ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच रविवार को स्विट्जरलैंड में करीब 80 मिनट तक बातचीत हुई। दोनों देश 60 दिन के युद्धविराम को स्थायी शांति समझौते में बदलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पहली ही बैठक में दोनों पक्षों के बीच बड़े मतभेद सामने आ गए। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, ईरान ने कहा कि आगे की बातचीत तभी संभव है जब इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच चल रहा संघर्ष पूरी तरह खत्म हो। फिलहाल यह साफ नहीं है कि दोनों पक्षों की अगली बैठक कब होगी। बातचीत में पाकिस्तान और कतर के अधिकारियों ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। बीबीसी ने अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि, बातचीत में 3 अहम मुद्दों पर पेंच फंसा रहा। इनमें होर्मुज को फिर से पूरी तरह खोलने को लेकर ईरान के अलग-अलग बयानों को स्पष्ट करना, दक्षिणी लेबनान में सीजफायर लागू कराना और परमाणु समझौते से जुड़ी बातें शामिल थीं। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर उसने लेबनान में हिजबुल्लाह को नहीं रोका तो अमेरिका फिर से उस पर हमला कर सकता है। ईरान ने इस चेतावनी को खारिज करते हुए कहा कि वह किसी भी संघर्ष के लिए तैयार है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ट्रम्प बोले हिजबुल्लाह को रोको, वरना फिर हमला करेंगे: ट्रम्प ने कहा कि ईरान लेबनान में अपने समर्थक हिजबुल्लाह को तुरंत रोके। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर अमेरिका पिछले हफ्ते से भी ज्यादा सख्त कार्रवाई करेगा। 2. वेंस बोले- अमेरिका और ईरान मिलकर शांति के लिए काम करेंगे: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि बातचीत में अच्छी प्रगति हुई है। उनके मुताबिक, दोनों देश मिलकर शांति और समृद्धि को बढ़ावा दे सकते हैं और ट्रम्प अगले 10 साल में पश्चिम एशिया की तस्वीर बदलना चाहते हैं। 3. होर्मुज स्ट्रेट पर सस्पेंस के बीच अमेरिका बोला- 24 घंटे में 67 जहाज गुजरे: ईरान के होर्मुज स्ट्रेट बंद करने के दावे के बावजूद अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि समुद्री यातायात जारी है। अमेरिका ने वैकल्पिक मार्ग भी खोला है और जहाजों को सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है। 4. लेबनान में मौतों का आंकड़ा 4,100 के पार: लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 2 मार्च से अब तक 4,106 लोगों की मौत और 12,153 लोग घायल हुए हैं। वहीं, इजराइली सेना प्रमुख इयाल जमीर ने कहा कि हिजबुल्लाह के साथ लड़ाई दोबारा शुरू हो सकती है। 5. ईरान का दावा- कतर में फंसे 6 अरब डॉलर मिलेंगे: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा कि अमेरिका के साथ हुए शुरुआती समझौते के तहत कतर में जमा ईरान के 6 अरब डॉलर वापस मिलेंगे। उन्होंने दावा किया कि समझौते की शर्तें तेहरान के पक्ष में हैं। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
Stocks to Watch: सोमवार, 22 जून के कारोबार में कई शेयरों पर निवेशकों की नजर रह सकती है। कुछ कंपनियों को बड़े ऑर्डर मिले हैं, कुछ ने डिविडेंड और रणनीतिक निवेश से जुड़े अहम ऐलान किए हैं। ऐसे में इन शेयरों में सोमवार को बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है।
Reliance Industries
रिलायंस इंडस्ट्रीज की टेलीकॉम कंपनी Jio Platforms ने 19 जून को SEBI के पास IPO के लिए ड्राफ्ट पेपर दाखिल कर दिए हैं। यह इश्यू 27 करोड़ नए शेयरों का फ्रेश इश्यू होगा।
Bharat Forge
डिफेंस कंपनी Bharat Forge को रक्षा मंत्रालय से ₹425 करोड़ का ऑर्डर मिला है। कंपनी भारतीय नौसेना के कोलकाता-क्लास युद्धपोतों के लिए गैस टर्बाइन जनरेटर (GTG) की सप्लाई करेगी।
Tata Motors CV
टाटा ग्रुप की Tata Motors CV को 3,400 से ज्यादा इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल्स (eCV) के ऑर्डर मिले हैं। इनमें करीब 2,000 छोटे कमर्शियल व्हीकल और पिक-अप, 900 ट्रक और 500 बसें शामिल हैं।
Knowledge Marine
इंजीनियरिंग कंपनी Knowledge Marine & Engineering Works (KMEW) को Inland Waterways Authority of India (IWAI) से 66.11 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। कंपनी 20 यात्रियों की क्षमता वाली 10 हाइब्रिड इलेक्ट्रिक फेरी बनाएगी। ऑर्डर में मैन्युफैक्चरिंग के साथ 5 साल का मेंटेनेंस भी शामिल है।
Nestle India
FMCG कंपनी Nestle India के बोर्ड की बैठक 3 जुलाई को होगी। इस बैठक में कंपनी 2026 के लिए स्पेशल डिविडेंड देने पर विचार करेगी।
Som Distilleries and Breweries
शराब बनाने वाली Som Distilleries and Breweries ने बताया कि मध्य प्रदेश आबकारी विभाग ने भोपाल प्लांट के लिए वित्त वर्ष 2026-27 का लाइसेंस देने से इनकार कर दिया है।
Kirloskar Oil Engines
इंजन और पावर सॉल्यूशन कंपनी Kirloskar Oil Engines को HyperNext से 192 मेगावाट क्षमता का बड़ा ऑर्डर मिला है। यह बिजली भारत में AI बेस्ड बड़े डेटा सेंटरों को सपोर्ट करने के लिए इस्तेमाल होगी।
RVNL
