एंटरप्रेन्योर ने कनाडा के हेल्थकेयर सिस्टम पर भी सवाल उठाए और कहा कि मेडिकल केयर मिलना उतना आसान नहीं था, जितना उन्होंने सोचा था। उन्होंने लिखा, “मुफ्त हेल्थकेयर एक मिथक है।” गुप्ता ने बताया कि उन्हें फैमिली डॉक्टर मिलने में छह महीने का इंतजार करना पड़ा। उन्होंने आगे कहा कि स्पेशलिस्ट से अपॉइंटमेंट लेने में दो महीने से ज्यादा का समय लगा। उन्होंने दवाओं की कीमत को भी एक और चिंता का विषय बताया।

मौसम भी एक चुनौती थी। गुप्ता के लिए, कनाडा की लंबी सर्दियां सिर्फ कम तापमान की बात नहीं थीं। उन्होंने रोज़मर्रा की जिंदगी पर भी असर डाला। उन्होंने लिखा, “यहां ठंड है और उदासी भी। अक्टूबर से अप्रैल तक, कोई बाहर नहीं निकलता। मैं टोरंटो की बात कर रहा हूं, किसी छोटे शहर की नहीं। हर दिन ढेरों कपड़े पहनने पड़ते हैं।”

गुप्ता का कहना था कि कनाडा में रहने का ज्यादा खर्च और तुलनात्मक रूप से कम सैलरी ने लोगों की जीवन की गुणवत्ता और नजरिए पर असर डाला है। उन्होंने यह भी कहा कि कई काबिल लोग बेहतर मौकों की तलाश में दूसरी जगहों पर चले जाते हैं। उनके अनुसार, परमानेंट रेजिडेंसी (PR) पाना मुश्किल होता जा रहा है, क्योंकि इसमें बहुत समय लगता है और एलिजिबिलिटी कट-ऑफ लगातार बढ़ रहे हैं।

गुप्ता ने अपनी बात यह कहते हुए खत्म की कि कनाडा शायद हर किसी के लिए सही जगह नहीं है। उन्होंने समझाया, “यह उन लोगों के लिए बना है, जिनके पास कोई बेहतर विकल्प नहीं है। अगर फ़ूड डिलीवरी, ट्रकिंग, खेती या ब्लू-कॉलर काम ही आपकी सीमा है, तो यह ठीक है। अगर आपमें महत्वाकांक्षा और पैसा कमाने की चाह है, तो यह जगह आपके लिए नहीं है। इंटरनेट पर दिखने वाले सुंदर नजारों, साफ हवा और ‘शांति’ के झांसे में न आएं। यह साल में 4-5 महीने तो बहुत अच्छा लगता है। बाकी समय सब कुछ उदास और फीका रहता है।”

एक यूजर ने कमेंट किया, “सैलरी ‘भारत से बस थोड़ी ज्यादा’ है – किस गलतफहमी वाली दुनिया में एक विकसित देश में औसत सैलरी भारत से ‘बस थोड़ी’ ज्यादा होती है??” दूसरों ने कहा कि उनका अनुभव बहुत अलग रहा है। एक यूजर ने लिखा, “एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर जो सच में कनाडा जाकर बसा है, मेरा नजरिया बहुत अलग है। मैं भारत के एक बड़े शहर से आया हूं, और एक महिला और नए माता-पिता के तौर पर, मेरा सच में मानना ​​है कि परिवार पालने के लिए कनाडा सबसे अच्छे देशों में से एक है। हां, रहने का खर्च ज्यादा है। लेकिन अगर दोनों पार्टनर कड़ी मेहनत करने को तैयार हों, तो समय के साथ जिंदगी बेहतर होती जाती है। रातों-रात कुछ नहीं होता, लेकिन चीजें बेहतर जरूर होती हैं।”

एक और व्यक्ति ने कहा, “कृपया वहां वापस चले जाएं, जहां से आप आए थे। जो लोग सच में दिलचस्पी रखते हैं, उन्हें इस पोस्ट की जरूरत नहीं है क्योंकि यह गलत है। पहली बात, जो लोग CAD में कमाते हैं, वे चीजों को समझने के लिए INR में नहीं बदलते। क्या आप कभी मुंबई में किराए के घर में रहे हैं? उससे यह पता नहीं चलता कि पूरे भारत में किराया और रहने का खर्च ज्यादा है। अच्छी नौकरी मिलना मुश्किल है, तो तैयारी करें और इंटरव्यू पास करें!”

