चीन के पश्चिमी गांसू प्रांत के पहाड़ी इलाके में मंगलवार को हुए भूस्खलन में 33 लोग मलबे में दब गए। सरकारी मीडिया के मुताबिक, अब तक 17 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि 16 लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान जारी है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सभी प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द बचाने के लिए हरसंभव प्रयास करने के निर्देश दिए हैं। इस बीच, सेंट्रल चीन के हुबेई प्रांत में सोमवार रात आए तेज तूफान और आंधी-बारिश से कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 275 लोग घायल हुए हैं। एक व्यक्ति अब भी लापता है। मौसम विभाग के मुताबिक, कई इलाकों में 149 किमी/घंटा तक की रफ्तार से हवाएं चलीं। अगले 24 घंटे में 260 मिमी तक बारिश होने की चेतावनी जारी की गई है, जिससे भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बना हुआ है। चीन के मौसम विभाग ने सुपर टाइफून ‘बावी’ को लेकर भी अलर्ट जारी किया है। यह तूफान 290 किमी/घंटा तक की रफ्तार वाली हवाओं के साथ प्रशांत महासागर से ताइवान की ओर बढ़ रहा है। अधिकारियों ने लोगों को सतर्क रहने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी है।

Monsoon and Health: स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून में संतुलित आहार, पर्याप्त पानी का सेवन, नियमित व्यायाम, व्यक्तिगत स्वच्छता और मच्छरों से बचाव जैसी आदतें अपनाकर कई मौसमी बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। साथ ही यदि तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, जोड़ों में दर्द, त्वचा पर चकत्ते, लगातार कमजोरी या उल्टी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें सामान्य वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय रहते डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।ALSO READ: Monsoon health tips: सावधान! बारिश में बीमारियों के खतरे से कैसे बचाएं खुद को, ये लक्षण दिखें तो ना करें नजरअंदाज
अगर आप जानना चाहते हैं कि मानसून में क्या खाएं, किन बातों का ध्यान रखें, इम्यूनिटी कैसे मजबूत करें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के आसान उपाय क्या हैं, तो यह लेख आपके लिए उपयोगी साबित होगा। यहां आपको मानसून में स्वस्थ और सक्रिय रहने के लिए जरूरी स्वास्थ्य टिप्स, सावधानियां और विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए महत्वपूर्ण उपाय विस्तार से बताए गए हैं।
यहां जानें मानसून डाइट प्लान
* सुबह की शुरुआत
गुनगुना पानी पिएं।
नाश्ते में पोहा, दलिया, ओट्स, मूंग दाल चीला या इडली जैसी हल्की और पौष्टिक चीजें लें।
मौसमी फलों का सेवन करें, लेकिन उन्हें अच्छी तरह धोकर खाएं।
* दोपहर का भोजन
दाल, रोटी, चावल और मौसमी सब्जियों का संतुलित भोजन करें।
दही की जगह यदि मौसम या स्वास्थ्य के अनुसार उपयुक्त लगे तो छाछ या अन्य हल्के विकल्प लें।
अधिक तला-भुना और मसालेदार भोजन सीमित रखें।
* शाम का नाश्ता
भुना चना, मखाना, स्प्राउट्स या सूप जैसे हल्के विकल्प चुनें।
चाय के साथ तले हुए स्नैक्स की बजाय पौष्टिक नाश्ता लें।
* रात का खाना
हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करें।
रात में बहुत देर से भोजन करने से बचें।
* इम्युनिटी बढ़ाने वाले घरेलू उपाय
1. हल्दी वाला दूध
हल्दी में मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा का समर्थन करने में सहायक माने जाते हैं।
2. अदरक और तुलसी की चाय
अदरक और तुलसी से बनी गर्म चाय गले को आराम पहुंचा सकती है और मौसम बदलने के दौरान आरामदायक महसूस कराने में मदद कर सकती है।
3. विटामिन C युक्त खाद्य पदार्थ
आंवला, अमरूद, संतरा और नींबू जैसे खाद्य पदार्थ विटामिन C के अच्छे स्रोत हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली के सामान्य कार्य में भूमिका निभाते हैं।
4. पर्याप्त पानी पिएं
प्यास कम लगने पर भी दिनभर पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पीते रहें।
5. पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम
रोज 7–8 घंटे की नींद लें और कम से कम 30 मिनट योग, वॉक या हल्की एक्सरसाइज करें।
6. प्रोटीन युक्त आहार लें
दालें, पनीर, अंडे (यदि आप खाते हों), सोया और अन्य प्रोटीन स्रोत शरीर के संतुलित पोषण में मदद करते हैं।ALSO READ: Health Benefits of Banana: कच्चे और पके केले में कौन कौनसे विटामिन होते हैं?
* स्वच्छता का रखें ध्यान
बाहर से आने के बाद हाथ धोएं।
गीले कपड़े तुरंत बदलें।
घर के आसपास पानी जमा न होने दें, ताकि मच्छरों का प्रजनन कम हो।
* किन चीजों से बचें?
