IND vs ENG: जीत के इरादे से उतरेगी टीम इंडिया, क्या बारिश बिगाड़ेगी मुकाबले में खलल?

IND vs ENG: भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज का पहला मुकाबला बुधवार को चेस्टर-ले-स्ट्रीट में खेला जाएगा। आयरलैंड के खिलाफ सीरीज हारने के बाद भारतीय टीम जीत के साथ वापसी करना चाहेगी। वहीं इंग्लैंड की टीम भी हालिया खराब प्रदर्शन को भुलाकर अपने घरेलू मैदान पर शानदार शुरुआत करने के इरादे से उतरेगी। ऐसे में दोनों टीमें पहले मुकाबले में जीत के साथ सीरीज का आगाज करना चाहेंगी। इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में भारतीय बल्लेबाजी पर सभी की नजर रहेगी। फिलहाल युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को डेब्यू के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है।

वहीं अभिषेक शर्मा से एक बार फिर तेज शुरुआत की उम्मीद होगी, जबकि संजू सैमसन भी अपनी लय हासिल करना चाहेंगे। कप्तान श्रेयस अय्यर के सामने भी टीम को संभालने और अगले टी20 विश्व कप की तैयारियों के बीच मजबूत प्रदर्शन करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। आइए जानते हैं कैसी होगी दोनों टीमों की प्लेइंग 11 और पिच रिपोर्ट

भारत-इंग्लैंड की संभावित प्लेइंग 11

भारत की संभावित प्लेइंग 11: अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेट कीपर), ईशान किशन, श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, सूर्यांश शेज, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह, वरुण चक्रवर्ती।

इंग्लैंड की संभावित प्लेइंग 11: फिल सॉल्ट, जोस बटलर (विकेट कीपर), हैरी ब्रूक (कप्तान), जैकब बेथेल, टॉम बैंटन, विल जैक्स, सैम करन, लियाम डॉसन, ल्यूक वुड, साकिब महमूद, आदिल राशिद।

दोनों टीमों की हेड-टू-हेड

भारत और इंग्लैंड के बीच अब तक टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 30 मुकाबले खेले जा चुके हैं। इन मुकाबलों में भारतीय टीम का रिकॉर्ड बेहतर रहा है। भारत ने 18 मैचों में जीत दर्ज की है, जबकि इंग्लैंड ने 12 मुकाबलों में बाजी मारी है। ऐसे में हेड-टू-हेड रिकॉर्ड में टीम इंडिया का पलड़ा फिलहाल भारी नजर आता है।

कैसा होगा स्टेडियम की पिच

डरहम के रिवरसाइड ग्राउंड की पिच आमतौर पर तेज गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती है। नई गेंद से गेंदबाजों को अच्छी स्विंग और उछाल मिलने की उम्मीद रहती है। वहीं शुरुआती ओवर संभालने के बाद बल्लेबाज खुलकर रन बना सकते हैं। ऐसे में पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम अगर 175 से 185 रन के बीच स्कोर बना लेती है, तो उसे चुनौतीपूर्ण लक्ष्य माना जा सकता है।

कैसा होगा स्टेडियम की मौसम

पहले टी20 मैच के दौरान मौसम नॉर्मल रहने की संभावना है। आसमान में हल्के बादल छाए रह सकते हैं और तापमान करीब 18 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। हल्की बारिश की आशंका जरूर है, लेकिन पूरे मैच के होने की उम्मीद है। मौसम की वजह से शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को स्विंग और अतिरिक्त मदद मिल सकती है।

A-1 लिमिटेड बनी ईशान डाइज की प्राइमरी डीलर, 5 महीने में ₹40 करोड़ का कारोबार

लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल केमिकल सप्लाई करने वाली कंपनी A-1 लिमिटेड को ईशान डाइज एंड केमिकल्स लिमिटेड ने अपने सल्फर-बेस्ड इंडस्ट्रियल केमिकल्स का प्राइमरी ऑथराइज्ड डीलर बनाया है। कंपनी का कहना है कि इससे उसका प्रोडक्ट पोर्टफोलियो मजबूत होगा और इंडस्ट्रियल केमिकल बाजार में उसकी मौजूदगी बढ़ेगी। फरवरी 2026 से अब तक दोनों कंपनियों के बीच करीब 40 करोड़ रुपये का कारोबार हो चुका है।

कौन-कौन से प्रोडक्ट्स की होगी सप्लाई?

