Asian Market Today: एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार, 1 दिन में 10% की गिरावट के बाद 3.65% चढ़ा कोस्पी

Asian Market Today: गिफ्ट निफ्टी में फ्लैट कारोबार कर रहा है। FIIs की कैश में हल्की खरीदारी हुई, लेकिन वायदा में बिकवाली रही। एशिया में KOSPI में कल की तेज गिरावट के बाद आज रिकवरी का मूड देखने को मिला। वहीं अमेरिका में डाओ जोंस में भी निचले स्तरों से 350 प्वाइंट की रिकवरी आई। लेकिन चिप शेयरों में बिकवाली जारी है। नैस्डैक कल भी 2% से ज्यादा फिसला है।

एशियाई बाज़ार

टेक्नोलॉजी शेयरों में तेज़ी के बीच बुधवार को एशियाई बाज़ारों में मिला-जुला कारोबार हुआ। जापान का निक्केई 225 0.52% और टॉपिक्स 0.41% गिरा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी एक दिन पहले 10% की गिरावट के बाद 3.65% चढ़ा, जबकि कोसडैक 1.49% बढ़ा। हांगकांग हैंग सेंग इंडेक्स फ्यूचर्स ने बढ़त के संकेत दिए।

गिफ्ट निफ्टी 23,874 के लेवल के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले क्लोज से लगभग 21 पॉइंट्स का प्रीमियम था, जो भारतीय स्टॉक मार्केट इंडेक्स के लिए धीमी शुरुआत का संकेत देता है।

वॉल स्ट्रीट

US स्टॉक मार्केट मंगलवार को सेमीकंडक्टर स्टॉक्स में भारी गिरावट और US फेडरल रिजर्व के सख्त रवैये को लेकर चिंताओं के कारण नीचे बंद हुआ।

डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 47.22 पॉइंट्स या 0.09% गिरकर 51,665.49 पर आ गया, जबकि S&P 500 107.32 पॉइंट्स या 1.44% गिरकर 7,365.47 पर आ गया। नैस्डैक कंपोजिट 579.56 पॉइंट्स या 2.21% गिरकर 25,587.04 पर बंद हुआ।

एनवीडिया के स्टॉक की कीमत 4.15% गिरी, AMD के शेयर 5.76% फिसले, इंटेल के शेयर 6.14% गिरे, माइक्रोन टेक्नोलॉजी के शेयर 13.18% टूटे, मार्वेल टेक्नोलॉजी 9.36% गिरी, माइक्रोसॉफ्ट के शेयर 1.80% बढ़े, एप्पल के स्टॉक की कीमत 0.91% गिरी, अल्फाबेट के शेयर 0.77% गिरे, टेस्ला के स्टॉक की कीमत 5.79% गिरी और स्पेसएक्स के शेयर 0.98% बढ़े।

बैंक ऑफ जापान

जून में हुई पॉलिसी मीटिंग में हुई राय की समरी से पता चला कि बैंक ऑफ़ जापान के कुछ बोर्ड मेंबर्स ने सेंट्रल बैंक के पॉलिसी रेट को इकॉनमी के लिए न्यूट्रल माने जाने वाले लेवल के करीब लाने के लिए इंटरेस्ट रेट में और बढ़ोतरी की मांग की।

जापान का सर्विसेज़ PPI

जापान का सर्विसेज़ प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स मई में एक साल पहले के मुकाबले 3.3% बढ़ा। इंडेक्स में सालाना बढ़ोतरी, जो कंपनियों द्वारा सर्विसेज़ के लिए एक-दूसरे से ली जाने वाली कीमत को ट्रैक करता है, अप्रैल में रिवाइज्ड 3.3% बढ़त के बाद हुई।

क्रूड ऑयल की कीमतें

क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट जारी रही क्योंकि ज़्यादा टैंकर खुलेआम होर्मुज स्ट्रेट को पार कर रहे थे। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 0.99% गिरकर $76.32 प्रति बैरल हो गई, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 1.05% गिरकर $72.44 पर आ गया।

आज सोने का रेट

सोने की कीमतों में गिरावट जारी रही। स्पॉट गोल्ड की कीमत 0.8% गिरकर $4,083.77 प्रति औंस हो गई, जबकि चांदी की कीमतें 1.1% गिरकर $60.86 पर आ गईं।

डॉलर

US डॉलर एक साल से ज़्यादा समय में अपने सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गया। डॉलर इंडेक्स, जो कई करेंसी के मुकाबले डॉलर को मापता है, मई 2025 के बाद अपने सबसे ऊंचे लेवल 101.42 पर पहुंचने के बाद 0.38% बढ़कर 101.39 पर पहुंच गया। यूरो 0.41% गिरकर $1.138 पर आ गया, जबकि स्टर्लिंग 0.45% कमजोर होकर $1.3187 पर आ गया। जापानी येन के मुकाबले डॉलर 0.01% मजबूत होकर 161.55 पर पहुंच गया।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price Today: सोना फिर लुढ़का, 24 और 22 कैरेट दोनों की गिरी कीमत; चेक करें दिल्ली समेत 10 बड़े शहरों का भाव

