Gold Price Today: सोना हुआ और सस्ता, मुंबई में ₹145850 पर आया 24 कैरेट; दिल्ली समेत दूसरे बड़े शहरों में ये है भाव

देश में सोने की कीमत और नीचे आई है। 20 जून की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत घटकर 146000 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 2,840 रुपये टूटकर 1,50,600 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई। मुख्य रूप से डॉलर के मजबूत होने से कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा। डॉलर सूचकांक एक साल के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,148.45 डॉलर प्रति औंस पर है।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 146000 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 133840 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 133690 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 145850 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 148030 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 135690 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 145850 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 133690 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली133840146000
मुंबई133690145850
अहमदाबाद133740145900
चेन्नई135690148030
कोलकाता133690145850
हैदराबाद133690145850
जयपुर133840146000
भोपाल133740145900
लखनऊ133840146000
चंडीगढ़133840146000

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श की टिप्पणियों से संकेत मिला है कि अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहती है, तो वर्ष 2026 में ब्याज दरों में एक बार बढ़ोतरी हो सकती है। यह सोने जैसी कीमती धातुओं के लिए एक निगेटिव फैक्टर है। जून की मीटिंग में फेडरल रिजर्व ने अपनी बेंचमार्क ब्याज दरों को 3.5%-3.75% पर स्थिर रखा।

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चांदी की कीमत

सोने की तरह दूसरी कीमती धातु चांदी में भी गिरावट है। 20 जून को कीमत घटकर 249900 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 64.73 डॉलर प्रति औंस पर है।

दावा- शीर्ष अमेरिकी वैज्ञानिक ने वुहान लैब को फंडिंग दी:अमेरिका की पूर्व खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड ने कहा- डॉ. फॉसी ने कसम खाकर झूठ बोला

अमेरिका की पूर्व खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड ने कार्यालय में अपने अंतिम दिन बड़े वैज्ञानिक डॉ. एंथनी फॉसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कुछ गोपनीय दस्तावेज जारी कर दावा किया है कि डॉ. फॉसी ने चीन की वुहान लैब को लाखों डॉलर की सरकारी फंडिंग दी थी। इस पैसे का इस्तेमाल चमगादड़ के कोरोना वायरस को और खतरनाक बनाने वाली रिसर्च के लिए हुआ। आरोप है कि जब महामारी फैली, तो डॉ. फॉसी ने ये बात दबाई कि वायरस लैब से लीक हुआ था। गबार्ड के मुताबिक, डॉ. फॉसी ने 2024 में अमेरिकी संसद के सामने कसम खाने के बाद भी झूठ बोला था। आरोप- डॉ. फॉसी ने लैब से कोरोना फैलने की बात दबाई 2020 में जब अमेरिका में कोरोना फैला, तो ट्रम्प सरकार ने इससे निपटने की जिम्मेदारी डॉ. फॉसी को सौंपी थी। ट्रम्प सरकार की डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस की हेड थीं तुलसी ट्रम्प की सरकार की टॉप हिंदू अधिकारी तुलसी गबार्ड ने 22 मई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। तुलसी अमेरिका की ‘डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस’ हेड हैं, उनके अंडर 18 सीक्रेट एजेंसियां काम करती हैं। फॉक्स न्यूज के मुताबिक, उनके पति एक बेहद दुर्लभ हड्डी के कैंसर से जूझ रहे हैं और गबार्ड इस मुश्किल समय में उनके साथ रहना चाहती हैं।रिपोर्ट के अनुसार, गबार्ड ने शुक्रवार को ओवल ऑफिस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात के दौरान उन्हें अपने इस्तीफे की जानकारी दी थी। गबार्ड ने अपने चिट्ठी में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का धन्यवाद भी किया और कहा था कि नेशनल इंटेलिजेंस ऑफिस का नेतृत्व करना उनके लिए सम्मान की बात रही। पूरी खबर पढ़ें… भारतवंशी नहीं हैं तुलसी गबार्ड तुलसी को उनके नाम की वजह से कई बार भारतवंशी कहा जाता है। हालांकि वे भारतवंशी नहीं हैं। वे खुद कई बार ऐसा कह चुकी हैं। तुलसी का जन्म एक समोअन अमेरिकी परिवार में हुआ था। उनके पिता कैथोलिक थे। मां भी ईसाई थी जिन्होंने बाद में हिन्दू धर्म अपना लिया। तुलसी भी पहले ईसाई थीं लेकिन बाद में उन्होंने हिन्दू धर्म अपना लिया। ——————- यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले-मेलोनी मेरे साथ फोटो खिंचाने के लिए बेताब थीं: इटली PM का जवाब- उनकी कहानी झूठी, विदेश मंत्री ने US दौरा रद्द किया इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक बयान पर नाराजगी जाहिर की है। ट्रम्प ने दावा किया था कि G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए बेताब थीं। इस पर मेलोनी ने कहा कि ट्रम्प की यह कहानी पूरी तरह झूठी और मनगढ़ंत है। पूरी खबर पढ़ें…

