Hormuz Strait Viral Video: समुद्र में बहने लगे iPhone और महंगे फ्रेंच परफ्यूम! ईरानी मछुआरों के लूटने का दावा, वीडियो हुआ वायरल

Hormuz Strait Viral Video: ईरान के पास रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में एक कंटेनर जहाज के डूबने के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में कथित तौर पर ईरानी मछुआरों और स्थानीय लोगों को समुद्र में तैरते iPhone, महंगे फ्रेंच परफ्यूम और दूसरे कीमती सामान को लूटने ने की कोशिश करते हुए दिखाया गया है। कुछ वीडियो में छोटी नावों को समुद्र में तैरते बड़े शिपिंग कंटेनरों को खींचने की कोशिश करते हुए भी देखा जा सकता है। हालांकि, इन वायरल वीडियो की सच्चाई पर सवाल उठने लगे हैं। कुछ फैक्ट-चेकिंग टीमों का कहना है कि ऑनलाइन वायरल हो रहे कुछ फुटेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाए गए हैं।

‘अल जजीरा’ की 17 अक्टूबर को जारी ओपन-सोर्स जांच के मुताबिक, स्मार्टफोन और लग्जरी परफ्यूम को समुद्र से निकालने का दावा करने वाले कई वीडियो फर्जी पाए गए। जांच में इन क्लिप्स को AI से तैयार किया गया बताया गया है। ऐसे में जहाज के डूबने की वास्तविक घटना और उससे जोड़कर शेयर किए जा रहे वीडियो के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

समुद्र में तैरते iPhone और परफ्यूम के वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर वायरल कुछ क्लिप्स में समुद्र की लहरों के बीच कंटेनर और पैकेट तैरते दिखाई देते हैं। दावा किया जा रहा है कि जहाज के डूबने के बाद उसका कीमती सामान पानी में बह गया। इसे देखते ही स्थानीय लोग उसे निकालने के लिए नावों से समुद्र में पहुंच गए। कुछ पोस्ट में इन पैकेटों को iPhone और फ्रांस के महंगे परफ्यूम की खेप बताया गया। हालांकि, इन सामानों की वास्तविक पहचान और वीडियो में दिखाई जा रही घटनाओं की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

लेबनान के अखबार अन-नहार की फैक्ट-चेकिंग टीम ने भी एक वायरल वीडियो की जांच की, जिसमें कथित तौर पर जहाज दुर्घटना के बाद iPhone के डिब्बे समुद्र तट पर पहुंचे दिखाई देते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एक विशेष डिटेक्शन टूल ने इस वीडियो के AI से बनाए जाने की बहुत अधिक संभावना जताई। इसलिए वायरल वीडियो को वास्तविक घटना का प्रमाण मानना सही नहीं होगा।

क्या है GFS Pride जहाज के डूबने की पूरी घटना?

यह मामला सिंगापुर के झंडे वाले कंटेनर जहाज GFS Pride के होर्मुज जलडमरूमध्य के पास डूबने के बाद सामने आया है। जहाज के डूबने की घटना की पुष्टि समुद्री अधिकारियों ने की है। सिंगापुर की मैरीटाइम एंड पोर्ट अथॉरिटी (MPA) के अनुसार, जहाज को नुकसान पहुंचा था और उसमें आग लग गई थी। इसके बाद जहाज समुद्र में डूब गया। राहत की बात यह रही कि जहाज पर मौजूद सभी 21 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया। अधिकारियों ने किसी के घायल होने की सूचना नहीं दी।

न्यूज एजेंसी ‘रॉयटर्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, MPA ने अपने बयान में बताया कि जहाज क्षतिग्रस्त होने और उसमें आग लगने के बाद डूब गया। इस हादसे में सभी 21 क्रू सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया।

GFS Pride की कंटेनर क्षमता 2,824 TEU थी। TEU का अर्थ ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट है, जिसका इस्तेमाल कंटेनर जहाजों की क्षमता मापने के लिए किया जाता है।

जहाज कैसे डूबा? ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने खुद बताया

जहाज के डूबने की वजह को लेकर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने अलग दावा किया। उसके मुताबिक, जहाज एक अवैध और खतरनाक समुद्री रूट्स में दाखिल हुआ था। समुद्री बारूदी सुरंग से टकरा गया, जिससे उसमें आग लग गई। हालांकि, जहाज के डूबने की परिस्थितियों, आग लगने के सटीक कारण और उसमें मौजूद सामान के बारे में किए जा रहे अलग-अलग दावों को सावधानी से देखना जरूरी है। खास तौर पर वायरल वीडियो में दिखाए गए iPhone और महंगे परफ्यूम की खेप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

होर्मुज में बढ़ा समुद्री जहाजों पर खतरा

GFS Pride के डूबने की घटना ऐसे समय हुई है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। ‘रॉयटर्स’ ने 14 अक्टूबर की रिपोर्ट में इस क्षेत्र में जहाजों पर हमलों में बढ़ोतरी की जानकारी दी थी। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के अधिकारियों ने जलडमरूमध्य पर अपना कंट्रोल मजबूत करने की कोशिशों के बीच रणनीति में बदलाव की बात कही थी।

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होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रूट है। युद्ध से पहले दुनिया के कुल तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रूट से गुजरता था। फिलहाल, सबसे अहम बात यह है कि जहाज का डूबना वास्तविक घटना है। लेकिन समुद्र से iPhone और महंगे परफ्यूम निकालते लोगों के नाम पर वायरल हो रहे कई वीडियो की प्रामाणिकता पर सवाल उठ रहे हैं। इसलिए इन सभी वीडियो को वास्तविक घटना बताकर शेयर करने से पहले उनकी पुष्टि करना जरूरी है।

ईरान की अमेरिका को कड़ी चेतावनी! फिर हमला हुआ तो पहले से ज्यादा मजबूत जवाब देंगे, बातचीत का रास्ता भी खुला

Iran-US War Update: ईरान ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए एक बार फिर साफ किया है कि वह अपनी रक्षा के साथ-साथ कूटनीतिक समाधान की कोशिश भी जारी रखेगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार (4 अक्टूबर) को चेतावनी दी कि अगर उनके देश के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई की गई तो इसका जवाब पहले से ज्यादा ताकतवर होगा। हालांकि, उन्होंने साथ ही बातचीत के जरिए न्यायपूर्ण और सम्मानजनक समाधान की संभावना भी खुली रखी है।

तेहरान में विदेशी राजदूतों और राजनयिक मिशनों के प्रमुखों को संबोधित करते हुए अराघची ने कहा कि अगर दुश्मन फिर से सैन्य टकराव का रास्ता चुनते हैं तो उन्हें पहले से अधिक मजबूत प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ईरान कूटनीति के जरिए समाधान तलाशने के लिए तैयार है।

ईरान-अमेरिका बातचीत पर फिर अड़चन

यह बयान ऐसे समय आया है जब युद्ध खत्म करने की कोशिशें फिलहाल गतिरोध में नजर आ रही हैं। अमेरिका और इजरायल की ओर से फरवरी के अंत में शुरू किए गए सैन्य अभियान के बाद भारी बमबारी हुई। लेकिन संघर्ष का निर्णायक अंत नहीं हो सका। हाल के हफ्तों में अमेरिका ने सैन्य अभियानों को कम करते हुए आर्थिक दबाव बढ़ाने पर जोर दिया है। जून में ईरान और अमेरिका ने स्थायी समाधान की दिशा में एक रूपरेखा तैयार करने के लिए समझौता ज्ञापन पर सहमति जताई थी। हालांकि, बाद में यह प्रक्रिया टूट गई। इसका एक प्रमुख विवादित मुद्दा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज रहा।

