E20 Petrol: क्या सच में एथेनॉल वाले पेट्रोल से कम हो जाता है गाड़ी का माइलेज और खराब होता है इंजन? इस डिटेल FAQ में हर सवाल का जवाब

देश में इस समय एथेनॉल और E20 पेट्रोल की काफी चर्चा हो रही है। E20 फ्यूल का मतलब है ऐसा पेट्रोल जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत साधारण पेट्रोल मिला होता है। देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की अफवाहें और भ्रामक दावे सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। कोई कह रहा है कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब हो जाता है, तो कोई दावा कर रहा है कि इससे गाड़ी का माइलेज बहुत कम हो जाता है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि E20 बनाने में हजारों लीटर पानी बर्बाद होता है।

वहीं इन दावों पर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने विस्तृत जानकारी जारी करते हुए कहा है कि ये बातें पूरी तरह गलत, बेबुनियाद और वैज्ञानिक तथ्यों से परे हैं। मंत्रालय ने ऑटोमोबाइल अनुसंधान संस्थानों और वाहन उद्योग से जुड़ी कई रिपोर्टों का हवाला देते हुए इन अफवाहों को खारिज किया है।

  • E20 पेट्रोल क्या है और इसकी इतनी चर्चा क्यों हो रही है?

E20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया जाता है। इथेनॉल एक जैव ईंधन (बायोफ्यूल) है, जिसे गन्ना, मक्का और अतिरिक्त चावल जैसी कृषि फसलों से तैयार किया जाता है। सरकार का कहना है कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को घटाना और देश में जैव ईंधन के उत्पादन को बढ़ावा देना है।

भारत ने दिसंबर 2025 तक पूरे देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल कर लिया, जबकि यह लक्ष्य पहले 2030 तक पूरा करना था। इसके बाद सोशल मीडिया पर ई20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि इसका गाड़ी के इंजन, माइलेज, वारंटी और लंबे समय तक वाहन के प्रदर्शन पर क्या असर पड़ेगा।

  • क्या E20 पेट्रोल से इंजन खराब होता है या माइलेज कम हो जाता है?

केंद्र सरकार ने उन दावों को गलत बताया है, जिनमें कहा जा रहा है कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब हो जाता है या गाड़ी का माइलेज बहुत कम हो जाता है। सरकार ने बताया कि इस विषय पर ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई), इंडियन ऑयल, भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (देहरादून) और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) ने मिलकर अध्ययन किया था। इसमें अलग-अलग तरह के वाहनों पर E20 पेट्रोल की जांच की गई।

स्टडी के अनुसार, कारों पर 40,000 किलोमीटर और दोपहिया वाहनों पर 20,000 किलोमीटर तक किए गए टेस्च में इंजन की एफिशिएंसी, गाड़ी स्टार्ट होने या धातु और प्लास्टिक के पुर्जों पर कोई बड़ी समस्या नहीं मिली। हालांकि, कुछ पुराने मॉडल की गाड़ियों में रबर के कुछ हिस्सों और गैस्केट को पहले बदलने की जरूरत पड़ सकती है।

केंद्र सरकार का कहना है कि ई20 पेट्रोल, सामान्य पेट्रोल की तुलना में कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन जैसे प्रदूषकों का उत्सर्जन कम करता है। सरकार के अनुसार, इथेनॉल की ऑक्टेन क्षमता अधिक होने के कारण ई20 के लिए तैयार किए गए वाहनों में इंजन की नॉकिंग कम होती है, गाड़ी की रफ्तार बेहतर होती है और ड्राइविंग का अनुभव भी अच्छा रहता है।

माइलेज को लेकर सरकार ने कहा है कि E20 पेट्रोल से बहुत ज्यादा माइलेज घटने की बातें सही नहीं हैं। मंत्रालय के मुताबिक, किसी भी गाड़ी का माइलेज सिर्फ ईंधन पर नहीं, बल्कि चलाने के तरीके, टायर में सही हवा, समय पर सर्विस और एयर कंडीशनर के इस्तेमाल जैसी कई बातों पर निर्भर करता है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी कहा कि रेसिंग कारों में लंबे समय से इथेनॉल का इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि इससे गाड़ी का प्रदर्शन बेहतर होता है और इंजन की नॉकिंग कम होती है। उन्होंने माना कि माइलेज में हल्की कमी आ सकती है, लेकिन इसके बारे में पहले से ही साफ जानकारी दी गई है।

  • क्या E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से गाड़ी का बीमा या वारंटी खत्म हो जाएगी?

केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से गाड़ी का बीमा या कंपनी की वारंटी खत्म नहीं होती। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, बीमा कंपनियों और वाहन बनाने वाली कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि अगर वाहन कंपनी के तय मानकों के अनुसार ई20 पेट्रोल के लिए उपयुक्त है, तो इस ईंधन के इस्तेमाल से बीमा या वारंटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार ने सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) का भी हवाला दिया है। सियाम के अनुसार, ई20 पेट्रोल के अनुकूल वाहनों पर कंपनी की वारंटी पहले की तरह लागू रहेगी और ग्राहकों को किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

  • क्या इथेनॉल बनाने में बहुत ज़्यादा पानी का इस्तेमाल होता है?

सरकार का कहना है कि एक लीटर इथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी लगने का दावा सही नहीं है। सरकार के मुताबिक, धान की खेती में इस्तेमाल होने वाले पूरे पानी को इथेनॉल उत्पादन से जोड़ना गलत है, क्योंकि धान और गेहूं की खेती सबसे पहले देश की खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए की जाती है। जब जरूरत से ज्यादा चावल बच जाता है, तभी उसका इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में किया जाता है।

सरकार का यही कहना गन्ने के मामले में भी है। उसके अनुसार, पहले देश में चीनी की जरूरत पूरी की जाती है और उसके बाद ही अतिरिक्त गन्ने या उससे बने कच्चे माल का उपयोग इथेनॉल बनाने के लिए किया जाता है।

सरकार ने यह भी बताया कि अब इथेनॉल बनाने में मक्के को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि मक्का उगाने में धान के मुकाबले काफी कम पानी लगता है। फिलहाल इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल में मक्के की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है।

सरकार के अनुसार, इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया के दौरान एक लीटर इथेनॉल तैयार करने में आमतौर पर केवल 3 से 5 लीटर पानी की जरूरत होती है। इसके अलावा कई आधुनिक कारखानों में पानी को दोबारा इस्तेमाल करने की तकनीक अपनाई जाती है, जिससे पानी की खपत और भी कम हो जाती है।

  • EBP प्रोग्राम से क्या फायदे हुए हैं?

सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) योजना से देश को आर्थिक और पर्यावरण दोनों स्तर पर बड़े फायदे हुए हैं। सरकार के मुताबिक, साल 2014-15 के बाद इस योजना की वजह से 1.90 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई गई है। साथ ही किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।

सरकार के अनुसार, इस योजना से करीब 930 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का उत्सर्जन कम हुआ है और 310 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा कच्चे तेल की जगह इथेनॉल का इस्तेमाल किया गया है। इससे पेट्रोलियम पर देश की निर्भरता घटाने में भी मदद मिली है।

सरकार ने यह भी बताया कि इथेनॉल उत्पादन की सालाना क्षमता 2013-14 में करीब 38 करोड़ लीटर थी, जो अब बढ़कर लगभग 2,000 करोड़ लीटर हो गई है। सरकार का कहना है कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत से ज्यादा इथेनॉल मिलाने का फैसला तभी लिया जाएगा, जब वैज्ञानिक जांच, परीक्षण और वाहन कंपनियों से चर्चा के बाद संबंधित विशेषज्ञ संस्था की मंजूरी मिल जाएगी।

Raksha Bandhan 2026 Date: इस साल कब मनाया जाएगा भाई-बहन के प्रेम का पर्व राखी? जानें सही तारीख, मुहूर्त और भद्रा रहेगी या नहीं

Raksha Bandhan 2026 Date: रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक पर्व है। हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष स्थान है। यह त्योहार हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं, उन्हें तिलक लगा कर मिठाई खिलाती हैं और उनकी सुरक्षा की कामना करती हैं। ‘रक्षाबंधन’ का अर्थ है “रक्षा का बंधन” या “सुरक्षा का धागा”, जिसे राखी के रूप में बहनें अपने भाइयों की कलाई पर बांधती हैं। माना जाता है कि यह सुरक्षा का धागा भाइयों की हर विपत्ति से रक्षा करता है और उनके जीवन पर आने वाले संकट को दूर करता है।

राखी बंधवाने के बाद भाई अपनी बहनों को हर संकट से बचाने का वचन देते हैं। इस पर्व पर भाई अपनी बहनों को प्रेम स्वरूप कुछ उपहार या शगुन देते हैं और उनका मुंह मीठा कराया जाता है। इस वर्ष का रक्षाबंधन बेहद खास और शुभ है क्योंकि राखी बांधने के समय पर भद्रा का कोई साया नहीं रहेगा। इस साल रक्षाबंधन को बहुत खास माना जा रहा है, क्योंकि पंचांग के अनुसार इस पर्व पर भद्रा का साया नहीं है। भद्रा काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। लेकिन इस साल बहनों के लिए पूरा दिन अच्छा और पवित्र है। आइए जानें इस साल यह पर्व किस दिन मनाया जाएगा और राखी बांधने के शुभ मुहूर्त क्या रहेंगे?

कब है रक्षाबंधन का पर्व?

पंचांग के अनुसार, इस साल श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 27 अगस्त 2026 को सुबह 09:08 बजे से होगी। इस तिथि का समापन 28 अगस्त 2026 को सुबह 09:48 बजे होगा। उदया तिथि को देखते हुए इस साल रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा।

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

इस साल पूर्णिमा तिथि सुबह 09:48 बजे समाप्त हो रही है, इसलिए सुबह का समय सबसे उत्तम माना गया है:

सुबह का मुहूर्त : सुबह 05:57 बजे से सुबह 09:48 बजे तक

कुल अवधि : लगभग 3 घंटे 51 मिनट

राहुकाल : सुबह 10:46 से दोपहर 12:22 तक

अगर इस समय राखी न बांध पाएं तो?

किसी कारणवश अगर आप सुबह राखी नहीं बांध पाती हैं, तो दोपहर 01:30 बजे से शाम 04:00 बजे के बीच भी राखी बांध सकती हैं।

रखाबंधन पर नहीं रहेगा भद्र का साया

शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में राखी बांधना पूरी तरह वर्जित होता है। लेकिन इस साल आपको भद्रा को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। 2026 में भद्रा काल रक्षाबंधन के दिन सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगा। इसलिए 28 अगस्त की सुबह जब आप सोकर उठेंगे, तब तक भद्रा पूरी तरह समाप्त हो चुकी होगी और पूरा दिन धार्मिक अनुष्ठानों के लिए एकदम शुभ रहेगा।

Bhadli Navami 2026: 22 या 23 जुलाई, कब है भड़ली नवमी? जानें सही तारीख, धार्मिक महत्व और इस दिन के अबूझ मुहूर्त

EPF Scheme 2026: 1 साल के अंदर छोड़ दी नौकरी तो क्या निकाल सकते हैं PF का पूरा पैसा? समझिए एलिजिबल मेंबर बैलेंस और टैक्स का पूरा नियम

EPF Scheme 2026: केंद्र सरकार ने नई कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योजना, 2026 को नोटिफाई कर दिया है। इसके तहत ईपीएफ खातों से आंशिक निकासी को लेकर एक आसान और नया फ्रेमवर्क पेश किया गया है। आपको बता दें कि सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के तहत नोटिफाई की गई यह नई स्कीम छह दशक पुरानी ईपीएफ योजना, 1952 की जगह लागू हुई है।

नए नियमों में पीएफ सदस्यों को अपनी अलग-अलग जरूरतों के लिए अपने एलिजिबल बैलेंस का 100 प्रतिशत तक हिस्सा निकालने की इजाजत है। इसके अलावा एक नया नियम भी जोड़ा गया है। इस नियम के तहत अब हर सदस्य को अपने ईपीएफ खाते में एक न्यूनतम बैलेंस बनाए रखना अनिवार्य होगा।

क्या बदल रहा है निकासी का नियम?

