इजराइल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कुर्सी पर संकट मंडरा रहा है। 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले आए 4 प्रमुख सर्वे में से 2 में विपक्षी खेमा आगे है, जबकि एक में दोनों खेमे बराबरी पर हैं और एक में नेतन्याहू का खेमा आगे है। किसी भी खेमे को सरकार बनाने के लिए जरूरी सीटें मिलती नहीं दिख रहीं। ऐसे में चुनाव के बाद सत्ता की चाबी छोटे दलों के हाथ में जा सकती है। इजराइल में चुनाव से पहले लोगों की राय बंटी येरुशलम के महाने येहुदा बाजार में चुनावी पोस्टरों के बीच 76 साल के फल विक्रेता अब्राहम लेवी को भरोसा है कि नेतन्याहू फिर सरकार बनाएंगे। वे कहते हैं, ‘नेतन्याहू को अपना काम पूरा करना है।’ लेकिन इसी शहर की जाफा स्ट्रीट पर दुकानदार इल्डा की राय अलग है। उनका कहना है कि हमास के हमले की जिम्मेदारी नेतन्याहू को लेनी चाहिए। तेल अवीव के जाफा इलाके में रहने वाले तुर्गेमान भी बदलाव चाहते हैं। वे कहते हैं कि वे गादी आइजनकोट का समर्थन करेंगे। लोगों की ये अलग-अलग राय इजराइल के चुनावी माहौल को दिखाती हैं। यहां कुछ लोग नेतन्याहू को दोबारा मौका देना चाहते हैं, तो कुछ हमास के हमले के बाद सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। इजराइल में 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले में करीब 1,200 लोग मारे गए थे। इसके बाद गाजा में इजराइली सैन्य कार्रवाई में 74 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है। करीब तीन साल बाद हो रहे इस चुनाव में सुरक्षा, हमास के हमले की जिम्मेदारी और नेतन्याहू का नेतृत्व बड़े मुद्दे हैं। सरकार बनाने के लिए 61 सीटों का समर्थन चाहिए इजराइल की संसद में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए किसी भी खेमे को कम से कम 61 सीटों का समर्थन चाहिए। चुनाव से पहले आए चार प्रमुख सर्वे में किसी भी खेमे को यह आंकड़ा मिलता नहीं दिख रहा। हमास हमले में अपनों को खोने वाले परिवार भी बंटे 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले में कई परिवारों ने अपने लोगों को खो दिया था। अब चुनाव में ऐसे परिवारों के बीच भी नेतन्याहू को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। किबुत्ज बेरी की मेराव के माता-पिता हमले में मारे गए थे। उनका मानना है कि जिस सरकार के कार्यकाल में इतना बड़ा हमला हुआ, उसे दोबारा सत्ता में नहीं आना चाहिए। वहीं, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी की उम्मीदवार तालिक देश में मजबूत नेतृत्व चाहती हैं। इससे साफ है कि हमले के पीड़ितों के परिवार भी इस सवाल पर एकमत नहीं हैं कि अगली सरकार किसकी होनी चाहिए। फिलिस्तीन को अलग देश बनाने का मुद्दा चुनावी बहस से दूर इस चुनाव में फिलिस्तीन को अलग देश बनाने का मुद्दा प्रमुख यहूदी दलों की बहस में ज्यादा जगह नहीं पा रहा है। नेतन्याहू फिलिस्तीनी इलाकों पर इजराइल का सुरक्षा नियंत्रण बनाए रखने के पक्ष में हैं। विपक्षी दल भी सुरक्षा के मामले में सख्त रुख रखते हैं। यानी नेतन्याहू का विरोध करने वाले सभी दल फिलिस्तीन के मुद्दे पर उनसे अलग राय नहीं रखते। सरकार बदलने की मांग के बावजूद सुरक्षा और फिलिस्तीन के भविष्य को लेकर बड़े दलों के बीच मतभेद सीमित दिखाई देते हैं। सर्वे के मुताबिक, विपक्षी मतदाताओं में 36% और अरब नागरिकों में 57% लोग दो राष्ट्र समाधान का समर्थन करते हैं। इस व्यवस्था के तहत इजराइल और फिलिस्तीन दो अलग-अलग देश होंगे। सरकार बनाने में अरब पार्टियों और छोटे दलों की भूमिका अहम इजराइल में किसी भी खेमे को बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में छोटे दल सरकार बनाने का समीकरण बदल सकते हैं। चुनाव के बाद नेतन्याहू और विपक्ष, दोनों को सरकार बनाने के लिए दूसरे दलों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। दिए गए अनुमानों के मुताबिक, कुछ छोटे दलों को 12 से 15 सीटें मिलने की संभावना है। इनमें राम पार्टी को 5, संयुक्त अरब सूची को 7 से 9, ओफर विंटर की पार्टी को 5 और हेंडेल-जेलखा को 4 सीटें मिलने का अनुमान बताया गया है। इन दलों का समर्थन किसे मिलता है, यह चुनाव के बाद सरकार बनाने की बातचीत में अहम हो सकता है। हालांकि, सीटों के ये अनुमान किस सर्वे से जुड़े हैं और क्या सभी आंकड़े एक ही सर्वे के हैं, इसकी पुष्टि जरूरी है। 