इस डील के तहत A-1 लिमिटेड अब सल्फ्यूरिक एसिड (98% और 70%), ओलियम (23% और 65%) और क्लोरो सल्फोनिक एसिड की सप्लाई करेगी। इन केमिकल्स का इस्तेमाल फर्टिलाइजर, फार्मा, डाइज, पेट्रोकेमिकल्स और वॉटर ट्रीटमेंट जैसे कई सेक्टर में होता है।

कंपनी के मुताबिक, इस साझेदारी से सल्फर-बेस्ड केमिकल्स की बढ़ती मांग पूरी करने में मदद मिलेगी। साथ ही, ग्राहकों को समय पर और लगातार सप्लाई मिल सकेगी। A-1 लिमिटेड के पास 100 से ज्यादा गाड़ियों का नेटवर्क है, जिससे वह अपनी सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन क्षमता को और मजबूत करेगी।

कंपनी ने क्या कहा?

A-1 लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर हर्षदकुमार पटेल ने कहा कि यह नियुक्ति कंपनी के मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और भरोसेमंद सेवाओं पर ग्राहकों के विश्वास को दिखाती है। उनके मुताबिक, इससे इंडस्ट्रियल केमिकल्स कारोबार में कंपनी की स्थिति और मजबूत होगी। साथ ही, आने वाले समय में ग्रोथ को भी रफ्तार मिलेगी।

हाल में मिले कई बड़े ऑर्डर

हाल के महीनों में A-1 लिमिटेड को सोलर इंडस्ट्रीज लिमिटेड, महाधन एग्रीटेक लिमिटेड और साईं बाबा पॉलीमर टेक्नोलॉजीज से करीब 35 करोड़ रुपये के सप्लाई ऑर्डर मिले हैं।

इसके अलावा कंपनी ने GNFC और सोलर इंडस्ट्रीज़ इंडिया लिमिटेड के साथ 10,000 मीट्रिक टन नाइट्रिक एसिड की सप्लाई का समझौता किया है। कंपनी को 127.50 करोड़ रुपये का इंडस्ट्रियल यूरिया सप्लाई ऑर्डर भी मिला है।

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में भी रखा कदम

A-1 लिमिटेड ने हाल ही में A-1 सुरेजा इंडस्ट्रीज में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 51% कर ली है। इसके बाद यह कंपनी उसकी सब्सिडियरी बन गई है। इसके साथ ही A-1 लिमिटेड ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी कारोबार में भी एंट्री कर ली है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

पीएम मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से की बात, होर्मुज की ‘आजादी’ के साथ इन मुद्दों पर दिया जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए संघर्ष के बाद पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। बातचीत के दौरान राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने प्रधानमंत्री मोदी को क्षेत्र के ताजा हालात और आगे की संभावित स्थिति की जानकारी दी। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल में बनी सहमति का स्वागत किया। साथ ही उन्होंने दोहराया कि भारत का हमेशा से यही मानना रहा है कि सभी विवादों और लंबित मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए ही होना चाहिए।

इन मुद्दों पर हुई बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में स्थायी शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इसका असर भारत समेत कई देशों के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम एशिया में हाल ही में तनाव बढ़ा था। इसके बावजूद भारत, ईरान के साथ अपने मजबूत कूटनीतिक संबंध बनाए हुए है और दोनों देश उच्च स्तर पर लगातार संपर्क में हैं। साथ ही, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है।

ईरान ने भेजा बुलावा 

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए ईरान ने भारत को बुलावा भेजा है। इस कार्यक्रम में भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा हिस्सा लेंगे। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, सार्वजनिक समारोह 4 जुलाई को स्थानीय समयानुसार सुबह 6 बजे तेहरान के इमाम खुमैनी ग्रैंड प्रेयर ग्राउंड्स में शुरू होगा। इसी समय से आम लोगों के लिए भी कार्यक्रम स्थल खोल दिया जाएगा, ताकि वे श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें।

मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच भारत- ईरान के मजबूत रिश्ते

