इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण दिया। जैसे ही वो मंच पर आए तो 75 देशों के प्रतिनिधि हूटिंग करके उनका विरोध करने लगे और बाहर जाने लगे। इस दौरान नेतन्याहू करीब 3 मिनट तक शांत रहे। फिर उन्होंने कहा, भाषण शुरू करने से पहले मैं कहना चाहता हूं कि अगर यहां कोई और कायर है तो बाहर चला जाए। हालांकि इस दौरान गैलरी नेतन्याहू के समर्थकों से भरा हुआ था। उन्होंने तालियां बजाकर राष्ट्रपति का स्वागत किया और ‘अम यिसराइल चाई’ यानि ‘इजराइल की जनता जिंदा है’ के नारे लगाए। नेतन्याहू ने अपने भाषण में गाजा, ईरान, लेबनान पर हुए इजराइली कार्रवाई का जिक्र किया। ट्रम्प की तारीफ, न्यूयॉर्क मेयर ममदानी और यूरोप के नेताओं की आलोचना की। नेतन्याहू के भाषण से जुड़ीं 2 फोटोज गाजा- इजराइली सेना के हमले का बचाव नेतन्याहू ने 7 अक्टूबर 2023 के हमले का जिक्र करते हुए इजराइल की सैन्य कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने कहा कि हमास के आतंकियों ने जिस तरह इजराइलियों को मारा, वह बेहद भयावह था। ऐसी भयावहता की कल्पना भी नहीं की जा सकती। नेतन्याहू ने आगे कहा, दुश्मनों को लगा था कि इजराइल टूट जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हम उठे और शेरों की तरह लड़े। इजराइली PM ने गाजा में इजराइल पर नरसंहार करने के आरोप को खारिज किया। उन्होंने इसे 21वीं सदी का सबसे बड़ा झूठ बताया। नेतन्याहू ने कहा, “इजराइल ने नरसंहार नहीं किया। इजराइल ने नरसंहार को रोका। अगर हमास के समर्थकों को मौका मिलता तो वे हर यहूदी को मार देते।” लेबनान- हिजबुल्लाह को पेजर अटैक की याद दिलाई नेतन्याहू ने हिजबुल्लाह के खिलाफ की गई उस कार्रवाई का भी जिक्र किया, जिसमें संगठन के सदस्यों के पास मौजूद पेजर में धमाके हुए थे। उन्होंने कहा, क्या आपको पेजर याद हैं? हिजबुल्लाह को तो जरूर याद होंगे। 17 सितंबर 2024 को लेबनान और सीरिया में हजारों पेजर एक साथ फटे थे, जिससे 3,000 से अधिक लोग घायल हुए और कई लोगों की मौत हो गई थी। ईरान- डेलीगेशन को स्टारलिंक गिफ्ट करने बात कही नेतन्याहू ने ईरान की मिसाइलों के खतरे का जिक्र करते हुए संयुक्त राष्ट्र में मौजूद लोगों से सवाल किया कि अगर एक टन की ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल इस इमारत पर गिर जाए तो क्या होगा। इससे पूरा इलाका तबाह हो सकता है। उन्होंने ईरान के नेताओं को ‘तेहरान का तानाशाह’ बताया और कहा कि वे अपने ही लोगों से डरते हैं। उन्होंने इलॉन मस्क की कंपनी स्टारलिंक का एक डिवाइस दिखाया और कहा कि इससे ईरान के लोग खुलकर अपनी बात कह सकते हैं। नेतन्याहू ने आगे कहा कि वे यह डिवाइस ईरानी डेलीगेशन के लिए छोड़कर जाएंगे। अगर वे अपनी सरकार के खिलाफ हो जाएं या उसका साथ छोड़ दें, तो स्टारलिंक के जरिए इंटरनेट चला सकेंगे और सोशल मीडिया पर अपनी बात दुनिया को बता सकेंगे। ममदानी- न्यूयॉर्क के मेयर को हमास समर्थक कहा इसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी पर निशाना साधा। नेतन्याहू ने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी यहूदी आबादी वाले इस शहर में यहूदी अब खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते। उन्होंने ममदानी को हमास का समर्थक बताया। उन्होंने ममदानी की पत्नी की भी आलोचना की और कहा कि वे सोशल मीडिया पर इजराइल विरोधी पोस्ट को पसंद करती हैं। उन्होंने कहा, वह दौर खत्म हो गया जब यहूदी बिना किसी बचाव के पीड़ित बनकर मारे जाते थे। आज हमारे पास एक देश है। आज हमारे