नए नियमों के तहत ईपीएफ सदस्य आंशिक निकासी के लिए डेजिगनेटेड पोर्टल से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यहां जानना जरूरी है कि ये विड्रॉल एक जरूरी शर्त के अधीन होगा। योजना के नियमों के मुताबिक कमिश्नर निर्दिष्ट पोर्टल पर किसी सदस्य के आवेदन पर आंशिक निकासी को मंजूरी दे सकता है, जो कि सदस्य के खाते में न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने की आवश्यकता के अधीन होगा। नई योजना में इस मिनिमम बैलेंस को पहली बार परिभाषित किया गया है।

क्या होता है Eligible Member Balance और Minimum Balance?

नोटिफिकेशन के मुताबिक मिनिमम बैलेंस का गणित कुछ इस तरह तय किया गया है। न्यूनतम बैलेंस का मतलब उस राशि से है जो सदस्य के खाते में जमा कुल योगदान (जिसमें कर्मचारी और कंपनी दोनों का हिस्सा और उस पर मिलने वाला ब्याज शामिल है) के 25 प्रतिशत के बराबर हो। किसी भी आंशिक निकासी का लाभ देने के बाद यह राशि सदस्य के खाते में अनिवार्य रूप से बची रहनी चाहिए। आसान शब्दों में कहें तो आपकी अब तक की कुल ईपीएफ बचत (आपका योगदान + कंपनी का योगदान + ब्याज) का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा विड्रॉल के बाद भी आपके खाते में ब्लॉक रहेगा।

इस अनिवार्य 25 प्रतिशत मिनिमम बैलेंस को घटाने के बाद जो रकम बचती है उसे एलिजिबल मेंबर बैलेंस कहा जाता है। कोई भी कर्मचारी सिर्फ इसी एलिजिबल मेंबर बैलेंस को ही खाते से निकाल सकता है।

1 साल के अंदर नौकरी छोड़ने पर क्या हैं नियम?

यह योजना उन कर्मचारियों को बड़ी राहत देती है जो अपनी नौकरी शुरू करने के 12 महीने पूरे होने से पहले ही काम छोड़ देते हैं। नए नियमों के मुताबिक कोई सदस्य 1 साल के अंदर भी नौकरी छोड़ देता है तो भी वह अपने पीएफ के पार्शियल विड्रॉल का हकदार होगा। हालांकि ऐसा सदस्य सिर्फ विड्रॉल की तारीख तक उपलब्ध अपने एलिजिबल मेंबर बैलेंस की सीमा तक ही पैसा निकाल सकेगा।

कब और किन जरूरतों के लिए निकाल सकते हैं 100% एलिजिबल बैलेंस?

ईपीएफ की कुल 12 महीने की सदस्यता पूरी करने के बाद, सदस्य अपनी अलग अलग व्यक्तिगत और पारिवारिक जरूरतों के लिए अपने एलिजिबल मेंबर बैलेंस का 100 प्रतिशत तक हिस्सा निकाल सकते हैं। इन जरूरतों में नीचे दी गई बातें शामिल हैं-

खुद या परिवार का इलाज

खुद या परिवार में शिक्षा

खुद या परिवार में शादी

घर या फ्लैट खरीदना

घर बनाने के लिए जमीन खरीदना

घर का निर्माण करना

होम लोन चुकाना

मौजूदा घर का रेनोवेशन/सुधार करना

इसके अलावा विशेष परिस्थितियों में भी 12 महीने की सदस्यता पूरी होने के बाद 100% एलिजिबल मेंबर बैलेंस निकालने की अनुमति दी जा सकती है।

कितनी बार निकाला जा सकता है पैसा?

नई योजना में इस बात की भी सीमा तय की गई है कि कोई सदस्य अपनी पूरी सदस्यता के दौरान अलग-अलग उद्देश्यों के लिए कितनी बार पैसा निकाल सकता है-

शिक्षा के लिए: पूरी सदस्यता के दौरान अधिकतम 10 बार विड्रॉल

शादी के लिए: पूरी सदस्यता के दौरान अधिकतम 5 बार विड्रॉल

घर/आवास संबंधी काम के लिए: अधिकतम 5 बार विड्रॉल।

विशेष परिस्थितियों में: एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 2 बार विड्रॉल।

क्यों जरूरी है मिनिमम बैलेंस का यह नया नियम?

इससे पहले लागू ईपीएफ निकासी के नियम अलग-अलग उद्देश्यों और अलग-अलग शर्तों से जुड़े होते थे जिसके कारण कई मामलों में सदस्य अपने खाते का अधिकांश बैलेंस निकाल लेते थे। नया फ्रेमवर्क एलिजिबल मेंबर बैलेंस की एक समान अवधारणा को लागू करके पूरे विड्रॉल प्रोसेस निकासी प्रक्रिया को स्टैंडराइज करता है। इसके साथ ही यह नियम यह भी सुनिश्चित करता है कि कर्मचारियों की रिटायरमेंट बचत का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा हमेशा इन्वेस्टेड रहे ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रहे।

यह भी पढ़ें: सरकार जल्द नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम का कर सकती है ऐलान, जानिए क्या है पूरा प्लान

JPSC PCS Pre Result 2026: जेपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर चेक करें रिजल्ट, 18 से 20 जुलाई के बीच होगी मुख्य परीक्षा

JPSC PCS Pre Result 2026: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की संयुक्त असैनिक सेवा (PCS) प्रारंभिक परीक्षा 2025 देने वाले उम्मीदवारों के लिए बड़ी खुशखबरी है। आयोग ने प्री परीक्षा के रिजल्ट का इंतजार खत्म करते हुए आधिकारिक वेबसाइट jpsc.gov.in पर नतीजे घोषित कर दिए हैं। इस परीक्षा में शामिल उम्मीदवार यहां से अपना रिजल्ट देख सकते हैं। आयोग ने रिजल्ट पीडीएफ फॉर्मेट में जारी किया है। इस परीक्षा में सफल उम्मीदवार अब जेपीएससी पीसीएस मुख्य परीक्षा में शामिल होने के योग्य होंगे।

