Iran-US War Update: ईरान ने अमेरिकी सैनिक को मारने या पकड़ने पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया, महिलाओं को देगा दोगुनी रकम

Iran-US War News Update: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच तेहरान ने एक बड़ा और बेहद चौंकाने वाला ऐलान किया है। ईरान ने अमेरिकी सैनिक को मारने या पकड़कर ईरानी सेना को सौंपने वाले व्यक्ति को 30 हजार अमेरिकी डॉलर (करीब 25 लाख रुपये) का इनाम देने की घोषणा की है। खास बात यह है कि अगर यह कार्रवाई किसी ईरानी महिला द्वारा की जाती है, तो उसे इनाम की रकम दोगुनी दी जाएगी।

ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA के मुताबिक, ईरानी सेना के प्रमुख अमीर हातमी ने इस इनाम की घोषणा की है। हातमी ने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों ने इस तरह की कार्रवाई में शामिल होने की इच्छा जताई थी, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिकी सैनिक को पकड़ने या मारने की कार्रवाई कहां और कब की जानी है।

अमेरिकी सैनिक को पकड़ने पर भी मिलेगा इनाम

हातमी ने कहा कि जो भी व्यक्ति किसी आक्रमणकारी अमेरिकी सैन्यकर्मी को मारता है या पकड़कर ईरानी सेना को सौंपता है, उसे 30 हजार डॉलर या 5 अरब तोमान का इनाम दिया जाएगा। ईरान में तोमान एक अनौपचारिक करेंसी है, जिसका इस्तेमाल आम तौर पर रियाल के साथ किया जाता है। ईरानी सेना प्रमुख ने इसके साथ ही महिलाओं के लिए अलग घोषणा करते हुए कहा कि यदि कोई बहादुर ईरानी महिला ऐसी कार्रवाई करती है, तो उसे दोगुना इनाम दिया जाएगा।

अमेरिका को क्षेत्र छोड़ने की चेतावनी

इनाम की घोषणा के साथ ही हातमी ने अमेरिका को क्षेत्र से अपनी सेना हटाने की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेनाओं को अब फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एंट्री करने की अनुमति नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य एवं राजनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है। हालांकि, संघर्ष के दौरान ईरान के भीतर अमेरिकी जमीनी सैनिकों की किसी बड़ी तैनाती की जानकारी सामने नहीं आई है।

ईरान में अमेरिकी जमीनी सैनिकों की तैनाती नहीं

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में एक बड़े बचाव अभियान के दौरान करीब 200 अमेरिकी सैन्यकर्मी और 170 से अधिक विमान शामिल हुए थे। इस अभियान का उद्देश्य हादसे का शिकार हुए F-15 के वेपन सिस्टम ऑफिसर को सुरक्षित निकालना था। इसके अलावा ईरान के अंदर अमेरिकी जमीनी सैनिकों की किसी बड़ी तैनाती की जानकारी नहीं है। ऐसे में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने के लिए इनाम की घोषणा का ऐलान खास तौर पर तनाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

कैसे शुरू हुआ अमेरिका-ईरान संघर्ष?

अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ, जब अमेरिकी और इजरायली सेना ने ईरान के खिलाफ हमले किए। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच लड़ाई जारी रही। बाद में अप्रैल में संघर्ष विराम हुआ। इसके बाद जून में शांति वार्ता के लिए एक संभावित ढांचा तैयार करने की कोशिश की गई। लेकिन बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी और प्रयास विफल हो गया।

इसके बाद भी अमेरिका और ईरान के बीच छिटपुट सैन्य हमले जारी रहे हैं। खासकर दक्षिणी ईरान और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तनाव देखने को मिला है। हालांकि मध्यस्थों के जरिए दोनों पक्षों के बीच अप्रत्यक्ष संपर्क जारी रहने की बात कही गई है, लेकिन अब तक कोई बड़ा कूटनीतिक समाधान सामने नहीं आया है।

संघर्ष में 17 अमेरिकी जवानों की मौत

US मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 17 अमेरिकी सैन्यकर्मी मारे जा चुके हैं। इनमें सबसे हालिया मौतों की जानकारी जुलाई में सामने आई थी। बड़ी बात यह है कि इन सभी अमेरिकी सैन्यकर्मियों की मौत ईरान के बाहर हुई। इनमें जॉर्डन और इराक में मारे गए अमेरिकी सैनिक भी शामिल हैं।

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ईरान की ओर से अमेरिकी सैनिकों को मारने या पकड़ने पर इनाम की घोषणा ऐसे समय हुई है जब दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव के साथ-साथ राजनयिक स्तर पर भी गतिरोध बना हुआ है। ऐसे में इस ऐलान से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल, ईरान के इस घोषणा पर अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पलटवार का इंतजार है।

Iran-US War Update: ईरान और ओमान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ी डील, अब पूरी तरह खुलने के लिए अमेरिका की क्या होगी भूमिका?

Iran-US War News Update: ईरान और ओमान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल रूट में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक अहम समझौता किया है। इस डील के तहत होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरने वाले जहाजों के लिए निर्धारित एंट्री-एग्जिट रूट तय किए गए हैं। इसे लंबे समय से चले आ रहे समुद्री तनाव और अव्यवस्था के बीच एक बड़ी कूटनीतिक प्रगति के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, अभी इस समझौते पर तकनीकी स्तर की बातचीत जारी है। दोनों देशों की ओर से जॉइंट आधिकारिक बयान आना बाकी है। इसके बावजूद, ईरान और ओमान ने सुरक्षित वाणिज्यिक आवाजाही के लिए अलग-अलग समुद्री कॉरिडोर तैयार करने पर सहमति बना ली है।

क्या है समझौते का पूरा प्लान?

