El Nino Impact in July: IMD के मंथली आउटलुक में जुलाई में भी मानसून वाली बारिश का हाल ठीक नहीं, अल नीनो का खतरा यहां तक पहुंचा

देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जुलाई 2026 के लिए अपना मासिक आउटलुक जारी कर दिया है। मौसम विभाग का यह पूर्वानुमान चिंता बढ़ाने वाला है। आईएमडी के मुताबिक जुलाई के महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की बारिश का हाल ठीक नहीं रहने वाला है और इसके सामान्य से कम होने की पूरी संभावना है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो को माना जा रहा है। इसका खतरा अब और बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

जुलाई में सामान्य से कम रहेगी बारिश: IMD का पूर्वानुमान

IMD द्वारा मल्टी-मॉडल एनसेंबल फोरकास्टिंग सिस्टम के आधार पर अपने पूर्वानुमान जारी किए गए हैं। इसके मुताबिक जुलाई के दौरान पूरे देश में मासिक औसत वर्षा सामान्य से कम (<94% of Long Period Average – LPA) रहने की सबसे अधिक संभावना है।

क्या है बारिश का सामान्य आंकड़ा (LPA)?

साल 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर जुलाई महीने के लिए पूरे देश की दीर्घकालिक औसत वर्षा लगभग 280.4 मिमी है। IMD का पूर्वानुमान है कि देश के अधिकांश हिस्सों में जुलाई में कम बारिश होगी। उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ हिस्सों, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में बारिश सामान्य से ऊपर या सामान्य रहने की संभावना है।

मजबूत हो रहा है अल नीनो, न्यूट्रल रहेगा आईओडी

मौसम विभाग ने मानसून की बारिश पर असर डालने वाले वजहों के बारे में भी बताया है। IMD के मुताबिक अभी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के ऊपर कमजोर अल नीनो की स्थिति बनी हुई है। लेकिन मानसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) और अन्य वैश्विक जलवायु मॉडलों के ताजा संकेत बताते हैं कि दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह अल नीनो स्थितियां और अधिक मजबूत हो सकती हैं।

इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति कैसी है?

इस समय हिंद महासागर में न्यूट्रल आईओडी की स्थिति देखी जा रही है। मॉडल के पूर्वानुमानों के अनुसार, पूरे दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह न्यूट्रल आईओडी स्थिति ही बनी रहने की संभावना है। इंडियन ओशन डाइपोल हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के समुद्री सतह के तापमान में अंतर को दर्शाने वाली जलवायु सिस्टम है। सामान्य तौर पर यदि IOD सकारात्मक रहता है तो यह भारतीय मानसून को मजबूत करने में मदद करता है। साथ ही अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम कर देता है। लेकिन इस बार IOD के तटस्थ रहने की संभावना है। इसका मतलब है कि यह मानसून को अतिरिक्त मजबूती नहीं दे पाएगा और अल नीनो का प्रभाव अधिक हावी रहेगा।

जुलाई में सताएगी गर्मी, तापमान रहेगा सामान्य से अधिक

कम बारिश के अनुमान के बीच जुलाई के महीने में देशवासियों को सामान्य से अधिक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। जुलाई के दौरान, देश के अधिकांश हिस्सों में मासिक अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है। हालांकि, पश्चिम-मध्य भारत के कुछ छिटपुट इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है। रात के समय या न्यूनतम तापमान की बात करें तो देश के अधिकांश क्षेत्रों में यह भी सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। सिर्फ मध्य और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ अलग-अलग हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य रह सकता है।

कम बारिश से बढ़ेंगी चुनौतियां, तैयारी करने की सलाह

आईएमडी ने आगाह किया है कि जुलाई में सामान्य से कम बारिश होने के कारण कई मोर्चों पर गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। बारिश की कमी के कारण कृषि, जल संसाधन, जलविद्युत उत्पादन, पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता और पीने के पानी की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।

मौसम विभाग ने बताया कि वह नुकसान को कम करने के लिए विस्तारित अवधि के पूर्वानुमान, जिला-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान, कृषि-मौसम विज्ञान सलाहकार सेवाएं और प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान जारी करता रहता है। ये किसान, आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और बिजली क्षेत्र के योजनाकारों के लिए मददगार हैं।

अगला पूर्वानुमान कब?

आईएमडी द्वारा मानसून सीजन के दूसरे भाग (अगस्त + सितंबर 2026) के लिए और विशेष रूप से अगस्त महीने की बारिश का पूर्वानुमान जुलाई 2026 के अंत में जारी किया जाएगा

IND vs ENG: ‘बेलफास्ट के हालात थे अलग’, इंग्लैंड सीरीज से पहले श्रेयस अय्यर का बड़ा बयान

आयरलैंड ने दो मैचों की टी20 सीरीज में भारत का 2-0 से सूपड़ा साफ कर दिया। इसके साथ ही साल 2023 के बाद पहली बार भारतीय टीम को किसी टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में हार का सामना करना पड़ा। आयरलैंड के खिलाफ सीरीज में हार के बाद भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर को उम्मीद है कि इंग्लैंड के खिलाफ टीम बेहतर प्रदर्शन करेगी। भारतीय कप्तान के मुताबिक, इंग्लैंड में खेलने का माहौल खिलाड़ियों के लिए ज्यादा परिचित है, जबकि बेलफास्ट की परिस्थितियां अलग और चुनौतीपूर्ण थीं। ऐसे में टीम अब नई शुरुआत करते हुए सीरीज में दमदार वापसी करना चाहेगी।