रेलवे सेक्टर की सरकारी कंपनी RVNL को बड़ा ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर सरकारी खनन कंपनी NMDC ने दिया है। कंपनी आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में बफर स्टॉकपाइल और ब्लेंडिंग यार्ड बनाएगी। इसकी क्षमता 10 मिलियन टन सालाना होगी। यह प्रोजेक्ट NMDC की लॉजिस्टिक्स क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा।
Aurobindo Pharma
फार्मा कंपनी Aurobindo Pharma ने बताया कि US FDA ने Eugia Steriles Private Ltd यूनिट का निरीक्षण पूरा कर लिया है। निरीक्षण के दौरान पांच ऑब्जर्वेशन जारी किए गए हैं।
Chennai Petroleum Corporation
सरकारी ऑयल रिफाइनिंग कंपनी Chennai Petroleum Corporation (CPCL) को केंद्र सरकार ने नवरत्न का दर्जा दे दिया है। इससे कंपनी को कारोबारी फैसलों में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी।
Himadri Speciality Chemical
स्पेशलिटी केमिकल्स कंपनी Himadri Speciality Chemical ने अमेरिका की International Battery Company में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 20.47% कर ली है। इसके लिए कंपनी ने अतिरिक्त 6.6 लाख डॉलर का निवेश किया है।
Vikram Solar
सोलर एनर्जी कंपनी Vikram Solar के खिलाफ दायर दिवाला याचिका को NCLT की कोलकाता बेंच ने स्वीकार कर लिया है। यह याचिका Isitva Steels Private Limited ने दायर की थी।
Garden Reach Shipbuilders & Engineers
डिफेंस सेक्टर की सरकारी कंपनी Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE) को केंद्र सरकार से नवरत्न का दर्जा मिला है। इसे कंपनी के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
Goodluck India
स्टील और डिफेंस उत्पाद बनाने वाली Goodluck India की सहायक कंपनी Goodluck Defence and Aerospace को करीब ₹255 करोड़ का ऑर्डर मिला है। कंपनी 155 मिमी लंबी दूरी के खाली गोले सप्लाई करेगी।
Mahindra Lifespace Developers
रियल एस्टेट कंपनी Mahindra Lifespace Developers ने मुंबई के कांदिवली ईस्ट में 15 एकड़ जमीन खरीदी है। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित वैल्यू करीब ₹5,600 करोड़ है और इसमें लगभग 18 लाख वर्ग फुट डेवलपमेंट की संभावना है।
Power Mech
बिजली कंपनी Power Mech Projects को JSW Thermal Energy से 1,008.90 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। कंपनी पश्चिम बंगाल के सालबोनी में बन रहे 2×800 मेगावाट के थर्मल पावर प्रोजेक्ट में सिविल और स्ट्रक्चरल काम करेगी। इस प्रोजेक्ट को 36 महीने में पूरा करना है।
Park Medi World के शेयर में 26% तक उछाल का दम, एमके ग्लोबल ने ‘बाय’ रेटिंग के साथ शुरू किया कवरेज
Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Gold Price: 2025 में 65% की जोरदार तेजी के बाद 2026 अब तक सोने के लिए खास नहीं रहा है। साल की पहली छमाही में सोना करीब 4% टूट चुका है। जनवरी 2026 के आखिर में सोने ने 5,602 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर छुआ था।
लेकिन इसके बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा, बाजार में मुनाफावसूली शुरू हुई और सोने में तेज गिरावट आ गई। जून में इसका भाव करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया। यह रिकॉर्ड स्तर से करीब 28% नीचे था। फिलहाल सोना करीब 4,144 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है।
ईरान-अमेरिका समझौते के बाद क्या बदला?
इस समय बाजार की नजर अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते पर है। होर्मुज स्ट्रेट खुलने से तेल की कीमतों में नरमी आई है। समझौते की खबर के बाद तेल करीब 15% सस्ता हो चुका है। हालांकि निवेशकों के मन में अब भी सवाल है कि यह समझौता कितने समय तक टिकेगा और क्षेत्र में तनाव सचमुच कम होगा या नहीं।
तेल सस्ता होने पर भी क्यों नहीं बढ़ रहा सोना?
यही सबसे बड़ा सवाल है। आमतौर पर तेल सस्ता होने और तनाव कम होने से सोने को सहारा मिलता है। लेकिन इस बार कहानी कुछ अलग है। फिलहाल सोने की चाल तेल नहीं, बल्कि अमेरिकी ब्याज दरें तय कर रही हैं।
सोने की कीमत पर एक साथ कई चीजें असर डालती हैं। इनमें महंगाई, ब्याज दरें, डॉलर और वैश्विक घटनाक्रम शामिल हैं। इस समय सबसे ज्यादा असर ब्याज दरों का दिख रहा है।
अमेरिकी फेड बना सबसे बड़ी चुनौती
17 जून को हुई अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के बाद संकेत मिले कि 2026 में कम से कम एक बार और ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। फेड चेयरमैन केविन वॉर्श ने भी साफ किया कि महंगाई को काबू में रखना उनकी प्राथमिकता है। इससे ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीद कमजोर पड़ गई है।
ऊंची ब्याज दरें सोने के लिए अच्छी खबर नहीं मानी जातीं। वजह यह है कि सोना कोई ब्याज नहीं देता। ऐसे में निवेशकों का रुझान दूसरे विकल्पों की तरफ बढ़ सकता है।
डॉलर भी डाल रहा दबाव
2026 में डॉलर इंडेक्स करीब 2.6% मजबूत हुआ है। दूसरी तरफ सोना करीब 4% गिरा है। जब डॉलर मजबूत होता है तो दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है। इसका असर मांग पर पड़ता है और कीमतों पर दबाव बढ़ता है।
एक्सपर्ट्स की गोल्ड पर राय