समझौते के मुताबिक, ईरान आने वाले यानी इनबाउंड कमर्शियल जहाजों की निगरानी करेगा। जबकि ओमान बाहर जाने वाले जहाजों यानी आउटबाउंड ट्रैफिक को संभालेगा। इसके लिए अलग-अलग निर्धारित शिपिंग लेन बनाई गई हैं। इनका उद्देश्य जहाजों के बीच टक्कर, सुरक्षा संबंधी घटनाओं और समुद्री तनाव को कम करना है। यह व्यवस्था दोनों देशों के बीच स्वतंत्र बातचीत के बाद तैयार हुई है।

इसका मकसद समुद्री ट्रैफिक को व्यवस्थित करना है। लेकिन साथ ही ईरान और ओमान की क्षेत्रीय संप्रभुता से समझौता न करना भी है। फिलहाल दोनों देशों की तकनीकी टीमें ऑपरेशनल प्रोटोकॉल, संचार व्यवस्था और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े नियमों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद संयुक्त औपचारिक घोषणा किए जाने की उम्मीद है।

सिर्फ रास्ते तय होने से नहीं खुलेगा होर्मुज

यह समझौता महत्वपूर्ण है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि होर्मुज जलडमरूमध्य तुरंत पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल ट्रैफिक के लिए खोल दिया जाएगा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि पूर्ण रूप से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही बहाल करने का फैसला व्यापक भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

तेहरान की प्रमुख मांगों में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी जैसी कार्रवाइयों का अंत, सैन्य धमकियों को रोकना और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत शामिल है। जब तक इन बाहरी परिस्थितियों पर सहमति नहीं बनती, तब तक नए निर्धारित समुद्री कॉरिडोर कड़ी निगरानी के तहत संचालित किए जाएंगे।

दुनिया के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है होर्मुज?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम एनर्जी चोकपॉइंट्स में से एक है। दुनिया की करीब 20 प्रतिशत पेट्रोलियम आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है। इसके अलावा बड़ी मात्रा में एलएनजी यानी तरलीकृत प्राकृतिक गैस भी इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचती है।

यही वजह है कि इस जलडमरूमध्य में तनाव या जहाजों की आवाजाही में किसी भी तरह की बड़ी रुकावट का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ता है। पिछले महीनों में बढ़े तनाव और समुद्री ट्रैफिक में आई बाधाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ी। कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा और जहाजों के लिए युद्ध जोखिम बीमा (War-Risk Insurance) की लागत भी काफी बढ़ गई।

क्या वैश्विक तेल बाजार को मिलेगी राहत?

ईरान और ओमान के बीच हुआ यह समझौता वैश्विक बाजारों के लिए अब तक का सबसे स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि होर्मुज संकट का कूटनीतिक समाधान संभव है। हालांकि, अभी इसे पूरी तरह संकट का अंत नहीं माना जा सकता। समुद्री मार्ग की पूर्ण और सामान्य आवाजाही इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान, अमेरिका और अन्य संबंधित पक्षों के बीच व्यापक भू-राजनीतिक मुद्दों पर किस तरह की सहमति बनती है। इसलिए फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उम्मीद जरूर जगी है। लेकिन पूरी तरह सामान्य स्थिति लौटने में अभी कई अड़चनें बाकी हैं।

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US-Iran War Update: होर्मुज में जहाजों पर हुए हमले पर भारत ने दी तीखी प्रतिक्रिया, गाजा संकट पर भी जताई चिंता

US-Iran War Update: भारत ने पश्चिम एशिया में बढ़ती हिंसा और तनाव को गंभीर रूप से चिंताजनक करार दिया है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य में कई समुद्री जहाजों पर हुए हालिया हमलों की कड़ी निंदा करते हुए क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय समुद्री रूट्स में व्यापार जल्द बहाल करने की मांग की। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की मध्य पूर्व पर आयोजित खुली बहस के दौरान संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने क्षेत्र में हिंसा और तनाव को बेहद चिंताजनक बताते हुए तत्काल तनाव कम करने की अपील की।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने पश्चिम एशिया को भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा, “क्षेत्र में थोड़े समय हमले रुकने के बाद फिर हमले शुरू हो गए हैं जो चिंताजनक है। यह बेहद गंभीर स्थिति है और भारत तत्काल तनाव कम करने का आग्रह करता है।”

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मंगलवार को पश्चिम एशिया की स्थिति पर आयोजित एक चर्चा में हरीश ने इस महीने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे जीएफएस गैलेक्सी, एमटी अल बहियाह और एमटी मोम्बासा सहित कई जहाजों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की।

उन्होंने कहा, “इन हमलों में कई भारतीय नागरिक घायल हुए, जिनमें कुछ गंभीर रूप से घायल हैं। एक भारतीय नागरिक को अपनी जान गंवानी पड़ी जबकि एक अन्य अब भी लापता है। भारत, नाविकों को निशाना बनाने और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर सुरक्षित एवं स्वतंत्र नौवहन बाधित करने वाली सभी हिंसक घटनाओं की लगातार निंदा करता रहा है।”

भारत ने क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता के हित में संवाद और कूटनीति के रास्ते पर लौटने की पुरजोर वकालत की। हरीश ने कहा, “क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों और असैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना तुरंत बंद होना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप क्षेत्र के समुद्री मार्गों पर बिना रोकटोक नौवहन और व्यापार को जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए।”

