इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने विमान क्रैश रोकने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की तारीफ की है। नेतन्याहू ने X पर पोस्ट में लिखा कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मच्छार ने हमलावर का सामना किया। वह सच्चे हीरो हैं। इजरायली PM ने कहा- कैप्टन स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में मदद की, जिससे यात्रियों और क्रू ने हमलावर को काबू कर लिया। कैप्टन की वजह से 174 लोगों की जान बची। इनमें इजरायली नागरिकों के साथ दूसरे देशों के लोग भी शामिल थे। दरअसल, बुधवार को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लायदुबई की फ्लाइट FZ1073 में उड़ान के दौरान भारतीय पायलट स्मित पर उनके को-पायलट ने चाकू से हमला कर दिया। फिर विमान का कंट्रोल हाथ में लेकर इसे क्रैश कराने की कोशिश की। लेकिन, पायलट स्मित ने हार नहीं मानी और संघर्ष करते हुए साजिश को नाकाम कर दिया। ट्रम्प बोले- प्लंबर ने भी बचाई लोगों की जान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी भारतीय पायलट स्मित मच्छार की तारीफ की। उन्होंने कहा- घायल होने के बावजूद कैप्टन ने कॉकपिट का दरवाजा खोला और मदद के लिए आवाज लगाई। इके बाद एक यात्री भी कॉकपिट में पहुंचा। ट्रम्प के मुताबिक, वह पेशे से प्लंबर था और उसने कभी विमान नहीं उड़ाया था। यात्री ने को-पायलट को सीट से खींचकर पीछे किया। इसके बाद दूसरे यात्रियों ने मिलकर उसे काबू किया। ट्रम्प ने बताया कि इस यात्री ने टीवी शो ‘एयर डिजास्टर्स’ देखकर विमान उड़ाने की कुछ बातें सीखी थीं। हालांकि, ट्रम्प ने कहा कि उन्हें यह जानकारी नेतन्याहू और कुछ अन्य सूत्रों से मिली है। उन्होंने कहा कि वह इन बातों की खुद पुष्टि नहीं कर सकते। चाकूबाजी से पहले दोनों पायलटों में हाथापाई हुई थी फ्लाईदुबई की फ्लाइट में यह घटना बुधवार सुबह करीब 9 बजे हुई। विमान में 174 यात्री सवार थे, जिनमें 27 बच्चे शामिल थे। ज्यादातर इजराइली पैसेंजर्स थे। रिपोर्टों के मुताबिक, हमले से पहले दोनों पायलटों के बीच हाथापाई हुई थी। इसके बाद को-पायलट ने कैप्टन स्मित पर चाकू से हमला किया। इस दौरान विमान करीब 34 हजार फीट की ऊंचाई से अचानक 17 हजार फीट नीचे आ गया। एक यात्री और क्रू मेंबर किसी तरह कॉकपिट तक पहुंचने में कामयाब हुए। इसके बाद दूसरे क्रू मेंबर भी कॉकपिट में पहुंचे और विमान की सुरक्षित सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई। हालांकि, यह अभी साफ नहीं है कि यात्री और क्रू मेंबर फ्लायदुबई के कॉकपिट में कैसे घुसे, क्योंकि कॉकपिट के दरवाजे जबरन खोलने की कोशिशों को रोकने के लिए मजबूत बनाए जाते हैं। आमतौर पर उड़ान के दौरान कॉकपिट का दरवाजा सुरक्षा कारणों से लॉक रहता है। 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के बाद यह विमान सुरक्षा का नियम बन गया। दोनों पायलट घायल, कैप्टन स्मित की हालत स्थिर एयरपोर्ट अधिकारियों के मुताबिक, दोनों पायलट घायल हुए और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। कैप्टन स्मित की हालत स्थिर बताई जा रही है। घटना के कई वीडियो भी सामने आए हैं। एक वीडियो में विमान तेजी से हिलता दिखा। वहीं दूसरे वीडियो में हमलावर पर काबू पाने के बाद विमान में बैठे पैसेंजर्स ताली बजाकर खुशी मनाते दिखे। इजराइली अधिकारियों ने बताया कि जिस साथी पायलट ने स्मित पर हमला किया, वह ओमान का नागरिक था। इजराइल के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि पायलट की हिम्मत ने बड़ी घटना टाल दी। वरना 2001 में हुए अमेरिका के 9/11 जैसी घटना हो सकती थी। इजराइली डेंटिस्ट ने कैप्टन स्मित की मदद की विमान में सवार यात्रियों को कुछ देर के लिए लगा कि वे जिंदा नहीं बचेंगे। एक यात्री ने AFP को बताया कि, “सभी