LKP Securities में वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी & करेंसी रिसर्च एनालिस्ट) जतीन त्रिवेदी का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से 2026 में एक बार ब्याज दर बढ़ाने के संकेत मिलने के बाद सोने पर दबाव बढ़ गया है। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और सोने जैसी ऐसी एसेट्स की चमक कुछ कम हुई है, जो कोई ब्याज नहीं देतीं। फेड के सख्त रुख के बाद बुलियन बाजार में बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली भी देखने को मिली है।
जतीन त्रिवेदी का कहना है कि निवेशकों को अमेरिका-ईरान वार्ता पर भी नजर रखनी चाहिए। बातचीत में किसी भी तरह की प्रगति या रुकावट कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव बढ़ा सकता है।
क्या खत्म हो गई तेजी?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर आने वाले महीनों में महंगाई काबू में आती है और फेड ब्याज दरें घटाने की तरफ बढ़ता है, तो सोने में फिर तेजी लौट सकती है। दूसरी तरफ अगर महंगाई ऊंची बनी रहती है, तब भी सोना निवेशकों के लिए बचाव का एक अहम विकल्प बना रह सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक पिछले कई सालों से लगातार सोना खरीद रहे हैं। उनका भरोसा अभी भी बना हुआ है। ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोने में सही समय पकड़ने की कोशिश करने के बजाय पोर्टफोलियो की 5% से 10% रकम सोना और चांदी जैसे कीमती धातुओं में रखना ज्यादा समझदारी भरा कदम हो सकता है।
Gold Price Today: सोना एक हफ्ते में ₹3000 तक हुआ सस्ता, चांदी ₹10000 लुढ़की
Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Stocks to Buy: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने और शांति समझौते की खबर से घरेलू शेयर बाजार में अच्छी रिकवरी देखने को मिली। इस बीच Nomura, Jefferies, JM Financial, Ambit Capital, Kotak Securities, Motilal Oswal और Nuvama Institutional Equities जैसी बड़ी ब्रोकरेज फर्मों ने कई शेयरों पर भरोसा जताया है। आइए जानते हैं उन 10 शेयरों के बारे में, जिनमें ब्रोकरेज को अच्छा रिटर्न मिलने की उम्मीद है।
Suzlon Energy
JM Financial ने Suzlon Energy पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने शेयर के लिए 65 रुपये का टारगेट दिया है। यानी शेयर में करीब 18% तक की तेजी आ सकती है।
ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी का AMS बिजनेस तेजी से बढ़ रहा है। Suzlon का लक्ष्य FY31 तक अपने मैनेजमेंट के तहत मौजूद प्रोजेक्ट्स को 18 GW से बढ़ाकर 70 GW से ज्यादा करना है। इसमें विंड, सोलर और बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट शामिल होंगे। अगर कंपनी यह लक्ष्य हासिल करती है, तो कमाई में बड़ा इजाफा हो सकता है।
TBO Tek
Motilal Oswal ने TBO Tek पर अपनी ‘Buy’ रेटिंग दोहराई है। ब्रोकरेज ने 1,765 रुपये का टारगेट दिया है। मौजूदा भाव 1,496 रुपये के मुकाबले शेयर में करीब 18% तक उछाल की उम्मीद है।
ट्रैवल इंडस्ट्री में तेजी लौट रही है। ज्यादा ट्रैवल एजेंट और कारोबारी ग्राहक कंपनी का प्लेटफॉर्म इस्तेमाल कर रहे हैं। ब्रोकरेज का मानना है कि इससे कंपनी का कारोबार तेजी से बढ़ सकता है। FY26 से FY28 के बीच GTV में करीब 23% सालाना बढ़ोतरी का अनुमान है।
Tata Steel
Nomura ने Tata Steel पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है और 240 रुपये का टारगेट दिया है। अगर अनुमान सही रहे, तो निवेशकों को करीब 22% तक का रिटर्न मिल सकता है।
Tata Steel के लिए कोकिंग कोल की कीमतें काफी अहम रहती हैं। अच्छी बात यह है कि चीन में कोयले की सप्लाई सुधर रही है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में बड़ी तेजी आने की आशंका कम है। अगर ऐसा होता है, तो कंपनी की लागत काबू में रह सकती है और कमाई को सहारा मिल सकता है।
Vedanta Aluminium
Kotak Institutional Equities ने Vedanta Aluminium पर ‘Buy’ रेटिंग के साथ कवरेज शुरू की है। ब्रोकरेज ने 600 रुपये का टारगेट दिया है। इससे संकेत मिलता है कि शेयर में करीब 30% तक की तेजी देखने को मिल सकती है।
Vedanta के डीमर्जर के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इसी कंपनी की हो रही है। एल्युमिनियम की मांग बढ़ रही है। कंपनी का मुनाफा सुधर रहा है और कर्ज भी कम हो रहा है। यही वजह है कि कई ब्रोकरेज इस शेयर पर बुलिश हैं।
Coforge
Motilal Oswal ने आईटी कंपनी Coforge पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने 1,900 रुपये का टारगेट दिया है। मौजूदा भाव से शेयर में करीब 30% तक का दम नजर आ रहा है।
हाल ही में हुए Analyst Day के बाद ब्रोकरेज का भरोसा कंपनी पर और मजबूत हुआ है। मैनेजमेंट FY30 तक Revenue को बढ़ाकर करीब 5 अरब डॉलर तक पहुंचाना चाहता है। कंपनी बड़े ग्राहकों पर ज्यादा फोकस कर रही है। नए कॉन्ट्रैक्ट मिल रहे हैं और जरूरत पड़ने पर अधिग्रहण भी कर रही है। इससे कारोबार की रफ्तार तेज रह सकती है।
Tata Motors Passenger Vehicles
Nuvama ने Tata Motors Passenger Vehicles पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने 470 रुपये का टारगेट दिया है। यानी निवेशकों को करीब 30% तक का फायदा मिल सकता है।
