सोने के भाव में आया बड़ा ट्विस्ट! अमेरिका-ईरान तनाव और फेड रेट के फेर में फंसा गोल्ड, आगे की चाल पर एक्सपर्ट्स ने ये कहा

Gold Prices Outlook: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच जारी युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण सोने की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। एक तरफ जहां वैश्विक अनिश्चितता के समय सोने को हमेशा ‘सुरक्षित निवेश’ माना जाता है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की आशंका ने इसकी रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।

टाटा म्यूचुअल फंड और Augmont के एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा गिरावट निवेशकों के लिए खरीदारी का एक शानदार मौका साबित हो सकती है। आइए समझते हैं कि सोने की कीमतों में गिरावट की असली वजह क्या है और आगे इसकी चाल कैसी रहेगी।

क्यों दबाव में हैं सोने की कीमतें? समझें बड़ी वजहें

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए शांति समझौते (MOU) को ‘खत्म’ घोषित कर दिया, जिससे तनाव चरम पर पहुंच गया। इसके बाद ईरान ने भी बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले का दावा किया। इन घटनाक्रमों के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 5% से ज्यादा उछल गईं, जिससे ग्लोबल लेवल पर महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

ब्याज दरों का सोने पर सीधा असर

जब महंगाई बढ़ती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को ऊंचा रखने या उन्हें और बढ़ाने की संभावना बढ़ जाती है। चूंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता, इसलिए ब्याज दरें बढ़ने पर निवेशक सोने के बजाय बॉन्ड्स जैसे ब्याज देने वाले एसेट्स में पैसा लगाना पसंद करते हैं। यही वजह है कि डॉलर की मजबूती और हाई बॉन्ड यील्ड के कारण सोने की कीमतें फिलहाल दबाव में हैं।

US Fed का अगला कदम रहेगा सबसे बड़ा ट्रिगर

ऑगमोंट की रिसर्च हेड डॉ. रेनिशा चैनानी के मुताबिक, अमेरिकी फेड की मीटिंग के मिनट्स से साफ है कि समिति के सदस्य आर्थिक दृष्टिकोण को लेकर बंटे हुए हैं। हालांकि फिलहाल दरों को स्थिर रखने पर सहमति है, लेकिन कुछ सदस्य दरें बढ़ाने के पक्ष में हैं।

CME फेडवॉच टूल के अनुसार, बाजार अब सितंबर में ब्याज दर बढ़ोतरी की 68% संभावना और जनवरी 2027 तक बढ़ोतरी की 87% संभावना मानकर चल रहा है। इन उम्मीदों से डॉलर मजबूत हो रहा है, जो शॉर्ट-टर्म में सोने के लिए नकारात्मक है।

क्या हैं सोने के नए टार्गेट?

डॉ. रेनिशा चैनानी के अनुसार, सोने ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना $4,080 का टार्गेट हासिल कर लिया है। अब आगे की चाल मिडिल ईस्ट के हालातों पर निर्भर करेगी:

तेजी का परिदृश्य: अगर सोना $4,090, भारतीय बाजार में लगभग ₹144000 के ऊपर टिका रहता है, तो यह $4,160 यानी ₹147000 की तरफ बढ़ सकता है।

मंदी का परिदृश्य: अगर कीमतें फिसलकर $4,040 (₹1,43,000) के नीचे आती हैं, तो गिरावट बढ़कर $3,950 (₹1,41,000) के स्तर तक जा सकती है।

भारतीय निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?

भारतीय निवेशकों के लिए एक राहत की बात यह है कि डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी घरेलू बाजार में सोने की गिरावट को रोकने में मदद करेगी। रुपया कमजोर होने से आयातित सोना महंगा हो जाता है, जिससे स्थानीय कीमतों को सपोर्ट मिलता है।

टाटा म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही शॉर्ट-टर्म में उतार-चढ़ाव बना रहे, लेकिन लंबी अवधि के लिए सोने का आउटलुक बेहद पॉजिटिव है। फंड हाउस ने सलाह दी है कि ‘निवेशकों को हर गिरावट पर सोना खरीदना चाहिए।’ शॉर्ट-टर्म के उतार-चढ़ाव से पैनिक होने के बजाय, इस करेक्शन को धीरे-धीरे अपने पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाने के मौके के रूप में देखना चाहिए।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल पर विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त किए गए विचार और निवेश टिप्स उनके अपने हैं, वेबसाइट या उसके प्रबंधन के नहीं। मनीकंट्रोल यूजर्स को सलाह देता है कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स से जांच कर लें।

Market cues : 23800 का सपोर्ट टूटने पर निफ्टी में बढ़ सकती है गिरावट, ऊपर की तरफ 24000 पर होगा पहला रेजिस्टेंस