ईरान, इज़रायल और अमेरिका के बीच संघर्ष के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया था। इसके बावजूद भारत ने ईरान के साथ अपने कूटनीतिक संबंध लगातार मजबूत बनाए रखे। इसके लिए दोनों देशों के बीच उच्च स्तर पर राजनीतिक, रणनीतिक और मानवीय स्तर पर लगातार बातचीत होती रही। प्रधानमंत्री स्तर की बातचीत से लेकर मंत्रियों की मुलाकातों और ब्रिक्स (BRICS) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों तक, भारत ने ईरान के साथ संवाद जारी रखा और सभी स्तरों पर संपर्क बनाए रखा। संघर्ष के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से दो बार फोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में शांति, स्थिरता और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की जरूरत पर जोर दिया।

जना स्मॉल फाइनेंस बैंक की होल्डिंग कंपनी को मिल सकती है ‘डिफॉल्ट’ रेटिंग, कर्ज चुकाने में की देरी : सूत्र

जना स्मॉल फाइनेंस बैंक की होल्डिंग कंपनी Jana Holdings Limited (JHL) की क्रेडिट रेटिंग घटकर ‘डिफॉल्ट’ कैटेगरी में जा सकती है। CNBC-TV18 को मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि इसकी वजह नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) की रकम तय समय पर नहीं चुका पाना है।

NCD भुगतान में हुई देरी

सूत्रों के मुताबिक, JHL ने NCD की भुगतान अवधि 30 जून 2026 से बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दी है। यानी कंपनी को भुगतान के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय मिला है।

बताया जा रहा है कि यह फैसला डिबेंचर-होल्डर्स की सहमति से लिया गया है। इनमें प्रमुख निवेशक TPG Asia VI India Markets Pte भी शामिल है। ऐसे में इसे टेक्निकल डिफॉल्ट माना जा रहा है।

 Jana Holdings को क्यों आई दिक्कत?

सूत्रों के अनुसार, JHL को उम्मीद थी कि वह Jana Small Finance Bank में अपनी हिस्सेदारी बेचकर NCD का भुगतान कर देगी। लेकिन हिस्सेदारी का समय पर मोनेटाइजेशन नहीं हो पाया, जिससे भुगतान में देरी हुई।

JHL की हिस्सेदारी पहले 44% थी, जो TVS Venu Group को आंशिक हिस्सेदारी बेचने के बाद घटकर करीब 16.95% रह गई है। सूत्रों का कहना है कि अगर रीफाइनेंसिंग की जरूरत पड़ी, तो कंपनी अपनी बची हुई हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा भी बेच सकती है।

Jana Small Finance Bank पर कितना असर?

सूत्रों के मुताबिक, इस घटनाक्रम का Jana Small Finance Bank के कारोबार पर सीधा असर सीमित रहने की उम्मीद है। बैंक को जून 2022 के बाद से JHL की ओर से कोई नई पूंजी नहीं मिली है। फंडिंग के मामले में बैंक स्वतंत्र रूप से काम करता है।

इसके अलावा JHL और बैंक के बोर्ड में कोई साझा प्रतिनिधित्व नहीं है। दोनों के कर्ज भी आपस में जुड़े नहीं हैं। इसलिए होल्डिंग कंपनी की रेटिंग में गिरावट का सीधा वित्तीय असर बैंक पर पड़ने की संभावना कम मानी जा रही है।

हालांकि, अगर JHL आगे अपनी बची हुई हिस्सेदारी भी बेचती है, तो इससे Jana Small Finance Bank के शेयर पर शॉर्ट टर्म में दबाव बन सकता है। फिलहाल इस मामले पर Jana Holdings और Jana Small Finance Bank की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

Stocks to Watch: 1 जुलाई को फोकस में रहेंगे ये 9 स्टॉक्स, दिख सकता है तगड़ा एक्शन

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RFBL Flexi Pack को मिला ₹20 करोड़ का ऑर्डर, 4 महीने में करेगी सप्लाई

पैकेजिंग कंपनी RFBL Flexi Pack को घरेलू बाजार से 20 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। कंपनी 3B Films को ट्रांसपेरेंट और मेटलाइज्ड फिल्म्स की सप्लाई करेगी। इस ऑर्डर को अगले चार महीनों में पूरा किया जाएगा।

कंपनी ने साफ किया कि यह किसी रिलेटेड पार्टी (Related Party) के साथ हुआ सौदा नहीं है। इस ऑर्डर में कंपनी के प्रमोटर या प्रमोटर ग्रुप की भी कोई हिस्सेदारी नहीं है।