साइबर समस्या का असर अब कम हो रहा है। बिक्री सामान्य हो रही है। उत्तर अमेरिका में कारोबार बढ़ रहा है और कंपनी के पास कई नए मॉडल भी हैं। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि इन वजहों से आने वाले समय में प्रदर्शन बेहतर रह सकता है।
Lemon Tree Hotels
ICICI Securities ने Lemon Tree Hotels पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है और 156 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा भाव 113.34 रुपये के मुकाबले शेयर में करीब 38% तक की तेजी देखने को मिल सकती है।
ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी का डिमर्जर लंबी अवधि में बड़ा वैल्यू अनलॉक कर सकता है। प्रस्तावित योजना के तहत Lemon Tree का होटल संचालन कारोबार और होटल मालिकाना कारोबार अलग-अलग हो जाएंगे। इससे निवेशकों को एसेट-लाइट और एसेट-हेवी दोनों बिजनेस का फायदा मिल सकेगा।
HUL
Nuvama ने HUL पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने 3,090 रुपये का टारगेट दिया है। मौजूदा स्तर से शेयर में 40% तक की छलांग लग सकती है।
पिछले कुछ तिमाहियों में कंपनी की ग्रोथ बेहतर हुई है। HUL लगातार नए और प्रीमियम प्रोडक्ट लॉन्च कर रही है। ऑनलाइन बिक्री बढ़ रही है। इसके अलावा D2C ब्रांड्स से भी कारोबार में अच्छा योगदान मिलने लगा है।
HCL Technologies
Nomura ने HCL Technologies पर ‘Buy’ रेटिंग बनाए रखी है। ब्रोकरेज ने 1,600 रुपये का टारगेट दिया है। इस आईटी स्टॉक में मौजूदा स्तर से करीब 41% उछाल आने की उम्मीद है।
हाल ही में कंपनी ने भारत की तेजी से बढ़ती एक AI कंपनी में रणनीतिक निवेश किया है। HCLTech AI के बढ़ते बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। ब्रोकरेज का मानना है कि इससे नए ग्राहक मिल सकते हैं और कारोबार बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
Pine Labs
Emkay ने Pine Labs पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है और 225 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा भाव 152.7 रुपये के मुकाबले शेयर में करीब 47% तक का उछाल देखने को मिल सकता है।
ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी का POS डिवाइस कारोबार मजबूत बना हुआ है। EMI और Affordability बिजनेस तेजी से बढ़ रहा है। ऑनलाइन पेमेंट सेगमेंट में भी नए बड़े ग्राहक जुड़ रहे हैं। कंपनी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार कर रही है। UPI बेस्ड क्रेडिट इकोसिस्टम में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है।
Nifty Outlook: 22 जून को कैसी रहेगी निफ्टी की चाल, कौन-से लेवल रहेंगे अहम? एक्सपर्ट्स से जानिए
Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट शेयर करते हुए इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर फिर एक बड़ा दावा किया। ट्रंप ने कहा कि जी-7 समिट के दौरान मेलोनी ने कई बार उनके साथ तस्वीर खिंचवाने की इच्छा जताई थी। ट्रंप ने यह भी कहा कि इटली में मेलोनी की लोकप्रियता पहले के मुकाबले कम हो रही है। उनके मुताबिक, इसकी एक वजह ईरान को परमाणु हथियार बनाने या हासिल करने से रोकने में इटली की कथित असफलता हो सकती है।
अपने पोस्ट में ट्रंप ने लिखा कि मेलोनी ने उस समय अमेरिका का साथ नहीं दिया, जब ईरान को परमाणु हथियारों तक पहुंचने से रोकने की बात हो रही थी। उन्होंने कहा कि अमेरिका हमेशा इटली से प्यार करता है और उसकी सुरक्षा के लिए खड़ा रहता है। ट्रंप ने यह भी उल्लेख किया कि नाटो ने भी इटली की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, ट्रंप के इन दावों पर इटली की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ट्रंप ने मेलोनी पर साधा निशाना
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान के साथ तनाव के दौरान इटली ने अमेरिका को अपने एयरबेस और रनवे का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी। हालांकि, इटली सरकार का कहना था कि अमेरिका ने इसके लिए तय प्रक्रिया के तहत पहले से मंजूरी नहीं ली थी। ट्रंप ने कहा, “मेलोनी ने हमें इटली के रनवे और लैंडिंग स्ट्रिप का इस्तेमाल नहीं करने दिया। इससे हमारे कामकाज और जरूरी व्यवस्थाओं में काफी परेशानी हुई। यह तब हुआ जब अमेरिका इटली और नाटो के दूसरे सहयोगी देशों की सुरक्षा पर हर साल अरबों डॉलर खर्च करता है।”
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि जॉर्जिया मेलोनी अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए उनके साथ अच्छे संबंध बनाने की कोशिश कर रही थीं। उनके अनुसार, मेलोनी जनता के बीच अपनी छवि मजबूत करने के लिए अमेरिका और उनके साथ नजदीकियां दिखाना चाहती थीं। हालांकि, ट्रंप के इन दावों पर इटली सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ट्रंप और मेलोनी के बीच बयानबाजी तेज
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि अब जब अमेरिका ने ईरान को सैन्य रूप से हरा दिया है, तो इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए फिर से दोस्ती करना चाहती हैं। ट्रंप ने लिखा, “अब वह अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए फिर से दोस्त बनना चाहती हैं। नहीं, धन्यवाद!” वहीं, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शेयर किए गए एक वीडियो में ट्रंप के दावों को खारिज कर दिया। ट्रंप ने दावा किया था कि जी-7 सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने उनसे तस्वीर खिंचवाने की गुजारिश की थी।