देश में सोने की कीमत में फिर से गिरावट दिख रही है। 24 जून की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत घटकर 144740 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 3,000 रुपये या 2 प्रतिशत घटकर 1,49,300 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई। मुख्य रूप से विदेशी बाजारों में डॉलर के मजबूत होने से कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,121.10 डॉलर प्रति औंस पर है।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 144740 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 132690 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 132540 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 144590 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 147920 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 135590 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 144590 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 132540 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली132690144740
मुंबई132540144590
अहमदाबाद132590144640
चेन्नई135590147920
कोलकाता132540144590
हैदराबाद132540144590
जयपुर132690144740
भोपाल132590144640
लखनऊ132690144740
चंडीगढ़132690144740

चांदी की कीमत

सोने की तरह दूसरी कीमती धातु चांदी में भी गिरावट है। 24 जून को कीमत घटकर 244900 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 62.27 डॉलर प्रति औंस पर है।

 

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होर्मुज में फंसे 11,000 नाविकों का रेस्क्यू शुरू:US-ईरान मिलकर काम कर रहे; अमेरिकी विदेश मंत्री पीस डील पर UAE को मनाने पहुंचे

संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) ने कहा है कि होर्मुज में फंसे करीब 11 हजार सीफेयरर्स, यानी नाविकों को सुरक्षित निकालने की योजना पर काम शुरू हो गया है। यह बड़ा अभियान अमेरिका, ईरान, खाड़ी इलाके के तटीय देशों, शिपिंग कंपनियों की मदद से चलाया जाएगा। इस दौरान यह भी सुनिश्चित कर लिया गया है कि जहाज सुरक्षित तरीके से इस रास्ते से गुजर सकें। इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो खाड़ी देशों के दौरे पर पहुंच गए हैं। उनका मकसद अमेरिका-ईरान समझौते को उन देशों के सामने रखना है, जो इस समझौते को लेकर सबसे ज्यादा संदेह में माने जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, UAE, बहरीन और कुवैत को इस समझौते की कुछ बातों पर चिंता है। उन्हें लगता है कि इससे होर्मुज में ईरान का प्रभाव बढ़ गया है। साथ ही समझौते में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर भी कोई स्पष्ट शर्त नहीं रखी गई है। इसके अलावा ईरान के पुनर्निर्माण के लिए प्रस्तावित 300 अरब डॉलर, यानी 28 लाख करोड़ रुपए के फंड में खाड़ी देशों से मदद मांगे जाने की संभावना है। ऐसे में अमेरिका इन देशों को भरोसा दिलाने और समझौते के समर्थन के लिए राजी करने की कोशिश कर रहा है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरानी राष्ट्रपति पाकिस्तान पहुंचे: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान एक दिन की यात्रा पर पाकिस्तान पहुंचे। इस दौरान अमेरिका और ईरान के बीच हुई पीस डील पर चर्चा हुई। 2. भारत से जुड़े 11 जहाजों ने होर्मुज पार किया: अमेरिका-ईरान के बीच 17 जून को हुए समझौते के बाद अब तक 11 जहाज होर्मुज पार कर भारत की ओर रवाना हो चुके हैं। 3. होर्मुज से 1.9 करोड़ बैरल तेल गुजरा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि सोमवार को होर्मुज से 1.9 करोड़ बैरल तेल की आवाजाही हुई, जो अब तक का रिकॉर्ड है। 4. इजराइल अपने हथियार खुद बनाएगा: इजराइली PM ने कहा कि इजराइल को अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर सैन्य निर्भरता कम करनी होगी और खुद हथियार बनाना सीखना होगा। 5. ट्रम्प ने ईरान को फिर से धमकी दी: ट्रम्प ने कहा कि अगर ईरान समझौते का पालन नहीं करता या सही तरीके से व्यवहार नहीं करता, तो वह फिर से कार्रवाई करने को तैयार हैं। ईरान पीस डील से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए….

Gold Silver Prices: ₹10500 सस्ती हुई चांदी, सोना ₹3000 टूटा; जानिए क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट

Gold Silver Prices: सोने और चांदी की कीमतों में मंगलवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। विदेशी बाजारों में डॉलर मजबूत होने के कारण दोनों कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ गया। राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोना ₹3,000 टूटकर ₹1.49 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं, चांदी ₹10,500 लुढ़ककर ₹2.35 लाख प्रति किलो पर पहुंच गई।

ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, 24 कैरेट वाला सोना 2% गिरकर ₹1,49,300 प्रति 10 ग्राम रह गया। इससे पहले सोना 27 मार्च को करीब इसी स्तर पर ₹1,47,800 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था।

चांदी में और बड़ी गिरावट देखने को मिली। इसकी कीमत 4.3% यानी ₹10,500 घटकर ₹2,35,000 प्रति किलो रह गई। यह दो महीने से ज्यादा समय का निचला स्तर है। इससे पहले 3 अप्रैल को चांदी ₹2,37,000 प्रति किलो पर थी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव

विदेशी बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 2% यानी 70.33 डॉलर टूटकर 4,121.10 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं चांदी 4% से ज्यादा गिरकर 62.27 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती दिखी।

सोना-चांदी क्यों टूट रहे हैं?

