बदल जाएगी एक्सपायरी के दिन की ट्रेडिंग, SEBI का प्रस्ताव एक्सपर्ट्स को आया पसंद

बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने एक्सपायरी के दिन ट्रेडिंग के फ्रेमवर्क में बदलाव का जो प्रस्ताव पेश किया है, वह मार्केट एक्सपर्ट्स को पसंद आया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन बदलावों से क्लोजिंग ऑक्शन यानी वोलैटिलिटी यानी भारी उठा-पटक और मैनिपुलेशन यानी हेरफेर की प्रमुख वजहों को दूर किया जा सकता है। इसके अलावा सेटलमेंट प्रोसेस अधिक आसान और पारदर्शी बन सकती है। मार्केट एक्सपर्ट्स का यह रुझान तब सामने आया, जब सेबी ने शनिवार को एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया, जिसमें CAS (Closing Auction Session) ने मार्केट टाइमिंग्स और डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट के तरीके में बदलाव का प्रस्ताव पेश किया है।

क्या है मुख्य बातें SEBI के प्रस्ताव में

डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट प्राइस को कैश मार्केट के क्लोजिंग प्राइस से अलग करना।

CAS के दौरान लाइव इंडिकेटिव इंडेक्स वैल्यू को बंद करना।

1% बैंड से बाहर लगाए गए ऑर्डर्स को अधिक बाइंडिंग बनाना।

क्या कहना है एक्सपर्ट्स का?

आनंद राठी वेल्थ के जॉइंट सीईओ फिरोज अजीज का कहना है कि सेबी ने तीन प्रमुख दिक्कतों पर ध्यान दिया है- कैश मार्केट के क्लोजिंग प्राइस और डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट प्राइस के बीच संबंध, इंडिकेटिव ऑक्शन प्राइस से होने वाली गड़बड़ियां और ऑक्शन प्रोसेस के दौरान ऑर्डर कैंसिल करने की दिक्कत। फिरोज के मुताबिक सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि किसी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट का सेटलमेंट बिल्कुल कैश मार्केट के क्लोजिंग प्राइस पर होना जरूरी नहीं होगा। इस तरह सेबी का मानना कि कैश और डेरिवेटिव्स मार्केट अलग-अलग उद्देश्यों पर काम करते हैं।

इसके अलावा फिरोज के मुताबिक क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान इंडिकेटिव इंडेक्स वैल्यू नहीं दिखाए जाने एक्जीक्यूट नहीं हुए ऑर्डर्स के कारण होने वाली उठा-पटक कम होगी तो 1% से बाहर लगाए गए आक्रामक ऑर्डर्स को अधिक बाध्यकारी बनाने से ऑर्डर्स को बार-बार कैंसिल करके बाजार में हेरफेर करने की संभावना भी कम होगी। उन्होंने सीएएस में आइसबर्ग ऑर्डर्स को मंजूरी देने, ट्रांजिशन पीरियड को कम करने और सीएएस के बाद डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग विंडो को घटाकर पांच मिनट करने को उचित और व्यावहारिक बदलाव बताया।

ट्रे़डजिनी के सीओओ त्रिवेश दिनेश ने सेबी के इस इस प्रस्ताव का सपोर्ट किया है कि एक्सपायरी-डे का सेटलमेंट प्राइस ट्रेडिंग के आखिरी 30 मिनट के VWAP (Volume-Weighted Average Price) के आधार पर तय किया जाएगा। उनका कहना है कि यह आसान तरीका है और उद्देश्य भी सेटलमेंट का ऐसा तरीका तैयार करने पर होना चाहिए, जो आसान हो और मार्केट में शामिल सभी पर एक तरह से लागू हो। उन्होंने सेबी के उस प्रस्ताव का भी सपोर्ट किया जिसमें नियमित ट्रेडिंग को दोपहर 3:30 बजे तक जारी रखने और उसके बाद क्लोजिंग ऑक्शन शुरू करने की बात कही गई है। उनके अनुसार इससे मार्केट स्ट्रक्चर और आसान होगा।

त्रिवेश ने क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान इंडकेटिव इंडेक्स वैल्यू को लाइव दिखाना बंद करने के प्रस्ताव का भी सपोर्ट किया है। उनका कहना है कि इससे गैरजरूरी उठा-पटक और भ्रम की स्थिति कम करने में मदद मिलेगी। उनका कहना है कि इंडिकेटिव इंडेक्स वैल्यू लाइव नहीं दिखेगी लेकिन अलग-अलग सिक्योरिटीज के इंडिकेटिव प्राइस को जारी रखने से ऑक्शन में हिस्सा लेने वाले लोगों को जरूरी जानकारी मिलती रहेगी।