दावा- शीर्ष अमेरिकी वैज्ञानिक ने वुहान लैब को फंडिंग दी:अमेरिका की पूर्व खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड ने कहा- डॉ. फॉसी ने कसम खाकर झूठ बोला

अमेरिका की पूर्व खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड ने कार्यालय में अपने अंतिम दिन बड़े वैज्ञानिक डॉ. एंथनी फॉसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कुछ गोपनीय दस्तावेज जारी कर दावा किया है कि डॉ. फॉसी ने चीन की वुहान लैब को लाखों डॉलर की सरकारी फंडिंग दी थी। इस पैसे का इस्तेमाल चमगादड़ के कोरोना वायरस को और खतरनाक बनाने वाली रिसर्च के लिए हुआ। आरोप है कि जब महामारी फैली, तो डॉ. फॉसी ने ये बात दबाई कि वायरस लैब से लीक हुआ था। गबार्ड के मुताबिक, डॉ. फॉसी ने 2024 में अमेरिकी संसद के सामने कसम खाने के बाद भी झूठ बोला था। आरोप- डॉ. फॉसी ने लैब से कोरोना फैलने की बात दबाई 2020 में जब अमेरिका में कोरोना फैला, तो ट्रम्प सरकार ने इससे निपटने की जिम्मेदारी डॉ. फॉसी को सौंपी थी। ट्रम्प सरकार की डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस की हेड थीं तुलसी ट्रम्प की सरकार की टॉप हिंदू अधिकारी तुलसी गबार्ड ने 22 मई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। तुलसी अमेरिका की ‘डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस’ हेड हैं, उनके अंडर 18 सीक्रेट एजेंसियां काम करती हैं। फॉक्स न्यूज के मुताबिक, उनके पति एक बेहद दुर्लभ हड्डी के कैंसर से जूझ रहे हैं और गबार्ड इस मुश्किल समय में उनके साथ रहना चाहती हैं।रिपोर्ट के अनुसार, गबार्ड ने शुक्रवार को ओवल ऑफिस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात के दौरान उन्हें अपने इस्तीफे की जानकारी दी थी। गबार्ड ने अपने चिट्ठी में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का धन्यवाद भी किया और कहा था कि नेशनल इंटेलिजेंस ऑफिस का नेतृत्व करना उनके लिए सम्मान की बात रही। पूरी खबर पढ़ें… भारतवंशी नहीं हैं तुलसी गबार्ड तुलसी को उनके नाम की वजह से कई बार भारतवंशी कहा जाता है। हालांकि वे भारतवंशी नहीं हैं। वे खुद कई बार ऐसा कह चुकी हैं। तुलसी का जन्म एक समोअन अमेरिकी परिवार में हुआ था। उनके पिता कैथोलिक थे। मां भी ईसाई थी जिन्होंने बाद में हिन्दू धर्म अपना लिया। तुलसी भी पहले ईसाई थीं लेकिन बाद में उन्होंने हिन्दू धर्म अपना लिया। ——————- यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले-मेलोनी मेरे साथ फोटो खिंचाने के लिए बेताब थीं: इटली PM का जवाब- उनकी कहानी झूठी, विदेश मंत्री ने US दौरा रद्द किया इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक बयान पर नाराजगी जाहिर की है। ट्रम्प ने दावा किया था कि G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए बेताब थीं। इस पर मेलोनी ने कहा कि ट्रम्प की यह कहानी पूरी तरह झूठी और मनगढ़ंत है। पूरी खबर पढ़ें…

क्या अमेरिका के इस टॉप साइंटिस्ट ने वुहान लैब को दिए थे पैसे, जहां से फैली थी Covid-19 महामारी? इस ‘खुलासे’ से दुनिया में मचा तहलका!