HDFC Securities के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका की वजह से सोने-चांदी पर दबाव बना हुआ है। एनालिस्टों का कहना है कि फिलहाल डॉलर की मजबूती बुलियन बाजार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

Kotak Securities की कमोडिटी रिसर्च प्रमुख कायनात चैनवाला के अनुसार, सोमवार को अमेरिका-ईरान वार्ता में प्रगति की खबरों से सोने को थोड़ी राहत मिली थी। हालांकि, यह तेजी ज्यादा देर टिक नहीं सकी। ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंताओं ने फिर से बाजार पर दबाव बना दिया।

फेडरल रिजर्व की चिंता बढ़ा रही दबाव

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना भी निवेशकों को परेशान कर रही है। डॉलर इंडेक्स बढ़कर 101.15 पर पहुंच गया, जो मई 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।

ट्रेडर्स अब एक और ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना को कीमतों में शामिल कर रहे हैं। यही वजह है कि निवेशक सोने और चांदी से दूरी बना रहे हैं।

आगे क्या रह सकता है रुख?

LKP Securities के रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी का कहना है कि डॉलर इंडेक्स 101 के ऊपर बने रहने से सोने पर दबाव जारी है। साथ ही अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर बनी अनिश्चितता भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही है।

अब निवेशकों की नजर अगले हफ्ते आने वाले अमेरिका के नॉन-फार्म पेरोल (NFP) और बेरोजगारी के आंकड़ों पर रहेगी। ये आंकड़े डॉलर और सोने की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

अब किस ओर जाएंगे दाम

जतीन त्रिवेदी के मुताबिक, निकट भविष्य में सोना ₹1,44,500 से ₹1,48,500 प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार कर सकता है।

वहीं Augmont Bullion की रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,200 डॉलर के स्तर से नीचे फिसल चुका है। अब इसका अगला अहम सपोर्ट 4,050-4,100 डॉलर के बीच माना जा रहा है, जो घरेलू बाजार में करीब ₹1.43 लाख से ₹1.44 लाख प्रति 10 ग्राम के बराबर है।

चांदी भी 65 डॉलर का अहम स्तर तोड़ चुकी है। अब इसका अगला सपोर्ट 60-61 डॉलर प्रति औंस के बीच माना जा रहा है। भारतीय बाजार में यह स्तर करीब ₹2.15 लाख से ₹2.20 लाख प्रति किलो के बराबर बैठता है।

Gold Silver Prices: सोने-चांदी में बड़ी गिरावट, ETF भी टूटा; ये 5 कारण हैं जिम्मेदार

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

होर्मुज संकट के बीच पीएम मोदी का फॉर्मूला, 1973 की गलती दोहराने से कैसे बचा भारत?

अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर होने के बाद अब दुनिया का ध्यान लड़ाई से हटकर उसके बड़े असर पर केंद्रित हो गया है। भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आने वाले तेल की सप्लाई को लेकर है। अगर इस अहम समुद्री मार्ग में कोई रुकावट आती है तो इसका असर भारत समेत कई देशों की ऊर्जा जरूरतों पर पड़ सकता है। इस स्थिति ने एक बार फिर यह चर्चा शुरू कर दी है कि भारत ने पिछले कई दशकों में पश्चिम एशिया के बड़े संकटों से कैसे निपटा है। 1973 के योम किप्पुर युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का रवैया और हाल के इज़राइल-ईरान तनाव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया, भारत की विदेश नीति के दो अलग-अलग दृष्टिकोणों को दिखाती है।

एक ओर पूर्व पीएम इंदिरा गांधी का रुख राजनीतिक और वैचारिक समर्थन पर आधारित था, जबकि दूसरी ओर नरेंद्र मोदी की सरकार ने रणनीतिक और व्यावहारिक नीति को प्राथमिकता दी है। आज भारत अपने राष्ट्रीय हितों, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक संबंधों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है। योम किप्पुर युद्ध अक्टूबर 1973 में शुरू हुआ था। उस समय मिस्र और सीरिया ने अचानक इजरायल पर हमला कर दिया था। इसके बाद यह संघर्ष तेजी से एक बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट में बदल गया। इस टकराव में अमेरिका, सोवियत संघ और अरब देशों के प्रमुख तेल उत्पादक राष्ट्र भी शामिल हो गए थे, जिससे पूरी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई थी।

पूर्व पीएम इंदिरा गांधी का रुख

1973 के युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने खुलकर अरब देशों का समर्थन किया था। भारत ने इस संघर्ष के लिए इज़रायल को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि उसकी सख्त और अड़ियल नीतियां ही क्षेत्र में तनाव और दुश्मनी की मुख्य वजह हैं। भारत ने अरब देशों और फिलिस्तीन के मुद्दे का मजबूती से समर्थन किया। उस समय भारत की विदेश नीति भी काफी हद तक इसी दिशा में थी। हालांकि, राजनीतिक और कूटनीतिक समर्थन देने के बावजूद भारत को इसका कोई खास आर्थिक फायदा नहीं मिला।

युद्ध के बाद दुनिया तेल संकट की चपेट में आ गई। कई अरब देशों ने तेल उत्पादन और आपूर्ति को लेकर सख्त कदम उठाए, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं। रिपोर्टों के मुताबिक, कच्चे तेल का दाम करीब 3 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 12 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। तेल की कीमतों में इस भारी बढ़ोतरी का असर भारत पर भी पड़ा। देश को तेल आयात करने के लिए पहले के मुकाबले कई गुना ज्यादा खर्च करना पड़ा, जिससे अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया।