फीडबैक के बाद आए हैं प्रस्ताव

सेबी ने मार्केट पार्टिसिपेंट्स से मिले फीडबैक के आधार पर प्रस्ताव पेश किए हैं। यह फीडबैक एक्सपायरी पर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट के लिए सीएएस से तय क्लोजिंग प्राइस के इस्तेमाल के बारे में था। सेबी को मिले फीडबैक में एक अहम मुद्दा डेरिवेटिव सेटलमेंट प्राइस को सीएएस से तय क्लोजिंग प्राइस के आधार पर तय करने को लेकर था। बता दें कि सीएएस को 3 अगस्त से उन इक्विटी कैश सेगमेंट के शेयरों के लिए लागू किया गया, जिनके डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की ट्रेडिंग होती है। इसे पारदर्शी तरीके से क्लोजिंग प्राइस तय करने के लिए लाया गया था। इसके लागू होने से पहले क्लोजिंग प्राइस आखिरी 30 मिनट में हुए ट्रेड्स के VWAP के आधार पर तय किया जाता था और इसे ऑक्शन के दौरान कुल खरीद और बिक्री ऑर्डर्स को ध्यान में रखकर एक बीच का भाव निकाला जाता है, जिस पर अधिक से अधिक ट्रेड हो सके।

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SEBI ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में बदलाव का प्रस्ताव पेश किया, जानें क्या हैं ये प्रस्ताव

सेबी ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी CAS में बदलाव का प्रस्ताव पेश किया है। इसमें शॉर्टर ट्रांजिशन पीरियड, रिवाइज्ड मार्केट टाइमिंग्स और एक्सपायरी डेज पर डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट के लिए दो अल्टरनेटिव तरीके शामिल हैं। क्लोजिंग ऑक्शन सेशन की व्यवस्था अगस्त की शुरुआत में लागू हुई थी।

पहले और दूसरे विकल्प की खास बातें

पहले विकल्प के तहत एक्सपायरी सेटलमेंट प्राइस ब्लेंडेड वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) पर आधारित होगा। इसका कैलकुलेशन कंटिन्यूअस ट्रेडिंग के अंतिम 30 मिनट्स और 10 मिनट्स के CAS के आधार पर होगा। दूसरे विकल्प में अंतरिम उपाय के तहत सिर्फ 30 मिनट के कंटिन्यूअस ट्रेडिंग VWAP के इस्तेमाल का प्रस्ताव है।

 IIV के डिसिमिनेशन को डिसकंटिन्यू करने का प्रस्ताव

सेबी ने इंडिकेटिव इंडेक्स वैल्यू (IIV) के डिसिमिनेशन को डिसकंटीन्यू करने का प्रस्ताव दिया है। IIV क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के दौरान इंडिकेटिव इक्विलिबरियम से निकलता है। सेबी ने कहा है कि इंडिकेटिव इंडेक्स वैल्यू को गलती से एक्चुअल इंडेक्स लेवल माना जा सकता है। इससे एग्जिक्यूटेड ट्रेड्स को रिप्रजेंट नहीं करने के बावजूद इसका असर ट्रेडिंग डिसिजंस पर पड़ सकता है।

मार्केट टाइमिंग से जुड़े मुख्य प्रस्ताव

मार्केट टाइमिंग्स के मामले में एक प्रस्ताव CAS स्टॉक्स में कंटिन्यूअस ट्रेडिंग 3:30 तक बढ़ाने, 3:31 और 3:40 के बीच ऑक्शन कंडक्ट करने और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग 3:45 तक होने देने की इजाजत है। दूसरे विकल्प में कहा गया है कि CAS स्टॉक्स के लिए 3:15 कट-ऑफ टाइम बना रहेगा। ऑक्शन 3:25 तक खत्म हो जाएगा, जबकि डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग 3:30 पर खत्म होगी।

3 फीसदी का प्राइस बैंड बना रह सकता है

सेबी ने कंटिन्यूअस ट्रेडिंग CAS के बीच के ट्रांजिशन पीरियड भी घटाने का प्रस्ताव दिया है। इसे पांच मिनट से घटाकर 1 मिनट किया जा सकता है। पोस्ट-CAS डेरिवेटिव्स ट्रे़डिंग विंडो को 10 मिनट से घटाकर 5 मिनट करने का प्रस्ताव है। रेगुलेटर ने CAS के दौरान मौजूदा 3 फीसदी प्राइस बैंड को भी बनाए रखने का प्रस्ताव दिया है।

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3 अगस्त को हुई थी CAS की शुरुआत

सेबी ने डेरिवेटिव्स सेगमेंट के स्टॉक्स के लिए CAS की शुरुआत 3 अगस्त, 2026 को की थी। इस सिस्टम में बदलाव की मांग और इस बारे में कई फीडबैक मिलने के बाद सेबी ने यह प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव पर रेगुलेटर ने 3 अक्तूबर, 2026 तक सलाह मांगी है।

BSE का शेयर एनएसई के आईपीओ के ऐलान से 3% फिसला, क्या यह इसे खरीदने का सही मौका है?

