Delhi Power Cut 5 July: दिल्ली में 5 जुलाई को बिजली कटौती! इन इलाकों में कई घंटे रहेगा पावर आउटेज

Delhi Power Cut 5 July: दिल्ली के कई इलाकों में रविवार, 5 जुलाई को बिजली की समस्या रहेगी। यह कटौती BSES राजधनी पावर लिमिटेड (BRPL) द्वारा किए जा रहे मेंटेनेंस काम के कारण की जा रही है। बिजली वितरण कंपनी के अनुसार, मेंटेनेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कामों के लिए अलग-अलग इलाकों में बिजली सप्लाई कुछ समय के लिए बंद रहेगी। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे उसी हिसाब से अपने दिन की योजना बनाएं और बिजली कटौती से पहले जरूरी इंतजाम कर लें।

निर्धारित बिजली कटौती इस प्रकार है:

जनकपुरी डिवीजन: सुबह 10:07 बजे से 12:07 बजे तक मीनाक्षी गार्डन और अशोक नगर इलाके में बिजली आपूर्ति प्रभावित रहेगी।

जनकपुरी  डिवीजन: सुबह 10:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक डिस्ट्रिक्ट सेंटर, जनकपुरी में बिजली सप्लाई बाधित रहेगी।

टैगोर गार्डन: सुबह 10:00 बजे से 12:00 बजे तक ब्लॉक B-2, रघुबीर नगर (टैगोर गार्डन एक्सटेंशन) में पावर कट रहेगा।

मुंडका डिवीजन: सुबह 11:00 बजे से 1:00 बजे तक सविता विहार, मुंडका एक्सटेंशन और ब्लॉक C (मुंडका) में बिजली बाधित रहेगी।

मुंडका डिवीजन: दोपहर 12:00 बजे से 2:00 बजे तक RMU में केबल एंट्री होल ओपन कार्य के कारण मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया और नेताजी सुभाष विहार में बिजली प्रभावित रहेगी।

मुंडका डिवीजन: दोपहर 1:00 बजे से 3:00 बजे तक वीणा एन्क्लेव (वेस्ट कैबिन ब्लॉक) और मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया बिजली आपूर्ति प्रभावित रहेगी।

अलकनंदा: सुबह 11:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक B-ब्लॉक, ओखला फेज-1 में पावर टक की समस्या रहेगी।

क्यों हो रही बिजली कटौती?

बता दें कि इस समय दिल्ली में भीषण गर्मी के चलते बिजली की खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। ऐसे में सिस्टम को स्थिर रखने और आगे बिना रुकावट सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए यह मेंटेनेंस जरूरी माना जा रहा है।

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Amazon और Flipkart Mega Sale 2026 लाइव, स्मार्टफोन, लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स पर भारी छूट, यहां देखें ऑफर्स की पूरी लिस्ट

Amazon Prime Day Sale 2026 और Flipkart GOAT Sale 2026 की शुरुआत 4 जुलाई से हो गई है। दोनों सेल्स रात 12 बजे लाइव हुईं, जहां इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट्स पर भारी छूट मिल रही है। स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य डिवाइस सस्ते दामों में उपलब्ध हैं। इस बार iPhone मॉडल्स पर भी आकर्षक ऑफर्स दिए जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले समय में Apple कीमतें बढ़ा सकता है, जिससे यह सेल और भी खास बन गई है। Amazon की सेल सिर्फ Prime मेंबर्स के लिए है, जबकि Flipkart GOAT Sale सभी यूजर्स के लिए खुली है, लेकिन Plus मेंबर्स को जल्दी एक्सेस मिलता है।

Amazon Prime Day Sale 2026 के खास ऑफर्स

Amazon ने कई डिवाइसों पर भारी छूट का ऐलान किया है। प्रमुख ऑफर्स इस प्रकार हैं:

  • OnePlus 13 (12GB/256GB) ₹54,999 में (25% छूट)
  • ASUS Vivobook 15 (i3 13th Gen) ₹44,990 में (42% छूट)
  • Samsung 55-inch 4K Smart TV ₹39,490 में (28% छूट)
  • LG 1.5 Ton Smart AC ₹35,490 में (53% छूट)
  • Godrej 600L Smart Refrigerator ₹69,990 में (40% छूट)
  • BenQ 4K Smart Projector ₹1,14,490 में (42% छूट)

इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स और एक्सेसरीज पर 80% तक की छूट दी जा रही है। लैपटॉप और टैबलेट पर 40%, स्पीकर्स पर 60%, स्मार्ट टीवी पर 65% और प्रोजेक्टर पर 70% तक डिस्काउंट मिल रहा है। SBI, Axis बैंक कार्ड और EMI ट्रांजैक्शन पर 10% तक का इंस्टेंट डिस्काउंट भी उपलब्ध है।

Flipkart GOAT Sale 2026 में iPhone और नए लॉन्च पर ऑफर

Flipkart की इस सेल में iPhone 17 और अन्य मॉडल्स पर भी आकर्षक कीमतें देखने को मिल रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक:

  • iPhone 17: ₹70,990 शुरुआती कीमत
  • iPhone 17 Pro: ₹1,12,900 शुरुआती कीमत

इसके अलावा पुराने iPhone मॉडल्स पर भी छूट की उम्मीद है।

Nothing और अन्य स्मार्टफोन्स पर ऑफर

Flipkart सेल में Nothing ब्रांड के नए डिवाइस भी डिस्काउंट पर उपलब्ध हैं:

  • Nothing Phone (4a): ₹32,999 (₹4,000 बैंक ऑफर के साथ)
  • Nothing Phone (4a) Pro: ₹41,999 (₹5,000 बैंक ऑफर)
  • Nothing Headphone (1): ₹16,999 (3–5 जुलाई तक उपलब्ध)

Motorola स्मार्टफोन्स पर बड़ी छूट

Motorola के कई मॉडल्स पर भी सेल के दौरान डिस्काउंट और बैंक ऑफर्स मिल रहे हैं। Edge और G सीरीज के फोन अलग-अलग कीमतों पर उपलब्ध हैं, जिनमें बैंक ऑफर के तहत ₹1,000 से ₹5,000 तक की अतिरिक्त छूट शामिल है।

फोल्डेबल और प्रीमियम मॉडल्स पर भी ऑफर्स दिए गए हैं, जिससे ग्राहकों को हाई-एंड डिवाइस कम कीमत में मिल सकते हैं।

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Gold Price Today: सोना हुआ और महंगा, 24 और 22 कैरेट दोनों का चढ़ा भाव

देश में सोने की कीमत और बढ़ गई है। 4 जुलाई की सुबह ज्यादातर शहरों में 24 और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत में इजाफा हुआ है। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत बढ़कर 147160 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 3,000 रुपये बढ़कर 1,47,500 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमत में मजबूती और डॉलर के कमजोर होने के कारण सोने की मांग में तेजी आई।

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श ने बाजार के अनुमानों के मुकाबले कम सख्त रुख की बात कही है, जिससे ब्याज दरों में जल्द बढ़ोतरी की चिंताएं कम हुई हैं। इसके अलावा अमेरिका में नौकरियों का डेटा उम्मीद से कमजोर रहना भी ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें कम होने का एक कारण है। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट के ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स का कहना है कि जून में नॉन-फार्म पेरोल में 57,000 नौकरियां बढ़ीं।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 147160 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 134910 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 134760 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 147010 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 149570 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 137010 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 147010 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 134760 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली134910147160
मुंबई134760147010
अहमदाबाद134810147060
चेन्नई137010149570
कोलकाता134760147010
हैदराबाद134760147010
जयपुर134910147160
भोपाल134810147060
लखनऊ134910147160
चंडीगढ़134910147160

 

Petrol Diesel Price Today: आज 4 जुलाई को क्या हैं पेट्रोल-डीजल के नए रेट? यहां देखें पूरी लिस्ट

Petrol Diesel Price Today:  हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 04 जुलाई 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट —

नई दिल्ली: पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 83.09 रुपये प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल 111.18 रुपये और डीजल 86 रुपये प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल 113.47 रुपये और डीजल 93.50 रुपये प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 91.50 रुपये प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल 102.77 रुपये और डीजल 91.70 रुपये प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 91.70 रुपये प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल 110.93 रुपये और डीजल 90 रुपये प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल 109.92 रुपये प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल 98.10 रुपये प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल 115.69 रुपये और डीजल 97 रुपये प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल 112.66 रुपये और डीजल 90.91 रुपये प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल 102.05 रुपये और डीजल 95.75 रुपये प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल 113.35 रुपये प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल 115.49 रुपये प्रति लीटर।

अहमदाबाद: डीजल 82.25 रुपये प्रति लीटर।

पुणे: डीजल 92.50 रुपये प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

Yogini Ekadashi Vrat 2026: कब है योगिनी एकादशी व्रत? इस दिन धन का मार्ग खोलने और कष्टों से मुक्ति के लिए जरूर करें ये आसान उपाय

Yogini Ekadashi Vrat 2026: हिंदू धर्म एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। इसे भगवान विष्णु की कृपा पाने का सबसे सरल उपाय माना जाता है। हर माह में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को यह व्रत किया जाता है। इस तरह पूरे हिंदू वर्ष में 24 एकादशी व्रत करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। इनमें से एक है योगिनी एकादशी का व्रत। यह एकादशी व्रत हर साल आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना और व्रत करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। योगिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है और इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से धन लाभ और कष्टों से मुक्ति मिल सकती है। आइए जानें इसके बारे में

योगिनी एकादशी व्रत और पारण की तारीख

एकादशी तिथि प्रारंभ : 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को सुबह 08:10 बजे से

एकादशी तिथि समाप्त : 11 जुलाई 2026, शनिवार को सुबह 05:23 बजे तक

व्रत पारण का समय (11 जुलाई): दोपहर 01:50 बजे से शाम 04:36 बजे के बीच

योगिनी एकादशी के दिन करें ये 3 उपाय

विष्णु जी का पूजन करें : योगिनी एकादशी के दिन माता लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की पूजा और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से जीवन में धन लाभ के योग बन सकते हैं। इस उपाय से श्री हरि की संपूर्ण कृपा दृष्टि बनी रहेगी। इस एकादशी के दिन व्रत का पालन करना और ज्यादा फलदायी हो सकता है। इस दिन व्रत करके फलाहार करें और विष्णु जी को भोग में पीले फल अथवा पीली मिठाई अर्पित करें।