को लगा कि अब हम मरने वाले हैं।” विमान में मौजूद कुछ लोगों ने भी सूझबूझ दिखाई, जिससे बड़ा हादसा टल गया। विमान में सिविल ड्रेस में 2 रिलीफ पायलट मौजूद थे जिन्होंने बाद में प्लेन को संभाला। जबकि यात्रियों ने हमलावर को कॉकपिट से दूर करने में मदद की। वहीं कैप्टन स्मित की मदद विमान में मौजूद एक डेंटिस्ट ने की। उन्होंने घायल पायलट का विमान में ही इलाज किया और उनकी जान बचाई। स्पाइसजेट में 11 साल पायलट रह चुके हैं कैप्टन स्मित फ्लाईदुबई से पहले स्मित ने 11 साल से ज्यादा समय तक स्पाइसजेट में काम कर चुके हैं। यहां उन्होंने 9500 घंटे से ज्यादा उड़ान भरी। इनमें 6400 घंटे से ज्यादा समय विमान के मुख्य पायलट यानी पायलट-इन-कमांड के तौर पर था। जून 2022 में उन्होंने फ्लाईदुबई जॉइन की थी। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, उन्हें कमर्शियल विमान उड़ाने का 13 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने बोइंग 737 विमानों पर करीब 9750 घंटे उड़ान भरी है। इसके अलावा वे पायलटों की ट्रेनिंग, उनकी जांच और उन्हें काम के दौरान गाइड करने का काम भी करते थे। पॉडकास्ट बताया- पढ़ाई के दौरान पायलट बनने का ख्याल आया पिछले साल अक्टूबर में कैप्टन स्मित ने CS जलक मेहता नाम के यूट्यूब चैनल के साथ पॉडकास्ट किया था। इस दौरान उन्होंने कहा, स्कूलिंग के बाद फैमिली बिजनेस संभालने के लिए मैंने मैनेजमेंट की पढ़ाई की। लेकिन इसी दौरान मैं एविएशन से जुड़े एक सेमिनार में गया, वहीं मैंने पहली बार पायलट बनने का सोचा। आगे उन्होंने बताया, ‘मेरी पहली कमर्शियल फ्लाइट बेंगलुरु से दिल्ली के लिए थी।’ 10 पॉइंट्स में जानिए विमान में क्या-क्या हुआ ———————- यह खबर भी पढ़ें… इजराइल जा रही फ्लाइट क्रैश कराने की कोशिश: पायलट को चाकू मारा, 17 हजार फीट नीचे आया विमान; फाइटर जेट की निगरानी में इमरजेंसी लैंडिंग दुबई से तेल अवीव जा रही एक फ्लाइट को हाईजैक कर क्रैश कराने की कोशिश हुई। पूरी खबर पढ़ें…
FlyDubai Flight Emergency Landing: दुबई से इजराइल के तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ 1073 में हवा में अचानक कुछ ऐसा हुआ, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में हड़कंप मच गया। कॉकपिट में पायलटों के बीच विवाद के बाद हाइजैक का डिस्ट्रेस सिग्नल ट्रिगर हो गया, जिसके चलते प्लेन को तुरंत सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी।
विमान के सुरक्षित जमीन पर उतरते ही यात्रियों ने राहत की सांस ली। इस दौरान पूरा केबिन ‘Od Avinu Chai’ गा रहा था जिसका मतलब यानी हमारा पिता अभी जीवित है जो एक हिब्रू प्रार्थना गीत है।
कॉकपिट में पायलटों की भिड़ंत और गलत सिग्नल का खौफ
इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उड़ते विमान के कॉकपिट में ही पायलटों के बीच आपस में तीखी बहस और हाथापाई हो गई थी। इसी घटनाक्रम के दौरान विमान से पहले सामान्य इमरजेंसी कोड 7700 भेजा गया, लेकिन इसके तुरंत बाद डिस्ट्रेस सिग्नल 7500 में बदल गया। यह कोड विमान के गैर-कानूनी कब्जे या ‘हाईजैकिंग’ को दर्शाता है।
हाइजैक कोड मिलते ही इजराइली वायुसेना एक्शन में आ गई और फाइटर जेट्स को हवा में तैनात कर दिया गया। हालांकि, बाद में सिग्नल को फिर से 7700 में स्विच किया गया और हाइजैकिंग की आशंका को खारिज कर दिया गया।
सऊदी अरब में लैंडिंग के बाद गूंजा ‘Od Avinu Chai’
तमाम आशंकाओं के बीच विमान को उत्तर-पश्चिमी सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट की तरफ डाइवर्ट किया गया, जहां प्लेन सुरक्षित लैंड हो गया। फ्लाईदुबई के प्रवक्ता ने बयान जारी कर पुष्टि की कि विमान में सवार सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं।
Footage shows the landing of the “FlyDubai” flight in Saudi Arabia.