* बासी या खुले में रखा भोजन।
* अस्वच्छ स्थानों का स्ट्रीट फूड।
* बहुत अधिक तला-भुना और अत्यधिक मीठा भोजन।
* बिना आवश्यकता के एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का सेवन।
संक्षेप में कहा जाए तो मानसून में फिट रहने के लिए कोई एक 'जादुई' खाद्य पदार्थ या घरेलू नुस्खा पर्याप्त नहीं होता। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, अच्छी स्वच्छता और मच्छरों से बचाव-इन सभी का संयोजन बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि तेज बुखार, लगातार उल्टी, सांस लेने में तकलीफ, गंभीर कमजोरी या डेंगू, मलेरिया अथवा चिकनगुनिया जैसे संक्रमण के लक्षण दिखाई दें, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Monsoon Health Tips: बारिश में फिट कैसे रहें?
कई लोगों की आदत होती है कि वो अपनी प्लेट में खाना बिल्कुल नहीं छोड़ते। दाल की आखिरी बूंद हो या मिठाई का अंतिम टुकड़ा, वो हर निवाले को खत्म करना पसंद करते हैं। देखने में यह एक सामान्य आदत लग सकती है, लेकिन इसके पीछे व्यक्ति की सोच, परवरिश और भोजन से जुड़े संस्कार छिपे हो सकते हैं। बचपन में मिली सीख, परिवार की परंपराएं और खाने की अहमियत को लेकर बनी धारणाएं इस व्यवहार को आकार देती हैं।
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि प्लेट साफ करने की आदत किसी खास व्यक्तित्व की पहचान नहीं होती, बल्कि यह सालों से बनी आदतों और मूल्यों का मिश्रण हो सकती है। आइए जानते हैं कि खाना पूरा खत्म करने वाले लोगों की मानसिकता के बारे में मनोविज्ञान क्या कहता है।
“खाना बर्बाद नहीं करना चाहिए” वाली सीख बन जाती है आदत
अक्सर यह आदत बचपन में ही विकसित हो जाती है। माता-पिता की बातें जैसे “प्लेट में खाना मत छोड़ो” या “खाने की कद्र करो” धीरे-धीरे सोच का हिस्सा बन जाती हैं। समय के साथ खाना पूरा खत्म करना एक स्वाभाविक व्यवहार बन जाता है। ऐसे लोग अक्सर इसे भूख से ज्यादा जिम्मेदारी और सम्मान से जोड़कर देखते हैं।
हर काम पूरा करने की सोच दिखा सकती है यह आदत
कुछ लोगों के लिए प्लेट में खाना छोड़ना अधूरे काम जैसा महसूस होता है। वे किसी भी चीज को बीच में छोड़ना पसंद नहीं करते और उसे पूरा करना संतुष्टि देता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि वे हमेशा ज्यादा जिम्मेदार या परफेक्शनिस्ट होते हैं, लेकिन उनकी आदतों में पूरा करने की भावना जरूर नजर आ सकती है।
भूख नहीं, कई बार आदत तय करती है कब रुकना है
खाने से जुड़ी मनोविज्ञान की रिसर्च बताती है कि लोग हमेशा अपनी भूख के हिसाब से खाना बंद नहीं करते। कई बार प्लेट में बचा हुआ खाना, खाने की मात्रा या सामाजिक आदतें यह तय करती हैं कि व्यक्ति कब खाना खत्म करेगा। यानी पेट भर जाने के बाद भी लोग सिर्फ इसलिए खाते रहते हैं क्योंकि प्लेट में खाना बाकी है।
खाना छोड़ना उन्हें बर्बादी जैसा लगता है
कुछ लोगों के लिए भोजन सिर्फ खाने की चीज नहीं बल्कि मेहनत और संसाधनों की कीमत से जुड़ा होता है। वे सोचते हैं कि इस खाने को बनाने में किसी की मेहनत, समय और पैसे लगे हैं, इसलिए इसे फेंकना सही नहीं है। खासकर ऐसे परिवारों में जहां बचपन से खाने की अहमियत सिखाई गई हो, वहां यह भावना और मजबूत हो जाती है।
रूटीन पसंद करने वाले लोग भी रखते हैं प्लेट साफ
हर दिन की छोटी-छोटी आदतें इंसान के स्वभाव की झलक दिखाती हैं। जो लोग अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित रखना पसंद करते हैं, वे खाने के मामले में भी एक तय तरीका अपनाते हैं। उनके लिए हर भोजन के बाद प्लेट खाली करना एक आरामदायक और परिचित रूटीन बन जाता है।
उनके लिए खाना सिर्फ भोजन नहीं, प्यार और सम्मान भी है
कई संस्कृतियों और भारतीय परिवारों में खाना भावनाओं से जुड़ा होता है। घर में बनाया गया भोजन मेहनत, प्यार और देखभाल का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में प्लेट में खाना छोड़ना कुछ लोगों को अनादर जैसा लग सकता है। उनके लिए हर निवाले को खत्म करना भोजन के प्रति आभार जताने का तरीका होता है।
क्या हमेशा प्लेट साफ करना सही है?