पास एक सेना है। ट्रम्प- इजराइल की सभ्यता बचाने में मदद की नेतन्याहू ने ट्रम्प की तारीफ की और इजराइल का साथ देने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि ट्रम्प ने सभ्यता को बचाने के लिए काम किया। नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका की मदद से हुए समझौते के बाद गाजा में बचे बंधकों को वापस लाया गया। नेतन्याहू ने अपना भाषण ‘हमारे पास कोई और विकल्प नहीं है’ कहते हुए खत्म किया। इस पर गैलरी में करीब 30 सेकेंड तक तालियां बजती रहीं। ईरान की सीट पर सुलेमानी की तस्वीर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण के दौरान ईरान का प्रतिनिधिमंडल मौजूद नहीं था। हालांकि, ईरान की सीट पर ईरान की कुद्स फोर्स के पूर्व कमांडर कासिम सुलेमानी की तस्वीर रखी थी। नेतन्याहू के भाषण के दौरान यह तस्वीर ईरानी प्रतिनिधिमंडल की मेज के सामने साफ नजर आ रही थी, जहां आमतौर पर ईरानी राजनयिक बैठते हैं। 3 जनवरी 2020 को बगदाद एयरपोर्ट के पास अमेरिकी ड्रोन हमले में सुलेमानी मारे गए थे। यह हमला तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के आदेश पर किया गया था। कासिम सुलेमानी ईरान के सबसे ताकतवर सैन्य कमांडरों में से एक थे। उन्हें तब खामेनेई के बाद ईरान का दूसरा सबसे ताकतवर शख्स माना जाता था। न्यूयॉर्क में नेतन्याहू के भाषण के विरोध में प्रदर्शन सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने UN में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भाषण के विरोध में ‘जायनिज्म खत्म होगा’ के नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों के पास नेतन्याहू का एक बड़ा कार्डबोर्ड कटआउट था। इसमें उन्हें लाल रंग से ढका दिखाया गया था और उनके हाथों से खून टपकता दिखाया गया था। कुछ लोगों के हाथों में ‘जायनिज्म आतंकवाद है’ लिखे पोस्टर भी थे। संयुक्त राष्ट्र के पास इजराइल के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान सड़क रोकने पर पुलिस ने दर्जनों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारियों ने फर्स्ट एवेन्यू पर सड़क रोक दी थी। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हथकड़ी लगाकर पुलिस बस तक पहुंचाया। —————————– यह खबर भी पढ़ें… गाजा में 2 बोरी आटे के बदले बेटी की शादी:UN रिपोर्ट- रेप पीड़िताओं की आरोपियों से शादी संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) ने गाजा में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें बताया गया है कि एक पिता ने अपनी 14 साल की बेटी की शादी 2 बोरी आटे के बदले कर दी। पूरी खबर पढ़ें…
इजराइल में प्रधानमंत्री के बालों की स्टाइलिंग और मेकअप पर 2019 से अगस्त 2026 तक करीब 4.7 लाख डॉलर यानी लगभग 4 करोड़ रुपए खर्च हुए। इसका खुलासा सूचना के अधिकार के तहत मिले सरकारी रिकॉर्ड से हुआ है। दिसंबर 2025 में वकील यारा शलित ने PM ऑफिस से इस खर्च की जानकारी मांगी थी। इसके बाद अलग-अलग साल और महीनों में हुए खर्च का ब्योरा जारी किया गया। इस दौरान पिछले 7 साल में तीन प्रधानमंत्री रहे- बेंजामिन नेतन्याहू, नफ्ताली बेनेट और याइर लैपिड। रिकॉर्ड के मुताबिक, बाल और मेकअप पर हुए कुल खर्च का करीब 90% हिस्सा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा पर हुआ। हालांकि, कई दस्तावेजों में उनके हेयर स्टाइलिस्ट और मेकअप आर्टिस्ट के नाम भी छिपा दिए गए। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसके लिए राज्य की सुरक्षा का हवाला दिया। 