The passengers are singing in Hebrew “Avinu Malkeinu” (“Our Father, Our King”). pic.twitter.com/v3OJAZldWq
— Hananya Naftali (@HananyaNaftali) September 30, 2026
लैंडिंग के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो में खौफ के साये से बाहर निकले यात्री खुशी से तालियां बजाते और मशहूर हिब्रू प्रार्थना गीत ‘Od Avinu Chai’ गाकर ईश्वर का शुक्रिया अदा करते नजर आ रहे हैं।
नेतन्याहू ने की आपातकालीन समीक्षा
इस घटना की गंभीरता को देखते हुए इज़राइली प्रधानमंत्री कार्यालय और रक्षा मंत्रालय तुरंत सक्रिय हो गए। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्थिति की समीक्षा के लिए आपातकालीन बैठक की और पूरे घटनाक्रम पर सीधे नजर रखी।
पीएमओ ने बयान जारी कर कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और सभी इज़राइली यात्रियों को सुरक्षित वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इजराइल की परिवहन मंत्री मिरियम रेगेव ने सुरक्षा स्थिति का आकलन किया, जबकि फ्लाईदुबई एयरलाइन ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
मिस्र ने 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास हमले की चेतावनी इजराइल को पहले ही दे दी थी। वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, मिस्र की खुफिया एजेंसी के प्रमुख अब्बास कामेल ने हमले से कुछ दिन पहले इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को फोन किया था। उन्होंने गाजा से बड़े हमले की आशंका जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, मिस्र ने इजराइल को पहली चेतावनी जून 2023 में दी थी। इसके बाद सितंबर में भी आगाह किया गया। हमले से कुछ दिन पहले नेतन्याहू के कार्यालय में फोन कर तीसरी बार चेतावनी दी गई थी। हालांकि, यह साफ नहीं है कि इन चेतावनियों के बाद इजराइल ने क्या कदम उठाए थे। मिस्र ने हमास से बातचीत शुरू करने को कहा था WSJ की रिपोर्ट के मुताबिक, मिस्र ने जून 2023 में गाजा के हालात पर चिंता जताई थी। उसने इजराइल से हमास के साथ बातचीत फिर शुरू करने को कहा था। यह बातचीत बंधकों और कैदियों की अदला-बदली को लेकर होनी थी। सितंबर 2023 में अब्बास कामेल इजराइल गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने वहां के अधिकारियों को बताया कि गाजा के हालात गंभीर हैं। उन्होंने चेताया कि स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। लेकिन इजराइली अधिकारियों ने उनसे कहा कि हालात नियंत्रण में हैं। इसके कुछ दिन बाद कामेल ने नेतन्याहू के कार्यालय को फोन किया। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने गाजा से बड़े हमले की आशंका को लेकर फिर चेतावनी दी। हालांकि, इन चेतावनियों में हमले का सही समय, निशाने और उसके पूरे प्लान की जानकारी होने की बात सामने नहीं आई है। नेतन्याहू ने चेतावनी मिलने से इनकार किया था नेतन्याहू पहले कह चुके हैं कि हमले से पहले उन्हें मिस्र के खुफिया प्रमुख से सीधे कोई चेतावनी नहीं मिली थी। ऐसे में नई रिपोर्ट के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या नेतन्याहू को हमले की आशंका के बारे में पहले से जानकारी थी। यह भी सवाल है कि मिस्र की ओर से मिली जानकारी इजराइल की सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंची थी या नहीं। UAE के राष्ट्रपति ने भी नेतन्याहू को चेताया था इससे पहले न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) की एक रिपोर्ट में भी दावा किया गया था कि UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने सितंबर 2023 में नेतन्याहू को हमास के संभावित बड़े हमले के बारे में बताया था। रिपोर्ट में बातचीत की जानकारी रखने वाले दो लोगों के हवाले से यह बात कही गई थी। NYT के मुताबिक, इजराइल के पांच पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा था कि UAE की यह चेतावनी देश के सुरक्षा तंत्र के शीर्ष अधिकारियों तक नहीं पहुंची थी। नेतन्याहू ने UAE से जुड़ी चेतावनी के आरोपों को खारिज किया था। उन्होंने उस रिपोर्ट को पूरी तरह झूठ बताया था। हमले से पहले क्या-क्या जानकारी मिली थी? 7 अक्टूबर 2023 को हमास के लड़ाकों ने गाजा सीमा पार कर इजराइली लोगों और सैन्य ठिकानों पर हमला किया था। इस दौरान कई लोगों को बंधक भी बनाया गया था। द अटलांटिक की रिपोर्ट के मुताबिक, अब्बास कामेल ने 26 सितंबर 2023 को इजराइल का दौरा किया था। यह हमले से 11 दिन पहले की बात है। रिपोर्ट में कहा गया कि कामेल ने गाजा में हमले की तैयारियों को लेकर चेतावनी दी थी। उन्होंने तनाव कम करने के कदम उठाने की अपील भी की थी। जेरूसलम पोस्ट ने WSJ की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि मिस्र ने इजराइल को कम से कम तीन बार चेतावनी दी थी। हालांकि, रिपोर्टों से यह साबित नहीं होता कि इजराइल को हमले की पूरी योजना पहले से पता थी। अब मुख्य सवाल यह है कि नेतन्याहू तक कौन-सी जानकारी पहुंची थी, सुरक्षा एजेंसियों को क्या बताया गया था और चेतावनियों के बाद क्या कार्रवाई हुई थी। इन सवालों पर अभी पूरी तस्वीर साफ नहीं है।