Trade setup for today : 8 जुलाई को कारोबार के आखिरी दौर में निफ्टी पर जबरदस्त बिकवाली का दबाव दिखा और यह 2 प्रतिशत से ज्यादा गिर गया। इसकी वजह तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिका-ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव के कारण इंडिया VIX में आई तेजी थी। टेक्निकल इंडिकेटर भी मंदी की ओर इशारा कर रहे थे। इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे आ गया और मोमेंटम इंडिकेटर में’बेयरिश क्रॉसओवर’देखने को मिला।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर निफ्टी 23800 के सपोर्ट लेवल को तोड़ता है तो करेक्शन का दौर शुरू होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। 23,800 के नीचे,23,600-23,500 का जोन अहम होगा जिस पर नजर रखनी होगी। ऊपर की तरफ 24,000 का लेवल तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है, और उसके बाद 24,200 का लेवल अगला अहम रेजिस्टेंस होगा।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 23,807, 23,690 और 23,501

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,185, 24,302 और 24,491

निफ्टी 50 ने डेली चार्ट पर एक लंबी बेयरिश कैंडल बनाई,जिससे इंडेक्स दो हफ्ते के निचले स्तर पर आ गया। एक ही सेशन में यह सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे गिर गया,जो यह संकेत देता है कि मंदड़ियों ने अपनी पकड़ मज़बूत कर ली है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) गिरकर 48.51 पर आ गया और इसमें बेयरिश क्रॉसओवर देखा गया,जबकि MACD लाइन के नीचे की ओर मुड़ने से MACD हिस्टोग्राम का हरा बार छोटा हो गया। ये सभी संकेत बेयरिश मोमेंटम के मजबूत होने का इशारा करते हैं।

बैंक निफ्टी

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 57,706, 58,066 और 58,649

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 56,540, 56,179 और 55,596

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 57,215, 59,195

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 56,465, 55,764

बैंक निफ्टी में 2.5 प्रतिशत की गिरावट आई और डेली टाइमफ्रेम पर एक लंबी’बेयरिश कैंडल’बनी। यह अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे आ गया है और ये सभी एवरेज नीचे की ओर झुक गए हैं,जो काफी कमजोरी का संकेत है। हालांकि,इंडेक्स अपने मीडियम और लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर बना हुआ है,जो जबरदस्त बिकवाली के दबाव के बावजूद एक पॉजिटिव संकेत है। इंडेक्स हाल की तेज़ी के 23.6 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट लेवल से भी नीचे आ गया। RSI गिरकर 48.51 पर आ गया,जबकि MACD में बेयरिश क्रॉसओवर देखा गया और साथ ही हिस्टोग्राम की लाल बार्स का दायरा भी बढ़ा। ये सभी संकेत नीचे की ओर बढ़ते मोमेंटम की ओर इशारा करते हैं।

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एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

8 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार चौथे सेशन में खरीदारी जारी रखी और 1,962 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर खरीदे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी एक दिन की बिकवाली के बाद खरीदारी की और 790 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

इंडिया VIX

मार्केट में उतार-चढ़ाव की उम्मीद को मापने वाला इंडिया VIX 26.04% बढ़कर 14.68 पर पहुंच गया। यह अप्रैल 2025 के बाद से इसमें एक दिन में हुई सबसे बड़ी बढ़त है। साथ ही,यह अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर चला गया है,जो तेजड़ियों के लिए चिंता का संकेत है। अगर यह 16 के लेवल से ऊपर जाता है,तो बुल्स पर दबाव और बढ़ सकता है।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 8 जुलाई को पिछले सेशन के 1.08 से गिरकर 0.81 पर आ गया। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक:कोई नहीं

 

 

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Stock Market Crash: ट्रंप के बयान से तबाही! सिर्फ 40 मिनट में सेंसेक्स 1000 अंक टूटा; अब तीन फैक्टर पर मार्केट की नजर

Stock Market Crash: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने बुधवार को दुनिया भर के बाजारों में भारी गिरावट (why market is down today) ला दी। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ हुआ सीजफायर अब खत्म हो चुका है। इसके बाद भारतीय शेयर बाजार में भी जोरदार बिकवाली शुरू हो गई। महज 40 मिनट में सेंसेक्स 1,000 अंक से ज्यादा टूट गया। वहीं, बाजार में डर का पैमाना माने जाने वाला India VIX 27% उछल गया।

दोपहर 1:40 बजे सेंसेक्स 77,603.90 पर कारोबार कर रहा था। अगले 40 मिनट में यह करीब 1,076 अंक लुढ़ककर 76,527.81 पर आ गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,677.12 अंक यानी 2.15% टूटकर 76,503.60 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 516.65 अंक यानी 2.12% गिरकर 23,882.05 पर बंद हुआ। बाजार में चौतरफा बिकवाली रही। करीब 3,095 शेयर गिरे, जबकि सिर्फ 1,000 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए।

ट्रंप ने ईरान सीजफायर पर क्या कहा?

ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ अंतरिम शांति समझौता अब खत्म हो चुका है। उन्होंने साफ कहा कि अब वह ईरान के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहते। उन्होंने ईरानी नेताओं पर भी तीखा हमला बोला। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार हुए, तो वह उनका इस्तेमाल करने से नहीं हिचकेगा।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उनके प्रतिनिधि ईरान से बातचीत जारी रखेंगे। लेकिन उन्हें नहीं लगता कि उससे कोई नतीजा निकलेगा।

तनाव अचानक क्यों बढ़ गया?

ट्रंप का बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका ने ईरान पर फिर से हवाई हमले किए हैं। साथ ही अमेरिका ने वह छूट भी खत्म कर दी है, जिसके तहत ईरान वैश्विक बाजार में तेल बेच रहा था।

इसके जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान ने एक अमेरिकी MQ-9 Reaper ड्रोन मार गिराने का भी दावा किया है।

इसके बाद बहरीन और कुवैत में एयर रेड सायरन बजने लगे। कुवैत की सेना ने कहा कि उसकी एयर डिफेंस सिस्टम दुश्मन के हमलों का जवाब दे रही है। हालांकि, अमेरिकी सेना की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

बाजार गिरने के अन्य 6 बड़े वजह

कच्चे तेल में तेज उछाल: अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड 6% उछलकर 76 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए महंगा तेल बाजार के लिए चिंता की बात है।

FII निवेश पर अनिश्चितता: Geojit Investments के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी.के. विजयकुमार के मुताबिक, हाल में FII की खरीदारी से बाजार मजबूत हो रहा था। लेकिन अमेरिका-ईरान तनाव ने इस सकारात्मक माहौल पर फिलहाल सवाल खड़े कर दिए हैं।

FII खरीदारी बनी हुई है: पिछले तीन कारोबारी सत्र में FIIs ने करीब 1,991 करोड़ रुपये की खरीदारी की है। हालांकि रकम बड़ी नहीं है, लेकिन लगातार खरीदारी को बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

टेक्निकल संकेत अभी कमजोर: SBI Securities के सुदीप शाह के मुताबिक, निफ्टी के लिए 24,120-24,140 का स्तर अहम सपोर्ट है। अगर यह टूटता है, तो अगला सपोर्ट 23,970-23,990 के बीच होगा। वहीं 24,370-24,390 के ऊपर निकलने पर तेजी फिर लौट सकती है।

ज्यादातर सेक्टरों में बिकवाली: फाइनेंशियल सर्विसेज, FMCG, ऑटो और हेल्थकेयर सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। इससे बाजार की गिरावट और बढ़ गई।

बड़े शेयरों में भारी कमजोरी: मारुति सुजुकी में 3% से ज्यादा गिरावट आई। इसके अलावा IndiGo, Hindustan Unilever, UltraTech Cement और Bharat Electronics जैसे हैवीवेट शेयर भी दबाव में रहे।

India VIX में तेज उछाल: बाजार में डर का पैमाना माने जाने वाला India VIX इंट्राडे कारोबार में 23% से ज्यादा उछलकर 14.33 पर पहुंच गया। VIX में तेज बढ़त आमतौर पर आने वाले दिनों में ज्यादा उतार-चढ़ाव का संकेत देती है।

बाजार में गिरावट पर एक्सपर्ट की राय

Geojit Investments के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि पश्चिम एशिया में फिर बढ़े तनाव ने भारतीय शेयर बाजार का माहौल पूरी तरह बदल दिया। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से महंगाई की चिंता फिर बढ़ गई है। इसका असर भारत और अमेरिका दोनों देशों के बॉन्ड यील्ड पर भी देखने को मिला।

उनके मुताबिक, India VIX में तेज उछाल यह दिखाता है कि निवेशकों के बीच डर बढ़ गया है। यही वजह रही कि लगभग सभी सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली। इसके साथ ही पहली तिमाही (Q1) के कमजोर नतीजों की आशंका ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया।

तीन फैक्टर तय करेंगे बाजार की चाल

विनोद नायर का कहना है कि सिर्फ कंपनियों के नतीजे ही बाजार की दिशा तय नहीं करेंगे। निवेशकों की नजर मैनेजमेंट की कमेंट्री और भविष्य ग्रोथके आउटलुक पर भी रहेगी। इससे पता चलेगा कि कमाई में कमजोरी दूसरी तिमाही (Q2) तक बनी रहती है या नहीं।

उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में बाजार की चाल तीन बड़े फैक्टर्स पर निर्भर करेगी। पहला, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की जुलाई की मौद्रिक नीति। दूसरा, अमेरिका के रेसिप्रोकल टैरिफ ट्रूस की अवधि खत्म होने का असर। और तीसरा, पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है या कम होता है, क्योंकि यही आगे बाजार की दिशा तय करेगा।