होर्मुज बना बड़ा मुद्दा

युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर कंट्रोल कायम करने की कोशिश की है। ईरान ने उन जहाजों पर भी हमले किए हैं जो उसकी अनुमति के बिना इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहे थे। पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरान और अमेरिका के अधिकारियों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत भी हुई। तेहरान के मुताबिक, उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए सात शर्तें रखीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन प्रस्तावों को खारिज कर दिया। लेकिन आगे बातचीत की संभावना के साथ-साथ सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू करने का विकल्प भी खुला रखा।

अमेरिका ने 1 सितंबर के बाद नहीं किया हमला

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने 1 सितंबर के बाद ईरान पर कोई नया हमला नहीं किया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार को ईरान में युद्ध और यमन के संघर्ष को लेकर बैठक की। इस बीच, ईरान समर्थित हूती संगठन यमन में सरकारी बलों के खिलाफ लड़ाई जारी रखे हुए है। हूती अब खुलकर सऊदी अरब को भी निशाना बना रहा है। ऐसे में ईरान-अमेरिका तनाव के साथ क्षेत्रीय संघर्ष को लेकर भी स्थिति पर नजर बनी हुई है।

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Iran-US War Update: ईरान पर घातक हमले की तैयारी में अमेरिका? ट्रंप बोले- जल्द हो सकता है बहुत बड़ा फैसला, तेहरान ने युद्ध खत्म करने के लिए रखीं 7 शर्तें

Iran-US War Update: सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका जल्द ही ईरान पर घातक हमला करने पर विचार कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वॉशिंगटन तेहरान के खिलाफ अपने अगले बड़े कदम पर गंभीरता से विचार कर रहा है। ट्रंप ने कहा कि वह फिलहाल निर्णय लेने की स्थिति में हैं। ट्रंप ने कहा कि आने वाले समय में ‘बहुत बड़ी चीजें’ हो सकती हैं। ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब ईरान ने अमेरिका के सामने युद्ध खत्म करने और बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए अपनी शर्तें रखी हैं।

ईरान ने ये मांगें मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे कतर के जरिए अमेरिका तक पहुंचाई हैं। तेहरान का कहना है कि नई बातचीत तभी संभव होगी जब लड़ाई खत्म हो और उस पर लगाए गए नौसैनिक प्रतिबंध हटाए जाएं।

ईरान के खिलाफ तीन विकल्पों का जिक्र

‘फॉक्स न्यूज’ के साथ कथित बातचीत में ट्रंप ने ईरान को लेकर अमेरिका के सामने मौजूद कई विकल्पों का जिक्र किया। उन्होंने तीन संभावित रास्ते बताए। ईरान को पूरी तरह तबाह करना, उसकी अर्थव्यवस्था को कमजोर होने देना या फिर बातचीत के जरिए समझौते तक पहुंचना। ट्रंप ने तेहरान को कड़ी चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा, “मेरा सवाल है कि मैं पूरे देश को कब और अगर जरूरत पड़ी तो कब उड़ा दूं? उन्हें बेहतर होगा कि वे सही व्यवहार करें।” ट्रंप की इस टिप्पणी से संकेत मिलता है कि अमेरिका ईरान के साथ जारी संघर्ष में सैन्य और कूटनीतिक, दोनों विकल्पों पर विचार कर रहा है।

ईरान के राष्ट्रपति से मुलाकात को तैयार ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की संभावित न्यूयॉर्क यात्रा पर भी प्रतिक्रिया दी। पेजेशकियन संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका जाने वाले हैं। जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान पेजेशकियन से मुलाकात करेंगे, तो उन्होंने कहा कि वह संभवतः इसके लिए तैयार होंगे। ईरान की अर्ध-सरकारी न्यूज एजेंसी ‘तस्नीम’ के मुताबिक, पेजेशकियन वरिष्ठ ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ अमेरिका जाने और संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अन्य देशों के नेताओं से भी मुलाकात करने की तैयारी में हैं।

हूती विद्रोहियों से भी संपर्क में अमेरिका

ट्रंप ने यमन के हूती विद्रोहियों को लेकर भी बड़ी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका की हूती समूह के साथ बातचीत जारी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल में सऊदी अरब को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए गए थे। ट्रंप के मुताबिक, हूती लड़ाकों ने अमेरिकी कर्मियों को निशाना नहीं बनाने पर सहमति जताई है।

ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं 7 शर्तें

दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए 7 शर्तें रखी हैं। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, ये शर्तें कतर के जरिए अमेरिकी पक्ष तक पहुंचाई गई हैं। ईरान के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ ने रविवार को इसकी पुष्टि की। इससे एक दिन पहले ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख मोहसिन रेजाई ने भी कहा था कि कतर ने तेहरान की मांगें अमेरिका तक पहुंचा दी हैं। रेजाई ने अल जजीरा से बातचीत में बताया कि ईरान की मांगों में सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना, ईरान के फ्रीज किए गए धन को वापस करना और नौसैनिक नाकाबंदी हटाना शामिल है।

अमेरिका के सहयोगी देशों को ईरान की चेतावनी

इस बीच ईरान के केंद्रीय सैन्य कमान ने दावा किया है कि उसे ऐसी खुफिया जानकारी मिली है, जिसके मुताबिक अमेरिका तेहरान के खिलाफ एक और सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा है। ईरान का आरोप है कि इस संभावित कार्रवाई में क्षेत्र के कई देश अमेरिका का समर्थन कर सकते हैं। ईरानी सेना ने अमेरिका का समर्थन करने वाले देशों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें इस मामले में ईरान की ओर से किसी तरह की नरमी की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। ईरानी सैन्य कमान ने ऐसे देशों को उस गतिविधि में शामिल पक्ष माना, जिसे उसने शरारत करार दिया।

बातचीत या सैन्य कार्रवाई…अमेरिका का अगला कदम क्या होगा?

ट्रंप के बयानों और ईरान की ओर से भेजी गई शर्तों से साफ है कि दोनों देशों के बीच तनाव के बीच कूटनीतिक रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। हालांकि, तेहरान ने बातचीत के लिए कई पूर्व शर्तें रखी हैं। जबकि ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई समेत कई विकल्प खुले रखने के संकेत दिए हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि अमेरिका ईरान की सात शर्तों पर क्या प्रतिक्रिया देता है। क्या दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर लौटने के लिए कोई साझा आधार तलाश पाते हैं।

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Market Outlook : आज मिलाजुला रहा शेयर बाजार का रुख, जानिए 21 सितंबर को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

Market Outlook : शुक्रवार को भारतीय शेयर बाज़ार में मिलाजुला रुख रहा। निफ्टी में 75.80 अंकों की बढ़त हुई, जबकि सेंसेक्स लगभग सपाट बंद हुआ। मेटल,सीमेंट, मीडिया,रियल्टी और फाइनेंशियल शेयरों में खरीदारी से बाज़ार को सहारा मिला,जबकि इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) शेयरों पर दबाव बना रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 19.63 अंक यानी 0.03 प्रतिशत गिरकर 74,294.96 पर बंद हुआ। जबकि,निफ्टी 50 75.80 अंक यानी 0.33 प्रतिशत बढ़कर 23,346.40 पर बंद हुआ।