7 साल पुराने भ्रष्टाचार केस में चुनाव से 16 दिन पहले कोर्ट पहुंचे नेतन्याहू चुनाव से पहले नेतन्याहू को भ्रष्टाचार के मामले में भी अदालत का सामना करना पड़ रहा है। रविवार, 11 अक्टूबर को वे इस मामले की सुनवाई के लिए अदालत में पेश हुए। सुनवाई के दौरान इजराइल के पूर्व अटॉर्नी जनरल अविचाई मंडेलब्लिट ने गवाही दी। मंडेलब्लिट ने ही 2019 में नेतन्याहू के खिलाफ मुकदमा चलाने का फैसला किया था। उन्होंने अदालत को बताया कि उनकी मंजूरी के बिना नेतन्याहू के तत्कालीन चीफ ऑफ स्टाफ का फोन टैप किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि एक समय उन्हें लगा था कि पुलिस किसी और के कहने पर काम कर रही है। क्या है नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार का मामला? नेतन्याहू पर कारोबारियों से महंगे तोहफे लेने और मीडिया संस्थानों को फायदा पहुंचाने के बदले अपने पक्ष में खबरें दिखवाने के आरोप हैं। 2019 में उनके खिलाफ रिश्वतखोरी, धोखाधड़ी और विश्वासघात के आरोपों में मुकदमा शुरू हुआ था। नेतन्याहू इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं। मामले की सुनवाई अदालत में जारी है। —————————– यह खबर भी पढ़ें… इजराइल में 20 दिन बाद वोटिंग, नेतन्याहू हार सकते हैं:हमास हमले ने बदली देश की राजनीति 7 अक्टूबर 2023 को हमास के करीब 6 हजार लड़ाकों ने इजराइल पर हमला किया। लोगों को घरों और बंकरों में मारा गया, कई लोगों को जिंदा जला दिया गया और 250 से ज्यादा लोगों को बंधक बनाकर गाजा ले जाया गया। पूरी खबर यहां पढ़ें…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को केटी जकारिया को व्हाइट हाउस की नई प्रेस सेक्रेटरी बनाने का ऐलान किया। कैरोलिना लेविट के पद छोड़ने के बाद करीब दो महीने से यह पद खाली था। जकारिया कैलिफोर्निया की वकील और कंजर्वेटिव विचारों वाली कमेंटेटर हैं। वह ट्रम्प की बड़ी समर्थक हैं और कई बार उनकी जमकर तारीफ कर चुकी हैं। ट्रम्प ने नियुक्ति का ऐलान करते हुए कहा कि जकारिया का उनके समर्थन का रिकॉर्ड बेदाग है। ट्रम्प ने उन्हें वफादार और प्रतिभाशाली समर्थक बताया। केटी जकारिया से पहले लगातार 6 महिलाएं इस पद की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। आखिरी पुरुष प्रेस सेक्रेटरी शॉन स्पाइसर थे, जिन्होंने 2017 में ट्रम्प के पहले कार्यकाल की शुरुआत में यह पद संभाला था। ट्रम्प ने फैसला लेने से पहले लेविट से भी सलाह ली ट्रम्प ने यह फैसला लेने से पहले अपने कई करीबी सलाहकारों से बात की थी। इनमें पूर्व प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिना लेविट भी शामिल थीं। लेविट ने अपने दूसरे बच्चे को जन्म देने के बाद अगस्त के आखिर में प्रशासन छोड़ दिया था। उनकी जगह लेने के लिए CNN के कंजर्वेटिव कमेंटेटर स्कॉट जेनिंग्स, ट्रम्प की पूर्व वकील अलीना हब्बा और डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी एना केली के नाम भी चर्चा में थे। करीब दो महीने तक प्रेस सेक्रेटरी का पद खाली रहने के कारण व्हाइट हाउस के प्रेस ब्रीफिंग रूम में आखिरी औपचारिक ब्रीफिंग 3 सितंबर को हुई थी। जकारिया ट्रम्प की कंपनी में भी काम कर चुकी हैं 42 साल की केटी जकारिया के चार बच्चें हैं। वे कैलिफोर्निया के वेस्टलेक विलेज में रहती हैं। उन्होंने ग्रेजुएशन और कानून की पढ़ाई पेपरडाइन यूनिवर्सिटी से की है। जून से वह ट्रम्प मीडिया एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप में सीनियर कम्युनिकेशन एडवाइजर के तौर पर काम कर रही थीं। यह वही कंपनी है जो ट्रम्प के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ को चलाती है। इसके अलावा पिछले एक साल में फॉक्स न्यूज और न्यूजमैक्स पर वह कई बार नजर आई हैं। जकारिया खुद को फॉक्स न्यूज की कमेंटेटर बता चुकी हैं। हालांकि, चैनल ने साफ किया है कि वह वहां कभी कर्मचारी नहीं रहीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रम्प ने जकारिया को टीवी पर देखने के बाद पसंद किया। जकारिया ने टीवी कार्यक्रमों में ही नहीं, बल्कि लंबे लेख लिखकर भी ट्रम्प के नेतृत्व और उनकी राजनीतिक उपलब्धियों की तारीफ की है। जकारिया ने नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट का विरोध किया था जकारिया फॉक्स न्यूज जैसे बड़े अमेरिकी न्यूज चैनलों पर ट्रम्प की नीतियों का बचाव करती रही हैं। उन्होंने ट्रम्प को अमेरिकी राजनीति का अब तक का सबसे बड़ा खिलाड़ी बताया था और उनकी तुलना खेल जगत के दिग्गजों से की थी। जकारिया के विचार ट्रम्प से काफी मिलते हैं। उन्होंने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के गिरफ्तारी वारंट का भी विरोध किया था। वह ईरान के खिलाफ भी सख्त रुख रखती हैं। जुलाई में जकारिया ने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी की आलोचना की थी। ममदानी ने कहा था कि नेतन्याहू के न्यूयॉर्क आने पर उन्हें गिरफ्तार कराने के कदम उठाए जा सकते हैं। इस पर जकारिया ने कहा था कि ममदानी ऐसे व्यवहार करते हैं, जैसे वह किसी स्वतंत्र देश के शासक हों।