कप्तान श्रेयस अय्यर ने कहा कि बेलफास्ट की परिस्थितियां टीम के लिए नई और चुनौतीपूर्ण थीं। उनका मानना है कि इंग्लैंड में होने वाले मुकाबलों की परिस्थितियां खिलाड़ियों के लिए ज्यादा परिचित होंगी, जिससे टीम बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। भारत अब पिछली हार को भूलकर दमदार वापसी करने की कोशिश करेगा।

मैदान काफी अलग था

श्रेयस अय्यर ने मंगलवार को कहा, “यह पूरी तरह अलग माहौल था। बेलफास्ट का मैदान सामान्य स्टेडियम जैसा नहीं था। आउटफील्ड में हल्की ढलान थी, मैदान कुछ जगह ऊबड़-खाबड़ था और उसका आकार भी थोड़ा अलग था। ऐसे में सिंगल और डबल रन रोकना आसान नहीं था। कप्तान के तौर पर फील्ड सेट करना भी चुनौतीपूर्ण रहा, क्योंकि हम ऐसी परिस्थितियों के आदी नहीं हैं। आईपीएल में ज्यादातर मैदान हर तरफ से बराबर होते हैं, इसलिए वहां खेलना हमारे लिए थोड़ा मुश्किल रहा।”

इंग्लैड के खिलाफ करेंगे बेहतरीन प्रदर्शन

अय्यर को उम्मीद है कि इंग्लैंड के मैदान और माहौल भारतीय खिलाड़ियों के लिए ज्यादा परिचित हैं। अय्यर ने कहा, “यहां मैदान का आकार लगभग एक जैसा है, आउटफील्ड भी समतल है और स्टेडियम का माहौल बिल्कुल अलग होता है। यहां बड़ी संख्या में दर्शक भी आएंगे। हम पहले भी ऐसी परिस्थितियों में खेल चुके हैं, इसलिए खुद को ढालना आसान रहेगा।” उन्होंने यह भी माना कि बेलफास्ट में भारतीय बल्लेबाजों को काफी दिक्कत हुई, क्योंकि आयरलैंड के तेज गेंदबाजों ने अतिरिक्त उछाल और बड़ी स्क्वायर बाउंड्री का पूरा फायदा उठाते हुए बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।

कब खेला जाएगा पहला टी20

आयरलैंड के खिलाफ शुरुआती हार के बाद श्रेयस अय्यर ने कहा था कि उनकी टीम किसी भी प्रतिद्वंद्वी को हल्के में नहीं ले सकती। उन्होंने माना कि टीम नए हालात के अनुसार अपने खेल की योजना को सही तरीके से लागू नहीं कर सकी। अब भारतीय टीम इंग्लैंड के खिलाफ नई शुरुआत करने के इरादे से उतरेगी। दोनों टीमों के बीच टी20 सीरीज का पहला मुकाबला 1 जुलाई को चेस्टर-ले-स्ट्रीट के रिवरसाइड ग्राउंड में खेला जाएगा। ये मुकाबला रात 10 बजे से शुरू होगा।

Stocks to Watch: 1 जुलाई को फोकस में रहेंगे ये 9 स्टॉक्स, दिख सकता है तगड़ा एक्शन

Stocks to Watch: बुधवार, 1 जुलाई के कारोबार में कई शेयर खबरों के चलते फोकस में रह सकते हैं। कहीं नए प्रोडक्ट और बड़ी डील का असर दिख सकता है, तो कहीं टैक्स विवाद और जून महीने के बिक्री आंकड़े निवेशकों की नजर में रहेंगे। ऐसे में इन शेयरों में बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है।

KPIT Technologies

टेक्नोलॉजी कंपनी KPIT Technologies ने कहा है कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही उम्मीद से कमजोर रह सकती है। कंपनी को रेवेन्यू में सालाना आधार पर करीब 1% की गिरावट का अनुमान है। वहीं EBITDA और नेट मार्जिन भी पिछली तिमाही के मुकाबले घट सकते हैं। हालांकि, कंपनी को दूसरी छमाही में कारोबार में सुधार और चौथी तिमाही में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है।

L&T Technology Services

इंजीनियरिंग और टेक कंपनी L&T Technology Services ने AI बेस्ड प्लेटफॉर्म Ainfonix 4.0 लॉन्च किया है। इसकी मदद से इंजीनियरिंग डॉक्युमेंट्स और तकनीकी रिकॉर्ड को डिजिटल डेटा में बदला जा सकेगा।

HDFC Life Insurance

लाइफ इंश्योरेंस कंपनी HDFC Life Insurance को GST मामले में झटका लगा है। थाणे के कमिश्नर (अपील) ने ब्याज और जुर्माने समेत 132.7 करोड़ रुपये की GST डिमांड को बरकरार रखा है।

Kotak Mahindra Bank

प्राइवेट सेक्टर के Kotak Mahindra Bank ने Deutsche Bank के साथ डील की है। कोटक इसके तहत बैंक के भारत में रिटेल बैंकिंग, प्राइवेट बैंकिंग और वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार को करीब 281.7 करोड़ रुपये में खरीदेगा।

Paras Defence

डिफेंस कंपनी Paras Defence and Space Technologies ने Tandem Defense LLC के साथ Guardian-1 Interceptor तकनीक के लिए IP लाइसेंस एग्रीमेंट किया है।

Prestige Estates Projects

रियल एस्टेट कंपनी Prestige Estates Projects ने मुंबई के मुलुंड में Prestige Forest Hills प्रोजेक्ट का दूसरा चरण लॉन्च किया है। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित ग्रॉस डेवलपमेंट वैल्यू 2,200 करोड़ रुपये है।