मिस्र ने 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास हमले की चेतावनी इजराइल को पहले ही दे दी थी। वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, मिस्र की खुफिया एजेंसी के प्रमुख अब्बास कामेल ने हमले से कुछ दिन पहले इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को फोन किया था। उन्होंने गाजा से बड़े हमले की आशंका जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, मिस्र ने इजराइल को पहली चेतावनी जून 2023 में दी थी। इसके बाद सितंबर में भी आगाह किया गया। हमले से कुछ दिन पहले नेतन्याहू के कार्यालय में फोन कर तीसरी बार चेतावनी दी गई थी। हालांकि, यह साफ नहीं है कि इन चेतावनियों के बाद इजराइल ने क्या कदम उठाए थे। अक्टूबर 2023 में हुए हमास हमले की तस्वीरें… मिस्र ने हमास से बातचीत शुरू करने को कहा था WSJ की रिपोर्ट के मुताबिक, मिस्र ने जून 2023 में गाजा के हालात पर चिंता जताई थी। उसने इजराइल से हमास के साथ बातचीत फिर शुरू करने को कहा था। यह बातचीत बंधकों और कैदियों की अदला-बदली को लेकर होनी थी। सितंबर 2023 में अब्बास कामेल इजराइल गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने वहां के अधिकारियों को बताया कि गाजा के हालात गंभीर हैं। उन्होंने चेताया कि स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। लेकिन इजराइली अधिकारियों ने उनसे कहा कि हालात नियंत्रण में हैं। इसके कुछ दिन बाद कामेल ने नेतन्याहू के कार्यालय को फोन किया। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने गाजा से बड़े हमले की आशंका को लेकर फिर चेतावनी दी। हालांकि, इन चेतावनियों में हमले का सही समय, निशाने और उसके पूरे प्लान की जानकारी होने की बात सामने नहीं आई है। नेतन्याहू ने चेतावनी मिलने से इनकार किया था नेतन्याहू पहले कह चुके हैं कि हमले से पहले उन्हें मिस्र के खुफिया प्रमुख से सीधे कोई चेतावनी नहीं मिली थी। ऐसे में नई रिपोर्ट के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या नेतन्याहू को हमले की आशंका के बारे में पहले से जानकारी थी। यह भी सवाल है कि मिस्र की ओर से मिली जानकारी इजराइल की सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंची थी या नहीं। रिपोर्ट- UAE के राष्ट्रपति ने भी नेतन्याहू को चेताया था इससे पहले न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) की एक रिपोर्ट में भी दावा किया गया था कि UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने सितंबर 2023 में नेतन्याहू को हमास के संभावित बड़े हमले के बारे में बताया था। रिपोर्ट में बातचीत की जानकारी रखने वाले दो लोगों के हवाले से यह बात कही गई थी। NYT के मुताबिक, इजराइल के पांच पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा था कि UAE की यह चेतावनी देश के सुरक्षा तंत्र के शीर्ष अधिकारियों तक नहीं पहुंची थी। नेतन्याहू ने UAE से जुड़ी चेतावनी के आरोपों को खारिज किया था। उन्होंने उस रिपोर्ट को पूरी तरह झूठ बताया था। हमले से पहले क्या-क्या जानकारी मिली थी? 7 अक्टूबर 2023 को हमास के लड़ाकों ने गाजा सीमा पार कर इजराइली लोगों और सैन्य ठिकानों पर हमला किया था। इस दौरान कई लोगों को बंधक भी बनाया गया था। द अटलांटिक की रिपोर्ट के मुताबिक, अब्बास कामेल ने 26 सितंबर 2023 को इजराइल का दौरा किया था। यह हमले से 11 दिन पहले की बात है। रिपोर्ट में कहा गया कि कामेल ने गाजा में हमले की तैयारियों को लेकर चेतावनी दी थी। उन्होंने तनाव कम करने के कदम उठाने की अपील भी की थी। जेरूसलम पोस्ट ने WSJ की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि मिस्र ने इजराइल को कम से कम तीन बार चेतावनी दी थी। हालांकि, रिपोर्टों से यह साबित नहीं होता कि इजराइल को हमले की पूरी योजना पहले से पता थी। अब मुख्य सवाल यह है कि नेतन्याहू तक कौन-सी जानकारी पहुंची थी, सुरक्षा एजेंसियों को क्या बताया गया था और चेतावनियों के बाद क्या कार्रवाई हुई थी। इन सवालों पर अभी पूरी तस्वीर साफ नहीं है। ——————— ये खबर भी पढ़ें…. इजराइल ने हमास आतंकी को मार गिराया:7 अक्टूबर के हमले में इजराइली महिला को किडनैप कर जबरदस्ती गाजा ले गया था इजराइल ने शनिवार को हवाई हमले में हमास आतंकी को मार गिराया है। इजराइली सेना (IDF) ने रविवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि आतंकी की पहचान साहेर निदाल लत्फी साकर के रूप में हुई है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया। लावरोव ने कहा कि सुरक्षा परिषद में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा, हम ब्राजील और भारत की स्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी का समर्थन करते हैं। उन्होंने सुरक्षा परिषद में पश्चिमी देशों की अतिरिक्त सीटों का विरोध किया। लावरोव ने खास तौर पर जर्मनी और जापान का नाम लेते हुए उन पर ‘सैन्यवाद