मेलोनी ने कहा कि ट्रंप की यह बात पूरी तरह गलत और मनगढ़ंत है। उन्होंने ट्रंप की टिप्पणियों पर हैरानी जताते हुए कहा कि यह समझ से परे है कि अमेरिका का राष्ट्रपति अपने ही एक सहयोगी देश के बारे में इस तरह की बातें क्यों कर रहा है। उन्होंने साफ कहा कि ट्रंप के लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है और ऐसी बातें दोनों देशों के रिश्तों के लिए ठीक नहीं हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को नया एयरफोर्स वन विमान दिखाया। यह विमान पहले कतर सरकार के पास था। पिछले साल मई में कतर ने बोइंग 747 का यह आधुनिक मॉडल ट्रम्प को उपहार में दिया था। बाद में इसे अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक विमान के रूप में तैयार किया गया। मैरीलैंड के जॉइंट बेस एंड्रयूज में ट्रम्प ने इस विमान को दुनिया का सबसे शानदार राष्ट्रपति विमान बताया। उन्होंने कहा, “इस विमान को उड़ते हुए व्हाइट हाउस की तरह बनाया गया है। इतनी लग्जरी शायद दुनिया ने पहले कभी नहीं देखी होगी।” नए एयरफोर्स-1 की 3 फोटोज पुराने एयरफोर्स-1 की पहचान खत्म, ट्रम्प की पसंद के रंगों में तैयार नए विमान का रंग-रूप मौजूदा एयर फोर्स वन से पूरी तरह अलग है। पुराने विमान के हल्के नीले रंग की जगह इसके निचले हिस्से को गहरे नेवी ब्लू रंग से रंगा गया है, जबकि उसके ऊपर लाल पट्टी बनाई गई है। विमान के उस हिस्से पर, जहां से राष्ट्रपति चढ़ते हैं, राष्ट्रपति की आधिकारिक मुहर लगाई गई है। वहीं पिछले हिस्से पर अमेरिकी झंडा बनाया गया है। ट्रम्प ने कहा कि जब यह प्लेन लंदन, जर्मनी या दुनिया के किसी अन्य एयरपोर्ट पर उतरेगा तो कोई भी इसकी बराबरी नहीं कर पाएगा। उन्होंने कहा, “हमारे देश का प्रतिनिधित्व इसी तरह होना चाहिए। रंग और डिजाइन मेरी पसंद के हैं, यह मैं मानता हूं।” उन्होंने यह भी बताया कि नया एयर फोर्स वन अगले महीने 4 जुलाई को अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान फ्लाईपास्ट करेगा। ट्रम्प NATO समिट में हिस्सा लेने नए प्लेन से जाएंगे ट्रम्प ने पुष्टि की कि वह अगले महीने तुर्किए की राजधानी अंकारा में होने वाले NATO समिट में इसी से जाएंगे। इसके बाद वे नवंबर में भी चीन दौरे पर इसका इस्तेमाल करेंगे। ट्रम्प ने कहा कि इस हफ्ते G7 समिट के दौरान फ्रांस दौरे पर उन्होंने आखिरी बार इस प्लेन का इस्तेमाल किया। 2028 तक ही कतर के गिफ्ट प्लेन का इस्तेमाल ट्रम्प सरकार का कहना है कि कतर से मिला यह प्लेन एक ‘ब्रिज एयरक्राफ्ट’ यानी अस्थायी समाधान है। इसका इस्तेमाल तब तक किया जाएगा, जब तक बोइंग नए राष्ट्रपति विमान तैयार नहीं कर देता। बोइंग के नए प्लेन 2024 में मिलने थे, लेकिन प्रोजेक्ट में देरी हो गई। अब उनकी डिलीवरी 2028 तक होने की संभावना है। ट्रम्प ने कहा, हम थोड़ी मुश्किल स्थिति में फंस गए थे क्योंकि नए प्लेन समय पर नहीं मिल रहे थे। इसलिए मैंने कतर के अमीर से पूछा कि क्या उनके किसी प्लेन का इस्तेमाल किया जा सकता है।सामान्य राष्ट्रपति ऐसा नहीं करते। वे इन सबसे दूरी बनाए रखना चाहते हैं। कतर के से मिले गिफ्ट पर उठे थे सवाल नए एयरफोर्स वन की अनुमानित कीमत करीब 40 करोड़ डॉलर (3600 करोड़ रुपए) बताई गई है। हालांकि विदेशी सरकार से इतना महंगा उपहार स्वीकार करने को लेकर अमेरिका में नैतिकता और कानूनी सवाल उठे थे। आलोचकों ने पूछा था कि क्या किसी विदेशी सरकार से इतना महंगा विमान लेना उचित है। ट्रम्प पहले कह चुके हैं कि राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद वह इस विमान का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उन्होंने कहा था कि बाद में इसे किसी राष्ट्रपति पुस्तकालय को दान कर दिया जाएगा। ट्रम्प की पहली पारी से जुड़ा है रंग बदलने का विवाद राष्ट्रपति विमान का रंग बदलने की ट्रम्प की योजना नई नहीं है। अपने पहले कार्यकाल में भी उन्होंने नए एयर फोर्स वन को अपने निजी विमान की तरह लाल, सफेद और नेवी ब्लू रंग देने का फैसला किया था। लेकिन मार्च 2023 में तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यह फैसला बदल दिया था। एयर फोर्स की समीक्षा में कहा गया था कि गहरे रंगों के इस्तेमाल से लागत बढ़ सकती है और विमान की डिलीवरी में और देरी हो सकती है। हालांकि सत्ता में लौटने के बाद ट्रम्प ने फिर अपनी पसंद की रंग योजना लागू कर दी। एयर फोर्स ने यह भी बताया कि भविष्य में कैबिनेट मंत्रियों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के सरकारी विमानों पर भी इसी तरह का लाल, सफेद और नेवी ब्लू रंग इस्तेमाल किया जाएगा। पुराने एयरफोर्स वन अभी सर्विस में रहेंगे एयर फोर्स के एक अधिकारी के अनुसार मौजूदा राष्ट्रपति विमान, जिन्हें VC-25A कहा जाता है, अभी रिटायर नहीं होंगे। वे तब तक सेवा में बने रहेंगे जब तक नए VC-25B विमान पूरी तरह तैयार होकर बेड़े में शामिल नहीं हो जाते। इस दौरान कतर से मिला नया विमान और मौजूदा दोनों एयर फोर्स वन राष्ट्रपति की यात्राओं के लिए उपलब्ध रहेंगे। राष्ट्रपति एयरलिफ्ट ग्रुप हर मिशन की