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सरकार ने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि कोर्ट अमेरिका के खिलाफ कार्रवाई करना बंद करे, वरना अमेरिका उसे खत्म करने की कोशिश करेगा। अमेरिका कोर्ट से इसलिए भी नाराज है, क्योंकि उसने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू समेत कई इजराइली अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। अमेरिकी सरकार का आरोप है कि कोर्ट अमेरिकी और इजराइली नागरिकों को गलत तरीके से निशाना बना रहा है। कोर्ट बोला- प्रतिबंधों से काम नहीं रुकेगा ICC की डिप्टी प्रॉसिक्यूटर नजहत शमीम खान ने अमेरिकी प्रतिबंधों की निंदा की। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और एक स्वतंत्र अदालत के काम को कमजोर करने की कोशिश है। खान ने साफ किया कि प्रतिबंधों के बावजूद कोर्ट अपनी जांच और कानूनी कार्रवाई जारी रखेगा। अमेरिका ने ICC पर प्रतिबंध ऐसे दिन लगाए, जब दक्षिण अफ्रीका की पूर्व न्यायाधीश नवी पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार देने का ऐलान हुआ। पिल्लै 2003 से 2008 तक ICC की अपील चैंबर में जज रही थीं। हालांकि, अमेरिका ने प्रतिबंध लगाने की योजना नोबेल पुरस्कार की घोषणा से काफी पहले बना ली थी। अमेरिकी कंपनियों पर भी पड़ सकता है असर अमेरिकी प्रतिबंधों का असर उन कंपनियों पर भी पड़ सकता है, जो ICC को सेवाएं देती हैं। अमेरिकी कंपनियों को कोर्ट के साथ कारोबार करने से रोका जा सकता है। इससे उसकी बैंकिंग, बीमा और सॉफ्टवेयर सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। प्रतिबंधों की आशंका को देखते हुए ICC ने पहले से तैयारी शुरू कर दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने माइक्रोसॉफ्ट के सॉफ्टवेयर की जगह दूसरे विकल्प अपनाने और बैंकिंग व स्वास्थ्य बीमा के लिए नए इंतजाम करने शुरू कर दिए थे। अमेरिका ने सहयोगी देशों से भी दबाव बनाने को कहा रुबियो ने कहा कि अमेरिका ने ICC और उसके सदस्य देशों को अपनी चिंताओं का समाधान करने का मौका दिया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने अमेरिका के सहयोगी देशों से भी कोर्ट पर लगाम लगाने को कहा। रुबियो के मुताबिक, प्रतिबंधों के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखा गया है। अगर बातचीत से समाधान नहीं निकला, तो अमेरिका आगे और कदम उठा सकता है। क्या है इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट की स्थापना 2002 में हुई थी। यह युद्ध अपराध, मानवता के खिलाफ गंभीर अपराध और नरसंहार जैसे मामलों की सुनवाई करता है। इसके 125 सदस्य देश हैं। यूरोपीय संघ के सभी देश इसके सदस्य हैं, लेकिन अमेरिका खुद इस कोर्ट का सदस्य नहीं है। ————————– ये खबर भी पढ़े़ं… वेंस बोले-वीजा लेकर अमेरिका में काम करने वाले बंधुआ मजदूर:भारत का जवाब- अमेरिकी अर्थव्यवस्था यही संभाल रहे; H-1B वीजा लेने वालों मे 71% भारतीय अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने H-1B वीजा पर अमेरिका में काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों को ‘बंधुआ मजदूर’ बताया है। उन्होंने यह बयान गुरुवार को 8 IT कंपनियों को ग्रीन कार्ड से जुड़े PERM प्रोग्राम से सस्पेंड किए जाने पर दिया। पूरी खबर यहां पढ़ें…
Flydubai attempted hijacking: दुबई से तेल अवीव जाने वाले फ्लाईदुबई की फ्लाइट को क्रैश कराने की कोशिश करने वाले पायलट हमाम अल हम्मामी के ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड प्रवास की जांच की जा रही है। ऑस्ट्रेलिया की संघीय पुलिस ने कहा कि ऑस्ट्रेलियन सुरक्षा एजेंसियां ओमानी पायलट के करीब दस साल पहले ऑस्ट्रेलिया में बिताए समय की जांच कर रही हैं। FlyDubai का पायलट यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) में कस्टडी में है। उस पर इजराइल जाने वाले प्लेन को क्रैश करने की कोशिश करने का आरोप है।