निफ्टी में लगातार तीसरे सत्र में बढ़त दर्ज की गई। हालांकि,सप्ताह के दौरान इसमें 0.22 प्रतिशत की गिरावट आई,जो लगातार छठी वीकली गिरावट है। ब्रॉडर मार्केट ने बेंचमार्क इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी स्मॉलकैप 50 में 1.73 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1.74 प्रतिशत की बढ़त हुई। निफ्टी मिडकैप 50 में 0.87 प्रतिशत की तेजी आई।

आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल

HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी ने कहा कि उतार-चढ़ाव के बावजूद बाजार में रिकवरी का सिलसिला तीसरे सेशन में भी जारी रहा। डेली चार्ट पर एक छोटी पॉजिटिव कैंडल बनी है,जिसमें ऊपर और नीचे की तरफ छोटी शैडो हैं। बाजार की चाल सुस्त बनी हुई है।

शेट्टी ने बताया कि निफ्टी लगातार छठे हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुआ है और इसमें वीकली बेसिस पर 0.22% की गिरावट आई है। उनके मुताबिक,हालांकि शॉर्ट-टर्म में थोड़ी रिकवरी दिख रही है,लेकिन ओवरऑल स्थिति अभी भी कमजोर है।

उन्होंने कहा निफ्टी 23100-23000 के अहम निचले सपोर्ट लेवल से मजबूत रिकवरी करने में नाकाम रहा। अब कोई तेजी आने पर निफ्टी के 23,500-23,600 के लेवल पर रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ सकता है। जबकि, गिरावट की स्थिति में 23,100-23,000 के लेवल पर सपोर्ट मिल सकता है।

स्टॉक्सकार्ट के डायरेक्टर और CEO प्रणय अग्रवाल ने कहा कि फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में 25-बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी और 2026 में और सख्ती के संकेतों से यह बात पक्की हो गई है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी। इससे निकट भविष्य में ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अमेरिका में ऊंची यील्ड और मजबूत डॉलर का असर डॉलर एसेट्स में कैपिटल एलोकेशन पर पड़ सकता है, जिससे भारत समेत तमाम उभरते बाजारों में FII का निवेश कुछ हद तक सतर्कता भरा रह सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि विदेशी निवेश की निकासी और ग्लोबल स्तर पर ऊंची यील्ड के कारण भारतीय इक्विटी मार्केट पर भी बीच-बीच में दबाव बन सकता है। उन सेक्टरों पर ज्यादा दबाव देखने को मिल सकता है जो ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील हैं या जिनका वैल्यूएशन बहुत ज्यादा है। हालांकि,घरेलू मांग में मजबूती,घरेलू संस्थागत निवेशकों की भागीदारी और कंपनियों की अर्निंग को लेकर स्पष्टता से ब्रॉडर मार्केट को कुछ सहारा मिल सकता है।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि निफ्टी हाल के निचले स्तरों से रिकवरी की कोशिश को जारी रखते हुए 23,335 के स्तर के पास थोड़ी बढ़त के साथ खुला। हालांकि,बड़ा तकनीकी ढांचा अभी भी कमजोर बना हुआ है। मोमेंटम इंडिकेटर में कोई खास बदलाव नहीं आया है और वे अभी भी खरीदारी में सुस्ती ही दिखा रहे हैं। इंडेक्स को 23,500–23,600 की ओर बढ़ने के लिए लगातार 23,400 के ऊपर टिके रहना होगा।

उन्होंने आगे कहा कि निफ्टी के लिए नीचे की तरफ 23,200 का लेवल तत्काल सपोर्ट का काम कर सकता है। उसके बाद 23,100–23,070 का ज़ोन ज़्यादा मज़बूत सपोर्ट के तौर पर काम करेगा। कुल मिलाकर नियर टर्म में बाजार में सतर्कता का रुख बने रहने की उम्मीद है। बाजार के सेंटीमेंट में और सुधार के लिए निफ्टी को 23,400 के ऊपर एक मजबूत चाल की जरूरत है। जबकि, नीचे की तरफ इसके लिए 23,100–23,070 पर सपोर्ट है। यह सपोर्ट टूटने पर बाजार में गिरावट का ट्रेंड फिर से शुरू हो सकता है।

 

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Market Outlook : मिलेजुले रुख के साथ बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 18 सितंबर को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : गुरुवार को क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के बाद भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स मिले-जुले रुख के साथ बंद हुए। सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। जबकि निफ्टी ने अपनी बढ़त बनाए रखी। दोपहर 3:30 बजे CAS के बाद बाजार बंद होने पर सेंसेक्स 21.86 अंक या 0.03 प्रतिशत गिरकर 74,314.59 पर था, जबकि निफ्टी 53 अंक या 0.23 प्रतिशत बढ़कर 23,270.60 पर पहुंच गया।

रियल्टी और फार्मा सेक्टर में 1.5 प्रतिशत से अधिक की बढ़त देखी गई। जबकि मीडिया में 1.35 प्रतिशत और ऑटो व मेटल सेक्टर में लगभग 1-1 प्रतिशत की तेजी आई। बैंकिंग इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। छोटे-मझोले शेयरों (ब्रॉडर मार्केट) का प्रदर्शन बेहतर रहा। इसके चलते मिडकैप 0.92 प्रतिशत और स्मॉलकैप 0.71 प्रतिशत ऊपर बंद हुए। मार्केट ब्रेथ पॉजिटिव रहा। आज 1,487 शेयरों में गिरावट के मुकाबले 2,480 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। जबकि इंडिया VIX में लगभग 7 प्रतिशत की गिरावट आई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि उम्मीद के मुताबिक यूएस फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने और बॉन्ड यील्ड में कमी से ग्लोबल इक्विटी मार्केट को कुछ समय के लिए सहारा मिला और महंगाई के धीरे-धीरे कम होने की उम्मीदें भी मजबूत हुईं। इसके बावजूद,घरेलू बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा। लेकिन हालिया गिरावट के बाद ‘वैल्यू बाइंग’के चलते बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और US टैरिफ के जोखिम के कारण ब्याज दरें और बढ़ाने के दौर की आशंका बनी हुई है, जिससे निवेशकों का रुख सतर्क रहने की संभावना है।

उन्होंने आगे कहा कि मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों का प्रदर्शन बेहतर बना रहा क्योंकि निवेशकों ने उन कंपनियों पर फोकस कर रहे हैं जिनकी कमाई की संभावना मजबूत है,जिनके पास अच्छे ऑर्डर हैं और जिनकी बैलेंस शीट मजबूत है। इनमें खासकर कैपिटल गुड्स,इंडस्ट्रियल,डिफेंस,पावर और हेल्थकेयर सेक्टर की कंपनियां शामिल रहीं।

HST वेल्थ के फाउंडर और CEO हरिसेलवन राधाकृष्णन ने कहा कि निफ्टी 23,300 के रेजिस्टेंस लेवल के करीब पहुंच रहा है। अगर यह मजबूती से इस लेवल के ऊपर बना रहता है तो रिकवरी 23,500 तक जा सकती है,जबकि इसके लिए सपोर्ट लेवल 23,200 और 23,000 पर बना हुआ है। जब तक निफ्टी 23,300 के लेवल को साफ तौर पर पार नहीं कर लेता,तब तक बाजार के कंसोलिडेशन मोड में रहने की संभावना है।