एनएसई के आईपीओ के ऐलान का सीधा असर बीएसई के शेयरों पर पड़ा है। बीएसई के शेयर में 11 सितंबर को 3 फीसदी तक गिरावट दिखी। बीते चार कारोबारी सत्रों में से 3 में यह शेयर गिरा है। यह अपने सपोर्ट जोन के करीब आ गया है। एनालिस्ट्स का कहना है कि सपोर्ट लेवल टूटने पर इस शेयर पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। सवाल है कि क्या यह बीएसई के शेयरों को खरीदने का सही समय है?

शेयर 17 अगस्त से कंसॉलिडेशन में

SBI Securities में टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च के हेड सुदीप शाह ने कहा कि बीएसई का शेयर 3,474-3,132 रुपये की रेंज में कंसॉलिडेट कर रहा है। 17 अगस्त से ऐसा दिख रहा है। उन्होंने कहा, “गिरता एडीएक्स इस बात का संकेत है कि शेयर में ट्रेंड स्ट्रेंथ की कमी है। एमएसीडी लाइन जीरो लाइन के नीचे बनी हुई है। यह कमजोर मोमेंटम का संकेत है।”

सपोर्ट जोन टूटने पर आएगी बड़ी गिरावट

उन्होंने कहा कि बीएसई के शेयरों के लिए अगला सपोर्ट 3,130-3,100 जोन में है। अगर यह इस रेंज को तोड़ देता है तो इस पर बिकवाली का नया दबाव दिख सकता है। इससे यह शेयर गिरकर 2,970 रुपये के अगले सपोर्ट लेवल तक जा सकता है। तेजी की स्थिति में 3,350-3,370 रुपये पर इसे अगला सपोर्ट मिलेगा।

CAS का असर ट्रेडिंग वॉल्यूम पर पड़ा

इससे पहले विदेशी ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने बीएसई के शेयर पर ‘अंडरपरफॉर्म’ की रेटिंग दी थी। बीएसई के शेयर पर एनालिस्ट्स की चिंता की वजह इसका ट्रेडिंग वॉल्यूम है। एक्सचेंज के मैनेजमेंट ने कहा है कि हाल में लागू क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) का असर इंडेक्स ऑप्शंस वॉल्यूम पर पड़ा है। ऑक्शन सेशन में सीमित लिक्विडिटी का असर पार्टिसिपेशन पर पड़ा है।

बीएसई का मार्केट कैपिटलाइजेशन 1.31 लाख करोड़

BSE का मार्केट कैपिटलाइजेशन अभी 1.31 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। एनएसई के आईपीओ का ऐलान हो जाने से इनवेस्टर्स दोनों एक्सचेंजों की वैल्यूएशन और प्रॉफिट बनाने की क्षमता की तुलना कर रहे हैं। एनएसई का मार्केट कैपिटलाइजेशन प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर करीब 4.46 लाख करोड़ रुपये होगा।

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एनएसई का प्रॉफिट बीएसई के प्रॉफिट का चार गुना

एनएसई का FY26 में टैक्स बाद प्रॉफिट 10,302 करोड़ रुपये था, जबकि प्राइस-टू-अर्निंग्स मल्टीपल करीब 42.5 गुना है। इसके मुकाबले बीएसई का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 1.31 लाख करोड़ रुपये है। इसका FY26 का टैक्स बाद प्रॉफिट 2,497 करोड़ रुपये था। इसका पी/ई मल्टीपल करीब 49 गुना है। एनएसई की वैल्यूएशन बीएसई की करीब 3.2 गुनी है, जबकि प्रॉफिट चार गुना से ज्यादा है।

SEBI चेयरमैन का बड़ा बयान, कहा-CAS का सिस्टम बना रहेगा, आगे लिक्विडिटी बढ़ेगी

सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के बारे में 10 सितंबर को बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि CAS की व्यवस्था जारी रहेगी और सेबी सिर्फ इस पर विचार कर रहा है कि क्या एफएंडओ सेटलमेंट प्राइस के लिए क्या कोई दूसरा तरीका हो सकता है।

अगस्त की शुरुआत में लागू हुआ था CAS

Closing Auction Session यानी CAS का सिस्टम पिछले महीने की शुरुआत में लागू हुआ था। इसके बाद बाजार के प्रमुख सूचकांकों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट से इतर पत्रकारों से बातचीत में पांडेय ने कहा, “MSCI ने यह माना है कि CAS के तहत हाल में हुई रीबैलेंसिंग में कोई दिक्कत नहीं आई। CAS लागू रहेगा। एक्सपायरी के दिन डेरिवेटिव्स के लिए CAS के तहत क्लोजिंग प्राइस तय करने के तरीके पर फिर से विचार हो रहा है।”

