Gurugram-Rewari highway: गुरुग्राम से रेवाड़ी के लिए खुल रहा है नया चमचमाता एक्सप्रेसवे, इसी महीने शुरू होगा पहला फेज! इन इलाकों की बदलेगी किस्मत

Gurugram-Rewari highway: हरियाणा और एनसीआर के लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। जल्द ही शुरू होने वाला 46 किलोमीटर लंबा गुरुग्राम-रेवाड़ी हाईवे दोनों शहरों के बीच यात्रा को तेज और आसान बना देगा। हाईवे के शुरू होने के बाद गुरुग्राम से रेवाड़ी का सफर सिर्फ 45 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। इसके अलावा इस परियोजना से क्षेत्र में रियल एस्टेट, उद्योग और निवेश को भी नई रफ्तार देने की उम्मीद है।

जानकारों का कहना है कि गुरुग्राम-रेवाड़ी हाईवे से सिर्फ़ सफर का समय ही कम नहीं होगा। बल्कि और भी कई फायदे होंगे। इस नई सड़क से प्रॉपर्टी की मांग बढ़ने, बिजनेस को बढ़ावा मिलने और नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) के दक्षिणी हिस्सों में कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।

दो चरणों में खुलेगा हाईवे

पहला चरण: 10 किलोमीटर का हिस्सा जुलाई 2026 में चालू होने की संभावना है।

दूसरा चरण: शेष मार्ग सितंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।

पहला चरण शुरू होने के बाद द्वारका एक्सप्रेसवे से KMP एक्सप्रेसवे तक का सफर, जो अभी पीक ट्रैफिक में करीब 45 मिनट लेता है, घटकर 10 मिनट से भी कम रह जाएगा।

इन इलाकों को मिलेगा सीधा फायदा

नया हाईवे सेक्टर-88B (द्वारका एक्सप्रेसवे) से शुरू होकर कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। इससे इन प्रमुख क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी:-

द्वारका एक्सप्रेसवे

न्यू गुरुग्राम

मानेसर

IMT मानेसर

रेवाड़ी

ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत

यह हाईवे मौजूदा सड़कों का विकल्प बनेगा, जिससे मानेसर और गुरुग्राम के केंद्रीय हिस्सों में ट्रैफिक का दबाव कम होगा। रोजाना आने-जाने वाले लोगों और माल ढुलाई करने वाले वाहनों को भी काफी राहत मिलेगी।

रेवाड़ी बनेगा नया निवेश और औद्योगिक हब

बेहतर सड़क संपर्क के बाद रेवाड़ी में उद्योग, वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। आसान परिवहन व्यवस्था के कारण कंपनियों का निवेश बढ़ सकता है, जिससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

रियल एस्टेट को मिलेगा बूस्ट

रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि हाईवे के किनारे स्थित इलाकों में आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं की मांग तेजी से बढ़ सकती है। गुरुग्राम के बिजनेस हब तक कम समय में पहुंचने की सुविधा मिलने से इन क्षेत्रों में प्रॉपर्टी की कीमतों में भी उछाल आने की संभावना है।

RRTS से भी जुड़ेगा हाईवे

यह परियोजना दिल्ली-गुरुग्राम-SNB-अलवर रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) से भी जुड़ेगी। इससे एनसीआर और हरियाणा के बीच क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और मजबूत होगी तथा रेवाड़ी को एक उभरते हुए ग्रोथ सेंटर के रूप में नई पहचान मिलेगी।

बेहतर कनेक्टिविटी

यह हाईवे द्वारका एक्सप्रेसवे पर सेक्टर 88B के पास से शुरू होगा और सीधे केएमपी एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। इससे न्यू गुरुग्राम, मानेसर और आईएमटी (IMT) मानेसर जैसे प्रमुख स्थानों तक पहुंच आसान हो जाएगी। इसके अलावा, यह दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी-अलवर रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) सहित बड़े ट्रांसपोर्ट नेटवर्क से भी जुड़ेगा।

औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स विकास

बेहतर रोड कनेक्टिविटी से रेवाड़ी के एक प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में बदलने की उम्मीद है। इससे माल की आवाजाही आसान होगी, जिससे यह क्षेत्र मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, गोदामों (warehouses) और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए अधिक आकर्षक बन जाएगा।

रियल एस्टेट में उछाल

रियल एस्टेट सलाहकारों को उम्मीद है कि इस कॉरिडोर के साथ आने वाले आवासीय (residential) और वाणिज्यिक (commercial) प्रोजेक्ट्स की मांग बढ़ेगी, क्योंकि गुरुग्राम के बिजनेस डिस्ट्रिक्ट्स तक आना-जाना तेज और अधिक सुविधाजनक हो जाएगा।

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अमेरिकी नागरिकता के पक्ष में फैसले से क्यों खुश हैं भारतीय

justice

मुरली कृष्णन

जन्म के आधार पर नागरिकता के मामले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने अमेरिका में रह रहे भारतीय परिवारों की चिंताएं घटाई हैं। आखिर इस फैसले से प्रवासी भारतीयों को क्या फायदा होगा? ALSO READ: खमेनेई के बाद ईरान: कितनी बदल जाएगी मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था

 

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया फैसले में जन्म के आधार पर नागरिकता को बरकरार रखा है। इस फैसले से हजारों भारतीय परिवारों को राहत मिली है। हालांकि, इस बात पर राजनीतिक लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है कि कौन व्यक्ति अमेरिकी कहलाने का हकदार है। जब 30 जून को सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आया, तब सिएटल में रहने वाले एक भारतीय जोड़े, राजेश और नेहा ने काम पर निकलने से पहले नाश्ते की मेज पर इस खबर को पढ़ा।

 

सॉफ्टवेयर इंजीनियर राजेश 2016 में एच-1बी वीजा पर दक्षिण भारतीय शहर बेंगलुरु से अमेरिका आए थे। एक साल बाद नेहा भी उनके साथ आ गईं। उनकी छह साल की बेटी आन्या का जन्म अमेरिका में ही हुआ था। नेहा ने डीडब्ल्यू को बताया, “यह राहत की बात थी। महीनों तक हम सोचते रहे कि क्या इतनी बुनियादी चीज सच में बदल सकती है।”

 