ग्लोब कैपिटल मार्केट में AVP-रिसर्च,विपिन कुमार ने कहा कि निफ्टी इंडेक्स में रिकवरी की रैली जारी रही और यह मामूली बढ़त के साथ फ्लैट-टू-पॉज़िटिव बंद हुआ। हालांकि,उन्होंने कहा कि पोज़िशनल चार्ट का स्ट्रक्चर अभी भी नेगेटिव बना हुआ है,जिसमें 23,450–23,600 के दायरे में कई रेजिस्टेंस लेवल हैं।

उन्होंने आगे कहा कि जब तक इंडेक्स इस रेजिस्टेंस ज़ोन के नीचे ट्रेड करता है तब तक उछाल पर बिकवाली की ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी अपनाने की सलाह होगी। नीचे की तरफ निफ्टी के लिए 23,100–23,000 का दायरा तत्काल सपोर्ट जोन का काम करेगा।

टेक्निकल व्यू

एनालिस्ट्स का कहना है कि मार्केट में तेजी लौटने के लिए निफ्टी को 23,300 के स्तर को मजबूती से पार करना होगा। बजाज ब्रोकिंग में रिसर्च के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पवित्रो मुखर्जी ने कहा कि निफ्टी ने अभी तक ‘हायर हाई-हायर लो’ का स्ट्रक्चर नहीं बनाया है,जिससे बाज़ार का मूड अभी भी सतर्क बना हुआ है। मंगलवार के हाई के पास स्थित 23,600 का लेवल एक अहम रेजिस्टेंस बना हुआ है। अगर निफ्टी 23,600 के ऊपर टिकता है,तो इससे मौजूदा गिरावट के थमने का संकेत मिलेगा। उन्होंने आगे कहा कि नीचे की तरफ 23,116 (मंगलवार और बुधवार का लो) का जोन अभी भी तत्काल सपोर्ट का काम कर रहा है। अगर यह स्तर टूटता है तो आने वाले सेशन में गिरावट का दौर 23,000 और 22,800 के स्तर तक बढ़ सकता है।

एक्सिस डायरेक्ट के रिसर्च हेड राजेश पलविया ने कहा कि टेक्निकल नज़रिए से देखें तो 23,350 के नीचे निफ्टी का रुख सावधानी के साथ मंदी (बेयरिश) वाला बना हुआ है। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 23,100 पर है। अगर यह इस लेवल के नीचे टूटता है तो इंडेक्स 22,800 की ओर जा सकता है। ऊपर की तरफ, 23,350 और 23,500 अहम रेजिस्टेंस लेवल बने हुए हैं। कच्चे तेल की कीमतों में और कमी या फेड का रुख कम सख्त होने से रिकवरी को सपोर्ट मिल सकता है और निकट भविष्य के सेंटीमेंट में सुधार हो सकता है।

HDFC सिक्योरिटीज में प्राइम रिसर्च के हेड देवर्स वकील ने कहा कि अगर निफ्टी 23,100 के पास स्थित हाल के स्विंग लो से ऊपर बना रहता है तो यह 23,500 के रेजिस्टेंस ज़ोन की ओर वापसी कर सकता है। हालांकि,23,100 के नीचे जाने पर निफ्टी 22,700 के पोजीशनल सपोर्ट तक गिर सकता है।

 

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Market Outlook : बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 17 सितंबर को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : 16 सितंबर को भारतीय इक्विटी इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए और निफ्टी 23,200 के ऊपर टिके रहने में कामयाब रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 332.63 अंक या 0.45 प्रतिशत बढ़कर 74,336.45 पर और निफ्टी 99.00 अंक या 0.43 प्रतिशत बढ़कर 23,217.60 पर बंद हुआ। आज लगभग 1913 शेयरों में बढ़त हुई, 2241 शेयरों में गिरावट आई और 180 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज़्यादा बढ़त वाले शेयरों में SBI लाइफ इंश्योरेंस,HDFC लाइफ,ITC,एक्सिस बैंक और SBI शामिल रहे। वहीं TCS,विप्रो,इंफोसिस,टेक महिंद्रा और बजाज फिनसर्व में गिरावट देखी गई।

IT और फार्मा को छोड़कर,बाकी सभी सेक्टर इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। FMCG और PSU बैंक इंडेक्स में 1% से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स बिना किसी बदलाव के बंद हुआ,जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स में मामूली गिरावट आई।

बोनान्ज़ा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि भारतीय बाजार आज बढ़त के साथ बंद हुआ। पिछले सेशन में आई भारी गिरावट के बाद इसमें रिकवरी हुई। सेंसेक्स लगभग 74,336 पर बंद हुआ और इसमें करीब 333 अंकों की बढ़त हुई,जबकि निफ्टी भी बढ़त के साथ 99 अंक ऊपर बंद हुआ। US में कच्चे तेल का स्टॉक बढ़ने से सप्लाई से जुड़ी कुछ चिंताएं कम हुईं,जिसके बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर लगभग 108 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई।

FMCG शेयरों में सबसे ज़्यादा तेजी रही और चार दिन से जारी इनकी गिरावट का सिलसिला थम गया। आने वाले त्योहारों के मौसम को देखते हुए निवेशकों के रुझान के कारण HUL,ITC,डाबर इंडिया,इमामी,गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और P&G हाइजीन के शेयरों में 2-4% की बढ़त हुई।

सरकार ने 2,000 रुपये से ज़्यादा के UPI मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन पर 0.4% MDR लागू किया है, जिसमें 75,000 रुपये और उससे ज़्यादा के ट्रांज़ैक्शन के लिए अधिकतम शुल्क 300 रुपये तय किया गया है। ये नए शुल्क 15 अक्टूबर से लागू होंगे। इससे 2020 में शुरू किया गया ज़ीरो MDR सिस्टम खत्म हो जाएगा। जिन छोटे व्यापारियों का मासिक UPI QR कलेक्शन 1 लाख रुपये तक है,उन्हें इससे छूट मिलेगी। P2P ट्रांज़ैक्शन पहले की तरह मुफ़्त रहेंगे। इस बदलाव से बैंकों,पेमेंट एग्रीगेटर्स और फिनटेक कंपनियों को अतिरिक्त रेवेन्यू मिल सकता है।

PhonePe के CEO समीर निगम ने कहा है कि नए MDR फ्रेमवर्क से कंपनी के IPO प्लान को मदद मिल सकती है और चालू वित्त वर्ष में इसकी लिस्टिंग हो सकती है। उम्मीद है कि यह IPO पूरी तरह से ‘ऑफर फॉर सेल’ होगा।

SEMICON India 2026 का आयोजन 17-19 सितंबर के बीच नई दिल्ली में किया जाएगा। इसमें 600 से ज्यादा एग्ज़िबिटर्स के शामिल होने की उम्मीद है,जिससे सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स शेयरों पर सबकी नजर रहेगी। सरकार ने 12 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी है, जिनमें से तीन में पहले से ही कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो चुका है।