अमेरिका की राजनीति और खुफिया विभाग से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिका की निवर्तमान डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (DNI) तुलसी गबार्ड ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन कुछ ऐसे सीक्रेट दस्तावेज जारी किए हैं, जिसने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया है। गबार्ड ने सीधे तौर पर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के मुख्य चिकित्सा सलाहकार रहे डॉ. एंथनी फाउची पर कोरोना महामारी (COVID-19) के सच को दबाने और अमेरिका की संसद से झूठ बोलने का गंभीर आरोप लगाया है।

गबार्ड के दफ्तर से जारी बयान के मुताबिक, डॉ. फाउची ने चीन की उसी वुहान लैब (WIV) को पैसे दिए थे, जहां से कोरोना वायरस के लीक होने का दावा पूरी दुनिया में किया जाता है।

चीनी लैब को दिए अमेरिकी टैक्सपेयर्स के करोड़ों डॉलर

तुलसी गबार्ड ने अपने आखिरी दिन “पहले कभी न देखे गए” खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक करते हुए सनसनीखेज दावे किए हैं:

खतरनाक रिसर्च की फंडिंग: डॉ. फाउची ने अमेरिकी जनता के टैक्स के लाखों-करोड़ों डॉलर चीन के ‘वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी’ (WIV) को दिए थे। इस पैसे का इस्तेमाल चमगादड़ों के कोरोना वायरस पर बेहद खतरनाक ‘गेन-ऑफ-फंक्शन’ (वायरस की ताकत और फैलने की क्षमता बढ़ाने वाली) रिसर्च के लिए किया गया था।

सच्चाई को दबाया: जब 2020 की शुरुआत में कोरोना महामारी फैली, तो फाउची ने खुफिया एजेंसियों के कुछ बड़े अधिकारियों के साथ मिलकर इस बात को पूरी तरह दबा दिया कि यह वायरस चीन की लैब से लीक (Lab-Leak) हुआ था।

‘डीप स्टेट’ का हथकंडा: खुफिया एजेंसियों को मोहरा बनाया

गबार्ड के दफ्तर द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि 85 वर्षीय डॉ. फाउची, जो 38 सालों तक अमेरिका की प्रमुख स्वास्थ्य संस्था (NIAID) के हेड रहे, उन्होंने बड़ी-बड़ी फार्मा कंपनियों (दवा निर्माताओं) के फायदे और ट्रिलियन डॉलर के वैक्सीन बाजार के चक्कर में इस खतरनाक रिसर्च को बढ़ावा दिया।

पीछे से घुमाई पूरी बाजी

बयान के मुताबिक, फाउची ने पर्दे के पीछे से खेल रचा। उन्होंने अपने पसंदीदा वैज्ञानिकों की एक टीम बनाई और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों पर दबाव डाला कि वे जनता के सामने यही कहें कि कोरोना वायरस किसी लैब से नहीं, बल्कि प्राकृतिक रूप से जानवरों के जरिए फैला है। उन्होंने एक फर्जी रिसर्च पेपर भी तैयार करवाया ताकि लैब-लीक थ्योरी को झुठलाया जा सके। जो भी वैज्ञानिक या अधिकारी फाउची की बात से असहमत होता था, उसे नौकरी से हटाने या करियर बर्बाद करने की धमकियां दी जाती थीं।

“संसद के सामने कसम खाकर बोला झूठ”

तुलसी गबार्ड, जिन्होंने हाल ही में अपने बीमार पति की देखभाल के लिए डोनाल्ड ट्रंप की इंटेलिजेंस चीफ का पद छोड़ने का फैसला किया था, उन्होंने कहा कि फाउची के ये पैंतरे सीधे तौर पर ‘डीप स्टेट’ (पर्दे के पीछे से सरकार चलाने वाले सीक्रेट नेटवर्क) जैसे हैं।