इस फैसले के बाद उनकी बेटी तो अमेरिकी नागरिक बनी रहेगी, लेकिन उनके लिए कुछ खास नहीं बदला है। अमेरिका में रह रहे हजारों अन्य भारतीय पेशेवरों की तरह, वे भी सालों से लाइन में लगे हुए हैं और नौकरी के आधार पर मिलने वाले ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं। राजेश ने कहा, “हम खुश हैं कि हमारी बेटी का भविष्य सुरक्षित हो गया है, लेकिन हमारी अपनी जिंदगी अब भी हर बार वीजा रिन्यू होने की चिंता के साथ गुजर रही है।” ALSO READ: जर्मनी में गर्मी की वजह से इस साल 5,100 लोगों की मौत

 

राहत की सांस

जून के आखिर में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जन्म के आधार पर नागरिकता को बरकरार रखा। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि अमेरिकी धरती पर पैदा होने वाले बच्चे अमेरिकी नागरिक बने रहेंगे, चाहे उनके माता-पिता का इमिग्रेशन स्टेटस कुछ भी हो।

 

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने पिछले साल एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किया था, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका में गैर-कानूनी तरीके से या अस्थायी वीजा पर रह रहे माता-पिता के बच्चे अपने-आप अमेरिकी नागरिक नहीं बनेंगे। उस आदेश पर फिलहाल रोक लगी हुई है और उस पर अदालत में कानूनी सुनवाई चल रही है।

 

सामाजिक और राजनीतिक संस्था ‘इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट' के कार्यकारी निदेशक चिंतन पटेल ने कहा, “यह फैसला इस बात की बेहतर तरीके से पुष्टि करता है कि अमेरिका में किसे रहने और नागरिक कहलाने का अधिकार है।” पटेल ने एक बयान में कहा, “ट्रंप के कार्यकारी आदेश से जिन लोगों को सबसे सीधा खतरा था, उनमें भारतीय और दक्षिण एशियाई मूल के प्रवासी परिवार शामिल हैं। ये समुदाय वर्षों से वीजा बैकलॉग और अनिश्चित आव्रजन प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। ऐसे में अक्सर उनके बच्चों का जन्म अमेरिका में हो जाता है, जबकि माता-पिता के पास स्थायी रूप से वहां रहने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं होता।”

 

‘प्यू रिसर्च सेंटर' की मई 2025 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में चीनी-अमेरिकियों के बाद भारतीय मूल के लोग एशिया के दूसरे सबसे बड़े प्रवासी समूह हैं। 2023 में अमेरिका में भारतीय मूल के लगभग 52 लाख लोग रहते थे, जो देश की एशियाई मूल की आबादी का लगभग 21 फीसदी है। अमेरिकी कंपनियों को कुशल विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर रखने की सुविधा देने वाले ‘एच-1बी वीजा' को पाने में भारतीय सबसे आगे हैं। लेकिन, हर देश के लिए तय सीमा होने की वजह से, नौकरी के आधार पर मिलने वाले ग्रीन कार्ड के लिए सबसे लंबा इंतजार भी इन्हीं भारतीयों को करना पड़ता है।

 

सामुदायिक संगठनों का अनुमान है कि अमेरिका में अस्थायी वर्क वीजा पर रह रहे भारतीय माता-पिता के यहां लाखों बच्चे पैदा हुए हैं। कोर्ट के इस फैसले से अब उनकी नागरिकता और उससे जुड़े अधिकार सुरक्षित रहेंगे, जिनमें अमेरिकी पासपोर्ट और सोशल सिक्योरिटी नंबर भी शामिल हैं।

 

कर्मचारी अपना स्टेटस (कानूनी दर्जा) खराब होने के डर से नौकरी बदलने में हिचकिचाते हैं। वहीं दूसरी तरफ, उनके जीवनसाथी (पति या पत्नी) को भी काम करने को लेकर कई तरह की पाबंदियों का सामना करना पड़ सकता है।

 

जो बच्चे अपने माता-पिता के सहारे यानी डिपेंडेंट के तौर पर अमेरिका आए थे, वे 21 साल के होते ही अपना कानूनी दर्जा खो सकते हैं, बशर्ते उनके माता-पिता को तब तक पक्का ग्रीन कार्ड न मिला हो। इस गंभीर समस्या को ‘एजिंग आउट' कहा जाता है। इस तरह के कठिन हालात के बीच, जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता ही उन कुछ चुनिंदा भरोसेमंद चीजों में से एक रही है, जिस पर ये परिवार पक्के तौर पर यकीन कर सकते हैं।

 

रोजगार और परिवार-आधारित इमिग्रेशन के विशेषज्ञ और अमेरिकी इमिग्रेशन अटॉर्नी राजकृष्ण एस। अय्यर ने डीडब्ल्यू से कहा, “यह अदालती फैसला इस पुराने संवैधानिक नियम को और मजबूत करता है कि जो कोई भी अमेरिका में पैदा हुआ है, वह वहां का नागरिक है। भले ही, उसके माता-पिता का इमिग्रेशन स्टेटस कुछ भी हो। भारतीय एच-1बी परिवारों के लिए इसका मतलब है कि उनके बच्चों को जन्म के समय ही अमेरिकी नागरिकता मिल जाएगी।” ALSO READ: फ्रांस की धुर दक्षिणपंथी नेता की सजा घटी लेकिन चुनौतियां नहीं

 

समाज को बांटने वाले मुद्दा

यह अदालती फैसला अमेरिकी राजनीति के सबसे ज्यादा विवादित और समाज को बांटने वाले सवालों में से एक को दोबारा चर्चा के केंद्र में ले आया है। दरअसल, सालों से ट्रंप और कई रूढ़िवादी नेता यह तर्क देते आ रहे हैं कि बिना किसी शर्त के मिलने वाली जन्म आधारित नागरिकता इमिग्रेशन सिस्टम के गलत इस्तेमाल को बढ़ावा देती है। अमेरिकी नागरिकता हासिल करने के लिए मौजूदा इमिग्रेशन सिस्टम का इस तरह जानबूझकर इस्तेमाल करना ही रूढ़िवादी नेताओं और इमिग्रेशन का विरोध करने वालों की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है।

 

ट्रंप के रूख का समर्थन करने वालों का कहना है कि जन्म के आधार पर नागरिकता मिलने से ‘बर्थ टूरिज्म' को बढ़ावा मिलता है। इसमें विदेशी नागरिक खास तौर पर बच्चे को जन्म देने के लिए अमेरिका आते हैं, ताकि उनके बच्चों को अमेरिकी नागरिकता मिल सके।