Auto Stocks

ऑटो सेक्टर की कंपनियां जून महीने के बिक्री आंकड़े जारी करेंगी। अनुमान है कि पैसेंजर व्हीकल की बिक्री में 26% और दोपहिया वाहनों की बिक्री में 18% की सालाना बढ़ोतरी हो सकती है।

Hexaware Technologies

आईटी कंपनी Hexaware Technologies ने Tensai for Reasoning Ops नाम का नया AI प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। इसका मकसद एंटरप्राइज आईटी ऑपरेशंस में एजेंटिक AI का इस्तेमाल बढ़ाना है।

Zaggle Prepaid Ocean Services

फिनटेक कंपनी Zaggle Prepaid Ocean Services ने APAC Financial Services के साथ 5 साल का समझौता किया है। इसके तहत कंपनी अपने एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म की सेवाएं उपलब्ध कराएगी।

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665KM रेंज, 5.8 सेकंड में 100kmph की रफ्तार! Tata Sierra EV हुई लॉन्च, जानें कीमत, फीचर्स और बैटरी की पूरी डिटेल

टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स ने भारत में अपनी नई Tata Sierra EV लॉन्च कर दी है। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 18.79 लाख रुपये रखी गई है। इसके साथ ही टाटा की सबसे लोकप्रिय एसयूवी में से एक सिएरा अब पूरी तरह इलेक्ट्रिक रूप में भारतीय बाजार में लौट आई है। नई Tata Sierra EV कुल पांच वेरिएंट में उपलब्ध है। इसमें दो बैटरी पैक का विकल्प मिलता है। कंपनी का दावा है कि यह एक बार चार्ज करने पर 665 किलोमीटर तक (एमआईडीसी प्रमाणित) की ड्राइविंग रेंज देती है। इसके अलावा इसमें ऑल-व्हील ड्राइव (AWD) का विकल्प और बैटरी पर लाइफटाइम वारंटी भी दी गई है।

यह टाटा मोटर्स की सातवीं इलेक्ट्रिक कार है। इससे पहले कंपनी टियागो ईवी, टिगोर ईवी, पंच ईवी, नेक्सॉन ईवी, कर्व ईवी और हैरियर ईवी को बाजार में उतार चुकी है। Tata Sierra EV की बुकिंग आज से शुरू हो गई है, जबकि इसकी डिलीवरी 15 जुलाई से शुरू होगी। ग्राहक चाहें तो 49,000 रुपये अतिरिक्त देकर 7.2 किलोवॉट एसी फास्ट चार्जर का विकल्प भी ले सकते हैं।

Tata Sierra EV: कीमत और वेरिएंट

Tata Sierra EV को कंपनी ने पांच वेरिएंट में लॉन्च किया है। इनमें प्योर, प्योर एस, एडवेंचर, एम्पावर्ड और एम्पावर्ड ए शामिल हैं। इस इलेक्ट्रिक एसयूवी की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 18.79 लाख रुपये है। वहीं, इसका सबसे टॉप मॉडल एम्पावर्ड ए (QWD) 25.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) में उपलब्ध है। यह वेरिएंट सबसे ज्यादा फीचर्स और बेहतर परफॉर्मेंस के साथ आता है।

Tata Sierra EV: बैटरी, रेंज और चार्जिंग

Tata Sierra EV में दो बैटरी विकल्प दिए गए हैं। पहला 63 kWh और दूसरा 75 kWh बैटरी पैक है। कंपनी के मुताबिक, 75 kWh बैटरी एक बार फुल चार्ज होने पर 665 किलोमीटर तक (एमआईडीसी प्रमाणित) चल सकती है। वहीं, 63 kWh बैटरी की रेंज 565 किलोमीटर बताई गई है।

टाटा मोटर्स का कहना है कि रोजमर्रा के इस्तेमाल में 75 kWh बैटरी वाली सिएरा ईवी करीब 510 से 530 किलोमीटर तक चल सकती है। वहीं, 63 kWh बैटरी वाला मॉडल 440 से 460 किलोमीटर तक की वास्तविक ड्राइविंग रेंज देगा। इसके अलावा 75 kWh बैटरी के साथ आने वाला क्वाड-व्हील ड्राइव (QWD) मॉडल एक बार चार्ज करने पर 500 किलोमीटर से ज्यादा की रेंज देने का दावा करता है।

चार्जिंग की बात करें तो इसमें 120 kW डीसी फास्ट चार्जिंग, 7.2 kW एसी चार्जिंग और 3.3 kW एसी चार्जिंग का विकल्प मिलता है। 120 kW डीसी फास्ट चार्जर की मदद से बैटरी को सिर्फ 26 मिनट में 20% से 80% तक चार्ज किया जा सकता है। वहीं, कंपनी का दावा है कि 15 मिनट की फास्ट चार्जिंग में यह इलेक्ट्रिक एसयूवी 250 किलोमीटर से ज्यादा की ड्राइविंग रेंज दे सकती है।

इसके अलावा Tata Sierra EV में व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) और व्हीकल-टू-लोड (V2L) जैसी आधुनिक सुविधाएं भी दी गई हैं। इनकी मदद से जरूरत पड़ने पर कार से दूसरे इलेक्ट्रिक वाहन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी बिजली दी जा सकती है।

Tata Sierra EV: पावर और परफॉर्मेंस

Tata Sierra EV को कंपनी ने दो इलेक्ट्रिक मोटर विकल्पों के साथ पेश किया है। इसके रियर-व्हील ड्राइव (RWD) मॉडल में 175 kW की इलेक्ट्रिक मोटर दी गई है, जो 340 Nm का टॉर्क पैदा करती है। वहीं, इसके टॉप वेरिएंट में 103 kW की फ्रंट मोटर भी मिलती है। दोनों मोटरों के साथ यह एसयूवी ऑल-व्हील ड्राइव (AWD) सिस्टम से लैस हो जाती है, जिससे इसकी पकड़ और प्रदर्शन बेहतर हो जाता है। टाटा मोटर्स का दावा है कि सिएरा ईवी महज 5.8 सेकंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है। कंपनी के अनुसार, यह अब तक भारत में लॉन्च हुई सबसे तेज इलेक्ट्रिक एसयूवी है।