गबार्ड ने बताया कि जून 2024 में जब अमेरिकी संसद की सुनवाई के दौरान फाउची से कसम खिलवाकर पूछा गया था कि— “क्या उन्होंने महामारी के पहले या बाद में एफबीआई (FBI), सीआईए (CIA) या किसी अन्य खुफिया एजेंसी से वायरस रिसर्च को लेकर कोई बात की थी?” तो फाउची ने सवालों से बचते हुए साफ झूठ बोल दिया कि उनके संज्ञान में ऐसी कोई बात नहीं है। जबकि नए दस्तावेज गवाही दे रहे हैं कि वे लगातार खुफिया अधिकारियों के संपर्क में थे।

अमेरिकी जनता को चाहिए इंसाफ

तुलसी गबार्ड ने भावुक होते हुए कहा, “कोविड-19 महामारी ने लाखों अमेरिकी नागरिकों और दुनिया भर के अनगिनत लोगों को असहनीय दर्द और तकलीफें दी हैं। सालों के झूठ, सेंसरशिप और सच को छुपाने के खेल के बाद, अब अमेरिकी जनता पारदर्शिता, सच्चाई और इंसाफ की हकदार है।”

गबार्ड के इन बेहद संगीन और सीधे आरोपों पर फिलहाल डॉ. एंथनी फाउची या उनके करीबियों की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या सफाई सामने नहीं आई है। लेकिन इस खुलासे ने दुनिया के सबसे बड़े वैश्विक संकट यानी कोरोना वायरस के जन्म को लेकर एक बार फिर महासंग्राम छेड़ दिया है।

फिर बंद कर दिया होर्मुज? ईरान ने बताई पूरी सच्चाई, लेबनान पर इजरायल के हमले से बढ़ा तनाव!

ईरान जंग में दुनिया से 115 करोड़ बैरल तेल गायब:ऑयल रिजर्व 36 साल में सबसे कम; ट्रम्प बोले- 4 हफ्ते में भंडार खत्म हो जाते

ईरान-अमेरिका समझौते के बाद इस हफ्ते होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुल गया है। हालांकि दुनिया अभी भी तेल संकट से पूरी तरह बाहर नहीं निकली है। एनालिटिक्स फर्म केपलर की रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के करीब चार महीनों में वैश्विक बाजार से 115 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई गायब हो चुकी है। इसका असर आने वाले महीनों तक बना रह सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के दौरान मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई लगभग बंद रही। इस वजह से दुनिया के स्ट्रेटजिक और कॉमर्शियल ऑयल रिजर्व तेजी से घटे हैं। पिछले कुछ महीनों में 19 करोड़ बैरल तेल स्टॉक से निकल चुका है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के स्ट्रेटजिक रिजर्व 1990 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं, जबकि अमेरिका का इमरजेंसी रिजर्व 43 साल के निचले स्तर पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को वर्साय में G7 बैठक के दौरान कहा कि अगर जंग खत्म नहीं करते तो हमारे रिजर्व करीब चार हफ्तों में खत्म हो जाते। सीजफायर के बाद तेल सस्ता हुआ अमेरिका-ईरान समझौते की खबर से तेल बाजार ने राहत की सांस ली। युद्ध के दौरान 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा ब्रेंट क्रूड अब 80 डॉलर से नीचे आ गया है। लेकिन कीमतों में यह गिरावट पूरी कहानी नहीं बताती। रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद भी तेल की सप्लाई तुरंत सामान्य नहीं होगी। पहले समुद्री रास्तों से बारूदी सुरंगें हटानी होंगी। इसके बाद खाली टैंकरों की वापसी, तेल उत्पादन बढ़ाने और सप्लाई चेन को पटरी पर लाने में वक्त लगेगा। तेल उद्योग से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि पूरी व्यवस्था को सामान्य होने में कई महीने लग सकते हैं। तब तक दुनिया को मौजूदा तेल भंडार के सहारे ही काम चलाना होगा। RBC कैपिटल मार्केट्स की हेलिमा क्रॉफ्ट ने कहा कि बाजार जरूरत से ज्यादा उत्साहित है। उनके मुताबिक, संकट खत्म मान लेना जल्दबाजी होगी, क्योंकि तेल की सप्लाई को सामान्य स्तर पर लाने में अभी बड़ी चुनौतियां बाकी हैं। कई एक्सपर्ट्स को अभी भी राहत की उम्मीद इंफ्रास्ट्रक्चर केपिटल एडवाइजर्स के CEO जे हैटफील्ड का मानना है कि नकदी संकट से जूझ रहे OPEC सदस्य देश उत्पादन बढ़ाने के लिए तैयार हैं। इससे बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आएगी और कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। मैक्वेरी ग्रुप के ग्लोबल ऑयल एंड गैस स्ट्रैटेजिस्ट विकास द्विवेदी ने कहा कि जंग शुरू होने से पहले दुनिया के पास तेल का अच्छा-खासा स्टॉक था। इसी वजह से इतनी बड़ी सप्लाई रुकने के बावजूद बाजार पूरी तरह नहीं हिला। उन्होंने कहा कि अमेरिका में डीजल और पेट्रोल का भंडार जरूर कम हुआ है, लेकिन हालात अभी काबू में हैं। संकट के दौरान रिफाइनरियों को तेल खरीदने के लिए कई जगह फोन करने पड़ रहे थे, लेकिन आने वाले हफ्तों में तस्वीर बदल सकती है। तब तेल बेचने वाले खुद खरीदारों के पास पहुंचेंगे। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि युद्ध के दौरान गायब हुए 115 करोड़ बैरल तेल की भरपाई आसान नहीं होगी। अगर दुनिया रोजाना मांग से 50 लाख बैरल ज्यादा तेल भी पैदा करे, तब भी इस कमी को पूरा करने में करीब एक साल लग जाएगा।