CAS की शुरुआत में मुश्किल आती है

उन्होंने कहा कि कई देशों के शेयर बाजारों में CAS लागू करने के दौरान चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। हर जगह शुरुआत में लिक्विडिटी को लेकर प्रॉब्लम आई है। आने वाले समय में लिक्विडिटी बढ़ेगी। सेबी चेयरमैन का यह बयान काफी अहम है, क्योंकि 10 सितंबर को CAS के दौरान निफ्टी 50 और बीएसई सेंसेक्स का इंडिकेटिव क्लोजिंग प्राइस कुछ समय के लिए 1 फीसदी से ज्यादा उछल गया था।

सूचकांकों में उतार-चढ़ाव की समस्या

8 सितंबर को भी CAS के दौरान निफ्टी का इंडिकेटिव क्लोजिंग प्राइस 1.8 फीसदी तक गिर गया था, जबकि CAS से पहले 3:15 बजे निफ्टी 0.58 फीसदी गिरकर बंद हुआ था। पिछले हफ्ते भी सेबी ने कहा था कि वह डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट प्राइस तय करने के तरीके पर फिर से विचार करेगा। उसने कहा था कि उसे इस बारे में मार्केट पार्टिसिपेंट्स से फीडबैक मिले हैं। वह उन पर विचार करेगा।

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कई एशियाई देशों के शेयर बाजारों में CAS का सिस्टम

सेबी ने 3 अगस्त को CAS की शुरुआत की थी। इसका मकसद सिक्योरिटीज के क्लोजिंग प्राइसेज तय करना है। CAS कारोबार के आखिर में कुछ समय का एक ऑक्शन है, जिसमें किसी शेयर के ऑफिशियल प्राइस को तय करने के लिए बाय और सेल (buy and sell) ऑर्डर्स मैच कराए जाते हैं। यह व्यवस्था चीन, हांगकांग, ताइवना और दक्षिण कोरिया सहित कई एशियाई देशों के शेयर बाजारों में लागू है।

Stock to Buy: एमसीएक्स के शेयरों को लग सकते हैं पंख, बर्नस्टीन ने बताई है इसकी वजहें

Stock to Buy: अगर आप ऐसे शेयर की तलाश में हैं, जो अच्छा मुनाफा दे सकता है तो आप एमसीएक्स के बारे में सोच सकते हैं। बर्नस्टीन ने एमसीएक्स के शेयर को कवर करना शुरू किया है। उसने इस पर ‘आउटपरफॉर्म’ की रेटिंग दी है। उसने इस शेयर के लिए 3,330 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि यह शेयर 10 सितंबर के अपने क्लोजिंग प्राइस से 15 फीसदी से ज्यादा चढ़ सकता है।

कॉन्ट्रैक्ट्स वॉल्यूम में अनुमान से तेज ग्रोथ

Bernstein ने बीएसई के मुकाबले एमसीएक्स के शेयरों को बेहतर बताया है। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि कमोडिटी डेरिवेटिव्स में अच्छी ग्रोथ जारी रहेगी, जबकि इक्विटी डेरिवेटिव्स की ग्रोथ सुस्त पड़ सकती है। उसने कहा है कि एमसीएक्स का कॉन्ट्रैक्ट वॉल्यूम अनुमान से ज्यादा तेजी से बढ़ा है। अगस्त में ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट साल दर साल आधार पर बढ़कर 4.3 गुना हो गया, जबकि फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स 2.1 गुना हो गया।

रेवेन्यू और प्रॉफिट ग्रोथ स्ट्रॉन्ग रहने की उम्मीद

ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि कॉन्ट्रैक्ट्स बढ़ने का पॉजिटिव असर एमसीएक्स की अर्निंग्स पर पड़ेगा। बर्नस्टीन ने FY27 में ऑपरेशंस से एमसीएक्स का रेवेन्यू बढ़कर 30,098 करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया है। FY26 में यह 23,020 करोड़ रुपये था। इस दौरान नेट प्रॉफिट बढ़कर 18,394 करोड़ रुपये पहुंच जाने का अनुमान है। FY26 में यह 13,314 करोड़ रुपये था।

कमोडिटी डेरिवेटिव्स में पार्टिसिपेशन बढ़ने की उम्मीद

ब्रोकरेज फर्म के अनुमान का आधार यह है कि ट्रेडर्स अब कमोडिटी डेरिवेटिव्स की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं। उसने अपने अनुमान में कहा है कि अभी सिर्फ 25 फीसदी इक्विटी डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स कमोडिटी डेरिवेटिव्स में पार्टिसिपेट करते हैं। इससे क्रॉस सेलिंग के लिए बड़ा मौका दिख रहा है, क्योंकि ब्रोकर्स अपना रेवेन्यू बढ़ाने के लिए इक्विटी ऑप्शंस से बाहर मौके तलाश रहे हैं।