2023 में युद्ध शुरू होने के दौरान भी बाल-मेकअप पर खर्च 2025 में सबसे ज्यादा खर्च, विदेश यात्राओं में भी बिल बढ़ा 2025 में प्रधानमंत्री के बालों और मेकअप पर सबसे ज्यादा रकम खर्च हुई। इस साल कुल खर्च करीब 1.11 लाख डॉलर यानी लगभग 93 लाख रुपए रहा। विदेश यात्राओं के दौरान भी बालों और मेकअप पर बड़ी रकम खर्च हुई। फरवरी 2025 में नेतन्याहू की 4 दिन की वॉशिंगटन यात्रा के दौरान मेकअप आर्टिस्ट और हेयर स्टाइलिस्ट की सेवाओं पर करीब 13,500 डॉलर यानी 11 लाख रुपए खर्च हुए। यह विदेश यात्रा के दौरान इस मद में सबसे बड़ा खर्च था। यह यात्रा ट्रम्प से मुलाकात के लिए हुई थी। उस समय नेतन्याहू ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में व्हाइट हाउस जाने वाले पहले विदेशी नेता थे। जुलाई 2024 में नेतन्याहू की एक और वॉशिंगटन यात्रा के दौरान भी इन सेवाओं पर करीब 11,500 डॉलर यानी 9.6 लाख रुपए खर्च हुए थे। मेहमानों और कपड़ों पर भी नेतन्याहू का खर्च ज्यादा बाल और मेकअप के अलावा प्रधानमंत्री के आधिकारिक प्रतिनिधित्व से जुड़े खर्च की अलग मद भी है। इसमें कपड़ों और मेहमानों की मेजबानी जैसे खर्च शामिल हैं। इस मद में नेतन्याहू से जुड़े खर्च करीब 1.34 लाख डॉलर यानी 1.12 करोड़ रुपए रहे। नफ्ताली बेनेट के लिए यह रकम करीब 19,000 डॉलर यानी 16 लाख रुपए और याइर लैपिड के लिए करीब 2,600 डॉलर यानी 2.2 लाख रुपए थी। हालांकि, सरकार ने गहनों, कपड़ों और इमेज कंसल्टिंग से जुड़े खर्च का पूरा ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया। सूचना की स्वतंत्रता के लिए काम करने वाले संगठन की ओर से इन जानकारियों की भी मांग की गई थी। इस मामले में सबसे ज्यादा ध्यान इसलिए जा रहा है क्योंकि सरकारी रिकॉर्ड में प्रधानमंत्री के बालों की स्टाइलिंग और मेकअप पर अलग से हजारों डॉलर खर्च होने की जानकारी सामने आई है। खास तौर पर 2025 में यह खर्च 1 लाख डॉलर से ज्यादा रहा। खर्च का हिसाब-किताब 2019-अगस्त 2026: हेयर स्टाइलिंग और मेकअप पर करीब 4.7 लाख डॉलर नेतन्याहू और सारा: कुल हेयर-मेकअप खर्च का करीब 90% 2023: करीब 1.03 लाख डॉलर 2022: करीब 27,600 डॉलर 2025: करीब 1.11 लाख डॉलर, सबसे ज्यादा फरवरी 2025 वॉशिंगटन यात्रा: करीब 13,500 डॉलर जुलाई 2024 वॉशिंगटन यात्रा: करीब 11,500 डॉलर सितंबर-नवंबर 2023: बालों पर करीब 2,600 डॉलर, मेकअप पर 1,580 डॉलर अक्टूबर 2023: बालों की स्टाइलिंग पर करीब 810 डॉलर बालों पर खूब एक्सपेरिमेंट करते हैं नेतन्याहू नेतन्याहू के बालों का रंग बदलना कोई नई बात नहीं है। पिछले कई सालों से इजराइली मीडिया उनके बालों के अलग-अलग रंगों पर रिपोर्ट करता रहा है। कभी उनके बाल गहरे भूरे दिखे, तो कभी ग्रे, सफेद, हरे या बैंगनी रंग के शेड में नजर आए। 2017 में उनके बदलते हेयर कलर पर इतनी चर्चा हुई कि उन्होंने खुद इस पर मजाक किया था। उन्होंने कहा था कि ‘ब्राउन नया ग्रे है’। फिर कुछ हफ्तों में उनका पुराना ग्रे रंग वापस आ जाएगा। इसके कुछ साल बाद, 2021 में नेतन्याहू ने खुद अपने बालों के रंग का राज बताया। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वे ऐसा शैंपू इस्तेमाल करते हैं, जिससे बालों का रंग बदला जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि रंग को लेकर किए गए प्रयोगों के दौरान उनके बाल कभी हरे, कभी भूरे और कभी बैंगनी हो गए थे।