जेपीएससी ने प्रीलिम्स परीक्षा का परिणाम पीडीएफ फॉर्मेट में जारी किया है। इसमें उन सभी अभ्यर्थियों के रोल नंबर दिए गए हैं, जिन्होंने मुख्य परीक्षा के लिए क्वालिफाई किया है। रिजल्ट घोषित करने के साथ ही आयोग ने इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार मेंस परीक्षा के लिए 9 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवार आयोग की वेबसाइट पर जाकर अपना रिजल्ट डाउनलोड कर सकते हैं और मुख्य परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं।

9 जुलाई तक करें मेन्स के आवेदन

जेपीएससी ने पीसीएस प्री परीक्षा 2026 में सफल उम्मीदवारों के लिए मुख्य परीक्षा का ऑनलाइन आवेदन शुरू कर दिया है। आवेदन लिंक आज से एक्‍टिव है और योग्य उम्मीदवार 9 जुलाई 2026 तक इसके जरिए आवेदन कर सकेंगे।

मुख्य परीक्षा 18 से 20 जुलाई के बीच होगी

जेपीएससी के पीसीएस परीक्षा के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार मुख्य परीक्षा 18, 19 और 20 जुलाई 2026 को आयोजित की जाएगी। परीक्षा दो शिफ्ट में होगी। पहली शिफ्ट सुबह 10:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक और दूसरी शिफ्ट दोपहर 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक आयोजित की जाएगी।

जेपीएससी प्री रिजल्ट 2026 कैसे डाउनलोड करें

  • सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइअ jpsc.gov.in पर जाएं।
  • होमपेज पर P.T.Result of the Recruitment of Jharkhand Combined Civil Services Examination (Regular)-2025 लिंक पर क्लिक करें।
  • लिंक खुलते ही मेरिट लिस्ट पीडीएफ स्क्रीन पर दिखाई देगी।
  • उम्मीदवार इसमें अपना रोल नंबर खोज सकते हैं।
  • भविष्य की जरूरत के लिए रिजल्ट का प्रिंट आउट या पीडीएफ अपने पास सुरक्षित रखें।

अफवाहों और फेक न्यूज से बचें

झारखंड लोक सेवा आयोग ने उम्मीदवारों को अफवाहों और फेक न्यूज से सतर्क रहने को कहा है। आयोग ने परीक्षार्थियों को परीक्षा से जुड़ी सभी नई सूचनाओं और अपडेट के लिए नियमित रूप से आयोग की आधिकारिक वेबसाइट देखने की सलाह दी है।

RPSC Exam Calendar 2026: आरपीएससी ने आरएएस परीक्षा की तारीखें बदलीं, नया शेड्यूल में 6 दिसंबर को होगी प्री परीक्षा

थाइलैंड में बच्चे ने 10 बौद्ध भिक्षुओं को कुचला, VIDEO:बिना इजाजत पिता का पिकअप ट्रक चला रहा था, 10 किमी चलाने के बाद कंट्रोल खोया

थाईलैंड के मुकदाहन शहर में गुरुवार को एक बच्चे ने पिकअप ट्रक से बौद्ध भिक्षुओं के जुलूस को कुचल दिया। जिसमें कम से कम 10 भिक्षुओं की मौत हो गई और 5 गंभीर रूप से घायल है। पुलिस के मुताबिक, 11 साल का एक लड़का अपने माता-पिता का पिकअप ट्रक बिना इजाजत लेकर निकला था। करीब 10 किलोमीटर चलाने के बाद उसने वाहन से नियंत्रण खो दिया और तीर्थयात्रा पर निकले भिक्षुओं के जुलूस में जा घुसा। यह हादसा स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 11 बजे हुआ। भिक्षुओं का समूह सड़क किनारे एक लाइन में पैदल चल रहा था। स्थानीय रेस्क्यू संगठन की ओर से जारी CCTV फुटेज में पिकअप ट्रक तेज रफ्तार में जुलूस को टक्कर मारता नजर आया। 35 भिक्षु और पांच श्रद्धालु तीर्थयात्रा पर निकले थे थाईलैंड की 93% से ज्यादा आबादी बौद्ध धर्म को मानती है। सार्वजनिक धार्मिक यात्राएं और जुलूस आम बात हैं। मुकदाहन के गवर्नर वोरायन बुन्नारात के मुताबिक, गुरुवार को कुल 35 बौद्ध भिक्षु और पांच आम श्रद्धालु एक मंदिर से दूसरे मंदिर तक पैदल तीर्थयात्रा कर रहे थे। यात्रा शुरू होने के कुछ ही समय बाद यह हादसा हो गया। अधिकारियों के अनुसार, पांच भिक्षुओं की मौत मौके पर हुई, जबकि अन्य ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। कई घायलों का इलाज चल रहा है। मुकदाहन अस्पताल ने घायलों के इलाज के लिए लोगों से तत्काल रक्तदान की अपील भी की है। बच्चे के परिजनों ने पुलिस को पिकअप ट्रक न होने की सूचना दी पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि लड़का घर पर अकेला था। वह उस दिन अस्वस्थ होने के कारण स्कूल नहीं गया था। इसी दौरान उसने अपने माता-पिता का पिकअप ट्रक बिना अनुमति ले लिया। जब परिजनों को पिकअप घर पर नहीं मिली तो उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी। पुलिस ने हादसे के बाद वाहन को जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। पुलिस ने अभी तक कोई केस दर्ज नहीं किया प्रांतीय पुलिस प्रमुख मेजर जनरल पैरोज थाइफुत्सा ने कहा कि लड़का नाबालिग है। फिलहाल उससे पूछताछ नहीं हो सकी है क्योंकि वह सदमे में है और बयान देने की स्थिति में नहीं है। इसी वजह से अभी तक कोई आरोप तय नहीं किया गया है। पुलिस पूरे मामले की कानूनी प्रक्रिया और हादसे की परिस्थितियों की जांच कर रही है। बाद में BBC से बातचीत में पुलिस प्रमुख ने कहा कि लड़के की देखभाल उसके अभिभावकों, डॉक्टर और अन्य अधिकारियों की टीम कर रही है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक वह विशेष जरूरतों वाला बच्चा हो सकता है, हालांकि इस बारे में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। थाईलैंड दुनिया के सबसे ज्यादा सड़क हादसों वाले देशों में शामिल है। WHO के मुताबिक, हर साल सड़क दुर्घटनाओं में करीब 18 हजार लोगों की मौत होती है। हालांकि इस मामले में हादसे की वास्तविक वजह का पता पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।