CAS से भी कमोडिची डेरिवेटिव्स में बढ़ रहा पार्टिसिपेशन

बर्नस्टीन का कहना है कि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) की शुरुआत से भी कमोडिटी डेरिवेटिव में पार्टिसिपेशन को बढ़ावा मिला है। उसने कहा है कि रिटेल ब्रोकर्स को कमोडिटीज में डायरेक्ट ट्रेड करने में ज्यादा फायदा है क्योंकि इक्विटी डेरिवेटिव्स को ज्यादा रेगुलेटरी प्रेशर का सामना करना पड़ता है।

86 फीसदी रेवेन्यू ट्रांजेक्शन चार्ज से आता है

एमसीएक्स का करीब 86 फीसदी रेवेन्यू ट्रांजेक्शन चार्ज से आता है। इसमें से करीब दो-तिहाई रेवेन्यू ऑप्शंस से आता है, जबकि एक-तिहाई रेवेन्यू फ्यूचर्स से आता है। फ्यूचर्स बिजनेस में बुलियन की हिस्सेदारी ज्यादा है। ऑप्शंस के लिहाज से एनर्जी कॉन्ट्रैक्ट्स खासकर क्रूड ऑयल और नेचुरल गैस के कॉन्ट्रैक्ट्स की ज्यादा हिस्सेदारी रही है।

बीते एक साल में 116 फीसदी चढ़ा है स्टॉक

एमसीएक्स का शेयर 10 सितंबर को 1.65 फीसदी गिरकर 3,294 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि बीते एक साल में यह शेयर 116 फीसदी चढ़ा है। इस दौरान शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों का रिटर्न निगेटिव रहा है। इसका मतलब है कि बाजार का सेंटीमेंट खराब रहने का बावजूद एमसीएक्स के शेयरों में तेजी आई है।

Trading Plan : कच्चे तेल और बॉन्ड यील्ड ने बाजार का सेंटिमेंट किया खराब, जानिए कल के लिए क्या हो रणनीति

Trading Plan : कच्चे तेल और बॉन्ड यील्ड ने बाजार का सेंटिमेंट खराब कर दिया है। निफ्टी 150 प्वाइंट फिसला है। इसके लिए 23600 को बचाने का चैलेंज है। बैंक निफ्टी ने भी 56800 का अहम लेवल तोड़ दिया है। लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप में आउटपरफार्मेंस देखने को मिल रहा है। क्रूड 100 डॉलर के करीब कारोबार कर रहा है। NBFCs, प्राइवेट बैंक, तेल-गैस शेयरों में ज्यादा बिकवाली है। तीनों इंडेक्स करीब एक परसेंट कमजोर हैं। साथ ही कैपिटल मार्केट और सीमेंट स्पेस में भी गिरावट है। लेकिन डिफेंस, फार्मा, कैपिटल गुड्स में खरीदारी आई है।

बाजार में फिर से बुरा दिन

सीएनबीसी-आवाज के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि बाजार खराब है लेकिन सिर्फ इंडेक्स स्तर पर है। चुनिंदा शेयरों में उतनी खराबी नहीं है। ADVANCE/DECLINE आज ठीक-ठाक ही है। मिडकैप, स्मॉलकैप शेयरों में आउटपरफार्मेंस है। निफ्टी में बड़ी दिक्कत ग्लोबल संकेत की वजह से है। कच्चा तेल और बॉन्ड यील्ड सबसे बड़े खलनायक बने हैं। बैंक निफ्टी ने आज काफी अहम लेवल तोड़ा है। डिफेंस, फार्मा, कैपिटल गुड्स शेयरों में खरीदारी आई है। बड़ा सवाल यह है कि क्या BULLS 23,600 को एक्सपायरी पर बचा पाएंगे? और क्या अब हम 23,500 को भी तोड़ने को तैयार हैं?

बाजार: अब क्या?

बाजार इस समय मंदड़ियों की पकड़ में है और Bears किसी भी हाल में कंट्रोल नहीं छोड़ रहे। छोटी-मोटी रैली में ही बिकवाली आ जाती है। एक्सपायरी से पहले एक शॉर्ट कवरिंग की उम्मीद रहेगी। लेकिन दिक्कत ये कि बड़ी रैली के ट्रिगर्स नहीं हैं। मगर एक अच्छी बात ये कि चुनिंदा शेयरों के हिसाब से बाजार खराब नहीं। आज भी Zero Stocks के मुकाबले ज्यादा HERO STOCKS हैं। GVT&D अभी भी F&O का सबसे बड़ा गेनर है। LAURUS और DIVI’S LABS ने नए हाई लगाए। डिफेंस और मेटल शेयरों में अच्छी तेजी है।

निफ्टी-बैंक निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए 23,550-23,600 पर सपोर्ट और 23,750-23,800 पर रेजिस्टेंस है। बैंक निफ्टी के लिए 56,500 पर सपोर्ट और 57,000-57,300 पर रेजिस्टेंस है।

प्री-CAS रणनीति

अनुज सिंघल ने कहा बाजार काफी कमजोर है लेकिन एक्सपायरी सामने है। एक बार के लिए अपनी पोजीशन 3:15 तक निपटा दें। 3:30-3:40 पर नया नजरिया लेंगे।

 

Trading Ideas : बाजार की स्ट्रक्चर अभी भी उछाल पर बिकवाली का, ये दो शेयर कमजोर बाजार में भी करा सकते हैं अच्छी कमाई

 

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क्या NSE के IPO से पहले BSE के शेयरों में निवेश करना समझदारी है?