NSE का IPO कल खुलने वाला है। बाजार में उतार-चढ़ाव ज्यादा रहने की संभावना है। सेक्टर-स्पेसिफिक डेवलपमेंट,कच्चे तेल की कीमतो और विदेशी निवेश इसके मुख्य कारण होंगे। NSE का यह बड़ा IPO प्राइमरी मार्केट में निवेशकों की दिलचस्पी का भी एक बड़ा टेस्ट होगा।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च,विनोद नायर का कहना है कि क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी और US फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीद (जिसका असर बाजार पहले ही पचा चुका है) से निवेशकों का भरोसा बढ़ा,जिससे भारतीय इक्विटी बाजार में भी तेजी आई। बैंक ऑफ जापान के पॉलिसी फैसले से पहले जापानी बॉन्ड यील्ड में नरमी आने से भी पॉजिटिव माहौल को और मजबूती मिली,जिससे पूरे एशिया में जोखिम लेने की इच्छा को सपोर्ट मिला।

घरेलू स्तर बाजार में बैंकिंग,FMCG और ऑटोमोबाइल सेक्टर में तेजी के कारण लार्ज-कैप शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त रही,जबकि IT सेक्टर में हालिया शानदार प्रदर्शन के बाद कुछ चुनिंदा शेयरों में मुनाफा वसूली दिखी।

निवेशक अब भविष्य में ब्याज दरों की चाल के बारे में और जानकारी पाने के लिए फेड चेयरमैन के बयान का इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद है कि इस गाइडेंस का असर ग्लोबल लिक्विडिटी की स्थिति,कैपिटल फ़्लो और फ़ाइनेंशियल मार्केट की निकट भविष्य की दिशा पर पड़ेगा।

HST वेल्थ के फाउंडर और CEO हरिसेल्वन राधाकृष्णन का कहना है कि मंगलवार को आई भारी गिरावट के बाद बुधवार को बैंकिंग शेयरों और कुछ बड़े शेयरों में वैल्यू बाइंग के चलते भारतीय इक्विटी मार्केट में थोड़ी रिकवरी देखने को नजर आई।

इस रिकवरी में बैंक निफ्टी सबसे आगे रहा। इसने 56,000 का स्तर फिर से हासिल किया और बेंचमार्क इंडेक्स को सपोर्ट दिया। हालांकि, रिकवरी में बहुत अधिक तेजी नहीं थी क्योंकि ब्रेंट क्रूड की कीमतें $107-$108 प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर बनी रहीं और फेडरल रिजर्व की पॉलिसी घोषणा से पहले अमेरिकी 10-साल के ट्रेजरी यील्ड 5% के आसपास रही।

ग्लोबल मार्केट में निवेशकों का रुख सावधानी के साथ पॉजिटिव रहा। बाजार फेड के फैसले का इंतज़ार कर रहे हैं। इंडिया VIX घटकर 13.15 पर आ गया,जो बताता है कि निकट भविष्य की चिंता में थोड़ी कमी आई है,हालांकि उतार-चढ़ाव हाल के स्तरों से ऊपर बना हुआ है।

तकनीकी स्थिति में मामूली सुधार हुआ है लेकिन यह अभी भी कमजोर है। निफ्टी 23,200 के ऊपर बंद हुआ। लेकिन 23,300-23,500 के दायरे में उसे अभी भी रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ रहा है। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 23,000 पर है और उसके बाद 22,800 पर अहम सपोर्ट है।

बैंक निफ्टी को 56,500-56,800 की ओर रिकवरी जारी रखने के लिए 56,000 के स्तर से ऊपर बने रहना होगा। अगर यह फिर से 56,000 के नीचे जाता है तो 55,500 का स्तर फिर से फोकस में आ सकता है।

फेडरल रिजर्व का ब्याज दरों पर फैसला और उसके साथ दी जाने वाली पॉलिसी गाइडेंस ही बाजार की अगली चाल तय करेगी। फेड की संतुलित कमेंट्री से रिकवरी में मदद मिल सकती है,जबकि सख्त रुख (हॉकिश आउटलुक),बॉन्ड यील्ड में फिर से तेजी या ब्रेंट क्रूड का $110 की ओर बढ़ना बिकवाली का दबाव फिर से बढ़ा सकता है और बाजार की रिकवरी को सीमित कर सकता है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के हेड ऑफ रिसर्च, वेल्थ मैनेजमेंट,सिद्धार्थ खेमका का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों,विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली और US फेडरल रिज़र्व के पॉलिसी फैसले से पहले बनी अनिश्चितता के बीच भारतीय शेयर बाजार में सावधानी का माहौल बने रहने की संभावना है।

PL कैपिटल में एडवाइजरी और डीलिंग के चीफ बिजनेस ऑफिसर विक्रम कसाट ने कहा कि आज भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव वाला दिन रहा। पिछले सेशन में हुई भारी बिकवाली के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में रिकवरी देखने को मिली। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें,बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी,रुपये में कमजोरी और FII की लगातार बिकवाली निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। आगे भी बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। ग्लोबल संकेत,कच्चे तेल की कीमतें,करेंसी में उतार-चढ़ाव और US फेड की पॉलिसी को लेकर उम्मीदें बाजार की दिशा तय करेंगी।

 

Trading Plan : कोई भी ट्रेड आज 3:40 बजे तक निपटा कर जाएं, कल का अनुमान अभी लगाना काफी मुश्किल

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Outlook : 23150 के नीचे बंद हुआ निफ्टी, जानिए 16 सितंबर को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : 15 सितंबर को भारतीय इक्विटी इंडेक्स शुरुआती बढ़त को बनाए नहीं रख पाए और गिरावट के साथ बंद हुए। निफ्टी 23,150 के नीचे चला गया। मार्केट बंद होने पर सेंसेक्स 777.94 अंक या 1.04 प्रतिशत गिरकर 74,003.82 पर और निफ्टी 279.50 अंक या 1.19 प्रतिशत गिरकर 23,118.60 पर बंद हुआ। लगभग 1132 शेयरों में बढ़त हुई, 3154 शेयरों में गिरावट आई और 163 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज़्यादा गिरावट वाले शेयरों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, श्रीराम फाइनेंस, अडानी एंटरप्राइजेज, इंटरग्लोब एविएशन और ग्रासिम इंडस्ट्रीज शामिल रहे। जबकि बढ़त वाले शेयरों में HCL टेक्नोलॉजीज, इंफोसिस, TCS, टेक महिंद्रा और विप्रो शामिल रहे।

IT को छोड़कर, बाकी सभी सेक्टर इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। रियल्टी इंडेक्स में 4% की गिरावट आई,जबकि ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, एनर्जी, मेटल, मीडिया और PSU बैंक इंडेक्स में 2-2% की गिरावट दर्ज की गई।

ब्रॉडर इंडेक्स का प्रदर्शन बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले कमज़ोर रहा। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 2% से ज़्यादा की गिरावट आई।

इक्विरस वेल्थ के मैनेजिंग डायरेक्टर अंकुर पुंज का कहना है कि आज बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। मज़बूत शुरुआत के बाद बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में तेजी ने आज ज़्यादातर समय बाज़ार का मूड कमजोर बनाए रखा।