कमर्शियल जहाजों पर हमले तेज

अमेरिका और इजरायल के ईरान के खिलाफ जारी युद्ध के बीच छह जुलाई से कमर्शियल जहाजों पर हमलों के बाद ईरान ने 11 जुलाई को एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद घोषित कर दिया। संयुक्त राष्ट्र के एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए आर्थिक एवं सामाजिक आयोग के अनुसार, संघर्ष से पहले प्रतिदिन 100 से अधिक जहाज इस मार्ग से गुजरते थे। सात जुलाई तक यह संख्या 49 तक पहुंच गई थी, लेकिन जुलाई के मध्य तक घटकर केवल 8 से 15 जहाज प्रतिदिन रह गई।

हरीश ने कहा कि इस क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता से भारत के महत्वपूर्ण हित जुड़े हैं क्योंकि भारत का व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति तंत्र पश्चिम एशिया से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि भारत और पश्चिम एशिया के बीच लगभग 180 अरब डॉलर का वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार, 31 अरब डॉलर से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश तथा केवल खाड़ी सहयोग परिषद के देशों से 52 अरब डॉलर से अधिक का वार्षिक प्रेषण (रेमिटेंस) होता है। इनका भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा प्रभाव है।

उन्होंने कहा कि लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी क्षेत्र में रहकर काम करते हैं। उनकी सुरक्षा एवं कल्याण भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत ने सुरक्षा परिषद में यह भी कहा कि दुनिया का ध्यान केवल होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर केंद्रित है और ऐसे में गाजा पट्टी में जारी गंभीर मानवीय संकट की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। हरीश ने कहा कि नागरिकों की मौत और असैन्य बुनियादी ढांचे का विनाश चिंता का बेहद गंभीर विषय है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

फिलिस्तीन को मानवीय सहायता जारी

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों, विशेष रूप से प्रस्ताव 2803, को पूरी तरह लागू करने की आवश्यकता दोहराई। भारत ने बताया कि वह अब तक फिलिस्तीन को लगभग 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर की विकास और मानवीय सहायता उपलब्ध करा चुका है तथा UNRWA (संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी) के प्रमुख दानदाताओं में शामिल है।

दो-राष्ट्र समाधान पर दोहराया समर्थन

भारत ने एक बार फिर इजरायल-फिलिस्तीन विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अपने पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि वह बातचीत के जरिए दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन किया है। भारत चाहता है कि एक संप्रभु, स्वतंत्र और सक्षम फिलिस्तीनी राष्ट्र का गठन हो, जो सुरक्षित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर इज़राइल के साथ शांति से रह सके।

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Market Insight : आज इंडेक्स पर रखनी होगी लेवल बेस्ड रणनीति, चुनिंदा शेयरों में शानदार मौके,वहीं करें फोकस

Market Insight :आज निफ्टी की वीकली एक्सपायरी का दिन है। कल निफ्टी और बैंक निफ्टी ने अहम स्तरों को डिफेंड किया। निफ्टी पर 24,150-24,180 का जोन सबसे अहम है। वहीं, बैंक निफ्टी में 57,500 का ऑल इम्पॉर्टेंट लेवल है। ऐसे में अगर गिफ्ट निफ्टी सही हुआ तो वो लेवल्स वापस टेस्ट होंगे। हालांकि ऐसा कोई कारण नहीं दिख रहा जिससे ये टूटें। ये कहना है सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल का।

उन्होंने आगे कहा कि कच्चा तेल वहीं है जहां हम कल छोड़कर गए थे और एशियाई बाजारों में भी कोई गिरावट नहीं है। कल HDFC बैंक ने बैंक निफ्टी का सेंटीमेंट खराब किया। आज शायद IT शेयरों में थोड़ी मुनाफावसूली आ जाए। US में सेमिकंडक्टर शेयर भागे हैं। कोरिया भी ऊपर है। आज MNC पावर से जुड़े शेयर जैसे GE Vernova और Hitachi फोकस में होंगे।

बाजार: आज के संकेत

आज का सबसे बड़ा संकेत है निफ्टी की वीकली एक्सपायरी। ऑप्शन राइटर्स की बेसिक रेंज 24,050-24,350 है। आज इसी रेंज को स्मार्ट तरीके से ट्रेड करने की जरूरत है। FIIs की कल कैश और इंडेक्स फ्यूचर्स में छोटी बिकवाली रही। कच्चा तेल अभी भी $88-89 के बीच बना हुआ है। डॉलर इंडेक्स 101 के आसपास बना हुआ है। कुल मिलाकर संकेत वहीं हैं जहां हम कल छोड़ कर गए थे। ऐसे में आज इंडेक्स पर लेवल बेस्ड रणनीति रखनी होगी। चुनिंदा शेयरों में शानदार मौके हैं,वहीं फोकस करें।

आज SBI फंड्स मैनेजमेंट की लिस्टिंग भी है। अगर अच्छे प्रीमियम पर लिस्ट हो तो मुनाफावसूली करें। RBI स्वाप विंडो के तहत भारत में $17.4 Bn के FCNR(B) डिपॉजिट आए हैं। डिपॉजिट उम्मीद से ज्यादा रहा है,कुल राशि $50-55 Bn से भी ज्यादा हो सकती है। डॉलर-रुपया पर नजर रखें,रिकॉर्ड निचले स्तर के हम काफी करीब हैं।

ट्रंप की टैरिफ धमकियां फिर लौटीं

ट्रंप की कनाडा को टैरिफ लगाने की चेतावनी आई है। कनाडा के कुछ सामानों पर 50% तक टैरिफ लगाने की धमकी आई है। US अल्कोहल,गाड़ियों,डेयरी प्रोडक्ट्स के साथ कनाडा के भेदभाव के जवाब में यह कदम उठाने की बात कही गई है। 50% टैरिफ की लिस्ट में दूध,क्रीम,ऑटो इक्विपमेंट और हॉकी के उपकरण शामिल हैं। एनर्जी,पोटाश,मछली और क्रिटिकल मिनरल्स लिस्ट से बाहर हैं। US-कनाडा-मेक्सिको समझौते के तहत आने वाले प्रोडक्ट्स पर छूट नहीं होगी।