ट्रंप ने खत्म किया सीजफायर! अब तेल, सोना और चांदी पर क्या होगा असर; जानिए एक्सपर्ट्स से

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24 घंटे में तीन टैंकरों पर अटैक…होर्मुज में फिर टेंशन, अमेरिका-ईरान तनाव के बीच आई बड़ी खबर

मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव का माहौल गहराता जा रहा है। पिछले 24 घंटों के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में तीसरे कॉमर्शियल जहाज पर हमला किया गया है। इस घटना के बाद इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता फिर बढ़ गई है। यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है। हालांकि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रखने और सीजफायर पर सहमति बनी हुई है।

बीते 24 घंटे में तीसरे जहाज पर हमला 

ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूकेएमटीओ के मुताबिक, ताजा घटना में एक तेल टैंकर पर किसी अज्ञात वस्तु से हमला किया गया। राहत की बात यह है कि इस हमले में किसी के घायल होने या जहाज को बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है। फिर भी इस घटना ने इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इससे पहले मंगलवार को भी दो अलग-अलग हमले हुए थे। इनमें कतर के तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) ले जाने वाले जहाज पर हमला और सऊदी अरब के झंडे वाले कच्चा तेल ले जा रहे टैंकर को नुकसान पहुंचने की घटना शामिल है।

होर्मुज में तीसरे टैंकर पर हमला

ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूकेएमटीओ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक और तेल टैंकर पर हमला हुआ है। एजेंसी के अनुसार, किसी अज्ञात वस्तु के टकराने से जहाज को नुकसान पहुंचा है। यूकेएमटीओ ने बताया कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक टैंकर की संरचना को नुकसान हुआ है। हालांकि राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है और न ही फिलहाल तेल रिसाव या समुद्री प्रदूषण के कोई संकेत मिले हैं। एजेंसी ने कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। साथ ही होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी जहाजों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने की सलाह दी गई है।

बता दें कि, इससे पहले होर्मुज की ताजा घटना से कुछ घंटे पहले कतर ने ईरान पर अपने एलएनजी ले जा रहे जहाज अल रेकय्यात पर हमला करने का आरोप लगाया था। यह जहाज रात के समय होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहा था। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, जहाज की ओर से बताया गया कि उस पर ड्रोन से हमला किया गया, जिससे इंजन वाले हिस्से में आग लग गई। हालांकि सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित रहे और उन्हें बाहर निकालने का काम तुरंत शुरू कर दिया गया।

दिल्ली में सोना 1400 रुपये गिरा, चांदी में भी कमजोरी

दिल्ली सर्राफा बाजार में 7 जुलाई को सोने में गिरावट आई। यह 1,400 रुपये गिरकर 1.49 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी में भी 200 रुपये की गिरावट आई। विदेश में सोने और चांदी में कमजोरी का असर घरेलू बाजार पर पड़ा। 6 जुलाई को दिल्ली में सोने का भाव 1,50,650 रुपये प्रति 10 ग्राम पर क्लोज हुआ था।

लगातार दूसरे दिन सोने में नरमी

चांदी 7 जुलाई को दिल्ली सर्राफा बाजार में 200 रुपये गिरकर 2.40 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रही। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में कमोडिटी के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा, “गोल्ड की कीमतों में मंगलवार को कमजोरी जारी रही। इनवेस्टर्स फेडरल रिजर्व की जून की मीटिंग के मिनट्स जारी होने से पहले सावधानी बरत रहे हैं।”

फेड के मिनट्स पर लगी निगाहें

उन्होंने कहा कि अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत के दूसरे दौर के नतीजों से गोल्ड की कीमतों को दिशा मिल सकती है। एनालिस्ट्स का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती का भी असर सोने की कीमतों पर पड़ा।

विदेश में भी सोने और चांदी में गिरावट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.59 फीसदी गिरकर 4,140.59 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। सिल्वर 2 फीसदी गिरकर 60.89 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। मिरै एसेट शेयरखान में कमोडिटीज के हेड प्रवीण सिंह ने कहा कि क्रूड की कीमतों में हल्की तेजी से विदेश में स्पॉट गोल्ड में नरमी है।

शॉर्ट टर्म में सीमित दायरे में रह सकती हैं कीमतें

उन्होंने कहा कि सोने और चांदी की कीमतें शॉर्ट टर्म में सीमित दायरे में बनी रह सकती हैं। हालांकि, अगर पश्चिम एशिया में जियोपॉलिटिकल टेंशन कम होता है तो बुलियन की कीमतों पर पॉजिटिव असर दिख सकता है। इस साल 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद सोने और चांदी की कीमतों पर दवाब दिखा था।