सरकार जल्द नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम का कर सकती है ऐलान, जानिए क्या है पूरा प्लान

सरकार नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम का ऐलान कर सकती है। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने यह बताया। इस बारे में आधिकारिक घोषणा दो हफ्ते के अंदर हो सकती है। सूत्रों ने बताया कि इस स्कीम के तहत 1,000 टन से ज्यादा सोना आने की उम्मीद है।

नई स्कीम में ज्वेलर्स होंगे कलेक्शन पार्टनर्स

देशभर के ज्वेलर्स को नई स्कीम में बतौर ‘कलेक्शन पार्टनर्स’ शामिल किया जा सकता है। उन्हें परिवारों से गोल्ड डिपॉजिट लेने की इजाजत होगी। पहले सिर्फ बैंकों को इसकी इजाजत थी। ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) ने कहा, “प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम में बतौर कलेक्शन पार्टनर्स शामिल किया जा सकता है।”

गोल्ड के इंपोर्ट में कमी लाने में मिल सकती है मदद

देश में ज्वेलर्स से जुड़ी संस्थाओं ने सरकार से गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम में बदलाव करने की गुजारिश की है। गोल्ड का इंपोर्ट घटाने के लिए उनका जोर ऐसे सॉल्यूशंस पर है, जिसका खराब असर इस सेक्टर से जुड़े लोगों की रोजीरोटी पर नहीं पड़े। अगर देश में परिवारों में रखा 5 फीसदी सोना भी मॉनेटाइज होता है तो इससे 90 अरब डॉलर की लिक्विडिटी मुमकिन हो सकती है।

पीएम मोदी ने की थी सोना नहीं खरीदने की अपील

हाल में प्रधानमंत्री ने देश के लोगों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की थी। इंडिया दुनिया में सोने की सबसे ज्यादा खपत वाले देशों में शामिल है। भारत में ज्वेलरी के साथ ही सुरक्षित निवेश के लिए लोग सोना खरीदते हैं। ज्वेलरी के खरीदने से सोने का ज्यादा इस्तेमाल नहीं हो पाता है। इसलिए गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम के जरिए काफी सोना आ सकता है।

2015 में हुई थी गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम की शुरुआत

सरकार ने 2015 में गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम (GMS) की शुरुआत की थी। इसका मकसद सोने के इंपोर्ट में कमी लाकर करेंट अकाउंट डेफिसिट को घटाना था। इनवेस्टर्स को फिजिकल गोल्ड खरीदने की जगह गोल्ड स्कीम का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। इनवेस्टर्स अपना सोना बैंक लॉकर्स में डिपॉजिट कर 2.25 से 2.5 फीसदी इंटरेस्ट कमा सकते हैं। विड्रॉल के समय इनवेस्टर्स के पास फिजिकल गोल्ड या उसके बराबर पैसा वापस लेने की इजाजत थी।

पुरानी स्कीम में 10 सालों में सिर्फ 38 टन सोना आया

स्कीम की शुरुआत के 10 साल बाद तक सिर्फ 38 टन सोना ही आ सका। यह इंडिया में परिवारों के पास रखे कुल सोना का बहुत कम हिस्सा है। इंडिया में परिवारों के पास 25,000 टन सोना होने का अनुमान है। सरकार ने स्कीम में मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म डिपॉजिट रोक दी थी। इस स्कीम में इनवेस्टर्स को इंटरेस्ट का पेमेंट सरकार करती है। इस वजह से यह स्कीम सरकार के लिए नुकसानदेह रही।

पुरानी स्कीम में सरकार को उठाना पड़ा लॉस

ट्रेडबुल्स सिक्योरिटीज के भाविक पटेल ने कहा, “आखिर में सरकार को इस स्कीम में लॉस उठाना पड़ा। सरकार को सोने की कीमतों में आए तेजी का बोझ उठाना पड़ता था। साथ ही उसे इनवेस्टर्स को सालाना 2 फीसदी इंटरेस्ट चुकाना पड़ता था।” यह स्कीम हेज्ड (Hedged) नहीं थी, जिससे विड्रॉल के समय सरकार को सोने की कीमतों में हुई वृद्धि का बोझ उठाना पड़ता था।

यह भी पढ़ें: Gold Price Today: चीन क्यों धड़ाधड़ खरीदने लगा सोना जबकि भारत में गोल्ड पर्चेज की रफ्तार पर लगा ब्रेक! अंदर की खबर ये है 

इन वजहों से असफल रही पुरानी स्कीम

इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि स्ट्रक्चरल वजहों से गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम विफल रही। AIJGF ने कहा कि इस स्कीम में दिलचस्पी दिखाने के लिए बैंकों को किसी तरह के इनसेंटिव की व्यवस्था नहीं थी। नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम से गोल्ड के इंपोर्ट पर निर्भरता में कमी आ सकीत है। साथ ही घरों में बेकार पड़े सोने का इस्तेमाल इकोनॉमी के हित में हो सकेगा।

Stock Market Rise: लगातार तीसरे दिन हरियाली, सेंसेक्स 262 अंक चढ़ा; निवेशकों की दौलत में ₹94270 करोड़ का इजाफा