और बदले की भावना की ओर बढ़ने का आरोप लगाया। हालांकि, लावरोव ने कहा कि UNSC में सुधार के दौरान मौजूदा स्थायी सदस्यों के अधिकारों और शक्तियों में कमी नहीं होनी चाहिए। UNSC में कुल 15 सदस्य, 5 परमानेंट मेंबर्स सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य हैं। इनमें 5 स्थायी सदस्य- चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका हैं, जिन्हें वीटो पावर हासिल है। इसके अलावा 10 गैर-स्थायी सदस्य होते हैं, जिन्हें 2 साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है। UN चार्टर में बदलाव के लिए महासभा में दो-तिहाई बहुमत और दो-तिहाई सदस्य देशों की औपचारिक मंजूरी जरूरी है। इसमें सभी पांच मौजूदा स्थायी सदस्यों की मंजूरी भी आवश्यक है। भारत के स्थायी सदस्यता की मांग 1990 से जारी भारत की UNSC में स्थायी सदस्यता की मांग 1990 के दशक से उठती रही है। 2008 से UN में सुरक्षा परिषद सुधार पर औपचारिक बातचीत शुरू हुई। 2010 में भारत ने ब्राजील, जर्मनी और जापान के साथ G4 समूह बनाकर स्थायी सीट की मांग आगे बढ़ाई। 2026 में भी सुधार को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन सदस्य देशों के बीच UNSC के नए ढांचे पर सहमति नहीं बनी है। स्थायी सदस्यता को लेकर 5 पेंच… 1. चीन का रुख
भारत की स्थायी सदस्यता पर चीन का रुख सबसे महत्वपूर्ण अड़चनों में से एक माना जाता है। चीन खुद मौजूदा पांच स्थायी सदस्यों में है और भारत के साथ क्षेत्रीय व रणनीतिक मतभेद भी हैं। 2. G4 के खिलाफ दूसरे देशों की आपत्ति
भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील स्थायी सीटों के विस्तार का समर्थन करते हैं। लेकिन Uniting for Consensus (UfC) जैसे समूह का एक प्रस्ताव है कि UNSC में नए स्थायी सदस्यों के बजाय गैर-स्थायी सीटें बढ़ाई जाएं। 3. अफ्रीकी देशों की सीटों पर सहमति
अफ्रीकी देशों की मांग भी UNSC सुधार का बड़ा हिस्सा है। कितनी सीटें होंगी और उनका स्वरूप क्या होगा, इस पर भी बातचीत जारी है। 4. वीटो का सवाल
नए स्थायी सदस्यों को वीटो पावर मिलेगी या नहीं, यह सबसे जटिल मुद्दों में से एक है। मौजूदा पांच स्थायी सदस्य अपने अधिकारों को बनाए रखने पर जोर देते हैं, जबकि G4 स्थायी सदस्यता के वास्तविक अधिकारों की बात करता है। 5. UN चार्टर में संशोधन
UNSC की संरचना बदलने के लिए UN Charter में संशोधन करना होगा। इसके लिए महासभा में दो-तिहाई बहुमत और सदस्य देशों की दो-तिहाई पुष्टि चाहिए, जिसमें मौजूदा सभी पांच स्थायी सदस्यों की मंजूरी भी जरूरी होती है। ——————————— ये खबर भी पढ़ें… UN में 75 देशों ने नेतन्याहू का बायकॉट किया: हूटिंग हुई तो 3 मिनट चुप खड़े रहे इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण दिया। जैसे ही वो मंच पर आए तो 75 देशों के प्रतिनिधियों ने हूटिंग करके उनका विरोध किया, फिर बाहर चले गए। इस घटनाक्रम के बाद नेतन्याहू करीब 3 मिनट तक चुपचाप खड़े रहे। पूरी खबर पढ़ें…
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया। लावरोव ने कहा कि सुरक्षा परिषद में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा, हम ब्राजील और भारत की स्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी का समर्थन करते हैं। उन्होंने सुरक्षा परिषद में पश्चिमी देशों की अतिरिक्त सीटों का विरोध किया। लावरोव ने खास तौर पर जर्मनी और जापान का नाम लेते हुए उन पर ‘सैन्यवाद और बदले की भावना की ओर बढ़ने का आरोप लगाया। हालांकि, लावरोव ने कहा कि UNSC में सुधार के दौरान मौजूदा स्थायी सदस्यों के अधिकारों और शक्तियों में कमी नहीं होनी चाहिए। UNSC में कुल 15 सदस्य, 5 परमानेंट मेंबर्स सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य हैं। इनमें 5 स्थायी सदस्य- चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका हैं, जिन्हें वीटो पावर हासिल है। इसके अलावा 10 गैर-स्थायी सदस्य होते हैं, जिन्हें 2 साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है। UN चार्टर में बदलाव के लिए महासभा में दो-तिहाई बहुमत और दो-तिहाई सदस्य देशों की औपचारिक मंजूरी जरूरी है। इसमें सभी पांच मौजूदा स्थायी सदस्यों की मंजूरी भी आवश्यक है। भारत के स्थायी सदस्यता की मांग 1990 से जारी भारत की UNSC में स्थायी सदस्यता की मांग 1990 के दशक से उठती रही है। 2008 से UN में सुरक्षा परिषद सुधार पर औपचारिक बातचीत शुरू हुई। 2010 में भारत ने ब्राजील, जर्मनी और जापान के साथ G4 समूह बनाकर स्थायी सीट की मांग आगे बढ़ाई। 2026 में भी सुधार को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन सदस्य देशों के बीच UNSC के नए ढांचे पर सहमति नहीं बनी है। स्थायी सदस्यता को लेकर 5 पेंच… 1. चीन का रुख
भारत की स्थायी सदस्यता पर चीन का रुख सबसे महत्वपूर्ण अड़चनों में से एक माना जाता है। चीन खुद मौजूदा पांच स्थायी सदस्यों में है और भारत के साथ क्षेत्रीय व रणनीतिक मतभेद भी हैं। 2. G4 के खिलाफ दूसरे देशों की आपत्ति
भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील स्थायी सीटों के विस्तार का समर्थन करते हैं। लेकिन Uniting for Consensus (UfC) जैसे समूह का एक प्रस्ताव है कि UNSC में नए स्थायी सदस्यों के बजाय गैर-स्थायी सीटें बढ़ाई जाएं। 3. अफ्रीकी देशों की सीटों पर सहमति
अफ्रीकी देशों की मांग भी UNSC सुधार का बड़ा हिस्सा है। कितनी सीटें होंगी और उनका स्वरूप क्या होगा, इस पर भी बातचीत जारी है। 4. वीटो का सवाल
नए स्थायी सदस्यों को वीटो पावर मिलेगी या नहीं, यह सबसे जटिल मुद्दों में से एक है। मौजूदा पांच स्थायी सदस्य अपने अधिकारों को बनाए रखने पर जोर देते हैं, जबकि G4 स्थायी सदस्यता के वास्तविक अधिकारों की बात करता है। 5. UN चार्टर में संशोधन
UNSC की संरचना बदलने के लिए UN Charter में संशोधन करना होगा। इसके लिए महासभा में दो-तिहाई बहुमत और सदस्य देशों की दो-तिहाई पुष्टि चाहिए, जिसमें मौजूदा सभी पांच स्थायी सदस्यों की मंजूरी भी जरूरी होती है। ——————————— ये खबर भी पढ़ें… UN में 75 देशों ने नेतन्याहू का बायकॉट किया: हूटिंग हुई तो 3 मिनट चुप खड़े रहे इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण दिया। जैसे ही वो मंच पर आए तो 75 देशों के प्रतिनिधियों ने हूटिंग करके उनका विरोध किया, फिर बाहर चले गए। इस घटनाक्रम के बाद नेतन्याहू करीब 3 मिनट तक चुपचाप खड़े रहे। पूरी खबर पढ़ें…
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को एक पाकिस्तानी रिपोर्टर पर तंज कसा। रिपोर्टर ने भारत पर पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। इस पर जयशंकर ने कहा, “एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है।” रिपोर्टर के सवाल का जवाब देने के बाद वे मुस्कुराए और वहां से निकल गए। जयशंकर के पाकिस्तानी पत्रकार को जवाब देने का VIDEO दरअसल, संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर मीडिया के सवालों का जवाब दे रहे थे। इस दौरान भारत की विदेश नीति, वैश्विक सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई पर बातचीत हो रही थी। 4 साल पहले भी ऐसा ही जवाब दिया था इससे पहले दिसंबर 2022 में न्यूयॉर्क में एक पाकिस्तानी पत्रकार ने जयशंकर से पूछा था कि दक्षिण एशिया आखिर कब तक भारत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से जुड़े आतंकवाद का सामना करता रहेगा। इस पर जयशंकर ने कहा था, आप गलत मंत्री से सवाल पूछ रहे हैं। पाकिस्तान कब तक आतंकवाद जारी रखना चाहता है, यह पाकिस्तान के मंत्री बताएंगे। भारत-पाकिस्तान के बीच आतंकवाद बड़ा विवाद भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाता रहा है। पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता है। दोनों देशों के बीच आतंकवाद का मुद्दा लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठता रहा है। भारत ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले का भी मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया है। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान में मौजूद या वहां से संचालित होने वाले आतंकी संगठनों और आतंकवाद की फंडिंग का मुद्दा भी उठाया है। वहीं, पाकिस्तान भारत के आरोपों को खारिज करता रहा है। जयशंकर ने समुद्री जहाजों पर हमलों का मुद्दा उठाया जयशंकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में खाड़ी, लाल सागर और ब्लैक सी में व्यापारिक जहाजों पर बढ़ते हमलों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि ये अब कभी-कभार होने वाली घटनाएं नहीं रह गई हैं। समुद्री रास्तों पर ऐसे हमले दुनिया के व्यापार और लोगों की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय हैं। पिछले 3 महीने में 7 भारतीयों की मौत, 1 लापता 8 जुलाई- ब्लैक सी में MV ओमोर्फी पर हमले में भारतीय चीफ ऑफिसर की मौत हुई। 19 जुलाई- MV गोल्डन लियो पर हमले में चार भारतीय नाविक मारे गए। 9 सितंबर- होर्मुज स्ट्रेट में एल गैया टैंकर पर हमला हुआ, जिसके बाद एक भारतीय क्रू सदस्य लापता हो गया। 17 सितंबर- ओमान की खाड़ी में MV केप डाओ पर हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हुई। कल UNGA में बोलेंगे जयशंकर विदेश मंत्री संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के हाई लेवल सेशन में 26 सितंबर को भारत का पक्ष रखेंगे। अपने संबोधन के दौरान वह वैश्विक मुद्दों पर भारत का पक्ष दुनिया के सामने रखेंगे। पिछले साल भी जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में भारत का पक्ष रखा था। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा था कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति जीरो टॉलरेंस की है। विदेश मंत्री ने आतंकवाद को बढ़ावा देने और आतंकियों को पनाह देने वाले देशों को जवाबदेह ठहराने की बात कही थी। ————————– यह खबर भी पढ़ें… UN में 75 देशों ने नेतन्याहू का बायकॉट किया:हूटिंग हुई तो 3 मिनट चुप खड़े रहे, फिर बोले- कायर बाहर चले जाएं