बढ़ते इंपोर्ट बिल को लेकर बनी चिंताएं घरेलू करेंसी पर भारी पड़ रही हैं। डॉलर के मुकाबले रुपया आज 96 रुपए प्रति-डॉलर के स्तर को तोड़ने के करीब पहुंच गया। इससे इक्विटी बाजार पर और दबाव पड़ा। टेक्नोलॉजी शेयरों को छोड़कर,बैंकिंग,रियल्टी, टेलीकॉम और ऑटो शेयरों में बिकवाली के कारण बेंचमार्क इंडेक्स में भारी गिरावट देखी गई।

आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ़ रिसर्च,विनोद नायर ने कहा कि आज घरेलू बाजार दबाव में रहे और उनमें गिरावट जारी रही। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने सेंटीमेंट पर असर डाला। इस हफ़्ते होने वाली बड़े सेंट्रल बैंकों की बैठकों से पहले निवेशक सतर्क दिखे। बड़ी अर्थव्यवस्थाओं द्वारा पॉलिसी को और सख्त करने की उम्मीदें बढ़ रही हैं। लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों के माहौल को लेकर बनी चिंताओं ने ट्रेजरी यील्ड को कई सालों के उच्चतम स्तर के करीब बनाए रखा और लगातार विदेशी निवेश की निकासी के चलते उभरते बाज़ारों के सेंटीमेंट कमजोर हुए

मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों का प्रदर्शन बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले कमजोर रहा। ज़्यादातर सेक्टर में भारी गिरावट के साथ कारोबार बंद हुआ। हालांकि,IT शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया क्योंकि AI के धीमे विकास के संकेतों ने पारंपरिक IT सेवाओं में तेजी से बदलाव की चिंताओं को कम किया।

निकट भविष्य में,तेल की ऊंची कीमतें और ऊंची बॉन्ड यील्ड जोखिम लेने की इच्छा पर दबाव डाल सकती हैं। हालांकि मज़बूत घरेलू फंडामेंटल और घरेलू निवेशकों द्वारा वैल्यू बाइंग से गिरावट के जोखिम को सीमित करने में मदद मिल सकती है।

PL कैपिटल में एडवाइजरी और डीलिंग के चीफ बिजनेस ऑफिसर विक्रम कसाट का कहना है कि आज भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का बाजार के सेंटीमेंट पर बुरा असर पड़ा। ब्रेंट क्रूड $108 प्रति बैरल से ऊपर बना रहा, जबकि US 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5% के स्तर को पार कर गई, जिससे लंबे समय तक ब्याज दरें ऊंची रहने की उम्मीदें और मजबूत हुईं हैं।

FII की लगातार बिकवाली ने दबाव और बढ़ा दिया,हालांकि IT शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया और HDFC बैंक के CEO पद के उत्तराधिकार से जुड़ी खबरों के बाद बैंक के शेयरों में बढ़त देखी गई। आगे बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। बाजार की दिशा तय करने में कच्चे तेल,ग्लोबल यील्ड,FII निवेश और US फेड के फैसले की अहम भूमिका होगी।

निफ्टी टेक्निकल व्यू

कोटक सिक्योरिटीज में हेड इक्विटी रिसर्च,श्रीकांत चौहान का कहना है कि आज आज बेंचमार्क इंडेक्स में ऊपरी लेवल पर प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिली। निफ्टी 280 अंक गिरकर बंद हुआ,जबकि सेंसेक्स में 778 अंकों की गिरावट आई। टेक्निकल तौर पर गैप-अप ओपनिंग के बाद मार्केट को लगातार ऊपरी लेवल पर बिकवाली का दबाव झेलना पड़ा। दिन के उच्चतम स्तर से निफ्टी 450 अंक से ज़्यादा नीचे आया। इसके अलावा,डेली चार्ट पर एक लंबी बेयरिश कैंडल बनी है और इंट्राडे चार्ट पर अभी भी लोअर टॉप फॉर्मेशन बना हुआ है। यह मौजूदा लेवल से और कमज़ोरी आने का संकेत है।

श्रीकांत चौहान का मानना ​​है कि जब तक निफ्टी 23,250 के लेवल से नीचे ट्रेड कर रहा है,तब तक करेक्शन जारी रहने की संभावना है। नीचे की तरफ यह 23,000 तक गिर सकता है। गिरावट का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है,जिससे इंडेक्स 22,900-22,850 तक फिसल सकता है। दूसरी ओर 23,250 के ऊपर जाने पर, पुलबैक मूवमेंट 23,400-23,450 तक बढ़ सकता है। मौजूदा मार्केट का मिज़ाज उतार-चढ़ाव वाला है। इसलिए,डे ट्रेडर्स के लिए लेवल-बेस्ड ट्रेडिंग सबसे अच्छी रणनीति होगी।

SBI सिक्योरिटीज में टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च के वाइस प्रेसिडेंट सुदीप शाह का कहना है कि मंगलवार को निफ्टी में गैपअप के साथ शुरुआत हुई,लेकिन यह ऊपरी स्तरों पर टिक नहीं पाया और दिन के हाई से लगभग 500 अंकों की भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। डेली चार्ट पर,इसने एक बड़ी बेयरिश कैंडल बनाई,जो लगातार बने बिकवाली के दबाव का संकेत है।

टेक्निकल नज़रिए से देखें तो निफ्टी अभी अपने 200-डे EMA से लगभग 5% और 100-डे EMA से 4% नीचे ट्रेड कर रहा है जो कमज़ोर मार्केट स्ट्रक्चर को दिखाता है। डेली RSI 22.23 पर है और गिरावट के ट्रेंड में बना हुआ है,जो मज़बूत बेयरिश मोमेंटम को दर्शाता है। इसके अलावा,MACD हिस्टोग्राम नीचे की ओर मोमेंटम में तेज़ी का संकेत देता है। मार्केट में उतार-चढ़ाव भी बढ़ गया है। आज इंडिया VIX 9% से ज़्यादा उछल गया। यह निवेशकों के बीच बढ़ते डर का संकेत है।

आगे 3250-23280 का ज़ोन इंडेक्स के लिए तत्काल रेजिस्टेंस एरिया का काम कर सकता है। जब तक निफ्टी 23280 के स्तर से नीचे रहता है,तब तक निकट भविष्य में बाजार का रुख कमज़ोर रहने की संभावना है। आगे इंडेक्स पर बिकवाली का दबाव बना रह सकता है और यह 22950 की ओर खिसक सकता है। इसके बाद शॉर्ट टर्म में 22800 का स्तर भी देखने को मिल सकता है। मौजूदा मंदी के माहौल से निकलने और रिकवरी की संभावना को बेहतर बनाने के लिए निफ्टी के 23280 के ऊपर जा कर टिकने की जरूरत है।

बैंक निफ्टी व्यू

सुदीप शाह ने कहा कि बैंक निफ्टी भी ऊपर की ओर गैप के साथ खुला लेकिन ऊंचे स्तरों पर टिक नहीं पाया,जिसके कारण सेशन के दौरान इसमें भारी प्रॉफिट बुकिंग हुई। इसके बाद इंडेक्स में इंट्राडे हाई से 1200 अंकों से ज़्यादा की गिराव देखी गई और अंततः यह 55800 पर बंद हुआ। आज इसमें 1.43% की गिरावट। डेली चार्ट पर, इसने एक बड़ी बेयरिश कैंडल बनाई, जो ऊपरी स्तरों पर लगातार बने बिकवाली के दबाव को दर्शाती है।