सोमवार को पुलिस के एक बयान में कहा गया कि फेडरल और स्टेट पुलिस और ऑस्ट्रेलिया की डोमेस्टिक इंटेलिजेंस एजेंसी समेत एक जॉइंट काउंटरटेररिज्म टीम, “ओमानी हमलावर के ऑस्ट्रेलिया से लिंक की जांच कर रही है।” न्यूजीलैंड की पुलिस एजेंसी ने यह भी कहा कि को-पायलट ने न्यूजीलैंड में समय बिताया था और अधिकारी जांच करेंगे।
छात्र वीजा पर 2014 में ऑस्ट्रेलिया आया था हम्मामी
न्यूज मीडिया ने बताया कि आरोपी पायलट को 2014 में ऑस्ट्रेलियाई छात्र वीजा मिला था। उसने 2015 में ऑस्ट्रेलिया में यूनिवर्सिटी कोर्स शुरू किया था। मीडिया ने बताया कि उसने 2017 में ऑस्ट्रेलिया छोड़ दिया था, और 2019 में उसका वीजा रद्द कर दिया गया था। Flydubai के को-पायलट पर आरोप है कि उसने दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट के दौरान कैप्टन पर क्रैश करने के इरादे से कुल्हाड़ी से हमला किया। ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने को-पायलट की पहचान नहीं की है। लेकिन रॉयटर्स, CNN और द न्यूयॉर्क टाइम्स समेत कई मीडिया आउटलेट्स ने उसकी पहचान हमाम अल-हम्मामी बताया है। ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (ABC) ने बताया कि काउंटर-टेररिज्म अधिकारी यह देखेंगे कि क्या वह आदमी ऑस्ट्रेलिया में रेडिकलाइज हुआ था। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि वह ओमानी नागरिक था।
क्या हुआ था फ्लाईदुबई की फ्लाइट में?
30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जाने वाली फ्लाइट में 170 से अधिक यात्री इजरायल जा रहे थे। यूनाइटेड अरब अमीरात के प्रॉसिक्यूटर जनरल ने कहा है कि अपनी यात्रा के ढाई घंटे बाद ओमानी को-पायलट द्वारा विमान के अन्य पायलट पर हमला करने के बाद विमान अचानक से 17,000ft (5,200m) नीचे गिर गया। प्लेन उड़ा रहे पायलट, कैप्टन स्मित मच्छार ने बताया कि कैसे वह घायल होकर जमीन पर पड़े थे। दो रिजर्व पायलटों ने प्लेन को सऊदी अरब में सुरक्षित लैंड कराया। मूल रूप से भारतीय नागरिक मच्छार को पास के एक हॉस्पिटल ले जाया गया, फिर उन्हें अबू धाबी एयरलिफ्ट किया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
को-पायलट की नौकरी का इतिहास खंगाला जा रहा
हमले के बाद के दिनों में को-पायलट की नौकरी की हिस्ट्री के बारे में और जानकारी सामने आई है। एक दूसरी एयरलाइन, ओमान एयर में काम करते समय, US मीडिया ने बताया कि अल-हम्मामी को उनके कट्टर विचारों की वजह से फ्लाइट ट्रेनिंग से हटा दिया गया था, और उन्हें ओमान की नेशनल एयरलाइन में दूसरी भूमिका दी गई थी। यह भी पता चला है कि, 2020 से, वह UK में बकिंघमशायर न्यू यूनिवर्सिटी द्वारा चलाए जा रहे डिस्टेंस-लर्निंग कोर्स में पढ़ रहा था। यूनिवर्सिटी ने कहा कि उसने 2023 में एविएशन मैनेजमेंट में डिग्री के साथ ग्रेजुएशन किया। उसने यह भी बताया कि उसने स्कूल में कोई पायलट ट्रेनिंग नहीं ली थी।

दुबई। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शनिवार को भारतीय पायलट स्मित मच्छार से फोन पर बात की और फ्लाईदुबई के विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की सह-पायलट की कथित साजिश नाकाम करने के लिए उन्हें इजराइल, भारत और पूरी दुनिया का ‘नायक’ बताया। उन्होंने मच्छार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इजराइल के स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में मशाल प्रज्वलित करने के लिए आमंत्रित भी किया।
कैप्टन मच्छार पर बुधवार को फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 के कॉकपिट में उनके सह-पायलट ने हमला किया था, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उस समय विमान दुबई से तेल अवीव जा रहा था।
नेतन्याहू ने संयुक्त अरब अमीरात के एक अस्पताल में उपचार करा रहे 38 वर्षीय भारतीय पायलट से बात कर उनका हालचाल जाना। ‘लाउडस्पीकर मोड’ पर हुई इस बातचीत की एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर भी साझा की गई।
कैप्टन मच्छार से बातचीत में नेतन्याहू ने कहा, ‘यह हमारे लिए सबसे बड़ा सम्मान है, जो हम अपने स्वतंत्रता दिवस पर प्रदान करते हैं। आमतौर पर यह केवल इजराइल के नागरिकों के लिए है, लेकिन मुझे लगता है कि इस मामले में इजराइल का हर नागरिक आपका सम्मान करेगा। हम उम्मीद करते हैं कि आप जल्द ही इजराइल आएंगे।’
इजराइल के स्वतंत्रता दिवस को ‘योम हाअत्जमाउत’ कहा जाता है। यह हिब्रू कैलेंडर के इयार महीने की पांचवीं तारीख को मनाया जाता है, जो अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत में पड़ती है।
इजराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने शनिवार को ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, ‘आप इजराइल, भारत और पूरी दुनिया के नायक हैं। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं आपको इजराइल के स्वतंत्रता दिवस पर मशाल प्रज्वलित करने के लिए आमंत्रित करता हूं।’
फ्लाईदुबई की फ्लाइट में बीच हवा में कॉकपिट के अंदर हुए हमले की जांच अभी जारी है। इस मामले में अब सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी कुछ अहम जानकारियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उड़ान से पहले यूएई ने फ्लाइट के पायलट और अन्य क्रू मेंबर्स की पूरी सूची इजरायल के साथ शेयर की थी। इस खुलासे के बाद अब सवाल उठ रहा कि ओमानी को-पायलट हम्माम अल-हम्मामी को तेल अवीव जाने वाली फ्लाइट उड़ाने की अनुमति कैसे मिली। कॉकपिट में हुए हमले की जांच संयुक्त अरब अमीरात कर रहा है।
आतंकी हमले की थी साजिश
अधिकारियों के मुताबिक, ओमानी को-पायलट को कथित तौर पर उसके चरमपंथी विचारों से जुड़ी चिंताओं के चलते ओमान में विमान उड़ाने से रोक दिया गया था। ओमान के इजराइल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं। इसके बावजूद उसे इजराइली यात्रियों को तेल अवीव ले जाने वाली फ्लाइट को उड़ाने की अनुमति कैसे मिली। इसे सुरक्षा में बड़ी चूक माना जा रहा है।
यूएई के अधिकारियों के मुताबिक, को-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला करने के बाद विमान का कंट्रोल अपने हाथ में लेने की कोशिश की। अधिकारियों ने इस घटना को संभावित आतंकी हमला बताया। विमान में करीब 180 लोग सवार थे। कैप्टन मच्छार ने किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिसके बाद यात्रियों और अन्य लोगों ने मिलकर हमलावर को काबू में करने में मदद की।
इजरायल ने क्या कहा
क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, उड़ान रवाना होने से पहले यूएई ने इजरायल के साथ विमान में सवार यात्रियों और क्रू से जुड़ी जानकारी शेयर की थी। इसमें उनके देश और राष्ट्रीयता जैसी जानकारियां भी शामिल थीं। वहीं इजरायली अधिकारियों का कहना है कि उन्हें विमान में मौजूद किसी भी यात्री या क्रू सदस्य को लेकर सुरक्षा संबंधी कोई आपत्ति या चेतावनी नहीं मिली थी। इजराइल की सुरक्षा एजेंसी शिन बेट ने कहा कि, यात्रियों की सूची की जांच परिवहन मंत्रालय की जिम्मेदारी है।
वहीं, परिवहन मंत्रालय ने कहा कि, उसे न तो यात्रियों की सूची मिली और न ही किसी तरह की सुरक्षा चेतावनी दी गई थी। अधिकारियों के मुताबिक, उड़ान से पहले यात्रियों और क्रू की जानकारी शेयर करना नॉर्मल प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन अलग-अलग देशों के बीच सुरक्षा जांच में कुछ सीमाएं भी होती हैं।
नेतन्याहू ने क्या कहा
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बताया कि विदेशी एयरलाइंस के साथ ऐसे समझौते हैं, जिनके तहत उन देशों के पायलटों को इजराइल में उड़ान भरने से रोका जा सकता है, जिनके साथ उसके डिप्लोमैटिक रिलेशन नहीं हैं। फ्लाईदुबई की घटना के बाद अब सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा जांच की जा रही है। जांच में ये भी देखा जा रहा है कि को-पायलट ने विमान में सवार होने से पहले किन-किन सुरक्षा जांचों को पास किया था और इसके बावजूद उसे उड़ान की अनुमति कैसे मिली।
आतंकी संगठन अल-कायदा ने फ्लाईदुबई की फ्लाइट में भारतीय पायलट स्मित मच्छर पर हमला करने वाले ओमानी को-पायलट हमाम अल-हमामी की तारीफ की। न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, अल-कायदा से जुड़ी मैगजीन अल-बयान में लिखा गया है कि जंग अभी खत्म नहीं हुई है। अमेरिकी और इजराइली विमानों पर 9/11 जैसे हमले किए जाने चाहिए। जो देश इस्लाम के खिलाफ उनके विमानों पर हमला करो मैगजीन में अमेरिका, इजराइल समेत उन देशों के विमानों को निशाना बनाने की अपील की गई है, जिन्हें इस्लाम के खिलाफ माना जाता है। ये मैगजीन अरबी भाषा में प्रकाशित होती है। इसमें लिखा गया है कि इजराइल, अमेरिकी और इस्लाम के खिलाफ लड़ने वाले दूसरे देशों के लोगों को ले जाने वाले विमान अभी भी आसमान में उड़ रहे हैं और उन्हें निशाना बनाया जा सकता है, जैसा 11 सितंबर और 30 सितंबर को हुआ। इस संदेश के साथ एक तस्वीर भी लगाई गई थी, जिसमें न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की ट्विन टावर्स से विमान टकराते हुए दिखाया गया था। दूसरी तस्वीर फ्लाईदुबई घटना से जुड़ी थी। न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, मैगजीन