1930 के टैरिफ अधिनियम की धारा 338 के तहत टैरिफ लगेंगे। धारा 338 US प्रेसिडेंट को 50% तक ड्यूटी लगाने का अधिकार देता है। इसके तहत अमेरिकी प्रोडक्ट्स के साथ भेदभाव करने वाले देशों पर टैरिफ का अधिकार है। कनाडा के ऊर्जा मंत्री के बयान में कहा गया है “कोई प्रतिक्रिया नहीं देने जा रहे हैं,हम यह सब पहले भी देख चुके हैं”।

US-ईरान युद्ध: ताजा हालात

US ने ईरान पर हमलों का एक और दिन शुरू किया। सोमवार को 4 PM ET से हमलों का 10वां दिन शुरू हुआ। अमेरिका की तरफ से कहा गया है कि हर बार जब ईरान किसी US सैनिक को मारेगा,उसे उसकी कई गुना कीमत चुकानी होगी

कल दोपहर को ईरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि US के साथ युद्ध को लेकर मध्यस्थों की तरफ से प्रस्ताव मिले हैं। MoU तभी मायने रखता है जब सभी पक्ष उसके लिए प्रतिबद्ध हों। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज पर ईरान के संप्रभु अधिकारों पर कोई समझौता नहीं होगा। ईरान के गृह मंत्री इस्कंदर मौमनी (Eskandar Momeni) सोमवार को पाकिस्तान का दौरा करेंगे। दोरे या किसी प्रस्ताव को लेकर अब तक कोई नई जानकारी नहीं मिली है।

10 दिन का सीजफायर?

रॉयटर्स के मुताबिक कतर और अन्य मध्यस्थों ने 10 दिन के सीजफायर का प्रस्ताव दिया था। एक यूएस अधिकारी ने कहा है कि ट्रंप इस समय जहाजों पर हमले के लिए ईरान को सजा देने पर फोकस कर रहे हैं। US हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक राष्ट्रपति कोई दूसरा रास्ता नहीं चुनते। युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं।

सऊदी अरब की समुद्री नाकेबंदी

ईरान समर्थित हूती ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया है। ये नाकेबंदी यमन की राजधानी सना पर सऊदी हमलों के जवाब में की गई है। हूती प्रवक्ता याह्या सारी (Yahya Saree) ने कहा है कि सऊदी जहाजों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लागू है। सऊदी अरब फिलहाल अपने तेल एक्सपोर्ट के बड़े हिस्से के लिए इसी रेड सी रूट का इस्तेमाल करता है। पिछले महीने सऊदी अरब ने 4.19 Mn बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का एक्सपोर्ट किया। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने Bab el-Mandeb स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने शुरू किए हैं। सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा कि 1982 UN Convention on Law of Sea के तहत कदम उठाएंगे।

बैंक: प्राइवेट Vs PSU बैंक

कल निफ्टी PSU बैंक ने 200 DMA से शानदार ब्रेकआउट दिया और निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स कल 200 DMA के नीचे आया। निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स अपने हाई से 13% नीचे है। कल HDFC बैंक में 2800 करोड़ रुपए की डिलिवरी सेलिंग हुई है। SBI में कल करीब 900-1000 करोड़ रुपए की डिलिवरी उठी है। ICICI बैंक भी कल शानदार नंबरों पर नहीं चल पाया। ऐसे में बाजार में एक रिस्क ओपन हुआ है। बैंक निफ्टी में एक डबल टॉप का रिस्क ओपन हुआ है। अब शुक्रवार का हाई पार करना बैंक निफ्टी के लिए बहुत मुश्किल है। SBI में मजबूती है मगर इस बार के नतीजे अहम होंगे।

बाजार: क्या हो रणनीति?

एक बात साफ है बाजार अभी भी रेंज में है। शुक्रवार को लगा कि रेंज टूट गई लेकिन वो रिजेक्ट हुआ और अब एक रिस्क रहेगा वापस रेंज में फंसने का है। अगर ब्रेकआउट फेल हो तो लोअर रेंज टेस्ट होने का रिस्क होता है। अगर निफ्टी 24,150 के नीचे सेटल हुआ तो ब्रेकआउट फेल कन्फर्म होगा। ऐसे में वापस 23,800-23,850 जाने का रिस्क रहेगा। लेकिन अगर निफ्टी ने 24,350 फिर पार किया तो ये बड़ा पॉजिटिव होगा। इंडेक्स से बेहतर है इस समय स्टॉक स्पेसिफिक रहना। फार्मा अभी भी बाजार की सबसे मजबूत कड़ी है। IT काफी चल चुका है और अब इस रैली का टेस्ट है। IT में पिछली दो रैलियां इतनी रिकवरी के बाद ही फेल हुई थीं। FMCG में धीरे-धीरे Accumulation हो रहा है। ऑटो और ऑटो एंसिलरी शेयरों में भी निचले स्तरों पर खरीदारी है।

निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए पहला सपोर्ट 24,100-24,150 (कल का low, 10 DEMA) पर है। इसके लिए अगला बड़ा सपोर्ट 24,000-24,050 (20 DEMA,ऑप्शंस जोन) पर है। इसके लिए पहला रजिस्टेंस 24,250-24,300 पर और बड़ा रजिस्टेंस 24,350-24,400 पर है। खरीदारी का सबसे अच्छा जोन 24,100-24,150 है। इसके लिए स्टॉप लॉस 24,025 पर रखें। बिकवाली का सबसे अच्छा जोन 24,300-24,350 है। इसके लिए स्टॉप लॉस 24,425 पर होना चाहिए।