दिल्ली में शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात के बाद एक तस्वीर ने फिर ध्यान खींचा। दोनों नेता द्विपक्षीय बैठक के बाद कार में सवार होकर इनोप्रोम प्रदर्शनी तक साथ गए। ये कार पुतिन की बख्तरबंद ओरस सीनेट है। इससे पहले दोनों नेता ने 12 दिन पहले 31 अगस्त को किर्गिस्तान के बिश्केक में साथ यात्रा की थी। मोदी के पीएम बनने के बाद यह भी पहली बार नहीं है, जब वह किसी विदेशी नेता के साथ कार में बैठे हों। 2014 के बाद वह ओबामा, मैक्रों समेत कई विश्व नेताओं के साथ 11 बार कार राइड कर चुके हैं। पहले आज की कार राइड की फोटो देखें पुतिन-मोदी पहले भी 3 बार साथ कार में बैठ चुके मोदी 11 बार वर्ल्ड लीडर्स के साथ एक काम में बैठे 30 सितंबर 2014 बराक ओबामा के साथ 4 जुलाई 2017 बेंजामिन नेतन्याहू के साथ सितंबर 2025 पुतिन के साथ अक्टूबर 2025 कीर स्टार्मर के साथ दिसंबर 2025 पुतिन के साथ 16 दिसंबर 2025 इथियोपियाई पीएम के साथ 12 जनवरी 2026 जर्मन चांसलर के साथ 31 अगस्त 2026 पुतिन के साथ 11 सितंबर 2026 पुतिन के साथ क्या होती है कार डिप्लोमेसी कार डिप्लोमेसी का सीधा सा मतलब है जब दो देशों के शीर्ष नेता कूटनीतिक औपचारिकताओं (प्रोटोकॉल) को किनारे रखकर एक साथ एक ही कार में सफर करते हैं। यह कोई आम सफर नहीं होता, बल्कि दुनिया को यह दिखाने का तरीका होता है कि दोनों नेताओं और उनके देशों के बीच बहुत गहरी व्यक्तिगत दोस्ती, सहजता और अटूट भरोसा है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… BRICS में मेहमानों को गिफ्ट में गुडी बैग दिया:इसमें बिहार का सत्तू, ओडिशा की कॉफी और गुजराती दुपट्टा; मकसद भारतीय संस्कृति से परिचित कराना BRICS समिट में शामिल होने आए प्रतिनिधियों और मेहमानों को खास गुडी बैग गिफ्ट किया जा रहा है। इसमें बिहार का सत्तू व मखाना पूरी खबर पढ़ें…
इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह की 2 किलोमीटर से ज्यादा लंबी सुरंग को ब्लास्ट कर तबाह कर दिया। यह विस्फोट इतना तेज था कि इलाके में 4.1 तीव्रता का भूकंप आ गया। लेबनान की सरकारी न्यूज एजेंसी के मुताबिक, धमाक से आसपास के इलाकों में जमीन हिलने लगी। कार्रवाई के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, ‘मिशन पूरा हुआ। हैप्पी न्यू ईयर।’ इजराइली सेना के मुताबिक, सुरंग नेटवर्क में ईरान में बने कई रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन रखे थे। यहां मशीनगन, एंटी-टैंक मिसाइल और सैकड़ों बारूदी सुरंगें व विस्फोटक भी मिले। सेना ने बताया कि इस परिसर में हिजबुल्लाह की ‘बद्र’ यूनिट का कमांड सेंटर भी था। 2 दशक में तैयार किया गया था टनल नेटवर्क नेतन्याहू और इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने बताया कि इस टनल नेटवर्क को दो दशक में तैयार किया था। ईरान ने इसके लिए फीडिंग की थी। इजराइली नेताओं ने इसे आतंकी नेटवर्क बताया। इजराइल का कहना है कि इस कार्रवाई के बाद अली अल-ताहेर पहाड़ी पर जमीन के ऊपर और नीचे दोनों जगह उसका ऑपरेशनल कंट्रोल हो गया है। इजराइल ने पिछले हफ्ते अली अल-ताहेर पहाड़ी पर कब्जा करने का दावा किया था। सेना के एक अधिकारी के मुताबिक, वहां हिजबुल्लाह के कुछ लड़ाके इलाके से निकल गए, जबकि कुछ को हवाई हमलों और तोपखाने की कार्रवाई में मार गिराया गया। लेबनान में इजराइली हमले फिर तेज हो रहे ईरान और अमेरिका के बीच जून में समझ बनने और उसके बाद लेबनान-इजराइल समझौते के बाद कुछ समय के लिए हिंसा कम हुई थी। हालांकि, पिछले कुछ दिनों में दक्षिणी लेबनान में इजराइली हमले फिर तेज हुए हैं। AFP के मुताबिक, बातचीत के दौरान अमेरिका ने प्रस्ताव दिया था कि अली अल-ताहेर