हालांकि युद्ध खत्म होने के बाद भी भारत का फिलिस्तीन के प्रति समर्थन जारी रहा। वर्ष 1974 में भारत ने संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (पीएलओ) को पर्यवेक्षक का दर्जा दिलाने की कोशिश का समर्थन किया। इसके एक साल बाद भारत पीएलओ को आधिकारिक मान्यता देने वाला पहला गैर-अरब देश बन गया। भारत ने नई दिल्ली में पीएलओ का कार्यालय खोलने की भी अनुमति दी। इसके अलावा, भारत ने संयुक्त राष्ट्र के उस प्रस्ताव का भी समर्थन किया था, जिसमें ज़ायोनीवाद को नस्लवाद के समान बताया गया था।

इन फैसलों से साफ होता है कि उस समय भारत के अरब देशों और फिलिस्तीन के साथ काफी करीबी संबंध थे। भारत का मानना था कि इस क्षेत्र के साथ मजबूत राजनीतिक रिश्ते उसके रणनीतिक और आर्थिक हितों को भी फायदा पहुंचाएंगे। उस दौर में भारत की मध्य पूर्व के तेल पर निर्भरता लगातार बढ़ रही थी। ऐसे में सरकार को उम्मीद थी कि अरब देशों के साथ अच्छे संबंध देश की ऊर्जा सुरक्षा और अन्य महत्वपूर्ण जरूरतों को पूरा करने में मदद करेंगे।

मोदी सरकार का रुख

योम किप्पुर युद्ध के लगभग 50 साल बाद पश्चिम एशिया में एक और बड़ा तनाव देखने को मिला। इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने दुनिया भर की चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बढ़ी, जो दुनिया में तेल आपूर्ति का एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। अगर इस रास्ते में किसी तरह की रुकावट आती है, तो इसका असर पूरी दुनिया के तेल कारोबार पर पड़ सकता है। भारत के लिए यह चिंता और भी बड़ी है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात किए गए तेल से पूरा करता है।

दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल भारत के लिए इस तरह का तनाव आर्थिक जोखिम पैदा कर सकता है। खाड़ी क्षेत्र में लंबे समय तक संकट रहने पर तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, आयात पर खर्च बढ़ सकता है और महंगाई में तेजी आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो इसका असर केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा। परिवहन, उद्योग और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी कई चीजों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। इससे देश की आर्थिक विकास दर पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।

हालांकि, 1973 के मुकाबले इस बार भारत का रुख काफी अलग रहा। इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को भारत ने किसी राजनीतिक पक्ष के नजरिए से नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वतंत्रता के आधार पर देखा। भारत ने किसी एक देश का खुलकर समर्थन करने के बजाय शांति, बातचीत और तनाव कम करने पर जोर दिया। मोदी सरकार लगातार यह कहती रही कि सभी पक्ष बातचीत के जरिए समाधान निकालें और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखें।

नई दिल्ली ने इज़रायल, ईरान और खाड़ी देशों समेत पश्चिम एशिया के सभी प्रमुख देशों के साथ अपने संबंध बनाए रखे। भारत ने किसी एक खेमे में शामिल होने के बजाय संतुलित नीति अपनाई, ताकि हर परिस्थिति में उसके राष्ट्रीय हित सुरक्षित रहें। इस सोच को अक्सर “भारत पहले” नीति कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चाहे क्षेत्रीय संघर्ष किसी भी दिशा में जाए, भारत की ऊर्जा जरूरतें, आर्थिक हित और कूटनीतिक संबंध प्रभावित न हों।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रुख इस पूरे संकट के दौरान व्यावहारिक और स्पष्ट रहा। भारत ने हालात बिगड़ने का इंतजार करने के बजाय पहले से ही जरूरी कदम उठाने शुरू कर दिए। केंद्र सरकार ने कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए नए और अलग-अलग स्रोतों पर ध्यान दिया, ताकि किसी एक क्षेत्र पर ज्यादा निर्भरता न रहे। साथ ही, तेल भंडार को मजबूत करने और रिफाइनरियों का काम लगातार जारी रखने पर भी जोर दिया गया, जिससे देश में ईंधन की आपूर्ति प्रभावित न हो।

भारत ने यह भी सुनिश्चित किया कि ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर किसी तरह का असर कम से कम पड़े। इसके लिए सरकार ने क्षेत्र के सभी प्रमुख देशों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में रहने और काम करने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई। भारत ने संघर्ष में शामिल सभी पक्षों के साथ अपने कूटनीतिक और व्यापारिक संबंध बनाए रखे, ताकि जरूरत पड़ने पर भारतीयों की मदद की जा सके और देश के आर्थिक हित सुरक्षित रहें। इस तरह भारत ने किसी एक पक्ष का समर्थन करने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों, ऊर्जा सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा को सबसे अधिक महत्व दिया।

Gold Silver Prices: सोने-चांदी में बड़ी गिरावट, ETF भी टूटा; ये 5 कारण हैं जिम्मेदार