तकनीकी नज़रिए से बैंक निफ्टी अभी अपने अहम मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है,जो निकट भविष्य में कमजोर ट्रेंड का संकेत है। डेली RSI 33.23 पर है और नीचे की ओर जा रहा है,जिससे पता चलता है कि मंदी का मोमेंटम हावी है।

आगे इसके लिए 55400-55300 का ज़ोन तत्काल सपोर्ट का काम कर सकता है। 55300 के स्तर से नीचे जाने पर गिरावट का दबाव बढ़ सकता है,जिससे 54800 और उसके बाद शॉर्ट टर्म में 54300 की ओर गिरावट का रास्ता खुल सकता है। ऊपर की ओर 56300-56400 का ज़ोन एक अहम रेजिस्टेंस एरिया के तौर पर काम कर सकता है। किसी भी अच्छी रिकवरी का संकेत देने के लिए इंडेक्स को इस बाधा से ऊपर जा कर टिके रहने की जरूरत है।

 

Market Trend : बाजार पर हावी हुआ क्रूड, बॉन्ड यील्ड और दरें बढ़ने का ट्रिपल टेंशन, इंट्राडे में शॉर्ट करें लेकिन मुनाफा समेट कर जाएं

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market This Week : इस हफ्ते 2% टूटे सेंसेक्स-निफ्टी,जानिए अगले हफ्ते कैसी रह सकती है इनकी चाल

Market This Week : 11 सितंबर को मेटल,रियल्टी और PSU बैंक शेयरों में बिकवाली के बीच,उतार-चढ़ाव भरे सेशन में भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स दिन के निचले स्तर से तेजी से सुधरे और मामूली गिरावट के साथ बंद हुए। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर लगभग $109 प्रति बैरल पर आ गया, जिससे मार्केट गैप-डाउन खुला और ज्यादातर समय नेगेटिव जोन में रहा। निफ्टी ने 23,231.40 का इंट्राडे लो बनाया,जबकि सेंसेक्स 740 अंक तक गिर गया। हालांकि, बाद में क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी से बिकवाली का दबाव कम हुआ,जिससे इंडेक्स दिन के निचले स्तर से रिकवर हुए और मामूली नुकसान के साथ बंद हुए।

कारोबार के अंत में सेंसेक्स 120.83 अंक या 0.16 प्रतिशत गिरकर 74,781.76 पर और निफ्टी 79.70 अंक या 0.34 प्रतिशत गिरकर 23,398.10 पर बंद हुआ। वीकली बेसिस पर देखें तो इस हफ्ते BSE सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 2% की गिरावट आई।

बाजार की वीकली चाल पर एक नजर

कोटक सिक्योरिटीज में VP टेक्निकल रिसर्च, अमोल अठावले का कहना है कि आज खत्म हुए हफ्ते में बेंचमार्क इंडेक्स में तेज गिरावट आई। निफ़्टी लगभग 2 प्रतिशत नीचे बंद हुआ,जबकि सेंसेक्स 1,700 अंक गिर गया। सेक्टरों की बात करें तो लगभग सभी अहम सेक्टर इंडेक्स में ऊपरी स्तरों पर प्रॉफिट बुकिंग रही। लेकिन रियल्टी और IT इंडेक्स को सबसे अधिक नुकसान हुआ। रियल्टी 6.50 प्रतिशत और IT 5.75 प्रतिशत नीचे गिर कर बंद हुए।

इस हफ्ते मार्केट ने 23,800/76,000 के अहम सपोर्ट जोन को तोड़ा और इसके बाद बिकवाली का दबाव बढ़ गया। टेक्निकल तौर पर डेली और इंट्राडे चार्ट पर मार्केट लोअर हाई और लोअर लो का पैटर्न दिखा रहा है और वीकली चार्ट पर एक लंबी बेयरिश कैंडल बनी है,जो काफी हद तक नेगेटिव संकेत है।

अगले हफ्ते कैसा रह सकता है बाजार?

अमोल अठावले का मानना ​​है कि शॉर्ट-टर्म के लिए मार्केट का ट्रेंड कमजोर है,लेकिन ओवरसोल्ड लेवल से संकेत मिलता है कि मौजूदा लेवल से एक पुलबैक रैली की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। ट्रेडर्स के लिए,तत्काल सपोर्ट जोन 23,200/74,200 के आसपास है। अगर मार्केट इस लेवल से ऊपर ट्रेड करने में कामयाब रहता है,तो 23,500/75,000 तक उछाल जारी रह सकता है। इसके बाद और तेजी आ सकती है,जिससे इंडेक्स 23,700–23,750/75,500–75,800 के आसपास पहुंच सकता है। इसके विपरीत अगर मार्केट 23,200/74,200 से नीचे गिरता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ने की संभावना है। इस लेवल से नीचे जाने पर मार्केट 23,000–22,900/73,700–73,500 के लेवल को फिर से टेस्ट कर सकता है।

बैंक निफ्टी के लिए सबसे नजदीकी सपोर्ट 56,000 पर है। इस लेवल के ऊपर जाने पर यह 57,000–57,500 की ओर बढ़ सकता है। नीचे की तरफ, अगर यह 56,000 से नीचे गिरता है तो इसके 55,500–55,200 तक गिरने की संभावना बढ़ जाती है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज़ में हेड ऑफ़ रिसर्च,वेल्थ मैनेजमेंट सिद्धार्थ खेमका का कहना है कि भारतीय इक्विटी बाजार पर दबाव बने रहने की संभावना है। ब्रेंट क्रूड की कीमत US$100 प्रति बैरल के स्तर को पार कर US$110 प्रति बैरल की ओर बढ़ गई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण सप्लाई में रुकावट की चिंताएं बढ़ गई हैं।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़त हुई है, जिससे US 10-ईयर ट्रेजरी यील्ड 5% के करीब पहुंच गई है। इससे इक्विटी वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ रहा है और फेड के ज्यादा सख्त रुख अपनाने की उम्मीदें भी बढ़ रही हैं। रुपया गिरकर ₹95.6/US$ पर आ गया है। जबकि FII की लगातार बिकवाली ने दबाव को और बढ़ा दिया है।

अगले हफ्ते निवेशक भारत के अगस्त के CPI और WPI महंगाई के आंकड़ों, US फ़ेड की पॉलिसी से जुड़े फैसले,US में रिटेल बिक्री और इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन पर नजर रखेंगे। साथ ही कच्चे तेल की कीमतें,रुपये की चाल और ग्लोबल यील्ड भी बाजार के लिए अहम होंगे।

बोनान्जा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि निकट भविष्य में बाजार की दिशा तय करने में कच्चे तेल की कीमतें और पश्चिम एशिया में हो रही घटनाओं की बड़ी भूमिका होगी। हालांकि,घरेलू संस्थागत निवेशकों का मजबूत निवेश बाजार को सहारा दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में कोई भी बड़ी गिरावट भारतीय इक्विटी बाजार को राहत दे सकती है। इसलिए, चुनिंदा और स्टॉक-स्पेसिफिक रणनीति अपना सही रहेगा। ऐसी कंपनियों पर फोकस करें जिनकी अर्निंग की संभावना मजबूत है और जिनका वैल्यूएशन सही है।

 

Market Outlook : गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 15 सितंबर को कैसी रह सकती है इसकी चाल

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

अमेरिका-ईरान में तेज हुई जंग: CENTCOM ने तबाह किए 5 ईरानी तेल टैंकर, जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर हमला