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण दिया। जैसे ही वो मंच पर आए तो 75 देशों के प्रतिनिधियों ने हूटिंग करके उनका विरोध किया, फिर बाहर चले गए। पूरी खबर यहां पढ़ें…

संयुक्त राष्ट्र महासभा के चल रहे सत्र में गुरूवार को इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया कि उन्होंने ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से सफलतापूर्वक रोका है।
उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु ठिकानों को नष्ट करना कठिन काम था, लेकिन उनके लिए यह बेहद जरूरी था, क्योंकि ऐसा न करने पर सभी के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा था।
उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयानों का समर्थन और अमेरिका को इजराइल का सबसे बड़ा साझेदार बताते कहा कि इजराइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को काफी हद तक कमजोर किया है।
Also Read : त्योहारी मौसम में 22 विशेष उड़ानें शुरू करेगी स्पाइसजेट
इजराइली प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनका देश इस समय हमास, हिजबुल्लाह, हूती, ईरान तथा इराक, सीरिया और फलस्तीन के विभिन्न गुटों के खिलाफ “सात मोर्चों” पर एक साथ लड़ाई लड़ रहा है।
वेस्ट बैंक में इजराइली नागरिकों की हिंसा पर सफाई देते हुए उन्होंने इसे महज कुछ असामाजिक तत्वों की हरकत बताया और संघर्ष में फलस्तीनी मौतों के आंकड़ों को खारिज किया।
इसके साथ ही, उन्होंने अपने देश के खिलाफ टिप्पणी करने वालों और न्यूयॉर्क शहर के मेयर ज़ोहरान ममदानी पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने वालों को अपने रुख पर पुनर्विचार करना चाहिए।
श्री नेतन्याहू भाषण की शुरुआत के दौरान व्यापक विरोध देखने को मिला। जैसे ही वे मंच पर पहुंचे, कई देशों के प्रतिनिधिमंडल असेंबली हॉल से बाहर निकल गए, जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए नेतन्याहू ने उन्हें “नैतिक कायर” करार दिया।
Pic Credit : UNI
Netanyahu vs Mamdani: न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में दिए भाषण को लेकर निशाना साधा है। ममदानी ने आरोप लगाया कि नेतन्याहू ने अपने भाषण में फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई को सही ठहराने के लिए “बेबुनियाद झूठ” दोहराए। इससे गाजा में इजरायल के युद्ध और नेतन्याहू की न्यूयॉर्क यात्रा को लेकर दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक टकराव और बढ़ गया है।
जोहान ममदानी ने कहा, “प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपने भाषण का इस्तेमाल फिलिस्तीनियों के नरसंहार को सही ठहराने के लिए बेबुनियाद झूठ दोहराने में किया। फिर भी, कोई भी झूठ इस सच्चाई को नहीं बदल सकता कि वह अभी भी इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) के गिरफ्तारी वारंट का सामना कर रहे हैं, जिसमें उन पर युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराधों का आरोप है।”
बता दें कि जोहरान ममदानी की ये बातें नेतन्याहू के UNGA भाषण में न्यूयॉर्क के मेयर पर सीधे हमले के कुछ घंटों बाद आईं। नेतन्याहू ने उन पर आरोप लगाया कि उन्होंने ऐसे हालात बनाने में भूमिका निभाई है, जिनमें न्यूयॉर्क में रहने वाले यहूदी अब सुरक्षित महसूस नहीं करते।
नेतन्याहू ने कहा, “मिस्टर ममदानी, जब से आप इस शहर के मेयर चुने गए हैं, न्यूयॉर्क में कई यहूदी अब सुरक्षित महसूस नहीं करते।” उन्होंने आगे कहा कि लोगों ने उनसे कहा है, “यह वह शहर नहीं है जिसे हम जानते थे। यह बहुत तेजी से बदल गया है।”
नेतन्याहू ने जोहरान ममदानी पर हमास का समर्थन करने का आरोप लगाया
नेतन्याहू ने जोहरान ममदानी पर ऐसे लोगों के साथ जुड़े होने का भी आरोप लगाया, जिन्हें उन्होंने हमास का समर्थक और इजरायल व यहूदी समुदायों का विरोधी बताया।
नेतन्याहू ने कहा, “आप हमास का समर्थन करने के दोषी अपराधियों की तारीफ करते हैं। आप हसन पिकर जैसे लोगों को अपना दोस्त मानते हैं, जिन्होंने कहा था कि अमेरिका 9/11 का हकदार था।” उन्होंने एक फिलिस्तीनी पत्रकार का भी जिक्र किया जिसे जोहरान ममदानी ने अपने घर बुलाया था। नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि उस पत्रकार ने हमास द्वारा इजरायली बंधकों की पिटाई और उन पर अत्याचार का वीडियो बनाया था, लेकिन बाद में उस फुटेज को पब्लिश करने से इनकार कर दिया।
नेतन्याहू ने जोहरान ममदानी की पत्नी की सोशल मीडिया गतिविधियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने उन पोस्ट को “लाइक” किया था जिनमें 7 अक्टूबर, 2023 को हुए हमास के हमले की तारीफ की गई थी और एक ऐसी पोस्ट भी जिसमें कहा गया था कि तेल अवीव का अस्तित्व नहीं होना चाहिए। हालांकि, जोहान ममदानी ने हमास का समर्थन करने के आरोपों को खारिज किया है।
वहीं, नेतन्याहू ने भी इजरायल पर नरसंहार करने के आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने जोहरान ममदानी से कहा, “आप इजरायल पर बार-बार नरसंहार का झूठा आरोप लगाते हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा, “इजरायल ने नरसंहार नहीं किया, इजरायल ने नरसंहार को रोका।”