Gold Silver Prices: सोने और चांदी में मंगलवार को बड़ी गिरावट दिखी। यह ट्रेंड वैश्विक और घरेलू, दोनों बाजारों में दिखा। गोल्ड और सिल्वर ETF भी लाल निशान में ट्रेड करते नजर आए। इसकी वजह फेडरल रिजर्व का रुख और भू-राजनीतिक घटनाक्रम हैं।

ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) के राष्ट्रीय महासचिव नितिन केडिया का कहना है कि सितंबर में अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका है। वहीं, बैंक ऑफ अमेरिका ने 2026 में तीन बार ब्याज दर बढ़ने का अनुमान दिया है। इस फैक्टर ने भी निवेशकों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

सोने और चांदी में कितनी गिरावट

गोल्ड दोपहर 2.40 बजे तक करीब 2100 रुपये यानी 1.42% की गिरावट के साथ 1,46,010 रुपये प्रति 10 ग्राम पर था। हालांकि, एक वक्त यह गिरकर 1,45,510 रुपये तक पर आ गया था। वहीं, चांदी 7300 रुपये यानी 3% से ज्यादा टूटकर 2,27,010 प्रति किलो पर थी। ये भी कारोबार के दौरान गिरकर 2,25,666 रुपये तक आ गई थी।

अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें, तो वहां सोना करीब 2% गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा था। वहीं, चांदी में 5% से ज्यादा की गिरावट आई है। गोल्ड और सिल्वर ETF भी लगभग इतना ही टूटे हैं।

गोल्ड-सिल्वर गिरने के 5 बड़े कारण

फेडरल रिजर्व के कड़े संकेत: अमेरिकी सेंट्रल बैंक ने संकेत दिए हैं कि महंगाई को काबू में रखने के लिए इस साल ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है। ब्याज दरें बढ़ने से निवेशक बॉन्ड्स में निवेश करना पसंद करते हैं। क्योंकि सोने-चांदी में ब्याज नहीं मिलता।

ब्याज दर बढ़ने का अनुमान: बैंक ऑफ अमेरिका ने 2026 में ब्याज दरों में तीन बार बढ़ोतरी का अनुमान दिया है। इसके चलते भी निवेशकों ने सोने और चांदी में बिकवाली बढ़ा दी है।

निवेशकों की मुनाफावसूली: ब्याज दर में बढ़ोतरी की आशंका से निवेशक गोल्ड और सिल्वर में मुनाफावसूली भी कर रहे हैं। गोल्ड-सिल्वर ETF में भी प्रॉफिट बुकिंग दिख रही है।

अमेरिकी डॉलर: डॉलर इंडेक्स में बढ़ोतरी देखने को मिली है। डॉलर मजबूत होने से विदेशी मुद्रा रखने वाले खरीदारों के लिए सोना-चांदी महंगा हो जाता है। इससे ग्लोबल डिमांड पर असर दिखता है।

भू-राजनीतिक तनाव में कमी: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की बातचीत में सकारात्मक प्रगति हुई है। इससे वैश्विक स्तर पर जोखिम में कुछ नरमी आई है। ऐसे में निवेशक सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी से अपना पैसा निकाल रहे हैं।

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Trading Strategy : ग्लोबल बाजारों से मिले कमजोर संकेत बाजार पर पड़े भारी, जानिए अब क्या हो ट्रेडिंग रणनीति

Trading Strategy : ग्लोबल बाजारों से कमजोर संकेत भारतीय बाजार पर भारी पड़े है। निफ्टी 200 प्वाइंट से ज्यादा फिसलकर 23900 के नीचे आ गया है। बैंक निफ्टी करीब 650 प्वाइंट गिरा है। वोलैटिलिटी इंडेक्स INDIA VIX 9% से ज्यादा चढ़कर 14 के करीब पहुंच गया है। चिप शेयरों में दबाव जारी है। नैस्डैक फ्यूचर्स 700 प्वाइंट से ज्यादा टूटा है। एशिया में कोस्पी में 10% का लोअर सर्किट लगा है। दूसरे एशियाई बाजारों में भी तेज गिरावट देखने को मिल रही है। डॉलर इंडेक्स के 101 के ऊपर निकलने से मेटल सेक्टर में तगड़ी मुनाफावसूली आई है। मेटल इंडेक्स 3.5 फीसदी टूटा है। नाल्को,हिंदुस्तान जिंक और NMDC वायदा के टॉप लूजर्स में शामिल हैं। IT इंडेक्स में भी दो फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। साथ ही सरकारी बैंक,कंज्यूर ड्यूरेबल और कैपिटल मार्केट शेयर भी फिसले हैं। वहीं कमजोर बाजार में भी फार्मा शेयर मजबूत दिख रहे हैं।

बाजार: बड़ी गिरावट

ऐसे में बाजार में अपनी रणनीति साझा करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि भारतीय बाजारों पर ग्लोबल बाजारों की गिरावट हावी हो गई है। एशिया और US फ्यूचर्स में गिरावट का असर देखने को मिल रहा है। निफ्टी ने इंट्राडे में 23,900 तोड़ा है। बैंक निफ्टी में भी बड़ी गिरावट आई है। इंफोसिस की अगुवाई में IT में फिर गिरावट आई है। निफ्टी IT फिर 52-WEEK LOW के करीब है। आज मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बड़ी गिरावट आई है। बड़ा सवाल यह है कि क्या आज ट्रेंड बदला है?