पहाड़ी का नियंत्रण लेबनानी सेना को दिया जाए, लेकिन हिजबुल्लाह ने इसे स्वीकार नहीं किया। लेबनानी अधिकारियों के मुताबिक, मार्च से अब तक इजराइली हमलों में 4300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान के एक हिस्से में बनाए गए तथाकथित सुरक्षा क्षेत्र में भी मौजूद है। —————— ये खबर भी पढ़ें… रूसी राष्ट्रपति पुतिन BRICS समिट के लिए भारत पहुंचे:मोदी से मुलाकात करेंगे; Su-57 फाइटर जेट और अपडेटेड ब्रह्मोस की डील हो सकती है रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS समिट में शामिल होने के लिए भारत पहुंच गए हैं। पुतिन का प्लेन रात करीब 3 बजे नई दिल्ली पहुंचा। एयरपोर्ट पर विदेश राज्य मंत्री केवी सिंह ने उनका स्वागत किया। पूरी खबर यहां पढ़ें…
UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद ने 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले से 10 दिन पहले इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को बड़े हमले की चेतावनी दी थी। इजराइली अखबार हारेत्ज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होने कहा था कि इस हमले में बहुत खून-खराबा होगा। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नेतन्याहू ने इस चेतावनी पर शांत तरीके से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इजराइल किसी भी स्थिति के लिए तैयार है। हालांकि, नेतन्याहू के कार्यालय ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। PMO ने इसे पूरी तरह झूठ बताया है। UAE के विदेश मंत्रालय ने इस दावे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। बड़ी संख्या में लोगों की जान जाने की चेतावनी दी थी रिपोर्ट के मुताबिक, बिन जायद ने कहा था कि हमले से बड़ी संख्या में लोगों की जान जा सकती है और इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रपति बिन जायद ने अब्राहम समझौते पर खतरा होने की बात भी कही थी। अब्राहम अकॉर्ड 2020 में अमेरिका की पहल पर शुरू हुआ एक समझौता है। इसके तहत इजराइल ने कई अरब और मुस्लिम बहुल देशों के साथ संबंध सामान्य किए थे। हालांकि, नेतन्याहू के कार्यालय के मुताबिक प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने उस वक्त बिन जायद से बात नहीं की थी और UAE राष्ट्रपति से उन्हें कोई चेतावनी नहीं मिली थी। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
8 मुस्लिम बहुल देशों ने रविवार को इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर के बयानों की कड़ी निंदा की। दोनों नेताओं ने गाजा से फिलिस्तीनियों को हटाने की योजना बनाने की बात कही थी। सऊदी अरब, जॉर्डन, UAE, तुर्किये, कतर, मिस्र, इंडोनेशिया और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान में कहा कि ऐसे बयान और भड़काऊ प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का खुला उल्लंघन हैं। ये फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों के लिए सीधा खतरा हैं। मंत्रियों ने चेतावनी दी कि अगर गाजा के लोगों को जबरन हटाया गया, तो इसके गंभीर नतीजे होंगे। इससे शांति की कोशिशों को नुकसान पहुंच सकता है। काट्ज ने कहा था- अमेरिका तैयार हुआ तो गाजा खाली करा देंगे इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने 2 सितंबर बुधवार को कहा था कि अगर अमेरिका मंजूरी देता है तो हम गाजा से फिलिस्तीनियों को बाहर निकाल देंगे। उन्होंने आगे बताया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फिलहाल इस