जरूरतमंदों को धन का दान : योगिनी एकादशी के दिन किसी जरूरतमंद को धन का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन आप प्रातः जल्दी उठकर स्नान आदि से मुक्त हो जाएं और विष्णु जी का पूजन करने के बाद किसी गरीब व्यक्ति को अन्न-धन दान स्वरूप दें। इस दिन पीले वस्त्रों का दान भी बहुत शुभ हो सकता है। इस उपाय से सभी बाधाएं दूर होंगी और जीवन में कभी भी अन्न और धन की कमी नहीं होगी।

तुलसी की पूजा : तुलसी के पौधे को विष्णु प्रिया के रूप में पूजा जाता है। योगिनी एकादशी के दिन तुलसी की पूजा विधि-विधान से करने पर भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की कृपा दृष्टि भी बनी रहेगी। लेकिन इस दिन तुलसी में भूलकर भी जल अर्पित न करें।

Raksha Bandhan 2026 Date: इस साल कब मनाया जाएगा भाई-बहन के प्रेम का पर्व राखी? जानें सही तारीख, मुहूर्त और भद्रा रहेगी या नहीं

मानसून में खुला जन्नत का दरवाजा देखिये हरियाली की चादर ओढे, इंडिया के स्कॉटलैंड और स्विट्ज़रलैंड!

मानसून का मौसम भारत की खूबसूरती को एक अलग ही रंग दे देता है। बादलों से ढकी पहाड़ियां, हरे-भरे जंगल और गिरते झरने कई जगहों को यूरोप जैसा बना देते हैं। भारत में ऐसी कई जगहें हैं जहां का नजारा देखकर लगता है जैसे हम किसी विदेशी देश में आ गए हों। यहां का मौसम, प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण हर ट्रैवलर को अट्रैक्ट करता है। आइये जानते है उन जगहों के बारे में भारत का स्वर्ग है मानसून सीजन में:

कूनूर, तमिलनाडु — शांत पहाड़ी जगह

Coonoor - Tourist Places & Top Things to Do in 2026

कूनूर ऊटी से ज्यादा शांत और नेचुरल जगह है जहां चाय बागानों के बीच सुकून मिलता है। मॉनसून में यहां की हरियाली बहुत गहरी और ताज़गी भरी लगती है। यह जगह कम भीड़ और ज्यादा नेचर के लिए जानी जाती है। होटल ₹1,500 से ₹5,000 प्रति रात और खाना ₹400 से ₹1,000 प्रति दिन होता है। डॉल्फिन नोज व्यू यहां का सबसे खूबसूरत पॉइंट है।

महाबलेश्वर, महाराष्ट्र — स्विस जैसा नज़ारा

Sanskar

महाबलेश्वर झरनों, घाटियों और स्ट्रॉबेरी फार्म के लिए बहुत मशहूर है। मॉनसून में यहां हरियाली और बढ़ जाती है और पूरा इलाका बहुत सुंदर लगने लगता है। यह जगह फैमिली और कपल ट्रिप दोनों के लिए बेस्ट है। रिसॉर्ट ₹2,000 से ₹8,000 प्रति रात और खाना ₹500 से ₹1,500 प्रति दिन होता है। एलेफैंट्स हेड पॉइंट यहां का सबसे पॉपुलर व्यू है।

लैंसडाउन, उत्तराखंड — शांत और साफ हवा

लॉकडाउन के बाद उत्तराखंड के इन हिल स्टेशनों पर जाना न भूलें, दोस्तों या पार्टनर संग बना सकते हैं प्लान - Tourist Guide After Lockdown You Can Go To These Hill Stations

लैंसडाउन भीड़ से दूर एक शांत और साफ हवा वाली जगह है। मॉनसून में यहां की हरियाली और बादल इसे बहुत खूबसूरत बना देते हैं। यह जगह सेना से जुड़ी होने के कारण काफी साफ और व्यवस्थित रहती है। होटल ₹1,200 से ₹5,000 प्रति रात और खाना ₹300 से ₹1,000 प्रति दिन होता है। आर्मी म्यूजियम और ट्रेकिंग यहां के मेन अट्रैक्शन हैं।

तवांग, अरुणाचल प्रदेश — पहाड़ों का जादू

Exploring Shungatser Lake & Bumla : Hidden Gems of Tawang

तवांग ऊंचाई पर स्थित एक बेहद खूबसूरत जगह है जहां बर्फीले पहाड़ और बौद्ध संस्कृति देखने को मिलती है। मॉनसून में यहां बादलों के बीच का माहौल बहुत रहस्यमय और शांत लगता है। यह जगह एडवेंचर और स्पिरिचुअल ट्रैवल दोनों के लिए खास है। होटल ₹2,500 से ₹9,000 प्रति रात और खाना ₹600 से ₹1,800 प्रति दिन होता है। तवांग मोनेस्ट्री और सेला पास यहां के मेन अट्रैक्शन हैं।

कूर्ग, कर्नाटक — स्कॉटलैंड की फीलिंग

This may contain: a small cabin in the middle of trees with fog rolling over it's roof