बैंक निफ्टी पर स्ट्रैटेजी

बैंक निफ्टी के लिए पहला सपोर्ट जोन 57,750-57,850 (10 DEMA)है। वहीं, अगला बड़ा सपोर्ट 57,500-57,600 (20 DEMA, कल का low) पर है। अगर 57,500 टूटा तो बड़ी गिरावट के लिए तैयार रहें। अगर बैंक निफ्टी 57,500 होल्ड करे तो 57,400 के स्टॉपलॉस के साथ खरीदें। इसके लिए पहला रजिस्टेंस 58,100-58,200 पर और बड़ा रजिस्टेंस 58,300-58,500 पर है।

 

Trading Plan : 24000 के ऊपर टिके रहने तक शॉर्ट-टर्म का रुझान पॉजिटिव, निफ्टी में जल्द ही 24500 का टारगेट मुमकिन

 

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लगातार 10वीं रात अमेरिका ने ईरान पर किया तबाही वाला हमली, इस बीच 17 अमेरिकी सैनिक मारे गए तो ट्रंप ने खाई ये कसम

Iran-US War Update: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब बेहद खतरनाक और बेकाबू मोड़ पर पहुंच चुका है। अमेरिकी सेना ने सोमवार रात लगातार 10वीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर विनाशकारी हवाई हमले किए। दूसरी ओर इस युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। वीकेंड पर अमेरिकी सैनिकों की हुई मौतों और नुकसान से भड़के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ भयंकर बदले की कसम खाई है।

5 घंटे चला ऑपरेशन: US CENTCOM ने इन ठिकानों को बनाया निशाना

अमेरिकी मध्य कमान (U।S। Central Command – CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए इस ताजा कार्रवाई की पुष्टि की है। अमेरिकी सेना के मुताबिक सोमवार रात को ईरान पर किया गया ताजा हमला करीब 5 घंटे तक चला।

अमेरिकी हवाई हमलों ने ईरान के सैन्य कमान केंद्रों, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइटों, समुद्री क्षमताओं और एयर डिफेंस सिस्टम को सीधे तौर पर निशाना बनाया और तबाह कर दिया। वाशिंगटन का कहना है कि इन स्ट्राइक्स का मुख्य मकसद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हमले करने की ईरान की क्षमता को पूरी तरह से नष्ट और कमजोर करना है।

17 पहुंची मृत अमेरिकी सैनिकों की संख्या, ट्रंप ने दी बड़ी चेतावनी

हाल ही में वीकेंड के दौरान हुए भीषण हमलों के बाद अमेरिकी सेना के हताहतों की संख्या बढ़ गई है। इस युद्ध की शुरुआत से लेकर अब तक मारे गए अमेरिकी सैनिकों की कुल संख्या बढ़कर 17 हो गई है। अमेरिकी सैनिकों के लिए खूनी साबित हुए इस वीकेंड के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान से कड़ा बदला लेने की कसम खाई है। बीते हफ्ते में ट्रंप ने ईरान में हमलों का दायरा बढ़ाने की चेतावनी दी थी। इसमें ईरान के प्रमुख ऊर्जा संयंत्रों और पुलों को निशाना बनाना शामिल है।

कैसे शुरू हुई यह जंग और दुनिया पर क्या पड़ रहा है असर?

अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर एक साथ बड़ा हमला किया था। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइलें दागी थीं। युद्ध के दौरान ईरान पर हुए अमेरिकी-इजराइली हमलों और लेबनान में हुए इजराइली हमलों में अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है और लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं। इस युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है और अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों व वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारी अनिश्चितता छा गई है।

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US-Iran War Update: ईरान ने होर्मुज को बताया ‘अटूट रेड लाइन’, अमेरिका को दी खुली चेतावनी! दुनिया की तेल सप्लाई पर मंडराया बड़ा खतरा

US-Iran War Update: पश्चिम एशिया में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रूट्स में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अपनी ‘अटूट रेड लाइन’ (unbreakable red line) घोषित करते हुए अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। तेहरान ने साफ कहा है कि यदि अमेरिका ने इस रणनीतिक जलमार्ग में किसी भी तरह का हस्तक्षेप किया तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका लगातार पांचवीं रात ईरान पर हवाई हमले कर चुका है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान युद्ध छोड़ बातचीत की मेज पर नहीं लौटता तो उसके बिजली प्लांटों और प्रमुख पुलों को भी निशाना बनाया जा सकता है।

क्या है ईरान की ‘रेड लाइन’?

एक वरिष्ठ ईरानी सैन्य अधिकारी के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी दखल किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। अधिकारी ने कहा कि यह ईरान की ‘अटूट रेड लाइन’ है। इसे पार करने की कोशिश गंभीर परिणाम ला सकती है। ईरान पहले भी कह चुका है कि जब तक अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई नहीं रोकता, तब तक होर्मुज को बंद रखने का विकल्प उसके पास मौजूद है।

दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रूट माना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला वैश्विक कच्चे तेल और एलएनजी (Liquefied Natural Gas) का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यदि यहां आवाजाही प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है और कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

दुनिया का लगभग 20% पेट्रोलियम (करीब 20 मिलियन बैरल प्रतिदिन) और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का एक बड़ा हिस्सा रोजाना इसी रास्ते से होकर गुजरता है। हालांकि, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों ने इस रास्ते से बचने के लिए जमीनी पाइपलाइनें बनाई हैं। लेकिन वे कुल तेल का केवल एक छोटा हिस्सा ही ले जा सकती हैं। खाड़ी देशों के अधिकांश तेल निर्यात के पास इस जलमार्ग के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।