जोहरान ममदानी और नेतन्याहू के बीच टकराव
यह टकराव जोहरान ममदानी की उस पुरानी मांग के बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने कहा था कि नेतन्याहू को इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) के वारंट के तहत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। ICC ने नवंबर 2024 में नेतन्याहू और उस समय के इजरायली रक्षा मंत्री योव गैलेंट के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। इन पर गाजा पट्टी में कथित तौर पर युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध करने का आरोप था। हालांकि, इजरायल इन आरोपों को खारिज दिया है और उसने कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी है।
जोहरान ममदानी ने इससे पहले अमेरिकी फेडरल सरकार से नेतन्याहू के खिलाफ ICC वारंट को लागू करने की मांग की थी और कहा था कि न्यूयॉर्क में इजरायली प्रधानमंत्री का “स्वागत नहीं” है। मेयर पद के लिए अपने चुनाव प्रचार के दौरान, जोहरान ममदानी ने यह भी वादा किया था कि अगर नेतन्याहू न्यूयॉर्क आते हैं तो उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।
यह भी पढ़ें: नोएडा एयरपोर्ट के पास सुनहरा मौका! YEIDA की नई स्कीम में 10 प्लॉट की ई-नीलामी शुरू
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण दिया। जैसे ही वो मंच पर आए तो कई देशों के प्रतिनिधि हूटिंग करके उनका विरोध करने लगे और बाहर जाने लगे। इस दौरान नेतन्याहू करीब 3 मिनट तक शांत रहे। फिर उन्होंने कहा, भाषण शुरू करने से पहले मैं कहना चाहता हूं कि अगर कोई और कायर व्यक्ति है तो यहां से बाहर चला जाए। हालांकि इस दौरान गैलरी नेतन्याहू के समर्थकों से भरा हुआ था। उन्होंने तालियां बजाकर राष्ट्रपति का स्वागत किया और ‘अम यिसराइल चाई’ यानि ‘इजराइल की जनता जिंदा है’ के नारे लगाए। नेतन्याहू ने अपने भाषण में गाजा, ईरान, लेबनान पर हुए इजराइली कार्रवाई का जिक्र किया। ट्रम्प की तारीफ, न्यूयॉर्क मेयर ममदानी और यूरोप के नेताओं की आलोचना की। गाजा- इजराइली सेना के हमले का बचाव नेतन्याहू ने 7 अक्टूबर 2023 के हमले का जिक्र करते हुए इजराइल की सैन्य कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने कहा कि हमास के आतंकियों ने जिस तरह इजराइलियों को मारा, वह बेहद भयावह था। ऐसी भयावहता की कल्पना भी नहीं की जा सकती। नेतन्याहू ने आगे कहा, दुश्मनों को लगा था कि इजराइल टूट जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हम उठे और शेरों की तरह लड़े। इजराइली PM ने गाजा में इजराइल पर नरसंहार करने के आरोप को खारिज किया। उन्होंने इसे 21वीं सदी का सबसे बड़ा झूठ बताया। नेतन्याहू ने कहा, “इजराइल ने नरसंहार नहीं किया। इजराइल ने नरसंहार को रोका। अगर हमास के समर्थकों को मौका मिलता तो वे हर यहूदी को मार देते।” लेबनान- हिजबुल्लाह को पेजर अटैक की याद दिलाई नेतन्याहू ने हिजबुल्लाह के खिलाफ की गई उस कार्रवाई का भी जिक्र किया, जिसमें संगठन के सदस्यों के पास मौजूद पेजर में धमाके हुए थे। उन्होंने कहा, क्या आपको पेजर याद हैं? हिजबुल्लाह को तो जरूर याद होंगे। 17 सितंबर 2024 को लेबनान और सीरिया में हिजबुल्लाह के सदस्यों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले हजारों पेजर एक साथ फटे थे, जिससे 3,000 से अधिक लोग घायल हुए और कई लोगों की मौत हो गई थी। ईरान- डेलिगेशन को स्टारलिंक देने की बात कही नेतन्याहू ने दावा किया कि इजराइल ने ईरान की वायुसेना, नौसेना और परमाणु कार्यक्रम को बहुत नुकसान बनाया है। ईरान के नेताओं को ‘तेहरान का तानाशाह’ बताया और कहा कि वे अपने ही लोगों से डरते हैं। उन्होंने इलॉन मस्क की कंपनी स्टारलिंक का एक डिवाइस दिखाया और कहा कि इससे ईरान के लोग खुलकर अपनी बात कह सकते हैं। नेतन्याहू ने आगे कहा कि वे यह डिवाइस ईरानी डेलिगेशन के लिए छोड़कर जाएंगे। अगर वे अपनी सरकार के खिलाफ हो जाएं या उसका साथ छोड़ दें, तो स्टारलिंक के जरिए इंटरनेट चला सकेंगे और सोशल मीडिया पर अपनी बात दुनिया को बता सकेंगे। ममदानी- न्यूयॉर्क के मेयर हमास समर्थक कहा इसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी पर निशाना साधा। नेतन्याहू ने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी यहूदी आबादी वाले इस शहर में यहूदी अब खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते। उन्होंने ममदानी को हमास का समर्थक बताया। उन्होंने ममदानी की पत्नी की भी आलोचना की और कहा कि वे सोशल मीडिया पर इजराइल विरोधी पोस्ट को पसंद करती हैं। उन्होंने कहा, वह दौर खत्म हो गया जब यहूदी बिना किसी बचाव के पीड़ित बनकर मारे जाते थे। आज हमारे पास एक देश है। आज हमारे पास एक सेना है। नेतन्याहू ने अपना भाषण ‘हमारे पास कोई और विकल्प नहीं है’ कहते हुए खत्म किया। इस पर गैलरी में करीब 30 सेकेंड तक तालियां बजती रहीं।