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बाजार: अब क्या?

अगर निफ्टी 23,900 के नीचे बंद हो तो बाहर हों। एक ना एक दिन तो ट्रेलिंग SL लगना ही था। फिर भी ये वाली स्विंग काफी अच्छी रही है। आज बाजार में थोड़ी घबराहट है। हमारे मार्केट्स का इतना गिरने का लॉजिक नहीं है। कोरिया जब 50% भागा हम तो नहीं भागे। आज कोरिया 10% गिरा तो हम क्यों गिरे? कच्चा तेल अभी भी $77 के ही करीब है। आज थोड़ा एक्सपायरी का भी प्रेशर लगता है।

निफ्टी-बैंक निफ्टी पर रणनीति साझा करते हुए अनुज सिंघल ने कहा कि निफ्टी के लिए अगला सपोर्ट 23,800-23,850 पर और बैंक निफ्टी के लिए अगला सपोर्ट 57,000-57,200 पर है।

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Monsoon Breaking: डाल्टेनगंज, मोतिहारी से गुजर रहा मानसून, अब IMD ने बताई यूपी में इसकी एंट्री की तारीख

Monsoon Entry in UP Forecast: उत्तर प्रदेश समेत देश के किसानों और आम जनता के लिए राहत की बड़ी खबर है। दो हफ्तों तक पश्चिमी भारत में सुस्त पड़े रहने के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने एक बार फिर जबरदस्त रफ्तार पकड़ ली है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक मानसून अब झारखंड के डाल्टेनगंज और बिहार के मोतिहारी से गुजर रहा है।

इसके साथ ही मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश में मानसून की एंट्री की तारीख भी साफ कर दी है। केंद्रीय और पश्चिमी क्षेत्रों में मानसून के आगे बढ़ने से खरीफ फसलों की बुवाई को बड़ा बूस्ट मिलने की उम्मीद है। साथ ही लोगों को भीषण लू से भी बड़ी राहत मिलेगी।

डाल्टेनगंज और मोतिहारी पहुंची मानसून की सीमा

IMD के मुताबिक 23 जून को मानसून की उत्तरी सीमा अब देश के कई महत्वपूर्ण हिस्सों को पार कर चुकी है। आज की तारीख में मानसून की यह रेखा दहानू, वर्धा, रायपुर, डाल्टेनगंज और मोतिहारी से होकर गुजर रही है। मानसून ने मध्य अरब सागर के बचे हुए हिस्सों, मुंबई सहित महाराष्ट्र के कुछ और इलाकों, तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के कई नए क्षेत्रों को पूरी तरह कवर कर लिया है।

उत्तर प्रदेश में इस दिन होगी मानसून की एंट्री

IMD ने अपने लेटेस्ट वेदर बुलेटिन में देश के विभिन्न राज्यों में मानसून के आगे बढ़ने का एक अनुमानित टाइमफ्रेम जारी किया है। अगले 2-3 दिनों में उत्तर अरब सागर के कुछ हिस्सों, गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के कुछ और इलाकों के साथ-साथ मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में मानसून दस्तक दे देगा।

मध्य प्रदेश में एंट्री के बाद मानसून अगले 3-5 दिनों में आगे बढ़ेगा और झारखंड व बिहार के बचे हुए हिस्सों को कवर करते हुए उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में प्रवेश कर जाएगा। यानी अगले एक हफ्ते के भीतर यूपी में मानसूनी बारिश का दौर शुरू होने की पूरी संभावना है।

दो हफ्ते तक क्यों अटका रहा मानसून?

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक मानसून ने 8 जून को ही दक्षिणी महाराष्ट्र में दस्तक दे दी थी लेकिन इसके बाद करीब दो हफ्तों तक इसकी रफ्तार थम गई थी। मौसम अधिकारियों के मुताबिक भूमध्य सागर से उठने वाले पश्चिमी विक्षोभ के कारण मानसून की प्रगति रुक गई थी। पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में बारिश और बर्फबारी लाते हैं लेकिन कभी-कभी ये मानसूनी हवाओं के मार्ग में रुकावट भी पैदा कर देते हैं। अब यह बाधा दूर हो चुकी है और मानसून दोबारा मोमेंटम पकड़ रहा है।

भारतीय अर्थव्यवस्था और खेती के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?

भारत की लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए जून से सितंबर के बीच होने वाली मानसूनी बारिश बेहद महत्वपूर्ण है। देश की करीब आधी आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। भारत की लगभग आधी कृषि भूमि सिंचाई के लिए पूरी तरह बारिश पर निर्भर है। यह चार महीने का मानसून देश की सालाना बारिश का लगभग 70% हिस्सा देता है। इससे जल स्रोतों की रीफिलिंग भी होती है।

जून में अब तक सामान्य से कम रही है बारिश

मौसम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि अल नीनो के प्रभाव के चलते इस साल जून के पहले 21 दिनों में भारत में औसत से 42.2% कम बारिश दर्ज की गई है। इस पूरे हफ्ते भी बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है। इससे पहले मौसम विभाग ने अपने पूर्वानुमान में कहा था कि चार महीने के इस मानसूनी सीजन में देश में दीर्घावधि औसत (LPA) की 90% बारिश होने की संभावना है जबकि अकेले जून महीने में एल नीनो के कारण एलपीए (LPA) की 92% बारिश होने का अनुमान जताया गया था।