जरूरत के हिसाब से तय करेगा कि किस यात्रा में कौन सा विमान इस्तेमाल किया जाएगा। पुराने एयरफोर्स वन के बारे में जानिए ट्रम्प अब तक बोइंग 747-200B का एयर फोर्स वन के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। बोइंग 747-200B अपनी सुरक्षा, संचार, और कमांड क्षमताओं के कारण दुनिया का सबसे सुरक्षित विमान माना जाता है। यह अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए एक चलते-फिरते ऑफिस की तरह है। वैसे तो दो बोइंग 747-200B विमान हैं, जिन्हें एक साथ तैयार रखा जाता है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति की सवारी वाला विमान ही एयर फोर्स वन कहलाता है। नए एयरफोर्स वन में हवा में ईंधन भरने वाली खूबियां नहीं एयर फोर्स वन में हवा में ही ईंधन भरने वाली खूबियां हैं जो नए एयर फोर्स वन में नहीं है। पुराना विमान परमाणु युद्ध जैसी स्थिति में करीब 7 दिन तक बिना रुके आसमान में रह सकता था। नया विमान अधिकतम 16 घंटे (14,430 किमी) ही उड़ पाएगा। नए प्लेन को तैयार करने के बजट को कंट्रोल में रखने के लिए व्हाइट हाउस ने इस फीचर को हटाने का फैसला किया था, क्योंकि हवा में ईंधन भरने का सिस्टम लगाने में बहुत ज्यादा खर्च आता है। पिछले 30 साल के इतिहास में किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति के सवार रहते हुए कभी भी हवा में ईंधन नहीं भरा गया है। सुरक्षा कारणों से हमेशा सुरक्षित सैन्य ठिकानों पर ही ईंधन भरना पसंद किया जाता है। नए एयर फोर्स की अपनी बिना ईंधन भरे उड़ान भरने की रेंज पुराने वाले विमान से लगभग 1,100 मील (करीब 1,770 किलोमीटर) अधिक है। यह एक बार में बिना रुके लगभग 8,900 मील (14,300+ किमी) तक उड़ सकता है, जो कि राष्ट्रपति की यात्राओं के लिए काफी मानी गई है। —————————- ट्रम्प से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले-मेलोनी मेरे साथ फोटो खिंचाने के लिए बेताब थीं:इटली PM का जवाब- उनकी कहानी झूठी, विदेश मंत्री ने US दौरा रद्द किया इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक बयान पर नाराजगी जाहिर की है। ट्रम्प ने दावा किया था कि G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए बेताब थीं। इस पर मेलोनी ने कहा कि ट्रम्प की यह कहानी पूरी तरह झूठी और मनगढ़ंत है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI ने 4 और कंपनियों के IPO को मंजूरी दे दी है। ये कंपनियां हैं- एजीएस हेल्थ, पीजीपी ग्लास, श्रेणी शेयर्स और SRIT इंडिया। एजीएस हेल्थ और पीजीपी ग्लास ने मार्च 2026 में सेबी के पास कॉन्फिडेंशियल तरीके से IPO का ड्राफ्ट जमा किया था। कॉन्फिडेंशियल रूट कंपनियों को लिस्टिंग पर अंतिम फैसले पर पहुंचने तक गोपनीयता की सुविधा देता है। अगर जरूरी हो तो वे बाद में बाजार की स्थितियों के आधार पर महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा किए बिना ड्राफ्ट को वापस भी ले सकती हैं।
कॉन्फिडेंशियल प्री-फाइलिंग कंपनियों को सेंसिटिव बिजनेस डिटेल्स या फाइनेंशियल मेट्रिक्स और रिस्क्स को गोपनीय रखने की इजाजत देती है, खासकर कॉम्पिटीटर्स से। दूसरी ओर स्टैंडर्ड DRHP (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस) फाइलिंग के बाद एक पब्लिक डॉक्युमेंट बन जाता है।
एजीएस हेल्थ 4500 करोड़ रुपये और पीजीपी ग्लास 4,100 करोड़ रुपये का पब्लिक इश्यू लाना चाहती है। इस तरह ये दोनों कंपनियां कुल मिलाकर 8600 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में हैं।
बाकी दोनों कंपनियों का क्या प्लान
ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के अनुसार, स्टॉक ब्रोकिंग फर्म श्रेणी शेयर्स के प्रस्तावित पब्लिक इश्यू में 69 लाख तक नए शेयर जारी होंगे। साथ ही मौजूदा शेयरधारकों की ओर से 82 लाख तक शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा। कंपनी नए शेयर जारी कर हासिल होने वाली रकम का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने, कुछ कर्ज चुकाने और सामान्य कॉर्पोरेट कामों के लिए करने की योजना बना रही है।
ड्राफ्ट पेपर के अनुसार, SRIT इंडिया के IPO में 1.68 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी होंगे। ऑफर फॉर सेल नहीं होगा। IPO से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल मौजूदा प्रोडक्ट्स को आधुनिक बनाने और उनके रीडेवलपमेंट, वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने, पहले से न पता अधिग्रहणों (Acquisitions) के जरिए इनऑर्गेनिक ग्रोथ हासिल करने और सामान्य कॉर्पोरेट कामों के लिए किया जाएगा।
IPOs This Week: 22 जून से शुरू हफ्ते में खुलेंगे 8 नए इश्यू, 6 कंपनियां होंगी लिस्ट
जियो प्लेटफॉर्म्स ने भी जमा किया IPO ड्राफ्ट
जियो प्लेटफॉर्म्स ने भी अपने पब्लिक इश्यू के लिए ड्राफ्ट सेबी के पास जमा कर दिया है। यह देश का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू साबित हो सकता है। कंपनी करीब 4 अरब डॉलर (लगभग 37,700 करोड़ रुपये) जुटाने की योजना बना रही है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Priyaka Chopra: सालों की कड़ी मेहनत के बाद प्रियंका चोपड़ा ने हॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई है। हालांकि, सात साल के गैप के बाद, यह एक्ट्रेस SS राजामौली की डायरेक्ट की गई बड़ी पैन-इंडियन एक्शन-एडवेंचर फ़िल्म ‘वाराणसी’ से भारतीय फ़िल्मों में वापसी कर रही हैं। वहीं उन्होंने हाल ही में एक बड़ी अपडेट शेयर की है।