 

अय्यर ने कहा कि यह आपत्ति आम तौर पर एच-1बी वीजा रखने वाले लोगों के लिए नहीं जताई जाती है। उन्होंने बताया, “खास बात यह है कि रूढ़िवादी लोगों ने अमेरिका में कानूनी तौर पर आए प्रवासी कामगारों के बच्चों के जन्म पर बहुत कम आपत्ति जताई है।”

 

अय्यर के मुताबिक, एच-1बी वीजा रखने वाले लोग कानूनी तौर पर आए कामगार होते हैं। ये लोग टैक्स देते हैं और आम तौर पर इन्हें सरकारी संसाधनों पर बोझ नहीं माना जाता। उन्होंने कहा, “इसलिए, ऐसा लगता है कि उनका असली विरोध सिर्फ प्रवासियों के कानूनी दर्जे (इमिग्रेशन स्टेटस) को लेकर नहीं है। उनका गुस्सा इस बात पर ज्यादा है कि लोग कानूनी व्यवस्था को दरकिनार कर रहे हैं, देश में अवैध रूप से दाखिल हो रहे हैं या फिर ‘बर्थ टूरिज्म' (सिर्फ बच्चे को नागरिकता दिलाने के लिए यात्रा करना) के लिए वैध वीजा का इस तरह फायदा उठा रहे हैं जिसके लिए वह वीजा बनाया ही नहीं गया था।”

 

अय्यर कहते हैं कि जन्म के आधार पर नागरिकता के नियम को लेकर अक्सर लोगों के बीच कई तरह की गलतफहमियां होती हैं। अमेरिका में पैदा हुए बच्चे 21 साल की उम्र से पहले अपने माता-पिता के परमानेंट रेजिडेंसी के लिए आवेदन नहीं कर सकते। इसका मतलब यह है कि बच्चे को जन्म से मिलने वाली नागरिकता, पूरे परिवार को तुरंत कानूनी दर्जा दिलाने का कोई सीधा रास्ता नहीं खोलती। वे संगठित रूप से होने वाले ‘ऑर्गनाइज्ड बर्थ टूरिज्म' के इक्का-दुक्का मामलों और उन परिवारों के बीच एक साफ अंतर देखते हैं, जो कंपनी के वीजा पर सालों से कानूनी तौर पर अमेरिका में रह रहे हैं और काम कर रहे हैं।

 

यह फर्क खासकर भारतीय एच-1बी परिवारों के लिए अहम है। बिना दस्तावेजों वाले (अवैध) प्रवासियों के उलट, ज्यादातर भारतीय पेशेवर कानूनी तौर पर अमेरिका में दाखिल होते हैं, वहां ईमानदारी से टैक्स भरते हैं और नौकरी-आधारित दुनिया की सबसे लंबी इमिग्रेशन लिस्ट (बैकलॉग) का सामना करते हुए भी हमेशा अपना कानूनी दर्जा बनाए रखते हैं।

 

नई दिल्ली के एक वकील करन ठुकराल ने कहा कि भारतीय पेशेवरों को जबरदस्ती एक ऐसी बहस में घसीटा जा रहा है, जो असल में अवैध प्रवासियों को ध्यान में रखकर शुरू की गई थी। उन्होंने डीडब्ल्यू को बताया, “इस फैसले से भारतीय एच-1बी वीजा वाले परिवारों के सामने बनी एक बड़ी अनिश्चितता दूर हो गई है। यह फैसला ग्रीन कार्ड के लिए दशकों लंबे इंतजार या अस्थाई वीजा पर जीने की कड़वी हकीकत को नहीं बदलता। वे कानूनी तौर पर आए हुए पेशेवर हैं। सिस्टम के गलत इस्तेमाल की चिंताओं की कीमत अमेरिका में पैदा हुए बच्चों के संवैधानिक अधिकारों को छीनकर नहीं चुकाई जानी चाहिए।” ALSO READ: ब्रिटेन का शाही परिवार कहां से और कैसे धन कमाता है

 

जन्म के आधार पर नागरिकता को लेकर खत्म नहीं हुई है लड़ाई

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से जन्म के आधार पर नागरिकता को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई खत्म नहीं हुई है। इसके बजाय, इस फैसले ने उन परिस्थितियों को सीमित कर दिया है, जिनमें निचली अदालतें राष्ट्रपति की नीतियों को पूरे देश में लागू होने से रोक सकती हैं। जब तक इस संवैधानिक सवाल का कोई पक्का समाधान नहीं निकल जाता, तब तक ट्रंप के कार्यकारी आदेश को देश भर की अदालतों में चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

 

अमेरिका में भारत की पूर्व राजदूत मीरा शंकर इस फैसले को किसी पक्के समाधान के बजाय एक तरह का भरोसा दिलाना मानती हैं। उन्होंने डीडब्ल्यू से कहा, “यह फैसला कई भारतीय परिवारों के लिए राहत की बात है, क्योंकि इससे अमेरिका में पैदा हुए बच्चों को अमेरिकी नागरिक के रूप में एक मजबूत कानूनी आधार (सुरक्षा) मिलता है।”

 

उन्होंने आगे कहा, “लेकिन ट्रंप प्रशासन के आने के बाद से, अमेरिका अब प्रवासियों का पहले की तरह स्वागत नहीं कर रहा है। इसलिए कई प्रतिभाशाली भारतीय, जो पहले अमेरिका जाना अपना सबसे अच्छा विकल्प मानते थे, अब शायद अपना फैसला बदलने पर विचार कर सकते हैं।”

 

अनिश्चितता के बीच कैसी होती है जिंदगी

कई भारतीय पेशेवरों के लिए, अदालत का यह फैसला एक बहुत बड़ी समस्या के सिर्फ एक हिस्से को ही हल करता है।

 

नौकरी के आधार पर मिलने वाले ग्रीन कार्ड के लिए हर साल अलग-अलग देशों का एक तय कोटा होता है। इसकी वजह से भारतीय आवेदकों के लिए बहुत बड़ा बैकलॉग बन गया है, यानी उनके लिए इंतजार की अवधि काफी बढ़ गई है। अलग-अलग अनुमानों के मुताबिक, 10 लाख से भी ज्यादा भारतीय यहां स्थायी तौर पर बसने के लिए लाइन में लगे हैं और इनमें से कुछ तो दशकों से इंतजार कर रहे हैं।