South Korea Stock Market: दक्षिण कोरिया का स्टॉक मार्केट क्रैश, Kospi 9 फीसदी से ज्यादा फिसला

South Korea Stock Market: दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में 23 जून को कोहराम मच गया। बाजार का प्रमुख सूचकांक कोस्पी 9.99 फीसदी क्रैश कर गया। पहले 8 फीसदी क्रैश करने के बाद ट्रेडिंग 20 मिनट के लिए रोक दी गई। दोबारा ट्रेडिंग शुरू होने पर गिरावट और बढ़ गई। अचानक आई इस बड़ी गिरावट ने इनवेस्टर्स को हैरान कर दिया है।

सेमीकंडक्टर शेयरों में आया था बड़ा उछाल

दक्षिण कोरिया का बाजार इस साल सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले बाजारों में शामिल था। कोस्पी ने ऊंचाई के कई नए रिकॉर्ड बनाए थे। इसकी बड़ी वजह सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में उछाल थी। विदेशी इनवेस्टर्स ने इन शेयरों में खूब पैसे लगाए। इससे इन कंपनियों के शेयरों में अप्रत्याशित तेजी आई थी। लेकिन, 23 जून को आई गिरावट ने इस तेजी पर बड़ा ब्रेक लगा दिया है।

SK Hynix का शेयर 10 फीसदी से ज्यादा फिसला

सबसे ज्यादा गिरावट SK Hynix के शेयरों में दिखी। यह 10 फीसदी से ज्यादा क्रैश कर गया। Samsung Electronics का शेयर 7.5 फीसदी क्रैश कर गया। बताया जाता है कि सर्किट ब्रेकर हटने के बाद दोबारा ट्रेडिंग शुरू होने पर सैमसंग के शेयरों पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया। इससे यह शेयर 9 फीसदी से ज्यादा क्रैश कर गया।

विदेशी निवेशकों ने बेचे 2.6 अरब डॉलर के शेयर

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने दोपहर तक 2.6 अरब डॉलर के शेयर बेचे, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया। हालांकि, रिटेल ट्रेडर्स ने इस गिरावट में अपनी पोजीशन बढ़ाई। इस महीने कोस्पी 9,000 का लेवल पार कर गया था। इसकी वजह अमेरिका-ईरान में डील की खबर थी। पहले पार कोस्पी इस लेवल पर पहुंचा था।

कई शेयरों की कीमतें एक साल में तीन गुनी 

दक्षिण कोरिया के बाजार में लगातार जबर्दस्त तेजी से रिस्क बढ़ गया था। कई शेयरों की कीमतें एक साल में तीन गुनी हो गई हैं। SK Hynix का शेयर इस साल 350 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है। इसने प्रतिद्वंद्वी कंपनी सैमसंग के शेयरों को पीछे छोड़ दिया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि चिप बनाने वाली कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी से शेयर की कीमतें आसमान में पहुंच गईं। इसमें लेवरेज्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड का बड़ा हाथ है।

इन शेयरों में भी बड़ी गिरावट 

स्टॉक मार्केट में गिरने वाले शेयरों की संख्या गिरने वाले शेयरों के मुकाबले काफी ज्यादा थी। LG Energy Solution का शेयर 2.98 फीसदी नीचे चल रहा था। Hyundai Motor का शेयर 8.78 क्रैश कर गया था। Kia Corp के शेयरों में 6.47 फीसदी गिरावट आई।

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इन वजहों से बाजार में गिरावट

एनालिस्ट्स का कहना है कि दक्षिण कोरिया में आज आई गिरावट की कई वजहें हैं। इनमें सबसे बड़ी वजह प्रॉफिट बुकिंग है। दूसरा, इस साल आई बड़ी तेजी की वजह से कई शेयरों की वैल्यूएशंस काफी बढ़ गई थीं। बाजार में एआई शेयरों के दम पर बाजार में आई तेजी के टिकने को लेकर संदेह जताया जा रहा था।

Trading Plan: 24000 के ऊपर बने रहने तक निफ्टी में तेजी की उम्मीद रहेगी कायम, 24500 पर अगला अहम रेजिस्टेंस

Trading Plan: बाजार में तेजी का दौर जारी रहने की संभावना है,क्योंकि निफ्टी 50 अपने शॉर्ट-टू-मीडियम टर्म मूविंग एवरेज से काफी ऊपर ट्रेड कर रहा है और ये एवरेज ऊपर की ओर बढ़ रहे हैं। साथ ही,कच्चे तेल की कीमतों में नरमी है और वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया VIX भी नीचे है। हालांकि,मोमेंटम इंडिकेटर बाजार के रुख को ‘साइडवेज-टू-पॉजिटिव'(सपाट से पॉजिटिव) बता रहे हैं। जब तक निफ्टी 24,000 से ऊपर बना रहता है,तब तक इसमें 24,200–24,300 के जोन (जो एक तत्काल रेजिस्टेंस है) तक तेजी आ सकती है। इसके बाद 24,500 का स्तर एक अहम रेजिस्टेंस लेवल के तौर पर सामने आएगा। निचले स्तर पर 23,800 के अहम सपोर्ट लेवल के तौर पर काम करने की उम्मीद है। वहीं,बैंक निफ्टी को 58,500–59,000 के जोन की ओर बढ़ने के लिए 58,000 के ऊपर लगातार क्लोजिंग की जरूरत है। जानकारों के मुताबिक,इंडेक्स के लिए सपोर्ट 57,000–56,800 की रेंज में है।