फॉर्च्यून इंडिया से बात करते हुए प्रियंका ने कन्फर्म किया कि वह हॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस एंजेलिना जोली के साथ काम करेंगी। हालांकि, एक्ट्रेस ने इस प्रोजेक्ट के बारे में और कोई जानकारी नहीं दी, जिससे फैंस यह सोचने पर मजबूर हो गए कि क्या वह जोली के साथ किसी फिल्म, एडवर्टाइजिंग कैंपेन या किसी चैरिटी से जुड़े काम में साथ आएंगी। बातचीत के दौरान, प्रियंका ने यह भी बताया कि उन्हें जोली के साथ-साथ पेनेलोप क्रूज़ और सलमा हायेक बहुत इंस्पायर भी करती हैं।
प्रियंका ‘वाराणसी’ के साथ इंडियन सिनेमा में वापसी करने जा रही हैं। अब तक की सबसे महंगी इंडियन फिल्मों में से एक, राजामौली के डायरेक्शन में बन रही इस फिल्म का बजट ₹1,200–1,400 करोड़ (135–150 मिलियन डॉलर) है। दुनिया भर में शूट की गई इस एडवेंचर फिल्म की शूटिंग जॉर्जिया, अंटार्कटिका, अफ्रीका और हैदराबाद में हुई है।
फिल्म के बड़े पैमाने के बारे में बात करते हुए प्रियंका ने कहा, “हम जो करने की कोशिश कर रहे हैं, वह बहुत बड़ा और महत्वाकांक्षी है; ऐसा काम बहुत समय से देखने को नहीं मिला है। मैं न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया के लिए भी बहुत खुश और उत्साहित महसूस कर रही हूं, क्योंकि यह एक बहुत बड़ी ग्लोबल रिलीज़ होगी और लोगों को पता चलेगा कि हम पिछले तीन सालों से किस चीज़ पर काम कर रहे हैं।” यह फिल्म 7 अप्रैल, 2027 को दुनिया भर में रिलीज़ होगी।
प्रियंका, PPP के को-प्रोडक्शन में ‘लॉर्ड ऑफ़ द रिंग्स’ और ‘पाइरेट्स ऑफ़ द कैरिबियन’ के स्टार ऑरलैंडो ब्लूम के साथ भी काम करेंगी। उनके पास मीरा नायर की बायोग्राफ़िकल ड्रामा फ़िल्म ‘अमरी’ भी पाइपलाइन में है। इसके अलावा, वह निकोलस स्टोलर की फ़िल्म ‘जजमेंट डे’ में भी नज़र आएंगी, जिसमें विल फेरेल, ज़ैक एफ्रॉन, रेजिना हॉल और अन्य कलाकार भी शामिल हैं।
हाल के दिनों में प्रियंका अपने प्रोजेक्ट्स चुनने को लेकर काफ़ी सोच-समझकर फ़ैसले ले रही हैं। वह मानती हैं कि सालों की कड़ी मेहनत के बाद, वह अपने करियर के ऐसे पड़ाव पर पहुंच गई हैं जहां उन्हें अपनी पसंद के प्रोजेक्ट्स चुनने की आज़ादी मिल गई है। उन्होंने कहा, “जब मैंने शुरुआत की थी, तब स्क्रिप्ट्स मेरे हिसाब से नहीं लिखी जाती थीं। मेरे पति निक (जोनस) ने हाल ही में (सिंगर बियॉन्से के शब्दों को दोहराते हुए) कहा था कि ‘तुमने जो त्याग किया था, अब तुम उसके दूसरे छोर पर हो।’ अब मैं अपनी पसंद के प्रोजेक्ट्स चुन सकती हूँ और अपने प्रोजेक्ट्स खुद बना सकती हूं।”
रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल सर्विसेज यूनिट जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड ने अपने IPO के लिए शुक्रवार, 19 जून को ड्राफ्ट पेपर कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कर दिया। इस पब्लिक इश्यू के जरिए कंपनी करीब 4 अरब डॉलर (लगभग 37,700 करोड़ रुपये) जुटाने की योजना बना रही है। इससे कंपनी की वैल्यूएशन लगभग 137 अरब डॉलर आंकी गई है। ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में Jio Platforms ने घोषणा की कि उसने अपने प्रस्तावित IPO के लिए 19 इन्वेस्टमेंट बैंकों को बुक रनिंग लीड मैनेजर (BRLM) के तौर पर नियुक्त किया है। यह किसी एक पब्लिक ऑफरिंग के लिए नियुक्त किए गए बैंकों की संख्या के हिसाब से दूसरा सबसे बड़ा मामला है।
DRHP के अनुसार, इस ऑफर के लिए BRLM हैं- कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी, मॉर्गन स्टेनली इंडिया कंपनी प्राइवेट लिमिटेड, BofA सिक्योरिटीज इंडिया, एक्सिस कैपिटल, BNP पारिबा, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, CLSA इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, DAM कैपिटल एडवाइजर्स, गोल्डमैन सैक्स (इंडिया) सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड, HDFC बैंक, HSBC सिक्योरिटीज एंड कैपिटल मार्केट्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, ICICI सिक्योरिटीज, IIFL कैपिटल सर्विसेज (पहले IIFL सिक्योरिटीज), जेफरीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, JM फाइनेंशियल, JP मॉर्गन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, SBI कैपिटल मार्केट्स, UBS सिक्योरिटीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और 360 ONE WAM।
इन 19 इनवेस्टमेंट बैंकों में से कोटक महिंद्रा कैपिटल को कैपिटल स्ट्रक्चरिंग, DRHP ड्राफ्टिंग, SEBI और रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के नियमों का पालन, कानूनी विज्ञापन, मध्यस्थों की नियुक्ति और घरेलू संस्थागत मार्केटिंग के लिए लीड कोऑर्डिनेटर बनाया गया है।
Jio IPO जारी होंगे 27 करोड़ नए शेयर
19 जून को रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं सालाना आम बैठक के दौरान चेयरमैन मुकेश अंबानी ने घोषणा की कि Jio Platforms को अपने प्रस्तावित IPO के लिए बोर्ड की मंजूरी मिल गई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुताबिक, इश्यू में 10 रुपये फेस वैल्यू वाले 27 करोड़ तक नए शेयर जारी करने की योजना है।