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2025 में सोने ने दिया था 70 फीसदी रिटर्न 

इस साल जनवरी के आखिर में सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं। उसके बाद उनमें तेज गिरावट आई। अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई ने बुलियन की कीमतों पर दबाव और बढ़ा दिया। 2025 में सोने ने निवेशकों को बहुत अच्छा रिटर्न दिया था। इससे पहले के कुछ सालों में भी सोने का रिटर्न पॉजिटिव रहा था। लेकिन, इस साल सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव दिख रहा है।

Gold Silver Rates Today: देश और विदेश में गोल्ड और सिल्वर में गिरावट, एक दिन में चांदी 5000 रुपये फिसली

Gold Silver Rates Today: देश और विदेश में 7 जुलाई को सोने और चांदी में गिरावट आई। सोना लगातार दूसरे दिन फिसला। विदेश में स्पॉट गोल्ड 0.8 फीसदी गिरकर 4,129.90 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। चांदी में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। स्पॉट सिल्वर 1.9 फीसदी गिरकर 60.93 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। पिछले हफ्ते सोने में अच्छी तेजी दिखी थी। यह 2 फीसदी से ज्यादा चढ़ा था। लेकिन, यह हफ्ता सोने के लिए अब तक कमजोर रहा है।

गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में गिरावट 

भारत में भी गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में कमजोरी दिखी। कमोडिटी एक्सचेंज MCX में गोल्ड फ्यूचर्स 1.07 फीसदी यानी 1,567 रुपये गिरकर 1,45,350 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। सिल्वर फ्यूचर्स 2.16 फीसदी यानी 5,096 रुपये गिरकर 2,30,979 रुपये प्रति किलो पर आ गया। सोने ने 2025 में 70 फीसदी रिटर्न दिया था।

डॉलर इंडेक्स में मजबूती का सोने पर असर

सोने में गिरावट की वजह डॉलर में मजबूती है। डॉलर इंडेक्स 0.10 फीसदी चढ़ा। डॉलर मजबूत होने से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिसका असर सोने पर पड़ता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि 7 जुलाई को आई गिरावट की वजह पिछले हफ्ते की तेजी के बाद कंसॉलिडेशन है।

इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर घटेगी गोल्ड की चमक

ट्रेडर्स को अमेरिकी केंद्रीय बैंक की बैठक के मिनट्स का इंतजार है। यह 8 जुलाई को आएगा। इससे पता चलेगा कि इनफ्लेशन के बारे में फेडरल रिजर्व की क्या सोच है। निवेशकों को अब सितंबर में इंटरेस्ट रेट बढ़ने का 56 फीसदी अनुमान है। अगर फेड इंटरेस्ट रेट बढ़ाता है तो इसका निगेटिव असर सोने की कीमतों पर पड़ेगा। इंटरेस्ट रेट में कमी आने पर सोने की चमक बढ़ती है। इसके उलट इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर सोने की चमक घटती है।

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सोना रिकॉर्ड ऊंचाई से 30 फीसदी फिसला

इस साल की शुरुआत में सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थी। उसके बाद उनमें तेज गिरावट देखने को मिली। 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद सोने और चांदी पर दबाव बढ़ गया। सोना अपने पीस से करीब 30 फीसदी गिर चुका है। जून में सोने में करीब 14 फीसदी की गिरावट आई थी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोने में तेजी टिक नहीं पा रही है। यही हाल चांदी का है। कुछ समय तक बुलियन कंसॉलिडेशन फेज में रह सकते हैं।

Stock Market Crash: डे-हाई से Sensex में 350 अंकों की गिरावट, 4 वजहों से Nifty आया 24450 के नीचे

Stock Market Crash: निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन आज मार्केट में शुरुआती कारोबार में अच्छी रौनक दिखी। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज उछल पड़े। सेंसेक्स 350 प्वाइंट्स से अधिक उछल पड़ा था तो निफ्टी भी 24500 के पार चला गया लेकिन फिर इंट्रा-डे हाई से सेंसेक्स 350 प्वाइंट्स टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 24450 के नीचे तक आ गया। हालांकि ब्रोडर लेवल पर मार्केट में आज शुरुआती कारोबार से ही दबाव बना रहा। निफ्टी मिडकैप 100 में आधे फीसदी के करीब गिरावट है तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आधे फीसदी से अधिक गिरावट है। अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो 01:39 PM पर सेंसेक्स 31.33 यानी 0.04% की गिरावट के साथ 78,253.74 और निफ्टी 8.70 यानी 0.04% की फिसलन के साथ 24,421.65 पर है।