कूर्ग को भारत का स्कॉटलैंड कहा जाता है क्योंकि यहां कॉफी के बागान, धुंध से ढके पहाड़ और झरनों का बेहद सुंदर नजारा मिलता है। मॉनसून में यह जगह और भी हरी-भरी हो जाती है और बादलों के बीच घूमना एक अलग ही एक्सपीरियंस देता है। यहां की ठंडी हवा और शांत माहौल मन को सुकून देता है। ठहरने के लिए होमस्टे और रिसॉर्ट ₹2,000 से ₹8,000 प्रति रात में मिल जाते हैं और खाने का खर्च लगभग ₹500 से ₹1,500 प्रति दिन होता है। यहां कूर्गी खाना और ताज़ी कॉफी का स्वाद जरूर लेना चाहिए।

मुन्नार, केरल — मिनी स्विट्जरलैंड

दक्षिण भारत में भी है एक माउंट ऐवरेस्ट, क्या आप इसके बारे में जानते हैं - Tripoto

मुन्नार अपनी चाय बागानों से ढकी पहाड़ियों और ठंडी हवा के लिए जाना जाता है। मॉनसून में बादलों के बीच चलना और हरियाली का नजारा इसे बेहद खास बना देता है। यहां की घाटियां और धुंध भरा मौसम बहुत रोमांटिक फील देता है। होटल और रिसॉर्ट ₹1,500 से ₹7,000 प्रति रात में मिल जाते हैं और खाने का खर्च ₹400 से ₹1,200 प्रति दिन होता है। यहां चाय म्यूजियम और एलेफैंट सफारी का एक्सपीरियंस लेना बहुत यादगार होता है।

ऊटी, तमिलनाडु — इंग्लिश गार्डन जैसी फीलिंग

Starts at ₹3,500/night* - Book United 21 Paradise in Naduvattam,Nilgiri - Best 3 Star Hotels near me in Nilgiri - Justdial

ऊटी अपनी झील, बॉटनिकल गार्डन और टॉय ट्रेन के लिए मशहूर है। मॉनसून में यहां की हरियाली और ठंडी हवा इसे और भी खूबसूरत बना देती है। यहां ब्रिटिश समय की झलक आज भी देखने को मिलती है। ठहरने का खर्च ₹1,800 से ₹6,000 प्रति रात और खाने का खर्च ₹400 से ₹1,200 प्रति दिन होता है। यह जगह फैमिली ट्रिप और रोड जर्नी के लिए बहुत पॉपुलर है।

शिलांग, मेघालय — ईस्ट का स्कॉटलैंड

Best places to visit in meghalaya for a trip with friend including Shillong and Mawsynram | पहाड़ घूमनें के शौकिन है तो सस्ते में बना ले मेघालय घूमनें का प्लान, दोस्तों संग

शिलांग में झरने, पहाड़ और धुंध भरे रास्ते इसे यूरोप जैसा फील देते हैं। मॉनसून में यहां का मौसम बहुत फिल्मी और रहस्यमय लगता है। हर तरफ हरियाली और पानी की आवाजें मन को रोक लेती हैं। यहां ठहरने का खर्च ₹1,500 से ₹6,500 प्रति रात और खाने का ₹400 से ₹1,000 प्रति दिन होता है। एलिफैंट फॉल्स और उमियम लेक यहां के मेन अट्रैक्शन हैं।

कसौली, हिमाचल प्रदेश — शांत हिल स्टेशन

Kasauli Tourism Guide – About Kasauli, Travel Info & Attractions | Trip and Tales

कसौली एक छोटा लेकिन बहुत शांत हिल स्टेशन है जहां मॉनसून में बादल और हरियाली बहुत सुंदर लगती है। यहां की सड़कों पर हल्की बारिश और ठंडी हवा एक रोमांटिक माहौल बनाती है। यह जगह भीड़ से दूर सुकून चाहने वालों के लिए परफेक्ट है। होटल ₹2,000 से ₹7,000 प्रति रात और खाना ₹500 से ₹1,200 प्रति दिन होता है। सनसेट पॉइंट और ट्रेल्स यहां बहुत फेमस हैं।

पांडिचेरी — फ्रेंच रिवेरा फील

Where to Propose on the French Riviera - AL Projects Design

पांडिचेरी में फ्रेंच आर्किटेक्चर और समुद्र का मेल इसे यूरोप जैसा बनाता है। मॉनसून में बीच और कैफे का माहौल बहुत खूबसूरत लगता है। यहां की गलियों में साइकिल चलाना और समुद्र किनारे घूमना बहुत खास एक्सपीरियंस है। ठहरने का खर्च ₹2,500 से ₹10,000 प्रति रात और खाने का ₹600 से ₹2,000 प्रति दिन होता है। कैफे हॉपिंग और बीच वॉक यहां बहुत पॉपुलर हैं।

भारत के ये सभी मानसून डेस्टिनेशन ट्रैवलर को हरियाली, बादल और झरनों का अनोखा एक्सपीरियंस कराते हैं। ये जगहें सिर्फ घूमने के लिए नहीं, बल्कि सुकून और यादगार पलों के लिए भी बेहतरीन हैं। अगर आप नेचर और शांति पसंद करते हैं तो ये ट्रिप आपके लिए परफेक्ट है। यदि आपको भी कभी मौका मिले तो अगली बार अपनी ट्रिप की प्लानिंग में इन जगहों को जरूर शामिल करें, क्योंकि यहां का एक्सपीरियंस हमेशा याद रहने वाला होता है।