NSE IPO के लिए 20 बैंकर
हाल ही में, NSE ने घोषणा की थी कि उसके प्रस्तावित IPO में लगभग 20 बैंकर होंगे, जो किसी एक इश्यू के लिए बैंकरों की सबसे ज्यादा संख्या होगी। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) भी सेबी के पास अपने IPO का ड्राफ्ट जमा कर चुका है। इससे करीब 30,000 करोड़ रुपये जुटाए जाने का प्लान है। IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। नए शेयर जारी नहीं होंगे। OFS में मौजूदा शेयरधारक कुल 14.89 करोड़ शेयर बेचेंगे। शेयरों को बिक्री के लिए रखने वालों में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड, कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड, अरांडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरीशस) प्राइवेट लिमिटेड, बैंक ऑफ बड़ौदा और स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड शामिल हैं। NSE में सबसे अधिक हिस्सेदारी रखने वाली LIC कोई शेयर नहीं बेचेगी।
Jio Platforms IPO में जारी होंगे 27 करोड़ तक नए शेयर, जल्द मिलने वाला है पैसा लगाने का मौका
देश का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू बन सकता है Jio IPO
Jio का पब्लिक इश्यू भारत में अब तक का सबसे बड़ा IPO साबित हो सकता है। भारत में अभी तक सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू Hyundai Motor India का रहा है। यह अक्टूबर 2024 में आया था और इसका साइज 27,858.75 करोड़ रुपये या 294.97 करोड़ डॉलर रहा था। अब जियो लगभग 37,700 करोड़ रुपये का IPO लेकर आ रही है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

सोचें, डोनाल्ड ट्रंप पर। अमेरिका का कैसा मजाक बना डाला है। चाहे जो कर रहे हैं मगर लोकतंत्र के तकाजे में कोई कुछ भी नहीं कर सकता। ईरान ने अमेरिका को हैसियत दिखा दी है। मेरा मानना है कि साठ दिनों बाद ईरान ही खाड़ी का मालिक होगा। दुनिया का संकट बना रहेगा। बावजूद इसके ट्रंप के झूठ, झांसे हॉट केक की तरह हैं। इसलिए भारत में भी उनका यह कहा अमृत वाक्य है कि नरेंद्र मोदी एक “टफ नेगोशिएटर” हैं। मोदी देखने में देवदूत जैसे लगते हैं और वे राजनीति में “किलर” हैं।
सवाल है क्यों ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह ‘चरित्र प्रमाणपत्र’ दिया? इसलिए क्योंकि दुनिया जानती है कि ज्योंहि प्रमाणपत्र मिलेगा त्योंहि मोदी और उनका मीडिया हिंदू भक्तों के बीच ट्रंपजी के कहे का घर-घर पहुंचा देगा। देखों हमारे भगवान को अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी देवदूत जैसा कहा!
ध्यान रहे, ट्रंप अपने आपको धूर्त, मास्टर सौदेबाज कहते हैं। उन्हे हर किसी को बेवकूफ बनाना आता है। वे प्रोपर्टी डीलर हैं। मिट्टी को भी सोने के भाव बेच सकते हैं। अमेरिका को जैसा अभी चूना लगा रहे हैं, वैसा एक भी राष्ट्रपति अमेरिकी इतिहास में नहीं हुआ है। ऐसे व्यापारी, सौदेबाज की पहली कला यह होती है कि सौदा करने से पहले सामने वाले को उसकी कीमत से थोड़ा ज्यादा महान महसूस करा दिया जाए।
ट्रंप ने आज ही लिखा है कि वे अपने आपको हिटलर, स्टालिन, माओं, सिकंदर आदि से बड़ा शक्तिमान मानते हैं। उन्हे भी इतिहास ऐसे ही याद करेगा। ट्रंप और नरेंद्र मोदी में फर्क यह है कि ट्रंप का लक्ष्य पृथ्वी के इतिहास का नंबर एक युगपुरुष होना है वही नरेंद्र मोदी को कलियुगी भारत का सबसे बड़ा देवता कहलाना है। एक की महानता का लेवल पृथ्वी का आधुनिक इतिहास है। वही दूसरे का कलियुगी हिंदुओं का नंबर एक भगवान बनना है। बारह साल, बारह युग! भारत में कभी चंद्रशेखर नाम के एक प्रधानमंत्री हुआ करते थे। उनके चेलों ने चालीस दिन बनाम चालीस साल के ऐसे नारे बनाए थे कि देश भर के चिरकूट उनका कीर्तन करते थे।
भटक गया हूं। असल मुद्दा है कि जल्द भारत का बाजार अमेरिकी का कैप्टिव बाजार होगा। ट्रंप अमेरिका से भारत को पशुओं की खुराक भिजवाएँगे तो सोयाबीन, मक्का से लेकर वे सामान भी आएंगे, जिससे भारत के विदेश व्यापार की कंगाली में आटा और गीला होगा। अब अमेरिका का बनवाया समझौता आसानी से लापतागंज में बिकेगा। 140 करोड़ ग्राहकों के बाजार में अमेरिका की उपस्थिति इसलिए बड़ी होनी है क्योंकि अमेरिका यह भी वचन ले रहा है कि इतने वर्षों में इतना अमेरिकी सामान भारत को खरीदना ही है। सोचें, एक के बाद एक मुक्त व्यापार समझौतों की बाढ़ में फंसता बाजार। यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ईएफटीए, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, ओमान, न्यूजीलैंड, अमेरिका से व्यापार (खरीद) के सौदे ही सौदे तो वही चीन बिना सौदे के पहले से ही सबसे बड़ा विक्रेता।
पता है व्यापारिक घाटे में सबसे बड़ा घाटे वाला कौन सा देश है? भारत। यों नंबर एक पर अमेरिका है। मगर वह इसलिए है क्योंकि अमेरिकी इतने अमीर है कि उन्हे काले हाथ करके सामान बनाना पसंद नहीं। अमेरिकियों की कमाई के असल जरिए दूसरे हैं। वह डॉलर छापता है। दुनिया को पूंजी, तकनीक देता है। अब वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता का भी मालिक है जिससे उसे डालर मिलेगा तो भारत की आईटी, सेवा क्षेत्र की डालर कमाई भी लापता होनीं है।