विशेषज्ञों के अनुसार, खाने की कद्र करना अच्छी बात है, लेकिन शरीर के संकेतों को समझना भी जरूरी है। अगर पेट भर चुका है तो सिर्फ आदत या दबाव में खाना जारी रखना सही नहीं माना जाता। बेहतर तरीका यह है कि भोजन का सम्मान भी करें और अपनी भूख व संतुष्टि के संकेतों को भी पहचानें।
निष्कर्ष: साफ प्लेट के पीछे छिपी होती है एक पूरी कहानी
प्लेट में एक भी दाना न छोड़ने की आदत किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व का पक्का प्रमाण नहीं है। इसके पीछे बचपन की सीख, परिवार के संस्कार, संस्कृति और भोजन के प्रति भावनाएं जुड़ी हो सकती हैं। आखिरकार स्वस्थ खाने की आदत वही है जिसमें भोजन की कद्र भी हो और शरीर की जरूरतों को समझने की समझ भी।
AC vs Air Cooler: बारिश के मौसम में AC या एयर कूलर? जानें कौन देगा बेहतर कूलिंग और आराम
India Weather Today: देश के बड़े हिस्से में मॉनसून का बवाली रूप देखने को मिल रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 7 जुलाई को देश के 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए भारी से अत्यंत भारी बारिश और आंधी-तूफान का हाई अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के ताजा विश्लेषण के मुताबिक उत्तरी छत्तीसगढ़ और उससे सटे दक्षिण-पूर्व उत्तर प्रदेश व उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश के ऊपर बना डिप्रेशन अब कमजोर होकर पूर्वी मध्य प्रदेश और उसके आसपास के इलाकों पर एक वेल-मार्कड लो प्रेशर एरिया में बदल चुका है।
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, इससे जुड़ा चक्रवातीय परिसंचरण समुद्र तल से 9.6 किमी ऊपर तक फैला हुआ है। इसके अगले 24 घंटों के दौरान मध्य प्रदेश और उससे सटे दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों में धीरे-धीरे पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने और आगे कमजोर होने की संभावना है। इसके साथ ही दक्षिण गुजरात से उत्तरी केरल तट तक ऑफ-शोर ट्रफ और एक अन्य वेदर सिस्टम (शीयर जोन) भी सक्रिय है, जिससे देश के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश का दौर जारी रहेगा।
देखें मौसम का पूर्वानुमान:

इन 6 राज्यों में अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग ने 7 जुलाई को देश के छह क्षेत्रों के लिए सबसे गंभीर चेतावनी जारी की है। यहां आकाशीय बिजली चमकने के साथ अत्यंत भारी बारिश होने की प्रबल आशंका है:
- तटीय कर्नाटक
- गुजरात राज्य
- कोंकण और गोवा
- मध्य महाराष्ट्र
- विदर्भ (महाराष्ट्र)
- पश्चिमी मध्य प्रदेश
इन इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ कुछ स्थानों पर रिकॉर्ड तोड़ मूसलाधार बारिश होने से जलभराव और नदी-नालों में उफान जैसे हालात बन सकते हैं।
बिहार, एमपी और राजस्थान में होगी बहुत भारी बारिश
मौसम विभाग के अनुसार, देश के मध्य, पूर्वी और पहाड़ी राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है:
बिहार और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम: पूर्वी भारत के इन हिस्सों में मूसलाधार बारिश का दौर जारी रहेगा। बिहार में बारिश के साथ ही 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं और बिजली गिरने की आशंका है।
पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़: लो प्रेशर एरिया के असर की वजह से इन दोनों राज्यों में बहुत भारी बारिश होगी। साथ ही आंधी-तूफान और वज्रपात का अलर्ट रहेगा।
पूर्वी राजस्थान: यहां मॉनसून की सक्रियता के कारण बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।
हिमाचल प्रदेश: उत्तर भारत के इस पहाड़ी राज्य में भारी से बहुत भारी बारिश से भूस्खलन का खतरा बना रहेगा।
मराठवाड़ा (महाराष्ट्र) और आंतरिक कर्नाटक इन दोनों क्षेत्रों के लिए भी भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
अरुणाचल प्रदेश: पूर्वोत्तर के इस राज्य में भी भारी से बहुत भारी बारिश के साथ बिजली कड़कने की चेतावनी है।
दिल्ली-NCR, यूपी और पंजाब समेत इन राज्यों में भारी बारिश और आंधी
मौसम विभाग ने कई मैदानी और पहाड़ी राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश के साथ ही बिजली चमकने और तेज आंधी का डबल अटैक होने का पूर्वानुमान जताया है-
दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़: दिल्ली-NCR और हरियाणा के इलाकों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड: पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट है। पूरे उत्तर प्रदेश में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने के आसार हैं।
पंजाब और पश्चिमी राजस्थान: इन क्षेत्रों में मानसून की सामान्य से भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। राजस्थान में भी 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से धूलभरी आंधी चल सकती है।
जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फराबाद: इन पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के साथ 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली तेज हवाएं और बिजली गिरने की आशंका है।
झारखंड और ओडिशा: चक्रवातीय सिस्टम के प्रभाव से इन राज्यों में भारी बारिश के साथ ही तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटे) और बिजली गिरने की चेतावनी है।
दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत: केरल और माहे, असम और मेघालय, तथा नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने की उम्मीद है। पूर्वोत्तर के राज्यों में बिजली कड़कने का भी अलर्ट है। गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल में भी आंधी-बारिश की चेतावनी है।
कर्नाटक और तेलंगाना में 60 किमी की रफ्तार से थंडरस्कॉल
मौसम विभाग ने दक्षिण भारत के राज्यों के लिए तेज आंधी का विशेष अलर्ट जारी किया है:
कर्नाटक और तेलंगाना: इन दोनों राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाले भयानक आंधी-तूफान आने की आशंका है।
मजबूत सतही हवाएं: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, तटीय कर्नाटक, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना में मजबूत सतही हवाएं चलने का अनुमान है।
समंदर में तूफान: मछुआरों को तटीय इलाकों से दूर रहने की सलाह
अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में मौसम बेहद खराब रहने का अनुमान है। कोंकण और गोवा तट पर 60-70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं, जिनकी रफ्तार बढ़कर 80 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। पश्चिम-मध्य, दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पश्चिम अरब सागर में 45-55 किमी प्रति घंटे (झोंके 65 किमी प्रति घंटे) की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। दक्षिण गुजरात, कर्नाटक, केरल तटों और लक्षद्वीप क्षेत्र में 40-50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे) की गति से तूफानी मौसम रहने के आसार हैं। उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, पश्चिम बंगाल और उत्तरी ओडिशा के तटों पर 45-55 किमी प्रति घंटे (झोंके 65 किमी प्रति घंटे) की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। वहीं उत्तरी आंध्र प्रदेश, ओडिशा तटों, और केंद्रीय बंगाल की खाड़ी में 40-50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे) की रफ्तार से तूफानी मौसम रहने की आशंका है।
मॉनसून की प्रगति
मॉनसून की उत्तरी सीमा (NLM) फिलहाल जामनगर, उदयपुर, अजमेर, झुंझुनू, हिसार और बठिंडा से होकर गुजर रही है। अगले 3 दिनों के भीतर इसके उत्तर अरब सागर, गुजरात के शेष हिस्सों, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं।
Delhi Power Cut: बुधवार, 8 जुलाई को दिल्ली के कई इलकों में बिजली कटौती की समस्या रह सकती है। यह कटौती किसी खराबी की वजह से नहीं, बल्कि जरूरी मेंटेनेंस और सिस्टम अपग्रेड के काम के कारण की जा रही है। दरअसल, BSES राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL) द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार और रखरखाव से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं, जिसके चलते अलग-अलग इलाकों में बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बाधित रहेगी। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे उसी हिसाब से अपने दिन की योजना बनाएं और बिजली कटौती से पहले जरूरी इंतजाम कर लें।
निर्धारित बिजली कटौती इस प्रकार है:
नांगलोई डिवीजन: सुबह 11:07 बजे से दोपहर 2:07 बजे तक डीडीए पार्क, निहाल विहार, अध्यापक नगर और नांगलोई इलाके में बिजली आपूर्ति प्रभावित रह सकती है।
पालम डिवीजन: सुबह 11:00 बजे से 12:30 बजे तक मिर्जापुर महावीर एन्क्लेव और पालम के ब्लॉक-J इलाके में बिजली सप्लाई बंद रहेगी।
जनकपुरी डिवीजन: सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक ब्लॉक G और ब्लॉक J, राजौरी गार्डन में बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है।
जनकपुरी डिवीजन: सुबह 10:07 बजे से दोपहर 12:07 बजे तक ब्लॉक-4 सुभाष नगर और MCD मार्केट अशोक नगर इलाके में बिजली की समस्या रह सकती है।
हौज खास: सुबह 11:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक पॉकेट B, कटवारिया सराय इलाके में बिजली आपूर्ति प्रभावित रह सकती है।
हौज खास: सुबह 11:07 बजे से दोपहर 1:07 बजे तक जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) की तरफ पावर कट की समस्या रह सकती है।
मुंडका डिवीजन: सुबह 10:07 बजे से दोपहर 12:07 बजे तक मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया और मुंडका एक्सटेंशन में बिजली कटौती रहेगी।
मोहन गार्डन डिवीजन: सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक जय भारत एन्क्लेव, भगवती गार्डन और नवादा इलाके में पावर कट रहेगा।
क्या है कारण?