बीएसई के शेयरों में 4 सितंबर को जोरदार तेजी आई। यह 3 फीसदी से ज्यादा चढ़कर 3,411 रुपये पर बंद हुआ। 3 सितंबर को भी शेयर में तेजी आई थी। इस तेजी की बड़ी वजह बीएसई के एमडी और सीईओ का यह बयान है कि आईपीओ के बाद एनएसई अपने शेयर अपने ही प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं करा सकता। 4 सितंबर को एनएसई के आईपीओ को सेबी की क्लियरेंस मिल गई। सवाल है कि क्या अभी बीएसई के शेयरों में निवेश करना समझदारी है?

ऑल-टाइम हाई पर पहुंचने के बाद बिकवाली दबाव

शेयर डॉट मार्केट बाय फोनपे के मार्केट एनालिस्ट मयंक जैन ने कहा कि बीएसई के शेयर इस साल की शुरुआत में 4,500 रुपये के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गए थे। उसके बाद शेयरों पर लगातार बिकवाली का दबाव दिखा है। हालांकि, करीब 3,265 रुपये के 200-डे सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) को टेस्ट करने के बाद शेयर में फिर से खरीदारी शुरू हुई।

रेसिस्टेंस लेवल को पार करने के बाद आ सकती है तेजी

उन्होंने कहा, “डेली चार्ट पर शेयर 3,265 रुपये के अपने 200-डे एसएम के करीब सपोर्ट लेवल को टेस्ट कर रहा है। यह शेयरों में निवेश बढ़ाने का भरोसेमंद बेस है। हालांकि, 3,550 रुपये के नजदीक 50-डे एसएम पर अगला रेसिस्टेंस है।” उन्होंने कहा कि अगर शेयर इस लेवल को पार करने के बाद लगातार इसके ऊपर बना रहता है तो इसका ट्रेंड बदलने की पुष्टि हो जाएगी। इसके बाद इसमें तेजी दिखेगी।

CAS पर सेबी के बयान से बीएसई के शेयरों में तेजी

सेबी के इस बयान से भी बीएसई के शेयर को मजबूती मिली है कि वह क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी CAS पर विचार करेगा। CAS की शुरुआत 3 अगस्त को हुई थी। उसके बाद शेयरों में काफी ज्यादा खासकर एक्सपायरी के दिन उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। सेबी को सीएएस के बारे में काफी फीडबैक मिले हैं। वह उन पर विचार करने के बाद CAS सिस्टम में कुछ बदलाव कर सकता है।

शॉर्ट टर्म में दिख सकता है शेयर में पुलबैक

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज में वाइस प्रेसिडेंट रुचित जैन ने कहा कि बीएसई का शेयर 4,400 रुपये के हाई लेवल से करेक्ट हुआ है। यह 3,200 रुपये पर आ गया है। RSI से शेयर के ओवरसोल्ड जोन में होने का संकेत मिलता है। अगर यह शेयर 3,200-3,150 रुपये के सपोर्ट लेवल से ऊपर बना रहता है तभी शॉर्ट टर्म में इसमें पुलबैक दिख सकता है।

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एनएसई के शेयर अपने प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं होंगे

पीएल कैपिटल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अगर एनएसई के शेयर उसके खुद के प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होते हैं तो इससे FY27 में बीएसई की अर्निंग्स पर असर पड़ सकता है। हालांकि, ऐसा लगता है कि एनएसई के शेयर अपने खुद के प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं होंगे। स्टॉक एक्सचेंज के शेयर को अपने ही प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होने की इजाजत नहीं है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Trading plan :ये बाजार पोजीशन लेकर जाने वाला नहीं, अपनी पोजिशन्स समेटें और सोमवार को नया नजरिया लेंगे

Trading plan :बाजार फिर ऊपरी स्तरों पर फिर अटक गया है। रिलांयस के सपोर्ट के बावजूद निफ्टी 24000 पार करने में संघर्ष कर रहा है। बैंक निफ्टी भी 58000 के जोन पर फंसा हुआ है। ब्रॉडर मार्केट में सुस्ती है। कच्चा तेल 95 डॉलर प्रति बैरल पर बरकरार,हालांकि इंडिया VIX 3 परसेंट नीचे है। केबल इंडस्ट्री में आदित्या बिड़ला ग्रुप की एंट्री से दूसरे कंपनियों के शेयरों को जोर का झटका लगा है। KEI, पॉलीकैब और हैवेल्स में 5-8 परसेंट की तेज गिरावट आई है। तीनों शेयर वायदा के टॉप लूजर्स में शामिल हैं।