अमेरिका 408 किलो का टाइम कैप्सूल जमीन में दफन करेगा:इसमें व्हेल की हड्डी से AI की भविष्यवाणी तक; 250 साल बाद खोला जाएगा

4 जुलाई को अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने के मौके पर 408 किलो का एक टाइम कैप्सूल जमीन में दफनाया जाएगा। इसे फिलाडेल्फिया के इंडिपेंडेंस नेशनल हिस्टोरिकल पार्क में दफनाया जाएगा और 250 साल बाद यानी 2276 में खोला जाएगा। इसकी जानकारी नेशनल पार्क सर्विस के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी दर्ज की गई है, ताकि 250 साल बाद आने वाली पीढ़ियां इसे ढूंढ़ सकें और इसके बारे में जान सकें। इस कैप्सूल में 50 राज्यों और आम लोगों की ओर से चुनी गई यादगार चीजें रखी गई हैं, जिसमें व्हेल की हड्डी, दुनिया के सबसे बड़े जिप्सम रेगिस्तान की रेत, राइट बंधुओं के विमान का कपड़ा, AI की भविष्यवाणी और कई ऐतिहासिक दस्तावेज शामिल हैं। टाइम कैप्सूल बंद पेटी या कंटेनर होता है, जिसमें किसी दौर की चीजें सुरक्षित रखी जाती हैं, ताकि भविष्य की पीढ़ियां उस समय के समाज, तकनीक, संस्कृति और जीवन को समझ सकें। कैप्सुल सुरक्षित रखने के लिए अपनाई गई खास तकनीकें टाइम कैप्सूल बनाना जितना मुश्किल नहीं था, उससे बड़ी चुनौती उसे 250 साल तक सुरक्षित रखना था। वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि जमीन के नीचे रखी चीजें ढाई सौ साल बाद भी सुरक्षित कैसे मिले। इस वजह से प्रोजेक्ट से जुड़े कई विशेषज्ञों को इसमें शामिल किया गया। कई साल की रिसर्च के बाद ऐसा डिजाइन तैयार किया गया, जो पानी, नमी, जंग और मौसम के असर से कैप्सूल को बचा सके। यह कैप्सूल चौकोर नहीं, बल्कि बेलन (सिलेंडर) के आकार का है। वैज्ञानिकों के अनुसार चौकोर डिब्बों के कोने समय के साथ कमजोर पड़ जाते हैं और वहीं से पानी अंदर जाने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। टाइम कैप्सूल को कैसे सील किया गया? कैप्सूल को कार्यक्रम के दिन सील नहीं किया जाएगा। इसे पहले ही पूरी तरह सील किया जा चुका है। 4 जुलाई को इसे सिर्फ फिलाडेल्फिया में जमीन के नीचे स्थापित किया जाएगा। कैप्सूल को सील करने के लिए खास धातु इंडियम का इस्तेमाल किया गया है। यह नरम धातु ढक्कन बंद करते समय छोटी-से-छोटी दरार भर देती है। इससे कैप्सूल पूरी तरह सील रहता है और अंदर रखा सामान लंबे समय तक सुरक्षित रहता है। अगर कैप्सूल में बहुत ज्यादा नमी होती तो कागज और दूसरी वस्तुएं खराब हो सकती थीं। वहीं नमी पूरी तरह खत्म करने पर कुछ चीजें सूखकर टूट सकती थीं। इसलिए वैज्ञानिकों ने कैप्सूल के अंदर 35% नमी रखी है। कैप्सूल को करीब 10 फीट नीचे दफनाया जाएगा। इस गहराई पर तापमान में उतार-चढ़ाव कम होता है। तेज गर्मी, कड़ाके की ठंड और सतह पर आने वाले तूफानों का असर भी बहुत कम पड़ता है। 250 साल तक न पानी पहुंचेगा, न जंग लगेगी वैज्ञानिकों के मुताबिक, जमीन के नीचे रखे जाने वाले किसी भी टाइम कैप्सूल का सबसे बड़ा दुश्मन पानी होता है। इसीलिए कैप्सूल के ऊपर एक और स्टील का सिलेंडर लगाया जाएगा। दोनों के बीच हवा की एक परत रहेगी, जो बाहर से आने वाले पानी को रोकने में मदद करेगी। यह ठीक उसी सिद्धांत पर काम करेगा, जैसे पानी में उल्टी बाल्टी डुबोने पर उसके अंदर हवा फंसी रहती है। अगर भविष्य में भूजल का स्तर बढ़ जाए या बाढ़ आ जाए, तब भी बेल जार के भीतर मौजूद हवा पानी को कैप्सूल तक पहुंचने से रोकेगी। इसे बनाने वाली टीम के प्रमुख वैज्ञानिक माइकल बेरिला ने कहा, अगर इस टाइम कैप्सूल में पानी पहुंचा, तो इसका मतलब होगा कि फिलाडेल्फिया शहर करीब 6 फीट पानी में डूब चुका है। और अगर ऐसा हुआ तो टाइम कैप्सूल नहीं, बल्कि पूरी दुनिया एक बड़े प्राकृतिक संकट से जूझ रही होगी। दुनिया के सबसे चर्चित टाइम कैप्सूल ————————————- ट्रम्प ने जन्मदिन पर व्हाइट हाउस में UFC फाइट कराई:अब तक का सबसे महंगा शो, ₹567 करोड़ खर्च; जीत के बाद विजेता राष्ट्रपति से मिला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 14 जून को व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में अल्टीमेट फाइटिंग चैम्पियनशिप यानी UFC मुकाबलों के साथ अपना 80वां जन्मदिन मनाया। UFC ने इस आयोजन पर करीब 6 करोड़ डॉलर (567 करोड़ रुपए) खर्च किए। ये अब तक का सबसे महंगा UFC आयोजन है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Income Tax Return: अगर आपके फॉर्म 16 में टैक्स जीरो है तो भी न करें ये भूल! इन 4 बड़े फायदों के लिए जरूर फाइल करें ITR