योजला को फ्रीज किया है। इजराइल अमेरिका के फैसले का इंतजार कर रहा है कि इन लोगों को कहां भेजा जाएगा। ट्रम्प ने फरवरी 2025 में पहली बार गाजा की करीब 23 लाख आबादी को दूसरी जगह बसाने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि काट्ज ने यह भी माना था कि फिलहाल कोई भी देश इतनी बड़ी संख्या में गाजा के लोगों को अपने यहां लेने के लिए तैयार नहीं है। इजिप्ट के विरोध के बाद प्रस्ताव पर पीछे हटे ट्रम्प अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में कहा था कि गाजा के करीब 20 लाख फिलिस्तीनियों को वहां से चले जाना चाहिए। ट्रम्प ने गाजा को फिर से बसाने और उसे भूमध्यसागर के किनारे एक लग्जरी रिसॉर्ट में बदलने की बात कही थी। ट्रम्प के इस प्रस्ताव का कई देशों ने विरोध किया था। इनमें मिस्र भी शामिल था। मिस्र, इजराइल के अलावा गाजा से सीमा साझा करने वाला इकलौता देश है। फिलिस्तीनियों ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया। उनका कहना था कि अगर उन्हें उनकी जमीन से जबरन हटाया गया तो यह उन्हें 1948 की याद दिलाएगा, जब इजराइल के बनने के दौरान बड़ी संख्या में फिलिस्तीनियों को अपना घर छोड़ना पड़ा था। फिलिस्तीनी इस घटना को ‘नकबा’ यानी तबाही कहते हैं। बाद में अक्टूबर में गाजा में युद्धविराम का ऐलान करते हुए ट्रम्प ने इलाके के लिए 20 बिंदुओं वाली योजना पेश की। इसमें फिलिस्तीनियों को गाजा से जबरन हटाने की बात नहीं थी। दावा- 80% लोग गाजा छोड़ने को तैयार इजराइल के कट्टरपंथी नेता इतामार बेन ग्वीर ने गुरुवार को गाजा की ज्यादातर फिलिस्तीनी आबादी को इलाके से बाहर निकालने की योजना पेश की थी। उन्होंने इसे स्वैच्छिक पलायन बताया था। काट्ज ने भी दावा किया कि गाजा के 80% लोग वहां से जाना चाहते हैं, लेकिन हमास उन्हें ऐसा करने से रोक रहा है। इस योजना में एक अलग सरकारी मंत्रालय बनाने की बात भी शामिल है। बेन ग्वीर ने कहा था कि अगर अक्टूबर के आखिर में होने वाले चुनाव के बाद उनकी गठबंधन सरकार सत्ता में रहती है तो वे इस योजना को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे। नेतन्याहू बोले- इजराइली सेना पीछे नहीं हटेगी इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजराइली सेना पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि “हम इस इलाके को नियंत्रित कर रहे हैं। हम पीछे नहीं हट रहे हैं। हम यलो लाइन पर बने रहेंगे।” यलो लाइन गाजा के उन इलाकों को अलग करती है, जो हमास और इजराइली सेना के नियंत्रण में हैं। उन्होंने आगे कहा कि हम गाजा पट्टी के 60% हिस्से को नियंत्रित करते हैं और हम रुकने वाले नहीं हैं, क्योंकि हम उन आतंकियों को खत्म कर रहे हैं जो हर दिन हमें धमकी देते हैं। हमास के हमले और गाजा में मौतों का आंकड़ा हमास के हमले के बाद इजराइली हमलों के कारण गाजा की बड़ी आबादी पहले ही अपने ही इलाके में विस्थापित हो चुकी है। इजराइली आंकड़ों के अनुसार, हमले में 1,221 लोग मारे गए थे। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इसके बाद इजराइल के हमलों में 73,470 लोगों की मौत हुई है। उसके मुताबिक युद्धविराम के बाद भी 1,330 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। ————– यह खबर भी पढ़ें… नेतन्याहू बोले- ईरान ने बेटे की हत्या की कोशिश की:हमें मिली सिक्योरिटी ऐशोआराम के लिए नहीं; ट्रम्प के बेटे को भी मिल चुकी धमकी इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि ईरान ने उनके परिवार को निशाना बनाया और उनके दो बेटों में से एक की हत्या की कोशिश की थी। पूरी खबर पढ़ें…
इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा कि अगर अमेरिका मंजूरी देता है तो हम गाजा से फिलिस्तीनियों को बाहर निकाल देंगे। काट्ज ने कहा कि हमास हथियार छोड़ने को तैयार नहीं है। ऐसे में गाजा की समस्या का समाधान लोगों को वहां से हटाए बिना संभव नहीं है। फिलिस्तीनियों को गाजा से बाहर निकालने की योजना तैयार है। लोगों को समुद्र, हवाई मार्ग या किसी भी दूसरे तरीके से बाहर भेजने की तैयारी है। उन्होंने कहा- अब इजराइल अमेरिका के फैसले का इंतजार कर रहा है कि इन लोगों को कहां भेजा जाएगा। इजिप्ट के विरोध के बाद प्रस्ताव पर पीछे हटे ट्रम्प ट्रम्प को इस प्रस्ताव पर कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। इसमें मिस्र भी शामिल था, जो इजराइल के अलावा गाजा से सीमा साझा करने वाला इकलौता देश है। फिलिस्तीनियों ने भी इस प्रस्ताव की निंदा की। उनके लिए अपनी जमीन से जबरन हटाने की कोई भी कोशिश 1948 में इजराइल के बनने के दौरान हुए बड़े पैमाने पर विस्थापन की याद दिलाती है, जिसे नकबा यानी तबाही कहा जाता है। अक्टूबर में गाजा युद्धविराम का ऐलान करते समय ट्रम्प ने इस इलाके के लिए 20 बिंदुओं की योजना बताई थी। इसमें जबरन विस्थापन नहीं करने की बात शामिल थी। काट्ज बोले- योजना रद्द नहीं हुई काट्ज ने कहा कि योजना रद्द नहीं हुई है। ट्रम्प ने इस विचार को सिर्फ फ्रीज किया है। वे फिलिस्तीनियों को रखने वाले देशों की तलाश कर रहे हैं। मुझे लगता है कि सभी की भलाई के लिए कोई दूसरा समाधान नहीं है। लेकिन इसे लागू करने के लिए हमें अमेरिका की जरूरत है। हमें उसकी मंजूरी कब मिलेगी? जब यह साफ हो जाएगा कि युद्धविराम के तहत हमास अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं कर रहा है।” काट्ज का दावा- गाजा के 80% लोग जाना चाहते हैं काट्ज ने अपने दावे का सोर्स बताए बिना कहा कि गाजा के 80% लोग वहां से जाना चाहते हैं। हमास उन्हें रोक रहा है। कब्जे वाले इलाके में आम लोगों को जबरन हटाना जेनेवा कन्वेंशन के तहत युद्ध अपराध माना जाता है। इंटरनेशनल कोर्ट ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और काट्ज के के खिलाफ युद्ध अपराधों को लेकर गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। हमास के हमले और गाजा में मौतों का आंकड़ा हमास के हमले के बाद इजराइली हमलों के कारण गाजा की बड़ी आबादी पहले ही अपने ही इलाके में विस्थापित हो चुकी है। इजराइली आंकड़ों के अनुसार, हमले में 1,221 लोग मारे गए थे। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इसके बाद इजराइल के हमलों में 73,470 लोगों की मौत हुई है। उसके मुताबिक युद्धविराम के बाद भी 1,330 से ज्यादा लोग मारे गए हैं।
Benjamin Netanyahu: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को लेकर एक बेहद ही सनसनीखेज दावा किया है। नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान ने उनके एक बेटे की हत्या की साजिश रची थी। उन्होंने कहा कि उसे निशाना बनाकर हत्या की कोशिश की गई। प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद इजरायल की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। नेतन्याहू ने सोमवार (24 अगस्त) को एक इंटरव्यू में कहा, “ईरान ने मेरे परिवार को निशाना बनाया।” उन्होंने यह बात इजरायली चैनल 14 को फोन पर दिए इंटरव्यू में कही।