आज डिफेंस शेयर दम दिखा रहे हैं। निफ्टी डिफेंस इंडेक्स करीब एक परसेंट ऊपर है। GE एयरोस्पेस से 3 इंजन की डिलिवरी मिलने और गोल्डमैन सैक्स की बुलिश रिपोर्ट से HAL भागा है। यह शेयर करीब 4 परसेंट उछलकर वायदा के टॉप गेनर्स में शुमार है। कोचिन शिपयार्ड और गार्डनरीच में भी तेजी आई है। फाइनेंशियल और कैपिटल मार्केट शेयरों में भी खरीदारी आई है। दोनों इंडेक्स करीब एक परसेंट मजबूत हुए हैं। साथ ही चुनिंदा तेल-गैस, मेटल, सरकारी और प्राइवेट बैंकों में भी रौनक है। लेकिन फार्मा, रियल्टी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में दबाव है।

बाजार: फिर वही कहानी

सीएनबीसी-आवाज के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि बाजार में रैली आई लेकिन ऊपरी स्तरों पर नहीं टिका। निफ्टी, बैंक निफ्टी फिर से रजिस्टेंस जोन में आ कर रुके अच्छी बात ये कि दोनों अभी भी ग्रीन में हैं। मिडकैप, स्मॉलकैप में आज अंडरपरफॉर्मेंस है। केबल & वायर शेयरों में बड़ी गिरावट है। कैपिटल मार्केट शेयरों में बड़ी तेजी। रिलायंस ने बुल्स के लिए लीडरशिप ली है। इंश्योरेंस शेयरों में अच्छी तेजी है। NSE के IPO से जुड़े शेयरों में भी तेजी है। चुनिंदा ऑटो शेयरों में आज भी कमजोरी

बाजार: अब क्या?

बाजार वापस दायरे में फंस गया है। बाजार के पास चलने के ट्रिगर्स नहीं हैं। ग्लोबल संकेत अच्छे हैं, लेकिन कच्चे तेल की तेजी ने कैप लगा दिया है। बड़ी तेजी के लिए कच्चे तेल का गिरना जरूरी है। बाजार में अभी भी रैली फेल होने पर बेच कर पैसा बना है। लेकिन अच्छी बात ये है कि बाजार गिरने को तैयार नहीं है जब तक 23,800 बचा है, बाजार में शायद ज्यादा गिरावट शायद ना हो। लेकिन 23,800 टूटा तो बड़ी गिरावट का रिस्क होगा। बैंक निफ्टी बार-बार 57,800 टेस्ट कर रहा है। अगर 57,800-58,000 पार हुआ तो बड़ा पॉजिटिव होगा।

निफ्टी-बैंक निफ्टी पर रणनीति

अनुज सिंघल ने कहा कि निफ्टी के लिए 23,800-23,850 पर सपोर्ट और 24,000-24,050 पर रेजिस्टेंस है। वहीं, बैंक निफ्टी के लिए 57,300-57,500 पर सपोर्ट और 57,800-58,000 पर रेजिस्टेंस हैं।

प्री-CAS रणनीति

ये बाजार पोजीशन लेकर जाने वाला नहीं है। आज शाम को US का बेहद अहम Payroll डाटा आएगा। Payroll डाटा के बाद बॉन्ड यील्ड में बड़ा मूव आ सकता है। इसलिए अपनी पोजिशन्स समेटें और सोमवार को नया नजरिया लेंगे।

CAS पर CNBC-आवाज़: ट्रेडर्स के साथ

CAS पर CNBC-आवाज़ की मुहिम का असर देखने को मिला है। SEBI ने कहा है कि कैश मार्केट में CAS के नतीजों की समीक्षा जारी है। CAS में बदलाव का प्रस्ताव लाया जा सकता है। सेटलमेंट प्राइस तय करने के तरीके बदल सकते हैं। F&O सेटलमेंट प्राइस के तरीके में बदलाव संभव है। एक हफ्ते के भीतर कंस्लटेशन पेपर ला सकते हैं।

CAS पर मुहिम, रिटेल ट्रेडर्स के सुझाव

सभी शेयरों की क्लोजिंग एक जैसी हो। यह 3:15 या 3:30 PM हो सकती है। कैश, फ्यूचर्स की अलग-अलग क्लोजिंग से भ्रम रहता है। प्राइस रेंज को ±3% की बजाय 0-0.3% तक छोटा करें। प्राइस रेंज छोटी होने से ऑक्शन रेंज भी घटेगी। इससे CAS में प्राइसिंग ज्यादा अच्छी तरह निकलेगी। छोटे प्राइस बैंड से बड़े प्राइस स्विंग से बचेंगे। इससे ऑप्शन राइटर्स का जोखिम भी घटेगा। वॉल्यूम बढ़ने तक रेंज को छोटा रखना अच्छा। डेली सेटलमेंट को 3:15 बजे ही किया जाए।