अमेरिका ने तेज किए हमले

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी सेना ने बंदर अब्बास समेत कई स्थानों पर ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना है जिससे वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकता है। इससे पहले ग्रेटर तुंब द्वीप पर तटीय रक्षा ठिकानों और क्रूज मिसाइल साइटों पर भी हमले किए गए थे।

ईरान में कई जगह धमाके

ईरानी मीडिया के मुताबिक, हालिया हमलों का दायरा पहले की तुलना में कहीं ज्यादा व्यापक रहा। उत्तरी ईरान के सेमनान एयरपोर्ट के पास एक प्रोजेक्टाइल गिरा। जबकि लोरेस्तान प्रांत में भी विस्फोटों की खबरें सामने आईं। राजधानी तेहरान के आसपास एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए। वहीं, खुजेस्तान प्रांत के अहवाज क्षेत्र में एक बच्चों के कैंसर अस्पताल के पास भी हमले की सूचना मिली, जिसकी ईरान ने कड़ी निंदा की है।

35 लोगों की मौत, 300 से ज्यादा घायल

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, हालिया अमेरिकी हमलों में कम से कम 35 लोगों की मौत हुई है। जबकि 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। स्थानीय लोगों ने लगातार हो रहे धमाकों से दहशत का माहौल बताया है।

ईरान की पलटवार की धमकी

अमेरिका की कार्रवाई के जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि हमले जारी रहे तो केवल होर्मुज जलडमरूमध्य ही नहीं। बल्कि पूरे क्षेत्र में अमेरिकी हितों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। ईरानी सेना ने कहा कि अगर अमेरिका आगे बढ़ता है तो क्षेत्र का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर ईरानी सशस्त्र बलों के जवाबी हमलों की जद में आ सकता है।

खाड़ी देशों पर भी बढ़ा खतरा

ईरान की सेना रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उन्होंने जवाबी कार्रवाई में जॉर्डन स्थित अमेरिकी एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। वहीं, जॉर्डन ने कई मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने का दावा किया है। कुवैत ने ड्रोन गिराने की जानकारी दी। जबकि बहरीन में एयर रेड सायरन बजाए गए। इराक के एरबिल क्षेत्र में भी विस्फोटक ड्रोन को रोके जाने की खबर सामने आई है।

कूटनीतिक रास्ता अभी पूरी तरह बंद नहीं

हालांकि, दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव चरम पर है। लेकिन कूटनीतिक प्रयास पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। पाकिस्तान ने दोनों पक्षों से बातचीत फिर शुरू करने की अपील की है। वहीं, ईरान ने संकेत दिया है कि यदि उसे किसी समझौते का लाभ नहीं मिलता तो वह उस पर कायम रहने का कोई कारण नहीं देखता। उधर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोहराया कि यदि ईरान जल्द बातचीत के लिए तैयार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

दुनिया पर क्या होगा असर?

यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ता है या वहां जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार, पेट्रोल-डीजल की कीमतों, समुद्री व्यापार और पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह टकराव केवल क्षेत्रीय नहीं। बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ी चिंता बनता जा रहा है।

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अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ कहा है कि इजरायल सरकार के कुछ लोग ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को अनिश्चितकाल तक लंबा खींचना चाहते हैं। उन्होंने यह बात पॉडकास्टर जो रोगन के साथ हुए इंटरव्यू में कही।वेंस ने बताया कि इजरायल के कुछ तत्व अमेरिकी जनता की राय को प्रभावित करने की

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US-Iran War News: होर्मुज को लेकर ट्रंप का बड़ा ऐलान! ईरानी जहाजों पर पूरी नाकाबंदी, शुल्क लगाने की धमकी से पीछे हटे

US-Iran War News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ईरान और खाड़ी क्षेत्र को लेकर कई बड़े ऐलान किए हैं। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना की वजह से वैश्विक तेल आपूर्ति रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान को छोड़कर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सभी देशों के लिए खुला रहेगा। जबकि ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों पर पूरी नाकाबंदी लागू की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।

इन हमलों में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई। जबकि 10 अन्य घायल हो गए। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार सुबह ईरान दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी को तलब किया और इन हमलों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत ने कहा कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के दौरान ‘ए अल बहियाह’ और ‘एमटी मोम्बासा’ नाम के दो पोत पर हुए हमलों को लेकर बेहद चिंतित है।

टैरिफ वाले बयान से पीछे हटे

डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले माल पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने की अपनी योजना से एक दिन बाद ही पीछे हटते हुए कहा कि इसके बजाय पश्चिम एशियाई देश अमेरिका के साथ निवेश और व्यापार समझौते करेंगे।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा. “पश्चिम एशिया के नेताओं के साथ अत्यंत सकारात्मक बातचीत के आधार पर मैंने 20 प्रतिशत अमेरिकी प्रतिपूर्ति शुल्क को उन व्यापार और निवेश समझौतों से बदलने का फैसला किया है। उन्हें विभिन्न खाड़ी देश अमेरिका में करेंगे।”

राष्ट्रपति ने कहा कि ये निवेश बहुत बड़े पैमाने पर होंगे। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ये उन नई प्रतिबद्धताओं से अलग होंगे या नहीं, जिनकी घोषणा ट्रंप ने पिछले साल पश्चिम एशिया यात्रा के बाद की थी।

ईरान का हिंसक दौर अब खत्म होगा?