Tata Sierra EV: डिजाइन और फीचर्स

Tata Sierra EV का डिजाइन काफी हद तक सिएरा के पेट्रोल-डीजल (आईसीई) मॉडल जैसा है, लेकिन इसे इलेक्ट्रिक एसयूवी का आधुनिक लुक देने के लिए कई खास बदलाव किए गए हैं। इसमें आगे की तरफ पारंपरिक ग्रिल की जगह बंद फ्रंट पैनल दिया गया है, जो आज की ज्यादातर इलेक्ट्रिक कारों की पहचान बन चुका है। इसके अलावा कार के फ्रंट बंपर को भी नया डिजाइन दिया गया है, जिससे इसका लुक और ज्यादा आकर्षक दिखाई देता है। वहीं, पीछे की तरफ कार के डिजाइन में ज्यादा बदलाव नहीं किए गए हैं। इसका रियर लुक पेट्रोल-डीजल मॉडल जैसा ही रखा गया है, जिससे सिएरा की पहचान बरकरार रहती है।

कभी सोचा है बारिश के बाद अचानक क्यों बढ़ जाते हैं मच्छर? जानें इसके पीछे की वजह

देश के कई इलाकों में बारिश शुरू होने से गर्मी से राहत मिली है। बारिश के साथ मच्छरों की संख्या भी तेजी से बढ़ने लगती है। बरसात के मौसम में जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों को पनपने का अनुकूल माहौल मिल जाता है, जिससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए इस मौसम में मच्छरों से बचाव करना बेहद जरूरी है। ऐसे में ये जानना जरूरी है कि बारिश के बाद मच्छर अचानक इतने ज्यादा क्यों बढ़ जाते हैं और उनसे बचाव के लिए क्या सावधानियां अपनानी चाहिए।

घर में पानी ना जमा होने दें

बारिश के बाद बाल्टी, कूलर, गमले, पुराने टायर, नालियों और गड्ढों में पानी जमा हो जाता है। यही रुका हुआ पानी मच्छरों के पनपने की सबसे बड़ी वजह बनता है। मादा मच्छर इसमें अंडे देती हैं, जो कुछ ही दिनों में लार्वा बन जाते हैं और करीब एक सप्ताह के भीतर बड़े मच्छरों में बदल जाते हैं। यही वजह है कि तेज बारिश के कुछ दिन बाद मच्छरों की संख्या अचानक बढ़ जाती है। बारिश का जमा पानी उनके लिए पनपने की सही जगह बन जाता है। इसके अलावा, बारिश के बाद हवा में नमी बढ़ने से मच्छरों को लंबे समय तक जीवित रहने और ज्यादा एक्टिव रहने के लिए अनुकूल माहौल मिल जाता है।

बारिश में मच्छरों का खतरा बढ़ जाता है

बारिश रुकने के बाद मच्छर आमतौर पर झाड़ियों, पौधों के नीचे, दीवारों के किनारे और घर के बरामदे जैसी ठंडी व नम जगहों पर छिपे रहते हैं। ये स्थान उन्हें धूप से बचाते हैं। सुबह और शाम के समय मच्छर सबसे ज्यादा एक्टिव होते हैं, इसलिए बारिश के बाद इन घंटों में उनके काटने का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। दिलचस्प बात ये है कि बारिश मच्छरों को आसानी से नुकसान नहीं पहुंचाती। बारिश की बूंदें उनसे कई गुना बड़ी और भारी होती हैं, फिर भी मच्छर अपनी हल्की बनावट और मजबूत बाहरी परत की वजह से इनसे बच जाते हैं। कई बार बारिश की बूंद उन्हें कुचलने के बजाय अपने साथ बहा ले जाती है, जिससे वे फिर भी जीवित रह सकते हैं।

कैसे करें बचत

बारिश के मौसम में मच्छरों की संख्या बढ़ने से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन बीमारियों से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दिया जाए, क्योंकि यही मच्छरों के पनपने की सबसे बड़ी वजह होती है।

Sawan 2026: 30 जुलाई से शुरू होगा सावन का महीना, इन तिथियों पर जलाभिषेक दिलाएगा भगवान शिव का आशीर्वाद

Sawan 2026: सावन का महीना भगवान शिव को अति प्रिय है। इस माह में शिव भक्त अपने आराध्य की पूजा, उपवास और जलाभिषे या रुद्राभिषेक करते हैं। माना जाता है कि इस माह में माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करने वाले भक्तों के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं और जीवन में खुशहाली आती है। इस माह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु कांवड़ा लाते हैं अपने भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। इस साल सावन का महीना गुरुवार, 30 जुलाई 2026 से शुरू हो रहा है। वहीं, इस पावन माह का समापन शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के पर्व के साथ होगा।

आमतौर से जलाभिषेक सावन की शिवरात्रि को किया जाता है। लेकिन इसके अलावा इस माह में पड़ने वाली विशेष तिथियों पर जलाभिषेक विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। इनमें सावन की शिवरात्रि के अलावा सावन के सभी सोमवार, दोनों प्रदोष व्रत, नाग पंचमी, हरियाली तीज और श्रावणी पूर्णिमा भी जलाभिषेक शुभ माना जाता है। आइए जानें साल 2026 में सावन (श्रावण) महीने में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए सबसे महत्वपूर्ण तिथियां इस प्रकार हैं:

सावन शिवरात्रि : कावड़ यात्रा और सामान्य भक्तों के लिए सावन महीने में जलाभिषेक का सबसे मुख्य दिन सावन शिवरात्रि माना जाता है। इस साल यह 11 अगस्त 2026 को होगी। इस दिन कावड़िए और भक्त भगवान शिव को जलाभिषेक करते हैं।

हरियाली तीज : सावन में शिव जी की पूजा के लिए हरियाली तीज 15 अगस्त 2026 को रहेगी। इस दिन महादेव पर जल चढ़ाने वालों को सुयोग्य जीवनसाथी पाने में मदद मिलती है।

सावन पूर्णिमा : सावन पूर्णिमा 28 अगस्त 2026 को है। इस दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। सावन पूर्णिमा पर जलाभिषेक कर शिव जी की साधना करने वालों को मां लक्ष्मी का आशीर्वाद भी मिलता है।

सावन सोमवार की तिथियां : सावन के सभी सोमवार जलाभिषेक के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं। उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान आदि) के पंचांग के अनुसार तिथियां निम्न हैं:

पहला सोमवार: 03 अगस्त 2026

दूसरा सोमवार: 10 अगस्त 2026

तीसरा सोमवार : तीसरा सोमवार 17 अगस्त 2026 को होगा। इस दिन नाग पंचमी भी है, जिससे इस सोमवार का महत्व और बढ़ गया है।

चौथा सोमवार : 24 अगस्त 2026

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कर्नाटक का हर नया CM घर की तलाश में क्यों जुट जाता है? डीके शिवकुमार ने 160 साल पुराना जो बंगला चुना वो बेहद खास!

भारत के कुछ ही राज्य ऐसे हैं जहां मुख्यमंत्री के स्थायी निवास के लिए कोई आधिकारिक सरकारी बंगला तय नहीं है और कर्नाटक उन्हीं राज्यों में से एक है। यही वजह है कि राज्य में जब भी सत्ता परिवर्तन होता है या नया नेतृत्व आता है तो उनके लिए घर की तलाश शुरू हो जाती है। बंगलों की ये तलाश कई बार जरूरत से ज्यादा वास्तु के मापदंडों की कसौटी पर भी कसी जाने लगती है। आप एक तरह से कह सकते हैं कि बेंगलुरु में एक घर ढूंढना किसी के लिए आसान नहीं है, यहां तक कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री के लिए भी नहीं। ये मामला इस वक्त चर्चा में इसलिए है क्योंकि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अपने रहने और कार्यालय के लिए लगभग 160 साल पुराने कुमार कृपा (Kumara Krupa) बंगले को चुना है। लोक निर्माण विभाग (PWD) इस हेरिटेज प्रॉपर्टी को रिनोवेट करने में जुटा है। यह नौबत इसलिए आई क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कावेरी बंगले में ही रहने का फैसला किया है। यह बंगला आमतौर पर कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों से सबसे करीब से जुड़ा रहा है।

आइए विस्तार से समझते हैं कि कर्नाटक में हर नए मुख्यमंत्री के सामने आखिर आवास की यह पहेली क्यों खड़ी हो जाती है और इसके पीछे क्या सियासी व ऐतिहासिक कारण हैं।

क्या कर्नाटक में मुख्यमंत्री का कोई आधिकारिक स्थायी निवास है?

इसका जवाब ना में है। कर्नाटक में कभी भी किसी सरकारी बंगले को मुख्यमंत्री के स्थायी निवास के रूप में औपचारिक रूप से अधिसूचित नहीं किया गया है। पिछले कई दशकों से अलग-अलग मुख्यमंत्री अपनी सुविधा के अनुसार विभिन्न सरकारी संपत्तियों में रहते आए हैं। वैसे 1980 के दशक से कुमार कृपा रोड पर स्थित दो आस-पास के बंगले कृष्णा और कावेरी सीएम आवास से ज्यादा करीब से जुड़े माने जा सकते हैं। कृष्णा बंगले का इस्तेमाल आधिकारिक बैठकों और प्रशासनिक कार्यों के लिए किया जाता है जबकि कावेरी सीएम आवास के रूप में इस्तेमाल होता है।

कावेरी बंगले का इतिहास और सिद्धारमैया का जुड़ाव

पूर्व मुख्यमंत्री आर गुंडू राव 1980 में कावेरी बंगले में रहने वाले पहले मुख्यमंत्री थे। उनके बाद सिद्धारमैया, बीएस येदियुरप्पा, जगदीश शेट्टार, जेएच पटेल, एस बंगारप्पा और वीरेंद्र पाटिल जैसे कई दिग्गज मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल के दौरान इस बंगले में रहे। दिलचस्प बात यह है कि कावेरी में रहने वाले मुख्यमंत्रियों में से सिद्धारमैया एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने अपना पांच साल का पूरा कार्यकाल पूरा किया है। चूंकि सिद्धारमैया इस बार भी कावेरी को छोड़ने के मूड में नहीं हैं इसलिए नए नेतृत्व के लिए नया घर ढूंढने का एक टास्क सामने आ गया।

हर नए सीएम के सामने क्यों खड़ी होती है आवास की पहेली?