शेयर बाजार में शुक्रवार, 3 जुलाई को लगातार तीसरे दिन तेजी रही। आईटी स्टॉक्स में बढ़त और अमेरिका के रोजगार आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहने के बीच सेंसेक्स और निफ्टी हरे निशान में बंद हुए। सेंसेक्स बढ़त में खुलने के बाद पिछली क्लोजिंग से 655 अंक से ज्यादा चढ़कर 78,157.52 के हाई तक गया। इसी तरह निफ्टी भी बढ़त में खुला और फिर 200 अंक से ज्यादा उछलकर 24,378.15 के हाई तक गया। बाद में सेंसेक्स 261.79 अंकों की तेजी के साथ 77,763.91 पर और निफ्टी 95.15 अंकों की बढ़त के साथ 24,270.85 पर बंद हुआ।

मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप बढ़कर 4,80,19,994.09 करोड़ रुपये हो गया। गुरुवार, 2 जुलाई को मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,79,25,723.825 करोड़ रुपये रहा था। यानि कि एक दिन में 94,270.265 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। गुरुवार को सेंसेक्स 579.48 अंक या 0.75 प्रतिशत बढ़कर 77,502.12 पर बंद हुआ था। निफ्टी 169.85 अंक या 0.71 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,175.70 पर बंद हुआ था।

इन प्रमुख वजहों से तेजी

अमेरिका में नौकरियों का डेटा उम्मीद से कमजोर रहने से फेडरल रिजर्व द्वारा निकट अवधि में बेंचमार्क ब्याज दरें बढ़ाए जाने को लेकर चिंता कम हुई। इससे उभरते बाजारों में जोखिम लेने की इच्छा बढ़ी। इसके अलावा एशियाई बाजारों में तेजी का भी घरेलू बाजार में सेंटिमेंट बे​हतर होने में हाथ रहा। निक्केई-225 में 1.3 प्रतिशत और सेट कंपोजिट में 1.1 प्रतिशत की तेजी है। जकार्ता कंपोजिट 2 प्रतिशत से ज्यादा उछला है। KOSPI 5.4 प्रतिशत चढ़ा है। हेंगसेंग में भी लगभग 1 प्रतिशत की तेजी है। एक वजह यह भी है कि मार्केट के उतार-चढ़ाव को दर्शाने वाले India VIX में लगभग 4 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह दर्शाता है कि बाजार में अनिश्चितता और जोखिम की आशंका कम हुई है, जो आमतौर पर इक्विटी बाजार के लिए अच्छा माना जाता है।

Waterways Leisure Tourism में और 10% तेजी की लहर, लगातार दूसरे दिन अपर सर्किट

रुपये की चाल

रुपया शुक्रवार को 14 पैसे मजबूत होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.21 (अस्थायी) पर रहा। डॉलर सूचकांक के पिछले 15 महीनों के उच्च स्तर से नीचे आने से घरेलू मुद्रा को बल मिला। रुपया गुरुवार को 19 पैसे की गिरावट के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.35 पर बंद हुआ था।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Totapuri Mango Price Crash: तोतापरी आम के दामों में भारी गिरावट की टेंशन! अब इसके लिए हाई लेवल कमेटी का ऐलान

आंध्र प्रदेश में तोतापरी आम की कीमतों में आई भारी गिरावट और इसके कारण किसानों के बीच पैदा हुए संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने इस समस्या के अध्ययन के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तहत एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में आंध्र प्रदेश का दौरा किया था। इस दौरे के दौरान किसानों ने उनके सामने पिछले कुछ महीनों में तोतापरी आम की कीमतों में आई भारी गिरावट का मुद्दा उठाया था। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक किसानों ने बताया कि मुख्य रूप से प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के लिए उगाए जाने वाले इस आम के दाम गिरने से उनकी इनकम पर बहुत बुरा असर पड़ा है। किसानों की इसी चिंता को देखते हुए कृषि मंत्री ने कमेटी गठन करने का आदेश जारी किया।

वैल्यू चेन की पूरी समीक्षा करेगी वैज्ञानिकों की कमेटी

कृषि मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक वैज्ञानिकों और संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधियों को मिलाकर बनाई गई यह कमेटी तोतापरी आम की पूरी वैल्यू चेन की विस्तृत समीक्षा करेगी। इस समीक्षा के दायरे में नीचे दिए गए विषय शामिल होंगे-

तोतापरी आम की खेती

  • प्रोसेसिंग
  • मार्केटिंग
  • घरेलू व्यापार
  • निर्यात

इसके साथ ही यह पैनल किसानों की कमाई में सुधार करने और इस पूरे सेक्टर को एक टिकाऊ व मजबूत स्थिति में लाने के लिए जरूरी उपायों के सुझाव भी देगा।

डॉ टी दामोदरन संभालेंगे कमेटी की कमान

लखनऊ स्थित ICAR-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान से जारी आदेश के मुताबिक इस उच्च स्तरीय समिति की कमान डॉ टी दामोदरन (निदेशक, ICAR-CISH) को सौंपी गई है। वही इसके अध्यक्ष होंगे। कमेटी में इनके अलावा डॉ. एम शंकरण, प्रमुख, फल फसल प्रभाग, ICAR-IIHR, बेंगलुरु, डॉ. एच एस सिंह, प्रधान वैज्ञानिक, ICAR-CISH, डॉ. डी श्रीनिवास रेड्डी, प्रोफेसर, कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर (अनंतराजुपेटा), डॉ. वाईएसआर हॉर्टिकल्चरल यूनिवर्सिटी, आंध्र प्रदेश के बागवानी निदेशक या उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि शामिल होंगे।

10 दिनों के भीतर ग्राउंड जीरो पर जाएगी कमेटी

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कमेटी को निर्देश दिया है कि वे अगले 10 दिनों के भीतर आंध्र प्रदेश के प्रमुख तोतापरी उत्पादक क्षेत्रों का दौरा करें। ग्राउंड लेवल की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए कमेटी को किसानों, प्रोसेसर्स, निर्यातकों, राज्य के बागवानी अधिकारियों और किसान उत्पादक संगठनों के साथ सीधा परामर्श करने के लिए कहा गया है।