इजरायली टेलीविजन चैनल चैनल 14 को दिए एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि ईरान ने उनके एक बेटे को निशाना बनाया था। उन्होंने दावा किया कि यह केवल धमकी नहीं थी। बल्कि उनके बेटे की हत्या करने की कोशिश की गई थी। नेतन्याहू ने इंटरव्यू में कहा, “ईरान ने मेरे एक बेटे को निशाना बनाया। ईरान ने मेरे एक बेटे की हत्या करने की कोशिश की। उसने उसकी हत्या की साजिश रची और उसे मारने की कोशिश की।”
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी किया बड़ा दावा
नेतन्याहू से पूछा गया कि क्या उनके बेटे को निशाना बनाने की जानकारी किसी खुफिया सूचना के लीक होने के कारण सामने आई थी। इसके जवाब में उन्होंने दोबारा स्पष्ट तौर पर कहा कि ईरान ने उनके एक बेटे की हत्या की कोशिश की थी। इसके बाद नेतन्याहू ने अपने परिवार को दी जा रही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का बचाव किया।
उन्होंने कहा कि उनके परिवार की सुरक्षा किसी दिखावे या विशेष सुविधा के लिए नहीं है, बल्कि वास्तविक खतरे को देखते हुए जरूरी है। नेतन्याहू ने कहा कि अगर यह सुरक्षा व्यवस्था नहीं होती, तो उनके बेटे को निशाना बनाने वाले लोग अपने मकसद में सफल हो सकते थे। उनके मुताबिक, परिवार के सदस्यों को सुरक्षा देना मौजूदा परिस्थितियों में एक आवश्यक कदम है।
किस बेटे को बनाया गया निशाना?
नेतन्याहू ने अपने बयान में यह स्पष्ट नहीं किया कि कथित हत्या की कोशिश में उनके किस बेटे को निशाना बनाया गया था। उनके दो बेटे याइर नेतन्याहू और अवनेर नेतन्याहू हैं। इसलिए यह अभी स्पष्ट नहीं है कि कथित ईरानी साजिश का निशाना याइर थे या अवनेर। नेतन्याहू ने इंटरव्यू के दौरान इस बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी शेयर नहीं की।
परिवार की सुरक्षा पहले ही बढ़ाई जा चुकी है
नेतन्याहू का यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब उनके परिवार की सुरक्षा को लेकर पहले ही अतिरिक्त कदम उठाए जा चुके हैं। जुलाई में शिन बेट मामलों से संबंधित मंत्रीस्तरीय समिति ने नेतन्याहू की पत्नी सारा नेतन्याहू और उनके दोनों बेटों याइर तथा अवनेर के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा बढ़ाने को मंजूरी दी थी। यह फैसला प्रधानमंत्री के परिवार को लेकर बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच लिया गया था। हालांकि, उस समय सुरक्षा बढ़ाने के पीछे कथित तौर पर किस विशेष खतरे का आकलन किया गया था, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी।
लंबे समय से सुरक्षा मामलों पर गोपनीयता
नेतन्याहू का ताजा बयान ऐसे समय आया है जब सुरक्षा से जुड़े कई मामलों को लेकर लंबे समय से सख्त गोपनीयता और प्रतिबंध लागू रहे हैं। इजरायल में प्रधानमंत्री और उनके परिवार की सुरक्षा से संबंधित खुफिया जानकारी को आम तौर पर सार्वजनिक नहीं किया जाता। ऐसे में नेतन्याहू द्वारा खुद अपने एक बेटे को ईरान की कथित हत्या की कोशिश का निशाना बताए जाने को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, उनके बयान में कथित हमले की तारीख, स्थान, हमले के तरीके या उसे विफल करने वाली सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई के बारे में कोई डिटेल्स जानकारी नहीं दी गई। नेतन्याहू के इस दावे से एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि इजरायल और ईरान के बीच जारी गंभीर तनाव अब प्रधानमंत्री के परिवार तक कितनी दूर पहुंच चुका है। हालांकि, कथित हत्या की कोशिश से जुड़े विस्तृत तथ्य और खुफिया जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