ने यह भी लिखा है कि अमेरिका और इजराइल के दुश्मन पहले से ज्यादा हैं। इसमें अमेरिका को ‘बुराई का साम्राज्य’ बताते हुए उसके खत्म होने की बात लिखी गई है। हमाम अल-हमामी विमान क्रैश करना चाहता था 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 दुबई से तेल अवीव जा रही थी। इस दौरान ओमानी को-पायलट हमाम अल-हमामी ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर कुल्हाड़ी (क्रैश एक्स) से कॉकपिट में हमला किया था और विमान को अपने कब्जे में लेकर क्रैश करने की कोशिश की थी। भारतीय कैप्टन घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब रहे। इसके बाद यात्रियों और क्रू की मदद के बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया था। फ्लाइटरडार 24 के मुताबिक, हमले के दौरान विमान करीब एक मिनट में 33 हजार फीट से 17 हजार फीट तक नीचे आ गया था। हमामी के अल-कायदा से कनेक्शन की जांच हो रही है हमाम अल-हमामी UAE की हिरासत में है। उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स भी जांच के दायरे में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसके अकाउंट्स पर अल-कायदा के कई आतंकियों की तस्वीरें मिली थी। इनमें ओसामा बिन लादेन और अयमान अल-जवाहिरी की तस्वीर भी शामिल हैं। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि हमलावर इस्लामी कट्टरपंथ से प्रभावित था। उसका इरादा यात्रियों समेत विमान को क्रैश करने का था। जांच में सामने आया है कि फ्लाईदुबई में शामिल होने से पहले अल-हमामी ओमान एयर और मोरक्को की एयरलाइन रॉयल एयर मरोक में काम कर चुका था। वह करीब 8 महीने पहले फ्लाईदुबई से जुड़ा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओमान एयर में काम करने के दौरान उसके कट्टरपंथी विचारों को लेकर चिंता जताई गई थी। इसके बाद उसे ड्यूटी से हटाकर प्रशासनिक काम दे दिया गया था। अब यह सवाल भी उठ रहा है कि जब हमामी के बारे में पहले ही चिंता जताई गई थी, तो वह फ्लाईदुबई में पायलट कैसे बना और उसे इजराइल जाने वाली फ्लाइट उड़ाने की जिम्मेदारी कैसे मिली। ——————————— ये खबर भी पढ़ें… नेतन्याहू बोले- हमलावर को किसने भेजा, जांच कर रहे: उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि फ्लाईदुबई की फ्लाइट में कैप्टन पर हमले के आरोपी ओमानी पायलट को किसने भेजा था, इसकी जांच की जा रही है। पूरी खबर पढ़ें…
दुबई से इजराइल जा रहे फ्लाईदुबई के विमान को बचाने वाले दो पायलटों के नाम अभी सामने नहीं आए हैं। कॉकपिट में को-पायलट ने कैप्टन पर हमला किया तो विमान तेजी से नीचे जाने लगा। इसी दौरान विमान में मौजूद दोनों पायलट कॉकपिट में पहुंचे और विमान संभाल लिया। AP के मुताबिक, विमान का कंट्रोल लेने के बाद भी दोनों पायलटों ने कुछ देर तक यात्रियों से बात नहीं की। इससे यात्री और डर गए। उन्हें पता नहीं था कि कॉकपिट में कौन है और विमान को कहां ले जाया जा रहा है। कुछ यात्रियों को डर था कि कहीं विमान को हाईजैक करके ईरान न ले जाया जाए। करीब 45 मिनट बाद पायलटों ने बताया कि विमान को सऊदी अरब के तबुक में उतारा जाएगा और सब ठीक है। इसके बाद यात्रियों को भरोसा हुआ। फ्लाईदुबई ने अभी दोनों पायलटों के नाम नहीं बताए हैं। एयरलाइन ने सिर्फ इतना कहा है कि दोनों क्रू मेंबर थे और उस समय विमान में सफर कर रहे थे। कैप्टन पर हमला होते ही मची अफरा-तफरी विमान में आगे बैठे यात्री डेनियल श्लिक्टर ने AP को बताया कि कॉकपिट से चीख-पुकार सुनकर यात्रियों को पता चला कि वहां कुछ गंभीर हुआ है। उनके मुताबिक, को-पायलट कैप्टन पर लगातार हमला कर रहा था। कैप्टन बुरी तरह घायल हो गए थे और कॉकपिट में खून फैल गया था। इसके बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। एक यात्री ने को-पायलट को पकड़कर बाहर खींच लिया, जबकि बाकी यात्री उसे काबू करने लगे। इसी दौरान एक अतिरिक्त पायलट तेजी से कॉकपिट में पहुंचा और कंट्रोल संभाल लिया। श्लिक्टर के मुताबिक, कुछ ही देर बाद दूसरा पायलट भी अंदर पहुंच गया। दोनों ने दरवाजा बंद कर लिया। विमान को वापस दुबई ले जाने के लिए मौजूद थे दोनों पायलट शुरुआत में यात्रियों को पता नहीं था कि ये दोनों पायलट विमान में क्यों मौजूद थे। बाद में पता चला कि उन्हें तेल अवीव से दुबई लौटने वाली फ्लाइट उड़ानी थी। इसलिए वे पहले से विमान में सफर कर रहे थे। एविएशन में ड्यूटी के लिए किसी दूसरी जगह जाने वाले पायलट की इस तरह की यात्रा को ‘डेडहेडिंग’ कहा जाता है। यानी उस वक्त