लगातार दूसरे दिन सोने की चमक पड़ी फीकी, चांदी में भी छाई सुस्ती

Gold Rate

सोने और चांदी की कीमत में शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिली। इससे सोने का दाम 1.45 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का दाम 2.32 लाख रुपए प्रति किलो से नीचे आ गया है। 

इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 3,123 रुपए कम होकर 1,44,970 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,48,093 रुपए प्रति 10 ग्राम था।

22 कैरेट सोने का दाम 1,35,653 रुपए प्रति 10 ग्राम से कम होकर 1,32,793 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है। 18 कैरेट सोने की कीमत कम होकर 1,08,728 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि पहले 1,11,070 रुपए प्रति 10 ग्राम थी।

सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है।

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चांदी का दाम 8,218 रुपए कम होकर 2,31,93 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,40,191 रुपए प्रति किलो था।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। कॉमेक्स पर सोना 1.68 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,174.47 डॉलर प्रति औंस और चांदी 2.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 64.91 डॉलर प्रति औंस पर थी।

एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने कहा कि फेडरल रिजर्व की ओर से 2026 में ब्याज दरें एक बार बढ़ाने के संकेत के बाद सोने की कीमतों पर दबाव देखने को मिल रहा है। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ और सोने जैसी बिना रिटर्न वाली संपत्तियों का आकर्षण कम हो गया। फेड के सख्त रुख के कारण बुलियन बाजारों में बड़े पैमाने पर प्रॉफिट बुकिंग देखी गई।

उन्होंने आगे कहा कि फेड की पॉलिसी के ऐलान के बाद पिछले कुछ सेशन में कॉमेक्स गोल्ड की कीमत लगभग 4375 डॉलर प्रति औंस से गिरकर 4150 डॉलर प्रति औंस हो गई है, जबकि एमसीएक्स गोल्ड का दाम लगभग 1,54,000 रुपए से घटकर 1,47,200 रुपए पर आ गया। डॉलर के मजबूत होने की संभावना और ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदों का असर मार्केट सेंटीमेंट पर पड़ रहा है।

Pic Credit : ANI

Stock Market Fall: 5 दिन बाद गिरावट की दस्तक, सेंसेक्स 607 अंक फिसला; लेकिन निवेशकों की दौलत ₹49543 करोड़ बढ़ी