AIIMS Paramedical Result 2026: एम्स के रिजल्ट पोर्टल पर जारी हुआ नतीजों का पीडीएफ, यहां बताए स्टेप्स की मदद से चेक करें अपना रोल नंबर

AIIMS Paramedical Result 2026: नई दिल्ली स्थित ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) ने एम्स पैरामेडिकल रिजल्ट 2026 की घोषणा कर दी है। जिन उम्मीदवारों ने 4 जुलाई, 2026 को हुई बीएससी पैरामेडिकल प्रवेश परीक्षा में हिस्सा लिया था, वे अब ऑफिशियल एग्जामिनेशन पोर्टल पर रिजल्ट देख सकते हैं। रिजल्ट एक पीडीएफ फॉर्मेट में उपलब्ध कराया गया, जिसमें सफल कैंडिडेट्स के नाम शामिल होंगे। जिन उम्मीदवारों का रोल नंबर मेरिट लिस्ट में शामिल है, उन्हें डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, ऑनलाइन काउंसलिंग और सीट आवंटन प्रक्रिया में शामिल होना होगा। इन चरणों में शामिल होने के लिए इन्हें सभी जरूरी योग्यता मानदंडों को पूरा करना होगा।

एम्स पैरामेडिकल रिजल्ट 2026: स्कोरकार्ड कैसे डाउनलोड करें

  • होमपेज aiimsexams.ac.in पर ‘Results’ सेक्शन पर क्लिक करें।
  • एकेडमिक कोर्स के तहत ‘Explore Now’ पर क्लिक करें।
  • अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम्स पर क्लिक करें या यहां दिए गए लिंक -> अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम्स पर जाएं।
  • B.Sc.(Allied & Health Care) लिंक ढूंढें और उस पर क्लिक करें या यहां दिए गए लिंक पर जाएं – B.Sc.(Allied & Health Care)
  • ‘View Details’ पर क्लिक करें और फिर ‘Result’ पर क्लिक करें।
  • मेरिट लिस्ट PDF डाउनलोड करें और अपना रोल नंबर देखें।
  • अपना स्कोरकार्ड प्राप्त करने और सुरक्षित करने के लिए अपनी पंजीकरण डिटेल्स का इस्तेमाल करके लॉग इन करें।
  • भविष्य में एडमिशन और काउंसलिंग के लिए एक कॉपी रखें।

कटऑफ मार्क्स और रिजल्ट के बाद के स्टेप्स

जनरल और EWS उम्मीदवारों के लिए क्वालिफाइंग कटऑफ 50%, या कुल 90 में से 45 मार्क्स रहने की संभावना है। OBC-NCL परीक्षार्थियों को कम से कम 45%, या 40.5 अंक लाने की जरूरत होगी, जबकि SC और ST कैंडिडेट्स को 40% का क्वालिफाइंग अंक हासिल करने होंगे, जो 36 अंकों के बराबर है।

मेरिट लिस्ट में शामिल उम्मीदवार एम्स पैरामेडिकल काउंसलिंग प्रोसेस के लिए क्वालिफाई करेंगे। एम्स पाठ्यक्रम में प्रवेश कैंडिडेट की रैंक, कैटेगरी, सीट की उपलब्धता और सफल डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के आधार पर होगा। एम्स रिजल्ट घोषित होने के बाद काउंसलिंग का समय, चॉइस फिलिंग और सीट आवंटन प्रक्रिया का विस्तृत ब्योरा अलग से जारी करेगा। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे काउंसलिंग और प्रवेश से जुड़े ताजा अपडेट के लिए आधिकारिक एम्स परीक्षा पोर्टल को लगातार चेक करते रहें।

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Tata Sierra Jubilee Edition launched

Tata Sierra Jubilee Edition

Tata Motors has introduced the Jubilee Edition for the Sierra’s Smart+, Pure and Adventure trims. Depending on the trim, accessories from the Sierra’s ROQ range are on offer, along with a couple of features that are otherwise not offered on those trims. Prices for the Jubilee Edition have not been officially revealed at the time of writing.

Tata Sierra Jubilee Edition details

Smart+

Rs 11.49 lakh-12.99 lakh

Tata Sierra Smart+

On the entry-level Sierra Smart+, the Jubilee Edition adds front grille and tailgate cladding, roof rails, semi-leatherette seat covers with Jubilee Edition branding, a 4-speaker audio system, and a 10.25-inch touchscreen infotainment system with wireless Android Auto, Apple CarPlay, and a rear-view camera.

Pure

Rs 12.99 lakh-15.99 lakh

Tata Sierra Pure

For the one-above-base Sierra Pure trim, the Jubilee Edition adds cladding for the front grille, tailgate and wheel arches, alongside roof rails, semi-leatherette seat covers, a leatherette steering wheel cover, magnetic sunshades, a parcel tray, and front and rear dash cameras.

Adventure

Rs 15.29 lakh-16.79 lakh

Tata Sierra Adventure

Buyers opting for the mid-spec Sierra Adventure Jubilee Edition get the full ROQ styling kit and front and rear dash cameras.

Tata Sierra powertrains and rivals

The Sierra is offered with three engine options. The first is a 1.5-litre turbo-petrol engine that produces 160hp and 255Nm, paired with a 6-speed automatic gearbox. There’s also a 1.5-litre naturally aspirated petrol engine with peak outputs of 106hp and 145Nm, available with either a 6-speed manual or a 7-speed dual-clutch automatic gearbox. Lastly, the 1.5-litre diesel engine develops 118hp and is offered with a 6-speed manual (260Nm) or a 6-speed automatic (280Nm).

Tata’s midsize SUV is priced between Rs 11.49 lakh and Rs 21.29 lakh, and it competes with the likes of the Hyundai Creta, Kia Seltos, Maruti Grand Vitara, Honda Elevate, Renault Duster and more.

Ex-showroom prices mentioned above are as on July 11, 2026.