RFBL Flexi Pack को मिलेगी मजबूती

कंपनी का कहना है कि इस ऑर्डर से फ्लेक्सिबल पैकेजिंग कारोबार में उसकी स्थिति और मजबूत होगी। ट्रांसपेरेंट और मेटलाइज्ड फिल्म्स का इस्तेमाल फूड, FMCG, फार्मा और इंडस्ट्रियल पैकेजिंग में बड़े पैमाने पर होता है।

ये फिल्म्स पैकेजिंग को ज्यादा मजबूत बनाती हैं। साथ ही उत्पाद को सुरक्षित रखने और उसकी शेल्फ लाइफ बढ़ाने में भी मदद करती हैं। कंपनी का कहना है कि यह ऑर्डर अलग-अलग इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा करने की उसकी रणनीति को और मजबूत करेगा।

UAE में भी बढ़ाएगी कारोबार

हाल ही में RFBL Flexi ने UAE में अपनी सब्सिडियरी बनाने का फैसला किया है। इसका मकसद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कारोबार बढ़ाना और विदेशी बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत करना है।

मजबूत घरेलू कारोबार, बेहतर वित्तीय प्रदर्शन और विदेशों में विस्तार की योजना के साथ RFBL Flexi Pack फ्लेक्सिबल पैकेजिंग इंडस्ट्री में अपनी पकड़ लगातार मजबूत कर रही है।

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Gaurav Khanna: ‘वो मेरी बीवी है यार’, तलाक की खबरों पर गौरव खन्ना ने दिया रिएक्शन

एक्ट्रेस आकांक्षा चमोला और एक्टर गौरव खन्ना इन दिनों अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं। आकांक्षा ने रियलिटी शो ‘लॉक अप सीजन 2’ के पहले एपिसोड में बताया कि उन्होंने और गौरव खन्ना ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला किया है। आकांक्षा ने बताया की वह पिछले 1 साल से एक दूसरे के साथ नहीं रह रहे हैं। वहीं तलाक की खबरों के बीच गौरव खन्ना लंबे समय बाद 30 जून को ‘लाफ्टर शेफ्स’ के सेट पर नजर आए। बिग बॉस 19 विनर गौरव खन्ना ‘लाफ्टर शेफ्स’ के सेट के बाहर पैपराजी को पोज देते नजर आए।

गौरव ने क्या कहा

इसी दौरान एक फोटोग्राफर ने उनसे पूछा, “गौरव भाई, क्या हाल है?” इस पर मुस्कुराते हुए गौरव ने कहा, “बस यार, वही जो पहले था, वही हाल है अभी भी। प्यार अभी भी बढ़ना है, सपोर्ट अभी भी बढ़ना है… मैं तो हमेशा आकांक्षा का साथ दूंगा, मेरी बीवी है यार। प्यार किया है तो पीछे क्यों हटूं।” जब आगे पूछा, “भाई, लेकिन कॉन्ट्रोवर्सी बहुत ज्यादा हो गई है…”, तो गौरव ने जवाब दिया, “आकांक्षा को जिंदगी के लिए मेरी तरफ से ढेर सारी शुभकामनाएं। मैं हमेशा उसके साथ खड़ा हूं और उसका सपोर्ट करता रहूंगा। वह अच्छा खेले और जीतकर वापस आए।”

वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते ही फैंस ने इस पर अपना रिएक्शन देना शुरू कर दिया। एक फैन ने कमेंट किया, “Gk बेस्ट है।” वहीं दूसरे फैन ने लिखा, “उसकी आंखें,” और इसके साथ रोने वाली इमोजी भी शेयर की।

 

आकांक्षा ने क्या कहा

इस बीच, ‘लॉक अप’ के हालिया एपिसोड में आकांक्षा को अपने को-कंटेस्टेंट्स श्रेया कालरा और सूफी मोतीवाला से बात करते देखा गया। अपने तलाक की वजह बताते हुए उन्होंने कहा, “जब हमारी शादी हुई थी, तब मेरे अंदर कभी मां बनने की इच्छा नहीं थी। मैंने खुद को समझने की कोशिश की, लेकिन धीरे-धीरे मुझे एहसास हुआ कि मैं इसके लिए बनी ही नहीं हूं। उस समय गौरव भी इस बात से ठीक थे, लेकिन समय के साथ उनका विचार बदल गया। अब वह बच्चे चाहते हैं और मैं उन्हें यह नहीं दे सकती। मेरे अंदर वह इंस्टिंक्ट नहीं है और मैंने यह बात उन्हें बहुत पहले ही बता दी थी। जब मुझे यकीन हो गया कि मैं इसके लिए नहीं बनी हूं, तभी मैंने साफ कह दिया था कि मैं ऐसा नहीं करूंगी। फिर मैंने उनसे कहा कि अगर वह मुझे छोड़ना चाहते हैं, तो छोड़ सकते हैं, मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है।”