एक्सपायरी के दिन एक्सपायर होने वाले ऑप्शन को CAS से बाहर रखें। अगर आज एक्सपायरी है तो एक्सपायरी ENDING TIME पर ऑप्शन सेटल हों। CAS का उद्देश्य प्राइस डिस्कवरी हो, ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं। प्री-ओपन की तरह टर्मिनल पर CAS के भाव भी दिखें। ऑप्शंस एक्सपायरी को CAS से डीलिंक किया जाए। ऑप्शंस की एक्सपायरी 3:15 पर कर दी जाए। 3:25 से 3:28 के बीच HFTs को ऑर्डर कैंसिल करने से रोका जाए। पहले की तरह 3:30 तक सामान्य ट्रेडिंग हो, बाद में 10 मिनट का CAS हो। हर ब्रोकर के टर्मिनल पर इंडिकेटिव भाव दिखने चाहिए।

 

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BSE Share Price: बीएसई के सीईओ के इस बयान से रॉकेट बना शेयर, जानिए उन्होंने क्या कहा

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई के शेयर 3 सितंबर को रॉकेट बन गए। इसकी वजह एक्सचेंज के एमडी और सीईओ सुंदररमण रामामूर्ति का एक बयान है। उन्होंने कहा कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि उसके प्लेटफॉर्म पर उसके शेयर लिस्ट नहीं होंगे। इस बयान के बाद बीएसई के शेयरों में तेजी आई। 1:15 बजे शेयर 4.26 फीसदी के उछाल के साथ 3,303 रुपये पर चल रहा था। बीते एक साल में यह शेयर करीब 50 फीसदी भागा है।

एनएसई के शेयर की ट्रेडिंग एनएसई के प्लेटफॉर्म पर नहीं होगी

BSE के एमडी और सीईओ सुंदररमण ने सीएनबीसी-टीवी18 से बातचीत में कहा कि एनएसई ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि ऑफर डॉक्युमेंट के साथ सेल्फ-ट्रेडिंग के लिए अडेन्डम (Addendum) इश्यू नहीं होगा। उन्होंने कहा कि 2017 में इजाजत लेने की कोशिशों के बावजूद बीएसई के शेयर को खुद के एक्सचेंज पर ट्रेडिंग की अनुमति नहीं मिली।

एनएसई के शेयर अपने प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होते हैं तो बीएसई को नुकसान

पहले आई खबरों में कहा गया था कि बीएसई पर लिस्टिंग के बाद ‘permitted to trade’ कैटेगरी के जरिए एनएसई के शेयर की ट्रेडिंग उसके खुद के प्लेटफॉर्म पर हो सकती है। पीएल कैपिटल ने इस बारे में एक रिपोर्ट में कहा है कि अगर एनएसई के शेयर में उसके खुद के एक्सचेंज पर ट्रेडिंग होती है तो इसका असर FY27 में बीएसई के अर्निंग्स पर पड़ सकता है।

एक्सचेंज के शेयर को अपने प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होने की इजाजत नहीं

बीएसई के एमडी ने कहा कि नियम के तहत किसी स्टॉक एक्सचेंज के शेयर को अपने ही प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होने की इजाजत नहीं है। क्लोजिंग ऑक्श सेशन के बारे में उन्होंने कहा कि इसकी वजह से इंडेक्स ऑप्शन वॉल्यूम घटा है। उन्होंने कहा कि CAS सिस्टम के लिए लिक्विडिटी बहुत जरूरी है। लिक्विडिटी कम होने से पार्टिसिपेशन घटा है। इंडेक्स वॉल्यूम नीचे आ गया है।

CAS पर डीलर्स की फीडबैक ले रहा है एक्सचेंज

उन्होंने कहा, “हम CAS पर डीलर मीटिंग्स कर रहे हैं। डीलर्स का एक फीडबैक यह था कि F&O एक्सपायरी को CAS से अलग कर दिया जाए। दूसरा फीडबैक यह था कि CAS को धीरे-धीरे लागू किया जाए। एक फीडबैक यह था कि ऑर्डर मॉडिफेशन की इजाजत नहीं होनी चाहिए। हम सभी डीलर्स के फीडबैक पर विचार कर रहे हैं। फिर इसे हम रेगुलेटर्स को सब्मिट करेंगे।”

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3 अगस्त को हुई थी CAS की शुरुआत 

CAS यानी क्लोजिंग ऑक्शन सेशन की शुरुआत 3 अगस्त को हुई थी। इसमें कारोबार के अंत में एक संक्षिप्त ऑक्शन होता है, जिसमें बाय और सेल ऑर्डर्स मैच कराए जाते हैं। फिर, उसके आधार पर शेयर का क्लोजिंग प्राइस तय होता है। यह व्यवस्था कुछ एशियाई देशों में शामिल हैं। इनमें चीन, ताइवान, हांगकांगक और दक्षिण कोरिया शामिल हैं।