इसकी सीधी सी वजह यह है कि मुख्यमंत्री पद के लिए कोई भी आवास स्थायी रूप से आरक्षित नहीं है। जब कोई नया मुख्यमंत्री पद संभालता है तो उनका पसंदीदा बंगला पहले से ही किसी पूर्व मुख्यमंत्री या किसी अन्य संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी के पास हो सकता है। कई मामलों में नए रहने वाले के आने से पहले बंगले में बड़े पैमाने पर रिनोवेशन की जरूरत होती है। इसके अलावा कुछ मुख्यमंत्री सरकारी बंगले में जाने के बजाय अपने निजी घरों में ही रहना पसंद करते हैं। परिणाम यह होता है कि हर बार इस बात को लेकर होड़ मचती है कि कौन सी संपत्ति मुख्यमंत्री का आधिकारिक निवास बनेगी।

डीके शिवकुमार ने क्यों चुना 160 साल पुराना कुमार कृपा बंगला?

चूंकि सिद्धारमैया कावेरी में ही रहेंगे, इसलिए शिवकुमार ने ‘कुमार कृपा’ को अपना आधिकारिक निवास और ‘कृष्णा’ को अपना ऑफिस चुना है। कुमार कृपा बंगला 12 कमरों का है और एक सरकारी गेस्ट हाउस के रूप में इस्तेमाल हो रहा था। अब इसका रिनोवेशन किया जा रहा है।

विपक्ष कर रहा आलोचना, जानिए इस बंगले का ऐतिहासिक महत्व

शिवकुमार के इस फैसले की जेडीएस ने कड़ी आलोचना की है। जेडीएस का तर्क है कि इस ऐतिहासिक धरोहर को उसके मौजूदा स्वरूप में ही संरक्षित किया जाना चाहिए। इस बंगले का एक बड़ा ऐतिहासिक महत्व है। यह बंगला मूल रूप से 1883 से 1901 तक मैसूर के दीवान रहे के शेषाद्रि अय्यर का निवास स्थान था। साल 1927 में बेंगलुरु यात्रा के दौरान महात्मा गांधी भी इसी कुमार कृपा बंगले में रुके थे।

अनुग्रह बंगला: आखिर इसे क्यों माना जाता है अशुभ?

राजनीतिक गलियारों में अनुग्रह बंगले को जिंक्सड यानी मनहूस या अशुभ माना जाता है। कहते हैं कि जो भी मुख्यमंत्री इस बंगले में रहने गया वो अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सका। इस बंगले में रहने वाले पूर्व मुख्यमंत्रियों में एचडी देवेगौड़ा, धरम सिंह और डीवी सदानंद गौड़ा शामिल हैं। इन सभी का कार्यकाल समय से पहले खत्म हो गया। पूर्व सीएम एसएम कृष्णा ने भी भी अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही विधानसभा भंग कर दी थी। पिछले सालों से इस बंगले में कई बार वास्तु बदलाव भी किए गए लेकिन नेताओं के मन से इसका डर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

राजनीतिक सलाहकार वेंकटेश थोगरीघट्टा बताते हैं कि यह कहना मुश्किल है कि अनुग्रह खराब वास्तु से पीड़ित है या केवल दुर्भाग्य का शिकार है। लेकिन पिछले तीन दशकों में इस बंगले को चुनने वाले कम से कम चार मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल बहुत छोटा रहा है। यह बात स्वाभाविक रूप से नए मुख्यमंत्रियों के दिमाग में घर चुनते समय असर डालती है। यही कारण है कि कई मुख्यमंत्री ताज वेस्ट एंड के पास स्थित रेस व्यू कॉटेज जैसे अन्य सरकारी आवासों को प्राथमिकता देते रहे हैं।

क्या वास्तु की मान्यताएं निर्णय को प्रभावित करती हैं?

कुछ मुख्यमंत्रियों ने अपने आवासों और कार्यालयों का चयन या उनमें बदलाव करते समय सार्वजनिक रूप से वास्तु पर विचार करने की बात स्वीकार की है। कुछ अन्य मुख्यमंत्रियों ने ऐसी चिंताओं को खारिज करते हुए प्रशासनिक सुविधा को प्राथमिकता दी है। कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक चूंकि कोई भी बंगला आधिकारिक तौर पर सीएम निवास के रूप में अधिसूचित नहीं है इसलिए मुख्यमंत्री उपलब्ध सरकारी संपत्तियों में से कोई भी चुनने के लिए स्वतंत्र हैं।

क्या कर्नाटक में एक स्थायी सीएम आवास होना चाहिए?

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली का मानना है कि राज्य में एक स्थायी मुख्यमंत्री आवास होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के लिए एक निश्चित और नामित आवास होना चाहिए। ऐसा न होने से, हर बार जब कोई नया मुख्यमंत्री आता है तो सरकार एक अलग घर तैयार करने में पैसा खर्च करती है। एक स्थायी आवास होने से बार-बार होने वाले इस रिनोवेशन के खर्च से बचा जा सकता है।

HDFC म्यूचुअल फंड के नवनीत मुनोत ने कहा-भारत में अब लोग सेविंग्स की जगह निवेश करने लगे हैं

एचडीएफसी म्यूचुअल फंड के सीईओ नवनती मुनोत ने इंडिया में निवेश की बदलती तस्वीर के बारे में बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा है कि देश में म्यूचुअल फंड स्टोरी अब सिर्फ मार्केट रिटर्न तक सीमित नहीं है बल्कि यह एक बड़े बदलाव से गुजर रही है। इसमें परिवार फाइनेंशियल सिक्योरिटी के लिए लंबी अवधि का निवेश कर रहे हैं। मनीकंट्रोल म्यूचुअल फंड समिट 2026 में मनीकंट्रोल के मैनेजिंग डायरेक्टर नलिन मेहता से बातचीत में उन्होंने इनवेस्टमेंट को लेकर कई अहम बातें बताईं।