5 दिन तेजी दर्ज करने के बाद शुक्रवार, 19 जून को शेयर बाजार में ​गिरावट रही। सेंसेक्स 607.08 अंक टूटकर 76,802.90 पर और निफ्टी 154.90 अंकों की गिरावट के साथ 24,013.10 पर बंद हुआ। हालांकि इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 49543 करोड़ रुपये से ज्यादा बढ़ गया। दिन में सेंसेक्स पिछली क्लोजिंग से 940.26 अंक तक टूटा और 76,469.72 का लो देखा। निफ्टी 266.1 अंक तक लुढ़ककर 23,901.90 के लो तक गया।

गुरुवार, 18 जून को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,77,04,016.033 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को मार्केट बंद होने पर यह 4,77,53,559.57 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। यानि कि 49543.537 करोड़ रुपये का इजाफा।

एक दिन पहले गुरुवार को शेयर बाजारों में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में तेजी रही थी। सेंसेक्स 254.36 अंक चढ़कर 77,409.98 पर बंद हुआ था। निफ्टी 82.30 अंक चढ़कर 24,168 पर बंद हुआ था। 5 कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स में कुल 3,577.43 अंकों और निफ्टी में 1,006.4 अंकों की बढ़त दर्ज की गई।

क्यों गिरा बाजार

शेयर बाजार में गिरावट की एक वजह यह रही कि IT शेयरों में बिकवाली का भारी दबाव दिखा। Nifty IT इंडेक्स 3 प्रतिशत से ज्यादा टूटा। इंफोसिस में 6.5 प्रतिशत और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में 3 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की सेलिंग, प्रॉफिट बुकिंग, दूसरे एशियाई बाजारों की कमजोरी की वजह से भी घरेलू शेयर बाजार लाल निशान में आ गए।

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रुपये की चाल

रुपया 19 जून को 6 पैसे मजबूत होकर 94.34 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। एक दिन पहले अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 10 पैसे की मजबूती के साथ 94.40 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

दूसरे एशियाई बाजारों की चाल

अन्य एशियाई बाजारों में हेंग सेंग 1.6 प्रतिशत गिरा है। सेट कंपोजिट में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट है। शंघाई कंपोजिट और कॉस्पी भी नीचे आया है। वहीं निक्केई 225 फ्लैट है। हालांकि अमेरिकी बाजार हरे निशान में बंद हुए हैं। यूरोपीय बाजारों में भी तेजी है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock Market Fall: 5 दिन बाद गिरावट की दस्तक, सेंसेक्स 607 अंक फिसला; लेकिन निवेशकों की दौलत ₹49543 करोड़ बढ़ी

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गुरुवार, 18 जून को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,77,04,016.033 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को मार्केट बंद होने पर यह 4,77,53,559.57 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। यानि कि 49543.537 करोड़ रुपये का इजाफा।

एक दिन पहले गुरुवार को शेयर बाजारों में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में तेजी रही थी। सेंसेक्स 254.36 अंक चढ़कर 77,409.98 पर बंद हुआ था। निफ्टी 82.30 अंक चढ़कर 24,168 पर बंद हुआ था। 5 कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स में कुल 3,577.43 अंकों और निफ्टी में 1,006.4 अंकों की बढ़त दर्ज की गई।

क्यों गिरा बाजार

शेयर बाजार में गिरावट की एक वजह यह रही कि IT शेयरों में बिकवाली का भारी दबाव दिखा। Nifty IT इंडेक्स 3 प्रतिशत से ज्यादा टूटा। इंफोसिस में 6.5 प्रतिशत और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में 3 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की सेलिंग, प्रॉफिट बुकिंग, दूसरे एशियाई बाजारों की कमजोरी की वजह से भी घरेलू शेयर बाजार लाल निशान में आ गए।

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रुपये की चाल

रुपया 19 जून को 6 पैसे मजबूत होकर 94.34 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। एक दिन पहले अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 10 पैसे की मजबूती के साथ 94.40 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