बरसात में कौन-सी सब्जियां खाएं और किनसे बनाएं दूरी? जानें एक्सपर्ट की सलाह

मानसून की पहली बारिश जहां तपती गर्मी से राहत देती है, वहीं ये मौसम सेहत के लिए कई नई चुनौतियां भी लेकर आता है। नमी बढ़ने के कारण बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनप सकते हैं, जिससे पेट की समस्या, संक्रमण और पाचन संबंधी परेशानियां बढ़ने लगती हैं। ऐसे में खानपान में थोड़ी सावधानी रखना बेहद जरूरी हो जाता है। खासकर सब्जियों का चुनाव करते समय ध्यान देना चाहिए, क्योंकि हर सब्जी बारिश के मौसम में शरीर के लिए फायदेमंद साबित नहीं होती।

आयुर्वेद भी इस मौसम में हल्के, ताजे और आसानी से पचने वाले भोजन को प्राथमिकता देने की सलाह देता है। सही सब्जियों का चयन और उन्हें अच्छी तरह साफ करके पकाना मानसून में स्वस्थ रहने का आसान तरीका हो सकता है।

पालक को दें थोड़े दिनों का ब्रेक

डॉ. नितिका कोहली के इंस्टाग्राम पोस्ट के अनुसार बारिश के मौसम में पालक खाने से पेट से जुड़ी समस्याओं और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए पालक का सूप, स्मूदी या पालक पनीर फिलहाल टालना बेहतर हो सकता है।

पत्तागोभी में छिप सकते हैं अनचाहे मेहमान

पत्तागोभी की परतों में बारिश के दौरान कीड़े या सूक्ष्म जीव छिपे होने की संभावना बढ़ जाती है। आयुर्वेद इसे भारी और ठंडी तासीर वाली सब्जी मानता है, जो पाचन शक्ति को कमजोर कर सकती है।

शिमला मिर्च भी बन सकती है परेशानी की वजह

नमी वाले मौसम में शिमला मिर्च जल्दी खराब हो सकती है और उसमें फंगस या कीट लगने का खतरा बढ़ जाता है। आयुर्वेद के मुताबिक इसकी ठंडी प्रकृति कुछ लोगों में गैस और एसिडिटी जैसी समस्याएं बढ़ा सकती है।

टमाटर हर मौसम में नहीं होता फायदेमंद

हालांकि टमाटर लगभग हर सब्जी का हिस्सा होता है, लेकिन मानसून में इसकी खट्टी तासीर एसिडिटी और पाचन संबंधी दिक्कतों को बढ़ा सकती है। आयुर्वेद इस मौसम में इसका सीमित सेवन करने की सलाह देता है।

फूलगोभी के पकौड़े खाने से पहले सोच लें

बरसात में फूलगोभी की ठंडी और अधिक पानी वाली प्रकृति पाचन अग्नि को कमजोर कर सकती है। इसलिए इसे कम मात्रा में या पूरी तरह पकाकर ही खाना बेहतर माना जाता है।

मशरूम में बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा

मशरूम नमी वाली मिट्टी में उगते हैं और बारिश के दौरान इनमें बैक्टीरिया पनपने की संभावना अधिक रहती है। सही तरीके से साफ और पकाए बिना खाने पर फूड पॉइजनिंग या पेट की समस्या हो सकती है।

बैंगन खाते समय रखें अतिरिक्त सावधानी

बारिश के मौसम में बैंगन पर कीड़ों और बैक्टीरिया का हमला ज्यादा हो सकता है। कुछ लोगों में यह खुजली, एलर्जी या त्वचा संबंधी परेशानियां भी बढ़ा सकता है।

ये सब्जियां बरसात में हो सकती हैं बेहतर विकल्प

लौकी बन सकती है आपकी हेल्दी साथी

लौकी में पानी, फाइबर और जरूरी विटामिन भरपूर होते हैं, जो पाचन को बेहतर रखने और शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। हालांकि इसे खरीदते समय कड़वी या खराब लौकी से बचें और हमेशा अच्छी तरह पकाकर ही खाएं।

खीरा खाना है तो पहले करें सही तैयारी

बारिश में खीरे की सतह पर कीटाणु जमा हो सकते हैं। इसे खाने से पहले 10–15 मिनट गुनगुने पानी में भिगोएं, अच्छी तरह धोएं, छिलका उतारें और फिर सेवन करें।

भिंडी बनाते समय न करें जल्दबाजी

भिंडी के अंदर छोटे कीड़े छिपे हो सकते हैं, इसलिए इसे लंबाई में काटकर अच्छी तरह जांचें। साफ पानी से धोकर पूरी तरह पकाने के बाद ही खाएं, ताकि बैक्टीरिया और फंगस का खतरा कम हो सके।

मानसून में याद रखें ये नियम

आयुर्वेद के अनुसार बारिश के मौसम में हल्का, ताजा, घर का बना और अच्छी तरह पका भोजन सबसे सुरक्षित माना जाता है। सब्जियों को अच्छी तरह धोना, साफ करना और पूरी तरह पकाकर खाना इस मौसम में संक्रमण और पाचन संबंधी समस्याओं से बचने का आसान तरीका है।

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वर्ल्ड अपडेट्स:हिजबुल का डिप्टी चीफ बोला- कश्मीर के हर कब्रिस्तान में पाकिस्तानी आतंकियों की कब्र

रऊफ डार, श्रीनगर। पाकिस्तान के आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के डिप्टी चीफ शमशीर खान ने पहली बार खुलकर माना है कि कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकी मारे गए और वहीं दफन हैं। PoK के मुजफ्फराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान शमशीर ने कहा, “कश्मीर का कोई कब्रिस्तान ऐसा नहीं है, जहां पाकिस्तान से आए आतंकियों की कब्र न हो।” शमशीर का यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि पाकिस्तान हमेशा यह कहता रहा है कि उसका जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन हिजबुल के सीनियर कमांडर के इस बयान को पाकिस्तान से आए आतंकियों की मौजूदगी की खुला कबूलनामा माना जा रहा है। भारत लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तान आतंकियों को ट्रेनिंग, हथियार और घुसपैठ में मदद देता है। पाकिस्तान इन आरोपों से लगातार इनकार करता रहा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… बहामास में फ्लेमिंगो एयर का छोटा विमान क्रैश, सभी यात्रियों 10 की मौत बहामास के नॉर्थ एंड्रोस इलाके में शुक्रवार को फ्लेमिंगो एयर का एक छोटा यात्री विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में विमान में सवार सभी 10 लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि एक यात्री को जिंदा निकाला गया था, लेकिन बाद में उसने भी दम तोड़ दिया। शुरुआती जांच के मुताबिक, सेसना 402C विमान ने राजधानी नासाउ से उड़ान भरी थी। उड़ान के कुछ देर बाद पायलट ने तकनीकी दिक्कत की जानकारी दी, जिसके बाद विमान जंगल वाले इलाके में गिर गया। हादसे के बाद बहामास सरकार ने एहतियात के तौर पर फ्लेमिंगो एयर की सभी उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी हैं। इसी दिन एयरलाइन के एक अन्य विमान में भी तकनीकी खराबी आने के बाद उसे वापस नासाउ लौटना पड़ा था। लैंडिंग के बाद उसमें आग लग गई, हालांकि उस विमान के सभी यात्री सुरक्षित बच गए। सरकार और विमान दुर्घटना जांच एजेंसी हादसे के कारणों की जांच कर रही है। फ्लेमिंगो एयर ने भी जांच में पूरा सहयोग देने और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई है।