‘लॉक अप’ के लॉन्च इवेंट में आकांक्षा चमोला ने खुलासा किया कि वह और गौरव खन्ना पिछले करीब एक साल से अलग-अलग रह रहे हैं। उनके इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा शुरू हो गई। कई लोगों ने इस दावे पर सवाल उठाए, जबकि कुछ यूजर्स ने इसे शो की पब्लिसिटी से जोड़कर भी देखा।

Multi Cap vs Flexi Cap: मल्टीकैप या फ्लेक्सी कैप… जानिए कौन-सा म्यूचुअल फंड आपके लिए रहेगा बेहतर?

Multi Cap vs Flexi Cap: जब हम अपनी गाढ़ी कमाई निवेश करने की सोचते हैं, तो चाहते हैं कि पैसा सुरक्षित रहे और अच्छा रिटर्न भी मिले। ऐसे निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड काफी लोकप्रिय विकल्प है। लेकिन यहां भी अक्सर लोग मल्टी-कैप (Multi Cap) और फ्लेक्सी-कैप (Flexi Cap) फंड को लेकर उलझ जाते हैं।

नाम सुनने में दोनों एक जैसे लगते हैं, लेकिन निवेश का तरीका और रणनीति अलग है। मनीफ्रंट के को-फाउंडर और CEO मोहित गांग ने आसान शब्दों में समझाया कि दोनों फंड कैसे काम करते हैं और किस तरह के निवेशक के लिए कौन-सा विकल्प बेहतर हो सकता है।

मल्टी-कैप फंड कैसे काम करता है?

मल्टी-कैप फंड को आप ऐसे परिवार की तरह समझ सकते हैं, जहां हर खर्च पहले से तय होता है। SEBI के नियमों के मुताबिक, इस फंड को अपनी कुल रकम का कम से कम 75% शेयर बाजार में निवेश करना होता है।

इसके अलावा फंड मैनेजर को 25% लार्ज-कैप, 25% मिड-कैप और 25% स्मॉल-कैप कंपनियों में निवेश करना ही पड़ता है। बाकी 25% रकम वह अपनी रणनीति के हिसाब से कहीं भी लगा सकता है।

मोहित गांग के मुताबिक, यही इसकी सबसे बड़ी ताकत भी है और सबसे बड़ी सीमा भी। फायदा यह है कि आपका पैसा हर तरह की कंपनियों में बंटा रहता है। लेकिन अगर बाजार में गिरावट आए और स्मॉल-कैप शेयर लगातार कमजोर चल रहे हों, तब भी फंड मैनेजर वहां से पूरा पैसा नहीं निकाल सकता। उसे नियमों के मुताबिक निवेश बनाए रखना पड़ता है। इससे जोखिम बढ़ सकता है।

फ्लेक्सी-कैप फंड में क्या खास है?

फ्लेक्सी-कैप फंड में फंड मैनेजर के पास ज्यादा आजादी होती है। इसे सिर्फ अपनी कुल रकम का कम से कम 65% शेयरों में निवेश करना होता है। इसके बाद वह बाजार की स्थिति के हिसाब से निवेश का फैसला ले सकता है।

अगर उसे लगता है कि आने वाले समय में स्मॉल-कैप कंपनियां बेहतर प्रदर्शन करेंगी, तो वह वहां ज्यादा पैसा लगा सकता है। अगर बाजार में जोखिम बढ़ता दिखे, तो वह निवेश का बड़ा हिस्सा लार्ज-कैप कंपनियों में शिफ्ट कर सकता है। जरूरत पड़ने पर वह स्मॉल-कैप में निवेश शून्य भी कर सकता है।

मोहित गांग का कहना है कि फ्लेक्सी-कैप की सबसे बड़ी ताकत यही लचीलापन है। फंड मैनेजर बाजार के हिसाब से रणनीति बदल सकता है। इससे गिरावट के दौर में जोखिम को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

आपके लिए कौन-सा फंड सही रहेगा?

यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितना जोखिम उठा सकते हैं। मोहित गांग के मुताबिक, अगर आप लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं और बाजार के उतार-चढ़ाव से ज्यादा परेशान नहीं होते, तो मल्टी-कैप फंड आपके लिए बेहतर हो सकता है। इसमें मिड और स्मॉल-कैप का हिस्सा तय होने की वजह से लंबे समय में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। हालांकि, इसमें जोखिम भी ज्यादा होता है।

अगर आप चाहते हैं कि बाजार की स्थिति के हिसाब से आपका पोर्टफोलियो बदलता रहे और जोखिम कुछ कम रहे, तो फ्लेक्सी-कैप फंड बेहतर विकल्प हो सकता है। इसमें फंड मैनेजर बाजार के हिसाब से निवेश का अनुपात बदल सकता है।

Multibagger Stocks: रामदेव अग्रवाल ने बताया अच्छे स्टॉक खरीदने का फॉर्मूला, इन 10 बातों से होगी पहचान

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IND vs ENG: वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू पर सस्पेंस बरकरार, प्लेइंग इलेवन को लेकर श्रेयस अय्यर ने अब तक नहीं खोले पत्ते

IND vs ENG: आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में भारत को 2-0 से हार का सामना करना पड़ा। इस सीरीज में संजू सैमसन और ईशान किशन का प्रदर्शन भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। इसके बाद युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में मौका देने की मांग और तेज हो गई है। वहीं आयरलैंड के बाद अब भारतीय टीम इंग्लैंड के साथ 5 मैचों की टी20 सीरीज खेलेगी। टी20 सीरीज का पहला मुकाबला 1 जुलाई को खेला जाएगा। भारत और इंग्लैंड के बीच पहले टी20 मैच से पहले कप्तान श्रेयस अय्यर ने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

श्रेयस अय्यर से जब पूछा गया कि क्या वैभव पहले मुकाबले में खेलेंगे, तो उन्होंने कहा कि टीम चयन से जुड़ी बातें सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं। अय्यर ने कहा कि वह टीम की रणनीति या प्लेइंग इलेवन के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं दे सकते।

तोड़ सकते हैं रिकॉर्ड

15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी से उम्मीद की कि उन्हें आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिलेगा। टीम में चुने जाने के बाद वह भारत के लिए सबसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले खिलाड़ी बन सकते थे। टीम प्रबंधन ने पहले दो मैचों में वैभव को मौका नहीं दिया और संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा व ईशान किशन जैसे अनुभवी बल्लेबाजों पर भरोसा जताया।

वैभव के डेब्यू पर क्या बोले अय्यर

श्रेयस अय्यर ने मंगलवार को कहा, “देखिए, आपको कभी नहीं पता होता कि क्या होने वाला है। फिलहाल मैं इस बारे में कुछ नहीं बता सकता, क्योंकि टीम संयोजन से जुड़ी बातें पूरी तरह निजी होती हैं। हम अपनी रणनीति और प्लेइंग इलेवन के बारे में पहले से खुलासा नहीं कर सकते, क्योंकि इससे विपक्षी टीम को फायदा मिल सकता है।” उन्होंने आगे कहा, “वैभव एक शानदार प्रतिभाशाली खिलाड़ी है और जब भी उसे मौका मिलेगा, मुझे पूरा भरोसा है कि वह बेहतरीन प्रदर्शन करेगा।”

अय्यर ने क्या कहा

जब उनसे बेंच पर बैठे खिलाड़ियों और विश्व कप विजेता खिलाड़ियों को लगातार मौका देने को लेकर सवाल पूछा गया, तो अय्यर ने टीम के फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा, “इस टीम में हर खिलाड़ी ने अच्छा प्रदर्शन किया है, ऐसा नहीं है कि सिर्फ एक खिलाड़ी ने ही खुद को साबित किया है। हमें खिलाड़ियों का भरोसा बनाए रखना होगा और उन्हें लगातार मौके देने होंगे, ताकि उनका आत्मविश्वास बना रहे। जिन्होंने पिछला टी20 विश्व कप जीता है, उन्हें इस फॉर्मेट का अच्छा अनुभव है और वे लंबे समय से टीम के अहम खिलाड़ी रहे हैं। इसलिए उनका समर्थन करना जरूरी है।”