बता दें कि इस समय दिल्ली में भीषण गर्मी के चलते बिजली की खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। ऐसे में सिस्टम को स्थिर रखने और आगे बिना रुकावट सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए यह मेंटेनेंस जरूरी माना जा रहा है।
Delhi Weather Today: पिछले दो सालों में जुलाई के सबसे गर्म दिनों में से एक का सामना करने के बाद, दिल्ली को मंगलवार (7 जुलाई) को काफी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राष्ट्रीय राजधानी में बारिश और आंधी-तूफान का अनुमान लगाया है। इसके लिए मौसम विभाग ने “येलो अलर्ट” जारी किया है, साथ ही कुछ इलाकों में बिजली कड़कने और आंधी-तूफान की संभावना भी जताई है।
IMD के ताजा अनुमान के मुताबिक, मंगलवार को दिल्ली में अधिकतम तापमान लगभग 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है। हालांकि, पिछले दिन की तुलना में तापमान में थोड़ी गिरावट आ सकती है, लेकिन उमस ज्यादा बने रहने की संभावना है, जिससे बारिश होने तक मौसम असहज रहेगा।
दो साल में जुलाई का सबसे गर्म दिन दर्ज
सोमवार का दिन दिल्ली में पिछले दो सालों में सबसे गर्म जुलाई का दिन रहा। हवा में ज्यादा नमी (उमस) होने की वजह से लोगों को महसूस होने वाला तापमान (फील्स लाइक) करीब 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। जिस वजह से शहर भर के लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ा।
दिल्ली में कब तक बारिश होगी?
IMD ने अनुमान लगाया है कि उत्तर भारत में मानसून के मजबूत होने के साथ ही अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रहेगा। सात दिनों के पूर्वानुमान के मुताबिक, 8 जुलाई से 10 जुलाई के बीच आंधी-तूफान के साथ बारिश होने की संभावना है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है।
बता दें कि उत्तर भारत में मानसून की गतिविधियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं, इसलिए आने वाले दिनों में दिल्ली में बार-बार बारिश होने की उम्मीद है। इससे लोगों को गर्मी से तो राहत मिलेगी, लेकिन शहर में जगह-जगह पानी भरने और ट्रैफिक में रुकावट का खतरा भी बढ़ जाएगा।
IMD ने लोगों को सलाह दी है कि वे तूफान के दौरान, खासकर सफर करते समय सतर्क रहें। तेज बारिश के दौरान पानी भरने, कम विजिबिलिटी, ट्रैफिक जाम और कुछ समय के लिए रुकावटें आ सकती हैं। लोगों को यह भी सलाह गई है कि बिजली कड़कने के दौरान पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें और घर से बाहर निकलने से पहले मौसम की आधिकारिक जानकारी जरूर देख लें।
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बारिश के मौसम में मौसम काफी खुशनुमा हो जाता है। वहीं बारिश के मौसम में गर्मी तो कम हो जाती है, लेकिन हवा में नमी बढ़ने से घर के अंदर काफी उमस महसूस होती है। ऐसे में घर को ठंडा रखने के लिए कई लोग नया कूलिंग अप्लायंस खरीदने का सोचते हैं। एयर कंडीशनर (AC) या एयर कूलर में से कौन सा घर के लिए अच्छा होगा, इसे लेकर अक्सर लोगों के मन में उलझन बनी रहती है। अगर आप भी बारिश के दौरान एयर कंडीशनर (AC) या एयर कूलर लेने का सोच रहे तो इनके बीच का अंतर जरुर जाने।
एयर कंडीशनर और एयर कूलर दोनों का काम कमरे को ठंडा करना है, लेकिन दोनों की तकनीक और काम करने का तरीका अलग होता है। इसलिए बारिश के मौसम में कौन-सा उपकरण आपके लिए सही रहेगा, ये आपकी जरूरत और मौसम की स्थिति पर निर्भर करता है।
जानें एसी और कूलर के फायदें
बारिश के मौसम में एयर कंडीशनर (AC) का इस्तेमाल कई मामलों में ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। ये केवल कमरे का तापमान कम नहीं करता, बल्कि हवा में मौजूद अतिरिक्त नमी को भी कम कर देता है। इससे कमरे में उमस घटती है और माहौल ज्यादा ठंडा व आरामदायक महसूस होता है।
वहीं, एयर कूलर गर्म और सूखे मौसम में बेहतर तरीके से काम करता है। यह पानी की मदद से हवा को ठंडा करता है। लेकिन बारिश के मौसम में हवा में पहले से ही नमी अधिक होती है, इसलिए कूलर की ठंडक उतनी असरदार नहीं रहती और कमरे में उमस भी बढ़ सकती है।
उमस भरी गर्मी में कौन सा बेहतर
बारिश के दिनों में एयर कूलर कई बार कमरे को आरामदायक बनाने के बजाय उमस और बढ़ा सकता है। इसलिए ऐसे मौसम में एयर कंडीशनर (AC) अधिक बेहतर विकल्प माना जाता है। एयर कूलर पानी से भीगे कूलिंग पैड के जरिए हवा को ठंडा करता है और यह तरीका तब सबसे अच्छा काम करता है, जब मौसम गर्म और सूखा हो। लेकिन हवा में नमी ज्यादा होने पर इसकी ठंडक का असर काफी कम हो जाता है।
बारिश के मौसम में हवा में नमी पहले से ही अधिक होती है, इसलिए एयर कूलर ठीक तरह से ठंडक नहीं दे पाता। इसके विपरीत, एयर कंडीशनर (AC) कमरे का तापमान कम करने के साथ-साथ हवा से अतिरिक्त नमी भी हटाता है। इससे कमरा ठंडा, सूखा और ज्यादा आरामदायक बना रहता है। यही वजह है कि मानसून के दौरान ज्यादातर लोग एयर कूलर की बजाय AC को बेहतर विकल्प मानते हैं।