सरकार को सौंपी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट

अपने फील्ड स्टडी और सभी पक्षों के साथ किए गए विचार-विमर्श के आधार पर यह कमेटी कृषि मंत्रालय को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। इस रिपोर्ट में कीमतों को स्थिर करने, वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देने, प्रोसेसिंग व एक्सपोर्ट क्षमता को मजबूत करने के लिए अहम सिफारिशें शामिल होंगी। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार द्वारा मिलकर की जाने वाली संयुक्त कार्रवाई के लिए FPOs, प्रोसेसर्स और निर्यातकों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने का रोडमैप भी सुझाया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री चौहान ने साफ तौर पर कहा है कि तोतापरी उत्पादकों की आय और उनकी आजीविका की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। कमेटी की रिपोर्ट और निष्कर्षों के आधार पर किसानों की मदद करने, वैल्यू एडिशन को बढ़ाने और इस सेक्टर में निर्यात व निवेश के अवसरों का विस्तार करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। आपको बता दें कि आंध्र प्रदेश में इस समय तेलुगु देशम पार्टी (TDP) की सरकार है। टीडीपी केंद्र और राज्य दोनों ही जगहों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की एक बेहद महत्वपूर्ण सहयोगी पार्टी है।

धरती के वो अनछुए कोने खामोश वादियां गूंजते राज, जहां नहीं पड़े इंसानी कदम आज तक!

दुनिया में कुछ ऐसी जगहें भी हैं, जिन्हें देखकर पहली नजर में यकीन करना मुश्किल हो जाता है। कहीं झील के बीच तैरते हुए द्वीप हैं, तो कहीं ऐसी नदी जिसका पानी हमेशा उबलता रहता है। कुछ जगहें विज्ञान के लिए भी आज तक रहस्य बनी हुई हैं। आइए जानते हैं दुनिया की ऐसी 5 अद्भुत जगहों के बारे में, जिन्हें अपनी जिंदगी में एक बार जरूर देखना चाहिए:

1. लोकटक झील, भारत – दुनिया की तैरती झील का अनोखा नज़ारा

लोकटक झील: भारत के मणिपुर में एक तैरता हुआ स्वर्ग

मणिपुर में लोकटक झील भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झीलों में से एक है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत इसके ‘फुमदी’ हैं। फुमदी मिट्टी, घास, पेड़-पौधों और जैविक पदार्थों से बने तैरते हुए छोटे-छोटे द्वीप होते हैं, जो पानी की सतह पर लगातार अपनी जगह बदलते रहते हैं। यही कारण है कि यह झील दुनिया की सबसे अनोखी झीलों में गिनी जाती है। यहां केइबुल लामजाओ नेशनल पार्क दुनिया का इकलौता तैरता हुआ नातिरोनल पार्क है, जहां दुर्लभ संगाई हिरण पाया जाता है। झील में बोटिंग, फोटोग्राफी, बर्ड वॉचिंग और सूर्योदय-सूर्यास्त का नजारा टूरिस्ट को मंत्रमुग्ध कर देता है। यहां ठहरने के लिए होमस्टे, कॉटेज और होटल उपलब्ध हैं, जिनका खर्च लगभग ₹1,500 से ₹5,000 प्रति रात होता है, जबकि खाने का खर्च ₹400 से ₹1,000 प्रतिदिन तक आता है।

2. डोर टू हेल, तुर्कमेनिस्तान – 50 साल से जलता रहस्यमयी गड्ढा

The 'Gates of Hell' could soon be extinguished in Turkmenistan due to its ecological damage | World News | Sky News

तुर्कमेनिस्तान के कराकुम रेगिस्तान में स्थित डोर टू हेल दुनिया के सबसे रहस्यमय टूरिस्ट डेस्टिनेशन में से एक है। यह एक विशाल गैस क्रेटर है, जिसमें 1971 से लगातार आग जल रही है। माना जाता है कि नेचुरल गैस की खुदाई के दौरान जमीन धंस गई थी और गैस के रिसाव को रोकने के लिए उसमें आग लगा दी गई, लेकिन वह आज तक नहीं बुझी। रात के समय यह गड्ढा चमकते हुए आग के समुद्र जैसा दिखाई देता है। इसका व्यास लगभग 70 मीटर और गहराई करीब 30 मीटर है। यहां होटल बहुत कम हैं, इसलिए ज्यादातर टूरिस्ट रेगिस्तान में कैंपिंग का एक्सपीरियंस लेते हैं। कैंप और टूर पैकेज का खर्च लगभग ₹8,000 से ₹20,000 तक हो सकता है, जबकि खाने का खर्च ₹1,000 से ₹2,500 प्रतिदिन रहता है।

3. सलार दे उयुनी, बोलिविया – दुनिया का सबसे बड़ा नटुरेल आईना

HD wallpaper: Salar de Uyuni, Bolivia, white clouds, nature, 1920x1080 | WallpaperFlare

बोलिविया का सलार दे उयुनी दुनिया का सबसे बड़ा नमक का मैदान है, जो लगभग 10,500 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। बारिश के मौसम में इसकी सतह पर पानी की एक पतली परत जम जाती है, जिससे पूरी जमीन एक विशाल आईने की तरह आसमान का लुक दिखाने लगती है। ऐसा लगता है जैसे लोग बादलों के ऊपर चल रहे हों। यही वजह है कि इसे दुनिया की सबसे फोटोजेनिक जगहों में गिना जाता है। यहां सूर्योदय और सूर्यास्त का व्यू बेहद शानदार होता है। टूरिस्ट जीप सफारी, फोटोग्राफी और नमक से बने होटलों में ठहरने का एक्सपीरियंस लेते हैं। यहां रहने का खर्च लगभग ₹3,000 से ₹10,000 प्रति रात और खाने का खर्च ₹800 से ₹2,000 प्रतिदिन हो सकता है।

4. रेसट्रैक प्लाया, अमेरिका – अपने आप चलने वाले पत्थरों का रहस्य

mystery of moving stone in California death valley | वो घाटी जहां अपने आप चलते हैं पत्थर