ट्रंप की इमिग्रेशन पॉलिसी को झटका, बर्थराइट सिटिजनशिप पर आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बड़ा झटका दिया है। US सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को यूनाइटेड स्टेट्स में बर्थराइट सिटिजनशिप पर रोक लगाने की वाली उनकी कोशिश को खारिज कर दिया। अदालत का यह फैसला अमेरिका की इमिग्रेशन नीति और संविधान के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के अनुसार, अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग सभी बच्चों को नागरिकता मिलने का अधिकार है। अदालत ने इस पुराने संवैधानिक प्रावधान को फिर से सही माना।

इस साल दूसरी बार हुआ है जब कोर्ट ने ट्रंप की किसी बड़ी पहल को अमान्य कर दिया है, इससे पहले फरवरी में उनके बड़े ग्लोबल टैरिफ को खत्म करने का फैसला लिया गया था।

ट्रंप की इमिग्रेशन पॉलिसी को झटका

दरअसल, जनवरी 2025 में राष्ट्रपति पद संभालने के पहले दिन डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इस आदेश का उद्देश्य उन बच्चों को जन्म के साथ मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता से वंचित करना था, जिनके माता-पिता अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे हों या अस्थायी वीजा पर हों। इस आदेश के तहत केवल उन्हीं बच्चों को जन्म के आधार पर अमेरिकी नागरिकता देने का प्रस्ताव था, जिनके कम से कम एक माता-पिता अमेरिकी नागरिक हों या कानूनी रूप से स्थायी निवासी (ग्रीन कार्ड धारक) हों। हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह आदेश लागू नहीं हो सकेगा।

बर्थराइट सिटिजनशिप  पर आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द

डोनाल्ड ट्रंप की इमिग्रेशन नीति को बड़ा झटका देते हुए अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें ट्रंप के इस कार्यकारी आदेश पर रोक लगा दी गई थी। डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से कहते रहे हैं कि जन्म के आधार पर अपने-आप मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता की मौजूदा व्यवस्था का कुछ लोग गलत फायदा उठाते हैं, जिससे देश की इमिग्रेशन व्यवस्था प्रभावित होती है। वहीं, ट्रंप के विरोधियों का आरोप है कि उनकी सरकार की कई इमिग्रेशन नीतियां भेदभावपूर्ण रही हैं और उनका असर खास समुदायों के लोगों पर अधिक पड़ता है।

यह मामला अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन में मौजूद नागरिकता संबंधी प्रावधान से जुड़ा है। इस प्रावधान में कहा गया है कि अमेरिका में जन्म लेने वाले या कानूनी रूप से अमेरिकी नागरिक बनने वाले सभी लोग, जो देश के कानून के दायरे में आते हैं, अमेरिका के नागरिक माने जाएंगे। पिछले 150 से ज्यादा वर्षों से इस नियम का यही मतलब माना जाता रहा है कि अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग सभी बच्चों को जन्म के साथ ही अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है, चाहे उनके माता-पिता का इमिग्रेशन स्टेटस कुछ भी हो।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अमेरिका के सॉलिसिटर जनरल डी. जॉन सॉयर ने ट्रंप प्रशासन की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी संविधान के नागरिकता संबंधी प्रावधान का मुख्य उद्देश्य पहले गुलाम रहे लोगों और उनकी आने वाली पीढ़ियों को अमेरिकी नागरिकता का अधिकार देना था। सॉयर ने यह भी कहा कि “बर्थ टूरिज्म” यानी सिर्फ बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के लिए दूसरे देशों के लोगों का अमेरिका जाकर बच्चे को जन्म देने का चलन बढ़ रहा है। उनका दावा था कि कई विदेशी नागरिक इसी मकसद से अमेरिका आते हैं। हालांकि, जब सुप्रीम कोर्ट के जजों ने उनसे इस दावे के समर्थन में आंकड़े मांगे, तो उन्होंने स्वीकार किया कि इस तरह के मामलों की संख्या बताने वाला कोई ठोस या आधिकारिक डेटा उनके पास नहीं है।