Stock Market Crash: ये है वजह

मुनाफावसूली

निवेशकों ने लगातार पांचवे दिन मार्केट में रौनक का फायदा उठाया और ऊपरी स्तर पर मुनाफावसूली की जिससे मार्केट नीचे आया। चार दिनों में सेंसेक्स और निफ्टी 2.4% मजबूत हुआ और यह करीब 10 हफ्ते के हाई लेवल पर बंद हुआ था।

Nifty की वीकली एक्सपायरी

आज निफ्टी के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की वीकली एक्सपायरी है तो इसका भी असर आज मार्केट पर दिखा।

मेटल और रियल्टी शेयरों में गिरावट

मार्केट पर आज मेटल और रियल्टी शेयरों ने काफी दबाव बनाया। मेटल शेयरों के निफ्टी इंडेक्स निफ्टी में 1% से अधिक तो निफ्टी रियल्टी में डेढ़ फीसदी से अधिक की गिरावट आई। इसके अलावा हल्की ही सही लेकिन सरकारी और प्राइवेट बैंकों के शेयरों ने भी मार्केट पर दबाव बनाया है जिनके निफ्टी इंडेक्स लाल हैं। हालांकि आईटी सेक्टर मार्केट को ऊपर लाने की पूरी कोशिश कर रहा जिससे मार्केट की गिरावट सीमित हो जा रही है। निफ्टी आईटी में ढाई फीसदी से अधिक तेजी है।

अमेरिका-ईरान तनाव

होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ओमान के तट पर एक तेल टैंकर पर मिसाइल हमला हुआ। इसे लेकर ईरानी स्टेट मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक यह टैंकर अमेरिकी नौसेना के सपोर्ट से ओमान के समुद्री रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहा था, जिसने ईरानी अधिकारियों की बार-बार दी गई चेतावनियों को नजरअंदाज किया था जिसके बाद इसे निशाना बनाया गया।

टेक्निकल आउटलुक

जियोजीत इंवेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स का कहना है कि एक कारोबारी दिन पहले 24400 के ऊपर निफ्टी के क्लोज होने से 24800-25250 की तरफ इसके बढ़ने का माहौल और सुधरा। हालांकि उन्होंने इस बात को लेकर भी सतर्क किया है कि 24600 के लेवल पर मार्केट को कुछ रिजेक्शन भी झेलना पड़ सकता है। आनंद के मुताबिक 24360 के सपोर्ट पर मार्केट 24600 की तरफ बढ़ सकता है।

Iran-US Tension: ‘बात नहीं मानी तो भुगतना होगा अंजाम’, ईरान ने बताया ओमान तट के पास तेल टैंकर पर क्यों दागी मिसाइल!

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

होर्मुज में तेल टैंकर पर भीषण मिसाइल हमला, सीजफायर खत्म होते ही तबाही की आहट; कच्चे तेल की कीमतों में लग सकती है आग!

Iran US Conflict Near Strait of Hormuz: वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री रास्ते ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ के पास सोमवार को एक बड़े तेल टैंकर पर मिसाइल हमला हुआ है। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के मुताबिक, ओमान के तट से करीब 8 समुद्री मील दूर एक अज्ञात मिसाइल या ड्रोन टकराने के बाद तेल टैंकर में भीषण आग लग गई।

इस घटना के तुरंत बाद अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया है कि ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने जानबूझकर दो कमर्शियल जहाजों पर मिसाइलें दागी हैं। इस हमले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुआ एक हफ्ते का संघर्ष विराम समझौता खत्म हो गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने का खतरा फिर से बढ़ गया है।

UKMTO और अमेरिका का क्या है दावा?

ब्रिटिश नौसेना की विंग UKMTO के अनुसार, यह तेल टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य से होते हुए दक्षिण की तरफ बढ़ रहा था, तभी इसके पोर्ट साइड पर एक मिसाइल आकर लगी। राहत की बात यह है कि इस हमले में किसी भी क्रू मेंबर के हताहत होने या किसी तरह के बड़े पर्यावरणीय नुकसान की खबर नहीं है।

अमेरिका की जवाबी कार्रवाई की तैयारी

अमेरिकी मीडिया आउटलेट ‘एक्सियोस’ से बात करते हुए दो यूएस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि ईरान ने दो व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया है, जिससे जहाजों को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके जवाब में अमेरिका अब ईरानी ठिकानों पर जवाबी सैन्य हमले करने की तैयारी कर रहा है।

क्यों टूटा अमेरिका-ईरान का शांति समझौता?