अमेरिका-ईरान में तेज हुई जंग: CENTCOM ने तबाह किए 5 ईरानी तेल टैंकर, जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर हमला

US Iran conflict

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध थमने का नाम ही रहा है। अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों पर मिसाइल हमलों के बाद अमेरिकी नौसेना ने ईरान के पांच तेल टैंकरों पर हमला किया है। अमेरिका ने ओमान की खाड़ी में 4 और खार्ग द्वीप के पास 1 तेल टैंकर को निशाना बनाया। अमेरिका ने ईरान की 36 संस्थाओं पर नए प्रतिबंध भी लगाए हैं। इस बीच ईरान ने भी एक अमेरिकी ड्रोन कब्जे में लेने का दावा किया है। ALSO READ: ईरान-अमेरिका युद्ध का नया दौर, फिर बढ़ीं तेल की कीमतें

 

CENTCOM ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, सेंटकॉम बलों ने 8 सितंबर को 5 ईरानी कच्चे तेल के वाहकों को नष्ट कर दिया, जब इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पिछले 2 दिनों में दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को निशाना बनाया था। अमेरिकी युद्धपोत ने ईरानी हमलों के प्रयासों को सफलतापूर्वक विफल कर दिया और क्षेत्रीय जल में गश्त करना जारी रखा। किसी भी अमेरिकी कर्मी को नुकसान नहीं पहुंचा है।

ईरान का जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर हमला

ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने की ओर 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन की सेना ने दावा किया कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने 18 मिसाइलों को मार गिराया, जबकि दो मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। इस बीच ईरान ने भी एक अमेरिकी ड्रोन कब्जे में लेने का दावा किया है।

 

कुवैत और बहरीन में तेल टैंकरों को धमकी

अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने कुवैत और बहरीन के बंदरगाहों के पास मौजूद कुछ तेल टैंकरों को चेतावनी दी है। ईरान के IRGC ने कहा है कि इन जहाजों के चालक दल तुरंत जहाज खाली कर दें। ALSO READ: Top News 9 September: ईरान के 5 तेल टैंकरों पर अमेरिकी हमला, नेपाल में 5.0 का भूकंप; राघव चड्ढा बने दिल्ली के वोटर

 

महंगा हुआ क्रूड 

मिडिल ईस्ट में जंग तेज होने से कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर पहुंच गई है। ब्रेंट क्रूड 99.36 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 94.37 डॉलर प्रति बैरल हो गया। इंडियन बास्केट में कच्चे तेल के दाम बढ़कर 106.3 डॉलर प्रति बैरल हो गए।

Iran-US War Update: ईरान ने अमेरिकी सैनिक को मारने या पकड़ने पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया, महिलाओं को देगा दोगुनी रकम

Iran-US War News Update: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच तेहरान ने एक बड़ा और बेहद चौंकाने वाला ऐलान किया है। ईरान ने अमेरिकी सैनिक को मारने या पकड़कर ईरानी सेना को सौंपने वाले व्यक्ति को 30 हजार अमेरिकी डॉलर (करीब 25 लाख रुपये) का इनाम देने की घोषणा की है। खास बात यह है कि अगर यह कार्रवाई किसी ईरानी महिला द्वारा की जाती है, तो उसे इनाम की रकम दोगुनी दी जाएगी।

ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA के मुताबिक, ईरानी सेना के प्रमुख अमीर हातमी ने इस इनाम की घोषणा की है। हातमी ने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों ने इस तरह की कार्रवाई में शामिल होने की इच्छा जताई थी, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिकी सैनिक को पकड़ने या मारने की कार्रवाई कहां और कब की जानी है।

अमेरिकी सैनिक को पकड़ने पर भी मिलेगा इनाम

हातमी ने कहा कि जो भी व्यक्ति किसी आक्रमणकारी अमेरिकी सैन्यकर्मी को मारता है या पकड़कर ईरानी सेना को सौंपता है, उसे 30 हजार डॉलर या 5 अरब तोमान का इनाम दिया जाएगा। ईरान में तोमान एक अनौपचारिक करेंसी है, जिसका इस्तेमाल आम तौर पर रियाल के साथ किया जाता है। ईरानी सेना प्रमुख ने इसके साथ ही महिलाओं के लिए अलग घोषणा करते हुए कहा कि यदि कोई बहादुर ईरानी महिला ऐसी कार्रवाई करती है, तो उसे दोगुना इनाम दिया जाएगा।

अमेरिका को क्षेत्र छोड़ने की चेतावनी

इनाम की घोषणा के साथ ही हातमी ने अमेरिका को क्षेत्र से अपनी सेना हटाने की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेनाओं को अब फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एंट्री करने की अनुमति नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य एवं राजनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है। हालांकि, संघर्ष के दौरान ईरान के भीतर अमेरिकी जमीनी सैनिकों की किसी बड़ी तैनाती की जानकारी सामने नहीं आई है।

ईरान में अमेरिकी जमीनी सैनिकों की तैनाती नहीं

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में एक बड़े बचाव अभियान के दौरान करीब 200 अमेरिकी सैन्यकर्मी और 170 से अधिक विमान शामिल हुए थे। इस अभियान का उद्देश्य हादसे का शिकार हुए F-15 के वेपन सिस्टम ऑफिसर को सुरक्षित निकालना था। इसके अलावा ईरान के अंदर अमेरिकी जमीनी सैनिकों की किसी बड़ी तैनाती की जानकारी नहीं है। ऐसे में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने के लिए इनाम की घोषणा का ऐलान खास तौर पर तनाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

कैसे शुरू हुआ अमेरिका-ईरान संघर्ष?

अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ, जब अमेरिकी और इजरायली सेना ने ईरान के खिलाफ हमले किए। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच लड़ाई जारी रही। बाद में अप्रैल में संघर्ष विराम हुआ। इसके बाद जून में शांति वार्ता के लिए एक संभावित ढांचा तैयार करने की कोशिश की गई। लेकिन बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी और प्रयास विफल हो गया।

इसके बाद भी अमेरिका और ईरान के बीच छिटपुट सैन्य हमले जारी रहे हैं। खासकर दक्षिणी ईरान और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तनाव देखने को मिला है। हालांकि मध्यस्थों के जरिए दोनों पक्षों के बीच अप्रत्यक्ष संपर्क जारी रहने की बात कही गई है, लेकिन अब तक कोई बड़ा कूटनीतिक समाधान सामने नहीं आया है।

संघर्ष में 17 अमेरिकी जवानों की मौत

US मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 17 अमेरिकी सैन्यकर्मी मारे जा चुके हैं। इनमें सबसे हालिया मौतों की जानकारी जुलाई में सामने आई थी। बड़ी बात यह है कि इन सभी अमेरिकी सैन्यकर्मियों की मौत ईरान के बाहर हुई। इनमें जॉर्डन और इराक में मारे गए अमेरिकी सैनिक भी शामिल हैं।

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ईरान की ओर से अमेरिकी सैनिकों को मारने या पकड़ने पर इनाम की घोषणा ऐसे समय हुई है जब दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव के साथ-साथ राजनयिक स्तर पर भी गतिरोध बना हुआ है। ऐसे में इस ऐलान से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल, ईरान के इस घोषणा पर अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पलटवार का इंतजार है।