दोनों पायलट यात्री की तरह सफर कर रहे थे, लेकिन इमरजेंसी आते ही उन्होंने कॉकपिट में पहुंचकर विमान संभाल लिया। विमान संभालने में 10 मिनट से ज्यादा लगे दोनों पायलटों के कॉकपिट में पहुंचने के बाद विमान को स्थिर करने में करीब 10 मिनट या उससे ज्यादा समय लगा। इससे पहले विमान इतनी तेजी से नीचे आया था कि उसके रडर का एक हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया था। पायलटों ने मे-डे कॉल किया और सुरक्षित लैंडिंग के लिए जगह तलाशनी शुरू की। बाद में विमान को सऊदी अरब के तबुक में उतार दिया गया। यात्री ने कहा- दोनों ने हीरो की तरह काम किया विमान के सुरक्षित उतरने के बाद श्लिक्टर ने दोनों पायलटों की तारीफ की। उन्होंने पूरे घटना को एक चमत्कार बताया। उनके मुताबिक, पहले कॉकपिट में पहुंचने वाले पायलट ने बिना समय गंवाए हालात समझे और कंट्रोल संभाल लिया। श्लिक्टर ने कहा कि यात्रियों की जान बचाने में इन दोनों पायलटों की भूमिका भी बेहद अहम थी। घटना के तीन दिन बाद भी फ्लाईदुबई ने दोनों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। इसलिए वे अब भी इस घटना के सबसे अहम और रहस्यमयी किरदार बने हुए हैं।
——————- ये खबर भी पढ़ें… स्मित बोले- हमलावर ने नमाज के बहाने कुल्हाड़ी मारी:नेतन्याहू ने भारतीय पायलट को फोन किया, PM मोदी के साथ मशाल जलाने का न्योता दिया इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फ्लाईदुबई एयरलाइन के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर से करीब 6 मिनट फोन पर बात की। उन्होंने कहा- आप भारत और इजराइल के लोगों के सच्चे हीरो हैं। आप पूरी दुनिया के हीरो हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
Flydubai Incident: फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार ने विमान के कॉकपिट में हुए उस खौफनाक घटनाक्रम के बारे में नए और चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उनके ओमानी को-पायलट ने 34,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे विमान में उनके सिर पर हमला कर दिया था। विमान में उस वक्त 174 लोग सवार थे। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत के दौरान कैप्टन मच्छार ने बताया कि उड़ान हर रोज की तरफ सामान्य थी। उनका को-पायलट नमाज पढ़ने के लिए अपनी सीट से उठा था। इस दौरान सम्मान के चलते उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। लेकिन कुछ मिनट बाद अचानक उनके सिर के पीछे जोरदार वार हुआ।
उन्होंने कहा, “यह सामान्य उड़ान थी। को-पायलट नमाज पढ़ना चाहता था, जैसा कि कई स्थानीय लोग करते हैं। वह नमाज पढ़ रहा था। इस दौरान सम्मान के कारण मैंने पीछे की ओर नहीं देखा। करीब चार-पांच मिनट बाद अचानक मेरे सिर के पीछे जोरदार चोट लगी।” बुधवार को दुबई से तेल अवीव जा रहे फ्लाईदुबई के विमान एफजेड1073 के कॉकपिट में उनके को-पायलट ने मच्छार पर चाकू से हमला किया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। विमान में 27 बच्चों समेत 174 यात्री सवार थे।
पहले लगा विमान में कोई बड़ी खराबी हो गई
कैप्टन मच्छार ने बताया कि शुरुआती हमले के बाद लगातार वार होते रहे। पहले उन्हें लगा कि शायद विमान में ही कोई गंभीर तकनीकी समस्या आ गई है। उन्होंने कहा, “लेकिन उसके बाद लगातार वार होते रहे। तभी मुझे समझ आया कि समस्या विमान में नहीं है। बल्कि कॉकपिट में मेरे साथ मौजूद दूसरे व्यक्ति ने मुझ पर हमला किया है।” हमले को रोकने की कोशिश में उनकी नजर धुंधली होने लगी। उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश भी की। लेकिन हमलावर ने दरवाजा फिर बंद कर दिया, जिससे वह जमीन पर गिर पड़े।
‘मेरे अंदर आखिरी लड़ाई बाकी थी’
कैप्टन ने बताया कि इसी दौरान विमान अचानक तेजी से नीचे की ओर झुकने लगा और यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। उस समय उन्हें लगा कि अगर उन्होंने कुछ नहीं किया तो विमान में सवार सभी लोगों की जान जा सकती है। उन्होंने कहा, “मेरे अंदर एक आखिरी लड़ाई बाकी थी। आप इसे निजी लड़ाई कहें या लोगों के लिए लड़ाई, लेकिन मैंने वह किया। अगर मैं ऐसा नहीं करता तो मैं मर जाता।” उन्होंने आगे बताया कि पूरी ताकत लगाकर उन्होंने कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचने की कोशिश की और आखिरकार उसे खोलने में सफल रहे। इसके बाद बाहर मौजूद लोगों ने स्थिति संभाल ली और विमान का अपने कंट्रोल में वापस ले लिया।
कोड के बावजूद कैसे खुला कॉकपिट का दरवाजा?