हालांकि, कुछ लोगों को लगा कि गुप्ता ने ऐसी चिंताएं उठाई हैं जिनका सामना हाल के सालों में कनाडा आए कई नए लोगों ने किया है। एक यूजर ने कहा, “मुझे उन सभी इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए बुरा लगता है, जो कोविड के बाद बड़े पैमाने पर हुए इमिग्रेशन के दौरान यहां आए थे। भारत में रिक्रूटरों ने उन्हें कनाडा की खूबसूरत तस्वीर और PR स्टेटस का वादा करके धोखा दिया। कनाडा का इमिग्रेंट्स के प्रति रवैया निश्चित रूप से बदला है। यह दुखद है।”

AI के दौर में नौकरी गई तो क्या करें? 15 दिन में नई जॉब पाने वाले इंजीनियर ने बताए टिप्स

AI के बढ़ते प्रभाव और कंपनियों में लगातार हो रही छंटनी ने नौकरीपेशा लोगों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर टेक सेक्टर में बदलते हालात के बीच कर्मचारियों के लिए हर दिन नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे माहौल में एक भारतीय टेक प्रोफेशनल की कहानी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर खूब चर्चा बटोर रही है। नौकरी जाने के बाद जहां कई लोग लंबे समय तक नए अवसर की तलाश में संघर्ष करते हैं, वहीं इस शख्स ने मुश्किल वक्त में हार मानने के बजाय तेजी से कदम उठाए। उसने अपने अनुभव, नेटवर्क और लगातार कोशिशों के दम पर कुछ ही दिनों में नई नौकरी हासिल कर ली।

उसकी पोस्ट अब हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है। कई यूजर्स इसे मौजूदा जॉब मार्केट की सच्चाई और सही रणनीति का उदाहरण बता रहे हैं। यह कहानी बताती है कि बदलते दौर में सिर्फ स्किल्स ही नहीं, बल्कि नेटवर्किंग, तैयारी और धैर्य भी सफलता की बड़ी कुंजी बन चुके हैं।

घबराने के बजाय अपनाई नई रणनीति

नौकरी जाने के बाद उसने समय बर्बाद नहीं किया और तुरंत नए अवसरों की तलाश शुरू कर दी। उसने LinkedIn पर रिक्रूटर्स से संपर्क किया, लेकिन सबसे ज्यादा फायदा उसे अपने नेटवर्क और दोस्तों से मिला। उसने अपने परिचितों से अलग-अलग कंपनियों में रेफरल दिलाने के लिए मदद मांगी।

15 दिनों में बदली तस्वीर, मिले कई ऑफर

लगातार कोशिशों का नतीजा यह रहा कि उसे पांच कंपनियों में इंटरव्यू के मौके मिले। इनमें से दो कंपनियों ने मना कर दिया, लेकिन तीन कंपनियों ने उसे जॉब ऑफर दे दिए। आखिरकार उसने नोएडा की एक HCM डोमेन वाली प्रोडक्ट कंपनी का ऑफर स्वीकार किया और पुणे की दो स्टार्टअप कंपनियों के प्रस्ताव ठुकरा दिए।

लेऑफ के बावजूद नहीं मिला सेवरेंस

टेक प्रोफेशनल ने बताया कि पुरानी कंपनी ने उसे 31 जुलाई तक पेरोल पर रखा था, लेकिन प्रोबेशन पीरियड में होने के कारण उसे सेवरेंस पैकेज नहीं मिला। इसके बावजूद उसने इस मुश्किल दौर को हार मानने की बजाय नई शुरुआत का मौका बनाया।

नौकरी मिल गई, लेकिन तैयारी नहीं रुकेगी

अपने अनुभव से सीख लेते हुए उसने अन्य प्रोफेशनल्स को सलाह दी कि नौकरी मिलने के बाद भी तैयारी बंद नहीं करनी चाहिए। उसका कहना है कि मौजूदा जॉब मार्केट काफी चुनौतीपूर्ण है और भविष्य में प्रतिस्पर्धा और बढ़ सकती है। इसलिए वह नई नौकरी मिलने के बाद भी DSA और सिस्टम डिजाइन जैसी स्किल्स पर काम जारी रखेगा।

Reddit पर लोगों ने की हिम्मत की तारीफ

इस पोस्ट पर कई यूजर्स ने उसकी मेहनत और सही समय पर नेटवर्किंग करने की रणनीति की सराहना की। कुछ लोगों ने कहा कि लेऑफ के बाद जल्दी नौकरी मिलना आत्मविश्वास बढ़ाता है, वहीं कई यूजर्स ने इसे आज के अनिश्चित जॉब मार्केट में तैयारी की जरूरत का उदाहरण बताया।

सावन की फुहार और चूड़ियों की खनक, इन हरी डिजाइनर चूड़ियों के साथ सजाएं अपने हाथों की खूबसूरती!