नौकरीपेशा लोगों के बीच अक्सर यह आम धारणा होती है कि अगर उनके फॉर्म 16 में कोई टैक्स नहीं कटा है या फिर कोई टैक्स देनदारी नहीं बनती है तो उन्हें इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की कोई जरूरत नहीं है। टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक फॉर्म 16 में टैक्स लायबिलिटी निल होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपको आईटीआर दाखिल करने से छूट मिल गई है। ऐसा न करना आपको भारी पड़ सकता है।

फॉर्म 16 नहीं है आपकी वित्तीय स्थिति की पूरी तस्वीर

King Stubb & Kasiva, Advocates and Attorneys के पार्टनर आदित्य भट्टाचार्य का कहना है कि एक आम गलतफहमी यह है कि अगर फॉर्म 16 में कोई टीडीएस या देय टैक्स नहीं है तो आईटीआर फाइल करने की जरूरत नहीं है। हालांकि, फॉर्म 16 सिर्फ इंप्लॉयर द्वारा भुगतान किए गए वेतन और काटे गए टैक्स (अगर कोई है तो) का एक रिकॉर्ड है। यह किसी व्यक्ति की पूरी वित्तीय तस्वीर को नहीं दर्शाता है। आईटीआर फाइल करने की अनिवार्यता इनकम टैक्स एक्ट के प्रावधानों, आपकी कुल आय और वित्तीय वर्ष के दौरान किए गए वित्तीय लेनदेन पर निर्भर करती है।

इन 4 बड़े फायदों के लिए जरूर फाइल करें ITR

भले ही आपके फॉर्म 16 में टैक्स जीरो दिख रहा हो लेकिन नीचे दी गई स्थितियों और फायदों के लिए आपको आईटीआर जरूर दाखिल करना चाहिए-

1- टैक्स रिफंड का दावा करने के लिए

कई बार ऐसा होता है कि बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के ब्याज पर टीडीएस काट लेते हैं या फिर नौकरी बदलने की स्थिति में पिछला इंप्लॉयर नौकरी छोड़ने से पहले टैक्स काट लेता है। भले ही वित्तीय वर्ष के अंत में आपकी कुल अंतिम टैक्स देनदारी शून्य ही क्यों न हो, लेकिन इस कटे हुए एक्स्ट्रा टैक्स को वापस पाने का एकमात्र जरिया आईटीआर है। बिना रिटर्न फाइल किए आप रिफंड क्लेम नहीं कर सकते।

2- वित्तीय घाटे को आगे बढ़ाने के लिए

अगर आप शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी से कोई कैपिटल लॉस उठाते हैं तो नियमों के तहत आप इस घाटे को भविष्य के मुनाफे के साथ एडजस्ट कर सकते हैं। यह लाभ आपको तभी मिलेगा जब आप निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना आईटीआर दाखिल करेंगे। डेडलाइन चूकने का मतलब है कि आप इस मूल्यवान टैक्स लाभ को हमेशा के लिए खो देंगे।

3- इन विशेष सरकारी शर्तों/नियमों को पूरा करने के लिए

टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार भले ही आपका अंतिम टैक्स शून्य हो लेकिन अगर आप वित्तीय वर्ष में निम्नलिखित में से किसी भी शर्त के दायरे में आते हैं तो आपके लिए आईटीआर फाइल करना कानूनी रूप से अनिवार्य हो जाता है:

  • एक या अधिक सेविंग्स बैंक अकाउंट्स में 50 लाख रुपये से अधिक जमा करना।
  • एक या अधिक करंट अकाउंट्स (चालू खातों) में 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक जमा करना।
  • अपने या किसी अन्य व्यक्ति के लिए विदेश यात्रा पर 2 लाख रुपये से अधिक खर्च करना।
  • एक वित्तीय वर्ष में 1 लाख रुपये से अधिक का बिजली बिल चुकाना।
  • अगर आप भारत के निवासी हैं और विदेशों में संपत्ति रखते हैं, किसी विदेशी संस्था में वित्तीय हित रखते हैं, विदेशी बैंक खाते में हस्ताक्षर करने का अधिकार रखते हैं या विदेशी संपत्तियों के लाभार्थी हैं।
  • वर्ष के दौरान कुल टीडीएस (TDS) या टीसीएस (TCS) 25000 रुपये या उससे अधिक हो (वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 50000 रुपये है)।
  • ऐसे प्रोफेशनल्स जिनकी कुल प्राप्तियां 10 लाख रुपये से अधिक हैं, भले ही उनकी टैक्स योग्य आय बुनियादी छूट सीमा से कम ही क्यों न हो।