मच्छार ने बताया कि कॉकपिट के दरवाजे में बाहर से खोलने के लिए कोड की व्यवस्था थी। उनके सहयोगी बाहर से कोड डालकर दरवाजा खोलने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन हमलावर उन्हें दरवाजा खोलने नहीं दे रहा था। ऐसे में उनके पास एक ही रास्ता बचा था दरवाजे के अंदर मौजूद नॉब तक पहुंचना। उन्होंने कहा, “यह एक छोटा और तेज ट्विस्ट था। जैसे ही मेरे हाथ नॉब तक पहुंचे, मैंने उसे घुमाया और दरवाजा खोल दिया।” इसके बाद बाहर मौजूद लोगों ने कॉकपिट में पहुंचकर स्थिति को संभाला और विमान को सुरक्षित कंट्रोल में लिया।
नेतन्याहू ने बताया ‘किस्मत का मोड़’, इजरायल आने का दिया न्योता
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की तारीफ करते हुए इसे ‘किस्मत का एक मोड़’ करार दिया। नेतन्याहू ने बातचीत के दौरान मच्छार से कहा कि वह इजरायल, भारत और पूरी दुनिया के हीरो हैं। उन्होंने उन्हें इजरायल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में मशाल जलाने के लिए आमंत्रित भी किया। यह घटना उस समय बेहद गंभीर हो गई थी जब 34,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे विमान के कॉकपिट में ही पायलट पर हमला हुआ। कैप्टन मच्छार की सूझबूझ और आखिरी क्षण तक विमान को बचाने की कोशिश ने संभावित बड़े हादसे को टालने में अहम भूमिका निभाई। इस वक्त उनकी पूरी दुनिया में तारीफ हो रही है।
अमेरिका ने ईरान के दो राजनयिकों को देश से बाहर भेज दिया है। दोनों संयुक्त राष्ट्र (UN) महासभा में शामिल होने के लिए न्यूयॉर्क पहुंचे थे, लेकिन महासभा खत्म होने के बाद भी वहीं रुके रहे। एक्सिओस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी विदेश विभाग ने सोमवार को न्यूयॉर्क स्थित ईरानी मिशन को निर्देश दिया था कि UN महासभा में शामिल होने आए उसके प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्य अमेरिका से रवाना हो जाएं। ज्यादातर प्रतिनिधि चले गए, लेकिन दो राजनयिक न्यूयॉर्क में ही रुके रहे। शुक्रवार को अमेरिकी अधिकारियों ने ईरानी मिशन को बताया कि उन्हें दोनों के अब भी न्यूयॉर्क में मौजूद होने की जानकारी है। इसके बाद ईरान को दोबारा संदेश भेजकर दोनों राजनयिकों को तुरंत अमेरिका छोड़ने के लिए कहा गया। इसके बाद एक राजनयिक शुक्रवार रात और दूसरा शनिवार सुबह न्यूयॉर्क से रवाना हो गया। अमेरिका से जंग के बावजूद न्यूयॉर्क गए थे ईरानी राष्ट्रपति ईरान और अमेरिका में जंग के बावजूद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान UN महासभा में शामिल होने न्यूयॉर्क पहुंचे थे। 23 सितंबर को यहां उन्होंने दुनिया के सामने ईरान का पक्ष रखा और अमेरिका-इजराइल पर कई गंभीर आरोप लगाए। पजशकियान अपने भाषण में युद्ध में मारे गए बच्चों की तस्वीरें भी लेकर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि ईरान ने पिछले 200 साल में किसी देश पर हमला नहीं किया है, बल्कि उसका देश खुद आतंकवाद और हमलों का शिकार रहा है। उन्होंने अमेरिका और इजराइल पर ईरान के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप लगाया। पजशकियान ने यह भी साफ किया कि ईरान परमाणु हथियार नहीं चाहता, लेकिन शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक के इस्तेमाल का अधिकार नहीं छोड़ेगा। इसके अलावा उन्होंने पश्चिमी देशों पर दोहरे रवैये और ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर भी सवाल उठाए। UN में ईरानी डेलिगेशन को स्टारलिंक देने पहुंचे थे इजराइली अधिकारी UN महासभा में इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरानी डेलिगेशन को स्टारलिंक डिवाइस देने की पेशकश की थी। उन्होंने कहा था कि इससे ईरान के लोग इंटरनेट का इस्तेमाल कर अपनी बात दुनिया तक पहुंचा सकेंगे। नेतन्याहू के भाषण के बाद एक इजराइली अधिकारी स्टारलिंक डिवाइस लेकर ईरानी अधिकारियों के पास पहुंचे। उन्होंने डिवाइस लेने की अपील करते हुए कहा कि यह उनके लिए उपयोगी हो सकता है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने डिवाइस लेने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और इसे लेने से इनकार कर दिया। ईरान में जंग से 7,300 मौतें, 32 लाख लोगों ने घर छोड़ा 28 फरवरी से शुरू हुई जंग में ईरान में करीब 7,300 लोग मारे गए और 32,314 घायल हुए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 1.49 लाख इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं, जिससे करीब 4 लाख लोग प्रभावित हुए। करीब 32 लाख लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा। जंग का असर स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी पड़ा। 229 स्वास्थ्य केंद्र और 49 अस्पताल क्षतिग्रस्त हुए। वहीं, ईरान ने अप्रैल में बताया था कि युद्ध की वजह से 24.8 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