IND vs ENG: भारत और इंग्लैंड के बीच 5 मैचों की टी20 सीरीज में अबतक कुल 2 मुकाबले खेला जा चुके हैं। पहला मुकाबला बारिश की वजह से रद्द हो गया वहीं दूसरे मैच में भारत को 4 विकेट से मात मिली है। इस जीत के साथ इंग्लैंड की टीम 1-0 की बढ़त बना ली है। वहीं अब 7 जुलाई को नॉटिंघम के ट्रेंट ब्रिज में भारतीय टीम इंग्लैंड से तीसरे मुकाबले में भिड़ेगी। वहीं इससे पहले आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों की टी20 सीरीज में भारतीय टीम 2-0 से हार गई थी। इसके बाद भारतीय टीम की काफी आलोचना हो रही थी। वहीं इस पर अब भारतीय टीम के बल्लेबाजी कोच सीतांशु कोटक ने रिएक्शन दिया है।
भारतीय टीम के बल्लेबाजी कोच सीतांशु कोटक ने कहा कि, कुछ हार के बाद टीम की आलोचना करना सही नहीं है, क्योंकि लोग 2024 से 2026 के बीच टीम के शानदार प्रदर्शन को भूल रहे हैं।
कोच ने क्या कहा
कोटक ने इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टी20 मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “देखिए, हमारा टारगेट बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में लगातार सुधार करना है। पिछले वर्ल्ड कप के बाद हम टीम को अगले स्तर तक ले जाना चाहते हैं, क्योंकि दूसरी टीमें भी लगातार बेहतर हो रही हैं। हम सिर्फ एक मैच को देखकर फैसले नहीं लेते। कई बार आप एक मैच जीतते हैं तो लोग तारीफ करते हैं, लेकिन अगले ही मैच में हार जाएं या दो कैच छूट जाएं तो वही लोग कहते हैं कि टीम की फील्डिंग खराब है।”
2 साल से लगातार जीत रहे सीरीज
कोच ने आगे कहा, “पिछले दो साल में हमने एक भी सीरीज नहीं गंवाई, वर्ल्ड कप जीता, एशिया कप जीता और तब सभी ने हमारी तारीफ की। अब दो मैच हारने के बाद लोग कह रहे हैं कि टीम लगातार हार रही है। आखिर यह भी खेल का ही हिस्सा है। हमारी टीम में कई बदलाव हुए हैं। कप्तान बदला है, हार्दिक यहां नहीं हैं और हम अगले दो साल को ध्यान में रखते हुए नए खिलाड़ियों को मौका दे रहे हैं। ऐसा होना आदर्श नहीं है, लेकिन ऐसी परिस्थितियां खेल का हिस्सा होती हैं। कुछ कमियां जरूर हैं, लेकिन हमें पता है कि अगर अगला वर्ल्ड कप जीतना है, तो हमें पिछले वर्ल्ड कप से भी बेहतर प्रदर्शन करना होगा।” गौतम गंभीर की कोचिंग में भारतीय टीम को तेज और उछाल वाली पिचों पर अच्छा प्रदर्शन करने में दिक्कत हुई है।
भारत के पहले मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर प्रोजेक्ट ने एक और बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। देश के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में आगे बढ़ते हुए इस प्रोजेक्ट के तहत मुंबई में अंडरग्राउंड टनलिंग (भूमिगत सुरंग बनाने) का काम आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है। एचटी के मुताबिक 5 जुलाई को देश की सबसे बड़ी रेलवे टनल बोरिंग मशीन (TBM) ने विक्रोली से बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्टेशन की तरफ जमीन को चीरते हुए अपनी यात्रा शुरू कर दी है। इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने के लिए एक औपचारिक लॉन्च कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।
इसकी अध्यक्षता केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव करने वाले थे। मुंबई में मूसलाधार बारिश के चलते जारी किए गए ‘रेड अलर्ट’ के कारण इस औपचारिक कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा लेकिन मशीन ने तय समय पर सुरंग बनाने का अपना काम शुरू कर दिया।
13.6 मीटर व्यास वाली देश की सबसे बड़ी रेलवे TBM
सुरंग बनाने के इस बेहद जटिल काम में 13.6 मीटर व्यास वाली एक विशाल मिक्सशील्ड टीबीएम का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह भारत में किसी भी रेलवे टनलिंग प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल की जाने वाली अब तक की सबसे बड़ी टनल बोरिंग मशीनों में से एक है। इस महाकाय मशीन का कुल वजन लगभग 3100 टन है और इसकी लंबाई 96 मीटर है। यह मशीन एक 6 किलोमीटर लंबी सिंगल-ट्यूब सुरंग खोदेगी। इसके भीतर से ही बुलेट ट्रेन की अप और डाउन दोनों लाइनें गुजरेंगी। यह टनल बुलेट ट्रेन रूट के मुंबई में बनाए कुल 21 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड सेक्शन का हिस्सा है।
जमीन से 56 मीटर नीचे से हुआ लॉन्च, दो तकनीकों का हो रहा इस्तेमाल
रेलवे अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक इस 21 किलोमीटर लंबे भूमिगत खंड में से 16 किलोमीटर का हिस्सा घनसोली के सांवली से लेकर बीकेसी) के बीच का है। इसे टनल बोरिंग मशीनों के जरिए खोदा जा रहा है। बाकी 5 किलोमीटर का हिस्सा न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड तकनीक के जरिए पहले ही सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। इस नई टीबीएम को विक्रोली में जमीन की सतह से 56 मीटर नीचे बनाए गए एक विशाल शाफ्ट से लॉन्च किया गया है। इसने अब बीकेसी की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया है।
क्या है मिक्सशील्ड तकनीक और इसकी खासियतें?