ट्रंप ने दुनिया को भरोसा दिलाते हुए संकल्प लिया है कि अमेरिका, ईरान को कभी भी परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) हासिल नहीं करने देगा। ट्रंप ने दावा किया है कि इन कड़े कदमों के बाद अब क्षेत्र में ईरान का हिंसक और आक्रामक दौर हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।

होर्मुज में हमले में एक भारतीय की मौत

भारत ने कमर्शियल पोत ‘एमटी अल बहिया’ और ‘एमटी मोम्बासा’ पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है। उन पर कुल 30 भारतीय नाविक सवार थे। भारत ने पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता लाने के लिए हिंसा को तुरंत रोकने और बातचीत व कूटनीति का रास्ता अपनाने की अपनी अपील दोहराई।

संयुक्त अरब अमीरात के दो तेल टैंकरों पर हमले अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हुए। ईरान पर 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद शुरू हुए संघर्ष में पश्चिम एशिया में 14 भारतीयों की मौत हो चुकी है।

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विदेश मंत्रालय ने मारे गए भारतीय नागरिक के परिवार के प्रति गहरी संवेदना जताई और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की। मंत्रालय ने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में भारतीय मिशन हालात पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। साथ ही प्रभावित भारतीय नाविकों को हर संभव मदद दिलाने के लिए खाड़ी देश के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में हैं।

‘आमिर खान Love Jihad के ब्रांड एंबेसडर बन रहे हैं’; अभिनेता की तीसरी शादी पर भड़के महाराष्ट्र के मंत्री

Nitesh Rane on Aamir Khan: महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सीनियर नेता नितेश राणे ने बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर खान की तीसरी शादी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह तय करना उनका काम नहीं है कि किसकी शादी में कौन जाए। लेकिन अब समय आ गया है कि हिंदू युवा, जो आमिर खान को अपना आदर्श मानते हैं, इस पर विचार करें कि उन्हें उनसे कैसी प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आमिर खान ‘लव जिहाद’ के ब्रांड एंबेसडर बनते जा रहे हैं।

न्यूज एजेंसी IANS के मुताबिक, शिरडी में आमिर खान की तीसरी शादी पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में मंत्री नितेश राणे ने कहा, “यह तय करना मेरा काम नहीं है कि कौन किसकी शादी में शामिल होगा। लेकिन, अब समय आ गया है कि हिंदू युवा, जो उन्हें एक सेलिब्रिटी मानते हैं, इस पर सोचें कि उन्हें इससे किस तरह की प्रेरणा लेनी चाहिए। मेरा मानना ​​है कि जब सेलिब्रिटी अपनी निजी जिंदगी के बारे में ऐसे फैसले लेते हैं, तो हिंदू समाज को इस पर सोचना चाहिए। आमिर खान असल में ‘लव जिहाद’ के ब्रांड एंबेसडर बन रहे हैं।”

राणे के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है। हालांकि, आमिर खान की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मंत्री का कहना है कि ‘लव जिहाद’ संबंधी आरोप उनका व्यक्तिगत राजनीतिक बयान है। आमिर खान ने इसी महीने गौरी स्प्रैट के साथ तीसरी शादी की थी। रीना दत्ता और किरण राव के बाद यह आमिर खान की तीसरी शादी है।

आमिर खान ने 1986 में रीना दत्ता से शादी की थी। दोनों के दो बच्चे अभिनेता जुनैद खान और इरा खान हैं। साल 2002 में दोनों अलग हो गए। इसके बाद आमिर ने 2005 में किरण राव से दूसरी शादी की। इस शादी से उनके बेटे आजाद राव खान का जन्म सरोगेसी के जरिए हुआ। हालांकि, साल 2021 में दोनों ने अलग होने का ऐलान कर दिया। अब आमिर ने तीसरी शादी की है।

मुस्लिम विरोधी बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं नितेश राणे

नितेश राणे पहले भी कई ऐसे सार्वजनिक बयान दे चुके हैं जिन्हें आलोचकों, विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों ने मुस्लिम विरोधी या सांप्रदायिक बताया है। इनमें मुस्लिम समुदाय, मस्जिदों, हलाल, लव जिहाद और धार्मिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर उनकी तीखी टिप्पणियां शामिल रही हैं। दूसरी ओर, राणे और उनके समर्थकों का कहना है कि वे हिंदू हितों की बात करते हैं और उनके बयान कानून या सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर आधारित हैं।

Love Jihad क्या होता है?

‘लव जिहाद’ एक बेहद संवेदनशील और विवादित शब्द है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से भारत में राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी बहसों में किया जाता है। इस शब्द का उपयोग उन मामलों को परिभाषित करने के लिए किया जाता है, जहां कथित तौर पर कोई मुस्लिम पुरुष किसी गैर-मुस्लिम महिला (आमतौर पर हिंदू या ईसाई) को शादी के माध्यम से इस्लाम में परिवर्तित करने के इरादे से प्रेम जाल में फंसाता है।

इस विषय से जुड़े विभिन्न दृष्टिकोण और मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:-

1. आरोप और चिंताएं (दावा करने वालों का पक्ष)

धर्मांतरण का आरोप: दक्षिणपंथी संगठनों और कुछ सामाजिक समूहों का आरोप है कि यह एक संगठित प्रयास है, जिसके तहत पहचान छिपाकर (जैसे गलत नाम बताकर) या शादी का झांसा देकर महिलाओं का जबरन या धोखाधड़ी से धर्म परिवर्तन कराया जाता है।

पारिवारिक और सांस्कृतिक चिंताएं: इन समूहों का मानना है कि इसके पीछे जनसांख्यिकीय (demographic) बदलाव या सांस्कृतिक पहचान को प्रभावित करने का इरादा होता है।

2. आलोचकों और कानूनी विशेषज्ञों का दृष्टिकोण

आरोप निराधार: आलोचकों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कई विपक्षी दलों का कहना है कि ‘लव जिहाद’ जैसी कोई संगठित साजिश नहीं है। उनका मानना है कि इस शब्द का इस्तेमाल सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने और वयस्कों की अपनी मर्जी से की जाने वाली अंतरधार्मिक (interfaith) शादियों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है।