भारत में अब लोग सेविंग्स की जगह निवेश कर रहे हैं

मुनोत ने कहा कि भारत अब ‘सेविंग्स करने वाले लोगों की जगह निवेश करने वाला देश बन रहा है।’ यह सोशल और सांस्कृतिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा, “यह पहली पीढ़ी है जो अनुशासित तरीके से निवेश कर वित्तीय आजादी हासिल करने की कोशिश कर रही है। मैं इसे इंडिया का 401(K) मूवमेंट कहता हूं।” उनका संकेत अमेरिकी रिटायरमेंट सेविंग्स सिस्टम से था। इसमें इनवेस्टर्स मार्केट लिंक्ड कंट्रिब्यूशन के जरिए लॉन्ग टर्म रिटायरमेंट वेल्थ क्रिएट करते हैं।

लोग अनुशासित निवेश से खुद की रिटायरमेंट सिक्योरिटी बना रहे 

उन्होंने कहा कि इस तरह (अमेरिका जैसा) के बदलाव की शुरुआत इंडिया में हो रही है। बड़ी संख्या में लोग यह सोचने लगे हैं कि वे नियमित रूप से निवेश के जरिए अपनी खुद की रिटायरमेंट सिक्योरिटी बना सकते है। उनका यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब भारत में म्यूचुअल फंड आम लोगों के सेविंग्स प्लान का प्रमुख हिस्सा बन गया है। इसमें सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान, डिजिटल ऑनबोर्डिंग और व्यापक वित्तीय जागरूकता का बड़ा हाथ है।

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म्यूचुअल फंड के प्रदर्शन से बढ़ा है लोगों का भरोसा

मुनोत ने कहा कि इंडस्ट्री (म्यूचुअल फंड) की ग्रोथ सिर्फ डिस्ट्रिब्यूशन की जगह परफॉर्मेंस और ट्रस्ट पर आधारित है। उन्होंने कहा, “इंडस्ट्री ने कड़ी मेहनत की है। मेरा मानना है कि यह ट्रैक रिकॉर्ड है, जिससे निवेशकों का भरोसा कायम हुआ है। इनवेस्टर्स की संख्या 2 करोड़ से 6 करोड़ तक पहुंच गया है। मेरा मानना है कि इस ट्रैक रिकॉर्ड की वजह से बड़ा फर्क आया है।” उन्होंने कहा कि ग्रोथ की संभावनाएं काफी ज्यादा है। भारत में परिवारों की 14 लाख करोड़ डॉलर की बैलेंसशीट में से सिर्फ 6 फीसदी का निवेश अभी शेयरों में है।

Multibagger Stocks: रामदेव अग्रवाल ने बताया अच्छे स्टॉक खरीदने का फॉर्मूला, इन 10 बातों से होगी पहचान

Multibagger Stocks: शेयर बाजार में सफल निवेश सिर्फ शेयर की कीमत या बाजार की चाल देखने से नहीं होता। अनुभवी निवेशकों का मानना है कि किसी कंपनी की असली ताकत उसके फाइनेंशियल नतीजों में छिपी होती है।

Motilal Oswal Group के चेयरमैन और दिग्गज निवेशक रामदेव अग्रवाल ने The Alpha Bets में ऐसे 10 फाइनेंशियल इंडिकेटर के बारे में बताया है, जिन्हें देखकर निवेशक किसी कंपनी की मजबूती का बेहतर आकलन कर सकते हैं। इससे मल्टीबैगर स्टॉक्स मिलने की संभावना भी बेहतर हो जाती है।

1. मुनाफे में लगातार बढ़ोतरी

सिर्फ बिक्री बढ़ना काफी नहीं है। कंपनी का मुनाफा भी लगातार बढ़ना चाहिए। इससे पता चलता है कि कंपनी खर्च पर नियंत्रण रखते हुए बेहतर कमाई कर रही है।

2. कम कर्ज

कर्ज से कारोबार बढ़ सकता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा कर्ज जोखिम बढ़ा देता है। कम कर्ज वाली कंपनियां मुश्किल समय में भी बेहतर स्थिति में रहती हैं।

3. मजबूत ऑपरेटिंग कैश फ्लो

ऑपरेटिंग कैश फ्लो बताता है कि कंपनी अपने रोजमर्रा के कारोबार से कितना नकद कमा रही है। इसे मुनाफे के मुकाबले ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है, क्योंकि इसमें हेरफेर करना आसान नहीं होता।

4. लगातार बढ़ता रेवेन्यू

रेवेन्यू यानी कंपनी की बिक्री से होने वाली कमाई। अगर किसी कंपनी का रेवेन्यू कई साल तक लगातार बढ़ रहा है, तो यह अच्छी बात मानी जाती है। इससे पता चलता है कि उसके प्रोडक्ट या सर्विस की मांग बनी हुई है।

5. ऊंचा ROE

रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) बताता है कि कंपनी शेयरधारकों के पैसे का कितना बेहतर इस्तेमाल कर रही है। ऊंचा ROE मजबूत मैनेजमेंट और बेहतर बिजनेस का संकेत माना जाता है।

6. बढ़ता प्रॉफिट मार्जिन

मार्जिन बताता है कि हर रुपये की बिक्री में से कंपनी के पास कितना मुनाफा बच रहा है। अगर मार्जिन बढ़ रहा है, तो इसका मतलब कंपनी पहले से ज्यादा कुशल तरीके से काम कर रही है।

7. मजबूत फ्री कैश फ्लो

फ्री कैश फ्लो वह रकम होती है, जो सभी खर्च और निवेश के बाद कंपनी के पास बचती है। इससे कंपनी विस्तार, डिविडेंड, कर्ज चुकाने या नए निवेश जैसे फैसले आसानी से ले सकती है।