इस प्रोजेक्ट में इस्तेमाल की जा रही मिक्सशील्ड टेक्नोलॉजी को विशेष रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के लिए डिजाइन किया गया है। यह तकनीक मिश्रित मिट्टी की स्थिति और उन इलाकों में जहां भूजल का दबाव बहुत अधिक होता है, वहां पूरी सुरक्षा के साथ काम करने में सक्षम है। टनलिंग के दौरान जमीन धंसने या जमीन के ऊपर होने वाली हलचल और व्यवधान को यह तकनीक बिल्कुल न्यूनतम रखती है। इस मशीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक तरफ सुरंग की खुदाई करती जाती है और साथ ही साथ प्रीकास्ट कंक्रीट लाइनिंग सेगमेंट्स को अपनी जगह पर फिट भी करती जाती है। इससे निर्माण की गति काफी तेज हो जाती है और सुरक्षा के मानक भी बेहतर होते हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और महापे में बना कास्टिंग यार्ड
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने इस पूरे प्रोजेक्ट को सपोर्ट करने के लिए विक्रोली में 56 मीटर गहरा लॉन्च शाफ्ट तैयार किया है। इसके साथ ही वहां स्लरी और वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, एक समर्पित पावर सबस्टेशन और अन्य आवश्यक सहायक बुनियादी ढांचे का निर्माण किया गया है। सुरंग की खुदाई के दौरान आसपास की इमारतों को कोई नुकसान न पहुंचे, इसके लिए बेहद संवेदनशील निगरानी उपकरण लगाए गए हैं। इनमें सेटलमेंट मार्कर्स, टिल्ट मीटर्स, सीस्मोग्राफ और 3D मॉनिटरिंग टारगेट शामिल हैं, जो पल-पल की रिपोर्ट दर्ज कर रहे हैं। सुरंग की दीवारों को मजबूती देने के लिए जरूरी करीब 77000 प्रीकास्ट कंक्रीट सेगमेंट्स का निर्माण करने के लिए महापे में 11.17 हेक्टेयर का एक विशाल कास्टिंग यार्ड स्थापित किया गया है।
क्या है इस टनलिंग प्रोजेक्ट की डेडलाइन?