व्यक्तिगत स्वतंत्रता: आलोचकों का तर्क है कि भारतीय संविधान के आर्टिकल 21 के तहत हर वयस्क नागरिक को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का अधिकार है, चाहे वह किसी भी धर्म का हो।

3. अदालतों और जांच एजेंसियों का रुख

एनआईए (NIA) और पुलिस जांच: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और विभिन्न राज्यों की पुलिस ने कुछ मामलों की जांच की है। जांच रिपोर्टों के अनुसार, व्यक्तिगत स्तर पर धोखाधड़ी या जबरन धर्मांतरण के मामले तो सामने आए हैं। लेकिन किसी केंद्रीयकृत या संगठित ‘लव जिहाद’ नेटवर्क या साजिश के पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं।

संसद में बयान: भारत सरकार ने भी संसद में एक लिखित जवाब में स्पष्ट किया था कि मौजूदा कानूनों में ‘लव जिहाद’ जैसी कोई परिभाषा नहीं है और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा ऐसा कोई संगठित मामला दर्ज नहीं किया गया है।

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4. राज्यों के कानून

पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तराखंड जैसे कई राज्यों ने ‘गैर-कानूनी धर्मांतरण निषेध कानून’ (Anti-Conversion Laws) पारित किए हैं। हालांकि, इन कानूनों में सीधे तौर पर ‘लव जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल नहीं है। लेकिन इनमें शादी के लिए धोखाधड़ी, लालच या जबरन किए जाने वाले धर्म परिवर्तन को रोकने और इसके लिए सजा के कड़े प्रावधान किए गए हैं।

LPG Price Today: घरेलू गैस सिलेंडर और कमर्शियल एलपीजी ग्राहकों को बड़ी राहत, जानिए देश के प्रमुख शहरों में नई कीमतें

LPG Price Today: देशभर में घरेलू और कमर्शियल रसोई गैस (LPG) उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। सरकारी तेल कंपनियों (इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम) ने जुलाई 2026 के लिए 14.2 किलो घरेलू LPG सिलेंडर के दामों में कोई नई बढ़ोतरी नहीं की है। जून में हुई ₹29 प्रति सिलेंडर की वृद्धि के बाद कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं। तेल कंपनियों ने जुलाई महीने में घरेलू 14.2 किलोग्राम गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं किया है।

हालांकि, इस महीने की शुरुआत में कमर्शियल 19 किलोग्राम LPG सिलेंडर की कीमत में 183.50 रुपये की कटौती की गई थी, जिससे होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बड़ी राहत मिली है। कमर्शियल सिलेंडर की इन कीमतों में 1 जुलाई को ₹183.50 की कटौती शामिल है। वहीं, जून के महीने में तेल कंपनियों द्वारा की गई ₹29 की बढ़ोतरी के बाद घरेलू गैस के दाम फिलहाल स्थिर बने हुए हैं।

उपभोक्ताओं को राहत

फिलहाल घरेलू और कमर्शियल LPG उपभोक्ताओं को राहत मिली हुई है क्योंकि सिलेंडर की कीमतों में कोई नई बढ़ोतरी नहीं हुई है। कमर्शियल LPG सस्ता होने से होटल, ढाबों और रेस्तरां कारोबार को लाभ मिलेगा। हालांकि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और पश्चिम एशिया की स्थिति आने वाले महीनों में LPG कीमतों की दिशा तय कर सकती है।

घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतें स्थिर

ताजा दरों के अनुसार, दिल्ली में 14.2 किलोग्राम घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत 942 रुपये है। जून में 29 रुपये की बढ़ोतरी के बाद से कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है। आम घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यह स्थिरता राहत लेकर आई है।

प्रमुख महानगरों में घरेलू LPG के दाम

शहर                                                                                          14.2 किग्रा घरेलू LPG (रुपये)

दिल्ली                                                                                          942

मुंबई                                                                                            941.50

कोलकाता                                                                                     लगभग 939

चेन्नई                                                                                            लगभग 928.50

(ये दरें 1 जुलाई 2026 से प्रभावी हैं और इनमें आज तक कोई बदलाव नहीं हुआ है।)

कमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ सस्ता

तेल कंपनियों ने हाल ही में 19 किलोग्राम कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम में 183.50 रुपये की कटौती की थी। नई दरों के बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर 2,930 रुपये में उपलब्ध है। यह कटौती वर्ष 2026 की पहली बड़ी कमी मानी जा रही है।

प्रमुख शहरों में 19 किग्रा कमर्शियल LPG की कीमत

शहर                                                                                          कमर्शियल LPG (रुपये)

दिल्ली                                                                                         2,930

मुंबई                                                                                           2,885.50

कोलकाता                                                                                    3,072

चेन्नई                                                                                             3,100

पश्चिम एशिया संकट पर नजर

घरेलू LPG की कीमतें फिलहाल स्थिर हैं। लेकिन पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ऊर्जा बाजारों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। भारत अपनी LPG आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका सहित वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।

थाली पर भी पड़ा असर

हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार टमाटर, प्याज और LPG की बढ़ी हुई लागत के कारण जून में घरेलू थाली की लागत में 5 से 6 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई। इससे साफ है कि रसोई गैस की कीमतों का सीधा असर आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ता है।

क्यों स्थिर हैं घरेलू दाम?

तेल कंपनियों ने जून में अंतरराष्ट्रीय LPG कीमतों और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण घरेलू सिलेंडर महंगा किया था। फिलहाल सरकार और कंपनियों ने घरेलू उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालने का फैसला किया है। इसलिए जुलाई संशोधन में कोई नई बढ़ोतरी नहीं की गई।

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