8. प्रमोटर्स की मजबूत हिस्सेदारी

अगर प्रमोटर्स लंबे समय तक अपनी हिस्सेदारी बनाए रखते हैं, तो यह कंपनी के भविष्य पर उनके भरोसे का संकेत माना जाता है। हालांकि, अगर उनकी हिस्सेदारी लगातार घट रही हो, तो निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए।

9. पूंजी का सही इस्तेमाल

अच्छी कंपनी सिर्फ मुनाफा नहीं कमाती, बल्कि उस मुनाफे का सही इस्तेमाल भी करती है। बेहतर मैनेजमेंट पूंजी को सही जगह निवेश करता है, कर्ज संभालता है और जरूरत पड़ने पर शेयरधारकों को भी फायदा पहुंचाता है।

10. लगातार बढ़ती कमाई

बेहतरीन कंपनियां सिर्फ अच्छे समय में नहीं, बल्कि मुश्किल दौर में भी कमाई बढ़ाने की क्षमता रखती हैं। लगातार बढ़ती आय मजबूत बिजनेस मॉडल और प्रतिस्पर्धी बढ़त का संकेत देती है।

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फ्लाइट कैंसिल होने के 40 दिन बाद भी नहीं मिला रिफंड, सोशल मीडिया पर यात्री ने शेयर किया अपना दर्द

एक यात्री की सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों काफी वायरल हो रही है। उसने बताया कि फ्लाइट रद्द होने के बाद उसे रिफंड मिलने में काफी देरी हुई। उसने कहा कि एयरलाइन और टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म दोनों एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे, जिससे उसे समय पर रिफंड नहीं मिला। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर फ्लाइट टिकट सीधे एयरलाइन से बुक करना ज्यादा सही रहता है या नहीं इस पर बहस शुरू हो गई। वहीं ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

ये मामला तब सामने आया जब एक्स यूजर साकेत आर ने अपनी रद्द हुई इंटरनेशनल फ्लाइट का एक्सपीरिएंस शेयर किया। उन्होंने बताया कि म्यूनिख जाने के लिए उन्होंने कई महीने पहले टिकट बुक की थी, लेकिन यात्रा से करीब 10 दिन पहले कुवैत एयरवेज ने फ्लाइट रद्द कर दी, जिससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

रिफंड में हुई देरी

उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “मैं सभी लोगों को सलाह दूंगा कि जहां तक संभव हो, MakeMyTrip जैसे प्लेटफॉर्म से फ्लाइट टिकट बुक करने से बचें। बेहतर होगा कि टिकट सीधे एयरलाइन की वेबसाइट या ऐप से ही बुक करें।” साकेत ने बताया कि उन्होंने फ्लाइट रद्द होने वाले दिन यानी 21 मई को ही रिफंड के लिए आवेदन कर दिया था। उनके अनुसार, शुरुआत में MakeMyTrip ने 31 मई तक पैसा वापस मिलने की जानकारी दी थी, लेकिन बाद में उन्हें बताया गया कि रिफंड की पूरी प्रक्रिया में 28 दिन तक का समय लग सकता है। उन्होंने बताया कि करीब 40 दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें रिफंड नहीं मिला।

अभी तक नहीं आया रिफंड

अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा, “जब मैं कुवैत एयरवेज से संपर्क करता हूं तो वहां से कहा जाता है कि टिकट MakeMyTrip के जरिए बुक हुई थी, इसलिए रिफंड की प्रक्रिया वही शुरू करेगा। वहीं MakeMyTrip का कहना है कि एयरलाइन की ओर से अभी तक रिफंड जारी नहीं किया गया है। इस तरह यात्री दोनों के बीच फंस जाता है और हर बार एक-दूसरे से संपर्क करने के लिए कहा जाता है, जबकि उसका पैसा अटका रहता है।”

MakeMyTrip की टीम ने किया संपर्क

उन्होंने कहा, “लोग थर्ड-पार्टी बुकिंग प्लेटफॉर्म इसलिए इस्तेमाल करते हैं क्योंकि उन्हें उम्मीद होती है कि किसी समस्या की स्थिति में उन्हें मदद मिलेगी। लेकिन अगर एक महीने से ज्यादा समय तक ग्राहक एयरलाइन और बुकिंग प्लेटफॉर्म के बीच चक्कर लगाता रहे और दोनों एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहें, तो ऐसे प्लेटफॉर्म की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।” बाद में उन्होंने एक नया अपडेट साझा करते हुए लिखा, “MakeMyTrip की टीम से मिस्टर कौशिक ने मुझसे संपर्क किया है और जल्द समाधान का भरोसा दिया है। रिफंड मिलने के बाद मैं इसकी जानकारी भी शेयर करूंगा।”

लोगों ने किया कमेंट

ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई, जिसके बाद कई लोगों ने भी ट्रैवल बुकिंग प्लेटफॉर्म और एयरलाइन से रिफंड में देरी के अपने अनुभव साझा किए। एक यूजर ने लिखा, “जब तक सब कुछ ठीक चलता है, तब तक थोड़ा डिस्काउंट मिल जाता है। लेकिन जैसे ही कोई समस्या आती है, परेशानी शुरू हो जाती है। मैंने यह बात कोविड के दौरान सीखी थी, तभी से मैं फ्लाइट टिकट किसी थर्ड-पार्टी वेबसाइट से बुक नहीं करता।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “मैं आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूं। मई में ईरान-अमेरिका तनाव के कारण हमारी कतर एयरवेज की फ्लाइट रद्द हुई थी, लेकिन एयरलाइन ने 2 से 3 दिन के भीतर ही पूरा रिफंड दे दिया।”