दूसरे एशियाई बाजारों की चाल

अन्य एशियाई बाजारों में हेंग सेंग 1.6 प्रतिशत गिरा है। सेट कंपोजिट में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट है। शंघाई कंपोजिट और कॉस्पी भी नीचे आया है। वहीं निक्केई 225 फ्लैट है। हालांकि अमेरिकी बाजार हरे निशान में बंद हुए हैं। यूरोपीय बाजारों में भी तेजी है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Jio Platforms का आएगा मेगा आईपीओ, कंपनी आज सेबी के पास डीआरएचपी फाइल करेगी

रिलायंस इंडस्ट्रीज चेयरमैन एवं एमडी मुकेश अंबानी ने 19 जून को बड़ा ऐलान किया। उन्होंने आरआईएल की 49वी एजीएम में कहा कि जियो प्लेटफॉर्म्स के बोर्ड ने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्ट्स (DRHP) को मंजूरी दे दी है। इसे आज यानी 19 जून को सेबी के पास फाइल कर दिया जाएगा।

आकाश, ईशा और अनंत जियो प्रोसेस को आगे बढ़ा रहे

अंबानी ने 19 जून को RIL के एजीएम को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने शेयर्ड ग्रोथ यानी साझा विकास के धीरूभाई अंबानी की विरासत को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा, “आकाश, ईशा और अनंत जियो के आईपीओ के प्रोसेस को आगे बढ़ा रहे हैं। इससे भविष्य में अगली पीढी की वैल्यू क्रिएशन के मौके बनेंगे।”

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जियो ने वॉयसेज को ग्राहकों के लिए फ्री किया

अंबानी ने कहा कि 10 साल पहले जियो ने भारत में डिजिटल असमानता खत्म करने के मकसद के साथ शुरुआत की थी। तब वॉयसेज बहुत महंगे थे। डेटा के लिए बड़ी कीमत चुकानी पड़ती थी और स्पीड और क्वाविलीट काफी खराब थी। जियो ने वॉयस को फ्री कर दिया। हाई स्पीड डेटा को सस्ता बना दिया।

जियो प्लेटफॉर्म्स अगली पीढ़ी के मिशन की तैयारी में

आरआईएल के चेयरमैन ने कहा कि जियो ने जियो ने हर भारतीय के लिए डिजिटल लाइफ को मुमकिन बनाया है। अब कंपनी अगली पीढी के बड़े मिशन की तैयारी कर रही है। जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ का काफी समय से इंतजार हो रहा था। 19 जून को यह इंतजार खत्म हो गया।

जियो प्लेटफॉर्म्स देश का सबसे बड़ा आईपीओ हो सकता है

जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ देश के सबसे बड़े आईपीओ में से एक होगा। इस मेगा आईपीओ को इनवेस्टर्स का जबर्दस्त रिस्पॉन्स मिल सकता है। रायटर्स ने इस साल जनवरी में कहा था कि यह आईपीओ 4 अरब डॉलर का हो सकता है। इसका मतलब है कि यह 36,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का होगा। इस तरह यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है।

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अमेरिका में करोड़ों की कंपनी चलाने वाली हिमाक्षी की दादी को उनके काम से ज्यादा शादी की चिंता! गजब का वीडियो शेयर किया

न्यूयॉर्क में रहने वाली एक सीनियर बिज़नेस एग्जीक्यूटिव का परिवार से जुड़ा एक ऐसा अनुभव सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे शादी, सफलता और महिलाओं से जुड़ी पीढ़ियों की उम्मीदों पर एक बड़ी बहस छिड़ गई है।

‘प्रिया ग्रोन डायमंड्स’ की प्रेसिडेंट हेमाक्षी मोटका ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया। इसमें उन्होंने बताया कि भारत में उनकी दादी हाल ही में एक कम्युनिटी इवेंट से निराश होकर लौटीं। इस इवेंट में शहर की सिर्फ़ शादीशुदा बेटियों को ही कंबल बांटे गए थे। चूंकि मोटका की शादी नहीं हुई है, इसलिए उनकी दादी उनके लिए कंबल नहीं ले पाईं।

अब वायरल हो रहे वीडियो में घटना के बारे में बताते हुए मोटका ने कहा- “मेरी दादी इसलिए दुखी हैं क्योंकि वह एक कार्यक्रम में गई थीं, जहां शहर की सभी शादीशुदा बेटियों को कंबल दिए जा रहे थे, और उन्हें कंबल नहीं मिल पाया क्योंकि मेरी शादी नहीं हुई है।”