निफ्टी आउटलुक और रणनीति

ICICI सिक्योरिटीज में डेरिवेटिव्स और क्वांट रिसर्च के वाइस प्रेसिडेंट और हेड जय ठक्कर का कहना है कि पिछले ट्रेडिंग सेशन में निफ्टी बढ़त के साथ बंद हुआ। हालांकि,इसे एक बार फिर 24,200 के लेवल के पास सप्लाई का सामना करना पड़ा,जो शॉर्ट-टर्म रेजिस्टेंस का काम कर रहा है। हाल ही में,इंडेक्स 23,800 के लेवल से पलटा और अब 24,000 के निशान से काफी ऊपर ट्रेड कर रहा है,जहां सबसे ज्यादा कुल ‘पुट बेस’है। इसलिए,शॉर्ट-टर्म रेंज 24,000–24,200 के बीच दिख रही है,जबकि महीने की बड़ी रेंज 23,800–24,500 है।

कुल मिलाकर ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है। इंडिया VIX और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जैसी कई वजहें इस बढ़त को सपोर्ट कर रही हैं। हालांकि,US डॉलर इंडेक्स में बढ़ोतरी इक्विटी के लिए एक नेगेटिव फैक्टर है। इसलिए,उम्मीद है कि मार्केट निकट भविष्य में एक दायरे (रेंज)में ही रहेगा। अगर इंडेक्स 24,200 के लेवल को पार करता है,तो इसमें 24,500 की ओर और तेजी आ सकती है। वहीं,अगर इंडेक्स इस लेवल को पार नहीं कर पाता है,तो कुछ समय के लिए कंसोलिडेशन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

हाल के निचले स्तर 23,072 से शुरू हुई रैली का आखिरी लक्ष्य 24,800–25,000 बना हुआ है। इसलिए,हमारा नजरिया पॉज़िटिव बना हुआ है और हम’बाय-ऑन-डिप्स'(गिरावट पर खरीदारी)की रणनीति अपनाने की सलाह है।

अहम रेजिस्टेंस: 24,200, 24,500

अहम सपोर्ट: 24,000, 23,800

स्ट्रैटेजी: 24,000 के आस-पास निफ्टी फ्यूचर्स खरीदें, 23,800 के नीचे स्टॉप-लॉस रखें और 24,200 व 24,500 का टारगेट सेट करें।

Market cues : निफ्टी के 24200 के नीचे ट्रेड करने तक कंसोलिडेशन जारी रहने की संभावना, 23800 पर अहम सपोर्ट

बैंक निफ्टी आउटलुक और रणनीति

जय ठक्कर का कहना है कि तेजी के इस दौर में बैंक निफ्टी,निफ्टी से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। इसमें सबसे पहले रिकवरी आई थी और यह अभी भी मजबूती से ट्रेड कर रहा है। पुट-कॉल रेश्यो (PCR) 1 से ऊपर 1.08 पर है,जो तेजी का संकेत है। इसके अलावा,इंडेक्स अपने 57,000 के’मैक्सिमम पेन लेवल’से काफी ऊपर ट्रेड कर रहा है,जिसके शॉर्ट-टर्म सपोर्ट के तौर पर काम करने की उम्मीद है।

मौजूदा सीरीज के लिए ऊपर की तरफ,58,000 के स्ट्राइक पर’कॉल बेस’काफी मज़बूत है और यह शॉर्ट-टर्म रेजिस्टेंस का काम कर रहा है। इस लेवल के ऊपर जाने पर ही और शॉर्ट कवरिंग शुरू होने की संभावना है,जिससे इंडेक्स 59,000 और 60,000 के लेवल तक जा सकता है। तब तक,57,000 और 58,000 के लेवल के बीच कंसोलिडेशन की संभावना ज्यादा है।

57,500 और 58,000 के स्ट्राइक पर पुट में काफी बढ़ोतरी हुई है। हालांकि,अभी 58,000 के स्ट्राइक पर’कॉल’राइटर्स का पलड़ा भारी है। पोजीशनल नजरिए से देखें तो जब तक 55,000 का लेवल नहीं टूटता,तब तक ट्रेंड पॉजिटिव बना रहेगा और 60,000 व 61,000 के टारगेट बने रहेंगे। फिलहाल,रणनीति यही है कि गिरावट पर खरीदारी करें या फिर 58,000 के ऊपर’ब्रेकआउट’होने पर खरीदें।

अहम रेजिस्टेंस: 58,000, 60,000

अहम सपोर्ट: 57,000, 56,000

स्ट्रैटेजी: बैंक निफ्टी फ्यूचर्स को 58,000 के ऊपर या 57,000 के आस-पास गिरावट पर खरीदें। स्टॉप-लॉस 56,000 के नीचे और टारगेट 60,000 रखें।

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।