4- लोन और वीजा के लिए पुख्ता इनकम प्रूफ

‘दिनेश आर्जव एंड एसोसिएट्स, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स’ की पार्टनर और एनआरआई टैक्स एक्सपर्ट प्रियल गोयल जैन कहती हैं कि कंप्लायंस के नजरिए से परे आपका आईटीआर चुपचाप आपके लिए दूसरी जगहों पर भी बहुत काम करता है। बैंक और वीजा कार्यालय अक्सर आय के प्रमाण के रूप में इसी दस्तावेज को मांगते हैं। इसलिए रिकॉर्ड में आईटीआर का होना बेहद फायदेमंद है, भले ही तकनीकी रूप से आपके लिए इसे फाइल करना जरूरी न रहा हो।

ऐसे में फॉर्म 16 में जीरो टैक्स देखकर आईटीआर न भरने की धारणा नुकसानदेह हो सकती है। ‘AQUILAW’ की लीड कंसलटेंट (टैक्स) – IDT डिंपल जोगानी के मुताबिक, फाइलिंग की आवश्यकता को नजरअंदाज करने से टैक्सपेयर्स न सिर्फ अपना रिफंड खो सकते हैं बल्कि नुकसान को कैरी फारवर्ड करने का मौका भी गंवा सकते हैं। अगर आयकर विभाग बाद में यह पाता है कि आपके लिए फाइलिंग अनिवार्य थी तो आपको स्पष्टीकरण के लिए नोटिस भी मिल सकता है। मामले के तथ्यों के आधार पर लेट फाइलिंग फीस, ब्याज या अन्य परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने अब ऐसी गलतफहमियों की गुंजाइश को खत्म कर दिया है। इंप्लॉयर, बैंकों, म्यूचुअल फंडों, स्टॉक एक्सचेंजों और अन्य वित्तीय संस्थानों से मिलने वाली जानकारी अब टैक्सपेयर के एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) में दिखाई देती है। इसके जरिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपके द्वारा किए गए वित्तीय लेनदेन की तुलना आपके रिटर्न में घोषित आय से आसानी से कर लेता है।

एक्सपर्ट्स की सलाह: सिर्फ फॉर्म 16 पर न रहें निर्भर

जैसे-जैसे टैक्स फाइलिंग का सीजन तेज हो रहा है विशेषज्ञ टैक्सपेयर्स को सलाह देते हैं कि वे ‘जीरो टीडीएस’ को ‘जीरो कंप्लायंस’ समझने की भूल न करें। सिर्फ फॉर्म 16 पर निर्भर रहने की बजाय, व्यक्तियों को अपनी आय के सभी स्रोतों की समीक्षा करनी चाहिए। अपने फॉर्म 26AS और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) की जांच करनी चाहिए। यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे आईटीआर फाइल करने की शर्तों के दायरे में आते हैं या नहीं।

त्योहार-शादी के सीजन में देश में हो सकती है चांदी की कमी, भाव 100 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है

अगर इंपोर्ट पर पाबंदी जारी रहती है तो देश में त्योहारों और शादी के सीजन में चांदी की कमी हो सकती है। आगे चांदी की डिमांड बढ़ने की संभावना है। मेटल्स फोकस में सीनियर कंसल्टेंट (साऊथ एशिया एंड मिडिल ईस्ट) हर्षल बरोट ने यह अनुमान जताया।

ज्यादातर तरह के सिल्वर के लिए लाइसेंस जरूरी

ज्यादातर एचएस कोड्स के तहत अभी सिल्वर के इंपोर्ट के लिए डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) से लाइसेंस जरूरी है। इसके चलते सिल्वर की नई सप्लाई हासिल करना मुश्किल हो गया है। इस वजह घरेलू बाजार की निर्भरता मौजूदा इनवेंट्रीज पर रिसाइक्ल्ड सिल्वर पर बढ़ गई है। एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में भी बिकवाली बढ़ी है। इससे प्रीमियम करीब 10 फीसदी रह गया है।

चांदी के पुराने स्टॉक से फिलहाल चल रहा काम

बारोट ने सीएनबीसी-टीवी18 से बातचीत में कहा, “मार्केट में सप्लाई कम है। नया मेटल उपलब्ध नहीं है। इसलिए मार्केट पहले से मौजूद स्टॉक से काम चला रहा है। कुछ रिसाइकल्ड सिल्वर बाजार में आ रहा है। लेकिन, नया इंपोर्ट अभी बहुत कम हो रहा है।” फिलहाल इसका ज्यादा असर नहीं दिख रहा, क्योंकि यह कमजोर डिमांड वाला सीजन है। लेकिन, अगस्त से हालात बदल सकते हैं। इसकी वजह यह है कि आम तौर पर त्योहार और शादी के सीजन से पहले खरीदारी शुरू हो जाती है।

अगस्त-सितंबर के बाद बढ़ने लगेगी चांदी की डिमांड

उन्होंने कहा, “हमें अगस्त-सितंबर के बाद डिमांड शुरू हो जाने की उम्मीद है। आम तौर पर तब भारत में त्योहारों और शादी का सीजन शुरू हो जाता है।” उन्होंने कहा कि अगर तब तक इंपोर्ट शुरू नहीं होता है तो मार्केट में असाधारण स्थिति बन सकती है। तब डिमांड ज्यादा होगी, लेकिन सप्लाई कम होगी। उन्होंने बताया कि ट्रेडर्स इंपोर्ट के वैकल्पिक रास्तों के बारे में सोच रहे हैं। इनमें सिल्वर डोर की सोर्सिंग शामिल है। अगर इंपोर्ट शुरू हो जाता है तो घरेलू प्रीमियम घट सकता है।