इंटरनेट को यकीन नहीं हो रहा था कि उनकी दादी की निराशा की वजह यही थी, लेकिन अलग-अलग पीढ़ियां चीज़ों को अलग-अलग नज़रिए से देखती हैं। उन्होंने कहा, “तो मैं यहां न्यूयॉर्क शहर में सचमुच एक मल्टी-मिलियन डॉलर की कंपनी चला रही हूं। मैंने मैराथन भी दौड़ी है – 42 किलोमीटर की। फिर भी, एक कंबल के सामने मेरी ये सारी उपलब्धियां फीकी पड़ गईं।”

हालांकि कई दर्शकों को इस स्थिति की विडंबना पर हंसी आई, लेकिन मोटका ने कहा कि इस घटना ने उन्हें इस बारे में गहराई से सोचने पर मजबूर किया कि कैसे अक्सर महिलाओं को अपनी खुशी और आज़ादी के बजाय दूसरों की मंज़ूरी और पारंपरिक पड़ावों को ज़्यादा अहमियत देने के लिए तैयार किया जाता है।

वीडियो के साथ लिखे कैप्शन में उन्होंने कहा- “और भले ही मुझे हंसी आई, लेकिन इसने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया। महिलाओं के तौर पर, हमें अक्सर उन पलों का जश्न मनाना सिखाया जाता है जब हमें चुना जाता है। जैसे प्रपोज़ल, शादी या मंज़ूरी मिलना। लेकिन आपका असली दम खुद को चुनने में है। यह करियर बनाने, जोखिम उठाने, खुद पैसे कमाने और ऐसी ज़िंदगी बनाने का आत्मविश्वास है जिस पर आपको गर्व हो। क्योंकि पद और दूसरों की राय बदल सकती है। खुद के साथ आपका रिश्ता हमेशा बना रहता है। कंबल अच्छा होता है, लेकिन आत्मविश्वास हर जगह आपके साथ रहता है। अपने आत्मविश्वास को अपनाएं।”

उनकी बातों ने सोशल मीडिया यूज़र्स का दिल जीत लिया। कई लोगों ने शादी को लेकर परिवार की उम्मीदों और समाज के दबाव से जुड़े अपने अनुभव भी शेयर किए। कुछ यूज़र्स ने उन्हें इस परंपरा को पूरी तरह से चुनौती देने के लिए प्रोत्साहित किया। एक व्यक्ति ने सुझाव दिया- “एक ऐसा कार्यक्रम आयोजित करें, जिसमें आप अविवाहित बेटियों को कंबल बांटें – कुछ अलग करके दिखाएं।”

वहीं, कुछ लोगों ने दादी के नज़रिए का बचाव करते हुए कहा कि बड़ी उम्र की और युवा महिलाओं की सोच और संस्कृति में बहुत अंतर होता है। एक कमेंट करने वाले ने लिखा, “मैं आपकी दादी को दोष नहीं देता, क्योंकि वे बिल्कुल अलग दौर और पीढ़ी से ताल्लुक रखती हैं… लेकिन मैं आपकी तारीफ़ करता हूं कि आप वही कर रही हैं जो आप चाहती हैं और अपने तरीके से कर रही हैं।”

एक और यूज़र ने कहा कि ऐसी सोच अक्सर निजी फ़ैसले के बजाय सामाजिक माहौल की वजह से बनती है। “आपकी दादी को उनके आस-पास के माहौल ने ऐसा सोचने के लिए तैयार किया था। इसमें उनकी कोई ग़लती नहीं है। अफ़सोस की बात है कि कई महिलाओं को पता ही नहीं होता या उन्हें ज़िंदगी में आगे बढ़ने के मौके नहीं मिलते।”

हालांकि, कुछ प्रतिक्रियाएं मज़ाकिया भी थीं। एक यूज़र ने मज़ाक में कहा- “यह दादी का आपको अगले इवेंट से पहले शादी करने के लिए प्रेरित करने का तरीका है, ताकि उन्हें मुफ़्त में ‘कंबल’ (DHAABLO) मिल सके।”