अमेरिका के डेथ वैली नेशनल पार्क में स्थित रेसट्रैक प्लाया एक सूखी झील का मैदान है, जो अपने चलने वाले पत्थरों के लिए पूरी दुनिया में पॉपुलर है। यहां बड़े-बड़े पत्थर बिना किसी इंसान या जानवर की मदद के अपनी जगह बदलते हुए दिखाई देते हैं और पीछे लंबी लकीरें छोड़ जाते हैं। कई वर्षों तक यह एक रहस्य बना रहा, लेकिन बारिश, बर्फ की पतली परत और तेज हवा मिलकर इन पत्थरों को धीरे-धीरे खिसकाती हैं। यहां का सुनसान और विशाल रेगिस्तानी इलाका एडवेंचर पसंद लोगों को खूब अट्रैक्ट करता है। यहां ठहरने के लिए डेथ वैली के आसपास होटल अवेलेबल हैं, जिनका खर्च लगभग ₹8,000 से ₹20,000 प्रति रात होता है, जबकि खाने का खर्च ₹1,500 से ₹3,000 प्रतिदिन तक हो सकता है।

5. शनाय-टिम्पिशका, पेरू – उबलती नदी का रहस्य

दुनिया की एकमात्र उबलती नदी, शनाय-टिम्पिश्का नदी, जिसे "अमेज़न की उबलती नदी" भी कहा जाता है, पेरू में स्थित है। इसका पानी 45°C (113°F) से लेकर लगभग ...

पेरू के अमेजन वर्षावन में स्थित शनाय-टिम्पिशका को दुनिया की सबसे रहस्यमयी नदियों में गिना जाता है। यह नदी कई स्थानों पर इतनी गर्म हो जाती है कि इसका टेम्परेचर 80 से 100 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। माना जाता है कि इसमें गिरने वाला कोई भी छोटा जीव कुछ ही मिनटों में मर सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि धरती के अंदर Geothermal एनर्जी के कारण यह पानी इतना गर्म रहता है। यहां जाने के लिए गाइड के साथ यात्रा करना सबसे सुरक्षित माना जाता है। आसपास इको-लॉज और जंगल रिसॉर्ट उपलब्ध हैं, जिनका खर्च लगभग ₹4,000 से ₹12,000 प्रति रात होता है, जबकि खाने का खर्च ₹800 से ₹2,000 प्रतिदिन तक हो सकता है।

इन पांचों जगहों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये नेचर के ऐसे अजूबे हैं, जिन्हें देखकर पहली नजर में यकीन करना मुश्किल हो जाता है। अगर आप भी टिपिकल टूरिस्ट डेस्टिनेशन से हटकर कुछ अनोखा और यादगार एक्सपीरियंस चाहते हैं, तो ये डेस्टिनेशन आपकी ट्रैवल बकेट लिस्ट में जरूर होने चाहिए।

Gold Price Today: चीन क्यों धड़ाधड़ खरीदने लगा सोना जबकि भारत में गोल्ड पर्चेज की रफ्तार पर लगा ब्रेक! अंदर की खबर ये है

भारत में सोने की डिमांड में कमी आने का सीजन शुरू हो चुका है। कीमतें 3 महीने के निचले स्तर से रिकवर हुई हैं, जिससे महंगे दाम पर खरीदी से बचा जा रहा है। हालांकि खरीद एकदम ठंडी भी नहीं है। रॉयटर्स के मुताबिक, ज्वेलर्स खरीदी कर रहे हैं लेकिन अस्थिर कीमतों को लेकर सावधान भी हैं। निकट अवधि में कोई बड़ा त्योहार भी नहीं है और न ही शादी का सीजन। लिहाजा गोल्ड की कम डिमांड वाला दौर शुरू हो गया है। वहीं दूसरी ओर चीन में डिमांड बढ़ी है।

हाल ही में मंगलवार को देश में सोने की कीमत 1,40,450 रुपये प्रति 10 ग्राम तक गिर गई थी, जो 27 मार्च के बाद का सबसे निचला स्तर था। लेकिन अब रिबाउंड देखने को मिला है। MCX पर 3 जुलाई को सोने का वायदा भाव 148069 रुपये प्रति 10 ग्राम के हाई तक गया। रॉयटर्स के मुताबिक, जून महीने में सोने की कीमत लगभग 8.4 प्रतिशत कमजोर हुई। मार्च महीने के बाद पहली बार किसी महीने में सोने में गिरावट देखी गई।

अंतरराष्ट्रीय कीमतें

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव की बात करें तो यह पिछले 5 हफ्तों में पहली बार बढ़त की ओर बढ़ रहा है। हाजिर सोने की कीमत 4,184.75 डॉलर प्रति औंस है। वहीं अगस्त में डिलीवरी वाला US गोल्ड फ्यूचर्स 4,197.20 डॉलर प्रति औंस पर है। अमेरिका में नौकरियों का डेटा उम्मीद से कमजोर रहने से फेडरल रिजर्व द्वारा निकट अवधि में बेंचमार्क ब्याज दरें बढ़ाए जाने को लेकर चिंता कम हुई है। इससे सोने की कीमत को बल मिला। अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट के ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स का कहना है कि जून में नॉन-फार्म पेरोल में 57,000 नौकरियां बढ़ीं।

सरकार जल्द नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम का कर सकती है ऐलान, जानिए क्या है पूरा प्लान

चीन में 2 डॉलर प्रति डिस्काउंट पर ट्रेडिंग

चीन में इस हफ्ते सोना अंतरराष्ट्रीय कीमत के मुकाबले कभी समान भाव पर तो कभी 2 डॉलर प्रति औंस तक सस्ते में बिक रहा था। पिछले हफ्ते यह 3 से 7 डॉलर प्रति औंस तक डिस्काउंट पर बिक रहा था। डिस्काउंट कम होना इस बात का संकेत है कि खरीदार पहले की तुलना में थोड़ा ज्यादा सक्रिय हुए हैं, इसलिए विक्रेताओं को ज्यादा छूट देने की जरूरत नहीं पड़ी।