स्पेन ने पहली बार गोल खाया लेकिन अंतिम लम्हों में बेलजियम पर पाई शानदार जीत

सुपर-सब मिकेल मेरिनो के आखिरी क्षणों में किये गये गोल की बदौलत स्पेन ने शुक्रवार रात फीफा विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में बेल्जियम को 2-1 से हराकर टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में फ्रांस से भिड़ने का रास्ता पक्का कर लिया। पहले हाफ में दोनों टीमों ने एक-दूसरे के खिलाफ गोल दागे।

शुरुआती लाइनअप में अप्रत्याशित रूप से शामिल हुए फैबियान रुइज ने 30वें मिनट में रिबाउंड पर गोल दाग दिया, लेकिन चार्ल्स डी केटेलेरे ने टिमोथी कास्टाग्ने के क्रॉस पर 41वें मिनट में बराबरी का गोल दाग दिया। यह टूर्नामेंट में पहला अवसर है जबकि स्पेन ने गोल खाया।

हालांकि, अंत में स्पेन ने बाजी मार ली, जब स्थानापन्न गोलकीपर सेने लैमेंस पाउ कुबार्सी के दूर से किए गए शॉट को रोक नहीं पाए और मेरिनो ने सामान्य समय समाप्त होने से दो मिनट पहले विजयी गोल दाग दिया।स्पेन अब मंगलवार को एक सपने जैसे सेमीफाइनल में फ्रांस का सामना करेगा।स्पेन मार्च 2023 से लगातार 37 मैचों में अजेय रहा है।

गोलकीपर लैमेंस को 71वें मिनट में मैदान में उतरना पड़ा, क्योंकि बेल्जियम के लंबे समय से गोलकीपर रहे थिबाउट कर्टोइस जांघ में चोट लगने के कारण मैदान से बाहर चले गए थे।बेल्जियम ने अंतिम मिनटों में बराबरी का गोल करने के लिए जीजान से प्रयास किया, लेकिन आयमेरिक लापोर्टे ने सर्वश्रेष्ठ मौके पर बाहर शॉट से मार दिया।

Home Loan Rates: नया घर खरीदने का है प्लान? देखें जुलाई 2026 में सरकारी, प्राइवेट बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की ताजा ब्याज दरें

Home Loan Interest Rates July 2026 Comparison: अगर आप अपने सपनों का आशियाना खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है। होम लोन लेने से पहले अलग-अलग बैंकों और वित्तीय संस्थानों की ब्याज दरों की तुलना करना आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है, क्योंकि मामूली सा अंतर भी आपकी मंथली ईएमआई (EMI) और कुल ब्याज के खर्च को लाखों रुपये कम कर सकता है।

वर्तमान में कई सरकारी बैंक 7.10% की शुरुआती दर पर होम लोन की पेशकश कर रहे हैं। हालांकि, आपको किस दर पर लोन मिलेगा, यह आपके क्रेडिट स्कोर, लोन की राशि, आपकी आय और रीपेमेंट हिस्ट्री जैसे कई फैक्टर्स पर निर्भर करता है। आइए जानते हैं देश के प्रमुख सरकारी, प्राइवेट बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFCs) की जुलाई 2026 की ताजा ब्याज दरें।

RBI की नीति और होम लोन का कनेक्शन

होम लोन की ब्याज दरें सीधे तौर पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मौद्रिक नीति से जुड़ी होती हैं. आरबीआई ने अपनी हालिया मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा है, जिसके चलते मार्केट में लोन की दरें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं.

1. सरकारी बैंकों की होम लोन दरें

सरकारी बैंक आमतौर पर सबसे किफायती दरों पर लोन ऑफर करते हैं. यहां प्रमुख सरकारी बैंकों की ब्याज दरों की लिस्ट दी गई है:

  • सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया: 7.10% से 9.15%
  • बैंक ऑफ महाराष्ट्र: 7.10% से 9.90%
  • बैंक ऑफ इंडिया: 7.10% से 10.25%
  • यूको बैंक (UCO Bank): 7.15% से 9.25%
  • इंडियन बैंक: 7.15% से 9.55%
  • यूनियन Bank ऑफ इंडिया: 7.15% से 9.60%

1. सरकारी बैंकों की होम लोन दरें

2. प्राइवेट बैंकों की होम लोन दरें

प्राइवेट सेक्टर के बैंक बेहतर और फास्ट सर्विस के साथ इन दरों पर होम लोन दे रहे हैं:

  • साउथ इंडियन बैंक: 7.20% से शुरुआत
  • फेडरल बैंक: 7.35% से 10.25%
  • HSBC बैंक: 7.45% से शुरुआत
  • कर्नाटक बैंक: 7.49% से 11.72%
  • ICICI बैंक: 7.55% से शुरुआत
  • कोटक महिंद्रा बैंक: 7.60% से शुरुआत

2. प्राइवेट बैंकों की होम लोन दरें

3. हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की दरें

अगर आप बैंकों के बजाय हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों का रुख करना चाहते हैं, तो उनकी दरें इस प्रकार हैं:

  • LIC हाउसिंग फाइनेंस: 7.15% से शुरुआत
  • बजाज हाउसिंग फाइनेंस: 7.25% से शुरुआत
  • PNB हाउसिंग फाइनेंस: 7.50% से शुरुआत
  • ICICI होम फाइनेंस: 7.50% से शुरुआत
  • गोदरेज हाउसिंग फाइनेंस: 7.65% से शुरुआत
  • आदित्य बिड़ला कैपिटल: 7.75% से शुरुआत

3. हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की दरें

सबसे सस्ता लोन पाने के लिए ‘क्रेडिट स्कोर’ है सबसे जरूरी

अगर आप बैंकों द्वारा ऑफर की जा रही सबसे न्यूनतम ब्याज दर (जैसे- 7.10%) का लाभ उठाना चाहते हैं, तो आपका क्रेडिट स्कोर 800 या उससे अधिक होना चाहिए। इसके अलावा ब्याज दरें इस बात पर भी निर्भर करती हैं कि आवेदन करने वाला व्यक्ति नौकरीपेशा है या सेल्फ-एंप्लॉयड। नौकरीपेशा लोगों को बैंक अक्सर ब्याज दरों में थोड़ी एक्स्ट्रा छूट देते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

80 साल का आयरिश व्यक्ति जोधपुर की बावड़ियों की सालों से कर रहा सफाई, आनंद महिंद्रा ने स्पेशल पोस्ट शेयर कर किया सलाम

अपने आस-पास, शहरों और देश को साफ-सुथरा रखना हर नागरिक का फर्ज है, लेकिन कभी-कभी किसी एक व्यक्ति का दृढ़ संकल्प हमें उन चीजों की अहमियत याद दिलाता है, जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। जोधपुर के ऐतिहासिक शहर में, आयरलैंड के रहने वाले एक 80 वर्षीय बुज़ुर्ग ने एक दशक से ज्यादा समय तक भुला दी गई बावड़ियों की सफाई की है और पानी के इन पारंपरिक ढांचों की ओर लोगों का ध्यान फिर से खींचा है।

‘द बेटर इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, कैरॉन रॉन्सली – जिन्हें स्थानीय लोग “पागल साहब” के नाम से जानते हैं – जोधपुर एक पर्यटक के तौर पर आए थे, लेकिन धीरे-धीरे वे शहर की धरोहर की देखभाल करने वाले बन गए। उपेक्षित बावड़ियों और झालरों (सीढ़ीदार जल-कुंडों) को अपने हाथों से ठीक करने की उनकी कोशिशों की अब बिजनेसमैन आनंद महिंद्रा ने भी तारीफ की है।

जहां बहुत से लोग जोधपुर की पुरानी बावड़ियों की सुंदरता की तारीफ करते थे, वहीं रॉन्सली ने कुछ ऐसा देखा जिस पर अक्सर दूसरों का ध्यान नहीं जाता था। बारीक कारीगरी और ऐतिहासिक महत्व के पीछे ऐसी संरचनाएं थीं, जो कचरे से भरी हुई थीं और धीरे-धीरे भुला दी जा रही थीं। वहां से चले जाने के बजाय, उन्होंने इनकी मरम्मत की जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया।

महिंद्रा ने हाल ही में अपने X हैंडल पर एक प्रेरणादायक वीडियो शेयर किया, जिसमें जोधपुर में पुरानी और उपेक्षित बावड़ियों की सफाई करने के रॉन्सली के सफर को दिखाया गया है। इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए महिंद्रा ने लिखा, “जोधपुर की बावड़ियों और झालरों की सफाई के प्रति अपने जुनून के कारण 80 वर्षीय आयरिश व्यक्ति कैरन रॉन्सले को ‘पागल साहब’ का उपनाम दिया गया था। सौभाग्य से, आज भारत की बावड़ियों को पुनर्जीवित करने के लिए खुद को समर्पित करने के लिए आपको ‘पागल’ या ‘फिरंगी’ होने की आवश्यकता नहीं है।”

महिंद्रा ने कहा कि विरासत को बचाने के लिए लोगों का एक्सपर्ट होना या किसी खास जगह का होना जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि लगन रखने वाला कोई भी व्यक्ति भारत की ऐतिहासिक इमारतों को बचाने में योगदान दे सकता है। उन्होंने चांद बावड़ी के बारे में अपनी पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट को भी याद किया, जिसमें उन्होंने मशहूर सीढ़ीदार कुएं (stepwell) को बनाए रखने के लिए की जा रही कोशिशों की तारीफ़ की थी। महिंद्रा ने बताया कि पूरे भारत में संरक्षणवादी, स्थानीय वॉलंटियर और ग्रामीण समुदाय इन शानदार इमारतों को फिर से ठीक करने के लिए काम कर रहे हैं।

ये बावड़ियां सिर्फ पत्थर से बनी पुरानी संरचनाएं नहीं हैं। सदियों से, इन्होंने समुदायों को पानी इकट्ठा करने और उसे जमा करने में मदद करने में अहम भूमिका निभाई है, खासकर राजस्थान जैसे इलाकों में जहां पानी की कमी हमेशा से एक चुनौती रही है। पानी के स्रोत होने के अलावा, बावड़ियां ऐसी जगहें भी बन गईं जहां लोग इकट्ठा होते थे, आराम करते थे और एक-दूसरे से जुड़ते थे। इनके डिज़ाइन पुरानी पीढ़ियों की इंजीनियरिंग कुशलता और सांस्कृतिक परंपराओं को दर्शाते थे।

हालांकि, बदलती जीवनशैली और पानी की आधुनिक सप्लाई प्रणालियों के आने से, कई बावड़ियों का महत्व धीरे-धीरे खत्म हो गया। कई बावड़ियों को नज़रअंदाज़ कर दिया गया और कुछ तो कचरा फेंकने की जगह बन गईं। रॉन्सली के लिए इन ऐतिहासिक ढांचों को ऐसी हालत में देखना मुश्किल था। उन्होंने अपना समय इन्हें साफ़ करने और एक-एक करके इनकी मरम्मत करने में लगाने का फैसला किया।

‘द बेटर इंडिया’ से बात करते हुए रॉन्सली ने कहा, “जब मैं 2014 के आखिर में जोधपुर आया, तो मैंने ये खूबसूरत बावड़ियां देखीं। लेकिन मैं यह देखकर हैरान रह गया कि पानी जमा करने के ये पुराने और अनोखे सिस्टम खराब हालत में थे। इसलिए, मैंने अपना समय इन जगहों की सफाई करने और उन्हें फिर से अच्छी हालत में लाने की कोशिश में लगाने का फैसला किया।”