यह हमला ठीक उस समय हुआ है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में हमलों को रोकने के लिए हुआ एक हफ्ते का समझौता समाप्त हो गया। केवल तीन हफ्ते पहले ही दोनों देशों ने एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, जो अब पूरी तरह टूटता नजर आ रहा है। पिछले हफ्ते कतर की राजधानी दोहा में दोनों पक्षों के बीच हुई अप्रत्यक्ष बातचीत भी इस रणनीतिक समुद्री रास्ते के भविष्य को लेकर बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई थी।

इससे पहले भी ईरान ने इस रास्ते की घेराबंदी कर दी थी और कई कमर्शियल जहाजों पर हमले किए थे, जिसके जवाब में अमेरिका ने नौसैनिक नाकेबंदी की थी। पिछले महीने हुए समझौते के बाद जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हुई थी, जो अब दोबारा खतरे में है।

ईरान अब जहाजों से वसूलेगा ‘टोल’

ईरान ने साफ कर दिया है कि वह युद्ध से पहले वाली स्थिति में वापस नहीं जाएगा, जहां जहाजों को इस रास्ते से मुफ्त में गुजरने की आजादी थी। ईरान ने चेतावनी दी है कि कोई भी जहाज उसके तय किए गए समुद्री कॉरिडोर से बाहर नहीं जाएगा।

बीजिंग में वर्ल्ड पीस फोरम के दौरान ईरानी राजदूत अब्दोलरेज़ा रहमानी फजली ने बड़ा बयान देते हुए कहा, ‘चूंकि होर्मुज का एक बड़ा हिस्सा ईरान के प्रादेशिक जल क्षेत्र में आता है, इसलिए ईरान अब यहां से गुजरने वाले जहाजों से ‘सर्विस फीस’ वसूलेगा। हालांकि उन्होंने इसे टैक्स या टोल टैक्स कहने से इनकार किया’।

ईरानी राजदूत ने यह भी साफ किया कि जो देश मुश्किल वक्त में ईरान के साथ खड़े रहे जैसे- भारत और अन्य मित्र देश, उन्हें इस सर्विस फीस में ‘विशेष छूट’ दी जाएगी।

दुनिया के लिए क्यों इतना महत्वपूर्ण है ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’?

होर्मुज जलडमरूमध्य खाड़ी देशों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों, विशेष रूप से एशिया तक कच्चे तेल के निर्यात का सबसे बड़ा लाइफलाइन रूट है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के आंकड़ों के मुताबिक, इस समुद्री रास्ते से हर दिन लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरता है। यह मात्रा पूरी दुनिया की कुल कच्चे तेल की सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा (20%) है। यही कारण है कि यहां होने वाली मामूली हलचल भी दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा देती है।

खामेनेई के जनाजे में लाखों लोगों की भीड़:अंतिम दर्शन को उमड़ा जनसैलाब, ताबूत देखते ही रो पड़े लोग; ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ के लगे नारे

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में शनिवार को तेहरान की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। छह दिन तक चलने वाले इस अंतिम संस्कार के पहले दिन ग्रैंड मोसल्ला मस्जिद में सुबह से ही लाखों लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने लगे। अधिकारियों का अनुमान है कि पूरे कार्यक्रम में 1.5 करोड़ से 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। खामेनेई का ताबूत ईरानी झंडे में लपेटकर मंच पर रखा गया था। उनके साथ हमले में मारे गए परिवार के अन्य सदस्यों के ताबूत भी रखे गए। ताबूत देखते ही कई लोग रो पड़े और कई श्रद्धालु फूट-फूटकर बिलखते नजर आए। इस दौरान भीड़ लगातार ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ और ‘इजराइल पर खुदा का कहर’ के नारे लगाती रही। कई लोग बदला लेने की मांग वाले पोस्टर लेकर पहुंचे। अंतिम यात्रा 6 जुलाई को तेहरान से निकलेगी। इसके बाद पार्थिव शरीर 7 जुलाई को कोम, 8 जुलाई को इराक के नजफ और करबला और 9 जुलाई को मशहद ले जाया जाएगा, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ दफनाया जाएगा। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स 1. अंतिम संस्कार में 100 ज्यादा देशों के प्रतिनिधिमंडल पहुंचे: अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हुए। 2. तेहरान में अभूतपूर्व सुरक्षा और लोगों के लिए विशेष इंतजाम: अंतिम संस्कार को देखते हुए सेना और पुलिस की भारी तैनाती की गई। मेट्रो और सरकारी बसें मुफ्त रहीं, होटलों में 50% तक छूट दी गई, 5,000 से ज्यादा स्कूलों में ठहरने की व्यवस्था की गई और दूसरे शहरों से विशेष ट्रेनें चलाई गईं। 3. खामेनेई की अंतिम यात्रा 5 शहरों से गुजरेगी: अंतिम यात्रा तेहरान से शुरू होकर क़ोम, इराक के करबला और नजफ होते हुए 9 जुलाई को मशहद पहुंचेगी, जहां उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। 4. ईरान ने अमेरिका से बातचीत रोकी, परमाणु ठिकानों के निरीक्षण से भी इनकार: अंतिम संस्कार के दौरान अमेरिका-ईरान के बीच चल रही अप्रत्यक्ष वार्ता फिलहाल रोक दी गई है। साथ ही ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को फोर्डो, नतांज और इस्फहान परमाणु ठिकानों के निरीक्षण की अनुमति देने से इनकार कर दिया। ट्रम्प का दावा- ईरान को अंतिम संस्कार के लिए एक हफ्ते की मोहलत दी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ने मानवीय आधार पर ईरान को अंतिम संस्कार पूरा करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। उन्होंने दावा किया कि इसके बाद ईरान को अमेरिकी शर्तें माननी होंगी। खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े अपडे्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

8th Pay Commission Updates: क्या केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज की सैलरी 283 फीसदी बढ़ने जा रही है?