अगले साल 100 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है सिल्वर

अभी चांदी की घरेलू मांग कम है, लेकिन कीमतों में तेजी के बावजूद इंडस्ट्रियल मांग स्ट्रॉन्ग है। बारोट ने कहा कि इनवेस्टर्स सिल्वर को लेकर बुलिश हैं। ईटीएफ में कुछ बिकवाली के बावजूद चांदी में बड़ी बिकवाली देखने को नहीं मिली है। मेटल फोकस का मानना है कि अगले साल सिल्वर की कीमतों में तेजी दिखेगी। अगले 12 महीनों में सिल्वर की कीमतें 80-85 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं। उन्होंने कहा कि अगर पिछले साल की तरह डिमांड मजबूत रहती है तो चांदी 100 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है।

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8th Pay Commission extends deadline: 8वें वेतन आयोग ने अब 31 जुलाई की आखिरी डेडलाइन फिक्स की, सैलरी और भत्तों पर आया लेटेस्ट अपडेट!

केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की सैलरी, भत्तों और पेंशन को लेकर आठवें केंद्रीय वेतन आयोग से एक बड़ा अपडेट सामने आया है। वेतन आयोग ने विभिन्न श्रेणियों के सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और पेंशन ढांचे पर केंद्र शासित प्रदेशों, केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों से सिफारिशें और जरूरी डेटा लेने की आखिरी तारीख को एक बार फिर आगे बढ़ा दिया है। अब इसके लिए 31 जुलाई की डेडलाइन तय की गई है।

15 जून से बढ़ाकर 31 जुलाई की गई आखिरी तारीख

इससे पहले आठवें वेतन आयोग ने अपने आधिकारिक ऑनलाइन वेब पोर्टल के माध्यम से सुझाव और मेमोरेंडम जमा करने की अंतिम तिथि 15 जून निर्धारित की थी। वेतन आयोग द्वारा जारी किए गए एक सर्कुलर के मुताबिक चूंकि कई मंत्रालय, विभाग और केंद्र शासित प्रदेश तय समय सीमा के भीतर आवश्यक डेटा जमा करने का काम पूरा नहीं कर पाए थे, इसलिए यह निर्णय लिया गया है कि डेटा कलेक्शन पोर्टल के माध्यम से डेटा जमा करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 31 जुलाई, 2026 कर दिया जाए।

सिर्फ ऑनलाइन स्वीकार होंगे मेमोरेंडम

आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी मंत्रालयों और विभागों को अपने मेमोरेंडम विशेष रूप से आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ही जमा करने होंगे। आयोग ने साफ कहा है कि किसी भी तरह की हार्ड कॉपी स्वीकार नहीं की जाएगी। फिजिकल सबमिशन मान्य नहीं होंगे। ईमेल के जरिए भेजे गए सुझावों पर भी आयोग विचार नहीं कर सकता है।

अगले 10 वर्षों के लिए तैयार की जा रही हैं सिफारिशें

समय सीमा बढ़ाए जाने पर ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन के अध्यक्ष मनजीत सिंह पटेल का भी रिएक्शन सामने आया है। उन्होंने कहा कि जब पूरी स्पीड से काम चल रहा होता है तो आयोग के लिए भी समय सीमा को बार-बार आगे बढ़ाना आसान फैसला नहीं होता। उन्होंने कहा कि आठवें वेतन आयोग को देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और दूसरे हितधारकों की असल जरूरतों का विश्लेषण करने के लिए मंत्रालयों, विभागों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय स्वायत्त निकायों से संबंधित डेटा की जरूरत होती है। इसी डेटा के आधार पर आयोग अगले 10 वर्षों के लिए निष्पक्ष, व्यावहारिक और दूरदर्शी सिफारिशें पेश की जा सकेंगी।

लखनऊ, भुवनेश्वर और कोलकाता का दौरा करेगा वेतन आयोग

इस बीच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के चल रहे परामर्श दौरों के क्रम में आठवें वेतन आयोग ने अपने अगले दौर के दौरों का भी ऐलान कर दिया है। आयोग लखनऊ, भुवनेश्वर और कोलकाता के दौरे करेगा। भुवनेश्वपर में बैठक 6-7 जुलाई और कोलकाता में 9-10 जुलाई को तय की गई है।

आयोग से मिलने और अपॉइंटमेंट लेने के लिए केंद्रीय सरकारी संगठनों, संस्थानों, कर्मचारी संघों और यूनियनों को आयोग की वेबसाइट के माध्यम से एक ऑनलाइन अनुरोध जमा करना होगा।

इन राज्यों में पहले ही हो चुका है परामर्श

आठवां वेतन आयोग लगातार अलग अलग क्षेत्रों के हितधारकों के साथ बैठकें कर रहा है। हाल ही में आयोग ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद (तेलंगाना) और महाराष्ट्र में हितधारकों के साथ चर्चा की है। इससे पहले, आयोग ने 26 अप्रैल को उत्तराखंड के कर्मचारी संघों के साथ अपनी पहली बातचीत की थी।