तब से, रॉन्सली ने जोधपुर में कई बावड़ियों पर काम किया है, जिनमें रामबाउरी और गुलाब सागर शामिल हैं। उन्होंने अपनी मेहनत से वहां से कचरा हटाया और शहर के इन भुला दिए गए हिस्सों की ओर लोगों का ध्यान फिर से खींचा। महिंद्रा ने भारतीय विरासत के प्रति रॉन्सली के समर्पण के लिए उनके प्रति सम्मान भी जाहिर किया। उन्होंने लिखा, “मैं जोधपुर के प्रति उनके प्यार और हमारी विरासत के लिए उनकी निस्वार्थ भावना और जुनून के लिए ‘पागल साहब कैरॉन’ को सलाम करना चाहता हूं। उनका काम कभी न रुके…”

आनंद महिंद्रा द्वारा रॉन्सली की कहानी शेयर किए जाने के बाद, कई यूज़र्स ने इस आयरिश व्यक्ति के समर्पण और जोधपुर की विरासत को बचाने की उनकी कोशिशों की तारीफ़ की। एक यूज़र ने कमेंट किया, “किसी जगह के लिए सच्चा प्यार काम से दिखता है, राष्ट्रीयता से नहीं। ‘पागल साहब’ को सम्मान।”

एक और यूजर ने लिखा, “कितनी अजीब बात है कि उन्हें ‘पागल’ कहा गया, जबकि वे सबसे समझदारी भरा काम कर रहे थे।” एक यूजर ने कहा, “कुछ विदेशी सच में भारत में अपने प्रेरणादायक काम के लिए हमारे सम्मान और समर्थन के हकदार हैं!”

एक और यूज़र ने कहा, “यह एक बहुत अच्छी बात है कि किसी जगह के लिए प्यार इस बात से नहीं मापा जाता कि आप कहां पैदा हुए हैं, बल्कि इस बात से मापा जाता है कि आप उसकी कितनी परवाह करते हैं। कैरॉन रॉन्सली, ‘पागल साहब’ और उन सभी वॉलंटियर्स को सलाम जो चुपचाप हमारी बावड़ियों और विरासत को ठीक करते हैं। उनकी कोशिशें न सिर्फ़ इतिहास को बचाती हैं, बल्कि पानी, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के लिए उम्मीद को भी सुरक्षित रखती हैं। उम्मीद है कि यह भावना और भी लोगों को प्रेरित करेगी।”

एक यूज़र ने लिखा, “मज़ेदार बात है कि कभी-कभी किसी बाहरी व्यक्ति को ही स्थानीय लोगों को यह याद दिलाना पड़ता है कि विरासत सिर्फ पोस्टकार्ड के लिए नहीं, बल्कि एक इंफ्रास्ट्रक्चर है। इतिहास के बारे में सिर्फ बातें करने के बजाय उसे ज़िंदा रखने के लिए सभी का सम्मान।”

AIBE 21 Final Answer Key 2026: ऑफिशियल पोर्टल पर लॉगइन कर एआईबीई 21 की फाइनल अंसर की करें डाउनलोड, सफल उम्मीदवारों को मिलेगा सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस

AIBE 21 Final Answer Key 2026: बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) ने ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) 21 की फाइनल आंसर की जारी कर दी है। परीक्षा में शामिल होने के बाद से सभी उम्मीदवार बेसब्री से फाइनल की का इंतजार कर रहे थे। लेकिन अब वे अपने लॉग इन क्रेडेंशियल की मदद से allindiabarexamination.com पर लॉग इन करके एआईबीई 21 फाइनल आंसर की पीडीएफ डाउनलोड कर सकते हैं। 7 जून को हुई परीक्षा के बाद, प्रोविजनल आंसर की 10 जून को जारी की गई और 17 जून तक आपत्तियां स्वीकार की गईं। फाइनल आंसर की पर आगे कोई ऑब्जेक्शन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बीसीआई द्वारा अब एआईबीई 21 फाइनल आंसर की के आधार पर रिजल्ट तैयार किया जाएगा। एआईबीई 21 फाइनल आंसर-की की मदद से उम्मीदवार अपने जवाबों की जांच कर सकते हैं और अंतिम नतीजों का अनुमान लगा सकते हैं। एआईबीई 21 रिजल्ट 2026 संशोधित आंसर की के आधार पर घोषित होने की उम्मीद है। बीसीआई के अनुसार, एआईबीई 21 का रिजल्ट 14 से 18 जुलाई के बीच घोषित होने की संभावना है। उम्मीदवार वेबसाइट पर अपना एप्लीकेशन नंबर या हॉल टिकट नंबर और जन्म तिथि डालकर अपने स्कोरकार्ड डाउनलोड कर पाएंगे।

एआईबीई 21 फाइनल आंसर की 2026 कैसे डाउनलोड करें?

कैंडिडेट इन स्टेप्स को फॉलो करके फाइनल आंसर की डाउनलोड कर सकते हैं:

  • एआईबीई की ऑफिशियल वेबसाइट allindiabarexamination.com पर जाएं।
  • एआईबीई 21 (XXI) फाइनल आंसर की 2026 लिंक पर क्लिक करें।
  • आंसर की PDF स्क्रीन पर खुल जाएगी।
  • पीडीएफ को डाउनलोड करें और भविष्य के लिए सेव कर लें।
  • अपना संभावित स्कोर कैलकुलेट करने के लिए फाइनल आंसर की का इस्तेमाल करें।

एआईबीई 21 रिजल्ट 2026 और सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस

बीसीआई अब एआईबीई 21 रिजल्ट 2026 फाइनल आंसर की के आधार पर तैयार कर जारी करेगा। चूंकि आपत्ति प्रक्रिया खत्म हो गई है, इसलिए आगे कोई चैलेंज नहीं लिया जाएगा। जो कैंडिडेट परीक्षा पास करेंगे, उन्हें सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (CoP) दिया जाएगा, जो भारत में लॉ की प्रैक्टिस के लिए जरूरी है। कैंडिडेट फाइनल आंसर की डाउनलोड करें और एआईबीई 21 रिजल्ट 2026 की घोषणा के लिए ऑफिशियल वेबसाइट देखते रहें।

क्या है पासिंग परसेंटेज

इस परीक्षा में कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं है। एआईबीई में सफल होने के लिए जनरल और ओबीसी कैटेगरी के उम्मीदवारों को पास होने के लिए 100 में से कम से कम 45 अंक जबकि एससी, एसटी और पीडबल्यूडी के लिए 40 मार्क्स तय किए गए हैं।

Lt Kashish Methwani: मॉडलिंग और ग्लैमर की दुनिया छोड़ कशिश मेथवानी ने चुना देश सेवा का रास्ता, सीडीएस में हासिल की थी एआईआर 2