रेलवे अधिकारियों द्वारा दी गई समयसीमा के अनुसार, इस अंडरग्राउंड प्रोजेक्ट को दो अलग-अलग चरणों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। विक्रोली से बीकेसी साल 2027 की शुरुआत तक और विक्रोली से घनसोली को मार्च 2028 तक पूरा किया जाएगा।
India Weather Update for 7th July: देश के बड़े हिस्से में दक्षिण-पश्चिम मानसून का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 7 जुलाई के लिए देश के 20 से अधिक राज्यों में भारी से अत्यंत भारी बारिश और भीषण आंधी-तूफान का ऑरेंज और रेड वॉच अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक दक्षिण झारखंड और उससे सटे उत्तरी आंतरिक ओडिशा के ऊपर बना डिप्रेशन 25 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ गया है। इससे बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में बवाली मौसम के आसार बन गए हैं।
यह डिप्रेशन अगले 24 घंटों के दौरान झारखंड, उत्तरी छत्तीसगढ़ और उससे सटे पूर्वी उत्तर प्रदेश व पूर्वी मध्य प्रदेश के इलाकों को प्रभावित करेगा। इसके साथ ही दक्षिण गुजरात से उत्तरी केरल तट तक ऑफ-शोर ट्रफ और एक अन्य वेदर सिस्टम (शीयर जोन) भी सक्रिय है, जिसके कारण अगले 3 दिनों तक देश के मध्य हिस्सों में मॉनसून बेहद एक्टिव फेज (सक्रिय चरण) में रहेगा।
रेड जोन जैसे हालात: इन 4 राज्यों में अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग ने 7 जुलाई को देश के चार प्रमुख क्षेत्रों के लिए सबसे गंभीर चेतावनी जारी की है। यहां मूसलाधार बारिश से हालात बिगड़ सकते हैं:-
तटीय कर्नाटक
गुजरात राज्य
कोंकण और गोवा
मध्य महाराष्ट्र
इन सभी इलाकों में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ अत्यंत भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। कोंकण, गोवा, गुजरात और तटीय कर्नाटक में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच यह अलर्ट बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
बिहार से मध्य प्रदेश तक बहुत भारी बारिश
7 जुलाई को मध्य, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में बवाली मौसम का असर दिखेगा। मौसम विभाग ने नीचे दिए गए राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है:-
बिहार और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम: यहां मानसून की मूसलाधार बारिश के साथ बिजली कड़कने और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है।
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ (महाराष्ट्र): इन क्षेत्रों में डिप्रेशन के असर से बहुत भारी बारिश होगी। साथ ही इन राज्यों में आंधी-तूफान के साथ बिजली गिरने की भी चेतावनी है।
आंतरिक कर्नाटक: तटीय इलाकों के साथ-साथ कर्नाटक के अंदरूनी हिस्सों में भी भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की जा रखी है।
हिमाचल प्रदेश और पूर्वी राजस्थान: उत्तर-पश्चिम भारत के इन दोनों पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में भी 7 जुलाई को बहुत भारी बारिश की संभावना है।
अरुणाचल प्रदेश: पूर्वोत्तर के इस राज्य में भी भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहेगा जिससे वज्रपात की भी आशंका है।
येलो अलर्ट: दिल्ली-NCR, यूपी समेत इन राज्यों में भारी बारिश और आंधी का डबल अटैक
मौसम विभाग के मुताबिक देश के कई राज्यों में 7 जुलाई को भारी बारिश के साथ तेज रफ्तार आंधी और बिजली गिरने का डबल अटैक देखने को मिलेगा:-
दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़: राजधानी दिल्ली समेत आसपास के इलाकों में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड: पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में कुछ जगहों पर भारी बारिश का अलर्ट है। पूरे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और यूपी में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने का अनुमान है।
पंजाब और राजस्थान: पंजाब और पश्चिमी राजस्थान में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। राजस्थान में भी 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने का अनुमान है।
जम्मू-कश्मीर-लद्दाख: इन पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के साथ 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली तेज हवाएं और बिजली गिरने की आशंका है।
झारखंड और ओडिशा: चक्रवातीय सिस्टम के प्रभाव से इन दोनों राज्यों में भारी बारिश के साथ ही 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं और बिजली गिरने का अलर्ट रहेगा।
दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत: केरल और माहे, असम और मेघालय, तथा नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश और बिजली चमकने के आसार हैं। गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल में भी भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी है।
कर्नाटक और तेलंगाना में 60 किमी की रफ्तार से थंडरस्कॉल
मौसम विभाग ने दक्षिण भारत के दो राज्यों के लिए विशेष अलर्ट जारी किया है:-
कर्नाटक और तेलंगाना: इन दोनों राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाले भयानक आंधी-तूफान की संभावना है जिसकी रफ्तार बढ़कर 70 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
मजबूत सतही हवाएं: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, तटीय कर्नाटक, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना में मजबूत सतही हवाएं भी चलेंगी।
मछुआरों के लिए चेतावनी: अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में उठेगा तूफान
समुद्र में बेहद खराब मौसम और तेज हवाओं को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है:-
उत्तरी कोंकण तट और अरब सागर: उत्तरी कोंकण तट और उससे सटे पूर्व-मध्य व पश्चिम-मध्य अरब सागर में 60-70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाएं चल सकती हैं। इनकी रफ्तार 80 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
दक्षिण कोंकण, गोवा तट: यहां 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी जो बढ़कर 70 किमी प्रति घंटे तक जा सकती हैं।
गुजरात, कर्नाटक और केरल तट: दक्षिण गुजरात, कर्नाटक, केरल तटों और लक्षद्वीप क्षेत्र में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाएं (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) दर्ज की जा सकती हैं।
बंगाल की खाड़ी: ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटों के साथ-साथ मध्य, उत्तरी और दक्षिणी बंगाल की खाड़ी में 40-50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे) की रफ्तार से तूफानी मौसम रहने की आशंका है।

मॉनसून की स्थिति
मॉनसून की उत्तरी सीमा (NLM) फिलहाल जामनगर, उदयपुर, अजमेर, झुंझुनू, हिसार और बठिंडा से होकर गुजर रही है। अगले 3 दिनों के भीतर इसके उत्तर अरब सागर, गुजरात के शेष हिस्सों, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं।