आठवां वेतन आयोग केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज और पेंशनर्स के वेतन वृद्धि के बारे में अपनी सिफारिशें देने के लिए देशभर में अलग-अलग पक्षों के विचार जानने की कोशिश कर रहा है। एंप्लॉयीज यूनियंस 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे है। अगर यह मांग मान ली जाती है तो मिनिमम बेसिक पे 283 फीसदी बढ़ जाएगा। यह 18,000 रुपये से बढ़कर करीब 68,940 रुपये हो जाएगा। नए पे स्केल का फायदा केंद्र सरकार के करीब 50 लाख एंप्लॉयीज और 70 लाख पेंशनर्स को मिलेगा।

एंप्लॉयीज यूनियंस ने बताई अपनी मांगें

कनफेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एंप्लॉयीज एंड वर्कर्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल में 8वें वेतन आयोग को एक व्यापक मेमोरेंडम सौंपा है। इसमें मिनिमम बेसिक पे 69,000 रुपये करने, 3.83 फिटमेंट फैक्टर, ओल्ड पेंशन स्कीम फिर से लागू करने और ज्यादा हाउस रेंट अलाउन्स (HRA) की मांग की गई है।

7वें वेतन आयोग ने 2.57 फिटमेंट फैक्टर माना था

फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज और पेंशनर्स के पे में संशोधन करने के लिए होता है। रिवाइज्ड बेसिक सैलरी तय करने के लिए फिटमेंट फैक्टर के आधार पर एंप्लॉयीज के मौजूदा बेसिक पे में बदलाव किया जाता है। एंप्लॉयीज यूनियंस ने 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। अगर यह लागू हुआ तो मिनिमम बेसिक पे करीब 69,000 रुपये हो जाएगा। 7वें वेतन आयोग ने 2.57 फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल किया था।

इस महीने भुवनेश्वर और कोलकाता में बैठक

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यूनियंस के प्रस्ताव मान लिए जाते हैं तो रिवाइज्ड बेसिक सैलरी का कैलकुलेशन मौजूदा बेसिक पे में 3.83 से गुणा कर किया जाएगा। हालांकि, 8वां वेतन आयोग कितना फिटमेंट फैक्टर रखता है, अभी इस बारे में कहना मुश्किल है। आयोग देश के अलग-अलग शहरों में एंप्लॉयीज के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर रहा है। 22-23 जून को लखनऊ की बैठक के बाद 6-7 जुलाई को भुवनेश्वर और 9-10 जुलाई को कोलकाता में बैठक होने वाली है।

सातवें आयोग ने मिनिमम बेसिक पे 18000 किया था

कुछ एंप्लॉयीज यूनियंस ने मिनिमम बेसिक पे बढ़ाकर 55,000 रुपये करने की मांग की है। उनका कहना है कि बीते कुछ सालों में कॉस्ट ऑफ लिविंग काफी बढ़ी है। खासकर हेल्थकेयर और एजुकेशन पर होने वाला खर्च काफी बढ़ा है। ऐसे में 18000 रुपये का मौजूदा न्यूनतम बेसिक पे पर्याप्त नहीं रह गया है। इससे पहले के वेतन आयोग ने मिनिमम बेसिक पे करीब ढ़ाई गुना कर दिया था। 7वें वेतन आयोग ने मिनिमम बेसिक पे को 7000 से बढ़ाकर 18,000 रुपये कर दिया था। यह 10 साल पहले की बात है।

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अगले साल के मध्य में आयोग सौंप सकता है रिपोर्ट

अनुमान है कि 8वां वेतन आयोग अगले साल के मध्य में अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप देगा। इसके बाद केंद्र सरकार इस रिपोर्ट पर व्यापक विचार करेगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतिम फैसला लेने से पहले केंद्र सरकार अपनी वित्तीय स्थिति का भी ध्यान रखेगी। सरकार ने पिछले साल जीएसटी के रेट्स में कमी किए हैं। इस साल अमेरिका-ईरान में लड़ाई की वजह से क्रूड में उछाल आया था। इससे सरकार का इंपोर्ट बिल काफी बढ़ गया था।